कर्नाटक की बुर्के वाली लड़कियों को तालिबान का समर्थन: ‘इस्लाम’ को बताया ‘मुल्क’ से ऊपर

                        हिजाब पहनने पर अड़ी लड़कियों का तालिबान ने किया समर्थन (साभार: ट्रिब्यून इंडिया)
कर्नाटक (Karanataka) के स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब (Hijab) पहनने को लेकर जारी विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँच चुका है। इस मुद्दे पर शांति नोबेल पुरस्कार पाने वाली मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) के बाद अब तालिबान (Taliban) की भी एंट्री हो गई है। 10 फरवरी 2022 को कट्टरपंथी संगठन तालिबान ने कर्नाटक में हिजाब पहनने वाली मुस्लिम लड़कियों का समर्थन करते हुए ‘इस्लामी मूल्यों’ की रक्षा के लिए डटकर खड़े रहने के लिए उनकी तारीफ की।

ब्रिटेन में आराम की जिंदगी मिलने के बाद अपना असली कट्टरपंथी रंग दिखाने वाली शांति नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई (Malala Yousafzai) द्वारा कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद (Hijab Controversy) पर बयान देकर फँस गई हैं। सोशल मीडिया पर हिजाब और शिक्षा को लेकर उनके दिए गए पुराने बयान को लेकर लोग ट्रोल करने लगे हैं।

अफगानिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथियों की गोली शिकार बनने के बाद ब्रिटेन में शरण पाने वाली मलाला ने कभी हिजाब को लेकर सवाल उठाया था। अपनी पुस्तक ‘आई एम मलाला’ में उन्होंने हिजाब को गलत और घुटन वाला बताया था। लेखक आनंद रंगनाथन ने मलाला के इस कथन का संदर्भ देते हुए एक ट्वीट किया है।

रंगनाथन ने ट्वीट में लिखा है कि कभी मलाला ने कहा था, “वे (इस्लामिक कट्टरपंथी) महिलाओं को बुर्का पहनने के लिए मजबूर कर रहे थे। बुर्का पहनना एक बड़े कपड़े के शटलकॉक के अंदर चले जाने जैसा है, जिसमें केवल एक ग्रिल है और गर्म दिनों में यह ओवन की तरह हो जाता है। मुझे यह पहनना नहीं था।”

भारत के मामले बयानबाजी करने वाली मलाला से सोशल मीडिया यूजर पूछ रहे हैं कि जिस नॉर्वे की ओर से उन्हें नोबेल सम्मान दिया गया है, उसने साल 2017 में स्कूल और यूनिवर्सिटी में हिजाब पर प्रतिबंध लगाते हुए कानून बनाया था। लोग पूछ रहे हैं कि मलाला नॉर्वे को लेकर कोई बात क्यों नहीं कही। 

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा किए जा रहे नरसंहार और कब्जे के बावजूद एकदम चुप्पी साधे हुए हैं। तालिबान के अमानवीय हमलों का विरोध करना और उस पर रोना तो छोड़िए एक फुसफुसाहट तक नहीं नजर आ रही है। ये वही मलाला हैं, जिन्हें अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान की स्वात घाटी में महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर तालिबान ने गोली मारी थी। गंभीर रूप से घायल हालत में उन्हें पहले पाकिस्तान के आर्मी अस्पताल में ले जाया गया और फिर वहाँ से यूके रेफर किया। वहाँ इलाज के बाद वह चमत्कारिक रूप से ठीक हो गई थीं।

अफगानिस्तान के तालिबानी नेता और उप-प्रवक्ता इनामुल्लाह समांगानी ने ट्वीट किया, “भारतीय मुस्लिम लड़कियों का हिजाब के लिए संघर्ष यह दिखाता है कि हिजाब अरब, ईरानी, ​​मिस्र या पाकिस्तानी संस्कृति नहीं है, बल्कि ‘इस्लामिक मूल्य’ है। इसके लिए विश्व भर में, खासकर ‘सेक्युलर दुनिया’ में मुस्लिम लड़कियाँ कई तरह से अपना बलिदान देती हैं और अपने धार्मिक मूल्य की रक्षा करती हैं।”

इसके साथ ही समांगनी ने कर्नाटक के स्कूल में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने वाली मुस्लिम लड़की ‘मुस्कान’ की तस्वीर को भी ट्विटर पर शेयर किया। बता दें कि तालिबान का यह ट्वीट मुस्लिम लड़कियों के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके लिए ‘हिजाब पहली प्राथमिकता है और एजुकेशन सेकेंडरी।’

                                                       इमानुल्ला समांगनी का ट्वीट

उधर सलीम जावेद नाम के एक यूजर ने कहा कि विरोध करने वाली मुस्लिम लड़कियाँ दरअसल ‘सेक्युलरिज्म’ के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के तहत धर्मनिरपेक्षता का समर्थन कर रही हैं। इस पर तालिबानी नेता समांगनी जावेद पर भड़क उठे। उन्होंने सलीम को ‘फेक सेक्युलरिस्ट’ और इस्लाम से दुश्मनी दिखाने वाला करार दिया। समांगानी ने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियाँ ‘धर्मनिरपेक्षता’ का विरोध कर रही हैं।

                                            इमानुल्ला समांगनी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

बुर्का विवाद पर मुस्लिम लड़की की तारीफ करने के मामले में इनामुल्ला समांगानी का कतर स्थित इस्लामिक अमीरात के आधिकारिक प्रवक्ता और तालिबान के अधिकारी सुहैल शाहीन समेत कई लोगों ने समर्थन किया।

                                                       इमानुल्ला समांगनी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

तालिबान में महिलाओं को नहीं है आजादी

खास बात ये है कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान में हथियारों के दम पर कब्जा करने के साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों का दमन शुरू कर दिया था। तालिबान ने वहाँ बुर्का या हिजाब को महिलाओं के लिए अनिवार्य कर दिया था। इसके अलावा इस्लामिक संगठन ने टीवी पर महिला कलाकारों को भी एक्टिंग से रोक दिया था।
तालिबान के खिलाफ जब कई अफगान महिलाओं ने रंगीन कपड़ों में शरिया लॉ के खिलाफ प्रदर्शन किया तो तालिबान के लड़ाकों ने महिलाओं के घरों पर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दिलचस्प बात ये है कि तालिबान की तरह ही कथित ‘वाम-उदारवादी’ भी महिलाओं को ढँका हुआ देखना चाहते हैं।

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कर्नाटक हिजाब विवाद

कर्नाटक के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज में हिजाब का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। बाद में इसके विरोध में मुस्लिम महिलाओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बताते हुए कक्षाओं में इस पहनने की छूट माँगी। बहरहाल मामला अभी अदालत में है।

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