साभार
जैसे-जैसे soft ware टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है, ज्यों-ज्यों यह फेसबुक पर मित्र बन मासूम और बेगुनाह लोगों को ब्लैकमेल भी कर अपमानित किया जा रहा है, जिसके पीछे शंका है कोई गैंग काम कर रहा है, जिसकी गंभीर जाँच ही सच्चाई सामने ला सकती है। फेसबुक पर कोई अध्यापक, अध्यापिका, ब्यूटी पार्लर, ग्रहणी एवं सम्मानित सुशोभित बन मित्र तो
बनाते हैं, लेकिन मैसेंजर बॉक्स में एक-दो दिन बाद ही उनकी अश्लीलता उजागर होने लगती है। पहले सामने वाले को उकसाया जाता है, पोर्न वीडियो दिखाई जाती है, पोर्न दिखाते वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू।
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| व्हाट्सअप DP पर नाम कुछ, लेकिन धन किसी अन्य नाम में , क्या यह Youtube चैनल का आधिकारिक DP है? |
दूसरे, एक बेकसूर को अपराधी बनाने से पूर्व उस तथाकथित साइबर क्राइम अधिकारी को इस बात की जाँच करनी थी कि:-
1. क्या अश्लील वीडियो के लिए सामने वाले ने बोला था?;
2. ये अश्लील वीडियो क्या तुम्हारी अपनी है?
3. यदि नहीं, फिर कौनसी पोर्न साइड से ली?
4. अश्लील वीडियो को सामने वाले को वीडियो कॉल कर दिखाई क्यों?
5 . अगर दिखाई भी तो सामने वाले को दिखाते वीडियो क्यों बनाई?
6 . अगर बनाई तो सामने वाले को क्यों ब्लैकमेल किया जा रहा है? आदि आदि
ऐसी स्थिति में इस बात की भी जाँच होनी चाहिए कि मैसेंजर बॉक्स की भी जाँच होनी चाहिए कि पोर्न वीडियो किसने डाली और क्यों? क्या सामने वाले/वाली ने बोला था? क्या वह पोर्न वीडियो उस महिला की है अथवा किसी अन्य पोर्न साइड से ली है? इस तरह की अश्लील वीडियो डालने के लिए उकसाने वाले के विरुद्ध भी कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अश्लील वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल करने अथवा करने वाली के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के साथ-साथ उस गैंग सम्मिलित लोगों को भी बक्शा नहीं जाना चाहिए।
अवलोकन करें:-
ऐसा नहीं सभी ऐसी अथवा ऐसी होती हैं। कई तो इतने सभ्य तरीके से बातचीत करते हैं कि सामने वाला अपने सब दुःख/चिंताओं को भूल जाता है। कहावत है, एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है, ठीक वही स्थिति मैसेंजर बॉक्स की हो रही है।



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