सुभाष चन्द्र
अमेरिका समेत दुनिया भर के अनेक देशों में हमास के समर्थन में प्रदर्शन नहीं हुए लेकिन फिलिस्तीन की आड़ में समर्थन हमास को ही दिया जा रहा है। सच यह है कि महमूद अब्बास का फिलिस्तीन और हमास के कब्जे वाला गाज़ा फिलिस्तीन के दो अलग अलग क्षेत्र हैं।
वर्ष 2006 के चुनाव में 132 सीट की Legislative Council में इस्माइल हानिया की हमास को 44.45% वोट मिले और 74 सीट मिली जबकि महमूद अब्बास/फतह की पार्टी फिलिस्तीन अथॉरिटी को 41.43% वोट मिले और 45 सीट मिली। यानी आतंकी गुट हमास को जनता का पूर्ण समर्थन मिला था। परन्तु सत्ता चलाने के लिए हमास का कब्ज़ा गाज़ा पर हो गया और west bank क्षेत्र के फिलिस्तीन पर महमूद अब्बास की हुकूमत स्थापित हुई।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी (PNA) और हमास में कोई सौहार्दपूर्ण संबंध नहीं हैं। हमास के लिए कहा जाता है कि “HAMAS is committed to armed resistance against Israel and to the creation of a Palestinian state, and the group has engaged in several rounds of violent conflict with Israel. The most recent began on 7 October 2023, when HAMAS launched a massive surprise attack against Israel, killing nearly 1,200 people” यानी हमास स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के पक्ष में नहीं है।
आपने कभी महमूद अब्बास का हमास के समर्थन में कोई बयान नहीं सुना होगा और इज़रायल के हमले मुख्यतः गाज़ा में ही केंद्रित रहे हैं, वेस्ट बैंक के फिलिस्तीन में नहीं अलबत्ता उनकी पावर सप्लाई जरूर काटी गई - हमास के साथ युद्ध में कूदा हिज़्बुल्ला और एक वर्ष में उसने इज़रायल पर 9000 मिसाइल दागे लेकिन अब इज़रायल ने उसका भी हमास की तरह उपचार करने का निश्चय किया और एक हफ्ते में ही हिज़्बुल्ला की कमर तोड़ दी -
लगातार हिज़्बुल्ला ने इज़रायल को निशाना बनाया लेकिन जब इज़रायल ने प्रतिकार किया और हिज़्बुल्ला की अच्छी पिटाई हुई तो कई देश इज़रायल को रोकने में लग गए और उसकी कार्रवाई पर नाखुशी जाता रहे हैं। UNO से भी कहा जा रहा है कि इज़रायल को रोका जाए लेकिन किसी ने हिज़्बुल्ला को रोकने की कोशिश नहीं की थी।
भारत के बॉलीवुड के कुछ सिरफिरे सितारे All Eyes On Rafah के पोस्टर लगा कर टसुए बहा रहे थे जबकि उन्होंने हमास के 7 अक्टूबर 2023 के इज़रायल पर हमले पर एक शब्द नहीं बोला जिसमें 1400 लोग मारे गए। नुसरत बरूचा को इजराइल और भारत सरकार ने सुरक्षित लाने में मदद की लेकिन कुछ ही दिन बाद इज़रायल को गाली बकने लगी।
देश के कुछ हिस्सों में फिलिस्तीन के समर्थन में कुछ लोग नारे लगा कर उसका झंडा लहरा रहे हैं और ओवैसी ने संसद में “जय फिलिस्तीन” का नारा लगाया था। बेहतर है एक क़ानून पारित किया जाए की ऐसे देश विरोधी नारेबाजी और आतंकी देशों के झंडे लहराने और उनकी जयकार करने वालों की “नागरिकता” तुरंत प्रभाव से छीन कर देश निकाला दिया जायेगा। जो लोग फिलिस्तीन के लिए नारे लगाते हैं, वो दरअसल हमास का समर्थन करते हैं और ऐसे लोगों को एक बार हड़का देना चाहिए कि तुम्हें सरकार गाज़ा भेज रही है।
अभी सुना है अमेरिकी चुनाव में अमेरिकी मुसलमानों ने कमला हैरिस को समर्थन देने से मना कर दिया है क्योंकि अमेरिका इज़रायल का समर्थन कर रहा है और फिलिस्तीन का विरोध लेकिन वे भी इस तरह हमास के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।


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