कुछ लोग राहुल गांधी के लिए कहते हैं कि वह ‘पप्पू’ है, उसे समझ नहीं है क्या बोलना है, कुछ कहते हैं नशा करके बोल देता है और उसे पता ही नहीं चलता क्या बोल गया और कुछ ज्योतिषाचार्य यह भी कह देते हैं कि बोलना तो ठीक चाहता है लेकिन बोल गलत जाता है अपने गृह गोचर की स्थिति के अनुसार। हकीकत यह है कि राहुल न तो कोई पप्पू है और न ही नसमझ, वो इन सबका ड्रामा कर अपना विभाजनकारी खेल खेल रहा है, जिसे जनता नहीं समझ रही।
दूसरे, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के ने कश्मीर में कांग्रेस सरकार बनने पर आतंकवाद के बढ़ने की बात कही, जिसे किसी भी मोदी विरोधी तो क्या किसी भी गोदी-मीडिया तक ने गंभीरता से नहीं लिया, क्यों? क्या मीडिया कांग्रेस से डरती है? अगर यही बात बीजेपी ने कह दी होती विपक्ष तो क्या सारा मीडिया सियापा कर रहा होता।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
आइए राहुल गांधी के कुछ बयान देखते हैं जो विदेशों में दिए हैं और सोचिये कि किस दृष्टि से वे अनजाने में या गलती से दिए गए होंगे। सच तो यह है कि ऐसे बयान बहुत सोच समझ कर किसी गुरु के निर्देशों पर और अपनी समझ से ही दिए जा सकते है।
सिंगापुर
“भारत में नफरत ही नफरत है’।
जर्मनी
‘महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के लिए भारत की संस्कृति जिम्मेदार है’।
बहरीन
चीन जो काम दो दिन में कर सकता है, वो काम भारत एक साल में भी नहीं कर सकता”।
लंदन
“भारत में प्रेस की आज़ादी, न्यायपालिका। सरकारी एजेंसियां और लोकतंत्र खतरे में है”।
लंदन
“भारत एक राष्ट्र नहीं, ये यूरोपीय यूनियन की तरह अलग अलग राज्यों को मिलाकर बना एक संघ है।
बेल्जियम
“भारत में अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग खतरे में हैं’।
अमेरिका
“भारत में झगड़ा इस बात का है कि सिखों को पगड़ी पहनने दी जाए न नहीं, उन्हें कड़ा पहनने दिया जाये या नहीं और पगड़ी/कड़ा पहन कर गुरूद्वारे जा सकते हैं क्या”?
ये तो कुछ बयान हैं, इसके अलावा और भी बहुत कुछ कहता है वो विदेश में भी और देश में भी, देश में तो अडानी उसका सबसे पसंदीदा विषय है।
सब बातों को देश कर यह नहीं कह सकते कि कुछ गलती से बोला गया बल्कि साफ इशारा होता है कि पूरे षड़यंत्र के साथ बोला जाता है। विदेश में भारत के दुश्मनों के साथ मिलना भी देश को नुकसान पहुंचाने के लिए ही होता है।
संभल कर रहें - ऐसे व्यक्ति को सत्ता मिल जाए तो देश को बेचने में देर नहीं लगाएगा। वैसे सौदेबाज़ी तो अभी भी की हुई है।


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