तिरुपति प्रसाद में घपले की जांच के लिए नई SIT गठित करने के मायने क्या हैं? राजनीति न हो, कहने का क्या मतलब है? उसे रोक नहीं सकते

सुभाष चन्द्र

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में बैठे हुए गवई साहब ने चंद्रबाबू नायडू से प्रसाद में मिलावट के सबूत मांगे थे और कहा था कि लैब रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं लिखा है। मैंने कल भी लिखा था कि एक मुख्यमंत्री ऐसे गलतबयानी कैसे कर सकता है कि रिपोर्ट में कुछ न हो फिर भी आरोप लगा दे 

आज जस्टिस गवई की बेंच ने आदेश दिया कि नई SIT गठित की जाएगी जिसकी monitoring CBI करेगी इस SIT में 2 सदस्य CBI के होंगे जो CBI Director nominate करेंगे, 2 राज्य पुलिस के अधिकारी होंगे और 1 वरिष्ठ अधिकारी FSSAI का होगा CBI द्वारा मॉनिटर करने की बात Bar & Bench ने रिपोर्ट की है

अब इस बात का मतलब साफ निकलता है कि जो कोर्ट पिछली सुनवाई में कह रहा था कि कोई सबूत नहीं है लैब रिपोर्ट में, उसे आज प्रथम दृष्टया लगा है कि मिलावट तो हुई है और तब ही नई SIT गठित की जिसमें 2 अधिकारी CBI के शामिल किए हैं वैसे तो जब CBI के अधिकारियों को शामिल करना ही था तो पूरी जांच ही CBI को सौंप देना उचित होता 

कांग्रेस के कुछ लोग ताली बजा रहे थे कि 100 करोड़ हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट हुआ, यह देख कर बहुत आनंद आया ऐसी बातों पर विराम लगाने के लिए पहली तारीख पर ही जांच के आदेश दे देने चाहिए थे

कोर्ट ने सफाई दी कि नई SIT गठित करने का मतलब यह नहीं है कि इससे वर्तमान में काम कर रही SIT के काम की आलोचना की गई है - यह हमने गठित इसलिए की है जिससे करोड़ों लोगों की भगवान में आस्था का आदर किया जा सके -

जस्टिस गवई की यह बात कुछ अजीब सी लगी जिसमें उन्होंने कहा कि मामला राजनीतिक रूप ले रहा है और हम नहीं चाहते कि इसका कोई political drama खड़ा हो निष्पक्ष जांच होगी तो लोगों में विश्वास बढ़ेगा

लेखक 
चर्चित YouTuber 
एक राज्य सरकार में घपला हुआ, दूसरी सरकार आने के बाद जब भेद खुलता है तब राजनीति होना तो स्वाभाविक है जिसे आप रोक नहीं सकते सवाल तो हर तरह के उठने भी लाजमी हैं जैसे एक बात तो यह भी मार्केट में चली कि जिस कंपनी तो प्रसाद का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था उसके बोर्ड में 6 मुस्लिम थे और तिरुपति देवस्थानम बोर्ड का चेयरमैन भी ईसाई चीफ मिनिस्टर ने एक ईसाई को ही बनाया हुआ था इसलिए भी राजनीति होना तो स्वाभाविक है

जस्टिस गवई कह चुके हैं कि वे कांग्रेस परिवार से आते हैं, इसलिए उन्हें याद करा दूँ कि कांग्रेस तो देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी राजनीति कर देती है तो प्रसाद में मिलावट के लिए राजनीति क्यों नहीं हो सकती? याद होगा सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक के सबूत मांगती फिरी थी कांग्रेस और उससे बड़ी राजनीति हो नहीं सकती क्योंकि कांग्रेस ने हमारे देश के जवानों के शौर्य पर सवाल उठाते हुए उन पर संदेह करके दुश्मन का साथ दिया था

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