भारत में हिंदू मुस्लिम “भाईचारे” और गंगा-जमुना तहजीब की दुहाई देने वाले सेकुलर दलों के नेता आज देख सकते हैं कि सीरिया में कैसा “भाईचारा” कायम हुआ है। हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के 30 हजार लड़कों ने करीब ढाई करोड़ की आबादी वाले मुल्क सीरिया पर राष्ट्रपति बशर अल-असद को खदेड़ कर कब्ज़ा कर लिया। है न एकदम सही “भाईचारे” की मिसाल जहां पीटने वाले भी अल्लाहु अकबर बोल रहे थे और पिटने वाले भी।
इस HTS ने नेता अबू मोहम्मद अल-जोलानी को अमेरिका ने 2017 में आतंकवादी घोषित किया था क्योंकि उसके HTS को अमेरिका अल-कायदा की ही शाखा समझता था जबकि जौलानी अलकायदा से अलग होने का दावा करता रहा था।
यह समय का खेल है कि असद के पिता हाफिज अल-असद और बशर अल-असद ने कुल मिला कर 53 साल सीरिया पर राज किया लेकिन आज एक समय ऐसा आ गया जब उसके मददगार रूस और ईरान भी साथ देने में असमर्थ थे, हिज़्बुल्ला की इज़रायल कमर तोड़ चुका है। असद के पिता हाफिज अल-असद 12 मार्च, 1971 से लेकर अपनी मौत के दिन 10 जून, 2000 तक राष्ट्रपति रहे और बशर 17 जुलाई, 2000 को गद्दी पर बैठे और कल HTS ने छुट्टी कर दी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अभी कुछ लोग कह रहे हैं कि सीरिया में 13 वर्ष से चल रहा गृह युद्ध समाप्त हो गया लेकिन मुझे नहीं लगता ऐसा होगा। HTS नेता जौलानी पूर्व में अल-कायदा और ISIS से जुड़ा रहा है और संभव है ये दोनों संगठन उसका एकछत्र राज सहन न कर सकें। दूसरा रूस और ईरान अपने मित्र बशर अल-असद की हालत से खुश नहीं रहेंगे। आज नहीं तो कल उनके गुर्गे भी सीरिया में गृह युद्ध जरूर करेंगे। और ऐसा नहीं हो सकता कि असद के समर्थक सीरिया में बचे ही न हों। यानी एक नहीं कई कई आतंकी गुट होंगे गृह युद्ध करने के लिए।
सबसे बड़ा तो कुर्द लड़कों का गुट है जिसमे 20 से 30 लाख लड़ाके हैं जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त है। तब जौलानी को पता चलेगा सत्ता क्या होती है। और इसका मतलब यह भी निकलता है कि “भाईचारे” के लिए युद्ध होता रहेगा।
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जो भी सरकार सीरिया में बनेगी वो अमेरिका के समर्थन से ही बनेगी। फिर तो सीरिया और इज़रायल के बीच कोई खटपट नहीं रहनी चाहिए लेकिन इज़रायल ने तो अभी से सीरिया के इलाकों पर बम बरसाए हैं क्योंकि उसे पता है सीरिया का बॉर्डर इज़रायल से लगता होने के कारण शांति नहीं होगी।
याद होगा जब ईरान में मोहम्मद रजा शाह पहलवी की हुकूमत थी तव ईरान एक मॉडर्न देश था लेकिन इस्लामिक हुकूमत आने के बाद महिलाएं बुर्के में कैद होकर रह गई। कल सीरिया में असद के जाने से खुश होकर प्रदर्शन करने वालों में काफी संख्या में लड़कियां भी थी जो खुले छोटे वस्त्र पहने हुई थी जिसका मतलब है असद राज में महिलाओं पर कोई इस्लामिक शरिया की पाबंदी नहीं थी।
लेकिन HTS एक कटटरपंथी इस्लामिक संगठन है और जाहिर है उसकी सत्ता में शरिया ही चलेगा और जो लड़किया आज जश्म मना रही हैं, उन्हें फिर असद याद आएगा।
सीरिया में गृह युद्ध के चलते 6 से 7 लाख लोग देश छोड़ गए और अधिकांश यूरोपीय देशों में जाकर बस गए जहां आज वो सिर दर्द बने हुए हैं। अब असद के जाने के बाद भी कहते हैं कई लाख लोग देश छोड़ कर भाग रहे हैं। जिस लेबनान ने हिज़्बुल्ला को अपने यहां रखा हुआ था और जो सीरिया के साथ था, उसी लेबनान ने सबसे पहले सीरिया से लगता अपना बॉर्डर सील कर दिया है। अबकी फिर सीरिया से भागने वाले इस्लामिक देशों में नहीं जाएंगे, वो ठिकाना यूरोप और ब्रिटेन को ही बनाएंगे। आग आगे देखिए क्या होता है। लेकिन middle east अभी शांत होता नहीं लगता।


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