TMC नेता हुमायूं कबीर का बाबरी बनाने का ऐलान बहुत गहरी सोंची-समझी साज़िश के तहत किया गया है। अब कोई इन फिरकापरस्तों से पूछे कि जो जमीन सुप्रीम कोर्ट से मिली थी वहां मस्जिद की नींव तक खोदने की हैसियत नहीं रखने वाले बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाकर एक नए विवाद को जन्म दे रहे हैं। अगर बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस गंभीर फिसाद पर चुप रहती है तो साफ है कि बंगाल चुनाव को मद्देनज़र रख हिन्दू-मुस्लिम कर कुर्सी हथियाने का षड़यंत्र।
याद हो, जब तक कोर्ट में केस लंबित होने से राम मन्दिर निर्माण में हो रही देरी पर मुस्लिम कट्टरपंथी और कालनेमि हिन्दू गैंग हिन्दुओं में फूट डालने जंगली कुत्तों की तरह भौकते रहते थे कि रामजन्मभूमि ट्रस्ट हिन्दुओं ने मंदिर निर्माण के लिए धन का दुरूपयोग कर रही है। लेकिन यह पूछने की किसी में हिम्मत नहीं कि एवज में मिली जमीन पर मस्जिद क्यों नहीं बनी? चर्चा हैं कि मस्जिद के लिए काफी रूपए भी जमा हो चुके हैं। क्या उस पैसे से कट्टरपंथियों और कालनेमि हिन्दू गैंग की रोजी-रोटी चल रही है? दूसरे, बाबरी मस्जिद मुक़दमे पर खर्चा कौन कर रहा था? क्या मस्जिदों के नाम पर विवाद खड़े कर तिजोरियां भरने की दुकान खोली जा रही है? क्या कोई शांतिप्रिय मुसलमान इन कट्टरपंथियों से पूछने की हिम्मत करने सडकों से लेकर मस्जिदों तक आएंगे? अगर ये सब खामोश रहते हैं तो साफ है कि इस झगडे में उनका गुप्त समर्थन है और हिन्दुओं और सरकार को गुमराह करने टीवी परिचर्चाओं में शांतिप्रिय होने का स्वांग करते हैं? देश इन सब से जवाब मांगता है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
बाबर जबकि खुद कभी बंगाल नहीं गया अलबत्ता उसकी सेना ने 1529 में घाघरा युद्ध में भाग लिया था और बंगाल का सुल्तान नुसरत शाह हार गया था। क्या हुमायूं कबीर भी और मुसलमानों की तरह बाबर का वंशज है क्योंकि वे भी मुगलों की गुलामी आज भी करते हैं।
जब सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2019 में राम मंदिर का निर्णय दिया था, तब कथित बाबरी मस्जिद के लिए भी अयोध्या में 5 एकड़ जमीन दी गई थी। मंदिर तो 3 साल में बन गया लेकिन मस्जिद बनाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। पहले वहां जा कर उस जमीन पर मस्जिद बना लो हुमायूं कबीर जो जमीन अभी तक बंजर पड़ी है, फिर मुर्शिदाबाद में मस्जिद बनाने की सोचना।
मस्जिद के लिए जमीन धन्नीपुर गांव में दी गई थी जो कथित बाबरी मस्जिद ढांचे से 25 किलोमीटर दूर है। मस्जिद के प्रोजेक्ट का संचालन उत्तर प्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड द्वारा स्थापित Indo-Islamic Cultural Foundation (IICF) trust कर रहा है लेकिन प्रोजेक्ट अभी तक Planning और Approval स्टेज पर है। सबसे बड़ी रूकावट फंड की है क्योंकि ट्रस्ट के पास पैसा नहीं है और अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी से प्रोजेक्ट के लिए अनुमति नहीं ली गई है। क्या बाबरी का मुकदमा लड़ने वकीलों से कोई सलाह लेने की लिए उनको धन की पोटली नहीं दी? क्यों बिना धन की पोटली लिए बिना कोई सलाह देने वाला नहीं। शुरू में प्रोजेक्ट को इसलिए अनुमति नहीं मिली क्योंकि मस्जिद को जाने वाली सड़क बहुत संकरी थी।
अब नया प्रोजेक्ट तैयार किया गया है जिसमें मस्जिद का नाम होगा “मस्जिद मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह” जिसमें एक समय में 2000 लोग नमाज पढ़ सकेंगे; 300 बेड का multi - speciality hospital होगा; community kitchen होगी जहां फ्री भोजन मिलेगा; रिसर्च सेंटर लाइब्रेरी और म्यूजियम होगा और focus on green building, with plans for a zero-energy structure powered by solar plants होगा। बस हॉस्पिटल कहीं अल फ़लाह की तरह आतंकी बनाने की फैक्ट्री न बन जाए।
आपने कभी किसी मुस्लिम संस्था जैसे जमीयत उलेमा-ए-हिंद, दारुल उलूम या मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और वक़्फ़ बोर्ड को इस प्रोजेक्ट के बात करते सुना है क्या? जबकि सबके पास पैसे की कोई कमी नहीं है लेकिन आज ये सब अल फ़लाह के उन डॉक्टरों की हिमायत कर रहे हैं जो राम मंदिर को उड़ाना चाहते थे और यह बात जांच में सामने आई है कि राम मंदिर का विध्वंस आतंकियों का मिशन था।
अभी कुछ ही पहले News18 पर एंकर लुबिका लियाकत के शो "गूंज" में ऑल इंडिया इमाम कांफ्रेंस के सदर मौलाना साजिद रशीदी के सुप्रीम कोर्ट की वकील श्रीमति सुभिहि खान ने कहा कि राम मन्दिर बनने पर चर्चा में शामिल इसी रशीदी ने कहा था कि "बना लो मन्दिर वक्त आने पर हम इसे तोड़ देंगे", तो आतंकवादी डॉक्टरों ने इसी रशीदी की बात को पूरा करने पर काम कर रहे थे। यह वही रशीदी है जिसने दिल्ली विधान सभा चुनावों में मतदान के बाद कहा था कि "मैंने बीजेपी को वोट दिया है।" ये वही निडर और निर्भीक महिला हैं सुभिहि जिन्होंने इसी रशीदी और शुऐब जमाई(अब ओवैसी पार्टी का दिल्ली अध्यक्ष है) टीवी पर लाइव शो में महिलाओं पर अभद्र भाषा बोलने पर पिटाई कर चुकी है।
जो लोग भी मंदिर को बनने के बाद उसे तोड़ने की वकालत करते रहे हैं, उन्हें भी जांच के घेरे में लेना चाहिए और एक ऐसा व्यक्ति खास था मौलाना साजिद रशीदी जिसके बयान इंटरनेट और यूट्यूब पर मिल जाएंगे जिनमे वो कहता सुनाई देगा कि आज नहीं तो कभी भी 100, 200, 500 या 1000 साल के बाद मुस्लमान राम मंदिर को तोड़ कर फिर से मस्जिद बना देंगे जैसे तुर्की की Hagia Sophia and Chora Church को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया। देखिए वीडियो:
ऐसे डॉक्टरों के बारे में क्यों पूछते है कि वो आतंकी क्यों बने, सीधा उनसे ही पूछ लो कि आतंकी बनकर राम मंदिर को ध्वस्त क्यों करना चाहते थे? दुनिया भर में आतंकवाद पर चल रहे लोग आतंकी क्यों बने और ओसामा बिन लादेन जो एक इंजीनियर था, वो आतंकी क्यों बना, महबूबा मुफ़्ती, फ़ारूक़ अब्दुल्ला और राशिद अल्वी इसका जवाब दे दें।

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