पाकिस्तान की दुर्दशा भारत में फैलाना चाहते है दोनों मदनी; क्या मिला पाकिस्तान लेकर, एक बार यह सोचें? मुस्लिमों का अल्पसंख्यक दर्जा ख़त्म हो

सुभाष चन्द्र

जबसे पाकिस्तान की दुर्दशा होनी शुरू हुई भारत में पल रहे पाकिस्तानपरस्तों की नींद, रोटी और पानी पीना तक हराम होने की वजह जहर उगलना शुरू किया हुआ है। भूल रहे हैं कि कुत्तों की भोंकना भी लोग ज्यादा पसंद नहीं करते, वही हालत बहुत जल्दी इन कट्टरपंथियों की भी होने वाली है। इनके जहर उगलने का किसी और से ज्यादा मुसलमानों को ही हो रहा है। इस कड़वी सच्चाई को आतंकवाद और पाकिस्तान के समर्थन में जहर उगलने वाले कट्टरपंथियों को समझनी होगी। भारतीय बनकर रहने की आदत डालनी होगी कट्टरपंथी नहीं। 

इन मदनी जैसे कट्टरपंथियों को मालूम होना चाहिए कि भारत विरोधी जरूर फंडिंग कर रहे हों लेकिन पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के मुसलमानों को भी कई देश(कुछ मुस्लिम देश भी शामिल है) वीसा देने पर जरुरत से ज्यादा गंभीर हैं।

      

एक दिन अरशद मदनी ने विलाप किया कि अमेरिका और लंदन में मेयर मुस्लिम बन सकते हैं लेकिन भारत में किसी यूनिवर्सिटी में VC मुस्लिम नहीं बन सकता जबकि उसे पता है सभी मुस्लिमों की यूनिवर्सिटियों में VC मुस्लिम ही हैं। उसके बाद अब उसका भाई महमूद मदनी सभी सीमाएं पार करता हुआ सीधा सुप्रीम कोर्ट पर हमला कर रहा है कि वह सरकार के दबाव में फैसले करता है और उसे अपने को सुप्रीम कहने का अधिकार नहीं है

हैरानी इस बात को लेकर है कि इन मदनियों द्वारा इतना जहर उगलने पर केंद्र और राज्य सरकारें क्यों खामोश हैं? जबकि कई मौलाना तक इन दोनों का विरोध कर रहे हैं।  

लेखक 
चर्चित YouTuber 
महमूद मदनी ने बहुत जहर उगला है - उसने कहा है कि :- 

-मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं (भूल गया 95000 पाकिस्तानी मुसलमानों ने 1971 में सरेंडर किया था);

-मुसलमानों को मुर्दा बनाने तुम्हारे जैसे कट्टरपंथी जिम्मेदार है; 

-मरियाना में कांग्रेस द्वारा मुस्लिम नरसंहार को क्यों भूले महामूर्ख मदनियों?  

-ज्ञानवापी, मथुरा पर सुनवाई चिंताजनक है;

-मायूसी कौम के लिए जहर की तरह है; (आपकी भाषा से आप और मुसलमान मायूस लगते हैं, क्या?)

-धारा 370, ट्रिपल तलाक वक्फ बोर्ड और राम मंदिर के फैसलों से मदनी को ऐतराज है;

-लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्दों से मुसलमानों का अपमान किया जा रहा है; (मतलब ये सब आपकी हिदायतों पर हो रहा है);

-कहीं कोई आतंकी घटना हो जाती है तो उसे जिहाद बता दिया जाता है;

-देश में जिहाद पर बहस गैर जरूरी है, जुल्म होगा तो जिहाद भी होगा;

-इन मदनियों और कट्टरपंथियों की वजह से मुसलमान भारत ही नहीं और विदेशों में भी शक की नजर से देखा जाने लगा है आदि आदि 

भारत जैसे संविधान में “धार्मिक आधार” पर अल्पसंख्यकों को किसी देश में अधिकार नहीं दिए गए हैं। केवल पाकिस्तान में Religious Minorities के अधिकार हैं लेकिन पाकिस्तान ने अपने यहां हिंदू लगभग ख़त्म ही कर दिए और उन्हें नाम के अधिकार दिए हैं जबकि भारत के मुसलमानों को भरपूर मिले हुए हैं। आर्टिकल 14 जिसमे कहा गया है की कानून सबके लिए बराबर है (equality before law) का फायदा घुसपैठिए मुस्लिम भी उठा रहे हैं जबकि खुद मुस्लिम अपने ही लोगों को बराबरी के अधिकार नहीं देते जैसे महिलाओं को मस्जिद में जाने की इज़ाज़त नहीं है और मुस्लिमों को दूसरे फिरकों के लोगो को केवल अपने ही फिरकों के कब्रिस्तान में दफनाने की इज़ाज़त है और अपने ही फिरके की मस्जिद में जाने की इज़ाज़त है। मर्द रंडवा होने पर खुले सांड की तरह घूम सकता है लेकिन मुस्लिम महिला विधवा होने पर 4 महीने तक किसी परिवार से बाहर किसी मर्द को देख भी नहीं सकती। फिर बकवास करते फिरते हैं कि इस्लाम में महिलाओं को खुली छूट है। पागलों पहले अपने मजहब की इन कुरीतियों को तो दूर कर लो। 

ऑस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड, पोलैंड, रूमानिया, ग्रीस और युगोस्लाविया जैसे देशों में religious minorities के अधिकार नहीं है, अलबत्ता ethnic और linguistic minorities के अधिकार है और किसी यूरोपीय देश या अन्य किसी लोकतांत्रिक देश में भारत की तरह वक्फ बोर्ड नहीं है जबकि कई यूरोपीय देशों ने तो बुरका तक बैन कर दिया है। चीन और म्यांमार ने तो मुस्लिमों पर दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर भी पाबंदी लगा रखी है

जो अलगाववादी नीति भारत के मुसलमानों ने 1947 में अपनाई और मदनी भाइयों ने अब फिर  शुरू की है, वह अन्य देशों में भी मुस्लिमों ने शुरू की हुई है और इसलिए उन देशों में मुसलमानों के खिलाफ विरोध शुरू हो चुका है। इन देशों में शामिल हैं जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, हंगरी, पोलैंड, ग्रीस और इटली आदि। 

भारत में अब आवश्यकता है कि समय के अनुसार अल्पसंख्यक नीति में बदलाव करते हुए 5% से ज्यादा की आबादी वाली किसी भी कौम (समुदाय) को अल्पसंख्यक न माना जाए और उस समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यकों को मिलने वाली कोई भी सुविधा न दी जाए। अल्पसंख्यकों के संविधान के अनुच्छेद स्वतः ही निष्क्रिय हो जायेंगे। इस काम के लिए किसी संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है, सरकार ही कानून बना सकती है

दोनों मदनी भाइयों को गिरफ्तार कर देश में सौहाद्र बिगाड़ने के आरोप में मुकदमा चलाया जाए और सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर महमूद मदनी पर अदालत की मानहानि का केस चलाना चाहिए मगर “सेकुलर” कोर्ट इतनी हिम्मत करेगा क्या?  

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