भारत में जो जाति के नाम पर हिन्दुओं को बाँटने का घिनौना खेल सालों से खिल रहा है उसे गहराने के लिए क्या UGC बिल लाया गया था। अगर सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई होती तो देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह द्वारा मंडल कमीशन को लाकर सवर्णों ने विरोध किया था, अगर UGC बिल पर रोक नहीं लगाई होती देश में इतना उपद्रव मच गया होता जिसकी आंच में मोदी सरकार का गिरना तय था।
प्रधानमंत्री मोदी को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल हटाना ही नहीं, कैबिनेट मीटिंग में पूछना चाहिए कि बिल पर बयानबाज़ी करने से पहले पढ़ा क्यों नहीं। टीवी पर हुई चर्चाओं में एक बात सामने आयी कि "किसी सवर्ण पर जाति टिप्पणी पर सजा देने से पहले उसकी पुष्टि करनी होगी, गलत पाने पर शिकायतकर्ता पर कानूनी कार्यवाही होगी।" लेकिन इसको को निकाल दिया गया। दूसरे जेएनयू के प्रोफेसर ने RJD महिला प्रवक्ता यादव का एक जो विवादित वीडियो -जिसमे यादव उच्च जाति के लिए कह रही है कि इसको फंसाना है..." उसी चर्चा में शामिल उसी महिला यादव को उसकी औकात दिखाई थी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 मार्च की तय की है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले को देखने के लिए एक नामचीन कानूनविदों की समिति बनाने के लिए कहा है जो इस पर विचार करे। इस समिति का मतलब है 3-6 महीने के लिए मामला लटक गया और उसके बाद The Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 संसद से पारित हो जाएगा जो UGC को ही समाप्त कर देगा अन्य 2 संस्थानों के साथ और जब UGC ही ख़त्म हो जाएगा तो उसके 2026 के नियम स्वत ही खत्म हो जाएंगे।
एक बात तो निश्चित है कि UGC के जिन नियमों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा “The Regulations are, we are sorry to say prima facie, the language there is completely vague, the provisions are capable of misuse” वे नियम UGC ने अपने रेगुलेशन में कैसे और किसके कहने पर डाले। इसके पीछे गहरी साजिश और शरारत थी ऐसा लगता है, सरकार को ही बदनाम करने की नहीं बल्कि मोदी को निजी तौर पर निशाना बनाने की।
न्यूज़ पोर्टल्स पर कहा गया है कि UGC ने विश्विद्यालयों में जातीय भेदभाव की शिकायते बढने की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट और The Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 को देखने वाली संसदीय समिति को भेजी थी जबकि समिति ने ऐसी कोई रिपोर्ट UGC से नहीं मांगी थी। UGC का संसदीय समिति को बिना मांगे रिपोर्ट भेजना ही संदेह पैदा करता है और इशारा करता है कि UGC के भीतर से ही शरारत की गई जिसके लिए मैं UGC के चेयरमैन विनीत जोशी को भी संदेह के घेरे से बाहर नहीं रख सकता।
बहुत लोगों का मानना है कि इस कांड के पीछे दिग्विजय सिंह का हाथ जो संसदीय समिति के अध्यक्ष है। निजी रूप से दिग्विजय सिंह ने विनीत जोशी को कुछ कहा हो तो कह नहीं सकते लेकिन समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद को 10 फरवरी तक देनी है और इस बीच समिति कोई अंतरिम रिपोर्ट किसी को नहीं देती।
कुछ लोग मेरे लेखों पर मुझसे नाराज हुए थे और मुझे ब्राह्मणों के खिलाफ भी कह दिया गया जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हिंदू समाज के सभी वर्गों की अलग अहमियत है लेकिन ब्राह्मण हिंदू समाज की रीढ़ हैं और सदा आदरणीय रहेंगे। मुझे केवल इस बात पर शोभ था कि UGC के नियमों के विरोध में निजी रूप से नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बुरा भला कहा गया और अपशब्द कहे गए। बाद में तो मोदी की कब्र खोदने की नारे लगाए गए, पुतले जमीन पर डाल कर डंडे बरसाए गए जो शर्म की बात है जबकि मोदी का सीधा इस प्रकरण में कोई हाथ नहीं था। जिस व्यक्ति ने अपना जीवन देश, समाज और जनता के कल्याण के लिए लगा दिया उसका ऐसा अनादर देख कर मैं क्षुब्ध था।
सवर्ण समझ को “ऊंची जाति” के वर्ग में शामिल किया जाता है। जब सवर्ण समाज भी जाति ही है तो वह भी जातीय भेदभाव का शिकार हो ही नहीं सकता है बल्कि सबसे बड़ा शिकार है क्योंकि उस पर ही सबसे ज्यादा झूठे आरोप लगाए जाते हैं।
केवल कानून से समाज की समस्याएं दूर नहीं होती। दहेज़ विरोधी कानून आया, क्या दहेज़ प्रथा बंद हो गई, SC/ST act आया लेकिन ऐसा दुरूपयोग हुआ कि लोग वर्षों तक बेकसूर होते हुए भी जेलों में रहे लेकिन क्या SC/ST act के उद्देश्य पूरे हुए, नहीं।
बॉलीवुड ने ब्राह्मणों, वैश्यों और ठाकुरों को दलितों पर अत्याचार करने वालों की छवि लोगों के दिलों में बिठा दी है। उसका ही असर है कि सवर्ण समाज और SC/ST/OBC समाज एक दूसरे को परस्पर विरोधी समझते हैं।

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