ईरान-अमेरिका-इजराइल लड़ाई ने नूपुर शर्मा विवाद को ताज़ा कर दिया। नूपुर ने वही कहा जो इनकी इस्लामिक किताबों में लिखा है और उस बात को बोलने के उकसाने वाले तास्सुबी तस्लीम पर सभी मुस्लिम कट्टरपंथियों ने चुप्पी साध ली और हिन्दू नूपुर को कसूरवार ठहरा दिया। ठीक वही हालत ईरान-अमेरिका-इजराइल लड़ाई में सामने आयी है। मार्च 2 को टीवी पर जमी चौपालों(परिचर्चाओं) में सऊदी अरब का नाम सामने आया, जिसके उकसाने पर ईरान पर हमला हुआ। लेकिन महामूर्ख अमेरिका और इजराइल को कसूरवार बता मुस्लिम मुल्क सऊदी अरब के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा, क्यों? गैर-मुस्लिम को दोषी बताकर असली दोषी मुस्लिम मुल्क सऊदी अरब को बचाया जा रहा है, क्यों? आखिर दोगलेपन की भी हद होती है। बिना सच्चाई जाने क्यों गैर-मुस्लिमों को कसूरवार ठहराया जाता है?
अमेरिका और इज़रायल का ईरान पर हमला हुआ जिसमें सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हो गई लेकिन कांग्रेस की बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए कि इस हमले के लिए भी मोदी को दोष दे रहे हैं क्योंकि हमला मोदी की इज़रायल यात्रा ख़त्म होने के अगले दिन शुरू हुआ। ओवैसी मोदी से पूछ रहा है कि आपने बताया क्यों नहीं कि इज़रायल हमला करेगा। ऐसे सवाल कांग्रेस के ढक्कन भी कर रहे हैं।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ईरान के लिए भारत में टसुए बहाने वालों को यह मालूम होना चाहिए कि ईरान एक बार नहीं बार बार ऐलान कर चुका है और उसने आज भी कहा है कि वो इज़रायल को दुनिया के नक़्शे से मिटा देगा और उसी के लिए वह एटम बम बना रहा है। ऐसे में क्या इज़रायल हाथ पे हाथ धरे बैठा रह सकता है। ईरान की पहुंच अमेरिका तक सीधे तो नहीं है और इसलिए वह अमेरिका के गल्फ देशों में उसके ठिकानों को निशाना बना रहा है, साथ में इज़रायल को भी। पहले ही दिन ईरान खामनेई के साथ 40 वरिष्ठ लीडर भी खो चुका है। वो 40 लोग कोई छोटे मोटे लोग नहीं थे क्योंकि उनके साथ खामनेई गुप्त बैठक कर रहा था जब हमले में सब मारे गए जिनमें खामनेई के परिजन भी शामिल थे।
कांग्रेस की तरफ से कहा जा रहा है कि “हम भारत के लोग मोदी, नेतन्याहू और ट्रंप के खिलाफ खड़े हैं”। कांग्रेस अपने को भारत के लोग कैसे समझ बैठी और कल तक तो ट्रंप के लिए ताली बजाता था राहुल गांधी जब उसने भारत की इकोनॉमी को डेड कहा था। कांग्रेस ने अमेरिका और इज़रायल के हमले को शिया मुसलमानों पर हमला बताया है। कांग्रेस केवल भारत के खिलाफ है।
शायद इसलिए ही कश्मीर और लखनऊ में शिया मुसलमान छातियां पीट रहे हैं और खामनेई की मौत पर मातम मना रहे हैं। इधर दिल्ली में भी धरना प्रदर्शन किया है शियाओं ने और कुछ महिलाएं कह रही हैं कि मोदी उन्हें इज़ाज़त दे कि वो ईरान जाकर इज़रायल और अमेरिका से लड़ सकें। सारे शिया जाएं कौन रोकता है, गाज़ा तो कोई नहीं गया। पहले देख लो ऐसे माहौल में ईरान वीसा भी देगा।
लेकिन सवाल यह उठता है कि शियाओं का खामनेई मारा गया तो वो उबल रहे हैं मगर सुन्नी क्यों चुप है जब शिया ईरान सुन्नी देशों पर हमले कर रहा है। Bahrain, Kuwait, Qatar, UAE, Jordan, Qatar और Oman सब पर ईरान हमले कर रहा है और सभी सुन्नी देश हैं, फिर भारत के सुन्नी मुसलमानों का खून ईरान के खिलाफ क्यों नहीं उबल रहा। क्या उन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
जो कश्मीर, लखनऊ और दिल्ली में शिया मुसलमान विलाप कर रहे हैं, उन्हें सोचना पड़ेगा कि उनकी भारत के प्रति वफ़ादारी पर कैसे विश्वास किया जा सकता है। मतलब साफ़ है कि कल को अगर ईरान ही भारत पर हमला कर दे तो ये लोग तो भारत के खिलाफ ही लड़ेंगे।
Jammu Kashmir Students Association ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वो ईरान में फंसे 1200 कश्मीरी छात्रों को निकालने का प्रबंध करें। यहां से ईरान जाकर लड़ने की बात कर रहे हैं शिया तो उन्हें लाने का क्या फायदा।
एक बात और, POJK में भी शिया आबादी ज्यादा है और वहां के मुसलमान हंगामा कर रहे हैं ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ। फिर POJK ऐसे मुसलमानों के साथ भारत में मिलाने से क्या फायदा क्योंकि वो और कश्मीर के शिया दोनों मिलकर भारत के विरुद्ध ही लड़ेंगे। इसलिए POJK लेना है तो बिना वहां की आवाम के जिन्हें पाकिस्तान में धकेल देना चाहिए।

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