डोनाल्ड ट्रंप ने जो किया, वो तो गलत किया था, उसका हिसाब बाद में भी हो सकता है, लेकिन अभी होर्मुज में उसे अकेला छोड़, NATO और EU देश, ईरान को अपना मित्र समझने की भूल न करें

सुभाष चन्द्र

डोनाल्ड ट्रंप ने पूरे विश्व में जो “टैरिफ” आतंक मचाया था, उसका वह दाव तो अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ही उल्टा कर दिया। निश्चित रूप से ट्रंप ने हर देश को अपना दुश्मन बना लिया था। इसके अलावा “ग्रीनलैंड” को लेकर पूरे EU से दुश्मनी मोल ले ली थी मोदी जैसे मित्र को भी दूर कर लिया था NATO से भी बाहर होने की बात उसने की थी जिसमें दोष NATO देशों का भी था क्योंकि बजट का हिस्सा अधिकांश देश नहीं दे रहे थे

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ट्रंप को पता नहीं था कि एक दिन जिन देशों को ठेंगा दिखा रहा है “टैरिफ” ठोक कर, कल उसे उन्हीं की जरूरत पड़ेगी ईरान से युद्ध होना कोई नई बात नहीं थी ईरान केवल इज़रायल और अमेरिका के लिए खतरा नहीं था बल्कि उसका “इस्लामिक परमाणु बम” किसी के लिए भी खतरा हो सकता है लेकिन यह बात आज NATO और EU देश नहीं समझ रहे 

होर्मुज पर कंट्रोल के लिए जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जापान समेत सभी ने अपने जंगी जहाज़ भेजने से मना कर दिया है हो सकता है ये सभी देश ट्रंप से अपना टैरिफ का हिसाब चुकता कर रहे हों लेकिन ट्रंप की हजार गलतियों के बावजूद उसे होर्मुज में अकेला छोड़ना कोई समझदारी नहीं है NATO और EU ये समझने की भूल न करें कि ऐसा करने से ईरान उनका मित्र बन जाएगा ईरान का लक्ष्य इज़रायल को दुनिया के नक़्शे से मिटाना है और उसके लिए ही उसने हमास, हिज्बुल्ला और हूती जैसे आतंकी संगठन खड़े किये हुए है

अमेरिका-इज़रायल का ईरान से युद्ध एक ईसाई-मुस्लिम युद्ध में बदल चुका है, या कहे तो इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में बदल चुका है, जिसमे इस्लामिक देश भी बंट चुके है ईरान की युद्ध में उपलब्धि अमेरिका के खिलाफ सीधी कुछ नहीं है, वह बस सुन्नी देशों में अमेरिका के अड्डों को निशाना बना रहा है ईरान तो सऊदी अरब यानी “अल्लाह के घर” को भी नहीं छोड़ रहा इसलिए आज अगर NATO और EU देशों के होर्मुज से वह तेल के जहाज निकाल भी देता है तब भी जरूरत पड़ने पर उन पर भी हमला कर सकता है जैसा ईरान से कहा भी है कि हमारी मिसाइल यूरोप तक मार कर सकती हैं

NATO और EU देशों को आभास होना चाहिए कि वे भी इस्लामिक कट्टरता और आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं जिससे निपटने के लिए कल उन्हें भी अमेरिका और इज़रायल की जरूरत पड़ सकती है कहते है कि कभी भारतवर्ष के कई हिंदू राजा अपने ही साथी हिंदू राजाओं के खिलाफ मुगलों से मिल गए थे ऐसा इतिहास में ईसाईयों ने भी किया और अब फिर वही किया जा रहा है जो प्रमुख ईसाई और यहूदी देश को छोड़ कर ईसाई देश ईरान की तरफ  झुक रहे हैं एकजुटता का अभाव केवल हिंदुओं में ही नहीं रहा, ईसाइयों में भी रहा है और अब भी दिखाई दे रहा है

होर्मुज अगर ईरानी कब्जे में रहा तो NATO और EU देशों में गैस और तेल की कीमतें उनकी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर देंगी ईरान उन्हें बचाने नहीं आएगा माना ट्रंप ने सबके साथ अपराध किया है लेकिन उसका हिसाब बाद में कर लेना परंतु अभी उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए वो युद्ध में घुसने के लिए नहीं कह रहा, बस होर्मुज पर कंट्रोल करने के लिए मदद मांग रहा है 

होर्मुज के बाद अब हूती संगठन Bab el-Mandeb Strait को बंद करने की धमकी दे रहा है

ईरान का साथ देने से पहले उसके हमास की 7 अक्टूबर 2024 की बर्बरता याद कर लेनी चाहिए, उसके बाद की इज़रायल की केवल प्रतिक्रिया नहीं

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