राहुल गांधी और कांग्रेस आज लोकतंत्र के लिए ढोल पीटने से पहले याद करें कि आज के दिन इंदिरा गांधी ने 1975 को कैसे देश को बंधक बनाया था; ”Indira Surrendered To Bhutto”

सुभाष चन्द्र 

कथित संविधान की लाल किताब हाथ में लिए हुए बेशर्म राहुल गांधी देश ही नहीं विदेशों में गीत गाता फिरता है कि मोदी ने लोकतंत्र और संविधान कुचल दिया, संवैधानिक संस्थाएं कब्जे में कर ली है। मोदी सरेंडर चिल्लाने वाले बेशर्म राहुल तेरी दादी ने तो पाकिस्तान के आगे सरेंडर कर दिया था, पाकिस्तान के बंधक बनाए 95000 फौजियों को छोड़ दिया लेकिन अपने 85 सैनिकों को नहीं छुड़वाया। उन्हें पाकिस्तान के हाथों मरने के लिए छोड़ दिया। और उसी रास्ते पूरी कांग्रेस और INDI गठबंधन चल रहा है। 

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जबकि सच्चाई यह है कि नेहरू से लेकर 2014 तक कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट और जितनी भी संवैधानिक संस्थाएं है सबको गुलाम बना रखा था। जो सुप्रीम कोर्ट सरकार के विरुद्ध बोल जाती है कांग्रेस के राज में किसी जज की हिम्मत नहीं थी। इंदिरा गाँधी का चुनाव रद्द कर 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ने का फैसला देने वाले इलाहबाद हाई कोर्ट जज जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा कहां गायब हो गए पता नहीं। बेशर्मों की तरह राहुल से लेकर INDI गठबंधन चील-कौओं की तरह संवैधानिक संस्थाओं को छोड़ो प्रधानमंत्री तक को गाली देने से नहीं चुकता। 

इमरजेंसी में वामपंथ कांग्रेस की गोदी में बैठा था। हाँ, महाराष्ट्र में हिन्दू सम्राट बालासाहेब ठाकरे को गिरफ्तार करने में इंदिरा ने घुटने टेक दिए थे। जानती थी कि ठाकरे को छेड़ना अपनी बचीकुची इज्जत से हाथ धोना। लेकिन माननीय बालासाहेब के बेटे ने कांग्रेस के आगे सरेंडर कर अपने बाप की इज्जत को मलियामेट कर दिया।   

लेकिन वह नहीं पढ़ना चाहता कि आज के दिन 1975 में उसकी दादी इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाकर, संविधान की किताब को बंद कर दिया था और लोकतंत्र की निर्मम हत्या कर दी थी। संविधान में मुस्लिमों को खुश करने के लिए बदलाव किए। 

कुछ दिन पहले अशोक गहलोत ने कहा था कि आज इंदिरा गांधी होती तो वह भाजपा पर बैन लगा देती राहुल गांधी तो कुछ पढ़ना नहीं चाहता लेकिन अशोक गहलोत तुम तो बुजुर्ग हो, तुम्हे तो पता होगा कैसे तुम्हारी अम्मा इंदिरा गांधी ने एक भाजपा (जनसंघ) ही नहीं सभी पार्टियों को बैन कर दिया था लोकनायक जयप्रकाश नारायण समेत विपक्ष के सभी नेता जेल में ठूंस दिए गए थे आरएसएस पर भी बैन लगा दिया था आम जनता पर अत्याचारों की कोई सीमा नहीं थी और आधी रात में पुलिस किसी को भी उठा ले जाती थी मौलिक अधिकार ख़त्म कर दिए गए थे 

अगले दिन 26 जून की सुबह सभी अख़बारों के पहले पन्ने काले थे कुछ नहीं लिखा गया था। तब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में केवल दिल्ली दूरदर्शन था इंदिरा गांधी का गुणगान करने के लिए लेकिन आज इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स में पत्रकार खुलेआम सरकार और मोदी की आलोचना करते हैं कुछ पत्रकार ऐसे हैं जो 1975 में थे और आज भी हैं, वो भी उन दिनों को भूलकर मोदी को गरिया रहे हैं जैसे स्वतंत्रता मिठाई के रूप में भी उन्हें हजम नहीं हो रही उन्हें वो ही काले दिन दिखा देता मोदी तो अच्छा रहता

राहुल गांधी संविधान की बात करता है हाई कोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने 12 जून, 1975 को इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया था लेकिन दादी ने क्या किया, उस फैसले को ठुकरा कर 12 दिन बाद इमरजेंसी लगा दी सारी न्यायपालिका को कब्जे में ले लिया आज जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज मोदी सरकार को हेंकड़ी दिखाते हैं, वो याद नहीं करते कि उनकी न्यायपालिका की क्या दुर्गति की थी इंदिरा गांधी ने आज कॉलेजियम से अपनी “दादागिरी” चला रही है न्यायपालिका लेकिन तब इंदिरा गांधी खुद जज बनाती थी और न्यायपालिका नतमस्तक रहती थी इनको भी स्वतंत्रता हज़म नहीं हो रही

न्यायपालिका को याद होगा कैसे बहरुल इस्लाम को एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट और राज्यसभा भेजती रही इंदिरा गांधी जबकि आज न्यायपालिका सरकार को अपनी मर्जी से तय किए जज नियुक्त करने  को मजबूर करती है अब कुछ हद तक मोदी सरकार उनकी Recommendations को स्वीकार नहीं करती

1971 का चुनाव इंदिरा गांधी “गरीबी हटाओ” के नारे पर जीती थी और राहुल गांधी आज भी गरीबी हटाओ का नारा लगाता है जबकि गांधी परिवार गरीबी हटाते हटाते खुद मालदार होता चला गया एक उपलब्धि, इंदिरा गांधी की कांग्रेस गाती फिरती है कि उसने बांग्लादेश बनाया जो आज हमारे लिए नासूर बन गया है पाकिस्तान पर जीत तो हासिल की लेकिन शिमला वार्ता में भुट्टो को इंदिरा गांधी ने सब कुछ वापस लौटा दिया -”Indira Surrendered To Bhutto”- ऐसी थी वो Iron Lady.

राहुल गांधी आज चुनाव आयोग पर सरकार के कब्जे की बात करता है जबकि कांग्रेस ने हर चुनाव आयुक्त को अपनी जेब में रखा और उससे वह सब करवाया जो कांग्रेस चाहती थी डॉ कुरैशी, डॉ गिल और नवीन चावला के नाम तो याद होंगे राहुल गांधी को

आज के दिन भी अगर राहुल गांधी और उसके चट्टे बट्टे लोकतंत्र की बात करते है तो इससे बड़ी शर्म की बात हो नहीं सकती क्योंकि लोकतंत्र की हत्या का काला दाग तो उनके चेहरे पर इंदिरा गांधी की इमरजेंसी से ही लगा हुआ है

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