सनातन का अपमान, स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’ विकसित करने वाले वैज्ञानिक का उड़ाया मजाक


कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की सनातन धर्म में कोई आस्था नहीं है। सनातन संस्कृति, गौ माता और भारतीय वैज्ञानिकों का अपमान करना इनकी आदत बन चुकी है। 7 नवंबर 1966 (गोपाष्टमी) को गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर स्वामी करपात्री जी महाराज और कई हिंदू संगठनों ने संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साधु-संतों पर गोली चलाने का निर्देश दिया था, जिसमें सैकड़ों साधु-संत मारे गए थे। पार्लियामेंट स्ट्रीट साधुओं के खून से लाल हो गयी थी। आज फिर इंदिरा गांधी की पोती प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना की याद ताजा कर दी है। उन्होंने संसद में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज और परीक्षा सुधार को लेकर गठित समितियों पर बोलते हुए गौ माता और वैज्ञानिक का अपमान किया।
चुनावों में हिन्दुओं को गुमराह करने रुद्राक्ष की माला पहन मन्दिरों में जाती है लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों में हाथ में कलावा तक नहीं होता। आखिर मुस्लिमपरस्त पार्टी से सनातन का गुणगान कैसे कर सकती है? कुछ लोग कहते थे कि प्रियंका गाँधी कांग्रेस के लिए राहुल गाँधी से बेहतर विकल्प हो सकता है, मुझे भी लगता था!
लेकिन शायद कांग्रेस को हकीकत पता थी, शायद इसीलिए राहुल के लगातार फेलियर के बावजूद प्रियंका को कभी कांग्रेस अध्यक्ष या PM मेटेरियल के रूप में प्रोजेक्ट करने का साहस नही किया!
जुलाई 28 को संसद में छात्रों के भविष्य और पेपर लीक विरोधी कानून जैसे गम्भीर मुद्दे पर प्रियंका गाँधी ने सिर्फ एक लाइन बोली कि ये पूरा कानून ही बेकार है, इससे पेपर लीक नही रुक सकता है!
आपको याद होगा इसी मानसिकता से इसने राजस्थान में लगभग हर पेपर लीक पर गहलोत का बचाव करते हुए कहा था कि गहलोत जी प्रयास कर रहे है! फिर भी पेपर लीक हो रहे है तो क्या करे?
क्योकि मंशा छात्रहित न होकर सिर्फ छात्रों के नाम पर राजनीति करना हो तो फिर सुझाव कहाँ से आएंगे?
अपनी योग्यता से IIT मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक पद पर बैठे प्रोफेसर कामाकोटी वीझिनाथन को गोमूत्र विशेषज्ञ बताकर हंसने लगी जैसे तो सनातन आस्था का मजाक बना रही हो? और गुलाम हिन्दू कांग्रेसी हंस रहे थे।
प्रियंका का कहना कि IIT मद्रास के निदेशक को शिक्षा बारे में क्या पता, अब कोई इनसे पूछे कि वो इस पद पर किसी खानदान में पैदा होने से नही पँहुचे बल्कि शिक्षा के दम पर ही पँहुचे है!
तुम दोनो बहन भाइयों को शिक्षा के बारे में क्या पता? एक खानदान में पैदा होने के अलावा तुम्हारी क्या योग्यता है जो तुम लोगो की लांचिंग ही सीधे राष्ट्रीय पदों पर होती है?
तुम दोनो भाई बहिन कांग्रेस का लीक नही रोक पा रहे तुम से पेपर लीक पर सुझाव की वैसे भी कोई उम्मीद नही है!
कभी नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर अनर्गल आरोप लगाने लगी!
न किसी क्लोज की बात की, न कोई और सुझाव दिया सीधे बोल दिया, नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा। राधाकृष्णन कमेटी भी बनी थी लेकिन उसकी एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई।
यहाँ भी साफ झूठ बोला, राधाकृष्ण कमेटी की 60% सिफारिश लागू हो चुकी है!
अभी तक इस मुद्दे पर विपक्ष के किसी वक्ता की तरफ से इस मुद्दे पर कोई सुझाव नही आया, आएगा भी कैसे, इनके पास सुझाव ही होते तो पहले इनकी सरकारों में ही कोई ठोस कानून बन गए होते, पेपर लीक तो पहले भी होते थे लेकिन इन्होंने तो कोई कानून लाने का प्रयास ही नही किया था!
आज सरकार प्रयास कर रही है तो ये लोग इसे सिर्फ सरकार को गरियाने का मुद्दा समझकर चुनावी भाषण दे रहे है, गम्भीर मुद्दे को सदन में मजाक बनाकर रखा है!
प्रियंका वाड्रा ऐसे बोल रही थी जैसे वो देश के मालिक है और दुनिया मे सब लोग उनके आगे तुच्छ है!
उसका मकसद मुद्दे पर गम्भीर चर्चा के बजाय, इस विषय से जुड़े लोगों की मजाक बनाकर तालिया बजवाने और ठहाके लगवाने के अलावा कुछ नही लगा !  

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में गौ माता का किया अपमान
दरअसल नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड रिफॉर्म टास्क फोर्स का गठन किया है। लोकसभा में इस कार्यबल पर तंज कसते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि इस नई समिति में तो पूर्व आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक, और एक गौ-मूत्र के विशेषज्ञ भी है। इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता जी। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा के चेहरे पर कुटिल मुस्कान और लोकसभा में बैठे कांग्रेस सांसदों द्वारा मेज थप-थपाकर हंसना साबित करता हैं कि इन्हें सनातन संस्कृति और गौ-माता का अपमान करने में मजा आता है।

प्रियंका गांधी ने वैज्ञानिक वी.कामकोटि का उड़ाया मजाक
प्रियंका गांधी वाड्रा ने जिस गौ मूत्र विशेषज्ञ पर तंज कसा, उनका नाम प्रो.वी.कामकोटि हैं। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में देश के चुनिंदा शिक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसमें आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो.वी.कामकोटि का नाम भी शामिल है। प्रो. कामकोटि सिर्फ एक शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’के विकास का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक भी हैं।

विकसित किया भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’
प्रो. कामकोटि को सबसे ज्यादा पहचान भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर परियोजना से मिली। उन्होंने उस रिसर्च टीम का नेतृत्व किया जिसने भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था। आज SHAKTI को देश की महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों में गिना जाता है। प्रो.वी.कामकोटि का कंप्यूटर साइंस, साइबर सुरक्षा और टेक्‍नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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