शायद अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होगा कि Al - Andalus जो आज का स्पेन है, पर करीब 800 वर्ष (711 से 1492 AD) तक इस्लामी हुकूमत रही थी जैसे भारत में। आज जैसे भारत में सेक्युलर कीड़ों की रगों में मुग़लों का DNA दौड़ता है वैसे ही लगता है स्पेन में सेकुलरिज्म का भूत सवार है। इसलिए ही नॉर्वे और आयरलैंड के साथ मिलकर स्पेन ने 2024 में फिलिस्तीन मान्यता दे दी थी जिसके विरोध में इज़रायल ने तीनो देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए थे।
कुछ दिन पहले स्पेन ने एक कानून पास किया था कि किसी भी शरणार्थी को ऐसे ही वापस नहीं भेजा जा सकता जबकि उसकी जांच पूरी ना हो जाए। स्पेन की आबादी लगभग 5 करोड़ हैं जिसमे 25 लाख यानी 5% मुस्लिम हैं।
अब अगले ही दिन मोरक्को के 60000 मुस्लिम स्पेन पहुंच गए और मॉल लूट लिए, घरों में घुसकर कब्जा कर लिया हाथ में बड़े बड़े चाकू पेचकस लेकर आम लोगों पर हमला कर दिया। वीडियो जो सामने आए उनमे साफ़ दिखाई देता है कि बहुत से घुसपैठिए 15-16 साल के रहे होंगे।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
"एक दिन ऐसा आएगा जब हम यूरोप से बहुत ज्यादा कट्टरपंथी, चरमपंथी और आतंकवादी आते देखेंगे, क्योंकि निर्णय लेने की कमी और राजनीतिक रूप से सही होने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन यहां गौर करने की बात यह भी है कि सऊदी अरब वर्षो तक Wahhabism को फ़ैलाने के लिए अरबों डालर खर्च करता रहा है। भारत में भी हजारों डॉलर सऊदी ने खर्च किए है और यह पैसा Islamic Redicalism को बढ़ाने में काम आता है।
वर्तमान समस्या में एक तो स्पेन का निर्णय जिम्मेदार है जो कहता है कि किसी शरणार्थी को बिना जांच वापस नहीं जाएगा लेकिन जैसे ही 60000 लोग घुसे स्पेन के Ceuta में घुसे स्पेन ने सैनिक कार्रवाई शुरू कर दी। इस घटना ने यूरोप के देशों में खलबली मचा दी, इटली ने स्पेन के साथ शेंगेन समझौते को रद्द करने की बात कही तो यूरोप के अनेक देशों ने स्पेन को बॉर्डर फ्री इलाके से हटाने की मांग की है।
स्पेन को भी खुराफात करने में कम नहीं है। पहले तो फिलिस्तीन को मान्यता देकर इज़रायल से पंगा लिया। इज़रायल ने जुलाई 2023 में पश्चिमी सहारा पर मोरक्को की संप्रभुता को मान्यता दे दी। NATO के देश वैसे तो अमेरिका ईरान युद्ध में अमेरिका के साथ नहीं रहे लेकिन स्पेन ने मार्च, 2026 में अपने रोटा और मोरोन सैन्य ठिकानों तक अमेरिका को पहुंच देने से मना कर दिया जबकि इन दोनों एयरबेस पर अमेरिका के 6000 सैनिक तैनात है और इससे नाराज़ होकर ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी व्यापार बंद करने की बात कही और एक तरह स्पेन को NATO से अलग करने की धमकी दे दी।
तभी से अमेरिका का Ceuta प्लान शुरू हो गया और उसके लिए मार्को रुबियो ने 20 मिलियन डॉलर भी दे दिए। जाहिर है मोरक्को को खुली घुसपैठ करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वह पैसा दिया गया।
कहने का मतलब है कि स्पेन की समस्या के लिए वह खुद तो दोषी है लेकिन उस वजह से अमेरिका भी स्पेन को सजा दे रहा है।
अमेरिका वैसे हर जगह खुराफात कर रहा है। कुछ दिन पहले उसका भारत में राजदूत Sergio Gor तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय जोसेफ से मिले जिसका कोई औचित्य नहीं था और अब खबर है कि Gor बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों में रोहिंग्या से मिल कर आए हैं। लगता है कुछ शरारत चल रही है ट्रंप प्रशासन के दिमाग में भारत को लेकर।

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