अपने 24 जुलाई, 2026 के लेख में मैंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जी और राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन जी से करबद्ध अनुरोध किया था कि विपक्षी सांसदों की नंगई/गुंडई देखते हुए उन्हें सत्र के लिए सस्पेंड कर दीजिए क्योंकि ये लोग प्यार की भाषा नहीं समझ सकते।
जब तक इन हुड़दंगियों को इन्हीं की भाषा में जवाब नहीं दिया जाएगा ये हुड़दंगी सही रास्ते पर नहीं आएंगे। अगर सदन स्थगित होता है इसका मतलब है आप अपनी शक्तियों का दुरूपयोग कर रहे हैं और ये हुड़दंगी उसका फायदा उठा कर सदन को मछली बाजार बनाकर आपका और सरकार का उपहास कर रहे हैं। ये हुड़दंगी आप दोनों का खुलेआम अपमान कर रहे हैं और उसे दोनों क्यों बर्दाश्त कर रहे हैं?
मैंने यहां तक कहा था कि “Your inaction and leniency is being treated as your Weakness by the opposition as if you are not capable of performing your duty”.
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
जैसे दिसंबर 2023 में हुड़दंग मचाने वाले लोकसभा के 95 और राज्यसभा के 51 सदस्यों को ससपेंड किया गया था, वैसा ही अब करना आवश्यक हो गया है।
संसद का लगभग पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया है। यह सिलसिला पिछले 12 साल से चल रहा है और मुझे याद नहीं पड़ता कभी प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में भी व्यवधान न डाला गया हो। अब सुना है 12 अगस्त को FCRA विधेयक पेश किया जाएगा। मुझे नहीं लगता आज जैसे हालात देखते हुए उस पर भी कोई चर्चा होगी और पास हो सकेगा।
याद कीजिए केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहते हुए जून, 2015, नवंबर, 2015, नवंबर, 2016, मई, 2017 और नवंबर, 2024 को भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता को मार्शलों से जबरन उठाकर विधानसभा से बाहर निकलवा दिया गया था। महाराष्ट्र विधानसभा में 5 जुलाई, 2021 को भाजपा के 12 विधायकों को एक वर्ष के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने सदन में दुर्व्यवहार किया और पीठासीन अधिकारी के लिए अपशब्द कहे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निलंबन केवल चालू सत्र के लिए हो सकता है।
इसी तरह कर्नाटक में 21 मार्च, 2025 को भाजपा के 18 विधायक 6 महीने के लिए निलंबित किए गए। इसके पहले 19 जुलाई, 2023 को भी भाजपा के 10 विधायक सस्पेंड किए गए थे। आरोप था -
"indiscipline and unruly behavior" after papers were thrown toward the Chair during a protest”. उससे ज्यादा "indiscipline and unruly behavior" तो संसद में आज विपक्ष कर रहा है।
मुझे समझ नहीं आता लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति विपक्ष की हुड़दंगबाजी देखकर भी क्यों मूक दर्शक बने हुए हैं? संसद में क्या मार्शल नहीं हैं? निलंबित करना चाहिए या मार्शलों से उन्हें बाहर निकलवा देना चाहिए। लोकसभा और राज्यसभा में पहले भी मार्शल सांसदों को उठा कर सदन से बाहर ले जा चुके हैं।
दोनों सदनों का इस तरह समय बर्बाद करने के लिए फिर स्पीकर और सभापति ही जिम्मेदार माने जाने चाहिए। संसद के बाहर तो भीड़तंत्र चलाया गया और अगर संसद में भी भीड़तंत्र चलेगा तो फिर संसद में तो लोकतंत्र चलेगा ही नहीं।
एक समाचार के अनुसार 16 से 18 अगस्त को संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पास कराया जाएगा। क्या ऐसे हालात में यह संभव हो पाएगा?

No comments:
Post a Comment