2014 में प्रधानमंत्री बनने उपरांत नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया था कि वह राजनीती से अपराध को दूर करने का प्रयास करेंगे और उसकी शुरुआत संसद से ही करनी होगी। लेकिन अब तक इस ओर कोई कदम न उठाए जाने के कारण, भाजपा के ही नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय को इस काम को अंजाम देने के लिए एन एन वोहरा कमिटी की रिपोर्ट को सीढ़ी बनाकर सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। 
एनएन वोहरा (बाएँ), दाऊद इब्राहिम (ऊपर), इकबाल मिर्ची (नीचे)
अपराध और राजनीति की मिलीभगत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद वोहरा कमिटी की रिपोर्ट को लेकर चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म हो गया है। नवंबर 20, 2020 को अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने 1993 की वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर एक्शन के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव एनएन वोहरा की नेतृत्व वाली कमिटी ने आपराधिक नेटवर्कों, सरकारी अधिकारियों और नेताओं के बीच के नेक्सस की जाँच की थी।
उपाध्याय ने ध्यान दिलाया कि इस रिपोर्ट का 100 पन्नों का एक अपूर्ण वर्जन 1995 में संसद में रखा गया था, जिससे उसकी वैधता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ये जानने का अधिकार है कि किन अपराधियों-अधिकारियों-नेताओं के नेक्सस का पता चला था, ताकि पारदर्शिता बनाई रखी जा सके। उन्होंने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रायल कोर्ट्स के गठन का भी आदेश दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निम्नलिखित निवेदन किए:
- वोहरा कमिटी की पूर्ण रिपोर्ट सभी जाँच एजेंसियों के निदेशकों को भेजी जाए।
- एनआईए, सीबीआई, आईबी, ईडी सहित अन्य एजेंसियों को वोहरा कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के लिए कहा जाए, ताकि अपराधी-नेता नेक्सस की पोल खुले।
- लोकपाल को भी इस रिपोर्ट के आधार पर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा जाए।
- इन जाँच एजेंसियों की जाँच की निगरानी के लिए एक न्यायिक कमिटी का गठन किया जाए।
- वोहरा कमिटी की रिपोर्ट में जिन नेताओं और सरकारी अधिकारियों के नाम हैं, उन्हें पद्मश्री सहित मिले अन्य सरकारी अवॉर्ड्स को वापस छीन लिया जाए।
देश जानना चाहता है कि दाऊद के कितने गुर्गे आज भी सांसद, विधायक और मंत्री बने हुए हैं तथा कितने गुर्गों को अब तक पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण मिल चुका है?@HMOIndia @AmitShah @PMOIndia @narendramodi pic.twitter.com/sFUSboScRw
— Ashwini Upadhyay (@AshwiniBJP) November 22, 2020
ऐसे तत्त्वो जो नेहरू खानदान का सत्ता पाने की सीढ़ी है को जनप्रतिनिधियों के रूप में बहुतायात रूप से बना विभिन्न उच्च सम्मानों से सम्मानित किया है।
— बिपिन कुमार सिंह शांडिल्य (@bksingh555) November 22, 2020
देश को कमजोर करने का असली गुनाहगार इटालियन बार बाला एबम उसके बंटी-बबली ही हैं।
ना दलित ना मुसलमान ना संविधान
— मोदीगिरी (@Sanjeev33070558) November 22, 2020
खतरे में है!!
सालों से जनता को बेवकूफ बना रहे थे उनकी *दुकान* खतरे में जरूर है।
!!जय श्रीराम!!
यह बात तो दाउद के पकड़े जानें पर ही मालुम हो सकतीं हैं सो पावर मैं बैठे वो लोग कभी भी नहीं चाहेंगे की दाउद पकड़ा जाय। साथ में पाकिस्तान भी कभी नहीं चाहेंगा की उसे भारत सरकार पकड़ सकें, शायद उसके पकड़े जानें के पहलें वहाँ ही मार दिया जायेगा।
— R R Goswami / Gosai (@rrgosai) November 22, 2020
एक गुर्गे को तो मोदी ने दिया पद्मविभूषण।
— 卐 सिंहनादः 卐 (@kshveditam) November 22, 2020
एक को तो माननीय प्रधानमंत्री जी ने 2017 मे #पद्माविभूषण से सम्मानित किया था
— Amrita Kaushalya (@AmritaKaushaly2) November 22, 2020
Am I right @NCPspeaks @PawarSpeaks ji
— Amrit Lal Chopra (@2000Amrit) November 22, 2020
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