जावेद अख्तर ने रुश्दी पर हमले की बचते-बचाते निंदा की
बॉलीवुड वाले पब्लिसिटी के इतने भूखे होते हैं, इस्लाम के खिलाफ कुछ होते ही ऐसे निकल आते हैं, जैसे गोश्त उछालने पर चील कौआ। लेकिन जब हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध कुछ होता है, बिल में घुस जाते हैं। न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान लेखक सलमान रुश्दी पर चाकुओं से हुए हमले के बाद संगीतकार जावेद अख्तर ने बहुत बचते-बचाते इस हमले की निंदा की है। उन्होंने अपने ट्वीट में न तो उस इस्लामी कट्टरपंथी का नाम लिखा है जिसने भरे मंच पर रुश्दी की गर्दन में चाकू घोंपा और न ही उन धमकियों या फतवों का जिक्र किया है जो रुश्दी के खिलाफ पिछले 30 साल से जारी हो रहे हैं।
जावेद ने बस लिखा, “मैं सलमान रुश्दी पर हुए हमले की निंदा करता हूँ जो कि किसी चरमपंथी द्वारा किया गया। उम्मीद है कि न्यूयॉर्क पुलिस हमलावर के खिलाफ कड़ा एक्शन लेगी।”
2012 में रुश्दी की किताब की निंदा
जावेद का यह रवैया कोई हैरानी वाला नहीं है। साल 2012 में एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान वह सलमान की किताब ‘द सैटैनिक वर्सेज’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लेखक को गलत कह चुके हैं।
Split ‘Hypocrisy’ and you will get “Javed Akhtar”. Hr is also equally responsible for inciting to kill Salman Rushdie. pic.twitter.com/BmfsScy9g0
— Oxomiya Jiyori 🇮🇳 (@SouleFacts) August 13, 2022
Javed Akhtar, Nasiruddin Shah and Hamid Ansari , these all are the chips of the same block.
— JAGDISH TYAGI (@jagdish_tyagi) August 13, 2022
— New India (@new_india_1) August 13, 2022
When #Islam is criticized... It's not Decent .. It's derogatory...it should be condemned.
— Bharat Virupaksha (@mythr89) August 13, 2022
but ..
when MF hussain draws nude pictures of female Hindu Deities .... then ..it is.. ART... Freedom of Expression... My Foot !!!
Shame on you @Javedakhtarjadu !!!
This so-called athiest, is more dangerous. Will he answer why the movie scripts written by him, invariably projected a tilak-dhari Hindu as a don, despite the fact that Mumbai underworld was ruled by Dawood? Rahman chacha is God fearing, while Deen Dayal is always a crook. Why?
— Krishna_t 🇮🇳 (@tejpeer) August 13, 2022
उन्होंने कहा था, “रुश्दी ने जो किया वह अच्छा नहीं है। मैं नास्तिक हूँ लेकिन जीवन में कुछ मर्यादा और बुनियादी शऊर है। वह इस्लाम के बारे में अपमानजनक बात नहीं कह सकते। उन्होंने एक नोवेल लिखी। कल्पना आधारित। उसमें उन्होंने ऐसे ऐतिहासिक लोगों को लिया जिन्हें अरबों लोगों द्वारा सम्मान दिया जाता है। आपने उनके बारे में अपमानजनक बातें कहीं। आखिर इससे आपको क्या मिलेगा? आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। इससे आप उन्हें अधिक मजहबी और कट्टरपंथी बना देंगे।”
For 33 years, Salman Rushdie has embodied freedom and the fight against obscurantism. He has just been the victim of a cowardly attack by the forces of hatred and barbarism. His fight is our fight; it is universal. Now more than ever, we stand by his side.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) August 12, 2022
जावेद ने कहा, “मैं किसी मजहब को नहीं मानता है फिर भी मुझे लगता है कि वो किताब बेहद अपमानजनक है। आप ऐसा नहीं कर सकते हैं।” ‘राइट टू ऑफेंड’ की बात आने पर वह बोले, “क्या मैं अपने पड़ोसियों के बारे में कुछ भी कह सकता हूँ? क्या मैं कह सकता हूँ वो दलाल है, उसका घर वेश्यालय?”
इस्लाम के खिलाफ बोलने वालों पर गुस्सा जाहिर करने के बाद अपनी सेकुलर व नास्तिक छवि को बनाए रखने के लिए अख्तर ने ये भी कहा था कि उन्हें उनके मजहब की आलोचना से दिक्कत नहीं है, लेकिन वो विद्वत्तापूर्ण किया जाना चाहिए।
सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद जावेद अख्तर के आए अब के ट्वीट और उनकी पुरानी बयानबाजी जोड़कर देखें तो पता चलता है कि कैसे खुद को नास्तिक और वामपंथी कहने वाले लोग ऐसी घटनाओं के समय आरोपित का नाम छिपाने में आगे रहते हैं और सिर्फ मगरमच्छ के आँसू बहाकर ऐसा दिखाते हैं कि उन्हें हमले का दुख है। जबकि, हकीकत ये होती है कि वो उन घटनाओं को रोकने का कोई प्रयास नहीं करते, बल्कि उसे और बढ़ावा देते हैं।


No comments:
Post a Comment