मुद्गल पुराण में विघ्नहर्ता गणेशजी के 32 मंगलकारी रूप बताए गए हैं। मैसूर का नंजनगुड शिव मंदिर एकमात्र ऐसा स्थान है जहां श्री गणेश के सभी 32 रूप स्थापित हैं।गणपति का हर रूप किसी ना किसी गुण का प्रतिनिधित्व करता है व भक्तों को प्रेरित करता है।
1. श्री बाल गणपति - उर्वरता का प्रतीक
2. तरुण गणपति -संघर्ष की प्रेरणा
3. भक्त गणपति - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतिनिधित्व
4. वीर गणपति- पूरी क्षमता से लड़ना
5. शक्ति गणपति- अभय मुद्रा
6. द्विज गणपति- वेदों से शिक्षा के प्रतीक़
7. सिद्धि गणपति-बुद्धि और सफलता के प्रतीक
8. उच्छिष्ट गणपति- ऐश्वर्य और मोक्ष में संतुलन के प्रतीक
9. विघ्न गणपति-बाधा हरण करने वाले
10. क्षिप्र गणपति- कामना पूर्ति के प्रतीक
11. हेरंब गणपति-डर पर विजय पाने के प्रेरक
12. लक्ष्मी गणपति-सफलता
13. महा गणपति- रक्षक
14. विजय गणपति-सफलता
15. नृत्य गणपति-ललित कलाओं में सफलता
16. ऊर्ध्व गणपति- आगे बढ़ने के प्रेरक
17. एकाक्षर गणपति-शुभारंभ के प्रतीक
18. वर गणपति-विजय के प्रतीक
19. त्रयक्षर गणपति-आध्यात्मिक ज्ञान
20. क्षिप्रप्रसाद गणपति-शाँति व समृद्धि
21. हरिद्र गणपति-इच्छा पूरक
22. एकदंत गणपति-बाधा हरण
23. सृष्टि गणपति-धर्म संस्थापक
24. उद्दंड गणपति-न्याय की स्थापना
25. ऋणमोचन गणपति-ऋण मुक्ति
26. ढुण्ढि गणपति-आध्यात्म
27. द्विमुख गणपति-सभी दिशाओं में देखने वाले
28. त्रिमुख गणपति-कर्म प्रेरक
29. सिंह गणपति-शक्ति
30. योग गणपति-यौगिक मुद्रा
31. दुर्गा गणपति-विजय
32. संकष्टहरण गणपति-संकट दूर करने वाले
जय श्री गणेश

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