ऐसे 150 वकीलों की हरकत पर उनके लाइसेंस रद्द होने चाहिये, केजरीवाल के लिए ऐसे जजों पर आरोप लगाने वालों के पीछे कौन सी ताकत है? जांच “न्याय बिंदु” की हो

सुभाष चन्द्र

Rouse Avenue कोर्ट की स्पेशल जज “न्याय बिंदु” के केजरीवाल को दिए गए जमानत आदेशों पर रोक लगाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुधीर कुमार जैन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट और निचली अदालतों के 150 वकीलों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर “स्यापा” करने की कोशिश की है और जस्टिस सुधीर जैन पर उंगली उठाई है। 

मुझे याद है 12 जनवरी, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर निशाना साधते हुए  पूरे सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाए थे जिसका हल कुछ नहीं निकला क्योंकि वह विपक्ष और कुछ निहित स्वार्थी तत्वों का एक प्रायोजित कार्यक्रम था

अब केजरीवाल का जेल में बैठे हुए प्रायोजित कार्यक्रम सामने आया है जिसमें 150 वकील केजरीवाल की जमानत पर “रोक लगने” पर रुदाली कर रहे हैं ये लोग आरोप लगा रहे हैं कि “हाई कोर्ट के न्यायाधीश वकीलों की दलील अपने Orders में नहीं लिख रहे हैं और यह अदालत के इतिहास में पहली बार हो रहा है यह भी कहा कि ‘unprecedented practices’ चल रही हैं अदालतों में” इतना ही नहीं जजों पर दबाव बनाने के लिए यहां तक कहा कि जस्टिस सुधीर जैन ED के वकील अनुराग जैन के सगे भाई हैं उन 4 जजों ने भी सुप्रीम कोर्ट में जो चल रहा था उसे “Unprecedented” कहा था

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यदि ये लोग क्या चाहते हैं कि सुधीर जैन काम करना ही बंद कर दें क्योंकि वो अनुराग जैन के भाई हैं, अगर ऐसा है तो इससे बड़ी तानाशाही क्या हो सकती है और यही चाहता है केजरीवाल कोई बड़ी बात नहीं 150 वकीलों के पत्र की पीछे मास्टरमाइंड अभिषेक मनु सिंघवी ही हो 

“मीठा मीठा गप्प और कड़वा कड़वा थू”, यह नजरिया है ऐसे वकीलों का, यानी “न्याय बिंदु” ने केजरीवाल को गलत जमानत दे दी, वह ठीक था लेकिन सुधीर जैन ने रोक दी तो आसमान सिर पर उठा लेंगे ये केजरीवाल के 150 चाटुकार बात करते हैं वकीलों की दलीलें आदेशों में न लिखने की लेकिन “न्याय बिंदु” ने तो बिना कागज पढ़े और बिना ED को मौका दिए ही जमानत दे दी। किस दबाव में "न्याय बिंदु" ने ED द्वारा कोर्ट में दर्ज documents को नहीं पढ़ा? यह किसी भी जज/न्यायाधीश की भयंकर गलती है, जो न्याय प्रक्रिया में सबसे बड़ा अपवाद है, जिसके लिए उसे जवाबदेही होना चाहिए। यह भयंकर भूल नज़रअंदाज़ नहीं की जानी चाहिए।  

अब मेरे विचार से 2 जांच होनी चाहिए - एक तो स्पेशल जज “न्याय बिंदु” के बारे में कि उसने केजरीवाल को जो जमानत दी उसका राज क्या था और क्या कुछ सौदेबाजी हुई थी और दूसरी जांच होनी चाहिए इन 150 वकीलों की लॉ डिग्री की ऐसी जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज दीपक गुप्ता की Committee कर रही है

ये 150 वकील CJI से क्या चाहते हैं जब सुप्रीम कोर्ट में बहुत कुछ वह होता है जो आरोप ये वकील लगा रहे हैं याद कीजिए जस्टिस RF Nariman सुप्रीम कोर्ट में जज थे और उनके पिता फाली नरीमन भी सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते थे उनके आपस के संबंधों का वे क्या लाभ उठाते होंगे ये तो वो ही जाने

CJI इस बात पर क्या विचार करेंगे कि जज वकीलों की दलील अपने Orders में नहीं लिख रहे लेकिन ये काम तो सुप्रीम कोर्ट के जज भी करते हैं सुनवाई के दौरान अशोभनीय और गैर जरूरी भाषा बोलते हैं लेकिन कभी orders में उनका जिक्र नहीं होता जस्टिस पारडीवाला और जस्टिस सूर्यकांत ने तो सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की सबसे भयंकर “Hate Speech” दी थी नूपुर शर्मा के लिए लेकिन एक शब्द भी order में नहीं लिखा CJI खुद माहिर है मर्जी के अनुसार अपना रुख बदलने के लिए, जैसे कहीं कहते हैं कोई सूचना Sealed Cover में नहीं दी जाएगी  जबकि अनेक मामलों में खुद ही Sealed Cover में सरकार से जानकारी मांगते हैं बस सरकार की ऐसी तैसी होनी चाहिए

अगर 150 वकीलों की बात पर संज्ञान लेते हैं चंद्रचूड़ तो उन 600 वकीलों के पत्र का क्या हुआ जिसमें उन्होंने अदालतों पर दबाव डालने की कोशिश की बात कही थी?

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