अपना भाग्य लोग स्वयं लिख लेते हैं; कांग्रेस और कुछ अन्य दलों को देख कर यह सत्य प्रतीत होता है

सुभाष चन्द्र

आज कांग्रेस की दुर्दशा ऐसी हो गई है कि देश में केवल 3 राज्यों में (कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना) सिमट कर रह गई है और अन्य राज्यों में एक क्षेत्रीय दल बन कर रह गई है लेकिन कभी आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत नहीं समझी कि ऐसा उसके साथ क्यों हुआ जो 1984 के बाद कभी लोकसभा में बहुमत नहीं मिला और 2014 में 44 सीट पर आ गई जबकि 1984 में उसकी 404 सीट थी। 

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आज अमेरिका की फंडिंग की खबर से मुंह काला होने के बाद भी अक्ल नहीं आ रही, अलबत्ता बगावत से सुर सुनाई देने लगे हैं। शशि थरूर राहुल गांधी से पूछ रहा है कि उसकी पार्टी में क्या हैसियत है और राशिद अल्वी कह रहा है कि जमीन से जुड़े लोगों की अनदेखी की वजह से पार्टी विफल हो रही है। अरे जमीन से जुड़े नहीं हैं वो, जमीन में घुस गए हैं

कांग्रेस के कुछ लोगों की बात करते हैं जो सही समय पर निर्णय करके भाजपा में आ गए और आज सम्मानित स्थिति में हैं वरना कांग्रेस में तो लुटे पिटे रहते

-हेमंत बिस्वा शर्मा 2015 में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए और आज असम के 10 साल से दबंग मुख्यमंत्री हैं;

-ज्योतिरादित्य सिंधिया मार्च 2020 में आए और आज मोदी सरकार में मंत्री हैं। ना आते तो राहुल गांधी के साथ लोकसभा में गप्पे ही मारते दिखाई देते अगर जीत जाते;

-हाल ही में हरियाणा की माँ-बेटी किरण चौधरी और श्रुति चौधरी चुनाव से पहले भाजपा में आई और आज माँ राज्यसभा में है और बेटी हरियाणा की मंत्री है;

-जगदंबिका पाल 2014 में आए, तब से लोकसभा में हैं और वक़्फ़ बोर्ड के लिए बनी JPC के अध्यक्ष बने; कांग्रेस में रह कर लोकसभा कभी नहीं पहुंचते;

-पेमा खांडू मई, 2019 में आए; तब से अरुणाचल के मुख्यमंत्री हैं;

-अरविंदर लवली भाजपा में आकर दिल्ली में विधायक बन गए, कांग्रेस में जीरो की लिस्ट में होते;

-जितिन प्रसाद 2019 में आकर तब से यूपी में मंत्री हैं;

-नारायण राणे शिवसेना से आए और केंद्र में मंत्री हैं;

-बिरेंद्र विक्रम सिंह 2017 में आए और अभी तक त्यागपत्र देने से पहले मणिपुर के CM थे;

-माणिक साहा 2016 में आए, आज त्रिपुरा के CM हैं;

-सुनील जाखड़ 2022 में आए, आज पंजाब भाजपा के अध्यक्ष हैं

इसके अलावा जो कांग्रेस से भाजपा में आए वो हैं-

-RPN Singh, 2022 (अब राज्यसभा में हैं);

-अमरिंदर सिंह पूर्व मुख्यमंत्री पंजाब;

-बाबूलाल मरांडी, झारखंड;

-गौरव वल्लभ (भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता);

-जयवीर शेरगिल (भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता);

-सुरेश पचौरी (मार्च, 2024);

-हार्दिक पटेल (अब गुजरात विधायक);

-अनिल अंटोनी (नागालैंड प्रभारी);

-सीआर केसावन (राष्ट्रीय प्रवक्ता);

-रीता बहुगुणा जोशी, लोकसभा / यूपी विधानसभा में रही और मंत्री भी थी);

-विजय बहुगुणा;

-मृत्यु से पहले SM Krishna और ND Tiwari भी भाजपा में थे;

-राधिका खेड़ा (आज टीवी चैनल्स पर कांग्रेस की बखिया उधेड़ती हैं)

उधर कोरोना काल में मृतकों का अंतिम संस्कार करने वाले जिसे मोदी ने पद्मश्री दिया, जितेंद्र सिंह शंटी केजरीवाल के पास चले गए और चुनाव हार गए;

उद्धव ठाकरे और मराठा “चाणक्य” शरद पवार अपनी पार्टी भी नहीं बचा सके और चुनाव में कांग्रेस के साथ रसातल में चले गए। उद्धव को भाजपा से धोखेबाजी और पालघर के साधुओं का श्राप खा गया परंतु उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। और न केजरीवाल को समझ आ रहा कि आज उसकी ऐसी दुर्दशा क्यों हुई? 

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