मदरसे की तालीम : हरदोई में ट्रेन पलटाने की साजिश, अब होली का त्योहार बर्बाद करने की कोशिश; उपद्रवियों को ब्लैकलिस्ट कर तुरंत हर सरकारी सुविधा ख़त्म होनी चाहिए

सुभाष चन्द्र 

मार्च 2 से रमजान का महीना शुरू हो गया और इस महीने में काफिरों के लिए इस्लाम में विशेष हिदायत होती है। कल ही हरदोई में दून एक्सप्रेस ट्रेन को पलटाने के लिए 2 मुस्लिम नाबालिग लड़कों इबादुल्लाह और मोहम्मद अनवारुल ने रेलवे ट्रैक पर लोहे के बोल्ट और भारी पत्थर रख दिए इन दोनों “शरीफजादों” की उम्र 15-16 साल है

सरकार जब तक उपद्रवियों को ब्लैकलिस्ट कर उन्हें और उनके परिवार को मिलने वाली किसी भी तरह की मिलने वाली सरकारी सुविधा को ख़त्म नहीं की जाएगी ये लोग अपने आकाओं के इशारे पर देश का माहौल ख़राब करते रहेंगे। अगर कोई कोर्ट या मानवाधिकार वाले इनके पक्ष में खड़े होते हैं उन पर सख्ती से पेश आना होगा।  

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ट्रेन का इंजन उनसे टकराया, लेकिन लोको पायलट ने फौरन ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी इसके बाद ट्रेन मैनेजर ने तुरंत हरकत में आते हुए दोनों को पकड़ लिया और ट्रेन में बैठाया फिर हरदोई स्टेशन पहुँचकर उन्हें आरपीएफ को सौंप दिया। इस टक्कर से इंजन और ट्रैक को नुकसान हुआ और चार जगह ट्रैक खराब मिला

यह मदरसा तालीम है जिसमें उन्हें ऐसे काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है ये मूर्ख यह नहीं सोचे कि अगर ट्रेन पलट जाती तो उसमें मरने वालों में उनका अपना भी कोई हो सकता था क्योंकि ये नाबालिग है, उन्हें अगर सजा भी मिली तो Juvenile Justice Act में केवल 3 साल के लिए बाल सुधार गृह में भेज दिया जाएगा, वह भी तब, जब उनके खिलाफ आरोप सही मानेगा कोर्ट

इन दोनों को रेलवे ट्रैक पर बांध कर खड़ा कर देना चाहिए और दूर से आती ट्रेन को ठीक इनके सामने लाकर खड़ी कर देनी चाहिए जिससे एक बार इन्हें मौत सामने खड़ी दिखाई दे

इतने बड़े अपराध के लिए केवल यह दंड कितना उचित है? आजकल नाबालिगों के रेप और हत्या समेत बड़े बड़े अपराधों में शामिल होने के बहुत मामले सामने आ रहे हैं और इसलिए अब नाबालिगों की उम्र अपराध के लिए घटा कर 10 वर्ष करने की जरूरत है

कुछ दिन पहले आपने सुना होगा Bollywood की फराह खान ने होली को “छपरियों” द्वारा खेला जाने वाला त्योहार बताया था यानी Bollywood में बैठ कर मदरसा छाप मुस्लिम सोच फराह खान पर हावी है और हिंदुओं के विरोध में बोलने और हिंदू त्योहारों का मजाक उड़ाने का Bollywood वालों को लाइसेंस मिला हुआ है इसलिए आवश्यकता है ऐसे लोगों के टीवी कार्यक्रमों और फिल्मों का सम्पूर्ण बहिष्कार किया जाए

आज बरेली की भी खबर है कि वहां के उलेमाओं और कट्टरपंथी मुस्लिमों ने धमकी दी है कि यदि होली खेली गई तो वह “खून की होली” होगी कदाचित इसलिए ही मथुरा में संतों ने मांग की है कि होली में मुस्लिमों का प्रवेश निषेध किया जाए मौलाना साजिद रशीदी कह रहे हैं कि मुस्लिमों को तो वैसे भी हिंदुओं के त्योहारों में नहीं जाना चाहिए क्योंकि वह हमारे मज़हब के कायदों के खिलाफ है लेकिन फिर भी घुसना हर त्यौहार में चाहते हैं 

कुछ मौलाना टीवी पर भाईचारे की बात करते रहते हैं। कैसा भाईचारा चाहते हैं ये लोग? आपका रमजान शुरू हुआ है परंतु हिंदुओं की तरफ से इसमें कोई दखल सुनने को नहीं मिलेगा लेकिन मुस्लिम कोई भी हिंदू त्योहार हो, उसमें विघ्न डालने का काम करते हैं गरबा में घुसते हैं, कुंभ में घुसने की कोशिश की और कांवड़ों पर पत्थरबाजी करते हैं रामनवमी, हनुमान जयंती, गणेश चतुर्थी समेत हर त्योहार की शोभा यात्राओं में पत्थर बाजी होती है 

सत्य तो यह है कि अब ऐसा लगता है फिर से 1947 का माहौल बनाने की तैयारी चल रही है और विपक्ष उसे हवा दे रहा है हिंदुओं का विरोध करने में विपक्ष एक पल भी व्यर्थ नहीं करता लेकिन ट्रेन पलटाने की काम पर खामोश रहता है

अजमेर में हाल ही में हिंदू नाबालिग लड़कियों के साथ दुर्व्यहार की घटना सामने आई है जिसके लिए कई मुस्लिम लड़के गिरफ्तार हुए हैं अब फिर समय आ गया है कि अजमेर की चिस्ती की दरगाह का हिंदू बहिष्कार करें

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