मंदिर में प्रवेश करने वाला प्रत्येक भक्त पहले घंटानाद करता है और मंदिर में प्रवेश करता है। क्या कारण है इसके पीछे? इतना ही घरों में होने वाली पूजा में बजाई जाने वाली घंटी, शंख और ताली से निकलने वाली ध्वनि का मानव के जीवन में बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। एक बात मन्दिर जाने वाले हर भक्त को ध्यान रखनी चाहिए कि मन्दिर में प्रभु को स्मरण करते समय कभी आंखे बन्द नहीं करनी चाहिए, क्योकि मन्दिरों में मूर्तियां मंत्रोउच्चारणों से प्राण प्रतिष्ठित की जाती है। जबकि घरों में मूर्तियां/चित्र की मन्त्रोंउच्चारणों से प्राण प्रतिष्ठा नहीं होने के कारण पूजा करते समय आंखे बंद रखी जाती हैं।
पूजा करते घंटा, घंटी, ढोल, मंजीरे, हारमोनियम, डमरू और शंख आदि बजाने कोई दिखावा नहीं बल्कि ज्ञात हो कि हमारे समस्त देवी-देवता संगीत प्रेमी थे। संगीत से निकलती ध्वनि समस्त भूमण्डल को प्रफुल्लित रखने के कारण देवी-देवताओं के वास स्थल को स्वर्ग कहते हैं। दूसरे, हवन का भी अपना प्रभुत्व कारण है। जब हवन होता है तो मन्त्र उच्चारण होते जब अग्नि में घी और सामग्री अर्पण करने से जो धुआं निकलता है, वह धुआं जहां-जहां जाता है वहां से नकारात्मक हवाएं दूर होकर समस्त वातावरण को सकारात्मक बनाता है। क्योकि अग्नि में अर्पित की जाने वाली हर वस्तु अग्नि के माध्यम से सीधे हमारे देवी-देवतों तक पहुँचती है। इसीलिए परिवार में बनने वाले हर व्यंजन को पहले अग्नि और लड्डू गोपाल जी को अर्पण करने का प्रावधान है। इस विधि का परिवार ही नहीं हलवाई भी अनुसरण करते हैं। इसीलिए कहते हैं तेरा तुझ को अर्पण क्या लागे मेरा। आज कल जब घरों में हवन होता है तो धुंए से बचने के लिए एक्सहॉस्ट खोल आनन्दित होते है जो पूर्णरूप से गलत है। जब धुआं घर के कोने-कोने में समाता है घर में दुष्ट हवाओं का नाश करता है।
एक वैज्ञानिक कारण
जब हम बृहद घंटे के नीचे खड़े होकर सर ऊँचा करके हाथ उठाकर घंटा बजाते हैं, तब प्रचंड घंटानाद होता है।
यह ध्वनि 330 मीटर प्रति सेकंड के वेग से अपने उद्गम स्थान से दूर जाती है, ध्वनि की यही शक्ति कंपन के माध्यम से प्रवास करती है।
आप उस वक्त घंटे के नीचे खडे होते हैं। अतः ध्वनि का नाद आपके सहस्रारचक्र (सिर के ठीक ऊपर) में प्रवेश कर शरीर मार्ग से भूमि में प्रवेश करता है। यह ध्वनि प्रवास करते समय आपके मन में (मस्तिष्क में) चलने वाले असंख्य विचार, चिंता, तनाव, उदासी, मनोविकार आदि इन समस्त नकारात्मक विचारों को अपने साथ ले जाती हैं, और आप निर्विकार अवस्था में परमेश्वर के सामने जाते हैं। तब आपके भाव शुद्धतापूर्वक परमेश्वर को समर्पित होते हैं।
घंटे के नाद की तरंगों के अत्यंत तीव्र के आघात से आस-पास के वातावरण के व हमारे शरीर के सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश होता है, जिससे वातावरण मे शुद्धता रहती है, हमें स्वास्थ्य लाभ होता है। इसीलिए मंदिर मे प्रवेश करते समय घंटानाद अवश्य करें, और थोड़ा समय घंटे के नीचे खडे़ रह कर घंटानाद का आनंद अवश्य लें। आप चिंतामुक्त व शुचिर्भूत बनेगें।
आप का मस्तिष्क ईश्वर की दिव्य ऊर्जा ग्रहण करने हेतु तैयार होगा। ईश्वर की दिव्य ऊर्जा व मंदिर गर्भ की दिव्य ऊर्जाशक्ति आपका मस्तिष्क ग्रहण करेगा। आप प्रसन्न होंगे और शांति मिलेगी। जब आप प्रसन्न रहेंगे परिवार भी मंगलमय होगा।
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