जनता को किस तरह महामूर्ख और पगला बनाया जाता है इस काम में हमारे नेता महारथ किये हुए हैं। कहते हैं कि कौआ कान ले गया पगली जनता अपना कान देखने की बजाए आसमान की तरफ कौए को देखने लग जाते हैं। राजनीति में आते हैं जनसेवक बन लेकिन सफेदपोश लुटेरा बन सियासत करते हर सरकारी सुविधा पर अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ कुछ नहीं होते हुए भी उन सरकारी सुविधाओं को छोड़ने में ऐसी तड़पन होती है जैसे कि प्राण निकल रहे हो। चीखते-चिल्लाते है कि हमारे साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और महामूर्ख पगली जनता भी झूठ और पाखंड को सच मान सत्ता पक्ष को कोसने लगती है।
विपक्ष के नेता हाथ में संविधान की लाल किताब लहराते फिरते हैं और खुद कानून को ताक पर रखते है।
मई, 2018 में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने NGO लोक प्रहरी की PIL स्वीकार करते हुए फैसला दिया कि उत्तर प्रदेश का कानून भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले देने के लिए असंवैधानिक है। यह कानून अखिलेश यादव की सरकार ने 2016 में बनाया था और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने बंगले खाली करने पड़े थे।
अदालत ने कहा है--पद त्याग करने के बाद मुख्यमंत्री या किसी भी व्यक्ति को किसी विशेष सुविधा का अधिकार नहीं रहता क्योंकि वो एक साधारण व्यक्ति हो जाता है। AGS अमन लेखी ने हालांकि कोर्ट को ध्यान दिलाया था कि शिवसागर बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ऐसे बंगलों की व्यवस्था को उचित ठहराया था जबकि वो भी तो पद त्याग के बाद साधारण नागरिक हो जाते हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
अब राबड़ी देवी को नीतीश कुमार की नई सरकार ने 10, Circular Road बंगला खाली कर 39, Hardinge Road में शिफ्ट होने को कहा है, जो उन्हें विधान परिषद् में विपक्ष की नेता के तौर पर अलॉट किया गया है। राजद ने कहा है कि कुछ भी हो जाए राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करेंगी। इस बंगले में राबड़ी देवी 20 वर्ष से रह रही है जब वे मुख्यमंत्री बनी थी। ये तो बड़ी बात है कि लालू यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते अलग से बंगला नहीं है वरना वह भी कोर्ट में लड़ रहा होता।
जब सुप्रीम कोर्ट 7 साल पहले निर्णय दे चुका है कि पूर्व मुख्यमंत्री को पद त्याग के बाद बंगले का अधिकार नहीं रह जाता, फिर किसी कानून में बंगला खाली न करने के लिए जिद पाले बैठी है राबड़ी देवी। प्रश्न यह भी उठता है कि नीतीश सरकार ने अभी तक बांग्ला खाली करने के लिए क्यों नहीं कहा, शायद इसलिए कि महिला होने के नाते सड़कों पर victim card खेलती न फिरे।
इस संदर्भ में यह प्रश्न भी उठता है कि सोनिया गांधी को 10 जनपथ बंगला राजीव गांधी की मौत के बाद 1991 में किस हैसियत से अलॉट किया गया था जबकि उस वक्त वह राजनीति में भी नहीं थी और आज भी उस बंगले में किस हैसियत से रह रही है? लोग कहेंगे कि मोदी सरकार बंगला तक खाली नहीं करा सकती लेकिन यदि मोदी सरकार यह कदम उठाती है तो यह जनता ही सोनिया के लिए आंसू बहाती फिरेगी कि एक विधवा को प्रताड़ित किया जा रहा है। उसे वैसे ही सर पर बिठा लेगी जैसे इंदिरा गांधी को बिठाया था 1980 चुनाव में और मोदी के सभी किये गए कामों को भूल जाएगी और देश फिर लुटेरों के हाथ में चला जायेगा।
जिस संस्था(NGO) लोक प्रहरी ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ PIL लगाई थी, उसने भी हिम्मत नहीं की सोनिया गांधी के10 जनपथ पर अधिकार को लेकर।

No comments:
Post a Comment