ओडिशा पुलिस ने शनिवार (22 नवंबर 2025) को एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को शरण देता था और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल करता था। पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपित सिकंदर आलम उर्फ सिको को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह 16 नवंबर 2025 को जगतसिंहपुर जिले के बहरामपुर झुग्गी बस्ती में हुई छापेमारी के बाद से फरार था। पुलिस ने बताया कि टीम ने लगातार कई स्थानों पर छापेमारी की और अंत में बार-बार ठिकाना बदल रहे सिको को जाजपुर से पकड़ा।
#ବାଂଲାଦେଶୀ_ଲିଙ୍କ୍; #ସିକନ୍ଦର_ଆଲାମ_ଗିରଫ
— ଓଟିଭି (@otvkhabar) November 22, 2025
-ଜଗତସିଂହପୁର: ବାଂଲାଦେଶୀ ଲିଙ୍କ୍; ସିକନ୍ଦର ଆଲାମ ଗିରଫ
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-ସଦର ଥାନା ବେହେରାମପୁର… pic.twitter.com/2a3P0zgRfe
पुलिस ने उसके पास से पासपोर्ट और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। सिको के छोटे भाई अब्दुल मोतालिफ खान उर्फ टिकी को भी खोरधा से गिरफ्तार किया गया है।
जाँच में हुआ महिलाओं की तस्करी का खुलासा
जाँच में सामने आया है कि सिको और उसके साथी बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में लाने, उन्हें रहने की जगह देने और गलत कामों में लगाने की साजिश का हिस्सा थे। पुलिस ने यह भी बताया कि बाहर से तस्करी कर लाई गई कुछ महिलाओं का लंबे समय से शोषण किया जा रहा था।
पुलिस ने बताया कि सिकंदर ने घुसपैठियों को पनाह देने के लिए सरकारी जमीन पर झोपड़ियाँ बनवाई थी। छापेमारी के समय घर में लगभग 30 बांग्लादेशी रह रहे थे और वे सभी भागने में सफल रहे। पुलिस उन सब की भी तलाश कर रही है।
पुलिस को सिकंदर के घर से क्या मिला?
इससे पहले पुलिस ने 16 नवंबर 2025 की छापेमारी के दौरान सिको के घर से पाँच तलवारें, एक देशी तमंचा और सात धारदार हथियार भी बरामद किए थे। इसके बाद 17 नवंबर 2025 को जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए कई मकानों को ध्वस्त कर दिया। इनमें सिको का 10 कमरों वाला पक्का मकान और सात अन्य झोपड़ियाँ शामिल हैं।
ऐसे में ज्वलंत प्रश्न है कि किसी भी अपराधी के पकडे पर ही क्यों अवैध निर्माण का पटाक्षेप होता है? इससे पहले प्रशासन कहां कुंभकरण की नींद में सो रहा होता है? जबकि आप वैध निर्माण करो या अवैध पुलिस सबसे पहले आती है, रिश्वत जरूर चाहिए, क्यों नहीं पुलिस को भी कटघरे में खड़ा किया जाता?
इससे पहले इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि वे यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या सिको को इस अवैध नेटवर्क को चलाने के लिए विदेश से फंडिंग मिलने के अलावा किन-किन नेताओं और पार्टियों का संरक्षण मिलता था।
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