माओवादी नक्सली खत्म होने की कगार पर हैं लेकिन अर्बन नक्सल प्रजाति बाहर निकल रही है जिसका नेतृत्व पीछे से राहुल गांधी के हाथ में है; हिड़मा के लिए नारे लगाने वाली चुड़ैलों को “हिडिंबा” कहना उचित नहीं है

सुभाष चन्द्र 

मोदी-योगी-बीजेपी विरोध में कुछ बिकाऊ मीडिया को भारत विरोधियों की हिमायत करते जरा-सी भी शर्म नहीं आती। लगता है उनके आत्मसम्मान की राम नाम सत्य हो चुकी है। ये जाहिल मीडिया बताए अगर प्रदर्शन प्रदुषण के नाम था फिर मिर्च स्प्रे क्यों किया? प्रदर्शन को समर्थन देने वाला बिकाऊ जन विरोधी मीडिया  को मालूम होना चाहिए कि मिर्च स्प्रे प्रदुषण से कहीं ज्यादा खतरनाक है? चाहिए ये था कि बिकाऊ मीडिया और इसके समर्थक इतनी गिरी हुई हरकत को करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की मांग करते। क्या इस प्रदर्शन का समर्थन करने वालों की इंसानियत ख़त्म हो गयी है?      

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प्रदूषण के नाम पर दिल्ली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाला अर्बन नक्सलियों का गिरोह दरअसल हिड़मा की मौत का मातम मनाने सड़कों पर आया और पुलिस पर मिर्च पाउडर से हमला कर हिंसक हो गया एक अख़बार “The Telegraph” ने खबर का शीर्षक दिया कि भाजपा ने प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन को “Urban Naxal Tag” चिपका दिया - ऐसे भ्रामक शीर्षक देते हैं अख़बार जो खुद नक्सलियों के चाटुकार हैं।  

दिल्ली में अर्बन नक्सलियों ने माडवी हिड़मा को आदिवासी समुदाय के भगवान बिरसा मुंडा के बराबर रखते हुए नारे लगाए कि बिरसा मुंडा की तरह हिड़मा भी "protector of water, forests, and land" था जबकि बिरसा मुंडा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे उनसे किसी हिड़मा पिडमा जैसे हिंसक आतंकी से मुकाबला नहीं किया जा सकता क्योंकि बिरसा मुंडा ने कभी निर्दोषों की हत्या नहीं की

ये मांडवी हिड़मा 26 सशत्र हमलों के लिए जिम्मेदार था जिसमे दंतेवाड़ा का 2010 का हमला शामिल था जिसमें उसने 76 CRPF जवानों की नृशंस हत्या की गई थी और JNU के दरिंदों ने उसका जश्न मनाया था; 2013 में घात लगा कर 27 लोगों को मारा था जिसमें कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ल का भी बलिदान हुआ था और 2021 में सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में 22 सुरक्षा कर्मियों की हत्या की थी अंततः उस पर एक करोड़ का इनाम रखा गया था और आज ये अर्बन नक्सल उसके अमर रहने की कामना करते हुए नारे लगा रहे हैं

नक्सलबाड़ी कोलकत्ता से 1967 में शुरू हुआ हिंसक नक्सल आंदोलन कांग्रेस राज में 2010 तक 235 जिलों में फ़ैल चुका था जो अब केवल 3 जिलों तक सीमित रह गया और अंतिम सांसे गिन रहा है जिसे ख़त्म करने के लिए मोदी सरकार ने मार्च, 2026 तय की है हर राज्य में धड़ाधड़ माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं लेकिन उन्हें बचाने ही नहीं उनसे भी भयंकर विद्रोह खड़ा करने “अर्बन नक्सल” प्रजाति सामने आ रही है जिसका नेतृत्व परोक्ष रूप से राहुल गांधी के हाथ में है जो देश में Gen Z भड़का कर हिंसा के जरिए सरकार का तख्तापलट करना चाहता है

इसलिए जो हश्र माओवादी नक्सलियों का किया है सरकार ने, वह अर्बन नक्सलियों का भी करना चाहिए और इसमें देर नहीं करनी चाहिए इस मक्कार गिरोह को सख्ती से कुचल देना चाहिए समस्या यह भी है कि यह अर्बन नक्स्लवाद न्यायपालिका में भी जड़ें बना चुका है

अवलोकन करें:-

हाथ में हिडमा के पोस्टर, जेब में चिली स्प्रे: दिल्ली में पर्यावरण के रखवाले नहीं, ‘अर्बन नक्सल’
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कुछ लोग हिड़मा के लिए नारे लगाती हुई बदसूरत चुड़ैलों को “हिडिंबा” कह रहे हैं, वह उचित नहीं है क्योंकि हिडिंबा महाबली भीम की पत्नी थी, वीर घटोत्कच की माँ थी और घटोत्कच बर्बरीक के पिता थे और माँ भवानी की भक्त थी जिन्होंने स्वयं अपने तप से माँ दुर्गा की शक्तियां अर्जित की थी  

माओवादी नक्सलियों से भी बड़ी चुनौती “अर्बन नक्सल” हैं जिनके उपचार के लिए “अज्ञात” भी ढूढ़ने होंगे। इनके हिंसाल नेताओं के भेजे में पीतल भरना जरूरी है

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