नुपूर शर्मा के समय के लाडले, रोहिंग्या घुसपैठियों की बात आई तो हो गए विलेन: CJI सूर्यकांत के खिलाफ वामपंथियों का ओपन लेटर दोगलई का अप्रतिम नमूना

                     रोहिंग्या मुस्लिम और CJI सूर्यकांत (फाइल फोटो, साभार- UNCHR/Bar&bench)
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने 2 दिसंबर 2025 को रोहिंग्या शरणार्थियों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने रोहिंग्याओं को ‘अवैध घुसपैठिए’ करार देते हुए कहा कि क्या देश में सीमा तोड़कर घुसने वालों को ‘रेड कार्पेट वेलकम’ देना चाहिए?

यह टिप्पणी रोहिंग्या हेबियस कॉर्पस याचिका पर आई, जिसमें 5 रोहिंग्या हिरासत में लापता होने का मामला उठाया गया था और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने उन्हें शरणार्थी घोषित नहीं किया है, तो उन्हें रखने का कोई दायित्व नहीं है और अवैध प्रवेश करने वालों को भोजन, आश्रय या शिक्षा का अधिकार नहीं मिल सकता।​

पूर्व जजों और वकीलों की आपत्ति

पूर्व जजों, वकीलों और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) ने 4-5 दिसंबर 2025 को सीजेआई सूर्यकांत को खुला पत्र लिखा, जिसमें टिप्पणियों को ‘अनकॉन्शिएनेबल’ और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।

पत्र में कहा गया कि रोहिंग्याओं को ‘टनल खोदकर घुसने वाले घुसपैठिए बताना उनके मानवीय अधिकारों का अपमान है। उन्होंने अनुच्छेद 21 का हवाला दिया जिसके तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को सभी को प्रदान करता है, भले ही वे विदेशी हों।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने ये भी कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ न्यायिक पूर्वाग्रह पैदा करती हैं और गरीबी का हवाला देकर शरणार्थियों के अधिकारों को नकारना खतरनाक मिसाल है।​

रोहिंग्याओं के समर्थक

भारत में रोहिंग्याओं के लिए वामपंथी प्रोपेगेंडा फैलाने वालों के साथ कुछ एनजीओ, मानवाधिकार कार्यकर्ता और कुछ सिविल सोसाइटी संगठन काम करते हैं। ये रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (आरओएचआरइनग्या) जैसे संगठने के तले उन्हें शिक्षा, राहत और कानूनी सहायता देने तक की पैरवी करते हैं।

यूएनएचसीआर, एमनेस्टी इंटरनेशनल और रिफ्यूजी इंटरनेशनल जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन रोहिंग्याओं को शरणार्थी मानते हैं और भारत में उनके हिरासत और निर्वासन का विरोध करते हैं।

वामपंथी समूह रोहिंग्याओं को शरणार्थी मानते हैं और भारत की निर्वासन नीति को मोदी सरकार का ‘इस्लामोफोबिक’ रुख बताते हैं, जबकि राष्ट्रवादी इसे अवैध घुसपैठ से जोड़ते हैं। 2018 में गृह मंत्रालय द्वारा रोहिंग्या समर्थकों की सूची में पूर्व राजदूत, वकील, प्रोफेसर और संगठन जैसे वर्किंग ग्रुप ऑन अल्टरनेटिव स्ट्रैटजीज शामिल थे।​

रोहिंग्या संकट का इतिहास और भारत की नीति

रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय म्यांमार के रखाइन राज्य से है, जहाँ 2017 के बाद जातीय सफाए के कारण 40,000 से अधिक भारत पहुँचे, हालाँकि भारत उन्हें अवैध प्रवासी मानता है।

सरकार ने उन्हें निर्वासित करने की योजना बनाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई, लेकिन 2018 में कोर्ट ने निर्वासन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। भारत ने गैर-हस्तक्षेप सिद्धांत अपनाया है, लेकिन बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद रोहिंग्या विरोध बढ़ा।​

क्या है शरणार्थी होने की परिभाषा

भारत की विदेशी नागरिकों के लिए शरणार्थी होने का दावा करने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (2011, संशोधित 2019) अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मानी जाती है। इस प्रक्रिया में शरणार्थी को उस व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे नस्ल, धर्म, लिंग, राष्ट्रीयता, जातीय पहचान, किसी सामाजिक समूह की सदस्यता या राजनीतिक विचारों के आधार पर उत्पीड़न का सच में डर हो। यह परिभाषा प्रचलित अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत की घरेलू नीतियों के बीच सामंजस्य को दर्शाती है।

पत्र में हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि भारत में लंबे समय से शरणार्थियों को प्रवासी (migrants) से अलग एक विशिष्ट श्रेणी के रूप में मान्यता देने की परंपरा रही है। देश ने पहले भी तिब्बतियों, श्रीलंकाई तमिलों और ऐतिहासिक रूप से 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान से उत्पीड़न के कारण भागकर आए लाखों लोगों को मानवीय संरक्षण प्रदान किया है।

नुपूर शर्मा मामले में वामपंथी प्रोपेगेंडा का दोहरा मापदंड

2022 में नुपूर शर्मा विवाद पर जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें ‘आग लगाने वाली जीभ’ कहा था, जिसे वामपंथी और उदारवादी समूहों ने जमकर सराहा था। लेकिन अब रोहिंग्या टिप्पणी पर वे इसी जस्टिस सूर्यकांत का विरोध कर रहे हैं।

नुपूर मामले में कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों को वामपंथियों ने मोदी सरकार पर हमले के रूप में इस्तेमाल किया। अब वही लोग सीजेआई की रोहिंग्या टिप्पणियों को ‘डीह्यूमनाइजिंग’ बता रहे हैं। यह दोगलापन सोशल मीडिया पर सामने आया, तो लोगों ने इसे हिपोक्रेसी करार दिया।

No comments: