आज सवर्ण समाज-ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ और वैश्य आदि-के साथ हो रहे भेदभाव के हमारा विपक्ष जिम्मेदार है जो हिन्दुओं को जातिगत सियासत के दलदल में फंसा घिनौनी राजनीति नहीं बल्कि सियासत खेल रहा है और उस दलदल में सत्तारूढ़ बीजेपी फंस चुकी है। जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है फिर सवर्ण वर्ग के साथ भेदभाव क्यों?
यूजीसी नियमों में क्या है, कैसे बने ये नियम, कौन जिम्मेदार है, इसे लेकर बाद में चर्चा करेंगे लेकिन आज यह सामने आ रहा है कि जो सवर्ण समाज जिसमें 90% ब्राह्मण हैं वो एक भगवाधारी मोदी को सत्ता से बाहर करने पर आमादा हैं जबकि ओवैसी एक हिजाब वाली को प्रधानमंत्री बनाना चाहता जिसका अंजाम आज उग्र हो रहे ब्राह्मण और अन्य सवर्ण नहीं समझ रहे और उन्हें शायद यह भी नहीं पता कि मोदी को हटा कर जिस कांग्रेस और अन्य विपक्ष को सत्ता देना चाहते हैं, उनकी दृष्टि में ब्राह्मण क्या है?
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| लेखक चर्चित YouTuber |
भूपेश बघेल के छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री रहते हुए उनके पिता नंद कुमार बघेल ने ब्राह्मणों के बहिष्कार का अभियान चलाया था जो शायद आज के ब्राह्मणों को याद भी नहीं होगा लेकिन तब कोई कुछ नहीं बोला था। नंदराम बघेल ने उत्तर प्रदेश में ही कहा था।
“हम ब्राह्मणों को गंगा से वोल्गा भेजेंगे क्योंकि वो परदेशी हैं; जिस तरह अंग्रेज़ आए और चले गए, उसी तरह ब्राह्मण लोग भी या तो सुधर जाएं या गंगा से वोल्गा जाने के लिए तैयार रहें; मैं भारत के सभी ग्रामीणों से आग्रह कर रहा हूं कि ब्राह्मणों को अपने गांवों में प्रवेश न करने दें; मैं हर दूसरे समुदाय से बात करूंगा ताकि हम उनका बहिष्कार कर सकें; उन्हें वोल्गा नदी के तट पर भेजने की जरूरत है और वहीँ रहें; ब्राह्मणों से इसलिए नाराज़गी है क्योंकि ब्राह्मण विदेशी हैं, हमको अछूत मानते हैं; सारे अधिकार वो छीन रहे हैं, इसलिए उनसे लड़ाई जरूरी है; हर समाज से प्रस्ताव करके ब्राह्मणों का बायकॉट करेंगे, उन्हें गांवों में घुसने नहीं देंगे; सरपंचों से कहेंगे कि ब्राह्मणवाद का विरोध करें; मेरा एक ही धर्म है एस सी एस टी ओबीसी और अल्पसंख्यक लोगों का हक और अधिकार के लिए अपना सर्वस्व निछावर करना”।
कांग्रेस और विपक्ष के किसी नेता ने ऐसे बयान के विरोध में कुछ नहीं कहा जिसका मतलब सभी का नंदराम बघेल के ब्राह्मणों के विरुद्ध बयान और अभियान को मौन समर्थन था। आज उछल रहे कितने ब्राह्मणों को बघेल के बारे में पता है जबकि नरेंद्र मोदी ने कभी ब्राह्मणों के खिलाफ तो क्या समाज के किसी भी व्यक्ति के लिए कभी कुछ नहीं कहा।
ब्राह्मणों पर तो अमेरिका की भी विशेष मेहरबानी हुई जो अभी कुछ दिन पहले ट्रंप पूर्व सहायक पीटर नवारो ने कहा था कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने में “ब्राह्मणों” को फायदा हो रहा है और उदित राज और कई अन्य ने उछल कर उसका समर्थन किया था।
उदित राज ने ब्राह्मणों को “सुवरों की प्रजाति” कहा था और सुप्रीम कोर्ट में ब्राह्मणों का आधिपत्य बताया था। उदित राज ने कहा था कि छत्रपति शिवाजी ने अपनी ताजपोशी के लिए ब्राह्मणों को पैसे और भोजन से खरीद लिया था। RSS की विचारधारा को “जहरीली” कहा था।
गगनयान में शुभांशु शुक्ला को भेजने पर उसने कहा कि ब्राह्मण ही क्यों, किसी दलित या ओबीसी को भेजना था”।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं है जो दलितों आदिवासियों और पिछड़े वर्ग के लोगों को छलने का काम करता है। हिंदू धर्म वास्तव में “ब्राह्मण धर्म” है।

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