सुप्रीम कोर्ट ने UPSC की तारीफ की है, फिर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति भी UPSC की परीक्षा के माध्यम से करने में क्या एतराज है?

सुभाष चन्द्र

नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कल सुनवाई करते हुए कहा कि UPSC से सीख लें जहां से एक भी पेपर लीक नहीं हुआ मतलब उसकी परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है - सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री जांच की खुद निगरानी कर रहे हैं। 

सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सभी को लीक पेपर के खरीदारों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि जब तक इन लोगों पर कार्यवाही नहीं होगी पेपर लीक होते रहेंगे करते रहो गिरफ्तारियां। करते रहो एक दूसरे पर दोषारोपण। सबसे बड़े गुनाहगार ये ही लोग है क्योकि ऐसे लोगों की वजह से लाखों का भविष्य दावं पर लग जाता है। 

मैं दूसरा विषय उठाना चाहता हूं कि अगर UPSC की परीक्षा प्रणाली पूर्ण रूप से पारदर्शी है तो फिर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति भी UPSC द्वारा परीक्षा से क्यों न कराई जाए क्योंकि कॉलेजियम की साख पारदर्शिता ना होने की वजह से जनमानस में गिर चुकी है

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आज की तारीख में हाई कोर्ट (कुल 25) के जजों की स्वीकृत संख्या (sanctioned vacancy) 1122 है लेकिन अभी 787 जज ही काम कर रहे हैं यानी 335 जजों के पद हाई कोर्ट में रिक्त हैं अनेक बार देखा गया है कि हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को कॉलेजियम हाई कोर्ट में जज के पद पर नियुक्त कर देता है कभी कभी तो 1 से लेकर 3 तक भी जज बनाए जाते हैं हाल ही में कोलकाता हाई कोर्ट के 9 वकीलों को हाई कोर्ट का जज बनाया गया है जब किसी  हाई कोर्ट में हजारों वकील प्रैक्टिस करते हैं, तब उनमे से कुछ को जज बनाना अपने आप में शंका पैदा करता है क्योंकि किसी को पता नहीं चलता कि उनके चयन का आधार क्या है

हाई कोर्ट के जज की नियुक्ति के लिए संविधान के आर्टिकल 217 में दी गई योग्यताओं के अनुसार इनमें कोई एक योग्यता अनिवार्य है

-किसी व्यक्ति के पास भारत में कहीं भी 10 साल तक judicial office में काम करने का अनुभव होना चाहिए; या 

-किसी वकील ने एक या एक से ज्यादा हाई कोर्ट में लगातार 10 साल प्रैक्टिस की हो; और 

-आयु 62 वर्ष की न हो;

इसके अलावा कॉलेजियम के नियमों के अनुसार “if collegium elevates a candidate from the Bar is generally expected to be between the ages of 45 and 55; have a consistent net professional income and maintain a strong record of court performance”

Judicial Office में काम करने का मतलब है state-employed legal professionals such as magistrates and judges in courts - Judicial Office में काम करने का यह भी मतलब है कि वो District Judge, additional District Judge or Magistrate हो

अगर ऐसे लोगों को परीक्षा से हाई कोर्ट के जज के पद के लिए नियुक्त किया जाए तो उससे ज्यादा पारदर्शिता तो होगी, वह भी तब जब  परीक्षा  UPSC द्वारा की जाए एक बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी परीक्षा से हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति के लिए कहा था

उदाहरण के लिए 335 पदों के लिए अगर परीक्षा ली जाए तो हज़ारों योग्य उम्मीदवार सामने आ सकते है और उत्तीर्ण होने वालों में से 335 के तीन गुना यानी करीब 1000 का इंटरव्यू किया जा सकता है लेकिन इस परीक्षा में चयन हेतू 10% नंबर अनुभव के लिए हों, 70% परीक्षा के लिए और 20% इंटरव्यू के लिए हों इनकों जोड़ कर merit list बनाए और 335 पदों का डेढ़ गुना यानी 500 उत्तीर्ण उम्मीदवारों का पैनल बना कर उससे नियुक्ति की जाए यह सरकार का normal selection process होता है इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के जजों की भी नियुक्ति होनी चाहिए

इससे चयन प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी होगी और भाई भतीजावाद का आरोप भी नहीं लगेगा और न अयोग्य लोग हाई कोर्ट के जज बनेंगे कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि उनके हाई कोर्ट में कुछ भी जज भेजे गए जो कोर्ट का case filing procedure भी नहीं जानते इसके अलावा यशवंत वर्मा का केस तो सबको पता ही है जिसके घर से अधजले 15 करोड़ के नोट मिलना उसकी नियुक्ति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है  

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