“फ्रांस के राष्ट्रपति ने अल्लाह के रसूल की शान में जो गुस्ताखी की है, उसको ऐसी ही सज़ा मिलनी चाहिए।”: मौलाना अब्बास रिज़वी, कांग्रेस विधायक

कांग्रेस विधायक ने भोपाल में जमा कराई कट्टरपंथी भीड़
इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर फ्रांस की सरकार ने जिस तरह का रवैया अपनाया, उसका विरोध तमाम इस्लामी मुल्कों में सामने आया। अब इसी कड़ी में भारत का कट्टरपंथी मुस्लिम वर्ग फ्रांस की सरकार और वहाँ के राष्ट्रपति एमैनुएल मेक्रों के विरोध में सड़कों पर नज़र आ रहा है। मुंबई और भोपाल में ये कट्टरपंथी लोग फ्रांस के राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित भिंडी बाज़ार में फ्रांस के राष्ट्रपति का पोस्टर सड़क पर चिपका कर विरोध किया गया। इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि रास्ते पर मैक्रों के पोस्टर चिपके हुए हैं और उसके ऊपर से वाहन गुज़र रहे हैं। इस दौरान सबसे ज़्यादा हैरानी की बात तब हुई, जब एक मौलाना ने इस प्रकरण पर बयान दिया।

रज़ा एकेडमी के मौलाना अब्बास रिज़वी ने कहा, “फ्रांस के राष्ट्रपति ने अल्लाह के रसूल की शान में जो गुस्ताखी की है, उसको ऐसी ही सज़ा मिलनी चाहिए।” इसके अलावा मौलाना अब्बास रिज़वी ने मुंबई की सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का पोस्टर लगाए जाने और उसके ऊपर चप्पल-जूते पहन कर चलते लोगों के साथ कुत्ते-बिल्लियों के चलने का समर्थन भी किया।

फ्रांस में दूसरा आतंकी हमला, सऊदी अरब में मारा चाकू

फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इस घटना को फ्रांस के ही नीस में 3 लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ ही घंटों बाद अंजाम दिया गया। ठीक इसी तरह का एक और कट्टरपंथी प्रयास सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में हुआ। सऊदी अरब के फ्रांसीसी दूतावास में तैनात सुरक्षाकर्मी पर धारदार हथियार से हमला किया गया।

कांग्रेसी विधायक ने मजहब के नाम पर जमा की भीड़ 

इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘अद्भुत मिसाल’ पेश की। भोपाल के इकबाल मैदान में कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद की अगुवाई में हज़ारों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। इतना ही नहीं, मौजूद लोगों ने फ्रांस के राष्ट्रपति से माफ़ी माँगने तक की बात कह दी।

स्मरण हो, कुछ ही वर्ष पूर्व जब फ़्रांस में ही शार्ली एब्दो द्वारा पैगम्बर मोहम्मद के कार्टून पर उपजे विवाद में मुंबई में शहीदी स्मारक को जेहादियों ने क्षति पहुंचाई थी और इसी तरह अब भोपाल में जमावड़ा। केन्द्र और राज्य सरकारों को दिल्ली, बंगलोर और बंगाल में हिन्दुओं पर हो रहे हमलों को ध्यान में रखते हुए, भोपाल में हुए इस जमावड़े को गंभीरता से ले। तुष्टिकरण पुजारी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स कहीं इस आग को भारत में फैलाने का साहस करने पाएं। वैसे बेंगलुरु उपद्रव से कम से कम किसी और छद्दम सेक्युलरिस्ट की बजाए कांग्रेस को इस आग से दूर रहना चाहिए, क्योंकि वहां उपद्रव कांग्रेस नेता के परिजन के ही कारण हुआ था। लेकिन कांग्रेस ही इस आग को हवा देकर अपना वोटबैंक साधने में लगी हुई है। ये कट्टरपंथी आतंकवादियों पर चुप्पी साढ़े हुए हैं।    

भोपाल में इतनी भारी संख्या में लोगों के मौजूद होने के बाद सामाजिक दूरी (सोशल डिसटेंसिंग) के नियमों की जम कर धज्जियाँ उड़ाई गईं। पूरी भीड़ में लगभग नहीं के बराबर लोगों ने मास्क पहना था। खुद विधायक आरिफ के वीडियो में आप इसे देख सकते हैं।

मजहब के नाम पर किए हुए जमावड़े पर लोगों की प्रक्रियाएं:-

भोपाल पुलिस ने कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद समेत कुल 2000 अज्ञात लोगों के विरुद्ध कोरोना के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए मामला दर्ज कर लिया। कांग्रेस विधायक का इस मुद्दे पर यह भी कहना है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत में रहने वाले मुस्लिम लोगों की भावनाओं को आहत किया है। 

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