थमा Iran-US का ‘महायुद्ध’, ट्रंप बोले- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा तो तेहरान ने भी रखीं 10 शर्तें

  ईरान-अमेरिका ने 38 दिन के युद्ध के बाद सीजफायर का किया ऐलान, हॉर्मुज पर बनी बात (साभार: NYT/Chosun)
ईरान और अमेरिका के बीच 38 दिन से जारी युद्ध के बाद अब दोनों देशों ने सीजफायर की घोषणा कर दी है। ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलने के लिए राजी हो गया है। इससे सहमत होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमला रोकने का ऐलान किया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहाँ के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अनुरोध किया कि आज रात ईरान पर होने वाले हमले को रोक दिया जाए। इस शर्त कि ईऱान तुरंत स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलने के लिए तैयार हो गया है, इसीलिए मैं दो हफ्तों के लिए हमले और बमबारी को रोकने के लिए सहमत हूँ। यह दोनों तरफ से युद्धविराम (सीजफायर) होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलवाने की डेडलाइन मंगलवार (07 अप्रैल 2026) को ख्तम हो गई, जिसके बाद उम्मीद थी कि अमेरिका कोई बड़ा हमला करेगा। लेकिन डेडलाइन खत्म होने से कुछ घंटों पहले ही दोनों देशों के बीच सीजफायर पर बात बन गई। लेकिन इस सीजफायर की भी कुछ शर्ते हैं। ईरान ने 10 प्रस्ताव दिए, जिसे अमेरिका मानने को तैयार हुआ। तब जाकर यह युद्ध खत्म हुआ।

क्या है ईरान की वो 10 प्रस्ताव

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका ने इन 10 प्रस्तावों को स्वीकार किया है:

  • अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता होगा कि दोनों एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे
  • स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा
  • ईरान को परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को मान्यता
  • अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी मुख्य प्रतिबंध हटा दिए जाएँगे
  • दूसरे देशों पर असर डालने वाले सभी प्रतिबंध भी खत्म किए जाएँगे
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के ईरान के खिलाफ सभी फैसले खत्म किए जाएँगे
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के ईरान के खिलाफ सभी फैसले खत्म किए जाएँगे
  • ईरान को हुए नुकसान के लिए उसे मुआवजा दिया जाएगा
  • अमेरिका अपने सैनिकों को इस क्षेत्र से वापस बुलाएगा
  • हर जगह चल रही लड़ाई बंद होगी, जिसमें ईरान से जुड़े समूह जैसे लेबनान का हिज्बुल्लाह भी शामिल है
  • सीजफायर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खेलने से जुड़ा होगा
इन प्रस्तावों को मानते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते तक अस्थायी तनाव कम करने के लिए समझौता किया है। इस समझौते में सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, क्योंकि दुनिया के 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। इसीलिए इस रास्ते को खोलना दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद जरूरी रहा। ईरान ने माना कि वह दो हफ्ते तक जहाजों को सीमित और नियंत्रित तरीके से गुजरने देगा।

जंग अभी खत्म नहीं हुई

अमेरिका के साथ सीजफायर बनी सहमति के ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी मिलिट्री को गोलीबारी रोकने का आदेश दिया है। मोजतबा खामेनेई का यह निर्देश ईरान के सरकारी चैनल IRIB पर सीजफायर के ऐलान के दो घंटे बाद पढ़ा गया।
मोजतबा खामेनेई के बयान में कहा गया, “यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सेना के हिस्सों को सुप्रीम लीडर के आदेश का पालन करते हुए गोलीबारी रोकनी चाहिए।” बयान में यह भी कहा गया कि लड़ाई रोकना पूरी तरह स्थायी नहीं है, बल्कि यह शर्तों पर आधारित है और आगे चल रही बातचीत से जुड़ा हुआ है।

जंग में जीत का ईरान और अमेरिका का दावा

बेशक युद्ध सिर्फ दो हफ्तों के लिए ही टाला गया हो, लेकिन ईरान और अमेरिका दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। ईरान ने कहा कि युद्ध के लगभग सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं। वहीं अमेरिका ने कहा कि यह उनकी जीत है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी सेना ने संभव बनाया है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के बयान के अनुसार, तेहरान इस मौजूदा संघर्ष को एक बड़ी रणनीतिक सफलता मान रहा है और उनका कहना है कि युद्ध के लगभग सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष करीब 40 दिनों तक चला, जिसका मकसद जरूरी राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करना था, जिनमें उनके बड़े क्षेत्रीय माँगों को मनवाना भी शामिल था।
इतना ही नहीं ईरान ने युद्ध आगे जारी रखने के भी संकेत दिए। काउंसिल ने यह भी कहा कि ईरान ने पहले अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा तय की गई समय-सीमा को मानने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह दुश्मनों द्वारा तय किए गए समय के अनुसार चलने को तैयार नहीं था। उनका कहना था कि जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
वहीं दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “यह अमेरिका की जीता है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप और हमारी अविश्वसनीय सेना ने संभव बनाया है।” उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ने हॉर्मुज को फइर से खुलवा दिया है। लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति ने शुरू से ही कहा था कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 4 से 6 हफ्ते का अभियान होगा और अमेरिका ने 38 दिनों में अपने प्रमुख सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लिया और उनसे कहीं आगे निकल गया।

सीजफायर के बाद तेल की कीमतों में राहत, शेयर बाजार में उछाल

ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा का सीधा असर तेल और शेयर बाजार दोनों पर देखने को मिला है। युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज बंद होने से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं और वैश्विक बाजारों में डर और अस्थिरता फैल गई थी। लेकिन जैसे ही सीजफायर की घोषणा हुई और हॉर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमित बनी, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, कीमतें 13 प्रतिशथ से 16 प्रतिशत तक नीचे आ गईं।
तेल सस्ता होने और तनाव कम होने की वजह से शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। भारत में सेंसेक्स 2600 प्वाइंट के ऊपर रहा और 23,800 के साथ निफ्टी में भी जोरदार उछाल आया, जबकि अमेरिका और अन्य देशों के बाजार भी सकारात्मक संकेत दिखाने लगे। खासकर तेल पर निर्भर कंपनियों और रिफाइनरी सेक्टर को इससे फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि उनका खर्च कम होगा।
हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अभी अस्थायी है, क्योंकि जमीन पर तेल सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और जहाजों की आवाजाही अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही। इसलिए आने वाले समय में बाजार का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि यह सीजफायर स्थायी शांति में बदलता है या नहीं।

ईरान-अमेरिका युद्ध में अब तक क्या-क्या हुआ?

ईरान और अमेरिका के बीच 38 दिन का संघर्ष चला। यह संघर्ष अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान रहा। इसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका के हमले से हुई, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने का दावा किया गया, हालाँकि ईरान ने भी इसकी पुष्टि की, तभी ईरान का नया सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह के बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना गया।
अयातुल्लाह खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान युद्ध के रड़ में उतरा और सबसे पहले खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू किया। ईरान ने कुवैत, लेबनान, बहराइन से लेकर UAE को निशाना बनाया। इन खाड़ी देशों को अमेरिका का साथ देने की सजा दी गई। इस बीच ईरान के क्षेत्र में तेल का सबसे बड़ा मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने की कगार पर आ गया, जिसके चलते दुनिया में तेल का संकट आ गया। इस दौरान भारत की रणनीतिक साझेदारी दुनियाभर में तारीफ के काबिल रही, हॉर्मुज बंद होने के बावजूद भारत के कई जहाजों की आवाजाही चालू रही।
इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने एक के बाद एक ईरान के टॉप सैन्य कमांडर को निशाना बनाना शुरू कर दिया। 38 दिन के युद्ध में ईरान के सभी टॉप कमांडर को ढेर कर दिया गया। इसके बावजूद ईरान सीजफायर समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, जिससे दुनियाभर के देशों का तेल संकट बढ़ता गया। तब जाकर ट्रंप ने ईरान को 07 अप्रैल 2026 तक की डेडलाइन दी कि अगर ईरान हॉर्मुज नहीं खोलता, तो इसका बहुत बुरा अंजाम खोलना होगा।
हालाँकि, डेडलाइन से दो घंटे पहले दोनों देशों के बीच सीजफायर समझौते पर सहमित बनी और युद्ध विराम की घोषण की गई। लेकिन यह सीजफायर केवल 2 हफ्तों के लिए ही है। ईरान का दावा है कि इन दो हफ्तों में दोनों देशों के बीच बातचीत होगी और युद्ध को स्थायी तौर पर रोकने पर भी सहमित बनेगी।

शहबाज शरीफ की इंटरनेशनल बेज्जती, ‘मध्यस्थ’ नहीं अमेरिका के ‘दलाल’ ही थे शहबाज शरीफ: ट्रंप से मिला मैसेज किया ‘कॉपी-पेस्ट’ तो जमकर हुए ट्रोल

                                 शहबाज शरीफ ने ट्रंप का मैसेज किया 'कॉपी-पेस्ट' (साभार : Grok)
मिडिल ईस्ट में पिछले 38 दिनों से चल रही विनाशकारी जंग पर बुधवार (8 अप्रैल 2026) सुबह आखिरकार ब्रेक लग गया। खास बात यह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी डेडलाइन खत्म होने से ठीक 2 घंटे पहले सीजफायर(संघर्ष विराम) का ऐलान कर दिया।

इस शांति के पीछे पाकिस्तान का हाथ बताया जा रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक ‘कॉपी-पेस्ट’ ट्वीट ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। चर्चा है कि ट्रंप खुद झुकते हुए नहीं दिखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शहबाज शरीफ से एक खास रिक्वेस्ट वाला ट्वीट करवाया ताकि उन्हें पीछे हटने का बहाना मिल सके। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ठीक ही कहा था कि भारत इस युद्ध में पाकिस्तान की तरह दलाली नहीं कर सकता है और अब शायद वही बात सामने भी आ रही है।

डेडलाइन से ठीक पहले ट्रंप का यू-टर्न

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार(7 अप्रैल) देर रात घोषणा की कि वह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर से बातचीत के बाद युद्ध रोकने को तैयार हुए हैं। ट्रंप ने पहले ईरान को चेतावनी दी थी कि या तो वह झुक जाए या बड़े हमले के लिए तैयार रहे। लेकिन जैसा कि पिछले कई मौकों पर देखा गया है, ट्रंप डेडलाइन खत्म होने से ऐन पहले पीछे हट जाते हैं। माना जा रहा है कि अपनी साख बचाने के लिए उन्होंने इस बार पाकिस्तान के कंधे का इस्तेमाल किया।

‘Draft’ ट्वीट से खुली पोल, क्या ट्रंप ने लिखा था संदेश?

विवाद तब शुरू हुआ जब पीएम शहबाज शरीफ ने ‘X’ (ट्विटर) पर रात 12:46 बजे एक पोस्ट किया। इस पोस्ट की पहली लाइन में ही ‘Draft–Pakistan’s PM Message on ‘X’’ लिखा था। हालाँकि, शरीफ की टीम ने एक मिनट के अंदर ‘कॉपी-पेस्ट’ को एडिट किया, लेकिन तब तक यह मैसेज वायरल हो चुका था।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह मैसेज ट्रंप की टीम ने लिखकर पाकिस्तान भेजा था? जानकारों का कहना है कि किसी देश के PM की टीम अपने ड्राफ्ट में ‘पाकिस्तान के पीएम का मैसेज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करती। ऐसा लग रहा है जैसे ट्रंप प्रशासन ने खुद यह ड्राफ्ट तैयार किया और शहबाज शरीफ से इसे पोस्ट करने को कहा, ताकि ट्रंप को दुनिया के सामने यह कहने का मौका मिले कि वह पाकिस्तान के अनुरोध पर जंग रोक रहे हैं।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने पोस्ट में क्या लिखा था?

शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में बड़ी चतुराई से ट्रंप से अनुरोध किया था कि कूटनीति को एक मौका देने के लिए हमले की डेडलाइन 2 हफ्ते आगे बढ़ा दी जाए। साथ ही, उन्होंने ईरान से भी अपील की कि वे सद्भावना दिखाते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोल दें। इसी ट्वीट को आधार बनाकर ट्रंप ने जंग रोकने का फैसला सुना दिया।

शहबाज शरीफ के लेबनान पर सीजफायर के दावे की इजरायल ने निकाली हवा (साभार : Thetribune & Indianews)
लेबनान में सीजफायर का झूठा दावा पड़ा भारी: इजरायल ने बम बरसाकर निकाली हवा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। शहबाज ने ट्वीट कर दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर लेबनान समेत हर जगह तुरंत प्रभावी होगा।

हालाँकि, इजरायल ने इस दावे की धज्जियाँ उड़ाते हुए साफ कर दिया कि लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है। इजरायल ने बयान जारी करने के साथ ही लेबनान में बमबारी जारी रखकर पाकिस्तान के झूठ की हवा निकाल दी।

पाकिस्तानी PM का बड़बोलापन

शहबाज शरीफ ने खुद को ‘शांति दूत’ बताते हुए घोषणा की थी कि लेबनान में भी जंग रुक गई है। लेकिन इजरायली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने सख्त लहजे में कहा कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता। इजरायल का तर्क है कि हिजबुल्लाह का मोर्चा अलग है। जब तक उत्तरी सीमा सुरक्षित नहीं होती, हमले जारी रहेंगे।

इजरायल के रुख से साफ है कि पाकिस्तान को या तो समझौते की समझ नहीं है या उसने श्रेय लेने के लिए सफेद झूठ बोला। इस घटना ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान को सच साबित कर दिया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को ‘फीस लेकर संकट सुलझाने का दावा करने वाला दलाल’ कहा था। पाकिस्तान अब कूटनीतिक रूप से अलग-थलग और बेनकाब हो गया है।

खड़के द्वारा कुरान पर अपमानजनक बात बोलने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों, "सिर तन से जुदा गैंग" और उनके आकाओं को क्या सांप सूंघ गया है?


नूपुर शर्मा द्वारा इस्लामिक किताबों में लिखी बात को बोलने पर हंगामा करने वाले उपद्रवी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के द्वारा कुरान में नहीं लिखी बात को बोलने पर क्यों खामोश हैं? क्या मुस्लिम कट्टरपंथी और उनके आका पार्टी देख उपद्रव करते हैं? जो कुरान की बात खड़के ने कही क्या सच है अगर नहीं फिर कट्टरपंथियों और उनके आकाओं की चुप्पी क्या साबित करती है? क्या अब इस्लाम का सम्मान किया जा रहा?

टीवी पर परिचर्चाओं में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता खड़के पर हो रहे प्रहारों पर कुरान टिप्पणी पर पर्दा डाल दलित कार्ड खेल बचाते नज़र आया। लेकिन अगर यही बात खड़के की बजाए किसी बीजेपी नेता ने कह दी होती उपद्रवी मुस्लिम कट्टरपंथी और उनके आका चील-कौआ की तरह चीख-चिल्लाकर "सिर तन से जुदा गैंग" सडकों पर आ गए होते, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा अपमानजनक बात बोलने पर सबको सांप सूंघ गया।

            

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के नाम से केजरीवाल की पैंट हर समय गीली रहती है; न्यायपालिका और न्यायाधीश पर पक्षपाती होने का आरोप लगा कर फंस गया केजरीवाल

सुभाष चन्द्र

केजरीवाल की मंशा है कि जस्टिस शर्मा पर हर फोरम पर आरोप लगा कर इतना दबाव बना दिया जाए कि वो स्वयं ही केस से अलग हो जाएं लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि आज जस्टिस शर्मा हैं तो कल को कोई और जज हो सकता है जिसकी इज़्ज़त उतारने में ये मक्कार पीछे नहीं रहेगा। प्रश्न न्यायपालिका और न्यायाधीश के सम्मान का है और दोनों पर आरोप लगा कर केजरीवाल ने खुलेआम Contempt of Court कर दिया

लेखक 
चर्चित YouTuber 
जस्टिस शर्मा के खिलाफ केजरीवाल का विलाप साबित कर रहा है कि उनके निर्णय को काट सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता भी नहीं कर सके लेकिन केजरीवाल ने उन्हें ऐसा “manage” कर लिया कि 12,जुलाई 2024 को ED की गिरफ़्तारी मामले में जमानत तो दे दी लेकिन गिरफ्तारी वैध थी या नहीं, यह निर्णय नहीं कर सके और बड़ी बेंच को भेज दिया केजरीवाल ने सब कुछ ऐसा manage किया कि आज लगभग 2 साल बाद भी बेंच नहीं बनी है

आप एक बहुत गहरी बात समझिए कि दो जज गिरफ़्तारी के मामले पर (जिस पर जस्टिस शर्मा ने निर्णय दे दिया) फैसला नहीं कर सके लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ही दो जज राष्ट्रपति को आदेश दे देते हैं क्या चारों जज अपने ऊपर प्रश्नचिन्ह नहीं खड़ा किए अपनी क़ाबलियत को लेकर? क्यों दो जज हाई कोर्ट के एक जज के फैसले को नहीं पलट सके और बड़ी बेंच को भेजा तो आदेश भी देते यह बेंच 3 महीने गठित कर दी जाए यह साबित करता है कि सारा मामला “Managed” और मैनेजर तो कई रहे होंगे अभिषेक सिंघवी मुख्य था

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा में केजरीवाल को “महिषासुरमर्दिनि” दिखाई दे रही है कि अगर उसने  सुनवाई की तो केस फिर खुलेगा जिसमें “manage” कर के “सभी Discharge” हो गए वह भी बिना ट्रायल के 

केजरीवाल ED के 9 समन पर हाजिर न हो कर जब हाई कोर्ट गया तब वहां से ही ED के सबूत देख कर आदेश मिल गया था गिरफ़्तारी का और 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार हुआ सिंघवी ने स्वर्ण कांता शर्मा के सामने विलाप किया कि चुनाव के समय क्यों गिरफ्तार किया गया ये अपने केजरीवाल से पूछ नवंबर,23 से 9 समन पर क्यों नहीं आया था 

अपने 8 अप्रैल, 2024 के फैसले में जस्टिस शर्मा ने साफ़ कहा था कि -

-”जांच एजेंसी के कानून के आदेश का पालन किया और रिमांड पर भेजने का मजिस्ट्रेट का आदेश भी सही था;

-ED की सामग्री से पता चलता है कि केजरीवाल ने षड़यंत्र रचा, वह पैसे के उपयोग और छिपाने में भी शामिल था;

-यह भी पता चलता है डीलरों के साथ गोवा चुनाव में आप उम्मीदवार के भी बयान हैं और पैसा गोवा भेजा गया; 

-न्यायाधीश कानून से बंधे हैं और अदालत के निर्णय राजनीतिक विचारों के बजाय कानूनी सिद्धांतों पर दिए जाते हैं और यह मामला केंद्र सरकार और केजरीवाल के बीच न होकर ED और केजरीवाल के बीच है;

-यह तय करना आरोपी का काम नहीं है कि जांच कैसे की जानी है, CM सहित किसी के लिए भी कोई विशेषाधिकार नहीं हो सकता”

अब जस्टिस शर्मा के स्पष्ट आदेशों की काट अगर सुप्रीम कोर्ट के जज नहीं निकाल सके तो यह साबित करता है वे मान रहे है कि केजरीवाल की गिरफ़्तारी वैध थी जो जस्टिस शर्मा ने कही लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने जबरन लटका दिया और वह आज भी मौज कर रहा है

जनता का 55 करोड़ रुपया वकीलों पर उड़ा कर आज हाई कोर्ट में खड़ा हो गया कि जज को हटाने का केस वो खुद लड़ेगा तुषार मेहता ने कहा अपने वकील को पहले डिस्चार्ज करो फिर केस की बहस करो बड़ा बेईमान है, कहता है आज के लिए कोई वकील नहीं होगा बस मैं रहूँगा

ममता को भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था आपके पास वकीलों की फ़ौज है, उन्हें ही उनका काम करने दीजिए 

पाकिस्तान में 80% Gay, 20% Bisexual: ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलोच का दावा, कहा- इस मुल्क में कोई नहीं Straight, मजहबी दबाव में छिपाते हैं यौन पहचान


पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलूच ने एक हैरान करने वाला दावा किया है। हिना बलूच ने कहा कि पाकिस्तान की 80% आबादी ‘गे’ (Gay) है जबकि बाकी 20% ‘बाइसेक्शुअल’ (Bisexual) है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और समाज में बहस तेज हो गई है।

हिना बलोच ने क्वीर ग्लोबल को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह पाकिस्तान का ओपन सीक्रेट है। हिना के मुताबिक, लोग अपनी असली यौन पहचान छिपाते हैं और मजहब, संस्कृति व परिवार के दबाव की वजह से इसे खुलकर स्वीकार नहीं करते। उन्होंने यहाँ तक कहा कि पाकिस्तान में कोई भी पूरी तरह ‘स्ट्रेट’ (Straight) नहीं है।

हिना ने अपने निजी संघर्ष की बात करते हुए बताया कि बचपन में लिपस्टिक लगाने और लड़कियों जैसे कपड़े पहनने पर परिवार से मारपीट झेलनी पड़ी। उन्होंने पाकिस्तान में ‘ख्वाजा सिरा’ समुदाय की खराब हालत का भी जिक्र किया और कहा कि इस समुदाय को अक्सर भीख, नाच या सेक्स वर्क जैसे सीमित विकल्पों में धकेल दिया जाता है।

हिना बलोच सिंध मूरत मार्च की को-फाउंडर रही हैं और औरत मार्च में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘प्राइड झंडा’ उठाने के कारण उन्हें अगवा किया गया और प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद उन्हें देश छोड़कर यूके में शरण लेनी पड़ी।

गिरफ़्तारी से बचने हैदराबाद भागा पवन खेड़ा: असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा, कांग्रेस नेता के घर से लौटी असम पुलिस

        पवन खेड़ा के घर पहुँची पुलिस, गिरफ़्तारी से बचने के लिए हैदराबाद भागे (Aajtak & Prabhatkhabar)
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की एक टीम पूछताछ के लिए पहुँची थीं। लेकिन दिल्ली स्थित आवास पर पवन खेड़ा नहीं मिले।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी दी कि पवन खेड़ा कल सुबह ही गुवाहाटी से निकल गए थे। दिल्ली में पुलिस की छापेमारी के दौरान पता चला कि वे अब हैदराबाद भाग गए हैं। मुख्यमंत्री हिमंता ने स्पष्ट कहा कि कानून अपना काम करेगा और कोई भी बच नहीं पाएगा।

पवन खेड़ा ने दो दिन पहले आरोप लगाया था कि असम के CM हिमंता की पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा के पास मिस्र, एंटीगा-बरबूडा और UAE के पासपोर्ट हैं। सीएम और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। इसी मामले में सोमवार(अप्रैल 7) को FIR दर्ज की गई थी।

आखिर झूठ पर झूठ बोलकर और फर्जीवाड़ा कर के कांग्रेस कब तक जनता को पागल बनाकर वोट लेती रहेगी? अगर पवन खेड़ा के आरोपों में दम था तो हैदराबाद क्यों भागा?  

क्या Indian Oil जसप्रीत गैस सर्विस, अरुण जेटली स्टेडियम के auto book सुविधा के दुरूपयोग की जाँच करेगी? उपभोक्ता परेशान

                                                                                                                                                                                     प्रतीकात्मक 
आज विपक्ष के दुष्प्रचार के कारण जनता LPG के लिए पागल होकर अपनी-अपनी गैस एजेंसी दुकानों पर भीड़ लगा रही है। इस भीड़ के लिए विपक्ष तो जिम्मेदार है लेकिन गैस एजेंसियां भी पीछे नहीं। कुछ एजेंसियां auto book का दुरूपयोग ब्लैकमेलिंग कर रही है। 

उदाहरण, जसप्रीत गैस एजेंसी, अरुण जेतली स्टेडियम, दिल्ली गेट, नई दिल्ली ने ऐसा जनविरोधी काम किया है। जिसकी Indian Oil को जाँच करनी चाहिए। एजेंसी को फोन करने पर फोन उठाया नहीं जाता वहां जाने पर भीड़ इतनी मालिक से बात करने तक नहीं दी गयी।   

उपभोक्ता द्वारा जब गैस बुक ही नहीं गयी फिर ये बुकिंग कैसे हुई और सिलेंडर किसको बेचा गया और कितने में?  क्या Indian Oil जसप्रीत गैस द्वारा इस ब्लैक की जाँच करेगी? ऐसे न जाने कितने उपभोक्ता होंगे जिनका auto book के दुरूपयोग से परेशान किया जा रहा होगा। 

Indian Oil द्वारा मोबाइल पर आयी निम्न सूचना की जाँच करेगी:- 

Invoice generated for Rs. 913.Share DAC 331531 on delivery. Download eInvoice https://cx.indianoil.in/webcenter/portal/LPG/pages_h?cId=16732482645

INDANE

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INDANE

Your order is delivered with invoice no. 5-106143993961. Next available booking date is 26-Apr-2026.

INDANE    

क्या 26 अप्रैल से पहले सिलेंडर की जरुरत होने पर Indian Oil उपरोक्त उपभोक्ता  की बुकिंग स्वीकार करेगी? नहीं करने की स्थिति में उपरोक्त उपभोक्ता जैसे सरकार को बदनाम नहीं करेगा, इसकी जिम्मेदारी गैस एजेंसी द्वारा गयी ब्लैकमेलिंग को कोई नहीं देखने वाला। आखिर किसने उपरोक्त बुकिंग की और गैस एजेंसी या वेंडर ने सिलेंडर किसे बेचा?    

कांग्रेस के लोग सच में पागल हो गए लगते हैं; न जुबान पर लगाम है और न दिमाग काम कर रहा है; गुजरात समेत पूरे देश के लोगों को खड़गे ने “अनपढ़ गंवार” कह दिया

सुभाष चन्द्र

राज्यसभा सीट के लिए तपस्या पूरी नहीं कर सके पवन खेड़ा ने आरोप लगा दिया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्वा शर्मा की पत्नी रिंकी भुयान शर्मा के पास तीन देशों के (UAE, Egypt और Antigua & Barbuda) पासपोर्ट हैं और वह भारतीय नहीं हैं विदेशों में बिज़नेस और संपत्ति के भी आरोप लगा दिए हैं रिंकी शर्मा ने खेड़ा पर 100 करोड़ का Criminal और Civil मानहानि का केस दायर करने की घोषणा की है आज की एक खबर थी कि उन्होंने वह FIR दर्ज  भी कर दी है। 

जब गौरव गोगोई की पत्नी के पाकिस्तान से संबंधों पर आरोप लग रहे थे और गौरव पर भी पाकिस्तान जाने के सबूत दिए गए थे, आखिर तब पवन खेड़ा ने ये बातें क्यों नहीं बोली और चुनाव प्रचार के दौरान ही क्यों आरोप लगाए ओ भाई, ये कैसी तपस्या है अब रिंकी के खिलाफ सबूत देने पड़ेंगे

आजम खान के बेटे और उसके पास दो पैन कार्ड थे,बीजेपी ने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की बल्कि मामले को कोर्ट में लेकर गई मामले को साबित किया और बाप बेटा जेल में पड़े हैं
कांग्रेस के पास देश के सबसे बड़े वकील भरे पड़े हैं फिर भी हेमंत विश्व सरमा की पत्नी के तीन पासपोर्ट का मामला कोई कोर्ट में लेकर नहीं जा रहा,मतलब चुनाव के दौरान झूठ फैलाओ और चुनाव के बाद कोर्ट में माफी मांग लो गजब लेवल के होते हैं गुलाम

कांग्रेस का Prince of Wales राहुल मोहब्बत की दुकान वाला रोज धमकी दे रहा है कि असम में हमारी सरकार बनने के बाद हिमंता बिस्वा शर्मा माफ़ी मांगेगा लेकिन हम माफ़ी नहीं देंगे, इसे जेल में डाल देंगे पहले अपने 20 से ज्यादा केस तो भुगत लो जिनमें हर केस में जेल होनी तय है और अपनी ब्रिटिश नागरिकता का मामला भुगत लो जिसमें देश छोड़ना निश्चित है केरलम के मुख्यमंत्री विजयन ने सही कहा है कि भले ही राहुल गांधी एक राष्ट्रीय नेता हैं, लेकिन उनमें कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता जितनी भी समझ नहीं है

राहुल गांधी शब्द कैसे उपयोग करता है मोदी को ट्रंप कहता कि उधर जाओ तो मोदी उधर जाता है, ट्रंप कहता है इधर आओ तो इधर आता है, मोदी ट्रंप का गुलाम है 

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अब कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे साहब की सुनो, वो कह रहे हैं “मोदी जी, आप गुजरात और अन्य राज्यों के गंवार लोगों को तो मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन केरल के लोगों को नहीं, यहां के लोग होशियार हैं और शिक्षित हैं केरलम में तभी लड़कियों का बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन होता है और वहां के लोग आतंकियों से जुड़ जाते हैं

यानी गुजरात की 6 करोड़ जनता को और देश भर की मोदी को वोट देने वाली जनता को “अनपढ़ और गंवार कह दिया” वो भूल गए कि इसी गुजरात की जनता ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 17 सीट दी थी जो उसके पहले के चुनाव से 60 कम थी और भाजपा को गुजरात के इतिहास की सबसे अधिक 156 सीट दी थी जो उसके पहले के चुनाव से 57 अधिक थी  मोदी को वोट देने वालों और कांग्रेस को ठोकर मारने वालों को “अनपढ़ गंवार” कह दिया 

खड़गे जी को पता नहीं चलता वो क्या बोल रहे हैं पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि देवगौड़ा ने प्यार तो हमसे किया लेकिन शादी मोदी से कर ली अब देवगौड़ा को भी मोदी ने मूर्ख बना दिया क्या 

कांग्रेस के लोगों की एक आदत बन चुकी है, सुबह उठो, मोदी के घर की तरफ मुंह करके गालियां देनी शुरू कर दो बस किसी तरह मोदी की छवि बिगाड़ दो करते रहो और विपक्ष की कुर्सी पर बैठे रहो खड़गे जी ने कहा है राहुल गांधी मोदी को कभी भी हरा सकते हैं लेकिन वो विपक्ष में रह कर देश की सेवा करना चाहते हैं खड़गे जी वो देश की सेवा नहीं देश की जड़ें खोदना चाहते हैं  

असम CM की पत्नी को निशाना बनाने के लिए कांग्रेस का फर्जीवाड़ा, पाकिस्तानी के खोए अमीरात ID कार्ड में हेराफेरी कर बताया रिनिकी का UAE पासपोर्ट


असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर लगाए गए आरोपों को लेकर कांग्रेस खुद ही फँसती नजर आ रही है। दरअसल, पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ व बारबुडा के 3 विदेशी पासपोर्ट हैं। उन्होंने इन दावों के समर्थन में कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

हालाँकि, मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ये आरोप झूठे, मनगढ़ंत और राजनीतिक मकसद से लगाए गए हैं। इस पूरे मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। जिन दस्तावेजों को कांग्रेस की ओर से पेश किया गया था, उनमें कई गड़बड़ियों की चर्चा पहले ही सामने आ गई थीं।

अब सामने आया है कि यह दस्तावेज असल में एक पाकिस्तानी नागरिक के खोए हुए अमीरात आईडी कार्ड की फोटो से छेड़छाड़ करके बनाया गया था। जानकारी के मुताबिक, ‘Pakistani in Ajman’ नाम के एक फेसबुक ग्रुप में टीपू सुल्तान नाम के व्यक्ति ने 28 मार्च को पोस्ट कर बताया था कि उसके दो एमिरेट्स आईडी कार्ड, एक कार का दस्तावेज और एक एटीएम कार्ड खो गए हैं। उसने अपने आईडी कार्ड की तस्वीर भी शेयर की थी।

उस आईडी कार्ड का नंबर 784-1996-5557498-8 है। यह वही नंबर है जिसे कांग्रेस ने रिनिकी भुइयां सरमा के कथित ‘UAE पासपोर्ट’ के रूप में दिखाया था। उस व्यक्ति की जन्मतिथि 10 जुलाई 1996 थी और ID नंबर के बीच के अंक भी उसी वर्ष को दिखाते हैं।

जब दोनों तस्वीरों की तुलना की गई तो साफ दिखा कि नाम को बदलकर ‘अशरफ अब्देलकादर अब्देलसमद हुसैन’ की जगह ‘रिनिकी भुइयां सरमा’ कर दिया गया। जन्मतिथि, जारी करने और समाप्ति की तारीख भी बदल दी गई लेकिन ID नंबर वही रखा गया।

यहाँ तक कि राष्ट्रीयता भी नहीं बदली गई और मिस्र ही बनी रही। यह भी सामने आया कि फेसबुक पोस्ट में ID कार्ड का पीछे का हिस्सा नहीं था। ऐसे में माना जा रहा है कि पीछे की तस्वीर किसी और स्रोत से ली गई और उसमें भी बदलाव किया गया।

इस पूरे मामले पर असम के मंत्री पियूष हजारिका ने भी प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह ‘गोल्डन कार्ड’ नंबर उसी फेसबुक ग्रुप से लिया गया है। उन्होंने लिखा, “पवन खेड़ा ने ‘गोल्डन कार्ड’ नंबर फेसबुक से चुराया है। कितनी शर्मनाक बात है।”

‘गोल्डन कार्ड VS रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड’

फेसबुक पर जो दस्तावेज सामने आया उसमें ‘रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड’ लिखा हुआ है जबकि कांग्रेस द्वारा पेश किए गए दस्तावेज में उसे ‘गोल्डन कार्ड’ बताया गया। ऐसे में कांग्रेस यह दावा कर सकती है कि यह जालसाजी नहीं है बल्कि एक अलग असली कार्ड है जिसका आईडी नंबर वही है। लेकिन यह संभव नहीं है। UAE में हर निवासी को 15 अंकों का एक यूनिक एमिरेट्स आईडी नंबर दिया जाता है।

यह नंबर व्यक्ति के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से जुड़ा होता है, जो फेडरल अथॉरिटी फॉर आइडेंटिटी, सिटिजनशिप, कस्टम्स एंड पोर्ट सिक्योरिटी के केंद्रीय डेटाबेस में दर्ज रहता है। यह नंबर कभी नहीं बदलता, चाहे कार्ड की अवधि खत्म हो जाए, उसे रिन्यू किया जाए, व्यक्ति वीजा या स्पॉन्सर बदल ले या फिर गोल्डन वीजा में अपग्रेड हो जाए।

UAE के असली एमिरेट्स आईडी नंबर पूरी तरह यूनिक होते हैं और दोबारा इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। इसलिए अलग-अलग दस्तावेज होने के बावजूद एक ही नंबर का इस्तेमाल संभव नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कॉन्ग्रेस द्वारा पेश किया गया दस्तावेज फर्जी है।

किशोरों के अपराध समाज के लिए सबसे गंभीर समस्या; 400 रुपए के लिए 3 नाबालिगों ने हत्या की और चौथे ने वीडियो बनाया

सुभाष चन्द्र

अब समय आ गया है कि Juvenile Justice Act को पूरी तरह ख़तम कर देना चाहिए और नाबालिगों को बालिग की तरह अपराधी माना जाना चाहिए इसे पोक्सो एक्ट से कंफ्यूज करने की जरूरत नहीं है जो नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण रोकने के लिए है और पोक्सो एक्ट में भी अदालतों को किसी तरह की नरमी नहीं दिखानी चाहिए

आज सुबह खबर पढ़ कर मैं दंग रह गया जिसके अनुसार दिल्ली के मुस्तफाबाद में (muslim dominated area) 3 नाबालिग लड़कों ने मोहम्मद कैफ (25) की चाकुओं से हत्या कर दी और उनका चौथा साथी हत्या का वीडियो बनाता रहा मुस्तफाबाद में 30% मुस्लिम हैं और वहां कुछ localities में 90% तक मुस्लिम रहते हैं। अभी एक वीडियो रिपोर्ट सुन रहा था जिसमें वहां के कुछ लोग बता रहे थे कि पिछले 6 महीने में 3 हत्याएं पहले भी हो चुकी हैं कैफ की हत्या करने वालों का किसी रिपोर्ट में कहीं नाम नहीं बताया गया है कैफ से इन चारों लड़कों ने 400 रुपए लेने थे और रुपए न मिलने की वजह से उसकी हत्या कर दी

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आज के एक अख़बार के अनुसार ऐसी हत्याएं दिल्ली में कई जगह हुई हैं :- 

-10 फरवरी को ख्याला में 2 नाबालिगों ने मामूली विवाद पर एक किशोर की चाकू घोंप कर हत्या कर दी;

-23 फरवरी मंगोलपुरी में सिगरेट मांगने पर हुए विवाद में नाबालिगों के एक गुट ने 17 साल के लड़के की हत्या कर दी;

-5 मार्च को उत्तम नगर में तरुण (26) की एक नाबालिग ने अन्य लोगों के साथ मिलकर (मुस्लिम महिला पर रंग पड़ने की वजह से) हत्या कर दी;

-24 मार्च को नेहरू विहार में 3 नाबालिगों ने घर में घुस कर हत्या कर दी

इसके अलावा भी आए दिन नाबालिगों के अपराधों की खबरें आती रहती है जिसमें यौन अपराध (बलात्कार) भी शामिल हैं बड़े घरों के नाबालिग तो अक्सर सड़कों पर तेज कार चला कर लोगों को कुचलते हुए देखे गए हैं लेकिन कुछ दिन बाद सब जमानत पर छूट जाते हैं और मुकदमेबाजी चलती रहती जिस पर शीघ्र निर्णय करना तो अदालतों की परंपरा ही नहीं है 

यह नहीं माना जा सकता कि यह अपराध नाबालिग नासमझी में कर रहे हैं उन्हें पूरा ज्ञान है कि हमारे किसी भी अपराध की सजा बस 3 साल सुधार गृह की कथित जेल होगी और जमानत तो पहले ही मिल जाएगी सुधार गृह की जगह सीधा जेल में रख कर अगर पत्थर तोड़ने के काम या अन्य कुछ ऐसे काम जिनसे कुछ tourchar हो, लिए जाएं तो कुछ तो भय होगा 

आज का नाबालिग मानसिक तौर पर पूरी तरह बालिगों की तरह सक्षम है उसे sex crime कैसे करना है, उसका पूरा ज्ञान है 16 साल की आयु तो छोड़िए, 10-12 साल के किशोर भी अपराध करने में पूरी तरह सक्षम हैं दंगो में या हिंदू त्योहारों की शोभा यात्राओं पर पत्थरबाजी करने वाले आधे से ज्यादा नाबालिग दिखाई देते हैं वंदे भारत या अन्य नई ट्रेनों पर पत्थर मारने वाले या रेल पटरियों पर पत्थर रखने वाले और ट्रैक्स की फिश प्लेट्स निकालने वाले बहुत नाबालिग दिखाई देते हैं जो भयंकर ट्रेन दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं

इसलिए अब Juvenile Justice एक्ट को पूरी तरह ख़त्म करने की जरूरत है वैसे juvenile कोर्ट को शक्तियां हैं वह 16-18 वर्ष के नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाए लेकिन वह बहुत प्रभावशाली नहीं है और इसलिए एक्ट ही ख़त्म होना चाहिए अगर समाज में सुधार लाना है

न हॉर्मुज खुला, न बदली ईरान की सत्ता… कंफ्यूजन में ट्रंप प्रशासन; कभी वापसी की बात तो कभी युद्ध जारी रखने का दावा: अमेरिका के सामने क्या हैं चुनौतियाँ?

                                                                                          प्रतिकात्मक तस्वीर (साभार- chatgpt)
अमेरिका अब ईरान युद्ध से पीछे हटने को तैयार है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान से समझौता हो या न हो, अमेरिका 2-3 सप्ताह के भीतर अपनी सैन्य कार्रवाई खत्म कर देगा और ईरान युद्ध से बाहर हो जाएगा। अब सवाल ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की ऐसी क्या मजबूरी आ गई जो ईरान को युद्ध में परास्त करने के जिद को छोड़कर बगैर समझौते के युद्ध खत्म करने की बात कह रहे हैं। अब होर्मुज खुलवाने और होर्मुज पर नियंत्रण की बात भी वे भूल चुके हैं।

क्या कहा राष्ट्रपति ट्रंप ने

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच डील की उम्मीद बनी हुई है। ईरान अगर बातचीत की मेज पर आता भी है तो इससे फर्क नहीं पड़ेगा। ईरान से शर्तों के साथ बातचीत करने का दम भरने वाले राष्ट्रपति ट्रंप को अब कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान से डील हो या न हो। उन्होंने यह भी कहा है कि होर्मुज खुले या न खुले, ये सिर्फ अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। दुनिया के दूसरे देश भी आगे आकर इसे खोलने की कोशिश करें।

उन्होंने कहा कि फ्रांस और दूसरे देश अगर तेल चाहते हैं तो होर्मुज स्ट्रेट होकर जा सकता है, अमेरिका का उससे कोई लेना-देना नहीं है।

हालाँकि ईरान की पार्लियामेंट ने यहाँ से गुजरने वाली जहाजों से टोल वसूलने का मन बना लिया है और एक प्रस्ताव पास किया, जिससे ईरान की मोटी कमाई होगी। ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका- इजरायल के तेल- गैस टैंकर यहाँ से नहीं गुजर सकते। ऐसे में अमेरिका के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल काम है। युद्ध से निकलने को बेताब अमेरिका इसमें फँसना नहीं चाह रहा है।

ईरान में रिजीम बदलने का दावा किया

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन हो चुका है’। उनके मुताबिक, ईरान के नए नेता पहले के नेताओं की तुलना में ‘ कम कट्टरपंथी’ और ‘ज्यादा समझदार’ हैं। उन्होंने ईरान को पूरी तरह तबाह करने का दावा भी किया है।
उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब कोई एंटी एयरक्राफ्ट नहीं बची है। अब कोई मुकाबला ईरान नहीं कर पा रहा है और कोई हम पर गोली भी नहीं चला रहा है। ईरान के पास कोई सैन्य साजो सामान नहीं है। न ही नौसेना बची है और न ही सामान इसलिए समझौता की गुहार लगा रहे हैं।

कम से कम 6 महीने तक लड़ने में दिक्कत नहीं- ईरान

ईरान ने समझौते के लिए शर्ते रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा को फोन कर कहा है कि उनपर भविष्य में इस तरह से हमले नहीं किए जाने की गारंटी चाहिए। ईरान पर आक्रमण तुरंत बंद हो।

दूसरी तरफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स ने मिडिल ईस्ट में काम करने वाली अमेरिकी 18 कंपनियों को तुरंत बोरिया बिस्तर समेटने की चेतावनी दी है और कहा है कि युद्ध में अमेरिका को तकनीकी मदद देने की वजह से इन कंपनियों को अब मिडिल ईस्ट छोड़ना पड़ेगा, वरना उन पर हमले होंगे।

ईरान ने कहा है कि कम से कम 6 महीने तक ईरान युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं है। उनका कहना है कि ईरान के पास अभी सैन्य साजो सामान से लेकर हर चीज का इतना स्टॉक है कि वह अगले कम से कम 6 महीने तक बगैर दिक्कत के युद्ध लड़ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट बना अमेरिका के लिए मुसीबत

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया पर दबाव बना है। दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल-गैस की आवाजाही इस मार्ग से होती है। दुनिया के इस व्यस्ततम मार्ग पर ईरान का कब्जा है। उसने अपने ‘मित्र देशों’ को इससे तेल और गैस से भरी जहाजों को सुरक्षित ले जाने की इजाजत दी है।

अमेरिका की चाह कर भी यहाँ कुछ नहीं चल रही है। पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करेगा, फिर उन्होंने नाटो देशों से इसमें मदद करने की गुहार लगाई।

ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन समेत ज्यादातर नाटो देशों ने मना कर दिया। इसके बाद अमेरिका खुद ये कह रहा है कि ईरान प्रशासन से बात कर कई देश अपना तेल-गैस होर्मुज स्ट्रेट से ले जा रहे हैं और आवाजाही चल रही है। एक तरह से अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए न तो अपनी सेना लगाना चाहता है और न ही मुसीबत मोल लेना चाहता है।

युद्ध में अमेरिका का हो रहा बेहिसाब खर्च

राष्ट्रपति ट्रंप को लगा था कि ईरान युद्ध ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा और 2-4 हफ्तों में बम गिरा कर ईरान को काबू में किया जा सकेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप पर जल्द से जल्द युद्ध खत्म करने का दबाव इसलिए भी है क्योंकि अमेरिकी खजाने पर हर दिन करोड़ों की चोट लग रही है। हर सेकेंड अमेरिका को 10 लाख रुपए खर्च करना पड़ रहा है।

सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर हमले के लिए हर दिन अमेरिका 8455 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। 28 फरवरी से 31 मार्च तक अमेरिका के 2 लाख 63 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस खर्च को राष्ट्रपति ट्रंप अब खाड़ी देशों से वसूलने का प्लान बना रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी देश को युद्ध का खर्च उठाने के लिए कहा है।

ट्रंप के करीबी वेंस और रुबियो के बीच मतभेद

व्हाइट हाउस में ईरान युद्ध को लेकर सिरफुटव्वल है। जानकारी के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की अपनी टीम में ही इस समय दो गुट बन गए हैं और दोनों के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है।

एक गुट उन लोगों का है जो देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति को संभालते हैं। इनका कहना है कि अगर यह युद्ध और लंबा खिंचा, तो पेट्रोल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। उन्हें डर है कि अगर आम जनता को महँगा पेट्रोल खरीदना पड़ा, तो वे ट्रंप के खिलाफ हो जाएँगे और उनका समर्थन करना बंद कर देंगे। नवंबर 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनाव में इसका असर पड़ेगा। अगर परिणाम राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जाते हैं तो वह देश में काफी कमजोर हो जाएँगे।

यही वजह है कि ट्रंप के बेहद करीबी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को युद्ध को लंबा खिंचने को लेकर जमकर लताड़ लगाई है और कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को बरगलाया और उन्हें ये बताया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान है और युद्ध जल्दी ही निपट जाएगा।

व्हाइट हाउस का दूसरा गुट ईरान युद्ध को यूँ ही खत्म करने के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि अगर अभी हमला रोक दिया गया, तो ईरान इसे अपनी जीत समझेगा और बहुत जल्द परमाणु बम बना लेगा। उन्हें डर है कि अधूरा छोड़ा गया काम आगे चलकर अमेरिकी सैनिकों के लिए और भी बड़ा खतरा बन सकता है। उनका तर्क है कि ईरान को अभी पूरी तरह कमजोर करना जरूरी है।

राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जल्द ही अपने अंजाम तक पहुँचने वाला है।

अमेरिका में बढ़ रही महँगाई और बढ़ रहा विरोध प्रदर्शन

अमेरिका में गैस और तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। इस वजह से महँगाई बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वह ईरान युद्ध से बाहर निकलने के बाद जल्द इस पर ध्यान देंगे। वह जल्द ही इस युद्ध से बाहर निकल जाएँगे।

अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर बड़े बड़े शहरों में प्रदर्शन का दौर जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप के कथित तानाशाही के खिलाफ ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन हो रहे हैं और ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने और गिरफ्तार करने तक की माँग की जा रही है। प्रदर्शनकारी ट्रंप की युद्ध नीति, संघीय इमीग्रेशन कानून , फ्यूल की बढ़ती कीमत और देश में बढ़ रही महँगाई को मुद्दा बनाया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप हम पर एक तानाशाह की तरह राज करना चाहते हैं, लेकिन यह अमेरिका है। यहाँ असली ताकत आम लोगों के हाथों में है, न कि उन लोगों के हाथों में जो खुद को राजा समझना चाहते हैं और न ही उनके अरबपति साथियों के हाथों में है। अमेरिका के न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन DC और लॉस एंजिल्स सहित हर बड़े शहर में ट्रंप विरोधी प्रदर्शन हुए हैं।

तेल और गैस की विश्वव्यापी समस्या पैदा होने से अमेरिका पर दबाव पड़ा है। आंतरिक और बाहरी समस्याओं में राष्ट्रपति ट्रंप फँस गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा नहीं कर पाने का एकमात्र रास्ता अमेरिकी सेना का ईरान में जमीनी कार्रवाई से संभव है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही कहा था कि वह अपनी सेना को ऐसी ‘बेवकूफाना’ जमीनी लड़ाइयों में नहीं झोकना चाहते जहाँ अमेरिकी सैनिकों की जान जाए। लेकिन दूसरी तरफ, तेल की कमी की वजह से जो महँगाई बढ़ रही है, उसे रोकने के लिए उनके पास अब ऑप्शन खत्म होते जा रहे हैं।

अमेरिका ने युद्ध शुरू करने से पहले अपने 4 लक्ष्य बताए थे। ईरान के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करना, ईरानी नौसेना शक्ति को पूरी तरह खत्म करना, ईरान के क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए समाप्त करना। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ये सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। अमेरिका में इसी साल नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने जब इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला शुरू किया था तो अमेरिका की बड़ी आबादी इस पक्ष में था कि ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न बनने से रोकना जरूरी है। लेकिन अब राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में लगातार कमी आ रही है।

अमेरिका में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और ट्रंप- वेंस की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है। राष्ट्रपति ट्रंप जल्द से जल्द ईरान युद्ध खत्म कर अपना ध्यान अमेरिका के अंदरुनी समस्याओं को खत्म करने पर लगाना चाहते हैं क्योंकि उनके लिए ये चुनाव जीतना बेहद जरूरी हैं। यह संसद में उनकी ताकत और कुर्सी बचाए रखने के लिए आवश्यक है।

ममता बनर्जी अमित शाह को मछली, मीट खाने को कह रही है, क्या ये उसकी हताशा है?

सुभाष चन्द्र

पुरुलिया की रैली में ममता ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आ गई तो लोगों के मछली और मीट खाने पर भी रोक लगा देगी। उसने कहा कि भाजपा कहती है कि वो मछली, मीट और अंडे नहीं खा सकती और किसी धर्म को नहीं मानती और भाजपा आदिवासियों का शोषण करती है और उसके राज्यों में महिलाओं पर हमले होते हैं। भाजपा ने कब ये कहा, हमें नहीं पता और अपने राज्य में ममता पहले देखे महिलाओं की क्या हालत है। 

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भाजपा की खुद की और साथी दलों के साथ अभी 22 राज्यों में सरकार है। क्या किसी राज्य में मछली और मीट खाने पर रोक लगाई है? राहुल गांधी भी कहता था कि भाजपा लोगों को अपने पसंद का खाना नहीं खाने देती। वो कहना चाहता था कि मुस्लिमों को गौमांस नहीं खाने दिया जाता और शायद ममता गौमांस कहना भूल गई कि बंगाल के मुस्लिमों को भी वह खाने नहीं दिया जाएगा। ममता ने कहा है कि 1.2 करोड़ वोट काट दिए गए हैं बंगाल में और यही उसकी तड़प का कारण लगता है

अमित शाह ने कहा कि वह बंगाल में 15 दिन रहेंगे तो ममता ने अमित शाह को ऐसे व्यंजनों की लिस्ट भेजी जो पूर्ण रूप से nonveg हैं और सलाह दी कि वे ये व्यंजन भी खाएं जबकि उसे पता है अमित शाह शाकाहारी है। ये राज्य में आए गृहमंत्री का सरासर अपमान है। 

ममता को किसी की परवाह नहीं है, केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक को अपने ठेंगे पर रखती है। सुप्रीम कोर्ट से बार बार फटकार मिलती है लेकिन उस पर कुछ असर नहीं है क्योंकि उसको पता है सुप्रीम कोर्ट में भी तारीख लगती रहेंगी और तब तक चुनाव ख़त्म हो जाएंगे। अगर IPAC की रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट कार्रवाई कर देता तो हो सकता था कुछ असर होता। गुंडागर्दी का तांडव चलते हुए भी अगर लोग उसे फिर से सत्ता देते हैं तो वे अपनी दुर्दशा के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे और दुर्दशा होनी तय है

ममता की जीत के लिए 2 Opinion Poll में भविष्यवाणी कर दी गई है -Votevibe-CNN-News18 survey ने ममता को 184-194 सीट दी हैं और Matrix-IANS survey ने उसे 155-170 और बीजेपी को 100-115 सीट दी हैं। वैसे ज्योतिषविद भी लगे हैं और अधिकांश का कहना है कि ममता अबकी बार सत्ता में नहीं आएगी, ऐसी भविष्यवाणी पिछली बार भी की गई थी

चुनाव में ममता के रहते निष्पक्ष चुनाव होना किसी भी हाल में संभव नहीं है। चुनाव आयोग ने 2.4 लाख CRPF जवानों की मांग की है लेकिन उन्हें ऐसे लोगों को देखते ही गोली मारने के आदेश होने चाहिए जो वोटरों को घर से निकलने से रोके, जबरन TMC को वोट देने के लिए कहे और भाजपा को वोट देने पर मरने मारने की धमकी दे

बंगाल में सबसे बड़ा फैक्टर cut money है। ये ऐसा मकड़जाल है जिसमे आम आदमी फंसा हुआ है और वह खुद उसे छोड़ना नहीं चाहता क्योंकि पैसे के लेनदेन से काम हो जाता है। इस फैक्टर के चलते भी ममता को जीत की उम्मीद रहती है। इसके अलावा मुस्लिम वोट तो हैं ही उसके पाले में - हुमायूं कबीर कितना वोट काट सकता है यह तो समय ही बताएगा। अबकी ओवैसी ने उसके साथ गठबंधन कर लिया है। पिछले चुनाव में Pirzada Abbas Siddiqui की पार्टी Indian Secular Front (ISF) ने 32 सीट लड़ी लेकिन एक ही जीत पाया। वैसे अबकी सुना है वामपंथी भी चुनाव से पहले मंदिर मंदिर भटकने लगे हैं ताकि हिंदू बहक जाएं

‘शीशमहल में मुर्गा बनाकर पीटे गए थे राघव चड्ढा’: पूर्व AAP नेता नवीन जयहिंद का दावा, कहा- उसी दौरान आँख में लगी चोट का इलाज कराने गए UK


आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर एक दावा सामने आया है। हरियाणा में ‘AAP’ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने Video शेयर कर आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास ‘शीशमहल’ में राघव चड्ढा के साथ मारपीट की गई थी।

नवीन जयहिंद ने सोशल मीडिया पर Video शेयर कर राघव चड्ढा पर निशाना साधकर कहा कि वे दिल्ली और पंजाब के बड़े राजदार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ‘शीशमहल’ में राघव चड्ढा को ‘मुर्गा’ बनाकर पीटा गया था, तब वो चुप क्यों थे। नवीन का दावा है कि उस दौरान राघव की आँखों में चोट लगी थी, जिसका इलाज राघव ने इंग्लैंड जाकर करवाया था।

डीलिंग और चार लोगों का जिक्र

नवीन जयहिंद ने Video में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूछा कि उस वक्त वहाँ कौन से चार लोग मौजूद थे? नवीन जयहिंद ने पैसों के लेन-देन और सूटकेस की डीलिंग का भी जिक्र किया। नवीन ने राघव को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह राज्यसभा में इतना बोलते हैं, तो इस पिटाई के सच को भी जनता के सामने रखें।

कौन हैं नवीन जयहिंद?

नवीन जयहिंद आम आदमी पार्टी के पुराने नेता रहे हैं। वे साल 2011 के अन्ना आंदोलन से जुड़े थे। उन्हें हरियाणा में पार्टी की कमान सौंपी गई थी। हालाँकि, साल 2022 में आपसी मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। फिलहाल इन आरोपों पर राघव चड्ढा या अरविंद केजरीवाल की तरफ से कोई सफाई नहीं आई है।

मालदा हिंसा को भड़काने वाले मोफक्कारुल इस्लाम का AIMIM के बाद निकला TMC कनेक्शन भी: सांसद कल्याण बनर्जी संग तस्वीर में मुस्कुराता दिखा, और भी मिले सबूत

                                      मालदा हिंसा का साजिशकर्ता निकला TMC का आदमी
पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और भीड़ को भड़काने के मुख्य आरोपित मोफक्कारुल इस्लाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन उपद्रवियों को ‘बाहरी’ बता रही थीं, वो खुद पहले TMC में रह चुका है और वर्तमान में उसके विपक्षी नेताओं के साथ भी करीबी संबंध सामने आए हैं।

TMC से AIMIM तक का सफर और वायरल तस्वीरें

मोफक्कारुल इस्लाम का इतिहास खंगालने पर पता चला कि वह पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का सक्रिय सदस्य था। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में उसने पाला बदला और ओवैसी की पार्टी AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

गिरफ्तारी के बाद उसकी TMC सांसद कल्याण बनर्जी और अन्य बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल हो रही हैं। यह साफ करता है कि हिंसा भड़काने वाला कोई अनजान बाहरी नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीति के गलियारों में अच्छी पकड़ रखने वाला व्यक्ति है।

NIA की एंट्री और साजिश का खुलासा

पुलिस का दावा है कि कालियाचक में सात जजों को घंटों बंधक बनाने और भीड़ को उकसाने के पीछे मोफक्कारुल का ही दिमाग था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब NIA ने जाँच की कमान संभाल ली है।

अब तक इस केस में ISF उम्मीदवार शाहजहाँ अली कादरी समेत कई लोग पकड़े जा चुके हैं। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से अब उन चेहरों का भी पर्दाफाश होगा जिन्होंने राजनीतिक संरक्षण में मालदा की शांति भंग करने की साजिश रची थी।

‘BJP को वोट मत देना वरना…’: लोगों को घर-घर जाकर धमका रहा था TMC का मुस्लिम नेता, पुलिस ने किया गिरफ्तार

                           वोटर्स को धमकाया, TMC नेता राजू मंडल गिरफ्तार (साभार : Video SS)
चुनाव आयोग के सख्त निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुर्शिदाबाद से तृणमूल कांग्रेस  (TMC) मुस्लिम 
नेता राजू मंडल को गिरफ्तार कर लिया है। राजू मंडल पर मतदाताओं को डराने और धमकानेका गंभीर आरोप है। धमकी देते हुए मुस्लिम नेता राजू मंडल का Video भी शामिल आया है।

सवाल है कि क्या चुनाव आयोग TMC को इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इजाजत देगा? चाहिए तो ये कि इस क्षेत्र से TMC को इस क्षेत्र से चुनाव ही लड़ने की इजाजत नहीं दे, जो आगे आने वाले चुनावों के लिए मिसाल बनेगी। चुनाव आयोग को इस बात पर भी निगाह रखनी होगी जो मुस्लिम क्षेत्रों में घुसपुसाहट कर बीजेपी को वोट नहीं देने का खेल खेला जाता है।     

अमित मालवीय ने ट्विट कर जानकारी दी और राजू मंडल को मुस्लिम नेता बताया है। राजू मंडल अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने लोगों से कहा, “आप भाजपा (पद्म फूल) को वोट नहीं दे सकते। अगर कोई समस्या हुई तो वोट डालने जाने की जरूरत नहीं है। मैं आपके घर चनबारा और रसगुल्ला भेज दूँगा, वरना आपको तृणमूल को ही वोट देना होगा।”

जानकारों का मानना है कि मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए ऐसे और भी नेताओं पर कार्रवाई की जरूरत है। कई अन्य TMC नेताओं पर भी वोटरों को डराने के आरोप लगे हैं। राज्य में शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए पुलिस पर भविष्य में ऐसी और गिरफ्तारियाँ करने का दबाव बढ़ सकता है।

चीफ जस्टिस साहब, रात 2 बजे तक जागने के मौके पहले भी आए थे, लेकिन जजों पर हमला हुआ तब ही नींद उड़ी

सुभाष चन्द्र

आखिर चीफ जस्टिस सूर्यकांत को सख्त क्यों होना पड़ा, उसकी असली वजह यह है कि ऊंट अब पहाड़ के नीचे आया है। जब अपने सिर पर डंडा पड़ता है तभी सच्चाई सामने आती है। ठीक वही हाल ममता ने सुप्रीम कोर्ट को दिखा दिया। नेताओं के लिए लचीला रुख अदालतों पर ही भारी पड़ रहा है। अभी ममता ने आईना दिखाया है बाकी नेताओं की लम्बी लिस्ट है। आगे-आगे देखिए होता है क्या!    

बंगाल के मालदा में 7 जजों पर भीड़ ने बंधक बना कर हमला किया उन 7 में से 3 तो महिला जज थी और ममता बनर्जी ने सफाई दे दी कि उसको तो इस घटना का पता ही नहीं था और राज्य का Law & Order तो वैसे भी अब उसके हाथ में नहीं है (मतलब वह अब चुनाव आयोग के हाथ में है) अगर वह ममता सरकार के हाथ में नहीं है तो कपिल सिब्बल और अन्य वकील कैसे सुप्रीम कोर्ट में उसकी सरकार की तरफ से खड़े थे। चीफ जस्टिस को आदेश देना चाहिए कि उन वकीलों की फीस राज्य सरकार की तरफ से न दी जाए

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच से सुनवाई की चीफ जस्टिस ने कहा This was not a routine incident. It was ex facie a calculated well- planned and deliberate move to demoralise the judicial officers and impact the ongoing process of adjudication of objections”. उन्होंने यह भी कहा कि वो रात 2 बजे तक मामले की monitoring कर रहे थे और he had never seen such a “politically polarised state like west Bengal. बेंच ने कहा the incident is a “complete failure of administration” and a direct challenge to authority.

सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों को virtually कोर्ट में पेश होने को कहा -

Chief Secretary of West Bengal

Director General of Police (DGP) of West Bengal

District Magistrate (DM) of Malda

Superintendent of Police (SSP/SP) of Malda

इन लोगों से सीधा सवाल पूछा जाना चाहिए कि आपने किसके कहने पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या चुनाव आयोग ने रोका या ममता ने रोका? उनसे सवाल जरूर होने चाहिए, कहीं ऐसा न हो, बस बुला के बिठा लिया और जिरह वकीलों से होती रहे चंद्रचूड़ ने मणिपुर के DGP को बुला कर ऐसा ही किया था पूरा दिन वह कोर्ट में बैठे रहे किसी जज ने एक सवाल नहीं पूछा

चीफ जस्टिस का कहना कि इस घटना ने सीधा “authority” को चुनौती दी है लेकिन सच तो यह है कि ममता अपने आपको राज्य में supreme authority मानती है जो सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर है 

चीफ जस्टिस साहब ममता राज में लोगों पर खासकर हिंदुओं पर अनेक घोर अत्याचार हुए हैं जिनके लिए भी आपको रात रात भर जाग कर monitoring करनी चाहिए थी लेकिन वह आपने केवल तब किया जब judicial officers पर हमले हुए एक बड़ा सीधा सा सिद्धांत (कानून) है कि सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालना और उसे काम करने से रोकना अपराध है वह अपराध ममता ने IPAC की ED की रेड में किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट उस मामले को भी अभी तक लिए बैठा है जबकि ममता ने माना वह वहां गई लेकिन पार्टी अध्यक्ष के नाते लेकिन कोई भी हो वह ED के काम में रुकवाट नहीं डाल सकता उस पर तो निर्णय दिया होता

बहुत लोगों का कहना है केंद्र को बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए केंद्र को ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन अब ठीक चुनाव से पहले किया नहीं जा सकता पहले किया जाता तब यही सुप्रीम कोर्ट जो आज उबल रहा है सवाल उठाता कि जिस सरकार के पास करीब तीन चौथाई बहुमत है आपने उसे कैसे गिरा दिया और फिर जनता भी ममता को “पीड़ित” मानकर फिर उसे वोट देती

इतना ही नहीं जब 2 मई, 2021 को चुनाव नतीजे आए तो उसी दिन से हिंदुओं पर हमले शुरू हो गए और 80 हजार लोगों को घर से बेघर होना पड़ा उसके लिए भी PIL दायर हुई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया उस दिन जो भी चीफ जस्टिस था उसे नींद नहीं आनी चाहिए थी

एक बात तो निश्चित है इस महीने के चुनाव में ममता अगर जीत गई तो 2021 की तरह फिर हिंदुओं पर हमले होंगे और उसके लिए यह नहीं देखा जाएगा कि कौन दलित है, आदिवासी है, OBC है या सवर्ण है