सुभाष चन्द्र
भारत में अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी और ममता बनर्जी जैसे अराजक नेताओं ने राजनीति को गन्दी सियासत बना दिया है। हैरानी होती है इन जैसे नेताओं और इनकी पार्टी को वोट देने वाले फूहड़ वोटरों पर। इन नेताओं की अराजकता के लिए जनता भी जिम्मेदार है। इस कटु सच्चाई इनको वोट देने वाले नकार नहीं सकते। जो राहुल को नेता मानते है दिमाग खाली होने का सबूत देते हैं। जो चुनाव होते ही विदेश में बैठे अपने आकाओं की गोदी में चला जाता है। राहुल भक्त बताएं इस समय जिस नेता को देश में होना चाहिए था विदेश क्यों भाग जाता है?
बंगाल में करारी हार के बाद भी ममता बनर्जी सत्य का सामना नहीं करना चाहती। वो कह रही है कि “मैं इस्तीफ़ा नहीं दूंगी, हमने चुनाव नहीं हारा …मैं राजभवन नहीं जाउंगी। सवाल ही नहीं उठता, नैतिक रूप से हम जीत हैं”। वो आरोप लगा रही है उसके पेट पर लात मारी गई लेकिन किसी कैमरे में आया हो हो सबूत दे।
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लेखक चर्चित YouTuber |
ममता जब अपने ही दांत जिव्हा(जुबान) काट दे तब किसी को दोष नहीं देना चाहिए। ममता को हराने में इसका सनातन विरोधी और बंगाल में धूमधाम से मनाए जाने वाली "काली पूजा" के मनाने पर पाबंदियां। सिर्फ अपने मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने के लिए। मुसलमानों ने वोट देकर खुश तो कर दिया लेकिन सनातनी वोट ने जमीन पर दे मारा। दूसरे, ममता की हार के पीछे BJP या RSS नहीं INDI गठबंधन है।अखिलेश यादव को प्रचार के लिए जाने से रोका था लेकिन नंबर बढ़ाने चला गया अंजाम ममता हार गयी। अखिलेश जिस-जिस राज्य में गया चुनाव हरवा कर ही शांति मिली। दूसरे, INDI गठबंधन की कांग्रेस और कम्युनिस्ट भी तृणमूल के खिलाफ लड़े।
अगर इस्तीफा नहीं देना चाहती मत दे किसे पागल बना रही ममता। मई 8 को विधान सभा का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है और उसके साथ ही बन जाएगी "भूतपूर्व"। पाप का घड़ा भर गया बस फूटने का इंतज़ार है। अगला चुनाव आने तक शायद तृणमूल कांग्रेस का कोई नामलेवा भी होगा या नहीं भविष्य के गर्भ में छिपा है।नैतिक रूप से जीतने से क्या सरकार बना सकती हैं ममता बनर्जी। वैसे तो नैतिकता का तो नामोनिशान भी नहीं है इस महिला में। राजभवन नहीं जाएगी तो जेल जाना पड़ेगा क्योंकि हारने के बाद भी इस्तीफ़ा न देना राजद्रोह कहलायेगा। सरकारी भवन भी जबरन खाली करा लिया जाएगा क्योंकि अभी 60 दिन सुरक्षा बल वहां मौजूद रहेंगे।
राहुल गांधी ने कहा था कि हम RSS, भाजपा और भारत देश से लड़ रहे हैं। अब लड़ लिए RSS और भाजपा से। RSS ने पिछले 20 साल में बंगाल की सामाजिक मुख्यधारा जो बदलाव किया, उसका परिणाम कल सामने आया है। RSS ने एक Silent Killer की तरह काम किया।
2006 में बंगाल में RSS की 500 से भी कम शाखाएं थी, 2011 में 830 हो गई और 2024 में बढ़ कर ये 4540 हो गई जो 2026 में हर ग्राम पंचायत में 8000 हो जाएंगी। RSS ने पिछले 5 साल में घर घर जाकर जनमानस को जाग्रत किया जिसका परिणाम अब सामने आया है।
राहुल गांधी RSS, भाजपा और मोदी से कुछ नहीं सीख सकता। पिछले 12 साल में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राहुल गांधी पूरा देशद्रोही बन गया जिसका काम केवल मोदी को बदनाम करना और देश के खिलाफ साजिश करना रह गया। जबकि बंगाल में भाजपा ने पिछले 15 साल में कड़ी मेहनत की, सैकड़ों कारकर्ताओं का बलिदान दिया। 2011 में भाजपा की जीरो सीट थी, 2016 में 3 हुई, 2021 में 73 हुई और अबकी बार 206। जबकि कांग्रेस की 2016 में 44 सीट थी और CPM की 26 लेकिन 2021 में शुन्य पर आ गई दोनों पार्टी। इस बार केवल 2-2 सीट मिली हैं दोनों को।
इतनी बड़ी हार के बाद भी ममता और राहुल चुनाव चोरी का राग अलाप रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा है “चुनाव चोरी, संस्था चोरी। अब और चारा ही क्या है”। भाई चारा क्या होता है लालू यादव से पूछ लो। और ये चुनाव चोरी हुआ होता तो केरल में कांग्रेस गठबंधन सत्ता में कैसे आ गया, ये सोचने का दिमाग राहुल गांधी में नहीं है।
उधर अखिलेश यादव तड़प रहा है और कह रहा है कि ये राजनीति के इतिहास का सबसे काला दिन है। संजय राउत बक रहा है कि ये पाकिस्तान जैसा चुनाव है। बहुत याद आ रही है पाकिस्तान की तो क्या इमरान खान के तरह विपक्ष के सभी नेताओ को जेल में डाल दें। फिर सही में पाकिस्तान का चुनाव कह सकते हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल केरल कांग्रेस को जीत के लिए बधाई दी, केरल और तमिलनाडु, पुडुचेरी बंगाल और असम सभी राज्यों के मतदाताओं को धन्यवाद किया जबकि ममता, राहुल, अखिलेश या किसी भी विपक्ष के नेता ने भाजपा को असम, बंगाल और पुडुचेरी जीत के लिए बधाई नहीं दी। ममता ने तो सुवेंदु अधिकारी को भी बधाई नहीं दी।
राहुल गांधी, अखिलेश और संजय राउत जैसे लोग ममता के लिए टसुए बहा रहे हैं लेकिन वो 8 दिसंबर, 2019 को TMC के गुंडों द्वारा बंधू प्रकाश पाल, उसकी 8 महीने की गर्भवती पत्नी और 5 साल के बच्चे की मुर्शिदाबाद में की गई निर्मम हत्या को याद नहीं कर रहे। वो याद नहीं करते 8 वर्ष पहले कैसे 22 साल के त्रिलोचन महतो को TMC के गुंडों ने फांसी पर लटका दिया था क्योंकि उसने भाजपा का समर्थन कर दिया था।
राजनीति के इतिहास का यह काला दिन नहीं है बल्कि कल राजनीति पर छाए हुए तानाशाही के बादल छट गए। एक बात साफ़ है जो सनातन धर्म और भगवान राम से नफरत करेगा, उसका पतन निश्चित है। यह बात अगर आज भी समझ नहीं आती इन लोगों को तो इनका आगे भी सर्वनाश होना तय है।