‘पुलिस की वर्दी पहनकर जंतर-मंतर पर करो हंगामा’: CJP के प्रदर्शन में ‘पाकिस्तानी साजिश’ पर बड़ा खुलासा, जैश के आतंकी हमीम ने खोले राज

                       ISI से जुड़ा हमीम मंडल (बाएँ) और उसकी गर्लफ्रेंड(दाएँ) गिरफ्तार (फोटो साभार: TOI)
पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा किया है। शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को पूर्वी बर्धमान जिले से 24 वर्षीय मोहम्मद हमीम मंडल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार वह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम कर रहा था और पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी के हैंडलरों के इशारे पर सक्रिय था। पुलिस ने यह भी बताया कि उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी संपर्क थे।

शनिवार (01 अगस्त 2026) को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान STF के आईजी गौरव शर्मा ने बताया कि हमीम मंडल के मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और एनक्रिप्टेड सोशल मीडिया चैट से जाँच एजेंसियों को अहम डिजिटल सबूत मिले हैं।

जाँच में सामने आया कि हमीम मंडल की योजना दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में घुसने की योजना थी। पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों ने हमीम को प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी में घुसकर तोड़फोड़ करने के आदेश दिए थे।

ऐसे में सवाल यह भी है कि पुलिस वर्दी कहां से और किसकी मदद से हासिल की जानी थी? इसकी भी जाँच बहुत जरुरी है। 

आईजी गौरव शर्मा ने बताया, “हमीम, पाकिस्तानी हैंडल और फोन नंबर इस्तेमाल करने वाले लोगों से सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए मिले निर्देशों पर काम कर रहा था। उसे पुलिस की वर्दी खरीदकर, एक ग्रुप के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर जाकर वहाँ हंगामा करने का निर्देश दिया गया था।” उन्होंने कहा कि इसकी जाँच चल रही है कि क्या वह इस ग्रुप को बना पाया और दिल्ली गया था या नहीं।

जाँच में यह भी सामने आया कि हमीम को बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की रेकी करने को कहा गया था। गौरव शर्मा ने बताया कि शुभेंदु अधिकारी को पाकिस्तान से निशाना बनाया गया था, इसके लिए हमीम को निर्देश थे कि वह मुख्यमंत्री की उन जगहों के बारे में जानकारी जुटाए जहाँ वे बिना सुरक्षा के जाते हैं। शुरुआती जाँच के बाद पुलिस ने हमीम मंडल को कोर्ट मे पेश किया, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

हमीम मंडल के पाकिस्तानी-समर्थित आतंकी मॉड्यूल की जाँच के दौरान STF को अर्पिता सरकार के साथ उसकी चैट मिली, जिसके बाद झारखंड से उसे भी गिरफ्तार किया गया। वह हमीम मंडल की गर्लफ्रेंड है, लेकिन इकलौती नहीं। हमीम उसे हनी-ट्रैप नेटवर्क की तरह इस्तेमाल करता था। उसे निशाने पर बड़े-बड़े नेता थे, हाल ही में अर्पिता झारखंड के मंत्री के संपर्क में थी।

STF ने हमीम मंडल और अर्पिता सरकार के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या दोनों ने किसी अन्य व्यक्ति को भी इस साजिश में शामिल करने की कोशिश की थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और साजिश की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

सेलेक्टिव क्यों हैं राहुल गांधी और CJP? झारखंड में सड़क पर उतरे युवाओं का सवाल


झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में गड़बड़ी, घोटालों और पेपर लीक को लेकर बवाल मचा हुआ है। छात्र और युवा सड़क पर उतर कर परीक्षा रद्द करने और सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। लेकिन 29 जुलाई,2026 को लोकसभा में 53 मिनट तक परीक्षा और पेपर लीक पर भाषण देने वाले राहुल गांधी ने एक बार भी झारखंड के छात्रों और युवाओं की मांगों का जिक्र नहीं किया। वहां पर परीक्षाओं में हो रही धांधली का मुद्दा नहीं उठाया, क्योंकि झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम की सरकार है। वहीं 29 जुलाई को ही झारखंड के बीजेपी सांसदों ने संसद भवन परिसर में झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने हेमंत सरकार और सरकार में शामिल कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सांसदों ने पूछा राहुल गांधी मौन क्यों है? इतना सब होने के बावजूद राहुल गांधी की आंखें क्यों नहीं खुलीं?

खड़गे, सोनिया, राहुल का दोहरा चरित्र – आदित्य साहू
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस दोहरी राजनीति करती है। दिल्ली में मांग करती है कि जांच हो और झारखंड में पूरी तरह मौन है। 19 अभ्यर्थी उत्पाद सिपाही दौड़ में मारे गए हैं। कांग्रेस झारखंड में मांग करे कि उन मृत बच्चों के परिजनों को हेमंत सरकार एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा तत्काल भुगतान करे। भाजपा की मांग है कि दिल्ली से कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी झारखंड की धरती पर जाएं, वहां की जनता इनका चेहरा देखना चाहती है और इनसे पूछना चाहती है कि आप लोगों का यह दोहरा चरित्र क्यों?

झारखंड में परीक्षा में धांधली के विरोध में सड़क पर उतरे छात्र और युवा
बुधवार 29 जुलाई को रांची में हजारों छात्रों ने जेपीएससी 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों में धांधली के विरोध में सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक संविधान यात्रा निकाली। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने झारखंड सरकार और आयोग से भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब छात्र और युवा सवाल कर रहे हैं कि राहुल गांधी सेलेक्टिव क्यों है? जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं पर अपनी आखें खोलें, परीक्षा रद्द करें और सीबीआई से जांच कराएं।

सरकार ने छात्रों को प्रदर्शन में हिस्सा लेने से रोका, बस मालिकों को धमकी
झारखंड की कांग्रेस और जेएमएम सरकार युवाओं के इस प्रदर्शन को दबाना और कुचलना चाहती है।  छात्रों को प्रदर्शन स्थलों तक पहुंचने से रोकने और यातायात व बस सेवाओं को प्रभावित करने की खबरें सामने आईं। रांची, हजारीबाग और अन्य शहरों में परीक्षा में गड़बड़ी व पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा का हवाला देकर छात्रों के जत्थों और वाहनों को रास्ते में ही रोका गया। प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाली कई बस सेवाओं और परिवहन के साधनों के मार्ग में फेरबदल किया गया या उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। प्रशासन की ओर से बस सेवाएं बंद रखने या बदलने का दबाव, और धमकाने जैसी परिस्थितियाँ देखने को मिलीं।

विरोध के बीच JPSC की मुख्य परीक्षा अगले आदेश तक स्थगित
बढ़ते विवाद और विरोध के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 को आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है। कथित अनियमितताओं की जांच सीआईडी (CID) द्वारा की जा रही है, जिसके तहत पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक और अन्य संबंधित लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। लेकिन सवाल है छात्रों के नाम पर दिल्ली की सड़कों पर हंगामा करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी कहां हैं? क्या छात्रों की आवाज़ सिर्फ वहीं सुनाई देती है, जहां राजनीतिक एजेंडा साधना हो? क्या झारखंड के छात्रों के अधिकार, उनका भविष्य और उनका इन पार्टियों के लिए कोई मायने नहीं रखता? जब मुद्दा राजनीति का नहीं, छात्रों के भविष्य का हो, तब यह चुनिंदा संवेदनशीलता और सुविधानुसार चुप्पी बहुत कुछ बयां करती है।

JPSC की कुल 10 पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच CBI के पास
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की पहली और दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सहित कुल 10 पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के पास है। 6 भर्ती जांच के दायरे में और 9 भर्ती परीक्षा स्थगित हो गई हैं। हालिया विवादों और 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच राज्य स्तर पर क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) द्वारा की जा रही है, जिसमें अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


स्पेन में घुसे हजारों अफ्रीकी घुसपैठियों को संभालने के लिए सेना तैनात, SC का आदेश बना ढाल: 6 साल पहले कैसे तबाही की कगार पर पहुँचा था यूरोप, भारत में भी घुसपैठियों के पास कानूनी ढाल

                                     स्पेन पहुँचे हजारो मोरक्को के घुसपैठिए (फोटो साभार-x@foxnews)

यूरोप एक बार फिर अवैध शरणार्थियों के नाम से काँप रहा है। दरअसल अफ्रीकी देश मोरक्को से बड़ी संख्या में अवैध शरणार्थी स्पेन में घुस गए हैं। ये लोग समुद्र तैर कर या जमीनी बॉर्डर के जरिए अवैध तरीके से स्पेन में घुस रहे हैं। सेउटा में घुसने से माइग्रेंट स्पेन के इलाके और आगे चलकर EU के इलाके में आ सकते हैं, जहाँ वे शरण माँग सकते हैं।

इन शरणार्थियों ने 8 साल पहले सीरिया संकट की याद ताजा कर दी है, जब यूरोप में बड़े पैमाने पर कट्टरपंथी शरणार्थी के तौर पर आए थे। स्पेन, फ्रांस, स्वीडन, जर्मनी समेत कई देशों में इनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि प्रशासनिक व्यवस्था चरमराने लगी। इसकी याद दिलाते हुए इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने शरणार्थियों के नए दौर पर चिंता जाहिर की है और कहा है कि वे स्पेन के साथ शेंगेन समझौता रद्द कर सकते हैं।

क्या है मामला

सेउटा मोरक्को के उत्तरी तट पर स्पेन के कंट्रोल वाला एक छोटा सा इलाका है। इससे सटे मेलिला एन्क्लेव में अफ्रीका और यूरोपियन यूनियन का जमीनी बॉर्डर है। सेउटा में हजारों शरणार्थी ब्रेकवॉटर के आस-पास तैरकर या बॉर्डर की बाड़ तोड़कर घुस गए हैं, जिससे छोटा-सा यूरोपियन देश स्पेन पर काफी दबाव बढ़ गया है। यहाँ तक कि स्पेन को सेना और ज्यादा पुलिस बल तैनात करनी पड़ी है।

अवैध तरीके से घुस आए बेलगाम शरणार्थियों के चलते बवाल मच गया है। यहाँ बड़ा मानवीय और सुरक्षा संकट पैदा हो गया है। दरअसल अचानक हजारों शरणार्थी सीमा पार कर घुसने लगे। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, हजारों शरणार्थी मोरक्को की सीमा पार कर स्पेन के शहर सेउटा में दाखिल हुए। नए जत्थे में 1500 से ज्यादा शरणार्थी हैं, जो समुद्र के रास्ते शहर में दाखिल हो रहे हैं। सेउटा के प्रशासनिक अधिकारी जुआन जीसस विवास के मुताबिक, पिछले हफ्ते भर से शरणार्थियों का आना काफी बढ़ गया है और संसाधनों की कमी हो रही है।

स्पेन में घुस रहे शरणार्थियों का वीडियो भी सामने आया है। सैकड़ों लोग इन्फ्लेटेबल ट्यूब और दूसरे फ्लोटेशन डिवाइस का इस्तेमाल करके ब्रेकवाटर के आसपास तैरते हुए दिखे। हजारों लोग जमीनी सीमा के गेट से घुसते दिखाई दिए। इससे घबरा कर सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी घबरा कर भाग गए।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन के सरकारी ब्रॉडकास्टर TVE ने अंदाजा लगाया है कि करीब 3000 लोग इस इलाके में घुसे हैं। समुद्र पार करते वक्त 9 शरणार्थियों की लाश भी पुलिस ने बरामद की है। इन शरणार्थियों में ज्यादातर मोरक्को के नागरिक हैं। दरअसल यूरोप में जमीन से घुसने का एकमात्र रास्ता मोरक्को और स्पेन की सीमा है। यहाँ तक कि सबसे आसान समुद्री रास्ता भी स्पेन तक ही जाता है। इसलिए 2021 के बाद 30 जुलाई 2026 को सबसे ज्यादा शरणार्थी स्पेन में घुस आए हैं। इसके साथ ही लगातार इनके आने का सिलसिला जारी है।

स्थानीय प्रशासन ने केन्द्र को आर्मी तैनात करने और नेशनल इमरजैंसी घोषित करने की माँग की है। स्पेन में आर्मी की हलचल तेज है। बख्तरबंद गाड़ियाँ घूमने लगी हैं। हालाँकि आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है।

क्या कहा मेलोनी ने

स्पेन में बॉर्डर पर बवाल के बाद इटली भी सचेत हो गया है। अवैध शरणार्थियों के आने पर इटली ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि वह ‘कड़े उपायों’ पर विचार कर रही हैं। उन्होंने स्पेन के साथ शेंगेन समझौते (Schengen Agreement) को अस्थायी रूप से निलंबित करने की चेतावनी दी है।

यूरोपीय देशों के बीच सीमा खुला रखने से जुडा शेंगेन समझौता इसके सदस्य देशों के बीच 1985 में हुई थी। जिसके तहत सदस्य देशों ने अपनी आपसी सीमाओं पर नियंत्रण समाप्त कर दिया है यानी इटली ने अपनी सीमा सील करने की चेतावनी दी है।

मेलोनी ने X पर लिखा, “सेउटा से आ रही तस्वीरें चौंकाने वाली हैं और एक बार फिर दिखाती हैं कि बिना कंट्रोल के अवैध घुसपैठ यूरोप के बॉर्डर की सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा खतरा है।”

उन्होंने कहा कि इटली इस पर विचार कर रहा है कि वह स्पेन के साथ शेंगेन एरिया को सस्पेंड कर दिया जाए। हालाँकि मेलोनी ने यह नहीं बताया कि ऐसा कैसे किया जाएगा।

स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आई शरणार्थियों की बाढ़

शरणार्थियों को लगता है कि यहाँ पहुँचने पर स्पेन के मुख्य भाग में एंट्री हो जाएगी और फिर यूरोपीय यूनियन के देशों तक पहुँचना आसान हो जाएगा।

स्पेन का मानना है कि मोरक्को और दूसरे अफ्रीकी देशों से जो शरणार्थी आ रहे हैं, उसके पीछे तस्करी करने वाले नेटवर्क का हाथ है। हाल ही में स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने बिना सही प्रक्रिया के समुद्र के रास्ते सेउटा में आने वाले शरणार्थियों को तुरंत वापस लौटने पर रोक लगा दी थी। स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मोरक्को के रास्ते सेउटा-मेलिला आने वाले शरणार्थियों को पकड़े जाने पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीधा मोरक्को नहीं भेजा जा सकता है। इससे तस्करी करने वाले नेटवर्क को बढ़ावा मिला है।

शरणार्थी सेउटा पहुँचने से पहले मोरक्को के शहर फनीडेक में इकट्ठा हो रहे हैं। मोरक्को के सुरक्षा बल इन पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं और इन पर पानी की बौछारें की जा रही हैं, लेकिन ये टस से मस नहीं हो रहे।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज और गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का के शुक्रवार को सेउटा जाकर लोकल अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों से मुलाकात की है। साथ ही मोरक्को के साथ कोऑर्डिनेट कर जो लोग अवैध तरीके से आए हैं, उन्हें वापस भेजने को लेकर वार्ता करेंगे।

2011-21 के बीच सेउटा में घुस आए थे शरणार्थी

स्पेन के साथ डिप्लोमैटिक विवाद के बीच मई 2021 में मोरक्को ने सीमा पर ढील दे दी थी, जिससे मात्र दो दिनों में हजारों लोग सेउटा घुस आए थे। इन अवैध शरणार्थियों में कई नाबालिग शामिल थे। नई शरणार्थियों की घुसपैठ से स्पेन और मोरक्को के रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका है। हालाँकि अभी तक दोनों देशों ने सहयोग करने की बात कही है।

साल 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध और आईएसआईएस के आतंक से बचने के लिए लाखों सीरियाई यूरोपीय यूनियन के देशों में शरणार्थी बन कर आए। इनके यूरोप पहुँचने के कई मार्ग थे, जिनमें मोरक्को से होते हुए स्पेन तक पहुँचना भी एक था। उस वक्त भी इनलोगों ने समुद्री और जमीनी रास्ते को वैसे ही चुना था, जैसा अभी हो रहा है।

यहाँ से यूरोप के दूसरे देशों में ये पहुँचे। जर्मनी, स्वीडन, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड जैसे अमीर यूरोपीय देशों ने इनके लिए अपनी ‘मानवीयता’ दिखाई। इनलोगों को शरण दी गई। इसके बाद 2015 में यूरोप का प्रवासी संकट भी आया और यूरोप के ज्यादातर देशों में कट्टरपंथियों की जमात बढ़ गई। हालात ये है कि इंग्लैंड, फ्राँस, जर्मनी समेत सारे देश अब क्राइम काफी बढ़ गया है। इस्लामी ग्रूमिंग गैंग लगातार स्थानीय नाबालिग लड़कियों को अपना निशाना बना रहे हैं। रेप, लूट-पाट, नशे की तस्करी जैसे क्राइम से निपटना स्थानीय सुरक्षा बलों के लिए मुश्किल हो रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में घुसपैठियों को लेकर कहा है कि अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों से आने वाले घुसपैठिए यूरोपीय देशों और यूके के लिए खतरा हैं। ये लोग यूरोप की पहचान और संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने इसको लेकर यूरोपीय नेताओं की आलोचना भी की थी कि उन्होंने नरमी बरती और कड़े कदम नहीं उठाए।

यूरोप की इस समस्या से भारत भी दो चार होता रहा है। यहाँ अवैध घुसपैठियों की वजह से दशकों से कई दिक्कतें पेश आ रही हैं। असम से पश्चिम बंगाल तक बांग्लादेशी घुसपैठियों से सिर्फ आबादी ही नहीं बढ़ी है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में जबरदस्त तरीके से डेमोग्राफी भी बदली है।

संसद में विदेश मामलों की स्थाई समिति ने बांग्लादेश से भारत में होने वाली अवैध घुसपैठ पर चिंता जताते हुए इस पर ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप तैयार करने की बात कही है। ताकि बांग्लादेशी घुसपैठियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होने और उनके प्रत्यर्पण पर निगरानी रखने में आसानी हो। समिति के मुताबिक, अभी 2369 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि के मामले बांग्लादेश सरकार के पास लंबित हैं।

ये तो उन नागरिकों की बात है, जिनके मामले सामने आए हैं। लेकिन भारत में ऐसे अवैध घुसपैठियों के मामले अक्सर सामने आते हैं, जिनका पता सालों बाद चलता है। इनके वजह से भारत के संसाधनों पर असर पड़ता है और रोजगार प्रभावित होते हैं। चुनाव में ये लोग पार्टियों के वोट बैंक बन जाते हैं और उनके पास भारत के वोटर कार्ड से लेकर आधार कार्ड तक पहुँच जाता है। ये लोग रोजगार पर बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं। चुनावों में इसका असर भी दिखता है।

न सिर्फ राजनीतिक-सामाजिक तौर पर बल्कि आर्थिक तौर पर भी इससे देश कमजोर होता है। घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाने के दौरान कई बार मानवाधिकार की बात की जाती है। सुप्रीम कोर्ट तक में कई ऐसे मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने घुसपैठियों को लेकर कहा है कि उनके पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

लेकिन स्थानीय स्तर पर मिलने वाले फर्जी दस्तावेज और कानूनों की कुछ सीमाएं उन्हें अनौपचारिक सुरक्षा प्रदान करती हैं। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत से आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे कागजात बन जाने के कारण पुलिस या प्रशासन के लिए तुरंत पहचान करना मुश्किल होता है। अगर पहचान हो भी गई तो कोर्ट में मामला लंबित रहता है। बड़े बड़े वकील से लेकर पूरा लिबरल इकोसिस्टम उन्हें बचाने में लग जाता है।

स्पेन में मोरोकोकियों की घुसपैठ के लिए कौन जिम्मेदार? खुद स्पेन या कोई और?

सुभाष चन्द्र

शायद अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होगा कि Al - Andalus जो आज का स्पेन है, पर करीब 800 वर्ष (711 से 1492 AD) तक इस्लामी हुकूमत रही थी जैसे भारत में।  आज जैसे भारत में सेक्युलर कीड़ों की रगों में मुग़लों का DNA दौड़ता है वैसे ही लगता है स्पेन में सेकुलरिज्म का भूत सवार है इसलिए ही नॉर्वे और आयरलैंड के साथ मिलकर स्पेन ने 2024 में फिलिस्तीन मान्यता दे दी थी जिसके विरोध में इज़रायल ने तीनो देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए थे

कुछ दिन पहले स्पेन ने एक कानून पास किया था कि किसी भी शरणार्थी को ऐसे ही वापस नहीं भेजा जा सकता जबकि उसकी जांच पूरी ना हो जाए  स्पेन की आबादी लगभग 5 करोड़ हैं जिसमे 25 लाख यानी 5% मुस्लिम हैं

अब अगले ही दिन मोरक्को के 60000 मुस्लिम स्पेन पहुंच गए और मॉल लूट लिए, घरों में घुसकर कब्जा कर लिया हाथ में बड़े बड़े चाकू पेचकस लेकर आम लोगों पर हमला कर दिया वीडियो जो सामने आए उनमे साफ़ दिखाई देता है कि बहुत से घुसपैठिए 15-16 साल के रहे होंगे

लेखक 
चर्चित YouTuber 
कुछ समय पहले सऊदी अरब और UAE के विदेश मंत्रियों ने कहा था कि यूरोप के देश आतंकवाद और इस्लाम के बारे में कुछ नहीं जानते UAE के विदेश मंत्री ने कहा था कि "हम जो आवाज सुनते हैं, उनमें हत्या और खून-खराबा और लोगों की संपत्ति चुराने की आवाज़ें लंदन, जर्मनी, स्पेन और इटली में हैं

"एक दिन ऐसा आएगा जब हम यूरोप से बहुत ज्यादा कट्टरपंथी, चरमपंथी और आतंकवादी आते देखेंगे, क्योंकि निर्णय लेने की कमी और राजनीतिक रूप से सही होने की कोशिश की जा रही है

लेकिन यहां गौर करने की बात यह भी है कि सऊदी अरब वर्षो तक Wahhabism को फ़ैलाने के लिए अरबों डालर खर्च करता रहा है। भारत में भी हजारों डॉलर सऊदी ने खर्च किए है और यह पैसा Islamic Redicalism को बढ़ाने में काम आता है

वर्तमान समस्या में एक तो स्पेन का निर्णय जिम्मेदार है जो कहता है कि किसी शरणार्थी को बिना जांच वापस नहीं जाएगा लेकिन जैसे ही 60000 लोग घुसे स्पेन के Ceuta में घुसे स्पेन ने सैनिक कार्रवाई शुरू कर दी इस घटना ने यूरोप के देशों में खलबली मचा दी, इटली ने स्पेन के साथ शेंगेन समझौते को रद्द करने की बात कही तो यूरोप के अनेक देशों ने स्पेन को बॉर्डर फ्री इलाके से हटाने की मांग की है

स्पेन को भी खुराफात करने में कम नहीं है पहले तो फिलिस्तीन को मान्यता देकर इज़रायल से पंगा लिया इज़रायल ने जुलाई 2023 में पश्चिमी सहारा पर मोरक्को की संप्रभुता को मान्यता दे दी NATO के देश वैसे तो अमेरिका ईरान युद्ध में अमेरिका के साथ नहीं रहे लेकिन स्पेन ने मार्च, 2026 में अपने रोटा और मोरोन सैन्य ठिकानों तक अमेरिका को पहुंच देने से मना कर दिया जबकि इन दोनों एयरबेस पर अमेरिका के 6000 सैनिक तैनात है और इससे  नाराज़ होकर ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी व्यापार बंद करने की बात कही और एक तरह स्पेन को NATO से अलग करने की धमकी दे दी

तभी से अमेरिका का Ceuta प्लान शुरू हो गया और उसके लिए मार्को रुबियो ने 20 मिलियन डॉलर भी दे दिए जाहिर है मोरक्को को खुली घुसपैठ करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वह पैसा दिया गया 

कहने का मतलब है कि स्पेन की समस्या के लिए वह खुद तो दोषी है लेकिन उस वजह से अमेरिका भी स्पेन को सजा दे रहा है

अमेरिका वैसे हर जगह खुराफात कर रहा है कुछ दिन पहले उसका भारत में राजदूत Sergio Gor तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय जोसेफ से मिले जिसका कोई औचित्य नहीं था और अब खबर है कि Gor बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों में रोहिंग्या से मिल कर आए हैं लगता है कुछ शरारत चल रही है ट्रंप प्रशासन के दिमाग में भारत को लेकर

ट्रंप के ‘सीजफायर’ दावे के बीच गाजा में फिर बरसे इजरायली बम: 4 की मौत, हमास बोला- पहले सेना हटाओ, तभी देंगे हथियार

                      इजरायल ने लगातार दूसरे दिन गाजा पर किए हवाई हमले (फोटो साभार: Arab news)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा में पिछले वर्ष हुए संघर्षविराम समझौते को लागू करने की दिशा में बड़ी प्रगति का दावा किए जाने के बावजूद इजरायल ने रविवार (2 अगस्त 2026) को लगातार दूसरे दिन गाजा पट्टी पर हवाई हमले जारी रखे।

फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इजरायली लड़ाकू विमानों ने गाजा सिटी और मध्य गाजा के दीर अल-बलाह में अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाया।

स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सकों के मुताबिक, दीर अल-बलाह में एक अपार्टमेंट पर हुए हवाई हमले में एक दंपति की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। वहीं गाजा सिटी में एक अन्य अपार्टमेंट पर हुए हमले में एक बच्चे समेत दो लोगों की जान चली गई।

इन हमलों ने ऐसे समय में तनाव और बढ़ा दिया है, जब अमेरिका की मध्यस्थता में संघर्षविराम समझौते को लागू करने की कोशिशें तेज होने का दावा किया जा रहा है।

संघर्षविराम लागू करने की कोशिशें, लेकिन हथियारों और सैन्य वापसी पर बना गतिरोध

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि गाजा में संघर्षविराम समझौते को लागू करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उनका कहना था कि अमेरिकी समर्थन वाली पहल के तहत हमास ने अपने हथियार छोड़ने पर सहमति जताई है।
इसके बाद ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने संघर्षविराम समझौते को लागू करने के अंतिम चरणों का विवरण देते हुए 15 बिंदुओं वाला एक रोडमैप भी जारी किया। हालाँकि यह रोडमैप अभी तक लागू नहीं हो सका है।
हमास ने स्पष्ट किया है कि वह अपने हथियार केवल सुरक्षित भंडारण के लिए तभी सौंपेगा, जब इजरायल पिछले वर्ष हुए समझौते के अनुरूप अपने सैन्य अभियान बंद करेगा और गाजा से अपनी सेना वापस बुलाएगा।
दूसरी ओर एक इजरायली अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा कि जब तक हमास का ‘वास्तविक निरस्त्रीकरण’ (Genuine disarmament) नहीं होता, तब तक इजरायल अपनी मौजूदा सैन्य तैनाती से पीछे नहीं हटेगा।

नेतन्याहू की चुप्पी, बेन-गवीर का विरोध और मोहम्मद दहलान का बड़ा दावा

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी पहल पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने इस पहल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि इजरायल को हमास के नेताओं के खिलाफ लक्षित हमले जारी रखने चाहिए।

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे फतह के पूर्व वरिष्ठ नेता मोहम्मद दहलान ने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और इस पहल से जुड़े वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर ने उन्हें बताया है कि वह गाजा पर इजरायली हमले रुकवाने के लिए इजरायली पक्ष के साथ काम कर रहे हैं।

दहलान ने कहा कि अमेरिका के साथ संपर्क लगातार जारी है ताकि संघर्षविराम समझौते को पूरी तरह लागू कराया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि इजरायल गाजा पर अपने दैनिक हमले पूरी तरह बंद करता है या नहीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने “बच्चों” को माफ़ कर दिया लेकिन अपनी पीड़ा भी व्यक्त कर दी

सुभाष चन्द्र

प्रधानमंत्री मोदी ने आज के अपने संबोधन में जंतर मंतर पर उत्पात करने वाले “कथित छात्रों” को माफ़ कर दिया मोदी जी का यह सन्देश इंस्टाग्राम पर एक करोड़ लोगों ने Love Emoji से लाइक किया है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत बड़ा दिल दिखाया वह भी उन बेशर्म “कथित छात्रों” के लिए जो मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ गए मोदी जी को जब भी विदेश में कोई अवार्ड मिलता है, तो वह हमेशा कहते हैं कि यह सम्मान मेरे लिए नहीं है बल्कि भारत 140 करोड़ लोगों के लिए हैं

इस तरह देखा जाए तो “गटर Z” के उत्पाती लोगों ने केवल प्रधानमंत्री मोदी को गालियां नहीं दी बल्कि देश के 140 करोड़ लोगों को गालियां दी हैं

लेखक 
चर्चित YouTuber 
मोदी जी ने अपने संबोधन में ये कुछ विशेष बातें कहीं -

-बचपन में गलतियां होती हैं; 

-गुमराह को राह दिखाना कठिन होता है;

-लेकिन बच्चों को राह दिखाना कर्तव्य है;

-कुछ शरारती बच्चो ने गलतियां कर दी;

-भद्दी भद्दी गालियां मुझे तो दी, मेरी स्वर्गीय माता जी को गाली दी गई;

-गलतियों से सीखें और आएगी बढ़ें;

-हमारी बेटियां कैसे इस तरह की भाषा बोल सकती हैं;

-मैं उन बच्चों को माफ़ करना चाहता हूँ क्योंकि कभी कभी जीभ दांतो तले आकर कट जाती है तो हम दांत नहीं तोड़ते क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है ये बच्चे भी हमारे हैं

इन बातों को ध्यान से समझा जाए तो पता चलेगा कि मोदी जी को उन्हें और उनकी स्वर्गीय माता जी को गालियां देने से असहनीय पीड़ा हुई जिसे उन्होंने जता दिया उन्होंने उत्पाती कथित छात्रों को “गुमराह” और शरारती भी कह दिया इतना ही नहीं उन बेशर्म लड़कियों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होनें मोदी जी को भद्दी भद्दी गालियां दी

मोदी ने एक तरफ ऐसे उद्दंड “कथित छात्रों” को माफ़ करने की बात की तो उसी दिन अभिजीत दिपके और सौरव दास खुलकर उस रुचिका सिंह के समर्थन में खड़े हो गए जो मोदी जी को अपमानित करने की भाषा बोलने में अग्रणी थी और अब फरार है जितनी हिम्मत बकवास करने में दिखाई थी, उतनी हिम्मत पुलिस के सामने आने में दिखाए

मेरी नज़र में ऐसे लोग माफ़ करने योग्य नहीं है 15-15 साल के लड़के लड़कियां ऐसे गालियां दे रहे थे जैसे किसी प्रतियोगिता में भाग ले रहे हों और उनमे से अब कई माफ़ी मांगते फिर रहे हैं सबसे बड़ी बात ऐसे बच्चों के एक भी माता पिता ने अपने बच्चों की करतूतों के लिए अफ़सोस प्रकट नहीं किया है ऐसा नहीं है उन तक उनके बच्चों की हरकतें न पहुंची हों

जिन लोगों ने भी गालियां देने में मर्यादाएं तोड़ी हैं, उन्हें किसी तरह माफ़ नहीं किया जाना क्योंकि ये लोग कभी मोदी जी के साथ नहीं आने वाले जैसी मोदी जी ने उनसे अपील की है गालियां देने में एक्सपर्ट थे लेकिन उनमे एक भी ऐसा नहीं है जो कामनवेल्थ खेलों में पदक जीत सके जैसे हमारे खिलाडियों ने जीते हैं

पप्पू यादव के खिलाफ दिल्ली में दर्ज हुई FIR, संसद में राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर किया था गंदा नाटक: लोकसभा अध्यक्ष ने दी गरिमा बनाए रखने की चेतावनी

                             राम मंदिर प्रदर्शन पर पप्पू यादव FIR। (फोटो साभार - जागरण/एनडीटीवी)
संसद परिसर में विपक्षी दलों ने शुक्रवार (31 जुलाई) को राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर नाटक किया था। इस नाटक में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पुजारी बनकर चंदा लूटते हुए नजर आए थे। Video वायरल होने के बाद अब विवाद बढ़ गया है। नाटक कर रहे पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज हुई है।

पप्पू यादव ने संसद भवन में भगवा वस्त्र पहनकर और पुजारी का भेष धारण कर चंदा चोरी करने का नाटक किया। इसमें पप्पू यादव ये दर्शाने की कोशिश कर रहे थे, कि हिंदू पुजारी ही राम मंदिर से चंदा चोरी कर रहे हैं। इसके बाद देशभर से संतों ने इस नाटक पर विरोध जताया था। अब दिल्ली के जहाँगीरपुरी थाने में सूर्य मैथिल नामक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। 

संसद के बाहर किए गए नाटक में विपक्ष के अन्य सांसद और राहुल गाँधी भी श्रद्धालु बनकर दानपेटी में पैसे डालते दिखे और पप्पू यादव उन पैसों को उठाकर अपनी जेब में रखने का अभिनय कर रहे थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेताओं के खिलाफ FIR पर DCP काशी जोन गौरव बंसवाल ने बताया है कि संतों की तहरीर पर तीनों नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल हुआ और भगवान रामलला की तस्वीर के अनादर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसी आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।

संसद में इस तरह वेश बदलकर प्रदर्शन करने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने संसद में कहा कि कुछ सदस्य जिस तरह से भेष बदल-बदलकर आ रहे हैं, वह सदन की मर्यादा और परंपराओं के खिलाफ है। ओम बिरला ने चेतावनी देते हुए कहा कि संसद भवन परिसर की पवित्रता और गरिमा बनी रहनी चाहिए और इस तरह के प्रदर्शनों पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

राहुल गाँधी, डिंपल यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी लिया नाटक में भाग

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी सांसद भी इस सांकेतिक प्रदर्शन में शामिल हुए और दान पेटी में पैसे डालकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान चंदा चोर, गद्दी छोड़, जवाब तुमको देना होगा और अमित शाह, सदन में आओ जैसे नारे भी लगाए गए।
शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि इस प्रदर्शन को राहुल गाँधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद समेत INDIA गठबंधन के कई सांसदों का समर्थन प्राप्त था। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े वीडियो, शिकायत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच की जा रही है। जाँच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कुछ सांसद अलग-अलग भेष बदलकर संसद परिसर में आ रहे हैं, जो संसद की परंपराओं और मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि संसद परिसर की पवित्रता और गरिमा को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक दास के नेतृत्व में संतों के प्रतिनिधिमंडल ने गौरव बंसवाल से मुलाकात की थी। जगद्गुरु बालक दास ने बताया कि संसद में जिस तरह से पप्पू यादव ने भगवान राम का और सनातन का अपमान किया वह अक्षम्य है। वहीं, महंत जगदीश्वरनाथ ने कहा, “संत समाज शांत है तो कुछ भी करोगे। हिम्मत है तो कभी सिर पर टोपी पहनकर कुछ करो तो जानें। सिर तन से जुदा न हो जाए तो कहना।”

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी पप्पू यादव के इस कृत्य की घोर निंदा की है। संतों ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी माँगने को कहा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए साधु-संतों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है और इसे संत-समाज कभी सफल नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उनके संसदीय क्षेत्र तक जाकर संत समाज लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा।

मथुरा में भी साधु-संतों ने एकजुट होकर पप्पू यादव का कड़ा विरोध किया है। संतों ने गोवर्धन क्षेत्र के ग्राम जुल्हेदी स्थित एक आश्रम पर यादव को ‘कंस’ का रूप बताते हुए उनके पोस्टर लगाए और पुतले का दहन किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि भगवा, सनातन धर्म और लोगों की आस्था का मजाक उड़ाने वाले जनप्रतिनिधियों को संसद में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। साथ ही, उनकी संसद सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है। संतों ने उनकी तस्वीर पर चप्पलें तक बरसाईं हैं।

इसके अलावा दिल्ली में भी पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दिल्ली के जहाँगीरपुरी थाने में सूर्य मैथिल नामक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल हुआ और भगवान रामलला की तस्वीर के अनादर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसी आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।

‘बरेली में 320 करोड़ रूपए का वक्फ घोटाला’: मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रशासन को 100 पन्नों के दस्तावेज सौंपे, निष्पक्ष जाँच की माँग की

                          मौलाना शहाबुद्दीन ने दिया सबूत, जाँच की उठाई माँग (फोटो साभार: News 18)
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वक्फ संपत्तियों में बड़ा घोटाला होने का आरोप लगाया है। उन्होंने जिला प्रशासन को इस घोटाले से जुड़े कई पक्के सबूत सौंपे हैं। मौलाना शहाबुद्दीन का दावा है कि बरेली में करीब 320 करोड़ रुपए की वक्फ संपत्ति में गड़बड़ी की गई है।

मौलाना शहाबुद्दीन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके। मौलाना शहाबुद्दीन 31 जुलाई को सीधे कलेक्ट्रेट पहुँचे। वहाँ उन्होंने अपर जिलाधिकारी यानी ADN (प्रशासन) से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।

मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रशासन को लगभग 100 पन्नों के दस्तावेज दिए हैं। इन कागजों में जमीनों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, राजस्व विभाग की जानकारियाँ और घोटाले के ठोस प्रमाण शामिल हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले मुख्यमंत्री को भी भेजी थी। मुख्यमंत्री तक बात पहुँचने के बाद प्रशासन ने उनसे इस मामले के सबूत माँगे थे।

अब मौलाना शहाबुद्दीन ने सभी संबंधित दस्तावेज और सबूत अधिकारियों के सामने रख दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इन सबूतों के आधार पर जल्द ही सख्त और निष्पक्ष जाँच शुरू करेगा।

दो स्थानों की जमीनों को बनाया जाँच का आधार, निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई की माँग

मौलाना ने दावा किया कि बरेली जिले की बहेड़ी तहसील के जाम सामंत क्षेत्र में करीब 1400 बीघा वक्फ भूमि से जुड़ी गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं। उनके अनुसार, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत लगभग 220 करोड़ रुपए है। इसके अलावा सदर तहसील के चंद्रपुर बिचपुरी क्षेत्र की वक्फ भूमि का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपए है।

उनका आरोप है कि इन संपत्तियों के लेनदेन में नियमों की अनदेखी की गई और वक्फ की जमीन को नुकसान पहुँचाया गया। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां समाज और जरूरतमंद लोगों के हितों के लिए होती हैं, इसलिए यदि उनमें किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जाँच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही कहा कि उनके द्वारा सौंपे गए दस्तावेज जाँच एजेंसियों को मामले की सच्चाई तक पहुँचने में मदद करेंगे।

उनका आरोप है कि इन संपत्तियों के लेनदेन में नियमों की अनदेखी की गई और वक्फ की जमीन को नुकसान पहुँचाया गया। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां समाज और जरूरतमंद लोगों के हितों के लिए होती हैं, इसलिए यदि उनमें किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जाँच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही कहा कि उनके द्वारा सौंपे गए दस्तावेज जाँच एजेंसियों को मामले की सच्चाई तक पहुँचने में मदद करेंगे।

इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा था, कि वक्फ की जमीनों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियाँ समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान हुईं और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी भेजा था।

जंतर-मंतर हिंसा: शांतिपूर्ण आंदोलन के दावों के बीच लहूलुहान वर्दी का सच; आयोजकों को हिरासत में लेकर पूछा जाए "गुंडों को किसने बुलाया?"


देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर, जो लंबे समय से जन-आंदोलनों और असहमति की आवाज़ उठाने का केंद्र रहा है, हाल ही में एक भीषण हिंसात्मक टकराव का गवाह बना। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पेपर लीक को लेकर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया था। हालांकि, ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान उग्र हुई भीड़ और उसके बाद सामने आए तथ्यों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब तक आयोजकों को हिरासत में लेकर सख्ती से यह नहीं पूछा जाए कि छात्रों के प्रदर्शन में गुंडों का क्या काम था? किसके कहने पर गुंडे आए? दिल्ली हिन्दू दंगा के आरोपितों की रिहाई की आवाज़ किसके कहने पर उठी थी? ये प्रदर्शन NEET को लेकर हुआ था या इन आरोपियों की रिहाई के लिए? क्या ये प्रदर्शन सनातन को बदनाम करने के लिए था? क्योकि जिस तरह की हिंसा हुई वह कोई साधारण हिंसा नहीं थी, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए हंगामे की तरह ही था। पुलिस तो अपना काम कर रही है लेकिन निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को इस प्रायोजित हिंसा को हल्के में नहीं लेना चाहिए।     

प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों और जवानों पर जानलेवा हमले हुए, जिनमें 180 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस दौरान भारी सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े गए, पत्थरबाजी हुई और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया। इस पूरी घटना ने उस समय एक नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया, जब ड्यूटी पर घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया के सामने आकर अपनी आपबीती साझा की।

 घायलों के परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रों के अधिकारों की आड़ में आए उपद्रवियों द्वारा ऑन-ड्यूटी सुरक्षा बलों पर बर्बर हमले किए गए और बाद में सोशल मीडिया पर पुलिस को ही खलनायक बनाकर पेश करने की कोशिश की गई। पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि वर्दी पहनने का मतलब मानवाधिकारों का त्याग करना नहीं होता। इस मामले में अब पुलिस कर्मियों के परिवारों ने भी देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जिससे इस मुद्दे ने सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से एक बड़ा आकार ले लिया है।

घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की आपबीती: “जब खून से लथपथ घर पहुंचे हमारे अपने”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिजनों ने अपनी आपबीती साझा की। सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों, अधिकारियों की पत्नियों और युवा छात्रों ने मीडिया के सामने घटना वाले दिन के जो संस्मरण रखे, वे दिल दहला देने वाले थे।

मरीन कमांडो रहे सब-इंस्पेक्टर की बेटी: “पिता की लिंचिंग की कोशिश की गई”
नेवी में 15 वर्षों तक मरीन कमांडो के रूप में देश सेवा करने के बाद दिल्ली पुलिस में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने भावुक होकर बताया कि उनके पिता मुख्य बैरिकेड्स पर तैनात थे। उन्होंने कहा: “मेरे पिता अक्सर कहते थे कि यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कई असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं। 25 तारीख को दोपहर लगभग 2 बजे जंतर-मंतर मंच के पास उग्र भीड़ ने मेरे पिता को घसीटा और उनकी लिंचिंग की कोशिश की। वह RML अस्पताल में चार घंटे तक बेहोश रहे और जब देर रात उनके साथी उन्हें घर लाए, तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी… जब मैंने सोशल मीडिया खोला, तो देखा कि मेरे ही पिता को क्रिमिनल कहा जा रहा था। जिन लोगों ने उन पर हमला किया, वही सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसलिए हमने भी न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।”

सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने यह भी दोहराया कि उनके पिता अक्सर घर आकर यह चिंता जताते थे कि आंदोलन को उग्र तत्वों द्वारा हायजैक कर लिया गया है। 25 तारीख को हुए लिंचिंग के प्रयास और 4 घंटे तक बेहोश रहने के बाद जब उन्हें घर लाया गया, तो परिवार पूरी तरह सदमे में था।

घायल एसीपी (ACP) की पत्नी: “दो साल की बच्ची और मेरे लिए वह पल दर्दनाक था”
20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए एक घायल एसीपी की पत्नी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा: 20 जुलाई की देर रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर लौटे, तो वह क्षण मेरे और हमारी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। हम यहां अपने परिवार का दर्द साझा करने आए हैं क्योंकि पुलिसकर्मियों के परिवारों का भी इस देश में न्याय पाने का बराबर अधिकार है।”

युवा पीढ़ी की अपील: “हम भी जेन-जी हैं, हमारी बात भी सुनी जाए”
हिंसा में घायल जवानों के बच्चों, जो स्वयं छात्र और जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी का हिस्सा हैं, ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने देश के नागरिकों और मीडिया से अपील की कि वे हिंसा का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के बच्चों का दर्द भी समझें।

1971 युद्ध के दिग्गज के पोते व ASI के बेटे का बयान: “अचानक हुआ जानलेवा पथराव”
चार वीरता पुरस्कार प्राप्त कर चुके एक एएसआई (ASI) के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके दादाजी BSF में थे और उन्होंने 1971 के युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने बताया: “मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे। अचानक उग्र भीड़ ने बिना किसी उकसावे के पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे, तभी एक भारी पत्थर उनके सिर पर लगा। जब मैंने अस्पताल में उनकी तस्वीर देखी, तो उनके सिर पर चार टांके लगे थे।”

33 साल से सेवारत ASI की पत्नी: “गमले और कांच की बोतलें फेंकी गईं”
33 वर्षों से पुलिस सेवा में कार्यरत एक अन्य एएसआई की पत्नी ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए तैनात थे। “शाम को मुझे खबर मिली कि वे LNJP अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर गमले, पत्थर, जूते और कांच की बोतलें फेंकी और सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ डाले।”

राहुल गांधी से पूछा गया सवाल, तो कहा: “आप बीजेपी से हैं”
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब मीडियाकर्मियों ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से इस संबंध में प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो एक नया विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने सवाल उठाया था कि जिस संसद की रक्षा करते हुए पुलिसकर्मी घायल हुए, उन्हें ‘गुंडे’ कैसे कहा जा सकता है। हालांकि, जब एक पत्रकार ने इस बाबत राहुल गांधी से सवाल किया, तो उन्होंने सवाल का जवाब देने के बजाय पत्रकार पर ही तंज कसते हुए कह दिया कि “आप बीजेपी से हैं।” आलोचकों और सोशल मीडिया पर यह तर्क दिया जा रहा है कि जब भी कोई सवाल राजनीतिक रूप से असुविधाजनक होता है, तो पत्रकारों पर किसी खास पार्टी का होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। इस वाकये के बाद प्रेस की आजादी के बड़े-बड़े दावे करने वाली विपक्षी राजनीति और उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

CJP का दावा बनाम पुलिस का पक्ष
जंतर-मंतर पर घटित इस घटनाक्रम ने आयोजकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों और पुलिस प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए जमीनी तथ्यों के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर दिया है।

CJP और आयोजकों का दावा: आयोजकों का तर्क है कि उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में सुधारों और छात्र हितों को लेकर पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे छात्र घायल हुए।

दिल्ली पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष: पुलिस जांच और डिजिटल सर्विलांस के आंकड़ों के अनुसार, भीड़ की आड़ में कई उग्र तत्व शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जब भीड़ ने संसद भवन की ओर जबरन बढ़ने और सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास किया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुपातिक बल प्रयोग अनिवार्य हो गया था।

सुरक्षा बलों के मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट की कानूनी कार्यवाही
जंतर-मंतर हिंसा का मामला अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले ने सुरक्षा बलों के मानवाधिकारों पर एक राष्ट्रीय कानूनी बहस शुरू कर दी है:

अनुच्छेद 21 और ऑन-ड्यूटी जवानों के अधिकार: याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और शारीरिक सुरक्षा का अधिकार) जितना आम नागरिकों पर लागू होता है, उतना ही ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों पर भी लागू होता है। भीड़ द्वारा जानलेवा हमला करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, ड्रोन फुटेज और बॉडी-वर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है।

आयोजकों की जवाबदेही: कोर्ट इस पहलू पर भी विचार कर रहा है कि यदि अनुमति प्राप्त प्रदर्शन हिंसक रूप लेता है, तो आयोजकों की नागरिक व आपराधिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में आंदोलनों की आड़ में कानून-व्यवस्था को नुकसान न पहुंचाया जा सके।

US की अगुवाई में गाजा की ‘पीस व्यवस्था’ संभालेगी इंटरनेशनल फोर्स, हमास समेत सभी आतंकी संगठन डालेंगे हथियार: डोनाल्ड ट्रंप ने किया ऐलान

                               बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो साभार: AFP)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को दावा किया कि उनके नेतृत्व में बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा में हमास और बाकी सभी आतंकी संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर एक ‘ऐतिहासिक समझौता’ कर लिया है। ट्रंप ने इसे मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम बताया। हालाँकि, इस समझौते को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं, क्योंकि न तो इजरायल ने आधिकारिक मंजूरी दी है और न ही हमास ने ट्रंप के दावे की पूरी तरह पुष्टि की है।

ट्रंप ने यह घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की। उन्होंने लिखा, “आज बोर्ड ऑफ पीस ने गाजा में हमास और अन्य सभी हथियारबंद समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर ऐतिहासिक समझौता किया है। यह स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बेहद बड़ा कदम है।”

ट्रंप ने बताया कि इस समझौते के बाद गाजा पर अब हमास का शासन नहीं रहेगा। इसकी जगह एक नई फिलिस्तीनी सरकार बनाई जाएगी, जो बोर्ड ऑफ पीस के साथ मिलकर काम करेगी और गाजा के लोगों के लिए प्रशासन चलाएगी। ट्रंप ने कहा कि इससे एक तरफ फिलिस्तीनियों को नया प्रशासन मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ इजरायल को वह सुरक्षा मिलेगी जिसकी वह लंबे समय से माँग करता रहा है। उनका कहना है कि अब गाजा का इस्तेमाल इजरायल पर आतंकी हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

कई चरणों में लागू होगा पूरा प्लान

ट्रंप ने बताया कि यह समझौता एक साथ लागू नहीं होगा, बल्कि इसे कई चरणों में पूरा किया जाएगा। जैसे-जैसे हमास और बाकी संगठनों का निरस्त्रीकरण पूरा होगा, वैसे-वैसे IDF यानी इजरायली सेना गाजा से अपनी वापसी शुरू करेगी।

इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (International Stabilization Force) और नई बनाई जाने वाली फिलिस्तीनी पुलिस के हाथों में जाएगी। इन दोनों का काम होगा कि गाजा अपने नागरिकों और पड़ोसी देशों के लिए सुरक्षित बना रहे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित योजना के तहत हमास के हथियार, रॉकेट, भारी हथियार, सुरंगों और सैन्य ढाँचे को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। पूरा निरस्त्रीकरण लगभग 200 से 350 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालाँकि, इसके लिए अभी कोई डेडलाइन तय नहीं मानी जा रही है।

ट्रंप ने इसे बताया ‘Trump 20-Point Plan’ का बड़ा पड़ाव

ट्रंप ने कहा कि यह समझौता उनके ‘Trump 20-Point Plan’ को लागू करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है। यह वही योजना है, जिसे गाजा युद्ध खत्म करने, वहाँ नई सरकार बनाने, सुरक्षा व्यवस्था बदलने और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण के लिए तैयार किया गया था।

उन्होंने कहा कि एक साल पहले गाजा में भीषण युद्ध चल रहा था, मानवीय संकट चरम पर था और बंधकों को कैद करके रखा गया था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। हालाँकि ट्रंप ने यह भी माना कि अभी ‘बहुत काम बाकी है।’

मिस्र, कतर और तुर्किये का किया आभार

ट्रंप ने इस समझौते के लिए मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इन देशों ने बातचीत आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही उन्होंने अपनी बातचीत करने वाली टीम की भी तारीफ करते हुए कहा कि उनकी लगातार मेहनत की वजह से यह ऐतिहासिक सफलता मिली।

7 अक्टूबर जैसे हमले दोबारा नहीं होंगे: ट्रंप

अपने बयान में ट्रंप ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “7 अक्टूबर को गाजा से जो खतरा पैदा हुआ था, उसे दोबारा कभी खड़ा नहीं होने दिया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि समझौते के बाद गाजा पूरी तरह ऐसी नई फिलिस्तीनी सरकार के हाथ में होगा, जो वहाँ के लोगों के लिए काम करेगी, न कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए।

अंत में ट्रंप ने इस समझौते के लिए सभी को बधाई दी और अपने विरोधियों को जवाब देते हुए कहा, “जिसके बारे में सब कहते थे कि इसे कभी हासिल नहीं किया जा सकता।”

इजरायल और हमास की मंजूरी नहीं

हालाँकि ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक सफलता बताया है, लेकिन इस समझौते को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमास ने अभी तक ट्रंप के दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। Reuters को हमास के सूत्रों ने बताया कि यह अभी एक मसौदा है और किसी भी तरह का निरस्त्रीकरण तभी शुरू होगा, जब इजरायल पहले गाजा से सेना हटाएगा।

दूसरी तरफ, इजरायल ने भी इस समझौते पर आधिकारिक सहमति नहीं दी है। इजरायल के एक अधिकारी ने Reuters को बताया कि इस समझौते को लेकर ट्रंप के ऐलान से पहले इजरायल इस प्रस्ताव को खारिज कर चुका है।

इजरायली अधिकारियों का कहना है कि उनकी माँग हमास के सैन्य ढाँचे को पूरी तरह खत्म करना है और ट्रंप जिस 15 सूत्रीय दस्तावेज की बात कर रहे हैं, उसमें इन माँगों का जवाब नहीं दिया गया है और इसीलिए इजरायल इसे नहीं मान रहा है।

पेपर चोरी करना भी क्या मौलिक अधिकार था जो कोर्ट ने यश यादव को NEET Re Exam देने की अनुमति दे दी उसका मौलिक अधिकार बता कर; अब दिपके का क्या होगा?

सुभाष चन्द्र

एक छात्र यश यादव है जो NEET 2026 पेपर लीक मामले में 13 में से एक है जो गिरफ्तार होकर जेल में पड़ा है। इस व्यक्ति ने किसी शुभम से पेपर 13 लाख रुपए में खरीदा और आगे जयपुर के मांगीलाल को 10 लाख रुपए में बेचा क्योंकि उसका बेटा भी NEET परीक्षा दे रहा था CBI को इसके पैसे के लेन देन के सबूत मिल चुके हैं यानी Money Trail पकड़ी गई है वह भी गंभीर मुद्दा है। 

यह महाशय यश यादव को जेल में अपने मौलिक अधिकार याद आ गए और Rouse Avenue कोर्ट में अर्जी लगाई कि उसे NEET Re Exam में बैठने की अनुमति दी जाए क्योंकि परीक्षा देना उसका मौलिक अधिकार है और अभी तक उनके खिलाफ आरोप भी साबित होना बाकी है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब आप सोचिए कोर्ट के जज साहब को क्या करना चाहिए था आप में से हर व्यक्ति कहेगा कि ये उन चोरों में शामिल था जिसकी वजह से लाखों छात्रों को भुगतना पड़ा और 17 बच्चो ने आत्महत्या भी कर ली 

लेकिन हमारी कोर्ट तो मौलिक अधिकारों की विशेषज्ञ है  Rouse Avenue कोर्ट के जज साहब ने परीक्षा में बैठना उसका मौलिक अधिकार समझा और उसे Re - Exam में जेल के संरक्षण में बैठने की अनुमति दे दी और एक मिनट भी यह नहीं सोचा कि यह व्यक्ति लाखों छात्रों की पीड़ा के लिए जिम्मेदार है उसके क्या मौलिक अधिकार हो सकते हैं? अगर आपको लगता था कि आरोप सिद्ध न होने तक वह निर्दोष है तो सीधी बेल ही दे देते

गूगल सर्च किया मैंने जिसमे बताया गया कि यश यादव ने Re Exam पास नहीं किया क्योंकि NTA ने उसके रिजल्ट को रोक लिया अब कल को वह यह भी याचिका लगा सकता है कि परीक्षा का नतीजा जानना उसका मौलिक अधिकार है और अगर वो पास होता है तो जुडिशल कस्टडी में ही उसे Counselling का भी अधिकार है

पिछले 12 साल में मौलिक अधिकारों की जिसमें उलजुलूल बोलने का अधिकार और प्रदर्शन का अधिकार मुख्यतः शामिल है, अदालतों द्वारा पुरजोर वकालत की रही है कोर्ट ने यश यादव को Re Exam में बैठने के मौलिक अधिकार की मांग को देख यह पूछने की जरूरत नहीं समझी कि क्या पेपर लीक करना भी तुम्हारा मौलिक अधिकार था?

अब कई वीडियो आ रहे हैं जिनमें प्रधानमंत्री मोदी, सेना और पुलिस के लिए गलियां देने वाले माफ़ी मांगते नज़र आ रहे हैं उनकी माफ़ी पर उनसे  पूछना चाहिए कि तुम्हे ऐसी अश्लील बकवास करने के लिए किसने कहा था? सौरव दास कहता है वो तो प्रधानमंत्री पर हल्का फुल्का मजाक था और यह उनका मौलिक अधिकार है उनके वीडियो मीडिया से हटाना Censorship लगाना होगा फिर वह कैसे कहता है कि जंतर मंतर पर जो हुआ उसके लिए “गटर Z” जिम्मेदार नहीं है?

आज एक खबर और भी है कि अभिजीत दिपके, कुणाल कामरा और सोनम वांगचुक के खिलाफ चंडीगढ़ कोर्ट में एक याचिका दायर उन पर FIR दर्ज करने की मांग की गई है क्योंकि उन्होंने हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाया कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 18 अगस्त तारीख तय की है दिपके और वांगचुक कुणाल कामरा के भगवान राम और सीता माता पर मजाक उड़ाने पर हंस कर उसका समर्थन कर रहे थे

सबका नंबर लगेगा!