नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू : दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में होगा भारत: मोदी ने 2047 के लिए फूंका IndiaAI मिशन का शंखनाद


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 के अपने संकल्प में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सबसे बड़ा ‘गेम-चेंजर’ करार दिया है। न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के लिए AI का ‘कोड’ खुद लिखेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत 2047 के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए ऐलान किया है कि भारत जल्द ही दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर्स में शामिल होगा। दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान एएनआई को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने भारत की डिजिटल संप्रभुता और तकनीक के मानवीय चेहरे पर विस्तार से बात की। पढ़िए प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू:-

ANI: भारत ग्लोबल साउथ में पहली बार AI इम्पैक्ट समिट 2026 होस्ट कर रहा है। समिट का मोटो है “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय”। इस समिट का विजन क्या है, और यह मोटो क्यों है?
पीएम नरेन्द्र मोदी: आज, AI एक सिविलाइज़ेशनल बदलाव के पॉइंट पर है। यह इंसानी काबिलियत को ऐसे तरीकों से बढ़ा सकता है जो पहले कभी नहीं हुए, लेकिन अगर इसे बिना गाइडेंस के छोड़ दिया जाए तो यह मौजूदा सोशल बुनियाद को भी टेस्ट कर सकता है। इसीलिए हमने जानबूझकर इस समिट को इम्पैक्ट के आस-पास बनाया है जो सिर्फ़ इनोवेशन ही नहीं, बल्कि सार्थक और बराबरी वाले नतीजे भी पक्का करता है। गाइड करने वाली भावना, “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय”, भारत की सिविलाइज़ेशनल सोच को दिखाती है। टेक्नोलॉजी का आखिरी मकसद ‘सबका भला, सबकी खुशी’ होना चाहिए। टेक्नोलॉजी इंसानियत की सेवा के लिए है, उसे बदलने के लिए नहीं। यह समिट लोगों, धरती और तरक्की के आस-पास बना है। AI सिस्टम दुनिया भर के समाजों में पैदा हुए ज्ञान और डेटा पर आधारित हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि AI के फायदे सभी तक पहुँचें, न कि सिर्फ़ शुरुआती अपनाने वाले ही इसे जमा करें। ग्लोबल साउथ में हो रहे पहले ग्लोबल AI समिट के तौर पर, भारत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रहा है जो कम रिप्रेजेंटेशन वाली आवाज़ों और डेवलपमेंट की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देता है। AI गवर्नेंस, इनक्लूसिव डेटासेट, क्लाइमेट एप्लीकेशन, एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी, पब्लिक हेल्थ और कई भाषाओं तक पहुँच हमारे लिए बाहरी मुद्दे नहीं हैं। वे सेंट्रल हैं। हमारा विज़न साफ़ है: AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज़ करना चाहिए।

ANI: आपने हमेशा एम्पावरमेंट और डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात की है। आप विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका को कैसे देखते हैं?
पीएम नरेन्द्र मोदी: AI, भारत के विकसिट भारत 2047 के सफ़र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मौका है। AI का विवेकपूर्ण, स्ट्रेटेजिक नज़रिए से इस्तेमाल करने से, पूरी तरह से नए आर्थिक मौके बनाने, सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को मुमकिन बनाने, शहर-गांव के बीच की खाई को पाटने और मौकों तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ विकास से जुड़ी गहरी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है। हेल्थकेयर में, AI पहले से ही असर डाल रहा है। हम प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर्स पर ट्यूबरकुलोसिस, डायबिटिक रेटिनोपैथी, मिर्गी और कई दूसरी बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन देख रहे हैं। एजुकेशन में, भारतीय भाषाओं में AI-पावर्ड पर्सनलाइज़्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, गांव और सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को कस्टमाइज़्ड एकेडमिक सपोर्ट पाने में मदद कर रहे हैं। एक बहुत ही अनोखी पहल में, अमूल हज़ारों गांवों में 36 लाख महिला डेयरी किसानों तक पहुंचने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है, मवेशियों की हेल्थ और प्रोडक्टिविटी पर गुजराती में रियल-टाइम गाइडेंस दे रहा है, और ज़मीनी स्तर की महिला प्रोड्यूसर्स को मज़बूत बना रहा है। खेती में, भारत विस्तार पहल का मकसद AI को फसल सलाह, मिट्टी के एनालिटिक्स और मौसम की जानकारी में जोड़ना है, जिससे किसानों को बेहतर, लोकल फैसले लेने में मदद मिलेगी। विरासत को बचाने में भी, AI पुरानी किताबों के डिजिटाइज़ेशन और मतलब को मुमकिन बना रहा है, जिससे भारत के सभ्यता से जुड़े ज्ञान के सिस्टम खुल रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया AI से बढ़ती दूरियों को लेकर परेशान है, भारत इसका इस्तेमाल दूरियों को मिटाने के लिए कर रहा है। हम इसे हर गांव, हर जिले और हर नागरिक को हेल्थकेयर, शिक्षा और आर्थिक मौके देने के लिए एक अच्छा टूल बना रहे हैं।

ANI: पेरिस में AI एक्शन समिट 2025 में अपनी स्पीच में, आपने AI के बायस और लिमिटेशन पर ज़ोर दिया था। अब से, क्या सिनेरियो बदला है? आप भारत को इस मुद्दे को कैसे देखते हैं?
पीएम नरेन्द्र मोदी: AI में बायस और लिमिटेशन को लेकर चिंताएं बहुत ज़रूरी हैं। जैसे-जैसे AI को अपनाने की रफ़्तार बढ़ रही है, रिस्क भी बढ़ रहे हैं। AI सिस्टम अनजाने में जेंडर, भाषा और सोशियो-इकोनॉमिक बैकग्राउंड से जुड़े बायस को बढ़ावा दे सकते हैं। AI इम्पैक्ट समिट 2026 अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ ला रहा है और AI के बायस और लिमिटेशन जैसे मामलों पर ग्लोबल अवेयरनेस पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए ग्लोबल कोऑपरेशन की ज़रूरत है। खास तौर पर भारत के लिए, हम यूनिक चैलेंज और मौकों का सामना कर रहे हैं। हमारी डायवर्सिटी – लिंग्विस्टिक, कल्चरल, रीजनल – का मतलब है कि AI बायस ऐसे तरीकों से दिख सकता है जो वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में साफ़ न हों। एक AI सिस्टम जो मुख्य रूप से इंग्लिश डेटा या शहरी कॉन्टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया है, वह रूरल यूज़र्स या रीजनल भाषाएं बोलने वालों के लिए खराब परफॉर्म कर सकता है। पॉजिटिव डेवलपमेंट यह है कि भारत इसे ज़्यादा सिस्टमैटिक तरीके से एड्रेस करना शुरू कर रहा है। हम ऐसे डायवर्स डेटासेट बनाने पर ज़्यादा फोकस देख रहे हैं जो भारत की प्लूरलिटी को दिखाते हैं, रीजनल भाषाओं में AI डेवलपमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है, और इंडियन एकेडमिक इंस्टीट्यूशन और टेक कंपनियों में फेयरनेस और बायस पर रिसर्च बढ़ रही है।

ANI: आधार और UPI जैसे कम लागत वाले डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने में भारत की सफलता शानदार है। DPI और AI का मेल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को काफी बेहतर बना सकता है। इस बारे में भारत क्या सीख रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ को मदद मिल सके?
पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यात्रा ग्लोबल साउथ के लिए ज़रूरी और प्रैक्टिकल सबक देती है। DPI और AI का मिलना इनक्लूसिव डेवलपमेंट का अगला फ्रंटियर है। आधार, UPI और दूसरी डिजिटल पब्लिक चीज़ों के साथ हमारी सफलता अचानक नहीं हुई। यह कुछ ऐसे सिद्धांतों से आई जिन्हें दोहराया जा सकता है। सबसे पहले, हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक पब्लिक गुड के तौर पर बनाया, न कि किसी प्रोप्राइटरी प्लेटफॉर्म के तौर पर। इस ओपन और इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर ने इनोवेशन को एक कॉमन बेस लेयर के ऊपर फलने-फूलने दिया। दूसरा, हमने पहले दिन से ही स्केल और इनक्लूजन के लिए डिज़ाइन किया। हमारे सिस्टम 1.4 बिलियन लोगों के लिए काम करते हैं, चाहे उनकी सोशियो-इकोनॉमिक स्थिति, लिटरेसी लेवल, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो। जब AI को इस फाउंडेशन पर लेयर किया जाता है, तो गवर्नेंस कहीं ज़्यादा रिस्पॉन्सिव और एफिशिएंट बन सकता है। AI वेलफेयर टारगेटिंग को बेहतर बना सकता है, फ्रॉड का पता लगाने को मज़बूत कर सकता है, इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को इनेबल कर सकता है, अर्बन प्लानिंग को सपोर्ट कर सकता है, और पब्लिक सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढ़ा सकता है। साथ ही, हम पूरे समाज में मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मज़बूत डेटा प्राइवेसी प्रोटेक्शन, सोच-समझकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और AI लिटरेसी के महत्व को समझते हैं। ह्यूमन-सेंट्रिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के अपने अनुभव के साथ, भारत यह पक्का करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है कि AI के फायदे आखिरी छोर तक, गांवों में किसानों, छोटे शहरों के स्टूडेंट्स, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर्स, इनफॉर्मल वर्कर्स और ग्रामीण और शहरी भारत के युवाओं तक पहुंचें, और यह सिर्फ शहरी अमीर लोगों तक ही सीमित न रहे। टेक्नोलॉजी को हर नागरिक की मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी इलाके, जेंडर या इनकम का हो। मकसद सिर्फ अपने फायदे के लिए AI को अपनाना नहीं है। यह AI ही है जो सच में नागरिकों को मजबूत बनाता है और 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनने की राह में तेजी लाता है, और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।

ANI: भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का पावरहाउस है। हम दुनिया को एक बड़ी टेक वर्कफोर्स देते हैं। AI के दौर में हम इसे और कैसे बढ़ा सकते हैं?
पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत में AI पावरहाउस बनने के लिए टैलेंट और एंटरप्रेन्योर एनर्जी है, सिर्फ़ एक कंज्यूमर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक क्रिएटर के तौर पर भी। हमारे स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और टेक इकोसिस्टम ऐसे AI सॉल्यूशन बना सकते हैं जो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, गवर्नेंस को बेहतर बनाएंगे और नई नौकरियां पैदा करेंगे। मुझे भरोसा है कि हमारे युवा भारतीय हकीकत के लिए AI सॉल्यूशन बना सकते हैं, जो किसानों, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर और जमीनी स्तर के इनोवेटर्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हम अपने टैलेंटेड युवाओं की हर कोशिश को मज़बूत करने के लिए कमिटेड हैं ताकि AI इनोवेशन और इनक्लूजन के लिए एक फोर्स-मल्टीप्लायर बन सके। यूनियन बजट 2026-27 इस विज़न को और मज़बूत करता है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सपोर्ट बढ़ाता है, जिससे घरेलू कंप्यूट कैपेसिटी मज़बूत होती है। IndiaAI फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप और रिसर्च इंस्टीट्यूशन को हाई-परफॉर्मेंस AI कंप्यूट रिसोर्स तक एक्सेस के साथ सपोर्ट दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स PLI, AI सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग के लिए लगातार कोशिश हार्डवेयर और ह्यूमन कैपिटल दोनों की नींव को मज़बूत करती है। शॉर्ट में, हम सिर्फ़ टैलेंट को ही नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि हम भारत को AI क्रांति में हिस्सा लेने से लेकर उसे आकार देने तक के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी इकोसिस्टम और स्किल बेस बना रहे हैं।

ANI: भारत में एक वाइब्रेंट IT सेक्टर है जो हमारे सर्विस एक्सपोर्ट में अहम योगदान दे रहा है। आप AI को हमारे IT सेक्टर पर कैसे असर डालते हुए देखते हैं? और सरकार हमारे IT सेक्टर को मज़बूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है?
पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत का IT सेक्टर हमारे सर्विस एक्सपोर्ट की रीढ़ और इकोनॉमिक ग्रोथ का एक मुख्य ड्राइवर रहा है। AI इस सेक्टर के लिए एक ज़बरदस्त मौका और चुनौती दोनों पेश करता है। AI मार्केट के अनुमान बताते हैं कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक $400 बिलियन तक पहुँच सकता है, जो AI-इनेबल्ड आउटसोर्सिंग और डोमेन-स्पेसिफिक ऑटोमेशन की नई लहरों से प्रेरित है। बुनियादी बदलाव यह है कि AI IT सेक्टर की जगह नहीं ले रहा है। यह इसे बदल रहा है। जबकि जनरल-पर्पस AI टूल्स आम हो गए हैं, एंटरप्राइज़-ग्रेड AI को अपनाना अभी भी खास सेक्टर्स में ही केंद्रित है, और मौजूदा IT फर्म मुश्किल बिज़नेस समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक मज़बूत भारतीय AI इकोसिस्टम को सक्षम करने के लिए, सरकार ने IndiaAI मिशन पर केंद्रित एक व्यापक रणनीति के साथ जवाब दिया है। हम पहले ही GPU के अपने शुरुआती टारगेट को पार कर चुके हैं और हम स्टार्टअप्स और एंटरप्राइज़ेज़ के लिए वर्ल्ड-क्लास AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक सस्ती पहुँच प्रदान करने के लिए और अधिक करने के लिए कमिटेड हैं। हमने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और सस्टेनेबल शहरों में चार सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और स्किलिंग के लिए पाँच नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं ताकि हमारे कर्मचारियों को इंडस्ट्री-संबंधित AI विशेषज्ञता से लैस किया जा सके। हम चाहते हैं कि हमारा IT सेक्टर न सिर्फ़ सर्विस डिलीवरी में, बल्कि भारत और दुनिया के लिए काम करने वाले AI प्रोडक्ट्स, प्लेटफ़ॉर्म और सॉल्यूशन बनाने में भी लीड करे।

ANI: हमने AI के गलत इस्तेमाल के कई उदाहरण देखे हैं। हम AI टेक्नोलॉजी के संभावित नुकसान से भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं?
पीएम नरेन्द्र मोदी: टेक्नोलॉजी एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह इंसानी इरादे के लिए सिर्फ़ एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर है। यह पक्का करना हम पर है कि यह अच्छे के लिए एक फ़ोर्स बने। AI इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन फ़ैसले लेने की आखिरी ज़िम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहनी चाहिए। दुनिया भर में, समाज इस बात पर बहस कर रहे हैं कि AI का इस्तेमाल और उसे कैसे कंट्रोल किया जाना चाहिए। भारत यह दिखाकर इस बातचीत को आकार देने में मदद कर रहा है कि मज़बूत सेफ़गार्ड लगातार इनोवेशन के साथ-साथ रह सकते हैं। इसके लिए, हमें AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट की ज़रूरत है, जो कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर बना हो। इनमें असरदार इंसानी निगरानी, ​​सेफ़्टी-बाय-डिज़ाइन, ट्रांसपेरेंसी और डीपफ़ेक, क्राइम और आतंकवादी गतिविधियों के लिए AI के इस्तेमाल पर सख़्त रोक शामिल होनी चाहिए। भारत AI रेगुलेशन में ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस अप्रोच की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में इंडियाAI सेफ़्टी इंस्टीट्यूट के लॉन्च के साथ, देश ने AI सिस्टम के नैतिक, सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड मैकेनिज़्म बनाया। जैसे-जैसे AI और एडवांस्ड होता जाएगा, हमारी ज़िम्मेदारी की भावना और मज़बूत होनी चाहिए। भारत के अप्रोच को जो बात खास बनाती है, वह है लोकल रिस्क और सामाजिक असलियत पर इसका फ़ोकस। नया रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं के साथ-साथ कमज़ोर ग्रुप्स को होने वाले नुकसान पर भी विचार करता है, जिसमें महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा के जोखिम और बुज़ुर्गों को प्रभावित करने वाले खतरे शामिल हैं। डीपफेक वीडियो में बढ़ोतरी के कारण इन सुरक्षा उपायों की ज़रूरत सभी को साफ़ हो रही है। इसके जवाब में, भारत ने AI से बने कंटेंट की वॉटरमार्किंग और नुकसानदायक सिंथेटिक मीडिया को हटाने के लिए नियम नोटिफ़ाई किए। कंटेंट सुरक्षा उपायों के साथ-साथ, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा सुरक्षा और यूज़र अधिकारों को मज़बूत करता है। भारत का कमिटमेंट ग्लोबल लेवल पर भी है। जैसे एविएशन और शिपिंग में बॉर्डर पार सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल नियम हैं, वैसे ही दुनिया को AI में भी आम सिद्धांतों और स्टैंडर्ड्स की दिशा में काम करना चाहिए। चाहे 2023 GPAI डिक्लेरेशन में अपनी भूमिका के ज़रिए, पेरिस AI चर्चाओं में, या मौजूदा समिट में, भारत ने हमेशा सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले #AIForAll के लिए सुरक्षा उपाय बनाते हुए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के संतुलित रास्ते की वकालत की है।

ANI: युवाओं के कुछ हिस्से में यह डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन लेगा। अगर ऐसा हुआ तो भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का फ़ायदा उठाना मुश्किल होगा। भारत सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?
पीएम नरेन्द्र मोदी: मैं जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों को लेकर हमारे युवाओं की चिंता समझता हूँ। तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं। सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्किलिंग पहलों में से एक शुरू की है। हम इसे भविष्य की समस्या के तौर पर नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे अभी की ज़रूरत मान रहे हैं। मैं AI को एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर के तौर पर देखता हूँ जो हमें उन सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जो हमने मुमकिन समझी थीं। यह डॉक्टरों, टीचरों और वकीलों को ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और उनकी मदद करने में मदद करेगा। इतिहास ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी की वजह से काम गायब नहीं होता। इसका नेचर बदलता है और नई तरह की नौकरियाँ बनती हैं। जहाँ कुछ नौकरियाँ फिर से तय हो सकती हैं, वहीं डिजिटल बदलाव भारत की इकोनॉमी में नई टेक नौकरियाँ भी जोड़ेगा। सदियों से, यह डर रहा है कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजिकल क्रांतियाँ नौकरियाँ खत्म कर देंगी। फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी इनोवेशन होता है, नए मौके सामने आते हैं। AI के ज़माने में भी यही सच होगा। भारत इस बदलाव के हिसाब से ढलने के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में, भारत तीसरे नंबर पर रहा, जो AI R&D, टैलेंट और इकोनॉमी में मज़बूत ग्रोथ को दिखाता है। इनोवेशन को इनक्लूजन के साथ मिलाकर, हमें भरोसा है कि AI भारत के वर्कफोर्स को मज़बूत करेगा। सही स्किल्स और तैयारी के साथ, हमारे युवा काम के भविष्य को लीड करेंगे।

ANI: आपके नेतृत्व में, भारत ने 4G और 5G जैसी स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी भी विकसित की है। आत्मनिर्भर भारत के लिए AI पर आपका क्या विजन है?
पीएम नरेन्द्र मोदी: आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा सफ़र एक बुनियादी उसूल पर बना है: भारत को सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे बनाना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत में AI के लिए मेरा विज़न तीन पिलर पर टिका है: सॉवरेनिटी, इनक्लूसिविटी और इनोवेशन। मेरा विज़न है कि भारत दुनिया भर में टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक हो, सिर्फ़ AI के इस्तेमाल में ही नहीं, बल्कि बनाने में भी। हमारे AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाएँगे, जो अरबों लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में सर्विस देंगे। हमारे AI स्टार्टअप की वैल्यू सैकड़ों अरबों में होगी, जिससे लाखों हाई-क्वालिटी जॉब्स बनेंगी। हमारी AI-पावर्ड पब्लिक सर्विसेज़ की दुनिया भर में कुशल, बराबर गवर्नेंस के लिए बेंचमार्क के तौर पर स्टडी की जाएगी। और सबसे ज़रूरी बात, हर भारतीय AI को मौके देने वाला, काबिलियत बढ़ाने वाला और इंसानी गरिमा का सेवक समझेगा, न कि अपनी आजीविका के लिए खतरा या कंट्रोल का ज़रिया। AI में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत डिजिटल सदी के लिए अपना कोड खुद लिखे, और IndiaAI मिशन के ज़रिए, हम यह पक्का कर रहे हैं कि वह कोड हमारी वैल्यूज को दिखाए, हमारे लोगों की सेवा करे, और भारत को दुनिया के लिए एक रेसपॉन्सिबल AI लीडर बनाए। 
स्रोत: ANI News

पंजाब का कैंसर संकट: 5 वर्ष में 13299 और 2025 में 2700 महिलाओं की मौत, AAP सांसद ने प्रदूषित पानी और खेती में केमिकल्स पर उठाए सवाल

           AAP के राज्यसभा सांसद सीचेवाल ने संसद में कैंसर से मौतों का मुद्दा उठाया (साभार: NDTV/Tribune)
पंजाब में कैंसर का संकट बेहद गंभीर होता जा रहा है। औसतन हर दिन आठ महिलाओं की कैंसर से मौत हो रही है। ताजा आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 2,700 महिलाओं की जान कैंसर के कारण जा चुकी है।

यह मामला 12 फरवरी को राज्यसभा में उठाया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने सदन में इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह पंजाब के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से तत्काल कदम उठाने की माँग की।

सीचेवाल ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

सीचेवाल ने विशेष उल्लेख (Special Mention) के दौरान पंजाब में महिलाओं के बीच बढ़ते कैंसर मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कैंसर के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी बेहद चिंताजनक है और इस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में पंजाब में लगभग 2,700 महिलाओं की कैंसर से मौत हुई जो औसतन प्रतिदिन 8 महिलाओं की मृत्यु के बराबर है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 13,299 महिलाओं की कैंसर से जान गई। इनमें सबसे अधिक 7,186 मौतें स्तन कैंसर से हुईं, इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervix Uteri) से 3,502 और अंडाशय कैंसर (Ovary cancer) से 2,611 महिलाओं की मृत्यु हुई।

उन्होंने आगे कहा, “चिंताजनक बात यह है कि 40 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में भी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही बल्कि कम उम्र की महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। उन्होंने पर्यावरणीय कारणों, खासकर जल प्रदूषण और कृषि में रासायनिक उर्वरकों के व्यापक उपयोग को इसके प्रमुख कारणों में बताया। उनका कहना था कि ये रसायन मिट्टी में मिलकर अंततः खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव शरीर में पहुँच जाते हैं।

सीचेवाल ने कहा कि ये आँकड़े नीति बनाने वालों और समाज दोनों के लिए चेतावनी हैं और इस पर गंभीरता से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

पंजाब में कैंसर के बढ़ते केस, इलाज में राहत की माँग

पर्यावरण प्रदूषण को कैंसर के बड़े कारणों में से एक माना गया है। प्रदूषित पीने का पानी, खेती में केमिकल खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल और उद्योगों का कचरा इसके संभावित कारण बताए गए हैं। सीचेवाल ने कहा कि जब माताओं के स्तन दूध में DDT जैसे खतरनाक रसायन पाए गए तब जाकर इन रसायनों पर रोक लगाई गई। इससे साफ होता है कि जहरीले तत्व कितनी गहराई तक इंसानी शरीर में पहुँच सकते हैं।

प्रदूषित/गंदे पानी की समस्या के दुष्परिणाम इंदौर में देखने बाद भी सरकारें सचेत नहीं है, क्योकि उनके घरों में 24 घंटे साफ पानी पहुँच रहा है।  दिल्ली में भी कई क्षेत्रों में मटमैला सरकारी पानी पहुँचने के कारण जनता पानी माफिया का पानी पीने को मजबूर हैं। सरकारें आएगी जाएँगी लेकिन पानी माफिया राज ख़त्म नहीं होगा। 

उन्होंने सरकार से माँग की कि महिलाओं के लिए कैंसर का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाए। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी या निजी अस्पतालों में इलाज के लिए कम से कम 75 से 80 प्रतिशत तक की सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि महिलाएँ परिवार और समाज की रीढ़ होती हैं, इसलिए पंजाब के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा जरूरी है।

पंजाब को क्यों कहा जाता है कैंसर कैपिटल?

पंजाब खासकर मालवा क्षेत्र को लंबे समय से भारत की ‘कैंसर कैपिटल’ कहा जाता है। कृषि उत्पादन के लिए मशहूर मालवा आज ‘कैंसर बेल्ट’ के नाम से भी जाना जाने लगा है।

Asian Pacific Journal of Cancer Prevention में प्रकाशित एक शोध पत्र में पंजाब के 500 कैंसर मरीजों का अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन के अनुसार, 500 मरीजों में से 65% महिलाएँ और 35% पुरुष थे। महिलाओं में 50–54 और 60–64 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित पाया गया। वहीं, पुरुषों में 65–69 और 60–64 वर्ष आयु वर्ग में कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा देखा गया।

महिलाओं में सबसे अधिक स्तन कैंसर के मामले सामने आए, इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) और अंडाशय (ओवरी) का कैंसर प्रमुख रहा। पुरुषों में सबसे ज्यादा कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर पाया गया, इसके बाद भोजन नली (इसोफेगस) और जीभ का कैंसर प्रमुख रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब में प्रति 1 लाख आबादी पर कम से कम 172 कैंसर मरीज दर्ज किए गए थे जबकि मालवा क्षेत्र में कैंसर के मामले और भी अधिक पाए गए। हाल के अनुमानों के मुताबिक मालवा में कैंसर की दर चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है। कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कृषि रसायनों और कीटनाशकों को व्यापक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में लगभग 15 लाख कैंसर के मामले दर्ज किए गए जो 2022 में 14.6 लाख थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरण प्रदूषण, आनुवंशिक कारण और देर से जाँच (डायग्नोसिस) कैंसर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। हालाँकि, पूरे देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन पंजाब की स्थिति विशेष रूप से गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यहाँ प्रदूषण और कृषि केमिकल्स से इसका संबंध है।

पंजाब की ‘कैंसर ट्रेन’

पंजाब की कैंसर स्थिति का सबसे मार्मिक प्रतीक है बठिंडा-बीकानेर ट्रेन जिसे लोग ‘कैंसर ट्रेन‘ कहते हैं। हर रात करीब 9:30 बजे 12 डिब्बों वाली यह ट्रेन बठिंडा से सैकड़ों यात्रियों, जिनमें कई कैंसर मरीज होते हैं, को लेकर रवाना होती है। लगभग 325 किलोमीटर का सफर तय कर यह सुबह राजस्थान के बीकानेर पहुँचती है।

अधिकांश मरीज आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर में इलाज कराने जाते हैं। बीकानेर में इलाज अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज दूसरे राज्य से रुख करते हैं। कैंसर मरीजों को ट्रेन में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है जबकि उनके साथ आने वाले को 75% किराया छूट दी जाती है।

मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष योजना के तहत बीकानेर के कुछ अस्पतालों में मरीजों को 15 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता भी दी जाती है। रातभर सफर कर इलाज के लिए जाते मरीजों के हाथों में मेडिकल फाइलों से भरे प्लास्टिक कवर, इस गंभीर संकट की दर्दनाक तस्वीर बन चुके हैं।

कौन हैं बलबीर सिंह सीचेवाल?

संत बलबीर सिंह सीचेवाल को ‘ईको बाबा’ के नाम से जाना जाता है। वह पंजाब के एक सिख पर्यावरण कार्यकर्ता, आध्यात्मिक नेता और राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) ने उनके पर्यावरण संरक्षण कार्यों के लिए नामित किया था।

उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान उस समय मिली जब उन्होंने काली बेईं नदी की सफाई का बड़ा अभियान चलाया। यह नदी लगभग 160 किलोमीटर बहने के बाद सतलुज और ब्यास नदियों में मिलती है। एक समय यह नदी औद्योगिक कचरे और दर्जनों गांवों के गंदे पानी के कारण पूरी तरह प्रदूषित होकर कूड़ाघर बन चुकी थी।

ऐसे हालात में संत सीचेवाल ने स्वयंसेवकों के सहयोग से एक विशाल जनआंदोलन खड़ा किया और नदी को पुनर्जीवित करने का काम किया। उनके इस प्रयास की विश्व स्तर पर सराहना हुई। वर्ष 2008 में उन्हें ‘टाइम’ पत्रिका द्वारा ‘पर्यावरण के नायक’ (Hero of the Environment) सम्मान दिया गया। उस समय यह सम्मान पाने वाले वे एकमात्र भारतीय और एशियाई थे।

उन्होंने ‘सीचेवाल मॉडल’ भी शुरू किया जो कम लागत वाली अंडरग्राउंड सीवेज व्यवस्था है। इस प्रणाली के माध्यम से गंदे पानी को शुद्ध कर खेतों में उपयोग किया जाता है। इस मॉडल को पंजाब सरकार का समर्थन भी मिला है। संत सीचेवाल स्वास्थ्य समस्याओं विशेषकर कैंसर को प्रदूषण से जोड़ते हैं। वे साफ जल और साफ हवा के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं और संसद में किसानों से लेकर पर्यावरण संकट तक के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

नरेंद्र मोदी ने देश को क्या दिया, कोई माता-पिता भी अपने बच्चों को सब कुछ नहीं देता पर आज मोदी से हर व्यक्ति 100% चाहता है: साभार - Abhay Pratap

सुभाष चन्द्र

- आपने 500 साल बाद राम मंदिर बनाया और उन पूर्वजों के सपनों को साकार किया जो मंदिर के लड़ते लड़ते मर गए

- आपने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाया और ज्ञानवापी सर्वे कराकर भोले बाबा के लिए;

- जो संभल जिहादी चरमपंथ का गढ़ था, वहां की जामा मस्जिद ढांचे में सर्वे कराया ताकि हरिहर मंदिर के मुक्त होने का रास्ता बन सके;

- केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कराया;

लेखक 
चर्चित YouTuber 
- उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के महाकाल लोक बनवाया;

- पावागढ़ के महाकाली मंदिर के शिखर पर 500 साल बाद भगवा ध्वज स्थापित किया, जिसे मुगल आक्रांताओं ने तोड़ दिया था;

- - कोयंबटूर में 112 फीट ऊंची आदियोगी शिव की प्रतिमा का अनावरण किया;

- सोमनाथ धाम परिवार का जीर्णोद्धार कराया;

- जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई व गुलमर्ग का शिव मंदिर, झेलम के रघुनाथ मंदिर, अनंतनाग का मार्तंड मंदिर, पाटन का शंकरगौरीश्वर मंदिर, श्रीनगर का पंडरेथन मंदिर, अवंतीपुरा का अवंति स्वामी व अवंती स्वरा मंदिर का पुनरुद्धार कराया;

- अनंतनाग के मार्तण्ड सूर्य मंदिर में सदियों बाद पूजा कराई

- उत्तराखंड के चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री को जोड़ने वाली सड़कों के लिए चारधाम परियोजना शुरू;

- देवनागरी ऋषिकेश को रेल मार्ग से कर्णप्रयाग से जोड़ा;

- अंबाजी तीर्थ का पुनर्निर्माण कराया;

- स्वदेश दर्शन के तहत 76 परियोजनाएं विकसित की;

- चोरी हुई 642 कलाकृतियां विदेश से वापस लाई गई;

- करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन किया;

- वक्फ कानून बनाया;

- BJP शासित राज्यों में गौ हत्या विरोधी कानून बना;

- BJP शासित राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून बना;

- BJP शासित राज्यों में लव जिहाद विरोधी कानून बना;

- CAA कानून बनाकर विदेशों में प्रताड़ित हिंदुओं को भारत की नागरिकता दी;

- 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय बनाए;

- विदेशी नेताओं को फूल नहीं बल्कि गीता भेंट की;

- अन्य प्रधानमंत्रियों के विपरीत गर्व से माथे पर त्रिपुंड लगाकर मंदिर-मंदिर घूमे और छद्म सेक्युलरिज्म की जगह सनातन सभ्यताओं को अपनाया;

- भारत मंडपम बनवाया जिसके बाहर भगवान नटराज की प्रतिमा लगवाई

- मुग़लिया और अंग्रेज गुलामी के तमाम प्रतीक हटाए;

- नया संसद भवन बनाया जिसमें सेंगोल स्थापित किया और प्राचीन अखंड भारत का मानचित्र लगाया;

- सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम अनिवार्य किया और कटा हुआ नहीं बल्कि पूर्ण वंदेमातरम बजाया

- काला पानी के वीर स्मारक स्मारक स्थल बनाया;

इसके बाद भी सोशल मीडिया का कट्टर हिंदू वर्ग आपकी कब्र खोदना चाहता है, आपकी सत्ता को उखाड़ फेंकना चाहता है और आपको हिंदू विरोधी और हिंदुओं में भी सवर्ण विरोधी घोषित कर चुका है और आपको हटाकर उन लोगों को सत्ता में लाने का रास्ता साफ कर रहा है;

- जो राम मंदिर का विरोध करते रहे;

- जो भगवान राम को काल्पनिक बताते थे;

- जो ज्ञानवापी और संभल सर्वे के विरोधी हैं;

- जो मुस्लिम वोट के कारण मंदिरों में पूजा करने नहीं जाते;

- जो 370 की बहाली की बात करते हैं;

- जो वक्फ कानून के विरोधी है;

- जो लव जिहाद और धर्मांतरण कानून के विरोधी हैं;

मोदी जी, गलती आपकी नहीं है. हम लोग हमेशा अहसानफ़रामोश रहे हैं

हम मनोकामना पूर्ण न होने पर भगवान बदल देते हैं तो आप तो फिर भी एक प्रधानमंत्री ही हो

हमें आदत है हिंदू विरोधी सरकार की, आपके जैसा कर्मठ  सनातनी प्रधानमंत्री नहीं चाहिए 

सब लोग ऐसे नहीं है, हम कोशिश करेंगे कि देश आपको खोए ना और आपकी जगह हिंदुद्रोही सत्ता में न आएं जो हिंदुओं और सनातन को मिटा दें -  

ISI से लिंक, सेना मुख्यालय से लेकर सरकारी दफ्तरों में आना-जाना: मेरठ में अम्मी-बेटी निकली PAK की नागरिक, 30 सालों से फर्जी आधार कार्ड-पासपोर्ट के जरिए भारत में रह रहीं

पाकिस्तानी नागरिक अम्मी-बेटी के खिलाफ जाली भारतीय दस्तावेज और अवैध निवास के आरोप में FIR दर्ज (साभार: Dall-E/X)
उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस ने 14 फरवरी 2026 को एक अम्मी और उसकी बेटी के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप है कि ये दोनों करीब 30 साल से भारत में रह रही थीं, जबकि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं। इस मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता रुखसाना ने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अम्मी-बेटी ने धोखे से भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए। रुखसाना ने शिकायत में बताया कि पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद दोनों ने फर्जी तरीके से आधार कार्ड, वोटर आईडी और भारतीय पासपोर्ट तक हासिल कर लिया।

मीडिया से बात करते हुए SSP अविनाश पांडेय ने बताया कि उन्हें फरहत मसूद नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली। वह दिल्ली गेट इलाके में रहता है। बताया जा रहा है कि फरहत मसूद पाकिस्तान गया था, जहाँ उसने सबा नाम की औरत से निकाह किया। वहीं पाकिस्तान में उनकी एक बेटी पैदा हुई। सबा और उसकी बेटी दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक हैं।

SSP ने बताया कि शुरुआती जाँच में यह साफ हो गया है कि आरोपित बिना वैध भारतीय नागरिकता के यहाँ रह रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे पहले SP सिटी द्वारा की गई जाँच में भी आरोपों में सच्चाई पाई गई थी। जाँच में तथ्य सामने आने के बाद अब इस मामले में औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की गहराई से जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

मामले में FIR की पूरी जानकारी

ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी देखी है। इस FIR में सबा मसूद उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उशकी बेटी ऐमन फरहत को मुख्य आरोपित बताया गया है। इन दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS)2023 की कई धाराएँ लगाई गई हैं।

इनमें धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 351(2) और 352 शामिल हैं। ये धाराएँ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोपों से जुड़ी हुई हैं।

                                                                       साभार: UP पुलिस

शिकायतकर्ता ने बताया कि सबा ने पाकिस्तान में फरहत मसूद से निकाह किया था और उनके बेटी ऐमन का जन्म वहीं 25 मई 1993 को हुआ था। उन्होंने आगे कहा कि जब सबा भारत आई, तो ऐमन भी उसके साथ ही आई थी। ऐमन ने भारत में एंट्री सबा के पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए की थी। उस पासपोर्ट में ऐमन का नाम और उसकी जन्मतिथि साफ-साफ दर्ज थी।

शिकायतकर्ता रुखसाना ने आगे बताया कि अम्मी और बेटी, दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद मेरठ में रह रही थीं। उन्होंने कभी भी कानूनी तरीके से भारतीय नागरिकता लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं की। रुखसाना ने यह भी कहा कि ऐमन ने मेरठ में ही पढ़ाई की, जबकि वह पाकिस्तानी नागरिक थी।

                                                              साभार: UP पुलिस

उन्होंने आगे बताया कि ऐमन के लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी और बनावटी दस्तावेज तैयार किए गए। रुखसाना के मुताबिक, सबा ने भी दो अलग-अलग नामों से वोटर कार्ड बनवा लिए थे। इनमें एक सबा मसूद के नाम से और दूसरा नाजिया मसूद के नाम से था। शिकायत में कहा गया है कि ये सब जानबूझकर अपनी असली पहचान छिपाने और भारतीय अधिकारियों को धोखा देने के लिए किया गया।

रुखसाना ने अपनी शिकायत में सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि आरोपित फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर कई बार पाकिस्तान और दूसरे देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि सबा के अब्बा हनीफ अहमद कथित तौर पर पाकिस्तान नागरिक थे और उनका संबंध ISI से बताया जाता है। रुखसाना के अनुसार, इसी वजह से यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर हो जाता है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित अपनी असली पहचान छिपाकर दिल्ली में सेना मुख्यालय और दूसरे सरकारी दफ्तरों में भी अकसर आते-जाते रहे हैं।
FIR में यह भी दर्ज है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पहले इस मामले पर आपत्ति जताई थी तब उन्हें धमकाया और डराया गया था। रुखसाना का कहना है कि आरोपितों ने उन्हें यह कहकर दबाव बनाने की कोशिश की कि उनकी राजनीतिक पहुँच है और पुलिस प्रशासन में भी उनके संबंध हैं।

ममता के तुष्टिकरण पर भारी पड़ेगा राष्ट्रवाद: इधर तारिक रहमान को मिठाई, उधर SIR में अड़ंगा बने अफसरों पर आयोग का डंडा


पश्चिम बंगाल मैं जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे ममता बनर्जी सरकार का असली चेहरा खुलकर सामने आने लगा है। मुस्लिम तुष्टिकरण, अवैध घुसपैठ पर नरमी, संवैधानिक संस्थाओं से टकराव और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग, इन सबने मिलकर बंगाल की जनता को भीतर तक झकझोर दिया है। बांग्लादेशी में जीते रहमान को मिठाई भेजने से लेकर SIR जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में अड़ंगा डालने तक, ममता सरकार के कदम साफ संकेत दे रहे हैं कि सत्ता बचाने के लिए राज्य की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भी गिरवी रखा जा सकता है। यही वजह है कि अब बंगाल का आम नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। चुनाव आयोग की सख्ती और सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी ने ममता बनर्जी की राजनीति की बुनियाद हिला दी है। चुनाव आयोग ने एसआईआर के काम में लापरवाही बरतने पर ममता सरकार से सात अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। यह सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उस अहंकार पर प्रहार है, जो खुद को संविधान से ऊपर समझ बैठे हैं।

अब “मां-माटी-मानुष” नहीं, बल्कि सुरक्षा, विकास और सुशासन की मांग
ममता सरकार की इन्हीं कारगुजारियों से बंगाल में बदलाव का आहट सुनाई देने लगी है। यहीं से बंगाल में बदलाव की कहानी शुरू होती है। तुष्टिकरण की थकी हुई राजनीति के मुकाबले राष्ट्रवाद, विकास और सुशासन की बात करने वाली भाजपा तेजी से जनता का भरोसा जीतती दिख रही है। ममता सरकार की घुसपैठ पर चुप्पी, वोट बैंक की राजनीति और ईडी-आयोग जैसी संस्थाओं से टकराव वाली नीतियां आने वाले चुनाव में बीजेपी के लिए सबसे बड़ा हथियार बन रही हैं। ममता बनर्जी अपनी जिद और तुष्टिकरण की राजनीति से बीजेपी के लिए रेड कार्पेट बिछा रही हैं। हर गलत फैसला, हर पक्षपाती कदम और हर संवैधानिक टकराव जनता को यह एहसास दिला रहा है कि अब बदलाव जरूरी है। यही कारण है कि बंगाल की फिजा में अब “मां-माटी-मानुष” नहीं, बल्कि सुरक्षा, विकास और स्थिरता की मांग गूंजने लगी है।

तुष्टिकरण के लिए तारिक रहमान को बधाई और मिठाई
राज्य में विधानसभा चुनाव की आहट तेज हुई, वैसे ही ममता बनर्जी की राजनीति एक बार फिर उसी पुराने ट्रैक पर लौट आई यानी मुस्लिम तुष्टिकरण। बांग्लादेश में जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान को जीत की बधाई के साथ मिठाई भेजना केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बंगाल की सियासत में एक गहरा संदेश है। यह संदेश साफ है—वोट बैंक सर्वोपरि है, चाहे राज्य की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन दांव पर क्यों न लग जाए। विडंबना देखिए कि जिस बंगाल में सबसे ज्यादा अवैध घुसपैठियों की शिकायतें सामने आती रही हैं, जहां सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है, उसी बंगाल की मुख्यमंत्री बांग्लादेशी नेता को मिठाई भेजने में संकोच नहीं करतीं। सवाल यह है कि क्या राज्य के मूल निवासियों की चिंता से ज्यादा जरूरी विदेश के ‘भाई’ से रिश्ते निभाना है? यह दोहरा चरित्र अब किसी से छिपा नहीं रहा।

जय श्रीराम के नारों से बिदकने वाली ममता की बाबरी यात्रा पर बोलती बंद
दरअसल, पश्चिम बंगाल में ममता सरकार को इन दिनों कई भूचाल का सामना करना पड़ रहा है। ममता बनर्जी संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ हैं तो खुद उनकी पार्टी में उनके खिलाफ आवाज उठने लगी है। कभी ममता बनर्जी के भरोसेमंद रहे विधायक हुमायूं कबीर अब उन्हीं के गले की फांस बनते जा रहे हैं। मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की घोषणा, उस पर अमल और  बाबरी यात्रा निकालकर  राज्य की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जय श्रीराम के नारों से ही बिदक जाती थीं, उनकी बोलती बाबरी यात्रा पर बंद हो गई है। दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यदि किसी एक स्तंभ ने ममता बनर्जी को पिछले डेढ़ दशक तक सत्ता में टिकाए रखा है, तो वह है मुस्लिम वोट बैंक। यही साम्प्रदायिक संतुलन अब तेजी से दरकता नजर आ रहा है। यह कोई छुपा हुआ तथ्य नहीं, बल्कि चुनावी गणित का सबसे स्थापित सच है। राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 27-28 प्रतिशत है और मतदाता सूची में भी यह अनुपात लगभग उतना ही है। यही वजह है कि बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाता केवल एक समुदाय नहीं, बल्कि सत्ता के निर्णायक वोट बैंक बनते रहे हैं। लेकिन अब यही वोट बैंक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ से फिसलता दिख रहा है। बल्कि यदि यह कहें कि वोट-बैंक रूपी यही औजार अगले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ इस्तेमाल होगा, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

चुनाव आयोग का सख्त संदेश: अब लापरवाही नहीं चलेगी
इस बीच चुनाव आयोग ने ममता सरकार को करारा झटका दिया है। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया में अड़ंगा डालने वाले मुख्यमंत्री के सात अधिकारियों को सस्पेंड कर यह स्पष्ट कर दिया गया कि संवैधानिक कार्यों में बाधा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि तृणमूल सरकार की मनमानी पर सीधा तमाचा है। सात अफसर निलंबित हो गए, लेकिन असली सवाल यह है कि उन्हें ऐसा करने का साहस कहां से मिला? क्या बिना मुख्यमंत्री के इशारे के इतने बड़े स्तर पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप संभव है? अफसरों को मोहरा बनाकर खुद को पाक-साफ दिखाने की यह पुरानी राजनीति अब जनता समझ चुकी है। दरअसल, ममता सरकार की राजनीति का केंद्र बिंदु वर्षों से एक ही रहा है और वह है एक वर्ग विशेष को खुश रखना। अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार की ढिलाई किसी भूल का नतीजा नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: एसआईआर में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं
हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने भी ममता सरकार को साफ शब्दों में चेताया कि SIR प्रक्रिया में किसी तरह की अनावश्यक दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। देश की सर्वोच्च अदालत को यह कहना पड़े, यह अपने आप में बताता है कि बंगाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कितना दबाव बनाया जा रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी संवैधानिक संस्थाओं से भिड़ती नजर आई हों। कभी राज्यपाल से टकराव, कभी केंद्रीय एजेंसियों पर आरोप, ईडी की टीम से टकराव और अब चुनाव आयोग व सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, यह एक ऐसे नेतृत्व की तस्वीर पेश करता है, जो कानून से ऊपर खुद को मान बैठा है।

अब इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार पर जोर दे रही जनता
एक ओर जहां देश के दूसरे हिस्से इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार पर बात कर रहे हैं, वहीं बंगाल की राजनीति आज भी पहचान और तुष्टिकरण के इर्द-गिर्द घूम रही है। उद्योग पलायन कर रहे हैं, युवा बेरोजगार हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का फोकस बांग्लादेशी नेताओं को मिठाई भेजने और वोट बैंक साधने पर है। अब बंगाल का आम नागरिक सवाल पूछ रहा है, क्या यही सुशासन है? क्या यही ‘मां-माटी-मानुष’ का मॉडल है? जिन इलाकों में स्थानीय लोग खुद को अल्पसंख्यक महसूस करने लगे हैं, वहां सरकार की चुप्पी बहुत कुछ बयां करती है। जनता समझ रही है कि यह सब अचानक नहीं हो रहा, बल्कि वर्षों की राजनीतिक प्रयोगशाला का नतीजा है।

तुष्टिकरण की राजनीति अब भारी पड़ेगा विकास और सुशासन
सात अफसरों का निलंबन केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले एक स्पष्ट संदेश है कि अब सिस्टम से खिलवाड़ नहीं चलेगा। यह ममता सरकार के लिए आखिरी चेतावनी भी हो सकती है कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती, जवाबदेही जरूर होती है। ममता बनर्जी आज उसी जाल में फंसती दिख रही हैं, जिसे उन्होंने खुद बुना है। मुस्लिम तुष्टिकरण, अवैध घुसपैठ पर नरमी, संवैधानिक संस्थाओं से टकराव और अफसरशाही का दुरुपयोग, ये सब मिलकर उनकी सरकार की विश्वसनीयता को तेजी से खोखला कर रहे हैं। चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती इस बात का संकेत है कि अब मनमानी का दौर खत्म होने वाला है। बंगाल बदलाव चाहता है। वह विकास और सुशासन चाहता है। वह महिला शक्ति का आत्मसम्मान और युवाओ के लिए रोजगार चाहता है। और शायद इस बार वोट सिर्फ भावनाओं पर नहीं, बल्कि सच्चाई, सुरक्षा, सुशासन और विकास के लिए ही पड़ेगा।

बाबरी यात्रा के जरिए ममता के मुस्लिम वोट बैंक में पैठ बनाना लक्ष्य
बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद नादिया-मुर्शिदाबाद बॉर्डर (पलाशी) से बेलडांगा तक 22 किलोमीटर का पैदल मार्च (बाबरी यात्रा) शुरू की है। इस बाबरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य मुर्शिदाबाद के बेल़डांगा में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति (Replica) का निर्माण करना है। इस यात्रा के जरिए कबीर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वोट बैंक यानी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में अपनी पैठ बनाएंगे और अपनी नई पार्टी, जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के लिए जनसंपर्क करेंगे। यह यात्रा नादिया जिले के ऐतिहासिक स्थल पलाशी से शुरू होकर मुर्शिदाबाद जिले में निर्माणाधीन बाबरी मस्जिद स्थल तक जाएगी। हालांकि पहले इसे उत्तर दिनाजपुर के इटाहार तक ले जाने की योजना थी, जिसे फिलहाल छोटा कर दिया गया है। खबरों के मुताबिक पहले यह यात्रा लगभग 265 किलोमीटर लंबी होनी थी, लेकिन बोर्ड परीक्षाओं के चलते और पुलिस की अनुमति न मिलने के कारण इसे घटाकर 22 किलोमीटर कर दिया गया है।

न्यायिक ढील कन्हैया कुमार को एक बार फिर JNU में ले आई; ब्राह्मणों को ठिकाने लगाने के नारे लगाए; रुचि तिवारी पर हमला JNU के गिरोह का ही काम था

सुभाष चन्द्र 

भारत के कानून लचीले हैं या न्यायाधीश इस गंभीर मुद्दे पर देश को जवाब मांगना होगा। कोर्ट में  freedom of speech के नाम पर जो रिहा करने का ड्रामा भारत में होता है किसी और देश में नहीं। "क्यों टुकड़े गैंग" को देशद्रोह के आरोप में जेलों में डाला जाता?     

आज से 9 साल पहले JNU में 9 फरवरी, 2016 को कन्हैया कुमार और उमर खालिद के नेतृत्व में नारेबाजी का नंगा नाच हुआ और देश तोड़ने के नारे लगाए गए। 

“हम क्या चाहते - आज़ादी, 

बंदूक से लेंगे आज़ादी, 

भारत तेरे टुकड़े होंगे - इंशाअल्ला,

इंडियन आर्मी मुर्दाबाद,

पाकिस्तान जिंदाबाद,

भारत को रगड़ा दे रगड़ा दे, और 

इंडिया गो बैक”

लेखक 
चर्चित YouTuber 
दिल्ली पुलिस ने जो केस दर्ज किया तो ये दोनों हिम्मत वाले नेता कन्हैया कुमार और उमर खालिद भाग खड़े हुए कि उन्होंने कोई नारे नहीं लगाए। केजरीवाल सरकार 4 साल तक कन्हैया कुमार को बचाती रही और 28 फरवरी, 2020 को दिल्ली चुनाव से पहले उस पर मुकदमा चलाने की सैंक्शन दी। 

मजिस्ट्रेट कोर्ट जांच में कह दिया गया कि उसके नारेबाजी में शामिल होने का प्रमाण नहीं मिला और कुछ वीडियो पुलिस के पास doctored हैं। लेकिन Sedition का केस कन्हैया कुमार पर चल रहा है परंतु ठंडे बस्ते में लगे होने की वजह से वह मौज ले रहा है और 15 फरवरी को एक बार फिर JNU में निष्काशित JNU छात्र संघ के नेताओ के साथ  ढपली बजा कर नारेबाजी कर रहा था। 

अबकी कन्हैया कुमार और JNU की अदिति मिश्रा गिरोह ने नारे लगाए -

“ब्राह्मणवाद से आज़ादी,

इस्लामफोबिया से आज़ादी,

मनुवाद से आज़ादी 

जातपात से आज़ादी”

उसके पहले 5-6 जनवरी को अदिति मिश्रा के नेतृत्व में कथित JNU छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत ख़ारिज होने पर नारे लगाए थे और सुप्रीम कोर्ट को सीधी चुनौती दी थी

“मोदी शाह की कब्र खुदेगी JNU की छाती पर,

ABVP - RSS की कब्र खुदेगी, 

इसके साथ आज़ादी के भी नारे लगे और नारे लगे -

“ब्राह्मणों भारत छोड़ो,

ब्राह्मणों कैंपस छोड़ो, 

ब्राह्मणों - बनियों से बदला लेंगे”

इस नारेबाजी और तोड़फोड़ के बाद छात्रसंघ के सभी पदाधिकारियों को JNU ने निष्कासित कर दिया था।

 

14 फरवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय में पत्रकार यूटूबर रुचि तिवारी पर JNU गिरोह ने जिसमें निष्कासित नेता शामिल थे हमला किया, उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की। रूचि के अनुसार वे लोग उसकी नग्न परेड कराना चाहते थे क्योंकि वह एक ब्राह्मण है। याद रहे ये JNU के गुंडे ब्राह्मणों को भारत से निकालने की बात कर रहे हैं

UGC रेगुलेशंस में कमियां हैं लेकिन सवर्णो खासकर ब्राह्मणों को JNU की खासकर ब्राह्मण नेता अदिति मिश्रा के उनके विरुद्ध नारेबाजी से सावधान रहना चाहिए। JNU के मुट्ठीभर लोग किसी का भविष्य तय नहीं कर सकते। इसलिए अब उन्हें JNU के गुंडों के खिलाफ हल्ला बोलना चाहिए और उन्हें याद रहे कांग्रेस ऐसे लोगो के साथ खड़ी है। मोदी से नाराज़गी हो सकती है लेकिन वह फिर भी अपना है लेकिन ये कांग्रेस और JNU के अर्बन नक्सल आपके दुश्मन है और किसी तरह ये अपने नहीं हो सकते

ऐसा क्या हो गया कि कांग्रेसियों पर ही भड़क उठे मणिशंकर अय्यर?


केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। उन्होंने न केवल आगामी चुनावों में कांग्रेस की हार की भविष्यवाणी की, बल्कि कई दिग्गज नेताओं पर भी तीखे प्रहार किए। उनके इन बयानों ने पार्टी के भीतर भूचाल ला दिया है और अंदरूनी कलह को सरेआम सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।

मणिशंकर अय्यर ने केरल चुनाव से पहले अपनी ही पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए दावा किया है कि राज्य में फिर से वाम मोर्चा (LDF) की सरकार बनने जा रही है और पिनराई विजयन ही मुख्यमंत्री की गद्दी संभालेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने वाम मोर्चा के पंचायती राज मॉडल का गुणगान करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

अब सोचिए, जिस वक्त कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) राज्य में 10 साल का सियासी सूखा खत्म करने की कोशिश में जुटी है, उसी वक्त पार्टी के वरिष्ठ नेता विपक्ष की जीत की भविष्यवाणी कर दें—तो फिर किरकिरी तो बनती है! इन बयानों के बाद कांग्रेस के भीतर ही मणिशंकर के खिलाफ बगावत शुरू हो गई है। पार्टी के एक शीर्ष नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी भड़ास निकालते हुए साफ किया कि अय्यर का पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं है और वे जो कुछ भी कह रहे हैं, वह उनकी ‘निजी हैसियत’ में है।

हालांकि, जब पार्टी ने उनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की, तो अय्यर साहब ‘फुल फॉर्म’ में आ गए और पलटवार करते हुए अपना ही मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पवन खेड़ा को ‘कठपुतली’ करार देते हुए दावा किया कि वे पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं। अय्यर ने यहां तक कह दिया कि यदि कांग्रेस पवन खेड़ा के विकल्प के तौर पर किसी और को प्रवक्ता नहीं बना पाती, तो पार्टी की हालत ऐसी ही बदतर बनी रहेगी।

अय्यर के तरकश के तीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने शशि थरूर पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे ‘अगले विदेश मंत्री’ बनने के सपनों में खोए हुए हैं और उनमें इस पद के लिए भारी महत्वाकांक्षा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश पर निशाना साधते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्हें अपनी ‘नौकरी’ बचाने के लाले पड़े हुए हैं।

इतना ही नहीं अपने बयानों से अक्सर विवादों में रहने वाले अय्यर ने राहुल गांधी को भी नहीं छोड़ा। राहुल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि मैं राहुलवादी नहीं हूं।

पूरा मामला तूल पकड़ चुका है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर मीम्स और तंज की बाढ़ आ गई है। इससे कांग्रेस की किरकिरी हो रही है…

 

शोएब अख्तर ने ऑन कैमरा मोहसिन नकवी को लताड़ा : ‘जाहिल, अयोग्य और बेकार’: T-20 में भारत से मिली हार के बाद PAK टीम को पाकिस्तानियों ने ही रगड़ा


ICC टी-20 वर्ल्ड कप में भारत ने एक बार फिर बड़े मुकाबले में अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए पाकिस्तान को 61 रन से करारी शिकस्त दी और सुपर 8 में अपनी जगह पक्की कर ली। कोलंबो में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 175 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 18 ओवर में 114 रन पर सिमट गई।

मैन ऑफ द मैच ईशान किशन ने 40 गेंदों पर 77 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी पारी में 10 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाज़ी की और रन गति को लगातार बढ़ाया। बाद में पाकिस्तान टीम जब पिच पर बैटिंग करने उतरी तो कुछ ही ओवरों में पता चल गया कि मैच के परिणाम क्या होने वाले हैं।

पाकिस्तान टीम की दुर्दशा के लिए खिलाडी नहीं पाकिस्तान सरकार जिम्मेदार है। U-19 में भारत के हाथों मिली हार के बाद प्रधानमंत्री शाहबाज़ द्वारा टूर्नामेंट का बहिष्कार करने ने टीम का मनोबल ही तोड़ दिया था। लेकिन ICC के सख्त रवैये की वजह से हाँ-ना में भारत के विरुद्ध खेलने के फैसले से टीम मझधार में रही। 

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के हाथों पाकिस्तान की शर्मनाक हार के बीच कोलंबो के स्टेडियम से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सोशल मीडिया पर विवाद और मजाक का नया दौर शुरू कर दिया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष और एशिया कप की ट्रॉफी चुराने वाले मोहसिन नकवी मैच खत्म होने से पहले ही स्टेडियम छोड़कर भाग निकले। उनसे पाकिस्तान की हार देखी नहीं गई।

जब भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी और 12वें ओवर में मोहम्मद नवाज का विकेट गिरा, तब पाकिस्तान का स्कोर 77/5 था। जीत की उम्मीद खत्म होते देख मोहसिन नकवी वीवीआईपी बॉक्स से उठकर सीधे अपनी गाड़ी की ओर भागते दिखे। पीटीआई द्वारा जारी वीडियो में उन्हें मैच खत्म होने से काफी पहले स्टेडियम के बाहर जाते देखा गया। सोशल मीडिया पर फैंस ने इसे हार के डर से भागना करार दिया है। 

पूर्व क्रिकेटरों ने दी बधाई, इरफान पठान ने डांस कर पूछा- पड़ोसियों, संडे कैसा रहा?

भारत की जीत के बाद देशभर में जश्न का माहौल रहा। सोशल मीडिया पर भी इस जीत को लेकर उत्साह देखने को मिला। भारतीय क्रिकेट जगत के पुराने खिलाड़ियों ने भी जीत के लिए टीम के खिलाड़ियों के बेहद अलग अंदाज में बधाई दी।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने टीम इंडिया को जीत की बधाई देते हुए X पर लिखा, “ईशान किशन असली धुरंधर की तरह खेले। सभी छोटी टीमों में से पाकिस्तान को हराना भारत के लिए सबसे आसान लग रहा था क्योंकि T-20 क्रिकेट में उनका 17वीं सदी का अप्रोच था और उन्हें हमेशा की तरह अच्छी हार मिली। पूरी कंबल कुट्टई।”

इसी तरह मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने लिखा, “पावरप्ले में भारत ने मैच अपने हाथ से छीन लिया। पहली इनिंग में ईशान किशन की बॉलिंग और दूसरी इनिंग में हमने जो जबरदस्त बॉलिंग देखी, उससे सारा फर्क पड़ा। हम हमेशा ड्राइवर सीट पर थे। आज रात भारत ने धमाल मचा दिया।”

पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान का एक खास वीडियो तो इंटरनेट पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की हार पर चुटकी ली है। मैच खत्म होते ही इरफान पठान ने इंस्टाग्राम पर अपना एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह मशहूर गाने ‘अफगान जलेबी’ पर थिरकते नजर आ रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में लिखा, “पड़ोसियों, संडे कैसा रहा?”  

क्रिकेटर युवराज सिंह ने X पर लिखा, “बड़े गेम में बड़े कैरेक्टर की जरूरत होती है और लड़कों ने आज रात वही दिखाया! शांत दिमाग और मजबूती से खत्म करने की भूख एक यूनिट के तौर पर हमने जिस तरह से परफॉर्म किया, उस पर गर्व है! आगे बढ़ते रहो और ऊपर उठते रहो।”

भारत के अलावा बलूचिस्तान में भी लोगों ने डांस करते हुए भारतीय टीम की जीत का जश्न मनाया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

मोहसिन नकवी पर भड़के शोएब अख्तर

दूसरी ओर पाकिस्तान में निराशा स्पष्ट थी। पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन की आलोचना करते हुए प्रशासनिक ढाँचे पर सवाल उठाए। उनका मानना था कि क्रिकेट की समझ रखने वाले लोगों को शीर्ष पदों पर होना चाहिए, तभी टीम का प्रदर्शन सुधर सकता है।
गुस्से में शोएब अख्तर ने नकवी को जाहिल और पद के लिए अयोग्य तक बताया। उन्होंने भारतीय न्यूज चैनलों से बात करते हुए अपना रोष प्रकट किया। उन्होंने कप्तान बाबर आजम के प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की और टीम चयन व नेतृत्व को लेकर नाराजगी जाहिर की।
एबीपी न्यूज पर बात करते हुए अख्तर ने माना है कि क्रिकेट नहीं जानते, PCB के चेयरमैन बन गए हैं, इस कारण पाकिस्तान टीम का यह हाल हो रहा है। शोएब अख्तर ने कहा, “एक आदमी जिसे कुछ नहीं पता, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का चेयरमैन (मोहसिन नकवी) बन गया है, आप क्या कर सकते हैं? टीम कैसे चलेगी? आपने एक ऐसे खिलाड़ी (बाबर आजम) को सुपरस्टार बना दिया है जो आपको एक भी मैच नहीं जिता सकता। दुनिया का सबसे बड़ा गुनाह है नाकाबिल और जाहील आदमी को बड़ा काम देना।”

पाकिस्तानी फैन्स की उम्मीदें टूटीं, विराट कोहली जैसे कप्तान की रखी माँग

पाकिस्तानी समर्थकों में भी गहरी निराशा दिखी। कई प्रशंसकों ने टीम की रणनीति, तैयारी और मानसिक मजबूती पर सवाल उठाए। कुछ ने भारतीय टीम की तारीफ करते हुए स्वीकार किया कि मौजूदा समय में भारत हर विभाग में बेहतर दिख रहा है।
फैन्स का मानना है कि टीम को राजनीति और आंतरिक विवादों से दूर रहकर पेशेवर तैयारी पर ध्यान देना होगा। तेज गेंदबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन के सामने पाकिस्तान के बल्लेबाजों की कमजोरी उजागर हुई।
एक ने कहा, “एकतरफा मैच था, अगर पाकिस्तान की अवाम बाबर आजम को किंग समझती है, तो उन्हें किंग की तरह बनना चाहिए, उन्हें विराट कोहली जैसा बनना चाहिए। विराट कोहली अगर आजम की जगह होते तो यह मैच इंडिया को आसानी से जिता देते। बाबर आजम किंग नहीं हैं और टीम में जगह पाने के लायक नहीं हैं। यह कोई टीम नहीं है, बस इधर-उधर से आए कुछ खिलाड़ियों का जमावड़ा है।”
एक मकबूल नाम के फैन ने कहा, “मुझे थोड़ी उम्मीद थी कि हम मैच जीतेंगे और कम से कम कड़ी टक्कर देंगे। लेकिन यह तो एक आम बात हो गई है। हमारे पास बुमराह का कोई जवाब नहीं है। हम हार्दिक का सामना नहीं कर सकते। यही हाल है। हमेशा की तरह, टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। अगर इसी तरह का प्रदर्शन जारी रहा, तो हम भारत को नहीं हरा सकते। भारतीय टीम बहुत अच्छी है। और हम इस बात को स्वीकार करते हैं।”

बुरी तरह हारने का पाकिस्तान का रहा है इतिहास

गौरतलब है कि T20 वर्ल्ड Cup के इतिहास में भारत और पाकिस्तान के मैच हमेशा खास रहे हैं, हर बार पाकिस्तान का दावा रहता है कि वो पूरी तैयारी के साथ हैं, लेकिन हर बार उन्हें फजीहत झेलनी पड़ती है। अब तक दोनों टीमों के बीच कुल 9 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से भारत ने 8 में जीत दर्ज की है।
इनमें एक मुकाबला ऐसा भी रहा, जिसमें परिणाम सुपर ओवर से तय हुआ और वहाँ भी भारत ने दबाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाज़ी अपने नाम की। यह दर्शाता है कि करीबी परिस्थितियों में भी भारतीय टीम मानसिक मजबूती और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में सफल रही है। दूसरी ओर, पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट में भारत के खिलाफ केवल एक जीत हासिल हुई है-वह भी 2021 में।

ब्राह्मण विरोधी नफरत, कश्मीरी पंडितों का मजाक और विक्टिम कार्ड: अंबेडकरवादी लक्ष्य लेकी ने की साइबर बुलिंग, वकील ट्यूलिप शर्मा ने दर्ज कराई शिकायत

                                   लक्ष्य लेकी, ट्यूलिप शर्मा (फोटो साभार: Instagram)
खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले लक्ष्य लेकी सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गए हैं। IIM इंदौर से पढ़े और TedX स्पीकर लक्ष्य के खिलाफ क्रिमिनल लॉयर और इन्फ्लुएंसर ट्यूलिप शर्मा ने साइबर शिकायत दर्ज कराई है। उस पर ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने, जातिगत गालियाँ देने और महिलाओं को अपमानजनक मैसेज भेजने का आरोप है।

ऑपइंडिया से बातचीत में ट्यूलिप ने शिकायत के बारे में कहा कि ऐसा करना जरूरी था, क्योंकि लक्ष्य जैसे लोग एक जगह पर नहीं रुकते, वो लगातार ऐसी हरकतें करते रहते हैं।

लक्ष्य लेकी आईआईएम इंदौर के ग्रेजुएट हैं और टीईडीएक्स स्पीकर भी रह चुके हैं। वे ‘लक्ष्य स्पीक्स’ नाम से इंस्टाग्राम पेज और यूट्यूब चैनल चलाते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 5 लाख 53 हजार फॉलोअर्स हैं और यूट्यूब पर 14 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स।

ट्यूलिप ने भारतनाट्यम और देवदासी पर उसके दावों पर उठाए सवाल, तो लक्ष्य ने ब्राह्मणों को दी गालियाँ

ट्यूलिप शर्मा ने गुरुवार (12 फरवरी 2026) को अपने इंस्टाग्राम हैंडल @_tulipsharma पर एक वीडियो डाला। इसमें उन्होंने बताया कि लक्ष्य लेकी काफी समय से जाति-विरोध के नाम पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी है और इंटरनेट पर नफरत कोई नई बात नहीं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कोई विरोधी राय बर्दाश्त न कर सके। वे ऐसे इन्फ्लुएंसर हैं जो अगर कोई उनके पोस्ट पर विरोधी कमेंट करे तो डीएम में आकर गंदी-गंदी बातें करते हैं।

ट्यूलिप ने बताया कि सब कुछ 11 फरवरी को शुरू हुआ जब लक्ष्य लेकी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो डाला। उसमें उन्होंने दावा किया कि भारतनाट्यम को ब्राह्मणों ने हड़प लिया है। उन्होंने कहा कि भारतनाट्यम ब्राह्मणों की सांस्कृतिक चोरी है, असली डांस सदिर अट्टम या दासी अट्टम था जो देवदासियां करती थीं। उनका कहना था कि तमिल ब्राह्मण महिला रुक्मिणी देवी ने उस डांस के सेक्सुअल/इरोटिक हिस्से को हटा दिया, उसे साफ-सुथरा बना दिया, लेकिन ऐसा करते हुए सदिर अट्टम की असली जड़ों से इसे अलग कर दिया।

इसके जवाब में ट्यूलिप शर्मा ने कमेंट किया, “आपकी लॉजिक के मुताबिक, ‘ब्राह्मण’ महिला रुक्मिणी देवी ने देवदासियों के यौन शोषण के चक्र को खत्म कर दिया। अब इसमें समस्या क्या है? एक तरफ आप इसे दमनकारी व्यवस्था मानते हैं, फिर कोई सुधार करे तो भी समस्या है सिर्फ इसलिए कि सुधार करने वाली ‘ब्राह्मण’ है। हंसते हुए। जिंदगी में थोड़ी क्लैरिटी लाओ और व्हाट्सएप नॉलेज पर निर्भर मत रहो।”

लेकिन ट्यूलिप शर्मा के तर्क का तथ्यों से जवाब देने की बजाय लक्ष्य लेकी उनके डीएम में घुस आए और जातिगत गालियाँ देने लगे। अपने दावे के समर्थन में शर्मा ने बातचीत के स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी शेयर किए। 

ट्यूलिप शर्मा ने बताया कि बात ब्राह्मण लड़कियों की भी नहीं थी, फिर भी लक्ष्य लेकी अपनी ब्राह्मण एक्स गर्लफ्रेंड्स के बारे में डींगें हाँकने लगे। ट्यूलिप ने कहा, “बात ब्राह्मण लड़कियों की नहीं थी लेकिन लक्ष्य लेकी अपनी सारी एक्स को ब्राह्मण बताकर बहस जीतना चाहते थे। पूरी कम्युनिटी की लड़कियों को इस्तेमाल करके बहस जीतना दिखाता है कि वे कितने बड़े जातिवादी हैं।”

लक्ष्य लेकी की ब्राह्मण लड़कियों को ऑब्जेक्ट बनाने वाली सोच को और एक्सपोज करते हुए शर्मा ने बताया कि वो जाति खत्म करने के लिए ‘अंतरजातीय बच्चे’ पैदा करने की बात कर रहा था।

                                                          सोर्स: ट्यूलिप शर्मा का वीडियो

शर्मा ने वीडियो में कहा, “उनका पूरा प्रोफेशन ही ब्राह्मणों को गालियाँ देने पर टिका है और फिर वे अपनी ब्राह्मण एक्स के बारे में डींग मारते हैं। वे और आगे बढ़कर कहते हैं कि अंतरजातीय बच्चे बनाकर जाति खत्म कर रहे हैं।” शर्मा ने बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

एक वीडियो में लक्ष्य लेकी ने खुद कहा था कि वे अपनी एससी/एसटी कम्युनिटी के बाहर डेट करने की हिम्मत नहीं रखते, लेकिन ट्यूलिप शर्मा की एक फीमेल फॉलोअर के मैसेज बॉक्स में उसने लिखा, “ब्राह्मण गर्लफ्रेंड मुझे ब्लो जॉब देती है, प्रॉब्लम?”

                                                         ट्यूलिप शर्मा की इंस्टाग्राम स्टोरी से

कई पब्लिकली शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने ट्यूलिप शर्मा को डीएम में लिखा, “होली चॉप्ड, ब्राह्मण लड़की के लिए तुम बहुत बदसूरत हो।” एक और मैसेज में उन्होंने लिखा, “मेरी गर्लफ्रेंड तुमसे कहीं ज्यादा खूबसूरत है। तुम तो बॉयफ्रेंड वाली भी नहीं लगतीं।”

एक और मैसेज में लक्ष्य ने लिखा, “4 ब्राह्मण एक्स, सब तुमसे ज्यादा खूबसूरत।”

इस बीच ट्यूलिप शर्मा ने अपने फॉलोअर्स को बताया कि उन्होंने आईटी एक्ट और संबंधित बीएनएस सेक्शन के तहत लक्ष्य लेकी के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज करा दी है।

बैकलैश के बीच लक्ष्य लेकी ने दावा किया कि ट्यूलिप शर्मा ने उनके जातिवादी और अपमानजनक मैसेज के जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, वे फेक हैं। उनका कहना है कि उन्हें फर्जी केस में फंसाने की कोशिश हो रही है।  

एक और वीडियो में लक्ष्य ने फिर दोहराया कि शर्मा के साथ उनकी चैट के सारे स्क्रीनशॉट फेक हैं। इस अंबेडकरवादी जाति एक्टिविस्ट ने विक्टिम कार्ड खेला और खुद की तुलना रोहित वेमुला से कर दी।

लक्ष्य ने कहा कि रोहित वेमुला के साथ भी इसी तरह की तरकीबें इस्तेमाल की गई थीं। लक्ष्य का रोहित वेमुला से अपनी तुलना करना बहुत बेशर्मी भरा था, क्योंकि असल में तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि वेमुला एससी जाति से नहीं थे।  

अक्सर घटिया प्रोपेगेंडा करता रहा है लक्ष्य लेकी

ज्यादातर कथित जाति-विरोधी ‘एक्टिविस्ट्स’ की तरह लक्ष्य लेकी भी जाति श्रेष्ठता के विरोध के नाम पर ब्राह्मणों को निशाना बनाता रहा है। एक वीडियो में उसने कहा कि दूसरे देशों में वेजिटेरियन होते हैं लेकिन भारत में ‘प्योर वेजिटेरियन’ होते हैं। ब्राह्मणों के शाकाहार से जुड़े धार्मिक विश्वास पर हमला करते हुए उसने कहा, “केवल भारत में ही ‘प्योर वेजिटेरियन’ का कॉन्सेप्ट है। क्योंकि यहाँ शाकाहार सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं है। ये शुद्धता, श्रेष्ठता और जाति के बारे में है। ये कहने के बारे में है कि मैं भगवान के ज्यादा करीब हूँ और तुम मांस खाने वाले दलित कम हो। वो ब्राह्मणवादी नजरिया तो वीगन लोगों में भी दिखता है जब वे दलित एक्टिविस्ट्स को वीगन न होने पर शर्मिंदा करते हैं।”

लक्ष्य ने ये नैरेटिव फैलाया कि ‘प्योर’ शब्द का मतलब जातिगत श्रेष्ठता या भगवान से ज्यादा निकटता है, जबकि असल में ये सिर्फ शाकाहार में सख्ती को दिखाता है।

जुलाई 2025 में एक पॉडकास्ट में लक्ष्य ने दावा किया कि ब्राह्मणों ने मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ भेदभाव किया। उसका कहना था कि ब्राह्मणों ने शिवाजी की जाति की वजह से उनका राजतिलक करने से इनकार कर दिया था और उन्हें बनारस से पुजारी बुलाने पड़े।

ये दावा कट्टर ‘जाति-विरोधी’ एक्टिविस्ट्स द्वारा गढ़ा गया ब्राह्मण-विरोधी नैरेटिव का हिस्सा है। हकीकत में स्थानीय ब्राह्मणों ने शिवाजी का ताज नहीं ठुकराया था क्योंकि उन्हें उनकी जाति से कोई समस्या थी, बल्कि इसलिए कि उन्हें ऐंद्रेय राजाभिषेक करना नहीं आता था। इसलिए बनारस से गागाभट्ट को बुलाया गया। ध्यान देने वाली बात ये है कि गागाभट्ट भी मराठी ब्राह्मण थे, उनका परिवार महाराष्ट्र के पैठण से था। छत्रपति शिवाजी महाराज के राजतिलक को लेकर विवाद वैदिक रीति बनाम तांत्रिक रीति को लेकर था।

अपने एक एक्स पोस्ट में लक्ष्य ने यादवों को हिंदू धर्म छोड़ने के लिए उकसाया क्योंकि ब्राह्मण और ठाकुर उनके साथ शादी के रिश्ते नहीं जोड़ते। उसने लिखा, “और यादव, अपनी राजनीतिक ताकत और क्षत्रियता के दावों के बावजूद, ठाकुरों और ब्राह्मणों द्वारा बराबर नहीं माने जाते। कोई अंतरजातीय शादी नहीं। कोई सम्मान नहीं। सिर्फ ग्रेडेड इनइक्वालिटी। मेरे यादव भाइयों और बहनों इस जाति पिरामिड का हिस्सा बनने की कोशिश मत करो।”

आश्चर्य की बात नहीं कि लक्ष्य लेकी 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का फैन है। उन्होंने मुस्लिम विक्टिमहुड का नैरेटिव फैलाया और कन्हैया कुमार के राजनीतिज्ञ बनने की तुलना उमर खालिद के जेल में रहने से की, सिर्फ इसलिए कि खालिद मुस्लिम है।

खालिद की लंबी जेल पर दुख जताते हुए लक्ष्य ने लिखा, “दो स्टूडेंट लीडर्स। एक ही कैंपस। एक जैसे आरोप। लेकिन दो बहुत अलग किस्मत। कन्हैया कुमार आजाद हैं, मुख्यधारा की राजनीति में आ गए। उमर खालिद, एक मुस्लिम, बेल के बिना 5 साल जेल में। ये संयोग नहीं है। भारत में मुस्लिम होने की कीमत है।”

दिलचस्प बात ये है कि लक्ष्य ने कहा कि उमर खालिद ‘मुस्लिम होने की कीमत’ चुका रहा है, जबकि खालिद खुद को नास्तिक बताता रहा है।

इस्लामो-लेफ्टिस्टों द्वारा उमर खालिद के लिए समर्थन और सहानुभूति जुटाने के लिए फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव के विपरीत ऑपइंडिया ने पहले रिपोर्ट किया था कि 2023 और 2024 में 14 स्थगनों में से 7 स्थगन खुद उमर खालिद ने माँगे थे। इसलिए जमानत वापस लेना ‘देरी’ की वजह से नहीं था। जबकि इस्लामी-लेफ्ट इकोसिस्टम ‘अन्याय’ का रोना रोता रहता है, असल में आरोपित के वकील की नाकाम कोशिशों की वजह से खालिद इतने दिनों से जेल में हैं।

दरअसल, भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी इस साल कहा था कि असली समस्या कुछ वकीलों और राजनीतिक ग्रुप्स की सोच में है जो अपने केस सिर्फ कुछ खास जजों से सुनवाना चाहते हैं। ऑपइंडिया ने बार-बार रिपोर्ट किया है कि खालिद की लीगल टीम ने फरवरी 2024 में ‘परिस्थितियों में बदलाव’ का हवाला देकर जमानत अर्जी वापस लेने से पहले कम से कम सात बार स्थगन माँगा था।

कई सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने 1990 के दशक में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के सामूहिक नरसंहार और पलायन का भी मजाक उड़ाया। एक कमेंट के जवाब में लक्ष्य ने लिखा, “कश्मीर ब्राह्मणों का यही हालत था।” एक और में लिखा, “मुझे कुछ नहीं होगा, तुम्हारे कश्मीरी पंडित भाइयों की तरह।”