पंजाब : कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की कार्रवाई

साभार पंजाब केसरी 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (9 मई 2026) को पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। केंद्रीय एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की है। इससे पहेल ED ने संजीव अरोड़ा के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।

PTC न्यूज के मुताबिक, सुबह से ही ED की टीमें लगातार अरोड़ा के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं और इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। (ED) की अलग-अलग टीमें संजीव अरोड़ा और उनके सहयोगियों के चार ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। ED के अधिकारी उनके सरकारी आवास पर भी पूछताछ और जाँच कर रहे हैं। 

पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर छापा मारने के बाद ईड़ी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेड की बताया जा रहा है कि उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कुछ लोगों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच में सुबह यह छापा पड़ा

 इसमें संजीव अरोड़ा का चंडीगढ़ स्थित सरकारी घर भी उन पांच जगहों में शामिल है, जहां छापे मारे गए रेड में दिल्ली और गुरुग्राम (हरियाणा) के भी कई ठिकाने हैं, इनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड नाम की कंपनी का दफ़्तर भी शामिल है

तीसरी बार उनके घर बीजेपी की ईडी आई

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर लिखा, आज फिर से बीजेपी की ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है एक साल में ये तीसरी बार उनके घर बीजेपी की ईडी आई है पिछले एक महीने में दूसरी बार फिर भी कुछ नहीं मिला है उन्होंने आगे लिखा, ईडी-बीजेपी के इस अनैतिक गठबंधन का अंत पंजाब से ही होगा

सच उगलने तक कस्टडी में रखो’: TCS नासिक कांड में निदा खान को नहीं मिली बेल, प्रेग्नेंसी के नाम पर माँग रही थी राहत

                                      निदा खान की जमानत याचिका खारिज (साभार : Dall-E)
नासिक की एक अदालत ने 2 मई को TCS धर्मांतरण मामले की आरोपित निदा एजाज खान को अग्रिम 
जमानत देने से मना कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि अब तक की जाँच से साफ है कि निदा एक सोची-समझी साजिश में शामिल थी, जिसका मकसद पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसका धर्म बदलवाना था

जज केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला काफी गंभीर है, इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए निदा को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करना बहुत जरूरी है। निदा के खिलाफ देवलाली पुलिस स्टेशन में अलग-अलग धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज है।

कोर्ट में निदा खान की सफाई: क्या थीं बचाव पक्ष की दलीलें?

निदा खान के वकील ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि निदा और पीड़िता बस साथ में काम करने वाले सहकर्मी थे और एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने निदा पर लगे सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर फँसाया गया है, जबकि मुख्य आरोप तो दानिश और तौसीफ पर हैं। वकील का यह भी कहना था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि निदा ने सबके सामने जाति को लेकर पीड़िता का अपमान किया हो।

आगे दलील दी गई कि महाराष्ट्र में धर्म बदलने को लेकर कोई अलग कानून नहीं है और जिस धारा (BNS 299) का जिक्र हो रहा है, वह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए है, न कि धर्म परिवर्तन के लिए। वकील के मुताबिक, धर्म पर सामान्य चर्चा करना कोई अपराध नहीं है और इसमें केवल जमानत मिलने वाली धाराएँ ही लगनी चाहिए। साथ ही, निदा के गर्भवती होने का हवाला देते हुए कहा गया कि इस हालत में गिरफ्तारी उनके होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

अभियोजन पक्ष का कड़ा रुख: ‘निदा खान सिर्फ मूकदर्शक नहीं, बल्कि मुख्य साजिशकर्ता’

अभियोजन पक्ष ने निदा खान की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट को बताया गया कि जुलाई 2023 से 2026 के बीच निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। सरकारी वकील ने दलील दी कि निदा ने न केवल पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई, बल्कि FIR में भी उसके नाम और भूमिका का स्पष्ट जिक्र है। जाँच से यह संकेत मिले हैं कि सभी आरोपितों ने आपस में संपर्क कर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया है।

कोर्ट को सूचित किया गया कि निदा खान इस मामले में कोई मामूली भूमिका में नहीं थी। वह ऑफिस में ब्रेक के दौरान पीड़िता से बात करती थी और इस्लाम कबूलने के लिए उसका ब्रेनवॉश करती थी। आरोप है कि उसने पीड़िता को खास मजहबी प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर करने में अहम भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में पीड़िता, उसकी माँ और भाई के बयानों को आधार बनाया।

जाँच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि निदा खान ने ही पीड़िता को बुर्का और इस्लाम से जुड़ी किताबें मुहैया कराई थीं। पीड़िता के फोन में एक ऐसा ऐप भी मिला, जिसे धर्मांतरण के इरादे से इंस्टॉल करवाया गया था। इसके अलावा, निदा उसे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के ऐसे लिंक भेजती थी जिनमें मजहबी उपदेश होते थे। पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों के सोर्स (Source) और निदा के बाहरी संपर्कों की गहराई से जाँच करना जरूरी है।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि निदा खान पीड़िता के घर भी जाती थी। वहाँ उसने पीड़िता को नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग दी और उसे हिजाब व बुर्का पहनने के निर्देश दिए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने की योजना थी। यही नहीं, उसे मलेशिया भेजने की भी तैयारी थी और इसके लिए ‘मालेगाँव पार्टी’ की मदद से दस्तावेज बनवाए जाने थे। इन तमाम विदेशी कड़ियों और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कोर्ट से आरोपित की कस्टडी (हिरासत) की माँग की गई।

पीड़िता के वकील का दावा: पद का फायदा उठाकर बनाया धर्मांतरण का दबाव

सुनवाई के दौरान पीड़िता के वकील ने विस्तार से बताया कि कैसे निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता का ब्रेनवॉश किया। वकील ने आरोप लगाया कि निदा और बाकी आरोपितों ने कंपनी में अपने ऊँचे पदों का गलत इस्तेमाल किया ताकि पीड़िता पर दबाव बनाया जा सके। उन्हें न केवल इस्लाम का पालन करने के लिए मजबूर किया गया, बल्कि उनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें मांसाहारी (Non-veg) खाना खाने के लिए भी विवश किया गया। इसके अलावा, कोर्ट को बताया गया कि आरोपित हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणियाँ करते थे और ऑफिस में पीड़िता को उनकी जाति को लेकर अपमानित किया जाता था।

पीड़िता के पक्ष ने एक और गंभीर बात कोर्ट के सामने रखी। उन्होंने कहा कि निदा खान सिर्फ पीड़िता तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उसने उसके परिवार को भी धर्मांतरण के लिए मजबूर करने की कोशिश की। इसके लिए बाकायदा धमकी भरे और डराने वाले तरीके अपनाए गए ताकि पूरे परिवार पर दबाव बनाया जा सके। इन दलीलों के जरिए कोर्ट को यह समझाने की कोशिश की गई कि यह मामला केवल आपसी बातचीत का नहीं, बल्कि एक गहरी और डरावनी साजिश का हिस्सा है।

कोर्ट का फैसला: ‘पहली नजर में आरोपित की भूमिका साफ दिखती है’

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने सह-आरोपितों और निदा खान की भूमिकाओं के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया। जज ने गौर किया कि जहाँ अन्य दो आरोपित पहली नजर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 75 के तहत अपराधों में शामिल थे, वहीं निदा खान की भूमिका धारा 299 और SC/ST एक्ट के प्रावधानों के तहत दिखाई दे रही है।

जज ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि FIR में न केवल निदा खान का नाम शामिल है, बल्कि उसकी भूमिका का भी साफ जिक्र है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि आरोपितों ने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में ‘आपत्तिजनक कहानियाँ’ सुनाईं और पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज किया गया है कि निदा खान ने पीड़िता को बुर्का दिया था। इसके अलावा, आरोपितों ने उसे पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर आधारित एक किताब दी और निदा खान खुद पीड़िता के घर जाकर उसे मजहबी ट्रेनिंग देती थी।

कोर्ट की टिप्पणी: ‘यह कोई साधारण बातचीत नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश’

कोर्ट ने अपनी बातों को और स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़िता और निदा खान के बीच धर्म पर हुई बातचीत कोई इत्तेफाक या साधारण चर्चा नहीं थी। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत साफ दिखाते हैं कि पीड़िता को फँसाने के लिए बहुत ही सलीके से और योजना बनाकर काम किया गया था। जज ने इस बात को गंभीरता से रखा कि यह अपराध कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरी परतें और एक बहुत बड़ी साजिश छिपी हुई है।

अदालत ने उन सबूतों पर भी कड़ी चिंता जताई, जिनसे पता चला कि आरोपित पीड़िता का नाम बदलना चाहते थे और उसे मलेशिया भेजने की तैयारी में थे। जज ने साफ कहा कि हमारा संविधान हर किसी को अपनी पसंद का धर्म और नाम चुनने की आजादी देता है, लेकिन किसी का ब्रेनवॉश करके या साजिश रचकर उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है। कोर्ट ने माना कि व्यक्ति के अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन किसी को धोखे का शिकार बनाकर उसका धर्म बदलवाना कानूनी रूप से अपराध है।

कोर्ट का फैसला: ‘सच उगलवाने के लिए पुलिस कस्टडी है जरूरी’

कोर्ट ने साफ कहा कि इस केस की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपित को पुलिस की गिरफ्त में रखना जरूरी है। कोर्ट का मानना है कि यह मामला काफी पेचीदा है, क्योंकि जाँच में ‘मालेगाँव पार्टी’ के साथ-साथ कई अन्य शहरों और विदेशों के नाम भी जुड़े मिले हैं। खासकर मलेशिया में बैठे ‘इमरान’ जैसे लोगों और इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में पूछताछ करना बेहद आवश्यक है, ताकि इस पूरी साजिश की हर कड़ी को जोड़ा जा सके।

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प्रेग्नेंसी की दलील भी नहीं आई काम, कोर्ट ने ठुकराई राहत

निदा खान के वकील ने दलील दी कि वह गर्भवती है और गिरफ्तारी का उसके होने वाले बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में सिर्फ प्रेग्नेंसी के आधार पर कानून में कोई अलग छूट नहीं मिलती। कोर्त ने इस बात को सही माना और कहा कि अग्रिम जमानत जैसी बड़ी राहत केवल बहुत ही खास और मजबूरी वाले हालात में दी जाती है, जो इस केस में कहीं नहीं दिखते। इन्हीं वजहों से जज ने निदा खान की याचिका में कोई दम न पाते हुए उसकी जमानत की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया।

तेलंगाना : हिन्दू विरोधी कांग्रेस सरकार ने बुलडोजर से ढहाया 800 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर

                                                                                                                                साभार: NDTV
तेलंगाना के वारंगल में विकास के नाम पर विनाश का एक खौफनाक मामला सामने आया है। प्रशासन ने एक स्कूल बनाने के लिए खानापुर में काकतीय काल के करीब 800 साल पुराने प्राचीन शिव मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। इस घटना के बाद इतिहासकारों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है, जिसके बाद केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग ने केस दर्ज कर लिया है।

इतिहास पर चला दिया बुलडोजर

यह मंदिर महज पत्थर की दीवारें नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी की अनमोल विरासत थी। यह महान काकतीय राजा गणपतिदेव के शासनकाल का प्रतीक था। मंदिर परिसर में फरवरी 1231 ईस्वी का एक दुर्लभ शिलालेख भी था, जिसमें राजा को ‘महाराजाधिराज’ बताया गया था। प्रशासन की एक लापरवाही ने सदियों पुराने इस गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिला दिया।

प्रशासन की बेतुकी सफाई और शिकायत

विवाद बढ़ता देख जिला प्रशासन अब लीपापोती में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि वहां केवल ‘जर्जर अवशेष’ थे और वह जगह ‘संरक्षित स्मारक’ में दर्ज नहीं थी। हालाँकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि 1965 में ही हेरिटेज विभाग ने इसे डॉक्युमेंट किया था। इस मामले में अधिवक्ता रामाराव ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में शिकायत की है, जिसके बाद अधिकारियों पर ‘तेलंगाना हेरिटेज एक्ट’ की धारा 30 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की माँग की जा रही है।

बढ़ते विरोध के बाद सरकार के बदले सुर

धरोहर पर हुए इस हमले के बाद जब हिंदू संगठनों और पुरातत्व विशेषज्ञों ने मोर्चा खोला, तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। वारंगल कलेक्टर और स्थानीय विधायक ने घटनास्थल का दौरा किया। भारी विरोध को देखते हुए अब सरकार ने आश्वासन दिया है कि उसी स्थान पर प्राचीन पारंपरिक शैली में मंदिर का दोबारा निर्माण कराया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जो ऐतिहासिक शिलालेख और प्राचीन अवशेष नष्ट हो गए, क्या उनकी भरपाई हो पाएगी?

सुवेंदु अधिकारी को भगवामय बंगाल का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई; अब हिंदुओं को सोया हुआ कह कर गाली देना बंद करो; हिन्दू को इसी तरह जागे रहना होगा

सुभाष चन्द्र

याद करो 1555 में फ्रेंच ज्योतिष ने कहा था कि हिन्द(भारत) को असली आजादी 2014 में मिलेगी। जो शनैः शनैः शत-प्रतिशत सत्य हो रही है। लेकिन हिन्दुओं को भी एकचित होकर जागे हुए सोने के नाटक करने की बजाए सेकुलरिज्म के नशे में मदहोश हुए हिन्दुओं को भी सेकुलरिज्म के नशे को उतार जगाए रखना होगा। कालनेमि हिन्दुओं, जातिगत सियासत करने वालों दलाल वकीलों और सनातन को कलंकित करने वालों का बहिष्कार करना होगा। सेकुलरिज्म हिन्दू विरोधी है, सेकुलरिज्म की सियासत में एक हाथ से ताली बजाना बंद करनी होगी।     

कांग्रेस के 30 साल, CPM के 34 साल और ममता के 15 साल यानी कुल 79 साल के बाद बंगाल सही मायने में आज़ाद हुआ और उपहार में हिंदू शक्ति ने उसे भगवामय कर दिया इस भगवामय बंगाल की कमान सुवेंदु अधिकारी (एक और कुंवारे) को दे दी गई ममता बनर्जी की TMC को छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले सुवेंदु अधिकारी ने पिछले 5 साल में कठिन परिश्रम किया और दो दिन पहले ही उन्होंने एक नया नारा दिया - “जो हमारे साथ है, हम उसके साथ हैं” जाहिर है इसमें सन्देश साफ़ है क्योंकि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा उन लोगों को पसंद नहीं आया जो सब कुछ मोदी से लेकर भी साथ तो देते ही नहीं थे बल्कि विश्वासघात करते थे

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अभी कुछ दिन पहले कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने मुस्लिमों के लिए घर बनाने और उनके क्षेत्रों के विकास के लिए 600 करोड़ का बजट आबंटन किया है मतलब घर बनेंगे तो केवल मुस्लिमों के लिए कुछ ऐसा ही नज़ारा अब सुवेंदु अधिकारी को बंगाल में दिखा देना चाहिए जो भाजपा को नहीं चाहते उन्हें खैरात देना बंद कर देना चाहिए

बहुत से लोगों की आदत है हर समय हिंदुओं को कोसने की जब भी भाजपा हार जाती है तो तुरंत उछलते हैं, हिंदू सोया रहता है, हिंदुओं में एका नहीं हो सकता, हिंदू ऐसे हैं, वैसे हैं लेकिन बंगाल को देख कर अब ऐसा कहना बंद कर देना चाहिए एक वरिष्ठ यूटूबर ने तो बंगाल में UGC को घुसेड़ दिया था कि उसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा सब फेल हो गए

मेरी एक बहुत पुरानी मांग है जिस पर अब कार्यवाही हो सकती है बंगाल के 9 जिलों और असम के 4 जिलों को जोड़ कर एक केंद्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए इस सभी जिलों की सीमाएं बांग्लादेश के साथ लगती हैं और इस वजह से सबसे ज्यादा घुसपैठ इनमे ही हुई है ममता के राज में घुसपैठ की वजह से मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है

बंगाल के ये जिले हैं दार्जिलिंग (3.4%); जलपाई गुडी (13.25%); कूच बिहार (25.54%); उत्तरी दीनापुर (49.92%); दक्षिणी दीनापुर (24%); मालदा (51.27%); मुर्शिदाबाद (66.27%); नादिया (26.76%); और उत्तरी 24 परगना (25.82%) - मुस्लिम आबादी ब्रैकेट में दी हुई है

असम के ऐसे 4 जिले हैं धुबरी (79.67%), करीमगंज (56.36%), कछार (36.13%) और साउथ सलमारा (95.2%)

सुना है कुछ बांग्लादेशी वापस लौटना शुरू हो गए हैं जो भी घुसपैठिए हैं उन्हें एक निश्चित अवधि में भारत छोड़ने के लिए कहना चाहिए वरना फिर जबरन निकाल दिया जाएगा

इसके अलावा जो CBI पर ममता ने बैन लगाया हुआ था राज्य में वह तत्काल हटा देना चाहिए जो भी मुकदमे ममता की पार्टी के लोगों पर ED/CBI ने चलाए हुए हैं, उनका निपटारा शीघ्र करने के लिए कोशिश होनी चाहिए जिसके लिए Fast Courts का गठन कर देना चाहिए

बंगाल के 2021 चुनाव में जो हिंसा हुई थी, उसके लिए याचिकाएं अभी 5 साल बाद भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं उन पर जल्द फैसले के लिए अपील दायर की जानी चाहिए 

सुवेंदु अधिकारी के PA चन्द्रनाथ रथ के बिना सुवेंदु को शपथ ग्रहण अधूरा लगेगा उसके हत्यारों को किसी भी तरह ढूंढ कर एनकाउंटर कर देना चाहिए कानून के रास्ते से वो 20 साल आज़ाद रहेंगे

भारत-वियतनाम रिश्तों को मिली नई ऊंचाई: प्रधानमंत्री मोदी- तो लाम की बैठक में रणनीतिक साझेदारी


नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज 6 मई को कूटनीति की एक नई इबारत लिखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत ने भारत-वियतनाम रिश्तों को एक नया आयाम दे दिया। ज्वाइंट प्रेस मीट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के महज एक महीने के भीतर तो लाम का भारत दौरा इस बात का संकेत है कि वे इस साझेदारी को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति तो लाम का स्वागत करते हुए उनके बोधगया दौरे का विशेष जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच केवल व्यापार का ही नहीं, बल्कि आत्मा और संस्कृति का भी रिश्ता है। वियतनाम की 15 प्रतिशत आबादी ने पिछले साल भारत से गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन किए थे, जो यह बताता है कि बुद्ध के विचार हमें कितनी मजबूती से जोड़ते हैं।

अब इस विरासत को डिजिटल युग में ले जाने की तैयारी है। भारत वियतनाम की प्राचीन चम्पा सभ्यता के मंदिरों का जीर्णोद्धार तो कर ही रहा है, साथ ही अब वहां की प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल धरोहर को सहेजने की मोदी सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है।

एक दशक पहले पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देश ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनर’ बने थे। लेकिन आज इस रिश्ते को एक कदम और ऊपर ले जाते हुए ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का नाम दिया गया है। इससे साफ है कि अब सहयोग सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिफेंस, सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे गंभीर क्षेत्रों में दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।

व्यापार के मोर्चे पर दोनों देशों ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं। पिछले 10 सालों में व्यापार दोगुना होकर 16 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जिसे 2030 तक 25 बिलियन डॉलर करने का टारगेट है। जल्द ही वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेंगे, जबकि भारतीय बाजारों में वियतनाम के डूरियन और पोमेलो जैसे फल देखने को मिलेंगे।

इतना ही नहीं, अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की पहुंच और आसान होगी। डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का UPI और वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द ही आपस में जुड़ने जा रहे हैं। यानी अब पैसे का लेन-देन चुटकियों में होगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को पंख लगेंगे।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को लेकर दोनों देशों का नजरिया एक जैसा है। पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए वियतनाम का आभार जताया। उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एक साथ हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग न केवल भारत और वियतनाम के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने बुद्ध की एक सीख का जिक्र करते हुए अपनी बात खत्म की- “यदि आप किसी और के लिए दीप जलाते हैं, तो वह आपके अपने मार्ग को भी प्रकाशमान करता है।” इसी भावना के साथ भारत और वियतनाम एक-दूसरे की तरक्की में मददगार बनेंगे। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद ये दोनों देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं और अब इनका लक्ष्य मिलकर ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के सपने को सच करना है। 

बंगाल : सत्ता बदलते ही 1600 करोड़ रूपए का घोटालेबाज़ महफूज आलम कानपुर भागा : उत्तर प्रदेश पुलिस ने दबोचा

                   1600 करोड़ के फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड महफूज आलम गिरफ्तार (साभार: इंडिया टूडे)
तृणमूल कांग्रेस(TMC) के संरक्षण में बंगाल के कोलकाता में छिपे 1600 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार के सरगना महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी को कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 24 लाख रुपए की लूट की जाँच के दौरान जिस बड़े हवाला नेटवर्क का खुलासा हुआ था।

महफूज ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी बैंक खातों का विशाल जाल खड़ा किया और उन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन को अंजाम दिया। पुलिस जाँच में अब तक करीब 1600 करोड़ रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन के सीधे प्रमाण मिले हैं, जबकि कुल लेनदेन 3200 करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है।

गरीबों के दस्तावेजों से खुलते थे फर्जी खाते

पुलिस जाँच में सामने आया है कि महफूज मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला लगाने वालों और बेरोजगार युवकों को लोन दिलाने या आर्थिक मदद का झाँसा देकर उनके आधार, पैन और अन्य दस्तावेज जुटाता था। इसके बाद अलग-अलग बैंकों में उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते थे।

पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी, जिनकी मदद से करोड़ों रुपए का लेनदेन बिना शक के चलता रहा। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपित ने 16 बैंकों में 100 से ज्यादा खातों का इस्तेमाल किया।

आरती इंटरप्राइजेज और राजा इंटरप्राइजेज जैसी कई फर्जी कंपनियों के जरिए हवाला कारोबार संचालित किया गया। पुलिस को इस नेटवर्क के तार GST फ्रॉड और स्लॉटर हाउस से जुड़े आर्थिक अपराधों से भी जुड़े मिले हैं।

ससुराल बना ‘सेफ हाउस’, TMC के संरक्षण में था आरोपित, सत्ता बदलते धराया

पुलिस के अनुसार, महफूज लंबे समय से फरार चल रहा था और कोलकाता में अपनी ससुराल में छिपा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसे वहाँ कुछ TMC नेताओं का संरक्षण भी मिला हुआ था, जिसकी वजह से वह लगातार गिरफ्तारी से बचता रहा। कानपुर पुलिस उसकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए कोलकाता पुलिस के संपर्क में भी थी।

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने और गिरफ्तारी का खतरा बढ़ने के बाद महफूज ने कानपुर लौटने का फैसला किया। पुलिस पहले ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी और शहर पहुँचते ही उसे गिरफ्तार कर लिया। एसीपी अभिषेक पांडे के मुताबिक, पता लगाया जा रहा है कि फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और किन-किन ठिकानों पर छिपा रहा।

ED, RBI और आयकर विभाग भी जाँच में जुटे

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कई केंद्रीय एजेंसियाँ भी जाँच में शामिल हो गई हैं। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और RBI पूरे नेटवर्क की वित्तीय जाँच कर रहे हैं। पुलिस अब इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि कहीं हवाला के जरिए टेरर फंडिंग या अन्य संगठित अपराधों को पैसा तो नहीं पहुँचाया गया।

इस मामले में महफूज के बेटे मासूम और साले महताब आलम को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं उसकी बीवी समेत नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक, अब तक आरोपित के खिलाफ पाँच गंभीर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और आने वाले दिनों में इस घोटाले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट से नहीं मिली जमानत

दंगाई हों, बलात्कारी हों, पत्थरबाज हों या फिर मजहब बदलने वाले/वाली हो भांडा फूटने पर छिपे-छिपे फिरते है, क्यों? अदालतों को चाहिए कि इन उपद्रवियों को तलाशने में जो खर्चा हुआ है उसकी वसूली करनी चाहिए। इन उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए।        
TCS धर्मांतरण मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गुरुवार (7 मई 2026) को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।

पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस की मदद से की गई। मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और अब तक आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि TCS से जुड़े BPO यूनिट के भीतर मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किए जाने के आरोप सामने आए थे।

पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं निदा खान महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीके अपनाने और मजहबी सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को कुछ मोबाइल एप और मजहबी कंटेंट भेजे गए थे और उसका नाम बदलने की योजना तक बनाई जा रही थी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, SIT ने बताए कई अहम लिंक

गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में अलग से कोई धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और जबरन धर्मांतरण के आरोप बेबुनियाद हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियाँ सामने आई हैं, इसलिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

SIT ने कोर्ट को यह भी बताया कि जाँच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगाँव और यहाँ तक कि मलेशिया तक पहुँच गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।

कई धाराओं में केस दर्ज, लगातार बदल रही थी ठिकाने

पुलिस के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही निदा खान फरार चल रही थी और उसके मोबाइल फोन समेत कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके शौहर से पूछताछ के बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार पुलिस को बंद मकान ही मिले। इसके बाद राज्यभर में तलाश अभियान तेज किया गया।

मामले में निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएँ आहत करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

भरी फ्लाइट में TMC सांसद महुआ मोइत्रा की फजीहत, ‘पिशी चोर(आंटी चोर)’, ‘भाइपो चोर (भतीजा चोर), तृणमूल के सब चोर… यात्रियों ने जोर-जोर से की नारेबाजी: Video

                                                           TMC MP महुआ मोइत्रा
बंगाल में हुई ममता बनर्जी की करारी हार और बीजेपी की जीत की गूंज सिर्फ भारत ही नहीं विदेशों में बैठे भारत विरोधियों और भारत में बैठे उनके sleeper cells की नींद हराम करने वाली है। विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत के विरुद्ध षड़यंत्र रचने वालों को चारों खाने चित कर दिया है। ममता के राज में जिस तरह सनातन को रोंदने की कोशिश हो रही थी वह साबित करती है ममता इन सनातन विरोधियों की कठपुतली बन सबकुछ कर रही थी। इस गंभीर घटनाक्रम पर समूचा मीडिया खामोश है, क्यों?    

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी की नेता महुआ मोइत्रा की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह फ्लाइट में बैठी हुई हैं और कुछ लोग उनके खिलाफ जोर-जोर से नारे लगा रहे हैं।

वीडियो में लोग उन्हें ‘पिशी चोर (आंटी चोर)’, ‘भाइपो चोर (भतीजा चोर)’ और ‘तृणमूल के सब चोर’ जैसे नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं। इसके साथ ही ‘जय श्रीराम’, ‘जय माँ दुर्गा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए जा रहे हैं। देख सकते हैं कि जिस समय ये घटना घटी उस वक्त महुआ मोइत्रा फ्लाइट के अंदर खड़ी थीं और चुपचाप बाहर निकलने का इंतजार कर रही थीं।

अवलोकन करें:-

बंगाल में BJP की जीत से विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत विरोधियों के मंसूबों पर पा
बंगाल में BJP की जीत से विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत विरोधियों के मंसूबों पर पा
 

घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को टैग करते हुए माँग की कि नारेबाजी करने वाले यात्रियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने एयरलाइन से भी यात्रियों की जानकारी देने को कहा। 

बंगाल में BJP की जीत से विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत विरोधियों के मंसूबों पर पानी फिरा, NYT-अल जजीरा-गार्डियन ने फैलाया झूठ: किसी ने मुस्लिमों के लिए बहाए आँसू तो किसी ने हिंदू राष्ट्रवाद को कोसा

इस्लामिक कट्टरपंथियों और भारत विरोधी ताकतों को मालूम होना चाहिए कि भारत तपस्वियों की धरती है। साधु-संतों-ऋषि और मुनियों की कठिनतम तपस्या से सनातन अमर था, है और रहेगा। इन महाऋषियों की तपस्या व्यर्थ नहीं जाएगी। ये इन महाऋषियों की तपस्या का प्रताप था कि चुनाव आयोग को इतना सख्त होकर चुनाव करवाना पड़ा। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है 
सनातन के विरुद्ध काम करने सरकार को जड़ से उखाड़ने के लिए कोई देवी-शक्ति चुनाव आयोग के रूप में काम कर रही थी। बंगाल का ऐसा चुनाव था जहाँ स्थानीय पुलिस को मतदान केंद्र से दूरी पर रखा गया था। ऐसा अपने जीवन में पहली बार देखा। दूसरे मुसलमानों द्वारा एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ वोट देना भी किसी काम नहीं आया। समय आ गया है कि सनातन प्रेमियों को कालनेमि हिन्दुओं को नकारना चाहिए। जिस दिन हिन्दू इन कालनेमियों को दरकिनार करना शुरू कर देगा कोई भारत विरोधी और मुस्लिम कट्टरपंथी इन्हे घास नहीं डालेगा।    
बंगाल में पहली बार बीजेपी का पताका आसमान की बुलंदियों को छू रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने न सिर्फ भारत के विपक्ष को सकते में ला दिया है, बल्कि दुनिया भर के इस्लामी वामपंथी ग्रुप को परेशान कर दिया है। जो साबित करता है कि यदि इस चुनाव में बंगाल पर देवी आशीष नहीं होता बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता। यही स्थिति 2014 लोकसभा चुनाव में हुई। अगर भारत पर देवी-देवताओं का शुभाशीष प्राप्त हो रहा है हिन्दुओं को कालनेमि हिन्दुओं और सनातन विरोधियों को धूल चटानी होगी। संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाले भारत विरोधियों के हाथ की काठपुतली हैं। संविधान के स्वरुप को बिगाड़ने वाले ये ही लोग हैं।    
साभार : सोशल मीडिया 

इससे पहले बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण का दाँव चलता था और 15 साल ममता बनर्जी से पहले करीब 35 साल लेफ्ट और उससे पहले कॉन्ग्रेस का शासन था। पहली बार हिन्दू एकजुट हुए और बीजेपी को वोट किया। यही वजह है कि बीजेपी को 294 में से 205 सीटों की प्रचंड जीत मिली।

लेकिन विदेशी मीडिया इस जीत को अलग चश्मे से देख रही है। कई विदेशी मीडिया ने BJP की जबरदस्त जीत को कवर किया, लेकिन इसे ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ सोच, ‘मुस्लिम अल्पसंख्यक को खतरा’ के तौर पर पेश करने में जुट गई। इतना ही नहीं, चुनाव से पहले SIR के माध्यम से की गई वोटर वैरिफिकेशन को लेकर भी झूठ फैलाया गया।

बंगाल का इतिहास हिन्दुओं के साथ अत्याचार से पटा हुआ है। बंगाल विभाजन और 1946 में हिन्दुओं का नरसंहार हुआ। आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला। बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए बंगाल सबसे सुलभ रहा। बांग्लादेश से सटे जिलों में तो हाल बुरा है।

ऐसे हालात में 2014 में नरेन्द् मोदी के नेतृत्व में बनी केन्द्र की एनडीए सरकार ने हालात पर नजर रखी। बीजेपी धीरे-धीरे लोगों को गोलबंद करने लगी। ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टिकरण के खिलाफ हिन्दुओं को जागरूक किया। संदेशखाली और आरजीके केस ने महिला सुरक्षा की कलई खोलकर रख दी।

सुनियोजित तरीके से हिन्दुओं के साथ होने वाले अत्याचार ने सबका ध्यान खींचा। सबसे बड़ी बात है कि दबले कुचले बहुसंख्यक आबादी के मन से उस खौफ को हटाया, कि अगर ममता नहीं जीतीं, तो उनका कत्लेआम निश्चित है। बीजेपी को फर्श से अर्श तक पहुँचने में 12 साल लगे।

भाजपा की जीत के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स यानी NYT, अल जजीरा, और द गार्डियन जैसे विदेशी मीडिया आउटलेट्स ने कवरेज के दौरान झूठ फैलाने की कोशिश की। जीत को हिन्दू राष्ट्रवाद का विस्तार बताया और अल्पसंख्यकों में भय फैलने जैसी बातें कही गई।

NYT ने बंगाल की जीत को मोदी के ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ का विस्तार कहा

बंगाल के चुनावी जीत को ‘लोकतांत्रिक जनादेश’ के रूप में दिखाने के बजाय इसे अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत’ कहा।

एंटी इंडिया और एंटी हिन्दू विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए लेख में लिखा गया है कि यह प्रधानमंत्री मोदी के हिन्दू फर्स्ट राजनीति का विस्तार है। लेख का शीर्षक है – ‘मोदी के हिंदू राष्ट्रवादियों ने भारत के विपक्ष के गढ़ पर कब्जा किया’। इतना ही नहीं NYT ने SIR पर सवाल उठाते हुए यह भी कह दिया कि चुनाव आयोग और बीजेपी में साँठ-गाँठ है। दरअसल विपक्ष के आधारहीन बयानों और तर्कों को सही मानते हुए भारतीय लोकतंत्र पर सवाल खड़े करने की कोशिश की।

अखबार ने पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर झूठ परोसा और दावा किया कि 90 लाख वोटरों के नाम हटा दिए। इनमें कई मुस्लिम थे। NYT ने न सिर्फ SIR को BJP के पक्ष में किया गया चुनावी इंजीनियरिंग कहा, बल्कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार की ईमानदारी पर भी सवाल उठाए और ‘मुस्लिम विरोधी’ करार दिया।

जबकि SIR में सबसे ज्यादा जिन जिलों में सबसे ज्यादा वोटरों के नाम हटे, उनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना शामिल हैं। जिन 20 विधानसभा सीटों पर जाँच के बाद सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम काटे गए थे, उनमें से 13 सीटों पर ममता बनर्जी की पार्टी ने ही जीत हासिल की है। वहीं, BJP को इनमें से 6 और कॉन्ग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली है। इसके बावजूद एसआईआर को ‘विलेन’ बताकर चुनावी हार को उसके मत्थे डालने की कोशिश NYT समेत तमाम विदेशी मीडिया आउटलेट्स ने की है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि NYT, अलजजीरा जैसे अखबार ने दावा किया है कि चुनाव आयोग ने बंगाल में SIR करने का मकसद अल्पसंख्यक वोटरों को हटाना था। जबकि सच्चाई यह है कि आयोग ने दिसंबर 2025 में 58.25 लाख वोटर्स के नाम हटा दिए थे। यह वे वोटर्स थे जो मर गए थे, अपने घरों में मौजूद नहीं थे या शिफ्ट हो गए थे अथवा जिनका नाम दो जगहों पर था। चुनाव आयोग की इस कवायद की वजह से वोटरों की कुल संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ हो गई थी। फाइनल लिस्ट में फरवरी 2026 में 5 लाख और नाम हटा दिए गए।

शुरू में जिन 60.06 लाख वोटर्स के नाम तय किए गए थे, उनमें से लगभग आधे अयोग्य पाए गए। सबसे ज़्यादा नाम मुस्लिम-बहुल मुर्शिदाबाद में हटाए गए। मुर्शिदाबाद, मालदा जैसे जिलों की सीमा बांग्लादेश से मिलती है। यहाँ घुसपैठ बड़े पैमाने पर हुए हैं। घुसपैठ और क्राइम यहाँ चुनावी मुद्दे रहे।

इस पर NYT ने लिखा, करीब 90 लाख वोटरों का नाम हटा, जिसमें कई मुस्लिम थे। चुनाव आयोग ने ऐसी शिकायतों को खारिज कर दिया।

पीएम मोदी की विचारधारा पर सवाल उठाए गए

 NYT में दावा किया गया है कि पीएम मोदी उस स्कूल में पढ़कर निकले हैं, जहाँ भारत को हिन्दू राष्ट्र कहा जाता है। हालाँकि यहाँ हजारों साल तक मुस्लिम शासन रहा। इसमें कहा गया है कि बंगाल में 19वीं सदी से कभी भी किसी धर्म का राज्य नहीं रहा। ‘धर्मनिरपेक्षता’ पर बंगालियों को नाज रहा है। अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में भी इनका अहम योगदान रहा। बंगाल में कम्यूनिस्ट पार्टी का शासन 34 साल था और फिर ममता सरकार 15 साल तक रही।

लेकिन NYT, अल जजीरा जैसे अखबार जब इतिहास की बात करते हैं तो उन्हें अच्छे से पता है कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, न कि किसी ओर आधार पर। बंग-भंग के दौरान हिन्दू मुस्लिम दंगे और हजारों हिन्दू महिलाओं के साथ रेप, उन्हें जिंदा जला दिया जाना इतिहास में दर्ज है। इस खूनी संघर्ष को कभी नहीं भूलाया जा सकता। ऐसे में धर्मनिरपेक्षता की बात कहते हुए बीजेपी को हिन्दू राष्ट्रवादी कहना काफी हास्यास्पद लगता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने बड़ी आसानी से पीएम नरेंद्र मोदी को ‘एंटी-सेक्युलरिस्ट’ दिखाया। भारत एक हिंदू बहुल राष्ट्र है। यहाँ की धर्मनिरपेक्षता हिन्दुओं को हाशिए पर रख कर नहीं हो सकती। भारतीय सभ्यता में सनातन जन्मी है। यही सच्चाई है। बीजेपी या उसकी ‘राष्ट्रवादी विचारधारा’ में दूसरे धर्मों के लिए वैमन्ष्यता नहीं है। यहाँ तक कि हजारों सालों तक शासन करने वाले इस्लाम से भी नफरत नहीं है। हालाँकि ये लोग बाहर से आए और हिंदुओं और गैर-मुसलमानों पर ज़ुल्म ढाया। उन्हें मारा-पीटा और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। हिन्दुओं के मंदिरों को लूटा, उन्हें तोड़ा और मस्जिद में तब्दील कर दिया। इस्लाम कबूल करने के लिए अत्याचार किए गए। इसके बावजूद हिन्दू आस्था टिकी रही, तो ये गर्व की बात है।

लेकिन इस्लामी वामपंथी प्रोपेगैंडा फैलाने वाले इसे ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ बताते हैं। इतिहास में इस्लामी शासकों के अत्याचार की जगह उनके गुणगान किए जाते हैं। हिन्दुओं के प्रति उनके नफरत की चर्चा नहीं की जाती।

ममता बनर्जी को गरीबों का मसीहा दिखा रहे प्रोपेगेंडा बाज

NYT ने ममता बनर्जी को गरीबों और दबे-कुचले के मसीहा के तौर पर दिखा रही है। ममता बनर्जी ने लेफ्ट को हरा कर सत्ता संभाली थी।

NYT ने लिखा है कि कॉर्पोरेट हितों का विरोध कर, वेलफेयर स्कीमों का प्रचार किया और एक धर्मनिरपेक्ष के तौर पर अपनी पहचान बनाई, जिससे वह मुसलमानों और लिबरल लोगों के बीच खास तौर पर पॉपुलर हो गईं।

लेकिन ममता बनर्जी के राज में सोशल वेलफेयर स्कीम घटे। घोटालों का जोर बढ़ा। नौकरी पाने के लिए बंगाल में टीएमसी से जुड़ना जरूरी बन गया था। पुलिस का काम ममता के कैडर कर रहे थे। उन्हें नजरअंदाज कर न तो कोई राज्य में टिक सकता था और न ही नौकरी कर सकता था। राज्य का इकोनॉमिक ग्रोथ गिर गया। राज्य में इतनी अराजकता थी कि कंपनियाँ बंगाल छोड़ कर भाग गईं।

बंगाल जो कभी बौद्धिक राज्य माना जाता था। उसकी हालत दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वालों की हो गई। न सड़कें, न काम और गरीबी में जीने के लिए मजबूर जनता का आखिरकार ममता बनर्जी से विश्वास डगमगाया और उन्हें उखाड़ फेंका। 15 साल का शासन राज्य को विकसित करने और कानून व्यवस्था को दुरुस्त कर पटरी पर लाने के लिए कम नहीं थे। लेकिन ममता बनर्जी ने सिर्फ वोटबैंक की चिंता की और उसके लिए घुसपैठियों को शरण दी। बंगाल को कर्ज के जाल में धकेल दिया। नेशनल GDP में पश्चिम बंगाल का हिस्सा कम हो गया, प्रति व्यक्ति आय कम हो गई।

ममता बनर्जी ने कई वेलफेयर स्कीम चलाईं। इससे बंगाल की माली हालत और खराब हुई। ममता सरकार ने बंगाल के इंडस्ट्रियल माहौल को इस हद तक बर्बाद कर दिया कि 2011 से अब तक 110 लिस्टेड फर्मों समेत 6,600 से ज़्यादा कंपनियों ने अपना ऑफिस कोलकाता में बंद कर दूसरे राज्यों की ओर रुख किया।

हिन्दुओं के प्रति ममता बनर्जी का रवैया दमनकारी रहा। 2023 में पश्चिम बंगाल के मालदा के कालियाचक में दुर्गा मंदिर को ब्लॉक और बैरिकेड किया गया था, क्योंकि उस रास्ते से मुहर्रम का जुलूस जाने वाला था। इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने 2016 और 2017 में मुहर्रम के जुलूसों के लिए दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी थी। इसकी प्रतिक्रिया बंगाल में दिखी भी थी।

असल में ममता बनर्जी ने मुसलमानों को खुश कर उन्हें वोटबैंक बनाया और हिंदुओं को दबाया। इसलिए वह और उनकी पार्टी लिबरल लोगों की नजर में ‘सेक्युलर’ और ‘लिबरल’ बनी रहीं।

बंगाल जीत को हिन्दू बहुसंख्यक की जीत कहा

ब्रिटेन की समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बंगाल और असम में BJP की चुनावी सफलता को हिंदू बहुसंख्यक की जीत कहा। उसके मुताबिक बीजेपी हिन्दू बहुमत को लुभाने की रणनीति में सफल रही। वहीं आगे कहा गया है कि बीजेपी के पास विपक्ष के मुकाबले ज्यादा धन-संसाधन हैं। एजेंसी ने कहा है कि एसआईआर जैसे कारण है, जिसके चलते लाखों लोग, खास कर मुस्लिम बड़ी संख्या में वोट नहीं डाल पाए। ये लोग टीएमसी के समर्थक थे। लेकिन चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया को संविधान सम्मत बताया है।

दिल्ली स्थित थिंकटैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के फेलो राहुल वर्मा के हवाले से एजेंसी ने लिखा, ‘बीजेपी के पास एक करिश्माई राष्ट्रीय नेता है, पार्टी बेहद संगठित है, उसके पास संसाधनों काफी ज्यादा हैं, जो कई दलों के पास नहीं है। एक स्पष्ट वैचारिक नैरेटिव है- ये सभी मिलकर हिंदुओं को एकजुट करने में मदद करते हैं। ‘

विदेशी मीडिया की आदत है कि वे BJP को ‘हिंदू नेशनलिस्ट’ पार्टी, ‘हिंदू हार्डलाइनर’, ‘हिंदुत्व संगठन’ बताते हैं। ये चाहते हैं कि पाठक इसे कट्टरपंथी पार्टी मान ले। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश की हिंदू बहुसंख्यक को अपील करने की PM मोदी की रणनीति जीत की वजह बनी।

BJP के यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करने वालों का साथ देने वाले इस्लामी वामपंथी मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सेक्युलरिज़्म’ का राग अलापते हुए बीजेपी को हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी कहती है।

BJP के यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करने वालों का साथ देने वाले इस्लामी वामपंथी मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सेक्युलरिज़्म’ का राग अलापते हुए बीजेपी को हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी कहती है।

हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडे को मिलेगी गति-बीबीसी

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर के अनुसार, 10 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले बंगाल की जीत पीएम मोदी के हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे को नई गति देगी और पूर्वी भारत में BJP का विस्तार पूरा करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सालों तक पश्चिम बंगाल राज्य केन्द्र में नरेंद्र मोदी की राजनीतिक बढ़त के बावजूद एक बड़ा अपवाद बना रहा। 2026 में बीजेपी की बंगाल फतह मोदी के 12 साल के शासन के सबसे अहम राजनीतिक सफलताओं में एक गिनी जाएगी।

द गार्डियन ने उठाए सवाल

UK के अखबार ‘द गार्डियन’ ने बंगाल और असम में बीजेपी की जीत को ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ की जीत बताया। हिन्दू विरोधी रूख के लिए मशहूर द गार्डियन ने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की बात कही और ‘सेक्युलरिज्म खतरे में’ वाला नैरेटिव सेट करने की कोशिश की। इससे पहले भी उसने 2014 में बीजेपी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ‘सिम्बोलिक खतरे’ के तौर पर पेश किया था।
बंगाल और असम विजय पर इस बार भी उसने वही राग अलापा। 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत की राजनीति BJP के इर्द-गिर्द घूम रही है। पीएम मोदी की व्यापक लोकप्रियता का प्रमाण है कि केन्द्र में लगातार तीसरी बार और 20 से ज्यादा राज्यों में बीजेपी गठबंधन सत्तासीन है। इसको नकारते हुए वामपंथी लिबरल ग्रुप धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते हुए आरोप लगाता रहा है कि बीजेपी भारत को सेक्युलर देश के बजाय हिंदू देश बनाना चाहती है।

भारतीय गणतंत्र पर गंभीर खतरा- प्रथम आलो

बांग्लादेश का अखबार प्रथम आलो ने बंगाल में जीत पर शीर्षक दिया- पश्चिम बंगाल चुनाव, सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य खतरे में।
इसमें कहा गया है कि बंगाल चुनाव भारत के चुनावी इतिहास में याद रखा जाएगा क्योंकि एसआईआर के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम काटे गए और केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की अभूतपूर्व तैनाती रही। हालाँकि अखबार मान रहा है कि बंगाल में इस बार हिंसा कम हुई। अखबार के मुताबिक बंगाल में बीजेपी ध्रुवीकरण की वजह से जीती। बंगालियों के अंदर भी हिन्दुत्व पैर जमा चुका है। अखबार लिखता है कि बंगाली लंबे समय से समन्वयवादी हिन्दू परंपरा के लिए जाने जाते हैं।
जबकि पाकिस्तानी दैनिक डॉन ने एएफपी की एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें बताया गया कि मोदी ने पश्चिम बंगाल में ‘रिकॉर्ड’ जीत का दावा किया।
इसमें कहा गया है कि ये परिणाम मोदी को 2029 में होने वाले आम चुनाव से पहले उच्च बेरोजगारी दर और लंबित अमेरिकी व्यापार समझौते सहित कई आर्थिक और विदेश नीति संबंधी चुनौतियों से निपटने में मजबूती प्रदान करेंगे।
विदेशी मीडिया ने भारत में हो रहे सकारात्मक सामाजिक-राजनीतिक बदलावों की बातें नहीं की, बल्कि एक नकारात्मक और एकतरफा नैरेटिव पेश किया है। यह वास्तविक पत्रकारिता नहीं है, बल्कि इस्लामी-वामपंथी प्रोपेगेंडा है।