बंगाल : आज़ादी के बाद पहली बार मना ‘पश्चिम बंग दिवस’; मोदी बोले- अब बेड़ियों से मिली मुक्ति, राज्य को दी 820 करोड़ की सौगात

   मोदी ने ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ पर बाबा तारकेश्वर की धरती से  दी 820 करोड़ की सौगात (साभार: नवभारत टाइम्स, एक्स @narendramodi)
जनसभाओं से लेकर राष्ट्रीय मंचों तक देश को आज़ादी दिलवाने के कसीदे पढ़ने वाली कांग्रेस और इसकी समर्थक वामपंथी पार्टी से लेकर ममता बनर्जी की TMC ने इतने साल बंगाल में राज किया, लेकिन कभी बंगाल
 का ‘पश्चिम बंग दिवस’ नहीं मनाया। फिर देशभक्ति की दुहाई देते फिरते हैं। धीरे-धीरे भारत विरोधियों की कठपुतली बनी पार्टियों की कलई खुलनी शुरू से बिलबिला रहे हैं। जो पार्टी राज्य का पावन  ‘पश्चिम बंग दिवस’ नहीं मनाए वह देशभक्त पार्टी नहीं हो सकती।   

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार 2 दिवसीय दौरे पर राज्य पहुँचे। उनके दौरे की शुरुआत हुगली जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले तारकेश्वर से हुई। यहाँ पहली बार आधिकारिक तौर पर आयोजित ‘पश्चिम बंग दिवस’ कार्यक्रम में PM मोदी ने हिस्सा लिया।

इस दौरान राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मंच पर मौजूद रहे। PM मोदी ने राज्य के लिए विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया, किसानों के खातों में PM-किसान योजना की राशि जारी की और राजनीतिक व ऐतिहासिक संदर्भों पर भी अपनी बात रखी।

पहली बार आधिकारिक तौर पर मनाया गया ‘पश्चिम बंग दिवस’, इतिहास से जोड़ा गया आयोजन

नई राज्य सरकार ने 20 जून को आधिकारिक ‘पश्चिम बंग दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया। यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा में विभाजन संबंधी प्रस्ताव पारित हुआ था। कार्यक्रम के लिए तारकेश्वर को चुना गया, जिसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।

 अपने संबोधन में PM मोदी ने कहा, “इस बार पश्चिम बंग दिवस की यह तारीख और भी खास है। आजादी के बाद बंगाल के उज्जवल भविष्य के लिए जो सपना देखा गया था, बंगाल की महान आत्माओं ने जो परिकल्पना की थी। आज पहली बार हम पश्चिम बंग दिवस पर उन सपनों को सच्चाई में बदलते देख रहे हैं।”

मोदी ने आगे कहा, “यह ऐतिहासिक तारीख पश्चिम बंगाल के विकास की प्रेरणा बने, हम एक नया और गौरवशाली इतिहास रचे। आज भाजपा-NDA सरकार में विकास के महाअभियान की शुरुआत हो रही है। मैं कामना करता हूँ कि ऐतिहासिक ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ राज्य के विकास के लिए प्रेरणा बने।”

तारकेश्वर मंदिर में पूजा, 820 करोड़ की परियोजनाएँ और रेलवे को बड़ा पैकेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारकेश्वर स्थित बाबा तारकनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद राज्य के लिए लगभग 820 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। इनमें रेलवे अवसंरचना पर विशेष जोर दिया गया और करीब 590 करोड़ रुपए रेलवे परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए।

इसी क्रम में हावड़ा में 99 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 300 बेड के नए डिवीजनल रेलवे अस्पताल का शिलान्यास भी किया गया। सरकार के अनुसार, यह अस्पताल रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

पीएम ने कहा, “बंगाल में दशकों तक पहले लेफ्ट और फिर TMC ने जो गड्ढे बनाए, उन्हें भरने के लिए डबल इंजन सरकार ने सुपरफास्ट गति से काम करना शुरू कर दिया है। बिजली की रफ्तार से फैसले हो रहे हैं। रुकी हुई योजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में आज यहाँ सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है।”

किसानों को पीएम-किसान की किस्त और नवद्वीप-पुरी रेल सेवा का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त भी जारी की। इसके तहत देश के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में कुल 18,880 करोड़ रुपए सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। इनमें पश्चिम बंगाल के 45 लाख से अधिक किसानों को 900 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिली।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के नवद्वीप और ओडिशा के पुरी के बीच नई सीधी रेल सेवा का भी उद्घाटन किया। माना जा रहा है कि इससे धार्मिक पर्यटन और दोनों राज्यों के बीच संपर्क को मजबूती मिलेगी।

कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और TMC पर हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “उस कठिन समय में कॉन्ग्रेस ने मजबूती से खड़े होने के बजाय घुटने टेक दिए थे। “उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के समय बंगाल को भारत से अलग करने की कोशिश हुई थी और उस दौर की घटनाओं को देश नहीं भूल सकता।
उन्होंने कहा, “बीजेपी की जीत के बाद राज्य में बदलाव साफ दिखाई देने लगा है, अब बंगाल विकास, निवेश और भविष्य के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।” सभा में उन्होंने कहा, “बंटवारे के समय कॉन्ग्रेस ने बंगाल को अनाथ छोड़ दिया था और स्वतंत्रता के बाद तुष्टीकरण की राजनीति की।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “गुलामी के दौर में हमारे बंगाल ने क्या कुछ नहीं सहा, कितने बलिदान दिए, कितने त्याग सहे, 1946 में, कोलकाता में हुई हिंसा, कितने निर्दोष बंगाली लोग उसकी भेंट चढ़ गए। बंगाल ने रक्तपात सहा, अपनों को खोया, अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखे लेकिन बंगाल ने अपनी अस्मिता, पहचान को नष्ट नहीं होने दिया।”
उन्होंने कहा, “इसी का परिणाम था कि जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश हो रही थी, तब अलग पश्चिम बंगाल बनाकर उन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया। पश्चिमबंग दिवस के रूप में हम केवल एक तारीख को याद नहीं कर रहे, बल्कि पूरे इतिहास को याद कर रहे हैं।”
अंत में उन्होंने योग दिवस का भी उल्लेख करते हुए कहा, “कल देश, दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना है। इस बार मैं बंगाल में ही योग दिवस का हिस्सा बनूँगा। स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसे योगियों की भूमि से जो संदेश जाएगा उससे पूरे विश्व का मार्गदर्शन होगा। मैं चाहूँगा कि इस बार बंगाल के कोने-कोने में योग दिवस के आयोजन हो।”

8वीं पास रूबीना, ‘उपाध्याय मैडम’ नाम रख फर्जी वकील बनीं, हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण और मुस्लिम लड़कों से निकाह कराने की रची साजिश

                                हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण की बड़ी साजिश (फोटो साभार: ChatGPT)
जब कांवड़ यात्रा के दौरान हिन्दू नाम रख ढाबे चलाने वाले मुस्लिमों पर कार्यवाही की जाने पर कितने सेक्युलर का चोला ओढे सनातन विरोधी चील-कौओं की तरह चीख रहे थे और हमारी अदालतें भी उनका पक्ष ले रही थी। अब अदालतों को आंखे खोलनी होंगी क्योकि 8वीं पास कानून की मोटी-मोटी किताबों को धता दे अब जेहादी नाम बदलकर अदालतों में पहुँच अपना खेल खेल रहे हैं। अदालतों को चाहिए कि पुलिस को निर्देश दे कि जिस संस्था ने इसे वकालत की डिग्री दी उसे चेतावनी ही नहीं सील करे। रुबीना के बैंक खाते फ्रीज़ किये जाएं। 
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 8वीं पास एक मुस्लिम महिला ने खुद को हिंदू वकील बताकर हिंदू लड़कियों को इस्लाम अपनाने और मुस्लिम युवकों से शादी करने के लिए फँसाया। सत्य की आवाज की रिपोर्ट के अनुसार, रूबीना नाम की महिला ने खुद को वकील बताकर नर्मदापुरम जिला व सत्र न्यायालय में एक वरिष्ठ वकील के चैंबर से जुड़ गई।

वह वरिष्ठ वकील की सहायक के रूप में काम करती थी और वकील की ड्रेस पहनकर अदालत में आती थी। रूबीना ने न केवल वकील होने की झूठी पहचान बनाई बल्कि अपनी मजहबी पहचान भी छिपाई। वह खुद को हिंदू बताती थी और लोग वहाँ उसे ‘उपाध्याय मैडम’ के नाम से जानते थे। अपनी इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर उसने हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए निशाना बनाया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वह हिंदू महिलाओं का ब्रेनवॉश करती थी, उन्हें मुस्लिम बनाने के लिए प्रेरित करती थी और उनका निकाह मुस्लिम पुरुषों से करवाती थी। रूबीना द्वारा निशाना बनाई गई ऐसी ही एक लड़की सामने आई है और उसने बताया है कि रूबीना ने उसके साथ क्या किया।

रूबीना के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई गई है जिसमें जबरन वसूली, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण के आरोप शामिल हैं। स्थानीय हिंदू संगठनों द्वारा मामला उठाए जाने के बाद उसका भंडाफोड़ हुआ। हिंदू संगठनों को संदेह है कि उसकी गतिविधियों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है और वे पुलिस से त्वरित और कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर यह महिला पूरे कानूनी तंत्र को कैसे धोखा देती रही। गौरतलब है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ऐसे ही फर्जी वकीलों के मामलों का जिक्र कर रहे थे, जब उन्होंने कहा था कि कुछ लोग व्यवस्था पर कॉकरोच की तरह हमला कर रहे हैं। जिसके बाद उनके इस बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था।

‘मुझे लोकप्रियता के लिए तुम्हारी जरूरत नहीं’: ट्रंप पर फिर फायर हुईं इटली की PM मेलोनी, पहले भी पाकिस्तान से लेकर मैंक्रों तक को दिखी चुकी हैं आँखें

डोनाल्ड ट्रम्प यह समझते हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति जब चाहे जो चाहे किसी को भी बोल सकता है और दुनिया चुप रहेगी। हर देश को पाकिस्तान समझने की गलती नहीं करें। पाकिस्तान को पैसों की खातिर बेइज्जती बर्दाश्त कर सकता है हर देश नहीं। आज लगभग हर देश अपने आप में स्वतंत्र है। सबका अपना आत्मसम्मान है। 

अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप से भिड़ने से पहले भी इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी कई आलोचकों को करारा जवाब दे चुकी हैं। उन्होंने अपने अंदाज में फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्रों को सुना दिया था। यहाँ तक कि अपने देश में कोर्ट के फैसले की आलोचना करने से लेकर पॉर्न साइट को अपना बोरिया बिस्तर समेटने को मजबूर कर दिया था। वह यूरोप के इस्लामीकरण से काफी परेशान दिखीं। उनका पुराना वीडिया 2018 में आया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटेन-अलबेनिया के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। 

राष्ट्रपति ट्रंप और मेलोनी विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और मेलोनी के बीच विवाद के बाद मेलोनी के बेबाक अंदाज की दुनियाभर में चर्चे हो रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि लोकप्रियता गिरने के कारण मेलोनी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए ‘मिन्नतें’ की थीं। ट्रंप ने यह भी कहा था कि उन्होंने मेलोनी के साथ फोटो सिर्फ इसलिए खिंचवाई क्योंकि उन्हें उन पर तरस आ गया था। दरअसल ट्रंप की असली नाराजगी ईरान युद्ध के समय इटली ने अमेरिकी फाइटर्स प्लेन को लैंडिंग की इजाजत नही दी थी।

ट्रंप के बयान पर मेलोनी ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि ट्रंप की दोस्ती से उनकी लोकप्रियता में इजाफा नहीं हुआ है। उनके दावे मनगढ़ंत है, जिसे सुनकर उन्हें हैरानी हुई। मेलोनी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि इटली एक संप्रभु देश है और अमेरिकी एयरबेस का इस्तेमाल उनकी शर्तों पर ही होगा। मेलोनी ने यहाँ तक कह दिया कि मेरी चिंता ना करें, अपना देखें।

मेलोनी ने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप की बातें पूरी तरह झूठी हैं। मैं सचमुच हैरान हूँ। मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं।”

यह पहली बार नहीं है जब मेलोनी के जवाब पूरी दुनिया में सुर्खियाँ पाई हो। उन्होंने पहले भी कई बार अपनी बेबाकी का परिचय दिया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति को दिया जवाब

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आप्रवासन की नीतियों और यूरोप के फैसलों को लेकर मेलोनी की फ्रांस के नेतृत्व के साथ कई बार तीखी नोक-झोंक हो चुकी है। फ्रांस के ल्योन शहर में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता क्विंटिन डेरांक की वामपंथी चरमपंथियों ने हत्या कर दी थी। इसको लेकर जॉर्जिया मेलोनी ने फ्रांस को सुनाया था और यूरोप के लिए एक गहरा घाव बताया था। इस पर भड़के फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने मेलोनी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रवादियों को अपने देश तक सीमित रहना चाहिए और दूसरों के मामलों में टांग नहीं अड़ाना चाहिए। मेलोनी ने भी तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि वह यूरोप में वैचारिक हिंसा के खिलाफ बोलने से पीछे नहीं हटेंगी, चाहे सामने फ्रांस जैसी बड़ी ताकत ही क्यों न हो।

यूरोप के इस्लामीकरण से चिंतित मेलोनी

जॉर्जिया मेलोनी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने यूरोप में हो रहे इस्लामीकरण और सऊदी अरब की मदद से चल रहे कई सांस्कृतिक केंद्रों पर खुलकर चिंता जताई थी। साथ ही साफ किया था कि इस्लामी संस्कृति की कुछ व्याख्या और यूरोपीय सभ्यता के मूल्यों और अधिकारों के बीच सामंजस्य बैठना काफी मुश्किल है। इस पर मेलोनी को पाकिस्‍तान में काफी ट्रोल किया गया था। हालाँकि ये बयान 2018 है, जब वह इटली की प्रधानमंत्री नहीं थीं। उस वक्त उन्होंने साफ कहा था कि अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए वह ब्रिटेन और अल्बानिया जैसे देशों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

फिलिस्तीन को नहीं दिया अलग देश का दर्जा

मेलोनी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ब्रिटेन और फ्रांस के रुख का समर्थन करते हुए फिलिस्तीन को तुरंत मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया। इटली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस अल्टीमेटम का भी समर्थन किया, जिसमें हमास को पूरी तरह हथियार छोड़ने और इजरायली बंधकों को तुरंत रिहा करने को कहा गया था। हालाँकि उनके इस रुख का इटली में ही विरोध हुआ। इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की माँग को लेकर 20 लाख से अधिक लोगों और ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी हड़ताल किया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई।

पोर्न वेबसाइट पर कसी लगाम

फिका नाम की एक पोर्न वेबसाइट ने मेलोनी, उनकी बहन आरियाना और विपक्षी महिला नेता एली श्लेन की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक बनाते हुए अपने साइट पर अपलोड कर दिया। इस पर एक्शन लेते हुए मेलोनी ने कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसको देखते हुए वेबसाइट ही बंद कर दी गई।

अदालत से भी भिड़ चुकी हैं मेलोनी

हमास के इजरायल पर हमले और निर्दोष लोगों को बंधक बनाने को मिस्र के निवासी इमाम मोहम्मद शाहिन को इटली की अदालत ने रिहा कर दिया तो मेलोनी कोर्ट पर बरस गईं। दरअसल इटली सरकार ने उसे देश से निकालने का आदेश दिया था, जिसे कोर्ट ने पलट दिया। इस पर मेलोनी ने सीधे कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर कोर्ट आतंकवाद का समर्थन करने वालों को ऐसे ही छोड़ देगी तो वह इटली के नागरिकों की सुरक्षा कैसे करेंगी?

अय्याज ताज-अमीन शेख-हजरत मौलाना ने हिंदू महिला से किया रेप-धर्मांतरण का भी प्रयास, पीड़िता के चीखने-चिल्लाने का वीडियो वायरल


महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर के सोनेगाँव क्षेत्र से एक हिंदू विवाहित महिला के साथ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में कलमेश्वर निवासी अय्याज ताज मदारे और आमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी हजरत मौलाना फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म, जबरन वसूली, धर्मांतरण के प्रयास और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा एवं काला जादू प्रतिबंध कानून के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

नशीला पदार्थ देकर बनाया वीडियो

पीड़िता 24 वर्षीय विवाहित महिला है और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है। उसका पति भारतीय वायुसेना में कार्यरत है और घटना के समय दूसरे शहर में तैनात था। शिकायत के मुताबिक, फरवरी 2025 में महिला के सहपाठी रहे अय्याज ने प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया।

आरोप है कि वह महिला को वर्धा रोड स्थित एक होटल में ले गया, जहाँ उसे जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। महिला का कहना है कि बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया गया और इस दौरान उसके वीडियो व फोटो रिकॉर्ड किए गए।

शिकायत में कहा गया है कि बाद में इन्हीं वीडियो और तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर आरोपित ने लगातार उसका यौन शोषण किया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उससे 3 लाख 9 हजार रुपए भी वसूले गए।

मौलाना ने कहा- अब तुम्हारा धर्मांतरण हो चुका है

शिकायत के अनुसार, मामला केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला पर धर्म बदलने का भी दबाव बनाया गया। महिला का आरोप है कि उससे विभिन्न मजहबी क्रियाएँ कराई गईं। इसी बीच एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें आरोपित महिला के साथ कलमा पढ़ता और उस पर फूँक मारता दिखाई दिया।
शिकायत के मुताबिक, 31 मई को आरोपित उसे नागपुर के कलमेश्वर इलाके में ले गया, जहाँ उसकी मुलाकात आमीन शेख और हजरत मौलाना से कराई। तीनों उसे एक सुनसान स्थान पर ले गए और कुछ मजहबी क्रियाएँ कर यह दावा किया कि उसका धर्मांतरण हो चुका है। इसके बाद उसके साथ दोबारा दुष्कर्म करने की कोशिश भी की गई।

पति के लौटने पर सामने आया मामला, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जाँच

 महिला का कहना है कि वह लंबे समय तक डर और दबाव में रही और किसी को पूरी घटना नहीं बता सकी। मामला तब सामने आया जब उसका पति तीन दिन पहले नौकरी से घर लौटा। इसके बाद महिला ने पूरी घटना पति को बताई और दोनों सोनेगाँव पुलिस थाने पहुँचे।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने दोनों को पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब पीड़िता के मोबाइल चैट, बैंक लेनदेन, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच कर रही है।

ब्रिटेन : पाकिस्तान आतंकिस्तान ही नहीं बलत्कारिस्तान भी; पहली बार ब्रिटैन संसद में बताया गया पाकिस्तान का इस्लाम: 2.5 लाख रेप पीड़िता, 87% आरोपित मुस्लिम और 149+ शहरों में फैला नेटवर्क: 219 पन्नों की ‘रेप गैंग इन्क्वायरी रिपोर्ट’ में सामने आई UK में दशकों से चल रही बर्बरता

                                                                                                                        साभार : सोशल मीडिया 
ब्रिटिश जिस साम्प्रदायिकता/फिरकापरस्ती/हिन्दू-मुस्लिम झगड़ों में भारत को झोंक कर गए थे उसी आग में जलने का अहसास खुद को होने लगा है। किस तरह पाकिस्तान ग्रूमिंग गैंग महिलाओं का बलात्कार कर महिलाओं के जीवन को नर्क बनाने में लगा है। जिसने भरी संसद में पाकिस्तान को इसका इस्लाम बताने को मजबूर कर दिया। आखिर कब तक सरकार अपने देश की महिलाओं का शोषण बर्दाश्त करती रहेगी? सुनने में आ रहा है कि सरकार पाकिस्तानियों को देश से बाहर करने की योजना बना रही है।     
ब्रिटेन (UK) में बरसों से ग्रूमिंग गैंग की समस्या पर रिपोर्ट जारी की गई है। यह 219 पन्नों की ‘रेप गैंग इन्क्वायरी रिपोर्ट’ एक ऐसी कहानी बताती है जिसे पढ़ना भी आसान नहीं है। रिपोर्ट का दावा है कि दशकों तक देश के अलग-अलग शहरों में संगठित गिरोह कमजोर और नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाते रहे। रिपोर्ट के अनुसार, इन गिरोहों में 87 प्रतिशत मुस्लिम आदमी शामिल थे और उनका शिकार ज्यादातर ‘श्वेत’ ब्रिटिश लड़कियाँ थीं। जाँच में कहा गया कि यह कोई इक्का-दुक्का अपराध नहीं था, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ एक संगठित नेटवर्क था जो वर्षों तक चलता रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियों को पहले दोस्ती, प्यार, उपहार, शराब, सिगरेट और नशे के जरिए फँसाया जाता था। कई गवाहियों में बताया गया कि 11 से 13 साल तक की बच्चियों को स्कूल के बाहर, देखभाल गृहों और सड़कों से टैक्सियों में ले जाया जाता था। इसके बाद उन्हें घरों, फ्लैटों, होटलों और रेस्टोरेंट तक पहुँचाया जाता था, जहाँ कई आदमी मिलकर बार-बार उनका बलात्कार करते थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई पीड़िताओं को अलग अलग शहरों में ले जाकर बेचा गया, उनकी वीडियो बनाई गईं, ब्लैकमेल किया गया और उन्हें लगातार डर के माहौल में रखा गया।

सबसे चौंकाने वाला दावा पीड़िताओं की संख्या को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 2.5 लाख श्वेत लड़कियाँ इस तरह के अपराधों का शिकार हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मामलों में बार बार बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, तस्करी, यातना, गर्भावस्था, जबरन गर्भपात, जबरन इस्लामी धर्मांतरण और जीवनरभर का मानसिक आघात शामिल था।

रिपोर्ट में कई पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें ‘व्हाइट ट्रैश’ और ‘काफिर’ कहकर अपमानित किया जाता था। जाँच के अनुसार अपराधियों ने गैर मुस्लिम और खासकर गरीब श्वेत लड़कियों को शिकार बनाया। कुछ गवाहियों में यह भी आरोप लगाया गया कि लड़कियों पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया गया, उन्हें मजहबी तौर-तरीकों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया और कुछ मामलों में विदेश में ले जाकर बेच दिया गया।

लेकिन रिपोर्ट सिर्फ अपराधियों पर सवाल नहीं उठाती। उसका सबसे बड़ा आरोप उन संस्थाओं पर है जिनका काम बच्चों की सुरक्षा करना था। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस, सामाजिक सेवाएँ, स्कूल, अस्पताल और स्थानीय प्रशासन के पास बार-बार चेतावनी के संकेत पहुँचे। कई मामलों में बच्चियों के साथ हुए अत्याचार के सबूत मौजूद थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। जाँच का निष्कर्ष है कि नस्लवाद के आरोप लगने के डर, राजनीतिक दबाव और संस्थागत विफलताओं ने अपराधियों को वर्षों तक खुला छोड़ दिया, जबकि हजारों बच्चियाँ लगातार शोषण का शिकार होती रहीं।

रिपोर्ट क्या है और इसे किसने तैयार किया

यह ‘रेप गैंग इन्क्वायरी रिपोर्ट‘ ब्रिटेन के ग्रेट यारमाउथ से सांसद रुपर्ट लोव के नेतृत्व में गठित स्वतंत्र जाँच समिति द्वारा तैयार की गई है। जाँच का मकसद ब्रिटेन में दशकों से सामने आ रहे ग्रूमिंग गैग्स और बाल यौन शोषण के मामलों की वास्तविक तस्वीर सामने लाना था।

रिपोर्ट तैयार करने के दौरान अदालतों के रिकॉर्ड, आधिकारिक और गैर-आधिकारिक जाँच रिपोर्टों, पीड़ितों की गवाही, विशेषज्ञों के बयान और विभिन्न शहरों से मिले साक्ष्यों का अध्ययन किया गया। जाँच समिति का दावा है कि उसने देशभर से बड़ी संख्या में पीड़ितों, गवाहों और संबंधित लोगों की गवाही दर्ज की।

219 पन्नों की इस रिपोर्ट में ग्रूमिंग गैंग्स के काम करने के तरीके, अपराधियों की पृष्ठभूमि, पीड़ितों के अनुभव, संस्थागत विफलताओं और राजनीतिक प्रतिक्रिया जैसे मुद्दों को विस्तार से शामिल किया गया है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह केवल कुछ स्थानीय मामलों की कहानी नहीं, बल्कि पूरे ब्रिटेन में फैला एक संगठित और लंबे समय तक चलने वाला संकट था।

कैसे लड़कियों को जाल में फँसाया जाता था?

रिपोर्ट के अनुसार ज्यादात मामलों में अपराध की शुरुआत किसी सुनसान जगह या हिंसा से नहीं, बल्कि दोस्ती से होती थी। गिरोह पहले ऐसी लड़कियों की तलाश करते थे जो भावनात्मक रूप से कमजोर हो, परिवार से दूर हों या किसी तरह की परेशानी से गुजर रही हों। उन्हें उपहार, पैसे, मोबाइल फोन, सिगरेट, शराब और नशीले पदार्थ देकर अपने करीब लाया जाता था।

जाँच में कहा गया है कि कई पीड़िताओं को यह विश्वास दिलाया गया कि अपराधी उनसे प्यार करते हैं और उनकी परवाह करते हैं। लेकिन एक बार भरोसा बन जाने के बाद हालात तेजी से बदल जाते थे। रिपोर्ट में दर्ज गवाहियों के मुताबिक लड़कियों को घरों, फ्लैटों, होटों, रेस्टोरेंट और टैक्सियों के जरिए अलग-अलग जगहों पर ले जाया जाता था, जहाँ उनका रेप किया जाता था।

                                    (फोटो साभार: Rape Gang Inquiry Report)

रिपोर्ट में एक जगह कहा गया है कि लड़कियों को अकसर ‘passed between multiple adult men’ यानी कई वयस्क पुरुषों के बीच घुमाया जाता था। कई पीड़िताओं ने बताया कि एक बार गिरोह के कब्जे में आने के बाद उनके साथ बार-बार और कई लोगों द्वारा बलात्कार किया गया। जाँच के अनुसार विरोध करने पर मारपीट, धमकी, ब्लैकमेल और परिवार को नुकसान पहुँचाने की चेतावनी दी जाती थी।

ढाई लाख से ज्यादा लड़कियाँ बनीं शिकार, जुर्म करने वालों में अधिकतर पाकिस्तानी मुस्लिम

रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में कम से कम 2.5 लाख श्वेत ब्रिटिश लड़कियाँ ग्रूमिंग गैंग का शिकार बनीं। जाँच में कहा गया है कि इन पीड़िताओं के साथ बार-बार बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, तस्करी, यातना, जबरन गर्भधारण, जबरन इस्लामी धर्मांतरण और गंभीर मानिक शोषण हुआ। रिपोर्ट का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे भी कहीं अधिक हो सकती है।

अदालत के रिकॉर्ड और आधिकारिक जाँचों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रूमिंग गैंग के मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों में करीब 87 प्रतिशत के नाम मुस्लिम हैं। हालाँकि जाँच यह भी कहती है कि गिरोहों में शामिल अधिकांष लोग कभी दोषी ठहराए ही नहीं गए।

                                  (फोटो साभार: Rape Gang Inquiry Report)

रिपोर्ट के मुताबिक इन नेटवर्कों में सबसे बड़ी संख्या पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम आदमियों की थी। इसके अलावा कुछ मामलों में सोमाली, सीरियाई, ईरानी और तुर्की मूल के मुस्लिम आदमियों के नाम भी सामने आए। ऑक्सफोर्ड इस्लामी कांग्रेगेशन के इमाम डॉ. ताज हार्गे का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रूमिंग गैंग में शामिल मुस्लिम आदमियों की वास्तविक संख्या 95 प्रतिशत हो सकती है।

पूरे ब्रिटेन में फैला था ग्रूमिंग गैंग नेटवर्क

रिपोर्ट के अनुसार ग्रूमिंग गैंग्स का एक जैसा मॉडल ब्रिटेन के दर्जनों शहरों और कस्बों में देखने को मिला। सांसद रूपर्ट लोव के नेतृत्व में हुई इस जाँच में ऐसे सबूत मिलने का दावा किया गया है, जिनसे पता चलता है कि यह नेटवर्क देश के लगभग हर हिस्से तक फैला हुआ था।

                                          (फोटो साभार: Rape Gang Inquiry Report)

जाँच के मुताबिक कम से कम 149 स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्रों में ऐसे मामलों के सबूत मिले हैं। रिपोर्ट का कहना है कि यह आँकड़ा दिखाता है कि समस्या किसी एक शहर या कुछ इलाकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर फैली हुई थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि अदालतों के रिकॉर्ड, विभिन्न जाँच रिपोर्टों और गवाहों की गवाही से एक समान पैटर्न सामने आया। जाँच का निष्कर्ष है कि यह अलग-अलग स्थानीय विफलताओं की कहानी नहीं, बल्कि संगठित बाल यौन शोषण का ऐसा नेटवर्क था जो उत्तर से लेकर दक्षिणी तट तक बार-बार एक जैसे तरीके से संचालित होता रहा।

पीड़िताओं की प्रमुख गवाहियाँ

  • हर दिन यौन शोषण: कई महिलाओं ने बताया कि उनके साथ महीनों और वर्षों तक लगातार बलात्कार हुआ। एक पीड़िता ने कहा, “मेरे साथ हर दिन रेप हुआ, कभी-कभी तो दिन में कई बार भी।”
  • एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाया जाता था: गवाहियों के अनुसार लड़कियों को अलग-अलग घरों, होटलों, फ्लैटों और कारों में ले जाया जाता था। रिपोर्ट में कहा गया कि कई पीड़िताओं को वयस्क पुरुषों के बीच इधर से उधर किया जाता था।
  • नस्लीय और मजहबी गालियाँ: कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें ‘व्हाइट ट्रैश’ और ‘काफिर’ कहकर तक अपमानित किया जाता था। गवाहियों में बताया गया कि गैर-मुस्लिम होने के कारण उन्हें नीचा दिखाया जाता था। कुछ गवाहियों में कहा गया कि गैर-मुस्लिम होने के कारण उन्हें नीचा दिखाया जाता था।
  • धर्म बदलने का दबाव: कई महिलाओं ने बताया कि उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। कुछ को परिवार को नुकसान पहुँचाने और जान से मारने तक की धमकियाँ दी गईं।
  • धमकी और ब्लैकमेल: कई महिलाओं ने बताया कि उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। कुछ को परिवार को नुकसान पहुँचाने और जान से मारने तक की धमकियाँ दी गईं।
  • शराब और नशे के जरिए नियंत्रण: पीड़िताओं के अनुसार उन्हें शराब, ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थ दिए जाते थे ताकि वे विरोध न कर सकें और अपराधियों के नियंत्रण में रहें।
  • मदद माँगने पर भी नहीं सुनी गई बात: कई महिलाओं ने कहा कि उन्होंने पुलिस, स्कूलों और सामाजिक सेवाओं से मदद माँगने की कोशिश की, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। कुछ मामलों में उन्हें ही दोषी मान लिया गया।
  • जिंदगी भर का मानसिक आघात: गवाहियों में अवसाद, डर, आत्महत्या के विचार, रिश्तों में समस्याएँ और जीवनभर बने रहने वाले मानसिक घावों का बार-बार जिक्र मिलता है। रिपोर्ट में बताया गया कि इन अपराधों का असर पीड़िताओं पर आज भी बना हुआ है।

पुलिस, स्कूल और सामाजिक सेवाओं की विफलता

रिपोर्ट का कहना है कि यह सिर्फ अपराधियों की कहानी नहीं है, बल्कि उन संस्थाओं की विफलता की भी कहानी है जिनका काम बच्चों की सुरक्षा करना था। जाँच रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थाएँ वर्षों तक यह जानती थीं कि बच्चियों के साथ क्या हो रहा है, लेकिन फिर भी समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस को बार-बार शिकायतें मिलती रहीं, लेकिन कई मामलों में पीड़िताओं की बातों को नजरअंदाज कर दिया गया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित लड़कियों को ही अपराधी की तरह देखा गया, सबूत नष्ट हुए और कई ज्ञात बलात्कार आरोपित जमानत पर बाहर घूमते रहे।
                                      (फोटो साभार: Rape Gang Inquiry Report)
सामाजिक सेवाओं को लेकर रिपोर्ट और भी गंभीर आरोप लगाती है। जाँच के मुताबिक कई बच्चियों को ऐसे बाल संरक्षण गृहों में रखा गया, जो बाद में शोषण और तस्करी के केंद्र बन गए। रिपोर्ट कहती है कि साफ संकेत मिलने के बावजूद कई मामलों को बंद कर दिया गया और उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई जिन्होंने इस समस्या को उजागर करने की कोशिश की।
स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों और डॉक्टरों के पास 13 साल तक की बच्चियों में यौन हिंसा के संकेत, यौन संक्रमण, बलात्कार के कारण हुई गर्भावस्था और आत्महत्या के प्रयासों के रिकॉर्ड मौजूद थे। इसके बावजूद कई पीड़िताओं को बिना उचित सुरक्षा व्यवस्था, परामर्श या विशेष देखभाल के वापस उसी माहौल में भेज दिया गया, जहाँ उनका शोषण हो रहा था।
स्कूलों को भी चेतावनी के संकेत दिखाई दे रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शिक्षकों ने स्कूल के बाहर बड़ी उम्र के पुरुषों को लड़कियों का इंतजार करते देखा, कुछ मामलों में स्कूल परिसर के अंदर ही बलात्कार की शिकायतें सामने आईं। लेकिन जाँच के अनुसार कई बार पीड़िताओं को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें ही स्कूल से निकाल दिया गया या अनुशासनहीन छात्रा मान लिया गया।
                                      (फोटो साभार: Rape Gang Inquiry Report)
रिपोर्ट में बताया गया कि राजनीतिक शुद्धता, नस्लवाद का आरोप लगने का डर और कुछ समुदायों का समर्थन खोने की आशंका ने बच्चों की सुरक्षा को पीछे धकेल दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई संस्थाओं ने समस्या का सामना करने के बजाय उससे बचने का रास्ता चुना, जिसका खामियाजा हजारों बच्चियों को भुगतना पड़ा।

रिपोर्ट की सिफारिशें और आगे क्या होगा?

रिपोर्ट का कहना है कि अब केवल पुरानी घटनाओं की जाँच करना पर्याप्त नहीं है। जाँच समिति ने पूरे देश में एक नई राष्ट्रीय सार्वजनिक जाँच शुरू करने की माँग की है, ताकि दशकों से चले आ रहे इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ग्रूमिंग गैंग्स से जुड़े सभी मामलों की दोबारा समीक्षा की जाए और उन अपराधियों की फिर से जाँच हो जो कभी अदालत तक नहीं पहुँचे। इसके अलावा पुलिस, सामाजिक सेवाओं, स्कूलों और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की भी स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की गई है, ताकि यह पता चल सके कि चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
                                      (फोटो साभार: Rape Gang Inquiry Report)
जाँच समिति ने पीड़िताओं के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम शुरू करने की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार हजारों महिलाएँ आज भी मानसिक आघात, अवसाद और अन्य समस्याओं से जूझ रही हैं। इसलिए उन्हें लंबे समय तक मनोवैज्ञानिक, कानूनी और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को अपराधियों की जातीय या धार्मिक पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्यों को छिपाने के बजाय खुलकर सामने रखना चाहिए। जाँच के अनुसार समस्या की सही पहचान किए बिना उसे रोकना संभव नहीं होगा।
आगे क्या होगा, यह काफी हद तक ब्रिटिश सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यदि इसकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया, तो हजारों पीड़िताओं को न्याय मिलने की संभावना और कमजोर हो सकती है। समिति का कहना है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि क्या हुआ था, बल्कि यह है कि इतने वर्षों तक ऐसा होने क्यों दिया गया और भविष्य में इसे कैसे रोका जाएगा।

दशकों से ब्रिटेन में खतरा है ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल

ब्रिटेन में 2002 के आसपास पहली बार ग्रूमिंग गैंग से जुड़े मामले उजागर हुए थे, जहाँ पाकिस्तानी मूल के पुरुषों पर इन नाबालिगों के शोषण के आरोप लगे थे। 2010 में यह ग्रूमिंग गैंग स्कैंडर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना, जब ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ ने जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट में इन बाल यौन शोषण के मामलों का खुलासा किया। उस रिपोर्ट में भी यह सामने आया कि अधिकतर आरोपित मुस्लिम थे और वे कमजोर एवं असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाली लड़िकयों को अपना शिकार बना रहे थे।
अवलोकन करें :-
हाल ही में जून 2026 की शुरुआत में ब्रिटेन की संसद में भी दोबारा से यह मुद्दा उठा था। जब सांसद रुपर्ट लोव ने संसद में ग्रूमिं गैंग की कई पीड़ित महिलाओं और लड़कियों की गवाहियाँ पढ़कर सुनाईं। इन गवाहियों में भी 600-700 आदिमयों ने किया रेप, टूटी बोतलों के टुकड़ों से रेप, पुलिस ऑफिसर द्वारा रेप, नस्लीय आधार पर ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाने जैसी बेहद दर्दनाक घटनाओं का जिक्र था।

अरफ़ा खानुम, नोमानी और मदनी जैसे लोगों को कहते हुए शर्म भी नहीं आती कि भारत में मुस्लिम डरे हुए हैं

सुभाष चन्द्र 

मुसलमान इतना डरा हुआ है कि जिसे लब्जों में बयां करना मुश्किल है। देखो ना बेचारा जब डरा हुआ है तो लव जिहाद, आतंकवाद और दंगों में मशगूल है, अगर डरा हुआ नहीं होता अल्लाह जाने कितनी दहशत फैली होती। यहाँ तक कि अब तो ब्रिटेन की संसद में पाकिस्तान के इस्लाम को बताने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जो अरफ़ा, मदनी और दूसरे कट्टरपंथियों के लिए कहीं डूब मरने वाली बात है। जो मुसलमान ही नहीं इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं और अंधभक्त मुसलमान चुपचाप बैठ बेइज्जती बर्दाश्त कर रहा है।    

लेखक 
चर्चित YouTuber 
कुछ दिन पहले महमूद मदनी ने कहा था कि मुसलमान लड़के सड़कों पर चलते हुए भी सुरक्षित महसूस नहीं करते। अब अरफ़ा खानुम शेरवानी ने मोदी को निशाना बनाते हुए कहा है कि “मोदी के भारत में मुसलमान होना, हर दिन अपमान, हर दिन धमकियाँ, हर दिन तकलीफें, एक ऐसी हकीकत है, जिसे लाखों लोग जीने के लिए मजबूर हैं।" यानी ये आपा भी कह रही हैं कि भारत का मुसलमान डरा हुआ है जैसे मदनी ने कहा

कुछ दिन पहले अरफ़ा खानुम ने कहा था कि “हलाला हम करवाते हैं लेकिन दर्द हिंदुओं को क्यों होता है, हलाला एक पवित्र क्रिया है जिसमें हल्ला, शोर शराबा नहीं होता और न पड़ोसियों को परेशानी होती है, इसलिए हलाला को सपोर्ट करें”
अरफ़ा इतना और बता दे कि हलाला क्यों होता है? एक गैर मर्द का बिस्तर गर्म कर वही औरत पाक कैसे हो जाती है?    

ये ऐसी बेशर्म और बेहया औरत है जिसे ऐसी बातें करते हुए शर्म भी नहीं आती। अगर मुसलमान डरे हुए हैं तो बांग्लादेश देश के घुसपैठिये और रोहिंग्या यहाँ ऐसे माहौल में रहने क्यों आये हुए हैं?

इसने तस्लीमा नसरीन के शब्द नहीं पढ़े जिसमें उन्होंने कहा है कि “भारत का मुसलमान देशद्रोही और गद्दार है, मौका मिलते ही भारत को ही खा जाएगा”

मुसलमान डरा हुआ है ये नरेटिव कोई नया नहीं है। हामिद अंसारी 10 साल Vice President  की कुर्सी पर बैठ कर कह गया कि मुसलमानों के लिए भारत में डर का माहौल है। नसीरुद्दीन शाह और आमिर खान कहते नहीं थकते कि भारत का मुसलमान डरा हुआ है। पता नहीं फिर भी बेशर्म भारत में रह रहे हैं।  

एक डरा हुआ मुसलमान, ये शब्द नहीं कह सकता जो AIMPLB के प्रवक्ता सज्जाद नोमानी ने कहे हैं। उसने कहा है कि -”हमने हिंदुओं को सेक्युलर और कम्युनल में विभाजित कर दिया है जिसके कारण हिंदू अब बहुमत में नहीं रह गए। जाट, SC/ST, तमिल, लिंगायत समुदाय के लोग भी हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं है” 

मौलाने, फिर तो, मुस्लिम अल्पसंख्यकों को जो अधिकार मिल रहे हैं, वो अब हिंदुओं को मिल जाएं तो पिछवाड़े में आग तो नहीं लगेगी? अबे निकम्मे तू हिंदू कौमों की बात करता है मगर भूल जाता है कि फिर मुसलमानों के 72 फिरके भी मुसलमान नहीं है खासकर पसमांदा तो मुस्लिम हैं ही नहीं। अहमदिया तो तुम वैसे ही मुसलमान नहीं मानते। और ये भी मत भूलें मदनी, अरफ़ा और नोमानी कि आज दुनिया में इस्लाम के मानने वाले पूरी तरह बिखर चुके हैं। ईरान ने सभी सुन्नी देशो को पेल दिया

भारत का मुसलमान इतना डरा हुआ है कि वो 

-उदयपुर के कन्हैया लाल की गर्दन उड़ा देता है;

-अमरावती के उमेश कोल्हे का भी सर तन से जुदा कर देता है;

-बहराइच में मोहम्मद सरफराज दुर्गा पूजा में राम गोपाल मिश्रा का क़त्ल कर देता है;

-कासगंज में डरे हुए मुस्लिम चंदन गुप्ता की हत्या कर देते हैं;

-दिल्ली की खोड़ा कॉलोनी में असद, 17 साल के सूर्य चौहान की ईद पर बलि दे देता है;

-पहलगाम में हिंदुओं की पहचान कर गोलियों से भूनकर 22 निर्दोषों की हत्या कर देता है;

-अल फ़लाह यूनिवर्सिटी की डॉ शाहीन और अनेक डॉक्टर आतंकी बना देता है;

-पुणे का लाखों की सैलरी पाने वाला ज़ुबैर हंगार्गेरकार अलकायदा से मिल कर हमलों की साजिश करता है;

-पुणे का ही Dr. Adnan Ali Sarkar ( specialist in anaesthesiology) ISIS से मिलकर मस्जिदों में हिंसक जिहाद फ़ैलाने की तक़रीर करता है

अरफ़ा खानुम, तुम दिन रात मोदी को कोसते नहीं थकती लेकिन तुम्हारा डरा हुआ मुसलमान मोदी से बिना किसी भेदभाव फ्री राशन लेकर अपने बच्चो का पेट पालता है. पक्के मकान लेता और 5 लाख का फ्री में इलाज भी लेता है लेकिन तुम्हारे भड़काए में मोदी को वोट नहीं देता

उमर खालिद और शरजील इमाम भी डरे हुए थे, उन्होंने दिल्ली को आग में झुलसाने का काम किया था

वैसे सज्जाद नोमानी को बंगाल चुनाव के नतीजे देख लेने चाहिए और वो अब भारत में अन्य राज्यों में दोहराए जाएंगे

टेलीग्राम पर NEET का फर्जी पेपर बेचते 19 साल के छात्र को राजस्थान पुलिस ने किया गिरफ्तार: अभ्यर्थियों से वसूले हजारों रुपए

         एग्जाम से पहले बेच रहा था री-नीट का फर्जी पेपर, आरोपित आकाश गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) के री-एग्जाम ठीक तीन दिन पहले राजस्थान के भीलवाड़ा में पुलिस ने फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 19 वर्षीय छात्र टेलीग्राम चैनल के जरिए अभ्यर्थियों को री-नीट का लीक पेपर देने का झाँसा देकर पैसे वसूल रहा था। आरोपित पहचान छिपाने के लिए विदेशी नेटवर्क और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। मामले में बैंक लेन-देन, डिजिटल गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की जाँच जारी है।

पुलिस के मुताबिक, भारत सरकार के एस-मेक (S-MEC) पोर्टल के माध्यम से विशेष शाखा को सोशल मीडिया पर पेपर लीक से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसी दौरान जिला विशेष टीम (DST) को भी सूचना मिली कि भीलवाड़ा के पटेल नगर क्षेत्र में रहने वाला एक युवक ऑनलाइन री-नीट का फर्जी पेपर बेच रहा है।

इनपुट मिलने के बाद पुलिस टीम गठित की गई और 18 जून 2026 की देर रात करीब एक बजे छापेमारी कर आरोपित आकाश चौधरी को उसके घर से हिरासत में लिया गया। जाँच में सामने आया कि आरोपित ने टेलीग्राम पर ‘पेपर माफिया’ नाम से चैनल बना रखा था। पुलिस का दावा है कि वह अमेरिका आधारित VPN नंबर और प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए चैनल संचालित कर रहा था ताकि उसकी पहचान और गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो।

4 हजार में बेचे जा रहे थे पेपर, NEET की किताबों से तैयार करता था सामग्री

प्रारंभिक जाँच में पता चला कि आरोपित प्रत्येक री-नीट पेपर के बदले चार हजार रुपए तक ले रहा था। भुगतान के लिए वह इच्छुक छात्रों को क्यूआर कोड भेजता था और रकम सीधे अपने बैंक खाते में मंगवाता था। पुलिस को उसके टेलीग्राम चैनल पर करीब 52 लोगों के संपर्क में होने की जानकारी मिली है।

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि वह नीट की तैयारी से जुड़ी पुस्तकों के पन्ने स्कैन कर उनसे डमी प्रश्नपत्र तैयार करता था और उन्हें असली लीक पेपर बताकर अभ्यर्थियों तक पहुँचाता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसका मोबाइल फोन, नीट की तैयारी की किताब और कुछ अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं।

जयपुर में कर रहा था तैयारी, अब नेटवर्क और ठगी की रकम की जाँच

आकाश ने स्थानीय स्तर पर पढ़ाई पूरी करने के बाद 12वीं पास की और फिलहाल जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह कार्रवाई से दो दिन पहले ही जयपुर से वापस भीलवाड़ा आया था। प्रताप नगर थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईटी एक्ट, धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पुलिस मोबाइल से डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों के लेन-देन, संभावित साथियों और इस ठगी से प्रभावित छात्रों की संख्या की जाँच कर रही है।

जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा बांग्लादेश; प्रभु श्रीराम की फोटो पर जूते मारने वालो को गिरफ्तार करो; सभी 64 ज़िलों में बनेगा राम मन्दिर

                   राम चित्र अपमान पर ढाका में हिंदुओं का विरोध प्रदर्शन। (फोटो साभार - दिनाजपुर टीवी)
आज भारत के अधिकांश राज्यों में भगवा लहराने का देश पर इतना असर नहीं पड़ा जितना बंगाल में लहराने से पड़ना शुरू हुआ है। बंगाल चुनाव सिर्फ चुनाव नहीं था सनातन का शंखनाद था। बंगाल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी यदि मुस्तैदी से सनातन विरोधियों पर कार्यवाही करते रहेंगे, बंगाल को घुसपैठ मुक्त करने से इसकी गूंज भारत ही नहीं विश्व में होगी। भारत में आज़ादी की चिंगारी बंगाल से निकली थी। ब्रिटिश सरकार महात्मा गाँधी या कांग्रेस से डरकर नहीं बल्कि बंगाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस से डरकर गयी थी। हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या। बंगाल चुनाव के बाद से सनातन विरोधियों की पार्टियां धराशाही हो रही है। दफ्तर में छंटनी का कानून है last come first go शायद यही कानून सनातन विरोधी पार्टियों पर भी अपने आप लागु हो चूका है। 

टीवी पर होनी वाली परिचर्चाओं में मुस्लिम कट्टरपंथी और इनकी समर्थक पार्टियां जब घिर रही होती है तो मुद्दे से भटकाते संविधान की दुहाई देते नज़र आते हैं। अयोध्या राममन्दिर में 200 करोड़ रूपए के घोटाले को जिस तरह उछाला जा रहा है इसके पीछे हिन्दुओं को राममन्दिर से दूर करने का बहुत गहरा षड़यंत्र है। प्रभु श्रीराम द्वारा सच्चाई सामने आने पर हिन्दुओं को बाँटने वाले चाहे वह मीडिया हो या राम विरोधी पार्टियां सब चारों खाने चित होंगे। अगर बंगाल में शुभेंदु अधिकारी शंखनाद कर रहे है तो उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पीछे नहीं रहने वाले।  

बांग्लादेश की राजधानी ढाका शुक्रवार (19 जून) को जय श्री राम के नारों से गूँज उठी। भगवान राम के अपमान के विरुद्ध सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरकर हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। मसाल जुलूस निकालते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों पर कार्रवाई के लिए बांग्लादेश की सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही कहा है कि देश के सभी 64 जिलों में एक-एक राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

प्रदर्शनकारी ढाका के शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए थे। वहाँ उन्होंने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और न्याय की माँग की। हिंदुओं ने सरकार को दोषियों को पकड़ने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे रविवार (21 जून) को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपेंगे।

64 जिलों में आंदोलन की चेतावनी

मशाल जुलूस में शामिल हिंदुओं ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपित गिरफ्तार नहीं हुए, तो आंदोलन पूरे देश में फैलेगा। बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में उग्र प्रदर्शन किए जाएँगे। शनिवार (20 जून) को ‘बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद’ ने भी देशव्यापी विरोध का ऐलान किया है। हिंदुओं का कहना है कि वे हर जिले में भगवान राम का मंदिर बनाकर रहेंगे।

जगह-जगह हुआ विरोध प्रदर्शन

शुक्रवार (19 जून) सुबह भी ढाका में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। हिंदू महाजोत के दो गुटों ने नेशनल प्रेस क्लब और ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी में कार्यक्रम किए। प्रेस क्लब के सामने एक बड़ा मानव बंधन बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री से मिलने और रैलियाँ निकालने की भी योजना बनाई है। उनकी माँग है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
अवलोकन करें:-
बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने
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बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने
भारत में घुसपैठियों को अपना दामाद बनाकर पालने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों में लेशमात्र भी शर्म है सभी को एकजुट ह... 

पूरा मामला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रंगपुर डिवीजन के गाइबांधा जिले में भगवान राम का मंदिर और 81 फीट ऊँची प्रतिमा बनाई जा रही थी। कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों ने इस निर्माण को रुकवा दिया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर वाले बैनर पर चप्पलें मारी गईं। इसका Video वायरल हुआ। इस घटना से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है।

‘मेरे साथ फोटो के लिए गिड़गिड़ाईं मेलोनी’: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर तमतमाईं इटली की प्रधानमंत्री ने दिया करारा जवाब

                                       डोनाल्ड ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी (फोटो साभार: ChatGPT)
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए ‘मिन्नतें’ की थीं। ट्रंप ने यह भी कहा था कि उन्होंने मेलोनी के साथ फोटो सिर्फ इसलिए खिंचवाई क्योंकि उन्हें उन पर तरस आ गया था।

 ट्रंप के इस बयान पर मेलोनी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के दावे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और उन्हें यह सुनकर हैरानी हुई। मेलोनी ने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप की बातें पूरी तरह झूठी हैं। मैं सचमुच हैरान हूँ। मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं।”

दरअसल, ट्रंप ने इटली के टीवी चैनल La7 को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेहद लालायित थीं। उन्होंने कहा था कि मेलोनी उनसे बात करके भी खुश होंगी क्योंकि उन्हें उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि मेलोनी फोटो के लिए उनसे बार-बार आग्रह कर रही थीं।

हालाँकि जी-7 सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वे काफी देर तक चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच मेलोनी ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने सहयोगियों के प्रति तो सख्त रवैया दिखाते हैं लेकिन पश्चिमी देशों और अमेरिका के विरोधियों के प्रति उतनी कठोरता नहीं दिखाते।

मेलोनी ने अपने जवाब में कहा, “एक बात उन्हें याद रखनी चाहिए, न मैं और न ही इटली कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाता है।” विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने 21 और 22 जून को प्रस्तावित अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियां गंभीर और अपमानजनक हैं तथा उन्होंने पूरे इटली का अपमान किया है।