उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों को बताया वेश्याओं से भी बुरा

लगता है समाजवादी पार्टी की भी उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। वह किसी और ने नहीं समाजवादी पार्टी ने खुद ही शुरू की है। यह समाजवादी पार्टी का कसूर नहीं बल्कि सौबत का है। INDI गठबंधन में जितनी भी पार्टियां है सभी सनातन विरोधी हैं। सभी मुसलमानों के वोट खींचने में सनातन पर प्रहार कर रहे हैं। जबकि मुसलमान भी इन पाखंडियों को समझ रहा है कि जो अपने धर्म नहीं हुआ हमारा क्या होगा। इन सबकी हालत धोबी का कुत्ता घर का न घाट का होने वाली है। 
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह ब्राह्मणों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। बीजेपी की उत्तर प्रदेश इकाई ने राजकुमार भाटी का यह वीडियो X पर शेयर किया है।

इस वीडियो में राजकुमार भाटी कह रहे हैं, “ब्राह्मण भला ना वेश्या, इनमें भला ना कोई। कोई-कोई वेश्या तो भली, ब्राह्मण भला ना कोई।”

अवलोकन करें:-

BJP ने X पर लिखा, “सपा में बयान नहीं, बदजुबानी की प्रतियोगिता चल रही है। कभी सनातन पर हमला, कभी समाज के सम्मानित वर्गों पर अपमानजनक टिप्पणी, यही सपाई राजनीति की असली पहचान बन चुकी है।” BJP ने आगे लिखा, “भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज का अपमान करने वाला बयान केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि उस मानसिकता का आईना है, जहाँ वोटबैंक के अहंकार में मर्यादा, संस्कार और सामाजिक सम्मान सब कुचल दिए जाते हैं।”

जो देश से कहा, उस रास्ते पर स्वयं भी चल पड़े मोदी, सुरक्षा वाहन भी हाफ

मोदी ने अपने काफिले की गाड़ियों को आधा किया (फोटो साभार : Hindustan & NDTV)
अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और वैश्विक ईंधन संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद से बड़ी शुरुआत की है। PM मोदी ने अपने काफिले (Cavalcade) को 50 फीसदी तक छोटा करने का निर्देश दिया है। अब उनके काफिले में पहले के मुकाबले आधी गाड़ियाँ ही नजर आएँगी।

PM मोदी ने सुरक्षा एजेंसी SPG को स्पष्ट कहा है कि सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए गाड़ियों की संख्या कम की जाए और काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को प्राथमिकता दी जाए। खास बात यह है कि इस बदलाव के लिए कोई नई गाड़ी नहीं खरीदी जाएगी। PM मोदी की इस पहल का उद्देश्य सरकारी खर्च में कटौती कर मिसाल पेश करना है।

उत्तर प्रदेश: CM योगी का बड़ा फैसला

PM मोदी के निर्देश का असर उत्तर प्रदेश में सबसे पहले दिखा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने और अपने मंत्रियों के काफिले में गाड़ियों की संख्या आधी (50%) करने का आदेश दे दिया है।
CM योगी ने मंत्रियों और विधायकों को हफ्ते में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो या बस) का उपयोग करने को कहा है। इसके साथ ही UP में ‘नो व्हीकल डे’ मनाने और सरकारी बैठकों को ‘वर्चुअल’ करने के निर्देश दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में भी दिखी सख्ती

मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। उन्होंने मंत्रियों को भी कम से कम गाड़ियाँ इस्तेमाल करने और सादगी से रहने की सलाह दी है।
वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सरकारी खर्च में कटौती का ऐलान किया है। उन्होंने खुद को और अपने मंत्रियों को कारों के सीमित उपयोग और कारपूलिंग के दायरे में रखा है। साथ ही दिल्लीवासियों से निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो और बसों के इस्तेमाल की अपील की है।
इसके अलावा, राजस्थान की भजनलाल सरकार ने भी बड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री ने अपने स्वयं के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की शुरुआत करते हुए राज्य के समस्त अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है।

PM मोदी की देशवासियों से अपील

कुछ समय पहले हैदराबाद और गुजरात के दौरों पर PM मोदी ने देशवासियों से अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट है।
इससे बचने के लिए PM मोदी ने जनता से एक साल तक सोना न खरीदने और विदेश यात्राओं पर खर्च कम करने का आग्रह किया है। PM ने पेट्रोल-डीजल के संयमित इस्तेमाल और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए ‘स्वदेशी’ अपनाने पर जोर दिया है।

क्यों लिया गया यह बड़ा कदम?

पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव न बढ़े, इसलिए केंद्र सरकार Work From Home को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के बजाय प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दे रही है। PM मोदी चाहते हैं कि सरकारी विभाग और राज्य सरकारें ‘एग्जांपल सेट’ करें ताकि आम नागरिक भी इस मुहिम से जुड़ सकें।

पौराणिक गाथा : अपरा एकादशी" की महिमा

प्रत्येक माह दो एकादशी-शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष- होती हैं और प्रत्येक एकादशी का अपना महत्व है। एकादशी भगवान श्रीकृष्ण यानि जगत के पालनहार विष्णु से सम्बंधित होती है। अगर एकादशी को चावल खाना तो दूर छूने तक की मनाही है तो कुछ पंडितों का कहना है कि अगले दिन चावल अवश्य खाना चाहिए।     
अपरा एकादशी" की महिमा क्या है एक ऐसा व्रत जो अपार पापों का नाश करता है? 
शास्त्रसम्मत कथा
​सनातन धर्म में एक ऐसी तिथि का वर्णन आता है, जिसके बारे में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। इस एकादशी को 'अचला एकादशी' भी कहते हैं क्योंकि इसका पुण्य कभी कम नहीं होता।
​आज आपको बताने जा रहे हैं 'ब्रह्म पुराण' में वर्णित अपरा एकादशी की वो महिमा, जो आपको कलियुग के कष्टों से बाहर निकाल लेगी!
 शास्त्रसम्मत प्रमाण (Scriptural Reference): 
​ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, अपरा एकादशी का फल उतना ही है जितना:
​कार्तिक मास में पुष्कर स्नान से मिलता है।
​गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने से मिलता है।
​या फिर सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में दान करने से मिलता है।
​ज्येष्ठकृष्णैकादशी या साऽपरा परिकीर्तिता।
तस्यां संपूज्यते विष्णुर्लोकेऽस्मिन् भुक्तिमुक्तिदः।। 
अपरा एकादशी का सटीक शास्त्रसम्मत संदर्भ 'ब्रह्मांड पुराण' में मिलता है, जहाँ धर्मराज युधिष्ठिर जिज्ञासावश भगवान श्रीकृष्ण से ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का महत्व पूछते हैं।
​आज उस कथा की गहराई में ले जाएंगे जिसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाया था। यह कथा एक ऐसे राजा की जिसका अंत उसके अपने भाई ने किया, लेकिन जिसकी मुक्ति एक महान ऋषि के तप के 'दान' से हुई।
 विस्तृत कथा: राजा महीध्वज और धौम्य ऋषि का महात्याग 
​प्राचीन काल में महीध्वज नाम के एक अत्यंत धर्मात्मा राजा थे। उनका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा ही पापी और ईर्ष्यालु था। सत्ता की भूख में उसने अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उनके शव को एक जंगली पीपल के नीचे गाड़ दिया।
​प्रेत का कष्ट:
अकाल मृत्यु और संस्कार न होने के कारण राजा महीध्वज 'प्रेत' बन गए। वे उसी पीपल के पेड़ पर रहकर राहगीरों को सताने लगे। राजा का तेज अब एक भयानक अंधकार में बदल चुका था, और वे वर्षों तक उस योनि में तड़पते रहे।
ऋषि का आगमन:
एक दिन धौम्य ऋषि उस रास्ते से गुजरे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि यह भयानक प्रेत असल में राजा महीध्वज है। ऋषि को उस पर दया आई। उन्होंने राजा को प्रेत योनि से मुक्त करने के लिए स्वयं 'अपरा एकादशी' का कठोर व्रत रखा।
 मुक्ति का क्षण: जब दान हुआ पुण्य 
​ऋषि ने व्रत पूरा करने के बाद द्वादशी के दिन भगवान विष्णु के सामने संकल्प लिया और अपने व्रत का पूरा फल उस प्रेत (राजा) को अर्पित कर दिया।
​जैसे ही पुण्य का फल राजा को मिला, वह प्रेत देह तत्काल जलकर भस्म हो गई और राजा महीध्वज दिव्य रूप धारण कर सामने प्रकट हुए। आकाश से विमान उतरा और राजा ऋषि को प्रणाम कर वैकुण्ठ धाम को चले गए। यह इस व्रत की वह शक्ति है जो 'असंभव' को भी 'संभव' बना देती है।
​अपरा एकादशी का व्रत उन लोगों के लिए रामबाण है जो:
​परनिंदा या झूठी गवाही के पाप से घिरे हैं।
​जिन्हें लगता है कि उनके पितृ कष्ट में हैं (यह व्रत पितरों की मुक्ति के लिए भी श्रेष्ठ है)।
​जो जीवन में मान-सम्मान और 'अपार' धन की इच्छा रखते हैं।
 अपरा एकादशी के विशेष नियम: 
​ भगवान विष्णु के 'गदाधर' स्वरूप की पूजा करें।

​तुलसी दल अर्पित करें (लेकिन याद रहे, एकादशी को तुलसी न तोड़ें)। 

बैंकों से लोन लो, मत चुकाओ मौज करो; बैंकों को उन्हें पकड़ने का भी अधिकार नहीं है

सुभाष चन्द्र

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुष्पेंद्र कुमार कौरव ने 10 मई को एक फैसले में कहा है कि सिर्फ ऋण न चुकाने के आधार पर किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी नहीं किया जा सकता।  उन्होंने कहा कि “LOC एक अंतिम कार्रवाई के रूप में की जाने वाली दंडात्मक कार्यवाही है और बैंक ऋण अदा करने में चूक या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए गए ऋण के हर मामले में LOC जारी नहीं किया जा सकता जहां LOC जारी करने के मामले में व्यक्ति को गबन या हेराफेरी के किसी अपराध में आरोपी नहीं बनाया गया, वहां LOC मान्य नहीं हो सकता” 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
न्यायमूर्ति कौरव ने अलग अलग मामलों में वित्तीय संस्थानों, बैंकों और जांच एजेंसियों के अनुरोध पर 23 याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जारी किए गए LOCs को रद्द कर दिया LOC जारी करने की कानूनी वैधता को सही ठहराने की जिम्मेदारी पूरी तरह उसे जारी करने वाली एजेंसी की होती है

23 याचिकाकर्ताओं के खिलाफ LOC ED, CBI, FFIO और विभिन्न बैंकों के कहने पर जारी किया गया था

इसका मतलब तो साफ़ हो गया कि व्यवसायी बैंकों से ऋण लें, अदा ना करें, तब भी उन्हें कोई हाथ नहीं लगा सकता जब तक वित्तीय संस्थाएं हाई कोर्ट के अनुसार कार्रवाई करेंगी, तब वो चुपचाप देश छोड़ कर भाग सकते हैं 

बात बड़ी स्पष्ट है कि जिन लोगों के खिलाफ LOC जारी किया गया होगा, उन्होंने कुछ हजारों में तो ऋण नहीं लिए होंगे, लाखों में होंगे और हो सकता है करोड़ों में हों ऐसे आदेश से तो उन ऋण अदा न करने वालों की मौज हो गई

LOC जारी करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है, यह गृह मंत्रालय के 2018 में जारी किए गए निर्देशों पर यह जारी किया जाता है जिससे wilful defaulters/Economic Offenders देश छोड़ कर न भाग सके जिनका ऋण अदा न करना देश के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है इसके लिए 2018 में Fugitive Economic Offenders Act भी बना था जिसके अनुसार जो देश छोड़ कर भाग जाते हैं उनकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है

दिल्ली हाई ने यह भी कहा कि “LOC cannot be used as a ‘strong-arm Tactics’ to restrict the right to travel under article 21”.

प्रश्न यह है कि आप इस article 21 के अधिकार तो अपराधियों समेत सबको देना चाहते हैं लेकिन उनके कर्तव्यों पर कभी कोई बात नहीं करते 

इस निर्णय की विवेचना सही मायने में ऐसे की जा सकती है कि हाई कोर्ट यह स्वीकार कर रहा है कि ऋण अदा करने वाले लोग रसूकदार हैं और देश छोड़ने की मंशा रखते हैं जिसकी छूट हाई कोर्ट ने दे दी

फिर विजय माल्या और नीरव मोदी को भी वापस लाने की क्या जरूरत है जिस पर सरकार लाखों रुपए खर्च चुकी है? क्या हाई कोर्ट यह चाहता है कि ये 23 लोग भी देश छोड़ कर भाग जाएं और फिर सरकार उनके प्रत्यर्पण के लिए भागती फिरे और करदाताओं का पैसा व्यर्थ में खर्च होता रहे

मुझे समझ नहीं आता अदालतें चाहती क्या हैं? क्या ऐसे आदेश से अराजकता नहीं फैलेगी वह भी तब, जब व्यक्ति जानबूझकर ऋण नहीं लौटा रहा आप तो आर्थिक अपराधियों को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं जबकि LOC जारी करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है लेकिन आप केवल अपनी Interpretation पर उसे रोक रहे हैं

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस उज्जवल भुइया की खंडपीठ ने एक नया कानून बना दिया कि अदालत के पास किसी अभियुक्त की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने का तो अधिकार है, लेकिन वे उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश नहीं दे सकती क्योंकि ऐसा करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है उस निर्णय ने भी अपराधियों की मौज करा दी थी क्योंकि आरोपी खुद तो कोर्ट में सरेंडर करेगा नहीं, आप सरेंडर करने के लिए कह नहीं सकते   

‘सनातन का नाश होना चाहिए’: तमिलनाडु विधानसभा में बोले उदयनिधि स्टालिन-चुपचाप सुनते रहे ईसाई CM विजय; क्या सनातन विरोध करना DMK के DNA में है?

                            तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन और CM विजय (फोटो साभार: ANI)
तमिलनाडु में मिली करारी हार के बाद भी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का राजनीतिक अहंकार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन के खिलाफ जहर उगला है। सनातन धर्म को लेकर अपना पुराना बयान दोहराते हुए उन्होंने सनातन को खत्म करने की बात कही है।

स्टालिन को ज्ञान नहीं कि सदियों प्राचीनतम सनातन को ख़त्म करने पता नहीं कितने आये और गए कोई उनका नामलेवा भी नहीं। अभी स्टालिन के पाप का घड़ा भरा नहीं है। जिस दिन भर जाएगा शायद इनका अपना परिवार ही इसे अपनाने से मना कर दे। सनातन विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। यह अडिग और अमर है और रहेगा। अब जो कालचक्र चल रहा है। जिस दिन बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी हिन्दू और सनातन एकजुट हो गया राज्य के इतिहास में भी इनका कोई नामलेवा नहीं मिलेगा। क्या सनातन विरोध करना DMK के DNA में है?    

तमिलनाडु के नवनिर्वाचित ईसाई मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय की मौजूदगी में मंगलवार (12 मई 2026) को विधानसभा को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “सनातन, जिसने लोगों को बाँटा है। उसका नाश होना चाहिए।”

यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन के खिलाफ जहर उगला हो, इससे पहले भी वो सनातन को खत्म करने की बात कह चुके हैं। इस साल की शुरुआत में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने सनातन धर्म पर उनकी 2023 की टिप्पणी को हिंदू समुदाय के खिलाफ ‘हेट स्पीच’ माना था।

तमिलनाडु सरकार में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री रहते हुए सितंबर 2023 में उदयनिधि स्टालिन ने ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए सनातन धर्म की तुलना मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म का सिर्फ विरोध नहीं बल्कि उसका पूरी तरह नाश होना चाहिए।

बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपने बयान का समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बाँटता है। उन्होंने कहा था कि मानवता और समानता के लिए सनातन धर्म को ‘जड़ से खत्म’ करना जरूरी है।

इसके बाद जनवरी 2026 में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने त्रिची सिटी पुलिस द्वारा भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था। यह FIR उदयनिधि के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप में दर्ज की गई थी। जस्टिस एस श्रीमथी ने तब कहा था कि उदयनिधि का कथित बयान स्वयं ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में आता है, ऐसे में उस पर सवाल उठाने को अपराध नहीं माना जा सकता है।

मोदी जी फ्री रेवड़ियों पर पाबन्दी कब? विधायक से लेकर सांसदों को मिलने वाली पेंशन और मिलने वाली अन्य सुविधाएं कब बंद होगी? मंत्रियों के साथ चलने वाले कारों के काफिलों पर पाबंदियां क्यों नहीं?


चुनावों के दौरान जिस बात का पूर्वाभास था परिणाम आने के बाद सच हो गया। बस पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ने बाकी हैं। वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई हैरानी का काम नहीं किया। इतिहास साक्षी है कि हमेशा चुनाव होने के बाद ऐसा होता आया है। ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के प्रभाव से जब विश्व अछूता नहीं, ये तो चुनावों की वजह से सरकार चुपचाप हर संकट झेल रही थी उसकी आंच जनता तक नहीं आने दी, यही सरकार की कुशल कार्यशैली को दर्शाता है।     
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनहित में जो जनता से अपील की है बहुत अच्छी बात है। जनता हमेशा मोदी की हर बात मानती रही है और मानती रहेगी। लेकिन अब जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जो अपील की है सिर-माथे। लेकिन ये अपील कई गंभीर सवालों का जवाब भी मांगती है। प्रधानमंत्री मोदी और इनके मंत्रिमंडल को इन सवालों पर भी चिंतन करने की जरुरत है। 
महान कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण ने उपरोक्त कार्टून 60 साल पहले बनाया था, लेकिन वर्तमान संदर्भ में यह कितना सटीक साबित हो रहा है।

1. फ्री की रेवड़ियों पर पाबन्दी क्यों नहीं लगाई जाती?

2. विधायक से लेकर सांसदों की पेंशन क्यों नहीं बंद की जाती? 

3. जब सांसदों को वेतन मिलता है फिर फ्री की बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं क्यों? 

4. ये जनसेवक हैं या शहंशाह? 

5. BPL में फ्री राशन लेने वालों की जाँच क्यों नहीं होती? 

6. आयकर नहीं देने पर भी सांसदों को छूट आदि आदि 

मोदी जी कई ऐसे सरकारी खर्चे हैं, जिनके बारे में बोलना शायद किसी को बर्दाश्त नहीं हो पाएगा, जो सालों से अर्थव्यवस्था पर बोझ नहीं बल्कि अर्थयवस्था को दीमक की तरह खा रहे हैं। जिस दिन इन पर पाबंदियां लग जाएंगी सरकारी खजाने में इतनी धन-वर्षा होगी कि खजाना खाली नहीं हो पाएगा। वह धन देश के विकास, रक्षा संसाधन और महंगाई कम करने के काम आएगा। गैर-बीजेपी शासित राज्यों की फ्री की रेवड़ियों से क्या हालत हो रही है सबके सामने है।  देखिए प्रधानमंत्री मोदी ने क्या अनुरोध किया है:-           
दुनिया में युद्धों को लेकर फैले संकट के बीच भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कुछ खास अपील की हैं। पीएम मोदी ने आम लोगों से जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर देशहित में योगदान देने की बात कही गई है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार (11 मई 2026) को तेलंगाना के दौरे पर थे और वहाँ सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने लोगों से ये अपील की हैं। पीएम मोदी ने लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की और इसके लिए उन्होंने कई रास्ते भी बताए हैं।

उन्होंने कहा, “भारत तेजी से विकसित होने के लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहा है। लेकिन कई विराट चुनौतियों का मुकाबला भी कर रहा है। कोरोना काल के दौरान ही दुनिया सप्लाई चेन के बहुत बड़े संकट से गिर गई थी। कोविड के बाद यूक्रेन में युद्ध शुरू हो गया। उसने दुनिया की परेशानियाँ और बढ़ा दी। फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर इन तीनों चीजों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।”

उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीने से हमारे पड़ोस में युद्ध चल रहा है और इसका भारत पर गंभीर असर हुआ है। उन्होंने कहा, “युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर के दाम आसमान को भी पार कर गए हैं। जब सप्लाई चेन पर संकट लगातार बना रहे तो हम कितने भी उपाय कर ले मुश्किलें बढ़ती ही जाती है।”

पीएम मोदी ने कहा, “अब देश को सर्वोपरि रखते हुए, माँ भारती को सर्वोपरि रखते हुए, हमें एकजुट होकर के लड़ना होगा। हमें याद रखना है देश के लिए मरना ही सिर्फ देशभक्ति नहीं होती है। देश के लिए जीना और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी देशभक्ति होती है।”

पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने पर जोर

 मोदी ने कहा कि हमें कुछ संकल्प लेने होंगे, जैसे एक बड़ा संकल्प है पेट्रोल-डीजल का संयम से इस्तेमाल करना। उन्होंने कहा, “हमें पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहाँ मेट्रो है, वहाँ हम तय करें कि हम मेट्रो का ही उपयोग करेंगे। ज्यादा से ज्यादा मेट्रो में ही जाएँगे। अगर कार में ही जाना जरूरी है तो फिर कार पुल करने का प्रयास करें।”

उन्होंने कहा, “अगर सामान भेजना हो तो रेलवे गुड्स के जो ट्रेन होती है रेलवे की सर्विज से भेजें ताकि इलेक्ट्रिक रेलवे होने के कारण पेट्रोल-डीजल की जरूरत ना पड़ती है। इलेक्ट्रिक व्हीकल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें।”

वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देने की अपील

पीएम मोदी ने लोगों से घर से काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हमने कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था विकसित की और हमें आदत भी हो गई थी। आज उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वह देश हित में होगा। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसेस, वर्चुअल मीटिंग्स, इनको हमें फिर से प्राथमिकता देनी है।”

एक साल तक सोना खरीदने से बचने की सलाह

प्रधानमंत्री ने एक वर्ष तक लोगों से सोना ना खरीदने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि सोना खरीदने में बहुत अधिक विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने कहा, “एक जमाना था जब संकट आता था, कोई युद्ध होता था तो लोग देश हित में सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है लेकिन देश हित में हमको यह तय करना पड़ेगा कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। सोना नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।”

खाने के तेल के इस्तेमाल में कटौती की बात

मोदी ने खाने के तेल के कम इस्तेमाल करने की भी बात कही है। उन्होंने कहा, “खाने के तेल के आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हर परिवार अगर खाने के तेल में खाने का तेल का जो उपयोग करता है अगर वह कुछ कमी करें मैंने बार-बार कहा है 10% कम करो। अगर हम तेल खाना कम करें ना तो भी वह देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है। इससे देश सेवा भी होगी और देह सेवा भी होगी। इससे देश के खजाने का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार के हर सदस्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।”

प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान

किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की गई है। सरकार लंबे समय से जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील

पीएम मोदी ने विदेशी ब्रांड के उत्पादों का कम इस्तेमाल करने और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संदेश दिया है। इससे स्थानीय उद्योगों और छोटे कारोबारियों को मजबूती मिलने की बात कही गई।

एक साल तक विदेश यात्रा टालने का सुझाव

देशवासियों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने की भी अपील की गई है। इसे देशहित और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश : ‘ऐसा ह₹@मी, देशविरोधी प्रधानमंत्री कभी नहीं देखा’: अजेंद्र कोहली, समाजवादी पार्टी सांसद; जनता भी किन सफेदपोश गुंडों को देती वोट


देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस के छोटे से लेकर बड़े नेता तक नफरत से भरे हुए हैं। एक के बाद एक प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जहरीले बयान दे रहे हैं। अब समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी सासंद अजेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अजेंद्र कुमार ने आपत्तिजनक बयान देते हुए प्रधानमंत्री मोदी को हरामी और देशविरोधी बताया है।
हैरानी होती है उस वोटरों पर जो सफेदपोशी गुंडों को वोट देकर वोट की बेइज्जती करते हैं। आखिर वोट देने से पहले वोटर अपनी अक्ल का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? क्या ऐसे नेता जनता और देश का भला कर सकते हैं? प्रधानमंत्री के विरुद्ध ऐसे अपशब्द बोलने वालों को गुंडा नहीं कहा जाए तो क्या कहा जाए? आखिर प्रधानमंत्री पद की कोई मर्यादा होती है नहीं? कहाँ है अखिलेश? क्यों नहीं जिस तरह बंगाल से ममता पार्टी का सफाया किया है उसी तरह उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी को भी चारों खाने चित करने का समय आ गया है। संसद में ऐसे सांसद हुड़दंग मचाकर जनता के पैसे को बर्बाद करते हैं।      

उत्तरप्रदेश के हमीरपुर से सपा सांसद अजेंद्र लोधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली बकने का वीडियो वायरल है। वीडियो में मीडियाकर्मी उनसे जब पूछते हैं कि पीएम मोदी ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है और पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने को कहा है तब अजेंद्र लोधी ने जवाब में प्रधानमंत्री को ह₹@मी बोला और देशविरोधी कहते हैं।

वीडियो वायरल में सपा सांसद ने पहले तंज मारते हुए कहा- “मोदी जी जो बोलते हैं बड़ा अच्छा बोलते हैं, सोना न खरीदें- पेट्रोल की खपत कम करें लेकिन विदेश की यात्रा करोड़ों में करें। कितना न्याय है, कितनी लोकप्रिय नेता हैं।” इसके बाद वो गाली देते हुए कहते हैं- इतना हर@मी और देशविरोधी प्रधानमंत्री आजतक किसी ने नहीं देखा और न आने वाली सरकारों में ऐसा कोई पीएम मिलेगा। 

ये बयानबाजी अजेंद्र लोधी ने उस समय की जब वो और अन्य पार्टी नेता राज्यपाल को 11 सूत्रीय माँगो का ज्ञापन सौंपने गए थे। वहीं पर मीडिया ने सवाल किया तो ये जवाब मिला। अब बयान वायरल है। सीएम योगी ने भी इसपर नाराजगी जताई है।

योगी ने अपने पोस्ट में कहा, “विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय जननेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति एक सांसद द्वारा की गई असंसदीय टिप्पणी न केवल अशोभनीय और अक्षम्य है, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी गंभीर आघात है। यह कृत्य राजनीतिक कुसंस्कार, वैचारिक दिवालियापन और सार्वजनिक जीवन की शालीनता के प्रति अनादर को प्रकट करता है। यह 145 करोड़ देशवासियों के जनादेश, विश्वास और भारत की लोकतांत्रिक गरिमा का भी अपमान है। देश की जनता ऐसे अमर्यादित आचरण का उत्तर समय आने पर अवश्य देगी।” 

बंगाल : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बॉर्डर पर दफन करने की धमकी, बांग्लादेश का मौलाना बोला- मुस्लिम हुए असुरक्षित तो हिंदुओं को नहीं छोड़ेंगे; बंगाल ही नहीं पूरे भारत से बांग्लादेशियों का सफाया होना चाहिए

                        बांग्लादेश के मौलाना ने हिंदुओं और शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी (फोटो साभार: NBT)
जब से पश्चिमी बंगाल में बीजेपी सरकार बनी है, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश से बांग्लादेशियों को बाहर करने की बात कही है मुस्लिम कट्टरपंथियों की जुबान बहुत ज्यादा खुलने लगी है। क्या इन कट्टरपंथियों को भी सबक सिखाने का अध्याय बंगाल से ही लिखा जाएगा? जिस तरह चुनाव में हिन्दुओं ने एकजुटता दिखाई है वही इन कट्टरपंथियों और इनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए दिखानी होगी। बहुत हो गया हिन्दू मुसलमान। ये वही कट्टरपंथी हैं जिन्होंने हिन्दू -मुसलमानों के बीच नफरत के बीज बोये हैं। दूसरे, बांग्लादेशियों को बाहर करने के बंगाल सरकार के फैसले से कट्टरपंथियों की बौखलाहट जाहिर कर रही है कि बंगाल में कितने ज्यादा बांग्लादेशियों को पिछली सरकारों ने दामाद बनाकर रखा हुआ था। 

हुमायूँ कबीर साथ-साथ बांग्लादेशी मौलाना भी बंगाल मुख्यमंत्री को धमकी देने मैदान में आ गए हैं यानि ये इस बात को साबित करता है कि यदि बंगाल से ही बांग्लादेशियों को वापस भेजना शुरू होते ही बांग्लादेश पाकिस्तान की तरह भुखमरी के रस्ते पर आ जाएगा। बंगाल से बाहर भी जितने बांग्लादेशी घुसे हुए है सभी को बाहर करना होगा। भारत सरकार को इन धमकियों को गंभीरता से लेते हुए बांग्लादेश सरकार से सख्ती के साथ जवाब तलब करना होगा। और बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक मदद बंद करनी होगी। जिस तरह पाकिस्तान को सबक सिखाया जा रहा है वही बांग्लादेश के साथ होना चाहिए। 

जब पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा हिन्दू महिलाओं का उजाड़ने पर Operation Sindoor हो सकता है फिर बांग्लादेश में सैकड़ों हिन्दुओं के मारे जाने पर भारत सरकार खामोश क्यों? बांग्लादेश को कब सबक सिखाया जाएगा?   

 

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद से पड़ोसी देश बांग्लादेश में खलबली मची हुई है। आए दिन बांग्लादेशी मौलाना भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। ताजा बयान बांग्लादेश के कट्टरपंथी मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी का है, जिसने कहा कि बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। उधर, शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी देने का भी एक वीडियो सामने आया है।

मौलाना अब्बासी कहता है, “भारत में हिंदुओं के लिए यहूदी मॉडल की तरह एक हिंदू-केंद्रित व्यवस्था बनाना नामुमकिन हो जाएगा। बीजेपी, जिसने अब बंगाल में सत्ता संभाल ली है, पहले से ही इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। गोमांस बेचने वाली दुकानों को तोड़ा जा रहा है और मुस्लिमों पर जुल्म और अत्याचार किए जा रहे हैं। इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए।”

अब्बासी ने बंगाल में मुस्लिमों पर कथित शोषण का बदला बांग्लादेश में हिंदुओं से लेने की बात कही। उसने कहा, “इस स्थिति में बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का भी एक बहुत ही अहम फर्ज है। भारत को एक सख्त चेतावनी दी जानी चाहिए कि हम उनके साथ अपने व्यापारिक संबंध तोड़ देंगे। इसके अलावा, यह भी साफ कर दिया जाना चाहिए कि अगर बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

ये वही मौलाना अब्बासी है, जो भारत विरोधी, भड़काऊ भाषणों और नफरती बयानों के लिए जाना जाता है। अब्बासी ने पहले भी भारत-विरोधी बयान दिया था कि बांग्लादेश के मुस्लिम दिल्ली में इस्लाम का झंडा फहराएँगे और मदरसों को हथियारों से लैस छावनी में बदल देंगे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी कर चुका है।

अवलोकन करें:-

बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी
बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी
 

शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी

ऐसी ही एक और भारत-विरोधी बयान सामने आया है, जिसमें बांग्लादेशी मुस्लिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी देता है। द इंकलाब नाम से फेसबुक पेज से प्रसारित वीडियो में बांग्लादेशी का एक मुस्लिम व्यक्ति शुभेंदु अधिकारी को सीमा पर ही दफनाने और उन पर हमला करने की धमकी दे रहा है। हालाँकि, इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है, पुलिस इसकी जाँच कर रही है।

बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी चैनल पर कहा- ‘मुस्लिमों को हाथ लगाया तो पीटूँगा’

                                                                                                         साभार - एक्स/@ItzBDHindus
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूँ कबीर ने राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पीटने की धमकी दी है। बांग्लादेशी चैनल ‘फेस द पीपल’ पर दिए इंटरव्यू में कबीर ने कहा, “अगर शुभेंदु किसी मुस्लिम को हाथ लगाएँगे, तो हम भी शुभेंदु को पीटेंगे।”

बयान सामने आने के बाद वीडियो के कमेंट सेक्शन में बांग्लादेश के कई अकाउंट्स से इंशाअल्लाह जैसे कमेंट भी किए गए। गौरतलब है कि शनिवार (9 मई 2026) को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शुभेंदु के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और खुदीराम टुडु ने भी मंत्री पद की शपथ ली। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही ममता बनर्जी सरकार के बाद यह पहला मौका है जब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी है।

जय सोमनाथ

सुभाष चन्द्र

अरब सागर पर स्थित “सोमनाथ मंदिर” प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है।  

यह “प्रथम आदि ज्योतिर्लिंग” श्री सोमनाथ महादेव हैं इसका उल्लेख स्कंद पुराण, श्रीमद् भागवत और विष्णु पुराण में है और ऋग्वेद की स्तुति में है आज के दिन 1951 में सरदार पटेल के हाथों जीर्णोद्धार के बाद राष्ट्र को समर्पित हुआ था

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तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मंदिर के पुनरुद्धार में रोड़े अटकाने के भरसक प्रयास किए और गिरावट की सभी सीमाएं लांघ दी नेहरू को सरदार पटेल के इस मंदिर निर्माण के कार्य से सख्त नफरत थी नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी उद्घाटन में जाने से मना किया लेकिन वे गए नेहरू ने अपनी कैबिनेट के मंत्रियों को भी उद्घाटन से दूर रहने को कहा और के एम मुंशी के अलावा कोई नहीं गया नेहरू की मानसिकता सनातन संस्कृति को मिटाने की थी, तो उन्हें मंदिर निर्माण कैसे भाता नेहरू के पदचिन्हों पर  चल कर आज के कांग्रेसी नेता (राहुल गांधी समेत) मंदिरों से सख्त नफरत करते हैं

इस मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि इसका 

पहला मंदिर निर्माण भगवान सोम ने सोने से किया;

मंदिर का दूसरा निर्माण भगवान सूर्य ने चांदी से किया;

तीसरा निर्माण भगवान कृष्ण ने लकड़ी से किया;

चौथा निर्माण राजा भीमदेव ने पत्थर से कराया;

मंदिर की विशेषताओं में देखें तो -

मंदिर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप;

मंदिर में 155 फ़ीट ऊंचा शिखर;

मंदिर के शिखर पर कलश का वजन 10 टन;

शिखर पर 27 फ़ीट ऊंचा और 1 फ़ीट चौड़ा ध्वज

वैसे तो आताताई मुगलों को मंदिरों से नफरत रही हैं लेकिन सोमनाथ मंदिर पर तो उन्होंने 17 आक्रमण किए उन आक्रमणों में प्रमुख और उनके चलते मंदिर निर्माण कैसे होता रहा, उनके बारे में कुछ जानकारी नीचे दे रहा हूं

(649 ई. में पहली बार मैत्रक के राजाओं ने बनवाया;)

75 साल बाद गवर्नर जुनैद ने हमला किया;

1025 - 26 में महमूद गजनवी ने मंदिर को लूटा;

गजनवी ने लूट के दौरान 50 हजार लोगों को क़त्ल किया;

(1026 - 42 के बीच भीमदेव सोलंकी ने मंदिर फिर खड़ा किया)

1299 में अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया;

(1169 में राजा कुमारपाल ने मंदिर के पत्थर लगवाए)

(1308 में चूड़ासमा राजा महिपाल प्रथम फिर निर्माण किया)

1395 में दिल्लीं सल्तनत के गवर्नर जफ़र ने तोड़फोड़ की;

1451 में गुजरात के शासक महमूद ने मंदिर को तहस नहस किया

1665 में औरंगज़ेब ने मंदिर गिराने का फरमान जारी किया;

1706 में औरंगज़ेब ने फिर हमला किया ताकि पूजा न हो सके 

(1763 में अहिल्याबाई ने नए मंदिर का निर्माण किया; नाम पुराना सोमनाथ)

आज सोमनाथ मंदिर निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाए गए “अमृत महोत्सव” का उद्घाटन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और आह्वान किया कि हमें सोमनाथ मंदिर जैसी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासतों को सम्भाल कर रखना है जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में उपयोगी हैं

आपने कभी कांग्रेस या विपक्ष के किसी नेता को सोमनाथ के दर्शन के लिए जाते नहीं देखा होगा - बस एक बार 2017 में राहुल गांधी गया था लेकिन Visitors Book में अपना धर्म लिखने में कुछ गड़बड़ हो गई और तब प्रचारित किया गया कि ये तो “दत्तात्रेय गोत्र” के ब्राह्मण है 

भगवान सोमनाथ को समर्पित है आज का दिन, इसलिए किसी के लिए अपशब्द नहीं कहूंगा लेकिन एक मूर्ख अराजकतावादी नेता ने दो दिन पहले कहा है कि मोदी औरंगज़ेब है, वो इसलिए कहा क्योंकि उसकी पार्टी की सरकार का एक मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा गया अब इस बेवकूफ को इतना भी नहीं पता कि औरंगज़ेब ने सोमनाथ मंदिर 2 बार तोड़ा था जबकि मोदी ने उसका पुनरुद्धार किया और आज भव्य समारोह में भी गए उस नेता का नाम आप समझ ही गए होंगे

जय सोमनाथ 

हर हर महादेव 

जय श्री महाकाल 

जय श्रीराम 

उत्तर प्रदेश : छात्राओं को पहनाया हिजाब, छात्रों को इस्लामी टोपी: संभल के सरकारी स्कूल में मजहबी तालीम दे रहे थे मुस्लिम शिक्षक, प्रिंसिपल समेत 3 सस्पेंड

                                         संभल स्कूल में बच्चों को दी जा रही थी मजहबी सीख
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र स्थित जालब सराय सरकारी स्कूल में मजहबी गतिविधियों को बढ़ावा देने का मामले सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के 2 मुस्लिम शिक्षक हिंदू छात्र-छात्राओं को इस्लामी तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

टीचरों के नाम अंजर अहमद और मोहम्मद गुल एजाज है। ये दोनों हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनने और छात्रों को इस्लामी टोपी पहनाकर सजदा करने के लिए कहते थे। साथ ही स्कूल परिसर में अन्य धर्मों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ भी करते थे।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब स्कूल से जुड़ी कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया।

इसके अलावा प्रभारी प्रधानाचार्य बालेश कुमार पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों से छिपाई और लापरवाही बरती।

डीएम ने मामले की गहन जाँच के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। यह समिति पूरे प्रकरण की जाँच कर यह पता लगाएगी कि इस गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

जिलाधिकारी ने साफ कहा है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का मजहबी या वैचारिक दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश : महाघोटाला : एक ही दिन 50 IAS-IPS ने खरीदी कृषि भूमि, 16 महीने बाद पास हो गया 3200 करोड़ रूपए का वेस्टर्न बायपास: लैंड यूज बदलते ही 11 गुना बढ़ी कीमत

                                                                                           प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)
मध्य प्रदेश में आईएएस अफसरों की अचल संपत्ति की जाँच में एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें देश के 50 अफसरों ने कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गाँव में एक ही दिन कृषि जमीन खरीद ली। यहाँ सिर्फ 16 महीनों में ही 3200 करोड़ रुपए का वेस्टर्न बायपास मंजूर हुआ और फिर 10 महीने में लैंड यूज बदलकर आवासीय कर दिया गया। इससे जमीन की कीमत 11 गुना बढ़ गई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अप्रैल 2022 को 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में हुई। 50 लोगों ने संयुक्त रूप से यह जमीन खरीदी। रजिस्ट्री में कीमत 5.5 करोड़ रुपए दर्ज की गई जबकि बाजार मूल्य 7.78 करोड़ रुपए बताया गया। आईपीआर में इसे ‘like-minded officers’ यानी एक जैसी सोच वाले अधिकारियों द्वारा खरीदी गई संपत्ति बताया गया। दस्तावेज बताते हैं कि 50 हिस्सों के पीछे असल खरीदार सिर्फ 41 हैं।

इस निवेश में सिर्फ मध्य प्रदेश कैडर के अफसर ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में तैनात कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। अफसरों ने मिलकर कृषि जमीन को खरीदा और बाद में सरकारी फैसलों का फायदा उठाया।

31 अगस्त 2023 को जमीन खरीद के 16 महीने बाद कैबिनेट ने वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दे दी। मौजूदा अलाइनमेंट के अनुसार बायपास खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर दूर है।

जून 2024 में बायपास मंजूरी के 10 महीने बाद ही जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय में बदल दिया गया। जब जमीन खरीदी गई थी तब वह पूरी तरह कृषि भूमि थी।

2022 में करीब 5 एकड़ यानी 2,17,800 वर्गफीट जमीन की दर लगभग 81.75 रुपए प्रति वर्गफीट थी। जून 2024 में लैंड यूज चेंज के बाद दर 557 रुपए प्रति वर्गफीट हो गई। वर्तमान बाजार दर 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट है। इससे जमीन का कुल मूल्य 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुँच गया है। हालाँकि अभी तक आवासीय प्रोजेक्ट के लिए कोई सोसायटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है। आवासीय प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन को सोसायटी के नाम ट्रांसफर करना होगा या प्लॉट आवंटित करने होंगे।

यह घटनाक्रम अफसरों पर सीधा निशाना साध रहा है और सवाल खड़ा कर रहा है कि उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी पहले से कैसे मिल गई। और फिर सवाल ये भी है कि क्या उन्होंने पद का दुरुपयोग कर अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाया? दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अब अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।