सनातन की एकजुटता पर उठाओ सवाल ताकि उम्माह का रहे बोलबाला : क्यों तरुण हत्याकांड में वामपंथी हिंदुओं में ही भर रहे ‘ग्लानि’, क्या है स्ट्रैटेजी?

दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान एक हिंदू दलित परिवार की खुशियाँ मातम में बदल गईं। एक बच्ची के पानी के गुब्बारे की छींटें मुस्लिम महिला पर पड़ने के बाद शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि तरुण को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। परिवार माफी माँगता रहा लेकिन इसकी कीमत उसकी जान देकर चुकानी पड़ी। घटना के दौरान भीड़ में शामिल लोग ‘खूनी होली’ की बात करते दिखे।

घटना के बाद वामपंथियों का प्रोपेगेंडा पैटर्न देखने को मिला। इसमें पहले इसे सामान्य झगड़ा बताने की कोशिश हुई। कहा गया कि दोनों पक्षों में मारपीट हुई और एक व्यक्ति की गलती से मौत हो गई। जब यह नैरेटिव नहीं चला तो सोशल मीडिया पर तरुण पर ही आरोप लगाए जाने लगे कि वही उकसा रहा था और वही मारने गया था। लेकिन स्थानीय लोगों और तथ्यों ने इन दावों को खारिज कर दिया।

इसके बाद फोकस पूरी तरह बदल दिया गया। तरुण के लिए न्याय की माँग कर रहे हिंदुओं के गुस्से को ही सवालों के घेरे में लाया गया। हिंदू संगठनों के प्रदर्शन को साजिश और हिंसा से जोड़ने की कोशिश की गई जबकि हत्या के मुद्दे को पीछे धकेला गया। यह पूरा मामला अब केवल एक हत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह उस नैरेटिव की लड़ाई का उदाहरण बन गया है जिसमें घटना से ज्यादा उसकी कहानी को प्रभावित करने की कोशिश होती है।

हिंदुओं को ‘अपराधी बनाने’ की सिस्टेमेटिक कोशिश

इस हिंसा में लेफ्ट-लिबरल गिरोह ने तरुण के लिए न्याय की माँग करना तो छोड़िए, हिंदुओं को ही अपराधी बताने की सिस्टेमेटिक कोशिशें शुरू कर दी। सबसे पहले ‘अस्वीकार’- इस गिरोह और इससे जुड़े पत्रकारों ने सबसे पहले इस घटना को सही रूप में दिखाने के बजाय इसे मामूली झगड़े को तौर पर पेश करनी कोशिश की। ऐसा दिखाया गया है कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को मारा और उनमें एक आदमी ‘गलती’ से मर गया। यह दिखानी कोशिश की गई कि स्थानीय झगड़े को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी आपको कई ऐसे वीडियो दिखेंगे, जिसमें यह बताने की कोशिश की गई कि यह स्थानीय लोगों का झगड़ा था। हालाँकि, तथ्य सामने थे तो यहाँ इस गिरोह की दाल नहीं गली।

इसके बाद यह कोशिश शुरू की गई कि तरुण पर ही इल्जाम लगा दिया जाए। सोशल मीडिया पर दावे वायरल होने लगे कि तरुण ही छेड़छाड़ कर रहा था और वही इन कट्टरपंथियों को मारने गया था लेकिन ये दावे भी नहीं टिके और पड़ोसियों और अन्य लोगों ने इस गिरोह का यह प्रोपेगेंडा भी फेल कर दिया।

इसके बाद एक और कोशिश शुरू की गई, इस बार निशाने पर तरुण की जगह पूरा हिंदू समाज था। इस हत्या के बाद हिंदू समुदाय ने तरुण कुमार की हत्या के लिए न्याय की माँग की। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठनों ने खुलेआम प्रदर्शन का ऐलान किया जिसके बाद भारी संख्या में न्याय की माँग के लिए लोग सड़कों पर उतर गए। लोग सड़कों पर उतरे तो उनमें से कई आक्रोशित भी थे और इसी आक्रोश की आड़ में हत्या को ढकने की साजिश शुरू कर दी गई। बताया जाना लगा कि तरुण की हत्या तो मामूली बात है असल दिक्कत हिंदुओं से ही है।

कॉन्ग्रेस के नेता भी इसी प्रोपेगेंडा को हवा देने लगे, पवन खेड़ा जैसे वरिष्ठ नेता तक यह दावा करने लगे कि तरुण की हत्या तो महज दो लोगों का झगड़ा थी, लेकिन RSS-BJP ने इस मामले को उग्र कर दिया। यानी हिंदू अगर न्याय माँगते हुए आक्रोशित भी हो जाएँ तो यह हिंदुओं के लिए गुनाह है। हत्या भी उन्हीं की होगी, आरोप भी उनपर लगेगा और अंत में अगर संभलकर नहीं बोले तो अपराधी भी वही ठहरा दिए जाएँगे।

यह पैटर्न कोई अभी का नहीं है। इसी दिल्ली में 2020 के दंगों को देखिए, शरजील इमाम जैसे लोगों के भड़काऊ भाषण दिए पैटर्न के तहत रोड ब्लॉक की गईं, जिसे जाँच में साजिश करार दिया गया। लेकिन यह गिरोह अंकित शर्मा की हत्या को छिपाकर इस मामले में सिर्फ इस पीड़ित को दिखाता है और वो है शरजील इमाम। उदयपुर में कन्हैयालाल की निर्मम हत्या को आइसोलेटेड घटना बताकर हिंदू एकजुटता पर ही सवाल उठा दिए गए। केरल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लव जिहाद के सैकड़ों मामले सामने आने के बावजूद इन्हें मिथ करार दिया जाता रहा है।

विरोध प्रदर्शनों का पैटर्न: हिंदुओं की उदारता ही उनका अपराध है?

हिंदू समाज को हमेशा से सहिष्णु और उदार माना जाता है। यह समाज अलग-अलग मतों को स्वीकार करता है और इसी से जुड़कर भी रहता है। लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि ज्यादा सहन करना कमजोरी समझ लिया जाता है। हिंदुओं की ‘उदारता’ ही उनका ‘अपराध’ बन जाती है। इसे प्रदर्शनों के पैटर्न के जरिए भी समझा जा सकता है। हिंदू संगठनों के प्रदर्शन का पैटर्न भी आम तौर पर यही रहता है कि लोग प्रदर्शन के लिए लोगों को बुलाने का आह्वान करते हैं, अपनी माँगों के लिए सड़कों पर उतरते हैं, पुलिस-प्रशासन तक अपनी बात पहुँचाते हैं और फिर न्याय का इंतजार करते हैं। यही दिल्ली में भी हुआ। इसे के लिए हिंदुओं को अपराधी बनाया जा रहा है।

अब दूसरी तरफ कट्टरपंथियों के इस प्रदर्शन के पैटर्न को देखिए। कई बार तो किसी को भनक तक नहीं लगती कि यहाँ कोई प्रदर्शन होने वाला है। ना कोई सार्वजनिक पोस्टर, ना सोशल मीडिया पर चर्चा। बस गुप्त बैठकें होती हैं, बंद कमरों में प्लानिंग होती है, वॉट्सऐपर पर कोडेड मेसेज चलते हैं और अचानक दंगा भड़क जाता है, हिंसा शुरू हो जाती है और सड़कों पर पत्थरबाजी देखने को मिलती है।

2020 दिल्ली दंगे इसका सबसे खतरनाक उदाहरण हैं। दिखावे के लिए महीनों तक ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन चल रहे थे लेकिन असली खेल पर्दे के पीछे खेला जा रहा था। दिल्ली में देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया और दर्जनों हिंदू मारे गए। इसके अलावा आगजनी और मंदिरों पर हमले की घटनाएँ भी हुई। मुस्लिमों की घरों से पत्थरबाजी की गई तो जाहिर है कि ये पत्थर एक दिन में नहीं इकट्ठा हुए होंगे। यह साजिश लंबे समय से रची जा रही थी। ताहिर हुसैन की छत पर बाहुबली गुलेल और पेट्रोल बम जैसी चीजें मिलीं जो हिंसक प्रदर्शनों के सुनियोजित होने पर सवाल उठा रही थीं।

उत्तर प्रदेश के बरेली में सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के बाद ‘आई लव मोहम्मद‘ को लेकर हुई हिंसा भी इसी तरह का उदाहरण है। लोगों को जो आम विरोध प्रदर्शन लग रहा था, वो अचानक हिंसक हो गया और पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। जाँच में पता चला कि यह आम या विरोध भी पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया जा रहा था।

बरेली में कुछ लोग इस्लामिया मैदान में जाने की जिद कर रहे थे और पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी तो कट्टरपंथियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इस दंगे के लिए करीब 5000 उपद्रवियों की फौज तैयार की गई थी। ये उपद्रवी शहर की 390 मस्जिदों में ठहराए गए थे और उनके पास पहले से ईंट, पत्थर और पेट्रोल बम जैसे हथियार मौजूद थे। अगर ये कट्टरपंथी अपनी इस साजिश में सफल हो जाते तो शायद सैकड़ों लोगों की जान जाती लेकिन पुलिस ने इन्हें काबू कर लिया।

राम नवमी, हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक जुलूसों के कार्यक्रमों पर हमलों की खबरें हम सब सुनते हैं। अचानक मस्जिदों और घरों की छतों से पत्थरबाजी होने लगती है, ऐसी दर्जनों घटनाएँ हैं। बीते दिनों शिवाजी महाराज की जयंती के मौके जुलूस पर हमला हुआ और मस्जिद से पत्थरबाजी की गई।

अब पत्थरबाजी के लिए ये पत्थर कैसे और क्यों इकट्ठा होते होंगे ये सवाल ही इन प्रदर्शनों की आड़ में होने वाली साजिश का सबसे बड़ा जवाब है। इन पैटर्न से आपको अंदाजा होगा कि दिल्ली के जिन हिंदुओं को अपराधी बताया जा रहा है वो असल में सिर्फ अपने बेटे-भाई को होने से ही पीड़ित नहीं है बल्कि वो उस प्रोपेगेंडाबाज गिरोह से भी पीड़िता है जो उनकी आवाज तक उठाने पर उन्हें अपराधी घोषित कर देता है।

तरुण पर चुप्पी, रिजवान के लिए दर्द?

इस घटना में वामपंथी प्रोपेगेंडाबाजों ने तरुण की हत्या से ध्यान हटाने के लिए ‘रिजवान कहाँ है‘ का नैरेटिव भी चलाया था। इस घिनौने नैरेटिव को हवा देने में तथाकथित सेकुलर और पत्रकारिता का चोला पहनने वाले लोग खुलकर सामने आ गए। आरजे सायमा से लेकर जहीर इकबाल की पत्नी सोनाक्षी सिन्हा और वारिस पठान समेत कई इस्लामी कट्टरपंथी इन्फ्लुएंसर्स ने यह प्रोपेगेंडा फैलाया था। लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनके इस प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी।

इसका मकसद बिल्कुल साफ था कि तरुण की हत्या वाले मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका दिया जाए। यह धारणा बना दी जाए कि इस घटना में सिर्फ हिंदू परिवार ही नहीं बल्कि मुस्लिम परिवार ने भी अपना बच्चा खो दिया है। पुलिस को बार-बार टैग करके इसे गंभीरता का रंग देने की रणनीति अपनाई गई ताकि आम आदमी सोचे कि शायद पुलिस कुछ छुपा रही है। लेकिन सच सामने आया तो इन सब प्रोपेगेंडाबाजों की पोल खुल गई।

हिंदुओं के लिए सच को पहचानने का समय

तरुण की हत्या के अपराध को छिपाने के लिए उस अपराध पर खड़ा किया गया दोहरा नैरेटिव भी कम अपराध नहीं है। न्याय माँगने वालों को ही साजिशकर्ता या हिंसक बता देना असल में पूरे देश में एक डर का माहौल खड़ा करने की साजिश है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है बल्कि यह इस गिरोह द्वारा हिंदू विरोध की धारणा बनाने की प्रक्रिया है।

यह गिरोह बस यही तय करता है कि कैसे अपने पर हुए अपराध के बाद भी हिंदुओं को आक्रामक और अपराधी की तरह दिखाया जाए जबकि दूसरे पक्ष को बेबस और पीड़ित की तरह पेश किया जाए। यह वक्त इस पूरे नैरेटिव को चुनौती देने का है। क्योंकि अगर आज भी हम यह नहीं समझ पाए कि हमारे सामने जो परोसा जा रहा है वो पूरी सच्चाई नहीं है तो आने वाले समय में हर घटना इसी तरह किसी एजेंडे की भेंट चढ़ाया जाता रहेगा। तब न कोई तरुण याद रहेगा, न उसकी हत्या केवल इस गिरोह के द्वारा बनाई एक कहानी बची रहेगी जिसे बार-बार दोहराकर सच साबित किया जाएगा।

नजरिया: ‘विक्टिम’ को ‘विलेन’ बनाने का खतरनाक इकोसिस्टम

उत्तम नगर के तरुण हत्याकांड ने एक बार फिर उस ‘नैरेटिव वॉर’ को सतह पर ला दिया है, जहाँ अपराधी के मजहब को ढाल बनाने के लिए पीड़ित के अस्तित्व को ही मिटाने की कोशिश की जाती है। यह महज एक स्थानीय झगड़ा या गुब्बारे से शुरू हुई हिंसा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी ‘मनोवैज्ञानिक युद्धनीति’ का हिस्सा है।

दिल्ली से लेकर बरेली तक, पैटर्न एक ही है। जहाँ एक पक्ष की ‘सुनियोजित हिंसा’ को ‘हताशा’ बताकर डिफेंड किया जाता है, वहीं दूसरे पक्ष की ‘प्रतिक्रिया’ को ‘आतंक’ करार दिया जाता है। सनातन समाज को यह समझना होगा कि यह लड़ाई केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि मोबाइल की स्क्रीन और अखबारों की सुर्खियों में लड़ी जा रही है।

अगर आज तरुण के लिए न्याय की माँग को ‘गुंडागर्दी’ मानकर हिंदू पीछे हटा, तो कल हर घर का दरवाजा इसी कट्टरता की दस्तक सुनेगा। यह ‘ग्लानि’ से बाहर निकलकर ‘सत्य’ को पहचानने और संगठित होने का समय है, क्योंकि नैरेटिव की इस जंग में चुप रहना ही पराजय स्वीकार करना है।

महात्मा गाँधी की Expensive Poverty


 अंग्रेजी में एक शब्द है– "एक्सपेंसिव पावर्टी"

इसका मतलब होता है "महंगी- गरीबी" अर्थात... गरीब दिखने के लिए आपको बहुत खर्चा करना पड़ता है।
गांधीजी की गरीबी ऐसी ही थी।
एक बार सरोजनी नायडू ने उनको मज़ाक में कहा भी था कि “आप को गरीब रखना हमें बहुत महंगा पड़ता है।”
ऐसा क्यों ?......
गांधी जी जब भी तीसरे दर्जे में रेल सफर करते थे तो वह सामान्य तीसरा दर्जा नहीं होता था।
अंग्रेज नहीं चाहते थे की गांधी जी की खराब हालातों में, भीड़ में यात्रा करती हुई तस्वीरें अखबारों में छपे उनको पीड़ित (विक्टिम) कार्ड का लाभ मिले।
इसलिए जब भी वह रेल यात्रा करते थे तो उनको विशेष ट्रेन दी जाती थी जिसमें कुल 3 डिब्बे होते थे..... जो केवल गांधी जी और उनके साथियों के लिए होते थे,क्योंकि हर स्टेशन पर लोग उनसे मिलने आते थे। इस सब का खर्चा बाद में गांधीजी के ट्रस्ट की ओर से अंग्रेज सरकार को दे दिया जाता था।
इसीलिए एक बार मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था की.... “जितने पैसो में मैं प्रथम श्रेणी यात्रा करता हूँ उस से कई गुना में गांधीजी तृतीय श्रेणी की यात्रा करते हैं।”
गांधीजी ने प्रण लिया था कि वे केवल बकरी का दूध पिएंगे।
बकरी का दूध आज भी महंगा मिलता है, तब भी महंगा ही था... अपने आश्रम में तो बकरी पाल सकते थे,पर गांधी जी तो बहुत घूमते थे। ज़रूरी नही की हर जगह बकरी का दूध आसानी से मिलता ही हो।
इस बात का वर्णन स्वयं गांधीजी की पुस्तकों में है,कैसे लंदन में बकरी का दूध ढूंढा जाता था,महंगे दामों में खरीदा जाता था क्योंकि गांधी जी गरीब थे,वो सिर्फ बकरी का दूध ही पीते थे...😊
ये बात अलग है कि खुशवंत सिंह ने अपनी किताब में लिखा है कि... गांधी जी ने दूध के लिए जो बकरियां पाली थी,उनको नित्य साबुन से नहलाया जाता था, उनको प्रोटीन खिलाया जाता था उनपर 20 रुपये प्रतिदिन का खर्च होता था।
90 साल पहले 20 रुपये मतलब आज हज़ारों रुपये... बाकी खर्च का तो ऐसा है कि गांधीजी अपने साथ एक दान पात्र रखते थे जिसमें वह सभी से कुछ न कुछ धनराशि डालने का अनुरोध करते थे। इसके अलावा कई उद्योगपति, उनके मित्र उनको चंदा देते थे। उनका एक न्यास(ट्रस्ट)था जो गांधी के नाम पर चंदा एकत्र करता था।
उनके 75 वें जन्मदिन पर 75 लाख रुपए का चंदा जमा करने का लक्ष्य था, पर एक करोड़ से ज्यादा जमा हुए। सोने के भाव के हिसाब से तुलना करें तो आज के 650 करोड़ रुपये हुए।
गांधी उतने गरीब भी नहीं थे, जितना हमको घुट्टी पिला पिलाकर रटाया गया है।(LBBhuva की वॉल से)

मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक 8931 दिन सबसे आगे मोदी… बनाया सबसे लंबे समय तक सरकार का प्रमुख रहने का रिकॉर्ड


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (22 मार्च 2026) को भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वे देश में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले सरकार के प्रमुख बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में 8,930 दिनों तक पद सँभाला था।

अब पीएम मोदी 8,931 दिनों के साथ इस सूची में शीर्ष पर पहुँच गए हैं। उनके इस कार्यकाल में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बिताया गया समय और प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल दोनों शामिल हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके लंबे राजनीतिक करियर को दर्शाती है बल्कि देश की राजनीति में उनकी निरंतर पकड़ और प्रभाव को भी उजागर करती है।

नरेंद्र मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी और 2014 तक इस पद पर बने रहे। इसके बाद वे देश के प्रधानमंत्री बने और लगातार तीन लोकसभा चुनाव 2014, 2019 और 2024 में अपनी पार्टी को जीत दिलाई। अपने राजनीतिक सफर में मोदी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं।

 वे गुजरात के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं और साथ ही ऐसे प्रधानमंत्री भी हैं जिनके पास मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा अनुभव रहा है। वे स्वतंत्र भारत के बाद जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री भी हैं। इसके अलावा  वे ऐसे पहले गैर-कॉन्ग्रेसी नेता हैं जिन्होंने केंद्र में लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने PM मोदी की इस उपलब्धि पर कहा कि यह सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने X पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी जी के 8,931 दिनों का सार्वजनिक जीवन देश को सबसे ऊपर रखने वाली सोच, ईमानदार कार्यशैली और हर नागरिक की सेवा के प्रति उनकी निरंतर मेहनत को दिखाता है। यह एक ऐसी विरासत है जो विश्वास और सेवा के दम पर बनी है।”

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की दशकों की सेवा ने एक नए युग की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, “इस नए भारत के निर्माण के लिए पूरी जिंदगी की मेहनत लगी है, और प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे पूरा किया। पिछले 24 सालों से बिना छुट्टी लिए देश की सेवा करना उनके समर्पण को दर्शाता है।”

X पर सक्रिय ट्रोल पर हुई कार्रवाई तो भड़क गई कांग्रेस, मोदी सरकार को बनाने लगे निशाना: इन हैंडल्स से फैलाया जा रहा था एंटी इंडिया प्रोपगैंडा

सुप्रिया श्रीनेत ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस (साभार: X_SupriyaShrinate)

केंद्र सरकार ने IT एक्ट की धारा 69ए का इस्तेमाल करते हुए बुधवार (18 मार्च 2026) को कई ऐसे एक्स हैंडल्स पर कार्रवाई की है, जिनके माध्यम से सोशल मीडिया पर एंटी-इंडिया प्रोपगैंडा फैलाया जा रहा था। ये एक्स हैंडल अधिककर विपक्षी पार्टियों और उसके इकोसिस्टम से जुड़े थे, जिन्हें भारत में अब ‘Withheld’ कर दिया गया है। इस कार्रवाई का मकसद ऐसे कटेंट का प्रसार रोकना है, जो समाज में अव्यवस्था और देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।

इस घटना के तुरंत बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी छीनने का आरोप लगाते हुए अभियान शुरू कर दिया। दिल्ली में पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

श्रीनेत ने इस कदम को बढ़ती सेंसरशिप की संस्कृति बताया और केंद्र पर आरोप लगाया कि वो असहमति को दबा रही है डिजिटल चर्चा पर अपना कब्जा मजबूत कर रही है और अपनी नीतियों की आलोचना करने वालों पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र असहमति वाली आवाजों को चुप कराने का पैटर्न अपनाया है।

श्रीनेत ने कहा कि ऐसे कदम दरअसल नौकरशाहों को खुली जानकारी तक पहुँचने के फैसले पर पावर दे देते हैं। सुप्रिया ने कहा, “यह सिर्फ कहानी गढ़ने की बात नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी की आत्मा पर हमला है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार मुख्यधारा के मीडिया में दखल के बाद अब सोशल मीडिया की दुनिया में भी अपना दखल बढ़ा रही है।

श्रीनेत ने आगे लिखा, “जिन लोगों पर असर पड़ा है उनमें से कई कांग्रेस के साथ नहीं हैं। कुछ तो हमारी फैसलों की आलोचना भी करते हैं लेकिन हम उनके समर्थन में आवाज उठाते हैं। हमने राहुल गाँधी से सीखा है कि किसी भी अन्याय का सामना करने वाले का साथ दें चाहे वो हमारे खिलाफ रहे हों और वो हमारे आधिकारिक सिस्टम का हिस्सा न हों बावजूद इसके कि भाजपा और उसके ट्रोल्स क्या कहते हैं।”

श्रीनेत यहीं नहीं रुकी, बल्कि कहा कि अकाउंट्स ब्लॉक करने से सवाल नहीं रुकेंगे। उन्होंने यह भी शिकायत की कि यह मुद्दा एक बड़ी समस्या का हिस्सा है और सरकार को बढ़ते संसदीय आर्थिक चुनौतियों और विदेश नीति की कमियों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया।

श्रीनेत ने इसी तरह के तर्कों वाला एक वीडियो भी अपलोड किया और बैन किए गए अकाउंट्स के समर्थन में ट्वीट किया जिसमें उन्होंने फैसले को ‘अस्वीकार्य’ बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘कायर’ कहा।

दिलचस्प बात यह है कि यह पुरानी बड़ी पार्टी असहमति कुचलने का लंबा इतिहास रखती है और अक्सर अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करती रही है। फिर भी वह इन लोगों के पीछे खड़ी हो गई है न कि ऊँचे आदर्शों की सच्ची चिंता से बल्कि इसलिए कि वे विपक्ष की कहानी फैलाते हैं। बेशक यह उनके खिलाफ कार्रवाई का एकमात्र कारण नहीं हो सकता क्योंकि उनकी ऑनलाइन गतिविधियों में काफी कुछ शामिल है।

फेक न्यूज फैलाने में माहिर हैं ये अकाउंट

नेहर_हू 2 लाख 42 हजार 300 फॉलोअर्स वाला एक पॉपुलर अकाउंट है जो इस्लामो-लिबरल गुट का है जिस पर रोक लगी है। इसने बार-बार न सिर्फ झूठी खबरें फैलाईं बल्कि नस्लवाद दिखाया और भारतीय सेना पर आरोप लगाए। उसने न्यायपालिका की भी निंदा की क्योंकि उसने मशहूर जिम मालिक ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार को सुरक्षा नहीं दी जो पहलगाम आतंकी हमले के शिकारों का मजाक उड़ा रहा था और कह रहा था ‘केवल भारत में हीरो को विलेन बना दिया जाता है।’

उसने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का भाषण शेयर किया जिसमें ब्रिटेन की विविधता का जश्न था और कहा कि ‘भारत में ठीक उलटा है’ देश की निंदा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा भले ही झूठ बोलकर। यह अकाउंट ‘अल्पसंख्यक खतरे में’ वाली बनाई गई कहानियाँ फैलाने में सबसे आगे रहा जबकि हिंदुओं पर हमलों को साफ कर दिया या उनके नरसंहार का मजाक उड़ाया।

साल 2024 में उसने ओपइंडिया के हिंदूफोबिया ट्रैकर का हवाला देकर कहा कि कश्मीर में हिंदू उत्तर प्रदेश से ज्यादा सुरक्षित हैं ताकि अपनी आश्चर्यजनक अपमानजनक और असंवेदनशील सोच दिखा सके। वह कश्मीरी पंडितों के जिहादियों के कारण पलायन को जानता है लेकिन फिर भी उनके दर्द का मजाक उड़ाता है।

इसी महीने अमेरिका के भारत राजदूत सर्जियो गोर और इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर सैमुअल जे पापारो भारत की वेस्टर्न आर्मी कमांड के चंडीगढ़ मुख्यालय गए। बातचीत पश्चिमी थिएटर की गंभीर सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित थी जो पाकिस्तान से सैन्य गतिरोध और दुश्मनी के कारण महत्वपूर्ण है।

लेकिन इस मीटिंग का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी को समझौता करने का आरोप लगाने के लिए किया गया जो कांग्रेस पार्टी अक्सर लगाती है और इससे रक्षा बलों की ईमानदारी पर सवाल उठाए गए।

नेहर_हू ने बिहार के लोगों पर उनके वोटिंग चॉइस के लिए नस्लवादी हमला किया और कहा ‘टॉयलेट में माइग्रेशन का मजा लो अगले 5 साल’ मेहनतकश मजदूर वर्ग का अपमान करने के लिए सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने उसकी पसंदीदा पार्टियों को वोट नहीं दिया।

“उत्तर प्रदेश और बिहार से लाखों प्रवासी त्योहार पर घर जाने के लिए भयानक तकलीफ झेलते हैं। कुछ तो मर भी जाते हैं” उसने 2024 में इसी तरह कहा और उन्हें केसरिया पार्टी को सपोर्ट करने के लिए कोसा और आरोप लगाया कि उसकी सरकार ने वंदे भारत अमीरों के लिए शुरू किया। उसने इसमें ‘जैसा बोया वैसा काटा’ जैसे तंज भी खुशी खुशी जोड़े। इस आदमी ने लगातार राज्य और उसके रहने वालों को स्वच्छता और दूसरी चीजों पर नीचा दिखाया है।

एक महिला ने बताया कि उसने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में समाजवादी पार्टी को वोट दिया था लेकिन उसे भाजपा का स्लिप मिल गया। हालाँकि उसने ये भी कहा कि मेरे साथ छोटा बच्चा था वोटिंग के समय जिस वजह से गलत बटन दब गया और मुझे ईवीएम से कोई समस्या नहीं है।” लेकिन उसकी झूठी बात का इस्तेमाल करके उसने भारत के चुनाव आयोग की निंदा की।

उसने और अल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने पत्रकार निशा पाल को निशाना बनाने की कोशिश की क्योंकि उन्होंने पहलगाम आतंकी घटना ऑपरेशन सिंदूर और इजराइल-हमास युद्ध के बारे में कुछ मुस्लिम बच्चों से सवाल पूछे थे।

उसने एक वीडियो भी अपलोड किया जिसमें कथित पाकिस्तानी आदमी भारतीय क्रिकेट टीम की जीत का जश्न मना रहा था और कह रहा था कि इस्लामिक रिपब्लिक भारत से बेहतर देश है जबकि अपने देश के खिलाफ आतंकवाद समेत सभी बड़े अपराधों को नजरअंदाज कर रहा था।

मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी के रूप में छिपा एंटी इंडिया प्रोपगैंडा

डॉ निमो यादव 2.0 एक और प्रमुख अकाउंट जो भारत में बैन हो गया है उसने दो केंद्रीय मंत्रियों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जोड़ने तक की हद पार कर दी। उसने कहा, “क्या यह सच है कि एन सीतारमण का ऑफिस और राजीव चंद्रशेखर ट्विटर पर उस व्यक्ति को फॉलो कर रहे थे जो भारत में आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा था।” इसने इन नेताओं की जाँच NIA से कराने की डिमांड तक रख डाली।

इस बीच जिन पार्टियों को ये लोग सपोर्ट करते हैं वे वोट बैंक के लिए माफिया और गैंगस्टरों को बढ़ावा दे रही हैं और अपनी एजेंडा थोपने के लिए मानवीय सीमाओं को पार कर रही हैं। उसने भारतीय सेना के अधिकारियों के दिखने पर मजाक भी किया और कहा, “यह तब होता है जब मिड-डे मील में अंडे बैन कर दो।” इस तरह से वो वर्दीधारी सैनिकों का सम्मान करता है, जिन्होंने युद्धक्षेत्र में पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मनों से लड़ते हुए अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया।

इन हैंडल्स पर निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी पर मजा लिया जो खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के असफल हत्या षड्यंत्र में शामिल था और चाहा कि उसकी कहानी धुरंधर 2 में दिखाई जाए, जिसमें आर माधवन भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का रोल करते हैं। यह भारतीय खुफिया एजेंसियों का मजाक उड़ाने का उसका दयनीय प्रयास था।

डॉ निमो यादव 2.0 ने एक और पोस्ट में दावा किया कि ‘भारत के लिए चीजें अच्छी नहीं लग रही’ क्योंकि ‘रूस ने पाकिस्तान को सस्ते दाम पर कच्चा तेल ऑफर किया’ जिसे उसने सरकार की बड़ी असफलता बताया। दूसरी तरफ भारत रूस से बहुत सस्ते दाम पर तेल खरीद रहा है खासकर 2022 में अमेरिका की धमकियों और टैरिफ के बावजूद।

वह जानता है कि रूस का पाकिस्तान को ऑफर भारत की इजराइल से निकटता की तरह दोनों देशों के रिश्तों में बाधा नहीं डालता फिर भी उसने अपनी प्रचार से मुँह नहीं मोड़ा।

अलग-अलग अकाउंट्स लेकिन काम एक जैसा

इसी तरह की पाबंदी मनीष आरजे के अकाउंट पर भी लगी है। उसने दावा किया था कि बिहारी वोटरों ने अपनी आत्मा 10 हजार में बेच दी क्योंकि उन्होंने भाजपा को सपोर्ट किया। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया इस गुट को तभी स्वीकार्य लगती है जब उनकी पसंदीदा पार्टियाँ जीतती हैं।

उसने भी बाकियों की तरह झूठी जानकारी फैलाने से खुद को नहीं रोका और इजराइल को ‘फादरलैंड’ कहा गलत तरीके से प्रधानमंत्री मोदी को इसका श्रेय देते हुए जबकि मोदी ने भारतीय यहूदियों के बारे में कहा था कि वे पश्चिम एशिया के उस देश को अपना पिता मानते हैं जबकि भारत को मातृभूमि।

आरजे ने कोलकाता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई भयानक बलात्कार और हत्या की घटना में पीड़िता की माँ को भी अपनी छोटी राजनीति में घसीट लिया और आरोप लगाया कि न्याय की उनकी गुहार दरअसल भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा से थी। उसने शोक संतप्त महिला की बेइज्जती की, जबकि उसे सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार से जवाब माँगना चाहिए था।

उसने लगातार उन पोस्ट्स को रीट्वीट किया जो भू-राजनीतिक संकट से भारतीयों पर पड़ने वाले नुकसान का मजाक उड़ाती हैं।

‘एक्टिविस्ट और सोशल वर्कर’ संदीप सिंह लिस्ट में एक और नाम है जो कांग्रेस का खासकर हरियाणा यूनिट का खुलकर समर्थन कर रहा है कई पोस्ट्स के जरिए जो श्रीनेत के दावे का खंडन करता है कि ये अकाउंट उनकी पार्टी को सपोर्ट नहीं करते।

इसके अलावा वह भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध चाहता है जैसा कि हालिया विवादित रिपोर्ट में अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने कहा है धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर और भेदभाव रोकने के लिए। रिपोर्ट ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग पर टारगेटेड सैंक्शंस की भी सिफारिश की।

डॉ रंजन जिनके अकाउंट का भी यही हाल हुआ। उसने एक कार्यक्रम का वीडियो पोस्ट किया और गलत दावा किया कि मोदी सरकार के प्रभाव में भारतीय मीडिया नागरिकों से संकट और आपदाएँ छिपा रही है। उसका साफ मकसद है लोगों में डर पैदा करना और सरकार के खिलाफ नफरत भड़काना, बिना देश पर पड़ने वाले असर को सोचे।

उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को भी तोड़ मरोड़ कर पोस्ट किया और जातीय विभाजन पैदा करने की कोशिश की।

कुछ लोगों ने घटना के बाद अपने ट्वीट्स लॉक कर लिए जिससे कई सवाल उठे।

ये वही लोग हैं, जो हिंदू एक्टिविस्ट विजय पटेल के अकाउंट सस्पेंड होने पर खुश थे और मालाबार गोल्ड चाहता था कि उन्हें जेल भेजा जाए क्योंकि उन्होंने उनके पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर्स को हायर करने की आलोचना की थी जो ऑपरेशन सिंदूर की निंदा कर रहे थे। वे ‘सेंसरशिप’ का मजा लेते हैं जब तक वो उनके विरोधियों पर अन्यायपूर्ण तरीके से लगे। पाखंड और दोहरे मापदंड वाकई हैरान करने वाले हैं।

अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अमित शाह ने कांग्रेस को उसके एडिटेड वीडियो का इस्तेमाल करने के लिए फटकार लगाई जिसमें आरोप था कि भाजपा की सत्ता आने पर आरक्षण खत्म हो जाएगा। यह वीडियो कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन और उनके पूरे नेटवर्क द्वारा असली बताकर फैलाया गया था। इस तरह नुकसान पहुँचाने के इरादे से गलत सूचना फैलाने को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ठीक वैसे ही देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी जो ऐसी तकनीकें इस्तेमाल करती रही है उसके इन अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई के बाद नाराज होना आश्चर्य की बात नहीं है।

पाकिस्तान में फिर अज्ञात हमलावरों ने ईद की नमाज के बाद निपटाया आतंकी बिलाल सलाफी: मुरिदके में लश्कर के गढ़ ‘मरकज तैयबा’ में घुसकर वार

                                                     आतंकी बिलाल आरिफ सलाफी
पाकिस्तान के मुरिदके से लश्कर-ए-तैयबा के लिए डराने वाली खबर सामने आई है। इस खबर ने ना केवल आतंकी संगठन बल्कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है। दरअसल, ईद के दिन आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकाने ‘मरकज तैयबा’ के अंदर घुसकर अज्ञात हमलावरों ने खूंखार कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि यह घटना ईद की नमाज के तुरंत बाद हुई। जैसे ही नमाज खत्म हुई, हमलावर ने मौके पर मौजूद बिलाल आरिफ सलाफी को निशाना बनाया। पहले उस पर गोलियाँ चलाई गईं और फिर यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह बच न सके, उस पर चाकू से कई वार किए गए। हमलावर तब तक नहीं रुका जब तक उसने बिलाल की मौत की पूरी पुष्टि नहीं कर ली।

सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद के कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें बिलाल जमीन पर पड़ा दिख रहा है और लोग उसकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

मरकज तैयबा को लश्कर-ए-तैयबा का हाई-सिक्योरिटी हेडक्वार्टर माना जाता है जहाँ बाहरी व्यक्ति का प्रवेश लगभग असंभव बताया जाता है। शुरुआती आशंका यह जताई जा रही है कि हमलावर पहले से ही नमाज के दौरान अंदर मौजूद था और उसने सही मौके का इंतजार किया। घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गया और अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर उसकी तलाश कर रही हैं।

कौन था बिलाल आरिफ सलाफी?

लश्कर-ए-तैयबा में बिलाल आरिफ सलाफी को एक अहम सदस्य माना जाता था। वह मुरिदके के सेंटर में नए लोगों को जोड़ने और उन्हें विचारधारा सिखाने का काम करता था। उसकी जिम्मेदारी युवाओं को पहचानकर उन्हें संगठन से जोड़ना और ट्रेनिंग की देखरेख करना थी। इसी वजह से वह संगठन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता था और मरकज तैयबा में उसकी मौजूदगी उसकी अहमियत दिखाने कि लिए काफी थी।

जज साहब, कोई भी SP और DM एड़ियां रगड़ कर बनता है, वो कॉलेजियम के पिछले दरवाजे से हाई कोर्ट के जज नहीं बनते

सुभाष चन्द्र

हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने संभल के SP और DM को बड़ी सरलता से कह दिया कि अगर rule of law enforce नहीं कर सकते तो या तो त्यागपत्र दे दो या अपना ट्रांसफर मांग लो 

सच्चाई है कि जजों की जुबान बेलगाम होती जा रही है कानून व्यवस्था कायम करना कोई मिठाई नहीं है जो किसी को पुलिस अधिकारी खिला दें आपने मुस्लिमों की मस्जिद में संख्या में संख्या सीमित करने का विरोध तो ऐसे कर दिया जैसे आप विपक्ष के लिए मुस्लिम वोटों का जुगाड़ कर रहे हो जबकि आप संभल का दंगों का इतिहास भूल गए आज हिंदू संभल में मात्र 20% बचे हैं और लगता है आप हिंदुओं का पूरी तरह सफाया चाहते हैं। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
मीलॉर्ड SP और DM एड़ियां रगड़ कर Competition पास करके बनते हैं वो कोई जज नहीं होते जो कॉलेजियम के पिछले दरवाजे से न्यायपालिका में घुसे हो दोनों माननीय जज बार से इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज बने थे और बार से जज बनना अपने आप में पक्षपात दर्शाता है

एक नहीं अनेक बार मस्जिदों से तकरीरों के बाद दंगे भड़कते हैं कौन संभालता है तब कानून व्यवस्था को प्रशासन को मौके पर निर्णय लेने होते हैं कानून व्यवस्था किसी जज के चैंबर में बैठ कर आदेश देने से नहीं संभलती जजों को प्रशासन के काम में इतना ही शौक है टांग अड़ाने का तो संवेदनशील मस्जिदों के नमाज के बाद पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर खड़े हुआ करें और अगर दंगा हो तो उसे पुलिस साथ झेलने का साहस दिखाया करें

जिस कथित मस्जिद की बात पर उन्होंने अधिकारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा, वह  घर किसी मोहन सिंह और भूराज सिंह के नाम पर रजिस्टर है जिसे जबरन कब्ज़ा कर मस्जिद बनाया हुआ है और ऐसा कहते है गांव के दोनों समुदायों ने निर्णय लिया था कि 20 लोग नमाज पढ़ेंगे और बाहर के लोग उसमे शामिल नहीं होंगे 

पुलिसकर्मी दंगों की ड्यूटी दंगों में मरने की नहीं होती बरेली का मौलाना तौकीर रजा खुली धमकी देता था कि हमारे लोग सड़कों पर आ गए तो हिंदुओं को निकलने का रास्ता भी नहीं मिलेगा क्या आप उसे फूलों की माला पहनाएंगे?

एक समय था जब सुप्रीम कोर्ट कश्मीर में आतंकियों की गोली का जवाब गोली से भी देने पर रोक लगाता था और पैलेट गन भी चलाने से रोक लगा दी थी। प्लास्टिक की गोली चलाने के लिए कहते थे

कथित किसान आंदोलन में 26 जनवरी, 2021 से पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट से आंदोलन पर उस दिन बैन लगाने के लिए कहा था तो चीफ जस्टिस बोबडे ने भी 2 छटांक की जुबान हिला कर कह दिया था कि कानून व्यवस्था संभालना आपका काम है और नतीजा लाल किले पर सबने देखा बोबडे साहब पुलिस कमिश्नर की टीम के साथ खड़ा होने की हिम्मत दिखाते तो बात थी लेकिन एक आदत बन चुकी है कि सारा दोष पुलिस के मत्थे मढ़ दिया जाए

2020 के सुनियोजित दंगों और 26 जनवरी 2021 के दिन अगर पुलिस ने संयम से काम न लिया होता तो कुछ भी अनहोनी हो सकती थी जैसा विपक्ष चाहता था

अगर योगी प्रशासन के अधिकारियों को जजों ने ऐसे ही जलील करना है तो जो चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में योगी जी और उनके प्रशासन की प्रशंसा की थी, वह वापस ले लेनी चाहिए वरना अपने जजों को नियंत्रित करना चाहिए जो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जलील न करें

जिस जल से होता था भगवान का अभिषेक, उसमें इस्लामी कट्टरपंथियों ने मीट खाकर फेंकी हड्डियाँ: महंत की शिकायत पर श्रावस्ती पुलिस ने जमाल-इरफान समेत 4 को किया गिरफ्तार

    श्रावस्ती के सोनपथरी आश्रम के पास नाले में इफ्तार पार्टी में परोसा मांस, अवशेष को नाले में फेंका (साभार: एक्स @@Sachingupta)
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ सोनपथरी आश्रम के पास स्थित एक पवित्र पहाड़ी जल के किनारे इफ्तार पार्टी कर गंदगी फैलाने के आरोप में पुलिस ने चार इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान जमाल अहमद, इरफान अहमद, इमरान अहमद उर्फ इम्मी और जहीर खान के रूप में हुई।

आरोप है कि कुछ मुस्लिम युवकों ने नाले के पास मांसाहारी भोजन किया और उसकी हड्डियाँ उसी पानी में फेंक दीं, जिसका उपयोग मंदिर के अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं के पीने के लिए किया जाता है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

मंदिर की पवित्रता से खिलवाड़: महंत का आरोप

सोनपथरी आश्रम के महंत हरिशरणानंद महाराज ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि यह पहाड़ी नाला आश्रम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र है। इसी जल का उपयोग मंदिर में मूर्तियों के अभिषेक, उनकी सफाई और भंडारे का भोजन बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यहाँ आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी नाले में स्नान करते हैं और इसका जल पीते भी हैं। पवित्र जल में हड्डियाँ फेंकने से मंदिर की शुचिता भंग हुई है।

साजिश के तहत धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश

महंत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि यह कृत्य अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और क्षेत्र का आपसी सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी, जिसे देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।

पुलिस की कार्रवाई: चार आरोपित भेजे गए जेल

सिरसिया थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। साक्ष्यों और वीडियो के आधार पर पुलिस ने चार मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की बारीकी से जाँच की जा रही है ताकि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके और उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।

ईरान से मोहब्बत है तो वहीं जाओ : पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का शिया मौलवियों को दो टूक : भड़के मौलवियों ने जिया-उल-हक के दौर से की तुलना

                                      ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ (फोटो साभार: न्यूज 18)
पाकिस्तान में गुरुवार (19 मार्च 2026) को हुई एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक के बाद शिया मौलवी, फौज के मुखिया आसिम मुनीर पर भड़के हुए हैं। रावलपिंडी स्थित फौज के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने शिया मौलवियों से बातचीत की। इस दौरान मुनीर ने मौलानाओं से कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी मोहब्बत है तो आप ईरान चले जाओ, मैं आपको बता दूँ कि जिन्ना एक शिया थे।”

शिया समुदाय ने मुनीर के इस लेक्चर को अपने अपमान के रूप में लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बैठक में एक दर्जन से अधिक शिया उलेमा शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत का माहौल शुरुआत से ही संतुलित नहीं रहा।

 शिया मौलवियों ने कहा कि आर्मी चीफ मुनीर ने लंबे समय तक केवल अपनी बात रखी और उलेमा को बीच में बोलने या अपनी बात विस्तार से रखने का मौका ही नहीं दिया गया। इससे बैठक धीरे-धीरे एकतरफा होती चली गई और कई मुद्दों पर असहमति उभरकर सामने आई।

शिया धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया और आरोप

शुक्रवार (20 मार्च 2026) को इस्लामाबाद में शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने खुलासा किया कि बैठक के दौरान असीम मुनीर का रवैया काफी सख्त और आपत्तिजनक था। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान फील्ड मार्शल ने शिया समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ।

नजफी ने बताया कि बैठक की शुरुआत में ही असीम मुनीर ने अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इस्लामाबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शनों पर नाराजगी जताई। उन्होंने खासतौर पर फौज की एक इमारत को जलाए जाने की घटना को अस्वीकार्य बताया।

नजफी के अनुसार, माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया तो उन्होंने खुद हस्तक्षेप करते हुए मुनीर को याद दिलाया कि पाकिस्तान की फौज में बड़ी संख्या में शिया अधिकारी भी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके मामा अमीर हयात को ‘सितारा-ए-जुर्रत’ से सम्मानित किया जा चुका है और उनके अन्य परिजन भी फौज में रह चुके हैं।

नजफी का कहना है कि इस पर असीम मुनीर का लहजा कुछ नरम पड़ा लेकिन इसके बाद उन्होंने फिर वही टिप्पणी दोहराई कि अगर शिया समुदाय को ईरान से इतना लगाव है, तो उन्हें वहाँ चले जाना चाहिए। इस पर नजफी ने गहरी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या कभी किसी शिया व्यक्ति ने इस्लामाबाद या कराची में किसी फौजी की हत्या की है?

उन्होंने यह भी कहा कि जिन तत्वों ने फौजियों के साथ बर्बरता की घटनाएँ कीं, क्या उनसे कभी यह कहा गया कि वे अफगानिस्तान चले जाएँ? लेकिन आज शिया समुदाय को इस तरह की बातें सुननी पड़ रही हैं। नजफी ने कहा कि असीम मुनीर ने बैठक में बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है। ऐसे में यदि ईरान सऊदी अरब पर हमला जारी रखता है तो पाकिस्तान को सऊदी की रक्षा के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।

जिया-उल-हक दौर से तुलना, शिया समुदाय के हालात पहले से ही खराब

शिया मौलवी सैयद जवाद नकवी ने पूरे घटनाक्रम की तुलना जिया-उल-हक के दौर से की। उनका कहना है कि उस समय की तरह अब भी एक खास सोच को थोपने का माहौल बनता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभक्ति की परिभाषा को सीमित किया जा रहा है और ईरान जैसे देशों से मजहबी या भावनात्मक जुड़ाव को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

पाकिस्तान में मजहबी अल्पसंख्यकों, खासकर शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय स्थिति चिंताजनक है। एक ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि ये समुदाय लगातार सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं और सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम रही है।

एथेंस स्थित संस्था डायरेक्टस के अनुसार, कट्टरपंथी संगठन ना केवल अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं बल्कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन एजेंसियों द्वारा होने वाले दुरुपयोग के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

रिपोर्ट में हाल ही में इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले का उल्लेख किया गया है जिसमें 36 लोगों की मौत और करीब 170 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान में शिया आबादी कुल आबाद की करीब 10-15% है और यह बहुसंख्यक सुन्नी समुदायों के निशाने पर रहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिया, हजारा, अहमदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, जिक्रि, सूफी और बरेलवी समुदाय न केवल हिंसा बल्कि भेदभावपूर्ण कानूनों और कमजोर कानूनी सुरक्षा का भी सामना कर रहे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के हवाले से यह भी कहा गया है कि कई मामलों में आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे हमलों को बढ़ावा मिल रहा है।

इंदिरा गांधी के खिलाफ निडर ऐतिहासिक फैसला देने वाले पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन


आज कांग्रेस और इसका गुलाम INDI गठबंधन देश को गुमराह करने कहता रहता ही कि बीजेपी और नरेंद्र मोदी संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करती, जबकि स्थिति एकदम विपरीत है। वैसे तो आजकल जो रहा है वही जनता की आंखें के लिए बहुत है। फिर भी पीछे पलट कर देखने पर मालूम होता है कि इन सबकी बौखलाहट की असली वजह यह है कि इनके कार्यकाल में संविधान से लेकर सभी संवैधानिक संस्थाओं को इन्होने अपने क़दमों में रखा हुआ था।    
इंदिरा गांधी के खिलाफ निडर ऐतिहासिक फैसला देने वाले पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि

वह 1975 में चर्चित उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण केस में दिये गये अपने ऐतिहासिक निर्णय के लिये प्रसिद्ध हैं जिसमें उन्होने तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गांधी के द्वारा जीते गए प्रधानमंत्री चुनाव को अवैध घोषित कर दिया और उन पर 6 वर्षो तक किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद ही पूरे भारत देश को नाजायज आपातकाल का सामना करना पड़ा था।

जगमोहन लाल सिन्हा द्वारा दिये गए इस फैसले को भारतीय लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था का सबसे निडर और मजबूत फैसला माना जाता है जिसमे पूरे लोकसभा चुनाव को गलत बताकर प्रधानमंत्री तक पर 6 सालो तक चुनाव ना लड़ने का फैसला सुना दिया गया था।

कहीं हिंदुओं की हत्या, कहीं बच्चियों का बलात्कार: 50+ घटनाओं से समझिए कितना ‘शांतिपूर्ण’ रहा 2026 का रमजान, इस्लामी मुल्क में कट्टरपंथियों ने मुस्लिमों को भी नहीं छोड़ा

                                                                                                          प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: AI)
रमजान को इस्लाम में सबसे पाक महीना माना जाता है। मुस्लिम दावा करते हैं कि यह माह इबादत, सब्र, जकात (दान) और सबसे बढ़कर आपसी दुश्मनी भुलाकर भाईचारे से रहने का है। लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा होता है-जब ‘शांति’ और ‘रहमतों’ का यह पाक महीना चल रहा होता है, तब हिंसा, संघर्ष और खून-खराबे की खबरों में मुस्लिमों की संलिप्ता क्यों सामने आती है?

एक तरफ तो मजहबी मंचो से संदेश दिया जाता है कि रमजान में सिर्फ सबाब के काम होने चाहिए वहीं दूसरी तरफ भड़काऊ बयानबाजियों से सोशल मीडिया भरा दिखता है। 2026 में भी यही सब हुआ। इस साल सिर्फ इस्लामी कट्टरपंथियों ने ही नहीं, बल्कि इस्लामी मुल्कों ने भी इस महीने का लिहाज नहीं किया। मात्र 30 दिनों में अनगिनत हत्या-लूटपाट-मारकाट-हिंसा-बलात्कार की घटनाएँ घटीं।

अब ऑपइंडिया उन्हीं घटनाओं में से 50 घटनाओं को आपके लिए सूचीबद्ध कर रहा है। इसमें दिल्ली में हुए तरुण की हत्या का केस भी शामिल है और अफगानिस्तान के अस्पताल में मारे गए 400 लोगों की जानकारी भी है। पढ़िए और निर्णय करिए कि रमजान के महीने को क्या वाकई इस्लामी कट्टरपंथी इबादत, सब्र और जकात का माह मानते हैं।

मिडिल ईस्ट: बारूद के ढेर पर रमजान और गहराता मानवीय संकट

रमजान के इस दौर में मिडिल ईस्ट के हालात बेहद नाजुक और तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषकर ईरान में सत्ता के शीर्ष स्तर पर मची उथल-पुथल और वहाँ हो रहे बड़े हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण सैन्य प्रहारों ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे देश के भीतर अस्थिरता का माहौल और गहरा गया है। हैरानी की बात यह है कि शांति के इस महीने में भी हिंसा का चक्र रुकने के बजाय तेज हो गया है।

ईरान ने इन हमलों के कुछ ही घंटों के भीतर आक्रामक रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की और क्षेत्र के कई देशों पर मिसाइलों व ड्रोनों से हमला बोल दिया। इस जवाबी कार्रवाई की जद में न केवल सैन्य प्रतिद्वंद्वी आए, बल्कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और कुवैत जैसे कई मुस्लिम बहुल देश भी शामिल थे। युद्ध और हमलों के इस दौर ने इस पवित्र महीने (रमजान) के दौरान क्षेत्र में एक गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है, जहाँ आपसी टकराव और सैन्य वर्चस्व की जंग इबादत के सुकून पर भारी पड़ती दिख रही है।

1. कुवैत में कोहराम: दूतावास पर हमला और ईरान का ‘रमजान ऑफेंसिव’

2 मार्च 2026 को कुवैत सिटी उस वक्त दहल गई जब ईरान के तथाकथित ‘रमजान ऑफेंसिव’ के तहत अमेरिकी दूतावास को सीधा निशाना बनाया गया। इस हमले में मिसाइलों और घातक ड्रोनों (UAV) का तालमेल बिठाकर आसमान से मौत बरसाई गई, जिससे शहर का आकाश काले धुएँ के गुबार से भर गया। हालाँकि कुवैत की रक्षा प्रणाली ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई ड्रोनों को हवा में ही ढेर कर दिया, लेकिन इसके बावजूद इस भीषण हमले ने एक व्यक्ति की जान ले ली और 32 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

किसी देश के राजनयिक मिशन (Diplomatic Mission) पर इस तरह का सीधा प्रहार न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाता है, बल्कि यह भी साफ करता है कि ईरान अब अपने पड़ोसी अरब देशों में हिंसा फैलाने से गुरेज नहीं कर रहा है। शांति के इस पवित्र महीने (रमजान) में की गई इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक खतरनाक युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया है।

2. तेल अवीव में कोहराम: रिहायशी इलाकों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों का कहर

1 मार्च 2026 को ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए बड़े पैमाने के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय संघर्ष की आग को और भड़का दिया है। हालाँकि इजरायल की ‘आयरन डोम’ रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन हमलों की भारी तादाद के कारण एक मिसाइल सुरक्षा घेरे को भेदते हुए सीधे ‘बीट शेमेश’ के रिहायशी इलाके में जा गिरी। इस भीषण धमाके ने पल भर में तबाही मचा दी, जिसमें 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कुल मृतकों का आँकड़ा 12 तक पहुँच गया।

इस हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 150 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। जिस तरह से मिसाइल रिहायशी इलाके में गिरी, वह साफ दर्शाता है कि निशाना सैन्य ठिकाने नहीं बल्कि निर्दोष आम नागरिक थे। रमजान जैसे पवित्र महीने में की गई यह हिंसक कार्रवाई न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि ईरान द्वारा किए जाने वाले मजहबी और शांति के दावों पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।

3. खाड़ी देशों में खौफ: ईरान का मिसाइल हमला और संप्रभुता पर चोट

28 फरवरी 2026 को खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख शहरों ‘अबू धाबी, दुबई और दोहा‘ पर ईरान ने एक साथ मिसाइलें दागकर पूरे इलाके को दहला दिया। ईरान के इस ‘मिसाइल ब्लिट्ज’ का निशाना न केवल अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे, बल्कि नागरिक और रिहायशी बुनियादी ढाँचों को भी जानबूझकर खतरे में डाला गया। इस हमले की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अबू धाबी में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दुबई के बुर्ज खलीफा जैसे व्यस्त इलाके के पास भी भीषण धमाकों की खबरें आईं।

इन हमलों के कारण पैदा हुए सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए पूरे मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र (Airspace) तुरंत बंद करना पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का पहिया थम गया और दुबई एयरपोर्ट पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह घटना स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है कि क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में ईरान अब अपने ही मुस्लिम पड़ोसी देशों की सुरक्षा और संप्रभुता को ताक पर रखने से भी पीछे नहीं हट रहा है।

सरहदों पर जंग: रमजान में पाकिस्तान-अफगानिस्तान का खूनी टकराव

दक्षिण एशिया में इस पवित्र महीने (रमजान) के दौरान भी शांति की उम्मीदें तब धराशायी हो गईं, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव ने एक भीषण सैन्य टकराव का रूप ले लिया। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर राजधानी काबुल, कंधार और कई अन्य इलाकों में जोरदार हवाई हमले किए। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने जानबूझकर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

इन हमलों की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि काबुल में एक अस्पताल भी इस बमबारी की चपेट में आ गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भीषण सैन्य कार्रवाई में अब तक लगभग 400 लोगों की जान जा चुकी है और 250 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। रमजान के पाक दिनों में अस्पतालों और रिहायशी इलाकों पर हुए इन हमलों ने न केवल मानवीय संकट को गहरा कर दिया है, बल्कि दो पड़ोसी मुस्लिम देशों के बीच की कड़वाहट को भी चरम पर पहुँचा दिया है।

4. कराची में कोहराम: ईरान समर्थित भीड़ का कोहराम और दूतावास पर हमला

ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की खबर के बाद पाकिस्तान के कराची में हिंसा की आग भड़क उठी, जिसने पूरे शहर को अराजकता की चपेट में ले लिया। 1 मार्च 2026 को ईरान समर्थक एक उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (Consulate) को निशाना बनाने की कोशिश की, जिससे हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिस चौकियों को आग के हवाले कर दिया, बल्कि कई सरकारी और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुँचाया।

हिंसा का यह सिलसिला केवल कराची तक ही सीमित नहीं रहा। स्कार्दू में भी उग्र भीड़ ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के दफ्तर में आग लगा दी। इन भीषण झड़पों और हिंसक वारदातों में अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 120 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पवित्र महीने (रमजान) के बीच हुई इस खूनी हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून के इकबाल पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

5. अफगानिस्तान के खोस्त और पक्तिका पर पाकिस्तानी हवाई हमले

28 फरवरी 2026 को पाकिस्तान एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा लांघकर खोस्त और पक्तिका प्रांतों में भीषण बमबारी की। पाकिस्तान ने इन हमलों को आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई बताया, लेकिन इसकी भारी कीमत निर्दोष लोगों को चुकानी पड़ी। इस सैन्य ऑपरेशन में कम से कम 8 आम नागरिकों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं।

इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है; अफगान तालिबान ने इसे अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार देते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। रमजान के इस पवित्र महीने में छिड़ी इस जंग ने सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिसके कारण हजारों परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर-बार छोड़कर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है।

6. रमजान की शुरुआत और सरहद पर मातम: नंगरहार-पक्तिका में पाकिस्तानी सैन्य प्रहार

रमजान के पवित्र महीने के शुरुआती दिनों में, जहाँ दुनिया शांति की उम्मीद कर रही थी, वहीं 22 फरवरी 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में एक और बड़ा सैन्य अभियान चलाकर तनाव को चरम पर पहुँचा दिया। पाकिस्तान ने इन हमलों को आतंकवाद के खिलाफ एक जरूरी कार्रवाई करार दिया, लेकिन इस सैन्य ऑपरेशन की भारी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ी।

इस भीषण हमले में 17 अफगान नागरिकों की जान चली गई, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से मौजूद कड़वाहट और ज्यादा बढ़ गई है। इबादत और बरकत के इन शुरुआती दिनों में हुई इस खूनी घटना ने शांति की तमाम उम्मीदों को तोड़ दिया है और सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

7. बागलकोट में बवाल: शिवाजी जयंती के जुलूस पर मस्जिद से पथराव

कर्नाटक के बागलकोट से सांप्रदायिक तनाव की एक भयावह घटना सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के उपसाक्ष्य में निकाले जा रहे गौरवशाली जुलूस को उस वक्त निशाना बनाया गया, जब वह ‘पंका मस्जिद’ के सामने से गुजर रहा था। आरोप है कि वहाँ मौजूद कट्टरपंथियों ने मस्जिद की ओर से जुलूस पर अचानक चप्पलें और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ गोयल तक को नहीं बख्शा। हमले में उनके सिर और गर्दन पर चोटें आईं। उनकी वर्दी पर लगे खून के धब्बे इस बात की गवाही दे रहे थे कि हमलावरों के मन में न तो प्रशासन का कोई खौफ है और न ही कानून का सम्मान। शांतिपूर्ण जुलूस पर हुए इस सुनियोजित हमले ने एक बार फिर बढ़ते कट्टरपंथ और बिगड़ते सामाजिक सद्भाव की चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

8. जबलपुर में तनाव: मंदिर की आरती और कट्टरपंथी हमला

मध्य प्रदेश के जबलपुर की संवेदनशील सिहोरा तहसील से कट्टरपंथी मानसिकता की एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई। 19 फरवरी 2026 की रात, जब हिंदू समाज अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा मंदिर में शाम की आरती कर रहा था, उसी दौरान पास की मस्जिद में नमाज का समय भी था। शांतिपूर्ण माहौल तब अचानक तनाव में बदल गया जब एक युवक ने कथित तौर पर मंदिर की ग्रिल को नुकसान पहुँचाया। यह केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हिंदुओं की धार्मिक आस्था और श्रद्धा पर किया गया प्रहार था।

जैसे ही स्थानीय लोगों ने इस हरकत का विरोध किया, वहाँ मौजूद कट्टरपंथी समूह ने हिंसक रुख अपनाते हुए भारी पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले ने पूरे इलाके को सांप्रदायिक तनाव की आग में झोंक दिया। मंदिर परिसर में हुई इस तोड़फोड़ और उसके बाद शुरू हुई हिंसा ने स्थानीय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी, जो स्पष्ट रूप से एक सुनियोजित कट्टरपंथी सोच का परिणाम नजर आती है।

9. हैदराबाद में तनाव: शिवाजी जयंती के नारों पर अंबरपेट में भारी बवाल

हैदराबाद के अंबरपेट इलाके से भी कट्टरपंथी मानसिकता का भी मामला है, जहाँ शिवाजी जयंती के जुलूस को निशाना बनाया गया। विवाद तब शुरू हुआ जब शोभायात्रा एक स्थानीय मस्जिद के पास से गुजर रही थी और वहाँ मौजूद कट्टरपंथी तत्वों ने बज रहे संगीत और ‘मंदिर बनाएँगे’ जैसे गानों पर कड़ी आपत्ति जताई। देखते ही देखते यह विरोध तीखी बहस और फिर हिंसक धक्का-मुक्की में बदल गया, जिससे पूरे क्षेत्र में डर का माहौल पैदा हो गया।

अक्सर देखा गया है कि ‘प्रार्थना में खलल’ का तर्क देकर हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश की जाती है, और यहाँ भी वही पैटर्न नजर आया। स्थिति को बेकाबू होते देख प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और इलाके में अगले चार दिनों के लिए धारा 144 (कर्फ्यू जैसी पाबंदी) लागू कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में 8 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे एक उत्सव को मजहबी कट्टरता के जरिए सांप्रदायिक तनाव में झोंक दिया गया।

10. महबूबनगर में खौफनाक वारदात: सोशल मीडिया पोस्ट पर हिंदू युवक को मॉब लिंचिंग की कोशिश

तेलंगाना के महबूबनगर जिले से कट्टरपंथी हिंसा की एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। यहाँ संतोष नामक एक हिंदू युवक पर करीब 20-25 लोगों की उग्र भीड़ ने सिर्फ इसलिए जानलेवा हमला कर दिया क्योंकि उसने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से जुड़ी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थी। 1 मार्च को डाली गई यह स्टोरी स्थानीय ग्रुप्स में वायरल हो गई, जिससे नाराज होकर कट्टरपंथी रात करीब 9 बजे संतोष की दुकान पर जा पहुँचे और उसे लात-घूंसों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
पीड़ित संतोष का कहना है कि भीड़ ने उसे जमीन पर गिराकर कुचलने की कोशिश की और अगर सामने वाले दुकानदार ने हिम्मत दिखाकर उसे बाहर न निकाला होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। हमलावरों का दुस्साहस इतना था कि वे आधी रात के बाद भी उसे दोबारा मारने के इरादे से उसकी दुकान के आसपास चक्कर काट रहे थे। इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों को आरोपित बनाया गया, जिनमें से 9 को गिरफ्तार किया था, हालाँकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

11. बेंगलुरु में सनसनीखेज वारदात: रमजान के दौरान मंगेतर की गला काटकर हत्या

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से भी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई, जहाँ रमजान के पवित्र महीने के बीच 20 वर्षीय मोहम्मद सबील ने अपनी ही नाबालिग मंगेतर जोया की बेरहमी से हत्या कर दी। यह खौफनाक वारदात डीजे हाली इलाके में 16 मार्च 2026 की सुबह करीब 6 बजे हुई। पुलिस के अनुसार, जोया के नाबालिग होने के बावजूद दोनों की सगाई हो चुकी थी और वे जल्द ही निकाह करने वाले थे। घटना वाले दिन सबील जोया को अपने एक रिश्तेदार के घर ले गया था, जहाँ किसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

विवाद इतना बढ़ा कि सबील ने आपा खो दिया और गुस्से में एक धारदार हथियार से जोया की गर्दन काट डाली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देकर सबील तुरंत वहाँ से फरार हो गया। करीब एक घंटे बाद जब सबील के रिश्तेदार घर लौटे, तो उन्हें जमीन पर जोया का खून से लथपथ शव मिला। परिवार की सूचना पर पहुँची पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और फरार आरोपित सबील की सरगर्मी से तलाश की। पवित्र महीने (रमजान) में हुई इस क्रूर हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।

12. दिल्ली में होली पर खूनी खेल: गुब्बारे के मामूली विवाद में तरुण की पीट-पीटकर हत्या

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तम नगर (हस्तसाल पुनर्वासित कॉलोनी) से एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जहाँ होली की खुशियाँ मातम में बदल गईं। विवाद की शुरुआत एक बेहद मामूली बात से हुई, जब हिंदू पीड़ित तरुण के परिवार की 11 साल की बच्ची छत से होली खेल रही थी। उसने नीचे खड़े अपने पिता की ओर पानी का गुब्बारा फेंका, जो गलती से सड़क पर गिर गया और उसका पानी पड़ोस की एक मुस्लिम महिला पर जा गिरा। परिवार का कहना है कि उन्होंने तुरंत माफी भी माँगी, लेकिन मुस्लिम समुदाय की उस महिला और उसके परिवार ने बात सुनने के बजाय झगड़ा शुरू कर दिया और अपने रिश्तेदारों को बुला लिया।

घटना के करीब एक घंटे बाद, जब 26 वर्षीय तरुण अपने दोस्त के साथ होली खेलकर बाइक से घर लौट रहा था, तभी 15-20 लोगों की इस्लामी उग्र भीड़ ने उसे रास्ते में घेर लिया। भीड़ ने तरुण पर लोहे की रॉड, ईंटों और पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। तरुण के दादा मान सिंह ने रुंधे गले से बताया कि हमलावरों ने उसे बेरहमी से पीटा और जब वह अधमरा होकर सड़क पर गिर गया, तब उसके सीने पर एक भारी पत्थर दे मारा। अस्पताल में इलाज के दौरान तरुण ने दम तोड़ दिया। एक छोटे से गुब्बारे से शुरू हुआ यह विवाद कट्टरपंथी मानसिकता के कारण एक हँसते-खेलते युवक की जान ले बैठा।

13. एटा में होली पर खूनी संघर्ष: रंग गिरने के बहाने दलित युवक को मरणासन्न किया

दिल्ली के उत्तम नगर जैसी ही एक और हृदयविदारक घटना उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आई थी, जहाँ होली की खुशियों के बीच कट्टरपंथी हिंसा ने एक दलित युवक के परिवार को निशाना बनाया। 4 मार्च 2026 की रात करीब 8 बजे 22 वर्षीय आकाश अपने घर के बाहर होली खेल रहा था। इसी दौरान मोहल्ले के तीन सगे भाई ‘अरबाज, शाहबाज और मुस्तफा’ वहाँ से गुजरे और उनके कपड़ों पर गलती से रंग गिर गया। इस मामूली बात पर तीनों ने आकाश की माँ और बहन को भद्दी गालियाँ देना शुरू कर दिया। जब आकाश ने विरोध किया, तो आरोपितों ने उसे जमीन पर गिराकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अरबाज ने अपने पास मौजूद तमंचे (पिस्तौल) की बट से आकाश के सिर पर जोरदार प्रहार किया, जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। जब आकाश की बहन बीना और भाभी वर्षा उसे बचाने दौड़ीं, तो मुस्तफा और अरबाज ने उनके साथ भी मारपीट की। जाते-जाते आरोपितों ने पीड़ित परिवार को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि ‘तुम्हें यहाँ रहने नहीं देंगे।’

14. दिल्ली में दरिंदगी: हलाल मीट शॉप के शटर के पीछे मासूम से हैवानियत

देश की राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके से रमजान के दौरान ही इंसानियत को तार-तार कर देने वाली एक जघन्य घटना सामने आई। गोयला डेयरी के पास एक 65 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति ने 6 से 9 साल की एक मासूम हिंदू बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। वारदात 16 मार्च 2026 को हुई, जब बच्ची अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल के पास खेल रही थी। तभी पास में हलाल मीट की दुकान चलाने वाले इस आरोपित ने बच्ची को कुछ देने के बहाने फुसलाया और अपनी हलाल मीट शॉप के भीतर ले गया। वहाँ दुकान का शटर गिराकर उसने मासूम के साथ दरिंदगी की।

इस खौफनाक घटना का खुलासा तब हुआ जब बच्ची की माँ और एक रिश्तेदार ने आरोपित को रंगे हाथों पकड़ा, जिसके बाद इलाके में भारी हंगामा और हाथापाई शुरू हो गई। बच्ची ने रोते हुए यह भी बताया कि उस मुस्लिम शख्स ने पहले भी उसके साथ गलत काम किया था। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया।

15. रायसेन किले पर अराजकता: ऐतिहासिक तोप चलाकर लगाए ‘ईरान’ के समर्थन में नारे

मध्य प्रदेश के रायसेन किले से एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में कुछ मुस्लिम युवक ऐतिहासिक किले की पहाड़ी पर खड़े होकर ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते और ‘हम ईरान का साथ देने जा रहे हैं‘ जैसी बातें कहते हुए दिखाई दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब इन युवकों ने कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए किले की एक प्राचीन तोप में माचिस से आग लगा दी। आग लगते ही एक जोरदार धमाका हुआ और पूरा इलाका धुएँ से भर गया, जबकि वीडियो में नीचे पूरा शहर साफ नजर आ रहा था।

इस घटना को सोशल मीडिया पर एक खास उकसावे वाले संदेश के रूप में पेश किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में रोष फैल गया। रायसेन के पटेल नगर निवासी बृजेश चावरिया की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए युवकों की पहचान रायसेन के शादाब कुरैशी और भोपाल के यूसुफ शेख, वसीम मोहम्मद व पप्पू उर्फ सलमान कुरैशी के रूप में हुई है। ऐतिहासिक धरोहर के साथ खिलवाड़ और इस तरह की भड़काऊ नारेबाजी ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है।

16. रायपुर में बवाल: मरही माता मंदिर पर पथराव और रंजिश की खूनी जंग

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का मौदहापारा इलाका 16 मार्च 2026 को हिंसा और पत्थरबाजी की चपेट में आया। विवाद की शुरुआत दो पक्षों के बीच टकराव से हुई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया और मरही माता मंदिर के पास जमकर ईंट-पत्थर चले। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के अनुसार, इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने देर रात मंदिर को निशाना बनाकर पथराव किया, जिससे इलाके में भारी सांप्रदायिक तनाव फैल गया। इस घटना के विरोध में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में मौदहापारा थाने का घेराव किया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मंदिर पर हमला करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रायपुर में हिंसा का यह दौर केवल पत्थरबाजी तक सीमित नहीं रहा, पिछले 24 घंटों के भीतर चाकूबाजी की भी चार अलग-अलग वारदातें सामने आई हैं। पुलिस जाँच में पता चला है कि मौदहापारा की इस हिंसा की जड़ में पुरानी रंजिश थी। पिछले साल अल्ताफ और राशिद नामक युवकों ने रवि रक्सेल पर हमला किया था, जिसके बाद से दोनों गुटों में ठनी हुई थी।

17. गंगा की पवित्रता पर प्रहार: वाराणसी में चलती नाव पर ‘बिरयानी पार्टी’ और 14 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी से आस्था को ठेस पहुँचाने वाली एक घटना सामने आई, जहाँ पवित्र गंगा नदी के बीचों-बीच नाव पर इफ्तार पार्टी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। 16 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में मुस्लिम युवकों की एक टोली ने न केवल रोजा इफ्तार किया, बल्कि चलती नाव पर बड़े भगोने से ‘चिकन बिरयानी’ परोसकर दावत भी उड़ाई। इन मुस्लिम युवकों ने मांसाहार करने के बाद जूठी हड्डियाँ सीधे माँ गंगा की पावन धारा में फेंक दीं, जिससे सनातन धर्म की मान्यताओं और नदी की शुचिता का अपमान हुआ है।

इस घटना के सामने आते ही स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैला। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वाराणसी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और इस ‘फ्लोटिंग पार्टी’ में शामिल 14 लोगों को गिरफ्तार किया। धार्मिक नगरी में मर्यादाओं के इस उल्लंघन ने एक बार फिर सांस्कृतिक सम्मान और आपसी सद्भाव के बीच गहरी लकीर खींच दी है।

18. रामपुर में नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण-धर्मांतरण

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई क्षेत्र से 22 फरवरी 2026 को एक गंभीर मामला सामने आया। यहाँ एक नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण और उसे बंधक बनाकर जबरन धर्मांतरण की कोशिश की। इस घटना के सामने आते ही पीड़ित परिजनों और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं में भारी रोष फैल गया। संगठनों ने तुरंत पटवाई थाने पहुँचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई और पुलिस प्रशासन से लड़की की सुरक्षित व जल्द बरामदगी की पुरजोर माँग की।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी लड़की का कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने पुलिस को सख्त अल्टीमेटम दिया। शिकायत के अनुसार, दो मुस्लिम युवकों ने लड़की को अगवा किया और उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाया। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने फिलहाल गाँव के प्रधान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

19. पहचान छिपाकर दरिंदगी: मेहसाणा में ‘राहुल पटेल’ बनकर मोहम्मद जावेद ने की ब्लैकमेलिंग

गुजरात के मेहसाणा जिले के खेड़ालू कस्बे से पहचान छिपाकर हिंदू लड़की के शोषण मामला सामने आया। 22 फरवरी 2026 को उजागर हुई इस घटना के अनुसार, मोहम्मद जावेद नाम के एक व्यक्ति ने खुद को ‘राहुल पटेल’ बताकर हिंदू लड़की से दोस्ती की और उसे अपने झांसे में ले लिया। आरोपित ने न केवल लड़की का विश्वास जीता, बल्कि उसकी कुछ निजी तस्वीरें भी ले लीं, जिनका इस्तेमाल वह बाद में उसे ब्लैकमेल करने के लिए करने लगा।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि जावेद उसे बहला-फुसलाकर एक गेस्ट हाउस में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ दुष्कर्म (रेप) करने की भी कोशिश की। जैसे ही इस घिनौनी करतूत की भनक परिजनों और ग्रामीणों को लगी, उन्होंने तुरंत मौके पर पहुँचकर आरोपित को रंगे हाथों पकड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और पीड़िता की शिकायत के आधार पर मोहम्मद जावेद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।

20. गाजियाबाद में हनुमान चालीसा बजाने पर हिंदू घर में घुसकर हथौड़े से वार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित नंदग्राम इलाके से 10 मार्च 2026 को एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाने को लेकर एक हिंदू परिवार को हिंसक भीड़ का शिकार होना पड़ा। पीड़ित रितिक सिंह के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब पड़ोस में रहने वाले कुछ मुस्लिम परिवारों ने डीजे पर बज रही हनुमान चालीसा पर आपत्ति जताई। यह मामूली कहासुनी देखते ही देखते तब खूनी संघर्ष में बदल गई जब ताहिर, राशिद और सलमान अपने कई अज्ञात साथियों के साथ जबरन रितिक के घर में घुस आए।

पीड़ित परिवार की सदस्य पूजा ने बताया कि हमलावरों ने पहले उनके पति को निशाना बनाया जब वे पास की दुकान पर गए थे, और फिर पूरे लाव-लश्कर के साथ घर में हंगामा किया। आरोप है कि इस दौरान हमलावरों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए पूजा की मासूम बेटी पर हथौड़े से हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। परिवार का दावा है कि उन्हें सरेआम जान से मारने की धमकियाँ भी दी गईं। नंदग्राम थाने के SHO उमेश कुमार ने मुख्य आरोपितों ‘ताहिर, राशिद और सलमान’ को पुलिस ने हिरासत में लिया।

21. हैदराबाद में कट्टरपंथ: ‘जय श्री राम’ के स्टिकर पर कैब ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के जेबी नगर इलाके से धार्मिक असहिष्णुता की एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई। 26 फरवरी 2026 की देर रात, एक हिंदू कैब ड्राइवर सुरेश गौड़ को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उनकी गाड़ी के पीछे ‘जय श्री राम’ का स्टिकर लगा हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिमों के एक उग्र समूह ने उनकी कैब को बीच रास्ते में रोक लिया और स्टिकर को लेकर विवाद शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते हिंसक हमले में बदल गया।

आरोप है कि करीब 25-30 इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने सुरेश गौड़ को घेर लिया और उन्हें जबरन वाहन से बाहर खींचकर उनके साथ मारपीट की। हमलावरों ने न केवल ड्राइवर को चोट पहुँचाई, बल्कि उनकी कैब में भी जमकर तोड़फोड़ की, जिससे गाड़ी के शीशे चकनाचूर हो गए और वाहन को भारी नुकसान पहुँचाया।

22. कोडागु में सांप्रदायिक झड़प: धार्मिक घोषणा के दौरान हिंदू युवक पर हमला

कर्नाटक के कोडागु जिले के नापोक्लू कस्बे में 3 मार्च 2026 को एक धार्मिक आयोजन की सूचना देना हिंसा का कारण बना। घटना उस समय हुई जब कुछ हिंदू युवक एक वाहन पर लाउडस्पीकर के जरिए आगामी धार्मिक कार्यक्रम की घोषणा की। इसी दौरान स्थानीय मुस्लिम युवकों ने इस पर आपत्ति जताई, जिससे शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक मारपीट में बदल गई। इस हमले में गौतम नामक एक हिंदू युवक गंभीर रूप से घायल हुआ।

इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और राशिद, सिद्दीक, सुहैल और रफी के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। इनमें से एक मुख्य आरोपित सुहैल को हिरासत में ले लिया था।

23. छिंदवाड़ा में दुस्साहस: इंस्टाग्राम पोस्ट पर हिंदू युवती को ‘पठान’ बनकर रेप की धमकी

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी धमकी और मानसिक उत्पीड़न का मामला सामने आया। घटना की शुरुआत 24 फरवरी 2026 को हुई, जब एक 22 वर्षीय हिंदू युवती ने इंस्टाग्राम पर एक हिंदू नेता का बयान साझा किया। इस पोस्ट से तिलमिलाए बिलाल, दिलावर और सलमान नाम के तीन युवकों ने हिंदू युवती को निशाना बनाया। उन्होंने न केवल फोन कॉल के जरिए युवती पर पोस्ट हटाने का दबाव बनाया, बल्कि उसे डराने के लिए मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं।

हिंदू युवती को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए आरोपितों ने बेहद आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल किया। बातचीत के दौरान एक आरोपित ने अपनी पहचान का रौब झाड़ते हुए कहा, “मैं पठान हूँ, सच में रेप करता हूँ,” जबकि दूसरे ने युवती को नीचा दिखाने के लिए दावा किया कि उसके समाज की चार लड़कियाँ उसकी ‘गर्लफ्रेंड’ हैं। इन खौफनाक धमकियों से घबराने के बजाय हिंदू युवती ने साहस दिखाया और तुरंत अपने परिवार को सूचित कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। छिंदवाड़ा पुलिस ने तीनों आरोपितों ‘बिलाल, दिलावर और सलमान’ को गिरफ्तार किया।

24. देहरादून में होली पर बवाल: गुब्बारा फटने के विवाद में हिंदू युवकों पर जानलेवा हमला

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से होली के उल्लास के बीच कट्टरपंथी हिंसा की एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई। 2 मार्च 2026 को चकराता रोड स्थित आरजीएम प्लाजा के पास चिराग आनंद और उनका दोस्त आनंद होली खेल रहे थे, तभी एक पानी से भरा गुब्बारा बिजली के तार में फँसकर फट गया। इस गुब्बारे का पानी पास खड़े साहिल धीमान के कपड़ों पर गिर गया, जो देखते ही देखते एक खूनी संघर्ष की वजह बन गया।
मामूली सी बात पर नाराज होकर साहिल ने अपने साथियों को बुला लिया और देखते ही देखते 20 से अधिक इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने लाठी-डंडों के साथ चिराग पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने क्रूरता दिखाते हुए चिराग के सिर और पीठ पर गंभीर चोटें पहुँचाईं, जिससे बचने के लिए उन्हें पास की एक गली में छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी। आरोप है कि भीड़ यहीं नहीं रुकी, बल्कि पत्थरों और ईंटों से हमला करने के बाद वे पीड़ित के घर तक जा पहुँचे, जहाँ उन्होंने चिराग की माँ के साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया।

25. राजकोट में होलिका दहन पर उपद्रव: पूजा के दौरान स्टंट और महिलाओं से अभद्रता

गुजरात के राजकोट स्थित भगवतीपारा इलाके में 2 मार्च 2026 को होलिका दहन के पावन अवसर पर उस समय भारी तनाव फैल गया, जब श्रद्धा और भक्ति के माहौल में विघ्न डालने की कोशिश की गई। घटना के वक्त बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएँ और बच्चे होलिका की पूजा और परिक्रमा कर रहे थे। इसी बीच, बाइक सवार दो मुस्लिम युवक अचानक वहाँ पहुँचे और भीड़ के बीच खतरनाक स्टंट करने लगे, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
जब वहाँ मौजूद लोगों ने इस असुरक्षित और आपत्तिजनक व्यवहार का विरोध किया, तो मुस्लिम युवक एक बार तो चले गए, लेकिन कुछ ही देर बाद अपने साथ अन्य साथियों की इस्लामी भीड़ लेकर वापस लौटे। देखते ही देखते यह विवाद एक हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि उपद्रवियों ने न केवल हंगामा किया, बल्कि वहाँ मौजूद महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार भी किया, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया।

26. रामपुर में धार्मिक परंपरा से खिलवाड़: समय से पहले होलिका दहन पर भारी बवाल

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बाजिदपुर गाँव में 2 मार्च 2026 को होलिका दहन के पावन पर्व पर उस समय तनाव फैल गया, जब एक मुस्लिम युवक ने हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। परंपरा के अनुसार, सैकड़ों हिंदू परिवार, महिलाएँ और बच्चे चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में होलिका दहन और परिक्रमा के लिए एकत्रित हुए थे। अभी लोग पूजा की तैयारी कर ही रहे थे कि इसी बीच एक मुस्लिम युवक ने तय समय से पहले ही चुपके से होलिका में आग लगा दी।
इस घटना से वहाँ मौजूद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया, क्योंकि इसे उनकी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का सीधा उल्लंघन माना गया। देखते ही देखते मौके पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई और होलिका दहन की प्रक्रिया बाधित हो गई। पुलिस ने तुरंत आरोपित युवक को हिरासत में लिया।

27. चंदौली में खूनी होली: रंग पड़ने के विवाद में ई-रिक्शा सवार ने साथियों संग किया जानलेवा हमला

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के दुधारी-तेंदुहान गाँव में 5 मार्च 2026 को होली की खुशियाँ उस वक्त मातम में बदल गईं, जब एक मामूली बात पर हिंसक संघर्ष छिड़ गया। गाँव के हिंदू युवक पारंपरिक गीतों पर थिरकते हुए एक-दूसरे को रंग-अबीर लगा रहे थे, तभी वहाँ से ई-रिक्शा पर गुजर रहे खुर्शीद नाम के व्यक्ति पर गलती से थोड़ा रंग गिर गया। इस छोटी सी बात को लेकर खुर्शीद आगबबूला हो गया और उसने तुरंत अपने गाँव के अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया।
देखते ही देखते विवाद ने इतना उग्र रूप ले लिया कि हमलावरों ने लाठी-डंडों, हॉकी स्टिक और धारदार हथियारों से लैस होकर होली खेल रहे युवकों पर धावा बोल दिया। हद तो तब हो गई जब हमलावर एक हिंदू युवक के घर के भीतर तक घुस गए और वहाँ मौजूद लोगों के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस सुनियोजित हमले में करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया।

28. टोंक में होली की पूर्व संध्या पर पथराव: नमाज से लौटते ही विवाद, पिता-पुत्री लहूलुहान

राजस्थान के टोंक जिले में होली के उल्लास से ठीक एक दिन पहले, 3 मार्च 2026 की रात को सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की खबर सामने आई, जहाँ एक पुराने विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक मुस्लिम परिवार नमाज अदा कर घर लौटा और उनका स्थानीय हिंदू परिवारों के साथ झगड़ा हो गया। देखते ही देखते यह तकरार इतनी बढ़ गई कि दोनों ओर से लाठी-डंडे चलने लगे और भारी पथराव शुरू हो गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इस खूनी झड़प में एक हिंदू पिता और उनकी बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में टोंक के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए टोंक के डिप्टी एसपी मृत्युंजय मिश्रा ने मोर्चा संभाला और सिटी कोतवाली, पुराना टोंक व सदर थाने की पुलिस के साथ ‘राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी’ के जवानों को चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिया है।

29. बांग्लादेश में बर्बरता: हिंदू व्यक्ति का सिर काटकर ईंट-भट्ठे के पास फेंका

पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के पीरोजपुर जिले में 45 वर्षीय हिंदू व्यक्ति गोपाल चंद्र दास की अत्यंत क्रूरता से हत्या की गई। 13 मार्च 2026 को लापता हुए गोपाल का सिर और कटा हुआ शव अगले दिन नेसराबाद उपजिला में एक सुनसान ईंट-भट्ठे के पास नदी किनारे बरामद हुआ। शव की वीभत्स हालत देख पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और स्थानीय हिंदू समुदाय में भारी दहशत का माहौल बन गया। पुलिस के अनुसार, शव मामून मियाँ के ईंट-भट्ठे परिसर के पास मिला था, जिसका सिर गायब होना इस बात का पुख्ता सबूत है कि हत्यारों ने बेइंतहा दरिंदगी को अंजाम दिया।
परिजनों ने इस जघन्य हत्याकांड का सीधा आरोप मोहम्मद सम्राट और मोहम्मद राजू नामक दो व्यक्तियों पर लगाया। शुरुआती जाँच और परिवार के बयानों से संकेत मिले कि गोपाल चंद्र दास का पहले अपहरण किया गया और फिर उन्हें किसी सुनसान जगह ले जाकर मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस ने आरोपित मोहम्मद सम्राट को गिरफ्तार किया, जबकि दूसरा आरोपित मोहम्मद राजू फरार बताया गया।

30. मुंगेर में होली पर उपद्रव: रंग लगाने के विवाद में पथराव

बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर इलाके में 4 मार्च 2026 को होली की खुशियाँ तनाव में बदली, जब सदर बाजार और रामपुर कॉलोनी को जोड़ने वाले रेलवे पथ के पास हिंसक झड़प हुई। यहाँ स्थानीय लोग पारंपरिक उत्साह के साथ एक-दूसरे को गुलाल लगा रहे थे, तभी रंग डालने की बात को लेकर मुस्लिम पक्ष ने विवाद शुरू किया। देखते ही देखते विवाद इतना गहरा गया कि स्थानीय मुस्लिमों की भीड़ ने वहाँ मौजूद हिंदू लोगों पर पथराव किया।
इस अचानक हुए हमले में एक हिंदू व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि कई अन्य लोगों को भी चोटें आईं। पुलिस इस मामले में कार्रवाई करते हुए पाँच संदिग्धों को हिरासत में लिया और पूरे मामले की गहन जाँच की, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिले।

31. उज्जैन में बवाल: भारत की वर्ल्ड कप जीत के जश्न पर पथराव और हमला

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 8 मार्च 2026 की रात खुशियाँ उस वक्त मातम और खौफ में बदली, जब भारत की ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहे एक हिंदू परिवार पर हमला किया। यह घटना चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र की राज रॉयल कॉलोनी की है, जहाँ रमजान के दौरान ही कट्टरपंथी हिंसा की तस्वीर सामने आई। परिवार अपने घर के बाहर पटाखे फोड़कर देश की जीत की खुशियाँ मना रहे थे, तभी पड़ोस के कुछ मुस्लिमों ने पटाखों पर आपत्ति जताते हुए विवाद शुरू किया।
देखते ही देखते यह सामान्य बहस एक हिंसक झड़प में तब्दील हो गई और मुस्लिम भीड़ ने परिवार के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले में परिवार के कई सदस्य घायल हुए। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की गई है। पुलिस ने वाहिद खान, जाकिर, सुल्तान, शादाब और अन्य आरोपितों को हिरासत में लिया।

32. रमजान में राजस्थान में खौफ: बुमराह के विकेट का जश्न मनाने पर हिंदू परिवार पर हमला

राजस्थान के अलवर जिले (खैरथल-तिजारा क्षेत्र) के किशनगढ़ बास थाना अंतर्गत बधोड़ा घुमक्कड़ गाँव में 8 मार्च 2026 की रात क्रिकेट का रोमांच उस वक्त खूनी संघर्ष में बदल गया, जब भारत की जीत की खुशी मनाना एक हिंदू परिवार को भारी पड़ गया। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना तब शुरू हुई जब एक हिंदू परिवार अपने घर की छत पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे मैच का आनंद ले रहा था। जैसे ही भारतीय गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने एक ओवर में लगातार दो विकेट झटके, परिवार के सदस्यों ने उत्साह में तालियाँ बजाकर खुशी जाहिर की।
मैच के इस जश्न पर पड़ोस में मौजूद कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने आपत्ति जताते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि करीब 15 से 20 इस्लामी भीड़ ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से लैस होकर हिंदू परिवार पर धावा बोला। इस दौरान न केवल भारी पथराव हुआ, बल्कि एक हमलावर ने दुस्साहस दिखाते हुए छत पर चढ़कर फायरिंग भी की। इस जानलेवा हमले में 30 वर्षीय महिला भजनो बाईवास के सिर में गंभीर चोट आई और वे लहूलुहान हुई।

33. रमजान के दौरान भिवंडी में ‘निकाह’ की साजिश: नाबालिग से दरिंदगी

महाराष्ट्र के भिवंडी में 20 वर्षीय अरमान शेख को एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जबरन निकाह के लिए दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया। रमजान के इस पवित्र महीने के दौरान उजागर हुई यह घटना 6 मार्च 2026 की है। पुलिस जाँच में पता चला है कि इन दोनों की मुलाकात साल 2024 में सोशल मीडिया के जरिए हुई। उस समय लड़की नाबालिग थी और अरमान करीब 18 वर्ष का था। आरोप है कि अरमान ने लड़की की मासूमियत और कम उम्र का फायदा उठाते हुए पिछले दो वर्षों तक उसका लगातार यौन शोषण किया।

हद तो तब हो गई जब लड़की के 18 वर्ष के होते ही अरमान उस पर निकाह के लिए दबाव बनाने लगा। आरोपित की ब्लैकमेलिंग और धमकियों से डरकर लड़की निकाह के लिए भिवंडी पहुँच गई, जहाँ निकाह की पूरी बिसात बिछाई गई थी। काजी से लेकर गवाह तक सब मौजूद थे। ऐन वक्त पर लड़की के परिजनों की सूचना पाकर एक हिंदू संगठन के सदस्य मौके पर पहुँचे और लड़की को वहाँ से सुरक्षित निकाला। पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद पुलिस ने अरमान शेख गिरफ्तार किया।

34. रमजान के दौरान लखनऊ में दरिंदगी: हिंदू युवती का धर्मांतरण

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक 23 वर्षीय हिंदू युवती को प्यार के जाल में फँसाकर न केवल उसका शारीरिक शोषण किया, बल्कि उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। ये सब रमजान के दौरान हुआ। पीड़िता ने फरहीन खान नामक युवक पर गंभीर आरोप लगाए कि उसने पहले शादी का झाँसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और फिर यह झूठ बोला कि यदि वह पहले निकाह करेगी, तो बाद में वह हिंदू रीति-रिवाजों से भी शादी करेगा। इसी धोखे के जाल में फँसाकर निकाहनामे पर युवती के हस्ताक्षर ले लिए गए।
निकाह के बाद फरहीन हिंदू युवती को अपने घर ले जाने के बजाय किराए के कमरे में रखा और लगातार उस पर कलमा पढ़ने व इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। जुल्म की इंतहा तब हो गई जब युवती गर्भवती हुई और फरहीन ने उसके पेट पर लात मारी, जिससे उसका गर्भपात हुआ। विरोध करने पर फरहीन ने युवती को जान से मारने, कहीं बेच देने की धमकी दी।

35. रमजान के दौरान केरल में धर्मांतरण: हिंदू महिला और बच्चे पर इस्लाम अपनाने का दबाव

केरल के कोझिकोड जिले में एक 21 वर्षीय हिंदू महिला ने अपने ही पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रमजान के इस महीने में उजागर हुई इस घटना के अनुसार, महिला को पहले प्रेम जाल में फँसाया गया और फिर आरोपित शाहुल हमीद ने उसके साथ गुरुवायूर मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। शादी के बाद दोनों साथ रहने लगे और महिला ने एक बच्चे को जन्म भी दिया।
हिंदू पीड़िता का कहना है कि विवाह से पहले धर्मांतरण जैसी कोई बात नहीं हुई थी, लेकिन जैसे ही वे साथ रहने लगे, शाहुल और उसके परिवार का असली चेहरा सामने आया। हिंदू पीड़िता का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही उसे और उसके मासूम बच्चे पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया। अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा को खतरे में देख पीड़िता पुलिस के पास पहुँची। तिरुवम्बाडी पुलिस ने शाहुल हमीद को हिरासत में लिया।

36. रमजान के दौरान शिर्डी में दुस्साहस: नाबालिग को ‘निकाह’ के लिए दबाव

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शिर्डी थाना क्षेत्र से एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के उत्पीड़न का बेहद गंभीर मामला सामने आया। रमजान के इस महीने में उजागर हुई इस घटना के अनुसार, इरफान शेख नामक युवक ने इंस्टाग्राम के जरिए नाबालिग से संपर्क साधा और धीरे-धीरे उसे बुरी तरह परेशान करना शुरू किया। इरफान न सोशल मीडिया और असल जिंदगी में भी हिंदू लड़की का पीछा किया और उसे ‘निकाह’ करने के लिए दबाव बनाया।
जाँच में सामने आया कि इस घिनौनी साजिश में इरफान अकेला नहीं था, बल्कि उसके परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल थे जो नाबालिग पर मानसिक दबाव बना रहे थे। लगातार हो रहे इस उत्पीड़न से तंग आकर बहादुर नाबालिग ने अपने परिजनों को पूरी सच्चाई बताई और थाने में शिकायत दर्ज कराई। फिर पुलिस ने मुख्य आरोपित इरफान शेख को गिरफ्तार किया।

37. रमजान के दौरान चिक्कमगलूरु में ‘मोरल पुलिसिंग’: दलित हिंदू किशोर को मुस्लिम भीड़ ने घेरा

कर्नाटक के चिक्कमगलूरु जिले के मलाड टाउन से ‘मोरल पुलिसिंग’ और दलित उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना 26 फरवरी 2026 की है, जब एक 17 वर्षीय दलित हिंदू नाबालिग लड़का अपनी एक मुस्लिम सहेली के साथ बाइक पर जा रहा था। इसी दौरान मार्केट रोड स्थित ज्योति सर्कल के पास मुस्लिम युवकों के एक कट्टरपंथी समूह ने उन्हें जबरन रोका। इस्लामी भीड़ ने किशोर से उसकी सहेली के साथ होने को लेकर सवाल पूछे और बुरी तरह डराया-धमकाया।
हैरानी की बात यह है कि मामला सड़क पर शांत होने के बाद भी खत्म नहीं हुआ। उसी रात आरोपित युवक उस दलित किशोर के घर तक जा पहुँचे और कथित तौर पर जबरन घर में घुसकर पूरे परिवार के साथ गाली-गलौज की। हमलावरों ने किशोर और उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद पुलिस ने कुल आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और तीन आरोपितों को हिरासत में लिया।

38. रमजान में शाहजहाँपुर में सुनियोजित हमला: रंग डालने के विवाद में हिंदू बस्ती पर पथराव

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के मऊ रसूलपुर गाँव में होली का उल्लास सांप्रदायिक तनाव में बदला। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना 4 मार्च 2026 को शुरू हुई, जब होली खेलते समय एक हिंदू युवक ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर रंग डाल दिया। उस वक्त तो मौके पर पहुँची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया था, लेकिन उसी रात गुपचुप बैठक कर हमले की पूरी साजिश रची गई और अगली सुबह बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पूरी तैयारी के साथ हिंदू बस्ती पर हमला किया।
भीड़ ने हिंदू ग्रामीणों पर पथराव किया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस ने जायद अली, शाहीद अली, अकील अहमद, अजीम, सोहेल, आमिर, महकू और हसरत समेत करीब 100 अज्ञात दंगाइयों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा किया।

39. रमजान के दौरान रुद्रपुर में खूनी संघर्ष: होली के जश्न में मुस्लिम भीड़ का पथराव और फायरिंग

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर से होली के पर्व पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। 5 मार्च 2026 की देर रात, जब भूतबंगला इलाके में स्थानीय लोग पारंपरिक उत्साह के साथ होली का कार्यक्रम मना रहे थे, तभी एक मुस्लिम युवक के दुस्साहस ने माहौल बिगाड़ा। रमजान के इस महीने में घटी इस घटना के अनुसार, वह युवक बार-बार अपना ई-रिक्शा जबरन भीड़ और कार्यक्रम के बीच से निकालने की कोशिश कर रहा था। जब मौजूद लोगों ने उसे टोकते हुए ऐसा करने से मना किया, तो वह अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए वहाँ से चला गया।
आरोप है कि वह मुस्लिम युवक थोड़ी ही देर बाद अपने साथ दर्जनों साथियों की उग्र भीड़ लेकर आया और होली मना रहे निहत्थे लोगों पर हमला किया। इस दौरान इस्लामी भीड़ ने पत्थरबाजी की और लाठी-डंडों से हिंदू लोगों को पीटा। चश्मदीदों के मुताबिक, हमले के दौरान गोलियाँ चलने की आवाजें भी सुनी गईं। इस अचानक हुए सुनियोजित हमले में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए।

40. रमजान के दौरान बाराबंकी में खूनी होली: रंग डालने के विवाद में हिंदू परिवारों पर हमला

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में होली के दौरान सांप्रदायिक हिंसा हुई। 4 मार्च 2026 को देवा थाना क्षेत्र के टिकरिया गाँव में होली का उल्लास उस वक्त मातम और दहशत में बदल गया, जब रंग खेलने को लेकर उपजा एक मामूली विवाद हिंसक संघर्ष में तब्दील हुआ। रमजान के इस महीने में घटी इस घटना के अनुसार, गाँव के हिंदू परिवार और युवक पारंपरिक रूप से होली खेल रहे थे, तभी स्थानीय मुस्लिमों के एक समूह ने इस पर आपत्ति जताई और हंगामा किया।
इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और चाकू से लैस होकर निहत्थे हिंदुओं पर हमला किया। इसमें 11 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हमलावरों ने लोगों के घरों के घुसकर परिवार के सदस्यों को बेरहमी से पीटा और जो भी बीच-बचाव करने आया, उसे भी निशाना बनाया। घटना की सूचना पर पुलिस ने FIR दर्ज की।

41. रमजान के दौरान बागपत में ‘दावत’ के बहाने हत्या

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के तित्रोड़ा गाँव में 4 मार्च 2026 को होली का पर्व मातम में बदला। रमजान के इस महीने में घटी इस घटना के अनुसार, अमृत शर्मा नामक एक हिंदू युवक की महज एक मामूली कहासुनी के बाद बेरहमी से चाकू मारकर हत्या की। अमृत अपने परिचित समीर के बुलावे पर होली की दावत में शामिल हुआ था। इसी दौरान वह गाँव में स्थित साजिद नामक व्यक्ति की चिकन की दुकान पर पहुँचा, जहाँ किसी बात को लेकर वहाँ मौजूद कुछ युवकों से उसकी बहस हुई।
विवाद इतना बढ़ा कि दुकान पर मौजूद सुहैल, अनस, शौकीन और चिंकू ने आव देखा न ताव और अमृत पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। हमलावरों ने अमृत के सीने, पेट और कमर पर कई वार किए, जिससे अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हुई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों नामजद आरोपितों ‘सुहैल, अनस, शौकीन और चिंकू’ के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया।

42. रमजान के दौरान लखीमपुर में पलायन: मंदिर में मांस फेंका

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदपुर गाँव में सांप्रदायिक कट्टरता और लगातार हो रही हिंसा के चलते एक हिंदू परिवार को अपना पुश्तैनी घर छोड़ना पड़ा। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना 4 मार्च 2026 की है, जब पीड़ित प्रदीप वर्मा ने अपने पड़ोसियों के जुल्मों से तंग आकर परिवार सहित गाँव से पलायन किया। प्रदीप का आरोप है कि उनका पड़ोसी इस्माइल अली और उसका परिवार लंबे समय से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
साजिश के तहत आरोपितों ने कई बार स्थानीय शिव मंदिर और प्रदीप के घर के सामने स्थित कुएँ में मांस के टुकड़े और हड्डियाँ फेंकीं। 4 मार्च को मंदिर परिसर को अपवित्र किया गया, तो प्रदीप ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। विरोध करने पर इस्माइल, वारिश अली, तहबान अली और इश्तियाक ने अपने परिवार की महिलाओं के साथ मिलकर प्रदीप वर्मा पर हमला किया और बेरहमी से पीटा। लगातार हो रहे इस अपमान और असुरक्षा के माहौल से टूटकर प्रदीप ने गाँव छोड़ा।

43. रमजान के दौरान गया में बवाल: बच्चों की गेंद लगने पर गर्भवती हिंदू महिला समेत कई पर पथराव

बिहार के गया जिले के बेलागंज क्षेत्र में रमजान के दौरान 5 मार्च 2026 को मामूली बात खूनी संघर्ष में तब बदली, जब खेल रहे बच्चों की एक गेंद गलती से एक मुस्लिम व्यक्ति को लगी। इस बात पर उस व्यक्ति ने कड़ी आपत्ति जताई, जिससे बहस शुरू हुई। देखते ही देखते यह विवाद इतना गरमाया कि कुछ ही देर में बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ इकट्ठा हो गई और उन्होंने हिंदू घरों पर अंधाधुंध पथराव किया।
इस अचानक हुए हमले और पत्थरबाजी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई मकानों को भारी नुकसान पहुँचा। हिंसा की इस चपेट में आकर कई लोग लहूलुहान हुए, जिनमें 21 वर्षीय गर्भवती महिला ललिता देवी को गंभीर चोटें आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, गाँव में तनाव की जड़ें पुरानी थीं, करीब एक सप्ताह पहले अखंड कीर्तन के दौरान निकाली गई कलश यात्रा को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद हुआ था।

44. रमजान के दौरान वाराणसी में दरिंदगी: अस्सी घाट से हिंदू नाबालिग को नशीली दवा पिलाकर रेप

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट में रमजान के महीने में एक हिंदू नाबालिग लड़की को ‘लव जिहाद’ और बर्बरता का शिकार बनाया गया। चंदौली के बाबुरी थाना क्षेत्र की रहने वाली यह किशोरी 7 मार्च 2026 को अपने भाई के साथ अस्सी घाट घूमने पहुँचीं, जहाँ से नबी रसूल उर्फ जावेद नाम के व्यक्ति ने उसे किडनैप किया। अपहरण के बाद जावेद ने हिंदू लड़की के पिता को फोन कर न केवल उसे अपनी हिरासत में होने की बात कुबूल की, बल्कि उसे धर्मांतरण कराकर जबरन निकाह करने की खौफनाक धमकी दी।
होश खोने के बाद जब 8 मार्च की सुबह आरोपित युवती को बेहोशी की हालत में उसके गाँव के पास छोड़कर फरार हुआ, तब इस पूरी साजिश का खुलासा हुआ। पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसे बंधक बनाकर नशीली दवाएँ दी गईं और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। दरिंदगी की हद पार करते हुए जावेद ने उसके अश्लील वीडियो और तस्वीरें भी बनाईं ताकि उसे ब्लैमेल किया जा सके। भेलूपुर पुलिस ने मुख्य आरोपित नबी रसूल को गिरफ्तार किया।

45. रमजान के दौरान कनाडा के स्कूल में गैर-मुस्लिम बच्चों के खाना खाने पर पाबंदी

कनाडा के कैलगेरी स्थित ‘फेयरव्यू स्कूल’ में समावेशी बनने की कोशिश में स्कूल प्रशासन ने एक ऐसा फैसला किया, जिससे गैर-मुस्लिम छात्रों की मुश्किलें बढ़ी। रमजान के इस महीने में स्कूल ने रोजा रखने वाले बच्चों के प्रति सम्मान दिखाने के नाम पर अपने कैफेटेरिया (भोजनालय) में खाना खाने पर ही पाबंदी लगाई। स्कूल के आधिकारिक ईमेल के अनुसार, लंच एरिया को ‘फूड फ्री’ यानी भोजन मुक्त क्षेत्र घोषित किया। इस तुगलकी फरमान के कारण जो बच्चे रोजा नहीं रख रहे थे, उन्हें भी लंच के समय भूखा रहना पड़ा और कड़ाके की ठंड में दूसरी जगह तलाशने पड़ी।
स्कूल के इस नियम के कारण कक्षा 4 से 6 तक के नन्हे बच्चों (लगभग 9 साल की उम्र) को भूखा रहना पड़ा। वहीं, कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों के लिए स्थिति और भी बदतर हुई, उनके लिए पूरे एक घंटे के ब्रेक के दौरान लंच रूम के अंदर भोजन करने पर पूरी तरह बैन किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि आमतौर पर इस्लाम में रोजा 13-14 साल की उम्र से अनिवार्य होता है, लेकिन स्कूल ने इसे छोटे बच्चों पर भी थोप दिया था।

46. रमजान के दौरान अमेरिका में आतंकी हमला: ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे के साथ गोलीबारी

अमेरिका के वर्जीनिया स्थित ओल्ड डोमिनियन यूनिवर्सिटी (ODU) में 12 मार्च 2026 को एक पूर्व सैन्यकर्मी ने बिजनेस स्कूल की इमारत में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की। रमजान के इस महीने में हुई इस भीषण घटना में 36 वर्षीय मोहम्मद बैलोर जल्लोह हमलावर ने क्लासरूम में दाखिल होते ही ‘अल्लाहू अकबर’ का नारा लगाया और गोलियाँ बरसानी शुरू की। इस हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रैंडन शाह की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हैरानी की बात यह है कि हमलावर जल्लोह कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह पूर्व आर्मी नेशनल गार्ड सदस्य था जिसे 2016 में खूंखार आतंकी संगठन ISIS की मदद करने का दोषी पाया गया था। वह समय से पहले रिहा होकर निगरानी (सर्विलांस) पर था। जिस समय उसने हमला किया, वहाँ मौजूद छात्र मिलिट्री ऑफिसर बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे। इन जांबाज छात्रों ने बिना डरे आतंकी का मुकाबला किया और उसे दबोच लिया। एफबीआई (FBI) के अनुसार, छात्रों ने आत्मरक्षा में जल्लोह को चाकुओं से गोदकर ढेर कर दिया।

47. रमजान के दौरान नाइजीरिया में कत्लेआम: मैदुगुरी में आत्मघाती धमाके, 23 की मौत

नाइजीरिया के मैदुगुरी शहर में रमजान के महीने के बीच भीषण आत्मघाती हमला हुआ। 16 मार्च 2026 की रात को संदिग्ध हमलावरों ने उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के इस प्रमुख शहर को निशाना बनाकर सिलसिलेवार बम धमाके किए। नाइजीरियाई पुलिस की पुष्टि के अनुसार, इन आत्मघाती विस्फोटों में कम से कम 23 निर्दोष लोगों की मौत हुई, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हिंसा प्रभावित बोर्नो राज्य की राजधानी में हुए इस हमले को हाल के वर्षों के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है। इस हमले की किसी भी आतंकी समूह ने अधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली थी, लेकिन इस्लामी आतंकी गुटों पर शक था।

48. रमजान के दौरान लंदन में कट्टरपंथ: हैरो में होलिका दहन के कार्यक्रम पर हमला

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के हैरो (Harrow) इलाके में रमजान के महीने में 4 मार्च 2026 को जब स्थानीय हिंदू समुदाय के लोग पूरी वैधानिक अनुमति के साथ ‘होलिका दहन‘ का पावन पर्व मना रहे थे, तब उत्सव के माहौल को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंसा में बदला। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदू परिवार, महिलाएँ और मासूम बच्चे शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पास की एक मस्जिद से आए कुछ लोगों ने अचानक आयोजन में खलल डाला। हमलावरों ने न केवल वहाँ लगे साउंड सिस्टम को उखाड़कर फेंका, बल्कि उत्सव में शामिल लोगों को धमकाया।

हैरानी की बात यह है कि शुरूआती विवाद के बाद यह समूह कुछ देर के लिए वहाँ से गया, लेकिन थोड़ी ही देर में करीब 20 अन्य कट्टरपंथियों के साथ वापस लौटा और दोबारा हमला किया। यह सब तब हुआ जब कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय मेयर, हैरो काउंसिल के प्रतिनिधि और लेबर पार्टी के बड़े नेता मौजूद थे। इतने वीआईपी (VIP) चेहरों की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों ने उत्पात मचाया।

49. रमजान के दौरान बुर्किना फासो में अल-कायदा का उत्पात: 50+ हत्याएँ

अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में रमजान के महीने के दौरान अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन जेएनआईएम (JNIM) ने भीषण कत्लेआम मचाया, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। 27 फरवरी 2026 को उत्तरी इलाकों में हुए एक बड़े हमले में आतंकियों ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए 50 से अधिक सैनिकों और आम नागरिकों की हत्या की।
सितंबर 2022 से इब्राहिम ट्रोरे के सैन्य शासन के अधीन चल रहे इस देश में जिहादी हमलों की यह बाढ़ नई नहीं है, लेकिन इस बार आतंकियों ने क्रूरता दिखाते हुए न केवल लोगों की जान ली, बल्कि अनाज के भंडारों को आग के हवाले कर दिया और खाने-पीने का सामान लूट लिया, जिससे स्थानीय आबादी के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। इस आतंकी गुट ने घातक हमले की जिम्मेदारी ली।

50. रमजान के दौरान मॉस्को में आतंकी विस्फोट: कट्टरपंथियों की क्रूरता और मासूमों का खून

रूस की राजधानी मॉस्को में 24 फरवरी 2026 को रमजान के दौरान आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े एक आतंकी ने रेलवे स्टेशन को निशाना बनाकर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
विडंबना यह है कि जहाँ एक ओर इन घटनाओं को अंजाम देने वाले कट्टरपंथी इस महीने को ‘इबादत और पवित्रता’ का समय बताते हैं, वहीं धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट दिखाई देती है। इस रिपोर्ट में दर्ज 50 घटनाएँ तो महज एक बानगी भर हैं, जबकि ऐसी सैकड़ों वारदातें और भी हो सकती हैं जो शायद कभी दुनिया के सामने ही नहीं आ पाईं। महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाले जघन्य दुष्कर्म, मासूमों की हत्या और बेगुनाह लोगों का खून बहाकर फैलाई गई यह अशांति इन कट्टरपंथियों के दोहरे चरित्र को उजागर करती है।
(साभार)