महबूबा मुफ्ती की हिंदू विरोधी बेटी इल्तिजा पर FIR, पुलिस अधिकारी को दाँत से काटा: बहने लगा खून, 370 हटाने के विरोध में जमकर किया हंगामा


हिंदुत्व को ‘बीमारी’ बताने वाली जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) नेता इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ श्रीनगर पुलिस ने FIR दर्ज की है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इल्तिजा मुफ्ती ने ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई की और उनकी बाँह पर काट लिया। इल्तिजा के काटने से अधिकारी की बांह पर चोट आई और खून निकलने लगा।

इस मामले में इल्तिजा मुफ्ती के साथ महबूबा मुफ्ती का नाम भी दर्ज किया गया है। महबूबा मुफ्ती पर लगाए गए प्रतिबंधों और प्रशासनिक निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 121, 132 और 191 के तहत कार्रवाई की है। ये धाराएँ सरकारी कर्मचारियों पर हमले, उनके सरकारी काम में बाधा डालने और उपद्रव/दंगा जैसी गतिविधियों से संबंधित हैं। FIR कोठीबाग थाने में दर्ज की गई है और पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

SK पार्क में प्रदर्शन, लाल चौक की ओर बढ़ने की कोशिश और मारपीट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 अगस्त की शाम श्रीनगर के एसके पार्क में महबूबा मुफ्ती और इल्तिजा मुफ्ती के नेतृत्व में पीडीपी का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन का मकसद अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में अपनी बात रखना था। इस दौरान प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने रेजीडेंसी रोड को अवरुद्ध करने और लाल चौक की तरफ बढ़ने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बैरिकेड हटाने और कानून-व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हुई और इल्तिजा मुफ्ती पर एक पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई की।

पुलिस का कहना है कि इल्तिजा ने अधिकारी को पकड़कर उनकी बांह पर काट लिया। इससे अधिकारी के हाथ में गहरी चोट आई और खून बहने लगा। घायल पुलिस अधिकारी को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। वहाँ चिकित्सकों ने घाव का उपचार किया।

पुलिस ने जारी किया समन

पुलिस ने इस घटना को ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी पर कथित हमले और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला माना है। कोठीबाग थाने में एफआईआर संख्या 63/2026 दर्ज की गई है।

जांँच के तहत इल्तिजा मुफ्ती को शुक्रवार को कोठीबाग थाने में पेश होने और जांँच में शामिल होने के लिए समन जारी किया गया है। पुलिस ने कहा है कि जांँच के दौरान यदि कोई अन्य व्यक्ति सरकारी कर्मचारियों पर कथित हमले या सरकारी काम में बाधा डालने में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, पीडीपी ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा पुलिस पर इल्तिजा मुफ्ती के साथ बदसलूकी और उन्हें चोट पहुँचाने का आरोप लगाया है।

हिंदू विरोध के लिए कुख्यात इल्तिजा

इल्तिजा मुफ्ती अपनी हिंदू विरोध सोच के लिए भी कुख्यात हैं। यहाँ तक कि वो हिंदुत्व को बीमारी तक बता चुकी हैं। इल्तिजा ने दिसंबर 2024 में कहा था कि हिंदुत्व एक ‘बीमारी’ है, जिसने लाखों भारतीयों को अपनी चपेट में ले लिया है और भगवान के नाम को बदनाम किया है। मुफ्ती ने कहा था कि ‘हिंदुत्व नफरत की एक विचारधारा है जिसे वीर सावरकर ने 1940 के दशक में भारत में हिंदुओं का वर्चस्व स्थापित करने के मकसद से फैलाया था’।

सिर्फ हिंदुत्व ही नहीं बल्कि इल्तिजा का भारत विरोध भी पुराना है। नवंबर 2019 में CNN के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था, “भारत पाकिस्तान का इस्तेमाल ‘कश्मीरियों को दबाने के लिए एक हथियार’ के तौर पर करता है। सच यह है कि कश्मीर एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ भारत का हिस्सा बना था और अब भारत एक ‘तानाशाह हिंदू पाकिस्तान’ में बदल रहा है।” इल्तिजा आगे कहती हैं कि भारत कट्टरता, चुनिंदा उत्पीड़न और अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) के प्रति नफरत का अड्डा बनता जा रहा है।

‘FCRA बिल वापस लें या JPC को भेजें’: अमित शाह से मिले ईसाई प्रतिनिधियों ने की माँग, गृह मंत्री से मिलकर मिजोरम के CM बोले- 12 अगस्त से संसद में इस पर होगी चर्चा


विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Bill) को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को ईसाई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री के साथ बैठक के दौरान विधेयक से जुड़े अपने मुद्दों और आशंकाओं पर चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने प्रतिनिधियों की बात ध्यान से सुनी और उनकी चिंताओं को नोट किया। गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उठाए गए मुद्दों को देखेंगे और इस मामले पर सरकार के अन्य सदस्यों के साथ भी चर्चा करेंगे।

वहीं, CNN News18 की एक पत्रकार ने X पर इस मुलाकात को लेकर लिखा कि शाह से मुलाकात करने वाले ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा, “प्रतिनिधियों ने माँग की कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर आगे की संसदीय जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए।”

FCRA बिल को लेकर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री के सामने विधेयक से जुड़े 6 मुद्दे उठाए थे।

लालदुहोमा के मुताबिक, इन छह मुद्दों में से एक पर अमित शाह ने उन्हें स्पष्ट आश्वासन दिया कि FCRA संशोधन विधेयक पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। यानी कानून बनने से पहले की अवधि पर इसके प्रावधान लागू नहीं होंगे।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने बताया कि बाकी मुद्दों पर गृह मंत्री ने लिखित जवाब देने की बात कही है। अमित शाह की ओर से इन बिंदुओं पर लिखित प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही विधेयक को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। लालदुहोमा ने यह भी बताया कि अमित शाह 12 अगस्त से संसद में FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू करने वाले हैं।

क्या है बिल के संशोधन और क्यों परेशान हैं मिशनरी

मार्च 2026 में पेश किया गया FCRA संशोधन विधेयक मुख्य रूप से उन संस्थाओं से जुड़ा है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका है, जिन्होंने अपना लाइसेंस खुद सरेंडर कर दिया है या जिनका लाइसेंस रीन्यू नहीं हुआ है। इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकारी को ऐसी संस्थाओं की विदेशी फंडिंग और उस पैसे से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड के दुरुपयोग और उसके अवैध तरीके से किसी दूसरे को हस्तांतरित किए जाने पर रोक लगाना है।

इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने 22 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी कर विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 में भी बदलाव किया। इसके तहत धार्मिक समुदायों के कई वर्गों के लिए धर्मांतरण यानी Proselytisation को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार की शक्तियाँ केवल उन्हीं संपत्तियों तक सीमित रहेंगी, जो विदेशी फंड से बनाई गई हैं और जिन पर FCRA लाइसेंस खत्म होने जैसी निर्धारित परिस्थितियाँ लागू होती हैं। साथ ही, ऐसे मामलों में सरकार के आदेश की समीक्षा और उसके खिलाफ अपील करने का अधिकार भी मौजूद रहेगा।

पिछले कई दशकों से अमेरिका स्थित कई ईसाई प्रचारक और मिशनरी नेटवर्क भारत में चर्च स्थापित करने, गरीबों, खासकर जनजातीय और दलित समुदायों के बीच धर्मांतरण अभियान चलाने और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग करते रहे हैं। Compassion International, World Vision India और Joshua Project जैसे कई विदेशी ईसाई संगठन भारत में सक्रिय रहे हैं। इन संगठनों की गतिविधियों को धार्मिक कामों के साथ-साथ उनके मूल देशों के रणनीतिक हितों से भी जोड़ा जाता रहा है।

अब यही विदेशी और भारतीय मिशनरी संगठन FCRA संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इस कानून से उन संस्थाओं तक विदेशी फंड पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा, जिन पर भारत की धार्मिक जनसांख्यिकी बदलने और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले एजेंडे पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं।

क्या देश में आग लगाना चाहते हैं राहुल गांधी? आलाकमान के मिशन को आगे बढ़ा रहे खड़गे, मनुस्मृति को बनाया हथियार


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश में आग लगाना चाहते हैं। मई 2022 में राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस ने सैकड़ों नेताओं के साथ चिंतन शिविर का आयोजन किया था। इस चिंतन शिवर के मंच से राहुल गांधी ने देश में ‘आग’ लगाने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था,
आपको दिखेगा अब यह लड़ाई शुरू हुई है। आने वाले समय में आपको दिखेगा हिंदुस्तान में आग लगेगी।” राहुल गांधी के इस बयान के बाद सशस्त्र बलों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर लाई गई नई अग्निपथ योजना के विरोध में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पंजाब समेत कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए।

राहुल गांधी की गृहयुद्ध की धमकी-पूरे देश में आग लगने जा रही है, याद रखो
दिल्ली के रामलीला मैदान में 31 मार्च, 2024 को अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के विरोध में रैली हुई थी। इस रैली में कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गृहयुद्ध की धमकी दी थी। राहुल गांधी ने कहा था, “इस पूरे देश में आग लगने जा रही है जो मैंने कहा याद रखो यह देश नहीं बचेगा।” उन्होंने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को IPL से जोड़ते हुए ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप जड़ा। इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की सूझबूझ और धर्य ने उनकी चाहत पर पानी फेर दिया और देश जलने से बच गया।

भारत को नेपाल की तरह जलाने और सत्ता परिवर्तन की बड़ी साजिश नाकाम
राहुल गांधी की इच्छा पूरी करने के लिए साजिशों का दौर जारी है। हाल ही में नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर छात्रों को भड़काया गया। 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं, सेकुलर गुंडों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन परिसर में जबरन घुसने का प्रयास किया। लेकिन सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने सांसदों को बंधक बनाने, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह देश को जलाने के उनके खतरनाक मंसूबों और साजिशों को नाकाम कर दिया।

खड़गे की अमित शाह को धमकी, खींच कर लाएंगे, जनता के सामने दिखाएंगे
जब छात्रों की आड़ में देश में सत्ता परिवर्तन नहीं कर पाए तो राहुल गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को देश में आग लगाने के खतरनाक मिशन पर लगा दिया। क्योकि जो अध्यक्ष होते हुए भी परिवार की इजाजत के बिना कोई निर्णय नहीं ले सकता वह इतनी बड़ी बात बोलने की हिम्मत नहीं कर सकता। 30 जुलाई को राज्यसभा में चर्चा के दौरान खड़गे ने संसद भवन के सामने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। जिस तरह उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित बयान दिया, वो देश को आग में झोंकने जैसा है। खड़गे ने कहा “आप बंद कमरे में रह कर बहुत दिन तक छुप नहीं सकते। एक दिन हम बाहर खींच कर लाएंगे और जनता के सामने हम दिखाएंगे, फिर बताएंगे”

खड़गे ने देश में आग लगाने के लिए मनुस्मृति को बनाया हथियार
अपने आलाकमान राहुल गांधी के निर्देश को पालन करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में आरोप लगाया कि नए और बदले जा रहे शैक्षणिक पाठ्यक्रम में मनुस्मृति की चीजें डाली जा रही हैं। खड़गे ने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा कि वेद का उच्चारण करने पर जीभ काटने तक की बात कही गई है। वेद मंत्र धारण करने पर शरीर काटने तक की बात कही गई है। ये सब मनुस्मृति में लिखा हुआ है। खड़गे के इतना बोलते ही सदन में हंगामा मच गया। बीजेपी के सांसदों ने इसका जमकर विरोध किया। इस दौरान सभापति ने खड़गे को टोका और कहा कि मनुस्मृति का पेपर लीक बिल से क्या लेना-देना है।

खड़गे के बयान से समाज में अशांति फैल सकती है- जेपी नड्डा
सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बीजेपी की ओर से जवाब देते हुए मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि इससे समाज में अशांति फैल सकती है। उन्होंने कहा, ‘अभी जो वक्तव्य लीडर ऑफ अपोजिशन मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने दिया है। उस वक्तव्य से समाज में विद्वेश की भावना पैदा होती है। अशांति का वातावरण पैदा होता है। जहां तक मेरी जानकारी है, यह तथ्यों से परे हैं। मनुस्मृति के ओरिजनल टैक्स्ट को ऑथेंटिकेट करें। ये ओरिजनल नहीं है।”

सुधांशु त्रिवेदी ने अंबेडकर के किताब का हवाला देकर ऑथेंटिकेशन की दी चुनौती
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज विलियम जोंस ने 1790 में मनुस्मृति का ट्रांसलेशन किया। उन्होंने तीन किताबों का ट्रांसलेशन किया था।” इसके साथ ही सुधांशु त्रिवेदी ने बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की किताब को कोट किया और कई किताबों का संदर्भ दिया । उन्होंने कहा, “बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की किताब “हू वर द शूद्राज़” (Who Were the Shudras?) चैप्टर नंबर वन, पेज नंबर वन, पैराग्राफ नंबर तीन में उन्होंने लिखा है कि देयर इज नो कनेक्शन ऑफ़ मॉडर्न डेज शेड्यूल कास्ट विद द वैदिक एंड शूद्रा। बाबा साहेब अंबेडकर की किताब ‘द अनटचेबल’ उसमें उन्होंने लिखा है कि देयर वाज़ नो अनटचेबिलिटी। मैंने बाबा साहेब को कोट किया है। विलियम जोंस से पहले की किताब अवेलेबल नहीं है। इसीलिए मैंने कहा आई वांट ऑथेंटिकेशन…।” इस पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मनुस्मृति पर दिए गए खड़गे के बयान को सदन की कार्यवाही से बाहर निकालने का ऐलान कर दिया।

खड़गे की सफाई- इस तरह का दंड मनुस्मृति में नहीं पाया जाता
बीजेपी सांसदों के जबरदस्त विरोध के बाद मल्लिकार्जु खड़गे को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्हें तथ्यात्मक रूप से पता चला कि यह प्रावधान मूल मनुस्मृति में नहीं, बल्कि गौतम धर्मसूत्र में हैं। उन्हें लगा कि उनका झूठ पकड़ा गया है, तो फिर आधारहीन तथ्यों को लेकर सफाई देने चले आए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई देते हुए खुद लिखा कि इस तरह के कठोर प्रावधान गौतम धर्मसूत्र के हैं। इस तरह का दंड मनुस्मृति में नहीं पाया जाता। इनका उल्लेख गौतम धर्मसूत्र (अध्याय 12, छंद 4-6) में किया गया है। खड़गे की इस सफाई के बाद स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी सामाजिक विद्वेश पैदाकर दलितों और सवर्णों के बीच गृहयुद्ध कराना चाहते हैं। हिन्दुओं को विभाजित कर सत्ता में आना चाहते हैं।

हिन्दू विरोधी कांग्रेस- दलित वोट बैक के लिए प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रंथों का अपमान
दलित वोट बैंक पर कब्जा करने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जाने को तैयार है। दलितों को गुमराह करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है। इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ कर अपने सियासी एजेंडे के अनुसार पेश कर रही है। दरअसल, मनुस्मृति में शूद्रों के बारे में जो भी लिखा है उसे लेकर विद्वानों, इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों के बीच अलग-अलग विचार हैं। एक पक्ष इसे पूरी तरह भेदभाव करने वाला मानता है तो दूसरा पक्ष इसे गुण-कर्म आधारित काम के बंटवारे की तरफ देखता है। साथ ही उनका यह भी तर्क है कि पाठ में सदियों से कई संशोधन हुए हैं और बाद में इसकी मूल सामग्री को बदल दिया गया होगा। कई शोधकर्ताओं ने इस बात का तर्क दिया है कि बाद के समय में बड़ी संख्या में छंद जोड़े गए। इस तरह अलग-अलग कालखंडों में रचे गए हिन्दू धर्मग्रंथों से समाज, संस्कृति और विचारों में समय-समय पर हुए बदलाव की पूरी जानकारी मिलती है।

राहुल पर एक साल में अराजकता के द्वारा सत्ता परिवर्तन करने का आरोप
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी राहुल गांधी पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “निरंतर चुनावों में अपनी पराजय के कारण कांग्रेस पार्टी ना सिर्फ मानसिक हताशा के दौर से गुजर रही है…परंतु उसी के साथ एक बहुत खतरनाक षड्यंत्र का हिस्सा होती जा रही है। राहुल गांधी का बयान समाचार पत्रों में आया है। उन्होंने कहा है कि एक साल के अंदर अराजकता के द्वारा यह सत्ता का परिवर्तन होगा। इससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी के लिए कहा था कि अब ये कांग्रेस पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि मुश्लिम लीगी, माओवादी कांग्रेस में तब्दील हो गई है। केरल में मुस्लिम लीग के साथ सत्ता में आने वाली कांग्रेस और ये हम नहीं कह रहे हैं। बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम लीग बन गई है।”

राहुल गांधी की थी भविष्यवाणी- अगले एक साल में पीएम मोदी की विदाई तय
दरअसल,  मई 2026 में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि यह सरकार सालभर से ज्यादा नहीं टिकने वाली है। हालांकि उन्होंने इसका कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक हालात बदल रहे हैं। इसी वजह से देश में महंगाई और आर्थिक असंतोष बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में मोदी सरकार की विदाई का कारण बनेगा। इस बीच बैठक में कुछ नेताओं ने मुस्लिम शब्द के बजाय अल्पसंख्यक शब्द इस्तेमाल की अपील की, जिस पर राहुल गांधी ने असहमति जताते हुए कहा कि डरना क्यों, जिस वर्ग के साथ अन्याय हो उसके साथ खुलकर खड़े होना है।

राहुल गांधी की भविष्यवाणी कितनी सच होगी, यह तो भविष्य के गर्त में हैं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री मोदी को हटा नहीं पाए। अब वह देश को जलाकर और अराजकता पैदा कर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं। आइए एक नजर डालते हैं राहुल गांधी ने कब कब देश को जलाने का प्रयास किया है…

तरुण तेजपाल को हाई कोर्ट से 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा; सुप्रीम कोर्ट से स्टे होगी, फिर कुछ वर्ष और मामला लटकेगा

सुभाष चन्द्र 

तरुण तेजपाल “तहलका पत्रिका” का संस्थापक एडिटर हुआ करता था। इस व्यक्ति ने भाजपा के एक ईमानदार पहले दलित अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को फर्जी स्टिंग ऑपरेशन में फंसाया था तेजपाल कांग्रेस का चहेता था ये स्टिंग ऑपरेशन उसने 23 दिसंबर 2000 से लेकर 7 जनवरी, 2001 तक किए और 13 मार्च, 2001 को जारी किए थे शायद इसलिए कि मई, 2021 में चुनाव होने थे तेजपाल ने बंगारू लक्ष्मण पर कलंक लगाया और आज उस पर लक्ष्मण से भी कहीं बड़ा कलंक लग गया कहीं तो हिसाब पूरा करते हैं कर्म

आप काल चक्र को देखिए - वर्ष 2000 से 13 साल बाद 2013 में तरुण तेजपाल ने कांड किया और आज 13 साल बाद ही उसे सजा हुई है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
2013 में गोवा में तेजपाल की अपनी ही एक साथी ने उस पर लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया केस 8 साल चला जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 8 हफ्ते में फैसला होना चाहिए  

21 मई, 2021 को गोवा की सेशन जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को आरोपमुक्त कर दिया मैंने अपने 28 अप्रैल, 2021 में लिखा था कि शायद उसे बचा लिया जाएगा ऐसा लिखने का कारण था कि क्षमा जोशी द्वारा निर्णय सुनाने की तिथियों को बार बार बदलना केस की सुनवाई 8 मार्च 2021 को पूरी हो गई और फैसला सुनाने की तारीख 27 अप्रैल तय की जज साहिबान ने लेकिन बिना किसी कारण उसे आगे बढ़ा कर 12 मई कर दिया और उस दिन भी फैसला सुनाए बिना तिथि 19 मई कर दी अब 19 मई को कह दिया गया कि कोर्ट में बिजली की समस्या है और तब 21 मई को तेजपाल को बरी कर दिया गया 

मेरी शंका निराधार नहीं थी बार बार फैसले की तारीख बदलना फैसले के लिए सौदेबाजी की तरफ इशारा करता है 

गोवा सरकार तब ही बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में अपील में चली गई और आज 5 साल बाद हाई कोर्ट की गोवा पीठ के Justices Dr. Neela Gokhale और  Amit Jamsandekar ने ट्रायल कोर्ट के तेजपाल को बरी करने के आदेश को पलट दिया और उसे IPC के section 376 और 354A में दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई लेकिन तेजपाल को 4 सप्ताह में अपील करने/जेल में सरेंडर करने का समय दे दिया

अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो जरूर और मुझे पूरा भरोसा है सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगा देगा और उसे जमानत पर भी रखेगा लेकिन अपील पर सुनवाई कब होगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता तेजपाल 13 साल से बाहर है और अब सजायाफ्ता होने के बाद भी बाहर ही रहेगा 

तेजपाल ने तो अपनी वयस्क महिला साथी के साथ दुष्कर्म किया था, हमारा सुप्रीम कोर्ट तो 4-5 साल की बच्चियों से बलात्कार करने वालों पर भी नरम रुख अपना लेता है

तरुण तेजपाल ने अपराध के अगले दिन ईमेल लिख कर पीड़िता से अपने कुकृत्य को स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी थी बड़े आश्चर्य की बात है इतने बड़े सबूत को भी सेशन जज क्षमा जोशी ने नज़रअंदाज कर दिया

फैसले की तारीख बदलना MJ Akbar भी भुगत चुका है जिसके बारे में आगे लिखूंगा

गालीबाजों के बॉस अरविंद केजरीवाल का दोगलापन : जंतर मंतर गालीबाज लड़की को समर्थन, पंजाब की बेटियों पर लाठियां

पंजाब में छात्राएं फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों को लेकर सड़क पर हैं। भगवंत मान सरकार की अनदेखी की वजह से उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राएं पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफा, सीबीआई जांच कराने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रहे हैं। लेकिन भगवंत मान सरकार और पंजाब के सुपर सीएम अरविंद केजरीवाल को उनकी परवाह नहीं है। अरविंद केजरीवाल को उन गालीबाजों और अराजक तत्वों की फिक्र है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देते हैं, जो समाज और देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं। यहां तक कि अरविंद केजरीवाल गालीबाजों का बॉस बनकर उन्हें राजनीतिक और कानूनी संरक्षण दे रहे हैं।

पंजाब की बेटियां सड़क पर, केजरीवाल गालीबाजों के संग
गालीबाजों के समर्थन में उतरने और झूठ बोलने की वजह से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि आज पंजाब की लड़कियों को केजरीवाल की जरूरत है, लेकिन केजरीवाल पंजाब छोड़कर भाग खड़े हुए हैं। केजरीवाल के पास गालीबाज लड़कियों के समर्थन में वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का समय है, लेकिन आज पंजाब की बेटियां सड़क पर है, उनसे बात करने के लिए केजरीवाल के पास समय नहीं है। लोगों का कहना है कि गालीबाज लड़कियों को सुरक्षा की गारंटी देने वाले अरविंद केजरीवाल पंजाब के लड़कियों से नाइंसाफी कर रहे हैं।  केजरीवाल को पंजाब की लड़कियां और उनकी मांगें दिखाई नहीं दे रही हैं।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे पर अड़ी पंजाब की लड़कियां
पंजाब की लड़कियां कह रही हैं कि हम लोग पंजाब सरकार से जवाब चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान जंतर मंतर पर कहा था कि अगर पंजाब में कोई भी पेपर लीक होता है तो शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफ दिलवा देंगे। दो दिन पहले फार्मेसी का पेपर लीक हुआ तो हम चाहते हैं कि हरजोत सिंह बैंस इस्तीफा दें। अब लड़कियों की मांग है कि पंजाब सरकार को पेपर लीक की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और हरजोत सिंह बैंस को इस्तीफा देना चाहिए।

छात्राओं के समर्थन में ABVP का चंडीगढ़ में प्रदर्शन
सड़क पर प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं के समर्थन में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी आ गई है। उसने 2 अगस्त को चंडीगढ़ में पंजाब भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया और पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की।

पंजाब की छात्राओं के समर्थन में उतरी बीजेपी 
इससे पहले 30 जुलाई को पंजाब में फार्मेसी परीक्षा सहित कई परीक्षाओं में अनियमितता व पेपर लीक का आरोप लगाते हुए दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के कार्यालय के पास प्रदर्शन किया। बैरिकेड तोड़कर कार्यालय तक पहुंचने का प्रयास कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर मंदिर मार्ग थाने ले गई। लगभग एक घंटे बाद चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया गया।

केजरीवाल नहीं ले रहे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “यह प्रदर्शन पेपर लीक को लेकर है। जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, मैंने भी हरजोत सिंह बैंस से कहा है कि उन्होंने इसमें शामिल लोगों के साथ मंच साझा किया था और वहां जवाबदेही की मांग की थी। क्या आपका ज़मीर आपको यहाँ भी जिम्मेदारी लेने के लिए नहीं कहता…”

गालीबाज रुचिका को केजरीवाल का समर्थन
दरअसल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान भद्दी गालियां देने वाली लड़की रुचिका सिंह का समर्थन किया है। केजरीवाल ने इसके साथ ही यह भी कहा है कि रुचिका को अगर किसी भी तरह की जरूरत महसूस हो तो वे उन्हें बता सकती हैं। रुचिका को डरा-धमका कर माफी मंगवाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक रुचिका सिंह को झुकाया तो दस रुचिका सिंह पैदा हो गईं।

केजरीवाल ने युवाओं में डर पैदा करने का लगाया आरोप 
केजरीवाल ने 2 अगस्त, 2026 को अपने ‘एक्स’ हैंडल पर रुचिका को समर्थन दिया। केजरीवाल ने लिखा ‘मोदी जी ने जो रुचिका सिंह के साथ किया, वो एक कायराना हरकत है। आप रुचिका के साथ ऐसा करके युवाओं में डर पैदा करना चाहते हो। पर युवाओं के मन से अब आपका और आपकी पुलिस का डर निकल चुका है। आप एक रुचिका को डराते हो, सोशल मीडिया पर दस और रुचिका आपके खिलाफ वीडियो डाल रही हैं। रुचिका, मैं आपके साथ हूं। कभी किसी भी तरह की जरूरत हो, आप हमें बताना।’  

केजरीवाल ने अच्छे वकील देने की पेशकश की
केजरीवाल ने कहा ‘मोदी जी कह रहे हैं कि मैंने सबको माफ किया। रुचिका सिंह बेचारी 15 साल की बच्ची है। उसको पुलिस के जरिए ट्रोल आर्मी के जरिए धमकियां दी गईं डराने की कोशिश कर रहे हैं। तो मोदी जी को मैं कहना चाहता हूं कि जब आपके नेता, ट्रोल आर्मी और कार्यकर्ता गालियां देते हैं तब आपको कुछ नहीं होता। दूसरों को गालियां देते हैं तब कुछ नहीं होता। एक बहुत बड़ी बात ये हुई है कि इस आंदोलन ने लोगों के मन में मोदी जी के लिए डर था वो डर खत्म कर दिया। अब मोदी जी पूरी ताकत लगा कर लोगों के मन में वो डर दोबारा पैदा करना चाहते हैं। लेकिन वो डर हो नहीं रहा। बच्चों के मन से डर खत्म हो गया है मोदी जी का।’
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा’ मैं उस बच्ची (रुचिका) को यह कहना चाहता हूं कि पूरा देश आपके साथ है बच्चे। मैं पर्सनली आपको सपोर्ट करता हूं और अगर आपको कभी भी किसी भी चीज की जरूरत हो अच्छे वकील की जरूरत और कोई आपको तंग करे हम आपको हमेशा सपोर्ट करेंगे।’

रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी माफी
जिस रुचिका सिंह को लेकर अरविंद केजरीवाल बात कर रहे हैं, वह सोशल मीडिया में खुद वीडियो जारी कर माफी मांग रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर गालीबाज प्रदर्शनकारियों के मामले में किसी प्रकार का एफआईआर दर्ज न करने की बात कही। पिछले दिनों इंस्टाग्राम रील के जरिए उन्होंने इस प्रकार के मामलों में आरोपी छात्र-युवाओं को माफ करने की बात कही। इसके बाद रुचिका सिंह का बयान सामने आया। उसने प्रधानमंत्री मोदी से दिल से माफी मांगने की बात कही। रुचिका ने कहा कि मैंने जो किया वो माफी लायक नहीं था। मैंने बहुत गांदी चीजें बोली हैं। मेरी ये पहली और आखिरी गलती है, दोबारा ऐसा नहीं करूंगी। मैं पूरे देश से माफी मांगता हूं। इतना शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरे भी नहीं उठा पा रही हूं।

केजरीवाल की खुली पोल, रुचिका ने कहा- मेरे पर कोई दबाव नहीं था
छात्रा रुचिका सिंह ने मीडिया से बातचीत के क्रम में सोशल मीडिया पर डाले गए माफी के वीडियो पर बयान दिया। उसने कहा कि मैंने दिल से माफी मांगी है। रुचिका से पूछा गया कि क्या आप पर दबाव था कि आप माफी मांगें। आप पर कोई प्रेसर बना रहा था या आपने दिल से माफी मांगी है। इस पर रुचिका ने कहा कि मैंने दिल से माफी मांगी है। मैंने जो वर्ड्स यूज किए थे, एक्चुअली वे अच्छे नहीं थे। मुझे उस चीज का बहुत गिल्ट है। मैंने तभी माफी मांगी, क्योंकि वे वर्ड्स मैं खुद नहीं सुन पा रही थी। फ्लो-फ्लो मैंने इतना कुछ बोल दिया, मुझे उस टाइम पर यह रियलाइज भी नहीं हुआ। मैंने जब वह वीडियो देखा तो मुझे लगा कि यह अच्छा नहीं हुआ।

रुचिका की मां ने कहा- बिना डर के, मैं दिल से बोल रही हूं
प्रधानमंत्री मोदी के माफ करने के फैसले पर रुचिका की मां ने आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को ‘जीवनदान’ दिया है। प्रधानमंत्री ने बदले की कार्रवाई के बजाय माफी का रास्ता चुना। मीडिया से बातचीत के दौरान रुचिका की मां ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश का अखंड विश्वास हैं। चाहे कोई यह बोले कि डर कर बोल रही है। उन्हें मैं आत्मा नहीं दिखा सकती। मैं दिल से बोल रही हूं, भगवान राम को साक्षी मानकर बोल रही हूं कि मुझे यकीन नहीं था, मेरी बेटी इस तरीके के शब्दों का प्रयोग करेगी। मां ने आगे कहा कि मुझे नहीं लगता था, यह इतने गंदे शब्द यूज भी कर सकती है। इसकी शुरुआत इंस्टाग्राम से हुई।

प्रदर्शन में ऐसे बच्चों का सिर्फ फायदा उठाते हैं- रुचिका की मां
रुचिका की मां ने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं क्या बोलूं। ये बेटी नहीं, बल्कि देश के बहुत सारे बच्चे इस समय इस उम्र के जितने भी बच्चे है दस से बीस वाले सारे ही इस स्थिति में आ चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी से मेरा विनम्र निवेदन है कि कृपया इंस्टाग्राम,फेसबुक नए बच्चों के लिए दस से बीस साल के बच्चों के लिए रोक दिया जाए। इनको सिर्फ पढ़ने दिया जाए। ऐसे प्रदर्शन में छोटे बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाए। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका जाए। इनका सिर्फ फायदा उठाया जाता है।


झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार क्यों हैं खामोश? कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब गला फाड़ रहे थे

रवीश कुमार… यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। खुद को निष्पक्ष पत्रकार कहने वाले रवीश कुमार असल में प्रोपोगेंडा की दुकान चलाने वाले पत्रकार हैं। ये अपनी छवि चमकाने और मोटी कमाई करने के लिए सिर्फ वही मुद्दे उठाते हैं जिससे इनका एजेंडा पूरा हो सके। जब बात इनके आकाओं को खुश करने की हो, तो यह अपनी कलम और माइक का पूरा इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जहाँ इनके मालिकों को गुस्सा आने का डर होता है, वहाँ इनकी बोलती बंद हो जाती है। दिल्ली में हुए हालिया कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और झारखंड के पेपर लीक मामले पर इनकी चुप्पी इस दोमुँही पत्रकारिता का सबसे बड़ा सबूत है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब बहाए थे आँसू

 दिल्ली में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान रवीश कुमार का असली रंग पूरी तरह से सामने आ गया था। इस प्रदर्शन को हवा देने के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का जमकर इस्तेमाल किया। उनके यूट्यूब चैनल पर सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़े 15 से ज्यादा वीडियो भरे पड़े हैं। इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम पर अलग से Reels शेयर की गईं और X पर लगातार भ्रामक पोस्ट किए गए।

इन वीडियोज के जरिए आम जनता को भड़काने की पूरी कोशिश की गई। प्रधानमंत्री को निशाना बनाया गया और विरोध प्रदर्शन के नाम पर उत्पात मचाने वाले दंगाइयों का खुला समर्थन किया गया। हद तो तब हो गई जब दिल्ली पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले उपद्रवियों को रवीश कुमार ने बेचारा और लाचार साबित करते हुए बचाने की पूरी कोशिश की। सच्चाई से कोसो दूर रहकर उन्होंने इस पूरे ड्रामे को ऐसे दिखाया जैसे वे कोई बहुत बड़े क्रांतिकारी हों। हाथों में पत्थर-लाठी लिए और मुँह में भरी गाली-गलौज के साथ उत्पात मचाने वालों को ये छात्र कहते नजर आए थे।

इसके अलावा, रवीश कुमार ने सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। संसद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और जवानों पर पथराव करने वाले, मॉब लिंचिंग करने वाले, सड़क पर घेरकर मारपीट करने वाले और तो और हथियार लहराकर धमकी देने वाले उपद्रवियों को प्रोपेगेंडाई रवीश कुमार छात्र कहते रहे। रवीश कुमार ने एक X पर पोस्ट, Video या अपनी Reel में दिल्ली पुलिस का कहीं बचाव या उनके काम की सराहना नहीं की थी। उल्टा देश की सुरक्षा करने वालों को ही अपराधी कहकर लोगों को घुमराह करते रहे।

झारखंड पेपर लीक पर अचानक क्यों सूंघ गया साँप?

रवीश कुमार का एक नजरिया यहाँ भी देख लेते हैं। जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन खत्म हुआ, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, दिल्ली का माहौल जमकर खराब किया, उसके बाद इन भाईसाहब को साँप सूंघ गया। और अब देश में युवाओं के भविष्य से जुड़ा झारखंड पेपर लीक का गंभीर मुद्दा सामने आया, रवीश कुमार की सारी पत्रकारिता हवा हो गई। इनके किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झारखंड से जुड़ा एक भी शब्द लिखा नहीं मिलेगा।

रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल को खंगालकर देखा। उनके पिछले कुछ दिनों के वीडियोज की लिस्ट देखी। पिछले 8 दिनों में उनके चैनल पर अपलोड किए गए आखिरी 9 वीडियोज के टॉपिक आपको इन मुद्दों पर मिलेंगे, जिनमें उनकी पत्रकारिता चमकेगी। इसमें प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, संसद से क्यों गायब रहे अमित शाह?, क्यों डूब रहा असम?, अमित शाह इस्तीफा दें- राहुल गाँधी, यही हैं हमारे नए शिक्षा मंत्री, संसद में पेपर लीक पर बहस, पुलिस हिंसा पर नई रिपोर्ट, जेनरेशन गटर!? यह क्या कंगना?, झुक गई बिहार सरकार, जेन जी होंगे रिहा और भगवा भरोसे बीजेपी…

इन सभी वीडियोज में आपको सरकार को घेरने वाले तमाम मसाले मिल जाएँगे, लेकिन झारखंड के छात्रों के दर्द पर एक भी वीडियो नहीं मिलेगा। बता दें कि फिल्हाल रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल पर 14.8 मिलियन सब्सक्राइबर है और कुल वीडियो 1.6K डाली गई है। बात करें इंस्टाग्राम की तो रवीश कुमार के इंस्टाग्राम पर फॉलोवर्स 4.9 मिलियन है और कुल पोस्ट 2900 से ज्यादा है। इसके अलावा, रवीश कुमार के X हैंडल (पहले ट्विटर) पर फॉलोवर्स की संख्या 4.2 मिलियन है और 49.2K पोस्ट है।

फायदे की पत्रकारिता और आकाओं को खुश करने की मजबूरी

सवाल यह उठता है कि आखिर झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार ने पूरी तरह चुप्पी क्यों साध रखी है? इसका सीधा सा जवाब है कि इस मुद्दे से उन्हें या उनके आकाओं को कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला है। अगर वे इस पर बोलेंगे, तो शायद उनके अपने लोग ही नाराज हो जाएँगे।

रवीश कुमार केवल उन्हीं मुद्दों पर अपना गला फाड़ते है जहाँ उन्हें लगता है कि इससे बीजेपी को बदनाम किया जा सकता है। जहाँ हिंसा करने वालों या हंगामा मचाने वालों को हीरो बनाया जा सकता है, वहाँ ये सबसे आगे रहते हैं। लेकिन जहाँ सचमुच देश के युवाओं का नुकसान हो रहा हो, वहाँ ये अपनी आँखें मूँद लेते हैं।

इस पूरी स्थिति से यह साफ हो जाता है कि रवीश कुमार जैसे लोग पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ अपना दुकान चला रहे हैं। दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, दंगाइयों के सिर पर हाथ रखना और पुलिस का अपमान करना इनके एजेंडे का हिस्सा था। लेकिन झारखंड के युवाओं के भविष्य की जब बात आई, तो इनका मौन इनकी असलियत बयाँ कर रहा है। जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है और ऐसे चेहरों के दोगलेपन को अच्छी तरह पहचानती है।

‘अभिजीत दिपके-सौरव दास पर POCSO लगाकर हो जीरो FIR’ : बंगाल की महिला वकील ने क्राइम ब्रांच में शिकायत देकर की माँग; नाबालिग बच्चियों को आंदोलन में क्यों शामिल होने दिया?

                            दिपके- दास पर जीरो एफआईआर दर्ज करने की माँग (फोटो साभार-X@abp)
NEET पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर हुए सीजेपी के विरोध- प्रदर्शन में बच्चों के शामिल होने पर विवाद शुरू हो गया है। वकील रिंकी चटर्जी ने सौरव दास, अभिजीत दिपके और CJP के विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ POCSO एक्ट की धाराओं के तहत जीरो FIR दर्ज करने की बंगाल के सिलीगुड़ी क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि प्रदर्शन में 12 साल की बच्ची को शामिल क्यों किया गया था? अगर हिंसक हुए आंदोलन में बच्ची या बच्चियों की मौत हो गयी होती कौन जिम्मेदार होता? 

वैसे ऐसी ही FIR हर उस प्रदर्शन/पत्थरबाजों पर भी हो जहाँ छोटे बच्चों और महिलाओं को ढाल बनाकर आगे कर दिया जाता है ताकि उनकी मौत होने पर सियासती रोटियां और लाशों पर बैठ मालपुए खाए जा सके।

  

एडवोकेट रिंकी चटर्जी सिंह के मुताबिक, “विरोध प्रदर्शन में बच्चों को शामिल करने के लिए आयोजकों के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 13, 14, और 15 और BNS की धारा 153 के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।”

वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन हो रहा था। इस दौरान लाठीचार्ज हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक लाइव वीडियो पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि उन्होंने युवाओं को उनकी भद्दी गालियों के लिए माफ कर दिया है और उनके भविष्य को देखते हुए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वकील के मुताबिक, CJP के ऑर्गनाइजर अभिजीत दिपके और सौरव दास ने बाद में 12 साल की लड़कियों पर पुलिस के लाठीचार्ज और उनके साथ दुर्व्यवहार को लेकर पीएम मोदी से माफी की माँग की और इसको लेकर वीडियो पोस्ट किया।

इसको लेकर वकील रिंकी चटर्जी ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी छोटी बच्चियों को विरोध प्रदर्शन में कौन लेकर आया और जिस उम्र में सुरक्षा देने की जरूरत होती है, उस उम्र में उसे विरोध प्रदर्शन में शामिल कैसे किया गया। उन्होंने इसके लिए आयोजकों पर पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की माँग की।

उन्होंने सवाल किया कि विरोध प्रदर्शन को कौन फंड कर रहा है, और पैसा कहाँ से आ रहा है? यह बिल्कुल ‘डीप स्टेट’ का काम है। उनका कहना है कि इसमें कुछ दलाल और देशद्रोही शामिल हैं। हमारे अपने देश के लोग जो इसका भला नहीं चाहते। वे सभी मोदी सरकार को गिराने की कोशिश में एक साथ आ गए हैं।

दरअसल जंतर मंतर के प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों के शामिल होने पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि पुलिस के लाठीचार्ज में इनमें से कई बच्चे घायल हुए हैं।