केरलम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने वामपंथियों के गढ़ में सेंध लगाई है। एबीवीपी ने कॉलेज यूनियन चुनावों में सभी सीटें जीतकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज यूनियन का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है।
INDIA FIRST
केरलम में भी छात्र संघ चुनाव में ABVP ने वामपंथियों के गढ़ में फहराया भगवा
राजनीति छोड़ कांग्रेस बनी ‘जोकरों की पार्टी’, राहुल गांधी बने ‘रिंग मास्टर’, किया ‘मां’ का अपमान
मसखरे चेहरे बदलते रहते हैं, पर नौटंकी की घटिया पटकथा वही रहती है। 🤡 pic.twitter.com/IlSleynUCg
— sumit kalra (@sumit1kalra) September 20, 2026
राहुल गांधी का नैतिक पतन, गिरता राजनीतिक स्तर
राहुल गांधी का नैतिक पतन हो चुका है। इसकी वजह से उनकी राजनीति का स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है। इसका सबसे वीभत्स रूप इंदौर में देखने को मिला, जब छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि के साथ मंच पर कुछ बातें कहीं और इशारे किए, जिनसे साफ पता चलता था कि वे प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ा रहे थे। सोशल मीडिया में कांग्रेस के एक्स हैंडल से शेयर किए गए एक वीडियो में कॉमेडियन पुलकित को विदेशी नेताओं के साथ बातचीत करने के प्रधानमंत्री मोदी के अंदाज की नकल करते हुए देखा जा सकता है।
My friend!! Great Harassment!! 🤣 pic.twitter.com/PqetUPxUWp
— Congress (@INCIndia) September 19, 2026
नारी शक्ति और मां का सार्वजनिक तौर पर अपमान
कॉमेडियन पुलकित के एक्ट में प्रधानमंत्री मोदी की एक रैली की उस घटना का भी जिक्र था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपना भाषण रोककर भीड़ में मौजूद एक बुज़ुर्ग महिला के लिए कुर्सी मंगवाई थी। पुलकित ने प्रधानमंत्री मोदी की नकल करते हुए कहा, “मां को कुर्सी दो, मां,” और फिर “सेटिंग, माय फ्रेंड” कहा। पुलकित के उस घटना का जिक्र करने पर राहुल गांधी को बेशर्मी के साथ हंसते हुए देखा गया। जिस तरह राहुल गांधी ने नारी शक्ति को सार्वजनिक तौर पर अपमान और मजाक का पात्र बनाया, उसकी अपेक्षा एक सभ्य और सही सोच वाले व्यक्ति से नहीं की जा सकती।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की स्वर्गीय माताजी के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी और उस पर राहुल गांधी जी का हंसना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं पीड़ादायक है।
— Arun Govil (@arungovil12) September 19, 2026
मां कभी राजनीति का विषय नहीं हो सकती। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी की स्वर्गीय माता के प्रति अमर्यादित टिप्पणी… pic.twitter.com/EXYErIrXdO
मोदी ने दिया एक मां को सम्मान, राहुल ने किया अपमान
राहुल गांधी के इस अपमानजनक कृत्य के लिए बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने एक बुजुर्ग मां को सम्मान और अपनापन दिया, दूसरी तरफ राहुल गांधी ने अपने कार्यक्रम में उनका मजाक उड़ाया। यही फर्क है संस्कार और दिखावे की राजनीति में। जिस उम्र में सम्मान मिलना चाहिए, वहां राहुल गांधी का यह शर्मनाक रवैया उनकी सोच के बारे में क्या कहता है?”
एक तरफ़ पीएम मोदी ने एक बुज़ुर्ग माँ को सम्मान और अपनापन दिया, दूसरी तरफ़ राहुल गांधी ने अपने कार्यक्रम में उनका मज़ाक उड़ाया।
— BJP (@BJP4India) September 19, 2026
यही फर्क है संस्कार और दिखावे की राजनीति में। जिस उम्र में सम्मान मिलना चाहिए, वहाँ राहुल गांधी का यह शर्मनाक रवैया उनकी सोच के बारे में क्या कहता है?… pic.twitter.com/wLMXVReASY
मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं- सीएम धामी
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “प्रधानमंत्री की स्वर्गीय माताजी के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे जाएं और उस पर राहुल गांधी हंसें, यह दृश्य बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक है। मां राजनीति का विषय नहीं होती। मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन प्रधानमंत्री जी की स्वर्गीय माताजी को लेकर कही गई अमर्यादित बात पर हंसना आपके राजनीतिक संस्कारों को स्वयं उजागर करता है। राहुल गांधी जी, राजनीतिक विरोध में मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ देना न लोकतंत्र है, न सेवा और न ही संस्कार। देश की मातृशक्ति सब देख रही है। ऐसी असंवेदनशीलता और उपहास किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।”
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की स्वर्गीय माताजी के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे जाएं और उस पर राहुल गांधी हंसें—यह दृश्य बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 19, 2026
मां राजनीति का विषय नहीं होती। मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन… pic.twitter.com/EYbIquTwhy
कांग्रेस बनी मसखरों और जोकरों की पार्टी
राहुल गांधी पर भारतीय सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाजों का उपहास उड़ाने तथा उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाने का आरोप लगातार लगाया जाता रहा है। वे अक्सर अलग-अलग मंचों पर भारतीय परंपराओं और मान्यताओं को विवादों में घसीटते हैं। वे भारतीय विरासत के सकारात्मक पहलुओं को दरकिनार कर केवल आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं। वे सुधार के नाम पर सनातन धर्म और परंपराओं को मजाक बनाते हैं। यह इसलिए होता है, क्योंकि राहुल गांधी के सलाहकारों, मुख्य रणनीतिकारों और कोर ग्रुप में ऐसे लोग (सैम पित्रोदा और लेफ्ट-लिबरल रुझान वाले विचारकों) शामिल है, जो पश्चिमी या वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं और भारतीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक चेतना को लेकर संवेदनशील नहीं हैं।
राहुल गांधी कैसे बने मसखरों के रिंग मास्टर ?
पिछले तीन लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी का कोर ग्रुप पूरी तरह असफल रहा है। अगर बीजेपी के आंकड़ों को माने तो राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी लगभग 99 चुनाव हार चुकी है। 12 साल से केंद्र की सत्ता से दूर होने के कारण राहुल गांधी और उनके कोर ग्रुप की हताशा बढ़ती जा रही है। इसलिए कोर ग्रुप अपनी असफलता से युवाओं का ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी को रिंग मास्टर बना दिया है। उनकी टीम में ऐसे चुनिंदा मसखरों और स्टैंड-अप कॉमेडियनों (पुलकित मणि और श्याम रंगीला) को शामिल किया है, जो उनकी विचारधारा से प्रेरित है और कोर ग्रुप की पटकथा को युवाओं के बीच परोस रहे हैं।
Do chutxiya congress ki ma choxdte hue aise banayege Rahul ko PM ye log pic.twitter.com/1OkNpK20Ur
— Gareeboo (@GareeboOP) September 21, 2026
स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि की असलियत
पुलकित मणि एक स्टैंड-अप कॉमेडियन हैं जो अक्सर अश्लील इशारे करते हैं और लोगों को हंसाने के लिए चौंकाने वाली हरकतों का सहारा लेते हैं। वे राजनीतिक जगत के नवीनतम चर्चित विषयों को चुनते हैं ताकि लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलें और उनके इर्द-गिर्द अश्लीलता फैलाकर व्यूज़ और ऑनलाइन ध्यान आकर्षित कर सकें। इंस्टाग्राम पर वे @hunnywhoisfunny हैंडल से काफी मशहूर हैं, जहां उन्होंने अपने बेतुके कॉमेडी वीडियो और अश्लीलता से भरपूर राजनीतिक व्यंग्य से भरे कंटेंट के जरिए प्रसिद्धि हासिल की है। उनके वीडियो में राजनीतिक हस्तियों और सार्वजनिक हस्तियों की अजीबोगरीब और आपत्तिजनक नकलें मुख्य रूप से देखने को मिलती हैं।
छात्रों की गूंज का ब्रांड एंबेसडर - पुलकित मणि
— Singh'am (@ASD24X7) September 20, 2026
ये बंदा राहुल गांधी का बहुत खास आदमी है #ChhatronKiGoonj pic.twitter.com/qbwjPq4vCo
हिंदू देवताओं और पुजारियों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी
जिस तरह राहुल गांधी और उनके नेता देवी-देवताओं का अपमान करते हैं, उसी तरह पुलकित मणि का हिंदू देवताओं और पुजारियों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने का इतिहास रहा है। एक वायरल वीडियो में, उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “भगवान, अगर मैं तुझसे कुछ माँगू… तो मैं भक्त कैसा?” और “और अगर मुझे तुझसे कुछ मांगना ही पड़े… तो तू भगवान कैसा? भाई, अगर मंदिर से दान पेटी हटा दिया जाए… तो नाराज कौन होगा? भगवान या पुजारी?”
ये सस्ता कॉमेडियन पुलकित मणि है!
— Shubham Shukla (@Shubhamshuklamp) September 20, 2026
जिस तरह की भाषा ये भगवान और पुजारी जी के लिए कर रहा है क्या ऐसा ही ये किसी अन्य धर्म, मजहब, मौलवी पादरी के लिए भी कर सकता है?
ऐसे सस्ते छपरी कॉमेडियन के साथ मंच शायरी करने की राहुल गांधी की भला क्या मजबूरी रही होगी? https://t.co/Tm5fYsDQOA pic.twitter.com/Avx4n1uTVU
ये हमारे संस्कार है, सभ्यता है हमारी- पुलकित मणि
पुलकित मणि अक्सर अपने कार्यक्रमों के लिए अश्लीलता से जुड़े विषयों को चुनते हैं। एक वायरल क्लिप में, वह कहते हैं, “एक चीज़ होती है हार्डकोर पोर्न,” और फिर कहते हैं, “फिर आता है सॉफ्ट कोर, उल्लू… ऑल्ट बालाजी… लेकिन पोर्न बनाना हमारे बस की बात नहीं है, भाई।” वह आगे मज़ाक करते हुए कहते हैं, “भाई, भारतीय पोर्न देखना नामुमकिन है। पहली बात तो यह है कि उसमें हर कोई बिल्कुल मेरे जैसा दिखता है। अब, अगर आप मुझसे लड़कियों को देखने के लिए कहेंगे, तो मैं उनके बारे में भी बात करूंगा। अगर मुझे सच में भारतीय पोर्न देखना होता, तो मैं खुद नंगा क्यों नहीं खड़ा हो जाऊं, ये हमारे संस्कार है, सभ्यता है हमारी?”
@MahuaMoitra No wonder TMC wipped out from West Bangal.
— Omkar Rathore (@omiverseglobal) September 20, 2026
Now see this video of Pulkit mani, do you support it. Just tell us?? https://t.co/tnqbZGtRx1 pic.twitter.com/elmYkJO5PI
विवाद के बाद पुलकित मणि का स्टैंड-अप शो रद्द
इंदौर में विवादास्पद कॉमेडी और लगातार मिल रही धमकियों के बाद पुलकित मणि ने उत्तर प्रदेश के नोएडा, लखनऊ और कानपुर में होने वाले अपने आगामी स्टैंड-अप शो सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिए हैं। इंस्टाग्राम पर अपने फॉलोअर्स को संबोधित करते हुए, मणि ने लिखा कि शो को “अप्रत्याशित परिस्थितियों” के कारण रद्द कर दिया गया है, और अचानक हुई असुविधा के लिए दर्शकों से माफी मांगते हुए उनके सहयोग और समझ के लिए धन्यवाद दिया।
राहुल गांधी के साथी बने कामरा, श्याम रंगीला, पुलकित
राहुल गांधी और कांग्रेस के इकोसिस्टम में कुणाल कामरा, श्याम रंगीला और पुलकित मणि जैसे स्टैंड-अप कॉमेडियन शामिल है, जो प्रधानमंत्री मोदी और हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने और उनका मजाक उड़ाने को अपना पेशा बना चुके हैं। कई बार इनकी प्रस्तुतियां और बयान मर्यादा की सीमा लांघते हैं या प्रधानमंत्री मोदी और धार्मिक भावनाओं का अनादर करते हैं। ये अपनी बेशर्म राजनीतिक कॉमेडी और हिन्दू विरोधी टिप्पणियों के कारण लगातार चर्चा और विवादों में रहते हैं।
विजयवर्गीय का तंज – भीड़ जुटाने के लिए रैपर्स और सिंगर्स की क्या जरूरत ?
मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कार्यक्रम में युवाओं को आकर्षित करने के लिए रैपर्स और सिंगर्स को आमंत्रित किए जाने के दावों पर कड़ा तंज कसा। उन्होंने मजाकिया और आक्रामक लहजे में कहा कि “भीड़ जुटाने के लिए रैपर्स या सिंगर्स की क्या जरूरत है, हमारे लिए तो राहुल गांधी खुद ही काफी हैं”।
राहुल गांधी की इंदौर में झूठ के गूंज कार्यक्रम में जब भीड़ नहीं आ रही तब भीड़ जुटाने के लिए नौटंकी डांस का सहारा लिया जा रहा है pic.twitter.com/hNCG8L4Eny
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) September 18, 2026
कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को “आम छात्र” बनाकर पेश किया
इंदौर में शनिवार 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी के झूठ की पोल खुल गई है। राहुल गांधी के सामने मंच पर छात्र बनकर प्रश्न उठाने वाले कई चेहरों की राजनीतिक पृष्ठभूमि अब चर्चा में है। कांग्रेस ने अपने ही संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को मंच पर “आम छात्र” बनाकर पेश किया। इनमें तीन छात्र तनय शर्मा, राधा मालवीय और रणजीत किसानवंशी मंच पर आए थे और अपनी समस्याएं बताईं। पड़ताल में सामने आया कि विश्वविद्यालय की बदहाली का मुद्दा उठाने वाला युवक कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़ा है, छात्रावास की समस्या बताने वाली युवती युवा कांग्रेस की पदाधिकारी है और भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठाने वाला युवक पहले से छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहा है।
मैं माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी का छात्र हूं और जब मैं वहां पढ़ने जाता हूं तो हमारे साथ भेदभाव किया जाता है।
— Congress (@INCIndia) September 19, 2026
ऐसा इसलिए क्योंकि हम सिस्टम से सवाल पूछते हैं, इसी के चलते मुझे मास्टर्स में एडमिशन नहीं दिया गया।
ये सरकार और सिस्टम सवाल पूछने वाले छात्रों को नहीं पसंद करती,… pic.twitter.com/uRv0tJbpRC
रजत गंगारेकर का एनएसयूआई से सक्रिय जुड़ाव
कार्यक्रम के बाद जब जांच और पड़ताल हुई, तो सामने आया कि खरगोन के मंडलेश्वर क्षेत्र के रजत गंगारेकर केवल एक आम छात्र नहीं हैं, बल्कि वे कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक कार्यक्रमों में कांग्रेस नेताओं तथा संगठन के पदाधिकारियों के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आईं। रजत गंगारेकर ने डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, महू को लेकर कहा था कि करोड़ों रुपये का बजट मिलने के बावजूद यहां गेस्ट फैकल्टी, पर्याप्त कक्ष और छात्राओं के लिए सुविधाएं नहीं हैं।
युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव हैं राधा मालवीय
उज्जैन की राधा मालवीय ने पीएचडी विद्यार्थियों के आवास और किराए का मुद्दा उठाते हुए पूछा था कि उद्योगों को एक रुपये में लीज पर जमीन दी जा सकती है तो विद्यार्थियों को एक रुपये में कमरा क्यों नहीं। पड़ताल में सामने आया कि वह पीएचडी छात्रा होने के साथ उज्जैन जिला पंचायत सदस्य, युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव और शाजापुर जिला प्रभारी भी हैं।
छात्रों की गूँज नही,काँग्रेसच्या गुलामांचा मेळावा? 😀
— Narendra Aher (@aher_narendra) September 19, 2026
पप्या च्या मंचावर प्रश्न विचारणारी 'निष्पाप विद्यार्थी' म्हणजे दुसरी तिसरी कोणी नसून काँग्रेसची जिल्हा सचिव राधा मालवीय आहे!
म्हणजे स्वतःच्याच कार्यकर्त्यांना बुरखा घालून विद्यार्थी बनवायचं आणि मग कॅमेऱ्यासमोर क्रांतीचा आव… pic.twitter.com/p79r0175aQ
NSUI के कार्यकर्ता निकले तनय शर्मा
भोपाल की माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के छात्र तनय शर्मा को भी मंच पर बुलाकर बातचीत कराई गई थी। वे वास्तव में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ता और पूर्व प्रवक्ता निकले। विवाद बढ़ने के बाद तनय शर्मा ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि वे वर्तमान में NSUI कार्यकर्ता हैं और पूर्व में प्रवक्ता भी रह चुके हैं।
इंदौर में @RahulGandhi और कांग्रेस का झूठ आखिरकार सामने आ ही गया है। मैंने पहले ही कहा था कि झूठ की गूंज ज्यादा दूर तक नहीं जाती है।
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) September 20, 2026
इंदौर में जिन चेहरों को आम छात्र बताकर मंच पर लाया गया है, उनमें से कुछ कांग्रेस और NSUI से ही जुड़े हैं। यह सीधे तौर पर युवाओं के नाम पर तैयार की… pic.twitter.com/jCigakRvfC
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल के साथ रंजीत किसानवंशी
देवास के खातेगांव निवासी रंजीत किसानवंशी ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। रणजीत भी कांग्रेस का कार्यकर्ता निकले हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल के साथ रंजीत की फोटो ने पोल खोल दी है। कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ उनके फोटो और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रियता भी सामने आई है।
पकड़ा गया राहुल गांधी और उनके समर्थक छात्रों का झूठ
शिक्षक भर्ती का मुद्दा दीप्ति सिंह ठाकुर ने उठाया। उन्होंने चयनित होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने की शिकायत की और वर्ग-2 तथा वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग रखी। आंदोलन से जुड़े नरेंद्र राजपूत के अनशन का मामला भी सामने आया। इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार का जवाब आया। स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा कि दीप्ति सिंह का नाम चयन या प्रतीक्षा सूची में नहीं है। नरेंद्र राजपूत के बारे में विभाग ने बताया कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में अंतिम चयनित अभ्यर्थी की रैंक 3,621 थी, जबकि उनकी रैंक 5,427 है। विभाग का यह भी कहना था कि परिणाम जारी होने के बाद पद बढ़ाने का कानूनी प्रावधान नहीं है। इस तरह मंच पर रखे गए चयन और नियुक्ति संबंधी दावों पर विभाग ने अलग स्थिति सामने रखी।
DUSU चुनाव रिजल्ट: राहुल गांधी की नौटंकी का छात्रों पर असर नहीं
संयोग देखिए, जिस समय मध्य प्रदेश के इंदौर में राहुल गांधी और कांग्रेस की नौटंकी चल रही थी, उसी समय दिल्ली में छात्र एक नई पटकथा लिख रहे थे, जिसमें छात्रों ने राहुल गांंधी को खलनायक साबित कर दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई चार में से एक भी पद नहीं जीत सकी। एबीवीपी तीन पद ले गई और उपाध्यक्ष का पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत लिया। दिलचस्प यह कि शौकीन एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे थे। इंदौर में कांग्रेस युवा संवाद का नया अध्याय खोल रही थी। दिल्ली में उसके छात्र संगठन का रिपोर्ट कार्ड सामने था। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजों ने बता दिया कि राहुल गांधी की नौटंकी का छात्रों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत जी, फिर तो 30 साल से लटके मुकदमों में न्याय मर ही चुका है
चीफ जस्टिस सूर्यकांत जी ने कल नरीमन मेमोरियल लेक्चर में कहा कि “Justice Delayed is not justice denied, it is justice destroyed” - बात बहुत बढ़िया है लेकिन तथ्यों पर ध्यान देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या यह है -
Over 30 years: 26 cases
Over 20 years (including the 30+ bracket): 558 cases
Over 10 years: More than 10,000 cases
General breakdown ranges: Roughly 31,500 under 1 year; 24,200 (1–3 years); 17,300 (3–5 years); and 12,800 (5–10 years)
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
Over 30 years: 80,660 cases
20 to 30 years: 3,71,492 cases
10 to 20 years: 11,62,505 cases
5 to 10 years: 13,60,504 cases
1 to 5 years: 22,68,167 cases
Less than 1 year: 12,29,208 cases
यह सूचना NJDG की है -(National Judicial Data Grid)
क्या इसका मतलब यह निकलता है कि 20 से 30 वर्ष से लंबित मुकदमों में तो न्याय Destroy हो ही गया है।
पिछले दिनों चीफ जस्टिस पुराने लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों की 4 बेंच बनाई थी।
आशा की जाती है कि वो benches सबसे पुराने मुकदमों का निपटारा वरीयता के आधार पर करेंगी।
कनिमोझी की सीक्रेट मीटिंग से हड़कंप, तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट, कांग्रेस को झटका देने की तैयारी
राहुल गाँधी ने बेसिर पैर बकवास कर कांग्रेस का स्तर इतना गिरा दिया है कि क्षेत्रीय पार्टियां तक दूरी बना रही हैं। यानि क्षेत्रीय पार्टियों के आगे कांग्रेस की कोई कीमत नहीं।
कनिमोझी और ममता बनर्जी की मुलाकात
तमिलनाडु में टीवीके की करिश्माई जीत के बाद कांग्रेस की धोखेबाजी से आहत डीएमके तीसरा मोर्चा (थर्ड फ्रंट) की संभावना पर काम कर रही है। गुरुवार यानी 17 सितंबर को डीएमके के लोकसभा सदस्य कनिमोझी करुणानिधि ने पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी से कोलकाता में मुलाकात की। हालांकि, कालीघाट स्थित पूर्व सीएम के आवास पर हुई बैठक में किन मुद्दों पर बात की गई, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को थर्ड फ्रंट को अस्तित्व में लाने की कवायद से जोड़ कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि कनिमोझी करुणानिधि डीएमके संसदीय दल की नेता हैं।
डीएमके (DMK) सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी से उनके कालीघाट आवास पर मुलाकात की है। pic.twitter.com/BnB1c82oe5
— Raman kumar (News 24) (@Raman_news24) September 17, 2026
तीसरा मोर्चा बनाने के लिए मुलाकातों का दौर जारी
यह सारी कवायद 2029 के आम चुनावों से पहले बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ एक मजबूत क्षेत्रीय मोर्चा बनाने के लिए की जा रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, डीएमके के एक नेता ने कहा, ‘हम बगैर कांग्रेस के एक तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाश रहे हैं।’ इधर, मीडिया से बातचीत में एक टीएमसी सांसद ने कहा, ‘ममता बनर्जी के DMK प्रमुख एमके स्टालिन के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। वह गैर NDA पार्टियों के साथ भी अच्छे रिश्ते बनाए रखती हैं और INDIA ब्लॉक के उन सदस्यों के करीब हैं जो कांग्रेस समर्थक नहीं हैं। आज की बातचीत सिर्फ उनके और कनिमोझी के बीच हुई। इसके अलावा कुछ भी कहना सिर्फ अटकलें लगाना होगा।’
उद्धव ठाकरे से ‘मातोश्री’ में मिली कनिमोझी
इससे पहले डीएमके नेता कनिमोझी ने शिवसेना यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे से ‘मातोश्री’ आवास पर मुलाकात की। ठाकरे ने खुद डीएमके सांसद का स्वागत किया और उन्हें सम्मान के तौर पर सुनहरी शॉल भेंट की। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई और मिलिंद नार्वेकर भी मौजूद थे। खबरों के मुताबिक, बीजेपी के प्रति कांग्रेस के मौजूदा रुख और इंडिया ब्लॉक की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। इस चर्चा में विपक्षी गठबंधन में क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों के महत्व और उभरती राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में उनकी भूमिका पर भी बात हुई।
कनिमोझी की शरद पवार और सुप्रिया सुले से बातचीत
उद्धव ठाकरे के साथ बैठक के बाद कनिमोझी दिल्ली गईं, जहां उन्होंने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता शरद पवार और उनकी बेटी व लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के साथ अलग-अलग बातचीत की। इन मुलाकातों से यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि डीएमके उन क्षेत्रीय पार्टियों को एक साथ लाने की संभावना तलाश रही है, जिनके कांग्रेस पार्टी के साथ मतभेद हैं।
केजरीवाल और अखिलेश यादव से मुलाकात की संभावना
कहा जा रहा है कि कनिमोझी जल्द ही आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मिल सकती हैं। केजरीवाल के ममता बनर्जी और एम स्टालिन से रिश्ते अच्छे हैं। यह स्थिति कांग्रेस को बेचैन कर सकती है। कनिमोझी पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान तथा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर अपना संपर्क अभियान जारी रखेंगी। इन प्रस्तावित बैठकों को एक समन्वित क्षेत्रीय राजनीतिक मंच के लिए समर्थन का आकलन करने की डीएमके की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
डीएमके तमिलनाडु में पड़ रही अकेली
डीएमके की तरफ थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिशों की चर्चा ऐसे वक्त पर सामने आई है जब तमिलनाडु में विजय अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ समय पहले उन्होंने सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस बनाया है। इसका हिंदी में मतलब ‘धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन’ है। डीएमके की मुश्किल यह है कि वह बीजेपी के साथ नहीं जा सकती है, दूसरी तरफ कांग्रेस ने पोस्ट पोल अलायंस के तहत विजय से हाथ मिला लिया है।
DMK की कांग्रेस से नाराजगी, INDIA गठबंधन से भी दूरी
तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक कांग्रेस और डीएमके एक साथ रहे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ लड़े, लेकिन 2026 चुनाव के बाद स्थिति बदल गई। कांग्रेस राज्य के सबसे बड़े दल तमिलागा वेत्री कझगम से जा मिली और पुराने साथी डीएमके के छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि डीएमके ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और INDIA गठबंधन से भी दूरी बना ली।
डीएमके के पास हैं 32 सांसद
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पार्टी के पास संसद के दोनों सदनों में कुल 32 सांसद (लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 10) हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर थर्ड फ्रंट की बात आगे बढ़ती है तो इसमें बीआरएस और जगन मोहन की अगुवाई वाली वाईएसआरसीपी जैसे दल भी एंट्री ले सकते हैं। अभी राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए और इंडिया ब्लॉक हैं। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
कांग्रेस ने मदद से किया इनकार तो नाराज हुई ममता बनर्जी
ममता बनर्जी की नाराजगी की एक वजह सीट शेयरिंग हो सकती है। खबरें थीं कि पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर ममता ने कांग्रेस से मदद मांगी थी, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। हालांकि, टीएमसी नेता इससे इनकार कर रहे हैं। जबकि, कांग्रेस खुलकर इसे स्वीकार कर रही है। खबरें थीं कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस से रेजिनगर सीट पर समर्थन मांगा था और नंदीग्राम सीट छोड़ने की पेशकश की थी।
पहले भी हो चुकी हैं तीसरे मोर्चे की कोशिशें
कांग्रेस और भाजपा से अलग क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। 2013 में ममता बनर्जी ने ऐसा राजनीतिक मंच बनाने की पहल की थी। इसके बाद 2018 में तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की ओर से भी विपक्षी दलों के बीच व्यापक राजनीतिक समन्वय की कोशिशें हुई थीं।
कांग्रेस की सोच किसी भी सीमा तक गिर सकती है; राहुल गांधी का तो कोई मुकाबला कर ही नहीं सकता
कांग्रेस को जितना नुकसान गाँधी परिवार ने किया है किसी और नहीं। यही वजह है कि कांग्रेस से अच्छी स्थिति क्षेत्रीय दलों की है। सोनिया से लेकर प्रियंका तक जितना अपना मुंह खोलेंगे बीजेपी को उतना ही फायदा होगा।
हर दिन कांग्रेस के लोग हिंदू और सनातन विरोध में सभी सीमाएं लांघते जा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि देश का GenZ उसके साथ मिलकर मोदी को उखाड़ फेंकेगा। लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत कई अन्य विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी परिषद ने चुनाव जीत कर बता दिया कि युवा वर्ग न कांग्रेस के साथ है और न कॉकरोचों के साथ।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
-फिर दिल्ली दंगों के मास्टर माइंड उमर खालिद को “राष्ट्रवादी” कहा;
-खड़गे का पुत्र प्रियांक खड़गे RSS को बैन करने के चक्कर में है;
-कांग्रेस के नेता अजय राय के स्वागत के लिए सावन के पवित्र माह में राम की नगरी अयोध्या में “Fish Party” की जाती है;
-राहुल गांधी बुर्के में एक मुस्लिम लड़की, गाउन से बदन ढके एक ईसाई लड़की के साथ साड़ी पहने एक हिंदू लड़की को स्टेज पर खड़ा करके कहता है मनुस्मृति ने महिलाओं को दबाया हुआ है;
-पुलकित मणि के साथ खड़ा होकर राहुल गांधी मोदी जी की स्वर्गीय माता जी का अपमान करता है। उसके पहले बिहार में भी राहुल की रैली में मोदी जी की माँ को लेकर गाली दी गई।
-कांग्रेस का नेता सलमान खुर्शीद अपनी जीवनी में 1984 के सिख विरोधी दंगों के बारे में लिखता है कि हिंदू और सिख 1947 के अपने पापों की सजा भुगत रहे हैं और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद मुसलमानों में भयानक संतुष्टि थी;
-यासीन मलिक का कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विशेष अतिथि के रूप में स्वागत करते थे;
-जो दस साल उपराष्ट्रपति रहा उस हामिद अंसारी ने जाते हुए कहा था कि यह देश अब रहने लायक नहीं रहा जहां मुसलमान डरे हुए हैं;
-आज उस हामिद अंसारी ने फिर नेहरू के शब्दों को Quote करते हुए कहा है कि “भारत को खतरा कम्युनिज्म से नहीं, हिंदू राइट विंग से है।”
-आज राहुल गांधी ने नया शिगूफा छेड़ा है और हमले का रुख अजीत डोभाल के तरफ मोड़ते हुए कहा कि “ये अपनी INFORMAL बातचीत में कहते हैं कि हिंदुस्तान को कंट्रोल करना है तो सिर्फ 500 लोगों को कंट्रोल करना पड़ेगा, इन्होने हिंदुस्तान के TELEPHONE, WHATSAPP और FACEBOOK कम्युनिकेशन को अपने कंट्रोल में ले रखा है, फ़ोन टैपिंग करवाते हैं और उसकी जानकारी अमित शाह और नरेंद्र मोदी को देते हैं”।
यह INFORMAL बातचीत राहुल के पास कैसे पहुंची और अगर डोभाल जी 500 लोगों को कंट्रोल कर देश चला रहे हैं तो उनसे बड़ा administrator कोई हो नहीं सकता।
-कल कांग्रेस राम मंदिर नहीं बनना देना चाहती थी और आज उनके एक नेता प्रदीप माथुर ने कहा है कि हम मथुरा में कॉरिडोर नहीं बनने देंगे’।
अगर कांग्रेस इसी हाल में रहना चाहती है तो सत्ता में आना तो भूल जाए क्योंकि राहुल गांधी से न हो पायेगा। कांग्रेस के नेता इमरान मसूद ने कहा है कि मुसलमानों को यह ग़लतफ़हमी थी कि उनके बिना कोई सरकार नहीं बन सकती लेकिन मोदी जी ने वह दूर कर दी। यह ग़लतफ़हमी मुस्लिमों को ही नहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भी थी तो फिर भी हिंदुओं का विरोध करके क्या मिलेगा।
कॉकरोचों का बुलबुला फट गया, केजरीवाल के बच्चे बर्बाद हो गए और राहुल गांधी की “गूंज” दब गई; राजस्थान में भी और दिल्ली में भी
केजरीवाल की नाजायज औलादों ने पहले दिल्ली में गुंडागर्दी मचाई और फिर राजस्थान गए भाजपा सरकार को अस्थिर करने के लिए। उधर राहुल गांधी “छात्रों को अपनी गूंज” सुना रहा था।
लेकिन पहले राजस्थान में पिटे और आज दिल्ली के छात्रसंघ के चुनाव में सबकी लुटिया डूब गई। DUSU के 4 पदों में से 3 विद्यार्थी परिषद जीत गई और एक निर्दलीय उपाध्यक्ष बना जो कहते हैं कांग्रेस का बागी है। यानी कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया। और राहुल गांधी अपने गुरु योगेंद्र यादव के कहने पर सड़क से सरकार चलाने के सपने देख रहा था।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
राजस्थान में 10 निगमों में से 4 में सीधे भाजपा के मेयर बने और भरतपुर में निर्दलीयों के साथ आपने मेयर बना लिया। कांग्रेस का केवल एक निगम में मेयर बना। बाकी 4 में भाजपा मेयर बना लेगी।
राजस्थान में 2021 के मुकाबले भाजपा का वोट 4% बढ़ा और कांग्रेस का 4% गिरा। निर्दलीयों का डेढ़ प्रतिशत बढ़ा। भाजपा को कुल 4139 सीट मिली जबकि कांग्रेस को 3613 और निर्दलीयों को 2273 सीट मिली। बस निर्दलीयों की सीट देख कर कुछ सिरफिरे कहते फिर रहे थे कि भाजपा हार गई और अब उत्तर प्रदेश को संभाल के रखे भाजपा।
कॉकरोच जनता पार्टी जो केजरीवाल की छत्रछाया में पल रही है और राहुल गांधी की “गूंज” पानी के बुलबुले की तरह हैं जो कब फट जाए पता नहीं चलता।
JNU में वामपंथी छात्रसंघ पर कब्ज़ा बनाए हुए हैं लेकिन एक दिन वहां भी अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा।
हिन्दू ही हिन्दू का दुश्मन! जानिए क्यों?
आज देश में सबसे बड़ा हिंदू विरोधी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया जा रहा है ओर बोला जा रहा है कि मोदी ने हिंदू का वोट लेकर हिंदू के लिए कुछ नहीं कर रहे है सवर्णों के लिए कुछ नहीं कर रहे है...!
लेकिन असलियत इसके उलट है क्योंकि गद्दारी नरेंद्र मोदी ने नहीं बल्कि खुद हिंदुओं ने करी है उसी का परिणाम रहा है कि पिछले लोकसभा चुनाव मैं मोदी को 400 सीट देने के बजाए मात्र 240 पर लाकर रोक दिया,
इसका बात का सीधा सा उदाहरण इस बात से ही पता चल जाएगा क्योंकि आपके सामने जो चेहरे नजर आ रहे है ये उत्तरप्रदेश से आने वाले कांग्रेस ओर समाजवादी पार्टी के सांसद है जो 2024 मैं जीत कर लोकसभा पहुंचे,
इकरा हसन —उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। कैराना लोकसभा क्षेत्र में हिंदू मतदाताओं की संख्या लगभग 58% से 60% (करीब 11 से 12 लाख) है
इमरान मसूद —उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं (वोटर्स) की संख्या लगभग 18.5 लाख है। अगर धार्मिक और जातिगत समीकरणों (Demography) की बात करें, तो इस सीट पर हिंदू वोटर्स की संख्या लगभग 56% से 58% (करीब 10.5 लाख से 11 लाख) है। वहीं, मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 41% से 42% (लगभग 6.5 से 7 लाख) है।
जिया उल रहमान बर्क —यह यूपी के सबसे संवेदन शील इलाके सम्भल से सांसद है जहां पर हिंदू मतदाता संभल लोकसभा क्षेत्र में लगभग 48% से 50% हिंदू मतदाता हैं। संख्या के लिहाज से इस लोकसभा सीट पर करीब 8.5 लाख से 9 लाख के करीब हिंदू वोटर हैं
अफजाल अंसारी—अफजाल अंसारी यूपी के सबसे बड़े माफिया बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई है जो कि गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से आते है जहां हिंदू आबादी/वोट गाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र में हिंदू समुदाय की आबादी और मतदाता भारी बहुमत में हैं। यहाँ लगभग 89% से 90% (करीब 89.3%) आबादी हिंदू धर्म से संबंधित है। कुल मतदाताओं में से लगभग 16 लाख से अधिक मतदाता हिंदू हैं।
अब इस बात को बताने का उद्देश्य यह है कि पिछला चुनाव हिंदू को एकजुट होने के लिए था क्यों कि 500 वर्ष बाद प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर मोदी योगी के प्रयासों से बनकर तैयार हुआ था लेकिन जहां हिंदू को एकमुश्त वोट देकर मोदी की ताकत मजबूत करना थी वहां हिन्दू ने आबादी के 50% से ज्यादा होने के बाद भी हिंदू के नाम पर वोट नहीं किया,
अब आप खुद इतने समझदार है कि समझ सकते है कि गद्दार मोदी है या खुद हिन्दू क्योंकि मोदी हिंदू के लिए अब कर रहा है फिर भी उन्हें गाली दी जा रही है,
हिंदू का कोई ओर दुशमन नहीं रहा क्योंकि खुद हिन्दू ही हिन्दू का हमेशा से दुश्मन होता आया है.
डोनाल्ड ट्रंप क्या मुंह लेकर भारत आएंगे अगर 100% टैरिफ लगाते हैं
पिछले कुछ दिनों पहले डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा था कि वो 2026 के अंत में भारत जाने का विचार कर रहे हैं।
लेकिन सितम्बर 17 को अमेरिकी संसद ने “Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran act of 2026 पास कर दिया। इस बिल के पक्ष में 262 वोट पड़े और विपक्ष में 159। सीनेट ये बिल अगस्त में पहले ही पारित कर चुकी है। Lindsey ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का सदस्य है।
इस बिल के पारित होने से ट्रंप को उन 5 बड़े देशों के आयात पर 100 टैरिफ लगाने की शक्तियां मिल गई जो रूस से तेल या गैस खरीदेंगे - चीन और भारत उसमे सबसे ऊपर हैं।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
भारत ने साफ़ कर दिया है कि इस तरह के कदम से द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की सम्भावना है। भारत अपने 1.40 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वह विभिन स्रोतों से और बाजार की बदलती परिस्तिथियों के आधार पर यह काम जारी रखेगा।
लगता है यह बिल BRICS के सफल आयोजन के प्रतिशोध के लिए पारित कराया गया है। अगर भारत पर ट्रंप 100% टैरिफ लगाते हैं तो किस मुंह से वो भारत आएंगे और ट्रेड डील तो ख़त्म ही समझो।
डोनाल्ड ट्रंप भूल रहे हैं कि अगर पुतिन से यूरोप के देशों और ब्रिटेन को गैस (LNG) सप्लाई बंद कर दी तो उनके लोग ठंड से मर जाएंगे। रूस पर पहले ही 30,000 से ज्यादा प्रतिबंध लगे हुए हैं जो अमेरिका EU देशों और ब्रिटेन ने लगाए हुए हैं। पुतिन पलटवार करेगा तो मुश्किल होगी।
यूक्रेन अकेला लड़ने की हिम्मत नहीं रखता रूस से। उसके साथ कौन लड़ रहे हैं उसे खाद पानी देकर यह भी देखिए -
-अमेरिका ने 31 मार्च 2026 तक 195 बिलियन डॉलर दिए;
-NATO देशों ने 27 बिलियन डॉलर की मदद दी अमेरिका के जरिए;
-EU और उसने 27 सदस्य देशों ने 240 बिलियन डॉलर की मदद दी। इसके अलावा 125 बिलियन यूरो लोन और रेफुजियों को सपोर्ट के लिए दिए; 78 बिलियन यूरो मिलिट्री सपोर्ट और यूक्रेन के लोगों को EU सदस्य देशों में रिफ्यूजी के रूप में रखने के लिए दिए और 17 बिलियन यूरो पूरी तरह से रिफ्यूजियों पर खर्च किये;
-ब्रिटेन ने 33 बिलियन डॉलर की multi-year commitments की; इसके अलावा 16 बिलियन पाउंड्स के हथियार मुहैया कराए; 5.6 बिलियन पाउंड्स की आर्थिक मदद अलग से की जिसमें वर्ल्ड बैंक के लोन की गारंटी भी शामिल हैं।
तो इस तरह देखा जाए तो रूस अकेले यूक्रेन से युद्ध नहीं लड़ रहा। उसके खिलाफ परोक्ष रूप से लड़ रहे हैं अमेरिका, ब्रिटेन, NATO देश, EU और EU के 27 देश। अगर इनका साथ न हो तो यूक्रेन की कोई औकात नहीं है रूस से लड़ने की।
एक तरफ ट्रंप ने 100% टैरिफ लगाने का बिल पास कराया और दूसरी तरफ रूस यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए अपना दूत भी पुतिन के पास भेजा। फिर तो sanctions ही चलने दो, युद्ध रोकने की क्या जरूरत है लेकिन शायद ट्रंप युद्ध रुकवा कर Nobel Prize के चक्कर में हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि की मुलाकात पुतिन से तब हुई जब पुतिन और मोदी मिल चुके थे और डॉ जयशंकर जेलेंस्की से मिल चुके थे। यानी बातचीत का आधार तैयार हो गया था। लेकिन पुतिन ने अमेरिका के सामने बस दो शर्ते रखी। पहली डॉन बॉस्को पर कब्ज़ा नहीं छोड़ेंगे और दूसरी यूक्रेन को NATO एंट्री नहीं मिलेगी।
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को विश्व में अकेला करके मानेंगे क्योंकि विश्व की आधी आबादी तो BRICS देशों में हैं। इस्लामिक देश वैसे ही ट्रंप को पसंद नहीं करते। मुझे नहीं लगता अब डोनाल्ड ट्रंप भारत आ सकेंगे।
राहुल गांधी का एक और कछुए की चाल से चलने वाला केस देखो; 7 साल लगा दिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन रद्द करने की याचिका ख़ारिज करने में
राहुल गांधी के खिलाफ 2018 में गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। राहुल गांधी पर आरोप था कि उसने राफेल मामले में राजस्थान की रैली में।
प्रधानमंत्री मोदी को “चोरों का सरदार” (“Commander-in-Thief) कहा था।
गिरगांव मजिस्ट्रेट ने 28 अगस्त, 2019 को राहुल गांधी को समन जारी किए थे जिन्हें राहुल गांधी ने 2021 में बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी (writ petition No 4391 of 2021)
अब 8 सितंबर, 2026 को हाई कोर्ट के जस्टिस NR Borkar ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि “the court did not find any ‘perversity and illegality’ in the magistrate’s order and hence no reason to interfere”.
अब आप हिसाब लगा लीजिए कैसे कछुए की चाल से चलते हैं राहुल गांधी के खिलाफ केस। 28 अगस्त, 2019 के समन पर फैसला होने में 7 साल लग गए। स्वयं हाई कोर्ट ने राहुल की याचिका पर निर्णय देने में 5 साल लगा दिए।
जस्टिस बोरकर ने यह भी कहा कि वो अपने 2021 के आदेश को बरकरार रखते हैं जिसमें मजिस्ट्रेट को सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टालने के लिए कहा गया था जिससे राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। 2021 का कोई और आदेश मुझे नहीं मिला जिसको राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देता। लेकिन अब देगा और जैसे अन्य मामलों में होता आया है, सुप्रीम कोर्ट इस केस में गिरगांव कोर्ट के समन पर रोक लगा देगा जिससे मामला फिर बर्फ में लग जाएगा।
में पहले भी कहा है राहुल गांधी VVIP/दामाद है अदालतों का। 5 साल हाई कोर्ट का उसकी याचिका पर बैठे रहना भी इसका एक सबूत है।
मजे के बात है राहुल गांधी के वकील सुदीप पसबोला और कुशल मोर ने कोर्ट में कहा कि शिकायत करता पीड़ित पक्ष नहीं है, उसे शिकायत दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं है। उनका मतलब था कि शिकायतकर्ता की कोई मानहानि नहीं हुई और इसलिए aggrieved party तो मोदी हैं, उन्हें शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
मतलब कांग्रेस का तर्क है कि हमारे लोग दिन रात प्रधानमंत्री को गाली देंगे और अगर मोदी जी आहत होते हैं तो खुद कोर्ट में जाए। नया संविधान लिखना चाहता है राहुल गांधी। लेकिन जब गांधी परिवार के किसी सदस्य खिलाफ कुछ कहा जाता है तो कांग्रेस के लोग क्यों FIR दर्ज करते हैं, खुद गांधी परिवार के लोग क्यों नहीं करते। ऐसी दलीले देकर कांग्रेस अपने ही जाल में फंस जाएगी और जो भी मुक़दमे उसने किसी के खिलाफ भी फायर किये हुए हैं वो सब पिट जाएंगे।




