बंगाल : खुद को हावड़ा का बड़ा गैंगस्टर बताने वाले TMC गुंडे आकाश सिंह की पुलिस ने कच्छा-बनियान में निकाली परेड, गंजा करके सड़क पर घुमाया

     हावड़ा के गैंगस्टर आकाश सिंह को पुलिस ने कच्छा-बनियान में सिर मुंडवाकर सड़कों पर घुमाया (फोटो साभार: X)
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनते ही राज्य में अपराध पर नकेल कसनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में पुलिस ने हावड़ा के गैंगस्टर आकाश सिंह को कच्छा और बनियान में सड़कों पर घुमाया। इस परेड का वीडियो भी सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आकाश सिंह खुद को हावड़ा का बड़ा गैंगस्टर बताता था, जो TMC की सरकार में फल-फूल रहा था। जैसे ही राज्य में बीजेपी सरकार आई और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में आकाश सिंह का भी नंबर आया। पुलिस ने आकाश सिंह को पुलिस पर गोली चलाने, रंगदारी गिरोह चलाने और कई आपराधिक गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया।

 गिरफ्तारी के बाद आकाश सिंह को मालीपांचघरा और गोलाबाड़ी थाना क्षेत्रों में क्राइम रिकंस्ट्रक्शन के लिए ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि इसका मकसद यह समझना था कि आरोपित ने अपराध की योजना कैसे बनाई, किन लोगों की मदद ली और वारदात को किस तरह अंजाम दिया गया। इस समय आकाश सिंह को हाफ पैंट और टी-शर्ट में देखा गया।

लेकिन शनिवार (23 मई 2026) को जब पुलिस आकाश सिंह को दोबारा घटनास्थल पर लेकर पहुँची, तब उसे बाल और दाढ़ी कटे हुए थे और वह केवल कच्छा और बनियान में नजर आया। इस दौरान उसके साथ पुलिस बल भी तैनात रहा। सामने आए वीडियो में आकाश सिंह को पुलिसकर्मियों के साथ सड़कों पर घूमता हुआ देखा जा सकता है।

पुलिस ने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में कई अहम सबूत हाथ लगे हैं और जो आगे की जाँच में कामगार साबित होंगे। उधर सोशल मीडिया पर पुलिस की इस प्रक्रिया की आलोचना की जा रही है।

राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में आरोपी गैंगस्टर आकाश सिंह को लेकर पुलिस द्वारा किए गए एक 'रिकंस्ट्रक्शन' अभ्यास ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप लग रहे हैं कि राज्य में BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद पुलिस ने आरोपी अपराधियों को सार्वजनिक रूप से सिर्फ अंडरगारमेंट्स में घुमाना शुरू कर दिया है।
हावड़ा के आपराधिक नेटवर्क में एक कुख्यात हस्ती माने जाने वाले आकाश सिंह को रविवार को पुलिस ने उन कई कथित अपराध स्थलों पर ले जाया, जिनका संबंध जांच के दायरे में चल रहे पुराने मामलों से है। मालीपंचघरा और गोलाबाड़ी पुलिस स्टेशनों की पुलिस टीमों ने सिंह को कई "अपराध स्थलों" पर ले जाकर, पुराने मामलों की फिर से जांच करने के उद्देश्य से चल रहे एक पुनर्निर्माण अभ्यास का हिस्सा बनाया।
ऑपरेशन के दौरान, सिंह को बनियान और शॉर्ट्स पहने देखा गया, जब पुलिस भारी सुरक्षा के बीच उसे शहर के अलग-अलग हिस्सों से ले जा रही थी। इन दृश्यों ने तुरंत लोगों का ध्यान खींचा, क्योंकि हाल ही में सामने आए एक अन्य मामले में एक और आरोपी को अंतर्वस्त्रों में घुमाया गया था। राज्य में पुलिस के आचरण को लेकर पहले ही एक बहस छिड़ गई थी,जो अब और बढ़ रही है।

ट्रंप की बेटी इवांका को मारना चाहता था मोहम्मद बाकेर, ईरानी सेना से मिली थी ट्रेनिंग: सुलेमानी की मौत का बदला लेना था मकसद

    ट्रंप और बेटी इवांका (बाएँ), हत्या की साजिश रचने वाला आतंकी मोहम्मद बाकेर (दाएँ), (साभार : CNN & Newyorkpost)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप पर एक बड़ा खतरा टल गया है। अमेरिकी अखबार ‘न्यू यॉर्क पोस्ट’ के अनुसार, इवांका की हत्या की साजिश रचने वाले एक ट्रेंड आतंकी मोहम्मद बाकेर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस आतंकी के पास से इवांका के फ्लोरिडा वाले घर का पूरा नक्शा मिला है। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं।

पकड़े गए आतंकी का पूरा नाम मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी है। उसकी उम्र 32 साल है। छह साल पहले बगदाद में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी मारा गया था। अल-सादी उसे अपना अब्बू जैसा मानता था। वह सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। उसने लोगों से कहा था कि वह इवांका को मारकर ट्रंप से अपना बदला पूरा करेगा।

इंटरनेट पर दी थी खुली धमकी

आरोपित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर काफी एक्टिव था। उसने वहाँ इवांका और उनके पति के 24 मिलियन डॉलर (225 करोड़ रुपए) के घर का नक्शा डाला था। उसने अरबी भाषा में लिखा था कि अमेरिकी महल या सीक्रेट सर्विस भी उन्हें नहीं बचा पाएगी। उसने लिखा कि हमारा बदला बस कुछ ही समय की बात है। वह लोगों को डराने के लिए साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भी भेजता था।

तुर्की में पकड़ा गया आरोपित

इस बड़े आतंकी को 15 मई को तुर्की में पकड़ा गया। वह वहाँ से रूस भागने की तैयारी में था। गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत अमेरिका भेज दिया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों का आरोप है। अभी उसे ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। वहाँ उसे सबसे अलग एक कड़े पहरे वाली कोठरी में बंद किया गया है।

कई देशों में फैलाया था खौफ

यह आतंकी सिर्फ ट्रंप की बेटी इवांका के पीछे नहीं था। वह ‘कथैब हिजबुल्लाह’ और ईरान के ‘IRGC’ जैसे खतरनाक संगठनों से जुड़ा है। उसने एम्स्टर्डम में एक बैंक पर पेट्रोल बम फेंका था। उसने लंदन में दो लोगों पर चाकू से हमला किया था। उसने टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी भी की थी। इसके अलावा बेल्जियम और रोटरडैम में भी उसने हमले किए थे।

सरकारी पासपोर्ट का उठाया फायदा

रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित के पास इराक का खास ‘सर्विस पासपोर्ट’ था। यह पासपोर्ट सिर्फ वहाँ के प्रधानमंत्री की इजाजत से मिलता है। इस VIP पासपोर्ट के कारण एयरपोर्ट पर उसकी जाँच नहीं होती थी। उसे हर जगह VIP लाउंज की सुविधा मिलती थी। इसी का फायदा उठाकर वह आसानी से दूसरे देशों में जाता था। वहां वह बड़े आराम से अपने आतंकी नेटवर्क को चला रहा था।

ट्रैवल एजेंसी के नाम पर धोखा

अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए उसने एक तरकीब निकाली थी। उसने मजहबी यात्राएँ कराने वाली एक ट्रैवल एजेंसी खोली थी। इसी एजेंसी की आड़ में वह पूरी दुनिया में घूमता था। वह अलग-अलग देशों में जाकर अपने साथियों से मिलता था। वह सोशल मीडिया पर एफिल टावर जैसी मशहूर जगहों के साथ फोटो डालता था। कई बार वह मिसाइलों और हथियारों के साथ भी अपनी फोटो पोस्ट करता था।

इस मामले पर अभी सब शांत

इवांका ट्रंप ने साल 2009 में अपनी शादी से पहले यहूदी धर्म अपना लिया था। इस बड़ी साजिश के सामने आने के बाद भी अभी सब शांत हैं। न्यू यॉर्क पोस्ट ने इस मामले पर बात करने के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया था। उन्होंने आरोपित के वकील से भी बात करने की कोशिश की। हालाँकि, अभी तक किसी की भी तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पुरखे बताते थे महिलाओं की चड्डी का रंग, ग्रामीण-गरीब महिला आकर्षक नहीं होती; आज ‘सपोले’ बता रहे सपा सबसे बड़ी महिला हितैषी: अखिलेश यादव गैंग से दोगले भी लजाए


लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार (16 अप्रैल 2026) को कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं का सबसे अधिक सम्मान करने वाली पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि सपा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और हक की सबसे बड़ी हितैषी रही है। लेकिन जैसे ही यह दावा सदन में गूँजा, सत्ता पक्ष की बेंचों से हंसी की लहर उठी। ये बयान उन्होंने उस समय दिया, जब संसद में नारी शक्ति वंदन (संसोधन) अधिनियम 2026 पर चर्चा चल रही थी। महिला आरक्षण से जुड़ा ये बिल लोकसभा में गिर गया, क्योंकि सपा, डीएमके, कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों ने इसका खुला विरोध किया।

 बहरहाल, धर्मेंद्र यादव ने जब सपा को सबसे बड़ी महिला हितैषी पार्टी बताया, उसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पुरानी खबरें, न्यायालय के फैसले और उन दिनों की रिपोर्ट्स वायरल हो गईं। लोग पूछने लगे कि क्या सचमुच सपा महिलाओं की हितैषी है? या फिर यह सिर्फ एक राजनैतिक चेहरा है, जिसके पीछे 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सरकार में उत्तर प्रदेश की महिलाओं की जो दर्दनाक हालत थी, वह आज भी काले धब्बे की तरह सपा के चेहरे पर चिपकी हुई है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) और ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट्स इस सवाल का जवाब साफ-साफ देती हैं। 2012-2017 के दौरान उत्तर प्रदेश में महिला अपराधों का आँकड़ा चौंकाने वाला रहा। साल 2012 में राज्य में बलात्कार के 1963 मामले दर्ज हुए थे। 2013 में यह संख्या अचानक बढ़कर 3050 हो गई, यानी महज एक साल में 55 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी। कुल महिला अपराध (क्राइम अगेंस्ट वुमेन) 2013 में 32,546 रहे।

साल 2014 में यह संख्या 38,467 तक पहुँच गई। इसके बाद तो 2016 और 2017 में यूपी पूरे देश में महिला अपराधों में सबसे ऊपर रहा। साल 2017 में अकेले यूपी में 56,011 मामले दर्ज हुए, जो पूरे देश के कुल महिला अपराधों का बड़ा हिस्सा था। एनसीआरबी के मुताबिक, उस दौरान यूपी न सिर्फ कुल संख्या में टॉप पर था, बल्कि बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या और छेड़छाड़ जैसे मामलों में भी अग्रणी रहा।

इटावा की घटना है जंगलराज की गवाह

ये आँकड़े सिर्फ कागज पर नहीं थे। ये असल जिंदगियों के टूटने की कहानियाँ थीं। अखिलेश यादव के गृह जिले इटावा में यादवों का आतंक ऐसा था कि बच्चियाँ और महिलाएँ अकेले घर से बाहर निकलने से काँपती थीं। गाँवों में दबंगों का राज था। पुलिस निष्क्रिय थी। न्याय की उम्मीद खत्म हो चुकी थी।

इसी दरमियान 11 मई 2014 को इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गौरापुरा गाँव में 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुई घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया। मुख्य आरोपित सनी यादव (शादीशुदा) ने पीड़िता के घर घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। लड़की ने रोते-रोते अपनी माँ को बताया। पीड़िता की माँ ने तुरंत थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सनी यादव को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन यहीं से दबाव शुरू हुआ।

आरोपित के परिवार ने पीड़िता की माँ पर केस वापस लेने का भारी दबाव बनाया। धमकियाँ दी गईं कि अगर जुबान खोली तो बेटी जैसा हाल किया जाएगा। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हालाँकि इसके बाद जब वो शौच के लिए खेत में गईं, तो उन्हें खेत में ही घेर लिया गया। आरोपित के पिता बसंतलाल यादव और उसके साथियों ने उसे निर्वस्त्र कर दिया। धारदार हथियारों से लहूलुहान कर दिया। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचाया गया।

उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और इटावा उनका पैतृक जिला। फिर भी दबंगों का साहस ऐसा था कि किसी की परवाह नहीं की। पीड़िता की माँ की चीखें आज भी यूपी की महिलाओं के मन में गूंजती हैं, क्या वो राज्य की सरकार थी या सपा का जंगलराज था?

मुलायम सिंह यादव के बयानों को भूले तो नहीं?

इसी तरह की घटनाएँ सपा शासन में आम थीं। लेकिन सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बयानों ने महिलाओं के घावों पर नमक छिड़क दिया। अप्रैल 2014 में बदायूँ में दो बहनों के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद मुलायम ने मुरादाबाद में कहा, “लड़कियाँ पहले दोस्ती करती हैं। फिर लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है। वे इसे रेप का नाम दे देती हैं। लड़कों से गलती हो जाती है। क्या रेप केस में फाँसी दी जाएगी? लड़के हैं, नादानी में रेप हो जाता है।”

यह बयान पूरे देश में आग की तरह फैला। महिलाएँ सड़कों पर उतर आईं। लेकिन मुलायम ने पीछे हटने की बजाय और विवादित बयान दिए। अगस्त 2015 में उन्होंने कहा, “एक महिला से चार लोग रेप नहीं कर सकते। रेप तो एक ही आदमी करता है, लेकिन एफआईआर में चार लोगों के नाम लिख दिए जाते हैं, जो गलत है। यूपी में तो केवल दो फीसदी रेप होते हैं।” यही नहीं, जुलाई 2014 में उन्होंने कहा, “21 करोड़ की आबादी की तुलना में यूपी में कम रेप होते हैं।” और फिर नवंबर 2014 में बाराबंकी में उन्होंने कहा, “गाँव की गरीब महिलाएँ ज्यादा आकर्षक नहीं होतीं।” उनके कहने का मतलब था कि गाँव की महिलाओं से कौन रेप करेगा?

आजम खान ने बताया था जयाप्रदा की चड्ढी का रंग

मुलायम के साथी सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान भी महिलाओं के अपमान में आगे रहे हैं। जयाप्रदा (तत्कालीन सपा सहयोगी) के बारे में उन्होंने कहा, “उनकी (जयाप्रदा की) चड्डी का रंग खाकी है।” यह टिप्पणी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में दी गई, लेकिन महिलाओं की गरिमा को तार-तार कर गई।

यही नहीं, इससे पहले साल 2010 में महिला आरक्षण बिल पर मुलायम ने कहा था कि यह बिल नौजवानों को संसद में सीटी बजाने के लिए उकसाएगा। उन्होंने दावा किया कि बिल से सिर्फ बड़े घर की और शहर की लड़कियाँ फायदा उठाएँगी, गाँव की गरीब महिलाएँ तो आकर्षक नहीं होतीं। सपा ने 2010 में बिल का तीखा विरोध किया और सदन में हंगामा किया।

अखिलेश यादव ने भी बाद में ‘कोटा के भीतर कोटा’ की माँग करते हुए बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी, दलित और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण नहीं तो बिल अधूरा है। सपा की यह रणनीति महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सुनिश्चित नहीं होने देने में अहम रही।

गायत्री प्रसाद प्रजापति केस में कोर्ट ने लगाई थी फटकार, उम्रकैद की सजा

सपा सरकार में मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ भी गंभीर मामले सामने आए। गायत्री प्रसाद प्रजापति सपा सरकार में खनन मंत्री थे। 2017 में चित्रकूट की एक महिला ने शिकायत की कि प्रजापति ने अपने सरकारी आवास पर उसे और उसकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया। वीडियो बनाया और धमकाया। पुलिस ने कुछ नहीं किया।

पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। 2021 में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने प्रजापति समेत दो अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि आरोपित ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर नाबालिग की गरिमा लूटी। पीड़िता की बेटी की आँखों में आज भी वह रात घूमती होगी, जब उसके घर का माहौल ही उसे सबसे बड़ा खतरा बन गया। वह सोचती होगी कि क्या मंत्री का पद इतना ताकतवर था कि न्याय भी चुप रह गया?

पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर 93 केस, रेप केस में सजा

सपा के पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर 93 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2023 में भदोही की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 2014 के बलात्कार मामले में 15 साल की सजा सुनाई। पीड़िता एक गायिका थीं। मिश्रा ने उन्हें कार्यक्रम के बहाने बुलाया और बार-बार बलात्कार किया। कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। आज वे आगरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन मामलों ने सपा की ‘महिला हितैषी’ छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अपने अतीत को सुधारे समाजवादी पार्टी

आज जब सपा के सांसद लोकसभा में महिलाओं का सम्मान करने का दावा करते हैं, तो पुरानी घटनाएँ और न्यायालय के फैसले उनकी पोल खोल देते हैं। सपा का इतिहास महिला आरक्षण का विरोध, विवादित बयानों और अपराधियों को संरक्षण देने का रहा है। 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित न हो पाने में सपा की भूमिका अहम रही। मुलायम और अखिलेश दोनों ने ‘कोटा के भीतर कोटा’ को बहाना बनाया, लेकिन असल में इनकी मंशा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित रखने की रही।

ये घटनाएँ सिर्फ आँकड़े नहीं, बल्कि उन माँ-बेटियों की चीखें हैं, जिन्हें सपा शासन ने कभी सुरक्षा नहीं दी। आज भी जब कोई सपा नेता महिलाओं का सम्मान करने का दावा करता है, तो इटावा की पीड़िता माँ-बेटी, चित्रकूट की नाबालिग और भदोही की गायिका की याद आ जाती है। सपा को अगर वाकई महिलाओं का सम्मान करना है, तो पहले अपने इतिहास का सामना करे।

अजय राय और राजकुमार भाटी जैसे नेता होंगे तो सपा और कांग्रेस के नेता कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे ही दौड़ेंगे क्योंकि खुद में तो दम रहा नहीं

सुभाष चन्द्र

केजरीवाल गिरोह की पैदाइश “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) को विदेशियों के सहारे खड़ा करने की कोशिश की गई है जिसने केजरीवाल स्टाइल में लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश की है। मनीष सिसोदिया का चेला है इसका संस्थापक अभिजीत दिपके और पूरा आपिया है धीरे धीरे पता चलेगा भारत में इसके कथित सदस्य “आप” के ही हैं 

इतिहास लिखा नहीं जाता बल्कि दोहराया जाता है। यानि जिस तरह कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश नागरिक ह्यूम द्वारा की गयी थी ठीक उसी तरह “कॉकरोच जनता पार्टी”(CJP) की स्थापना विदेशियों द्वारा की गयी है। क्या “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) कांग्रेस या INDI गठबंधन का विकल्प है?  

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अखिलेश यादव ने इस पार्टी को समर्थन देकर बता दिया कि उसमें अब भाजपा से लड़ने की शक्ति नहीं रही अखिलेश की सोशल मीडिया पर पोस्ट  “BJP बनाम CJP” (बीजेपी versus CJP) का मतलब ही यह है देश की विपक्षी पार्टियां और इंडी भिंडी गठबंधन की पार्टिया सब ख़त्म और अब बस भाजपा रहेगी और CJP. 

उधर कांग्रेस के नेता भी CJP के लिए मरे जा रहे हैं और CJP का X अकाउंट बंद करने पर छातियां पीट रहे हैं जिनमें शशि थरूर भी शामिल हैं नाना पटोले महाराष्ट्र में रो रहा है और तेलंगाना/केरल के नेता भी तड़प रहे हैं

ये लोग CJP का भाजपा से मुकाबला करने से पहले यह नहीं जानते कि भाजपा का कमल लक्ष्मी जी का आसन है और कॉकरोच गंदी नालियों में पैदा होते हैं और उन्हें जल्दी से जल्दी मार देना ही लोग पसंद करते हैं भाजपा देश भक्तों की पार्टी है और कांग्रेस एवं विपक्ष मुस्लिमों की पार्टियां बनकर रह गई हैं

क्या कोई व्यक्ति चाहता है कि कॉकरोच उसके नजदीक भी फटके। अलबत्ता जो समाजवादी और कांग्रेस पार्टी की गंदगी भरी विचारधारा के लोग हैं, वो जरूर CJP के कॉकरोचों को साथ बिठाना चाहेंगे 

समाजवादी पार्टी का राजकुमार भाटी रोज बक बक करता है कभी कहता है इस्लाम मे हिंदुओं से बेहतर विवाह प्रथा है क्योंकि उनमें child marriage नहीं होती (9 साल की लड़की से विवाह क्या child marriage नहीं है) कभी कहता है ब्राह्मण वेश्याओं से भी गए गुजरे होते हैं और कभी कहता है गुर्जरों और जाटों की महिलाओं के कई कई पति होते हैं 

सबसे बड़ी बात यह है कि अखिलेश ने उसे टोकने की कोशिश नहीं की कैसे करते जब एक मौलाना के उसकी पत्नी को नंगी कहने पर मौन हो गए और फिर अखिलेश कह रहे हैं कि अगला उत्तर प्रदेश का चुनाव वो हार गए तो राजनीति छोड़ देंगे पता नहीं उन्हें अपना यह बयान याद भी रहेगा क्योंकि हार तो निश्चित है

साभार: सोशल मीडिया  

एक तरफ कांग्रेस में राहुल गांधी क्या कम है जो मोदी/अमित शाह/RSS और हिंदुओं को गाली देता है और जिसकी सभा में मोदी की माँ को गाली दी जाती है लेकिन वो चुप रहता है। अब लगता है कोई नया टूल किट तैयार हो गया है जो राहुल ने कहा है मोदी सरकार एक साल में गिर जाएगी 

शायद ऐसी ही बातें कांग्रेस में होती है जो उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने मोदी जी के अत्यंत अभद्र भाषा बोली जब FIR हो गई तो कहता है कि चाहे 100 केस दर्ज कर दो, मैं पीछे हटने वाला नहीं हूँ मतलब मान रहा है कि उसने मोदी जी को गाली दी लेकिन दूसरी तरफ यह भी कह रहा है कि वह उसका AI Generated video हैं ठीक है अब पुलिस के सामने साबित करना वो वीडियो फर्जी है वैसे अभी राहुल गांधी को भी साबित करना है पुलिस के सामने कि मोदी/अमित शाह और RSS गद्दार हैं

डूबते को तिनके का सहारा बहुत होता है लगता है कांग्रेस समाजवादी और अन्य विपक्षी दलों को CJP में सहारा मिल गया है जबकि वह पार्टी पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए उपयुक्त है क्योंकि वहां के सदस्य 50% से ज्यादा हैं

पौराणिक गाथा : दिल्ली के कालकाजी मन्दिर की महानता


दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर(श्री कालिका जी) की उत्पत्ति और इतिहास से जुड़ी कहानी अत्यंत प्राचीन और रोचक है। इसे "मनोकामना सिद्ध पीठ" और "जयंती पीठ" भी कहा जाता है। इस स्थान की मुख्य मूल कहानी पौराणिक कथाओं, महाभारत काल और आधुनिक इतिहास के तीन मुख्य अध्यायों में बंटी हुई है:
1. पौराणिक कथा: महाकाली का प्राकट्य (सत्ययुग)
धार्मिक मान्यताओं और 'दुर्गा सप्तशती' के अनुसार, यह कहानी सत्ययुग की है।
असुरों का आतंक: उस समय अरावली पर्वत श्रृंखला के सूर्यकूट पर्वत (जहां आज मंदिर स्थित है) के आसपास रहने वाले देवताओं को 'रक्तबीज' और अन्य शक्तिशाली राक्षसों ने बहुत प्रताड़ित किया।
कौशिकी देवी का जन्म: राक्षसों से मुक्ति पाने के लिए देवताओं ने ब्रह्मा जी और माता पार्वती की आराधना की। देवताओं की प्रार्थना पर माता पार्वती के अंश से देवी कौशिकी प्रकट हुईं, जिन्होंने राक्षसों का संहार करना शुरू किया।
रक्तबीज की चुनौती: जब देवी कौशिकी ने रक्तबीज पर प्रहार किया, तो उसके रक्त(खून) की बूंदें जैसे ही धरती पर गिरतीं, वैसे ही हर बूंद से एक नया और शक्तिशाली राक्षस पैदा हो जाता। इससे राक्षसों की सेना लगातार बढ़ती गई।
महाकाली का रूप: तब माता पार्वती ने क्रोध में आकर अपने मुख से 'मां काली' को प्रकट किया। मां काली का रूप अत्यंत विशाल और भयानक था। उन्होंने अपना मुंह आकाश से लेकर धरती तक फैला लिया।
असुरों का अंत: इसके बाद देवी कौशिकी राक्षसों का वध करती गईं और मां काली उनके रक्त की बूंदों को धरती पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समेटती(पीती) गईं। इस तरह रक्तबीज और अन्य असुरों का अंत हुआ।
विराजमान होना: युद्ध के बाद देवताओं ने मां काली से इसी स्थान पर रुकने की प्रार्थना की। माता देवताओं की भक्ति से प्रसन्न हुईं और उन्होंने इसी सूर्यकूट पर्वत पर स्वयं को 'पिंडी'(स्वयंभू रूप) के रूप में स्थापित कर लिया।
2. महाभारत काल की कथा
कालकाजी मंदिर का संबंध द्वापर युग यानी महाभारत काल से भी मजबूती से जुड़ा हुआ है।
पांडवों की आराधना: माना जाता है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांचों पांडवों (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव) को शक्ति और विजय प्राप्त करने के लिए इसी सूर्यकूट पर्वत पर मां कालका की पूजा करने की सलाह दी थी।
विजय का आशीर्वाद: पांडवों ने यहां आकर कठिन तपस्या और पूजा की, जिससे प्रसन्न होकर मां कालका ने उन्हें युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया। कुरुक्षेत्र का युद्ध जीतने के बाद पांडवों ने यहां आकर माता का आभार व्यक्त किया और मंदिर का एक हिस्सा बनवाया था।
3. लोककथा: गाय और दूध की कहानी
एक स्थानीय लोककथा यह भी है कि सदियों पहले जब यह इलाका पूरी तरह जंगली और पहाड़ी था, तब यहां चरवाहे अपनी गाएं चराने आते थे।
वहां एक चमत्कारिक घटना घटने लगी—एक गाय हर रोज जंगल में एक निश्चित चट्टान(पिंडी) के पास जाकर खड़ी हो जाती और उसके थनों से अपने आप दूध बहने लगता, जिससे पिंडी का अभिषेक हो जाता था।
जब चरवाहों और स्थानीय लोगों ने यह दृश्य देखा, तो उन्हें समझ आया कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि साक्षात देवी का रूप है। इसके बाद वहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना शुरू हो गई।
4. आधुनिक इतिहास और जीर्णोद्धार
समय के साथ इस सिद्धपीठ का स्वरूप बदलता रहा:
मराठा काल (1764 ईस्वी): इतिहास के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर के मुख्य और पुराने हिस्से का पुनरुद्धार 1764 ईस्वी में मराठों द्वारा कराया गया था।
मुगल काल (अकबर द्वितीय के समय): 1816 ईस्वी में मुगल सम्राट अकबर शाह द्वितीय के पेशकार (कोषाध्यक्ष) राजा केदारनाथ ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और इसकी संरचना में कुछ बदलाव किए।
वास्तुकला: आज जो मंदिर हम देखते हैं, उसका मुख्य गर्भगृह अष्टकोणीय (8 कोनों वाला) है, जो संगमरमर से बना है। मंदिर में कुल 12 द्वार हैं, जो वर्ष के 12 महीनों और द्वादश आदित्यों को दर्शाते हैं।

मान्यता है कि कालकाजी मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से आता है, मां कालका उसकी झोली कभी खाली नहीं रखतीं। यही कारण है कि इसे आज भी दिल्ली के सबसे जाग्रत और प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। 

‘एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार’ लेकिन राहुल/प्रियंका प्रधानमंत्री नहीं बनने वाले : विदेशी ताकतों से देश के मामले में मदद माँगती है कांग्रेस

उपद्रवी कभी अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते, ठीक वही हालत कांग्रेस और इसको समर्थन वाले INDI गठबंधन की है। ये भारत विरोधियों की उँगलियों पर नाचने वाले देश क्या चलाएंगे, toolkit ही इनको अलग बैठा देगा। राहुल गाँधी का यह कहना कि ‘अगले एक साल में मोदी सरकार गिर जाएगी’ किसी मदारी की तरह मजमा देखने वालों को हंसाने से कम नहीं। ऐसा नेता देशहित की सोंच ही नहीं सकता और न ही किसी को दूर तक कल्पना करनी चाहिए। ऐसी बयानबाज़ी कर सिर्फ सुर्ख़ियों में बना रहना चाहते हैं। दूसरे यह कि जनता ने भी राहुल की बातों पर ध्यान देना छोड़ रही है।    

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गाँधी के ‘अगले एक साल में मोदी सरकार गिर जाएगी’ वाले दावे पर पलटवार करते हुए इसे कांग्रेस नेता की हताशा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल भारत को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने टूलकिट गैंग की एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये देश में अराजकता फैलाने की एक बड़ी कोशिश है।

उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी एंड कंपनी जब चुनाव में बीजेपी को नहीं हरा पा रहे तो देश में हिंसा फैलाने की साजिश रच रहे हैं। पीएम मोदी को न सिर्फ देश की जनता, बल्कि दुनिया का भरपूर प्यार और भरोसा मिला है, जबकि राहुल गाँधी नकारात्मकता और राजनीतिक विफलताओं के कारण निराश होकर ऐसे बयान दे रहे हैं। भारत से उन्हें काफी नफरत है और राष्ट्र को बदनाम करना, संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और विदेशी धरती पर जाकर विदेशी ताकतों से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की अपील करना, ये बताता है कि कॉन्ग्रेस की असली मंशा क्या है?

वहीं बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब जब वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ भारत, तब तब भारत विरोधी अंतरराष्ट्रीय ताकतों ने देश को बदनाम करने का अभियान चलाया और कॉन्ग्रेस ने उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि देश की जनता समझदार है। वह राहुल गाँधी, विपक्ष और देश के खिलाफ काम कर रहे टूलकिट गैंग को अच्छे से समझती है। जनता ने बार–बार इन लोगों को करारा जवाब दिया है। दरअसल राहुल गाँधी का बयान भारत विरोधी नैरेटिव को हवा देना और भारत में अस्थिरता की भविष्यवाणी करना है। ये संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित ‘टूलकिट राजनीति’ का हिस्सा है।

कॉन्ग्रेस की अल्पसंख्यक सलाहकार समिति की बैठक में राहुल गाँधी ने आर्थिक असंतोष का हवाला देते हुए दावा किया कि आने वाले एक साल में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार गिर जाएगी। उन्होंने देश में आर्थिक संकट और महँगाई बढ़ने की आशंका जताई। इसके जवाब में बीजेपी नेताओं ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का भीषण हमला, फौजियों को ले जा रही ट्रेन को उड़ाया: 24 की मौत और 100+ घायल, बोगियों में लगी आग के Video


पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार (24 मई 2026) को सेना के जवानों को ले जा रही एक ट्रेन को निशाना बनाकर बड़ा धमाका किया गया। इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में सेना के जवान भी शामिल हैं। यह भीषण धमाका बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के पास चमन फाटक (Chaman Phatak) रेलवे स्टेशन के नजदीक हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी और उसमें फौजी अपने परिवारों के साथ सफर कर रहे थे। कई लोग ईद की छुट्टियाँ मनाने के लिए जा रहे थे। बताया गया कि ट्रेन जब क्वेटा में चमन पट्टक इलाके में एक सिग्नल पार कर रही थी, उसी दौरान विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी ने ट्रेन के एक डिब्बे को टक्कर मारी, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की मजीद ब्रिगेड ने इस ‘फिदायीन हमले’ की जिम्मेदारी ली है। BLA ने कहा कि हमले में ट्रेन में यात्रा कर रहे पाकिस्तानी फौजियों को निशाना बनाया गया था।

धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरकर पलट गए और उनमें आग लग गई। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में ट्रेन का एक डिब्बा बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर किनारे पलटा हुआ दिखाई दिया। हादसे के बाद लोग मलबे पर चढ़कर जीवित लोगों की तलाश करते नजर आए।

धमाके के असर से आसपास की इमारतों की खिड़कियों और शीशे भी टूट गए। पुलिस के अनुसार, ट्रेन को नुकसान पहुँचा है जबकि आसपास खड़े कम से कम 10 वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। सामने आए कुछ वीडियो में घटनास्थल पर जली हुई गाड़ियाँ भी नज़र आ रही है।

 घायल लोगों को तुरंत आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वीडियो और तस्वीरों में लोगों को खून से लथपथ घायलों को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए देखा गया जबकि सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और मौके पर तैनाती बढ़ा दी।

खुद को ‘ईसा मसीह’ मानने वाले नासिरे बेस्ट ने व्हाइट हाउस के बाहर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियाँ, चर्च में क्यों नहीं बरसाईं?

                                    व्हाइट हाउस और हमलावर नासिरे बेस्ट (फोटो साभार - आज तक)
पिछले दो/तीन दिनों से अमेरिका में फायरिंग के समाचार सुर्खी बने हुए हैं, आखिर हो रही फायरिंग के पीछे क्या कोई षड़यंत्र हैं?  

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन DC में शनिवार (23 मई 2026) की शाम व्हाइट हाउस के बाहर अचानक गोलियाँ चलने लगीं। यह फायरिंग व्हाइट हाउस के बेहद सुरक्षित इलाके में बने एक सिक्योरिटी चेकपॉइंट के पास हुई।

घटना के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे, जिसके बाद पूरे इलाके में तुरंत हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावर को गोली मार दी। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

कैसे शुरू हुई पूरी घटना?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाम करीब 6 बजे एक युवक 17th स्ट्रीट और पेनसिल्वेनिया एवेन्यू के पास बने सिक्योरिटी चेकपॉइंट तक पहुँचा। कुछ ही देर बाद उसने अपने बैग से रिवॉल्वर निकाली और सीक्रेट सर्विस अधिकारियों पर फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि उसने शुरुआती दौर में कम से कम तीन गोलियाँ चलाईं।

सीक्रेट सर्विस के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की आवाज सुनते ही अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने मीडिया कर्मियों और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि घटना के दौरान 20 से 30 राउंड तक गोलियाँ चलीं। घटना में एक आम नागरिक भी गोली लगने से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हालाँकि राहत की बात यह रही कि किसी भी सीक्रेट सर्विस अधिकारी को चोट नहीं आई। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमलावर सुरक्षा घेरे को पार नहीं कर पाया।

 घटना के बाद पूरे व्हाइट हाउस इलाके को कई घंटों तक घेराबंदी में रखा गया। अमेरिकी जाँच एजेंसी FBI और वॉशिंगटन DC पुलिस अब इस मामले की जाँच कर रही हैं। जाँच एजेंसियाँ CCTV फुटेज, चश्मदीदों के बयान और बैलिस्टिक सबूतों की जाँच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपित का मकसद क्या था।

कौन था नासिरे बेस्ट?

पुलिस ने हमलावर की पहचान 21 साल के नासिरे बेस्ट के रूप में की है, जो मैरीलैंड का रहने वाला था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह पहले भी सीक्रेट सर्विस की नजर में आ चुका था। उस पर व्हाइट हाउस से दूर रहने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह कई बार प्रतिबंधित इलाके के आसपास देखा गया।

बताया जा रहा है कि जून 2025 में उसने सीक्रेट सर्विस एजेंटों को रोककर धमकी दी थी, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया था। जुलाई 2025 में भी वह प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की कोशिश करते पकड़ा गया था।

नासिरे बेस्ट मानसिक रूप से परेशान था और खुद को ईसा मसीह मानता था। शनिवार की घटना में उसने रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया लेकिन सीक्रेट सर्विस की जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

सवाल यह है कि अगर आरोपी मानसिक रूप से परेशान था तो व्हाइट हाउस ही क्यों चुना, चर्च क्यों नहीं चुना? यह निश्चितरूप से कोई सुनियोजित षड़यंत्र है।   

 ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला होंडुरास, दो हमलों में 25 लोगों की मौत: बंदूकधारियों ने मजदूरों और पुलिसकर्मियों पर बरसाईं गोलियाँ

सेंट्रल अमेरिका के देश होंडुरास में गुरुवार (21 मई 2026) को हुई दो अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। इन हमलों में अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 6 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

सबसे बड़ा हमला ट्रूजिलो इलाके के एक खेत और प्लांटेशन में हुआ, जहाँ हथियारबंद हमलावरों ने मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में 19 लोगों की जान चली गई।

यह इलाका लंबे समय से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर चल रहे विवादों से प्रभावित है। यहाँ पर्यावरण और जमीन के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को पहले भी धमकियाँ मिलती रही हैं।

दूसरी घटना ग्वाटेमाला सीमा के पास ओमोआ इलाके में हुई, जहाँ बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मी राजधानी तेगुसिगल्पा से एंटी-गैंग मिशन पर जा रहे थे, तभी उन पर गोलियाँ बरसा दी गईं।

इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। पुलिस और सेना ने दोनों इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और जाँच के लिए फॉरेंसिक टीमों को भेजा गया है।

वैश्विक ईंधन संकट के बीच राजस्थान में मिला प्राकृतिक गैस का भंडार: हरदीप पुरी बोले- ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

                                                                                                       (फोटो साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश)
मिडिल ईस्ट में जारी संकट से वैश्विक ईंधन सप्लाई लगभग ठप होने के बाद दुनियाभर में ईंधन की किल्लत हो रही है। इस बीच भारत के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है। राजस्थान के जैसलमेर बेसिन में सरकारी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को बड़ी कामयाबी मिली है। कंपनी ने डांडेवाला फील्ड में एक नया गैस कुआँ खोजा है, जहाँ से पहली बार कम गहराई वाली सानू फॉर्मेशन से प्राकृतिक गैस निकलनी शुरू हुई है।

इस खोज को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि भारत अभी भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से गैस आयात करके पूरा करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है।

जैसलमेर में मिला नया गैस भंडार

OIL के मुताबिक यह नया गैस कुआँ करीब 950 मीटर की गहराई तक ड्रिल किया गया था। परीक्षण के दौरान यहाँ से लगभग 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (SCMD) गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। शुरुआती जाँच और तकनीकी विश्लेषण में इस क्षेत्र में करीब 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCM) गैस संसाधन होने का अनुमान लगाया गया है।

कंपनी ने कहा कि डांडेवाला फील्ड पहले से पारंपरिक गैस उत्पादन के लिए जाना जाता था, लेकिन सानू फॉर्मेशन में पहली बार गैस की मौजूदगी साबित हुई है। इससे इस पूरे क्षेत्र में आगे और गैस खोज की संभावनाएँ बढ़ गई हैं।

OIL का कहना है कि यह सफलता मिस्ड ऑपर्च्युनिटीज रणनीति और नई तकनीकी जाँच का नतीजा है। आने वाले समय में यहाँ और कुओं की ड्रिलिंग और उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई जा सकती है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है खोज

भारत में इस समय प्राकृतिक गैस की खपत करीब 187 MMSCMD (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन) है, जबकि देश अपनी लगभग 50 फीसदी जरूरत LNG आयात से पूरी करता है।

ऐसे में घरेलू गैस उत्पादन बढ़ना काफी अहम माना जाता है। हालाँकि इस नए कुएँ से अभी केवल 0.025 MMSCMD गैस उत्पादन शुरू हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आगे बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की संभावना बन सकती है।

वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की स्थिति में भारत के ऊर्जा आयात पर असर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में देश के भीतर नए गैस भंडार मिलना सरकार के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह खोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता मिशन को और मजबूती देगी।

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भारत के अल्पसंख्यकों के लिए बोलने से पहले अपने घर और यूरोप के देशों को देख लेते

सुभाष चन्द्र

आखिर नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ROB JETTEN अपने देश में कुरान जलाए जाने के बावजूद भारत में अल्पसंख्यकों की वकालत किस मुंह से कर रहे हैं? आखिर तुम्हारे देश में कुरान क्यों जलाया गया था? वैसे तो भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं वह देश की हिन्दुओं के बाद दूसरे नंबर है और जो दूसरे नंबर की आबादी होती है वह अल्पसंख्यक कैसे? आपका सवाल यह सवाल यह होना चाहिए था।     

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ROB JETTEN ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से पहले भारत के अंदरूनी मामलों के बारे में विवादित बयान देकर कोई परिपक्वता नहीं दिखाई हालांकि हमारे विदेश मंत्रालय ने उन्हें ठोक कर जवाब दिया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से मिलने से पहले ऐसा बयान देने का औचित्य क्या था? 

Jetten ने कहा कि “Dutch government too, has concerns regarding developments in India. It is not just press freedom, but also about the rights of minorities, which are under severe pressure there”.

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आप क्या कहना चाहते थे Mr Jetten कि भारत में प्रेस फ्रीडम नहीं है और अल्पसंख्यकों (शायद मुस्लिमों) के लिए तड़प रहे थे, प्रताड़ित हैं? नीदरलैंड यूरोपीय देश है और ब्रिटेन समेत पूरे यूरोप में मुस्लिमों के क्या विवाद चलते रहते हैं, आप कैसे भूल गए? आज लंदन छोड़ कर लोग भाग रहे हैं क्योंकि वहां पाकिस्तानियों की वजह से रहना मुश्किल हो गया है 

Mr Jetten आपको भारत के बारे में कुछ जानकारी नहीं है मीडिया को पूरी आज़ादी है और कुछ मीडिया के लोग हमारे प्रधानमंत्री को अपमानित करने में पीछे नहीं रहते आपका विपक्ष का नेता Geert Wilder कभी आपको “गद्दार” नहीं कहता होगा लेकिन हमारा विपक्ष का नेता हमारे प्रधानमंत्री को कहता है 

आपको यह भी शायद मालूम नहीं है कि आपके देश की जितनी आबादी है (1.8 करोड़) उसके 5 गुना तो भारत में घुसपैठिये हैं और आप उन्हीं को अल्पसंख्यक मान कर उनकी वकालत कर रहे हैं, भारत में अल्पसंख्यक नहीं बहुसंख्यक खतरे में रहते हैं और उन पर हमले होते हैं कितना आतंकवाद भारत झेलता है, कितना धर्म परिवर्तन और लव जिहाद होता है भारत में आपको कुछ नहीं पता

आपके देश में स्वीडन और डेनमार्क की तरह कुरान जलाई गई लेकिन ऐसा भारत में कभी नहीं हुआ आपके देश में anti-immigration आंदोलन चलते हैं जो टर्की और मोरक्को की मुस्लिमों के खिलाफ है आप सोचिये अगर कल को Geert Wilder प्रधानमंत्री हो गए तो क्या वो भी आपकी तरह “अल्पसंख्यकों” के लिए उदार होंगे जो कहते हैं -”Islamic Culture is incompatible with Western, secular and democratic values and mass immigration threatens Dutch identity”.

कज़ाकस्तान की आबादी में 69% मुस्लिम हैं वहां के Bishop ATHANASIUS SCHNEI DER के शब्दों पर ध्यान दीजिए उन्होंने कहा - “THEY ARE NOT REFUGEES, THEY ARE INVADERS WHO WANT TO ISLAMIZE EUROPE. THEY WANT TO DESTROY HISTORICAL CULTURE IN EUROPE”.

एक मित्र देश के प्रधानमंत्री से मिलने से पहले आपको ऐसा बयान देने से पहले अपने घर और यूरोप में झांक लेना चाहिए था

बंगाल : अब ‘नो कोर्ट, सीधा डिपोर्ट’: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को BSF को सौंपने का दिया आदेश, बोले- अदालत ना ले जाएँ

       शुभेंदु अधिकारी और अवैध बांग्लादेशी प्रवासी, BSF को सौंपने का आदेश (फोटो साभार : NDTV & Jagran)
बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने पर बीजेपी सरकार ने घुसपैठ पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एलान किया है कि राज्य में पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अब कोर्ट में पेश नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपकर वापस भेजा जाएगा। ‘पता लगाओ, हटाओ और देश-निकाला दो’ अभियान के तहत यह नया नियम 20 मई से लागू हो चुका है।

जिन बांग्लादेशियों को अपनी कुर्सी की खातिर ममता बनर्जी दामाद बनाकर पाल रही थी, अब दामादों को जिस तरह देश-निकाला किया जा रहा है, हर बीजेपी राज्य को शुभेंदु के रास्ते पर चलना होगा। ये अवैध घुसपैठियों की वजह से भारतीयों को मिलने वाली सुविधाएं बाधित हो रही है। जब तक देश से घुसपैठियों- पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या- को बाहर नहीं किया जाएगा देश में असुरक्षा का डर हमेशा बना रहेगा। इन घुसपैठियों का समर्थन करने वाली पार्टियों से पूछना चाहिए कि जिन रोहिंग्यों को जब कोई मुस्लिम मुल्क रखने को तैयार नहीं फिर क्यों भारत में रखने के लिए हिन्दू-मुसलमान कर माहौल ख़राब कर रहे हो? क्या ये घुसपैठिये तुम्हारे दामाद हैं?         

अब कोर्ट के चक्कर नहीं, सीधे बॉर्डर पर ‘नो एंट्री’

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हावड़ा में साफ कहा कि पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। हावड़ा स्टेशन या राज्य में कहीं भी कोई अवैध बांग्लादेशी पकड़ा जाता है, तो उसे अदालत ले जाने की जरूरत नहीं है। पुलिस पहले उसे अच्छे से खाना खिलाएगी और फिर सीधे उत्तर 24 परगना के पेट्रापोल या बशीरहाट बॉर्डर पर BSF के हवाले कर देगी, जहाँ से उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।

किसे मिलेगी राहत और कौन होगा बाहर?

इस नए नियम से उन लोगों को अलग रखा गया है जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में आते हैं। बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थी अगर प्रताड़ना की वजह से भारत आए हैं, तो वे CAA के तहत नागरिकता का दावा कर सकते हैं। लेकिन जो इस दायरे में नहीं आते और अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें तुरंत डिपोर्ट किया जाएगा। हर हफ्ते ऐसे लोगों की रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक (DGP) के जरिए मुख्यमंत्री दफ्तर भेजी जाएगी।

2025 के नए कानून से मिला सरकार को पावर

अब तक का नियम था कि बिना कागजात मिलने वाले विदेशी नागरिक को ‘विदेशी अधिनियम 1946’ के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाता था। यह अदालती प्रक्रिया सालों चलती थी। लेकिन अब सरकार संसद से अप्रैल 2025 में पास हुए ‘प्रवासन और विदेशियों अधिनियम, 2025’ के तहत कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 14 मई को ही इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसका बंगाल सरकार पालन कर रही है।

कांग्रेस शासन में हिंदुओं के खिलाफ लाए 7 काले कानून!

                                                                                                                     साभार: सोशल मीडिया  
आजादी के बाद कांग्रेस ने सत्ता को केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि वैचारिक वर्चस्व स्थापित करने का औजार भी बना लिया। देश की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी को उसकी अपनी आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के प्रति अपराधबोध से भरने की एक सुनियोजित राजनीति दशकों तक चलती रही। सेक्युलरिज्म के नाम पर ऐसा वातावरण और कानून बनाए गए, जिनमें हिन्दू यदि अपने अधिकारों, मंदिरों या सांस्कृतिक अस्मिता की बात करे तो उसे संकीर्ण और साम्प्रदायिक ठहराया जाए, जबकि तुष्टिकरण की राजनीति को प्रगतिशीलता का प्रमाणपत्र दिया जाता रहा। हिन्दू कोड बिल से लेकर वक्फ कानून, शाहबानो प्रकरण से लेकर वोट बैंक आधारित नीतियों तक, कांग्रेस ने बार-बार ऐसा संदेश देने की कोशिश की कि इस देश में बहुसंख्यक होना ही मानो अपराध है। यही कारण है कि दशकों तक हिन्दू समाज को ‘सहन करो, झुको और चुप रहो’ की मानसिकता में ढालने का प्रयास किया गया।

मोदी सरकार ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के जरिए एक नई पहचान दी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी ने 80 और 90 के दशक में इस वैचारिक खेल की परतें खोलनी शुरू कीं। हिन्दू समाज को यह एहसास कराया गया कि सहिष्णुता और आत्मसमर्पण एक ही नहीं होते। सनातन परंपरा क्षमा सिखाती है, लेकिन आत्महीनता नहीं। कांग्रेस ने जहां जाति, क्षेत्र और तुष्टिकरण के जरिए हिंदुओं को खांचों में बांटने की राजनीति की, वहीं मोदी सरकार ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के माध्यम से उन्हें एक साझा पहचान देने की पुरजोर कोशिशें की हैं। आज एक ओर ओबीसी, जातीय जनगणना और विभाजनकारी विमर्श के जरिए हिन्दू समाज को बांटने की कांग्रेस और विपक्ष की राजनीति है, तो दूसरी ओर सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, सबका विकास और सभ्यतागत गौरव को पुनर्स्थापित करने का सफल प्रयास है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE)

लागू हुआ : 1 अप्रैल 2010
आरटीई में मदरसों और मुस्लिम शिक्षण संस्थानों को छूट
इस कानून के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी जोड़ा गया। लेकिन कांग्रेस सरकार की पक्षपातपूर्ण मंशा की पोल तब खुल गई, जब पता चला कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों, मदरसों को कई प्रावधानों से छूट दी गई, जबकि 
हिन्दू प्रबंधित निजी स्कूलों पर अधिक नियामकीय बोझ डाला गया। इस कानून को लेकर आज भी “समान नियम बनाम विशेष छूट” की बहस जारी है।
                                                                                     साभार : सोशल मीडिया 
फॉरेन कॉन्ट्रीबूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए)
लागू हुआ :2010
गैर हिंदू धार्मिक एवं गैर-सरकारी संगठनों को अप्रत्यक्ष लाभ
एफसीआरए का उद्देश्य विदेशी चंदे के नियमन को मजबूत करना था। लेकिन वास्तविकात में इस कानून का इस्तेमाल चयनात्मक तरीके से किया गया और कुछ गैर 
हिन्दू धार्मिक एवं गैर-सरकारी संगठनों को अप्रत्यक्ष लाभ मिला। दरअसल, यह कानून विदेशी फंडिंग की निगरानी और गैरकानूनी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए होना चाहिए था। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। बाद में मोदी सरकार ने इसमें कई संशोधन कर नियमों को और कड़ा किया और इसे सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता से जोड़ा।
वक्फ अधिनियम संशोधन
लागू हुआ : 1995
वक्फ बोर्डों को आंख मूंदकर अत्यधिक अधिकार दिए गए
कांग्रेस सरकार ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए नया वक्फ कानून लागू किया। इससे वक्फ संपत्तियों पर कब्जे को भी बढ़ावा मिला। आलोचकों ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्डों को अत्यधिक अधिकार दिए गए, जिससे संपत्ति विवादों में सामान्य नागरिकों के लिए कानूनी जटिलताएं बढ़ीं। बाद के वर्षों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई कि वक्फ कानूनों में अधिक पारदर्शिता और न्यायिक संतुलन होना चाहिए।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम
लागू हुआ : 1992
मुसलमानों के धार्मिक और भाषाई अधिकारों की रक्षा करना
आजादी के बाद वक्फ की संपत्ति और उसके रखरखाव के लिए वक्फ एक्ट-1954 बनाया गया था। कोई भी ऐसी चल या अचल संपत्ति वक्फ की हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर दे। 1995 में वक्फ कानून में संशोधन करते हुए वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दी गईं। आज इसी शक्ति की वजह वक्फ और मुसलमान समुदाय देशभर में लैंड जिहाद चला रहा है। कानून कहता है कि यदि वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर अपना दावा कर दे, तो उसे उसकी संपत्ति माना जाएगा। मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कई उदाहरणों में से यह एक बड़ा कानून था। कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को वैधानिक दर्जा देने के लिए यह कानून बनाया। इसका उद्देश्य केवल मुसलमानों के धार्मिक और भाषाई अधिकारों की रक्षा करना था। स्वाभाविक रूप से आलोचकों का कहना था कि संविधान पहले से सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, इसलिए अलग आयोग बनाना पहचान-आधारित राजनीति को बढ़ावा देता है। विरोधियों ने यह भी कहा कि बहुसंख्यक समुदाय की शिकायतों के लिए समान स्तर की संस्थागत व्यवस्था नहीं बनाई गई।

पूजा स्थल अधिनियम
लागू हुआ : 1991
हिंदू धार्मिक स्थलों पर ऐतिहासिक दावों के कानूनी रास्ते सीमित किए

राम मंदिर आंदोलन की तरह अन्य आंदोलन न हों, इसी मंशा से पूजा स्थल कानून लाया गया था। पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार द्वारा लाए गए इस कानून में यह प्रावधान किया गया कि 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बदला नहीं जाएगा। अयोध्या विवाद को इससे बाहर रखा गया था। दरअसल, हकीकत यह थी कि इससे अयोध्या को तो भारी दबाव के चलते अलग रख दिया गया। लेकिन इस कानून की आड़ में काशी और मथुरा जैसे अन्य हज़ारों विवादित हिन्दू धार्मिक स्थलों पर ऐतिहासिक दावों के कानूनी रास्ते सीमित कर दिए गए। दरअसल इस कानून के माध्यम से हिंदू पक्ष की मांगों को स्थायी रूप से रोकने का कुत्सित प्रयास किया गया।

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट धारा- 2
यह धारा कहती है कि 15 अगस्त 1947 में मौजूद किसी धार्मिक स्थल में बदलाव के विषय में यदि कोई याचिका कोर्ट में पेंडिंग है तो उसे बंद कर दिया जाएगा।

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा- 3
इस धारा के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल को पूरी तरह या आंशिक रूप से किसी दूसरे धर्म में बदलने की अनुमति नहीं है। इसके साथ ही यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि एक धर्म के पूजा स्थल को दूसरे धर्म के रूप में ना बदला जाए या फिर एक ही धर्म के अलग खंड में भी ना बदला जाए।

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा- 4 (1)
इस कानून की धारा 4(1) कहती है कि 15 अगस्त 1947 को एक पूजा स्थल का चरित्र जैसा था उसे वैसा ही बरकरार रखा जाएगा।

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा- 4 (2)
धारा- 4 (2) के अनुसार यह उन मुकदमों और कानूनी कार्यवाहियों को रोकने की बात करता है जो प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट के लागू होने की तारीख पर पेंडिंग थे।

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा- 5
धारा- 5 में प्रावधान है कि यह एक्ट रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले और इससे संबंधित किसी भी मुकदमे, अपील या कार्यवाही पर लागू नहीं करेगा।

आर्टिकल 25- धर्म परिवर्तन को मान्यता
वर्ष 1950 में संविधान में आर्टिकल 25 शामिल किया गया। इसमें धर्म परिवर्तन को मान्यता दी गई। इससे सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुओं को हुआ क्योंकि हिन्दू धर्म के लोगों का ही सबसे अधिक धर्म परिवर्तन कराया गया। भारत के संविधान में धर्मांतरण को लेकर कोई स्पष्ट अनुच्छेद नहीं है। अनुच्छेद 25 से लेकर 28 के बीच धार्मिक स्वतंत्रता का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि अपनी स्वेच्छा से भारत के हर व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने, पालन करने और प्रचार-प्रसार करने की आजादी है।

आर्टिकल 28 – हिंदुओं से धार्मिक शिक्षा का हक छीना
जवाहरलाल नेहरू ने अंग्रेजों की ही तरह आजादी के बाद भी दबाना जारी रखा। आर्टिकल 28 के जरिये हिंदुओं की धार्मिक शिक्षा का अधिकार ही छीन लिया गया। एक तरफ हिंदूओं से धार्मिक शिक्षा का अधिकार छीना गया वहीं दूसरी तरफ आर्टिकल 30 के तहत मुसलमान और अल्पसंख्यक धार्मिक शिक्षा ले सकते हैं।

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम
लागू हुआ : 1986
चुनाव हारने के डर से कानूनी व्यवस्था में गहरा विरोधाभास पैदा किया
यह कानून भारतीय राजनीति और कानूनी इतिहास में एक अत्यंत संवेदनशील और विवादास्पद मोड़ था, जिसने धर्मनिरपेक्षता और समानता की बहस को पूरी तरह बदल दिया। 1985 के शाह बानो मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि एक बुजुर्ग तलाकशुदा मुस्लिम महिला दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत अपने पूर्व पति से जीवनभर भरण-पोषण पाने की हकदार है, जो कि देश का एक धर्मनिरपेक्ष और सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होने वाला कानून था। हालांकि, इस फैसले का कट्टरपंथी मुस्लिम मौलवियों और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कड़ा विरोध किया और इसे शरिया कानून व मुस्लिम पर्सनल लॉ में सीधा हस्तक्षेप माना। चुनाव हारने के डर और मुस्लिम रूढ़िवादी नेतृत्व के भारी दबाव में आकर तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने संसद में पूर्ण बहुमत का उपयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को उलटने के लिए यह विशेष कानून पारित कर दिया। यह कानून मुस्लिमों (विशेषकर मुस्लिम पुरुषों और रूढ़िवादी वर्ग) के फेवर (पक्ष) में इस प्रकार था क्योंकि इसने शरीयत के इस सिद्धांत को कानूनी मान्यता दे दी कि एक मुस्लिम पति की जिम्मेदारी तलाक के बाद केवल 90 दिनों की ‘इद्दत अवधि’ तक ही सीमित है, और उसके बाद वह अपनी बेसहारा पत्नी को वित्तीय सहायता देने के कानूनी दायित्व से पूरी तरह मुक्त हो जाता है। इसने मुस्लिम समाज के पारंपरिक ढांचे और उनके व्यक्तिगत कानूनों की स्वायत्तता को धर्मनिरपेक्ष अदालतों के हस्तक्षेप से बचा लिया, जिसे मुस्लिम नेतृत्व ने अपनी धार्मिक स्वतंत्रता की जीत के रूप में देखा। इसके विपरीत, यह कदम हिंदुओं और अन्य समुदायों के लिए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण इसलिए प्रतीत हुआ क्योंकि इसने देश की कानूनी व्यवस्था में एक गहरा विरोधाभास पैदा कर दिया। जहां एक तरफ हिंदू, ईसाई या सिख पुरुषों पर देश का धर्मनिरपेक्ष कानून (CrPC 125) लागू होता था, जिसके तहत यदि वे अपनी पत्नी को तलाक देते हैं तो उन्हें पत्नी के पुनर्विवाह न करने तक जीवनभर आर्थिक भरण-पोषण (Alimony) देना अनिवार्य है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम पुरुषों को इस नए कानून के माध्यम से उस सामान्य नागरिक दायित्व से विशेष छूट दे दी गई। आलोचकों, हिंदू संगठनों और कई कानूनी विचारकों ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति का चरम उदाहरण माना, जहां एक ही अपराध या नागरिक परिस्थिति (तलाक के बाद महिला की लाचारी) के लिए दो अलग-अलग धर्मों के नागरिकों के साथ कानूनन अलग व्यवहार किया गया।

हिंदू कोड बिल
लागू हुआ : 1955
केवल हिंदुओं पर कानून लागू, मुस्लिमों को बख्श दिया
स्वतंत्रता के बाद नेहरू सरकार ने हिंदू व्यक्तिगत कानूनों में व्यापक सुधार के नाम पर हिंदू कोड बिल 1955-56 लागू किया। यह कानून विवाह, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति अधिकारों के बारे में थे। इसके तहत हिंदू मैरिज एक्ट 1955, हिंदू सक्सेशन एक्ट 1956, हिंदू अडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट 1956, हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्डियनशिप एक्ट 1956 को शामिल किया गया। इन कानूनों में यह पूरी तरह साफ था कि सरकार ने केवल हिंदू समाज में हस्तक्षेप किया, जबकि समान नागरिक संहिता की दिशा में अन्य धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को नहीं छुआ गया। इसी कारण कई राष्ट्रवादी नेताओं ने इसे मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर “असमान सुधार” कहा।

हिंदू कोड बिल पर राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया था नेहरू का विरोध
आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने पहली लोकसभा में 1955-56 में हिंदू कोड बिल्स पास किए। इस बिल को लेकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पंडित जवाहर लाल नेहरू के बीच राजनीतिक मतभेद उत्पन्न हो गया था। अक्टूबर 1947 में संविधान सभा में अंबेडकर ने इसका मसौदा पेश किया। नेहरू ने उसका समर्थन किया। इसके तहत सभी हिंदुओं के लिए एक नियम संहिता बनाई जानी थी। तब गृह मंत्री सरदार पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जो हिंदू महासभा से संबंधित थे, कांग्रेसी नेता पंडित मदन मोहन मालवीय ने हिंदू कोड बिल का पुरज़ोर तरीके से विरोध किया था। कांग्रेस अध्यक्ष पट्टाभि सीतारमैया ने बिल का बहिष्कार यह कहते हुए किया कि आनेवाले चुनावों में इस बिल का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस बिल का बहिष्कार यह कहते हुए किया था कि यह बिल हिंदू संस्कृति को टुकड़ों में बांट देगा। ऑल इंडिया हिंदू वीमेन कांफ्रेंस की अध्यक्ष जानकी बाई जोशी ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को पत्र लिखते हुए कहा था कि प्रस्तावित विधेयक संस्कार विवाह को संविदात्मक बनाकर हिंदुओं की परिवार व्यवस्था को ही नष्ट कर रहा है। 

हिंदू दर्शन, कला और संस्कृति को सीखने का केंद्र थे मंदिर
मंदिर हमेशा से ही हिंदू सभ्यता और संस्कृति के केंद्र रहे थे। हमारी सभ्यता इन्हीं मंदिरों की वजह से फलती-फूलती रही। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं थे। बल्कि, हिंदू दर्शन, कला और संस्कृति को सीखने का केंद्र थे। सभी राजाओं ने अपने समय में मंदिरों का निर्माण किया। और, ये मंदिर ही मुगल और अंग्रेजों के समय विरोध का भी केंद्र बने। मुगलों ने मंदिरों को तोड़ने की कोशिशें की, लेकिन उस पर नियंत्रण नहीं कर सके। समय-समय पर ईस्ट इंडिया कंपनी और अंग्रेजों ने भी ऐसा ही करना चाहा। लेकिन, वो नाकाम रहे। 1863 में अंग्रेजों ने एक एक्ट लाकर हिंदू मंदिरों को स्वतंत्र कर दिया। जिसके चलते मंदिर स्वतंत्रता सेनानियों की बैठकों की जगह बन गए।