हिन्दुओं victim card खेलने वालों के खिलाफ एकजुट हों ; ये प्रेग्नेंट है से लेकर उसकी बीवी तो सुंदर है तक… नासिक TCS कांड में जिहादी गैंग के कुकर्मों को धो-पोंछने के लिए क्या तर्क दे रही ‘जमात’, अम्मी-बहन-मौलाना सबको किया एक्टिव

             नासिक TCS कांड में मुस्लिम गैंग को बचाने के लिए नई 'जमात' एक्टिव (साभार : ChatGPT)
हिन्दुओं और समस्त हिन्दू संगठनों को भी कट्टरपंथियों की तरह एकजुट होकर work jehadi के विरुद्ध सिर्फ खड़ा होना होगा बल्कि जनता को जिहाद का समर्थन कर रही पार्टियों का धूल चटवाने के लिए खड़ा करना होगा। जब तक जेहादियों को कालनेमि हिन्दुओं द्वारा समर्थन दिया जाता रहेगा हिन्दू अपमानित होता रहेगा। दंगा होता है तो बाहरी आकर करते हैं लेकिन पुलिस के हत्ते चढ़ते स्थानीय। जनता, हिन्दू स्वयंसेवी संगठन और अदालतों को ऐसे मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा। इनके victim card को कूड़ेदान में फेंक सख्ती से पेश आना होगा।   

नासिक TCS कांड को लेकर पिछले दिनों पूरे देश में हल्ला मचा, लेकिन वामपंथियों की कान में जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने पहले इस मामले में लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी और फिर जब बोले तो सीधा मुस्लिम आरोपितों के बचाव पर उतर आए। अब स्थिति ये है कि इस मामले को दबाने के लिए एक नई जमात को एक्टिव किया गया है जो इस खबर में नए-नए एंगल लाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। कैसे आइए बताते हैं?

अभी तक मीडिया में आप हिंदू पीड़ितों के साथ हुए अत्याचार की खबरों को पढ़ रहे थे। मगर अब इस केस को ऐसा बनाया जा रहा है कि आपके मन में या तो मुस्लिमों आरोपितों की पीड़ित वाली छवि बने या फिर आपको ये लगे कि कहीं हिंदू ही इस मामले को बेवजगह तूल देकर किसी बेचारे को फँसा तो नहीं रहे है।

प्रेग्नेंसी और संवेदना का पुराना खेल: निदा खान और सफूरा जरगर का ‘विक्टिम’ कनेक्शन

नासिक कांड में कथित तौर पर निदा खान को HR हेड कहा जा रहा है, जिसकी भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि निदा खान न केवल इस पूरे गिरोह की जानकारी रखती थी, बल्कि जब पीड़ित हिंदू महिलाओं ने उसके पास शिकायतें भेजीं, तो उसने कोई एक्शन लेने के बजाय उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि ‘ऑफिसों में यह सब चलता है।’ अब जब पुलिस का शिकंजा कसा, तो निदा खान फरार हो गई और अचानक कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए ‘प्रेग्नेंसी’ का तर्क सामने रख दिया। सोशल मीडिया पर एक विशेष जमात ने तुरंत यह शोर मचाना शुरू कर दिया कि एक ‘गर्भवती महिला’ को पुलिस और मीडिया परेशान कर रहा है।

यह ठीक वैसा ही नैरेटिव है जैसा 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय देखा गया था। उस वक्त मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल सफूरा जरगर ने भी जेल से बचने के लिए अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला दिया था। तब भी लिबरल गिरोह ने छाती पीटते हुए सफूरा को ‘बेचारी छात्रा’ और ‘स्कॉलर’ बताया था, जबकि उस पर UAPA जैसी गंभीर धाराओं के तहत सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप था। निदा खान हो या सफूरा, ये लोग जानते हैं कि भारतीय समाज में प्रेग्नेंसी एक संवेदनशील विषय है, इसलिए वे अपने अपराधों की गंभीरता को कम करने के लिए इसे ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।

‘मेरी बहू सुंदर है तो बेटा क्यों भटकेगा?’: आरोपित की अम्मी का इमोशनल ड्रामा

नासिक TCS कांड के मुख्य आरोपित दानिश शेख की गिरफ्तारी के बाद उसकी अम्मी का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें वह फूट-फूटकर रोते हुए अपने बेटे को ‘बेगुनाह’ साबित करने पर तूली है। आरोपित की अम्मी ने तर्क दिया कि उनका बेटा बहुत अच्छा इंसान है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

सबसे अजीबोगरीब दलील जो उन्होंने दी, वो यह थी कि ‘मेरी बहू इतनी सुंदर है, मेरा बेटा किसी और के पीछे क्यों जाएगा?’ यह तर्क देकर उन्होंने उन सभी महिलाओं के आरोपों को सिरे से खारिज करने की कोशिश की जिन्होंने दानिश पर गंभीर यौन शोषण और रेप के आरोप लगाए हैं।

आरोपित दानिश की अम्मी का कहना है कि उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है और उनकी बहू डिप्रेशन में है। वह धर्मांतरण के आरोपों पर कहती हैं कि ‘धर्मांतरण ऐसे नहीं होता, ये काम तो सिर्फ मौलवी करते हैं।’ लेकिन पुलिस की जाँच और दर्ज की गई 9 FIR कुछ और ही कहानी बयाँ करती हैं। जाँच में सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क था जहाँ हिंदू लड़कियों पर मानसिक दबाव बनाया गया, उन्हें बीफ खाने को मजबूर किया गया और धार्मिक टिप्पणियाँ की गईं। अम्मी के आँसू अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन वे उन पीड़ित लड़कियों के आँसुओं का जवाब नहीं हैं जिनका शोषण ऑफिस की आड़ में किया गया।

मौलाना और ‘स्क्रिप्टेड’ साजिश: जब कुछ न मिले तो बजरंग दल को कोस दो

इस मामले में एक और एंगल आरोपितों के रिश्तेदारों और मौलानाओं की तरफ से सामने आया। आरोपित रजा मेमन के चाचा रजाक काजी का दावा है कि यह सब कुछ एक ‘साजिश’ है और इसमें बजरंग दल शामिल है। उनका कहना है कि लड़कियों के परिवारों ने बजरंग दल को बुलाया और उनके दबाव में आकर पुलिस ने यह पूरा ‘स्क्रिप्ट’ तैयार किया।

यह एक जाना-पहचाना पैंतरा है, जब भी कोई मुस्लिम आरोपित पकड़ा जाता है, तो उसे ‘मुस्लिम होने की सजा’ या ‘दक्षिणपंथी संगठनों की साजिश’ करार देकर असल अपराध से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है। काजी का कहना है कि पुलिस ने पहले एक व्यक्ति को छोड़ा और फिर दोबारा गिरफ्तार कर लिया, जिससे साबित होता है कि सबकुछ पहले से तय था।

लेकिन वे इस बात का जवाब नहीं देते कि अगर सबकुछ स्क्रिप्टेड था, तो मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुए उन बयानों का क्या, जिनमें महिलाओं ने आपबीती सुनाई है? नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के अनुसार, यह मामला एक संगठित नेटवर्क जैसा है जिसमें 18 से 25 साल की लड़कियों को निशाना बनाया गया। मौलानाओं और आरोपितों के रिश्तेदारों द्वारा बजरंग दल का नाम लेना केवल मामले को सांप्रदायिक मोड़ देने की कोशिश है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘मुस्लिम उत्पीड़न’ का रोना रोया जा सके।

आरोपित की बीवी का हिंदू पीड़िता पर वार

TCS के गिरफ्तार कर्मचारियों में से एक की बीवी ने अब मीडिया के सामने आकर नया दावा किया है। उनका कहना है कि दानिश शेख और शिकायतकर्ता महिला के बीच पहले से ‘रिलेशनशिप’ था और सब कुछ आपसी सहमति से हो रहा था। आरोपित की बीवी के अनुसार, “ऑफिस में हर कोई जानता था कि वह महिला दानिश की दीवानी थी और वह घंटों उसके काम खत्म होने का इंतजार करती थी।”
आरोपित की बीवी का कहना है कि उस महिला ने दानिश के लिए रोजा रखना और उसकी पसंद के कपड़े पहनना भी शुरू कर दिया था। अब जब उनके रिश्ते में कड़वाहट आई, तो उसने रेप और धर्मांतरण का आरोप लगा दिया। इस तर्क के जरिए आरोपित की बीवी न केवल दानिश को बचाने की कोशिश कर रही है, बल्कि अन्य 7 गिरफ्तार पुरुषों को भी निर्दोष बता रही है।
आरोपित की बीवी का कहना है कि पुलिस ने अलग-अलग मामलों को जानबूझकर एक साथ जोड़ दिया है। बीवी यह भी सवाल उठाती है कि ‘अगर उसका शौहर घर से शाकाहारी खाना ले जाता था, तो वह किसी को मांसाहार के लिए कैसे मजबूर कर सकता है?’ लेकिन यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस ने केवल एक नहीं, बल्कि कई महिलाओं के बयानों के आधार पर केस दर्ज किया है।
एक महिला के साथ ‘रिलेशनशिप’ का तर्क देकर उन अन्य पीड़ितों के यौन शोषण और धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों को नहीं झुठलाया जा सकता जिन्होंने इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठाई है।

वामपंथी-लिबरल इकोसिस्टम की निर्लज्जता: अपराधियों के लिए आँसू, पीड़ितों के लिए खामोशी

नासिक के इस कांड ने एक बार फिर ‘लिबरल और वामपंथी’ गिरोह के दोहरे चरित्र को नंगा कर दिया है। जब तक पीड़ित हिंदू महिलाएँ अपनी गरिमा के लिए लड़ रही थीं, तब तक इन लोगों को ‘साँप सूँघ’ गया था। लेकिन जैसे ही मुस्लिम आरोपितों की गिरफ्तारी हुई, राजदीप सरदेसाई से लेकर अरफा खानम शेरवानी तक, पूरा इकोसिस्टम सक्रिय हो गया। इनके लिए यह ‘यौन शोषण’ नहीं बल्कि ‘रिलेशनशिप में कड़वाहट’ है। इनके लिए यह ‘धर्मांतरण’ नहीं बल्कि ‘मुस्लिम युवाओं को टारगेट’ करने की साजिश है। अरफा खानम ने तो यहाँ तक कह दिया कि मुस्लिमों को जो गिने-चुने रोजगार मिले हैं, उन्हें भी छीना जा रहा है।
नसरीन खान जैसे लोग तो इसे ‘स्मार्ट मुस्लिम लड़कों से हिंदुओं की जलन’ का मामला बता रहे हैं। ये वही लोग हैं जो आतंकियों के मानवाधिकारों के लिए आधी रात को कोर्ट खुलवाते हैं, लेकिन जब हिंदू लड़कियों को ऑफिस के भीतर नमाज पढ़ने या बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इनके मुँह से एक शब्द नहीं निकलता। यह गिरोह जानता है कि कब कहाँ रोना है, कब विक्टिम कार्ड खेलना है और कब पीड़ित महिला का ही चरित्र हनन करना है। इनकी यह ‘चुनिंदा संवेदनशीलता’ ही भारत के सामाजिक ताने-बाने के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

मोदी और अमित शाह नया नहीं नासिक का कार्पोरेट जिहाद, देशभर के KPO-BPO में निशाने पर हिंदू लड़कियाँ: पूर्व KPO कर्मी के तौर पर मैं बताऊँगा इस्लामी कट्टरपंथियों की मोडस ऑपरेंडी

                                                                                                                     प्रतीकात्मक चित्र (AI)

नौकरी चाहिए है? तो पहले नमाज पढ़ो… सैलरी हाइक या प्रमोशन चाहिए है? तो पहले बीफ खाओ… महाराष्ट्र के नासिक में मुस्लिम कट्टरपंथियों के ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का शिकार बनी हिंदू युवतियों और महिलाओं ने ऐसे आरोप लगाए थे। आइए समझते हैं कि विवाद क्या था और इसी क्षेत्र में काम करते हुए मेरा क्या अनुभव रहा।

हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का मामला सामने आया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की एक BPO ऑफिस में हिंदू महिला कर्मचारियों को निशाना बनाकर उन्हें किस तरह इस्लामी जिहाद में फँसाया जा रहा था और इसको लेकर चर्चा हो रही है। सभी आरोपि मुस्लिम हैं और कंपनी में अच्छी और प्रभावशाली पोस्ट पर काम कर रहे थे। इस विवाद के सामने आने के बाद से BPO और KPO की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने का मेरा अनुभव भी शायद समाज के लिए उपयोगी हो सकता है।

मेरा अनुभव

जब पूरा शहर रात के अँधेरे में सो रहा होता है, तब इन चमकती हुई काँच की इमारतों में हजारों युवा जाग रहे होते हैं। आज मैं यह खुलासा करूँगा कि कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल और आधुनिकता के नाम पर यहाँ क्या चल रहा है। आज ऑपइंडिया पर मैं अपना निजी अनुभव साझा कर रहा हूँ।
मैंने BPO और KPO सेक्टर में सालों तक काम किया है। मैंने वहाँ का माहौल देखा है, नेटवर्क देखा है और वहाँ की मानसिकता को करीब से अनुभव किया है। नासिक में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 6 मुस्लिम टीम लीडर तो बस शुरुआत भर हैं। आज मैं इस बारे में बात करूँगा कि इन दफ्तरों के अंदर असली खेल कैसे खेला जाता है।

BPO-KPO सेक्टर के अंदर की सच्चाई

इस सेक्टर में नौकरी पाने के लिए आपको किसी बड़ी डिग्री की जरूरत नहीं होती। थोड़ी-बहुत अंग्रेजी जानने भर से ही आपको 20-30 हजार रुपए की नौकरी मिल जाती है। यहाँ मुख्य रूप से दो तरह के लोग काम करते हैं। एक तरफ वे लोग होते हैं जो बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते और एक ही जगह पर लंबे समय तक टिके रहना चाहते हैं। दूसरी तरफ कॉलेज जाने वाले हिंदू युवक-युवतियाँ होते हैं जो अपने खर्च निकालने के लिए रात में काम करते हैं।
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों में अपने खर्च निकालने के लिए ऐसे ही एक BPO में रात की शिफ्ट में काम किया करता था। मैंने अपनी आँखों से देखा है कि जब कोई मुस्लिम व्यक्ति टीम लीडर (TL), ट्रेनर या HR जैसी किसी ऊँची पोस्ट पर पहुँच जाता है तो वह वहाँ के पूरे माहौल (ecosystem) को ही बदल देता है। वह बड़ी आसानी से अपने मजहब के युवाओं को इंटरव्यू पास करवाकर उन्हें इस सिस्टम के अंदर ले आता है।
हिंदू युवा आमतौर पर 2-3 साल में अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करके दूसरे क्षेत्रों में चले जाते हैं। लेकिन ये लोग सालों तक एक ही जगह पर टिके रहते हैं, क्योंकि इन्हें आगे और पढ़ाई करने की जरूरत नहीं होती। इसका नतीजा यह होता है कि वे ट्रेनिंग से लेकर मैनेजमेंट तक की सभी अहम कुर्सियों पर काबिज हो जाते हैं और जब सत्ता उनके हाथों में आ जाती है तो उनका असली खेल शुरू होता है। और तब उनका असली निशाना होती हैं- नई-नई आई हुईं हिंदू लड़कियाँ।

सीक्रेट मुस्लिम वॉट्सऐप ग्रुप

नासिक के TCS केस में पुलिस जाँच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इन जिहादियों ने ऑफिस के अंदर एक सीक्रेट मुस्लिम वॉट्सऐप ग्रुप बनाया हुआ था। इस ग्रुप में ऑफिस की हिंदू लड़कियों की तस्वीरें शेयर की जाती थीं। वहाँ इस तरह की चर्चाएँ होती थीं कि ‘आज किसका नंबर है?’, ‘कौन-सी लड़की कमजोर है जो जल्दी जाल में फँस जाएगी?’, ‘किसे किस तरह ब्लैकमेल करना है?’।
जो लड़की अपने टीम लीडर को अपना रक्षक मानती थी, वही टीम लीडर डिजिटल ग्रुप में उसी लड़की की बोली लगा रहा था। यह एक ‘डिजिटल मंडी’ थी, जहाँ हिंदू बेटियों की अस्मिता के सौदे हो रहे थे।

टीम आउटिंग और ब्लैकमेलिंग की रणनीति

मुझे याद है कि जब मैं काम करता था, तब ये लोग ‘टीम आउटिंग’ या ‘टीम डिनर’ के नाम पर बहुत जोर देते थे। नासिक के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। ये जिहादी पूरी टीम को आउटिंग पर ले जाते, जहाँ हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण किया जाता, उनके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाए जाते और फिर धर्मांतरण के लिए ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी जाती।
नासिक के अंबड पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत में ऐसी बातें सामने आई हैं जिन्हें सुनकर खून खौल उठता है। कंपनी के मुस्लिम टीम लीडर्स और मैनेजर्स ने जैसे एक नियम बना दिया था कि अगर सैलरी हाइक या प्रमोशन चाहिए तो नमाज पढ़नी होगी और गौमांस खाना होगा।

हिंदू पुरुष भी टारगेट

ये लोग सिर्फ लड़कियों को ही नहीं बल्कि हिंदू लड़कों को भी निशाना बनाते हैं। उन्हें नशे की आदत में धकेलना, उनकी आस्था को तोड़ना और धीरे-धीरे उन्हें इस्लामी विचारधारा की ओर मोड़ना, यह सब ऑफिस के AC केबिन में बैठकर किया जाता है।
रात के समय जब कोई निगरानी करने वाला नहीं होता, तब ये जिहादी ऑफिस को अपने प्रचार का केंद्र बना देते हैं। नाइट शिफ्ट का सबसे बड़ा फायदा इन्हें यह मिलता है कि रात में पूरी दुनिया सो रही होती है। ब्रेक के नाम पर लड़कियों को बाहर ले जाना, होटलों में जाना तो यह सब आम बात बना दी जाती है। CCTV भले ही ऑफिस के फ्लोर पर लगे होते हैं लेकिन पार्किंग या बाहर क्या हो रहा है, इसकी कोई परवाह नहीं करता।

पूरे देश में फैला है नेटवर्क

नासिक पुलिस की कार्रवाई से यह साफ होता है कि यह कोई एक-दो लोगों का मामला नहीं बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। महाराष्ट्र पुलिस ने फिलहाल 6 लोगों को पकड़ा है लेकिन क्या इतना ही काफी है? गुजरात से लेकर दिल्ली तक कई कंपनियों में ऐसे मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
असल में ऐसी कंपनियों के HR और मैनेजमेंट की भी जाँच होनी चाहिए। हर कंपनी की Prevention of Sexual Harassment (POSH) कमेटी में संतुलित और जवाबदेह प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि पीड़ित महिलाओं को सही न्याय मिल सके।
माता-पिता से भी अपील है कि वे इस बात पर ध्यान दें कि उनके बेटे-बेटियाँ किस कंपनी में काम कर रहे हैं, उनका टीम लीडर कौन है और कार्यस्थल का माहौल कैसा है। कॉर्पोरेट कल्चर के नाम पर किसी भी तरह के शोषण या दबाव को नजरअंदाज न करें। अगर किसी के पास ऐसी कोई जानकारी हो, तो संबंधित अधिकारियों तक जरूर पहुँचाएँ क्योंकि समय पर उठाई गई आवाज किसी की जिंदगी बचा सकती है।
(साभार :यह खबर मूल रूप से गुजराती में लिखी गई है ; લિંકન સોખડિયા
Young and enthusiastic journalist, having modern vision though bound with roots. Shares deep interests in subjects like Politics, history, literature, spititual science etc.)

मेरी पारसी मित्र Armaity Ghasvala-Dumasia के आज के लेख का हिंदी में अनुवाद पोस्ट कर रहा हूं : कृपया पढ़िए

सुभाष चन्द्र

कोई बात नहीं, मैं सिर्फ कुछ शब्द कहना चाहती हूँ क्योंकि जो कुछ चल रहा है उससे मैं दुखी और परेशान हूँ, और यह लगातार चलता जा रहा है। 

हम पारसी भारत से बहुत प्रेम करते हैं, हम सच्चे देशभक्त हैं कृपया कुछ घटनाओं के आधार पर हम सबका मूल्यांकन मत कीजिए उन महान पारसियों को याद कीजिए जिन्होंने हमारे देश के लिए इतना कुछ किया है

कुछ लोग अतीत को खोदकर यह कह रहे हैं कि पारसी कंपनियों ने कैसे पैसा कमाया वे जो कहना चाहें कहें कुछ लोग हमारे धार्मिक नियमों की भी आलोचना करते हैं, जैसे हमारे मंदिरों में कौन प्रवेश कर सकता है वे यह नहीं समझते कि ये वे पुराने वचन हैं जो हमारे पूर्वजों ने भारत आने पर दिए थे, और उन्हें हम आज भी निभा रहे हैं

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब इसी मुद्दे पर दूसरी कंपनियों का भी नाम लिया जा रहा है। तब लोग उनके बारे में क्या कहेंगे? अभी “पारसियों से नफरत”, फिर अगला कौन? इस प्रकार की नफरत बंद होनी चाहिए हमें परिपक्व बनना चाहिए, एकजुट रहना चाहिए और मिलकर काम करना चाहिए मुझे इस नफरत की परवाह नहीं, क्योंकि मैं जानती हूँ कि मैं एक वफादार भारतीय हूँ और यह आपसी लड़ाई बचकानी है और केवल दुश्मनी पैदा करती है

Tata Group को देखिए—वहाँ अधिकांश कर्मचारी हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों से हैं कुल मिलाकर पारसियों की संख्या लगभग 60,000 ही है उनमें से कई विद्यार्थी हैं या बुजुर्ग हैं और बहुत कम लोग वास्तव में टाटा में काम करते हैं, और वहाँ के अधिकांश शीर्ष अधिकारी पारसी भी नहीं हैं, बल्कि हिंदू या अन्य समुदायों से हैं जब कोई गलती होती है, तो आप केवल टाटा परिवार को दोष नहीं दे सकते; आपको उन प्रबंधकों और अध्यक्षों को भी देखना चाहिए जो उन विभागों के प्रभारी हैं

हाल की Tata Consultancy Services (TCS) की घटना ने हमारी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है क्योंकि लोग सोचते हैं कि “टाटा” का अर्थ हमेशा “पारसी” होता है, जबकि पूरी सच्चाई यह नहीं है 

परिपक्व बनिए, आप लोग आखिर कितने समुदायों से नफरत करेंगे?

मैं एक बहुत दृढ़ विचारों वाली इंसान हूँ और कट्टर राष्ट्रवादी हूँ, मैं सच्ची देशभक्त हूँ

यदि आप चाहें, तो मुझे अपनी मित्र सूची से हटा सकते हैं, मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी

‘HR मैनेजर नहीं थी निदा खान’: TCS ने नासिक कांड पर जारी किया बयान, कहा- POSH की कोई शिकायत भी नहीं मिली; पुलिस कृतिवासन से भी पूछताछ करे


आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले पर अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने साफ कहा है कि जिस महिला कर्मचारी पर आरोप लगाए जा रहे हैं वह HR (मानव संसाधन) मैनेजर नहीं है और न ही नासिक का ऑफिस बंद हुआ है। TCS ने यह जानकारी शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में दी गई अपनी रिपोर्ट में दी।

कंपनी के मुताबिक, आरोपित निदा खान को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में HR मैनेजर या विभाग की प्रमुख बताया जा रहा है जबकि वह HR विभाग से जुड़ी ही नहीं हैं। वह सिर्फ एक प्रोसेस एसोसिएट (साधारण कर्मचारी) थीं और उनके पास कोई बड़ी जिम्मेदारी या नेतृत्व की भूमिका नहीं थी।

TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कृतिवासन ने कहा, “मीडिया में गलत तरीके से निदा खान को HR मैनेजर बताया जा रहा है। वह न तो HR मैनेजर हैं और न ही हायरिंग का काम संभालती थी। वह सिर्फ एक कर्मचारी थी और उसके पास कोई नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं थी।”

अब सवाल यह है कि जिस CEO को यह नहीं मालूम कि उसकी कंपनी में किस तरह का षड़यंत्र चल रहा है फिर इस पद पर क्यों? क्या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कृतिवासन अपने आपको बचाने इस तरह के बयान दे रहा है? कोई गहरा राज है जिसका भांडा फूटना चाहिए। पुलिस कृतिवासन से भी पूछताछ करे। जब निदा खान HR नहीं थी, क्या CEO को नहीं मालूम कि कोई कर्मचारी किस तरह दुष्प्रचार कर रहा/रही है?     

     

कंपनी ने यह भी साफ किया कि नासिक का ऑफिस पूरी तरह चालू है। बयान में कहा गया, “नासिक में हमारा ऑफिस बंद नहीं हुआ है। वहाँ काम पहले की तरह चल रहा है और ग्राहकों को सर्विसेज दी जा रही हैं। ऑफिस बंद होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं।”

TCS ने यह भी कहा कि उसे नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न से जुड़ी कोई भी शिकायत नहीं मिली है। कंपनी के मुताबिक, नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की शुरुआती जाँच में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है। ये शिकायतें कंपनी के एथिक्स (नैतिकता) या POSH चैनलों में भी दर्ज नहीं हैं। बयान में कहा गया, “विस्तृत जाँच अभी जारी है लेकिन नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की शुरुआती जाँच से यह पता चलता है कि हमें एथिक्स या POSH चैनलों के जरिए ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा आरोप लगाया जा रहा है।”

कंपनी ने बताया कि उसने जाँच के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है। डेलॉइट और लॉ फर्म ट्राइलीगल की टीमों को स्वतंत्र सलाहकार के तौर पर जोड़ा गया है। यह जाँच टीसीएस की प्रेसिडेंट और COO आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में हो रही है। साथ ही, टाटा समूह की इस कंपनी ने एक निगरानी समिति (ओवरसाइट कमेटी) भी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता केकी मिस्त्री कर रहे हैं। कंपनी ने कहा, “आंतरिक जाँच के नतीजे इस समिति के सामने रखे जाएँगे ताकि उनकी समीक्षा हो सके और जो भी सुझाव हों, उन्हें लागू किया जा सके।”

कंपनी ने फिर दोहराया कि वह किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करती। साथ ही, उसने यह भी कहा कि वह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।

बयान में कंपनी ने कहा, “हम हर कर्मचारी की सुरक्षा, सम्मान और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। हम अपने कर्मचारियों का समर्थन करने और हर जगह सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा, “हम कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखे हुए हैं जिससे इस मामले की पूरी, पारदर्शी तरीके से जाँच हो सके और सही निष्कर्ष तक पहुँचा जा सके।”

महिला आरक्षण बिल गिरा कर विपक्ष ने कुल्हाड़ी पर पैर मार लिया

सुभाष चन्द्र

जब हम स्कूल में पढ़ते थे एक शिक्षाप्रद अध्याय जरूर होता था, संस्कृत में ईश्वरः यत करोति शोभनम एव करोति, हिन्दी में भगवान जो करता है भलाई के ही लिए करता है और अंग्रेजी में It's All For The Best तीनों का भावार्थ एक ही है कोई अन्तर नहीं, अन्तर सिर्फ भाषा का है। इस चित्रण में एक राजा और उसके मंत्री की मंत्रा के माध्यम से शिक्षा दी गयी है।

भारत विरोधियों की भीख पर चलने वाला मोदी विरोधी गैंग यानि INDI गठबंधन मोदी के जाल में फंस गया। अगर मोदी विरोधी गैंग अपनी बुद्धि से काम लेता तो बिल को समर्थन देता। अगर चुनावों में महिलाओं ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर वोट दिया मोदी विरोधी गैंग चारों खाने चित होगा। खैर विनाश काल विपरीत बुद्धि, सनातन को अपमानित करने वालों को क्या मालूम भागवत गीता में श्रीकृष्ण ने क्या लिखा है।  

याद रखना मेरे देश वासियों ओर मेरे देश की माता बहनों इन चारों महिलाओं को
इनकी वजह से ही 27 साल से अटके महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया,
इनकी महिला होकर महिला विरोधी मानसिकता से परिपूर्ण सोच को समझिए,
इन्हें सिर्फ अपनी कुर्सी अपने परिवार और अपने राजनीतिक फायदे की चिंता हे,
बाकी हमारे देश की महिला किस दौर से गुजर रही,किस संकट से गुजर रही इन्हें कोई परवाह नहीं,
एक कहती थी "लड़की हूं लड़ सकती हूं" आज उसी लड़की से लड़ने के लिए आमने सामने हो गई,
यह आरक्षण बिल सिर्फ महिलाओं को चुनाव में सीट के लिए बल्कि महिला आत्मसम्मान महिला सशक्तिकरण के लिए भी नींव का पत्थर साबित होता,
लेकिन इन सोने के चम्मच से खाने वाले लोग आपका हक खा गए,
क्यों कि ये परिवारवादी महिलाओं को कोई फर्क नहीं पड़ता महिला के आत्मसम्मान से इन्हें सिर्फ चुनाव के समय महिला याद आती है महिला दुखी नजर आती है, अगले चुनाव मैं इन्हें इस बात का एहसास जरूर करवाना की महिला क्या कर सकती है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
महिला आरक्षण बिल गिरा कर विपक्ष बहुत गर्व कर रहा है और ख़ुशी से पागल है कि हमने बिल को रोक दिया उन्हें नहीं पता कि उन्होंने अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारी बल्कि कुल्हाड़ी पर पैर मार लिया है

महिला आरक्षण 2023 के कानून के अनुसार 2029 से लागू होना है सरकार चाहती थी कि परिसीमन के बाद इसे 2029 से लागू किया जाए लेकिन विपक्ष को पता नहीं उसने यह बिल गिरा कर अपना क्या नुकसान कर लिया

अब महिला आरक्षण 543 सीटों में 33% लागू होगा वह भी 2029 से यानी 543 में से 180 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी जो चुनाव आयोग तय करेगा विपक्ष के कौन से नेता की सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाए पता नहीं वह चाहे राहुल गांधी हो या अखिलेश यादव या कोई अन्य नेता और वह फिर जब किसी और सीट से लड़ेगा तो भाजपा महिलाओं में प्रचार करेगी कि इन्होने आपको जो 283 सीट मिल सकती थी 850 में वो नहीं मिलने दी तब ये महिलाओं को सफाई देते फिरेंगे और जीतना मुश्किल हो जाएगा

दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं की सीट भी महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती है लेकिन वो तो अपना प्रचार का आधार महिलाओं को ही बनाएंगे और जीत सुनिश्चित करेंगे

मोदी जी को पता था यह बिल पास नहीं होगा और इसलिए विपक्ष को बेहाल करने के लिए ये खेल खेला था अब इसका असर बंगाल में जमकर देखने को मिलेगा हो सकता है जब विपक्ष को अपनी गलती का एहसास हो तो वह खुद आरक्षण बिल ले कर आए 

शरीयत लाने वाले क्यों छिपकर संविधान की शरण में आ रहे हैं? नासिक TCS कांड में फरार निदा खान ने कोर्ट में दायर की जमानत याचिका: हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी, तौसीफ का हिंदू कर्मी को मजहबी टोपी पहनाने का Video आया सामने

आरोपित और फरार HR मैनेजर निदा खान, हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहनाता तौसीफ (साभार: जनसत्ता, एक्स @IndiaToday)
नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में नया मोड़ सामने आया। इस मामले की मुख्य आरोपित और फरार निदा खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए नासिक की कोर्ट में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिका दायर की है। कई खबरों में निदा खान को कंपनी की HR मैनेजर भी बताया जा रहा था।

भारत में शरीयत लाकर गज़वा-ए-हिन्द बनाने वाले भांडा फूटने पर उस भारतीय संविधान से न्याय की गुहार क्यों लगाने छिपे-छिपे फिर रहे हैं? जब ये लोग अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते फिर किस से डर कर छिप रहे हो? हर मुसलमान को ऐसे भड़काऊ लोगों से इस सवाल का जवाब मांग इनके भड़काऊ मंसूबों को बेनकाब करना होगा। इन्ही भड़काऊ लोगों ने इस्लाम को बदनाम जहर फ़ैलाने का काम कर रहे हैं। फिर अपने-आपको गरीब, मजलूम आदि बताकर victim card खेल जनता और कानून की आँखों में धूल झोंकते हैं।           

मामले के सामने आने के बाद से ही फरार चल रही खान ने अब अपने वकीलों से दोबारा संपर्क किया, जबकि SIT लगातार उसकी तलाश में कर रही है। इस पूरे मामले में अब तक 9 हिंदू पीड़ितों की FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस अब तक सात पुरुषों और एक महिला समेत कुल 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि निदा खान अब भी फरार है।

निदा खान आंतरिक POSH कमेटी का हिस्सा थी और आरोप है कि उसने शिकायतों को दबाया और पीड़िताओं को कार्रवाई से हतोत्साहित किया। निदा खान दफ्तर की हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी। SIT की जाँच में यह भी सामने आया है कि HR विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 70 से अधिक शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।

डिजिटल साक्ष्य खंगालने में जुटी एजेंसियाँ, बढ़ सकती है जाँच का दायरा

पीड़िताओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और निदा खान ने उन्हें शिकायतें वापस लेने के लिए दबाव डाला। अब जाँच एजेंसियाँ ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और चैट जैसे डिजिटल साक्ष्यों की गहन जाँच कर रही हैं, ताकि आरोपितों के बीच समन्वय और संभावित वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।

अवलोकन करें:-

प्राइवेट पार्ट पर बात, गंदे इशारे और देवी-देवताओं का अपमान: नासिक TCS मामले में मुस्लिम गैंग कैसे
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प्राइवेट पार्ट पर बात, गंदे इशारे और देवी-देवताओं का अपमान: नासिक TCS मामले में मुस्लिम गैंग कैसे
नासिक के अशोका मार्ग पर स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत.....

इस मामले में आरोपित तौसीफ का वो Video मिला, जिसमें वह हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहना रहा है। पीड़ित का कहना है कि 2023 में ईद के मौके पर उसे जबरदस्ती तौसीफ के घर ले जाया गया, जहाँ जबरन उसे मजहबी टोपी पहनाई गई, नमाज और कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS और NIA जैसी एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है, जिससे जाँच का दायरा और बढ़ सकता है। 

परमाणु हथियारों पर बिगड़ी ईरान-अमेरिका की बात: शिया मुल्क के न्यूक्लियर पावर बनने के सपने से क्यों घबराया है US

परमाणु हथियारों का फैलाव न हो, इसके लिए ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ अमेरिका ने भी कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। मध्यपूर्व में परमाणु होड़ को रोकने से लेकर आतंकी संगठनों हूती, हिजबुल्ला और हमास तक पर लगाम कसने के लिए ईरान पर ‘रोक’ जरूरी है। इजरायल के अस्तित्व को नकारने वाले ईरान के हाथ परमाणु बम लगने का वैश्विक असर पड़ सकता है। इसलिए परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण विराम अमेरिका की अहम शर्त है। 
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों को लेकर आतंकवादी प्रेमी बहुत ज्यादा परेशान है। आतंकवादी प्रेमी नहीं चाहते कि 122 आतंकवादी संगठनों को पालने-पोसने वाला आर्थिक तंगी में फंस उन्हें धन दौलत देने से वंचित न हो। अब सवाल यह होता है कि अमेरिका के लाडले पाकिस्तान के पास भी तो नुक्लिअर है लेकिन भूल जाते हैं उन नुक्लियर की कमांड अमेरिका के पास है और अमेरिका की इजाजत के बिना पाकिस्तान उन्हें छू भी नहीं सकता।  आज आतंकवादी हरकतों को देख सम्भावना है कि ईरान नुक्लियर आतंकवादियों को सप्लाई करना शुरू कर दे। 

परमाणु करार पर बढ़ी ‘रार’

ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध को स्थाई तौर पर रोकने के लिए इस्लामाबाद में 21 घंटे की वार्ता विफल रही। मध्यपूर्व में स्थाई शांति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए चल रही वार्ता पर दुनियाभर की नजर थी। इसके विफल रहने के पीछे अहम वजह होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण और उसका परमाणु कार्यक्रम ही है।

अमेरिका नहीं चाहता है कि किसी भी हालत में ईरान के पास परमाणु बम हो। वह हर हाल में ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म या सीमित करना चाहता है, लेकिन ईरान इसे एक देश का अधिकार मानता है।

ईरान-अमेरिका वार्ता भी इसकी वजह से सफल नहीं हो सकी। दरअसल परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी दबाव ईरान को अस्वीकार है। उसका कहना है कि यूरेनियम संवर्धन वह पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, लेकिन परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद से ही अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे में कमी आनी शुरू हो गई थी। अमेरिका को ईरान पर जरा भी एतबार नहीं है।

2015 में अमेरिका डील से बाहर निकल गया

2003 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान चोरी छिपे परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों में लगा हुआ है। इसके आधार पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए। 2006 में ईरानी कंपनियों की संपत्ति, जो विदेशों में थी, उसे फ्रीज कर दिया गया और ईरान में यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध लगाया गया।

इसके अगले साल यानी 2007 में ईरान के हथियार खरीदने पर प्रतिबंध लगाया गया। ईरान की अर्थव्यवस्था पर सबसे गहरी चोट तब पहुँची, जब ईरानी सेंट्रल बैंक और तेल निर्यात पर रोक लगा दी गई।

2015 में ईरान के परमाणु बम नहीं बनाने को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की अगुवाई में ईरान और दुनिया के बड़े देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन के बीच JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) समझौता हुआ था।

उस वक्त ईरान ने माना था कि वो यूरेनियम संवर्धन का स्तर निम्न रखेगा, स्टॉकपाइल सीमित करेगा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को अपने प्लांट के निरीक्षण की इजाजत देगा। समझौते के बाद उस पर लगी आर्थिक पाबंदियाँ हटा दी गईं।

अमेरिका और इजराइल का मानना था कि इससे ईरान परमाणु बम नहीं बना पाएगा और अगर चोरी-छिपे बनाता भी है, तो इसमें काफी समय लगेगा। लेकिन, 2018 में अमेरिका इस डील से बाहर निकल गया। राष्ट्पति ट्रंप का मानना था कि डील एक तरफा और कमजोर है। इसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों पर रोक नहीं लगी है। प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हिजबुल्लाह, हूती हमास) पर कोई रोक नहीं है और 10-15 साल बाद ईरान फिर से खुलकर परमाणु कार्यक्रम चला सकता है। इसके बाद ईरान ने भी धीरे-धीरे डील तोड़ी। उसने यूरेनियम 60% तक संवर्धित करना शुरू कर दिया। हालाँकि परमाणु बम के लिए ये संवर्धन 90% जरूरी होता है। स्टॉकपाइल बढ़ा दिया और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से सहयोग करना कम कर दिया।

10 साल बाद यानी 2025-26 में जब ईरान पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध हटने वाला था, लेकिन JCPOA का उल्लंघन करने, 60 फीसदी से ज्यादा यूरेनियम संवर्धन करने और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के जुर्म में उस पर ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए। हालाँकि ईरान कहता रहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा और चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अमेरिका नहीं माना।

ईरान के साथ बातचीत के बीच अमेरिका ने चेतावनी दी और अंत में इजरायल के साथ मिलकर 28 फरवरी 2026 को हमला कर दिया।

क्या सुरक्षा की गारंटी है परमाणु हथियार

अमेरिका के धूर विरोधी उत्तर कोरिया और ईरान दोनों ही देश हैं। दोनों देशों के संबंध रूस और चीन के साथ अच्छे हैं। लेकिन, अमेरिका उत्तर कोरिया पर हमला करने की हिम्मत नहीं करता, लेकिन ईरान पर हमला करता है। इसकी एक अहम वजह ईरान का परमाणु शक्ति संपन्न नहीं होना भी है।

अगर उत्तर कोरिया की तरह ईरान के पास परमाणु बम होता, तो इजरायल और अमेरिका दोनों ही देश उस पर हमला करने से पहले सौ बार सोचते। दरअसल अमेरिका को डर रहता है कि अगर उसने उत्तर कोरिया को छेड़ा, तो उस तक युद्ध की आँच पहुँच जाएगी। उत्तर कोरिया के पास ऐसे मिसाइल मौजूद हैं, जिससे अमेरिका को टारगेट किया जा सकता है।

अगर ईरान को ‘परमाणु बम’ मिल जाए तो क्या होगा?

अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो मध्यपूर्व में क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होने का तर्क अमेरिका देता रहा है। ईरान के पड़ोसी देशों सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन, तुर्की, इजरायल समेत सभी देश परमाणु हथियार बनाने की होड़ में शामिल हो सकते हैं। इससे पूरे मध्यपूर्व और पूरी दुनिया को खतरा पैदा होगा। फिलहाल इस्लामिक देशों में सिर्फ पाकिस्तान के पास परमाणु बम है, इसकी धौंस वह भारत पर भी जमाता रहता है।

अमेरिका का करीबी देश इजरायल परमाणु संपन्न है, इसके बावजूद ईरान का परमाणु शक्ति संपन्न होना उसकी सुरक्षा के लिए खतरनाक है। 1979 में इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान के इजरायल से काफी अच्छे संबंध थे। 1950 में ईरान ने इजरायल को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी। ऐसा करने वाली ईरान उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने इजरायल को राष्ट्र के रूप में स्वीकारा, लेकिन इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान ने उसे ‘दुश्मन देश’ करार दिया और विश्व मानचित्र से हटाने की बात कही। जाहिर तौर पर इजरायल के लिए ईरान का परमाणु शक्ति संपन्न होना खतरे की घंटी होगी। इसके अलावा हमास से तो इजरायल का युद्ध लंबे वक्त तक चला। हमास को कमजोर करने में वह सफल रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु संपन्न होने से हमास एक बार फिर सामरिक और राजनीतिक रूप से ‘जीवित’ हो सकता है।

हिज्बुल्लाह, हूती, हमास जैसे आतंकियों तक परमाणु बम पहुँच सकते हैं

ईरान के परमाणु बम बना लेने से लेबनान का हिज्बुल्लाह, यमन के हूती, फिलिस्तीन के हमास जैसे संगठन काफी ताकतवर हो सकते हैं। इन संगठनों को ईरान मदद करता है और ये संगठन लगातार इजरायल और मध्यपूर्व के देशों के खिलाफ आतंकी कार्रवाई को अंजाम देते हैं। ऐसे में इन आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को ईरान परमाणु बम का धौंस दिखा कर रोकने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद ये आतंकी संगठन बेखौफ होकर आक्रामक गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। ईरान को इनकी मदद करने में कोई दिक्कत भी नहीं होगी, क्योंकि उसे किसी का डर नहीं होगा।

जो ईरान अभी होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल कर अमेरिका को वार्ता की मेज तक आने के लिए मजबूर कर दिया। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालने में कामयाब रहा, वह हूतियों के माध्यम से लाल सागर पर भी नियंत्रण कर लेगा। होर्मुज की तरह लाल सागर भी दुनिया के व्यस्ततम मार्गों में एक है। ऐसे में ईरान का प्रभुत्व काफी बढ़ जाएगा। इससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा।

ईरान के परमाणु संपन्न होने से न सिर्फ मध्यपूर्व के देश परमाणु बनाने की होड़ में शामिल हो जाएँगे, बल्कि दुनियाभर में परमाणु बम बनाने की एक सनक सवार हो सकती है। परमाणु अप्रसार को रोकने के लिए वैश्विक परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी कमजोर पड़ सकता है। परमाणु संपन्न देश अपने एटमी बमों और हथियारों को दुनिया में न फैलाएँ और धीरे-धीरे दुनिया परमाणु निरस्त्रीकरण की ओर बढ़े, ये इसका उद्देश्य है, लेकिन ईरान जैसे ‘गैर जिम्मेदार’ देशों के पास परमाणु हथियारों का पहुँचना, पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है।

विपक्ष द्वारा न्यायपालिका की अवहेलना

अभी मैं अरविंद केजरीवाल की कोर्ट की वीडियो देख रहा था

जिसमें वह जस्टिस स्वर्णकांता से कह रहा था कि आप आरएसएस के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गई है इसीलिए मुझे आप पर विश्वास नहीं है
जस्टिस स्वर्णकांता ने बोला कि मैं कब गई थी ?
फिर उसने किसी वकीलों के सम्मेलन का नाम लिया और बोला कि उसमें जो आयोजक था उसकी विचारधारा RSS की है
सोचिए अगर इस तरह की बात नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहे होते तो क्या होता
गुजरात हाई कोर्ट में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को घेरने के लिए कांग्रेस ने बड़ा घटिया प्लान रचा था
राष्ट्रीय जनता दल के एक बड़े नेता थे आफताब आलम वह वकील भी थे लंबे समय तक लालू प्रसाद यादव की पार्टी से जुड़े रहे
फिर लालू प्रसाद यादव ने उन्हें बिहार का महाधिवक्ता नियुक्त किया उसके बाद मनमोहन सरकार ने उनको गुजरात हाई कोर्ट का जज बनाकर भेज दिया
कॉलेजियम के द्वारा हाई कोर्ट के जज बनाए जाने की सिर्फ दो शर्तें होती हैं या वह किसी हाईकोर्ट में 10 साल तक प्रेक्टिस किया हो या वह कुछ वर्षों तक किसी राज्य का महाधिवक्ता अब यह जो महाधिवक्ता वाला योग्यता है इसका जमकर दुरुपयोग होता है
क्योंकि जब वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने अपनी सगी बेटी अभिलाषा कुमारी को हिमाचल प्रदेश का महाधिवक्ता नियुक्त कर दिया जो कानून के खिलाफ है और उसके कुछ वर्षों के बाद मनमोहन सिंह ने अभिलाषा कुमारी को गुजरात हाई कोर्ट का जज बनाकर भेज दिया
और इन दोनो के ही बेंच में अमित शाह और नरेंद्र मोदी के सारे मामले आते रहे
और यह लोग अहमद के इशारे पर फैसला लिखते रहे जबकि कहा तो यह जाता था कि अहमद की ऑफिस में फैसला तैयार होते थे और यह लोग सिर्फ दस्तखत करते थे
फिर इन दोनों को प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया और वहां ऐसा सिस्टम लगा दिया गया कि गुजरात से जुड़ा कोई भी मामला या नरेंद्र मोदी अमित शाह से जुड़ा कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में जाता था तो वह सीधे आफताब आलम की बेंच में जाता था
जस्टिस आफताब आलम की बेटी और अरुषा आलम तीस्ता सेतलवाड़ के एनजीओ में ट्रस्टी थी और जमकर न्यायपालिका का बलात्कार हो रहा था
और पूरी दुनिया आंखें बंद कर देख रही थी
वह तो गुजरात हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस बीएम सोनी ने इस पूरे गोरख धंधे के बारे में एक लंबा चौड़ा पत्र भारत के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखा और उसे पत्र को सार्वजनिक लिखा तब जाकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने रजिस्ट्री सिस्टम में बदलाव किया और जस्टिस आफताब आलम को गुजरात से जुड़े सारे मामलों से अलग कर दिया गया
लेकिन एक बार भी नरेंद्र मोदी ने या अमित शाह ने यह नहीं कहा कि आप लोग मुझे न्याय नहीं दे सकते क्योंकि आप हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की बेटी है या आप लालू प्रसाद यादव की पार्टी से लंबे समय तक जुड़े रहे है।
(साभार: मीडिया माफिया, अप्रैल 14, 2.15 pm)

पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी हमारी गौरवशाली सेना की भी विरोधी


किसी भी चुनाव में वोट करने से पहले जनता को अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। जो पार्टियां मोदी विरोध करने में भारत विरोधी विदेशियों के हाथ की कठपुतली बन फौज और संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न खड़े कर संविधान की धज्जियाँ उड़ाती हो क्या ऐसी पार्टियां एक भी वोट की हकदार हैं? 2014 चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद से हमारी फौजें शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनी है पिछली सरकारों ने सिर्फ एक नाम के लिए फौज का जमावड़ा किया हुआ था। आज जब हमारी सेनाएं अपना पराक्रम दिखाती है विपक्ष फौजों का मनोबल गिराने का कोई मौका नहीं चुकती। फिर विपक्ष जनता को गुमराह कर कहता है कि संविधान से बंधे हैं, फौजों की ही वजह से हम चैन से अपने घरों में सो पाते हैं और जनता इनके मकड़जाल में फंस इनको वोट दे देती हैं। इतना ही नहीं, 2014 के बाद से भारत विरोधियों से मिली भीख पर जितने भी आन्दोलनजीवी सड़क पर उतर देश की शांति भंग करने की कोशिश की। लेकिन परमपिता परमेश्वर की कृपा से आन्दोलनजीवी ही नहीं इनके आका भी बेनकाब हो जाते हैं फिर भी हम इनको वोट देकर इनकी देश विरोधी हरकतों को गुप्त समर्थन दे देते हैं।      

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के बयानों को लेकर समय-समय पर राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छिड़ती रही है। खासतौर पर जब मनगढ़ंत और झूठ आरोपों का संबंध हमारी गौरवशाली भारतीय सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र या संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों से जुड़ता है, तब यह बहस और भी गंभीर हो जाती है। लोकतंत्र में सवाल उठाना और जवाबदेही मांगना स्वाभाविक है, लेकिन जब आरोपों की भाषा और संदर्भ देश की बहादुर सेना और उसकी विश्वसनीयता पर प्रभाव डालने लगें, तब यह विमर्श केवल राजनीतिक नहीं रह जाता। यह राष्ट्रीय मनोबल और संस्थागत भरोसे को डिगाने वाला बन जाता है। एक तरह से यह राष्ट्रद्रोह की सोच का शुरुआती चरण ही है। हाल के वर्षों में उनके कई बयान ऐसे रहे हैं, जिनमें उन्होंने सेना की कार्यशैली, केंद्र सरकार की सुरक्षा नीति और यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

मनगढ़ंत आलोचना-आरोपों से राजनीतिक हित साधने की चेष्टा
हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि यहां सवाल पूछे जा सकते हैं। लेकिन सवाल पूछने और आरोप लगाने में फर्क होता है। जब कोई वरिष्ठ संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति सेना जैसी संस्था पर टिप्पणी करता है, तो उसका प्रभाव सामान्य राजनीतिक बयान से कहीं अधिक व्यापक होता है। इससे न केवल देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश जाता है। राजनीति में तीखे आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एक न्यूनतम सहमति और संयम की अपेक्षा हमेशा रही है। जब यह सीमा टूटती है, तो राजनीतिक लाभ भले ही अल्पकालिक हो, लेकिन दीर्घकालिक नुकसान संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है। ममता बनर्जी के बयान इसी संदर्भ में हैं, जिनमें आलोचना और आरोप के साथ-साथ राजनीतिक हित साधने की चेष्टा ज्यादा है।

सेना की विश्वसनीयता पर सवाल: एक खतरनाक संकेत
जनवरी 2026 में ममता बनर्जी द्वारा भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी पर राजनीतिक प्रभाव में काम करने का आरोप लगाना एक गंभीर मामला बन गया। यह आरोप इतना संवेदनशील था कि सेना की पूर्वी कमान को राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी। सेना ने साफ तौर पर इन आरोपों को निराधार बताया। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेना जैसी संस्था की निष्पक्षता और पेशेवर प्रतिबद्धता उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। ऐसे में बिना ठोस प्रमाण के इस तरह के आरोप न केवल संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि जनता के बीच भ्रम भी पैदा करते हैं।

सेना को कार्रवाई से पहले मुझसे सलाह लेनी चाहिए- मुख्यमंत्री
सितंबर 2025 में ममता बनर्जी का यह कहना कि सेना को किसी भी कार्रवाई से पहले राज्य सरकार या पुलिस से सलाह लेनी चाहिए, एक अलग तरह का विवाद खड़ा करता है। भारतीय संविधान में सेना की भूमिका और उसके संचालन का स्पष्ट ढांचा है, जिसमें केंद्र सरकार की प्रमुख भूमिका होती है। ऐसे में राज्य स्तर पर सैन्य निर्णयों को नियंत्रित करने की बात न केवल संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत प्रतीत होती है, बल्कि इससे सुरक्षा तंत्र की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठते हैं। उनका यह बचकाना बयान राजनीतिक असहमति से आगे जाकर संस्थागत सीमाओं को चुनौती देता नजर आता है।

हमले को “फासीवादी सर्जिकल स्ट्राइक” बताया
आतंकी हमलों के खिलाफ सेना की सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ न करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक को फासीवादी जरूर करार दिया। ममता का जनवरी 2020 में जेएनयू हिंसा के संदर्भ में “फासीवादी सर्जिकल स्ट्राइक” जैसे शब्दों का प्रयोग भी विवादों में रहा। “सर्जिकल स्ट्राइक” शब्द भारतीय सेना की एक विशेष सैन्य उपलब्धि से जुड़ा है, जिसे देश में गर्व के रूप में देखा जाता है। ऐसे में सीएम ने इसे जेएनयू की ओछी राजनीति में इस्तेमाल किया। इस शब्द का राजनीतिक संदर्भ में नकारात्मक अर्थों में इस्तेमाल करना वाकई लोगों को आपत्तिजनक लगा। इससे यह सवाल भी उठा कि क्या राजनीतिक विमर्श में सैन्य उपलब्धियों की भाषा का इस तरह उपयोग उचित है?

पौराणिक गाथा : माता गायत्री की उत्पत्ति की कथा


पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा सृष्टि के कल्याण के लिए पुष्कर में एक महान यज्ञ का आयोजन कर रहे थे। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी बड़े यज्ञ की पूर्णता के लिए पत्नी का साथ होना अनिवार्य होता है। पत्नी साक्षात् लक्ष्मी स्वरूप होती है। पत्नी का जीवन ही नहीं प्रत्येक स्थान पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसे साधारण मानव से लेकर देवता भी आदर-सत्कार देते हैं। इसीलिए छोटी पूजा से लेकर बड़ी पूजा में नारी यानि देवी को प्रमुखता दी गयी है। अगर विवाहित स्त्री के नाम से पहले श्रीमती और अविवाहित कन्या के नाम से पहले सुश्री लिखा जाता है क्योकि दोनों का अर्थ ही देवी होता है।     

यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था, लेकिन ब्रह्मा जी की पत्नी देवी सावित्री (सरस्वती) समय पर यज्ञ स्थल पर नहीं पहुँच सकीं। वे अपनी सखियों के आने की प्रतीक्षा कर रही थीं। मुहूर्त बीतता देख ब्रह्मा जी चिंतित हो गए, क्योंकि यदि मुहूर्त निकल जाता तो यज्ञ निष्फल हो जाता।
यज्ञ की रक्षा के लिए ब्रह्मा जी ने देवराज इंद्र से कहा कि वे शीघ्र ही किसी योग्य कन्या की खोज करें जिससे विवाह कर यज्ञ संपन्न किया जा सके। तब इंद्र ने एक अत्यंत रूपवती और तेजस्विनी कन्या को खोजा, जो वास्तव में साक्षात वेदों की अधिष्ठात्री देवी थीं।
भगवान विष्णु की सहमति से ब्रह्मा जी ने उस कन्या से विवाह किया। उस कन्या का नाम 'गायत्री' रखा गया। गायत्री माता ने ब्रह्मा जी के साथ यज्ञ में बैठकर उसे विधिपूर्वक संपन्न कराया।
जब देवी सावित्री यज्ञ स्थल पर पहुँचीं और ब्रह्मा जी के साथ दूसरी स्त्री को देखा, तो वे क्रोधित हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पूरे संसार में उनकी पूजा केवल पुष्कर में ही होगी। साथ ही उन्होंने इंद्र और विष्णु जी को भी श्राप दिए।
बाद में माता गायत्री ने अपने तप और सौम्यता से देवी सावित्री के क्रोध को शांत किया और सभी देवताओं को श्राप के प्रभाव से मुक्त होने का मार्ग दिखाया। माता गायत्री ने ही सावित्री (ज्ञान) और गायत्री (कर्म) के बीच संतुलन स्थापित किया।
पंचमुखी स्वरूप: माता गायत्री को अक्सर पांच मुखों और दस हाथों के साथ दिखाया जाता है, जो पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और मानवीय ज्ञान की इंद्रियों का प्रतीक हैं।
वेदों की जननी: माना जाता है कि चारों वेदों की उत्पत्ति गायत्री मंत्र से ही हुई है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का सार गायत्री में ही समाहित है।
गायत्री मंत्र: यह मंत्र (ॐ\ भूर्भुवः\ स्वः...) सूर्य की ऊर्जा (सविता देव) को समर्पित है, जो मनुष्य की बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करता है।
देवी गायत्री की कथा हमें सिखाती है कि शुद्ध बुद्धि और अनुशासन के बिना कोई भी महान कार्य (यज्ञ) सफल नहीं हो सकता। वे केवल एक देवी नहीं, बल्कि चेतना और सद्बुद्धि का साक्षात रूप हैं।
जिस तरह ॐ शब्द में समस्त देवी-देवताओं की वंदना होती है उसी तरह प्रतिदिन प्रातः उठ गायत्री मन्त्र जप करने से प्राणी समस्त देवी-देवताओं को नमन कर लेता है। गायत्री मन्त्र से अधिक शक्तिशाली मन्त्र किसी भी धर्म में नहीं।
जय गायत्री माता!

फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR: ‘मैनेजर को मारो और सुलगाओ शहर’: मानेसर से नोएडा तक मजदूरों की आड़ में छिपकर हो रही हिंसा की साजिश, वॉट्सऐप-इंस्टा-X पर मिले सबूत?

                                                नोएडा में हिंसक प्रदर्शन (साभार- दैनिक भास्कर)
नोएडा में सैलरी की माँग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन में भड़की हिंसा को लेकर भड़काऊ पोस्ट करने पर RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर शेयर किया था। इस पुराने वीडियो में पुलिस को प्रदर्शनकारी को पीटते दिखाया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले ही इन वीडियो का फैक्टचेक किया था। पुलिस ने वीडियो को गलत बताते हुए कहा कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल झूठ है।

पुलिस ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के अलावा भी भड़काऊ पोस्ट करने वाले कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है।

ऐसे में अदालतों से भी प्रश्न है कि हिंसा भड़काने वालों पर कानूनी डंडा चलेगा? ऐसे फेक वीडियो फैलाकर हिंसा भड़काने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। देश में अशांति फैलाना बहुत ही संगीन अपराध माना जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई नेता या पार्टी ऐसा घिनौना काम नहीं कर सके। लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि जिस अपराध के लिए आम नागरिक को आसानी से जमानत नहीं मिलती उसी अपराध में नेताओं को मिल जाती है, क्यों?    

नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि समेत ज्यादातर माँगों को सरकार ने मान लिया है और उसे 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया है। इसके बावजूद मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन जारी है। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को प्रदर्शनकारियों ने 2 से 3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और आगजनी की।

अब सवाल उठ रहा है कि सरकार जब मजदूरों के असंतोष का पता चलते ही एक्शन में आ गई, उनके साथ संवाद किया और सुनिश्चित किया कि उनकी माँगे पूरी हों, इसके बाद भी आगजनी और पथराव की घटनाएँ हो रही है, तो सवाल उठता है कि इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं…

हिंसा का नक्सली और पाकिस्तानी कनेक्शन की आशंका

साजिश का तो जाँच के बाद में पता चलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि ये नक्सलवाद को फिर से जीवित करने का प्रयास हो सकता है। सीएम ने कहा कि देश में नक्सलवाद खात्मे के कगार पर है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो वास्तव में मजदूर हैं, उनसे ही बातचीत की जानी चाहिए। अक्सर बाहरी लोग मजदूर के प्रतिनिधि बनकर आंदोलन में घुसपैठ करते हैं।

वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पाकिस्तान लिंक की भी जाँच करने की बात कही थी। उन्होंने हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मेरठ और नोएडा से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।

सरकार के आला अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। राज्य में उद्योगों को लेकर योगी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाया है। कानून व्यवस्था दुरुस्त किया गया है। साजिश कर इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

गलत वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई

डीजीपी राजीव कृष्ण, जो लखनऊ कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ने कहा है कि अफवाह फैलाने वाले कई ग्रुप को चिन्हित किया गया है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अलग-अलग जगहों पर भी पाए गए हैं। अफवाहें फैलाने वाले दो एक्स हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 50 से अधिक एक्स हैंडल की पहचान की गई है, जिनमें से कई पिछले 24 घंटों में बनाए गए हैं। अब उनकी जाँच होगी।
इतना ही नहीं, यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो को गलत बताते हुए कहा है कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो पूर्णतः असत्य है।
यूपी पुलिस ने किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जानने की जरूरत पर बल दिया है। इसके अलावा NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऑडियो क्लिप में एक शख्स लोगों से कहता सुनाई दे रहा है कि मंगलवार को फिर से पुलिस पर हमला करना है और लाठीचार्ज करवाना है, क्योंकि कई लोग पहले दिन घायल हुए थे। इस ऑडियो में शख्स कह रहा है कि हमारे बहुत से बहन-भाई घायल हुए हैं और इसीलिए आप लोग सुबह आने की कृपा करें।
इसी के साथ कुछ चैट्स में प्रदर्शनकारियों को मिर्ची पाउडर साथ लाने की सलाह दी गई ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। एक मैसेज में लिखा गया कि अगर पुलिस लाठी उठाए तो मिर्ची पाउडर काम आएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लेकर आएँ। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

अब नोएडा का मामले में साजिश का पता तो जाँच पूरी होने के बाद चलेगा, लेकिन मानेसर को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसने साफ हो गया है कि यहाँ मजदूरों की आड़ में साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

मानेसर में रची गई गहरी साजिश का हुआ खुलासा

9 अप्रैल 2026 को गुरुगाम के मानेसर में आईएमटी कंपनी में वेतन वृद्धि की माँग लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान 300 से 400 की भीड़ जमा हो गई और कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस पर पथराव किया। घटना की जाँच के दौरान पता चला है कि व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाई गई थी, जिसमें मैनेजर रामबीर को मारने की बात थी और फिर दंगा भड़काने की साजिश की गई थी। इस मैसेज में लिखा था कि रामबीर को बाहर लेकर आओ।

दूसरे मैसेज में रात तक इंतजार करने और फिर आग लगाने को कहा गया था। दरअसल साजिशकर्ता चाहते थे कि रात के अंधेरे का फायदा उठा कर काम को अंजाम दिया जाए। इतना ही नहीं मैसेज से पता चलता है कि पेट्रोल बम से हमले की तैयारी की गई थी। मैसेज में कहा गया है कि ठेके से बीयर की बोतल लेकर आना और पेट्रोल भरकर कंपनी पर फेंक देना। इससे पता चलता है कि साजिश कर मजदूरों की आड में कंपनियों को जलाने और मैनेजर को मारने की योजना थी।

पुलिस का कहना है कि व्हाट्स एप में जिस तरह के मैसेज मिले हैं, उससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। जल्द ही ऐसे नकाबपोशों को बेनकाब किया जाएगा, जिन्होंने मजदूरों की आड में हिंसा फैलाने की कोशिश की। इस घटना ने बता दिया है कि कैसे भोलेभाले मजदूरों को भड़का कर, उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा कर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश अराजक तत्व करते हैं।