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हैलो, मैं चन्द्रशेखर बोल रहा हूँ.....बेकाबू शिव सैनिकों को काबू में करो ठाकरे
महिला सशक्तिकरण के नाम पर लोकसभा सीटें बढ़ाने का सीधा-सीधा अर्थव्यवस्था पर महीने का करोड़ों का अतिरिक्त बोझा; नई दुकाने खुलने से महंगाई को खुला निमन्त्रण
भाजपा ने महिला आरक्षण के लिए 2023 में कानून पास किया, ढोल पीटा कि 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं को देंगे। लेकिन अंदर ऐसा जाल बिछाया कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन, होगा तब जाकर लागू किया जाएगा। यानी सीधा-सीधा 2029 तक ठंडे बस्ते में डाल दिया।
अगर नीयत साफ होती तो अभी 543 में से करीब 180 सीटें महिलाओं को दे देते। लेकिन ऐसा करते ही आधे बड़े-बड़े नेताओं की कुर्सी जाती और पार्टी में बगावत खड़ी हो जाती। क्योंकि 543 सांसदों में 180 महिला सांसदों को एडजस्ट करते तो बीजेपी के लगभग 120 पुरुष सांसद घर पर बैठते।
तो क्या किया सीटें 850 कर दो और 280 सीटें महिलाओं के नाम पर दे दो, बाकी में पुराने नेता भी सेट हो जाएंगे। मतलब जनता को लगा क्रांति हो गई, और नेताओं का भी कुछ नहीं बिगड़ा। राजनीति में इसे कहते हैं “दोनों तरफ माल”।
आज भी पंचायत में महिला सरपंच जीतती है, लेकिन कुर्सी पर उसका पति बैठता है। “प्रधान पति” नाम यूं ही नहीं पड़ा। उसमें आज तक सरकार ने कोई सुधार नहीं किया और वही मॉडल अब संसद में लागू होगा। बड़े नेता अपनी पत्नी-बेटी को टिकट देंगे और खुद पीछे से रिमोट से चलाएंगे। नाम महिला का, सत्ता आदमी की होगी। ये सशक्तिकरण नहीं, ये सेटिंग है।
ये वही सरकार है जो खुद को महिला हितैषी बताती है। लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है? लड़कियों का बलात्कार हो रहा है, लव जिहाद के नाम पर लड़कियों की ज़िंदगियां बर्बाद हो रही हैं। गेस्ट हाउस कांड होते हैं, बच्चे हैं गलती हो जाती है कहने वाले को सर्वोच्च सांसद के इनाम से सम्मानित किया जाता है, क्या है ये सब ड्रामा? महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े हर साल बढ़ रहे हैं, लेकिन भाषणों में “नारी शक्ति” का जप चलता रहता है।
जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल किया, जैसे तमिलनाडु, केरल उनकी सीटें कम बढ़ेंगी। और जहां आबादी बेकाबू बढ़ी, जैसे यूपी, बिहार वहां सीटों की बरसात होगी। मतलब जिसने जिम्मेदारी निभाई वो सजा पाएगा, जिसने लापरवाही की वो इनाम ले जाएगा।
कल को सिर्फ हिंदी बेल्ट जीतकर कोई भी सरकार बना लेगा, दक्षिण की आवाज साइड में डाल दी जाएगी।
जिन राज्यों में विपक्ष की पकड़ है, वहां सीटें कम बढ़ेंगी। जहां भाजपा मजबूत है, वहां सीटें ज्यादा। मतलब चुनाव शुरू होने से पहले ही मैदान झुका दिया गया।
अभी 543 सांसदों में ही बहस का टाइम नहीं मिलता, 850 में क्या होगा? संसद नहीं, मेला लगेगा। कानून ऐसे पास होंगे जैसे टिकट कटते हैं बस स्टैंड पर।
ये महिला आरक्षण नहीं है, ये 2029 का चुनावी ट्रैप है। ये सीटें बढ़ाना नहीं है, ये नेताओं की फौज खड़ी करना है। ये सुधार नहीं है, ये सिस्टम को अपने हिसाब से मोड़ना है।
अगर अभी भी किसी को लग रहा है कि ये सब महिलाओं के भले के लिए हो रहा है, तो वो या तो भक्ति में डूबा है या फिर उसे सच सुनने की हिम्मत नहीं है।
जनता को भावनाओं में उलझाओ, आंकड़ों से डराओ, और फिर टैक्स के पैसे से अपना साम्राज्य बढ़ाओ यही चल रहा है इस समय देश में। जनता को नई दुकानें खोलकर लुटने की बजाए महंगाई, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण से राहत दो।
Lenskart controversy : CEO की पत्नी निधि मित्तल बंसल ने बंद किया अपना X अकाउंट; ये कालनेमि हिन्दू मुस्लिम कट्टरपंथियों से ज्यादा जहरीले
लेंसकार्ट की जितनी जाँच हो रही है उतनी सच्चाई सामने आ रही है। अरविन्द केजरीवाल जो अपने आपको बड़ा ईमानदार और राजनीति को बदलने वाला कहता था हिन्दू होकर हिन्दुओं के ही खिलाफ काम कर रहा है। पूरी पार्टी हिन्दुओं को प्रताड़ित करने में लगी हुई है। इन सभी हिन्दू जेहादियों को मुस्लिम कट्टरपंथियों से सीखना चाहिए जो अपने मजहब की बुराई बर्दाश्त नहीं कर सकते। लेकिन कालनेमि हिन्दू हिन्दू होकर हिन्दुओं को कलंकित कर रहे हैं। जनता को जितनी जल्दी से केजरीवाल पार्टी को धराशाही ही नहीं सामाजिक बहिष्कार करना होगा। जब तक हिन्दू इन कालनेमि हिन्दुओं, चाहे वह किसी भी पार्टी से हो, सामाजिक बहिष्कार नहीं करेगा हिन्दू प्रताड़ित होता रहेगा। इन लालची(???) की वजह से मुस्लिम कट्टरपंथी हिन्दुओं पर हमला करते हैं। मुस्लिम कट्टरपंथियों से कहीं ज्यादा हिन्दुओं के ये कालनेमि हिन्दू हैं।
लेंसकार्ट सीईओ पीयूष बंसल की पत्नी निधि मित्तल बंसल के पुराने ट्वीट्स वायरल होने के बाद उनका एक्स अकाउंट डिएक्टिवेट हो गया। जिसमें उन्होंने पीएम मोदी बीजेपी और हिंदू संगठनों पर तीखे हमले किए थे। इस बीच, कंपनी के स्टाइल गाइड में हिंदू प्रतीकों जैसे बिंदी तिलक और कलावा पर भेदभाव का विवाद भी तेज हो गया है जिससे सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचा हुआ है।
लेंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल की पत्नी निधि मित्तल बंसल ने आम आदमी पार्टी का सपोर्ट किया था और बीजेपी पीएम मोदी तथा हिंदू संगठनों के खिलाफ तेज टिप्पणियाँ पोस्ट की थीं। हैशटैग जैसे वोट फॉर मफलरमैन और दिल्ली डिसाइड्स भी इस्तेमाल किए गए थे।
अब वायरल हो चुके स्क्रीनशॉट्स जो 2013 से 2015 के बीच के हैं उनमें निधि मित्तल बंसल आम आदमी पार्टी यानी एएपी का सपोर्ट दिखा रही हैं जबकि बीजेपी और हिंदू संगठनों के खिलाफ तेज टिप्पणियाँ पोस्ट कर रही हैं। कुछ पोस्ट्स में हैशटैग जैसे #vote4mufflerman और #DelhiDecides थे जबकि दूसरों में हिंदू महासभा की आलोचना की गई और बीजेपी के बारे में अपमानजनक बातें कही गईं। जैसे-जैसे ये पोस्ट्स सोशल मीडिया पर फैल गए उनके अकाउंट @nidhimittal13 अनुपलब्ध हो गया जो बताता है कि बढ़ती आलोचना के बीच इसे हटा दिया गया है।
इस घटना के साथ लेंसकार्ट कंपनी पर भी विवाद गहरा गया है। कंपनी का 23 पेज का इंटरनल स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड फरवरी 2026 का डॉक्यूमेंट ऑनलाइन आया जिसमें कर्मचारियों को बिंदी कलावा और धार्मिक कलाई बैंड पहनने से मना किया गया था। वहीं हिजाब और टर्बन को काले रंग की शर्त के साथ अनुमति दी गई थी। सिंदूर को भी कम लगाने की सलाह थी। इस असमानता ने हिंदू प्रतीकों पर भेदभाव का आरोप लगाया और सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया।
पीयूष बंसल ने 15 अप्रैल को पहला बयान दिया। उन्होंने कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट गलत है और ये लेंसकार्ट की मौजूदा नीति नहीं दिखाता। लेकिन एक्स पर कम्युनिटी नोट ने इसे चुनौती दी क्योंकि डॉक्यूमेंट पर फरवरी 2026 की डेट और ऑफिशियल ब्रांडिंग थी।
फिर पीयूष बंसल ने अपना बयान बदला। उन्होंने माना कि डॉक्यूमेंट असली है लेकिन इसे पुराना इंटरनल ट्रेनिंग पेपर बताया। उन्होंने कहा कि बिंदी और तिलक वाली लाइन कभी नहीं लिखी जानी चाहिए थी और 17 फरवरी को इसे हटा दिया गया था। उन्होंने कहा मैं फाउंडर और सीईओ के रूप में इस चूक की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ। लेंसकार्ट किसी भी सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति को कभी प्रतिबंधित नहीं करता और आगे भी नहीं करेगा।
स्पष्टीकरण के बावजूद सवाल बाकी
माफी के बावजूद कई असंगतियाँ चिंता बढ़ा रही हैं। अगर डॉक्यूमेंट को सच में 17 फरवरी 2026 को हटा दिया गया था तो सवाल ये है कि फरवरी 2026 वाली वर्जन कर्मचारियों के बीच अभी भी क्यों घूम रही थी। कंपनी ने कोई अपडेटेड या सुधारा हुआ पॉलिसी भी पब्लिक नहीं किया है जिससे पारदर्शिता की कमी रह गई है जब कंज्यूमर ट्रस्ट पर दबाव है।
अवलोकन करें:-
इसके अलावा कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अब कहा है कि मार्च के इंटरनल ऑडिट्स से पता चला कि कंपनी तिलक और बिंदी लगाने के खिलाफ भेदभाव जारी रखे हुए थी जिससे और गुस्सा भड़क गया है।
तुम्हारे आने वाली पीढ़ियों में भी कोई गुंडा पैदा नहीं होगा : चंद्रशेखर की शरद यादव और रामबिलास को चेतावनी
अगर आज संसद में चंद्रशेखर और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता होते तो संसद का मिजाज ही ऐसा होता पूरा देश कहीं का कहीं पहुँच चूका होता। दुर्भाग्य से जनता ने गाँधी परिवार, मुलायम परिवार, लालू और शरद पवार आदि के परिवारों को पहुंचा अपने परिवारों को धन-संपन्न कर देश का नुकसान करवा रहे हैं।
तब शरद यादव ने अपनी दबंगई दिखाते हुए चंद्रशेखर जी को टोका और कहा "अध्यक्ष जी आप बीच में मत बोलिये।" बस फिर क्या था!
चंद्रशेखर जी ने भरी संसद में अपना जो रौद्र रूप दिखाया तो इन तथाकथित उस जमाने के इन युवा नेताओं के छक्के छूटने लगे।
चंद्रशेखर जी ने उस समय कड़कती आवाज में कहा था: "मुझसे ऐसी भाषा में बात करते हो। संसद भवन के बाहर ऐसी भाषा बोलो शरद। मैं तुम दोनों को यकीन दिलाता हूँ, तुम्हारे आने वाली पीढ़ियों में भी कोई गुंडा पैदा नहीं हो पायेगा, यह सुनते ही दोनों को सांप सूंघ गया और वे भयभीत नजर आने लगे।
दोनो ने सदन से बाहर निकलते ही चंद्रशेखर के पैर पकड़ लिए और दया की भीख मांगने लगे। चंद्रशेखर दबंगों के भी दबंग थे। कहते हैं चंद्रशेखर के मौन रहने के दौरान भारत के सबसे बडे बददिमाग वकील राम जेठमलानी ने उनके खिलाफ कोई टिप्पणी कर दी। इसके बाद उनके समर्थको ने जेठमलानी की हाथो और लातो से जमकर पूजा की थी। उसके बाद जब तक चंद्रशेखर जिन्दा रहे इस जेठमलानी ने उनकी तरफ आँख भी नहीं उठायी। चन्द्रशेखर जी ने सभी के लिए सामान कानून के लिए कहा था कि "अगर हमारे फौजदारी के मामले और शादी विवाह समान हैं तो यूनिफार्म सिविल कोड क्यों नहीं?"
एक अक्खड़, मनमौजी, गंभीर, फौलादी जिगर वाला नेता जिसने राजनीती अपने शर्तो पे की। किसी की मेहरबानी को कबूल नहीं किया। देश का प्रधानमंत्री बना और कांग्रेस के दुष्चरित्र को भांप कर उस कुर्सी को ठोकर मार दी। ऐसी शख्सियत तो राजाओं की राजा ही कहलायेगी। उस बलिया के शेर, महान तेजस्वी नेता चंद्रशेखर जी की आज जन्म जयंती पर कोटि कोटि नमन !!
यशवंत वर्मा को तो आप निकाल नहीं सकी जस्टिस नागरत्ना, फिरअन्य भ्रष्ट जजों को कैसे निकाल सकेंगी? नोटबंदी का दर्द आपको अब तक क्यों सता रहा है
कुछ सुप्रीम कोर्ट के जज आजकल बेलगाम हुए जो मर्जी बोल रहे हैं। क्या वे लोग मीडिया की सुर्ख़ियों में रहना चाहते हैं?
अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि “नोटबंदी से काला धन सफ़ेद में बदला; हम सब जानते हैं कि 8 नवंबर 2016 को क्या हुआ था, कालेधन का खत्म कहां हुआ? यह कालेधन को सफ़ेद बनाने का एक अच्छा तरीका था”।
यह बात जस्टिस नागरत्ना कोई नई नहीं कह रही। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 5:1 के फैसले में नोटबंदी पर मुहर लगा दी थी लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने Dissenting Judgement देते हुए उसे गैर कानूनी कहा था। मुझे लगता है नोटबंदी से उन्हें सबसे ज्यादा दर्द हुआ है जो अभी तक जाने का नाम नहीं ले रहा। यह दर्द उन्हें क्यों हुआ, ये वो ही जानती होंगी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
कल जस्टिस नागरत्ना ने कहा है कि “Judges who are unable to live within their known source of income and fall prey to greed and temptation must be weeded out of the system”. मतलब साफ है जज भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं।
कहने को यह प्रवचन बहुत आकर्षक है लेकिन क्या इसका मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि आप ऐसे भ्रष्ट जजों को जानती हैं? फिर निकालेगा कौन उन्हें? आप सुप्रीम कोर्ट के CJI से कहें कि सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति बना कर ऐसे जजों को चिन्हित करे और उन्हें निकालने के कदम उठाए जाएं। लेकिन क्या ऐसा किया जा सकता है जब यशवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कोई कार्रवाई नहीं की?
जस्टिस वर्मा ने तो न्यायपालिका के मुख पर कालिख पोत दी और सुप्रीम कोर्ट चुपचाप देखता रहा। आप कहिये चीफ जस्टिस से कि अब तो वर्मा ने रिटायरमेंट ले ली है, अब तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कर CBI को जांच करने के लिए कहें। अगर ऐसा नहीं कर सकती तो आलतू फ़ालतू बयानबाजी का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार दूर करने के लिए खुद न्यायपालिका को सामने आना पड़ेगा लेकिन वह तो NCERT की किताब भी बर्दाश्त नहीं कर सकती। न्यायपालिका ने वह किताब तो रोक दी लेकिन चीफ जस्टिस और पूरी न्यायपालिका यह नहीं समझती कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के लिए Public Perception क्या है? आज के जस्टिस नागरत्ना के बयान ने यह तो साबित कर दिया कि न्यायपालिका में Corruption है, फिर NCERT की किताब वापस पाठ्यक्रम में शामिल करने के आदेश दिए जाएं।
J&K में श्रीनगर एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए गए 2 अमेरिकी नागरिक, सैटेलाइट फोन के साथ पकड़े गए: एयरपोर्ट सिक्योरिटी ने पूछताछ के बाद पुलिस के हवाले किया
साभार : ZEENews
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट पर दो अमेरिकी नागरिकों को रविवार (19 अप्रैल 2026) को सैटेलाइट फोन रखने के आरोप में हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों की पहचान जेफ्री स्कॉट और हालदार कौशिक के रूप में हुई है।
अधिकारियों के मुताबिक, नियमित जाँच के दौरान उनके पास सैटेलाइट फोन पाए गए जो जम्मू-कश्मीर में बिना अनुमति रखना और इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। एयरपोर्ट सिक्योरिटी ने दोनों से पूछताछ की और बाद में उन्हें आगे की जाँच के लिए पुलिस के हवाले कर दिया।
2 US nationals detained at Srinagar Airport over keeping Sat Phones:
— Sidhant Sibal (@sidhant) April 19, 2026
Jeoffery Scott
Haldar kaushik https://t.co/pIHcDhtjZw
सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों से पूछताछ शुरू कर दी है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वे इन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से कर रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों श्रीनगर से बाहर जाने की तैयारी में थे। इस मामले में उनके साथ मौजूद कोलकाता के हलदर कौशिक को भी पकड़ गया है। फिलहाल मामले की जाँच जारी है और संबंधित एजेंसियाँ सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की आत्मा मर गई या किसी ने खरीद लिया; हाई कोर्ट का जज बिना सोचे आदेश कैसे दे सकता है?
कल मैंने अपने लेख में विस्तार से लिखा था कि जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी को सरकार और विग्नेश शिशिर के दस्तावेज़ देख कर लगा था कि प्रथम दृष्टया राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता है तो FIR दर्ज करने और CBI जांच के आदेश देने की क्या जरूरत थी? खुद ही निर्णय दे देना चाहिए था कि वह ब्रिटिश नागरिक है। फिर उस आदेश को राहुल गांधी चुनौती देता फिरता।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
कल हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश में कोर्ट ने कहा है कि-
”शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याची समेत केंद्र और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं से पूछा गया था कि क्या इस मामले में विपक्षी संख्या एक(राहुल गांधी) को नोटिस जारी किए जाने की आवश्यकता है। अधिवक्ताओं ने बताया कि नोटिस जारी किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, तत्पश्चात खुली अदालत में FIR का विस्तृत आदेश पारित कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि बिना राहुल को नोटिस जारी किए मामले को निर्णीत करना उचित नहीं है”।
कैसे न्यायाधीश है आप सुभाष विद्यार्थी जी जो याची, केंद्र और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं का कहना मान कर आपने राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं समझी? अपना दिमाग लगाए बिना आदेश पारित कर दिया और इसका मतलब यही निकलता है कि आप उन अधिवक्ताओं की बात से सहमत थे कि नोटिस की जरूरत नहीं है।
अब राहुल गांधी को नोटिस जारी करने का दूसरा आदेश देने के लिए क्या आपकी आत्मा मर गई या किसी ने आपके पहले आदेश के बाद “डोज़” दे दी जो अपना ही आदेश रोक दिया? शिशिर ने आपके पास लखनऊ के MPMLA कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की थी जहाँ राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने का मौका मिला था लेकिन एक सुनवाई में उसके चेलों ने हंगामा खड़ा कर दिया था और शायद उसी दबाव में जज ने 27 घंटे की सुनवाई के बाद कह दिया कि यह मामला मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
ऐसा ही प्रकरण जस्टिस सुभाष विद्यार्थी आप क्या अपनी अदालत में भी देखना चाहते हैं? राहुल गांधी कल तो किसी हालत में जवाब नहीं देगा और कम से कम एक महीना का समय मांगेगा। अब समय कितना देना है ये पहले से सोच कर रखें या क्या उसके लिए भी किसी के निर्देश आएंगे, लेकिन एक बात याद रखिए, आप याची और केंद्र सरकार के गोपनीय दस्तावेज़ों से मान चुके हैं कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता थी।
अवलोकन करें:-
इसलिए कल अगर राहुल गांधी जवाब नहीं देता तो उसे सीधा “कारण बताओ नोटिस दीजिए कि सभी दस्तावेज़ों के मद्देनज़र कोर्ट ने पाया है कि आप ब्रिटिश नागरिक थे और आपने भारतीय नागरिकता भी नहीं छोड़ी थी, इसलिए क्यों न आपकी भारत की नागरिकता रद्द कर दी जाए”।
अगर आप ऐसा नहीं करते तो माना जाएगा कि आपने कांग्रेस के दबाव में कार्य किया और आप राहुल गांधी को आरोप मुक्त करना चाहते हैं।
कांग्रेस ने 2005 में ही रख दी थी भारत को इस्लामिक देश बनाने की नींव
आज जो कांग्रेसी खुशी मना रहे है और उनकी खुशी मैं हिंदू शामिल है तो उन हिन्दुओं को मालूम होना चाहिए कि साल 2005 मैं कांग्रेस एक ऐसा कानून लेकर आई थी जिसे अगर बीजेपी के विरोध की वजह से गिराया नहीं गया होता तो भारत देश आज इस्लामिक राष्ट्र बन गया होता!
सावधान: लेंसकार्ट "कन्वर्ट-कार्ट" का धंधा भी चला रहा है। बॉयकॉट #lenskart
पोस्ट सोर्स इंटरनेट
पौराणिक गाथा : अन्नदान नहीं करने पर जब चित्रगुप्त जी महाराज ने दानवीर कर्ण को मोक्ष देने से इंकार कर दिया और प्रारम्भ हुई श्राद्ध परम्परा
आज पश्चिमी सभ्यता हमारे पर इतनी हावी हो चुकी है कि अपने सनातनी संस्कार ही भूल गए। सनातन में प्रत्येक त्यौहार और दान का अपना महत्व है। ज्येष्ठ माह की एकादशी पर लोग प्याऊ लगाते थे और दूध-दही की लस्सी बांटते थे। इतना ही नहीं गर्मी के दिनों में जगह-जगह प्याऊ लगवाते थे ताकि गर्मी में पथिक को दो घूंट पानी मिलने पर लू के प्रकोप से बच सके। बदलते परिवेश में सब इतिहास बन गए। क्योकि लोगों को ही पीने का पानी नहीं मिल रहा प्याऊ कहाँ से लगवाएं। सनातन परम्परा को धूमिल करने में जितनी पश्चिमी सभ्यता है उससे कहीं अधिक हमारी सरकारें और सनातन को बदनाम करते कालनेमि बने फिर रहे हिन्दू।
एक समय था जब श्राद्ध प्रारम्भ होते ही हिन्दू त्योहारों का आगमन मानते थे, जबकि श्राद्ध अच्छे दिन नहीं होते इन दिनों कोई शुभ काम नहीं होते फिर ख़ुशी-ख़ुशी श्राद्ध मनाते थे, क्योकि जिसके घर में श्राद्ध होता था वह अपने परिवार, निजी रिश्तेदार और मौहल्ले में खास मिलने वालों को बुलाकर श्राद्ध को त्यौहार की भांति मनाते थे, अनाथालय या निकट के मन्दिर में अपने पितरों के नाम से घर में बने पकवान का भोग देते थे, लेकिन सब बेमानी हो गया। श्राद्ध तो लगभग ख़त्म हुए बराबर समझो। पितरों पर अहसान कर किसी मंदिर में रूपए देकर बला टाल अपने आपको धन्य मानना शुरू कर दिया। वर्तमान पीढ़ी को नहीं मालूम कि उनके नाम से भोजन दान करने से हमारे पितृ कितने खुश होते हैं अपना आशीष देते हैं परमपिता परमेश्वर अपनी फुलवारी पर अपनी अनुकम्पा बनाये रखने की विनती करते हैं। घर-परिवार और अतिथि जब भोजन उपरांत जल पीते हैं वह जल उनके माध्यम से हमारे पितृ पीकर अपनी फुलवारी की मंगल कामना करते हैं।
श्रीकृष्ण भगवान ने कहा है कि आत्मा कभी मरती नहीं, ये बस एक शरीर से दूसरे शरीर में बदलती है। इसलिये आप अपने पूर्वजों को जब भी कुछ अर्पित करते हो तो वो उन्हें मिलता है।

