चंद्रशेखर हिम्मत है तो ईसाईओं और मुसलमानों को जातियों में विभाजित करके दिखाओ


हिन्दुओं को जातियों में बाँटने वाले किसी भी जीवट नेता में मुस्लिमों को जातियों में बाँटने की हिम्मत है? किसी ने माँ का दूध नहीं पिया। हिन्दुओं को विभाजित करने में इसलिए सफल हो जाते हैं क्योंकि हिन्दू पागलों की तरह इनकी भड़काऊ चालों में आ जाता है जबकि मुसलमान नहीं। इन विघटनकारी नेताओं को वोट देने वालों की सोंच पर हैरानी होती है। इन कालनेमि हिन्दू नेताओं को वोट देने वाले हिन्दुओं देश को अंधकार मत लेकर जाओ। योगी आदित्यनाथ की बात मत भूलो "बंटे तो कटे"
। जिन हिन्दुओं ने कटने की कसम खा ली है जरूर इन तुष्टिकरण करने वालो को वोट दो, फिर मत रोना, सरकार से मदद मत मांगना और जब तुम कट रहे होंगे इन नेताओं में से कोई तुम्हे बचाने आगे नहीं आएगा उल्टे दोषियों को बचाने तुम्हे ही दोषी बताएंगे। उन्हें भटका हुआ, गरीब, मज़लूम, दिमाग से पागल आदि कहने के अलावा दुष्प्रचार करेंगे कि मुसलमान होने की वजह से उन पर जुल्म किया जा रहा है।    

हिन्दुओं को जातियों में विभाजित करने वाले नेताओं हिन्दुओं में चाहे जितनी भी जातियां हो फिर भी जाते सब एक ही मन्दिर और शमशान में जबकि ईसाई और मुस्लिमों में सब जातियों के अलग चर्च, मस्जिद और कब्रिस्तान हैं। कोई दूसरे के चर्च या मस्जिद में नहीं जा सकता और न ही कब्रिस्तान में अपना मुर्दा दफ़न कर सकता है।        

संसद में परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। चंद्रशेखर ने दलितों के लिए ‘सेपरेट इलेक्टोरेट’ (अलग निर्वाचक मंडल) की माँग उठाई।

इसका सीधा मतलब यह है कि देश में ऐसी सीटें बनाई जाएँ जहाँ केवल दलित उम्मीदवार खड़े हों और उन्हें वोट देने का अधिकार भी सिर्फ दलित मतदाताओं को ही हो। इस माँग के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर का Video वायरल हो गया है और आलोचक इसकी तुलना 1916 में मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा की गई मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्र की माँग से कर रहे हैं।

क्या है चंद्रशेखर की माँग और क्यों मचा है बवाल?

संसद में अपनी बात रखते हुए चंद्रशेखर आजाद ने दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में दलित प्रतिनिधि अपनी कौम के प्रति कम और अपनी राजनीतिक पार्टियों के प्रति ज्यादा वफादार रहते हैं।

चंद्रशेखर ने डॉ अंबेडकर और कांशीराम की ‘चमचा युग’ अवधारणा का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जब तक दलितों को अपना प्रतिनिधि खुद चुनने का स्वतंत्र अधिकार (सेपरेट इलेक्टोरेट) नहीं मिलता, उनका असली सशक्तिकरण नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘पूना पैक्ट’ के कारण दलितों की स्वतंत्र राजनीति की आवाज छीन ली गई थी।

जिन्ना के मॉडल और विभाजन की आशंका

चंद्रशेखर की इस माँग पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। जानकारों का कहना है कि इसी तरह की माँग 1916 में जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए की थी, जिसकी परिणति अंततः देश के विभाजन के रूप में हुई। आजाद भारत के संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर इस व्यवस्था को ठुकराया था क्योंकि यह समाज को जोड़ने के बजाय धर्म और जाति के आधार पर राजनीतिक रूप से तोड़ती है। आलोचकों का मानना है कि केवल एक विशेष वर्ग को वोट का अधिकार देना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और यह देश को एक नए बँटवारे की ओर धकेलने जैसी ‘देशद्रोही’ सोच है।

दलित और मुस्लिम महिलाओं के हक की बात

वायरल वीडियो में चंद्रशेखर ने महिला आरक्षण के भीतर भी आरक्षण की बात की। उन्होंने सवाल उठाया कि 33% आरक्षण में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा (कोटा भीतर कोटा) क्यों नहीं है? उन्होंने कहा कि बिना इसके इन वर्गों की सबसे वंचित महिलाएँ कभी संसद तक नहीं पहुँच पाएँगी। उनके भाषण में दलित और मुस्लिम एकजुटता का सुर साफ दिखाई दिया, जिसे लेकर अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह न्याय की माँग है या तुष्टीकरण और समाज को बाँटने वाली राजनीति।

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया केजरीवाल मामले की सुनवाई से क्यों हटे?

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से जुड़े एक मामले में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस तेजस कारिया ने अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है
 इस कारण केजरीवाल और अन्य के खिलाफ याचिका पर सुनवाई टल गई है यह मामला अदालत का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से जुड़ा है यह मामला बुधवार(अप्रैल 22) को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार को एक अलग पीठ द्वारा की जाएगी

यह मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं और वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मां की गई है आरोप है कि इन लोगों ने एक्साइज नीति मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किए यह याचिका वकील वैभव सिंह द्वारा दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसे सार्वजनिक करना नियमों का उल्लंघन है याचिका में यह भी मांग की गई है कि इन वीडियो को सोशल मीडिया से हटाया जाए इस मामले में केवल केजरीवाल और रविश कुमार ही नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है

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रवीश कुमार-केजरीवाल-दिग्विजय सिंह के खिलाफ दिल्ली HC में याचिका, कोर्ट का वीडियो शेयर करने पर का

जस्टिस स्वर्णकांता ने खुद को नहीं किया अलग

इससे पहले सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट से एक अन्य मामले में केजरीवाल को झटका लगा था हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार करते हुए केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया था एक घंटे से अधिक समय तक हुई सुनवाई में जस्टिस शर्मा ने कहा कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के जज पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है और जज किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते हैं उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को बिना किसी आधार के किसी संस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि किसी जज पर व्यक्तिगत हमला न्यायपालिका पर ही हमला होता है जस्टिस शर्मा ने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें मामले की सुनवाई से हटाने की याचिकाओं में वर्णित विवरण अनुमानों और कथित झुकावों पर आधारित था जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह अदालत अपने और संस्था के लिए खड़ी रहेगी… मैं खुद को इस मामले से अलग नहीं करूंगी

पहलगाम याद रहे पाकिस्तान को और 6 मई का ऑपरेशन सिंदूर भी याद रखे जो स्थगित है, जब मर्जी शुरू हो सकता है

सुभाष चन्द्र

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आज 22 अप्रैल है, पहलगाम नरसंहार का दिन जब पाकिस्तानी दरिंदों ने धर्म पूछ कर 26 हिंदुओं की हत्या की थी। उस नरसंहार में प्राण गंवाए सभी हिंदुओं को नमन और श्रद्धांजलि

उस नरसंहार का न्याय करने के लिए 6 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर कर पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी और जो अभी स्थगित है 

पाकिस्तान बस आज का दिन भी याद रखे और ऑपरेशन सिंदूर भी याद रखे जिसे कभी भी भारत अपनी इच्छानुसार शुरू कर सकता है क्योंकि पहलगाम का न्याय अभी अधूरा है 

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में उस दिन चारों ओर खून बिखरा पड़ा था और चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। इस जघन्य हमले की पहली बरसी की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर ऑपरेशन सिंदूर को याद किया। सेना ने लिखा- जब इंसानियत की हदें पार होती हैं, तो जवाब भी निर्णायक होता है। न्याय मिल गया। भारत एकजुट है। इसके साथ ही एक ग्राफिक भी था, जिस पर लिखा था- कुछ हदें कभी पार नहीं की जानी चाहिए। भारत भूलता नहीं है।

आतंकी ठिकानों का काम तमाम

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान पर निर्णायक कार्रवाई की थी। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इस दौरान नौ बड़े आतंकी लॉन्चपैड को नष्ट कर दिया गया और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सेना ने100 से ज्यादा आतंकियों को 72 हूरों के पास पहुँचाया 

सेना की इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच 4 दिन तक संघर्ष चला और भारी नुकसान झेलने के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ को फोन कर सीजफायर की गुजारिश की। 10 मई को दोनों पक्षों में सहमति बन गई।

नोएडा हिंसा : ‘X Storm’ से निकली चिंगारी, पुलिस को मिला फर्जी खबरें फैलाने वाला 274 लोगों का वॉट्सऐप ग्रुप

                                                                                                                    साभार: इंडियन एक्सप्रेस
राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शनों की जाँच कर रही पुलिस ने दावा किया है कि सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित नेटवर्क ने तनाव बढ़ाने और हिंसा भड़काने का काम किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘X Storm’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप सामने आया है जिसमें 274 लोग शामिल थे। पुलिस का कहना है कि यह ग्रुप खास तौर पर मजदूरों के आंदोलन के दौरान भड़काऊ वीडियो और गलत जानकारी फैलाने के लिए बनाया गया था। आदित्य आनंद को इस ग्रुप का एडमिन और बनाने वाला बताया जा रहा है।

इस वॉट्सऐप ग्रुप के बारे में पुलिस को तब पता चला जब वह 13 अप्रैल की हिंसा के मुख्य आरोपित आदित्य आनंद से पूछताछ कर रही थी। शुरुआत में यह प्रदर्शन मजदूरों की बेहतर वेतन की माँग को लेकर शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में यह तेजी से हिंसक हो गया। इस दौरान आगजनी, पत्थरबाजी और हमले की घटनाएँ हुईं जिसमें कई औद्योगिक इकाइयों और दफ्तरों पर हमला किया गया और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

पुलिस ने कहा है कि ‘X Storm’ वॉट्सऐप ग्रुप ने बिना पुष्टि वाले कंटेंट को फैलाने और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने में अहम भूमिका निभाई। अधिकारियों को शक है कि कई वॉट्सऐप ग्रुप मिलकर संगठित तरीके से भड़काऊ सामग्री फैलाने और बड़े स्तर पर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे। इस ग्रुप के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा रही है और डिजिटल सबूतों की जाँच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हिंसा की योजना और साजिश में कोई बाहरी तत्व शामिल थे या नहीं।

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फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खि
फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खि
 

नोएडा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने शनिवार (18 अप्रैल 2026) को आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने की थी।

रवीश कुमार-केजरीवाल-दिग्विजय सिंह के खिलाफ दिल्ली HC में याचिका, कोर्ट का वीडियो शेयर करने पर कार्यवाही की माँग


दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार (21 अप्रैल 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल, कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और यूट्यूबर रवीश कुमार के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में दोनों पर अवमानना की कार्रवाई करने की माँग की गई है।

यह याचिका एडवोटेक वैभव सिंह ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि आबकारी नीति (Excise Policy) मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जो गलत है।

याचिका में खासतौर पर उस वीडियो पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें अरविंद केजरीवाल जस्टिस शर्मा से खुद को केस से अलग करने की माँग करते हुए अपनी दलील रख रहे थे। ये वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। याचिका में इन वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दिए जाने की भी माँग की गई।

इस मामले में अरविंद केजरीवाल और रवीश कुमार के अलावा कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, AAP नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पुरनदीप सिंह साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की गई है। इस मामले की सुनवाई 22 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच करेगी, जिसमें चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया शामिल हैं।

याचिका में क्या कहा गया?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में कहा गया कि AAP के कई नेताओं और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जानबूझकर और सोच-समझकर कोर्ट की छवि खराब करने की कोशिश की। इसमें कहा गया है कि इन लोगों ने कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करके उसे सोशल मीडिया पर फैलाया, ताकि देश और विदेश में न्यायपालिका की छवि खराब हो और आम लोगों को गुमराह किया जा सके।

याचिकाकर्ता एडवोकेट वैभव ने यह भी बताया कि ये वीडियो और ऑडियो क्लिप फेसबुक, इंस्टाग्राम, यू्ट्यूब और कई न्यूज चैनलों पर साझा किए गए। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिस तरह से ये रिकॉर्डिंग की गई और फिर अलग-अलग नेताओं ने इसे शेयर, रीट्वीट और पोस्ट किया। उससे यह एक बड़ी साजिश जैसी लगती है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि केजरीवाल और AAP के अन्य नेताओं ने मिलकर कोर्ट की छवि खराब करने, आम जनता को गुमराह करने और यह दिखाने की कोशिश की कि न्यायपालिका किसी राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।

एक लाइन का प्रचार: “कांग्रेस और विपक्ष ने महिला आरक्षण रोक दिया”; 2029 तक सभी चुनावों में विपक्ष को धूल चटा देगा

सुभाष चन्द्र

यह बात राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने नारी शक्ति वंदन बिल के गिरने के बाद खुद कही कि हमने “महिला आरक्षण” रोक दिया। साथ में जो भी स्पष्टीकरण दिया, वो किसी काम का नहीं है, बस मुख्य बिंदु यह है कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण रोका जिसमें अन्य विपक्षी दलों ने भी साथ दिया

किसी को इस बात से मतलब नहीं है कि कांग्रेस ने परिसीमन से साथ जोड़ने के कारण यह बिल रोका, सत्य तो यह याद रहेगा महिलाओं को कि उनके अधिकार पर कांग्रेस और विपक्ष ने डाका डाला

महिलाओं को संसद और विधानसभाओं की सीटों में 33% आरक्षण देने का बिल लोकसभा ने 19 सितंबर 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया था और राज्यसभा में यह 21 सितंबर को सर्वसम्मति से पारित हुआ। राष्ट्रपति ने इसे 28 सितंबर को साइन किया जो बिल विपक्ष की सहमति से पारित हुआ उसके अनुसार यह बिलकुल साफ़ था कि “यह महिला आरक्षण पहले परिसीमन के बाद लागू होगा जिस पर 2026 तक रोक लगी हुई थी

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ऐसे में कांग्रेस और विपक्षी दलों का यह विलाप कि अब महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ क्यों जोड़ा गया, संसद की अवमानना है और ऐसा करके समूचा विपक्ष 2023 के अपने ही समर्थन से पारित बिल के प्रावधानों से मुकर गया 

अब विपक्ष कुछ भी कहता रहे लेकिन सच तो जनता के सामने खुद विपक्ष ने रख दिया कि हमने महिला आरक्षण रोक दिया

राहुल गांधी ने कहा सरकार वर्तमान 543 की संख्या पर ही 33% महिला आरक्षण तत्काल लागू करे, कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी 

लोकसभा में 543 की संख्या कब तय हुई थी, उसका इल्म नहीं है राहुल गांधी को यह संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय हुई थी परिसीमन को पहले 1976 में और फिर 2001 में 25 - 25 वर्ष के लिए रोक दिया गया था और यह अवधि अब 2026 में समाप्त हुई जिसके बाद पहला परिसीमन होना है 

क्या राहुल गांधी चाहता है आरक्षण 1971 की 543 सीटों पर दिया जाए जब भारत की जनसंख्या 54 करोड़ 79 लाख थी जो अब बढ़ कर 140 करोड़ के पार है ये आज की जनता को कैसे बराबरी का अधिकार दे सकता है और फिर 543 में 33% महिलाओं के सीट का मतलब है 180 सीट महिलाओं की हो जाएंगी राहुल गांधी के खाली दिमाग ने इसका ख्याल नहीं किया कि ऐसा करने से कहीं उसकी रायबरेली की सीट भी महिला कोटे में न चली जाए

लोकसभा की सीटें जनसंख्या के आधार पर ही तय होनी चाहिए आज देश में 127 सीट हैं जहां 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं सीटों में वोटरों का संतुलन किस कदर बिगड़ा हुआ है उसका अनुमान इस बात से लगता है कि सबसे ज्यादा वोटर किस सीट पर हैं और सबसे कम किस सीट पर

सबसे अधिक वोटर वाली सीट -

-मल्काजगिरी (तेलंगाना) - 37.80 लाख;

-बेंगलुरु उत्तर (कर्नाटक) - 32.15 लाख;

-गाजियाबाद (उ प्र) - 29.48 लाख;

-गौतमबुद्ध नगर (उ प्र) - 26.81 लाख; और 

पश्चिमी दिल्ली - 25.92 लाख 

ये उन 127 सीटों में शामिल हैं जहां वोटर 20 लाख से ज्यादा हैं 

सबसे कम वोटर वाली सीट -

-लक्षद्वीप - 58 हजार;

-दमन और दीव - 1.34 लाख;

-लद्दाख - 1.90 लाख;

-दादरा नगर हवेली - 2.83 लाख; और 

अंडमान निकोबार -  3.15 लाख 

सीटों में वोटरों का ऐसा अनुपात किसी दृष्टि से उचित नहीं है और इसके लिए परिसीमन जरूरी है लेकिन विपक्ष ने आंखे और दिमाग बंद कर लिए क्योंकि महिला आरक्षण रोकना था  

योगी ने बंगाल में लिया था ‘नेताजी’ जी का भी नाम, अधूरे क्लिप से TMC-कांग्रेस ने फैलाया प्रोपेगेंडा

                योगी के चुनावी भाषण को TMC-कांग्रेस ने काट-छाँट कर पेश किया (साभार : Aajtak & TV9)
पश्चिम बंगाल के जॉयपुर विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी जनसभा के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण का एक छोटा सा हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस(TMC) की नेता महुआ मोइत्रा और कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेता समेत कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ का श्रेय स्वामी विवेकानंद को दे दिया।

महुआ मोइत्रा ने उन्हें ‘बुलडोजर बुद्धि’ तक कह डाला। लेकिन जब इस पूरे Video की पड़ताल की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। यह रिपोर्ट TMC और कांग्रेस के भ्रामक प्रचार और CM योगी के वास्तविक भाषण के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है। विपक्ष ने इस छोटी सी बात को जानबूझकर इतना बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास इसलिए भी किया है क्योंकि योगी आदित्यनाथ न केवल एक मुख्यमंत्री हैं, बल्कि एक प्रतिष्ठित धार्मिक पीठ (गोरक्षपीठ) के प्रमुख भी हैं।

योगी के भाषण का सच

सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा Video अधूरा और काट-छाँट कर पेश किया गया है। भाषण के करीब 10 मिनट के बाद के हिस्से को अगर ध्यान से सुना जाए, तो स्पष्ट होता है कि सीएम योगी बंगाल की महान विभूतियों का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने कहा, “याद करिए, स्वामी विवेकानंद इसी बंगाल की धरती से जन्मे हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था… (यहाँ हल्का सा ठहराव लेकर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम लिया)… तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा, नेताजी का यह उद्घोष भारत की आजादी का मंत्र बना।”

अक्सर रैलियों में जब वक्ता कई महापुरुषों का नाम एक साथ लेता है, तो शब्दों का प्रवाह (स्लिप ऑफ टंग) हो जाता है। CM योगी ने तुरंत उसी वाक्य में ‘नेताजी’ का नाम लेकर इसे स्पष्ट कर दिया था। लेकिन TMC ने केवल ‘स्वामी विवेकानंद’ और ‘नारे’ वाले हिस्से को जोड़कर इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की ताकि बंगाल की जनता के सामने उनकी छवि खराब की जा सके।

महुआ मोइत्रा और सुप्रिया श्रीनेत का गुमराह करने वाला पोस्ट

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने तथ्यों की जाँच किए बिना सोशल मीडिया पर योगी पर निजी हमला किया। उन्होंने लिखा, “हेलो बुलडोजर बुद्धि, अपने फैक्ट्स ठीक करो। नेताजी ने कहा था- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा, स्वामी विवेकानंद ने नहीं। वापस यूपी जाकर फैंटा पियो और बंगाल को अकेला छोड़ दो।”

यह पोस्ट न केवल अपमानजनक था, बल्कि जानबूझकर जनता को गुमराह करने वाला भी था। TMC ने बंगाल में अपनी सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल और ‘भ्रष्टाचार’ के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस छोटी सी जुबान फिसलने वाली घटना को ‘तथ्यात्मक गलती’ के रूप में पेश किया।

वहीं, कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस बहती गंगा में हाथ धोते हुए ट्वीट किया कि ‘योगी जी यह बात नेताजी ने 1944 में कही थी, जबकि विवेकानंद जी का निधन 1902 में हो गया था।’ दोनों ही नेताओं ने जनता को यह दिखाने की कोशिश की कि CM योगी को इतिहास की जानकारी नहीं है, जबकि उन्होंने जानबूझकर वीडियो के उस हिस्से को नजरअंदाज किया जहाँ स्पष्टीकरण मौजूद था।

सोशल मीडिया पर TMC-कांग्रेस की फजीहत: लोगों ने सिखाया ‘सुनने का सलीका’

महुआ मोइत्रा के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने उन्हें जमकर आईना दिखाया। नेटिजन्स ने पूरा Video साझा करते हुए बताया कि योगी जी ने नेताजी का नाम स्पष्ट रूप से लिया था।

एक यूजर ने CM योगी की Video शेयर कर हुए लिखा, “मैडम कानों का इलाज कराओ, यूपी में अच्छे अस्पताल हैं।”

एक अन्य यूजर ने महुआ मोइत्रा को स्पष्ट कर लिखा, “योगी जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संदर्भ में ही नारा दिया था, विवेकानंद जी के साथ उसे नहीं जोड़ा। यह तथ्य की गलती नहीं, आपके सुनने की विफलता है।”

इसके अलावा एक और यूजर ने महुआ मोइत्रा को फटकार लगाते हुए लिखा, “सच्चाई जानने के बजाय आपने गाली देना चुना, जो आपकी राजनीति को दर्शाता है।”

विपक्ष के कुशासन और हिंदू गौरव पर कड़ा प्रहार

अपने उसी भाषण में योगी आदित्यनाथ ने TMC पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने कहा कि बंगाल की धरती रामकृष्ण परमहंस, नेताजी और खुदीराम बोस की पावन धरा है, लेकिन आज TMC यहाँ राम भक्तों पर अत्याचार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC सरकार दुर्गा पूजा रुकवाती है और विसर्जन पर प्रतिबंध लगाती है। CM योगी ने स्वामी विवेकानंद के उस आह्वान को याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था, “गर्व से कहो हम हिंदू हैं।”

योगी आदित्यनाथ का मुख्य निशाना TMC की तुष्टीकरण की राजनीति थी। उन्होंने बंगाल की जनता से विकास और सम्मान के लिए एकजुट होने की अपील की। शायद यही कारण है कि TMC ने उनके पूरे भाषण के मुख्य मुद्दों (सुरक्षा, धर्म और विकास) को दबाने के लिए एक छोटे से ‘वर्ड प्ले’ को प्रोपेगेंडा की तरह इस्तेमाल किया।

‘आतंकवादी हैं PM मोदी’: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

                                    मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी को कहा 'आतंकवादी' (साभार : NDTV)

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘आतंकवादी’ कह दिया। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी बराबरी और न्याय के सिद्धांतों में विश्वास नहीं करते हैं।

हालाँकि, बयान पर बवाल बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्द का अर्थ यह था कि प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं को ‘आतंकित’ कर रहे हैं, न कि वे स्वयं आतंकवादी हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस गिरते स्तर की राजनीति कर रही है। गोयल ने इसे 142 करोड़ भारतीयों और लोकतंत्र का अपमान बताते हुए खड़गे से माफी की माँग की। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले इस बयान ने चुनावी माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है।

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‘मुझे झाँ* फर्क नहीं पड़ता’: ममता बनर्जी ने मोदी के लिए किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल; और कितनी
‘मुझे झाँ* फर्क नहीं पड़ता’: ममता बनर्जी ने मोदी के लिए किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल; और कितनी

 

‘मुझे झाँ* फर्क नहीं पड़ता’: ममता बनर्जी ने मोदी के लिए किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल; और कितनी गन्दी गालियां सुनेगा मोदी; मीडिया खामोश


नरेंद्र मोदी भारत का पहला ऐसा प्रधानमंत्री है जिसे सबसे ज्यादा गालियां पड़ी हैं। फिर भी मस्त हाथी की तरह अपने काम में लगा हुआ है। हद तो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुंडों द्वारा दी जाने वाली गाली दे दी। लेकिन सारा मीडिया इस गुण्डई गाली पर खामोश है। अगर यही गाली किसी बीजेपी वाले ने दे दी होती सारा मीडिया breaking news चलाकर उछाल रहा होता।   

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस(TMC) की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेहद अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है।

अरामबाग टीवी के पत्रकार शफीकुल इस्लाम द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में ममता बनर्जी कहती सुनाई दीं, “वह (नरेंद्र मोदी) दूरदर्शन का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और राजनीतिक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के बारे में कुछ कहा था। मैं उनके भाषण नहीं सुनती।”

इसके बाद उन्होंने हैरान करते हुए कहा, “अमार ब** लागे ना”। जानकारी के लिए बता दें कि ‘ब**’ एक बेहद आपत्तिजनक बंगाली शब्द है जिसका इस्तेमाल जननांगों के बाल के रूप में किया जाता है। जिस तरह हिंदी में ‘मुझे झाँ** फर्क नहीं पड़ता’ का इस्तेमाल होता है, उसी तरह बंगाली में इसका इस्तेमाल किया गया है। ममता बनर्जी के इस बयान पर लोगों में आक्रोश है और उन पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाषा के स्तर को और नीचे गिराने के आरोप लग रहे हैं।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस तरह की आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया हो। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी ममता बनर्जी ने ‘B#ra’ जैसे सेक्सिस्ट शब्द का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा था। इसका इस्तेमाल पुरुषों के जननांग के लिए किया जाता है।

उस समय भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने कहा था, “आज के समय में ममता बनर्जी जितनी घृणित और आपत्तिजनक कोई भी नेता नहीं है। लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग अब उनसे तंग आ चुके हैं।”