भारत में ‘रिजीम चेंज’ की विदेशी पटकथा, मोहरा बने राहुल गांधी, 270 गुप्त विदेशी दौरों का सच

जो कांग्रेस भारत को आज़ादी दिलवाने की दुहाई देती रहती है, आज वही कांग्रेस भारत विरोधियों के साथ मिल भारत को खंडित करने में लगने से इसकी आज़ादी की लड़ाई में गंभीर होने पर प्रश्नचिन्ह लगाने में कांग्रेस ही जिम्मेदार है। वरना कांग्रेस बताये कि राहुल गाँधी विदेशों में किन से मिलने जाते हैं और क्या बातें होती हैं। चीन के साथ क्या MoU साइन हुआ है? भारत में राहुल के आगे-पीछे डोलने वाला मीडिया भी खामोश, क्यों?    

भारतीय राजनीतिक गलियारों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के गुप्त विदेशी दौरों को लेकर अक्सर तीखा सियासी घमासान देखने को मिलता है। एक जिम्मेदार नेता होने के बावजूद राहुल गांधी बजट सत्र, चुनाव और उप-राष्ट्रपति शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण असवरों पर विदेश रवाना हो जाते हैं। आम नागरिकों के मन में भी अक्सर यह जिज्ञासा और सवाल रहता है कि एक प्रमुख राजनीतिक दल और प्रतिपक्ष के नेता आखिर इतनी बार विदेश क्यों जाते हैं, उनके इन दौरों का असली मकसद क्या होता है और वे वहां किससे मिलते हैं? लोकतंत्र में पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही की मांग करने वाली कांग्रेस इन सवालों का जवाब नहीं दे रही है। लेकिन देश और विदेश में चल रहे प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के नेटवर्क से सवालों के जवाब मिलने लगे हैं। दरअसल, इन गुप्त विदेश यात्राओं का एक बड़ा मकसद भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने यानी ‘रिजीम चेंज’ के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचना है।

राहुल गांधी ने 10 वर्ष में 270 बार विदेश दौरा किया-दुबे
भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों पर यह दावा किया कि विपक्ष भारत विरोधी विदेशी ताकतों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि चीन में बैठे नेविल रॉय सिंघम, हवाला फंडिंग नेटवर्क, सोरोस फाउंडेशन और अमेरिकी सांसद इल्हान उमर जैसी भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश के भीतर ‘रेिजीम चेंज’ की पटकथा लिखी जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि पिछले 10 वर्षों में 270 बार विदेश जाकर वे किन शक्तियों के संपर्क में रहे। इसका जवाब उन्हें देश को देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “क्या इसके पीछे सरोस थे? क्या सैम पित्रोदा भी इस साजिश में प्रमुख रूप से शामिल है?

वैश्विक कार्टेल और लॉबी मोदी सरकार के खिलाफ- दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया, क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा मानने से इनकार किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर सख्त नीतिगत नेतृत्व दिया। इसी वजह से इन तीनों क्षेत्रों के वैश्विक कार्टेल और लॉबी भारत सरकार के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। विपक्ष उनके हाथ का औजार बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गैंबलिंग 30-35 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार बन चुका है, जबकि बिना किसी कानूनी वजूद वाली क्रिप्टोकरेंसी पूरी दुनिया में लोगों को बर्बाद कर रही है।

भारत में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश-दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से आम नागरिकों के साथ ही व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को परेशानी हो रही है। पर्व के समय प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे प्रदर्शनों को कुछ भारत विरोधी तत्वों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने मलेशिया में बैठे जाकिर नाइक, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू और कराची में बैठे दाऊद इब्राहिम का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ऐसे तत्व देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। सांसद ने दावा किया कि उनका उद्देश्य भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसी हालत की ओर धकेलना और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना है।

 

राहुल गांधी पर युवाओं की भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
निशिकांत दुबे ने राहुल पर आरोप लगाया कि वह उन विदेशी ताकतों से मिलते हैं, जो भारत को तोड़ने की भावना रखती हैं और फिर उनके ही इशारे पर भारत में आंदोलन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयानों और विरोध प्रदर्शनों से युवाओं की भावनाएं भड़कती हैं, जिसके कारण कई युवाओं को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जबकि इस दौरान राहुल गांधी विदेश चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के ही इशारे पर यहाँ आंदोलन भड़काया गया और इसी का परिणाम है कि आशुतोष रांका और सौरभ दास जैसे युवाओं को कुछ दिन जेल में रहना पड़ा। इसके बाद गांधी वियतनाम चले गए।
राहुल, सलील और ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ कनेक्शन
सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर फरवरी 2023 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी के साथ चल रहे सलील शेट्टी और निखिल डे की तस्वीरें शेयर की हैं। सलील शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा समर्थित ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ के वैश्विक उपाध्यक्ष थे। सलील शेट्टी के राहुल गांधी के साथ चलने और कांग्रेस के जॉर्ज सोरोस के साथ ‘रिश्ते’ पर सवाल उठाए गए। उनके पुराने ट्वीट्स को खंगालते हुए यह दावा किया गया कि सलील सीएए-विरोधी (CAA) प्रदर्शनों में शामिल रहे थे और उन्होंने फाइजर (Pfizer) तथा मॉडर्ना (Moderna) टीकों की पैरवी की थी।
वामपंथी संगठन ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ से जुड़े हैं निखिल डे
राहुल गांधी के करीबी निखिल डे प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के निर्णय लेने वाले मुख्य कार्यकारी निकाय तथा सलाहकार परिषद का हिस्सा हैं। निखिल डे भारत में ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ (MKSS) के संस्थापक सदस्य भी हैं। प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल एक अंतरराष्ट्रीय संगठन या नेटवर्क है, जिसका दावा है कि वह दुनिया भर में वामपंथी, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करने का काम करता है। यह आरोप लगाया जाता रहा है कि यह कई देशों में घरेलू आंदोलनों को समर्थन देकर वहां की सरकारों के खिलाफ माहौल बनाने या कथित तौर पर ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) के एजेंडे में शामिल रहता है। दावा किया जा रहा है कि भारत के भीतर होने वाले विभिन्न विरोध-प्रदर्शनों, अराजकता या राजनीतिक माहौल को हवा देने के पीछे ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ जैसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स और संगठनों की सहभागिता रहती है। अप्रैल 2025 में राहुल गांधी ने प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी। 
‘ओपन सोसाइटी’ का भारत में निवेश और ईडी की कार्रवाई 
सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में भारत में ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ से जुड़े संगठनों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई का आंकड़ा पेश किया। इसके मुताबिक ईडी ने सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) द्वारा भारत की 12 कंपनियों में 300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की जांच की है। 18 मार्च 2025 को बेंगलुरु में आठ परिसरों की तलाशी ली गई, जिनमें Open Society Foundations (OSF) से संबंधित कार्यालय और Aspada Investments Pvt. Ltd. भी शामिल थे। दस्तावेज़ के अनुसार, SEDF ने तीन कंपनियों के माध्यम से लगभग 25–26 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि बाकी नौ कंपनियों में अधिक पूंजी पहुंचने का संदेह जताया गया।
‘ओपन सोसाइटी’ पर FCRA के उल्लंघन का आरोप
आरोप है कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और परामर्श शुल्क के जरिए विदेशी अंशदान नियमन कानून (FCRA) से जुड़ी पाबंदियों को दरकिनार करने की कोशिश की गई। ईडी के हवाले से दस्तावेज़ में कहा गया है कि Compulsorily Convertible Preference Shares (CCPS) के जरिए निवेश किया गया। केवल एक कंपनी Rootbridge Services को ऐसे शेयरों के माध्यम से 18.6 करोड़ रुपये मिलने का उल्लेख है। मॉरीशस स्थित AIC और भारत में स्थापित सलाहकार कंपनियों के माध्यम से निवेश के प्रबंधन का उल्लेख है। दस्तावेज़ में यह भी सवाल उठाया गया है कि निवेश से जुड़ी गतिविधियों में पारदर्शिता थी या नहीं। दस्तावेज़ का दावा है कि विदेशी निवेश के माध्यम से धन पहुँचाने की संरचना और उसके नियामकीय अनुपालन की जाँच की जा रही है। निशिकांत दुबे ने दस्तावेज़ के माध्यम से दावा किया है कि 2024–2026 के दौरान गृह मंत्रालय के नियमों में बदलाव से ऐसी फंडिंग पर अधिक निगरानी, खुलासे और उपयोग संबंधी सीमाएं लागू हो सकती हैं।
इल्हान उमर जैसे भारत विरोधियों से राहुल की मुलाकात
नेता प्रतिपक्ष होकर भी राहुल गांधी विदेशों में भारत विरोधी इल्हान उमर, डोनाल्ड लू, जेरेमी कॉर्बिन, सुनीता विश्वनाथ, गुनथर फेलिंगर और खालिस्तानी समर्थक से मिलते हैं। राहुल गांधी सितंबर 2024 में तीन दिनों के दौरे पर अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिन पर विवाद हो गया। इन तस्वीरों में राहुल गांधी के साथ भारत विरोधी अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर नजर आ रही हैं। यह मुलाकात वॉशिंगटन डीसी में रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में हुई थी। इल्हान उमर को उनके भारत विरोधी विचारों के लिए जाना जाता है। इल्हान ने साल 2022 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का दौरा किया था। उन्होंने पीएम मोदी के अमेरिकी संसद में दिए गए भाषण का बहिष्कार भी किया था। वे भारत को अल्पसंख्यक विरोधी भी बता चुकी हैं। एक बयान में बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधते हुए इल्हान उमर ने कहा था कि भारत में लंबे समय से मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने तब यहां तक कह दिया था कि भारत में मुस्लिम होना अपराध जैसा है।
मुस्लिम परस्त इल्हान उमर पर ट्रंप का शिकंजा
सांसद निशिकांत दुबे ने केंद्र सरकार से राहुल गांधी की विदेश यात्रा के दौरान भारत विरोधी ताकतों से मुलाक़ात पर एक न्यायिक आयोग बनाने की मांग की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर के खिलाफ लगाए गए कई गंभीर आरोपों का जिक्र किया हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने इल्हान उमर से संसद (कांग्रेस) से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है। ट्रंप ने दावा किया है कि इल्हान उमर का असली नाम ‘इल्हान नूर सईद एल्मी’ है और उन्होंने कांग्रेस सदस्य के रूप में शपथ लेते समय एक फर्जी नाम का उपयोग किया। वाशिंगटन डीसी में इल्हान उमर के घर पर हुई फेडरल (संघीय) एजेंसियों की छापेमारी के बाद, ट्रंप ने कहा कि वह जेल जा सकती हैं या उन्हें देश से निकाला (डिपॉर्ट) किया जा सकता है। यह जांच उनकी नागरिकता और आव्रजन दस्तावेजों से जुड़े मामलों की हो रही है। ट्रंप ने सांसद की शादी पर सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘उनका सरनेम उनके भाई, अहमद नूर सईद एल्मी के सरनेम से बिल्कुल मेल खाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने भाई से ही शादी की थी और उनके बच्चे भी हैं – खैर, ऐसा करना कानूनी है या नहीं, मुझे नहीं पता।’
भारत विरोधी बांग्लादेशी पत्रकार मुश्फिकुल अंसारे से मुलाकात
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सितंबर 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान उनकी बांग्लादेशी पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे के साथ बातचीत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। अंसारे ‘जस्ट न्यूज बीडी’ के लिए व्हाइट हाउस के संवाददाता रहे हैं और उनके संगठनों तथा गतिविधियों को लेकर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। अमेरिकी विदेश विभाग और संयुक्त राष्ट्र की प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश के पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे ने भारत के आंतरिक मामले में दखल देते हुए सवाल उठाए थे। उस पर सवाल उठे थे कि बांग्लादेशी पत्रकार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की खबर को उठाने में इतनी दिलचस्पी क्यों है?
जर्मनी में भारत विरोधी और चीन समर्थकों से राहुल की मुलाकात
राहुल गांधी के विदेशी दौरों की सच्चाई एक-एककर बाहर आ रही है। दिसंबर 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र के बीच में राहुल गांधी ने जर्मनी की पांच दिवसीय यात्रा की थी। इस दौरान राहुल गांधी ने कॉर्नेलिया वोल से जर्मनी के हर्टी स्कूल में मुलाकात की थी। ये सिर्फ यहां की प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि सेंटर फॉर यूरोपियन यूनिवर्सिटी की बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में भी हैं। इस संस्थान को लेकर सोरोस से जुड़े फंडिंग नेटवर्क्स के साथ कथित संबंधों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। लार्स क्लिंगबाइल जर्मनी के उप-चांसलर और SPD पार्टी के अध्यक्ष हैं। क्लिंगबाइल सितंबर 2024 और नवंबर 2025 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मिले। जून 2023 में उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात की थी। और अब वही क्लिंगबाइल राहुल गांधी से मिले। यानि चीन से नज़दीकियां रखने वाले नेता से राहुल गांधी की मुलाकात ने नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रेडरिक एबर्ट स्टिफ्टुंग यह एक जर्मन राजनीतिक फाउंडेशन है, जिसकी गतिविधियों और भारत संबंधी विचारों को लेकर आलोचक सवाल उठाते रहे हैं। इसे कथित तौर पर ग्लोबलिस्ट, प्रो-NATO थिंक टैंक के रूप में भी पेश किया जाता है। इसके संबंधों को लेकर सोरोस समर्थित Open Society और Ford Foundation जैसे नेटवर्क्स का नाम भी चर्चाओं में आता रहा है।

एक बार फिर राहुल गांधी कोर्ट का दामाद बन गया; सुल्तानपुर कोर्ट ने 8 साल बाद अमित शाह के खिलाफ अपशब्द कहने के लिए बरी कर दिया; अब राहुल कहेगा एक “हत्यारा” हमारा गृहमंत्री है

सुभाष चन्द्र

मैं बार बार कहता रहा हूं कि राहुल गांधी अदालतों का दामाद है जो उस पर कोई आंच नहीं आने देती।  

2018 में राहुल गांधी ने टिप्पणी की थी कि “एक हत्यारा सत्ताधारी दल का अध्यक्ष है”। उसके खिलाफ भाजपा नेता विजय मिश्रा ने कोर्ट में मुकदमा/शिकायत दर्ज की थी।

आज 8 साल के बाद सुल्तानपुर MP-MLA कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने इस मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। 

महान जज ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा दिया गया बयान या की गई टिप्पणी मानहानिकारक श्रेणी में नहीं आती है;

सीडी को माना गया मजबूत सबूत: राहुल गांधी के वकीलों द्वारा कोर्ट में पूरे बयान की जो सीडी (CD) दाखिल की गई थी, उसे अदालत ने एक मजबूत साक्ष्य माना और यह स्पष्ट हुआ कि उनका इरादा किसी की मानहानि करना नहीं था।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
शिकायतकर्ता की स्थिति/अधिकार: इस मामले में शिकायत स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी; अदालत का यह भी मानना था कि यदि बयान से कथित तौर पर मानहानि अमित शाह की हुई थी, तो तीसरे पक्ष (शिकायतकर्ता) द्वारा मुकदमा कायम करने या आरोप साबित करने को लेकर कानूनी आधार पर्याप्त नहीं थे।

अब ये जज साहब बताएं कि क्या राहुल गांधी की तरफ से पेश की गई CD में ये शब्द नहीं सुने गए जो उन्होंने मान लिया कि राहुल गांधी का इरादा किसी की मानहानि करने का नहीं था?

सच्चाई तो यह है जिसे मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने नज़रअंदाज किया कि 2005-06 में सोहराबुद्दीन, उसकी बीवी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति की हत्या के आरोप में कांग्रेस की केंद्र सरकार ने अमित शाह को फंसाया और उसे राज्य से तड़ीपार तक कर दिया। लेकिन 30 दिसंबर, 2014 को CBI जज MB Gosavi ने अमित शाह को आरोप मुक्त कर दिया। उसके बाद भी राहुल गांधी का 2018 में निर्दोष साबित हो चुके अमित शाह को हत्यारा कहना किस औचित्य से शुभम वर्मा को मानहानिकारक नहीं लगा? मानहानि का इरादा नहीं था तो ऐसा बयान देने की जरूरत क्या थी?

बस यही लक्षण है राहुल गांधी के इस कोर्ट दामाद होने के।

मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने एक और वाहियात निर्णय दिया कि “यदि बयान से कथित तौर पर मानहानि अमित शाह की हुई थी, तो तीसरे पक्ष (शिकायतकर्ता) द्वारा मुकदमा कायम करने या आरोप साबित करने को लेकर कानूनी आधार पर्याप्त नहीं थे”। 

शुभम वर्मा जी भूल गए या जानबूझकर अनजान बन गए कि पार्टी अध्यक्ष के विरुद्ध अपमानजनक भाषा से पार्टी का कोई भी कार्यकर्त्ता आहत हो सकता है। आपका क्या मतलब है कि शिकायत अमित शाह को ही दर्ज करनी चाहिए थी? ऐसा फैसला दे कर तो आपने राहुल गांधी को आज़ादी दे दी कि अब वो कह सके कि “एक हत्यारा देश का गृहमंत्री है”। 

राहुल गांधी को कांग्रेस परिवार से आने वाले जस्टिस बीआर गवई ने उसकी सजा पर रोक लगा कर उद्दंड बना दिया।

सोनिया गांधी को लिए उसे असली नाम से पुकारने पर सोनिया गांधी ने शिकायत नहीं की बल्कि पार्टी के लोगों ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अलग अलग राज्यों में 100 FIR दर्ज की।

आज खड़गे के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। क्या कोर्ट भविष्य में यही कहेगा कि प्रधानमंत्री मोदी को गाली दी गई है तो उन्हें ही केस दर्ज करना चाहिए? फिर मंदिर की तरफ से केस लड़ने के लिए सीधे भगवान को समन किया करें।

मुक़दमे कितने भी हो जाएँ राहुल गांधी के खिलाफ, वो हर मामले में बरी कर दिया जायेगा अदालतों में। लेकिन फिर विजय मिश्रा को इस निर्णय के विरुद्ध इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील करनी चाहिए।

लंदन में ‘एंटी-इंडिया’ टूलकिट एक्टिव, अंदरूनी मामलों में दखल का पक्का सबूत!


दिल्ली और भारत में भी वही सब होते-होते रह गया, जो आज पेरिस, फ्रांस, इटली, बेल्जियम और यूरोप के दूसरे देशों में हो रहा है। हम भी ऐसी स्थिति के बहुत करीब पहुँच गए थे।
इन कॉकरोचों की पूरी प्लानिंग थी कि गठबंधन के कुछ सदस्य आखिर क्या करने की योजना बना रहे थे?
एक बात पर ध्यान दीजिए, ये लोग लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहे थे कि इन्हें अपना प्रदर्शन जंतर-मंतर पर ही करना है। आपको पता है, ऐसा क्यों था? इसकी वजह है।
जंतर-मंतर के बिल्कुल पास कनॉट प्लेस है। अगर प्रदर्शन बढ़ता और वहाँ तक फैल जाता, तो ये लोग कनॉट प्लेस में पहुँचकर लूटपाट शुरू कर सकते थे, ठीक वैसे ही जैसे आज पेरिस में हो रहा है।
अब कनॉट प्लेस की अहमियत को समझिए। इतने सालों बाद भी कनॉट प्लेस सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। यह दिल्ली के कारोबार का सबसे अहम केंद्र है।
अगर कनॉट प्लेस में लूटपाट और हिंसा शुरू हो जाती, तो वहाँ की तस्वीरें और वीडियो पूरे देश में फैल जाते। इससे देश के दूसरे शहरों में भी अराजकता फैल सकती थी। यानी हालात इतने बिगड़ सकते थे कि इसका असर दिल्ली से निकलकर पूरे देश में दिखाई देने लगता।
लेकिन दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय ने जिस समझदारी से इस पूरे मामले को संभाला, उसकी वजह से हालात को वहीं काबू में कर लिया गया।
लेकिन मैं आपको एक बात साफ-साफ है, खतरा अभी टला नहीं है। आज पेरिस और यूरोप के दूसरे देशों में जो हो रहा है, वही इन कॉकरोचों के लिए एक मॉडल है। वे इसी से प्रेरणा लेकर भारत में भी ऐसा करने की बार-बार कोशिश करेंगे।
लगता है कि अब जब दिल्ली पुलिस ने इन प्रदर्शनों को संभालकर अपनी ताकत और क्षमता दिखा दी है, तो उसे धीरे-धीरे और सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इन कॉकरोचों को साफ संदेश मिल जाए कि भारत में पेरिस जैसे हालात दोबारा पैदा करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भारत के चुनावी मैदान में लगातार मिल रही पराजय के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हताश और निराश हो चुके है। तीन आम चुनाव में जनता द्वारा ठुकराये जाने के बाद राहुल गांधी की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। इसलिए विदेशी ताकतों से मदद पाने के लिए अलग-अलग देशों का दौरा किया। मार्च 2023 में लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि भारतीय लोकतंत्र के ढांचे पर बर्बर हमला हो रहा है। उन्होंने अफसोस जताया था कि अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के लोकतांत्रिक देश इस पर ध्यान देने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने खुलेआम भारत में दखल देने की अपील की थी। अब उस अपील का असर भारत से लेकर लंदन तक दिखाई देने लगा है। राहुल गांधी के लगातार विदेशी दौरों की सच्चाई अब सामने आने लगी है।

ध्रुव राठी की अपील के बाद लंदन में प्रदर्शन

जो लोग कल तक बोल रहे थे कि भारत में हो रहे प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ नहीं है, वो अब देख सकते हैं कि कैसे विदेशी ताकतें लंदन की सड़कों पर अपनी भागीदारी का परिचय दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और हिन्दू विरोधी ताकतों का पोस्टर ब्वॉय और यूट्यूबर ध्रुव राठी की सक्रियता बता रही है कि विदेशी टूलकिट किस तरह काम कर रहा है। ध्रुव राठी की अपील के बाद 17 अक्टूबर को लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया गया। नई दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में ब्रिटेन के कई संगठनों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसफआई) के बैनर तले आयोजित किया गया।

लंदन में लगे भारत से आजादी-आजादी के नारे

जहां भारत में प्रशांत भूषण जैसे देश विरोधी खुलकर रिजीम चेंज की बात कर रहे हैं, वहीं विदेशों में बैठे इनके समर्थक भी अब खुलकर मैदान में आ चुके हैं। लंदन में हुए प्रदर्शन में जिस तरह आजादी…आजादी के नारे लगाए गए, उससे पता चलता है कि इसका आयोजन भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग ने किया था। इस गैंग को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन हासिल है। इस प्रदर्शन में लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी भी शामिल थे, जिन्होंने भारतीय छात्र संगठन एसएफआई का छात्र बनकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

सर पर उजली टोपी और मुंह पर मास्क लगाकर फोटो खींचते नजर आया ध्रुव राठी

एसएफआई के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी सर पर उजली टोपी और मुंह पर मास्क लगाकर फोटो खींचते नजर आया। बता दें कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ब्रिटेन इकाई ने भी इसी सप्ताह कार्डिफ, लीड्स और एडिनबर्ग में सभाएं आयोजित कीं। इसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया और मतदान के अधिकार तथा विरोध करने की स्वतंत्रता की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने की मांग का समर्थन किया।

ध्रुव राठी ने लंदन पहुंच कर किया था प्रदर्शन का ऐलान

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्टूबर वाले प्रदर्शन में सीजेपी का साथ देने भारत आए ध्रुव राठी अब लंदन पहुंच गए हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने शनिवार 17 अक्टूबर को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में संसद चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लंदन में मौजूद लोगों से दोपहर 12 बजे प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। राठी ने कहा कि अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का समय आ गया है।

जवाब में लगे ‘मोदी- मोदी’ और ‘जय श्री राम’ नारे

लंदन में प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तिरंगा लहराया और प्रधानमंत्री के पक्ष में नारे लगाए। ‘भारत माता की जय’, ‘मोदी- मोदी’ और ‘जय श्री राम’ नारे लगा प्रधानमंत्री और भारत सरकार के प्रति अपना समर्थन जताया। प्रधानमंत्री मोदी समर्थक प्रवासी भारतियों ने कॉकरोचों के खिलाफ भी नारा लगाया। उन्होंने कहा, “एक-दो कॉकरोच को फेंक दो।” मौजूद लोगों ने कहा कि वो विदेशों में भारत की छवि बचाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उनका मानना ​​है कि कुछ प्रदर्शन ऐसे हैं, जिनका मकसद देश की साख को नुकसान पहुंचाना है।

भारत को बदनाम करने की हो रही है कोशिश  

लंदन में रहने वाले एक भारतीय ने बताया कि इस सभा का उद्देश्य उन कोशिशों का विरोध करना था, जिन्हें वे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश मानते हैं। उन्होंने कहा, “आज हम लंदन के भारत भवन में उन लोगों का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए हैं, जो हमारी नजर में भारत को बदनाम कर रहे हैं। भारतीय राष्ट्रवादी होने के नाते, हम उनके कामों का जवाब देने और अपने देश के बचाव में आवाज उठाने के लिए एक साथ आए हैं।”

अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल की दखलंदाजी

वॉशिंगटन राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने बुधवार 14 अक्टूबर को भारत में वोटर लिस्ट से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर चिंता जताई थी। उन्होंने इसे मतदाताओं के नामों की ‘सफाई’ या बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कार्रवाई बताते हुए सवाल उठाए। जयपाल ने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की उन कार्रवाइयों से की, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोकतंत्रों की रक्षा करना जरूरी है और भारतीयों को भी अमेरिकियों की तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव मिलने चाहिए। प्रमिला जयपाल डेमोक्रेटिक सांसद है, जबकि ट्रंप रिपब्लिकन हैं। प्रमिला जयपाल ने भारत में कथित लोकतंत्र-विरोधी प्रयासों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों का समर्थन भी किया।

भारत ने प्रमिला जयपाल को दिया दो टूक जवाब

प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने गुरुवार 15 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने कहा किभारत की चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर जयपाल की टिप्पणियां देश के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां स्वतंत्र और मजबूत संवैधानिक संस्थाएं हैं तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का लंबा इतिहास रहा है। क्वात्रा ने यह भी कहा कि वे प्रमिला जयपाल के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, ताकि उनकी गलतफहमियों को दूर किया जा सके।

UN मानवाधिकार संगठन द्वारा सीजेपी प्रदर्शन पर टिप्पणी

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने शनिवार 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी। साथ ही, उसने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का सम्मान करने और बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की अपील की थी।

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर जतायी थी चिंता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने कहा कि कार्यालय “दिल्ली में आज हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को भारत में बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों से चिंतित है। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान करें और उसे सुनिश्चित करें। शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता की कड़ी कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए।”

भारत का मानवाधिकार संगठन को जवाब

भारत ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर अपने ‘India at UN’ अकाउंट से कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि OHCHR की चिंताएं गलत हैं। भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे बड़े पैमाने के विरोध-प्रदर्शनों पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमारे संविधान में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और विरोध जताने का अधिकार दिया गया है। इस अधिकार की रक्षा मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया करते हैं। हर लोकतंत्र की तरह भारत में भी लोग सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखते हुए और तय नियमों के तहत इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं। अधिकारी कानून के मुताबिक काम करते हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए देश की अदालतें सभी के लिए खुली हैं।”

भारत ने OHCHR के दोहरे मापदंड की पोल खोली

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की मानवाधिकार संस्थाओं के दोहरे मापदंडों, राजनीतिक पक्षपात और बिना सबूतों के रिपोर्ट तैयार करने के रवैये को लेकर उनकी कड़े शब्दों में आलोचना की है। भारत ने OHCHR पर ‘चयनात्मक रवैया’ (Extreme Selectivity) अपनाने का आरोप लगाया। भारत ने साफ कहा कि यूएन की यह संस्था दुनिया के अन्य हिस्सों और भारत के पड़ोसी देशों में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों या उन पर की जाने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर पूरी तरह चुप रहती है, लेकिन भारत के मामलों में तुरंत टिप्पणी करती है। ऐसे दोहरे मापदंडों से इस वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता खत्म होती है।

बांग्लादेशी छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने दिया CJP प्रदर्शन को समर्थन

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेता नाहिद इस्लाम ने भारत में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे भारतीय युवाओं के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के आयोजकों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। साथ ही, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों को बुनियादी स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। साथ ही हिंदुत्व आधारित बहुसंख्यकवाद पर सवाल उठाते हुए भारतीय युवाओं से अपील की।

नाहिद इस्लाम ने की शाहीन बाग की महिलाओं की तारीफ 

नाहिद इस्लाम आगे कहा, यह संघर्ष केवल आपका नहीं है। ढाका से हम आपके साथ दोस्तों की तरह खड़े हैं। हम जवाबदेह सत्ता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवीय गरिमा की साझा मांग से जुड़े हैं। नाहिद इस्लाम ने भारत में लोकतांत्रिक विरोध की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा, हम भारत में लोकतांत्रिक प्रतिरोध की समृद्ध परंपराओं को पहचानते हैं। शाहीन बाग की महिलाओं ने दिल्ली की सर्दियों में समान नागरिकता के अधिकार की रक्षा की। वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जादवपुर विश्वविद्यालय में कई पीढ़ियों के छात्रों ने संगठित विरोध की परंपरा को बनाए रखा है। ये लोकतंत्र की अनमोल विरासत हैं।

 

फ़ारूक़ अब्दुल्ला का पाकिस्तान प्रेम, चीन की अरुणाचल में शरारत, जामिया में “फ्री कश्मीर” के नारे और JNU में नक्सली नारे सब एक साथ हुए हैं

सुभाष चन्द्र

इन सब बातें को का एक साथ होना कोई संयोग नहीं है। जिस दिन जामिया मिलिया में “फ्री कश्मीर” और “फ्री उमर खालिद” के नारे लिखे गए, उसी दिन फारूक अब्दुल्ला ने सबसे घटिया बयान दिया है कि पाकिस्तान के कारण बच रही है कश्मीरियों की जान। अब्दुल्ला के बूढ़े दिमाग में फितूर घुसा है कि क्योंकि पाकिस्तान कई जगहों पर जाकर कश्मीर और कश्मीरियों के बारे में बात कर रहा है, इसी वजह से कश्मीरियों की जान बच रही है। तो जिन देशों से बात कर रहा है पाकिस्तान, उनसे भारत पर हमला करा के देख ले।

यह बात अब्दुल्ला ने उस दिन कही जिस दिन जामिया मिलिया में “फ्री कश्मीर” के नारे दीवारों पर लिखे गए। इस अब्दुल्ला को पाकिस्तान चले जाना चाहिए लेकिन मुझे नहीं लगता पाकिस्तान इसे अपने मुल्क में रखना चाहेगा। इस हरामखोर को याद होना चाहिए कि 16 अगस्त, 1946 को “Direct Action Day” की कॉल देकर जिस सुहरावर्दी ने हजारों हिंदुओं को मरवा दिया था, वो पाकिस्तान का 1956 में प्रधानमंत्री तो बना लेकिन 13 महीने बाद गद्दारी के आरोप में बर्खास्त कर दिया अय्यूब खान ने और उसे पाकिस्तान में दफ़न के लिए 2 गज़ जमीन भी नसीब नहीं हुई और उसकी मौत बेरूत, लेबनान में हुई। तेरा भी यही हाल होगा एक बार पाकिस्तान जाकर तो देख।

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि हमारे पड़ोसी देश को देखो वह हर जगह कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है। वरना हमारी सरकार की नीयत ठीक नहीं है। अब फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रमुख मौलाना खालीद रशीद फिरंगी और मौलाना सैफ अब्बास ने पलटवार किया है।

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा, फारूक अब्दुल्ला कह रहे हैं, कि दिल्ली से हमें कोई उम्मीद नहीं है, हमारा तो पाकिस्तान ही है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को दो टूक जवाब देते हुए कहा, जिस तरीके से पूर्व सीएम ने बोला है कि दिल्ली से कोई उम्मीद नहीं है, वह पूरी तरह गलत है। दिल्ली से उन्हें किस बात की उम्मीद नहीं है? अगर वे कहते हैं कि उनकी सुरक्षा पाकिस्तान करेगा तो मैं समझता हूं कि पता नहीं वे किस ख्याली दुनिया में हैं। मौलाना ने कहा, अगर फारूक अब्दुल्ला कहते कि हमें दिल्ली से उम्मीद थी कि ऑपरेशन सिंदूर के समय कश्मीर मिल जाएगा, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। तो यह बात समझ में आ सकती है। उन्होंने कहा, देश में हर किसी को यही उम्मीद है कि पाकिस्तान जो है वह हमें जो पाकिस्तान के अंदर हमारे कश्मीर का हिस्सा है, वह निश्चित रूप से मिलेगा और, अखंड भारत का सपना पूरा होगा।'

'वोट बैंक की राजनीति कर रहे अब्दुल्ला'
उन्होंने फारूक अब्दुल्ला पर सियासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा, 'वह कश्मीर में राजनीति कर रहे हैं और वह वोट बैंक की राजनीति को लेकर इस तरह से बयान दे रहे हैं। मैं समझता हूं कि जो पाकिस्तान दर-दर जाकर अपने लिए खुद सुरक्षा का जरिया ढूंढ रहा है और सुरक्षा के बारे में सोच रहा है, वह हमारा क्या कर सकता है? मैं समझता हूं कि अगर हिंदुस्तान आज चाह ले तो पूरा कश्मीर हमारे पास होगा।

ये हरामखोर अब्दुल्ला कश्मीरियों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान को श्रेय दे रहा है लेकिन ये नहीं बोलता कि गुलाम कश्मीर में नरसंहार भी वो ही पाकिस्तान कर रहा है। बेशर्म गैंडे कश्मीरियों को बचाया हुआ है तो मोदी ने बचाया हुआ है और जो पाकिस्तान जाकर स्वाद चखना चाहते हैं वो गुलाम कश्मीर में चले जाएं।

चीन ने अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ कर शरारत करने की कोशिश की है जबकि ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग बड़ी बड़ी मीठी मीठी बातें करके गया था, जो कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं हुआ। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के बीच MOU यही तो है कि कांग्रेस के इशारे पर जब मर्जी चीन घुसपैठ करेगा जैसे पहले ढ़ोकलाम और लद्दाख में की। चीन की किसी भी शरारत के पीछे कांग्रेस का सीधा हाथ मान कर चलना चाहिए। ये शरारत भी तब  हुई है जब राहुल विंची वियतनाम गया हुआ है। 

कांग्रेस का काम बिना चुनाव सत्ता पाने का है और उसके लिए कांग्रेस के सारे नेता पागल हो रखे हैं। 
 
आज खड़गे को बोलते हुए शर्म नहीं आई कि “मोदी क्या मोदी का बाप भी जाएगा”। इस निशाचर की माँ और बहन को रजाकारों ने जिंदा जलाया था, काश इसे भी ढूंढ कर जला दिया होता तो आज ये भारत पर बोझ न बनता। ये रजाकारों द्वारा की गई इसकी माँ और बहन की निर्मम हत्या को भूल गया और इसका बेटा प्रियांक खड़गे RSS पर बैन लगाना चाहता है।

कांग्रेस के जब रिजीम चेंज के हथकंडे फेल हो गए तो कॉकरोचों और जामिया/JNU का सहारा ले लिया और चीन से हरकत करा दी। जिन माओवादियों का सफाया कर दिया मोदी सरकार के, उनके लिए आज JNU में नारे लगे है “लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी” और “फ्री उमर खालिद”। 

हिम्मत है तो अब “नक्सलबाड़ी” को जिन्दा करके दिखाओ, शुभेंदु अधिकारी बैंड बजा देगा।

अभी तो कांग्रेस की 1 नवंबर की रामलीला मैदान की रैली में भारी हिंसा करने की कोशिश की जाएगी। शायद इसलिए कि कल अमित शाह ने पुलिस मुख्यालय में कुछ रणनीति बनाई होगी। मजे की बात तो ये है कि कांग्रेस की कोई औकात नहीं है उत्तर प्रदेश में क्योंकि विधानसभा में उसके केवल 2 विधायक हैं और अखिलेश से गठबंधन के लिए 200 सीट मांग रही है कांग्रेस। है न मजाक की बात! 

UN अधिकारी क्या भारत के खिलाफ भौंकने वाले “कुत्तों” का गिरोह है?

सुभाष चन्द्र

वैसे अपने आप में किसी काम का नहीं है UNO क्योंकि किसी वैश्विक मामले को सुलझाने का इसमें दम नहीं है लेकिन लगता है इसके अधिकारी भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले “कुत्तों का गिरोह” बन गया है और भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए कुछ भारत विरोधी दलों को खाद पानी देने का काम कर रहे है। 

UN के 20 से अधिक स्वतंत्र कथित “मानवाधिकार विशेषज्ञों” (जो वास्तव में ‘दानवाधिकार विशेषज्ञ” है) ने स्पेशल रिपोर्टर्स सहित एक संयुक्त बयान जारी कर भारत में पिछले कुछ महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की ‘बार बार’ अत्यधिक प्रतिक्रिया पर चिंता जाहिर की है। 

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विदेश मंत्रालय ने UN में इन टिप्पणियों को एकतरफा, पक्षपात पूर्ण और असत्यापित बताया है। मानवाधिकार को सुनी सुनाई बातो के आधार पर किसी को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने का औजार नहीं बनाया जाना चाहिए।

इसके अलावा आज UNO की एक अन्य रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व वाली डी कंपनी को “भारत स्थित” आपराधिक समूह बताया है। भारत ने इस पर भी UNO को फटकार मारी है कि ऐसे “factually Incorrect” बयानों से UN जैसी वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान होता है। भारत ने दोहराया कि दाऊद पाकिस्तान में रह रहा है ठीक उसी तरह जैसे पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को छुपाया हुआ था। भारत ने UN को अपना रिकॉर्ड सुधारने के लिए कहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी UN की टिप्पणियों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उनकी बातों में “विरोधाभास” है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यह उसका आंतरिक मामला है। अमेरिका में भी रोज प्रदर्शन होते हैं, इसलिए वह अन्य देश के घरेलू मामलों में टिप्पणी नहीं करेंगे।

ये UNO के कुत्ते ट्रंप के बयान पर नहीं बोलते जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान में 6 महीनों में 75,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई है। UN के कुत्तों की नज़र में वह “अत्यधिक बल प्रयोग” नहीं था।

UNO के कुत्ते फ्रांस, इटली, अल्बानिया और अन्य यूरोपीय देशों में हो रहे दंगों पर खामोश है। ये लोग क्या भारत को भी इस देशों की तरह आग के हवाले करना चाहते हैं और क्या भारत को दंगाइयों को खुला छोड़ देना चाहिए।

UNO के बयानों से साफ़ हो गया कि जो भारत में तख्तापलट के साजिश के तहत प्रदर्शन हुए उनके लिए पैसा UN की एजेंसियों ने ही दिया। अभी कोई बड़ी बात नहीं होगी अगर अभिजीत दिपके गैंग के लोगों और नेहा बोरा को Ramon Magsaysay Award दे दिए जाएं।

नेहा बोरा और दिपके इस तरह पतली गली से निकल सकते हैं क्या?

सुभाष चन्द्र

जुलाई, 20 से जंतर मंतर पर बिना पुलिस अनुमति प्रदर्शन करने वाला अभिजीत दिपके तब बड़ा नेता बना हुआ था और सोनम वांगचुक के साथ नेहा बोरा भी अनशन पर बैठी हुई थी। 5 दिन हिंसा का नंगा नाच किया कॉकरोचों ने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घटिया से घटिया गलियां दिलाई अपनी बेशर्म लड़कियों से। 

सौरव दास और आशुतोष रांका पुलिस ने दबोच लिए 10 अक्टूबर को फिर से जंतर मंतर में घुसने के लिए। उसके पहले दिपके, सौरव और रांका पुलिस में बांड भर चुके थे। लेकिन दिपके डगमगाता रहा, कभी कहा बांड नहीं भरा, कभी कहा भरा तो पर ये नहीं लिखा और वो नहीं लिखा। केजरीवाल को अपना पिता समान बताने लगा।

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जब सौरव और रांका जेल में थे तो शायद पिताश्री केजरीवाल ने आदेश दिया दिपके को कि सारा दोष उन दोनों पर मढ़ दे और खुद बाहर आ जा। बस दिपके ने ऐलान कर दिया कि वो कोई नेता नहीं है, उसके नेता तो सौरव दास और रांका हैं, जो वो कहते हैं, मैं वह करता हूं।

अब इस नेहा बोरा की कहानी सुनो कि इसकी जुबान कैसे लड़खड़ाई है। 

जब CJP के मंच पर अनशन पर थी तब कोई दिक्कत नहीं थी। फिर 13 अक्टूबर को अपना खुद एक 39 सेकंड का वीडियो बनाया जिसमें उसने बांग्लादेश के Socialist Students Front (SSF) को भारतीयों को मार्ग दिखाने के लिए धन्यवाद किया। वीडियो में बांग्लादेश की तरह सरकार बनाने की बात की नेहा बोरा ने। 

लेकिन बांड न भरने के लिए हाई कोर्ट गई जहां उसके वकील ने कहा कि उसका CJP से कोई लेना देना नहीं है। बांड के मामले में उसकी अपील ख़ारिज होने के बाद नेहा बोरा ने कहा कि “उसका वीडियो doctored है, असली नहीं है, उसमे छेड़छाड़ की गई है जिससे उसकी बातों को तोड़ मरोड़ कर रखा गया”। हम किसी सरकार को Overthrow नहीं करना चाहते”।

लेकिन प्रशांत भूषण की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसके बगल में बैठी थी जिसमें वो छाती ठोक कर कह रहा था “हमारी लड़ाई रिजीम चेंज के लिए है और हम रिजीम चेंज करके रहेंगे। तब क्यों नहीं कहा कि आप प्रशांत भूषण की बात से सहमत नहीं हो?

मतलब लोगों को ये वामपंथी बेवकूफ समझते हैं। 14 अक्टूबर को इसने वीडियो अपलोड किया और वह 10 दिन तक टीवी में दिखाया जाता रहा, तब नहीं कहा कि ये वीडियो Doctored है, इसे चलाना बंद करो। अगर वीडियो गलत था तो नेहा बोरा को पुलिस में FIR करनी चाहिए थी कि उसके वीडियो में छेड़छाड़ की जांच के जाए।

इसका एक बयान और देखा मैंने जिसमें उसने कहा कि “मैं भारत की धरती से BJP और RSS को ख़त्म करना चाहती हूं”। उधर राहुल गांधी बोला कि “RSS पुरुषों का एक ऐसा समूह है जो संविधान के खिलाफ है और मानता है कि औरतें पुरुषों की संपत्ति हैं, मैं शिव-शक्ति में विश्वास रखता हूं, इसलिए उनसे लड़कर मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है”। 

इन लोगों को RSS से कितनी नफरत है। लगता है इन लोगों को RSS की वजह से नींद भी नहीं आती होगी। नेहा बोरा और राहुल गांधी को पता होना चाहिए RSS दुनिया का 100 वर्ष से निरंतर बिना विभाजित हुए चलने वाला संगठन है। नेहरू और फर्जी गांधी परिवार से जोर लगा दिए उसे ख़त्म करने के लेकिन सफल नहीं हुए। 

राहुल गांधी क्या शिव-शक्ति की बात करता है जब उसके परिवार के सभी नेता बाबर की कब्र पर माथा रगड़ आए। यह ऐसा निकम्मा है जो शिव को मानने का ढोंग करता है मगर भगवान राम को नहीं मानता जबकि सत्य यह है जो राम का नहीं उसे भगवान शिव भी कभी स्वीकार नहीं करते।

उमरा करने गए बांग्लादेशी युगल शीरी अख्तर और नजमुल द्वारा नमाज के बाद 'किस' करने पर "सजा-ए-मौत" का फरमान


उमरा करने मक्का पहुँचे कपल को सिर धड़ से जुदा का फरमान मिला, और अब दोनों की लाश ताबूत मेें बंद होकर लौट आई है।

खबरों की माने, तो बांग्लादेशी युगल शीरी अख्तर और नजमुल उमरा करने सऊदी अरब गए।
मक्का की एक मस्जिद में उन्होंने नमाज अदा किया और भाव विभोर होकर एक दूसरे से गले लग गए और एक दूसरे को "किस" (चूम) लिया। इस वक्त दोनों की आँखों से आँसू बह रहे थे। जाहिर है, दोनों भाव-विभोर होंगे।
कुछ धार्मिक यात्राएँ एक सपना होती हैं। ऐसे में जब एक सपना पूरा हुआ, तो दोनों खुशी से झूम उठे। उन दोनों ने यह किसी अश्लीलता की वजह से नहीं किया था बल्कि भाव विभोर होकर किया था।
इस पल को किसी बेहूदा ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। फिर सऊदी अरब की तालिबानी हुकूमत ने "सजा-ए-मौत" दे दिया।
कहाँ है वो मोहब्बत के ठेकेदार, महिला और मानवाधिकार आयोग के रखवाले... इस घटना को लेकर मुँह सिले बैठे हैं।
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के एक भी मुस्लिम को इस घटना के खिलाफ लिखते या बोलने की फुरसत नहीं। शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर गाड़े बैठे हैं।
बताया जा रहा है कि इस कपल की एक आठ वर्षीय बेटी भी है, जो अब अनाथ हो गई। इन्हें मारने से पहले उस बच्ची के बारे में सोच लेते।
वह लोग जो शरिया कानून की बात कर रहे हैं, वह बताएँगे कि फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो सऊदी अरब में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बिना शादी के रह रहे थे, वह क्या था?
दरअसल, सऊदी अरब में बिना शादी के एक कपल साथ नहीं रह सकता है। यह वहाँ का कानून है।
इसका मतलब विदेशी यदि अरबपति हो, तो शरिया कानून अनदेखा करेगा, लेकिन वह गरीब हुआ, तो सिर तन से जुदा हो जाएगा।
...और कोई कुछ नहीं कहेगा। ना अपने इस्लाम को मानने वाले, ना ही मानवाधिकार आयोग वाले।