मोदी जी फ्री रेवड़ियों पर पाबन्दी कब? विधायक से लेकर सांसदों को मिलने वाली पेंशन और मिलने वाली अन्य सुविधाएं कब बंद होगी? मंत्रियों के साथ चलने वाले कारों के काफिलों पर पाबंदियां क्यों नहीं?


चुनावों के दौरान जिस बात का पूर्वाभास था परिणाम आने के बाद सच हो गया। बस पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ने बाकी हैं। वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई हैरानी का काम नहीं किया। इतिहास साक्षी है कि हमेशा चुनाव होने के बाद ऐसा होता आया है। ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के प्रभाव से जब विश्व अछूता नहीं, ये तो चुनावों की वजह से सरकार चुपचाप हर संकट झेल रही थी उसकी आंच जनता तक नहीं आने दी, यही सरकार की कुशल कार्यशैली को दर्शाता है।     
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनहित में जो जनता से अपील की है बहुत अच्छी बात है। जनता हमेशा मोदी की हर बात मानती रही है और मानती रहेगी। लेकिन अब जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जो अपील की है सिर-माथे। लेकिन ये अपील कई गंभीर सवालों का जवाब भी मांगती है। प्रधानमंत्री मोदी और इनके मंत्रिमंडल को इन सवालों पर भी चिंतन करने की जरुरत है। 
महान कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण ने उपरोक्त कार्टून 60 साल पहले बनाया था, लेकिन वर्तमान संदर्भ में यह कितना सटीक साबित हो रहा है।

1. फ्री की रेवड़ियों पर पाबन्दी क्यों नहीं लगाई जाती?

2. विधायक से लेकर सांसदों की पेंशन क्यों नहीं बंद की जाती? 

3. जब सांसदों को वेतन मिलता है फिर फ्री की बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं क्यों? 

4. ये जनसेवक हैं या शहंशाह? 

5. BPL में फ्री राशन लेने वालों की जाँच क्यों नहीं होती? 

6. आयकर नहीं देने पर भी सांसदों को छूट आदि आदि 

मोदी जी कई ऐसे सरकारी खर्चे हैं, जिनके बारे में बोलना शायद किसी को बर्दाश्त नहीं हो पाएगा, जो सालों से अर्थव्यवस्था पर बोझ नहीं बल्कि अर्थयवस्था को दीमक की तरह खा रहे हैं। जिस दिन इन पर पाबंदियां लग जाएंगी सरकारी खजाने में इतनी धन-वर्षा होगी कि खजाना खाली नहीं हो पाएगा। वह धन देश के विकास, रक्षा संसाधन और महंगाई कम करने के काम आएगा। गैर-बीजेपी शासित राज्यों की फ्री की रेवड़ियों से क्या हालत हो रही है सबके सामने है।  देखिए प्रधानमंत्री मोदी ने क्या अनुरोध किया है:-           
दुनिया में युद्धों को लेकर फैले संकट के बीच भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कुछ खास अपील की हैं। पीएम मोदी ने आम लोगों से जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर देशहित में योगदान देने की बात कही गई है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार (11 मई 2026) को तेलंगाना के दौरे पर थे और वहाँ सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने लोगों से ये अपील की हैं। पीएम मोदी ने लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की और इसके लिए उन्होंने कई रास्ते भी बताए हैं।

उन्होंने कहा, “भारत तेजी से विकसित होने के लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहा है। लेकिन कई विराट चुनौतियों का मुकाबला भी कर रहा है। कोरोना काल के दौरान ही दुनिया सप्लाई चेन के बहुत बड़े संकट से गिर गई थी। कोविड के बाद यूक्रेन में युद्ध शुरू हो गया। उसने दुनिया की परेशानियाँ और बढ़ा दी। फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर इन तीनों चीजों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।”

उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीने से हमारे पड़ोस में युद्ध चल रहा है और इसका भारत पर गंभीर असर हुआ है। उन्होंने कहा, “युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर के दाम आसमान को भी पार कर गए हैं। जब सप्लाई चेन पर संकट लगातार बना रहे तो हम कितने भी उपाय कर ले मुश्किलें बढ़ती ही जाती है।”

पीएम मोदी ने कहा, “अब देश को सर्वोपरि रखते हुए, माँ भारती को सर्वोपरि रखते हुए, हमें एकजुट होकर के लड़ना होगा। हमें याद रखना है देश के लिए मरना ही सिर्फ देशभक्ति नहीं होती है। देश के लिए जीना और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी देशभक्ति होती है।”

पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने पर जोर

 मोदी ने कहा कि हमें कुछ संकल्प लेने होंगे, जैसे एक बड़ा संकल्प है पेट्रोल-डीजल का संयम से इस्तेमाल करना। उन्होंने कहा, “हमें पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहाँ मेट्रो है, वहाँ हम तय करें कि हम मेट्रो का ही उपयोग करेंगे। ज्यादा से ज्यादा मेट्रो में ही जाएँगे। अगर कार में ही जाना जरूरी है तो फिर कार पुल करने का प्रयास करें।”

उन्होंने कहा, “अगर सामान भेजना हो तो रेलवे गुड्स के जो ट्रेन होती है रेलवे की सर्विज से भेजें ताकि इलेक्ट्रिक रेलवे होने के कारण पेट्रोल-डीजल की जरूरत ना पड़ती है। इलेक्ट्रिक व्हीकल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें।”

वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देने की अपील

पीएम मोदी ने लोगों से घर से काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हमने कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था विकसित की और हमें आदत भी हो गई थी। आज उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वह देश हित में होगा। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसेस, वर्चुअल मीटिंग्स, इनको हमें फिर से प्राथमिकता देनी है।”

एक साल तक सोना खरीदने से बचने की सलाह

प्रधानमंत्री ने एक वर्ष तक लोगों से सोना ना खरीदने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि सोना खरीदने में बहुत अधिक विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने कहा, “एक जमाना था जब संकट आता था, कोई युद्ध होता था तो लोग देश हित में सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है लेकिन देश हित में हमको यह तय करना पड़ेगा कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। सोना नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।”

खाने के तेल के इस्तेमाल में कटौती की बात

मोदी ने खाने के तेल के कम इस्तेमाल करने की भी बात कही है। उन्होंने कहा, “खाने के तेल के आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हर परिवार अगर खाने के तेल में खाने का तेल का जो उपयोग करता है अगर वह कुछ कमी करें मैंने बार-बार कहा है 10% कम करो। अगर हम तेल खाना कम करें ना तो भी वह देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है। इससे देश सेवा भी होगी और देह सेवा भी होगी। इससे देश के खजाने का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार के हर सदस्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।”

प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान

किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की गई है। सरकार लंबे समय से जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील

पीएम मोदी ने विदेशी ब्रांड के उत्पादों का कम इस्तेमाल करने और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संदेश दिया है। इससे स्थानीय उद्योगों और छोटे कारोबारियों को मजबूती मिलने की बात कही गई।

एक साल तक विदेश यात्रा टालने का सुझाव

देशवासियों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने की भी अपील की गई है। इसे देशहित और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश : ‘ऐसा ह₹@मी, देशविरोधी प्रधानमंत्री कभी नहीं देखा’: अजेंद्र कोहली, समाजवादी पार्टी सांसद; जनता भी किन सफेदपोश गुंडों को देती वोट


देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस के छोटे से लेकर बड़े नेता तक नफरत से भरे हुए हैं। एक के बाद एक प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जहरीले बयान दे रहे हैं। अब समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी सासंद अजेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अजेंद्र कुमार ने आपत्तिजनक बयान देते हुए प्रधानमंत्री मोदी को हरामी और देशविरोधी बताया है।
हैरानी होती है उस वोटरों पर जो सफेदपोशी गुंडों को वोट देकर वोट की बेइज्जती करते हैं। आखिर वोट देने से पहले वोटर अपनी अक्ल का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? क्या ऐसे नेता जनता और देश का भला कर सकते हैं? प्रधानमंत्री के विरुद्ध ऐसे अपशब्द बोलने वालों को गुंडा नहीं कहा जाए तो क्या कहा जाए? आखिर प्रधानमंत्री पद की कोई मर्यादा होती है नहीं? कहाँ है अखिलेश? क्यों नहीं जिस तरह बंगाल से ममता पार्टी का सफाया किया है उसी तरह उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी को भी चारों खाने चित करने का समय आ गया है। संसद में ऐसे सांसद हुड़दंग मचाकर जनता के पैसे को बर्बाद करते हैं।      

उत्तरप्रदेश के हमीरपुर से सपा सांसद अजेंद्र लोधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली बकने का वीडियो वायरल है। वीडियो में मीडियाकर्मी उनसे जब पूछते हैं कि पीएम मोदी ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है और पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने को कहा है तब अजेंद्र लोधी ने जवाब में प्रधानमंत्री को ह₹@मी बोला और देशविरोधी कहते हैं।

वीडियो वायरल में सपा सांसद ने पहले तंज मारते हुए कहा- “मोदी जी जो बोलते हैं बड़ा अच्छा बोलते हैं, सोना न खरीदें- पेट्रोल की खपत कम करें लेकिन विदेश की यात्रा करोड़ों में करें। कितना न्याय है, कितनी लोकप्रिय नेता हैं।” इसके बाद वो गाली देते हुए कहते हैं- इतना हर@मी और देशविरोधी प्रधानमंत्री आजतक किसी ने नहीं देखा और न आने वाली सरकारों में ऐसा कोई पीएम मिलेगा। 

ये बयानबाजी अजेंद्र लोधी ने उस समय की जब वो और अन्य पार्टी नेता राज्यपाल को 11 सूत्रीय माँगो का ज्ञापन सौंपने गए थे। वहीं पर मीडिया ने सवाल किया तो ये जवाब मिला। अब बयान वायरल है। सीएम योगी ने भी इसपर नाराजगी जताई है।

योगी ने अपने पोस्ट में कहा, “विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय जननेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति एक सांसद द्वारा की गई असंसदीय टिप्पणी न केवल अशोभनीय और अक्षम्य है, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी गंभीर आघात है। यह कृत्य राजनीतिक कुसंस्कार, वैचारिक दिवालियापन और सार्वजनिक जीवन की शालीनता के प्रति अनादर को प्रकट करता है। यह 145 करोड़ देशवासियों के जनादेश, विश्वास और भारत की लोकतांत्रिक गरिमा का भी अपमान है। देश की जनता ऐसे अमर्यादित आचरण का उत्तर समय आने पर अवश्य देगी।” 

बंगाल : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बॉर्डर पर दफन करने की धमकी, बांग्लादेश का मौलाना बोला- मुस्लिम हुए असुरक्षित तो हिंदुओं को नहीं छोड़ेंगे; बंगाल ही नहीं पूरे भारत से बांग्लादेशियों का सफाया होना चाहिए

                        बांग्लादेश के मौलाना ने हिंदुओं और शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी (फोटो साभार: NBT)
जब से पश्चिमी बंगाल में बीजेपी सरकार बनी है, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश से बांग्लादेशियों को बाहर करने की बात कही है मुस्लिम कट्टरपंथियों की जुबान बहुत ज्यादा खुलने लगी है। क्या इन कट्टरपंथियों को भी सबक सिखाने का अध्याय बंगाल से ही लिखा जाएगा? जिस तरह चुनाव में हिन्दुओं ने एकजुटता दिखाई है वही इन कट्टरपंथियों और इनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए दिखानी होगी। बहुत हो गया हिन्दू मुसलमान। ये वही कट्टरपंथी हैं जिन्होंने हिन्दू -मुसलमानों के बीच नफरत के बीज बोये हैं। दूसरे, बांग्लादेशियों को बाहर करने के बंगाल सरकार के फैसले से कट्टरपंथियों की बौखलाहट जाहिर कर रही है कि बंगाल में कितने ज्यादा बांग्लादेशियों को पिछली सरकारों ने दामाद बनाकर रखा हुआ था। 

हुमायूँ कबीर साथ-साथ बांग्लादेशी मौलाना भी बंगाल मुख्यमंत्री को धमकी देने मैदान में आ गए हैं यानि ये इस बात को साबित करता है कि यदि बंगाल से ही बांग्लादेशियों को वापस भेजना शुरू होते ही बांग्लादेश पाकिस्तान की तरह भुखमरी के रस्ते पर आ जाएगा। बंगाल से बाहर भी जितने बांग्लादेशी घुसे हुए है सभी को बाहर करना होगा। भारत सरकार को इन धमकियों को गंभीरता से लेते हुए बांग्लादेश सरकार से सख्ती के साथ जवाब तलब करना होगा। और बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक मदद बंद करनी होगी। जिस तरह पाकिस्तान को सबक सिखाया जा रहा है वही बांग्लादेश के साथ होना चाहिए। 

जब पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा हिन्दू महिलाओं का उजाड़ने पर Operation Sindoor हो सकता है फिर बांग्लादेश में सैकड़ों हिन्दुओं के मारे जाने पर भारत सरकार खामोश क्यों? बांग्लादेश को कब सबक सिखाया जाएगा?   

 

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद से पड़ोसी देश बांग्लादेश में खलबली मची हुई है। आए दिन बांग्लादेशी मौलाना भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। ताजा बयान बांग्लादेश के कट्टरपंथी मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी का है, जिसने कहा कि बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। उधर, शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी देने का भी एक वीडियो सामने आया है।

मौलाना अब्बासी कहता है, “भारत में हिंदुओं के लिए यहूदी मॉडल की तरह एक हिंदू-केंद्रित व्यवस्था बनाना नामुमकिन हो जाएगा। बीजेपी, जिसने अब बंगाल में सत्ता संभाल ली है, पहले से ही इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। गोमांस बेचने वाली दुकानों को तोड़ा जा रहा है और मुस्लिमों पर जुल्म और अत्याचार किए जा रहे हैं। इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए।”

अब्बासी ने बंगाल में मुस्लिमों पर कथित शोषण का बदला बांग्लादेश में हिंदुओं से लेने की बात कही। उसने कहा, “इस स्थिति में बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का भी एक बहुत ही अहम फर्ज है। भारत को एक सख्त चेतावनी दी जानी चाहिए कि हम उनके साथ अपने व्यापारिक संबंध तोड़ देंगे। इसके अलावा, यह भी साफ कर दिया जाना चाहिए कि अगर बंगाल में मुस्लिम सुरक्षित नहीं है, तो बांग्लादेश में भी हिंदुओं को सुरक्षित रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

ये वही मौलाना अब्बासी है, जो भारत विरोधी, भड़काऊ भाषणों और नफरती बयानों के लिए जाना जाता है। अब्बासी ने पहले भी भारत-विरोधी बयान दिया था कि बांग्लादेश के मुस्लिम दिल्ली में इस्लाम का झंडा फहराएँगे और मदरसों को हथियारों से लैस छावनी में बदल देंगे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी कर चुका है।

अवलोकन करें:-

बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी
बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी
 

शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी

ऐसी ही एक और भारत-विरोधी बयान सामने आया है, जिसमें बांग्लादेशी मुस्लिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को जान से मारने की धमकी देता है। द इंकलाब नाम से फेसबुक पेज से प्रसारित वीडियो में बांग्लादेशी का एक मुस्लिम व्यक्ति शुभेंदु अधिकारी को सीमा पर ही दफनाने और उन पर हमला करने की धमकी दे रहा है। हालाँकि, इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है, पुलिस इसकी जाँच कर रही है।

बंगाल में बाबरी की नींव रखने वाले हुमायूँ कबीर ने CM शुभेंदु अधिकारी को दी धमकी, MLA ने बांग्लादेशी चैनल पर कहा- ‘मुस्लिमों को हाथ लगाया तो पीटूँगा’

                                                                                                         साभार - एक्स/@ItzBDHindus
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूँ कबीर ने राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पीटने की धमकी दी है। बांग्लादेशी चैनल ‘फेस द पीपल’ पर दिए इंटरव्यू में कबीर ने कहा, “अगर शुभेंदु किसी मुस्लिम को हाथ लगाएँगे, तो हम भी शुभेंदु को पीटेंगे।”

बयान सामने आने के बाद वीडियो के कमेंट सेक्शन में बांग्लादेश के कई अकाउंट्स से इंशाअल्लाह जैसे कमेंट भी किए गए। गौरतलब है कि शनिवार (9 मई 2026) को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शुभेंदु के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और खुदीराम टुडु ने भी मंत्री पद की शपथ ली। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही ममता बनर्जी सरकार के बाद यह पहला मौका है जब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी है।

जय सोमनाथ

सुभाष चन्द्र

अरब सागर पर स्थित “सोमनाथ मंदिर” प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है।  

यह “प्रथम आदि ज्योतिर्लिंग” श्री सोमनाथ महादेव हैं इसका उल्लेख स्कंद पुराण, श्रीमद् भागवत और विष्णु पुराण में है और ऋग्वेद की स्तुति में है आज के दिन 1951 में सरदार पटेल के हाथों जीर्णोद्धार के बाद राष्ट्र को समर्पित हुआ था

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मंदिर के पुनरुद्धार में रोड़े अटकाने के भरसक प्रयास किए और गिरावट की सभी सीमाएं लांघ दी नेहरू को सरदार पटेल के इस मंदिर निर्माण के कार्य से सख्त नफरत थी नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी उद्घाटन में जाने से मना किया लेकिन वे गए नेहरू ने अपनी कैबिनेट के मंत्रियों को भी उद्घाटन से दूर रहने को कहा और के एम मुंशी के अलावा कोई नहीं गया नेहरू की मानसिकता सनातन संस्कृति को मिटाने की थी, तो उन्हें मंदिर निर्माण कैसे भाता नेहरू के पदचिन्हों पर  चल कर आज के कांग्रेसी नेता (राहुल गांधी समेत) मंदिरों से सख्त नफरत करते हैं

इस मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि इसका 

पहला मंदिर निर्माण भगवान सोम ने सोने से किया;

मंदिर का दूसरा निर्माण भगवान सूर्य ने चांदी से किया;

तीसरा निर्माण भगवान कृष्ण ने लकड़ी से किया;

चौथा निर्माण राजा भीमदेव ने पत्थर से कराया;

मंदिर की विशेषताओं में देखें तो -

मंदिर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप;

मंदिर में 155 फ़ीट ऊंचा शिखर;

मंदिर के शिखर पर कलश का वजन 10 टन;

शिखर पर 27 फ़ीट ऊंचा और 1 फ़ीट चौड़ा ध्वज

वैसे तो आताताई मुगलों को मंदिरों से नफरत रही हैं लेकिन सोमनाथ मंदिर पर तो उन्होंने 17 आक्रमण किए उन आक्रमणों में प्रमुख और उनके चलते मंदिर निर्माण कैसे होता रहा, उनके बारे में कुछ जानकारी नीचे दे रहा हूं

(649 ई. में पहली बार मैत्रक के राजाओं ने बनवाया;)

75 साल बाद गवर्नर जुनैद ने हमला किया;

1025 - 26 में महमूद गजनवी ने मंदिर को लूटा;

गजनवी ने लूट के दौरान 50 हजार लोगों को क़त्ल किया;

(1026 - 42 के बीच भीमदेव सोलंकी ने मंदिर फिर खड़ा किया)

1299 में अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया;

(1169 में राजा कुमारपाल ने मंदिर के पत्थर लगवाए)

(1308 में चूड़ासमा राजा महिपाल प्रथम फिर निर्माण किया)

1395 में दिल्लीं सल्तनत के गवर्नर जफ़र ने तोड़फोड़ की;

1451 में गुजरात के शासक महमूद ने मंदिर को तहस नहस किया

1665 में औरंगज़ेब ने मंदिर गिराने का फरमान जारी किया;

1706 में औरंगज़ेब ने फिर हमला किया ताकि पूजा न हो सके 

(1763 में अहिल्याबाई ने नए मंदिर का निर्माण किया; नाम पुराना सोमनाथ)

आज सोमनाथ मंदिर निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाए गए “अमृत महोत्सव” का उद्घाटन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और आह्वान किया कि हमें सोमनाथ मंदिर जैसी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासतों को सम्भाल कर रखना है जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में उपयोगी हैं

आपने कभी कांग्रेस या विपक्ष के किसी नेता को सोमनाथ के दर्शन के लिए जाते नहीं देखा होगा - बस एक बार 2017 में राहुल गांधी गया था लेकिन Visitors Book में अपना धर्म लिखने में कुछ गड़बड़ हो गई और तब प्रचारित किया गया कि ये तो “दत्तात्रेय गोत्र” के ब्राह्मण है 

भगवान सोमनाथ को समर्पित है आज का दिन, इसलिए किसी के लिए अपशब्द नहीं कहूंगा लेकिन एक मूर्ख अराजकतावादी नेता ने दो दिन पहले कहा है कि मोदी औरंगज़ेब है, वो इसलिए कहा क्योंकि उसकी पार्टी की सरकार का एक मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा गया अब इस बेवकूफ को इतना भी नहीं पता कि औरंगज़ेब ने सोमनाथ मंदिर 2 बार तोड़ा था जबकि मोदी ने उसका पुनरुद्धार किया और आज भव्य समारोह में भी गए उस नेता का नाम आप समझ ही गए होंगे

जय सोमनाथ 

हर हर महादेव 

जय श्री महाकाल 

जय श्रीराम 

उत्तर प्रदेश : छात्राओं को पहनाया हिजाब, छात्रों को इस्लामी टोपी: संभल के सरकारी स्कूल में मजहबी तालीम दे रहे थे मुस्लिम शिक्षक, प्रिंसिपल समेत 3 सस्पेंड

                                         संभल स्कूल में बच्चों को दी जा रही थी मजहबी सीख
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र स्थित जालब सराय सरकारी स्कूल में मजहबी गतिविधियों को बढ़ावा देने का मामले सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के 2 मुस्लिम शिक्षक हिंदू छात्र-छात्राओं को इस्लामी तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

टीचरों के नाम अंजर अहमद और मोहम्मद गुल एजाज है। ये दोनों हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनने और छात्रों को इस्लामी टोपी पहनाकर सजदा करने के लिए कहते थे। साथ ही स्कूल परिसर में अन्य धर्मों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ भी करते थे।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब स्कूल से जुड़ी कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया।

इसके अलावा प्रभारी प्रधानाचार्य बालेश कुमार पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों से छिपाई और लापरवाही बरती।

डीएम ने मामले की गहन जाँच के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। यह समिति पूरे प्रकरण की जाँच कर यह पता लगाएगी कि इस गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

जिलाधिकारी ने साफ कहा है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का मजहबी या वैचारिक दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश : महाघोटाला : एक ही दिन 50 IAS-IPS ने खरीदी कृषि भूमि, 16 महीने बाद पास हो गया 3200 करोड़ रूपए का वेस्टर्न बायपास: लैंड यूज बदलते ही 11 गुना बढ़ी कीमत

                                                                                           प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)
मध्य प्रदेश में आईएएस अफसरों की अचल संपत्ति की जाँच में एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें देश के 50 अफसरों ने कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गाँव में एक ही दिन कृषि जमीन खरीद ली। यहाँ सिर्फ 16 महीनों में ही 3200 करोड़ रुपए का वेस्टर्न बायपास मंजूर हुआ और फिर 10 महीने में लैंड यूज बदलकर आवासीय कर दिया गया। इससे जमीन की कीमत 11 गुना बढ़ गई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अप्रैल 2022 को 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में हुई। 50 लोगों ने संयुक्त रूप से यह जमीन खरीदी। रजिस्ट्री में कीमत 5.5 करोड़ रुपए दर्ज की गई जबकि बाजार मूल्य 7.78 करोड़ रुपए बताया गया। आईपीआर में इसे ‘like-minded officers’ यानी एक जैसी सोच वाले अधिकारियों द्वारा खरीदी गई संपत्ति बताया गया। दस्तावेज बताते हैं कि 50 हिस्सों के पीछे असल खरीदार सिर्फ 41 हैं।

इस निवेश में सिर्फ मध्य प्रदेश कैडर के अफसर ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में तैनात कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। अफसरों ने मिलकर कृषि जमीन को खरीदा और बाद में सरकारी फैसलों का फायदा उठाया।

31 अगस्त 2023 को जमीन खरीद के 16 महीने बाद कैबिनेट ने वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दे दी। मौजूदा अलाइनमेंट के अनुसार बायपास खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर दूर है।

जून 2024 में बायपास मंजूरी के 10 महीने बाद ही जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय में बदल दिया गया। जब जमीन खरीदी गई थी तब वह पूरी तरह कृषि भूमि थी।

2022 में करीब 5 एकड़ यानी 2,17,800 वर्गफीट जमीन की दर लगभग 81.75 रुपए प्रति वर्गफीट थी। जून 2024 में लैंड यूज चेंज के बाद दर 557 रुपए प्रति वर्गफीट हो गई। वर्तमान बाजार दर 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट है। इससे जमीन का कुल मूल्य 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुँच गया है। हालाँकि अभी तक आवासीय प्रोजेक्ट के लिए कोई सोसायटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है। आवासीय प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन को सोसायटी के नाम ट्रांसफर करना होगा या प्लॉट आवंटित करने होंगे।

यह घटनाक्रम अफसरों पर सीधा निशाना साध रहा है और सवाल खड़ा कर रहा है कि उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी पहले से कैसे मिल गई। और फिर सवाल ये भी है कि क्या उन्होंने पद का दुरुपयोग कर अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाया? दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अब अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

सीरिया में ISIS से जुड़ने गई थीं 3 जिहादने, ऑस्ट्रेलिया लौटते ही पुलिस ने लिया गिरफ्तार: 8.5 लाख रूपए में औरतें खरीदकर गुलाम बनाने का आरोप, 25 साल सड़ेंगी जेल में

                                                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: दैनिक जागरण)
सीरिया से लौटते ही ऑस्ट्रेलिया में तीन महिलाओं को आतंकवाद और गुलामी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। मेलबर्न एयरपोर्ट पर 53 वर्षीय महिला और उसकी 31 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया। दोनों पर आरोप है कि वे 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने के लिए सीरिया गई थीं।

शुरू में तो पैसे के लालच में लड़कियां ISIS में शामिल होने अपना मुल्क छोड़ देती है, लेकिन दुर्गति होने पर ISIS के चुंगल से भाग जाती है। 2019 में भी एक हसीना ब्रिटेन से भाग ISIS में शामिल हो गयी और ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई।      

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला ने करीब 10 हजार अमेरिकी डॉलर (साढ़े 8 लाख से 9 लाख तक) देकर एक महिला को गुलाम के तौर पर खरीदा था, जबकि उसकी बेटी ने उसे अपने घर में गुलाम बनाकर रखा। दोनों पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 25 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, ISIS के पतन के बाद 2019 में कुर्द बलों ने इन महिलाओं को पकड़ लिया था। तब से वे सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रही थीं। गुरुवार (7 मई 2026) की रात कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं 32 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और ISIS में शामिल होने का आरोप है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह 2015 में अपने शौहर के पास सीरिया गई थी, जो पहले से ISIS का लड़ाका था।

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ के नवजात बच्चे की मौत, सीरिया से आना चाहती है वापस

2019 में ब्रिटेन ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है। यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस  में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।

दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।

इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।

नेपाल में लैंड करते टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में लगी आग: बाल-बाल बचे 289 लोग, Video

                                                                                                               प्रतीकात्मक चित्र (साभार: AI)
नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार (11 मई 2026) को एक बड़ा हादसा टल गया। इस्तांबुल (तुर्की) से काठमांडू आ रही टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट TK-726 के टायर में लैंडिंग के दौरान अचानक आग लग गई। घटना के समय विमान में कुल 289 लोग सवार थे जिनमें 278 यात्री और 11 चालक दल के सदस्य शामिल थे। यात्रियों में संयुक्त राष्ट्र (UN) के कुछ अधिकारी भी मौजूद थे।

आग लगते ही एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई लेकिन दमकल कर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पा लिया। इसके बाद विमान में मौजूद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है।

एयरपोर्ट सुरक्षा के एसपी राजकुमार सिलावल ने बताया कि विमान इस्तांबुल से काठमांडू पहुँचा था और लैंडिंग के दौरान उसके टायर में आग लग गई। फायर इंजन की मदद से स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया। फिलहाल अधिकारी घटना के कारणों की जाँच कर रहे हैं।

बांग्लादेशी तुम्हारे हैं, वो तो लेने पड़ेंगे; हिंदुस्तान में घुसने के लिए किसने कहा था; कट्टरपंथी समाजवाद की नसीहत अपने पास रखें

सुभाष चन्द्र

दूसरों को नसीहत देना बहुत आसान है, आज पलटवार होने के डर से नसीहत देते शर्म नहीं आ रही। कल जब बांग्लादेश में तुम जालिम इंसानियत का नंगा नाच खेल रहे थे हिन्दुओं के दुश्मनों तब ख्याल नहीं आया कि कल पलटवार होने पर हमारे मुसलमानों का क्या हश्र होगा। अंजाम भुगतने को तैयार रहो। शराफत से भारत में घुसे सारे बांग्लादेशियों को वापस बुला लो भलाई इसी में है।   

बांग्लादेश की पार्टी जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉक्टर शफीकुर्रहमान ने शनिवार(मई 9) को कहा कि वे भारत सरकार से अपील करेंगे कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के साथ धर्म, जाति या नस्ल के आधार पर भेदभाव या हिंसा न हो।  

उन्होंने आगे कहा कि “किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को निशाना बनाकर नुकसान पहुंचाना गलत है और इसे रोका जाना चाहिए रहमान ने कहा कि दुनिया में कहीं भी निर्दोष लोगों पर अत्याचार होगा तो वे उनके खिलाफ आवाज उठाएंगे उन्होंने खास तौर पर पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा पीड़ित लोगों के साथ खड़े रहेंगे”

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आज जमात-ए - इस्लामी नेता को धर्म, जाति और नस्ल के आधार पर निशाना बनाना याद आ रहा है जबकि यही संगठन भारत का धुर विरोधी है और जब यूनुस के समय में हिंदुओं पर बांग्लादेश में बर्बरता हो रही थी, उनके घर जलाए जा रहे थे, मासूम महिलाओं के रेप हो रहे थे, हिंदुओं को क़त्ल किया जा रहा था, नंगा कर पेड़ों पर लटका कर फांसी दी जा रही थी, तब जमात नेता को ये बातें याद नहीं आ रही थी और बांग्लादेश में जमात-ए -इस्लामी समेत कोई संगठन हिंदुओं की मदद के लिए आगे नहीं आया तब किसी पीड़ित के साथ क्यों नहीं खड़े हुआ डॉ रहमान जो आज दर्द छलक रहा है क्या हिंदुओं को आप “पीड़ित” नहीं मानते उन्हें तो आपने 1947 के बाद से बांग्लादेश में कितना ख़त्म किया है, यह आप अच्छी तरह जानते हैं

बांग्लादेश से करोड़ों लोग भारत में घुसपैठ किए और भारत की डेमोग्राफी बदल कर रख दी लेकिन अब उन्हीं अपने लोगों को बांग्लादेशी नेता और वर्तमान सरकार वापस नहीं लेना चाहती

 अब उन्हें धर्म और जाति के नाम पर शोषण दिखाई दे रहा है बांग्लादेश की सरकार ने तो यह भी कहा है कि दोनों देशों के संबंध मधुर रखने के लिए भारत संयम से काम ले मतलब हमारे लोगों को भारत में ही रहने दे कल यूनुस के समय में बांग्लादेश पाकिस्तान की गोद में बैठ कर अपने सैनिकों को भारत से लड़ने के लिए पाकिस्तान की आर्मी से ट्रेनिंग दिला रहा था

ऐसा कहते हैं कि NSA अजित डोभाल बांग्लादेश जा कर वहां की सरकार को साफ़ शब्दों में कह आए हैं कि घुसपैठियों को वापस लेने के लिए अपने बॉर्डर खोल कर रखिए

इस बीच कुछ वीडियो सोशल मीडिया में आ रहे हैं जिसमें दिखाया जा रहा है कि हजारों की संख्या में बंगाल से बांग्लादेशी बोरिया बिस्तर उठाए बांग्लादेश जा रहे हैं

इसके साथ यह भी सूचना आ रही है कि बंगाल की नई शुभेंदु सरकार ने BSF को 600 एकड़ भूमि देने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं जिससे बची हुई बांग्लादेश से लगते बॉर्डर पर fancing का काम पूरा हो सके और घुसपैठ पर अंकुश लगाया जा सके यह भूमि ममता बनर्जी ने देने से मना कर दिया था और वही इलाका है जहां से अभी तक घुसपैठ हो रही है

बांग्लादेश को अपने नागरिक वापस तो लेने पड़ेंगे प्यार से लेगा तो ठीक है वरना जबरन भेजे जाएंगे

अचूक ‘ब्रह्मास्त्र’ : भारत ने MIRV तकनीक वाली एडवांस ‘अग्नि’ का किया परीक्षण; एक मिसाइल और दुश्मन के कई ठिकाने तबाह

                   भारत की आत्मनिर्भर एडवांस अग्नि मिसाइल MIRV (साभार : X_@DefenseNewsIN)
सोचिए, आसमान से एक बिजली कड़कती है और वह जमीन पर गिरने से पहले कई हिस्सों में बँटकर दुश्मन के अलग-अलग ठिकानों को एक साथ राख कर देती है। सुनने में यह किसी पौराणिक कथा के अस्त्र जैसा लगता है, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने इसे हकीकत बना दिया है।

 8 मई 2026 की शाम, जब ओडिशा के तट पर सूरज ढल रहा था, तभी डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एक ऐसी मिसाइल निकली जिसने न सिर्फ आसमान को जगमगा दिया, बल्कि भारत के दुश्मनों की नींद भी उड़ा दी। यह कोई साधारण मिसाइल नहीं थी, यह ‘अग्नि’ परिवार की वह एडवांस मिसाइल थी जो अब एक साथ कई शिकार करने में सक्षम है।

क्या है यह नई शक्ति और कैसे करती है काम?

साधारण मिसाइलें एक बार में एक ही लक्ष्य (Target) पर वार करती हैं। लेकिन इस नई एडवांस अग्नि मिसाइल की खासियत इसकी MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ‘बस’ की तरह है।

जैसे एक बस में कई यात्री बैठते हैं और बस अपनी यात्रा के दौरान अलग-अलग स्टॉप पर यात्रियों को उतारती जाती है, वैसे ही यह मिसाइल अपने साथ कई परमाणु हथियार (वॉरहेड्स) लेकर उड़ती है। अंतरिक्ष में पहुँचने के बाद यह मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में अपने इन हथियारों को छोड़ देती है। नतीजा यह होता है कि एक ही मिसाइल से दुश्मन के पाँच-छह अलग-अलग शहर या सैन्य ठिकाने एक साथ तबाह किए जा सकते हैं।

DRDO का ‘मेक इन इंडिया’ चमत्कार

इस महाशक्तिशाली मिसाइल को हमारे वैज्ञानिकों की संस्था DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने तैयार किया है। सबसे गर्व की बात यह है कि इसे बनाने में देश की प्राइवेट इंडस्ट्रीज ने भी पूरा सहयोग दिया है।

परीक्षण के दौरान मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी से उड़ान भरी और हिंद महासागर में हजारों किलोमीटर दूर रखे गए अलग-अलग लक्ष्यों को बिल्कुल सटीक तरीके से भेदा। जमीन पर लगे रडार और समुद्र में तैनात युद्धपोतों ने इसकी हर हरकत पर नजर रखी और पाया कि मिसाइल ने हर कसौटी पर खुद को सौ फीसदी सही साबित किया है।

दुश्मन के लिए इसे रोकना क्यों है नामुमकिन?

आजकल दुनिया के कई देशों के पास ऐसी तकनीक है जो आने वाली मिसाइल को हवा में ही मार गिराती है। लेकिन भारत की इस MIRV तकनीक ने उस सुरक्षा घेरे को बेकार कर दिया है। जब एक मिसाइल से दस अलग-अलग हथियार अलग-अलग गति और दिशा में निकलेंगे, तो दुश्मन का डिफेंस सिस्टम भ्रमित (Confuse) हो जाएगा।

वह एक को रोकेगा तब तक बाकी नौ अपना काम कर चुके होंगे। यही कारण है कि इस परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में हलचल मच गई है, क्योंकि अब भारत की पहुँच और मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने थपथपाई वैज्ञानिकों की पीठ

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद सोशल मीडिया और आधिकारिक बयान के जरिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों को एक अविश्वसनीय मजबूती देता है। बदलती सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते खतरों के बीच, हमारे वैज्ञानिकों, भारतीय सेना और इंडस्ट्री ने मिलकर देश का सिर फख्र से ऊँचा कर दिया है।”

ओडिशा से बांग्लादेश तक दिखा अद्भुत नजारा

जब यह मिसाइल शाम के वक्त छोड़ी गई, तो आसमान में एक नारंगी और सफेद रंग की लंबी पूंछ जैसा नजारा दिखा। यह इतना चमकदार था कि इसे सिर्फ ओडिशा में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश के कॉक्स बाजार तक देखा गया। लोगों को लगा कि कोई पुच्छल तारा या उड़नतश्तरी (UFO) जा रही है, लेकिन असल में वह भारत की सुरक्षा की नई गारंटी ‘अग्नि’ थी।

दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में भारत

इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों (जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास एक मिसाइल से कई निशाने साधने की तकनीक है। यह मिसाइल शांति का प्रतीक है क्योंकि यह बताती है कि भारत की तरफ आँख उठाने वाले का अंजाम क्या होगा। यह वैज्ञानिकों की तपस्या और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की जीत है।

पाकिस्तान में भीषण धमाका, कार में ब्लास्ट से ढही पुलिस चौकी: विद्रोहियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग भी की; 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका

                                                                                                                            साभार News18  
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में शनिवार (9 मई 2026) की देर रात एक बड़ा हमला हुआ। विद्रोहियों ने पहले पुलिस चौकी के पास एक कार को बम धमाके से उड़ा दिया और इसके बाद भीषण गोलीबारी की है। इसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर हिला कर रख दिया
 इस हमले में पहले एक कार बम धमाका किया गया और उसके तुरंत बाद पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हमला किया गया 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका है रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में हुआ, जो अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित है यहां एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया गया पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को चौकी के पास उड़ा दिया

15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका

धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी पुलिस पोस्ट ढह गई इस हमले में कम से कम तीन पुलिस अधिकारियों की मौत की पुष्टि हुई है लेकिन नुकसान इससे कहीं ज्यादा बताया जा रहा है पुलिस अधिकारी सज्जाद खान के मुताबिक, चौकी पर उस समय करीब 15 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे, जिनमें से ज्यादातर के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है हालांकि अंतिम आंकड़े ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही सामने आएंगे

यह इलाका अफगानिस्तान सीमा से सटा हुआ है और लंबे समय से आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय हमला हुआ, उस वक्त चौकी में 15 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद थे और कई अन्य के घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस अधिकारी जाहिद खान ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को सुरक्षा चौकी के पास उड़ा दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि चौकी पूरी तरह ढह गई। इसके तुरंत बाद विद्रोहियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और मौके पर पहुँच रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया।

स्थानीय मीडिया डॉन के अनुसार, धमाके से आसपास के रिहायशी इलाकों को भी भारी नुकसान पहुँचा है और दो आम नागरिक घायल हुए। घटना के बाद बन्नू के सरकारी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले को कैसे दिया गया अंजाम?

हमले का तरीका बेहद खतरनाक था पहले कार को मेन गेट से टक्कर मार करे धमाका किया गया. ब्लास्ट के बाद आसपास से पुलिसकर्मी मदद के लिए मौके पर पहुंचे और हमलावरों ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया इस दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य पुलिस अधिकारी जाहिद खान ने बताया कि इस हमले में एक आत्मघाती हमलावर भी शामिल था, जिसने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को चौकी के पास उड़ा दिया इसके बाद कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया, जिससे यह हमला और ज्यादा खतरनाक हो गया. यह दिखाता है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे 

दक्षिण विजय के लिए भाजपा को क्या करना होगा ?

डॉ राकेश कुमारआर्य
गंगोत्री से गंगासागर तक अपना विशाल साम्राज्य खड़ा करने वाली भाजपा के लिए दक्षिण अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का मनोविज्ञान मजबूत करने वाली भाजपा के लिए यह आवश्यक है कि वह दक्षिण को भी भगवा ध्वज के नीचे लाए। अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों ( असम, पांडिचेरी, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु ) के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जहां असम और पश्चिम बंगाल में धुआंधार मचाई है और पांडिचेरी में भी सरकार बनाने में सफल हुई है, वहीं केरल और तमिलनाडु में उसकी पराजय सचमुच चुभने वाली है। इन दोनों ही प्रदेशों ने भाजपा के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोक दिया है। निश्चित रूप से भाजपा को अंतरमंथन करना ही होगा। यह इसलिए भी आवश्यक है कि भाजपा संपूर्ण देश को एक इकाई के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त करती है। साथ ही वह सारे संसार को यह दिखाना चाहती है कि हमारे यहां का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भाषा ,प्रांत ,क्षेत्र, जाति, संप्रदाय आदि की सारी संभावनाओं और विसंगतियों को पीछे छोड़कर 'एक' होने की क्षमता रखता है।
लेखक 
दक्षिण भारत के 6 राज्यों अर्थात कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भाजपा को विशेष ध्यान देना है। इन आधा दर्जन राज्यों में कांग्रेस के द्वारा भाषा के नाम पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता रहा है। उन्हें यह बताया जाता रहा है कि भाजपा हिंदी- हिंदू- हिंदुस्तान की बात करती है। यदि यह सत्ता में बनी रहेगी और स्थानीय लोग अपनी भाषाई पहचान को छोड़कर भाजपा के ' हिंदी -- हिंदुस्तान ' के साथ जाने का मन बनाएंगे तो एक दिन ऐसा आएगा जब भाजपा इन प्रांतों की स्थानीय भाषाओं को मिटा देगी। इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं -एक तो यह कि भारत में भाषाई पूर्वाग्रह है। इसके लिए हम चाहे कितना ही यह दिखाने और कहने का प्रयास करें कि हम भाषा के नाम पर बंटे हुए नहीं हैं ,परन्तु सच यह है कि भाषा हमें दूसरे प्रान्तों के लोगों से अलग करती है। दूसरी बात यह है कि भारत में भाषाओं के नाम पर यदि प्रान्तों का विभाजन किया गया है तो भाषा राजनीति में एक वैधानिक आधार प्राप्त कर चुकी है अर्थात भाषा के नाम पर प्रान्तों का विभाजन करना भाषाई विवाद को वैधानिकता प्रदान करता है।
भाजपा को अपनी रणनीति में इस बात को सम्मिलित करना पड़ेगा कि वह संस्कृतनिष्ठ हिंदी की समर्थक है और दक्षिणी की सभी भाषाओं के संस्कृतनिष्ठ शब्दों को हिंदी शब्दों के रूप में स्वीकृति देने को तैयार है। इसी मत के प्रतिपादक सावरकर जी थे। भाजपा को दक्षिण के लोगों को यह भली प्रकार समझाना होगा कि कांग्रेस उर्दूनिष्ठ खिचड़ी भाषाओं की समर्थक रही है। कांग्रेस की इसी नीति का विरोध दक्षिण भारत करता है। लोगों को मान्यता है कि भाजपा की हिंदी का अभिप्राय कांग्रेस की इसी उर्दूनिष्ठ हिंदी से है अर्थात दक्षिण भारत उस उर्दूनिष्ठ खिचड़ी हिन्दी का विरोधी है, जो उसकी अपनी भाषाओं से कहीं भी मेल नहीं खाती है। भाजपा को ध्यान रखना चाहिए कि उसके अंग्रेजी या उर्दू के नारे दक्षिण भारत के लोगों को रास नहीं आते हैं।
भाजपा ने भाषा के नाम पर तुष्टिकरण का खेल खेलते हुए दक्षिण को उन्हीं की अपनी भाषा में संबोधित करने का क्रम चलाया है अर्थात पार्टी हंस की चाल चली तो अपनी चाल भूल गई। भाजपा को सावरकर जी के भाषा संबंधी चिंतन को क्रियान्वित करने के लिए ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कि दक्षिण की सभी भाषाओं के संस्कृतनिष्ठ शब्दों को हिंदी के संस्कृतनिष्ठ स्वरूप के साथ समन्वित किया जा सके। कांग्रेस ने भाषा को अभिव्यक्ति का माध्यम मान लिया है। जबकि भाषा राष्ट्रीय एकता की सजग प्रहरी होती है। इसी स्वरूप में भाजपा को अपना भाषा संबंधी चिंतन स्पष्ट करना चाहिए।
हमें ध्यान रखना चाहिए कि दक्षिण भारत के इन 6 राज्यों में लोकसभा की 130 सीटें आती हैं। जिनमें से भाजपा के पास ढाई दर्जन भी नहीं हैं। इससे पता चलता है कि भाजपा को दक्षिण में पैर जमाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा।
कर्नाटक में भाजपा के लिए बहुत अनुकूल अवसर हैं। वहां पर उसकी सरकार भी रही है। भविष्य में वहां पर भाजपा की सरकार आने की प्रबल संभावनाएं हैं। कर्नाटक को आधार बनाकर दूसरे प्रान्तों को जीतने की एक सफल योजना बनाई जा सकती है। कर्नाटक को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। जिसमें विशेष रूप से भाषा के प्रति उदार दृष्टिकोण रखा जाए। कर्नाटक के लोगों को यह विश्वास दिलाया जाए कि भाजपा ' सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय' में विश्वास रखती है और वह भाषा को राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम मानती है। तमिलनाडु में जिस प्रकार से वहां के स्थानीय दल सत्ता में आते रहे हैं, उससे पता चलता है कि यहां के लोग क्षेत्रीय पार्टियों को प्राथमिकता देते हैं। अब उन्होंने तमिलनाडु में टीवीके को एक विकल्प के रूप में स्वीकार कर लिया है। भारतीय जनता पार्टी को इन तीनों के विकल्प के रूप में अपने आप को स्थापित करना है। इसके लिए भाजपा को चाहिए कि वह जिस प्रकार बंगाल को लगभग डेढ़ लाख छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करके विजय करने में सफल हुई है, उसी प्रकार उसे तमिलनाडु में भी करना होगा। मंचों पर दिए गए भाषणों से अधिक यह छोटी-छोटी बैठकर प्रभावशाली होती हैं। भाजपा को तमिलनाडु के लोगों को भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में इस प्रान्त के महत्वपूर्ण योगदान से परिचित कराना होगा। यह भी दिखाना होगा कि राम हमारी आस्था के और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं। उन्हें स्थानीय स्तर पर तमिलनाडु के लोग रावण के दृष्टिकोण से देखना बंद करें। दक्षिण में जिस प्रकार भाजपा के पास लोकसभा के लिए सीटों का अकाल पड़ा हुआ है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यहां के लोगों ने भाजपा को अभी कांग्रेस जैसा भी सम्मान देना ठीक नहीं माना है। यही कारण है कि दक्षिण भारत के लोग भाजपा को वोट भी बहुत कम देते हैं। यह भी एक तथ्य है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश में बीजेपी को मात्र एक प्रतिशत वोट मिले थे।
ऐसा नहीं है कि दक्षिण भारत के लोग सनातन से दूर हैं, वहां पर कार्यरत ईसाई मिशनरीज स्थानीय लोगों को भारत के सनातनी स्वरूप से दूर ले जाने का हर संभव प्रयास करती रही हैं, परंतु इसके उपरांत भी बहुसंख्यक लोग भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में आस्था रखते हैं। भाजपा को इसी आस्था को पकड़ना चाहिए। वहां के मंदिरों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। मंदिरों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर अच्छे भाषण करने वाले लोगों को वक्ता के रूप में स्थापित किया जाए। इनका विशेष कार्य उत्तर दक्षिण का भेद मिटाना होना चाहिए।
( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं)