असम : जब ‘रजस्वला’ होती हैं माँ कामाख्या: 3 दिन रुक जाती है पूजा, खुलते हैं सृजन, शक्ति और साधना के रहस्य; अंबुबाची मेले की अनोखी कथा

             कामाख्या मंदिर के अंबूबाची मेले में हर साल लाखों श्रद्धालुओं की लगती है भीड़ (फोटो साभार: AI)
भारत की धार्मिक परंपराएँ केवल पूजा-पाठ या आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें प्रकृति, जीवन, स्त्री शक्ति और सृजन का गहरा दर्शन भी छिपा हुआ है। देश में कई ऐसे पर्व मनाए जाते हैं जो मनुष्य और प्रकृति के संबंध को समझाते हैं। इन्हीं में से एक है अंबुबाची मेला, जो हर साल असम के गुवाहाटी स्थित माँ कामाख्या मंदिर में आयोजित किया जाता है।

यह मेला अपने स्वरूप, मान्यताओं और धार्मिक रहस्य के कारण बाकी मेलों से बिल्कुल अलग माना जाता है। यहाँ न तो केवल दर्शन का महत्व है और न ही केवल अनुष्ठानों का, बल्कि यह आयोजन उस समय से जुड़ा माना जाता है जब देवी स्वयं विश्राम करती हैं।

मान्यता है कि इन दिनों माँ कामाख्या वार्षिक रजस्वला अवस्था (मासिक धर्म) में रहती हैं और इसी वजह से मंदिर के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

पूर्वोत्तर भारत का यह सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, तांत्रिक साधक और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जुटते हैं। इन दिनों पूरा क्षेत्र भक्ति, साधना, रहस्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है।

क्या है अंबुबाची मेला और इसकी मान्यता क्यों है अलग?

अंबुबाची मेला देवी शक्ति की उपासना से जुड़ा एक वार्षिक धार्मिक आयोजन है। इसकी सबसे विशेष मान्यता यह है कि इस अवधि में माँ कामाख्या को रजस्वला माना जाता है। इस कारण देवी को विश्राम दिया जाता है और मंदिर में सामान्य पूजा-पाठ रोक दिया जाता है।

यह परंपरा स्त्री शरीर और सृजन प्रक्रिया के सम्मान का प्रतीक भी मानी जाती है। जहाँ कई संस्कृतियों में मासिक चक्र को अलग नजर से देखा गया, वहीं इस परंपरा में इसे सृजन शक्ति और जीवन के स्रोत के रूप में सम्मान दिया गया है। अंबुबाची शब्द को भी कई लोग जल, उर्वरता और सृजन से जोड़कर देखते हैं।

यही वजह है कि यह मेला केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और दार्शनिक महत्व भी रखता है। तंत्र साधना से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में साधना और मंत्र सिद्धि का विशेष महत्व होता है, इसलिए बड़ी संख्या में साधक यहाँ पहुँचते हैं।

अंबुबाची मेला 2026: कब शुरू होगा और क्या रहेगा कार्यक्रम?

साल 2026 में अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून की रात से होगी। इसी दिन रात लगभग 9 बजकर 8 मिनट पर मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाएँगे। इसके बाद 23 जून, 24 जून और 25 जून तक मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह बंद रहेगा। इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को देवी के प्रत्यक्ष दर्शन की अनुमति नहीं होती।

मंदिर परिसर में भी सामान्य धार्मिक गतिविधियों को सीमित रखा जाता है। चार दिवसीय इस आयोजन का समापन 26 जून की सुबह विशेष अनुष्ठानों और शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन दोबारा शुरू किए जाएँगे। हर साल यहाँ आने वाले लोगों की संख्या लाखों में होती है।

पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने के बाद प्रशासन और मंदिर समिति विशेष व्यवस्था करती रही है। इस बार भी सुरक्षा, सफाई, पेयजल, चिकित्सा और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं।

प्रवृत्ति और निवृत्ति: मेले के दो आध्यात्मिक चरण

अंबुबाची मेले की पूरी प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में पूरी होती है- प्रवृत्ति और निवृत्ति। प्रवृत्ति चरण देवी के रजस्वला काल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी को विश्राम दिया जाता है। इन दिनों पूजा, आरती और नियमित धार्मिक गतिविधियां नहीं होतीं।

इसके बाद आता है निवृत्ति चरण। इसे देवी के विश्राम काल की समाप्ति और पुनः ऊर्जा के साथ दर्शन देने की अवस्था माना जाता है। विशेष शुद्धिकरण और वैदिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर खोला जाता है। यही वह समय होता है जब सबसे ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं और मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।

धरती माँ के विश्राम और स्त्री शक्ति का संदेश

अंबुबाची मेले का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ा एक गहरा प्राकृतिक और सांस्कृतिक संदेश भी माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार, जैसे एक स्त्री मासिक धर्म के दौरान विश्राम करती है, उसी तरह इस अवधि में धरती भी विश्राम करती है।

यह समय सामान्य रूप से मानसून के आगमन और भूमि की नई उर्वरता से भी जोड़ा जाता है। इसी सोच के कारण आज भी कई परिवार इन दिनों खेती-बाड़ी, भूमि की खुदाई या कुछ शुभ कार्यों को टालते हैं। इसका उद्देश्य किसी भय से नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और सृजन प्रक्रिया को समझने से जुड़ा माना जाता है।

यह मान्यता बताती है कि धरती केवल संसाधन नहीं बल्कि जीवन देने वाली शक्ति है, जिसे समय-समय पर विश्राम और सम्मान की आवश्यकता होती है।

अंगोदक, अंगवस्त्र और मेले से जुड़ी विशेष परंपराएँ

अंबुबाची मेले की एक महत्वपूर्ण पहचान है यहाँ मिलने वाला विशेष प्रसाद। परंपरा के अनुसार, मंदिर बंद करने से पहले गर्भगृह में विशेष वस्त्र रखे जाते हैं। कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को अंगोदक और अंगवस्त्र प्रदान किया जाता है। अंगोदक पवित्र जल को कहा जाता है जबकि अंगवस्त्र लाल वस्त्र के छोटे भाग को माना जाता है।
श्रद्धालु इसे देवी की कृपा और शक्ति का प्रतीक मानकर अपने साथ ले जाते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर में देशभर से आए साधु-संतों और तांत्रिक परंपरा से जुड़े लोगों का भी विशेष जमावड़ा देखने को मिलता है, जिससे मेले का आध्यात्मिक स्वरूप और अधिक विशिष्ट हो जाता है।

माँ कामाख्या मंदिर: जहाँ मूर्ति नहीं, शक्ति के प्रतीक की होती है पूजा

अंबुबाची मेले की आत्मा माँ कामाख्या मंदिर ही है। असम के गुवाहाटी शहर की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के शरीर के विभिन्न अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। कामाख्या को उस स्थान से जोड़ा जाता है जहाँ देवी का योनि भाग गिरा माना जाता है।
इसी कारण यह मंदिर शक्ति, सृजन और देवी उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहाँ देवी की पारंपरिक मूर्ति नहीं है। गर्भगृह में प्राकृतिक शिला स्वरूप की पूजा की जाती है, जो हमेशा जलधारा से सिक्त रहती है। यही स्वरूप इस मंदिर को बाकी शक्तिपीठों से अलग बनाता है।
मुख्य मंदिर के आसपास देवी के विभिन्न स्वरूपों और भगवान शिव को समर्पित कई मंदिर भी स्थित हैं, जो पूरे नीलाचल क्षेत्र को एक विशाल आध्यात्मिक परिसर का रूप देते हैं। इसी वजह से अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आस्था, स्त्री शक्ति, प्रकृति, सृजन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत उत्सव माना जाता है।

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 : ममता की तरह धमकाने पर उतरे अखिलेश यादव, कहा- सरकार बनी तो करेंगे सख्त कार्रवाई: एनकाउंटर्स को बताया फर्जी

जिस तरह बंगाल में ममता बनर्जी मुसलमानों का डर दिखाकर हिन्दुओं को धमका रही थी, ठीक उसी रास्ते पर अखिलेश यादव चल निकले हैं। योगी आदित्यनाथ से पहले उत्तर प्रदेश में जो जंगल राज था उसी की वापसी करने की तैयारी की जा रही है। जो पुलिस समाजवादी पार्टी के मंत्री की भैंस ढूंढने कानून व्यवस्था को छिन बिन्न कर रखा था वही वापस लाने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया है। जब सत्ता से 10 साल दूर रहने की इतनी तड़प हो रही है कि पुलिस अधिकारियों को धमका रहे हैं हिन्दुओं का क्या होगा? क्या हिन्दू योगी राज से पहले की तरह समाजवादी पार्टी के राज में अपने त्यौहारों को खुलकर नहीं मना सकेंगे? बंगाल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के हिन्दुओं को ही नहीं बल्कि सभी धर्मों को समाजवादी पार्टी के खिलाफ लामबंद होना होगा।  
चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होने सत्ता के बिना किस तरह बिलबिला रहे हैं कि प्रदेश में सत्ताभोग नहीं तो चलो संसद पहुँच कर राजशाही करो। ऐसे नेताओं को ना ही देश की चिंता है और ना ही जनता की इन्हे चाहिए विलासिता जीवन और तिजोरी भरने का साधन।  
देखिए सोशल मीडिया पर वायरल ‎ये है असली रुप इन कांग्रेसी,सपा,आरजेडी,टीएमसी और अन्य पारिवारिक पार्टी का।
हिंदुओं के वोट पाने के लिए 2014 के बाद से हमें मजबूरन पूजा करने मंदिरों में जाना पड़ रहा है। लेकिन उससे आप कोई गलतफहमी मत पाल लेना कि हम अब बदल गए हैं, खुदा कसम हम वही है और वही रहेंगे जो 2014 पहले हुआ करते थे
देखिए न, हम जो भी तोड़फोड़ करते हैं हिंदुओं में ही करते हैं मुसलमानों को जातियों में बांटकर आपस में लड़ाने का काम ना हम तब करते थे और न आज कर रहे हैं, ऐसा गंदा काम करने की बात तो हम कभी सोचते भी नहीं
 2027 में रहम मेरे ऊपर ही करना किसी और पर नहीं,आपको खुदा का वास्ता  
आज राज्य की जनता योगी मॉडल अपनाने की मांग कर रही है, और समाजवादी पार्टी और INDI गठबंधन हिन्दुओं को जातियों में बाँट राज करने की हिमाकत कर रहे हैं। मुसलमानों को भी सोंचना होगा कि जो अपने धर्म का नहीं किसी दूसरे के मजहब नहीं हो सकता। अगर हिन्दुओं को ये लोग बांट रहे हैं तो बदनाम मुसलमान भी हो रहा है।   
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब धमकाने पर उतर आए हैं। अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बयान देते हुए धमकी दी है कि प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो जिन अधिकारियों ने फर्जी एनकाउंटर किए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने रोजगार के मुद्दे पर योगी सरकार और केंद्र की BJP सरकार पर आरोप लगाया कि युवाओं को नौकरी देने के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने वादा किया कि समाजवादी सरकार बनने पर एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और गरीबों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर तथा मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। अखिलेश ने पेट्रोल-डीजल में कथित मिलावट का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे लोगों की गाड़ियों को नुकसान हो रहा है।

असम में 5 मुस्लिम छात्रों ने की हिंदू छात्रों को बीफ खिलाने की कोशिश, स्कूल ने नहीं लिया एक्शन तो पीड़ितों ने कराई FIR: 1 की माँ को पुलिस ने किया गिरफ्तार

                                                                                                                साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश
असम के गोलपारा जिले के एक स्कूल में बीफ खाने से जुड़ी घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। हब्रागघाट हायर सेकेंडरी स्कूल क्रिश्नई में कक्षा 9 के कुछ छात्रों से जुड़ी इस घटना को लेकर पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि पाँच मुस्लिम छात्रों ने स्कूल परिसर में बीफ लाकर खाया और दो साथ पढ़ने वाले हिंदू छात्रों को खिलाने की कोशिश भी की।

स्कूल परिसर में हुई घटना

मामला गोलपाड़ा जिले के अंतर्गत कृष्णाई स्थित हाबराघाट हायर सेकेंडरी स्कूल का बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (5 जून 2026) को कक्षा 9 के पाँच छात्रों ने लंच ब्रेक के दौरान बीफ खाया।

इसी दौरान उन्होंने अपने साथ पड़ने वाले दो हिंदू छात्रों को वही माँस खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। घटना के बाद पीड़ित छात्रों ने स्कूल के एक शिक्षक को इसकी जानकारी दी।

शिकायत, प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस जाँच

बताया गया है कि शुरुआत में स्कूल प्रशासन ने मामले को शांत करने की कोशिश की और छात्रों को चुप रहने की सलाह दी। बाद में परिजनों को जानकारी मिलने पर वे स्कूल पहुँचे और कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद मामले में कृष्णई पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। पुलिस ने छात्रों और उनके अभिभावकों से पूछताछ की, जबकि एक छात्र की माँ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदीप तिमुंग और नवनीत महंता ने स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और जाँच जारी रखने की बात कही है।

विपक्ष के नेता भाजपा से सीखें जो 2 सीट पर आ गई लेकिन टूटी नहीं और न देशद्रोह के मार्ग पर चली

सुभाष चन्द्र

आज ममता बनर्जी की पार्टी एक हार के बाद खंड खंड हो गई है और खुद ममता अपनी पार्टी को कांग्रेस में शामिल करने की सोच रही है। उसकी पार्टी की 80 सीट, भाजपा की 1984 की लोकसभा में 2 सीट से कहीं ज्यादा सम्मानजनक हैं

भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। पहले यह भारतीय जनसंघ हुआ करती थी जिसने अपना सफर 1951 के लोकसभा चुनाव में 3 सीट से शुरू किया। 1957 में 4 हुई, 1962 में 14, 1967 में 35 और 1971 में 22 हुई

लोकसभा का 1977 का चुनाव 5 दलों ने एक जनता पार्टी बना कर लड़ा और 295 सीट जीत कर इंदिरा गांधी को पटक दिया जिसकी कांग्रेस को मात्र 153 सीट मिली। जनता पार्टी की 295 सीटों में जनसंघ घटक की सबसे अधिक 93 सीट थी। 1980 के चुनाव में जनता पार्टी की मात्र 31 सीट आई जिनमें मुझे याद पड़ता है जनसंघ की 15 या 16 सीट थी

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चर्चित YouTuber 
उसके बाद 1984 का चुनाव राजीव गांधी ने इंदिरा जी की लाश को कंधे पर ढो कर लड़ा और भाजपा को मात्र 2 सीट मिली। इतना ही नहीं उस समय चुनाव के दौरान Organiser Weekly में शीर्षक Lakhs of BJP voters removed from voter list रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। यानि खुलेआम वोट चोरी। लेकिन न तो भाजपा में कोई टूट हुई और न किसी और दल में विलय का ख्याल किया। 1989 में कांग्रेस पिछले चुनाव की 404 सीट से 197 और भाजपा 2 से बढ़ कर 85 पर पहुँच गई। 1984 के बाद कभी कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला लेकिन 2014 में 30 साल बाद मोदी के नेतृत्व में भाजपा को बहुमत मिला और 282 सीट मिली लेकिन कांग्रेस 44 सीट पर सिमट गई। भाजपा का आधारभूत ढांचा मजबूत है जबकि कांग्रेस का खोखला है

भाजपा ने 2 सीट आने पर भी और 1951 से 1996 तक जब वाजपेयी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने तक 45 साल विपक्ष में बैठने के बावजूद कभी नहीं कहा कि कांग्रेस ने वोट चोरी की, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में ले लिया। लोकतंत्र खत्म कर दिया कांग्रेस ने। 1989 से 2014 तक भाजपा की तरफ से विपक्ष के नेता की कुर्सी पर अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी जी और सुषमा स्वराज रहे लेकिन कभी किसी ने स्वयं सत्ता पक्ष के खिलाफ नारेबाजी नहीं की लेकिन आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी का व्यवहार देख लीजिए। मैंने किसी मुख्यमंत्री को विधानसभा में स्वयं नारे लगाते हुए नहीं देखा लेकिन ममता बनर्जी ऐसी मुख्यमंत्री थी जिसने सदन में नारे लगाए -”मोदी चोर, भाजपा चोर”। नारेबाजी केजरीवाल ने भी कम नहीं की

राहुल गांधी ने देश में ही नहीं विदेशों में भी भारत का अपमान किया और एक बात तोते की तरह रट कर बोली कि भारत में लोकतन्त्र ख़तम हो चुका है, आप लोकतंत्र बहाल करने में मदद करें। इतना ही नहीं मणिशंकर अय्यर ने तो 2014 में ही पाकिस्तान में जाकर उससे कहा आप मोदी को हटाएं और हमें लाएं। कांग्रेस के जयराम रमेश ने मोदी द्वारा नेहरू के चुने हुए प्रधानमंत्री काल को पार करने पर भी एक बकवास की है कि “मोदी का दूसरा पहलू है कि वो लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार है” 

अगर मोदी ने लोकतंत्र की हत्या की होती तो तुम ऐसी बकवास करने की हिम्मत न करते। लोकतंत्र की हत्या तो तुम्हारी दादी इंदिरा गांधी ने की थी जब इमरजेंसी लगाई थी। क्या चाहते हो मोदी भी वही करे जो इंदिरा ने किया? 

कांग्रेस वो कर ही नहीं सकती जो विपक्ष का नेता होते हुए वाजपेयी ने किया। 1994 में जिनेवा में कश्मीर पर भारत का पक्ष जिस तरह उन्होंने रखा वो आज की कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है

इतना ही नहीं वाजपेयी से प्रधानमंत्री के तौर पर जब अमेरिका में कांग्रेस के बारे सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया - “while the ruling party and the opposition might have their differences at home, ‘in foreign countries, we are all Indians first.’ He consistently maintained that political disputes should remain within India’s borders. दूसरी तरफ राहुल गांधी है जो विदेशों में जाकर भाजपा, आरएसएस और मोदी को गाली बकता फिरता है

विपक्ष कभी भी भाजपा से कुछ नहीं सीख सकता। 

मध्य प्रदेश : फराज को मिली थी बैचलर युवाओं के ब्रेनवॉश की जिम्मेदारी, नईम अब्दुल्ला से मिलकर शरिया लागू करने का था टारगेट: पढ़ें- भोपाल ATS ने और क्या बताया

           आरोपित फराज और नईम पर थी बैचलर्स के ब्रेन वॉश की जिम्मेदारी (फोटो साभार: MSN, एक्स)
मध्य प्रदेश के भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार किए गए मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ में जाँच एजेंसियों को कई ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनसे मामले की गंभीरता बढ़ गई है। जाँच एजेंसियों के अनुसार, फराज और नईम अब्दुल्ला साल 2047 तक देश में शरिया कानून लागू करने की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे।

फराज को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की ओर से मध्य प्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, बैचलर युवकों का ब्रेन वॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वह आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार, अविवाहित और आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की कोशिश कर रहा था।

एजेंसियों का दावा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुँच बनाकर उन्हें जिहादी बनाने की योजना पर काम किया जा रहा था।

सोशल मीडिया बना नेटवर्क का माध्यम, डिजिटल जाँच तेज

जाँच एजेंसियों की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि फराज पिछले करीब चार वर्षों से टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। आरोप है कि वह अलग-अलग ग्रुप्स बनाकर युवाओं को जोड़ता था और उनमें वीडियो व अन्य सामग्री साझा करता था। इसी के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।

ATS ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया है और फोरेंसिक जाँच शुरू कर दी गई है। मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियाँ, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और संपर्क सूची की जाँच की जा रही है। साथ ही बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी फंडिंग के पहलू भी जाँच के दायरे में हैं।

देवबंद कनेक्शन और नईम की गिरफ्तारी से खुलीं नई परतें

फराज की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के देवबंद से नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया गया। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, नईम की भूमिका फराज को विदेशी संपर्कों तक पहुँचाने और विचारधारात्मक रूप से जोड़ने में अहम मानी जा रही है। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है।

जाँच में यह भी सामने आया कि फराज ने देवबंद में मजहबी तालीम हासिल की थी और इसी दौरान उसकी मुलाकात नईम से हुई थी। बाद में दोनों संपर्क में बने रहे। ATS ने गुरुवार (11 जून 2026) की तड़के करीब 3:30 बजे भोपाल के काजी कैंप इलाके में फराज के घर पर कार्रवाई की।

करीब एक दर्जन अधिकारियों की टीम, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, पहले घर के पास पहुँची और फिर अंदर जाकर उसे हिरासत में लिया। अगले दिन उसके घर और जिस क्लीनिक में वह काम करता था, दोनों जगह ताले लगे मिले। फराज लंबे समय से बैटरी रिपेयरिंग का काम करता था और साथ ही एक क्लीनिक में कंपाउंडर के रूप में भी कार्यरत था।

स्थानीय पहचान, पारिवारिक जीवन और गतिविधियों की पड़ताल जारी

स्थानीय लोगों के अनुसार, फराज इलाके में मजहबी गतिविधियों में सक्रिय माना जाता था। बताया गया कि वह घर पर बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता था और परिवार के साथ रहता था। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि घर पर समय-समय पर मजहबी कक्षाएँ आयोजित होती थीं।

जाँच एजेंसियाँ अब उसके परिचितों, सामाजिक दायरे, कार्यस्थल और संपर्कों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही हैं। यह भी जाँच की जा रही है युवाओं तक पहुँच बनाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया और वास्तव में उससे कितने लोग जुड़े थे। फिलहाल एजेंसियाँ पूरे मामले की अलग-अलग एंगल से जाँच कर रही हैं।

बैंकॉक के ब्रह्मा मंदिर में धमाका करने वाले यूसुफु मियराली और बिलाल मोहम्मद उईगरों को मौत की सजा : 11 साल पहले गई थी 20 लोगों की जान

                                यूसुफु मियराली और बिलाल मोहम्मद (फोटो साभार: एक्स @ThaiEnquirer)
करीब 11 साल पुराने बैंकॉक के चर्चित एरावन मंदिर बम धमाके मामले में थाईलैंड की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चीन के उइगर मुस्लिम समुदाय से जुड़े यूसुफु मियराली और बिलाल मोहम्मद (अदेम करादाग) को मौत की सजा सुनाई है। दोनों को 17 अगस्त 2015 को हुए उस धमाके का दोषी माना गया, जिसमें 20 लोगों की मौत हुई थी।

इस धमाके में 120 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हमला बैंकॉक के बेहद व्यस्त और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय एरावन श्राइन पर हुआ था। एरावन मंदिर बैंकॉक का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह हिंदू देवता ब्रह्मा को समर्पित है। बैंकॉक साउथ क्रिमिनल कोर्ट की पीठ ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त और मजबूत सबूत मौजूद हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक आरोपित ने विस्फोटक सामग्री तैयार की और दूसरे ने उसे मंदिर परिसर तक पहुँचाकर धमाका किया। कोर्ट ने दोनों को पूर्व नियोजित हत्या, हत्या के प्रयास और विस्फोटक रखने जैसे गंभीर अपराधों में दोषी माना। हालाँकि दोनों आरोपियों ने खुद को बेगुनाह बताया है और फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

धमाके की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली थी, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इसे उइगर मुद्दे से जोड़ते रहे हैं। माना जाता है कि यह हमला उस समय थाईलैंड द्वारा बड़ी संख्या में उइगर शरणार्थियों को चीन वापस भेजे जाने के विरोध में किया गया था।

उइगर समुदाय के कुछ लोग चीन के शिनजियांग क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतिबंधों का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि चीन इन आरोपों को खारिज करता है।

उत्तर प्रदेश : किस ‘शर्त’ पर चुनावों में सपा के समर्थन को तैयार हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, क्यों हिंदू विरोधी अतीत को दे रहे हैं ‘क्लीनचिट’?

      स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आरती करतीं डिंपल यादव और अखिलेश यादव (फोटो साभार: X/Dimple Yadav)
जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव निकट आ रहे हैं, सनातन को अपमानित करने वाली समाजवादी पार्टी ने कालनेमि बन हिन्दुओं को गुमराह करने साधु-संतों की शरण में जाना शुरू कर दिया है। हिन्दू यह भी नहीं भुला कि किस तरह समाजवादी नेता रामायण के पृष्ठ फाड़ रहे थे, सनातन के विरुद्ध बयानबाज़ी कर रहे थे और आज सत्ता पाने उसी सनातन की शरण में जा रही है। लेकिन हिन्दुओं को इन सनातन विरोधियों से बंगाल की तरह दूरी बनानी होगी।       
गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने और गौहत्या पर प्रतिबंध की माँग को लेकर निकाली जा रही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ‘गविष्ठी यात्रा’ लगातार चर्चाओं में है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा को लेकर यह सवाल उठ रहे थे कि इसे समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने हाईजैक तो नहीं कर लिया है। अब अखिलेश यादव के एक बयान के बाद विवाद और बढ़ गया है।

दरअसल, अखिलेश यादव ने शुक्रवार (12 जून 2026) को एटा में कहा कि शंकराचार्य भी PDA हो गए हैं। विधानसभा चुनाव 2026 में टिकट बँटवारे को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “पूजनीय शंकराचार्य जी भी पीड़ित, दुखी, अपमानित हो रहे हैं इस सरकार में। वह भी PDA हो गए हैं, इसलिए हम उनके साथ हैं।” अखिलेश यादव के इस बयान और यात्रा में सपा नेताओं के शामिल होने पर उठ रहे सवालों को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने ऑपइंडिया से बात की है।

गलफहमी ना पालें अखिलेश: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष

3 मई 2026 से शुरू हुई इस 81 दिवसीय यात्रा को लेकर संजय पांडेय ने कहा कि यात्रा को लेकर जनता का रुख सकारात्मक है और यात्रा के बाद से मुस्लिम और ईसाई भी समर्थन में आ गए हैं। वहीं, अखिलेश यादव के बयान पर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा कुछ भी अखिलेश जी ने बयान दिया है कि महाराज जी PDA का हिस्सा हो गए हैं, तो ये उनकी गलतफहमी है। महाराज जी सिर्फ सनातन धर्म के हैं। वो किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं।”

हालाँकि, उन्होंने कहा, “अगर PDA अभी यह घोषणा कर दे कि सरकार बनने पर गाय को ‘राज्य माता’ घोषित किया जाएगा और गौकशी पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी, तो उन्हें शंकराचार्य जी का समर्थन और आशीर्वाद मिलेगा। वे और उनके समर्थक PDA के साथ खड़े होंगे। लेकिन अगर ऐसा नहीं किया गया तो शंकराचार्य जी का समर्थन उन्हें नहीं मिलेगा।”

संजय पांडेय ने कहा, “यह किसी विशेष दल का समर्थन करने का मामला नहीं है। अगर बीजेपी, कॉन्ग्रेस या PDA कोई भी दल अपने घोषणा पत्र में गाय को राज्य माता घोषित करने और गोकशी बंद कराने का लिखित व सार्वजनिक वादा करेगा तो उन्हें समर्थन दिया जाएगा। यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं बल्कि गौ माता के प्राणों की रक्षा का है।”

सपा-कांग्रेस के नेताओं के यात्रा में शामिल होने पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा को लेकर यह सवाल पूछा जा रहा है कि कहीं उनकी यात्रा को उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों ने हाईजैक तो नहीं कर लिया है। दरअसल, उनकी यात्रा के मंचों पर सपा और कांग्रेस के नेता खूब नजर आ रहे हैं और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रुख सरकार को लेकर गोरक्षा के विषय से आगे बढ़कर आक्रामक नजर आ रहा है।

कुछ दिनों पहले उनकी यात्रा जब इटावा के सैफई पहुँची तो उनके मंच पर अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव नजर आए थे। इस दौरान उन्होंने मुलायम सिंह यादव के परिवार की न सिर्फ जमकर तारीफ की बल्कि मुलायम सिंह को ‘संतों का सम्मान करने वाला’ और ‘दशकों पुराना सच्चा हितैषी’ तक करार दे दिया।

उन्होंने अखिलेश यादव और डिंपल यादव को ‘बड़े दिल वाला’ बताते हुए मुलायम सिंह यादव द्वारा पूर्व में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की गिरफ्तारी का भी एक तरह से बचाव कर डाला था। इस बारे में भी संजय पांडेय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रुख स्पष्ट किया है।

संजय पांडेय ने कहा, “किसी भी राजनीतिक दल वाले आ रहे हैं तो वो सनातनी ही हैं। जब मुस्लिम समर्थन कर रहे हैं, गौ माता को राष्ट्र माता बोल रहे हैं जबकि उनके धर्म में पशु माना जाता है। तो जब वो तैयार हो गए हैं, किसी भी राजनीतिक पार्टी का हिंदू अगर आ रहा है, तो उसका स्वागत है। उसमें भाजपा के भी लोग आएँ, उनके लिए भी कोई रोक नहीं है।”

‘सपा के हिंदू विरोधी अतीत’ से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा, “शंकराचार्य जी महाराज, परंपरा से जुड़े हुए हैं और सपा की सच्चाई भी इनको मालूम है। सपा जहाँ गड़बड़ है, सपा जो गलत कर रही है धर्म विरोधी, तो सपा का भी विरोध रहेगा। अभी जब राजकुमार भाटी ने बयान दिया था ब्राह्मणों और धर्म के खिलाफ तो महाराज श्री ने उनकी भी निंदा की थी और कहा था कि समाजवादी पार्टी को जनता ठीक कर देगी।”

उन्होंने कहा, “जितना धर्म के अंश में वह काम करेंगे, उतना ही शंकराचार्य जी का उनके साथ समर्थन रहेगा, आशीर्वाद रहेगा। जो भी अधर्म करेगा, यहाँ तक कि हम शिष्य भी अगर अधर्म करेंगे तो हम लोग को वह मार के भगा देंगे। शंकराचार्य जी को केवल शास्त्र और धर्म से मतलब है और किसी से कोई उनका और मतलब नहीं है। अगर कोई ऐसा सोचता है तो उसकी मूर्खता है।”

वहीं, मजहबी आधार पर आरक्षण की माँग करने वाली पार्टियों को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने हर तरह के आरक्षण का विरोध करने की बात कही हैं। उन्होंने कहा, “हम लोग तो किसी आधार पर आरक्षण नहीं चाहते हैं। किसी भी मजहब या किसी भी तरह से, आरक्षण से हम लोग का देश नष्ट ही हो जाएगा। शंकराचार्य जी का मानना है कि आरक्षण नहीं होना चाहिए।”

बांग्लादेश : भगवान राम के पोस्टर पर मारे जूते-चप्पल, जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने दिखाई हिंदू घृणा: Video वायरल


भारत में घुसपैठियों को अपना दामाद बनाकर पालने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों में लेशमात्र भी शर्म है सभी को एकजुट होकर बांग्लादेश में भगवान श्रीराम के पोस्टरों पर जूते-चप्पल मारे जाने का विरोध ही नहीं जहाँ-जहाँ अपनी कुर्सी की खातिर इन्हे छुपाकर रखे हो भारत और राज्य सरकारों को जानकारी देकर देश से बाहर धक्का दो। अन्यथा जनता इन पार्टियों को चुनावों में बंगाल से भी बुरी तरह हराकर सत्ता से बाहर करे।     

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों का बवाल लगातार जारी है। अब सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज सामने आएँ हैं, जिसमें भगवान राम के पोस्टर पर जिहादी जूते-चप्पल मारते दिख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, गाईबांधा में जुमे की नमाज के बाद कुछ इस्लामी समूहों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और राम प्रतिमा निर्माण का विरोध जताया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर वाले बैनरों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन पर जूते-चप्पल मारे गए।

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों की ओर से विरोध और उसे तोड़ने की धमकियाँ दिए जाने के कुछ दिनों बाद हिंदू मंदिर समिति को प्रतिमा का निर्माण कार्य रोकना पड़ा है।

एक बयान में मंदिर समिति के एक सदस्य ने मीडिया को बताया, “हम आपके हित में, राष्ट्र और समाज के हित में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य रोक रहे हैं। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम यह कार्य रोक रहे हैं। भविष्य में, यदि हमें आवश्यकता महसूस हुई, तो हम आपको बुलाएँगे, सभी हितधारकों के सुझाव लेंगे और कार्य पुनः आरंभ करेंगे।”

MOU के बाद भी सुस्त रहा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश ने फुर्ती से पकड़े मझगाँव डॉक के 29000 करोड़ रूपए: चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में NDA सरकार ला रही बड़े निवेश

                 मझगांव डॉक ने किया आंध्र प्रदेश में 29000 करोड़ रूपए का निवेश (फोटो साभार: MDL)
कहते हैं गायक का जुबान और नाचने वाले के पैर कभी नहीं रुकते। ठीक उसी तरह दिमाग में विकास वाला नेता विकास का कोई मौका नहीं छोड़ता। आंध्र प्रदेश के दो टुकड़े होने से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जो विकास किया था दुर्भाग्य से विकासशील हिस्सा तेलंगाना में चला गया। देखा जाए तो आज तेलंगाना नायडू की बोई फसल पर जी रहा है। 

आंध्र प्रदेश देश में निवेश के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। तमिलनाडु की द्रमुक सरकार के ढुलमुल रवैए का फायदा उठाते हुए अब मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने एक और बड़ा दाँव मारा है। यह रफ्तार आगे भी जारी रहने वाली है क्योंकि सरकारी जहाज बनाने वाली कंपनी मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) तिरुपति जिले के दुगराजपटनम में आंध्र प्रदेश के प्रस्तावित मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर में 29,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश कर रही है।

मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) नाम की यह बड़ी डिफेंस पीएसयू (PSU) आंध्र प्रदेश के शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट में मुख्य निवेशक बनने के लिए तैयार है, जिसका लक्ष्य 1.2 मिलियन टन सालाना क्षमता का है। इस मेगा प्रोजेक्ट में राज्य सरकार और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी जमीन और समुद्री बुनियादी ढाँचे के लिए 5,289 करोड़ रुपए का योगदान देंगे, जबकि मुख्य निवेशक MDL इसमें 23,964 करोड़ रुपए का निवेश करेगा।

मझगांव डॉक लिमिटेड के प्रतिनिधि जल्द ही इस जगह की संभावनाओं का आकलन करने के लिए आंध्र प्रदेश का दौरा कर सकते हैं।

तमिलनाडु की सुस्ती बनी आंध्र प्रदेश के लिए मौका

आंध्र प्रदेश सरकार और MDL के बीच राज्य के प्रस्तावित शिपबिल्डिंग क्लस्टर में भारी निवेश को लेकर बातचीत शुरू होने से पहले इस डिफेंस पीएसयू ने तमिलनाडु की तत्कालीन द्रमुक (DMK) सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।

सितंबर 2025 में MDL ने ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत थूथुकुडी में 15,000-18,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से एक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड बनाने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ समझौता किया था। हालाँकि द्रमुक सरकार ने इसमें ढुलमुल रवैया अपनाया और बाद में MDL के साथ तय प्रक्रिया को छोड़कर दक्षिण कोरिया की एचडी हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज (HD Hyundai Heavy Industries) के साथ एक विशेष समझौता कर लिया।

MDL को तमिलनाडु सरकार से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) का इंतजार था, हालाँकि द्रमुक सरकार ने न तो प्रोजेक्ट शुरू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और न ही इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर मना किया।

तमिलनाडु सरकार के इस कदम से MDL-थूथुकुडी प्रोजेक्ट अधर में लटक गया और भारत की एक प्रमुख डिफेंस पीएसयू किनारे हो गई। MDL ने आरोप लगाया कि द्रमुक सरकार द्वारा तय चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और भारतीय शिपबिल्डिंग कंपनियों को प्रतिस्पर्धा करने का सही मौका नहीं दिया गया। पीएसयू ने पारदर्शिता और जिस तरह से तमिलनाडु सरकार ने एंकर शिपयार्ड का चयन किया, उस पर भी सवाल उठाए।

अब जब MDL के आंध्र प्रदेश में बड़ा निवेश करने की खबरें आ रही हैं, तो तमिलनाडु के कई लोग द्रमुक सरकार की आलोचना कर रहे हैं कि उनकी वजह से राज्य के हाथ से रक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निवेश निकल गया।

आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और बंदरगाह से जुड़े निवेश को लेकर लंबे समय से मुकाबला चल रहा है। दोनों राज्य निवेश को आकर्षित करने के लिए अपने तटीय इलाकों, कुशल कामगारों और रियायतों का इस्तेमाल करते हैं। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के शासन वाले आंध्र प्रदेश ने ‘बिजनेस करने की रफ्तार’ (speed of doing business) को लेकर बड़े स्तर पर मार्केटिंग की है, जिसमें जमीन की उपलब्धता, नीतिगत स्थिरता और राज्य व केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के कारण केंद्रीय समन्वय को प्रमुखता से दिखाया गया है।

चंद्रबाबू नायडू की NDA सरकार में आंध्र प्रदेश बना उद्योगों के लिए आकर्षक

बीते कुछ महीनों में तमिलनाडु और कॉन्ग्रेस शासित कर्नाटक से एनडीए शासित आंध्र प्रदेश में कई बड़े निवेशकों का ट्रांसफर देखा गया है।

अगस्त 2025 में तमिलनाडु की द्रमुक सरकार ने थूथुकुडी में दक्षिण कोरिया की ह्वासुंग फुटवियर (Hwaseung Footwear) द्वारा 1,720 करोड़ रुपये के नॉन-लेदर फुटवियर प्लांट की घोषणा की थी, जिससे 20,000 से अधिक नौकरियों का वादा किया गया था। हालाँकि तमिलनाडु सरकार की ओर से हुई देरी और लापरवाही के कारण ह्वासुंग को बेहतर विकल्पों की तलाश करनी पड़ी। नवंबर 2025 तक यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के कुप्पम में शिफ्ट हो गया।

दक्षिण कोरियाई कंपनी ह्वासुंग ने एनडीए के नेतृत्व वाले राज्य आंध्र प्रदेश में 150 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ अपना नॉन-लेदर स्पोर्ट्स शू मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने की घोषणा की। राज्य सरकार ने ह्वासुंग को 100 एकड़ जमीन आवंटित की। अब यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की विधानसभा सीट कुप्पम में आकार ले रहा है।

मई 2026 में तमिलनाडु के हाथ से प्रस्तावित एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) फ्लाइट टेस्टिंग और इंटीग्रेशन कॉम्प्लेक्स डिफेंस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट भी निकल गया और यह आंध्र प्रदेश के पास चला गया। हालाँकि तमिलनाडु सरकार डीआरडीओ (DRDO) से जुड़े इस 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को हासिल करने की कोशिश में थी और उसने बेंगलुरु के एयरोस्पेस क्लस्टर के पास होसुर में जमीन और रनवे की पेशकश की थी। लेकिन आंध्र प्रदेश ने तेजी से मंजूरी देने और एक एकीकृत डिफेंस कॉरिडोर के विजन की पेशकश करके यह बाजी जीत ली।

यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के पुट्टपार्थी में गया, और इस साल मई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री नायडू ने 600 एकड़ की इस फैसिलिटी का शिलान्यास किया। इस पर केंद्र द्वारा पक्षपात करने के आरोप भी लगे, हालाँकि खबरों में कहा गया कि आंध्र प्रदेश को प्रोजेक्ट सौंपना विभिन्न राज्यों में रक्षा निर्माण क्षमताओं को बाँटने की रणनीति का हिस्सा था।

जहाँ तमिलनाडु ने होसुर में 100 एकड़ जमीन मुफ्त देने की पेशकश की थी, वहीं आंध्र प्रदेश ने पुट्टपार्थी में 650 एकड़ का एक बड़ा डेडिकेटेड हब ऑफर किया।

राज्यों के बीच यह मुकाबला सिर्फ आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार कर्नाटक तक भी है। जुलाई 2025 में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को तीन साल से चल रहे किसानों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण बेंगलुरु हवाई अड्डे के पास एक प्लान्ड एयरोस्पेस पार्क के लिए देवनहल्ली में कृषि भूमि का अधिग्रहण करने के प्रस्ताव को रद्द करना पड़ा था।

राज्य ने पहले इस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट के लिए चन्नरायपटना और देवनहल्ली तालुक के आसपास के गाँवों में 1,777 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन किसानों ने पहले दिन से ही इस कदम का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह जमीन उपजाऊ है और उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है।

जब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया, तो आंध्र प्रदेश ने तुरंत इस मौके का फायदा उठाया। राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक खुला निमंत्रण देते हुए लिखा, ‘प्रिय एयरोस्पेस इंडस्ट्री, इसके (विरोध प्रदर्शन) बारे में सुनकर दुख हुआ। मेरे पास आपके लिए एक बेहतर विचार है। आप इसके बजाय आंध्र प्रदेश को क्यों नहीं देखते? हमारे पास आपके लिए एक आकर्षक एयरोस्पेस नीति है, जिसमें बेहतरीन प्रोत्साहन और 8000 एकड़ से अधिक तैयार जमीन (बेंगलुरु के ठीक बाहर) उपलब्ध है! उम्मीद है कि टेबल पर बैठकर बात करने के लिए आपसे जल्द ही मुलाकात होगी।”

साफ है कि आंध्र प्रदेश की एनडीए सरकार न केवल राज्य को मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक आदर्श जगह के रूप में पेश कर रही है, बल्कि तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रतिस्पर्धी राज्यों में दिक्कतों का सामना कर रहे निवेशकों को भी आक्रामक रूप से अपने साथ जोड़ रही है।

टेक, डेटा सेंटर, एआई (AI) और एयरोस्पेस से लेकर आंध्र प्रदेश ने दूसरे राज्यों से निवेश हासिल किया है और वह इसका दावा करने से पीछे नहीं हटता।

साल 2025 में गूगल (Google) ने भारत के सबसे बड़े एआई और डेटा सेंटर्स में से एक के लिए विशाखापत्तनम में 15 बिलियन डॉलर या 1.25 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया।

बेंगलुरु के पास आईटी की ताकत और बुनियादी ढाँचा होने के बावजूद गूगल द्वारा इस दौड़ में अपने प्रतिस्पर्धी कर्नाटक के बजाय आंध्र प्रदेश को चुनना कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को रास नहीं आया। कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे की X पर आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश के साथ तीखी बहस भी हुई थी।

आंध्र प्रदेश सरकार ने 22,000 करोड़ रुपए के बड़े प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश करके गूगल का यह निवेश सुरक्षित किया। इस पैकेज में जमीन पर 25% की छूट, पानी के टैरिफ पर 25% की छूट, 100% मुफ्त बिजली ट्रांसमिशन के साथ-साथ स्टेट जीएसटी (SGST) की पूरी प्रतिपूर्ति शामिल थी।

आंध्र प्रदेश ने पिछले साल कर्नाटक की सरला एविएशन के 1,300 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रिक एयर-टैक्सी मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट ‘स्काई फैक्ट्री‘ को भी अपने नाम कर लिया। यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के अनंतपुरम जिले में विकसित किया जाएगा। कर्नाटक की एक कंपनी का अपने गृह राज्य को छोड़कर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के लिए दूसरे राज्य को चुनना कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा गया।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश की ‘काम करने की रफ्तार’ का असर कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना पर भी पड़ा है। मार्च 2025 में हैदराबाद की प्रीमियर एनर्जीज (Premier Energies) ने घोषणा की कि वह तेलंगाना के सीतारामपुर से आंध्र प्रदेश के नायडूपेटा में अपना 1,700 करोड़ रुपये का प्रस्तावित 4 GW सोलर फोटोवोल्टिक सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शिफ्ट कर रही है। इस प्रोजेक्ट से करीब 3,500 नौकरियाँ पैदा होंगी।

प्रतिस्पर्धी राज्यों की तुलना में आगे निकलकर एक और प्रोजेक्ट को हासिल करने की जानकारी देते हुए आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने X पर लिखा, “एपी (AP) ने रिकॉर्ड समय में एपीआईआईसी (APIIC) के माध्यम से 269 एकड़ जमीन को तेजी से मंजूरी दी। ये बातचीत अक्टूबर 2024 में शुरू हुई थी और फरवरी 2025 तक जमीन आवंटित कर दी गई। यह जमीन बंदरगाहों के करीब है और सक्रिय प्रोत्साहनों से समर्थित है। यह आंध्र प्रदेश को एक अग्रणी सौर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जिससे औद्योगिक विकास और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जिसकी क्षमता को 7 GW तक बढ़ाने की योजना है। आंध्र प्रदेश को भारत के दूसरे सबसे बड़े एकीकृत सौर सेल और मॉड्यूल निर्माता का एपी में स्वागत करते हुए गर्व हो रहा है – जो हमारे युवाओं के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन और ग्रीन जॉब्स को बढ़ावा देगा।”

                                                            नारा लोकेश के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यहाँ एक दिलचस्प बात यह है कि खबरों के मुताबिक आंध्र प्रदेश ने एनडीए शासन के दो सालों के भीतर लगभग 23 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है।

मुख्यमंत्री नायडू ने इस बारे में कहा, “कल्याण, विकास और सुशासन प्रदान करने के साथ-साथ एनडीए सरकार विशाखापत्तनम, अमरावती और तिरुपति क्षेत्रों का विकास कर रही है। रायलसीमा में रक्षा, ड्रोन, स्पेस, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के उद्योग आ रहे हैं। एनडीए शासन के दौरान राज्य ने अब तक 23 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। हम हर घर में सोलर रूफटॉप के जरिए बिजली पैदा करने का अवसर दे रहे हैं। रॉयल एनफील्ड तिरुपति में 18 महीनों में एक मोटरसाइकिल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर रही है।”

हालाँकि आंध्र प्रदेश की आक्रामक निवेश रणनीतियों से अन्य राज्य सरकारों का सतर्क होना स्वाभाविक है, लेकिन एनडीए शासित यह राज्य भारत की विकास गाथा में योगदान देने में जितना हो सके आगे रहना चाहता है। आंध्र प्रदेश सरकार वैश्विक और घरेलू कंपनियों को राज्य में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, लैंड बैंक, सब्सिडी और केंद्रीय सहयोग का पूरा इस्तेमाल कर रही है।

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की वाणी; हिंदुओं को प्रवचन दे दिए, लेकिन चर्च, मस्जिदों और दरगाहों की अंधी कमाई के बारे में बोलने की हिम्मत दिखाओ

सुभाष चन्द्र

आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि -

“मंदिरों में जो हजारों टन सोना पड़ा हुआ है आखिर वो कब काम आएगा, इस मुश्किल घड़ी में सरकार को सोचना चाहिए, राजधर्म कहता है कि हमारे देश के लोगों को कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए” 

मेरी बातों का मतलब यह कतई नहीं है कि मैं श्री श्री रविशंकर का किसी तरह अपमान करना चाहता हूँ लेकिन उनकी बातों में दोहरापन दिखाई देता है। उन्होंने कभी इस विषय को नहीं उठाया कि दक्षिण भारत की राज्य सरकार मंदिरों का धन निकाल कर मस्जिदों और चर्चों पर खर्च करती हैं जबकि उनके पास धन की कोई कमी नहीं होती

श्री श्री रविशंकर जी चर्चों को छोड़िए, जहाँ धन का अम्बार है लेकिन दिल्ली की जामा मस्जिद, निजामुद्दीन दरगाह और अजमेर की दरगाह की रोज की कितनी कमाई है कभी उसके बारे में भी कुछ बोलिए। ये कमाई किसकी जेब में जा रही है? वक़्फ़ बोर्ड भी बोलने की हिम्मत नहीं करता। ये तो सिर्फ तीन बताए है। जिसको देखों हिन्दुओं को ही प्रवचन देकर अपने आपको पता नहीं क्या समझने लगता है। तनिक भी शर्म नहीं आती।   

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आर्ट ऑफ़ लिविंग अपनी संपत्ति का ब्यौरा कभी घोषित नहीं करता लेकिन एक कथित एक विशाल वैश्विक मानवीय एवं शैक्षिक गैर-लाभकारी (Non-Profit) संस्था होने के कारण इसकी परिसंपत्तियाँ (Assets) और आय (Revenue) विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों में विभाजित हैं और  सामान्यतः संगठन के वैश्विक नेटवर्क और परिसंपत्तियों का मूल्यांकन सैकड़ों मिलियन डॉलर के स्तर पर किया जाता है भारत और विश्व में इसका आंकलन 200 से 1000 करोड़ के बीच लगाया गया है

अमेरिका स्थित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत क्षेत्रीय वित्तीय विवरणों (जैसे IRS को प्रस्तुत अभिलेखों) के अनुसार, उसकी वार्षिक आय लगभग 1.2 करोड़ डॉलर से 2.3 करोड़ डॉलर के बीच तथा कुल परिसंपत्तियां लगभग 3.2 करोड़ डॉलर बताई गई हैं 

विभिन्न क्षेत्रीय संपत्ति एवं आध्यात्मिक नेताओं से संबंधित Publications में श्री श्री रविशंकर की  लगभग 1,500 करोड़ रूपए की अनुमानित व्यक्तिगत संपत्ति के साथ उल्लेख किया जाता है

मैं यह नहीं कहता कि आर्ट ऑफ़ लिविंग मानवीय सेवा परियोजनाओं, संघर्ष-समाधान(Conflict Resolution) तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में निवेश नहीं करता लेकिन यह भी सत्य है कि इसके अधिकांश आयोजनों में अमीर लोगों की संगत दिखाई देती है

इतनी अपार संपत्ति में से कुछ देश के लिए भी दान कर दीजिए अगर आपको मोदी जी की अपील में जरा सा भी दम दिखाई देता है और आप देश पर संकट मानते हैं

श्री श्री रविशंकर ने मुस्लिमों से नहीं कहा कि जब आप ईरान के लिए 600 करोड़ रुपया और गहने दान कर सकते हो तो देश के लिए भी कुछ करो  

श्री श्री रविशंकर 2007 से 2014 तक कई बार इराक गए जहां शिया सुन्नी मुस्लिम लीडरों से मिले उन्होंने वहां जोर देकर कहा कि शिया और सुन्नी इस्लाम की दो आँखे हैं और दोनों को एक हो जाना चाहिए ऐसी बात वे कई बार बोल चुके हैं दिल्ली के India Dialogue में उन्होंने कहा कि शिया सुन्नी एक हो जाएं जिससे उन पर Extremist होने का लगा दाग मिट सके

यह सोच है श्री श्री रविशंकर की जिसके लिए Shia-Sunni Unity Movement उन्हें उनके Global Peace Mission के लिए बधाई देता रहा है बेहतर होगा ईरान अमेरिका/इज़रायल की संधि कराने ही चले जाएं और नहीं तो कम से कम ईरान से कहें कि अपने सुन्नी भाइयों के देशों पर हमले मत करो

श्री श्री रविशंकर भूल गए कि वक्फ बोर्ड के पास देश भर में 9.4 लाख एकड़ भूमि है

Archbishop KP Yohannan(founder of the Believers Eastern Church in Kerala) भारत का wealthiest evangelist है जिसकी संपत्ति 175 मिलियन डॉलर है

इंडियन कैथोलिक चर्च के पास 17 करोड़ एकड़ भूमि है और गैर-कृषि संपत्ति 20,000 करोड़ से 100,000 करोड़ रुपए के बीच है

मुंबई के लोकल Roman Catholic Archdiocese अकेले की प्रॉपर्टी और real assets की कीमत 1.5 बिलियन डॉलर है

श्री श्री रविशंकर ने केवल हिंदू मंदिरों के सोने पर नज़र रखी लेकिन मुस्लिमों और ईसाइयों को अपार संपत्ति में से कुछ भी  देने के लिए नहीं कहा ये कैसा दोहरा मापदंड है?

‘यूरोप के हथियारों से भारत पर हमला होता है’: रूसी तेल पर ज्ञान देने वाले पश्चिमी देशों को जयशंकर ने दिखाया आईना

                                                         साभार - एक्स/@DrSJaishankar
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने के फैसले का मजबूती से बचाव किया है और पश्चिमी देशों की आलोचना पर सवाल उठाए हैं। यह पूरा मामला फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतारांता टॉक्स’ के दौरान सामने आया, जहाँ उनसे रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत की ऊर्जा नीति को लेकर सवाल पूछे गए। एक पत्रकार ने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस के प्रति ‘ज्यादा सहानुभूतिपूर्ण’ है और वहाँ से तेल खरीदकर उसका समर्थन कर रहा है।

भारत ने क्यों खरीदा रूस से तेल?

इस सवाल के जवाब में जयशंकर ने साफ कहा कि भारत का फैसला पूरी तरह आर्थिक और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित था। उन्होंने कहा, “मैं तेल उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर खरीदता हूँ।”

उन्होंने समझाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तो यूरोप ने मिडिल ईस्ट से तेल खरीदना शुरू कर दिया, जो पहले भारत का पारंपरिक सोर्स था। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों के कारण भारत को रूस से सस्ता और अधिक तेल मिलना शुरू हुआ।

जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में अमेरिका ने खुद भारत से कहा था कि वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदा जाए, ताकि महँगाई अचानक न बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और इसी आधार पर निर्णय लिया है।

पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर सवाल

अपने बयान में विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूरोप के किसी भी देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ, लेकिन यूरोप कई देशों को हथियार बेचता है जिनका इस्तेमाल संघर्षों में होता है।
उन्होंने कहा, “यूरोप हथियार बेचता है, जिनका उपयोग हम पर भी हुआ है। भारत ने कभी यूरोप के लिए कोई खतरा नहीं पैदा किया।” जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जबकि अमेरिका गैस का प्रमुख सप्लायर है।
उन्होंने वैश्विक नीति को डीरिस्किंग की दिशा में बताया और कहा कि आज ऊर्जा बाजार पूरी तरह बदल चुका है। भारत ने साफ किया है कि वह किसी भी प्रतिबंध का हिस्सा नहीं है और अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले लेता रहेगा।


‘फहीम, उसका अब्बू, मौलवी और…. याद भी नहीं कितनों ने किया रेप’: मेरठ में जबरन निकाह के बाद ‘जहन्नुम’ बनी हिंदू बेटी की जिंदगी

              फहीम (बाएँ), फहीम का घर (बीच में), हिंदू पीड़िता (दाएँ), (फोटो साभार : Dainik bhaskar)
अक्सर चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी और INDI गठबंधन वाले दलितों पर अत्याचार होने का रोना रोते दिखाई पड़ते हैं। लेकिन जब इन लोगों के शांतिदूतों के ही द्वारा दलित लड़कियों का गैंग रेप और इस्लामीकरण किया जाता है सबके सब पता नहीं कब्र में छुप कर बैठ जाते हैं। सबको सांप सूंघ जाता है। जनता है कि इनके मकड़जाल में फंस जाती है। अगर गहराई से देखा जाए तो मुसलमानों के असली दुश्मन ये ही लोग हैं। उधर बंगाल में देखा किस तरह ममता बनर्जी ने हिन्दुओं को बीजेपी का साथ देने पर मुसलमानों की धमकी दी। क्या मुसलमान इंसान नहीं? क्यों उनको बहशी, बलात्कारी और मवालिओं की तरह दिखाकर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है?  

राजधानी दिल्ली के जामिया नगर में एक दलित हिंदू युवती के साथ मजहबी हैवानियत और जबरन धर्मांतरण का ऐसा खौफनाक खेल खेला गया, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। सोशल मीडिया पर ‘साहिल’ बनकर मेरठ के फहीम ने पहले हिंदू युवती को प्रेमजाल में फँसाया, फिर किडनैप कर उसका जीवन नर्क बना दिया।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित फहीम, उसके अम्मी-अब्बू (तस्लीम-खुर्शीद), भाई और मौलवी (जैद और मोहम्मद खालिद) सहित 5 दरिंदों को जेल में डाला है, जबकि दो आरोपित अभी भी फरार हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि नवंबर 2021 में इंस्टाग्राम पर साहिल नाम के लड़के ने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी।

धीरे-धीरे दोस्ती गहरी हुई तो मार्च 2022 में उसने लड़की को दिल्ली के बाटला हाउस बुलाया। साहिल ने हिंदू युवती को अपनी बातों में फँसाकर दोस्त के फ्लैट पर ले गया। वहाँ युवती को नशीला जूस पिलाया गया।

होश आने पर पता चला कि साहिल और उसके दोस्त ने मिलकर उसका रेप किया था। उन्होंने रेप करते हुए का Video भी बना लिया और वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगे। इसके बाद आरोपित साहिल ने दोबारा हिंदू युवती को दिल्ली बुलाया।

इस बार उसने सरेआम पिस्टल तान दी और डरा-धमकाकर उसे मेरठ के सठला गाँव ले गया। वहाँ पहुँचकर युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिसे वह साहिल समझ रही थी, वह असल में मुसलमान था और उसका असली नाम फहीम था।

उसी रात फहीम और उसके अब्बू खुर्शीद ने हिंदू युवती के साथ जबरदस्ती की। जब हिंदू पीड़िता ने भागने की कोशिश की, तो फहीम की अम्मी तस्लीम और बहन ने उसे बेरहमी से पीटा और बंधक बना लिया।

‘हिंदू लड़की लाओ, जन्नत जाओ’, मदरसे में जबरन निकाह और गोमांस का टॉर्चर

हैवानियत यहीं नहीं रुकी। फहीम की अम्मी तस्लीम और बहन हिंदू युवती को एक मदरसे में ले गईं। वहाँ मौजूद मौलवी (मोहम्मद खालिद) ने हिंदू युवती से कहा, “तू खुशनसीब है कि मुसलमान के घर आ गई, अब तुझे जन्नत मिलेगी।”

इसके बाद जबरन उसका निकाह फहीम से करा दिया गया। घर लाकर उसे पाँचों वक्त की नमाज पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाने लगा। उसे जबरदस्ती गोमांस खाने को दिया जाता था। विरोध करने पर उसके सामने जिंदा मुर्गा काटकर उसका खून युवती के ऊपर छिड़क दिया जाता था।

‘कितने लोग कमरे में आए गिनती याद नहीं’, पैसे लेकर सास कराती थी धंधा

निकाह के बाद हिंदू युवती के साथ जो हुआ, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। हिंदू पीड़िता ने रोते हुए बताया कि निकाह के बाद मौलवी (मोहम्मद खालिद) आए दिन उसके कमरे में आने लगा और जोर-जबरदस्ती करता था। जब युवती ने चीख-पुकार मचाई, तो मौलवी ने हँसते हुए कहा, “यह सब फ्री में नहीं होता, तेरी सास को इसके पैसे देते हैं।”

तब पीड़िता को समझ आया कि उसकी सास ही उससे जिस्मफरोशी का धंधा करवा रही थी। उसकी सास कहती थी कि हिंदू लड़की लाने का मतलब जन्नत का रास्ता साफ करना है। वह अपने बाकी बेटों को भी हिंदू लड़कियाँ फँसाकर लाने को कहती थी।

प्रधान ने बदलवाया आधार कार्ड, तंग आकर ट्रेन के आगे कूदने जा रही थी युवती

हताश और बेबस युवती 3 महीने बाद प्रेग्नेंट हो गई। गाँव के प्रधान फिरोज ने मिलीभगत करके पीड़िता के आधार कार्ड पर पिता का नाम हटवाकर जबरन फहीम का नाम दर्ज करवा दिया। मार्च 2023 में उसने एक बेटी को जन्म दिया। नवंबर 2024 में फहीम उसे लेकर वापस दिल्ली आया, जहाँ जनवरी में वह हथियारों की तस्करी के मामले में जेल चला गया।

इसके बाद जब युवती अपने मायके पहुँची, तो वहाँ से भी उसे दुत्कार मिला। हर तरफ से हारी-थकी पीड़ित बेटी 10 मई को अपनी 3 साल की बच्ची को लेकर ट्रेन के आगे कूदकर जान देने जा रही थी, तभी एक अजनबी ने उसकी जान बचाई और हिम्मत दी। इसके बाद जामिया नगर थाने में FIR दर्ज कराई गई। पुलिस फिलहाल मामले की गहन जाँच कर रही है।

पंचमुखी हनुमान : अगर हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण नहीं किया होता लंका पर विजय नहीं होती


रामायण का वह रहस्य जिसके बिना शायद लंका विजय कभी पूरी ही नहीं होती। अगर उस एक भयावह रात पवनपुत्र हनुमान ने अपना दिव्य पंचमुखी स्वरूप धारण नहीं किया होता, तो संभव है कि अधर्म की विजय हो जाती और संसार एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ जाता जहां मर्यादा, धर्म और सत्य की ज्योति हमेशा के लिए बुझ जाती। यह केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, यह उस क्षण की कथा है जब स्वयं समय ठहर गया था और एक भक्त ने अपने प्रभु की रक्षा के लिए अपनी समस्त दिव्य शक्तियों का आवाहन किया था।

लंका का युद्ध अपने अंतिम और सबसे निर्णायक चरण में पहुंच चुका था। रावण के एक-एक महारथी का अंत हो चुका था। मेघनाद, कुंभकर्ण और उसके अनेक पराक्रमी योद्धा युद्धभूमि में परास्त हो चुके थे। हर दिन रावण का साम्राज्य कमजोर होता जा रहा था और श्रीराम की विजय निश्चित दिखाई देने लगी थी। लेकिन रावण केवल बलवान ही नहीं था, वह अत्यंत चतुर और मायावी भी था। जब उसे समझ में आ गया कि साधारण युद्ध में वह श्रीराम को पराजित नहीं कर सकता, तब उसने अपनी अंतिम और सबसे भयानक चाल चलने का निश्चय किया।
रात का समय था। लंका के एक गुप्त कक्ष में बैठा रावण गहरी चिंता में डूबा हुआ था। तभी उसे अपने पुराने मित्र और पाताल लोक के अधिपति अहिरावण का स्मरण हुआ। अहिरावण कोई साधारण राक्षस नहीं था। वह तंत्र, मंत्र, मायावी शक्तियों और काले जादू का ऐसा महाज्ञाता था जिसके सामने बड़े-बड़े देवता भी सावधान रहते थे। कहा जाता था कि उसने ऐसी रहस्यमयी विद्याओं में सिद्धि प्राप्त कर ली थी जिनका ज्ञान स्वयं असुरों के बीच भी दुर्लभ था।
रावण ने तुरंत उसका आह्वान किया। कुछ ही क्षणों में पाताल लोक की गहरी अंधकारमयी शक्तियों से घिरा हुआ अहिरावण वहां प्रकट हुआ। उसकी आंखों में विचित्र चमक थी और उसके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान खेल रही थी। रावण ने उससे कहा, "मित्र, अब मेरी सारी आशाएं तुम पर टिकी हैं। यदि राम और लक्ष्मण जीवित रहे तो मेरा अंत निश्चित है। किसी भी प्रकार उन्हें मेरे मार्ग से हटाना होगा।"
अहिरावण ने कुछ क्षण ध्यान लगाया और फिर हंसते हुए बोला, "लंकेश, चिंता मत करो। मैं ऐसी योजना बनाऊंगा कि किसी को कुछ समझने का अवसर भी नहीं मिलेगा। सूर्योदय होने से पहले राम और लक्ष्मण मेरे होंगे।"
उधर समुद्र तट पर वानर सेना युद्ध की थकान के बाद विश्राम कर रही थी। चारों ओर शांति थी। लेकिन वह शांति किसी बड़े तूफान से पहले की निस्तब्धता थी। आधी रात के समय अहिरावण अपनी मायावी शक्तियों के साथ वहां पहुंचा। उसने ऐसे मंत्रों का उच्चारण किया कि पूरी वानर सेना गहरी निद्रा में डूब गई। यहां तक कि कई वीर योद्धाओं को भी उसकी उपस्थिति का आभास तक नहीं हुआ।
अहिरावण ने विभीषण का रूप धारण किया और सुरक्षा घेरा पार कर सीधे उस स्थान तक पहुंच गया जहां श्रीराम और लक्ष्मण विश्राम कर रहे थे। उसने अपने मायाजाल से दोनों भाइयों को अचेत किया और उन्हें लेकर पाताल लोक की ओर निकल पड़ा। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि किसी को कुछ समझने का अवसर ही नहीं मिला।
सुबह जब वानर सेना जागी तो पूरे शिविर में हाहाकार मच गया। श्रीराम और लक्ष्मण कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। सभी दिशाओं में खोज शुरू हुई। सुग्रीव, अंगद, जाम्बवान और अन्य सभी वीर चिंतित थे। तभी विभीषण ने ध्यान लगाकर सत्य का पता लगाया और गंभीर स्वर में बोले, "यह कार्य केवल एक ही व्यक्ति कर सकता है — पाताल लोक का राजा अहिरावण।"
यह सुनते ही हनुमान जी की आंखों में अग्नि प्रज्वलित हो उठी। उनके लिए श्रीराम केवल राजा नहीं थे। वे उनके प्राण, उनके आराध्य और उनके समस्त अस्तित्व का केंद्र थे। उन्होंने बिना एक क्षण गंवाए पाताल लोक की ओर प्रस्थान किया।
पाताल लोक का मार्ग अत्यंत भयावह था। वहां चारों ओर अंधकार, विषैले जीव और रहस्यमयी शक्तियां विचरण कर रही थीं। लेकिन हनुमान जी के साहस के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकी। वे हर संकट को पार करते हुए अंततः अहिरावण के महल तक पहुंच गए।
महल के भीतर जो दृश्य उन्होंने देखा, उसे देखकर उनका हृदय क्रोध से भर उठा। विशाल यज्ञ वेदी के सामने श्रीराम और लक्ष्मण मजबूत नागपाशों में बंधे हुए थे। चारों ओर तांत्रिक मंत्रों का उच्चारण हो रहा था। राक्षस उत्सव मना रहे थे क्योंकि उन्हें विश्वास था कि अब उनकी विजय निश्चित है।
तभी हनुमान जी की दृष्टि एक विचित्र रहस्य पर पड़ी। पांच अलग-अलग दिशाओं में पांच दीपक जल रहे थे। पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और आकाश की ओर स्थित उन दीपकों से अद्भुत ऊर्जा निकल रही थी। तभी अहिरावण जोर से हंसा और बोला, "वानर, तू बहुत देर से आया है। जब तक ये पांचों दीपक एक साथ नहीं बुझेंगे, तब तक मेरी मृत्यु असंभव है। मेरी प्राणशक्ति इन्हीं में सुरक्षित है।"
यह सुनकर हनुमान जी कुछ क्षण विचार में डूब गए। पांचों दीपक इतनी दूर-दूर स्थित थे कि उन्हें एक साथ बुझाना लगभग असंभव था। लेकिन यह वह समय था जब केवल बल पर्याप्त नहीं था। यहां दिव्य शक्ति और बुद्धि दोनों की आवश्यकता थी।
तभी हनुमान जी ने अपने भीतर स्थित पंचदेव शक्तियों का आवाहन किया। अगले ही क्षण उनका शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगा उठा। उनके एक नहीं, पांच मुख प्रकट हो गए।
पूर्व दिशा में स्वयं हनुमान का वानर मुख था जो अदम्य साहस और भक्ति का प्रतीक था।
दक्षिण दिशा में भगवान नरसिंह का उग्र मुख प्रकट हुआ जो अधर्म के विनाश की शक्ति था।
पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख प्रकट हुआ जो विष और नाग शक्तियों का नाश करने वाला था।
उत्तर दिशा में भगवान वराह का मुख प्रकट हुआ जो पृथ्वी और धर्म की रक्षा का प्रतीक था।
और ऊपर आकाश की ओर भगवान हयग्रीव का दिव्य मुख प्रकट हुआ जो ज्ञान और दिव्य चेतना का स्वरूप था।
पंचमुखी हनुमान का वह विराट रूप इतना तेजस्वी था कि पूरा पाताल लोक कांप उठा। राक्षस भय से थर-थर कांपने लगे। स्वयं अहिरावण के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
अगले ही क्षण हनुमान जी ने अपने पांचों मुखों से एक साथ प्रचंड वायु प्रवाहित की। वह दिव्य वायु इतनी शक्तिशाली थी कि पांचों दिशाओं में स्थित दीपक एक ही क्षण में बुझ गए।
दीपक बुझते ही अहिरावण की सारी मायावी शक्तियां समाप्त हो गईं। उसका अभेद्य तिलिस्म टूट गया। उसके मंत्र निष्प्रभावी हो गए और उसका शरीर कमजोर पड़ने लगा।
हनुमान जी ने अवसर देखते ही अपने दिव्य पराक्रम से उस अधर्मी का अंत कर दिया। पूरी यज्ञ वेदी कांप उठी। पाताल लोक में गूंजती उसकी भयावह हंसी सदा के लिए शांत हो गई।
इसके बाद हनुमान जी ने श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया। जैसे ही दोनों भाइयों ने अपने प्रिय भक्त को उस दिव्य पंचमुखी स्वरूप में देखा, उनके मुख पर प्रसन्नता की मुस्कान आ गई। श्रीराम ने प्रेमपूर्वक कहा, "हनुमान, तुम्हारी भक्ति के कारण ही धर्म की यह ज्योति आज सुरक्षित है।"
हनुमान जी ने विनम्रता से सिर झुका दिया। उनके लिए यह विजय उनकी नहीं थी। यह उनके प्रभु की कृपा थी।
यही कारण है कि पंचमुखी हनुमान को आज भी पांचों दिशाओं के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि उनका यह स्वरूप हर प्रकार के भय, तंत्र-मंत्र, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से अपने भक्तों की रक्षा करता है। यह कथा हमें सिखाती है कि जब भक्ति सच्ची हो और उद्देश्य धर्म की रक्षा हो, तब असंभव भी संभव हो जाता है।
और शायद यही कारण है कि आज भी करोड़ों भक्त विश्वास के साथ कहते हैं — जहां राम का नाम है, वहां हनुमान हैं, और जहां हनुमान हैं, वहां किसी भी संकट का टिक पाना असंभव है।
जय श्रीराम।
जय बजरंगबली।
जय पंचमुखी हनुमान।