नासिक TCS कांड में मुस्लिम गैंग को बचाने के लिए नई 'जमात' एक्टिव (साभार : ChatGPT)
हिन्दुओं और समस्त हिन्दू संगठनों को भी कट्टरपंथियों की तरह एकजुट होकर work jehadi के विरुद्ध सिर्फ खड़ा होना होगा बल्कि जनता को जिहाद का समर्थन कर रही पार्टियों का धूल चटवाने के लिए खड़ा करना होगा। जब तक जेहादियों को कालनेमि हिन्दुओं द्वारा समर्थन दिया जाता रहेगा हिन्दू अपमानित होता रहेगा। दंगा होता है तो बाहरी आकर करते हैं लेकिन पुलिस के हत्ते चढ़ते स्थानीय। जनता, हिन्दू स्वयंसेवी संगठन और अदालतों को ऐसे मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा। इनके victim card को कूड़ेदान में फेंक सख्ती से पेश आना होगा।
नासिक TCS कांड को लेकर पिछले दिनों पूरे देश में हल्ला मचा, लेकिन वामपंथियों की कान में जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने पहले इस मामले में लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी और फिर जब बोले तो सीधा मुस्लिम आरोपितों के बचाव पर उतर आए। अब स्थिति ये है कि इस मामले को दबाने के लिए एक नई जमात को एक्टिव किया गया है जो इस खबर में नए-नए एंगल लाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। कैसे आइए बताते हैं?
अभी तक मीडिया में आप हिंदू पीड़ितों के साथ हुए अत्याचार की खबरों को पढ़ रहे थे। मगर अब इस केस को ऐसा बनाया जा रहा है कि आपके मन में या तो मुस्लिमों आरोपितों की पीड़ित वाली छवि बने या फिर आपको ये लगे कि कहीं हिंदू ही इस मामले को बेवजगह तूल देकर किसी बेचारे को फँसा तो नहीं रहे है।
प्रेग्नेंसी और संवेदना का पुराना खेल: निदा खान और सफूरा जरगर का ‘विक्टिम’ कनेक्शन
नासिक कांड में कथित तौर पर निदा खान को HR हेड कहा जा रहा है, जिसकी भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि निदा खान न केवल इस पूरे गिरोह की जानकारी रखती थी, बल्कि जब पीड़ित हिंदू महिलाओं ने उसके पास शिकायतें भेजीं, तो उसने कोई एक्शन लेने के बजाय उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि ‘ऑफिसों में यह सब चलता है।’ अब जब पुलिस का शिकंजा कसा, तो निदा खान फरार हो गई और अचानक कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए ‘प्रेग्नेंसी’ का तर्क सामने रख दिया। सोशल मीडिया पर एक विशेष जमात ने तुरंत यह शोर मचाना शुरू कर दिया कि एक ‘गर्भवती महिला’ को पुलिस और मीडिया परेशान कर रहा है।
Here comes the lawyer of Nida Khan: TCS Nashik Jihad Case
— Subhi Vishwakarma (@subhi_karma) April 17, 2026
From the "Relationship gone wrong" article, to the wife of one of the accused saying "Her husband is innocent and is being falsely accused," to the statement of the accused’s father saying "We are educated and my son is a… pic.twitter.com/QxVObYYN7H
यह ठीक वैसा ही नैरेटिव है जैसा 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय देखा गया था। उस वक्त मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल सफूरा जरगर ने भी जेल से बचने के लिए अपनी प्रेग्नेंसी का हवाला दिया था। तब भी लिबरल गिरोह ने छाती पीटते हुए सफूरा को ‘बेचारी छात्रा’ और ‘स्कॉलर’ बताया था, जबकि उस पर UAPA जैसी गंभीर धाराओं के तहत सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप था। निदा खान हो या सफूरा, ये लोग जानते हैं कि भारतीय समाज में प्रेग्नेंसी एक संवेदनशील विषय है, इसलिए वे अपने अपराधों की गंभीरता को कम करने के लिए इसे ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।
‘मेरी बहू सुंदर है तो बेटा क्यों भटकेगा?’: आरोपित की अम्मी का इमोशनल ड्रामा
नासिक TCS कांड के मुख्य आरोपित दानिश शेख की गिरफ्तारी के बाद उसकी अम्मी का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें वह फूट-फूटकर रोते हुए अपने बेटे को ‘बेगुनाह’ साबित करने पर तूली है। आरोपित की अम्मी ने तर्क दिया कि उनका बेटा बहुत अच्छा इंसान है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
सबसे अजीबोगरीब दलील जो उन्होंने दी, वो यह थी कि ‘मेरी बहू इतनी सुंदर है, मेरा बेटा किसी और के पीछे क्यों जाएगा?’ यह तर्क देकर उन्होंने उन सभी महिलाओं के आरोपों को सिरे से खारिज करने की कोशिश की जिन्होंने दानिश पर गंभीर यौन शोषण और रेप के आरोप लगाए हैं।
आरोपित दानिश की अम्मी का कहना है कि उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है और उनकी बहू डिप्रेशन में है। वह धर्मांतरण के आरोपों पर कहती हैं कि ‘धर्मांतरण ऐसे नहीं होता, ये काम तो सिर्फ मौलवी करते हैं।’ लेकिन पुलिस की जाँच और दर्ज की गई 9 FIR कुछ और ही कहानी बयाँ करती हैं। जाँच में सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क था जहाँ हिंदू लड़कियों पर मानसिक दबाव बनाया गया, उन्हें बीफ खाने को मजबूर किया गया और धार्मिक टिप्पणियाँ की गईं। अम्मी के आँसू अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन वे उन पीड़ित लड़कियों के आँसुओं का जवाब नहीं हैं जिनका शोषण ऑफिस की आड़ में किया गया।
मौलाना और ‘स्क्रिप्टेड’ साजिश: जब कुछ न मिले तो बजरंग दल को कोस दो
इस मामले में एक और एंगल आरोपितों के रिश्तेदारों और मौलानाओं की तरफ से सामने आया। आरोपित रजा मेमन के चाचा रजाक काजी का दावा है कि यह सब कुछ एक ‘साजिश’ है और इसमें बजरंग दल शामिल है। उनका कहना है कि लड़कियों के परिवारों ने बजरंग दल को बुलाया और उनके दबाव में आकर पुलिस ने यह पूरा ‘स्क्रिप्ट’ तैयार किया।
#WATCH | Maharashtra | Nashik TCS alleged religious conversion and sexual harassment | Accused Raza Memon's uncle Razak Kazi says, "All the families are troubled. Everything is happening as per a conspiracy... The Bajrang Dal are involved in this... The girl's family called… pic.twitter.com/RcyI4ZPwHS
— ANI (@ANI) April 16, 2026
यह एक जाना-पहचाना पैंतरा है, जब भी कोई मुस्लिम आरोपित पकड़ा जाता है, तो उसे ‘मुस्लिम होने की सजा’ या ‘दक्षिणपंथी संगठनों की साजिश’ करार देकर असल अपराध से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है। काजी का कहना है कि पुलिस ने पहले एक व्यक्ति को छोड़ा और फिर दोबारा गिरफ्तार कर लिया, जिससे साबित होता है कि सबकुछ पहले से तय था।
लेकिन वे इस बात का जवाब नहीं देते कि अगर सबकुछ स्क्रिप्टेड था, तो मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुए उन बयानों का क्या, जिनमें महिलाओं ने आपबीती सुनाई है? नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के अनुसार, यह मामला एक संगठित नेटवर्क जैसा है जिसमें 18 से 25 साल की लड़कियों को निशाना बनाया गया। मौलानाओं और आरोपितों के रिश्तेदारों द्वारा बजरंग दल का नाम लेना केवल मामले को सांप्रदायिक मोड़ देने की कोशिश है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘मुस्लिम उत्पीड़न’ का रोना रोया जा सके।

