ध्रुव राठी-पाकिस्तानी-बांग्लादेशी गठजोड़ का प्लान लीक! भारत को फ्रांस-इटली की तरह जलाने की तैयारी

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली बार सरकार बनते ही कांग्रेस पार्टी के नेता रिजीम चेंज करने की कोशिशों में लग गए थे। नवंबर 2015 में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान के निजी न्यूज चैनल ‘दुनिया टीवी’ के एक पैनल डिस्कशन में शामिल हुए थे। इस चर्चा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान से अपील की थी, “सबसे पहले मोदी को हटाओ और हमें बातचीत फिर से शुरू करने का मौका दो। हमें (कांग्रेस को) वापस सत्ता में लाओ और उन्हें हटाओ।” 2015 से लेकर अब तक कई बार प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने की कोशिशें हो चुकी हैं। हाल के दिनों में दिल्ली से लेकर लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर तक जो कुछ देखने को मिला, वो भारत में रिजीम चेंज करने वाले ‘विदेशी टूलकिट’ का हिस्सा है। ध्रुव राठी का दिल्ली से लंदन पहुंच कर प्रदर्शन करना बताता है कि मोदी सरकार विरोधी ताकतों का भारत में कोई जनाधार नहीं है। जनता उनके बहकावे में आने वाली नहीं है। इसलिए उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश की मदद लेनी पड़ रही है।

लंदन प्रदर्शन में ज्यादातर पाकिस्तानी और बांग्लादेशी 
दरअसल, 17 अक्टूबर को लंदन में एसआईआर के खिलाफ भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुआ। भारत में स्थित ध्रुव राठी के समर्थक खुश है कि लंदन के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। ध्रुव राठी के समर्थकों ने इसे सरकार विरोधी नैरेटिव की एक बड़ी सफलता के रूप में प्रचारित किया और सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी उत्साह दिखाया। हालांकि इस प्रदर्शन को ध्रुव राठी के व्यक्तिगत प्रभाव के रूप में दिखाया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इस प्रदर्शन में भारत के लोगों की तुलना में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी शामिल थे। उनकी उपस्थिति बता रही है कि यह प्रदर्शन आईएसआई के निर्देशन में ध्रुव राठी के पाकिस्तानी और बांग्लादेशी दोस्तों ने आयोजित किया था।

ध्रुव राठी के आस-पास पाकिस्तानी और बांग्लादेशी
जब प्रदर्शन में शामिल एक-एक चेहरे की पड़ताल की गई, तो चौकाने वाले खुलासे हुए। ध्रुव राठी के आस-पास जो चेहरे थे, वो पाकिस्तानी और बांग्लादेशी थे। ध्रुव राठी के बगल में मौजूद ऐसे दो लोगों की तस्वीरें सामने आई हैं। एक तस्वीर में एक व्यक्ति, जिसने लाल जैकेट के साथ टोपी पहन रखी है। दूसरा, जिसने ब्लू स्वेटर पहन रखा है और कान में एक छोटा-सा डिवाइस लगाया हुआ है। इन दो लोगों का परिचय जानकर हैरान रह जाएंगे। सोशल मीडिया में किए जा रहे दावे के मुताबिक टोपी वाले व्यक्ति का नाम है वक़ार अहमद है। ये कोई भारतीय नहीं, बल्कि मुरीदके का रहने वाला एक पाकिस्तानी नागरिक हैं। यह महज़ एक सप्ताह पहले ही इंग्लैंड पहुंचा था। स्वेटर पहने अधेड़ व्यक्ति का नाम जमशेद बाजवा हैं। ये भी पाकिस्तानी-ब्रिटिश नागरिक हैं और पहले भी खालिस्तान समर्थक व भारत-विरोधी प्रदर्शनों में इसकी स्पष्ट भूमिका रही है।

ध्रुव राठी के साथ पाकिस्तानी न्यूज चैनल के रिपोर्टर
पाकिस्तान और आईएसआई के लिए काम करने वाले ‘ARY न्यूज़’ के रिपोर्टर फरीद अहमद को लंदन में ध्रुव राठी के साथ देखा गया। फ़रीद अहमद 2014 से पाकिस्तान के प्रमुख न्यूज चैनल ‘ARY न्यूज़’ के यूके स्थित रिपोर्टर के रूप में काम कर रहा है। 17 अक्टूबर को लंदन में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास हुए प्रदर्शन के दौरान उनकी उपस्थिति और यूट्यूबर ध्रुव राठी के पास खड़े होने की तस्वीरें सामने आने के बाद स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान की मीडिया भी भारत को बदनाम करने में लगी है। भारत के वामपंथी और सेकुलर गैंग के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त और पूरी चुनाव प्रणाली के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, ताकि भारत की निर्वाचित सरकार को अवैध साबित किया जा सके।

लंदन में पाकिस्तानी झंडे के साथ भारत-विरोधी गैंग
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को लंदन प्रोटेस्ट का वीडियो शेयर कर निशाना साधा है। अपने पोस्ट में किरेन रिजिजू ने लिखा कि, ‘लंदन में कांग्रेस पार्टी के झंडे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान के झंडों के साथ! इन लोगों को लगता है कि लंदन में भारत विरोधी गैंग के जमावड़े देशभक्त भारतीयों को डरा देंगे।’ बता दें कि, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने पोस्ट में जो विडियो शेयर किया,उस पर लिखा था.. ‘लंदन में भारत-विरोधी सभी गैंग एक ऐसे यूट्यूबर के इशारे पर काम करते हैं, जो खुद को भारतीय बताता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।’

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पाकिस्तानी नागरिक आमिर हाशमी का वीडियो शेयर किया है। आमिर हाशमी ने इस प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उसने अपने इंस्टाग्राम हैंडल amir.hashmi22 पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार राजनीति के माध्यम से भारत और पाकिस्तान को विभाजित नहीं कर सकती। हालांकि हाशमी ने जो वीडियो शेयर किया है वो पुराना (अगस्त 2026) प्रतीत होता है, लेकिन प्रदर्शन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने वाली उसकी सोशल मीडिया पोस्ट हाल ही की है।

प्रदर्शन में शामिल इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन का भारत विरोधी इतिहास
लंदन प्रदर्शन में इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन, ग्रेट ब्रिटेन (IWA-GB) भी शामिल था। यह एक वामपंथी झुकाव वाला संगठन है जो ब्रिटेन में अपने लाल झंडे के साथ भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। सितंबर 2026 में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे के दौरान, IWA (Great Britain) ने ‘साउथ एशियन सॉलिडैरिटी ग्रुप’, ‘यूके इंडियन मुस्लिम काउंसिल’ और ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ के साथ मिलकर लंदन में भारी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस पर फासीवादी और अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के पारित होने के बाद, IWA ने ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीयों, छात्रों और मानवाधिकार संगठनों के साथ मिलकर लंदन में भारतीय उच्चायोग और संसद के बाहर प्रदर्शन किए थे। साल 2019 में जब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया, तब भी IWA ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।

प्रदर्शन में शामिल बांग्लादेशी नागरिक का बड़ा खुलासा
एसआईआर प्रकिया उन लोगों के लिए परेशानी पैदा करने वाला है, जो बिना वैध दस्तावेजों, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद या अवैध रास्तों से प्रवेश कर भारत में रह रहे हैं। दरअसल, उन पर कानूनी कार्रवाई और देश से बाहर निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है। इसलिए ऐसे लोगों में एसआईआर को लेकर खलबली मची है। ध्रव राठी के प्रदर्शन में शामिल एक बांग्लादेशी नागरिक ने हैरान करने वाला खुलासा किया। The Fauxy से बात करते हुए बांग्लादेशी नागरिक ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में उनके परिवार के लोगों का नाम था, लेकिन एसआईआर की वजह से उनका नाम कट गया है।

ध्रुव राठी के प्रदर्शन में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी झंडे
विदेशी धरती पर एसआईआर के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में अपने-अपने देश के झंडे के साथ बाग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिकों का शामिल होना भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का स्पष्ट प्रमाण है। विदेशी नागरिकों या मीडिया कर्मियों द्वारा इसमें रुचि दिखाना बताता है कि उनके हित कैसे प्रभावित हो रहे हैं। वो कांग्रेस और वामपंथी संगठनों को समर्थन दे रहे हैं ताकि उनके जो रिश्तेदार भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, उनकी सुरक्षा हो सके। इसलिए एसआईआर प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय रंग देकर भारत की आंतरिक व्यवस्था को अस्थिर करने या दबाव बनाने की साजिश हो रही है। यहां तक कि बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और इटली की तरह जलाने की कोशिशें हो रही हैं। इसे देश की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील घटना माना जा रहा है।

SIR पर ‘जन गण मन’, आतंकवादी घटनाओं पर मौन
पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक अपने झंडे के साथ भारत का राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ गाकर एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं। लेकिन राष्ट्र की संप्रभुता, आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर इस तरह की मुखर एकजुटता अक्सर नदारद रहती है। जब भी भारत को सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद, उग्रवादी हमलों या देश के सुरक्षा बलों (सेना और अर्धसैनिक बलों) पर हमलों का सामना करना पड़ता है, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या पड़ोसी देश के नागरिकों/मंचों से उस प्रकार की एकजुटता और निंदा देखने को नहीं मिलती। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि ऐसे समूहों की प्राथमिकताएं वास्तव में लोकतंत्र के प्रति हैं या फिर भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के प्रति। लंदन में हुए प्रदर्शन और उसमें बाहरी तत्वों की उपस्थिति ने इस बहस को और गहरा कर दिया है कि घरेलू राजनीतिक विरोध की आड़ में किस तरह से राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को पीछे धकेल दिया जाता है। लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन जब यह विरोध ऐसे मंचों और माध्यमों से होने लगे जहां बाहरी और अवांछित ताकतों को हस्तक्षेप करने का अवसर मिले, तो यह देश की संप्रभुता के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

OIC जम्मू कश्मीर पर बोलने से पहले अपने खुदा के घर सऊदी अरब को बचाए तो बेहतर होगा

सुभाष चन्द्र

ये 57 इस्लामिक देशों का संगठन OIC (Organisation of Islamic Countries) अपनी हर बैठक में भारत के जम्मू कश्मीर पर जहर उगलता है और अबकी बार भारत के अल्पसंख्यकों और इस्लामिक फोबिया पर भी बकबक की। यह संगठन पाकिस्तान को भाव देता है और उसके उकसावे में भारत के खिलाफ टीका टिप्पणी करता है। मजे की बात कि इसके कई सदस्य देशों की भारत के साथ मित्रता है और वे भारत से व्यापार करते हैं। अनेक इस्लामिक देशों में भारतीय काम करते हैं।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
UAE की आबादी में 35 से 38%, कतर में 21 से 25%, बहरीन में 30 से 40% और कुवैत, ओमान और सऊदी अरब में 10 से 15% भारतीय हैं जो इन देशों की प्रगति में योगदान करते हैं जबकि न केवल पाकिस्तान खुद दुनिया भर में भीख मांगता है, बल्कि उसके नागरिक भी सऊदी अरब और UAE में भीख मांगने के अपराध में निष्कासित किए जा चुके हैं। 

इस पाकिस्तान को दुनिया की 10 शीर्ष भुखमरी से जूझ रहे देशों में शामिल किया गया। यह पाकिस्तान हमारा कब्जाया हुआ POJK तो संभाल नहीं पा रहा लेकिन नज़रें हमारे जम्मू कश्मीर पर हैं जिसके लिए 4 युद्ध लड़ कर मार खा चुका है। इस पाकिस्तान को OIC इतना भाव क्यों दे रहा है?

भारतीय विदेश मंत्रालय ने OIC के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए OIC के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि “OIC पाकिस्तान का हथियार न बने। OIC की भारत के बारे में की गई टिप्पणियां “दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और झूठी हैं जो पाकिस्तान के इशारे पर की गई हैं”।

भारत ने यह भी कहा है कि “OIC को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और राजनीतिक मकसद से किया जाने वाला दुष्प्रचार इस हकीकत को कभी नहीं बदल सकता”।

OIC को भारत पर बोलने से पहले पाकिस्तान के खुद के हालात देखने चाहिए जिसके पास लोगों को देने के लिए भोजन नहीं है लेकिन भारत में दंगा फसाद करने के लिए ISI 1300 करोड़ का बजट रखता है। कभी OIC बलूचिस्तान को भी देखे और POJK में हो रहे नरसंहार को देखे। वहां चल रहा है पाकिस्तान का असली इस्लामिक फोबिया।

OIC ने ईरान से कभी कुछ नहीं कहा जिसने मिडिल ईस्ट के सभी इस्लामिक देशों पर हमले किए और अब हूती सऊदी अरब को बर्बाद करने में लगे हैं जहां से इस्लाम शुरू हुआ। सऊदी अरब का मक्का मदीना ही ख़तम हो गए तो इस्लाम तो स्वतः ही ख़त्म हो जाएगा। मक्का समझौते के बावजूद OIC का प्रिय पाकिस्तान और तुर्की सऊदी अरब की मदद करने को तैयार नहीं हैं, मतलब समझौता कर अपनों को ही धोखा दे रहे हैं।

OIC यह भी देखे कि आज डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान में पिछले 6 महीनों में 75,000 प्रदर्शनकारी मार दिए गए। वो है असली इस्लामिक फोबिया।

इस्लामिक फोबिया का नज़ारा तो यूरोप के कई देशों में दिखाई दे रहा है। OIC को अगर भारत में अल्पसंखयक सुरक्षित नहीं लगते तो अपने 57 देशों में ले जाए लेकिन ये काम OIC कभी नहीं करेगा क्योंकि वो तो इस्लामिक देशों के गरीब शरणार्थियों को भी अपने किसी देश में पनाह नहीं देता। 

यूरोपीय देशों को आग लगाने वाले मुस्लिम शरणार्थी ही हैं जो अब उन देशों की अर्थी निकाल रहे हैं

सुभाष चन्द्र

सीरिया के गृहयुद्ध के समय एक बच्चे की फोटो दुनिया भर में वायरल की गई जिसके आधार पर यूरोपीय देश पिघल गए और लाखों लोगों को अपने यहां शरण दी और शरणार्थी का दर्जा दिया और वो ही शरणार्थी उन्हीं शरण देने वाले देशों की अर्थी निकाल रहे हैं। लेकिन याद रहे किसी इस्लामिक देश ने सीरिया से लोगों को अपने यहां रहने की जगह नहीं दी।

एक पैटर्न सामने नज़र आ रहा है कि हर देश में जहां भी आग लगी, वहां फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया है चाहे वो इटली की पीसा टावर हो, फ्रांस की एफिल टावर हो या 143 साल पुराना टाउन हॉल, इंग्लैंड की सड़कें, भारत का जंतर मंतर या प्रियंका वाड्रा का बैग हो - ओवैसी ने तो “जय फिलिस्तीन” का नारा लगा दिया।

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
इस पैटर्न को देख कर कोई भी समझ सकता है कि इन देशों में आग लगाने के पीछे सीधा बेशक फिलिस्तीन न हो लेकिन उसकी आड़ में हमास और उसकी साथी संगठन रहे हैं। लेकिन गलती किसकी है?

यूरोप के लगभग सभी 27 देश इज़रायल को दरकिनार कर फिलिस्तीन का साथ देते हैं। वो फिलिस्तीन का साथ नहीं दे रहे बल्कि उसके नाम पर हमास को परोक्ष समर्थन दे रहे हैं। ये देश फिलिस्तीन और इज़रायल के बीच Two State Solution का समर्थन करते हैं जबकि भूल जाते हैं कि इज़रायल इन यूरोपीय देशों के कुछ काम आ सकता जबकि फिलिस्तीन की आड़ में दुनिया भर में मुस्लिम हमास के पीछे चल कर आग लगा सकते हैं जैसे अभी हो रहा है। लेकिन सब्र रखो, ये मुस्लिम समुदाय के हूती ही ईरान के साथ अल्लाह के घर सऊदी अरब को भी आग लगा रहे हैं।

Germany, France, Italy, Belgium, Spain और Belgium ने ईरान युद्ध में डोनाल्ड ट्रंप का साथ नहीं दिया। कोई बड़ी बात नहीं होगी कि इन सभी देशों में Deep State, George Soros के साथ मिलकर तख्ता पलट की कोशिश कर रहा हो।

लेकिन एक बात डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका को समझ लेनी चाहिए कि जिस तरह इस्लामिक ताकतें अमेरिका में पैर पसार रही हैं, उनका अगला निशाना अमेरिका भी हो सकता है। जैसे यूरोप के देश आज जल रहे हैं, कल को अमेरिका भी जल सकता है। ट्रंप ने फ्रांस के साथ आज कुछ सहानुभूति प्रकट की है लेकिन वह बेमानी है, उसे अपने प्रशासन को देखना चाहिए वो क्या कर रहा है?

अमेरिका के Vice President JD Vance ने भारतीयों को लेकर घटिया टिप्पणी करते हुआ कहा “ H-1B visa workers as “indentured servants” and referred to certain tech practices as “visa mills” while defending a US government freeze/suspension on PERM green-card labor certifications affecting major tech and IT companies (including several Indian IT firms like Infosys, TCS, and Wipro). आज कह रहा है कि उसके शब्दों का चयन ठीक नहीं था। अमेरिका के उपराष्ट्रपति हो कोई भड़भूजे नहीं हो जो मन में आया बोल दिया।

यूरोप के देशों में वैसे ही शिक्षा सुधार के नाम पर दंगे शुरू किए गए जैसे भारत में कॉकरोचों ने शुरू करने की कोशिश की थी। इसमें तो कोई शक नहीं कॉकरोचों की फंडिंग अमेरिका ने की जो इस बात से साबित होता है कि सैम पित्रोदा George Soros से 10 billion डॉलर मांग रहा है मोदी को हटाने के लिए।

यूरोपीय देशों में लगी आग से सबसे ज्यादा ख़बरदार अमेरिका को होना चाहिए क्योंकि वहां नारे लग रहे हैं Make America Islamic स्टेट।

रोज कुत्ते की तरह भौंकने वाला राहुल गांधी कह रहा है कि लोगों की आवाज़ दबाई जा रही है; हम सरकार बदल कर लोकतंत्र ख़त्म करने वाले मोदी/शाह/भागवत/ज्ञानेश कुमार को सजा देंगे

सुभाष चन्द्र

कौन क्या नहीं बोल रहा, देश में राहुल गांधी मोदी सरकार को उखाड़ने की बात कर रहा है, तिलचट्टों के सिर पर सवार हो गया है और नेहा बोरा को पाल लिया है, उसको सिर पर चढ़ा लिया तो सुप्रिया श्रीनेत समेत बड़े बड़े नेता बिगड़ जाएंगे, कन्हैया कुमार कोने में खड़ा कर दिया। दीपेंद्र हुडा और उसके बाप भूपेंदर हुडा की तरफ राहुल ने देखा तक नहीं। 

देश में मोदी के खिलाफ विद्रोह चाहता है और तिलचट्टों की हुड़दंगबाजी को कनाट प्लेस/जंतर मंतर पर समर्थन कर रहा था लेकिन अपनी ही कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने तिलचट्टों को प्रदर्शन नहीं करने दिया। वहां लोकतंत्र नहीं चाहिए, वो लोकतंत्र बस दिल्ली में ख़त्म हो गया।

डी के शिवकुमार को धक्का दे दिया, तेजस्वी और अखिलेश यादव को खुद अपने हाथ से ट्रक से उतार दिया। उत्तर प्रदेश में अजय राय को बोल्ड कर दिया और प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा को कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया जिसने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आते ही कहा कि “भारत माता की जय के नारे लगाए तो ये पार्टी में अनुशासनहीनता मानी जाएगी। अगर नारे लगाने हैं तो ‘कांग्रेस की जय, सोनिया गांधी की जय और राहुल गांधी की जय के नारे लगाएं”। उत्तर प्रदेश के ही एक कांग्रेस नेता ने कहा कि कुछ समय बाद हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे”। जितनी तेजी से कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता बाहर आ रही है फिर भी अगर हिन्दू कांग्रेस को वोट देता है उससे बड़ा महामूर्ख दुनियां के किसी कोने में नहीं मिलेगा।  

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आराधना मिश्रा को यह सोच कर अध्यक्ष बनाया कि महिलाओं का वोट मिलेगा और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया मुस्लिम वोट के लिए। लेकिन महिला आरक्षण बिल को राहुल गांधी कहता है हम पास नहीं होने देंगे और इमरान मसूद तो पहले ही हाथ खड़े कर चुका है कि केवल मुसलमानों की वोटों के भरोसे चुनाव नहीं जीत सकते।

पंजाब में मारामारी मची है। दो दिन में दो अध्यक्ष बदलने पड़े और बात करता है लोकतंत्र की। कही ऐसा न हो कांग्रेस में ही आवाज़ उठने लगे कि “गांधी परिवार कांग्रेस छोड़ो” क्योंकि राहुल गांधी की अब कांग्रेस में लोग सुनने को तैयार नहीं हैं, तभी उसे कांग्रेस वर्किंग कमिटी में कहना पड़ा कि “मुझ पर भरोसा करना शुरू कीजिए”।

एक बैठा है अमेरिका में सैम पित्रोदा जो जॉर्ज सोरोस के आगे भीख मांग रहा है कि सोरोस भारत में 10 अरब डॉलर लगाएं तो अच्छी बात है। वो पैसा विकास के लिए नहीं बल्कि मोदी के विनाश के लिए मांग रहा है।

राहुल गांधी की नई मित्र नेहा बोरा बांग्लादेश को अपना रोल मॉडल बता कर कह रही है कि वहां की तरह भारत में सत्ता बदलनी है। उसे नहीं पता वहां आंदोलन करने वाले कथित छात्रों की पार्टियां केवल 6 सीट जीत सकी थी, अलबत्ता उन्होंने कट्टरपंथियों को सीट जितवा दी थी लेकिन खुद के हाथ में सत्ता नहीं आई। राहुल गांधी भी उसकी बात मान रहा है लेकिन यहां भारत में तो कांग्रेस को वोट ही नहीं मिल रहे।

राहुल गांधी सत्ता बदल कर जांच के बात कर रहा है। तो अभी सुप्रीम कोर्ट में वोट चोरी के सबूत दे दे, सब कुछ साफ़ हो जाएगा। CJI ने कह दिया है कि कोर्ट में कुछ कहा जाए और कोर्ट के बाहर सड़क पर कुछ और, यह नहीं चलेगा। 

कांग्रेस खुद में अब कोई राजनीतिक पार्टी नहीं रह गई। तो ऐसे हिंसक लोगों का संगठन बन चुकी है जिनका काम केवल देश में अराजकता फैलाना है। तिलचट्टों और कांग्रेस के प्रदर्शनों में 3000 करोड़ स्वाहा हो गए, ये पैसा CJP और कांग्रेस से वसूल करना चाहिए।

विदेशियों पर भरोसा करते हो तो देख लो एक विदेश से आया था ध्रुव राठी जो चार दिन में भाग खड़ा हुआ। उसे साथ रख कर Regime Change कराते। 

हाई कोर्ट के जज “रेप विशेषज्ञ” बन रहे है; ऐसे ऐसे फैसले देते हैं कि लज्जा को भी लज्जा आ जाए

सुभाष चन्द्र 

ताजा फैसला पटना हाई कोर्ट से आया है जिसमें जस्टिस संदीप कुमार ने  स्पष्ट किया है कि “किसी सोती हुई महिला के ऊपर लेट कर उसका मुंह दबाना, जब तक कि शारीरिक संबंध बनाने की दिशा में स्पष्ट सबूत न हों, दुष्कर्म के प्रयास को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है”। जज साहब ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए इसे लज्जा भंग करने के दायरे में माना। और आरोपी की 60 वर्ष की आयु को देखते हुए, उसकी मुख्य सजा के पहले काटी हुई अवधि तक सीमित कर दिया, साथ में 25 हजार का जुर्माना लगाया जो पीड़िता को मिलेगा। घटना 8 फरवरी 2010 बेगूसराय में हुई थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 10 फरवरी, 2026 के फैसले में कहा था “that once an accused starts executing criminal intent (such as groping and untying clothing), it moves past preparation into an attempt to commit rape”. ये फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा के निर्णय पर था जिसमें उन्होंने कहा था 11 साल की बच्ची के स्तन दबाना और उसका नाड़ा खोलना बलात्कार की कोशिश नहीं माना जा सकता।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब ये जस्टिस संदीप कुमार जी नई थ्योरी ले आए। इनसे पूछो कि आरोपी महिला के घर में क्यों घुसा और उस पर लेट कर और मुंह दबा कर क्या भजन करना चाहता था? लगता है जस्टिस संदीप कुमार जब तक रेप नहीं हो जाता उसे रेप की कोशिश नहीं मानते। ये कैसा मजाक है? 

एक नहीं अनेक मामले हैं जिनमें हाई कोर्ट के जज बिलकुल “रेप विशेषज्ञ” बनकर फैसले देते हैं। उनके पीड़ित महिलाओं के दर्द का अहसास तब तक नहीं हो सकता जब तक उनके घर की बहन बेटियों के साथ ऐसा न हो।

एक मामले में झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि “रात में किसी महिला के घर में घुसना, उसे पकड़ना और उसके कपड़े उतारना रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता (not an attempt to rape)। 28 साल पुराने केस में अभियुक्त 8 महीने जेल में बिता चुका था और जज साहब ने Trespass का केस मान कर सजा को 8 महीने कर दिया। यही काम पटना हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप कुमार ने किया।

रेप के मामलों में जज ऐसे “रेप विशेषज्ञ” बन गए है कि जैसे उन्होंने इस मामले में PhD कर रखी हो। कोई कह देता है, रेप का अभियुक्त तो 5 वक्त की नमाज पढता है और सजा कम कर देता है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी (अब रिटायर्ड) ने कह दिया कि “Every Sinner has a future” और 4 वर्ष की बच्ची के बलात्कारी/हत्यारे की फांसी की सजा रद्द कर आजीवन कारावास में बदल दी।

छत्तीसगढ़ के ही जस्टिस नरेंद्र व्यास ने एक फैसले में कहा -” छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) ने फरवरी 2026 में एक मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया था कि यदि प्राइवेट पार्ट (योनि) में प्रवेश (Penetration) नहीं हुआ है और केवल वीर्यपात (Ejaculation) हुआ है, तो उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत 'बलात्कार' (Rape) नहीं माना जा सकता, बल्कि यह 'बलात्कार का प्रयास' (Attempt to Rape) की श्रेणी में आएगा।

ऐसे बहुत केस हैं जिनमें जज रेप के मामलों में अपनी expetise झाड़ते हैं, बिना लाज शर्म के।

सुप्रीम कोर्ट को हाई कोर्ट के जजों के लिए विशेष दिशा निर्देश जारी करने चाहिए कि रेप के मामलों में “अपना ज्ञान देने की बजाय न्याय करें नाकि पीड़ित महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ करें”।

भारत में ‘रिजीम चेंज’ के लिए खूनी क्रांति की धमकी, बांग्लादेश जैसा हिंदू जेनोसाइड की खौफनाक प्लानिंग


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी और भारत का दबदबा बढ़ रहा है। भारत अमेरिका की शर्तों के सामने झुकने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भारत को उभरती हुई महाशक्ति और प्रतिद्वंदी मानने लगा है। अमेरिका को लग रहा है कि अगर भारत को अभी रोका नहीं गया तो आने वाले कुछ ही वर्षों में वो चीन की तरह उसको चुनौती दे सकता है। इसलिए अमेरिका पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत में एक ऐसी कठपुतली सरकार बनाना चाहता है, जो उसके इशारों पर काम कर सके। इस मकसद को पूरा करने के लिए भारत के विपक्षी दलों को आर्थिक मदद देकर देश में रिजीम चेंज की कोशिश की जा रही है।

भारत में ‘खूनी क्रांति’ के जरिए रिजीम चेंज की कोशिश
विदेशी फंडिंग पर पलने वाले कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल के सामने मुश्किल यह है कि वो संवैधानिक तरीके से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को हटा नहीं सकते, क्योंकि उन्हें पता है कि संसद में उनके पक्ष में संख्या बल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें उम्मीद नहीं है, क्योंकि ‘वोट चोरी’ का कोई ठोस सबूत नहीं है। इसलिए वो लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को संसद की जगह सड़क से अपदस्त करना चाहते हैं। विदेशों से सुपारी लेकर सड़क पर ‘लोकतंत्र की डकैती’ करना चाहते हैं। इसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ‘वोट चोरी’ के नाम पर एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विरोध कर रहे हैं। सड़क पर अराजकता फैलाकर खूनी क्रांति करना चाहते हैं।

सड़क पर अराजकता और ‘लोकतंत्र की डकैती’ की कोशिश 
विपक्षी दलों ने सड़क पर ‘लोकतंत्र की डकैती’ को अंजाम देने के लिए एक टूलकिट तैयार किया है, जिसमें एक-एककर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता खत्म करना शामिल है। यह साबित करना है कि देश की सभी संस्थाएं सरकार की कठपुतली बन चुकी हैं। इसका मकसद जनता में असंतोष पैदा कर उनका समर्थन हासिल करना है। कॉकरोच जनता पार्टी को मोहरा बनाकर युवाओं खासकर ‘जेन-जी’ को भड़काना है, ताकि बांग्लादेश और नेपाल की तरह सड़क पर अराजकता पैदा किया जा सके। पुलिस पर हमला, सुरक्षा एजेंसियों और राष्ट्रवादी मीडिया को बदनाम करना इनकी रणनीति का हिस्सा है।

प्रशांत भूषण की रिजीम चेंज करने की खुलेआम धमकी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर जो राजनीतिक और सीजेपी का प्रदर्शन शुरू हुआ है उसकी मंशा पर यूं तो पहले से सवाल खडे होते रहे हैं। लेकिन अब यह खुलकर सामने आ गया है कि कुछ संगठन दिल्ली में बांग्लादेश जैसी हिंसा की स्थिति पैदा कर सत्ता परिवर्तन करना चाहते थे। 15 अक्टूबर,2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने खुले तौर पर रिजीम चेंज का एलान किया। उन्होंने कहा,“हां, हम चाहते हैं सत्ता परिवर्तन हो, खुले तौर पर कह रहा हूं ये सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है। हम लोग सत्ता परिवर्तन कराकर रहेंगे “

प्रशांत भूषण की खूनी क्रांति के जरिए रिजीम चेंज की योजना
इससे पहले 13 अक्टूबर,2026 को प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया ग्रुप में बातचीत के दौरान खूनी क्रांति की बात कही थी। उन्होंने कहा, “हमारे सामने विकल्प क्या है ? हमारे पास विकल्प है कि क्रांति के जरिए कुछ करा लें। अब उस क्रांति में बहुत खून-खराबा होगा। क्योंकि ये लोग अभी पुलिस इस्तेमाल कर रहे हैं। अर्धसैनिक बल इस्तेमाल कर रहे हैं। इन लोगों ने अभी बंदूकें इस्तेमाल नहीं की हैं। वो सभी यूज करेंगे। आर्मी को भी बुला सकते हैं।”

बांग्लादेश की तरह भारत में हिन्दुओं का नरसंहार की प्लानिंग
प्रदर्शन की पोस्टर गर्ल बनी वामपंथी छात्र संगठन आईसा (एआईएसए) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने खुद बांग्लादेश की तरह भारत में भी सत्ता परिवर्तन का खुलासा किया है। सोशल मीडिया फेसबुक पर नेहा खुलकर बता रही हैं कि भारत में शुरू हुए जेनजी आंदोलन की शुरूआत बांग्लादेश से हुई थी। उन्होंने कहा रास्ता दिखाने और इस देश के युवाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आपको बधाई। नेहा बोरा के इस बयान से स्पष्ट है कि वो बांग्लादेश के युवाओं से प्रेरणा ले रही है। जिस तरह बांग्लादेश के युवाओं ने हिन्दुओं के खिलाफ हिंसक अभियान चलाकर उनका नरसंहार किया, उसी तरह नेहा बोरा भी हिन्दू राष्ट्रवादियों का नरसंहार कर देश में सत्ता परिवर्तन करना चाहती है।

नाहिद इस्लाम ने भारत के प्रदर्शनकारियों को दिया समर्थन 
ध्यान देने की बात है कि तीन दिन पहले ही बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नाहिद इस्लाम ने भारत में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में बयान जारी किया और चुनावी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे भारतीय युवाओं के साथ एकजुटता जताई थी।

ध्रुव राठी पर सेना और पुलिस को भड़काने का आरोप
यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है। यह शिकायत दिल्ली के एक वकील विवेक गर्ग ने पुलिस कमिश्नर, नार्थ DCP और रूप नगर थाना प्रभारी को दी है। आरोप है कि ध्रुव राठी ने इंटरव्यू में भारतीय सेना और पुलिस को सरकार के खिलाफ विद्रोह करने के लिए उकसाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि ध्रुव राठी के बयान देश और केंद्र सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश तथा साजिश से जुड़े हैं। शिकायत में सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो का हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता ने ध्रुव राठी के आर्थिक स्रोतों और कथित संपर्को की जांच करने के साथ उनका पासपोर्ट जब्त करने की भी मांग की है।

देश का भविष्य चुनावों से तय नहीं होगा, प्रतिरोध से तय होगा- योगेंद्र यादव
जुलाई 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च के दौरान आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव ने कहा था कि इस देश का फ्यूचर संसद से नहीं सड़क से तय होगा। योगेंद्र यादव ने कहा था, “अब इस देश में लोकतंत्र का भविष्य संसद से तय नहीं होगा बल्कि सड़क से तय होगा। चुनावों से तय नहीं होगा, प्रतिरोध से तय होगा। और 20 तारीख़ को उसकी एक झलक, हमने देखी।” गौरतलब है कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के खून में ही गद्दारी है। दोनों ने अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर आम आदमी पार्टी बनाई थी, लेकिन केजरीवाल ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

 

सड़कों पर 30,000 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं- राहुल
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रिजीम चेंज के इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहते हैं। इसलिए वो भी सड़क पर उतर कर लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश में लग गए हैं। 12 अक्टूबर,2026 को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा था, “हम चाहते हैं कि सड़कों पर 20,000 से 30,000 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। सरकार बहुत बड़ी गलती कर रही है, क्योंकि हम देश को दिखाना चाहते हैं कि मोदी जी ज्ञानेश कुमार को बचा रहे हैं… उन्हें जितनी ज़्यादा सुरक्षा मिलेगी, हम आखिरकार उनके कंट्रोलर तक उतनी ही आसानी से पहुंच पाएंगे”

जो भी कहना होगा, सड़क पर कहूंगा- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि वे पुलिस और प्रशासन के दबाव से डरने वाले नहीं हैं और जनता के अधिकारों की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरेंगे। उनका कहना है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए बैरिकेड्स और पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन वे और उनका विपक्ष जनता की आवाज को सड़क से लेकर संसद तक उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा, “हां, सरकार से मेरी बातचीत हो रही है, लेकिन मुझे फ़ोन कॉल की ज़रूरत नहीं है। मैं जो कहना चाहता हूं, वह सड़कों पर कहता हूं।”

सोशल और विदेशी मीडिया के माध्यम से प्रोपेगैंडा
सोशल मीडिया के माध्यम से मोदी सरकार के खिलाफ नैरेटिव चलाया जा रहा है, ताकि दुनिया को दिखाया जा सके कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार अलोकप्रिय और तानाशाही हो चुकी है। उसका जनाधार खत्म हो चुका है। इससे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाना और आसान हो जाएगा। इसमें अंतर्राष्ट्रीय मीडिया गिद्ध की तरह नजर गड़ाए बैठी हैं। अंतर्राष्ट्रीय मंचों से सरकार के खिलाफ और प्रदर्शन के समर्थन में बयान जारी हो रहे हैं। इससे मोदी सरकार पर देश के बाहर से भी दबाव बनाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिशें की जा रही हैं।

    अवलोकन करें:-
प्रशांत भूषण के खिलाफ शिकायत

प्रशांत भूषण के खिलाफ शिकायत

सुभाष चन्द्र

प्रशांत भूषण के देश विरोधी खुलेआम बयान देने पर Bar Council of India क्यों खामोश है? क्यों नहीं इस पर कोई कार्यवाही की गयी? क्या Bar Council of India प्रशांत के इस बयान को अप्रयत्क्ष अपना समर्थन दे रही है?   

यह शिकायत मैंने Bar Council of India ( bciinfo21@gmail.com) को भेजी है और उसकी प्रतिलिपि Delhi Police Commissioner को cpdelhi@delhipolice.gov.in भेजते हुए लिखा है “सूचनार्थ तथा इस विषय में दिल्ली पुलिस के वैधानिक अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किसी भी पहलू पर विचार करने हेतु, यदि उपलब्ध सामग्री एवं साक्ष्य से कोई संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया प्रकट होता हो”

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आप सभी से अनुरोध है कि आप भी ये शिकायत BCI को भेजें और कॉपी दिल्ली पुलिस आयुक्त को उपरोक्त शब्दों के साथ भेजें। मेरे नाम की जगह अपना नाम लिख दीजिए।

सेवा में,

अध्यक्ष महोदय,

बार काउंसिल ऑफ इंडिया

नई दिल्ली।

विषय: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के ‘सत्ता परिवर्तन’ संबंधी व्यापक रूप से प्रसारित वक्तव्य की जाँच तथा कानून के अनुसार उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु अभ्यावेदन।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपका ध्यान वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रशांत भूषण के उस कथित वक्तव्य की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, जिसमें मीडिया में प्रकाशित एवं टेलीविजन पर प्रसारित समाचारों के अनुसार उन्होंने कहा कि “यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है और हम इसे हासिल करेंगे” अथवा इसी आशय की बात कही।

किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना करना, नीतियों का विरोध करना और चुनावों के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की माँग करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। परंतु यदि किसी वक्तव्य का वास्तविक आशय लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के स्थान पर हिंसा, विद्रोह अथवा असंवैधानिक तरीकों से निर्वाचित सरकार को हटाने के लिए लोगों को उकसाना हो, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।

श्री प्रशांत भूषण एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे संविधान, कानून के शासन तथा न्यायपालिका की गरिमा के प्रति विशेष जिम्मेदारी का निर्वहन करें। यदि किसी अधिवक्ता द्वारा ऐसे आचरण या वक्तव्य का प्रमाण मिलता है जो कानून और संवैधानिक व्यवस्था के प्रतिकूल हो, तो केवल उनके पेशेवर पद या प्रतिष्ठा के कारण उस पर विचार करने से बचा नहीं जाना चाहिए।

मैं यह अभ्यावेदन किसी व्यक्ति की सरकार की आलोचना करने अथवा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन का समर्थन करने के अधिकार को सीमित करने के उद्देश्य से नहीं दे रहा हूँ। मेरी चिंता यह है कि कहीं उक्त वक्तव्य में हिंसा, विद्रोह या असंवैधानिक कार्रवाई के लिए उकसाने का कोई तत्व तो नहीं है। इसका निर्णय मीडिया की सुर्खियों या किसी पूर्वधारणा के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे वक्तव्य, उसकी प्रामाणिक रिकॉर्डिंग, संदर्भ और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच के बाद किया जाना चाहिए।

अतः आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि:

उक्त वक्तव्य की पूरी, बिना काट-छाँट वाली रिकॉर्डिंग अथवा प्रमाणित प्रतिलेख प्राप्त कर उसके संदर्भ सहित जाँच कराई जाए।

यह निर्धारित किया जाए कि क्या उपलब्ध सामग्री से अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के अंतर्गत पेशेवर अथवा अन्य कदाचार के संबंध में प्रथम दृष्टया कार्यवाही का आधार बनता है।

यदि जांच में कदाचार प्रमाणित होता है, तो कानून के अनुसार उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। जहां कानून अनुमति देता हो, वहाँ गंभीरता के अनुरूप निलंबन अथवा अधिवक्ताओं की सूची से नाम हटाने जैसी कार्रवाई पर भी विचार किया जाए।

यदि सामग्री से किसी संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया संकेत मिलता हो, तो उसे उचित कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित कानून-प्रवर्तन प्राधिकारी के संज्ञान में लाया जाए।

मुझे इस अभ्यावेदन पर की गई कार्रवाई अथवा लिए गए निर्णय से अवगत कराने की कृपा की जाए।

मेरा स्पष्ट मत है कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध हिंसा या असंवैधानिक कार्रवाई के लिए उकसाने के आरोप, यदि साक्ष्यों से समर्थित हों, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही, प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष जाँच, अपना पक्ष रखने और कानून के अनुसार निर्णय पाने का अधिकार भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मुझे आशा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस अभ्यावेदन पर निष्पक्षता, गंभीरता और कानून के अनुरूप विचार करेगी।

धन्यवाद,

भवदीय,

सुभाष चंद्र