BBC ने कहा- ‘मेट्रो खाली’, हकीकत में रिकॉर्ड सवारी और बढ़ता नेटवर्क: अधूरे डेटा से गढ़े गए प्रोपेगेंडा का असली विश्लेषण

                                                                                                                   साभार : Aajtak & BBC
बीबीसी (BBC) ने एक लेख छापा जिसका शीर्षक था, “भारत ने मेट्रो पर अरबों खर्च कर दिए, लेकिन यात्री कहाँ हैं?” इस लेख को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे भारत की मेट्रो परियोजनाएँ सही तरीके से काम नहीं कर रहीं और लोग उनका इस्तेमाल ही नहीं कर रहे। लेकिन असल तस्वीर इससे अलग है। हकीकत यह है कि BBC ने दिल्ली मेट्रो जैसे बड़े और सफल मॉडल को ‘अपवाद’ कहकर किनारे कर दिया और नई मेट्रो लाइनों के शुरुआती कम उपयोग वाले डेटा को ही पूरी कहानी मान लिया। यह तरीका पूरा सच नहीं दिखाता।

सच्चाई यह है कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट- जैसे मेट्रो, हाईवे या एयरपोर्ट को पूरी तरह चलने और लोगों की आदत में आने में समय लगता है। शुरुआत में लोग धीरे-धीरे जुड़ते हैं, नेटवर्क बढ़ता है और फिर उपयोग तेजी से बढ़ जाता है। 2025–26 के आँकड़े बताते हैं कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली मेट्रो करोड़ों यात्रियों को रोज सफर करा रही है और मुंबई मेट्रो की नई लाइनों पर भी यात्रियों की संख्या हर महीने बढ़ रही है।

दिल्ली मेट्रो से सीख: सिस्टम धीरे-धीरे मजबूत होता है

BBC का मुख्य तर्क है कि कई शहरों में मेट्रो में उम्मीद से कम यात्री सफर कर रहे हैं। लेकिन इस विश्लेषण में वह दिल्ली मेट्रो के पूरे सफर को नजरअंदाज कर देता है। जब दिल्ली मेट्रो शुरू हुई थी, तब भी इसे लेकर सवाल उठे थे। कई लोगों ने कहा था कि यह महँगा है और ज्यादा काम नहीं आएगा। शुरुआती समय में लोगों को मेट्रो स्टेशन तक पहुँचने में दिक्कत होती थी, क्योंकि फीडर बसें और ई-रिक्शा जैसी सुविधाएँ पूरी तरह विकसित नहीं थीं।

धीरे-धीरे हालात बदले। जैसे-जैसे नेटवर्क बढ़ा, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत हुई और लोगों की निर्भरता बढ़ती गई। आज दिल्ली मेट्रो देश ही नहीं, दुनिया के सबसे सफल पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स में गिनी जाती है। साल 2025 में इसमें औसतन 64.6 लाख लोग रोज यात्रा कर रहे हैं और साल भर में यह 235 करोड़ से ज्यादा यात्राएँ पूरी करती है। यह आँकड़ा एक बड़े देश जैसे न्यूजीलैंड की पूरी आबादी से भी ज्यादा है।

अब दिल्ली मेट्रो कमाई के मामले में भी मजबूत स्थिति में है। 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, यह ₹412 करोड़ से ज्यादा का ऑपरेटिंग सरप्लस कमा रही है। इसका मतलब है कि मेट्रो सिर्फ चल ही नहीं रही, बल्कि अपने खर्च निकालकर मुनाफा भी दे रही है। यह साफ दिखाता है कि कोई भी मेट्रो सिस्टम शुरुआत में धीमा हो सकता है, लेकिन समय के साथ वह मजबूत, उपयोगी और आत्मनिर्भर बन जाता है।

मुंबई एक्वा लाइन की सच्चाई: ‘सुनसान’ नहीं, तेजी से बढ़ता इस्तेमाल

BBC ने मुंबई की नई एक्वा लाइन (मेट्रो-3) को ‘सुनसान’ बताने की कोशिश की, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है। यह लाइन पूरी तरह अक्टूबर 2025 में शुरू हुई और अप्रैल 2026 तक इस पर 4 करोड़ से ज्यादा यात्री सफर कर चुके हैं। किसी भी नई मेट्रो लाइन के लिए इतने कम समय में यह बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

मुंबई की सभी मेट्रो लाइनों को मिलाकर अब रोज करीब 7.5 लाख लोग सफर कर रहे हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे लोग नई लाइन के बारे में जान रहे हैं और कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है, यात्रियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

जहाँ तक किराए की बात है, 10 से 70 रुपए का खर्च मुंबई जैसे शहर में ज्यादा नहीं माना जाता। यहाँ लोग रोज ट्रैफिक में घंटों फँसते हैं। ऐसे में मेट्रो समय बचाती है और सफर आसान बनाती है। सरकार का काम सिर्फ आज की भीड़ संभालना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत ट्रांसपोर्ट तैयार करना भी है, ताकि सड़कों पर दबाव कम हो सके।

मेट्रो का बड़ा फायदा: सफर ही नहीं, जेब भी बचा रही है

मेट्रो का असर सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं है, यह लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधार रही है। जनवरी 2026 की ‘EAC-PM’ रिपोर्ट बताती है कि मेट्रो आने से लोगों का रोज का ट्रांसपोर्ट खर्च कम हुआ है। पेट्रोल, डीजल और टैक्सी पर होने वाला खर्च बच रहा है, जिससे लोगों के पास हर महीने कुछ अतिरिक्त पैसे बच रहे हैं।

इस बचत का सीधा फायदा घर के लोन (होम लोन) चुकाने में दिख रहा है। दिल्ली में मेट्रो वाले इलाकों में लोन न चुका पाने वाले लोगों की संख्या 4.42% कम हुई है। बेंगलुरु में EMI लेट करने वालों की संख्या 2.4% घटी है, जबकि हैदराबाद में समय से पहले लोन चुकाने वालों की संख्या 1.8% बढ़ी है।

सीधी भाषा में समझें तो मेट्रो लोगों की जेब में बचत डाल रही है। इससे उनका आर्थिक बोझ कम हो रहा है और जीवन आसान बन रहा है। लेकिन ऐसे बड़े फायदे अक्सर BBC जैसी कुछ रिपोर्ट्स में नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।

क्या मेट्रो घाटे में है?

अक्सर कहा जाता है कि मेट्रो प्रोजेक्ट घाटे का सौदा हैं। लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। शुरुआत में हर मेट्रो सिस्टम ‘नेट लॉस’ दिखाता है, क्योंकि उस पर बड़े लोन और निर्माण का खर्च होता है। इसे ही डेप्रिसिएशन कहा जाता है। इसलिए सिर्फ कुल घाटा देखकर फैसला करना सही नहीं होता।

असल पैमाना होता है ‘ऑपरेटिंग सरप्लस’। यानी रोजमर्रा का खर्च निकालने के बाद क्या मेट्रो के पास पैसा बच रहा है या नहीं। उदाहरण के तौर पर, बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो ने 2024-25 में 1,191 करोड़ रुपए कमाए और 229 करोड़ रुपए का ऑपरेटिंग सरप्लस हासिल किया। इसका मतलब है कि मेट्रो अपना खर्च निकालकर बचत भी कर रही है।

अहमदाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में भी यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। साफ है कि यह पैसा बर्बाद नहीं हुआ, बल्कि शहरों के लिए लंबी अवधि का मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार हुआ है। इससे प्रदूषण कम हो रहा है और पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है।

BBC की रिपोर्ट पर सवाल: क्या पूरी तस्वीर दिखाई गई?

बीबीसी की रिपोर्ट को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसमें पूरी तस्वीर नहीं दिखाई गई। कुछ चुनिंदा आँकड़ों के आधार पर ऐसा निष्कर्ष दिया गया, जैसे मेट्रो प्रोजेक्ट सही दिशा में नहीं हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।

आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन चुका है, जो 1,000 किलोमीटर से ज्यादा फैल चुका है। यह अपने आप में दिखाता है कि यह सिस्टम लगातार बढ़ रहा है और शहरों की जरूरत बनता जा रहा है। मेट्रो ने लोगों को लंबे ट्रैफिक जाम से राहत दी है और सफर को ज्यादा आसान और आरामदायक बनाया है।

लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और फीडर बसों की दिक्कतें अभी भी कई शहरों में हैं, लेकिन इन पर तेजी से काम हो रहा है। दिल्ली इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जहाँ समय के साथ मेट्रो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।

साफ है कि भारत में मेट्रो सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि शहरी बदलाव का बड़ा जरिया बन रही है। यह धीरे-धीरे हर शहर की जरूरत और आदत बनती जा रही है, और इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

तेलंगाना : कांग्रेस की हिटलरशाही, आलोचना करने वालों पर आतंकवाद वाला कानून क्यों? संविधान और लोकतंत्र का रोना-रोने वाले राहुल गाँधी चुप क्यों?


इमरजेंसी में जिस तरह प्रेस और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने गला घोंटा था उसका तेलंगाना कांग्रेस सरकार द्वारा जीवंत उदाहरण पेश कर रही है। फिर शोर मचाते हैं मोदी सरकार में लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। जनता को गुमराह करती है कांग्रेस। हकीकत में  लोकतंत्र और संविधान कांग्रेस राज में ही खतरे में रहे हैं। अपने राज में कांग्रेस ने संविधान में इतने ज्यादा संशोधन कर संविधान की मूलभावना को ही चकनाचूर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट तक चुपचाप बैठे देखती रही।  

कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी राष्ट्रीय स्तर पर खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे बड़ा चैंपियन बताते हैं। वे अक्सर भाजपा सरकार पर ‘आवाज दबाने’ का आरोप लगाते हैं, लेकिन तेलंगाना में उनकी अपनी सरकार का रवैया कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार अब सोशल मीडिया पर आलोचना करने वालों के खिलाफ देश के सबसे कड़े कानून ‘यूएपीए’ (UAPA) का इस्तेमाल कर रही है।

X हैंडल पर UAPA लगाने का क्या है पूरा मामला?

दरअसल, तेलंगाना पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग के डीआईजी (CI Cell) आर. भास्करन का एक आधिकारिक पत्र सामने आया है। 18 अप्रैल 2026 को जारी इस पत्र में एक्स कॉर्प (X Corp) को संबोधित करते हुए एक ट्विटर हैंडल @TeluguScribe के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है। इस पत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43F का हवाला दिया गया है।

पुलिस ने अपने आधिकारिक पत्र में लिखा, “हम आपसे इस विशिष्ट एक्स (X) खाते से संबंधित निम्नलिखित विवरण प्रदान करने का अनुरोध करते हैं: खाता पंजीकरण की जानकारी, उपयोग लॉग और गतिविधि विवरण, तथा कोई भी अन्य प्रासंगिक डेटा जो हमारी जाँच में सहायता कर सके। यह जानकारी मामले की गहन जाँच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

आलोचना पर आतंकवाद वाला कानून क्यों?

हैरानी की बात यह है कि UAPA जैसा सख्त कानून, जो आमतौर पर आतंकवाद और देश विरोधी गंभीर गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है, उसे महज कुछ ट्वीट्स के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पत्र के अनुसार, उक्त हैंडल पर आपत्तिजनक भाषा और कथित तौर पर ‘पब्लिक फिगर’ की छवि खराब करने वाले ट्वीट किए गए थे। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी सरकार या नेता की आलोचना करना अब आतंकवाद की श्रेणी में आता है?

कांग्रेस और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर उठते सवाल

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इस कार्रवाई से कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करती है। एक तरफ राहुल गाँधी ‘संविधान बचाने’ और ‘बोलने की आजादी’ का नारा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी सरकार असहमति की आवाज को कुचलने के लिए UAPA जैसे दमनकारी प्रावधानों का सहारा ले रही है।

इस मामले को देखें तो साफ है कि तेलंगाना में सत्ता मिलते ही कांग्रेस की ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ वाली परिभाषा बदल गई है। क्या रेवंत रेड्डी सरकार इतनी डर गई है कि उसे साधारण ट्वीट्स से राज्य की सुरक्षा को खतरा महसूस होने लगा है? यह सीधे तौर पर लोकतंत्र में विपक्ष और जनता की आवाज को खामोश करने की एक तानाशाही कोशिश नजर आती है।

आंध्र प्रदेश : अनंतपुर में 60 वर्षीय मौलाना ने की 6 साल की बच्ची से रेप की कोशिश, भीड़ ने जमकर पीटा और मुँडवा दिया सिर और दाढ़ी


आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में 60 वर्षीय मौलाना खाजा हुसैन को 6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित मौलाना YSRCP का नेता बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रुद्रंपेट इलाके में आरोपित खाजा हुसैन ने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास कर रहा था लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। गुस्साए लोगों ने पहले उसकी जमकर पिटाई की, फिर उसका सिर और दाढ़ी मुँडवा दी।

इतना ही नहीं उसके कपड़े उतरवाकर सड़क पर घुमाया गया और चेहरे पर कालिख भी पोती गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग आरोपित को लेकर चौथे टाउन पुलिस स्टेशन पहुँचे और पुलिस के हवाले कर दिया गया।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस आरोपित को बचाने की कोशिश कर रही है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच में जुटी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ़्तारी से बच कर भागने वाले “अपराधियों” की मौज कर दी; नया कानून बना दिया

सुभाष चन्द्र

कल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस उज्जवल भुइया की खंडपीठ ने एक नया कानून बना दिया कि अदालत के पास किसी अभियुक्त की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने का तो अधिकार है, लेकिन वे उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश नहीं दे सकती क्योंकि ऐसा करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। 

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अभियुक्त की ने केवल जमानत याचिका नामंजूर की बल्कि उसे ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने का आदेश दिया था हाई कोर्ट के इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ स्वत यह नहीं है कि अदालत अभियुक्त की “व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करते हुए” उसे सरेंडर के लिए मजबूर करे

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
सरेंडर न करने के लिए कहने का प्रावधान कौन से कानून में है बल्कि सच्चाई यह है कि “अग्रिम जमानत” अदालतों द्वारा दे दी जाती है लेकिन अग्रिम जमानत” नाम से उसका भी कोई प्रावधान CRPC या BNSS में नहीं है

CRPC का सेक्शन 438 - “Anticipatory bail in India is applied for and adjudicated (accepted or rejected) under Section 438 of the CRPC, 1973. This section empowers the high court or the court of sessions to grant pre-arrest bail to any person apprehending arrest for a non-bailable offences”. 

ऐसे ही प्रावधान BNSS के section 482 में हैं लेकिन anticipatory bail शब्द उपयोग नहीं किया गया है

सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों ने यह कानून स्वयं ही बना दिया कि कोर्ट अभियुक्त को सरेंडर करने के लिए नहीं कह सकता जबकि ऐसा प्रावधान कहीं नहीं है इसकी जगह आप यह क़ानून भी तो बना सकते थे कि जिस पर non-bailable offence के आरोप लगे हैं उसे हर हाल में ट्रायल कोर्ट में पेश होना चाहिए यानी सरेंडर करना चाहिए

आरोपी छुपा बैठा है लेकिन वकील के जरिए “अग्रिम जमानत” की अर्जी लगा रहा है और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि कोर्ट उसे सरेंडर करने के लिए नहीं कह सकता, तो आरोपी की तो मौज हो गई क्योंकि उसे पकड़ना तो बस पुलिस की जिम्मेदारी रह गई जिससे वो कहीं भी छुपता फिरेगा इसलिए ही पवन खेड़ा पकड़ में नहीं आ रहा

ऐसे निर्णयों से कानून से भागने वालों की मदद ही होगी कानून की नई परिभाषा ही बनानी थी तो वह अभियुक्त की पेशी के लिए बनानी थी न कि उसे छुट्टा घूमने की आज़ादी देने के लिए फिर जिस व्यक्ति पर non-bailable offence के आरोप हैं, उसकी “व्यक्तिगत स्वतंत्रता” का क्या मतलब है वह कोई भी हो सकता है और उसने कोई भी संगीन अपराध किया हुआ हो सकता है 

आप कानून बनाते हुए अभियुक्त को छूट तो दे सकते हैं लेकिन उसे कानून के सामने पेश होने के लिए कहने का कानून नहीं बना सकते पेश होने के लिए कहना या न कहना, दोनों ही प्रावधान CRPC और BNSS में नहीं है 

राष्ट्रपति को जस्टिस परदीवाला आदेश तो दे सकते हैं जबकि वह गैर कानूनी था, जो सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के reference में माना था, लेकिन एक अभियुक्त को कोर्ट में पेश होने के लिए नहीं कह सकते इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार के एक निर्णय के खिलाफ जस्टिस परदीवाला और जस्टिस महादेवन की पीठ ने कभी कोई Criminal case उनके पास भेजने की रोक लगा दी थी और वह भी कानूनी रूप से उचित नहीं थी जिसे फिर चीफ जस्टिस ने हाई कोर्ट के 13 जजों के protest letter के बाद पीठ द्वारा वापस लिया गया

कानून बनाएं लोकहित में और वैसे भी कानून बनाने की जिम्मेदारी संसद की है। आप संसद को कानून में बदलाव के लिए सिफारिश कर सकते हैं

मैंने खुद नहीं देखी किताब, राहुल गाँधी के पास कहां से आयी? : जनरल नरवणे ने राहुल गाँधी के ‘झूठ’ की खोली पोल

                                                                                                                              साभार - न्यूज 18
पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि जिस किताब को उन्होंने खुद नहीं देखा, उस पर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने साफ किया कि रक्षा मंत्रालय (MoD) की मंजूरी के बिना किताब प्रकाशित नहीं हो सकती थी और प्रकाशक ने नियमों का पालन किया है।

जनरल नरवणे ने यह भी कहा कि अगर किसी ने गैर-कानूनी तरीके से PDF या सामग्री हासिल की है, तो उस पर वह टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने आज के दौर में साइबर क्राइम और AI के खतरे का जिक्र करते हुए कहा कि बिना पुष्टि किसी भी चीज पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने राहुल गाँधी के उन आरोपों को खारिज किया, जिसमें राहुल गाँधी ने कहा गया था कि सरकार ने सेना को अकेला छोड़ा। नरवणे के मुताबिक, उस समय सरकार ने उन्हें पूरी आजादी दी थी और यह सेना पर पूरा भरोसा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस विवाद को राजनीतिक मुद्दा मानते हैं और सेना को राजनीति से दूर रखने के पक्षधर हैं।

क्या था मामला

पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने संसद में इस किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 2020 के भारत-चीन गतिरोध के दौरान सरकार ने सेना को अकेला छोड़ दिया। इस दावे के बाद संसद में हंगामा हुआ और मामला और गर्मा गया।

हालाँकि किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया  ने साफ कहा कि यह किताब न तो छपी है और न ही किसी भी रूप में प्रकाशित या वितरित की गई है। इसके बावजूद किताब की कॉपी सामने आने के दावे ने कई सवाल खड़े कर दिए, यहाँ तक कि पुलिस जाँच भी शुरू हुई।

इस बीच जनरल नरवणे ने एक नई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ भी लिखी है। इसमें उन्होंने सेना से जुड़े कई दिलचस्प और कम चर्चित किस्सों को साझा किया है, जो आम लोगों के लिए नई जानकारी लेकर आते हैं। 

क्या शरिया लागू होने पर मॉडर्न फलक को इंस्टाग्राम पर आने की आज़ादी होगी? ‘योगी बंदर, चायवाला मोदी, तड़ीपार शाह’: ‘गलीचपने’ में सईदा फलक निकली ओवैसी की उस्ताद

AIMIM नेता सैयदा फलक(जो पब्लिक मीटिंग में हिजाब और इंस्टाग्राम पर मॉडर्न) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी की (Instagram: syedafalakk)
असदुद्दीन ओवैसी की मजहबी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता आए दिन विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। कभी मुंब्रा की पार्षद सहर शेख खुलेमंच से पूरे इलाके को ‘हरा रंग‘ में रंगने का ख्वाब बुनती हैं, तो कभी असदु्द्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ‘15 मिनट के लिए पुलिस हटाने‘ की धमकी देती हैं। तो अब ताजा उदाहरण हैं सईदा फलक। ये देश के उच्च पदों पर बैठे नेताओं के लिए ‘गंदी भाषा’ का इस्तेमाल करती हैं।

सईदा फलक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी की है। मुस्लिम भीड़ को संबोधित करते हुए सईदा फलक अपमानजनक टिप्पणी करते यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग सईदा फलक की इन अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

सईदा फलक ने पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी पर की अपमानजनक टिप्पणी

सामने आए वीडियो में AIMIM नेता सईदा फलक सीएम योगी आदित्यनाथ को ‘बंदर’ कहती है। सईदा ने कहा, “ये ‘बंदर’ योगी बंगाल में कहता है कि बंगाल को काबा नहीं बनने देंगे। ये क्या आपके बाप की जागीर है।” वे चेतावनी देते हुए कहती है, “इंशाल्लाह, कयामत तक हम दाढ़ी करेंगे, हिजाब पहनेंगे, टोपी पहनेंगे, अजान पढ़ेंगे, नमाज पढ़ेंगे, शरियत पर चलेंगे।”

असदुद्दीन ओवैसी की हिजाब पहनने वाली महिला को भारत का प्रधानमंत्री बनने वाले बयान का जिक्र करते हुए सईदा फलक ने आगे कहा, “जब ओवैसी ऐसा कहते हैं, तो सब कहते हैं कि ये गजवा-ए-हिंद की बात कर रहे हैं… क्यों नहीं बन सकते? जब कल का तड़ीपार आज होम मिनिस्टर बनकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है, जो कल का चायवाला था वो प्राइम मिनिस्टर बनकर देश को बेच रहा है।” सईदा की इस अपमानजनक टिप्पणी पर मुस्लिम भीड़ जोर-जोर से हँस रही है और नारेबाजी कर रही है।

सईदा फलक के खिलाफ लोगों ने कार्रवाई की माँग की

AIMIM नेता सईदा फलक की पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ लोगों ने कार्रवाई की माँग की है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोग यूपी पुलिस, गृह मंत्रालय और योगी कार्यालय को टैग करते हुए कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

अमिताभ चौधरी नाम के ‘एक्स’ यूजर लिखते हैं, “AIMIM नेता सईदा फलक सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर रही है।
@Uppolice @myogioffice @AmitShahOffice मामले में दखल दें।”

‘फाइटर 3.0’ नाम से यूजर कहते हैं, “आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन मर्यादा की सीमा लांघकर की गई टिप्पणी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हो सकती। सईदा फलक द्वारा योगी आदित्यनाथ और अमित शाह पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियाँ सीधे-सीधे राजनीतिक शालीनता पर सवाल उठाती हैं। सीधा संदेश: असहमति हो सकती है, लेकिन अभद्रता नहीं।”

वे आगे कहते हैं, “राजनीति में स्तर गिराकर नहीं, तर्क और काम के दम पर जवाब दिया जाता है। जरूरत है कि ऐसी भाषा पर कड़ा संज्ञान लिया जाए, ताकि सार्वजनिक विमर्श की गरिमा बनी रहे और कोई भी नेता सीमाएँ पार करने की हिम्मत न करे। @Uppolice @myogioffice @AmitShahOffice“

दीपक शर्मा नाम के यूजर लिखते हैं, “हैलो @Uppolice सईदा फलक हमारे CM योगीजी के लिए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही है। इस खुदीली खातून के खिलाफ कार्यवाही करें।”

कौन हैं सईदा फलक?

हैदराबाद की रहने वाली 31 साल की सईदा फलक कराटे की खिलाड़ी रह चुकी हैं। सईदा ने 20 राष्ट्रीय और 22 अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप जीते हैं। वे तेलंगाना की पहली खिलाड़ी हैं जिन्होंने वर्ल्ड कराटे चैंपियनशिप और एशियाई कराटे चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। खिलाड़ी के तौर पर सईदा की सबसे बड़ी उपलब्धि 2016 में यूएस ओपन कराटे चैंपियनिशिप और 2022 में दुबई के शोरिन काई कराटे कप में स्वर्ण पदक जीतकर हासिल की। इसके अलावा सईदा फलक पेशेवर तौर पर एक एडवोकेट भी हैं।

खेल में करियर बनाने के बाद सईदा ने राजनीति ज्वाइन की। साल 2020 में सईदा ने ओवैसी की पार्टी AIMIM का दामन थाम लिया। तभी से वह AIMIM की विचारधारा का प्रचार करते नजर आती हैं। AIMIM ज्वाइन करने के बाद सईदा फलक की एक अलग पहचान बनी। सईदा को बुर्के में भड़काऊ भाषण देते देखा गया, जो सीधे नेताओं को टारगेट कर बोलती हैं, इसीलिए उन्हें ‘लेडी ओवैसी’ भी कहा जाने लगा।

सईदा फलक का हिजाब पर समर्थन और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान को लेकर

सईदा फलक एक तरफ हिजाब पहनने का समर्थन करती हैं और दूसरी तरफ महिलाओं की आवाज बुलंद करने के लंबे-लंबे भाषण देती हैं। यही वजह है कि सईदा को उनके ही भाषणों के लिए कई बार घेरा जा चुका है। 4 साल पहले न्यूज 18 की डिबेट में सईदा फलक ने कहा कि ‘मदरसों में लड़कियों को हिजाब की अहमियत समझाई जाएगी’, तब होस्ट अमन चोपड़ा ने उनसे सवाल किया, “आप भी हिजाब नहीं पहनती थी।” तो सईदा ने इसे विकल्प बताया, लेकिन अगली ही लाइन में इसे इस्लाम में जरूरी बताया, जिसके बाद वे टीवी डिबेट में घिरती नजर आईं।

और जब अकबरुद्दीन ओवैसी ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते हुए कहा था, “कई इन लोगों के खुदा हैं। वो क्या-क्यो जो पूजा करते हैं। कितने राम-लक्ष्मण-दुर्गा क्या क्या है? हर 8 दिन में एक नया पैदा हो जाता है। अब हनुमान जयंती आ गई, लक्ष्मू मालूम थी और अब भाग्य लक्ष्मी आ गई।” तब सईदा फलक ने न्यूज 18 के साथ डिबेट में अकबरुद्दीन ओवैसी का बचाव किया था।

पहले भी सीएम योगी पर की अभद्र टिप्पणी, जानिए पुराने विवादित बयान

सईदा फलक को यूँ ही AIMIM में ‘लेडी ओवैसी’ नहीं कहा जाता है बल्कि उनके बयान भी ओवैसी से मिलते जुलते हैं। सईदा फलक कभी-भी मंच से किसी भी नेता को धमकी दे देती हैं, कभी किसी के लिए अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करती हैं।

वे पहले भी सीएम योगी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी कर चुकी हैं, “उनका (सीएम योगी) खुद का नाम पहले अजय बिष्ट था, नाम बदलकर योगी आदित्यनाथ रख लिया। तो बेहतर यह होगा कि एक बार फिर से वो अपना नाम बदलकर नाम बदलने वाला बंदर रख लें।”

हाल ही में बिहार चुनाव और मुंबई के BMC चुनावों में भी सईदा फलक के कई विवादित बयान सामने आए थे। किशनगंज में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सईदा शेख ने पीएम मोदी और सीएम योगी को ‘छोटा शैतान‘ कहा था। वहीं BMC चुनावों में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस को चुनौती देते हुए सईदा ने कहा था, “सुन लो फडणवीस, अगर अल्लाह ने चाहा तो एक दिन इसी नकाब और हिजाब को पहनकर एक मुस्लिम औरत हिंदुस्तान की प्राइम मिनिस्टर बनेगी।”

AIMIM नेताओं की ‘गलीचपने’ की रही पृष्ठभूमि

अब सईदा शेख की इन अपमानजनक टिप्पणियों को सुनने के बाद ज्यादा हैरानी भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये उसी पार्टी की नेता हैं, जिसमें सहर शेख और अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे नेता शामिल हैं। और यही AIMIM की पहचान है, कि देश के प्रधानमंत्री और प्रशासन को सीधी ‘गाली’ या ‘धमकी’ देकर चर्चा में आओ और फिर खुद को बड़ा नेता बनाओ। इन सभी नेताओं से ऐसे बयान करने की उम्मीद भी है, क्योंकि इनके मुखिया असदु्द्दीन ओवैसी ही आए दिन हिंदू-विरोधी और कट्टर बयान देते नजर आते हैं और मंच के सामने बैठी कौम इसपर ठहाके मारकर हँसती है।

अब ईरान भी पाकिस्तान को मान रहा ‘ट्रंप का टट्टू’, अमेरिका के दलाल से ना हो पाएगी मध्यस्थता

           पाकिस्तान ट्रंप के आगे झुकता है, भरोसे लायक नहीं: ईरान ने मध्यस्थता पर उठाए सवाल (साभार: CNBC)
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में पाकिस्तान लगातार खुद को शांतिदूत दिखाने की कोशिश में लगा हुआ है। वहीं, अब तेहरान ने साफ संकेत दे दिया है कि वह पाकिस्तान को एक भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मानता। ईरान के सांसद और संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने खुलकर पाकिस्तान की भूमिका पर आपत्ति जताई है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

हकीकत यह है कि पाकिस्तान शुरू से ही दलालियाँ कर मुल्क को चलाता रहा है। इसने कभी आत्मनिर्भर बनने की कोशिश तक नहीं की। ईरान और अमेरिका में बातचीत का ड्रामा कर अमेरिका को पागल बनाकर नोट खींच रहा है। हैरानी इस बात पर होती है कि अमेरिका जैसा देश इस दोगले पाकिस्तान के इशारे पर नाच रहा है। सोवियत यूनियन को तोड़ने में अमेरिका ने पाकिस्तान और इराक का इस्तेमाल किया और इराक की जो हालत है सबके सामने है और पाकिस्तान एक भिखारी देश। दूसरे, समझ में नहीं आता अमेरिका पाकिस्तान पर भरोसा क्यों कर रहा है? इसी पाकिस्तान ने कहा था कि ओसामा पाकिस्तान में नहीं लेकिन अमेरिका ने ओसामा को मारा पाकिस्तान में। अगर ओसामा पाकिस्तान में नहीं था फिर किस ओसामा को अमेरिका ने मारा था? 

फिर सऊदी अरब ने किस घटिया देश के साथ रक्षा समझौता किया है जिसकी सेना 1971 की लड़ाई में भारत के आगे समर्पण किया और अफगानिस्तान और बलूचिस्तान की सेनाओं से पिट रही है।   

मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, पाकिस्तान में भरोसे की कमी

इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “पाकिस्तान के पास मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अच्छा मित्र और पड़ोसी जरूर है लेकिन बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।

रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नीतियों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों को ध्यान में रखता है और अक्सर उसी दिशा में झुकाव दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद कभी भी वॉशिंगटन के खिलाफ खुलकर बोलने से बचता है। रेजाई ने कहा, “एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, न कि हमेशा एक पक्ष की ओर झुकाव रखना चाहिए।”

कूटनीतिक हलचल तेज, बातचीत में अनिश्चितता कायम

इन बयानों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने में जुटे हैं। हाल ही में उन्होंने तीन दिनों के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान का दौरा किया और वहाँ आर्मी चीफ असीम मुनीर सहित कई शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की। इससे पहले वे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात कर चुके थे।

अराघची इससे पहले ओमान भी गए थे, जहाँ सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के साथ उनकी बातचीत हुई। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा, नए कानूनी ढाँचे, मुआवजे की माँग, भविष्य में सैन्य कार्रवाई रोकने की गारंटी और अमेरिकी समुद्री प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान बातचीत चाहता है, तो वह सीधे संपर्क कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगर वे बातचीत करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आ सकते हैं या हमें कॉल कर सकते हैं… आप जानते हैं, फोन मौजूद है और हमारे पास सुरक्षित लाइनें हैं।”

पौराणिक गाथा : जब जगन्नाथ जी महाराज ने एकादशी माता को बांधकर उल्टा लटकाया; एकादशी को चावल छूना भी पाप करने से कम नहीं


इस धरती पर आज भी श्रीकृष्ण, वीर हनुमान और भगवान विश्वकर्मा आदि प्रकट होते हैं। ओडिसा के पुरी में तो भगवान जगन्नाथ के रूप में श्रीकृष्ण विराजमान हैं। शनि धाम में शनि देव स्वयं। शनि धाम क्षेत्र में किसी मकान में दरवाजे बंद नहीं होते और ताला नहीं पड़ता। 
अगर त्रेता युग में पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं और धर्म दार्शनिकता से भरा है तो द्वापर युग भी श्रीकृष्ण की असंख्य लीलाओं से भरा हुआ है। परन्तु इस कलयुग में भी प्रभु की लीलाओं की कोई कमी नहीं। यह वह युग है जहां प्रभु ने अपने परमभक्त हनुमान की महिमा को प्रकाशमय कर रहे हैं। 
ओडिसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ जी(जगत पालनकर्ता श्रीविष्णु) महाराज की महिमा देखते ही बनती है।  
एकादशी के दिन जगन्नाथ जी के दर्शन करने का अवसर मिला। सुना था कि जगन्नाथ धाम के दर्शन करने बाद चावल खा सकते हैं। लेकिन जब भंडारे में रूपए देने उपरान्त पंडित जी ने भंडारे की रसीद लेकर परिवार के सभी सदस्यों के लिए भोजन लाए। भोजन में नाना प्रकार के चावल, दाल और सब्जी आदि होने पर पंडितजी महाराज को एकादशी व्रत होने से चावल खाने से मना करने पर बोले कि एकादशी को सिर्फ जगन्नाथ धाम के प्रांगण में खा सकते हो बाहर नहीं। खोल लो व्रत। प्रभु का प्रसाद है। जीवन का शायद का पहला और आखिरी व्रत होगा जब प्रभूधाम में व्रत चावल से खोला। व्रत खोलने के बाद फिर उन्होंने एकादशी माता के उल्टा लटके मूर्ति के भी दर्शन करवाने के बाद कथा बताई।   

आइए देखते हैं इस कथा में।

श्री जगन्नाथ मंदिर में आज एकादशी के दिन भात बन रहा है। हां, भात बन रहा है। दाल बन रही है। अनेकों प्रकार के व्यंजन और सब्जियां बन रही हैं।
अरे इस कलयुग में जहां एकादशी के दिन भात खाना तो दूर की बात उसका विचार करना भी महापाप माना जाता है, वहां श्री क्षेत्र पुरी के जगन्नाथ मंदिर में आज उत्सव का माहौल है। भक्तगण आनंद बाजार में बैठकर तृप्त होकर महाप्रसाद से आनंदित हो रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों? क्यों यहां एकादशी माता का चाबुक नहीं चलता?
बात उस समय की है जब सतयुग का सवेरा था। भगवान विष्णु के श्री अंग से एक परम तेजस्वी शक्ति उत्पन्न हुई जिनका नाम था एकादशी देवी। उनका जन्म ही इसलिए हुआ था कि वे संसार से पाप का नाश कर सकें।
ठाकुर जी ने उन्हें निहारते हुए एक विशेष वरदान दिया। बोले देवी, महीने में दो दिन तुम्हारा राज चलेगा। जो भी मनुष्य उस तिथि पर अन्न, विशेषकर चावल पाएगा, उसके सारे संचित पाप उस अन्न में समा जाएंगे और जो तुम्हारी शरण में रहकर व्रत करेगा उसे साक्षात मेरा धाम प्राप्त होगा।
एकादशी माता को अपनी इस शक्ति पर बड़ा गर्व हो गया। हो भी क्यों ना, तीनों लोकों में उनका भय था। स्वर्ग हो या पाताल, उस दिन कहीं चूल्हा नहीं जलता था। पापी से पापी मनुष्य भी एकादशी के दिन चावल को छूने से कांपता था।
अपनी विजय पताका फहराती हुई अहंकार में डूबी एकादशी माता एक दिन नीलांचल धाम यानी हमारे जगन्नाथ पुरी पहुंची। जैसे ही उन्होंने मंदिर के सिंह द्वार में अपना पहला कदम रखा, उनको लगा कि शायद वे रास्ता भटक गई हैं।
आज एकादशी की पावन तिथि थी, पर यहां का नजारा तो बिल्कुल उलट था। आनंद बाजार में हजारों भक्त बैठे थे। कोई भूखा नहीं था, कोई प्यासा नहीं था। सबके सामने मिट्टी के कुल्हड़ों में गरमागरम अन्न परोसा जा रहा था। भक्त बड़े चाव से “जय जगन्नाथ” का उद्घोष करते हुए उस भात का आनंद ले रहे थे।
एकादशी माता का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। वे व्याकुल हो उठीं। सोचने लगीं, यह मेरा अपमान है। मेरे ही दिन यहां चावल! क्या जगन्नाथ जी मेरा नियम भूल गए?
क्रोध में जलती हुई वे सीधे मंदिर के गर्भगृह में घुस गईं। सामने रत्न सिंहासन पर ठाकुर जी अपने बड़े भाई बलभद्र और लाडली बहन सुभद्रा के साथ मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे।
एकादशी माता ललकार कर बोलीं, “प्रभु, यह क्या अनर्थ हो रहा है? आपने ही तो मुझे वरदान दिया था कि एकादशी को चावल में पाप का वास होगा। तो आज आपके इस धाम में यह पाप क्यों बह रहा है? रोकिए इन भक्तों को, वरना मेरा श्राप सबको भस्म कर देगा।”
ठाकुर जी ने बड़े प्रेम से देखा और शांत स्वर में बोले, “देवी, शांत हो जाओ। तुम जो देख रही हो वह साधारण चावल नहीं है। वह कैवल्य है, वह मेरा महाप्रसाद है। यह साक्षात मेरी जूठन है और मेरी जूठन में कभी कोई पाप निवास नहीं कर सकता। इसके सामने कोई तिथि, कोई नियम बड़ा नहीं है।”
परंतु एकादशी माता का अहंकार बहुत बढ़ चुका था। वे बोलीं, “नहीं प्रभु, नियम तो नियम होता है। अगर सारी दुनिया चावल नहीं खा रही तो पुरी में भी कोई नहीं खाएगा।”
जैसे ही उन्होंने महाप्रसाद को रोकने के लिए हाथ उठाया, अचानक मंदिर का वातावरण बदल गया। ठाकुर जी की मुस्कान गायब हो गई और उनकी आंखों में प्रचंड तेज आ गया।
वे कड़क स्वर में बोले, “रुको देवी! तुमने मेरे महाप्रसाद को पाप कहने का दुस्साहस कैसे किया? यह महाप्रसाद साक्षात ब्रह्म है। इसके सामने वेद-पुराण भी छोटे पड़ जाते हैं।”
पर एकादशी माता नहीं मानीं। उन्होंने कहा, “मैं यह अन्याय नहीं होने दूंगी।”
अब ठाकुर जी का धैर्य समाप्त हो चुका था। उन्होंने अपनी योगमाया का आह्वान किया। अगले ही पल दिव्य जंजीरों ने एकादशी माता को जकड़ लिया। उन्हें मंदिर के ईशान कोण में ले जाकर उल्टा लटका दिया गया।
ठाकुर जी बोले, “अब तुम यहीं बंदी बनकर रहोगी। तुम्हारी आंखों के सामने मेरे भक्त महाप्रसाद पाएंगे, लेकिन तुम किसी को रोक नहीं पाओगी।”
एकादशी माता रोने लगीं। बोलीं, “प्रभु, यह अन्याय है। अगर मैं यहां बंदी रहूंगी तो संसार मेरा सम्मान करना छोड़ देगा।”
उनका अहंकार टूट चुका था।
ठाकुर जी का हृदय पिघल गया। उन्होंने कहा, “देवी, घबराओ मत। मैं तुम्हारा सम्मान बनाए रखूंगा। पुरी में एकादशी के दिन भक्त महाप्रसाद खाएंगे, पर उससे पहले उसे अपने मस्तक से लगाकर तुम्हें प्रणाम करेंगे।”
यह सुनकर एकादशी माता प्रसन्न हो गईं और बोलीं, “जो भक्त इस भाव से महाप्रसाद ग्रहण करेगा, मैं उसके पाप नहीं गिनूंगी, बल्कि उसे दुगुना पुण्य दूंगी।”
यही कारण है कि आज भी जगन्नाथ पुरी में एकादशी के दिन हजारों भक्त आनंद से महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।
और मान्यता है कि यदि उस दिन महाप्रसाद को व्रत के कारण ठुकरा दिया जाए, तो वह भगवान का अपमान माना जाता है।
आज भी मंदिर के पास एकादशी माता की मूर्ति स्थापित है, जहां वे मौन रहकर सब देखती हैं।
यह कथा हमें सिखाती है कि धर्म में नियम बहुत हैं, पर प्रेम और भगवान का प्रसाद उन सभी नियमों से ऊपर है।
जय जगन्नाथ जी की
जय एकादशी माता

पाकिस्तान की तहरीक-ए-तालिबान की बांग्लादेश एयरफोर्स में घुसपैठ, बड़े अधिकारियों समेत 13 जवान गिरफ्तार


बांग्लादेश एयरफोर्स इन दिनों हाई अलर्ट पर है। हाल ही में कई एयरबेस पर खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई। इन छापों में कुछ अधिकारियों और जवानों पर प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े होने का आरोप है।

यह कार्रवाई 20 अप्रैल 2026 की सुबह शुरू हुई थी। अब तक कम से कम दो स्क्वाड्रन लीडर, करीब 10 जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) और एयरफोर्स के जवानों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा लगभग एक दर्जन अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अन्य संदिग्ध देश छोड़कर भाग गए हैं।

इस मामले का खुलासा सबसे पहले भारतीय पत्रकार चंदन नंदी ने 23 अप्रैल 2026 को नॉर्थईस्ट न्यूज की एक रिपोर्ट में किया था। इसके बाद 24 और 25 अप्रैल को आई रिपोर्ट्स में इस कथित घुसपैठ की पूरी जानकारी सामने आई। बांग्लादेश के अधिकांश मीडिया संस्थानों ने इस संवेदनशील सैन्य मामले पर सीधे रिपोर्टिंग करने से परहेज किया। हालाँकि, बाद में कुछ समाचार पोर्टलों ने नॉर्थईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के आधार पर खबर प्रकाशित की। इसके बाद एयरबेस और आसपास के इलाकों में पुलिस की सतर्कता भी बढ़ा दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश एयरफोर्स की खुफिया शाखा ने लंबे समय तक निगरानी करने के बाद 20 अप्रैल की तड़के ढाका स्थित कम से कम दो एयरफोर्स ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 10 अन्य सैन्यकर्मियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।

साथ ही उसने यह भी बताया कि पिछले कई महीनों से बांग्लादेश एयरफोर्स के भीतर TTP नए लोगों की भर्ती करने की कोशिश कर रही थी। इसके बाद पाकिस्तान ने यह पूरी जानकारी बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ साझा की।

जानकारी मिलते ही बांग्लादेश एयरफोर्स की खुफिया शाखा तुरंत सक्रिय हो गई। अगले 8 से 9 दिनों तक देश के तीन प्रमुख एयरबेस पर लगातार छापेमारी की गई। इनमें चटगाँव का जुहरुल हक एयरबेस, ढाका के कुर्मिटोला स्थित एके खंदाकर बेस और जेसोर का मतीउर रहमान बेस शामिल थे। इन छापों के दौरान कई वायुसेना कर्मियों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 4 से 5 एयरमैन कॉक्स बाजार यूनिट से थे। बाकी जवान चटगाँव की 25वीं स्क्वाड्रन और जेसोर की 18वीं स्क्वाड्रन से थे। जेसोर की यह स्क्वाड्रन रडार संचालन का काम संभालती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरार हुए दो एयरमैन ढाका एयरबेस में तैनात थे, जबकि एक अन्य जाहुरुल हक एयरबेस से जुड़े एयरमेन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में काम करता था। मामले की जाँच अभी जारी है और सुरक्षा एजेंसियाँ हर पहलू पर नजर बनाए हुए हैं।

जाँच एजेंसियों ने जाहुरुल हक एयर बेस की मुख्य मस्जिद के इमाम अब्दुस शुकुर को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य भर्ती करने वाला व्यक्ति बताया है। माना जा रहा है कि करीब 6 महीने पहले TTP के लोगों ने उससे संपर्क किया था। छापेमारी के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, TTP से जुड़े बांग्लादेश एयरफोर्स के 10 से 12 अन्य कर्मी, जिनमें कुछ वारंट अधिकारी भी शामिल हैं, ये मामले का खुलासा होने के बाद तुर्की, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और पुर्तगाल भाग गए हैं।

नॉर्थईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में बताया गया कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस्तियाक अहमद नाम के एक व्यक्ति की पहचान की है। वह सामी, अबू बक्कर और अबू मोहम्मद जैसे कई नामों से जाना जाता था। जाँच में सामने आया कि वह सेना से निकाले जा चुके दो पूर्व सैनिकों के लगातार संपर्क में था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें उसने इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम बताए।

बांग्लादेशी मीडिया संस्थान ‘द सन 24’ के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई उस खुफिया जानकारी के बाद शुरू हुई, जिसमें कॉक्स बाजार जिले के उखिया इलाके में TTP का एक ट्रेनिंग सेंटर बनाने की साजिश का पता चला था। इसके बाद बांग्लादेश पुलिस ने देशभर के वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत अलर्ट जारी किया।

इसमें रेंज DIG, मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षकों को संवेदनशील जगहों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए। संसद भवन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के दफ्तर, धार्मिक स्थल, मनोरंजन केंद्र, शाहबाग और हथियार भंडार जैसी जगहों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। यह चेतावनी तब जारी की गई, जब प्रतिबंधित संगठन और मौजूदा व हाल ही में बर्खास्त किए गए सैन्यकर्मियों के बीच संबंधों के संकेत मिले।

नॉर्थईस्ट न्यूज की आगे की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अब बांग्लादेश पुलिस TTP और सेना के कम से कम दो पूर्व जवानों के बीच संबंधों की भी जाँच कर रही है। इससे साफ है कि जाँच का दायरा अब केवल एयरफोर्स तक सीमित नहीं रहा है। हालाँकि, बांग्लादेश सरकार ने अब तक गिरफ्तारियों या इस ऑपरेशन के पूरे पैमाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, पाकिस्तान में प्रतिबंधित और अफगान तालिबान से जुड़े TTP ने भी इन आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बंगाल : दूसरे चरण के मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस(TMC) के कार्यकर्ता रफीकुल इस्लाम के घर मिला क्रूड बमों का जगीरा

                   NIA ने शुरू की TMC कार्यकर्ता के घर मिले बम मामले की जाँच (साभार: न्यूज18/एनडीटीवी)

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से दूसरे चरण से पहले पश्चिम बंगाल में 79 क्रूड बम बरामद होने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर उठाया गया है।

कोलकाता पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ इलाके में रफीकुल इस्लाम के घर से ये बम और दूसरी आपत्तिजनक सामग्री बरामद की थी। बीजेपी ने आरोपित को तृणमूल कांग्रेस(TMC) का कार्यकर्ता बताया है। इन विस्फोटकों को इस तरह रखा गया था जिससे आम लोगों की जान और संपत्ति को सीधा खतरा था।

इससे पहले चुनाव आयोग ने रविवार (26 अप्रैल 2026) को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि राज्य में बम बनाने की गतिविधियों में शामिल लोगों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए और ऐसी सभी सामग्री जब्त की जाए।

आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर, सभी डीसीपी, एसपी और थाना स्तर तक के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि अगर उनके क्षेत्र में विस्फोटक बरामद हुए या धमकी की कोई घटना सामने आई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। आयोग ने साफ कहा है कि संबंधित अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन्हें ‘बख्शा नहीं जाएगा।’

सभी जिलों में विशेष अभियान पहले से शुरू हो चुका है। आयोग ने यह भी तय किया है कि बम बनाने से जुड़े सभी मामलों की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) करेगी ताकि चुनावी माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार सोमवार (27 अप्रैल 2026) को खत्म हो जाएगा। दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा।

प्रशांत भूषण UCC की मांग कर रहा है; और शरिया लॉ को चुनौती दे रहा है, जबकि मुस्लिम ही सबसे ज्यादा UCC का विरोध करते हैं

सुभाष चन्द्र

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) आवेदन कानून 1937 को चुनौती देते हुए उसके प्रावधानों को गैर संवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। यह याचिका पौलोमी पावनी शुक्ला और न्याय नारी फाउंडेशन ने दायर की है और उनका वकील है प्रशांत भूषण

दरअसल, दिल से कोई मुस्लिम शरीयत लागू करना या करवाना नहीं चाहता। यहाँ तक शरीयत का शोर मचाने वाले। उनका मकसद बस शोर मचाकर अपनी तिजोरियां भरना है। वह अच्छी तरह जानता है कि इसके लागू होते ही उनकी आज़ादी, मनपसंद कपडे, फिल्में देखना और घरों में टीवी आदि आदि पर पाबन्दी। हाँ अपना दबदबा बनाये रखने के लिए शरीयत के लिए शोर या उपद्रव मचाने में कोई नुकसान नहीं। इतना ही नहीं, शरीयत लागू होते मुस्लिम महिलाओं की आज़ादी पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। फिर कोई कहने वाला नहीं होगा कि इस्लाम में औरतों को आज़ादी है।       

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
अब देखने वाली बात है कि घोर हिंदू विरोधी और मोदी सरकार विरोधी वामपंथी मानसिकता के वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि देश में UCC न होने की वजह से शरिया आवेदन कानून 1937 आज़ादी के 78 साल बाद भी प्रभावी है इसका मतलब प्रशांत भूषण ने सीधे सीधे UCC लागू करने की मांग कर दी जिसका मुस्लिम ही सबसे ज्यादा विरोध करते हैं

अब याचिका दायर करने वाले गैर मुस्लिम हैं, इसलिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को भी पार्टी बनाएं

प्रशांत भूषण ने दलील दी कि 1937 के इस पुराने कानून के कारण लगभग एक करोड़ मुस्लिम महिलाओं के साथ विरासत, संपत्ति और विवाह जैसे मामलों में भेदभाव किया जा रहा है इस कानून के तहत महिलाओं को पुरुषों की तुलना में आधा या उससे भी कम हिस्सा मिलता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है अगर सुप्रीम कोर्ट इस रद्द करता है तो वे भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की व्याख्या बदल सकते हैं

प्रशांत भूषण ने इस कानून को अनुच्छेद 25 से भी अलग बता दिया और कहा कि मुस्लिम महिलाओं को कम हिस्सा मिलना अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं हो सकती

याचिकाकर्ता का कहना था कि विरासत और उत्तराधिकार के मामलों में मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाला व्यवहार उन्हें “दोयम” दर्जे का नागरिक बनाता है और इसे अब ख़त्म किया जाना चाहिए यह मामला सीधे तौर पर पर्सनल लॉ और संवैधानिक अधिकारों के बीच टकराव से जुड़ा है यदि कोर्ट इस गैर संवैधानिक करार देता है तो यह मुस्लिम महिलाओं की कानूनी अधिकारों की बड़ी जीत होगी 

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार को 4 सप्ताह में उत्तर देने के लिए नोटिस जारी किया, अब केंद्र सरकार याचिका समर्थन करेगी तो मुस्लिम संगठन मोदी पर मुस्लिमों के अधिकारों पर हस्तक्षेप का आरोप लगा देंगे

एक याचिका कभी हिंदू संगठन ने दायर की थी (शायद 2018 में) सबरीमाला मंदिर के फैसले के बाद जिसमें मांग की गई थी कि मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में जाने का अधिकार मिलना चाहिए तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता से पूछा था, आप कौन होते है ऐसी याचिका दायर करने वाले, इसे मुस्लिम महिलाओं को दायर करने दो तब भी कहा जा सकता था कि कुछ मुस्लिम महिलाओं को पार्टी बनाएं लेकिन तब ऐसा नहीं कहा गया लेकिन अब कहा गया है

अभी कुछ दिन पहले CJI सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कहा है कि -

“UCC IS ABOUT CONSTITUTION, NOT RELIGION”

“UNIFORM CIVIL CODE IS A CONSTITUTIONAL GOAL AIMED AT EQUALITY, NOT LINKED TO ANY RELIGION”

प्रशांत भूषण को चाहिए कि वह मुस्लिम महिलाओं के साथ मुस्लिम समाज में होने वाले सभी तरह के भेदभावों को एक साथ कोर्ट के सामने प्रस्तुत करें और UCC लागू करने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क कर उनका समर्थन जुटाए

कांग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच : रेप हो रहा है तो लेटकर मजे लो,… क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कांग्रेस नेता?

                                    क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कांग्रेस नेता?
महाराष्ट्र में अमरावती जिले से सामने आया मामला समाज की कई परतों को उजागर करता है। एक तरफ जहाँ मुस्लिम युवक मोहम्मद अयान अहमद तनवीर ने 180 लड़कियों को अपने जाल में फँसाया, उनके साथ 350 से ज्यादा अश्लील वीडियो बनाए और इनमें से 100 वीडियो वायरल भी कर दिए। दूसरी तरफ कांग्रेस है, जो ऐसे गंभीर मामलों में पीड़िताओं को कठघरे में खड़ा करने से बाज नहीं आती।

इस पूरे मामले में कांग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच को पूरी तरह उजागर करते कांग्रेस नेत्री यशोमती चंद्रकांत ठाकुर का पीड़िताओं पर सवाल उठाते बयान सामने आया है। उन्होंने उन पीड़िताओं को लेक्चर दिया- “लड़कियों में अक्ल नहीं है क्या? क्या लड़कियों ने अपनी बुद्धि खो दी है?”

दिलचस्प बात यह है कि यशोमती ठाकुर 2019 से 2022 तक कांग्रेस और शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। यानी जिस पद पर रहते हुए यशोमती ठाकुर से महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान की आस थी, वही कांग्रेस नेता आज पीड़ित लड़कियों पर सवाल उठा रही है।

सीधी बात है कि ये सिर्फ एक बयान नहीं है, ये कांग्रेस पार्टी की मानसिकता है। ये वही सोच है जो हर बार रेप, छेड़छाड़ या यौन शोषण के मामलों में अपराधी पर सवाल उठाने के बजाए लड़कियों को ही नसीहत देने लगती है। कभी उनके कपड़ों पर, कभी उनकी समझ पर, कभी उनके फैसलों पर। हर बार राजनीतिक बयानबाजी में निशाना पीड़िता ही बनती हैं।

और ये पहली बार नहीं हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, ऐसे बयान बार-बार सामने आते हैं। कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर केआर रमेश कुमार का वो शर्मनाक बयान कौन भूल सकता है- “जब रेप होना ही है, तो लेटो और मजे लो।” यही नहीं कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया खुलेआम कहते हैं- “खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो जाता है।” केरल कांग्रेस के नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन तो इससे भी आगे निकल जाते हैं और कहते हैं- “जिस लड़की का रेप हो, उसे आत्महत्या कर लेनी चाहिए।” वहीं अमरगौड़ा पाटिल जैसे नेता तो रेप पीड़िता के परिवार को ही झूठा करार देने लगते हैं।

ये कोई एक-दो फिसलती जुबान के उदाहरण नहीं हैं, ये उसी पुरानी, टुच्ची और गैर-जिम्मेदार सोच की झलक है जो अंदर तक बैठी हुई है।

और बात यहीं खत्म नहीं होती। जब राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी हाथरस की पीड़िता से मिलने जाते हैं, तब जो वीडियो सामने आई, उसने भी बहुत कुछ साफ कर दिया। जिस वक्त पूरे देश में गुस्सा और संवेदना का माहौल था, उस समय दोनों भाई-बहन का कार में हँसी-मजाक करते हुए जाना ये दिखाता है कि गंभीरता कितनी है। साफ है, ये सिर्फ अलग-अलग नेताओं की गलती नहीं है।

सबसे खतरनाक बात ये है कि इस तरह के बयान सीधे-सीधे अपराधियों को राहत देते हैं। जब देश की एक पार्टी के नेता ही पीड़ितों को दोष देने लगेंगे, तो अपराधियों का हौसला क्यों नहीं बढ़ेगा? उन्हें तो यही लगेगा कि गलती उनकी नहीं, बल्कि लड़कियों की ही है।

आखिर में साफ शब्दों में कहें तो कांग्रेस की समस्या बयान नहीं, पूरी सोच है। बार-बार वही गिरी हुई बातें, वही पीड़ितों को कठघरे में खड़ा करने की आदत ये दिखाती है कि ये कोई गलती नहीं बल्कि जड़ जमा चुकी मानसिकता है। जिस पार्टी के नेताओं को रेप जैसे गंभीर अपराध में भी संवेदनशीलता नहीं दिखती, वो महिलाओं की सुरक्षा की बात करें, ये खुद एक मजाक लगता है। सच यही है कि कांग्रेस के लिए ऐसे मुद्दे गंभीर नहीं, सिर्फ राजनीति का सामान है। और जब तक ये सोच नहीं बदलेगी, तब तक इनके बयान भी ऐसे ही जहरीले और शर्मनाक आते रहेंगे।

पौराणिक गाथा : पुरी में जगन्नाथ जी ने राम भक्त हनुमान को स्वर्ण जंजीर में बांधकर अपराधी की तरह क्यों रखा है?

जब राजा इंद्रदुम्न ने पुरुषोत्तम क्षेत्र यानी पुरी में भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण किया तो समुद्र के अधिपति वरुण देव के मन में अपने प्रभु के दर्शन की तीव्र इच्छा जागी। वे जानते थे कि साक्षात नारायण अब उनके तट पर निवास कर रहे हैं। अपनी इसी भक्ति के वशीभूत होकर वरुण देव ने मंदिर की ओर प्रस्थान किया। क्योंकि वरुण देव जल के स्वामी हैं। उनके आगमन के साथ ही समुद्र की प्रचंड लहरें भी नगर की सीमाओं को लांघ कर भीतर प्रवेश कर गई। देखते ही देखते पुरी का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और मंदिर के प्रांगण तक पानी पहुंच गया। यह कोई साधारण प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि एक भक्त का अपने आराध्य से मिलने का आवेग था जिसने अनजाने में पुरी धाम के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया था। 
मन्दिर के अन्दर प्रवेश करने पर ध्यान से सुनने पर समुद्र की लहरों का मधुर स्वर कानों में सुनाई पड़ता है। जबकि समुद्र और मन्दिर में दूरी है। जबकि समुद्र के पास जाने पर उतनी मधुर ध्वनि नहीं सुनाई पड़ती। अब इसे प्रभु का चमत्कार ही कहा जाएगा।    
यह स्थिति नगरवासियों के लिए अत्यंत चिंताजनक थी। लोगों के घर बहने लगे और खेती नष्ट होने लगी। तब समस्त नगरवासी अपनी करुण पुकार लेकर श्री जगन्नाथ धाम पहुंचे। उन्होंने महाप्रभु के श्री चरणों में साष्टांग प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा हे प्रभु यदि आप इस नीलांचल धाम में निवास करना चाहते हैं और चाहते हैं आपकी सेवा करें तो कृपा कर हमें इस संकट से बचाएं। वरुण देव बार-बार आपके दर्शन के बहाने हमारे नगर को डूबा रहे हैं। यदि यही स्थिति रही तो यह सुंदर नगर और आपकी सेवा करने वाले भक्त कैसे जीवित रहेंगे? 
हे जगत के स्वामी इस विनाशकारी बाण को रोकिए। तब महाप्रभु के मन में एक गहरा विचार चला। वरुण देव का यह प्रेम अब मर्यादा तोड़ रहा है। मेरे दर्शन की उनकी यह प्यास मेरे अन्य भक्तों के लिए संकट बन गई है। इसे रोकने के लिए मुझे एक ऐसे रक्षक की आवश्यकता है जिसके भीतर अथाह शक्ति भी हो और अटूट धैर्य भी। जिसने माता सीता की खोज कर मेरे हृदय के संताप को हरा था वही आज मेरे नगरवासियों के भय को भी हर सकता है। 
भगवान ने विचार किया कि वरुण देव का जल तत्व है और हनुमान पवन पुत्र है। पवन ही जल की लहरों को नियंत्रित करती है। इसलिए भगवान ने हनुमान जी को बुलाया क्योंकि वे जानते थे कि जो समुद्र को लांघ सकता है वही समुद्र को बांध भी सकता है। यह तुच्छ सेवक धन्य हुआ कि आपने एक बार फिर इस दास को अपनी सेवा के योग्य समझा। हे महावीर तुम इस नीली जलराशि के सम्मुख एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हो जाओ। वरुण देव की एक बूंद भी मेरे भक्तों के आंगन तक नहीं पहुंचनी चाहिए। प्रभु आपके आदेश की गुरुता को मैं समझता हूं। समुद्र की गर्जना मेरे राम नाम के उद्घोष के सामने मौन हो जाएगी। आपकी आज्ञा मेरे लिए अमिट रेखा है। जिसे लांघने का साहस स्वयं वरुण देव भी नहीं कर पाएंगे। जय श्री जगन्नाथ। 
हे पवन पुत्र मेरा उद्देश्य प्रभु के भक्तों को कष्ट देना नहीं था। मैं तो बस अपने स्वामी के उन नूतन विग्रहों के दर्शन करना चाहता था जो इस भव्य मंदिर में विराजे हैं। लहरों का उफान मेरी भक्ति का आवेग था। हे वरुण भक्ति वही श्रेष्ठ है जो संसार का कल्याण करे विनाश नहीं। प्रभु का आदेश है कि तुम अपनी मर्यादा में रहो। यदि तुमने इस रेखा को लांघा तो मेरी गदा और प्रभु का सुदर्शन चक्र तुम्हारा मार्ग रोक देंगे। 
बस, उस समय से भगवान जगन्नाथ को भोग में केवल खिचड़ी अर्पित की जाती थी जो चावल और दाल से बनी होती थी। वही भोग हनुमान जी को भी दिया जाता था। लेकिन हनुमान जी को अयोध्या में रहते हुए अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का अनुभव था। अच्छा खिचड़ी। धीरे-धीरे वे केवल खिचड़ी खाते-खाते ऊब गए। हनुमान जी के मन में यह विचार आने लगा। प्रभु की महिमा अपरंपार है और यह खिचड़ी भी दिव्य है। मैं तो वानर सेना का सेनापति हूं। मुझे तो मीठे फल और लड्डुओं का स्वाद प्रिय है। क्या प्रभु को मेरी पसंद याद नहीं? क्या मुझे युगों युगों तक बस इसी खिचड़ी पर गुजारा करना होगा। खिचड़ी से ऊबकर और मीठे व्यंजनों की लालसा में हनुमान जी ने एक युक्ति निकाली। वे जानते थे कि प्रभु जगन्नाथ जो राम ही हैं के वास अयोध्या और अन्य स्थानों पर आज भी उनके मनपसंद भोग लगते हैं। 
जब भी वरुण देव यानी समुद्र शांत होते हनुमान जी चुपके से अपना पहरा छोड़ते और आकाश मार्ग से उड़कर अयोध्या या वाराणसी पहुंच जाते। वहां वे भरपेट लड्डू, मालपुआ और ताजे फलों का भोग पाते। वे सोचते प्रभु तो भीतर ध्यान मग्न है। उन्हें क्या पता चलेगा? मैं जल्दी से प्रसाद खाकर वापस लौट आऊंगा। लेकिन जैसे ही हनुमान जी वहां से हटते वरुण देव को मौका मिल जाता। समुद्र की लहरें फिर से मंदिर की दीवारों को छूने लगती और पुरी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता। जब यह बार-बार होने लगा तो भगवान जगन्नाथ समझ गए कि हनुमान जी का मन इस खिचड़ी प्रसाद से भर गया है और वे स्वाद के चक्कर में अपनी ड्यूटी छोड़ रहे हैं। हनुमान तुम अपनी जगह क्यों छोड़ रहे हो? क्या तुम्हें मेरी दी हुई खिचड़ी पसंद नहीं? प्रभु आपकी खिचड़ी अमृत है। पर इस वानर को कभी-कभी लड्डुओं की भी याद आती है। 
हे महावीर तुम तो जानते हो कि मेरे लिए भक्तों के कल्याण से बड़ा कुछ नहीं है। तुम्हारी शक्ति और तुम्हारी भूख दोनों ही असीमित हैं। मुझे प्रसन्नता है कि तुमने अपने मन की बात मुझसे छिपाई नहीं। पर हनुमान पुरी धाम की रक्षा का भार केवल तुम्हारे सबल कंधों पर है। यदि तुम स्वाद के वश में होकर तट छोड़ोगे तो वरुण देव मर्यादा का उल्लंघन करेंगे और मेरे हजारों भक्त जलमग्न हो जाएंगे। हनुमान तुम स्वयं को वश में नहीं कर पा रहे हो। इसलिए अब मैं तुम्हें प्रेम और कर्तव्य की इन स्वर्ण जंजीरों में बांधता हूं। यह जंजीरें तुम्हें दंड देने के लिए नहीं बल्कि इस स्थान पर तुम्हारे अडिग होने का प्रमाण होंगी। जब तक तुम बंधे रहोगे वरुण देव की शक्ति तुम्हें पार नहीं कर पाएगी और ना ही तुम विचलित हो पाओगे। 
हनुमान जी ने देखा कि वे जंजीरें केवल स्वर्ण की निर्जीव वस्तु नहीं थी। जब उन्होंने जंजीर के हर एक कड़े को ध्यान से देखा तो उन्हें प्रत्येक कड़े पर राम नाम अंकित दिखाई दिया। इतना ही नहीं उन जंजीरों से वही मधुर ध्वनि निकल रही थी जो हनुमान जी के हृदय में सदैव गूंजती रहती है। राम राम राम हे महाप्रभु मैं कितना अज्ञानी था जो इसे दंड समझ रहा था। आपने तो मुझे दंड नहीं बल्कि अपना साक्षात नाम पहना दिया है। यह बेड़ियां स्वर्ण की नहीं है। यह तो आपके नाम की शक्ति है। प्रभु इस संसार में हनुमान के लिए राम नाम के बंधन से बड़ा कोई मोक्ष नहीं है। 
हे अंजनी पुत्र संसार तुम्हें अनेक नामों से जानता है। किंतु यहां तुम्हारी ख्याति बेड़ी हनुमान के रूप में होगी। जो भी भक्त जगन्नाथ धाम आएगा वो तुम्हारे इस स्वरूप का दर्शन कर यह सीखेगा कि भगवान का नाम राम नाम की बेड़ी ही जीव को भटकने से रोकता है। तुम इसी तट पर दरिया महावीर बनकर मेरे धाम की रक्षा करोगे। 
हनुमान सुनो आज से मैं इस पुरी धाम की मर्यादा और तुम्हारी सन्तुष्टि के लिए एक नई परंपरा का आरंभ करता हूं। आज से इस मंदिर की रसोई साक्षात महालक्ष्मी के संरक्षण में होगी। अब से यहां केवल खिचड़ी नहीं बल्कि छप्पन भोग का विधान होगा। इसमें तुम्हारे प्रिय लड्डू भी होंगे, मालपुआ भी होगा और वह दिव्य पोड़ा पीठा भी होगा। जिसकी सुगंध पाकर स्वयं देवता भी स्वर्ग छोड़कर यहां दौड़े आएंगे। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि 56 प्रकार के इन व्यंजनों का विस्तार इतना विशाल हो कि मेरे भक्त को कभी किसी और द्वार की ओर न ताकना पड़े। 
हनुमान यह 56 भोग मेरे और तुम्हारे प्रेम का प्रतीक होंगे। आज से जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद दुनिया का सबसे पवित्र अन्न होगा। जिसे पाकर मनुष्य जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाएगा। नील माधव हे नील माधव मैं केवल मुट्ठी भर लड्डुओं के मोह में भटक रहा था। पर आपने तो मेरे बहाने समस्त चराचर जगत के लिए अमृत का द्वार ही खोल दिया। आज इस हनुमान ने जान लिया कि आपके चरणों को छोड़कर कहीं और सुख खोजना केवल मृत तृष्णा है। प्रभु आपकी जय हो। आपके इस महाप्रसाद की जय हो। 
हनुमान जी ने एक हाथ में अपनी गदा संभाली और दूसरे हाथ से अपनी बेड़ियों को माथे से लगाया। भगवान जगन्नाथ मंदमंद मुस्कुराते हुए मंदिर के गर्भगृह की ओर लौट गए। उसी दिन से पुरी में महाप्रसाद और छप्पन भोग की परंपरा शुरू हुई। वरुण देव ने अपना सिर झुका लिया और हनुमान जी दरिया महावीर बनकर अनंत काल के लिए पहरे पर बैठ गए। आज भी पुरी जाने वाला हर भक्त जानता है कि मंदिर के भीतर जो शांति है वो बाहर खड़े उसी महावीर की पहरेदारी का फल है जिसे भगवान ने खुद राम नाम की बेड़ियों में बांधा था। जय जगन्नाथ जय दरिया महावीर। 

क्या राघव चड्ढा भी बीजेपी में शामिल होकर साबिर अली, नरेश अग्रवाल और शहजाद अली आदि की तरह भीड़ में गुम हो जाएंगे?

उत्तर प्रदेश की सियासत के एक बड़े माहिर खिलाड़ी हुआ करते थे, नरेश अग्रवाल। हरदोई जिले में नरेश अग्रवाल के परिवार का खासा दबदबा माना जाता था। जिला पंचायत, नगर पालिका से लेकर हरदोई विधानसभा तक, 40 साल तक उनका कब्ज़ा रहा है। कहने को तो वो खाँटी सपाई थे मगर प्रदेश में सरकार किसी की भी रही हो, नरेश अग्रवाल का जलवा हमेशा बरकार रहा।

अपने बयानों को लेकर नरेश अग्रवाल हमेशा अखबारों और मीडिया में चर्चा का विषय रहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हिंदू देवी-देवताओं तक पर वो विवादित बयान दे देते थे। उन पर हिन्दू देवी देवताओं को लेकर गलत बयानबाज़ी के चलते एफआइआर तक दर्ज हुई थी। फिर 2018 में वो भाजपा में शामिल हो गए। भक्त परेशान हो गए, जुगनू बन गए, भाजपा को गरियाने लगे।
नरेश अग्रवाल का भाजपा में शामिल होना 'खबर' थी, लेकिन उसके बाद नरेश अग्रवाल खबरों से गायब हो गए। किसी ने नरेश अग्रवाल का कोई बयान, कोई चर्चा या अखबार में उनकी फोटो देखी है? जेडीयू के एक नेता साबिर अली हुआ करते थे। कट्टरपंथी विचारों और विवादित बयानबाज़ी के लिए मशहूर थे। पीएम मोदी तो खास तौर से उनके निशाने पर रहते थे।
वरिष्ठ पत्रकार एम जे अकबर जिनकी राजीव गाँधी के राज में बड़ी तूती बोलती थी। मुसलमानों का डर दिखा राजीव सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानों के पक्ष में दिए फैसले को ही रुकवा दिया लेकिन वही अकबर बीजेपी में आने पर मोदी द्वारा तीन तलाक बिल पर चुप्पी साध गया। मुंह से एक शब्द नहीं निकाल पाया।
इतना ही नहीं, चर्चा थी कि उन्ही दिनों Calcutta High Court द्वारा कुरान की 124 आयतों के विरुद्ध आने वाले जजमेंट को भी सुनाये जाने में अहम् भूमिका रही। जबकि 31 जुलाई 1986 को तीस हज़ारी कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रट लोहट 24 आयतों के खिलाफ फैसला देने में सफल हो गए जिससे मुल्लावाद में मातम छा गया था।
जब भाजपा-जेडीयू में छत्तीस का आंकड़ा था तो साबिर अली टीवी पर आकर जेडीयू की ओर से मोदी के खिलाफ ज़हर उगलते थे। साबिर अली कहते थे कि मोदी को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। लगभग हर दूसरे दिन अखबार में उनका कोई न कोई बयान छपता था। फिर एक दिन वो बीजेपी में शामिल हो गए। भक्त परेशान, जुगनू की टिमटिम। भाजपा में भी विरोध हुआ, 24 घण्टे में साबिर अली बाहर कर दिए गए। मगर अंदरखाने भाजपा से जुड़े रहे।
पिछले साल मई में साबिर अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ा पद मिला था। किसी को खबर हुई? एक शहज़ाद अली हुआ करते थे, एक्टिविस्ट कहलाते थे। CAA को लेकर शाहीन बाग में धरना दे रहे थे। सोशल मीडिया पर भी CAA और मोदी के खिलाफ ज़हर उगलते थे। शहज़ाद अली वामपंथियों के नए माई-बाप थे जिनसे वामियों को बड़ी क्रांति की उम्मीद थी। फिर एक दिन शहज़ाद अली भाजपा में शामिल हो गए। भक्त फिर परेशान।
शहज़ाद अली भाजपाई होते ही कहने लगे भाजपा मुसलमानों की दुश्मन नहीं है। हम मोदी जी के साथ मिलकर CAA का हल निकाल लेंगे। भाजपा में शामिल होने तक तो शहज़ाद अली 'खबर' थे, उसके बाद एकदम से गायब हो गए। न उन्होंने CAA को लेकर अब तक कोई बयान दिया और न ही अब तक किसी 'क्रांति' की 'मूली' उखाड़ी। मुम्बई हमला आरएसएस की साज़िश बताने वाले कृपा शंकर सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए थे, भक्त तब भी परेशान थे।
कभी खबर बने रहने वाले कृपा शंकर सिंह अब खबरों से ही गायब है। कांग्रेस के धुर हिंदुत्व विरोधी अशोक चह्वाण, मिलिंद देओरा, रंजीत चौटाला, गीता कोड़ा, तपस राय, टीएमसी के अर्जुन सिंह, सुवेन्दु अधिकारी, और दिलीप मंडल भाजपा में शामिल होने के बाद या तो शांत हैं या हिंदुत्व के लिए लड़ रहे हैं। और अब राघव चड्ढा के भाजपा में आने के बाद वातावरण में जुगनुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
राघव चड्ढा या तो चुप रहकर खबरों से गायब हो जाएंगे या देश और हिंदुत्व के लिए काम करेंगे। भाजपा गंगा नहीं है, जो सब पवित्र कर देगी। भाजपा वासेपुर है..यहाँ कबूतर भी एक पंख से उड़ता है ..और दूसरे से अपनी इज्ज़त बचाता है। भाजपा में सब धान बाईस पसेरी है। भाजपा भुने चने खेत मे बोकर भी फसल तैयार कर देती है।