JNU की जिस वामपंथन निवेदिता मेनन को ‘मुस्लिम मर्द’ लगते हैं अट्रैक्टिव, वो भारत को कह रही ‘मनहूस देश’

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हाल ही में पत्रकार मंदीप पुनिया के यूट्यूब चैनल पर जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) की पूर्व प्रोफेसर निवेदिता मेनन का एक इंटरव्यू आया है। इस इंटरव्यू में निवेदिता ने छात्र आंदोलनों और शिक्षा के मुद्दों की आड़ लेकर भारत राष्ट्र, देश की संप्रभुता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था पर सीधे हमले करते हुए भारत को ‘मनहूस’ देश बताया है।

JNU जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में बैठकर लंबे समय तक पठन-पाठन से जुड़ी रहीं एक प्रोफेसर द्वारा सार्वजनिक मंचों से इस तरह के वक्तव्य देना केवल असहमति व्यक्त करना नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता और सामाजिक ताने-बाने पर किया गया एक सोची-समझी रणनीति का प्रहार है।

पूरे साक्षात्कार के दौरान बोले गए उनके शब्द यह साफ उजागर करते हैं कि वामपंथी-कट्टरपंथी इकोसिस्टम किस हद तक भारत के प्रति द्वेष और घृणा से भरा हुआ है।

भारत को ‘मनहूस’ बताकर किया देश का अनादर, हिंदुओं पर भी की घटिया टिप्पणी

निवेदिता मेनन ने अपने इस इंरव्यू में देश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन, विभिन्न छात्र आंदोलनों और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चर्चा करते हुए भारत राष्ट्र के प्रति अपनी अंतर्निहित घृणा को जगजाहिर कर दिया। उन्होंने भारत जैसे महान, सहिष्णु और लोकतांत्रिक देश के लिए ‘मनहूस’ जैसे अपमानजनक शब्द का प्रयोग किया।

देश के भीतर चल रहे CJP के अभियानों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब जुनैद जैसे बच्चे को ट्रेन में मार के फेंक दिया जाता है और पूरा देश सन्नाटे में रहता है, मुझे लगता है कि पिछले 12 साल में ऐसे उनको मतलब बार-बार एहसास दिलाया जा रहा है कि तुम यहाँ के नहीं हो। तुम्हें बुलडोज करेंगे हम, तुम्हें हम कुछ भी करेंगे और तुम चू तक नहीं कर सकते। CJP का प्रोटेस्ट जो है वह थोड़ा साँस लेने की जगह दी और मुसलमानों को शायद लगने लगा कि शायद इस मनहूस देश में हमारे लिए भी कोई जगह है।”

भारत जैसे महान राष्ट्र, जहाँ करोड़ों नागरिक अपनी सांस्कृतिक धरोहर और संप्रभुता पर गर्व करते हैं, उसी राष्ट्र को एक ‘मनहूस’ ढाँचा बताकर पेश करना यह साबित करता है कि तथाकथित वामपंथी बुद्धिजीवियों के पास रचनात्मक आलोचना के नाम पर केवल राष्ट्र-विरोधी जहर उगलने का काम बचा है।

इस प्रकार की भ्रामक भाषा का प्रयोग करके वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि को एक अत्याचारी राष्ट्र के रूप में चित्रित करने का प्रयास करती हैं।

CJP और अराजक आंदोलनों का महिमामंडन: संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की साजिश

निवेदिता का पूरा जोर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों को सही ठहराने और उनका महिमामंडन करने पर रहा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के भेष में तमाम उपद्रवियों के संसद में घुसने की साजिशों और उपद्रव में शामिल वामंपथी और कट्टरपंथी संगठनों व पुलिस पर हमले करने वाले गुंडो को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।

मेनन ने इन आंदोलनों को ‘लोकतांत्रिक जीत’ का नाम दिया। उन्होंने कह, “यह अकाउंटेबिलिटी शब्द जो CJP के प्रोटेस्ट ने इतना आम बनाया कि हर कोई अकाउंटेबिलिटी और जवाबदेही की बात कर रहे हैं। एक स्टूडेंट ने आपको याद होगा एनसीआरटी की टेक्स्ट बुक से डेमोक्रेसी का वर्णन पढ़ते हुए बताया कि अकाउंटेबिलिटी है डेमोक्रेसी का फीचर। तो यह इस मूवमेंट का सबसे बड़ा की सबसे बड़ी बड़ी जीत यह है कि अकाउंटेबिलिटी शब्द हमारे शब्दकोश में हमारे आम बोलचाल में यह शब्द आ गया है।”

आंदोलन के नेतृत्व और उसके स्वरूप पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, “CJP के कॉल पे जिस तरह के लोग निकल के आए तो एक तरह से मैं सुन रही हूँ यह शब्द ऑर्गेनिक बहुत ज्यादा कि यह ऑर्गेनिक हो गया। अब ऑर्गेनिक तो हो गया लेकिन ऑर्गेनिक अपने आप में उभर के नहीं आता है। कहीं न कहीं एक कॉल देने वाला एक केंद्र होना चाहिए और इसमें अभिजीत दीपके का नाम और अभिजीत दीपके की भूमिका जो है हम कभी नहीं भूल सकते। उनको रिड्यूस नहीं कर सकते।”

उन्होंने यह दावा भी किया कि इस तरह के आंदोलनों ने पिछले 12 वर्षों के सन्नाटे को तोड़ा है और विभिन्न वामपंथी समूहों को एक मंच पर लाया है। उन्होंने कहा, “लेकिन वह जो बिल्कुल एक 12 साल से घना सन्नाटा छाया हुआ था, इन 12 सालों में जो कुछ भी हुआ है, एक तरह से अभिजीत ने इसीलिए लेफ्ट ग्रुप्स उनके साथ जुड़ सके। इसीलिए इतने सारे लोग दुनिया देश भर में, दुनिया भर में एक्चुअली दुनिया भर में भी सपोर्ट हुआ है।”

RSS, केंद्र सरकार और शैक्षणिक व्यवस्था पर जहरीले प्रहार

इंटरव्यू के दौरान केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रति निवेदिता मेनन का राजनीतिक विद्वेष स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने देश के नए शिक्षा मंत्री, नवगठित टास्क फोर्स और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर तीखी और अमर्यादित टिप्पणियाँ कीं। साथ ही आरोप लगाया कि इनकी मानसिकता महिलाओं को लेकर भी बहुत घटिया है।

उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “धर्मेंद्र प्रधान निकल गए लेकिन जो एजुकेशन मिनिस्टर बन के आए वह उनसे भी कट्टर संघी हैं और भी कट्टर RSS के मतलब प्रचारक हैं। उन्होंने बिलकिस बानो के बलात्कारियों के बारे में बहुत ही सपोर्टिवली बात की। तो ऐसे शख्स को एजुकेशन मिनिस्टर बनाया है जो हमने सोचा होगा कि धर्मेंद्र प्रधान से खराब कोई नहीं होगा, लो उन्होंने एक और अपने बट से निकाला।” मेनन ने नए शिक्षा मंत्री पर कई तरह के अन्य घटिया आरोप लगाए और हिंदू समाज पर अभद्र टिप्पणी की।

सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए बनाई गई टास्क फोर्स के गठन और उसमें शामिल सदस्यों का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने जो सो कॉल्ड हाई पावर टास्क फोर्स बनाया है उसमें देख लीजिए किस तरह के लोग हैं। उसमें IAS के ब्यूरोक्रेट्स हैं, उसमें इंफोसिस के चीफ हैं और इंफोसिस एजुकेशन के बारे में क्या बताएगा हमको? फिर एक और हैं जिन्होंने गोमूत्र के बारे में बहुत प्रशंसा की है कि गोमूत्र के जरिए बहुत सारी बीमारियाँ ठीक होती हैं। तो इस तरह का एक टास्क फोर्स बनाया है जिससे हमें मतलब कोई उम्मीद ही नहीं।”

देश के राजनीतिक ढाँचे और लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह से नकारते हुए उन्होंने आरोप लगाया, “12 साल से हिंदू राष्ट्र ही रहा है हमारे यहाँ, हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश की गई है और एक तरह से हिंदू राष्ट्र बन भी गया है। हम सब हिंदू राष्ट्र की छाया में रह रहे हैं।”

CAA विरोधी प्रदर्शनों, उमर खालिद और अलगाववादी निरंतरता का समर्थन

इंटरव्यू में निवेदिता मेनन ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों के संदिग्धों का खुलकर बचाव किया। उन्होंने उमर खालिद जैसे जेल में बंद आरोपितों द्वारा फैलाए गए आख्यानों का महिमामंडन किया और इसे एक बड़े क्रांतिकारी सफर के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा, “जो बीज बोए गए एंटी-सीएए और फार्मर्स प्रोटेस्ट में जो बीज बोए गए और उनको दबाया गया एक तरह से, लेकिन उसमें से जो वो सीड्स उमर खालिद जैसे नौजवानों ने जो बीज बोए थे, वो पौधे बनकर उभरे। और अब तो वो एक कंटिन्यूटी है, एक कंटिन्यूटी है एंटी-सीएए से लेके यहाँ तक।”

इसके अलावा उन्होंने देश की चुनावी प्रक्रिया, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर पूर्ण अविश्वास व्यक्त करते हुए कहा, “इस तरह का जो व्यवहार है किसी सरकार का दिखाता है हमें कि उनका कोई इरादा नहीं है एक चुनाव जीतने का, इसका मतलब यह है ना कि उनको चुनाव से डर नहीं है क्योंकि हर लेवल पर उन्होंने EVM, ECI, SIR, डीलिमिटेशन ये सारी चीजों को लेके अब उनको लगता है कि चुनाव हमें जीतने की जरूरत ही नहीं है।”

PM मोदी को दी गई गालियों को बताया ‘प्रतिरोध’, ‘एंटी-पेट्रियारकल’ और ‘फूलों का गुलदस्ता’

छात्र आंदोलनों के दौरान प्रधानमंत्री और देश की संवैधानिक हस्तियों को दी जाने वाली अभद्र और अमर्यादित गालियों को सही ठहराने के लिए निवेदिता मेनन और मंदीप पुनिया ने फेमिनिस्ट और ‘क्वीर’ थ्योरी का सहारा लिया। उन्होंने इसे युवाओं का ‘क्रांतिकारी प्रतिरोध’ करार देते हुए कहा, “जब कोई भी ग्रुप पे एक गाली बार-बार मारी जाती है, उस गाली को उठा के एक फूलों का गुलदस्ता बनाना और बैज ऑफ ऑनर बनाना, यह भी ऐतिहासिक प्रोसेस है।”

उन्होंने आगे गालियों का बचाव करते हुए कहा, “ज्यादातर जो गालियाँ हैं वो एक्चुअली एंटी-पेट्रियारकल हैं, मुझे गालियाँ सुनके लगा कि यह भी वो जो रेजिस्टेंस का एक पोक, दिस इज अ काइंड ऑफ रेजिस्टेंस जो व्हिच आवर जनरेशन, तो मुझे लगता है गालियाँ सुनके लगा कि यह भी रेजिस्टेंस का हिस्सा है।”

एक पूर्व विश्वविद्यालय प्रोफेसर द्वारा युवाओं की अशिष्टता, अमर्यादित भाषा और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति गालियों को ‘बैज ऑफ ऑनर’ और ‘फूलों का गुलदस्ता’ बताकर बढ़ावा देना वामपंथी बौद्धिक वर्ग के नैतिक पतन की चरम सीमा को दर्शाता है।

JNU के मंच का दुरुपयोग और युवाओं के मन में जहर घोलने का प्रयास

इंटरव्यू के अंत में निवेदिता मेनन ने यह खुलकर स्वीकार किया कि वे किस प्रकार युवाओं की इन अराजक कार्यशैली से सीख रही हैं और इसे बढ़ावा देना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, “यह RSS और BJP वाले जब प्रोपेगेंडा करते हैं, उनसे सीखूँगी मैं, उनसे सीखूँगी कैसे जब कीचड़ उछाला जाता है आप कीचड़ को उठा के उनके ऊपर नहीं, उसको एक तरह से गुब्बारा या गुलदस्ता बना के वापस उछाल रहे हैं।”

एक प्रोफेसर का यह दायित्व होता है कि वह छात्रों को अध्ययन, अनुशासित बहस, राष्ट्रनिर्माण और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति जागरूक करे। लेकिन इसके विपरीत, निवेदिता मेनन जैसे वामपंथी विचारक युवाओं के मन में देश की राज्य व्यवस्था, न्यायपालिका और सीमाओं के प्रति आक्रोश और अलगाववाद की भावना को भड़काने में लगे रहते हैं।

निवेदिता मेनन का पुराना ‘कच्चा-चिट्ठा’: विवादित बयानों की पूरी लिस्ट

भारत को ‘मनहूस देश’ बताना या भारतीय सेना व संवैधानिक व्यवस्था पर हमले करना निवेदिता मेनन की किसी नई सोच का नतीजा नहीं है। अगर उनके पिछले करियर और रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि उनका पूरा इतिहास ही भारत विरोधी बयानों, सेना के अपमान, अलगाववादियों के समर्थन और हिंदू विरोधी एजेंडे से भरा पड़ा है।

भारत ने कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है: निवेदिता का विवादित बयान

मार्च 2016 में, JNU परिसर में ‘आजादी’ के नारों को लेकर जारी विवाद के दौरान निवेदिता मेनन ने ‘व्हाट नेशनहुड मीन्स टू मी’ (मेरे लिए राष्ट्रवाद का क्या अर्थ है) विषय पर एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया था। इस भाषण में उन्होंने खुले तौर पर कहा था, “हम सभी जानते हैं कि कश्मीर पर भारत का कब्जा अवैध है। दुनिया भर में यह माना जाता है कि भारत ने कश्मीर पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर रखा है (India is illegally occupying Kashmir)।”

उन्होंने टाइम और न्यूजवीक जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के विवादित नक्शों का संदर्भ देकर यह तर्क दिया था कि यदि पूरा विश्व भारत को कश्मीर में एक आक्रामक शक्ति मानता है, तो घाटी में ‘आजादी’ के नारे लगना पूरी तरह से जायज और प्राकृतिक है। उनके इस वक्तव्य से देश भर में भारी आक्रोश पैदा हुआ था।

भारतीय सैनिकों का अपमान और ‘रोजी-रोटी के लिए काम करने’ का आरोप

फरवरी 2017 में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU), जोधपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में निवेदिता मेनन मुख्य वक्ता थीं। वहाँ उन्होंने न केवल भारत का विवादित नक्शा प्रदर्शित किया, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले भारतीय सेना के जवानों का घोर अपमान किया।

उन्होंने कहा था, “सैनिक देश की रक्षा या देशभक्ति के लिए सीमाओं पर नहीं खड़े हैं, बल्कि वे केवल अपनी आजीविका (रोजगार) चलाने और अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए सेना में काम करते हैं।” उन्होंने आगे यह भी कहा था कि भारत को सियाचिन जैसे क्षेत्रों से अपनी सेना हटा लेनी चाहिए और उस पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए।

इस राष्ट्र-विरोधी बयान के बाद जोधपुर में विश्वविद्यालय परिसर से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन हुए थे, मेनन के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और संगोष्ठी की आयोजक प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया था।

भारत के आधिकारिक मानचित्र और अखंडता पर सवाल उठाना

निवेदिता मेनन ने अपने कई व्याख्यानों और लेखों में भारत के भौगोलिक मानचित्र की वैधता को खारिज किया है। ‘हिमालयन मैगजीन’ और विदेशी प्रकाशनों के विवादित नक्शों का हवाला देकर उन्होंने बार-बार यह तर्क दिया है कि भारत एक ‘कृत्रिम राष्ट्र-राज्य’ है।

वे उत्तर-पूर्व भारत और कश्मीर के भारत में विलय को एक ‘सैनिक जबर्दस्ती’ के रूप में पेश करती हैं, जो सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाला रुख है।

‘लव जिहाद’ पर वामपंथी-इस्लामी साँठगाँठ: आरफा खानम और निवेदिता मेनन द्वारा पीड़ित हिंदुओं का मजाक

निवेदिता मेनन और ‘द वायर’ की प्रोपेगैंडिस्ट आरफा खानम शेरवानी की एक पुरानी बातचीत का विश्लेषण यह साफ उजागर करता है कि किस तरह वामपंथी और इस्लामी मिलकर हिंदू समाज की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों का मजाक उड़ाते हैं।

आरफा खानम ने अपना एजेंडा आगे बढ़ाते हुए सवाल पूछा कि ‘हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के ही क्यों पसंद आते हैं?’, तो निवेदिता मेनन ने ठहाके लगाते हुए बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा, “मुस्लिम मर्द होंगे इतने अट्रैक्टिव और उनको अपने ही धर्म में वो नहीं मिलता होगा।”

आरफा और निवेदिता की इस जोड़ी ने लव जिहाद के पीछे की उस गहरी कड़वी सच्चाई को छिपाने की कोशिश की, जहाँ मुस्लिम युवक अपनी मजहबी पहचान छिपाकर हाथ में कलावा बाँधते हैं, फर्जी हिंदू नाम रखकर हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसाते हैं और बाद में यौन शोषण व धर्मांतरण का दबाव बनाते हैं।

भारतीय संविधान, हिंदू धर्म और हिंदुत्व पर अनर्गल टिप्पणियाँ

प्रोफेसर मेनन अपने भाषणों में लगातार हिंदू समाज की सांस्कृतिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और हिंदुत्व की अवधारणा पर तीखे हमले करती रही हैं। वे हिंदुत्व को एक उग्र, हिंसक और महिला-विरोधी विचारधारा के रूप में चित्रित करती हैं, जबकि अन्य धर्मों में मौजूद कड़े कट्टरपंथ और कुरीतियों पर वे पूरी तरह मौन धारण कर लेती हैं।

हिंदू धर्म की मान्यताओं को निशाना बनाकर बहुसंख्यक आबादी के खिलाफ असंतोष फैलाना उनकी रणनीतिक बयानबाजी का मुख्य हिस्सा रहा है।

देश की न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की साख पर प्रहार

मेनन का यह रिकॉर्ड रहा है कि वे भारत की किसी भी संवैधानिक संस्था पर भरोसा नहीं करतीं। कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए अलगाववादियों या आतंकवादियों के समर्थकों के मामले में वे हमेशा न्यायपालिका के फैसलों पर सवाल उठाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए जाँच के आदेशों को वे ‘राज्य का दमन’ बताती हैं और पुलिस द्वारा की जाने वाली कानूनी कार्रवाइयों को ‘राजनीतिक उत्पीड़न’ का नाम देती हैं। इस प्रकार वे युवाओं के मन में भारतीय राज्य व्यवस्था के प्रति पूर्ण अविश्वास पैदा करने का काम करती हैं।

वैचारिक अराजकता और राष्ट्र-विरोधी आख्यान का वास्तविक आईना

निवेदिता मेनन के इस हालिया इंटरव्यू और उनका पुराना विवादित इतिहास यह साफ उजागर करता है कि उनका पूरा आख्यान केवल किसी राजनीतिक दल या सरकार का विरोध नहीं है, बल्कि भारत के राष्ट्र-राज्य, उसकी संप्रभुता और संवैधानिक ढाँचे पर किया गया एक गहरा प्रहार है।

भारत जैसे विविध और सहिष्णु देश को ‘मनहूस’ बताना, देश की रक्षा करने वाली भारतीय सेना के शौर्य को मात्र ‘रोजी-रोटी का जरिया’ करार देना, कश्मीर पर भारत के संप्रभु अधिकारों को अवैध बताना और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल आरोपितों को ‘क्रांति का बीज’ कहना- यह सब एक सुनियोजित वामपंथी-अलगाववादी सोच का हिस्सा है।

लोकतंत्र में असहमति और वैचारिक आलोचना का हमेशा स्वागत है, लेकिन जब असहमति के नाम पर राष्ट्र के अस्तित्व को नकारा जाने लगे, गालियों को ‘सम्मान का पदक’ (Badge of Honor) बनाकर पेश किया जाने लगे और अराजकता को बढ़ावा दिया जाए, तो उसे अभिव्यक्ति की आजादी नहीं बल्कि ‘वैचारिक आतंकवाद’ कहा जाएगा।

एम जे अकबर का करियर कैसे बर्बाद किया गया?

पत्रकार सुपर्णा शर्मा 
सुभाष चन्द्र

वर्ष 2017 में बॉलीवुड की तनुश्री दत्ता ने मी-टू अभियान चलाया नाना पाटेकर पर आरोप लगा कर। उसके बाद प्रिया रमानी ने अक्टूबर, 2018, में 25 साल पुराने कथित यौन शोषण का आरोप विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर पर लगा दिया, मंत्रीपद चला गया और आज 8 साल बाद भी वो रमानी के खिलाफ केस लड़ रहा है केस में किस किस तारीख को क्या हुआ, पहले ये देखिए ➖

लेखक 
चर्चित YouTuber 
-अक्टूबर 2018 को प्रिया रमानी ने अकबर के खिलाफ sexual misconduct का आरोप लगाया जो कथित तौर पर दिसंबर,1993 में हुआ

-15 अक्टूबर, 2018 को अकबर ने रमानी पर आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया;

-29 जनवरी, 2019 को कोर्ट ने एक अभियुक्त के तौर प्रिया को समन किया;

-25 फरवरी, 2019 रमानी कोर्ट में पेश हुई और जमानत मिल गई;

-1 फरवरी, 2020 को कोर्ट ने अंतिम सुनवाई की; और 

-17 फरवरी, 2021 को (यानी एक साल बाद) कोर्ट ने अकबर का केस ख़ारिज करते हुए कहा कि WOMAN’S RIGHT TO DIGNITY OUTWEIGHS A MAN’S RIGHT TO REPUTATION. महिला उस अधिकार के लिए दशकों बाद भी आवाज़ उठा सकती है

-मार्च-सितंबर 2025 में अकबर ने हाई कोर्ट में अपील दायर की जो MP/MLA कोर्ट को भेज दी गई;

-हाई कोर्ट ने 16 मार्च, 2026 अंतिम सुनवाई के लिए तय की;

-लेकिन अब उसे बढ़ा कर 24 सितंबर, 2026 कर दिया गया है

- इस बीच MP/MLA कोर्ट के मुक़दमे अभी तक देख रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की जगह अब जस्टिस मनोज जैन देखेंगे

1 फरवरी, 2020 को सब तरह से सुनवाई पूरी करने के बाद चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर फैसले के लिए 10 फरवरी की तिथि तय की। उस दिन ये नहीं कहा गया कि दोनों पक्ष अपने लिखित बयान भी देंगे

लेकिन 10 फरवरी को यानी फैसले के दिन CMM पांडेय ने ये कह कर फैसले की तारीख 17 फरवरी कर दी कि लिखित बयान देर से भेजे गए दोनों पक्षों द्वारा। ये बात कुछ हजम नहीं हुई थी और उस दिन होने वाले फैसले पर शंका थी मुझे

जब आपने 10 फरवरी को फैसला देना था तो दोनों पक्षों को लिखित बयान 3 फरवरी तक देने को कहना था और तब ही तय तारीख पर फैसला हो सकता था मगर ऐसा नहीं किया गया

जैसा मैंने कल तरुण तेजपाल के केस में कहा था कि फैसले की तारीख बदलना कुछ गोलमाल की तरफ इशारा करता है और अकबर के केस में भी ऐसा ही हुआ

इस केस में सबसे रहस्यमय बात यह है कि एक तरफ प्रिया रमानी ने दिसंबर 1993 में अकबर पर Sexual Misconduct (रेप का नहीं) का आरोप लगाया दूसरी तरफ वह MJ Akbar की फरवरी,1994 में शुरू होने वाली पत्रिका Asian Age में जनवरी,1994 में ही नौकरी ज्वाइन कर गई

गूगल के अनुसार प्रिया ने लॉन्च से पहले की तैयारियों के लिए नौकरी ज्वाइन की यानी अकबर की कहानी फर्जी थी फिर 25 साल तक खामोश क्यों रही? 

इसका मतलब साफ है या तो प्रिया रमानी ने झूठे आरोप लगाए और या उसे MJ Akbar के व्यवहार से कोई समस्या नहीं थी क्योंकि Asian Age के मालिक तो वही थे जब MJ Akbar ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया तो उसे उनकी संस्था में जाना ही नहीं चाहिए था और यह साबित करता है कि इसकी शिकायत मनघडंत और किसी राजनीति से प्रेरित थी

MJ Akbar एक समय में भाजपा/RSS/Modi के कट्टर आलोचक थे लेकिन मार्च 2014 में भाजपा में शामिल हो गए और राज्यसभा के सदस्य बने उन्होंने विदेश राज्य मंत्री रहते इस्लामिक देशों से भारत के संबंधों को आगे बढ़ाया बस इसी कारण शायद उनके खिलाफ यह षड्यंत्र रचा गया और मोहरा बनी प्रिया रमानी

महबूबा मुफ्ती की हिंदू विरोधी बेटी इल्तिजा पर FIR, पुलिस अधिकारी को दाँत से काटा: बहने लगा खून, 370 हटाने के विरोध में जमकर किया हंगामा


हिंदुत्व को ‘बीमारी’ बताने वाली जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) नेता इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ श्रीनगर पुलिस ने FIR दर्ज की है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इल्तिजा मुफ्ती ने ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई की और उनकी बाँह पर काट लिया। इल्तिजा के काटने से अधिकारी की बांह पर चोट आई और खून निकलने लगा।

इस मामले में इल्तिजा मुफ्ती के साथ महबूबा मुफ्ती का नाम भी दर्ज किया गया है। महबूबा मुफ्ती पर लगाए गए प्रतिबंधों और प्रशासनिक निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 121, 132 और 191 के तहत कार्रवाई की है। ये धाराएँ सरकारी कर्मचारियों पर हमले, उनके सरकारी काम में बाधा डालने और उपद्रव/दंगा जैसी गतिविधियों से संबंधित हैं। FIR कोठीबाग थाने में दर्ज की गई है और पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

SK पार्क में प्रदर्शन, लाल चौक की ओर बढ़ने की कोशिश और मारपीट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 अगस्त की शाम श्रीनगर के एसके पार्क में महबूबा मुफ्ती और इल्तिजा मुफ्ती के नेतृत्व में पीडीपी का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन का मकसद अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में अपनी बात रखना था। इस दौरान प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने रेजीडेंसी रोड को अवरुद्ध करने और लाल चौक की तरफ बढ़ने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बैरिकेड हटाने और कानून-व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हुई और इल्तिजा मुफ्ती पर एक पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई की।

पुलिस का कहना है कि इल्तिजा ने अधिकारी को पकड़कर उनकी बांह पर काट लिया। इससे अधिकारी के हाथ में गहरी चोट आई और खून बहने लगा। घायल पुलिस अधिकारी को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। वहाँ चिकित्सकों ने घाव का उपचार किया।

पुलिस ने जारी किया समन

पुलिस ने इस घटना को ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी पर कथित हमले और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला माना है। कोठीबाग थाने में एफआईआर संख्या 63/2026 दर्ज की गई है।

जांँच के तहत इल्तिजा मुफ्ती को शुक्रवार को कोठीबाग थाने में पेश होने और जांँच में शामिल होने के लिए समन जारी किया गया है। पुलिस ने कहा है कि जांँच के दौरान यदि कोई अन्य व्यक्ति सरकारी कर्मचारियों पर कथित हमले या सरकारी काम में बाधा डालने में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, पीडीपी ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा पुलिस पर इल्तिजा मुफ्ती के साथ बदसलूकी और उन्हें चोट पहुँचाने का आरोप लगाया है।

हिंदू विरोध के लिए कुख्यात इल्तिजा

इल्तिजा मुफ्ती अपनी हिंदू विरोध सोच के लिए भी कुख्यात हैं। यहाँ तक कि वो हिंदुत्व को बीमारी तक बता चुकी हैं। इल्तिजा ने दिसंबर 2024 में कहा था कि हिंदुत्व एक ‘बीमारी’ है, जिसने लाखों भारतीयों को अपनी चपेट में ले लिया है और भगवान के नाम को बदनाम किया है। मुफ्ती ने कहा था कि ‘हिंदुत्व नफरत की एक विचारधारा है जिसे वीर सावरकर ने 1940 के दशक में भारत में हिंदुओं का वर्चस्व स्थापित करने के मकसद से फैलाया था’।

सिर्फ हिंदुत्व ही नहीं बल्कि इल्तिजा का भारत विरोध भी पुराना है। नवंबर 2019 में CNN के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था, “भारत पाकिस्तान का इस्तेमाल ‘कश्मीरियों को दबाने के लिए एक हथियार’ के तौर पर करता है। सच यह है कि कश्मीर एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ भारत का हिस्सा बना था और अब भारत एक ‘तानाशाह हिंदू पाकिस्तान’ में बदल रहा है।” इल्तिजा आगे कहती हैं कि भारत कट्टरता, चुनिंदा उत्पीड़न और अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) के प्रति नफरत का अड्डा बनता जा रहा है।

‘FCRA बिल वापस लें या JPC को भेजें’: अमित शाह से मिले ईसाई प्रतिनिधियों ने की माँग, गृह मंत्री से मिलकर मिजोरम के CM बोले- 12 अगस्त से संसद में इस पर होगी चर्चा


विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Bill) को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को ईसाई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री के साथ बैठक के दौरान विधेयक से जुड़े अपने मुद्दों और आशंकाओं पर चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने प्रतिनिधियों की बात ध्यान से सुनी और उनकी चिंताओं को नोट किया। गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उठाए गए मुद्दों को देखेंगे और इस मामले पर सरकार के अन्य सदस्यों के साथ भी चर्चा करेंगे।

वहीं, CNN News18 की एक पत्रकार ने X पर इस मुलाकात को लेकर लिखा कि शाह से मुलाकात करने वाले ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा, “प्रतिनिधियों ने माँग की कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर आगे की संसदीय जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए।”

FCRA बिल को लेकर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री के सामने विधेयक से जुड़े 6 मुद्दे उठाए थे।

लालदुहोमा के मुताबिक, इन छह मुद्दों में से एक पर अमित शाह ने उन्हें स्पष्ट आश्वासन दिया कि FCRA संशोधन विधेयक पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। यानी कानून बनने से पहले की अवधि पर इसके प्रावधान लागू नहीं होंगे।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने बताया कि बाकी मुद्दों पर गृह मंत्री ने लिखित जवाब देने की बात कही है। अमित शाह की ओर से इन बिंदुओं पर लिखित प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही विधेयक को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। लालदुहोमा ने यह भी बताया कि अमित शाह 12 अगस्त से संसद में FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू करने वाले हैं।

क्या है बिल के संशोधन और क्यों परेशान हैं मिशनरी

मार्च 2026 में पेश किया गया FCRA संशोधन विधेयक मुख्य रूप से उन संस्थाओं से जुड़ा है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका है, जिन्होंने अपना लाइसेंस खुद सरेंडर कर दिया है या जिनका लाइसेंस रीन्यू नहीं हुआ है। इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकारी को ऐसी संस्थाओं की विदेशी फंडिंग और उस पैसे से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड के दुरुपयोग और उसके अवैध तरीके से किसी दूसरे को हस्तांतरित किए जाने पर रोक लगाना है।

इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने 22 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी कर विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 में भी बदलाव किया। इसके तहत धार्मिक समुदायों के कई वर्गों के लिए धर्मांतरण यानी Proselytisation को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार की शक्तियाँ केवल उन्हीं संपत्तियों तक सीमित रहेंगी, जो विदेशी फंड से बनाई गई हैं और जिन पर FCRA लाइसेंस खत्म होने जैसी निर्धारित परिस्थितियाँ लागू होती हैं। साथ ही, ऐसे मामलों में सरकार के आदेश की समीक्षा और उसके खिलाफ अपील करने का अधिकार भी मौजूद रहेगा।

पिछले कई दशकों से अमेरिका स्थित कई ईसाई प्रचारक और मिशनरी नेटवर्क भारत में चर्च स्थापित करने, गरीबों, खासकर जनजातीय और दलित समुदायों के बीच धर्मांतरण अभियान चलाने और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग करते रहे हैं। Compassion International, World Vision India और Joshua Project जैसे कई विदेशी ईसाई संगठन भारत में सक्रिय रहे हैं। इन संगठनों की गतिविधियों को धार्मिक कामों के साथ-साथ उनके मूल देशों के रणनीतिक हितों से भी जोड़ा जाता रहा है।

अब यही विदेशी और भारतीय मिशनरी संगठन FCRA संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इस कानून से उन संस्थाओं तक विदेशी फंड पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा, जिन पर भारत की धार्मिक जनसांख्यिकी बदलने और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले एजेंडे पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं।

क्या देश में आग लगाना चाहते हैं राहुल गांधी? आलाकमान के मिशन को आगे बढ़ा रहे खड़गे, मनुस्मृति को बनाया हथियार


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश में आग लगाना चाहते हैं। मई 2022 में राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस ने सैकड़ों नेताओं के साथ चिंतन शिविर का आयोजन किया था। इस चिंतन शिवर के मंच से राहुल गांधी ने देश में ‘आग’ लगाने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था,
आपको दिखेगा अब यह लड़ाई शुरू हुई है। आने वाले समय में आपको दिखेगा हिंदुस्तान में आग लगेगी।” राहुल गांधी के इस बयान के बाद सशस्त्र बलों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर लाई गई नई अग्निपथ योजना के विरोध में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पंजाब समेत कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए।

राहुल गांधी की गृहयुद्ध की धमकी-पूरे देश में आग लगने जा रही है, याद रखो
दिल्ली के रामलीला मैदान में 31 मार्च, 2024 को अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के विरोध में रैली हुई थी। इस रैली में कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गृहयुद्ध की धमकी दी थी। राहुल गांधी ने कहा था, “इस पूरे देश में आग लगने जा रही है जो मैंने कहा याद रखो यह देश नहीं बचेगा।” उन्होंने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को IPL से जोड़ते हुए ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप जड़ा। इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की सूझबूझ और धर्य ने उनकी चाहत पर पानी फेर दिया और देश जलने से बच गया।

भारत को नेपाल की तरह जलाने और सत्ता परिवर्तन की बड़ी साजिश नाकाम
राहुल गांधी की इच्छा पूरी करने के लिए साजिशों का दौर जारी है। हाल ही में नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर छात्रों को भड़काया गया। 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं, सेकुलर गुंडों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन परिसर में जबरन घुसने का प्रयास किया। लेकिन सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने सांसदों को बंधक बनाने, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह देश को जलाने के उनके खतरनाक मंसूबों और साजिशों को नाकाम कर दिया।

खड़गे की अमित शाह को धमकी, खींच कर लाएंगे, जनता के सामने दिखाएंगे
जब छात्रों की आड़ में देश में सत्ता परिवर्तन नहीं कर पाए तो राहुल गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को देश में आग लगाने के खतरनाक मिशन पर लगा दिया। क्योकि जो अध्यक्ष होते हुए भी परिवार की इजाजत के बिना कोई निर्णय नहीं ले सकता वह इतनी बड़ी बात बोलने की हिम्मत नहीं कर सकता। 30 जुलाई को राज्यसभा में चर्चा के दौरान खड़गे ने संसद भवन के सामने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। जिस तरह उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित बयान दिया, वो देश को आग में झोंकने जैसा है। खड़गे ने कहा “आप बंद कमरे में रह कर बहुत दिन तक छुप नहीं सकते। एक दिन हम बाहर खींच कर लाएंगे और जनता के सामने हम दिखाएंगे, फिर बताएंगे”

खड़गे ने देश में आग लगाने के लिए मनुस्मृति को बनाया हथियार
अपने आलाकमान राहुल गांधी के निर्देश को पालन करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में आरोप लगाया कि नए और बदले जा रहे शैक्षणिक पाठ्यक्रम में मनुस्मृति की चीजें डाली जा रही हैं। खड़गे ने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा कि वेद का उच्चारण करने पर जीभ काटने तक की बात कही गई है। वेद मंत्र धारण करने पर शरीर काटने तक की बात कही गई है। ये सब मनुस्मृति में लिखा हुआ है। खड़गे के इतना बोलते ही सदन में हंगामा मच गया। बीजेपी के सांसदों ने इसका जमकर विरोध किया। इस दौरान सभापति ने खड़गे को टोका और कहा कि मनुस्मृति का पेपर लीक बिल से क्या लेना-देना है।

खड़गे के बयान से समाज में अशांति फैल सकती है- जेपी नड्डा
सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बीजेपी की ओर से जवाब देते हुए मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि इससे समाज में अशांति फैल सकती है। उन्होंने कहा, ‘अभी जो वक्तव्य लीडर ऑफ अपोजिशन मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने दिया है। उस वक्तव्य से समाज में विद्वेश की भावना पैदा होती है। अशांति का वातावरण पैदा होता है। जहां तक मेरी जानकारी है, यह तथ्यों से परे हैं। मनुस्मृति के ओरिजनल टैक्स्ट को ऑथेंटिकेट करें। ये ओरिजनल नहीं है।”

सुधांशु त्रिवेदी ने अंबेडकर के किताब का हवाला देकर ऑथेंटिकेशन की दी चुनौती
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज विलियम जोंस ने 1790 में मनुस्मृति का ट्रांसलेशन किया। उन्होंने तीन किताबों का ट्रांसलेशन किया था।” इसके साथ ही सुधांशु त्रिवेदी ने बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की किताब को कोट किया और कई किताबों का संदर्भ दिया । उन्होंने कहा, “बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की किताब “हू वर द शूद्राज़” (Who Were the Shudras?) चैप्टर नंबर वन, पेज नंबर वन, पैराग्राफ नंबर तीन में उन्होंने लिखा है कि देयर इज नो कनेक्शन ऑफ़ मॉडर्न डेज शेड्यूल कास्ट विद द वैदिक एंड शूद्रा। बाबा साहेब अंबेडकर की किताब ‘द अनटचेबल’ उसमें उन्होंने लिखा है कि देयर वाज़ नो अनटचेबिलिटी। मैंने बाबा साहेब को कोट किया है। विलियम जोंस से पहले की किताब अवेलेबल नहीं है। इसीलिए मैंने कहा आई वांट ऑथेंटिकेशन…।” इस पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मनुस्मृति पर दिए गए खड़गे के बयान को सदन की कार्यवाही से बाहर निकालने का ऐलान कर दिया।

खड़गे की सफाई- इस तरह का दंड मनुस्मृति में नहीं पाया जाता
बीजेपी सांसदों के जबरदस्त विरोध के बाद मल्लिकार्जु खड़गे को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्हें तथ्यात्मक रूप से पता चला कि यह प्रावधान मूल मनुस्मृति में नहीं, बल्कि गौतम धर्मसूत्र में हैं। उन्हें लगा कि उनका झूठ पकड़ा गया है, तो फिर आधारहीन तथ्यों को लेकर सफाई देने चले आए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई देते हुए खुद लिखा कि इस तरह के कठोर प्रावधान गौतम धर्मसूत्र के हैं। इस तरह का दंड मनुस्मृति में नहीं पाया जाता। इनका उल्लेख गौतम धर्मसूत्र (अध्याय 12, छंद 4-6) में किया गया है। खड़गे की इस सफाई के बाद स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी सामाजिक विद्वेश पैदाकर दलितों और सवर्णों के बीच गृहयुद्ध कराना चाहते हैं। हिन्दुओं को विभाजित कर सत्ता में आना चाहते हैं।

हिन्दू विरोधी कांग्रेस- दलित वोट बैक के लिए प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रंथों का अपमान
दलित वोट बैंक पर कब्जा करने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जाने को तैयार है। दलितों को गुमराह करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है। इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ कर अपने सियासी एजेंडे के अनुसार पेश कर रही है। दरअसल, मनुस्मृति में शूद्रों के बारे में जो भी लिखा है उसे लेकर विद्वानों, इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों के बीच अलग-अलग विचार हैं। एक पक्ष इसे पूरी तरह भेदभाव करने वाला मानता है तो दूसरा पक्ष इसे गुण-कर्म आधारित काम के बंटवारे की तरफ देखता है। साथ ही उनका यह भी तर्क है कि पाठ में सदियों से कई संशोधन हुए हैं और बाद में इसकी मूल सामग्री को बदल दिया गया होगा। कई शोधकर्ताओं ने इस बात का तर्क दिया है कि बाद के समय में बड़ी संख्या में छंद जोड़े गए। इस तरह अलग-अलग कालखंडों में रचे गए हिन्दू धर्मग्रंथों से समाज, संस्कृति और विचारों में समय-समय पर हुए बदलाव की पूरी जानकारी मिलती है।

राहुल पर एक साल में अराजकता के द्वारा सत्ता परिवर्तन करने का आरोप
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी राहुल गांधी पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “निरंतर चुनावों में अपनी पराजय के कारण कांग्रेस पार्टी ना सिर्फ मानसिक हताशा के दौर से गुजर रही है…परंतु उसी के साथ एक बहुत खतरनाक षड्यंत्र का हिस्सा होती जा रही है। राहुल गांधी का बयान समाचार पत्रों में आया है। उन्होंने कहा है कि एक साल के अंदर अराजकता के द्वारा यह सत्ता का परिवर्तन होगा। इससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी के लिए कहा था कि अब ये कांग्रेस पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि मुश्लिम लीगी, माओवादी कांग्रेस में तब्दील हो गई है। केरल में मुस्लिम लीग के साथ सत्ता में आने वाली कांग्रेस और ये हम नहीं कह रहे हैं। बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम लीग बन गई है।”

राहुल गांधी की थी भविष्यवाणी- अगले एक साल में पीएम मोदी की विदाई तय
दरअसल,  मई 2026 में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि यह सरकार सालभर से ज्यादा नहीं टिकने वाली है। हालांकि उन्होंने इसका कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक हालात बदल रहे हैं। इसी वजह से देश में महंगाई और आर्थिक असंतोष बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में मोदी सरकार की विदाई का कारण बनेगा। इस बीच बैठक में कुछ नेताओं ने मुस्लिम शब्द के बजाय अल्पसंख्यक शब्द इस्तेमाल की अपील की, जिस पर राहुल गांधी ने असहमति जताते हुए कहा कि डरना क्यों, जिस वर्ग के साथ अन्याय हो उसके साथ खुलकर खड़े होना है।

राहुल गांधी की भविष्यवाणी कितनी सच होगी, यह तो भविष्य के गर्त में हैं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री मोदी को हटा नहीं पाए। अब वह देश को जलाकर और अराजकता पैदा कर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं। आइए एक नजर डालते हैं राहुल गांधी ने कब कब देश को जलाने का प्रयास किया है…

तरुण तेजपाल को हाई कोर्ट से 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा; सुप्रीम कोर्ट से स्टे होगी, फिर कुछ वर्ष और मामला लटकेगा

सुभाष चन्द्र 

तरुण तेजपाल “तहलका पत्रिका” का संस्थापक एडिटर हुआ करता था। इस व्यक्ति ने भाजपा के एक ईमानदार पहले दलित अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को फर्जी स्टिंग ऑपरेशन में फंसाया था तेजपाल कांग्रेस का चहेता था ये स्टिंग ऑपरेशन उसने 23 दिसंबर 2000 से लेकर 7 जनवरी, 2001 तक किए और 13 मार्च, 2001 को जारी किए थे शायद इसलिए कि मई, 2021 में चुनाव होने थे तेजपाल ने बंगारू लक्ष्मण पर कलंक लगाया और आज उस पर लक्ष्मण से भी कहीं बड़ा कलंक लग गया कहीं तो हिसाब पूरा करते हैं कर्म

आप काल चक्र को देखिए - वर्ष 2000 से 13 साल बाद 2013 में तरुण तेजपाल ने कांड किया और आज 13 साल बाद ही उसे सजा हुई है

लेखक 
चर्चित YouTuber 
2013 में गोवा में तेजपाल की अपनी ही एक साथी ने उस पर लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया केस 8 साल चला जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 8 हफ्ते में फैसला होना चाहिए  

21 मई, 2021 को गोवा की सेशन जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को आरोपमुक्त कर दिया मैंने अपने 28 अप्रैल, 2021 में लिखा था कि शायद उसे बचा लिया जाएगा ऐसा लिखने का कारण था कि क्षमा जोशी द्वारा निर्णय सुनाने की तिथियों को बार बार बदलना केस की सुनवाई 8 मार्च 2021 को पूरी हो गई और फैसला सुनाने की तारीख 27 अप्रैल तय की जज साहिबान ने लेकिन बिना किसी कारण उसे आगे बढ़ा कर 12 मई कर दिया और उस दिन भी फैसला सुनाए बिना तिथि 19 मई कर दी अब 19 मई को कह दिया गया कि कोर्ट में बिजली की समस्या है और तब 21 मई को तेजपाल को बरी कर दिया गया 

मेरी शंका निराधार नहीं थी बार बार फैसले की तारीख बदलना फैसले के लिए सौदेबाजी की तरफ इशारा करता है 

गोवा सरकार तब ही बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में अपील में चली गई और आज 5 साल बाद हाई कोर्ट की गोवा पीठ के Justices Dr. Neela Gokhale और  Amit Jamsandekar ने ट्रायल कोर्ट के तेजपाल को बरी करने के आदेश को पलट दिया और उसे IPC के section 376 और 354A में दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई लेकिन तेजपाल को 4 सप्ताह में अपील करने/जेल में सरेंडर करने का समय दे दिया

अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा तो जरूर और मुझे पूरा भरोसा है सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगा देगा और उसे जमानत पर भी रखेगा लेकिन अपील पर सुनवाई कब होगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता तेजपाल 13 साल से बाहर है और अब सजायाफ्ता होने के बाद भी बाहर ही रहेगा 

तेजपाल ने तो अपनी वयस्क महिला साथी के साथ दुष्कर्म किया था, हमारा सुप्रीम कोर्ट तो 4-5 साल की बच्चियों से बलात्कार करने वालों पर भी नरम रुख अपना लेता है

तरुण तेजपाल ने अपराध के अगले दिन ईमेल लिख कर पीड़िता से अपने कुकृत्य को स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी थी बड़े आश्चर्य की बात है इतने बड़े सबूत को भी सेशन जज क्षमा जोशी ने नज़रअंदाज कर दिया

फैसले की तारीख बदलना MJ Akbar भी भुगत चुका है जिसके बारे में आगे लिखूंगा

गालीबाजों के बॉस अरविंद केजरीवाल का दोगलापन : जंतर मंतर गालीबाज लड़की को समर्थन, पंजाब की बेटियों पर लाठियां

पंजाब में छात्राएं फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों को लेकर सड़क पर हैं। भगवंत मान सरकार की अनदेखी की वजह से उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राएं पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफा, सीबीआई जांच कराने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रहे हैं। लेकिन भगवंत मान सरकार और पंजाब के सुपर सीएम अरविंद केजरीवाल को उनकी परवाह नहीं है। अरविंद केजरीवाल को उन गालीबाजों और अराजक तत्वों की फिक्र है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देते हैं, जो समाज और देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं। यहां तक कि अरविंद केजरीवाल गालीबाजों का बॉस बनकर उन्हें राजनीतिक और कानूनी संरक्षण दे रहे हैं।

पंजाब की बेटियां सड़क पर, केजरीवाल गालीबाजों के संग
गालीबाजों के समर्थन में उतरने और झूठ बोलने की वजह से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि आज पंजाब की लड़कियों को केजरीवाल की जरूरत है, लेकिन केजरीवाल पंजाब छोड़कर भाग खड़े हुए हैं। केजरीवाल के पास गालीबाज लड़कियों के समर्थन में वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का समय है, लेकिन आज पंजाब की बेटियां सड़क पर है, उनसे बात करने के लिए केजरीवाल के पास समय नहीं है। लोगों का कहना है कि गालीबाज लड़कियों को सुरक्षा की गारंटी देने वाले अरविंद केजरीवाल पंजाब के लड़कियों से नाइंसाफी कर रहे हैं।  केजरीवाल को पंजाब की लड़कियां और उनकी मांगें दिखाई नहीं दे रही हैं।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे पर अड़ी पंजाब की लड़कियां
पंजाब की लड़कियां कह रही हैं कि हम लोग पंजाब सरकार से जवाब चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान जंतर मंतर पर कहा था कि अगर पंजाब में कोई भी पेपर लीक होता है तो शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफ दिलवा देंगे। दो दिन पहले फार्मेसी का पेपर लीक हुआ तो हम चाहते हैं कि हरजोत सिंह बैंस इस्तीफा दें। अब लड़कियों की मांग है कि पंजाब सरकार को पेपर लीक की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और हरजोत सिंह बैंस को इस्तीफा देना चाहिए।

छात्राओं के समर्थन में ABVP का चंडीगढ़ में प्रदर्शन
सड़क पर प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं के समर्थन में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी आ गई है। उसने 2 अगस्त को चंडीगढ़ में पंजाब भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया और पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की।

पंजाब की छात्राओं के समर्थन में उतरी बीजेपी 
इससे पहले 30 जुलाई को पंजाब में फार्मेसी परीक्षा सहित कई परीक्षाओं में अनियमितता व पेपर लीक का आरोप लगाते हुए दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के कार्यालय के पास प्रदर्शन किया। बैरिकेड तोड़कर कार्यालय तक पहुंचने का प्रयास कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर मंदिर मार्ग थाने ले गई। लगभग एक घंटे बाद चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया गया।

केजरीवाल नहीं ले रहे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “यह प्रदर्शन पेपर लीक को लेकर है। जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, मैंने भी हरजोत सिंह बैंस से कहा है कि उन्होंने इसमें शामिल लोगों के साथ मंच साझा किया था और वहां जवाबदेही की मांग की थी। क्या आपका ज़मीर आपको यहाँ भी जिम्मेदारी लेने के लिए नहीं कहता…”

गालीबाज रुचिका को केजरीवाल का समर्थन
दरअसल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान भद्दी गालियां देने वाली लड़की रुचिका सिंह का समर्थन किया है। केजरीवाल ने इसके साथ ही यह भी कहा है कि रुचिका को अगर किसी भी तरह की जरूरत महसूस हो तो वे उन्हें बता सकती हैं। रुचिका को डरा-धमका कर माफी मंगवाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक रुचिका सिंह को झुकाया तो दस रुचिका सिंह पैदा हो गईं।

केजरीवाल ने युवाओं में डर पैदा करने का लगाया आरोप 
केजरीवाल ने 2 अगस्त, 2026 को अपने ‘एक्स’ हैंडल पर रुचिका को समर्थन दिया। केजरीवाल ने लिखा ‘मोदी जी ने जो रुचिका सिंह के साथ किया, वो एक कायराना हरकत है। आप रुचिका के साथ ऐसा करके युवाओं में डर पैदा करना चाहते हो। पर युवाओं के मन से अब आपका और आपकी पुलिस का डर निकल चुका है। आप एक रुचिका को डराते हो, सोशल मीडिया पर दस और रुचिका आपके खिलाफ वीडियो डाल रही हैं। रुचिका, मैं आपके साथ हूं। कभी किसी भी तरह की जरूरत हो, आप हमें बताना।’  

केजरीवाल ने अच्छे वकील देने की पेशकश की
केजरीवाल ने कहा ‘मोदी जी कह रहे हैं कि मैंने सबको माफ किया। रुचिका सिंह बेचारी 15 साल की बच्ची है। उसको पुलिस के जरिए ट्रोल आर्मी के जरिए धमकियां दी गईं डराने की कोशिश कर रहे हैं। तो मोदी जी को मैं कहना चाहता हूं कि जब आपके नेता, ट्रोल आर्मी और कार्यकर्ता गालियां देते हैं तब आपको कुछ नहीं होता। दूसरों को गालियां देते हैं तब कुछ नहीं होता। एक बहुत बड़ी बात ये हुई है कि इस आंदोलन ने लोगों के मन में मोदी जी के लिए डर था वो डर खत्म कर दिया। अब मोदी जी पूरी ताकत लगा कर लोगों के मन में वो डर दोबारा पैदा करना चाहते हैं। लेकिन वो डर हो नहीं रहा। बच्चों के मन से डर खत्म हो गया है मोदी जी का।’
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा’ मैं उस बच्ची (रुचिका) को यह कहना चाहता हूं कि पूरा देश आपके साथ है बच्चे। मैं पर्सनली आपको सपोर्ट करता हूं और अगर आपको कभी भी किसी भी चीज की जरूरत हो अच्छे वकील की जरूरत और कोई आपको तंग करे हम आपको हमेशा सपोर्ट करेंगे।’

रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी माफी
जिस रुचिका सिंह को लेकर अरविंद केजरीवाल बात कर रहे हैं, वह सोशल मीडिया में खुद वीडियो जारी कर माफी मांग रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर गालीबाज प्रदर्शनकारियों के मामले में किसी प्रकार का एफआईआर दर्ज न करने की बात कही। पिछले दिनों इंस्टाग्राम रील के जरिए उन्होंने इस प्रकार के मामलों में आरोपी छात्र-युवाओं को माफ करने की बात कही। इसके बाद रुचिका सिंह का बयान सामने आया। उसने प्रधानमंत्री मोदी से दिल से माफी मांगने की बात कही। रुचिका ने कहा कि मैंने जो किया वो माफी लायक नहीं था। मैंने बहुत गांदी चीजें बोली हैं। मेरी ये पहली और आखिरी गलती है, दोबारा ऐसा नहीं करूंगी। मैं पूरे देश से माफी मांगता हूं। इतना शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरे भी नहीं उठा पा रही हूं।

केजरीवाल की खुली पोल, रुचिका ने कहा- मेरे पर कोई दबाव नहीं था
छात्रा रुचिका सिंह ने मीडिया से बातचीत के क्रम में सोशल मीडिया पर डाले गए माफी के वीडियो पर बयान दिया। उसने कहा कि मैंने दिल से माफी मांगी है। रुचिका से पूछा गया कि क्या आप पर दबाव था कि आप माफी मांगें। आप पर कोई प्रेसर बना रहा था या आपने दिल से माफी मांगी है। इस पर रुचिका ने कहा कि मैंने दिल से माफी मांगी है। मैंने जो वर्ड्स यूज किए थे, एक्चुअली वे अच्छे नहीं थे। मुझे उस चीज का बहुत गिल्ट है। मैंने तभी माफी मांगी, क्योंकि वे वर्ड्स मैं खुद नहीं सुन पा रही थी। फ्लो-फ्लो मैंने इतना कुछ बोल दिया, मुझे उस टाइम पर यह रियलाइज भी नहीं हुआ। मैंने जब वह वीडियो देखा तो मुझे लगा कि यह अच्छा नहीं हुआ।

रुचिका की मां ने कहा- बिना डर के, मैं दिल से बोल रही हूं
प्रधानमंत्री मोदी के माफ करने के फैसले पर रुचिका की मां ने आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को ‘जीवनदान’ दिया है। प्रधानमंत्री ने बदले की कार्रवाई के बजाय माफी का रास्ता चुना। मीडिया से बातचीत के दौरान रुचिका की मां ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश का अखंड विश्वास हैं। चाहे कोई यह बोले कि डर कर बोल रही है। उन्हें मैं आत्मा नहीं दिखा सकती। मैं दिल से बोल रही हूं, भगवान राम को साक्षी मानकर बोल रही हूं कि मुझे यकीन नहीं था, मेरी बेटी इस तरीके के शब्दों का प्रयोग करेगी। मां ने आगे कहा कि मुझे नहीं लगता था, यह इतने गंदे शब्द यूज भी कर सकती है। इसकी शुरुआत इंस्टाग्राम से हुई।

प्रदर्शन में ऐसे बच्चों का सिर्फ फायदा उठाते हैं- रुचिका की मां
रुचिका की मां ने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं क्या बोलूं। ये बेटी नहीं, बल्कि देश के बहुत सारे बच्चे इस समय इस उम्र के जितने भी बच्चे है दस से बीस वाले सारे ही इस स्थिति में आ चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी से मेरा विनम्र निवेदन है कि कृपया इंस्टाग्राम,फेसबुक नए बच्चों के लिए दस से बीस साल के बच्चों के लिए रोक दिया जाए। इनको सिर्फ पढ़ने दिया जाए। ऐसे प्रदर्शन में छोटे बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाए। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका जाए। इनका सिर्फ फायदा उठाया जाता है।