जो कांग्रेस भारत को आज़ादी दिलवाने की दुहाई देती रहती है, आज वही कांग्रेस भारत विरोधियों के साथ मिल भारत को खंडित करने में लगने से इसकी आज़ादी की लड़ाई में गंभीर होने पर प्रश्नचिन्ह लगाने में कांग्रेस ही जिम्मेदार है। वरना कांग्रेस बताये कि राहुल गाँधी विदेशों में किन से मिलने जाते हैं और क्या बातें होती हैं। चीन के साथ क्या MoU साइन हुआ है? भारत में राहुल के आगे-पीछे डोलने वाला मीडिया भी खामोश, क्यों?
भारतीय राजनीतिक गलियारों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के गुप्त विदेशी दौरों को लेकर अक्सर तीखा सियासी घमासान देखने को मिलता है। एक जिम्मेदार नेता होने के बावजूद राहुल गांधी बजट सत्र, चुनाव और उप-राष्ट्रपति शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण असवरों पर विदेश रवाना हो जाते हैं। आम नागरिकों के मन में भी अक्सर यह जिज्ञासा और सवाल रहता है कि एक प्रमुख राजनीतिक दल और प्रतिपक्ष के नेता आखिर इतनी बार विदेश क्यों जाते हैं, उनके इन दौरों का असली मकसद क्या होता है और वे वहां किससे मिलते हैं? लोकतंत्र में पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही की मांग करने वाली कांग्रेस इन सवालों का जवाब नहीं दे रही है। लेकिन देश और विदेश में चल रहे प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के नेटवर्क से सवालों के जवाब मिलने लगे हैं। दरअसल, इन गुप्त विदेश यात्राओं का एक बड़ा मकसद भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने यानी ‘रिजीम चेंज’ के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचना है।लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के CEO राहुल गांधी फिर से विदेश दौरे पर। इस बार राजा बाबू वियतनाम गए है https://t.co/Sjde9TS0wo
— Oc updates (@ocupdate) October 20, 2026
राहुल गांधी ने 10 वर्ष में 270 बार विदेश दौरा किया-दुबे
भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों पर यह दावा किया कि विपक्ष भारत विरोधी विदेशी ताकतों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि चीन में बैठे नेविल रॉय सिंघम, हवाला फंडिंग नेटवर्क, सोरोस फाउंडेशन और अमेरिकी सांसद इल्हान उमर जैसी भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश के भीतर ‘रेिजीम चेंज’ की पटकथा लिखी जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि पिछले 10 वर्षों में 270 बार विदेश जाकर वे किन शक्तियों के संपर्क में रहे। इसका जवाब उन्हें देश को देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “क्या इसके पीछे सरोस थे? क्या सैम पित्रोदा भी इस साजिश में प्रमुख रूप से शामिल है?
राहुल गांधी जी के नेतृत्व वाली पूरी विपक्ष अमेरिकी कांग्रेस की जॉंच के अनुसार Neville Roy singham जो AI,cryptocurrency और online gaming लॉंबी के लिए काम कर रही है,उसके इशारे पर regime change की बात कर रही है
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) October 22, 2026
वैश्विक कार्टेल और लॉबी मोदी सरकार के खिलाफ- दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया, क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा मानने से इनकार किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर सख्त नीतिगत नेतृत्व दिया। इसी वजह से इन तीनों क्षेत्रों के वैश्विक कार्टेल और लॉबी भारत सरकार के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। विपक्ष उनके हाथ का औजार बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गैंबलिंग 30-35 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार बन चुका है, जबकि बिना किसी कानूनी वजूद वाली क्रिप्टोकरेंसी पूरी दुनिया में लोगों को बर्बाद कर रही है।
. @RahulGandhi हर बार विदेश जाकर भारत-विरोधी तत्वों के सिंडिकेट से मिलते हैं। अमेरिकी रिपोर्टों से यह बेनकाब हो चुका है कि विदेशी फंड के सहारे राहुल गांधी देश में ‘रिजीम चेंज’ और विभाजन का षड्यंत्र रच रहे हैं। नेहरू ने देश का बंटवारा किया था और राहुल गांधी नेपाल-श्रीलंका जैसी अराजकता फैलाकर भारत को फिर से तोड़ना चाहते हैं। लेकिन जनता अब जाग चुकी है। इस गद्दारी और विदेशी टूलकिट का पर्दाफाश कर भाजपा इस सिंडिकेट का नामोनिशान मिटा देगी। -डॉ. @nishikant_dubey जी, सांसद, गोड्डा
— BJP JHARKHAND (@BJP4Jharkhand) October 22, 2026
भारत में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश-दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से आम नागरिकों के साथ ही व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को परेशानी हो रही है। पर्व के समय प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे प्रदर्शनों को कुछ भारत विरोधी तत्वों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने मलेशिया में बैठे जाकिर नाइक, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू और कराची में बैठे दाऊद इब्राहिम का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ऐसे तत्व देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। सांसद ने दावा किया कि उनका उद्देश्य भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसी हालत की ओर धकेलना और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना है।
Regime Change के नाम पर फिर देश के टुकड़े? 💔🇮🇳 BJP सांसद निशिकांत दुबे ने Rahul Gandhi पर बड़ा सियासी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे भारत में श्रीलंका और नेपाल जैसे हालात पैदा करना चाहते हैं और फिर से देश का बँटवारा चाहते हैं। सियासत अपनी जगह, लेकिन देश की एकता और अखंडता से बड़ा कुछ नहीं! #nishikantdubey #rahulgandhi #congress #regimechange #trendingreels
— banwari Maheshwari (@banwariMaheshw1) October 22, 2026
निशिकांत दुबे ने राहुल पर आरोप लगाया कि वह उन विदेशी ताकतों से मिलते हैं, जो भारत को तोड़ने की भावना रखती हैं और फिर उनके ही इशारे पर भारत में आंदोलन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयानों और विरोध प्रदर्शनों से युवाओं की भावनाएं भड़कती हैं, जिसके कारण कई युवाओं को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जबकि इस दौरान राहुल गांधी विदेश चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के ही इशारे पर यहाँ आंदोलन भड़काया गया और इसी का परिणाम है कि आशुतोष रांका और सौरभ दास जैसे युवाओं को कुछ दिन जेल में रहना पड़ा। इसके बाद गांधी वियतनाम चले गए।
भारत विरोधी ताक़तों से राहुल गांधी जी विदेश में क्यों मिलते हैं?
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) October 22, 2026
सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर फरवरी 2023 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी के साथ चल रहे सलील शेट्टी और निखिल डे की तस्वीरें शेयर की हैं। सलील शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा समर्थित ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ के वैश्विक उपाध्यक्ष थे। सलील शेट्टी के राहुल गांधी के साथ चलने और कांग्रेस के जॉर्ज सोरोस के साथ ‘रिश्ते’ पर सवाल उठाए गए। उनके पुराने ट्वीट्स को खंगालते हुए यह दावा किया गया कि सलील सीएए-विरोधी (CAA) प्रदर्शनों में शामिल रहे थे और उन्होंने फाइजर (Pfizer) तथा मॉडर्ना (Moderna) टीकों की पैरवी की थी।
आज के लिए विस्मिल प्रसाद इतना ही https://t.co/4afqH8Tmmi
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) October 22, 2026
राहुल गांधी के करीबी निखिल डे प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के निर्णय लेने वाले मुख्य कार्यकारी निकाय तथा सलाहकार परिषद का हिस्सा हैं। निखिल डे भारत में ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ (MKSS) के संस्थापक सदस्य भी हैं। प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल एक अंतरराष्ट्रीय संगठन या नेटवर्क है, जिसका दावा है कि वह दुनिया भर में वामपंथी, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करने का काम करता है। यह आरोप लगाया जाता रहा है कि यह कई देशों में घरेलू आंदोलनों को समर्थन देकर वहां की सरकारों के खिलाफ माहौल बनाने या कथित तौर पर ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) के एजेंडे में शामिल रहता है। दावा किया जा रहा है कि भारत के भीतर होने वाले विभिन्न विरोध-प्रदर्शनों, अराजकता या राजनीतिक माहौल को हवा देने के पीछे ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ जैसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स और संगठनों की सहभागिता रहती है। अप्रैल 2025 में राहुल गांधी ने प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी।
सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में भारत में ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ से जुड़े संगठनों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई का आंकड़ा पेश किया। इसके मुताबिक ईडी ने सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) द्वारा भारत की 12 कंपनियों में 300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की जांच की है। 18 मार्च 2025 को बेंगलुरु में आठ परिसरों की तलाशी ली गई, जिनमें Open Society Foundations (OSF) से संबंधित कार्यालय और Aspada Investments Pvt. Ltd. भी शामिल थे। दस्तावेज़ के अनुसार, SEDF ने तीन कंपनियों के माध्यम से लगभग 25–26 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि बाकी नौ कंपनियों में अधिक पूंजी पहुंचने का संदेह जताया गया।
आरोप है कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और परामर्श शुल्क के जरिए विदेशी अंशदान नियमन कानून (FCRA) से जुड़ी पाबंदियों को दरकिनार करने की कोशिश की गई। ईडी के हवाले से दस्तावेज़ में कहा गया है कि Compulsorily Convertible Preference Shares (CCPS) के जरिए निवेश किया गया। केवल एक कंपनी Rootbridge Services को ऐसे शेयरों के माध्यम से 18.6 करोड़ रुपये मिलने का उल्लेख है। मॉरीशस स्थित AIC और भारत में स्थापित सलाहकार कंपनियों के माध्यम से निवेश के प्रबंधन का उल्लेख है। दस्तावेज़ में यह भी सवाल उठाया गया है कि निवेश से जुड़ी गतिविधियों में पारदर्शिता थी या नहीं। दस्तावेज़ का दावा है कि विदेशी निवेश के माध्यम से धन पहुँचाने की संरचना और उसके नियामकीय अनुपालन की जाँच की जा रही है। निशिकांत दुबे ने दस्तावेज़ के माध्यम से दावा किया है कि 2024–2026 के दौरान गृह मंत्रालय के नियमों में बदलाव से ऐसी फंडिंग पर अधिक निगरानी, खुलासे और उपयोग संबंधी सीमाएं लागू हो सकती हैं।
नेता प्रतिपक्ष होकर भी राहुल गांधी विदेशों में भारत विरोधी इल्हान उमर, डोनाल्ड लू, जेरेमी कॉर्बिन, सुनीता विश्वनाथ, गुनथर फेलिंगर और खालिस्तानी समर्थक से मिलते हैं। राहुल गांधी सितंबर 2024 में तीन दिनों के दौरे पर अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिन पर विवाद हो गया। इन तस्वीरों में राहुल गांधी के साथ भारत विरोधी अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर नजर आ रही हैं। यह मुलाकात वॉशिंगटन डीसी में रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में हुई थी। इल्हान उमर को उनके भारत विरोधी विचारों के लिए जाना जाता है। इल्हान ने साल 2022 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का दौरा किया था। उन्होंने पीएम मोदी के अमेरिकी संसद में दिए गए भाषण का बहिष्कार भी किया था। वे भारत को अल्पसंख्यक विरोधी भी बता चुकी हैं। एक बयान में बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधते हुए इल्हान उमर ने कहा था कि भारत में लंबे समय से मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने तब यहां तक कह दिया था कि भारत में मुस्लिम होना अपराध जैसा है।
⚠️ Ilhan Omar, Donald Lu, Jeremy Corbyn, Sunita Viswanath, Gunther Fehlinger और खालिस्तानी समर्थकों के साथ Rahul Gandhi की नज़दीकियाँ कई सवाल खड़े करती हैं। क्या यह महज़ संयोग है या कोई सुनियोजित राजनीतिक रणनीति? भारत की जनता खुद तय करे! 🇮🇳 #RahulGandh https://t.co/ljLAZl9Pdu
— Dr. Dhananjay Giri (@dhananjay4help) October 23, 2026
सांसद निशिकांत दुबे ने केंद्र सरकार से राहुल गांधी की विदेश यात्रा के दौरान भारत विरोधी ताकतों से मुलाक़ात पर एक न्यायिक आयोग बनाने की मांग की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर के खिलाफ लगाए गए कई गंभीर आरोपों का जिक्र किया हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने इल्हान उमर से संसद (कांग्रेस) से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है। ट्रंप ने दावा किया है कि इल्हान उमर का असली नाम ‘इल्हान नूर सईद एल्मी’ है और उन्होंने कांग्रेस सदस्य के रूप में शपथ लेते समय एक फर्जी नाम का उपयोग किया। वाशिंगटन डीसी में इल्हान उमर के घर पर हुई फेडरल (संघीय) एजेंसियों की छापेमारी के बाद, ट्रंप ने कहा कि वह जेल जा सकती हैं या उन्हें देश से निकाला (डिपॉर्ट) किया जा सकता है। यह जांच उनकी नागरिकता और आव्रजन दस्तावेजों से जुड़े मामलों की हो रही है। ट्रंप ने सांसद की शादी पर सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘उनका सरनेम उनके भाई, अहमद नूर सईद एल्मी के सरनेम से बिल्कुल मेल खाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने भाई से ही शादी की थी और उनके बच्चे भी हैं – खैर, ऐसा करना कानूनी है या नहीं, मुझे नहीं पता।’
अमेरिकी सांसद इल्हान उमर को तो झूठ बोलने,देश में इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा देने के जुर्म में जेल भी होगी और अमेरिका से निष्कासित भी की जाएगी @RahulGandhi जी आपने उस महिला से क्यों मुलाक़ात की? आपकी मुलाक़ात क्या सैम पित्रोदा,सोरोस ने करवाई? भारत विरोधी किस गतिविधियों में वह लिप्त है? क्या सार्वजनिक तौर पर आप भारत के लोगों को बता सकते हैं? भारत सरकार को राहुल गांधी जी के विदेश दौरे में इनलोगों की मुलाक़ात पर एक न्यायिक आयोग बनाना चाहिये https://t.co/jX5hFFx6gu
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) October 21, 2026
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सितंबर 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान उनकी बांग्लादेशी पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे के साथ बातचीत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। अंसारे ‘जस्ट न्यूज बीडी’ के लिए व्हाइट हाउस के संवाददाता रहे हैं और उनके संगठनों तथा गतिविधियों को लेकर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। अमेरिकी विदेश विभाग और संयुक्त राष्ट्र की प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश के पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे ने भारत के आंतरिक मामले में दखल देते हुए सवाल उठाए थे। उस पर सवाल उठे थे कि बांग्लादेशी पत्रकार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की खबर को उठाने में इतनी दिलचस्पी क्यों है?
Remember the journalist who frequently asks questions about Kejriwal to the UN and USA regarding Indian matters? He is Mushfiqul Fazal, a Bangladeshi. He met Pappu last night, and he's met him before as well. So, it's clear that the Congress ecosystem is behind this. Are they trying to defame India on an international level? Not unexpected, though.
— Mr Sinha (@Mrsinha) September 11, 2024
राहुल गांधी के विदेशी दौरों की सच्चाई एक-एककर बाहर आ रही है। दिसंबर 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र के बीच में राहुल गांधी ने जर्मनी की पांच दिवसीय यात्रा की थी। इस दौरान राहुल गांधी ने कॉर्नेलिया वोल से जर्मनी के हर्टी स्कूल में मुलाकात की थी। ये सिर्फ यहां की प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि सेंटर फॉर यूरोपियन यूनिवर्सिटी की बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में भी हैं। इस संस्थान को लेकर सोरोस से जुड़े फंडिंग नेटवर्क्स के साथ कथित संबंधों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। लार्स क्लिंगबाइल जर्मनी के उप-चांसलर और SPD पार्टी के अध्यक्ष हैं। क्लिंगबाइल सितंबर 2024 और नवंबर 2025 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मिले। जून 2023 में उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात की थी। और अब वही क्लिंगबाइल राहुल गांधी से मिले। यानि चीन से नज़दीकियां रखने वाले नेता से राहुल गांधी की मुलाकात ने नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रेडरिक एबर्ट स्टिफ्टुंग यह एक जर्मन राजनीतिक फाउंडेशन है, जिसकी गतिविधियों और भारत संबंधी विचारों को लेकर आलोचक सवाल उठाते रहे हैं। इसे कथित तौर पर ग्लोबलिस्ट, प्रो-NATO थिंक टैंक के रूप में भी पेश किया जाता है। इसके संबंधों को लेकर सोरोस समर्थित Open Society और Ford Foundation जैसे नेटवर्क्स का नाम भी चर्चाओं में आता रहा है।
🚨 इन तीन चेहरों के लिए संसद को बीच में छोड़ जर्मनी भागे थे राहुल गांधी! 🇩🇪🤔 पहला चेहरा — कॉर्नेलिया वोल (Cornelia Woll) 👤 राहुल गांधी ने इनसे जर्मनी के हर्टी स्कूल (Hertie School) में मुलाकात की। ये सिर्फ यहाँ की प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि सेंटर फॉर यूरोपियन यूनिवर्सिटी की बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में भी हैं। इस संस्थान को लेकर सोरोस से जुड़े फंडिंग नेटवर्क्स के साथ कथित संबंधों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। 🌐 दूसरा नाम — लार्स क्लिंगबाइल (Lars Klingbeil) 🇩🇪🇨🇳 जर्मनी के उप-चांसलर और SPD पार्टी के अध्यक्ष क्लिंगबाइल सितंबर 2024 और नवंबर 2025 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मिले। जून 2023 में उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात की थी। और अब वही क्लिंगबाइल राहुल गांधी से मिले! 🤝 यानि चीन से नज़दीकियाँ रखने वाले नेता से राहुल गांधी की मुलाकात ने नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। तीसरा और सबसे विवादास्पद नाम — फ्रेडरिक एबर्ट स्टिफ्टुंग (Friedrich-Ebert-Stiftung/FES) ⚠️ यह एक जर्मन राजनीतिक फाउंडेशन है, जिसकी गतिविधियों और भारत संबंधी विचारों को लेकर आलोचक सवाल उठाते रहे हैं। इसे कथित तौर पर ग्लोबलिस्ट, प्रो-NATO थिंक टैंक के रूप में भी पेश किया जाता है। इसके संबंधों को लेकर सोरोस समर्थित Open Society और Ford Foundation जैसे नेटवर्क्स का नाम भी चर्चाओं में आता रहा है। FES को रूस में प्रतिबंधित संस्थानों में गिना जाता है। 🇷🇺 आपको याद होगा, कुछ समय पहले राहुल गांधी कह रहे थे कि उन्हें पुतिन से मिलने नहीं दिया जा रहा है। अब सवाल उठता है कि जिन संस्थानों को लेकर रूस में आपत्तियाँ रही हैं, उनसे जुड़े लोगों के साथ राहुल गांधी की मुलाकातों का राजनीतिक संदेश क्या है? 🤔 इसके अलावा, FES के संबंध जर्मन मार्शल फंड (German Marshall Fund) से भी जोड़े जाते हैं, जिसे कुछ आलोचक CIA-linked नेटवर्क के संदर्भ में देखते हैं। वही CIA, जिस पर दुनिया के कई देशों में सत्ता परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। 🌍 🔥 अब सारे तार जोड़िए— विदेशी थिंक टैंक, सोरोस नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप, चीन के नेताओं से मुलाकातें और भारत को लेकर राजनीतिक बयान! यह विदेश यात्रा थी या भारत की राजनीति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की कवायद? सवाल उठना स्वाभाविक है। ❓ आखिर राहुल गांधी किसके लिए काम कर रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल—राहुल गांधी के लिए संसद से ज्यादा जरूरी ये मुलाकातें क्यों थीं? 🇮🇳🚩
— अखण्ड भारत संकल्प (@Akhand_Bharat_S) October 23, 2026













