मध्य प्रदेश : महाघोटाला : एक ही दिन 50 IAS-IPS ने खरीदी कृषि भूमि, 16 महीने बाद पास हो गया 3200 करोड़ रूपए का वेस्टर्न बायपास: लैंड यूज बदलते ही 11 गुना बढ़ी कीमत

                                                                                           प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)
मध्य प्रदेश में आईएएस अफसरों की अचल संपत्ति की जाँच में एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें देश के 50 अफसरों ने कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गाँव में एक ही दिन कृषि जमीन खरीद ली। यहाँ सिर्फ 16 महीनों में ही 3200 करोड़ रुपए का वेस्टर्न बायपास मंजूर हुआ और फिर 10 महीने में लैंड यूज बदलकर आवासीय कर दिया गया। इससे जमीन की कीमत 11 गुना बढ़ गई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अप्रैल 2022 को 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में हुई। 50 लोगों ने संयुक्त रूप से यह जमीन खरीदी। रजिस्ट्री में कीमत 5.5 करोड़ रुपए दर्ज की गई जबकि बाजार मूल्य 7.78 करोड़ रुपए बताया गया। आईपीआर में इसे ‘like-minded officers’ यानी एक जैसी सोच वाले अधिकारियों द्वारा खरीदी गई संपत्ति बताया गया। दस्तावेज बताते हैं कि 50 हिस्सों के पीछे असल खरीदार सिर्फ 41 हैं।

इस निवेश में सिर्फ मध्य प्रदेश कैडर के अफसर ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में तैनात कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। अफसरों ने मिलकर कृषि जमीन को खरीदा और बाद में सरकारी फैसलों का फायदा उठाया।

31 अगस्त 2023 को जमीन खरीद के 16 महीने बाद कैबिनेट ने वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दे दी। मौजूदा अलाइनमेंट के अनुसार बायपास खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर दूर है।

जून 2024 में बायपास मंजूरी के 10 महीने बाद ही जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय में बदल दिया गया। जब जमीन खरीदी गई थी तब वह पूरी तरह कृषि भूमि थी।

2022 में करीब 5 एकड़ यानी 2,17,800 वर्गफीट जमीन की दर लगभग 81.75 रुपए प्रति वर्गफीट थी। जून 2024 में लैंड यूज चेंज के बाद दर 557 रुपए प्रति वर्गफीट हो गई। वर्तमान बाजार दर 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट है। इससे जमीन का कुल मूल्य 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुँच गया है। हालाँकि अभी तक आवासीय प्रोजेक्ट के लिए कोई सोसायटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है। आवासीय प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन को सोसायटी के नाम ट्रांसफर करना होगा या प्लॉट आवंटित करने होंगे।

यह घटनाक्रम अफसरों पर सीधा निशाना साध रहा है और सवाल खड़ा कर रहा है कि उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी पहले से कैसे मिल गई। और फिर सवाल ये भी है कि क्या उन्होंने पद का दुरुपयोग कर अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाया? दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अब अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

सीरिया में ISIS से जुड़ने गई थीं 3 जिहादने, ऑस्ट्रेलिया लौटते ही पुलिस ने लिया गिरफ्तार: 8.5 लाख रूपए में औरतें खरीदकर गुलाम बनाने का आरोप, 25 साल सड़ेंगी जेल में

                                                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: दैनिक जागरण)
सीरिया से लौटते ही ऑस्ट्रेलिया में तीन महिलाओं को आतंकवाद और गुलामी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। मेलबर्न एयरपोर्ट पर 53 वर्षीय महिला और उसकी 31 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया। दोनों पर आरोप है कि वे 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने के लिए सीरिया गई थीं।

शुरू में तो पैसे के लालच में लड़कियां ISIS में शामिल होने अपना मुल्क छोड़ देती है, लेकिन दुर्गति होने पर ISIS के चुंगल से भाग जाती है। 2019 में भी एक हसीना ब्रिटेन से भाग ISIS में शामिल हो गयी और ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई।      

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला ने करीब 10 हजार अमेरिकी डॉलर (साढ़े 8 लाख से 9 लाख तक) देकर एक महिला को गुलाम के तौर पर खरीदा था, जबकि उसकी बेटी ने उसे अपने घर में गुलाम बनाकर रखा। दोनों पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 25 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, ISIS के पतन के बाद 2019 में कुर्द बलों ने इन महिलाओं को पकड़ लिया था। तब से वे सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रही थीं। गुरुवार (7 मई 2026) की रात कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं 32 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और ISIS में शामिल होने का आरोप है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह 2015 में अपने शौहर के पास सीरिया गई थी, जो पहले से ISIS का लड़ाका था।

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ के नवजात बच्चे की मौत, सीरिया से आना चाहती है वापस

2019 में ब्रिटेन ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है। यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस  में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।

दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।

इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।

नेपाल में लैंड करते टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में लगी आग: बाल-बाल बचे 289 लोग, Video

                                                                                                               प्रतीकात्मक चित्र (साभार: AI)
नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार (11 मई 2026) को एक बड़ा हादसा टल गया। इस्तांबुल (तुर्की) से काठमांडू आ रही टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट TK-726 के टायर में लैंडिंग के दौरान अचानक आग लग गई। घटना के समय विमान में कुल 289 लोग सवार थे जिनमें 278 यात्री और 11 चालक दल के सदस्य शामिल थे। यात्रियों में संयुक्त राष्ट्र (UN) के कुछ अधिकारी भी मौजूद थे।

आग लगते ही एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई लेकिन दमकल कर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पा लिया। इसके बाद विमान में मौजूद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है।

एयरपोर्ट सुरक्षा के एसपी राजकुमार सिलावल ने बताया कि विमान इस्तांबुल से काठमांडू पहुँचा था और लैंडिंग के दौरान उसके टायर में आग लग गई। फायर इंजन की मदद से स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया। फिलहाल अधिकारी घटना के कारणों की जाँच कर रहे हैं।

बांग्लादेशी तुम्हारे हैं, वो तो लेने पड़ेंगे; हिंदुस्तान में घुसने के लिए किसने कहा था; कट्टरपंथी समाजवाद की नसीहत अपने पास रखें

सुभाष चन्द्र

दूसरों को नसीहत देना बहुत आसान है, आज पलटवार होने के डर से नसीहत देते शर्म नहीं आ रही। कल जब बांग्लादेश में तुम जालिम इंसानियत का नंगा नाच खेल रहे थे हिन्दुओं के दुश्मनों तब ख्याल नहीं आया कि कल पलटवार होने पर हमारे मुसलमानों का क्या हश्र होगा। अंजाम भुगतने को तैयार रहो। शराफत से भारत में घुसे सारे बांग्लादेशियों को वापस बुला लो भलाई इसी में है।   

बांग्लादेश की पार्टी जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉक्टर शफीकुर्रहमान ने शनिवार(मई 9) को कहा कि वे भारत सरकार से अपील करेंगे कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के साथ धर्म, जाति या नस्ल के आधार पर भेदभाव या हिंसा न हो।  

उन्होंने आगे कहा कि “किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को निशाना बनाकर नुकसान पहुंचाना गलत है और इसे रोका जाना चाहिए रहमान ने कहा कि दुनिया में कहीं भी निर्दोष लोगों पर अत्याचार होगा तो वे उनके खिलाफ आवाज उठाएंगे उन्होंने खास तौर पर पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा पीड़ित लोगों के साथ खड़े रहेंगे”

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आज जमात-ए - इस्लामी नेता को धर्म, जाति और नस्ल के आधार पर निशाना बनाना याद आ रहा है जबकि यही संगठन भारत का धुर विरोधी है और जब यूनुस के समय में हिंदुओं पर बांग्लादेश में बर्बरता हो रही थी, उनके घर जलाए जा रहे थे, मासूम महिलाओं के रेप हो रहे थे, हिंदुओं को क़त्ल किया जा रहा था, नंगा कर पेड़ों पर लटका कर फांसी दी जा रही थी, तब जमात नेता को ये बातें याद नहीं आ रही थी और बांग्लादेश में जमात-ए -इस्लामी समेत कोई संगठन हिंदुओं की मदद के लिए आगे नहीं आया तब किसी पीड़ित के साथ क्यों नहीं खड़े हुआ डॉ रहमान जो आज दर्द छलक रहा है क्या हिंदुओं को आप “पीड़ित” नहीं मानते उन्हें तो आपने 1947 के बाद से बांग्लादेश में कितना ख़त्म किया है, यह आप अच्छी तरह जानते हैं

बांग्लादेश से करोड़ों लोग भारत में घुसपैठ किए और भारत की डेमोग्राफी बदल कर रख दी लेकिन अब उन्हीं अपने लोगों को बांग्लादेशी नेता और वर्तमान सरकार वापस नहीं लेना चाहती

 अब उन्हें धर्म और जाति के नाम पर शोषण दिखाई दे रहा है बांग्लादेश की सरकार ने तो यह भी कहा है कि दोनों देशों के संबंध मधुर रखने के लिए भारत संयम से काम ले मतलब हमारे लोगों को भारत में ही रहने दे कल यूनुस के समय में बांग्लादेश पाकिस्तान की गोद में बैठ कर अपने सैनिकों को भारत से लड़ने के लिए पाकिस्तान की आर्मी से ट्रेनिंग दिला रहा था

ऐसा कहते हैं कि NSA अजित डोभाल बांग्लादेश जा कर वहां की सरकार को साफ़ शब्दों में कह आए हैं कि घुसपैठियों को वापस लेने के लिए अपने बॉर्डर खोल कर रखिए

इस बीच कुछ वीडियो सोशल मीडिया में आ रहे हैं जिसमें दिखाया जा रहा है कि हजारों की संख्या में बंगाल से बांग्लादेशी बोरिया बिस्तर उठाए बांग्लादेश जा रहे हैं

इसके साथ यह भी सूचना आ रही है कि बंगाल की नई शुभेंदु सरकार ने BSF को 600 एकड़ भूमि देने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं जिससे बची हुई बांग्लादेश से लगते बॉर्डर पर fancing का काम पूरा हो सके और घुसपैठ पर अंकुश लगाया जा सके यह भूमि ममता बनर्जी ने देने से मना कर दिया था और वही इलाका है जहां से अभी तक घुसपैठ हो रही है

बांग्लादेश को अपने नागरिक वापस तो लेने पड़ेंगे प्यार से लेगा तो ठीक है वरना जबरन भेजे जाएंगे

अचूक ‘ब्रह्मास्त्र’ : भारत ने MIRV तकनीक वाली एडवांस ‘अग्नि’ का किया परीक्षण; एक मिसाइल और दुश्मन के कई ठिकाने तबाह

                   भारत की आत्मनिर्भर एडवांस अग्नि मिसाइल MIRV (साभार : X_@DefenseNewsIN)
सोचिए, आसमान से एक बिजली कड़कती है और वह जमीन पर गिरने से पहले कई हिस्सों में बँटकर दुश्मन के अलग-अलग ठिकानों को एक साथ राख कर देती है। सुनने में यह किसी पौराणिक कथा के अस्त्र जैसा लगता है, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने इसे हकीकत बना दिया है।

 8 मई 2026 की शाम, जब ओडिशा के तट पर सूरज ढल रहा था, तभी डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एक ऐसी मिसाइल निकली जिसने न सिर्फ आसमान को जगमगा दिया, बल्कि भारत के दुश्मनों की नींद भी उड़ा दी। यह कोई साधारण मिसाइल नहीं थी, यह ‘अग्नि’ परिवार की वह एडवांस मिसाइल थी जो अब एक साथ कई शिकार करने में सक्षम है।

क्या है यह नई शक्ति और कैसे करती है काम?

साधारण मिसाइलें एक बार में एक ही लक्ष्य (Target) पर वार करती हैं। लेकिन इस नई एडवांस अग्नि मिसाइल की खासियत इसकी MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ‘बस’ की तरह है।

जैसे एक बस में कई यात्री बैठते हैं और बस अपनी यात्रा के दौरान अलग-अलग स्टॉप पर यात्रियों को उतारती जाती है, वैसे ही यह मिसाइल अपने साथ कई परमाणु हथियार (वॉरहेड्स) लेकर उड़ती है। अंतरिक्ष में पहुँचने के बाद यह मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में अपने इन हथियारों को छोड़ देती है। नतीजा यह होता है कि एक ही मिसाइल से दुश्मन के पाँच-छह अलग-अलग शहर या सैन्य ठिकाने एक साथ तबाह किए जा सकते हैं।

DRDO का ‘मेक इन इंडिया’ चमत्कार

इस महाशक्तिशाली मिसाइल को हमारे वैज्ञानिकों की संस्था DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने तैयार किया है। सबसे गर्व की बात यह है कि इसे बनाने में देश की प्राइवेट इंडस्ट्रीज ने भी पूरा सहयोग दिया है।

परीक्षण के दौरान मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी से उड़ान भरी और हिंद महासागर में हजारों किलोमीटर दूर रखे गए अलग-अलग लक्ष्यों को बिल्कुल सटीक तरीके से भेदा। जमीन पर लगे रडार और समुद्र में तैनात युद्धपोतों ने इसकी हर हरकत पर नजर रखी और पाया कि मिसाइल ने हर कसौटी पर खुद को सौ फीसदी सही साबित किया है।

दुश्मन के लिए इसे रोकना क्यों है नामुमकिन?

आजकल दुनिया के कई देशों के पास ऐसी तकनीक है जो आने वाली मिसाइल को हवा में ही मार गिराती है। लेकिन भारत की इस MIRV तकनीक ने उस सुरक्षा घेरे को बेकार कर दिया है। जब एक मिसाइल से दस अलग-अलग हथियार अलग-अलग गति और दिशा में निकलेंगे, तो दुश्मन का डिफेंस सिस्टम भ्रमित (Confuse) हो जाएगा।

वह एक को रोकेगा तब तक बाकी नौ अपना काम कर चुके होंगे। यही कारण है कि इस परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में हलचल मच गई है, क्योंकि अब भारत की पहुँच और मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने थपथपाई वैज्ञानिकों की पीठ

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद सोशल मीडिया और आधिकारिक बयान के जरिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों को एक अविश्वसनीय मजबूती देता है। बदलती सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते खतरों के बीच, हमारे वैज्ञानिकों, भारतीय सेना और इंडस्ट्री ने मिलकर देश का सिर फख्र से ऊँचा कर दिया है।”

ओडिशा से बांग्लादेश तक दिखा अद्भुत नजारा

जब यह मिसाइल शाम के वक्त छोड़ी गई, तो आसमान में एक नारंगी और सफेद रंग की लंबी पूंछ जैसा नजारा दिखा। यह इतना चमकदार था कि इसे सिर्फ ओडिशा में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश के कॉक्स बाजार तक देखा गया। लोगों को लगा कि कोई पुच्छल तारा या उड़नतश्तरी (UFO) जा रही है, लेकिन असल में वह भारत की सुरक्षा की नई गारंटी ‘अग्नि’ थी।

दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में भारत

इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों (जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास एक मिसाइल से कई निशाने साधने की तकनीक है। यह मिसाइल शांति का प्रतीक है क्योंकि यह बताती है कि भारत की तरफ आँख उठाने वाले का अंजाम क्या होगा। यह वैज्ञानिकों की तपस्या और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की जीत है।

पाकिस्तान में भीषण धमाका, कार में ब्लास्ट से ढही पुलिस चौकी: विद्रोहियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग भी की; 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका

                                                                                                                            साभार News18  
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में शनिवार (9 मई 2026) की देर रात एक बड़ा हमला हुआ। विद्रोहियों ने पहले पुलिस चौकी के पास एक कार को बम धमाके से उड़ा दिया और इसके बाद भीषण गोलीबारी की है। इसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर हिला कर रख दिया
 इस हमले में पहले एक कार बम धमाका किया गया और उसके तुरंत बाद पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हमला किया गया 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका है रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में हुआ, जो अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित है यहां एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया गया पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को चौकी के पास उड़ा दिया

15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका

धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी पुलिस पोस्ट ढह गई इस हमले में कम से कम तीन पुलिस अधिकारियों की मौत की पुष्टि हुई है लेकिन नुकसान इससे कहीं ज्यादा बताया जा रहा है पुलिस अधिकारी सज्जाद खान के मुताबिक, चौकी पर उस समय करीब 15 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे, जिनमें से ज्यादातर के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है हालांकि अंतिम आंकड़े ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही सामने आएंगे

यह इलाका अफगानिस्तान सीमा से सटा हुआ है और लंबे समय से आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय हमला हुआ, उस वक्त चौकी में 15 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद थे और कई अन्य के घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस अधिकारी जाहिद खान ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को सुरक्षा चौकी के पास उड़ा दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि चौकी पूरी तरह ढह गई। इसके तुरंत बाद विद्रोहियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और मौके पर पहुँच रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया।

स्थानीय मीडिया डॉन के अनुसार, धमाके से आसपास के रिहायशी इलाकों को भी भारी नुकसान पहुँचा है और दो आम नागरिक घायल हुए। घटना के बाद बन्नू के सरकारी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले को कैसे दिया गया अंजाम?

हमले का तरीका बेहद खतरनाक था पहले कार को मेन गेट से टक्कर मार करे धमाका किया गया. ब्लास्ट के बाद आसपास से पुलिसकर्मी मदद के लिए मौके पर पहुंचे और हमलावरों ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया इस दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य पुलिस अधिकारी जाहिद खान ने बताया कि इस हमले में एक आत्मघाती हमलावर भी शामिल था, जिसने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को चौकी के पास उड़ा दिया इसके बाद कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया, जिससे यह हमला और ज्यादा खतरनाक हो गया. यह दिखाता है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे 

दक्षिण विजय के लिए भाजपा को क्या करना होगा ?

डॉ राकेश कुमारआर्य
गंगोत्री से गंगासागर तक अपना विशाल साम्राज्य खड़ा करने वाली भाजपा के लिए दक्षिण अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का मनोविज्ञान मजबूत करने वाली भाजपा के लिए यह आवश्यक है कि वह दक्षिण को भी भगवा ध्वज के नीचे लाए। अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों ( असम, पांडिचेरी, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु ) के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जहां असम और पश्चिम बंगाल में धुआंधार मचाई है और पांडिचेरी में भी सरकार बनाने में सफल हुई है, वहीं केरल और तमिलनाडु में उसकी पराजय सचमुच चुभने वाली है। इन दोनों ही प्रदेशों ने भाजपा के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोक दिया है। निश्चित रूप से भाजपा को अंतरमंथन करना ही होगा। यह इसलिए भी आवश्यक है कि भाजपा संपूर्ण देश को एक इकाई के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त करती है। साथ ही वह सारे संसार को यह दिखाना चाहती है कि हमारे यहां का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भाषा ,प्रांत ,क्षेत्र, जाति, संप्रदाय आदि की सारी संभावनाओं और विसंगतियों को पीछे छोड़कर 'एक' होने की क्षमता रखता है।
लेखक 
दक्षिण भारत के 6 राज्यों अर्थात कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भाजपा को विशेष ध्यान देना है। इन आधा दर्जन राज्यों में कांग्रेस के द्वारा भाषा के नाम पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता रहा है। उन्हें यह बताया जाता रहा है कि भाजपा हिंदी- हिंदू- हिंदुस्तान की बात करती है। यदि यह सत्ता में बनी रहेगी और स्थानीय लोग अपनी भाषाई पहचान को छोड़कर भाजपा के ' हिंदी -- हिंदुस्तान ' के साथ जाने का मन बनाएंगे तो एक दिन ऐसा आएगा जब भाजपा इन प्रांतों की स्थानीय भाषाओं को मिटा देगी। इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं -एक तो यह कि भारत में भाषाई पूर्वाग्रह है। इसके लिए हम चाहे कितना ही यह दिखाने और कहने का प्रयास करें कि हम भाषा के नाम पर बंटे हुए नहीं हैं ,परन्तु सच यह है कि भाषा हमें दूसरे प्रान्तों के लोगों से अलग करती है। दूसरी बात यह है कि भारत में भाषाओं के नाम पर यदि प्रान्तों का विभाजन किया गया है तो भाषा राजनीति में एक वैधानिक आधार प्राप्त कर चुकी है अर्थात भाषा के नाम पर प्रान्तों का विभाजन करना भाषाई विवाद को वैधानिकता प्रदान करता है।
भाजपा को अपनी रणनीति में इस बात को सम्मिलित करना पड़ेगा कि वह संस्कृतनिष्ठ हिंदी की समर्थक है और दक्षिणी की सभी भाषाओं के संस्कृतनिष्ठ शब्दों को हिंदी शब्दों के रूप में स्वीकृति देने को तैयार है। इसी मत के प्रतिपादक सावरकर जी थे। भाजपा को दक्षिण के लोगों को यह भली प्रकार समझाना होगा कि कांग्रेस उर्दूनिष्ठ खिचड़ी भाषाओं की समर्थक रही है। कांग्रेस की इसी नीति का विरोध दक्षिण भारत करता है। लोगों को मान्यता है कि भाजपा की हिंदी का अभिप्राय कांग्रेस की इसी उर्दूनिष्ठ हिंदी से है अर्थात दक्षिण भारत उस उर्दूनिष्ठ खिचड़ी हिन्दी का विरोधी है, जो उसकी अपनी भाषाओं से कहीं भी मेल नहीं खाती है। भाजपा को ध्यान रखना चाहिए कि उसके अंग्रेजी या उर्दू के नारे दक्षिण भारत के लोगों को रास नहीं आते हैं।
भाजपा ने भाषा के नाम पर तुष्टिकरण का खेल खेलते हुए दक्षिण को उन्हीं की अपनी भाषा में संबोधित करने का क्रम चलाया है अर्थात पार्टी हंस की चाल चली तो अपनी चाल भूल गई। भाजपा को सावरकर जी के भाषा संबंधी चिंतन को क्रियान्वित करने के लिए ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कि दक्षिण की सभी भाषाओं के संस्कृतनिष्ठ शब्दों को हिंदी के संस्कृतनिष्ठ स्वरूप के साथ समन्वित किया जा सके। कांग्रेस ने भाषा को अभिव्यक्ति का माध्यम मान लिया है। जबकि भाषा राष्ट्रीय एकता की सजग प्रहरी होती है। इसी स्वरूप में भाजपा को अपना भाषा संबंधी चिंतन स्पष्ट करना चाहिए।
हमें ध्यान रखना चाहिए कि दक्षिण भारत के इन 6 राज्यों में लोकसभा की 130 सीटें आती हैं। जिनमें से भाजपा के पास ढाई दर्जन भी नहीं हैं। इससे पता चलता है कि भाजपा को दक्षिण में पैर जमाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा।
कर्नाटक में भाजपा के लिए बहुत अनुकूल अवसर हैं। वहां पर उसकी सरकार भी रही है। भविष्य में वहां पर भाजपा की सरकार आने की प्रबल संभावनाएं हैं। कर्नाटक को आधार बनाकर दूसरे प्रान्तों को जीतने की एक सफल योजना बनाई जा सकती है। कर्नाटक को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। जिसमें विशेष रूप से भाषा के प्रति उदार दृष्टिकोण रखा जाए। कर्नाटक के लोगों को यह विश्वास दिलाया जाए कि भाजपा ' सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय' में विश्वास रखती है और वह भाषा को राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम मानती है। तमिलनाडु में जिस प्रकार से वहां के स्थानीय दल सत्ता में आते रहे हैं, उससे पता चलता है कि यहां के लोग क्षेत्रीय पार्टियों को प्राथमिकता देते हैं। अब उन्होंने तमिलनाडु में टीवीके को एक विकल्प के रूप में स्वीकार कर लिया है। भारतीय जनता पार्टी को इन तीनों के विकल्प के रूप में अपने आप को स्थापित करना है। इसके लिए भाजपा को चाहिए कि वह जिस प्रकार बंगाल को लगभग डेढ़ लाख छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करके विजय करने में सफल हुई है, उसी प्रकार उसे तमिलनाडु में भी करना होगा। मंचों पर दिए गए भाषणों से अधिक यह छोटी-छोटी बैठकर प्रभावशाली होती हैं। भाजपा को तमिलनाडु के लोगों को भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में इस प्रान्त के महत्वपूर्ण योगदान से परिचित कराना होगा। यह भी दिखाना होगा कि राम हमारी आस्था के और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं। उन्हें स्थानीय स्तर पर तमिलनाडु के लोग रावण के दृष्टिकोण से देखना बंद करें। दक्षिण में जिस प्रकार भाजपा के पास लोकसभा के लिए सीटों का अकाल पड़ा हुआ है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यहां के लोगों ने भाजपा को अभी कांग्रेस जैसा भी सम्मान देना ठीक नहीं माना है। यही कारण है कि दक्षिण भारत के लोग भाजपा को वोट भी बहुत कम देते हैं। यह भी एक तथ्य है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश में बीजेपी को मात्र एक प्रतिशत वोट मिले थे।
ऐसा नहीं है कि दक्षिण भारत के लोग सनातन से दूर हैं, वहां पर कार्यरत ईसाई मिशनरीज स्थानीय लोगों को भारत के सनातनी स्वरूप से दूर ले जाने का हर संभव प्रयास करती रही हैं, परंतु इसके उपरांत भी बहुसंख्यक लोग भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में आस्था रखते हैं। भाजपा को इसी आस्था को पकड़ना चाहिए। वहां के मंदिरों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। मंदिरों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर अच्छे भाषण करने वाले लोगों को वक्ता के रूप में स्थापित किया जाए। इनका विशेष कार्य उत्तर दक्षिण का भेद मिटाना होना चाहिए।
( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं)

हापुड़ : महाराणा प्रताप जयंती की शोभायात्रा पर पत्थर फेंकने वाले कट्टरपंथियों को भीड़ ने छत पर चढ़ कर पीटा: Video

  हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभा यात्रा के दौरान पथराव, हिंदुओं ने कट्टरपंथियों को पीटा (साभार: एक्स @ocjain4)
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के धौलाना थाना क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती पर निकाली जा रही भव्य शोभायात्रा के दौरान शनिवार (9 मई 2026) को अचानक हिंसा भड़क उठी। यहाँ हजारों लोगों की मौजूदगी में निकाली जा रही यात्रा जब मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रही थी, तभी मामूली कहासुनी को लेकर कट्टरपंथियों ने जमकर पथराव शुरू कर दिया।

हालाँकि, शोभायात्रा में शामिल भीड़ ने छतों पर चढ़कर पत्थर फेंक रहे जिहादियों को पीट दिया। पलटवार कर हिन्दुओं ने कट्टरपंथियों को सख्त सन्देश दे दिया है कि अब हिन्दू यात्रा पर पत्थरबाज़ी करने वाले कट्टरपंथियों को बक्शा नहीं जाएगा। इस पलटवार ने एक सन्देश कट्टरपंथियों का समर्थन करने वालों को भी दे दिया गया है। 

पथराव से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में कई युवक घायल हुए हैं, जबकि एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया और देर तक क्षेत्र में गहमागहमी बनी रही।

कट्टरपंथियों ने घरों और वाहनों में की तोड़फोड़, कई लोग घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर देहरा गाँव में बड़ी शोभायात्रा निकाली जा रही थी, जिसमें हजारों लोग शामिल थे। यात्रा जब गाँव के मुस्लिम बाहुल्य इलाके से गुजर रही थी, उसी दौरान कुछ युवक रास्ते में एक दुकान पर गुटखा खरीदने पहुँचे।

इसी दौरान किसी बात को लेकर युवकों के बीच कहासुनी हो गई। शुरुआत में मामूली विवाद लग रहा मामला कुछ ही मिनटों में उग्र हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इसके बाद इलाके में अचानक पथराव शुरू हो गया, जिससे शोभायात्रा में शामिल लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

उपद्रव के बीच कुछ लोगों द्वारा घरों में घुसकर तोड़फोड़ किए जाने की भी सूचना है। कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस के मुताबिक, 2 से 3 लोगों को मामूली चोटें आई हैं, वहीं एक युवक की हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस बल ने सँभाला मोर्चा, दो आरोपित गिरफ्तार

बवाल की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा और काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया। एसपी हापुड़ कुँवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने पत्थरबाजी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, रैली बाद में सकुशल संपन्न करा दी गई और वर्तमान में क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था सामान्य है।

पौराणिक गाथा : शिव का रौद्र रूप भैरों बाबा

सनातन धर्म के महाकाव्य रामायण, महाभारत, भागवत गीता, वेद, पुराण, उपनिषद और अन्य ग्रन्थ मात्र धार्मिक पुस्तकें नहीं बल्कि जीवनशैली का मार्गदर्शन हैं। रामायण में दर्शाया कि महान तपस्वी और तीनो लोकों में शक्तिशाली रावण को मोक्ष दिलवाने प्रत्येक देवी-देवता का किसी न किसी रूप में धरती पर अवतरण हुआ।    
प्राचीन काल की बात है, जब पृथ्वी पर 'ज्वरासुर' नामक एक भयंकर असुर का आतंक फैल गया था। वह असुर रोगों का साक्षात स्वरूप था। उसके स्पर्श मात्र से लोगों के शरीर तपने लगते, अंगों पर दाने निकल आते और पूरी मानवता महामारी की चपेट में आ गई थी।

शक्ति का प्राकट्य
जब हाहाकार मच गया, तब समस्त देवगण भगवान शिव की शरण में गए। महादेव के अंश से और आदिशक्ति की कृपा से एक देवी का प्राकट्य हुआ, जिनका स्वरूप अत्यंत शीतल और ममतामयी था। उन्हें 'शीतला' कहा गया। वे नीम की पत्तियों के गहने पहने, हाथ में कलश और झाड़ू लिए गधे पर सवार होकर पृथ्वी पर उतरीं।

माँ शीतला ने जैसे ही अपनी झाड़ू से रोगों को बुहारना और कलश के जल से शांति फैलाना शुरू किया, ज्वरासुर और उसके सहायक प्रेत-पिशाच क्रोधित हो उठे। उन्होंने माता के कार्य में विघ्न डालना शुरू कर दिया ताकि महामारी बनी रहे।
तब देवी की सहायता के लिए महादेव ने अपने रौद्र रूप 'भैरव' को प्रकट किया। भगवान शिव ने भैरव से कहा:
"हे भैरव! तुम देवी के अंगरक्षक और क्षेत्रपाल बनकर उनके साथ रहो। जो भी आसुरी शक्तियाँ या रोगरूपी दानव देवी के मार्ग में आएंगे, उनका संहार करना तुम्हारा उत्तरदायित्व है।"

भैरव जी ने माता के आदेश को शिरोधार्य किया। तंत्र ग्रंथों के अनुसार, भैरव ने जहाँ एक ओर दुष्टों के लिए काल का रूप धरा, वहीं भक्तों के लिए वे 'बटुक भैरव' (बालक रूप) बनकर माता के साथ चलने लगे। उन्होंने ज्वरासुर का मान मर्दन किया और उसे माता के चरणों में झुकने पर विवश कर दिया।
तब से यह परंपरा बन गई कि माँ शीतला जहाँ भी निवास करती हैं, वहाँ भैरव द्वारपाल या क्षेत्रपाल के रूप में पहरा देते हैं। बिना भैरव की अनुमति और उनके दर्शन के, शीतला माता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
कथा का आध्यात्मिक सार
यह कहानी केवल दो शक्तियों के मिलन की नहीं है, बल्कि आयुर्वेद और सुरक्षा का संगम है:
माँ शीतला: आरोग्य और स्वच्छता का प्रतीक हैं।
भैरव: अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
निष्कर्ष: माँ शीतला की झाड़ू गंदगी (बीमारी की जड़) साफ करती है, कलश का जल घावों को भरता है और भैरव का दंड उन बाहरी नकारात्मक ऊर्जाओं को रोकता है जो दोबारा बीमारी ला सकती हैं। 

Narendra Modi द्वारा तमिलनाडु में शुरू की गई प्रमुख परियोजनाएं (2014–2026)

सुभाष चन्द्र 

तमिलनाडु में भाजपा को मात्र एक सीट मिली है। जबकि सनातन विरोधी DMK की सत्ता बेशक चली गई लेकिन उसे भाजपा से कहीं अधिक सीट मिली। 

तमिलनाडु से ही मेरे एक परम मित्र ने मुझे बताया कि DMK ने लोगों के दिमाग में फितूर भर दिया था कि मोदी ने तमिलनाडु के साथ भेदभाव किया है। वैसे DMK का प्रचार हिंदी विरोध का ज्यादा रहता है। 

सब कुछ गँवा के होश मे आये तो क्या किया

तमिलनाडू DMK के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के स्टालिन ने कहा कि, मैने जो अपने कार्यकाल में सनातन संस्कृति का अपमान किया हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया ये सब मैंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कहने पर किया।
आज मुझे इसके लिए बड़ा पछतावा हो रहा है। मैं इसके लिए देश के सभी हिन्दूओं से माफी मांगता हूं।

आज सबकुछ लुटवाकर सच्चाई बोलने का क्या फायदा? उस समय अक्ल क्या भैंस चरने गयी थी?   

आज मुझे चाणक्य की वो बात याद आ रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेशी औरत से जन्मा बच्चा कभी देश भक्त नहीं हो सकता। लेकिन राहुल जहां जहां जायेगा विनाश ही करेगा।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब देखते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के विकास के लिए पिछले 12 वर्ष में क्या किया

2014 से 2026 तक केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में सड़क, रेलवे, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी अनेक बड़ी परियोजनाएं शुरू कीं। इस दौरान राज्य में 4,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और विस्तार किया गया और रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े निवेश किए गए।

मुख्य परियोजनाएँ इस प्रकार हैं —

* राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और नए बाईपास निर्माण की कई परियोजनाएं शुरू की गई, जिन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं - NH-332A ( ₹2,100 crore) और  NH-87 ( ₹1,800 crore) की लागत से शुरू किए गए;

* प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 370 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया ताकि गांवों को बेहतर संपर्क मिल सके;

* रेलवे आधुनिकीकरण के तहत तमिलनाडु के 77 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है;

* भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल “पंबन ब्रिज” राष्ट्र को समर्पित किया गया;

* राज्य को 9 वंदे भारत ट्रेनों सहित कई नई रेल सेवाएं दी गई तथा कई रेल लाइनों का विद्युतीकरण और दोहरीकरण किया गया;

* ऊर्जा क्षेत्र में गैस वितरण नेटवर्क, बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाएँ और चेन्नई में इंडियन ऑयल का बड़ा ल्यूब ब्लेंडिंग प्लांट शुरू किया गया -(Project in Nilgiris and Erode districts by BPCL (approx. ₹3,700 crore).IOCL Lube Blending Plant: Dedicated to the nation in Chennai (investment of ₹1,490 crore).Kudankulam Power Transmission);

* तूतीकोरिन स्थित VOC पोर्ट के विकास और बंदरगाह संपर्क सड़कों के विस्तार की परियोजनाएं शुरू की गईं;

* तमिलनाडु में 11 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए;

* प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत हजारों घरों में सोलर रूफटॉप लगाए गए;

* आदिचनल्लूर जैसे ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना शुरू की गई;

केंद्र सरकार के अनुसार पिछले एक दशक में तमिलनाडु के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई

लगता है तमिलनाडु की जनता को विकास से मतलब नहीं है जबकि मोदी ने उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया। उन्होंने एक फ़िल्मी सितारे को सत्ता सौंप दी

बंगाल : TMC नेता के करीबी के घर से भारी मात्रा में हथियार बरामद, 140 राउंड कारतूस के साथ एक महिला गिरफ्तार

                                          हथियारों के साथ महिला गिरफ्तार (फोटो साभार: ANI)
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में शनिवार (9 मई 2026) को पुलिस ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक नेता के करीबी के घर से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरहामपुर के सैदाबाद गिरजापाड़ा इलाके में पुलिस ने छापेमारी के दौरान करीब 140 राउंड कारतूस, तीन 7.65 एमएम रिवॉल्वर और एक मैगजीन जब्त की।

मौके से टुकू सरकार नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, दो अन्य आरोपित पापाई घोष और उसका सहयोगी आशीम सरकार फरार बताए जा रहे हैं।

यह बरामदगी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में TMC की चुनावी हार के बाद कई इलाकों से छिटपुट हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। आरोप है कि TMC का नेतृत्व जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर रहा और अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को भड़का रहा है कि पार्टी को किसी भी हालत में चुनाव नहीं हारना चाहिए था।

इसी बीच बीजेपी विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने आज राज्य के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर बंपर जीत हासिल की है।

पंजाब : कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की कार्रवाई

साभार पंजाब केसरी 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (9 मई 2026) को पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। केंद्रीय एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की है। इससे पहेल ED ने संजीव अरोड़ा के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।

PTC न्यूज के मुताबिक, सुबह से ही ED की टीमें लगातार अरोड़ा के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं और इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। (ED) की अलग-अलग टीमें संजीव अरोड़ा और उनके सहयोगियों के चार ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। ED के अधिकारी उनके सरकारी आवास पर भी पूछताछ और जाँच कर रहे हैं। 

पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर छापा मारने के बाद ईड़ी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेड की बताया जा रहा है कि उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कुछ लोगों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच में सुबह यह छापा पड़ा

 इसमें संजीव अरोड़ा का चंडीगढ़ स्थित सरकारी घर भी उन पांच जगहों में शामिल है, जहां छापे मारे गए रेड में दिल्ली और गुरुग्राम (हरियाणा) के भी कई ठिकाने हैं, इनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड नाम की कंपनी का दफ़्तर भी शामिल है

तीसरी बार उनके घर बीजेपी की ईडी आई

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर लिखा, आज फिर से बीजेपी की ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है एक साल में ये तीसरी बार उनके घर बीजेपी की ईडी आई है पिछले एक महीने में दूसरी बार फिर भी कुछ नहीं मिला है उन्होंने आगे लिखा, ईडी-बीजेपी के इस अनैतिक गठबंधन का अंत पंजाब से ही होगा

सच उगलने तक कस्टडी में रखो’: TCS नासिक कांड में निदा खान को नहीं मिली बेल, प्रेग्नेंसी के नाम पर माँग रही थी राहत

                                      निदा खान की जमानत याचिका खारिज (साभार : Dall-E)
नासिक की एक अदालत ने 2 मई को TCS धर्मांतरण मामले की आरोपित निदा एजाज खान को अग्रिम 
जमानत देने से मना कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि अब तक की जाँच से साफ है कि निदा एक सोची-समझी साजिश में शामिल थी, जिसका मकसद पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसका धर्म बदलवाना था

जज केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला काफी गंभीर है, इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए निदा को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करना बहुत जरूरी है। निदा के खिलाफ देवलाली पुलिस स्टेशन में अलग-अलग धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज है।

कोर्ट में निदा खान की सफाई: क्या थीं बचाव पक्ष की दलीलें?

निदा खान के वकील ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि निदा और पीड़िता बस साथ में काम करने वाले सहकर्मी थे और एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने निदा पर लगे सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर फँसाया गया है, जबकि मुख्य आरोप तो दानिश और तौसीफ पर हैं। वकील का यह भी कहना था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि निदा ने सबके सामने जाति को लेकर पीड़िता का अपमान किया हो।

आगे दलील दी गई कि महाराष्ट्र में धर्म बदलने को लेकर कोई अलग कानून नहीं है और जिस धारा (BNS 299) का जिक्र हो रहा है, वह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए है, न कि धर्म परिवर्तन के लिए। वकील के मुताबिक, धर्म पर सामान्य चर्चा करना कोई अपराध नहीं है और इसमें केवल जमानत मिलने वाली धाराएँ ही लगनी चाहिए। साथ ही, निदा के गर्भवती होने का हवाला देते हुए कहा गया कि इस हालत में गिरफ्तारी उनके होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

अभियोजन पक्ष का कड़ा रुख: ‘निदा खान सिर्फ मूकदर्शक नहीं, बल्कि मुख्य साजिशकर्ता’

अभियोजन पक्ष ने निदा खान की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट को बताया गया कि जुलाई 2023 से 2026 के बीच निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। सरकारी वकील ने दलील दी कि निदा ने न केवल पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई, बल्कि FIR में भी उसके नाम और भूमिका का स्पष्ट जिक्र है। जाँच से यह संकेत मिले हैं कि सभी आरोपितों ने आपस में संपर्क कर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया है।

कोर्ट को सूचित किया गया कि निदा खान इस मामले में कोई मामूली भूमिका में नहीं थी। वह ऑफिस में ब्रेक के दौरान पीड़िता से बात करती थी और इस्लाम कबूलने के लिए उसका ब्रेनवॉश करती थी। आरोप है कि उसने पीड़िता को खास मजहबी प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर करने में अहम भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में पीड़िता, उसकी माँ और भाई के बयानों को आधार बनाया।

जाँच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि निदा खान ने ही पीड़िता को बुर्का और इस्लाम से जुड़ी किताबें मुहैया कराई थीं। पीड़िता के फोन में एक ऐसा ऐप भी मिला, जिसे धर्मांतरण के इरादे से इंस्टॉल करवाया गया था। इसके अलावा, निदा उसे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के ऐसे लिंक भेजती थी जिनमें मजहबी उपदेश होते थे। पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों के सोर्स (Source) और निदा के बाहरी संपर्कों की गहराई से जाँच करना जरूरी है।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि निदा खान पीड़िता के घर भी जाती थी। वहाँ उसने पीड़िता को नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग दी और उसे हिजाब व बुर्का पहनने के निर्देश दिए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने की योजना थी। यही नहीं, उसे मलेशिया भेजने की भी तैयारी थी और इसके लिए ‘मालेगाँव पार्टी’ की मदद से दस्तावेज बनवाए जाने थे। इन तमाम विदेशी कड़ियों और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कोर्ट से आरोपित की कस्टडी (हिरासत) की माँग की गई।

पीड़िता के वकील का दावा: पद का फायदा उठाकर बनाया धर्मांतरण का दबाव

सुनवाई के दौरान पीड़िता के वकील ने विस्तार से बताया कि कैसे निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता का ब्रेनवॉश किया। वकील ने आरोप लगाया कि निदा और बाकी आरोपितों ने कंपनी में अपने ऊँचे पदों का गलत इस्तेमाल किया ताकि पीड़िता पर दबाव बनाया जा सके। उन्हें न केवल इस्लाम का पालन करने के लिए मजबूर किया गया, बल्कि उनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें मांसाहारी (Non-veg) खाना खाने के लिए भी विवश किया गया। इसके अलावा, कोर्ट को बताया गया कि आरोपित हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणियाँ करते थे और ऑफिस में पीड़िता को उनकी जाति को लेकर अपमानित किया जाता था।

पीड़िता के पक्ष ने एक और गंभीर बात कोर्ट के सामने रखी। उन्होंने कहा कि निदा खान सिर्फ पीड़िता तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उसने उसके परिवार को भी धर्मांतरण के लिए मजबूर करने की कोशिश की। इसके लिए बाकायदा धमकी भरे और डराने वाले तरीके अपनाए गए ताकि पूरे परिवार पर दबाव बनाया जा सके। इन दलीलों के जरिए कोर्ट को यह समझाने की कोशिश की गई कि यह मामला केवल आपसी बातचीत का नहीं, बल्कि एक गहरी और डरावनी साजिश का हिस्सा है।

कोर्ट का फैसला: ‘पहली नजर में आरोपित की भूमिका साफ दिखती है’

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने सह-आरोपितों और निदा खान की भूमिकाओं के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया। जज ने गौर किया कि जहाँ अन्य दो आरोपित पहली नजर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 75 के तहत अपराधों में शामिल थे, वहीं निदा खान की भूमिका धारा 299 और SC/ST एक्ट के प्रावधानों के तहत दिखाई दे रही है।

जज ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि FIR में न केवल निदा खान का नाम शामिल है, बल्कि उसकी भूमिका का भी साफ जिक्र है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि आरोपितों ने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में ‘आपत्तिजनक कहानियाँ’ सुनाईं और पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज किया गया है कि निदा खान ने पीड़िता को बुर्का दिया था। इसके अलावा, आरोपितों ने उसे पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर आधारित एक किताब दी और निदा खान खुद पीड़िता के घर जाकर उसे मजहबी ट्रेनिंग देती थी।

कोर्ट की टिप्पणी: ‘यह कोई साधारण बातचीत नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश’

कोर्ट ने अपनी बातों को और स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़िता और निदा खान के बीच धर्म पर हुई बातचीत कोई इत्तेफाक या साधारण चर्चा नहीं थी। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत साफ दिखाते हैं कि पीड़िता को फँसाने के लिए बहुत ही सलीके से और योजना बनाकर काम किया गया था। जज ने इस बात को गंभीरता से रखा कि यह अपराध कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरी परतें और एक बहुत बड़ी साजिश छिपी हुई है।

अदालत ने उन सबूतों पर भी कड़ी चिंता जताई, जिनसे पता चला कि आरोपित पीड़िता का नाम बदलना चाहते थे और उसे मलेशिया भेजने की तैयारी में थे। जज ने साफ कहा कि हमारा संविधान हर किसी को अपनी पसंद का धर्म और नाम चुनने की आजादी देता है, लेकिन किसी का ब्रेनवॉश करके या साजिश रचकर उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है। कोर्ट ने माना कि व्यक्ति के अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन किसी को धोखे का शिकार बनाकर उसका धर्म बदलवाना कानूनी रूप से अपराध है।

कोर्ट का फैसला: ‘सच उगलवाने के लिए पुलिस कस्टडी है जरूरी’

कोर्ट ने साफ कहा कि इस केस की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपित को पुलिस की गिरफ्त में रखना जरूरी है। कोर्ट का मानना है कि यह मामला काफी पेचीदा है, क्योंकि जाँच में ‘मालेगाँव पार्टी’ के साथ-साथ कई अन्य शहरों और विदेशों के नाम भी जुड़े मिले हैं। खासकर मलेशिया में बैठे ‘इमरान’ जैसे लोगों और इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में पूछताछ करना बेहद आवश्यक है, ताकि इस पूरी साजिश की हर कड़ी को जोड़ा जा सके।

अवलोकन करें:-

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट
TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट
 

प्रेग्नेंसी की दलील भी नहीं आई काम, कोर्ट ने ठुकराई राहत

निदा खान के वकील ने दलील दी कि वह गर्भवती है और गिरफ्तारी का उसके होने वाले बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में सिर्फ प्रेग्नेंसी के आधार पर कानून में कोई अलग छूट नहीं मिलती। कोर्त ने इस बात को सही माना और कहा कि अग्रिम जमानत जैसी बड़ी राहत केवल बहुत ही खास और मजबूरी वाले हालात में दी जाती है, जो इस केस में कहीं नहीं दिखते। इन्हीं वजहों से जज ने निदा खान की याचिका में कोई दम न पाते हुए उसकी जमानत की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया।

तेलंगाना : हिन्दू विरोधी कांग्रेस सरकार ने बुलडोजर से ढहाया 800 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर

                                                                                                                                साभार: NDTV
तेलंगाना के वारंगल में विकास के नाम पर विनाश का एक खौफनाक मामला सामने आया है। प्रशासन ने एक स्कूल बनाने के लिए खानापुर में काकतीय काल के करीब 800 साल पुराने प्राचीन शिव मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। इस घटना के बाद इतिहासकारों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है, जिसके बाद केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग ने केस दर्ज कर लिया है।

इतिहास पर चला दिया बुलडोजर

यह मंदिर महज पत्थर की दीवारें नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी की अनमोल विरासत थी। यह महान काकतीय राजा गणपतिदेव के शासनकाल का प्रतीक था। मंदिर परिसर में फरवरी 1231 ईस्वी का एक दुर्लभ शिलालेख भी था, जिसमें राजा को ‘महाराजाधिराज’ बताया गया था। प्रशासन की एक लापरवाही ने सदियों पुराने इस गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिला दिया।

प्रशासन की बेतुकी सफाई और शिकायत

विवाद बढ़ता देख जिला प्रशासन अब लीपापोती में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि वहां केवल ‘जर्जर अवशेष’ थे और वह जगह ‘संरक्षित स्मारक’ में दर्ज नहीं थी। हालाँकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि 1965 में ही हेरिटेज विभाग ने इसे डॉक्युमेंट किया था। इस मामले में अधिवक्ता रामाराव ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में शिकायत की है, जिसके बाद अधिकारियों पर ‘तेलंगाना हेरिटेज एक्ट’ की धारा 30 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की माँग की जा रही है।

बढ़ते विरोध के बाद सरकार के बदले सुर

धरोहर पर हुए इस हमले के बाद जब हिंदू संगठनों और पुरातत्व विशेषज्ञों ने मोर्चा खोला, तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। वारंगल कलेक्टर और स्थानीय विधायक ने घटनास्थल का दौरा किया। भारी विरोध को देखते हुए अब सरकार ने आश्वासन दिया है कि उसी स्थान पर प्राचीन पारंपरिक शैली में मंदिर का दोबारा निर्माण कराया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जो ऐतिहासिक शिलालेख और प्राचीन अवशेष नष्ट हो गए, क्या उनकी भरपाई हो पाएगी?