मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग; व्हाट्सएप्प ग्रुप से बड़ा खुलासा, CJP के प्रदर्शन में मौत की प्लानिंग, प्रदर्शनकारियों को JNU से मिले हिंसा के निर्देश


कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई, 2026 को संसद मार्च के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई। इस हिंसा में 6 आईपीएस अधिकारी और 118 पुलिस के जवान घायल हुए। पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई है और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस व्हाट्सएप्प ग्रुप, मोबाइल वीडियो, CCTV, ड्रोन कैमरे और पुलिस बॉडी कैमरे की फुटेज की जांच कर रही है। इस जांच में जो बातें अब तक खुलकर सामने आ रही हैं, वो काफी हैरान और परेशान करने वाली है। कुछ व्हाट्सएप्प ग्रुप में केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए मौत की प्लानिंग की गई थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मारने की बात कही जा रही थी।
जो-जो लोग भी आज के हिंसक आंदोलन में शामिल थे और खूब उपद्रव किए, अब उनकी पिता की सात पीढ़ियाँ याद आ जाएंगी।
जो-जो उछलने गए थे, वहाँ अब तुम उछल लिए। अब तुम्हें एक-एक करके पुलिस और कानून सबक सिखाएगा। अब पूरी उम्र तुम कोर्ट-कचहरी दौड़ोगे। और जो-जो उपद्रवी नेता तुम्हें उकसाए थे, वे तुम्हारा हाल तक नहीं पूछेंगे।
और अब पुलिस ने 70 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। जिन-जिन ने हिंसक उपद्रव किया है, अब सबका घर-परिवार बर्बाद हो जाएगा। पुलिस उपद्रवियों की पहचान भी वीडियो के माध्यम से कर रही है।
मीडिया चैनल बता रहे हैं कि इस उपद्रव में पाकिस्तान कनेक्शन की भी जाँच कर रही है पुलिस।
हम लोग इसीलिए सामान्य वर्ग को समझा रहे थे कि यह छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि उपद्रवियों का आंदोलन है। उपद्रव ये जरूर करेंगे, लेकिन उपद्रव खत्म होते ही पुलिस एक-एक को ढूँढेगी और फिर उसका घर-परिवार तबाह हो जाएगा।
अब पुलिस जिन जिन उपद्रवियों को चिन्हहित करके FIR कर रही है अब आप लोग बताओ इनका मुकदमा पूरी उमर ये और इनका परिवार लड़ेगा या वो वो नेता लड़ेंगे जो इनको उकसाकर उपद्रव करवाये।
और समान्यवर्ग के लोग ये ध्यान देंगे कि यदि कोई समान्यवर्ग का इस उपद्रव में यदि पकड़ा गया या FIR हुआ तो उसकी मदत किसी समान्यवर्ग को नही करना है इनके अकेले ही झेलने दो

चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप में मौत की प्लानिंग
छात्रोंं के नाम पर प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से निर्देश दिए जा रहे थे। उन्हें समझाया जा रहा था कि कैसे प्रदर्शन करना है। सोशल मीडिया में चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप का चैट वायरल हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे। एक चैट में akak नाम के हैंडल ने कहा, “भाई अगर किसी की मौत होती है तो उसमें तो सरकार पर ज्यादा दबाव आएगा।” 

akak के हैंडल से आगे लिखा गया, ” देखो यार जो जान देने तक को तैयार वो ये सुन लो, कम से कम तुम्हारा एहसान तो रहेगा आने वाली पीढ़ियों पर, आने वाले बच्चों पर, वो सुनेंगे की मेरा भाई उस प्रोटेस्ट में मारा गया, उस लड़ाई में मारा गया। याद किए जाओंगे। बहुत अच्छा लग रहा है ये देखकर वो जान तक देने को तैयार है भाई लोग।” इस चैट से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों की कितनी खतरनाक साजिश थी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस के धैर्य ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। 

JNU से संचालित हो रहा था CJP का प्रदर्शन
एक दूसरे व्हाट्सएप्प ग्रुप का नाम JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन है, जिसमें कई आपत्तिजनक पोस्ट किए गए हैं। पुनीत सुलाख के हैंडल से प्रदर्शनकारियों यानी वामपंथी छात्रों यानी कॉमरेड्स को कई निर्देश दिए गए। इसमें जो लिखा गया, आप खुद पढ़ सकते हैं…

मित्रों और कॉमरेड,
पुलिस विरोध प्रदर्शन को रोकने/कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रही है। हमें पता चला है कि पुलिस हमें रोकने के लिए सुबह-सुबह जेएनयू (JNU) के सभी गेट बंद कर सकती है। सभी से अनुरोध है कि यदि आप अगले 2-3 घंटों में कैंपस छोड़ दें और रात 2-3 बजे तक जंतर-मंतर पहुंच जाएं, तो बहुत अच्छा होगा। इसके विकल्प के रूप में, जेएनयूएसयू (JNUSU) और हमारे संगठन का नेतृत्व सुबह 4 बजे से गंगा ढाबा पर मौजूद रहेगा, वहां से हम 4-5 लोगों के छोटे समूहों में बाहर निकल सकते हैं।

सामान्य निर्देश:

जूते और आरामदायक कपड़े पहनें।

फोन को अच्छी तरह चार्ज रखें और यदि संभव हो तो पावर बैंक साथ रखें।

इसके बाद भी समूहों में रहें…

कौन हैं पुनीत सुलाख ?
प्रदर्शनकारियों को निर्देश देने वाले पुनीत सुलाख जेएनयू के बी-टेक फाइनल ईयर के छात्र हैं। ये School of Engineering के ‘पर्सपेक्टिव्स – वाद-विवाद क्लब’ [Perspectives – Debating Club] में उपाध्यक्ष भी रहे हैं।

Briar और Bitchat ऐप डाउनलोड करने और जुड़े रहने का निर्देश
JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन व्हाट्सएप्प ग्रुप के एक अन्य सदस्य अंजलि ने निर्देश दिया, ” विरोध प्रदर्शन (प्रदर्शन स्थल) वाली जगह पहुँचने के बाद शायद आपके डिवाइस (मोबाइल) में नेटवर्क न मिले। पिछली बार भी पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था और इस बार भी वे ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, आप जिस समूह के साथ आए हैं, उसके साथ जुड़े रहना बहुत ज़रूरी है। Briar, bitchat या ऐसी ही कोई अन्य ऐप डाउनलोड कर लें। ये नेटवर्क बंद होने पर भी ब्लूटूथ सिग्नल पर काम करते हैं, ताकि कोई भी आपके कनेक्शन को न देख सके। सुनिश्चित करें कि आपके समूह के सभी लोगों के पास एक ही ऐप इंस्टॉल हो और प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने से पहले ही वे आपस में जुड़ (कनेक्ट हो) चुके हों।”

प्रदर्शनकारियों को मरने के लिए उकसाने की कोशिश
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को गाली देते हुए प्रदर्शनकारियों को भड़काने की कोशिश की गई है। वीडियो में एक नकाबपोश व्यक्ति को कहते सुना जा सकता है, “जब पुलिस लाठीचार्ज करे तो तुम लोग भाग क्यों रहे हो…अरे कायर हो क्या तुम…इन हिजड़े पुलिस वालों की लाठियों से तुम मर जाओंगे क्या ? अरे, मर भी जाओंगे तो देश के लिए प्रोटेस्ट करने के लिए गए हो शहीद हो जाओंगे…मेरे भाइयों पीठ दिखाकर मत भागो तुम…इतिहास तुम्हें कायर बोलेगा कायर…तो फिर तुम्हारे बाल बचे देखेंगे तो कायर बोलेंगे। मेरे पापा मेरे भाई पुलिस की लाठी देखकर पीठ दिखाकर भागे थे।”

पीएम मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी पीएम मोदी को गाली दे रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी तो प्रधानमंत्री मोदी को मारने की प्लानिंग कर रहा है। उसे कहते सुना जा सकता है, “मोदी या तो इस्तीफा दे दें…उसके खाने में जहर का इंतजाम करो और खत्म करो कहानी।
मोदी का इलाज यही है कि यहां भेज दो एकबार…या कोई जुगाड़ करो खाने का…जहर मिलाओ…जो हार्ट अटैक में भी पोस्टमार्टम में पता नहीं चले कि कैसे मर गया।”

इस प्लानिंग का असर किस तरह सड़कों पर दिखाई दिया…प्रदर्शनकारी  किस तरह मरने और मारने पर उतारू थे…

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सड़कों को बनाया युद्ध का मैदान 
सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस की गाड़ी पर पत्थराव करते हुए देखा जा सकता है…वो जिस तरह गाड़ी पर पत्थरों की बारिश कर रहे हैं…उससे पता चलता है कि उन्हें जो निर्देश दिया गया है, उसे वो बखूबी पालन करते हुए दिख रहे हैं।

 

कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पर पत्थरबाजी

बाउंड्री और फुटपाथ में लगी ईंटें तोड़ते प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन से भागते हुए पकड़ा गया विजेता दहिया
जब प्रदर्शनकारी दिल्ली की सड़कों को युद्ध का मैदान बना रखे थे, तब सीजेपी का प्रवक्ता विजेता दहिया प्रदर्शन से गायब था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विजेता दहिया को भागते हुए पकड़ लिया और पूछा, “आप प्रदर्शन में क्यों नहीं गए…मैं जंतर-मंतर पर गया, आप क्यों नहीं गए। वहां सब लाठी खा रहे हैं और आप घूम रहे हों। ये कौन सा सपोर्ट कर रहे हो। बाबा को गाली दे रहे हो…आप कर क्या रहो हो ? आप गाली दे रहो और यहां क्या कर रहे हो।”

अवलोकन करें:-

CJP वालों के तंबू उखाड़ दिए; मौज कर रहे थे, समोसे खा रहे थे, अब पहचान हो रही है और फिर जेल की रोटी तोड़ें
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पकड़े जाने के बाद बोला विजेता दहिया- प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ?
विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें उसे कहते हुए सुना जा सकता है कि प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ? तुमने इसे इलेक्ट किया है, इस पोजिशन के लिए, सरकार अकाउंटेबल ठहराते, तुम्हारी जो नॉनसेंस थिंकिंग है तो उसमें मुझे नहीं फंसना, मुझे कोई पॉलिटिक्स में नहीं आना। तुम्हारे जैसे बेवकूफों को अपिज करूं।

प्रदर्शन में शामिल हुआ ‘हिस्ट्रीशीटर’ हाजी अफजल


हाजी अफजल उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके से संबंधित हैं और पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें ‘हिस्ट्रीशीटर’ के रूप में दर्ज किया गया है। उन पर मकोका (MCOCA) और अन्य आपराधिक मामलों के तहत आरोप लगे हैं। हाल ही में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवकों के साथ उनकी मौजूदगी की खबरों और वीडियो के कारण वे चर्चा में रहे थे।

‘तुम्हारे लिए जहन्नुम बना देंगे…’ ईरान में सत्ता संग्राम तेज, राष्ट्रपति पेजेशकियान को कट्टरपंथी गुटों ने धमकाया


अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। एक ओर अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार आठवें दिन हवाई हमले किए, वहीं ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और एक जवान लापता बताया गया।

दूसरी तरफ ईरान के भीतर भी राजनीतिक संकट गहरा गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अमेरिका से बातचीत करने वाले नेताओं के खिलाफ कट्टरपंथी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी ने सत्ता संघर्ष की अटकलों को और तेज कर दिया है।

जॉर्डन में हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, आठवें दिन भी जारी रही बमबारी

जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक सैनिक अब भी लापता बताया जा रहा है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा किए जा रहे खतरे को कम करना है। अमेरिका ने दावा किया कि इस कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

दो अमेरिकी सैनिकों की मौत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि दोनों जवान देश की सेवा करते हुए बलिदान हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि सैनिकों का बलिदान अमेरिका के संकल्प को और मजबूत करेगा।

ईरान में सरकार के खिलाफ भड़का गुस्सा, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री बने निशाना

बाहरी युद्ध के बीच ईरान के भीतर भी राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के खिलाफ भीड़ ने ‘समझौतावादी मुर्दाबाद’ के नारे लगाए, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पथराव किया गया।

कट्टरपंथी गुटों ने उन्हें ‘गद्दार’ और ‘बिकाऊ’ तक कहा। इन गुटों का आरोप है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम और बातचीत कर सरकार ने इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों और सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों से समझौता किया है। उनका दावा है कि सरकार बदले की कार्रवाई करने के बजाय वॉशिंगटन के साथ समझौते का रास्ता अपना रही है।

‘हम होंगे, ब्लेड होगा और सामने आपका गला’, राष्ट्रपति को खुली धमकी

अली खामेनेई के उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही मौजूदा हालात पर कोई सार्वजनिक बयान दिया है। उनकी इस गैर-मौजूदगी ने सत्ता संघर्ष की अटकलों को और हवा दे दी है।

कट्टरपंथी धड़ों का आरोप है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची नए सर्वोच्च नेता की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर सत्ता अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं।

इसी बीच राजनीतिक विवाद खुली धमकियों तक पहुँच गया। सरकार समर्थक कट्टरपंथी मोहम्मद अली बख्शी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति पेजेशकियान को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सर्वोच्च नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारे हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला होगा। हम तुम्हारे लिए जहन्नुम बना देंगे।”

दूसरी ओर तख्तापलट की आशंका जताने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से हटा दिया गया, जिसे सरकार द्वारा कट्टरपंथी धड़े की बढ़ती सक्रियता पर लगाम लगाने की कोशिश माना जा रहा है।

दो मोर्चों पर घिरा ईरान, बढ़ सकता है पश्चिम एशिया का संकट

युद्धविराम टूटने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने अमेरिका को ‘अविस्मरणीय सबक’ सिखाने की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में ईरान एक साथ दो बड़े संकटों का सामना कर रहा है।

एक तरफ अमेरिका के साथ तेज होता सैन्य संघर्ष है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच टकराव खुलकर सामने आ चुका है। यदि यह आंतरिक संघर्ष और गहराता है, तो इसका असर केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है।

CJP वालों के तंबू उखाड़ दिए; मौज कर रहे थे, समोसे खा रहे थे, अब पहचान हो रही है और फिर जेल की रोटी तोड़ेंगे

सुभाष चन्द्र 

सोनिया गांधी ने 2 दिन पहले कांग्रेस को कहा सोनम वांगचुक और CJP का साथ दो और आज CJP के भेड़ियों ने आतंक मचा दिया। कभी CCA के आंदोलन के समय भी सोनिया गांधी ने कहा था कि ये लड़ाई सड़कों पर लड़नी होगी और 2 दिन बाद दंगे भड़क गए थे। कांग्रेस और विपक्ष ने आज संसद में वह किया जो CJP ने सड़कों पर किया। संसद में उनके सदस्यों की पिटाई नहीं हो सकती थी लेकिन CJP वालों ने जब पुलिस पर पत्थरबाजी की तो पुलिस ने भी तबियत से तुड़ाई कर दी

जो नेता और उनकी पार्टियां उपद्रवियों को उकसा कर भारत को नेपाल या बांग्लादेश बनाने का षड़यंत्र रच रहे थे कि इन बिकाऊ उपद्रवियों को मोहरा बनाकर मोदी सरकार को गिरा देंगे, बहुत बड़ी गलत फहमी में जी रहे हैं, जिस दिन देशप्रेमी जनता सड़क इन उपद्रवियों की क्या औकात और इनके सफेदपोशी गुंडे आका घरों में भी नहीं छुप पाएंगे। जो उपद्रव किया गया है वह किसी छात्र या बेरोजगार का काम नहीं ये गुंडों और मवालियों का है।

     

लेखक 
चर्चित YouTuber 
एक पत्रकार किसी चैनल पर कह रहा था कि आप पुलिस वालों के घायल होने की खबर दे रहे हो लेकिन प्रदर्शनकारी कितने घायल हुए ये नहीं बता रहे। उसकी ही बात से इसका अनुमान लगाया जा सकता है कि CJP वाले ठोके गए हैं। CJP गुंडों की पत्थरबाजी में 50 पुलिस के जवान घायल हुए जिनमें 10 IPS रैंक के अधिकारी है। ऐसी रिपोर्ट है 70 गुंडों को गिरफ्तार किया गया है

CJP वाले और उनके लिए जुड़ने वाले जंतर मंतर पर बैठ कर गंदगी फैला रहे थे। समोसे खाते थे और पार्टी करते थे। उधर वांगचुक कथित तौर पर अनशन पर था। आज CJP के हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जंतर मंतर से उनके सारे तंबू उखाड़ फेंके

जुलाई 20 की सुबह संजय सिंह, आतिशी मर्लेना और सिसोदिया बेरिकेड लांघ कर CJP वालो को आज दंगा करने के लिए खाद पानी दे आए थे। यानी कुल मिलाकर CJP के दंगे के पीछे “आप” और कांग्रेस एवं वामपंथियों का हाथ था क्योंकि JNU के वामपंथी संगठन बढ़चढ़ कर जंतर मंतर में नारेबाजी कर रहे थे

ये आंदोलन NEET और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए था ही नहीं। अगर होता तो कुणाल कामरा सीता माता और भगवान राम के लिए अपशब्द नहीं बोलता। दिपके नहीं कहता कि केवल अल्लाह है - “मेरा लिंग मेरी मर्जी” के नारे न लगाए जाते। धारा 370 बहाली के नारे न लगाए जाते। और NEET परीक्षा देने वाले लोग नज़र आते पर वहां कोई नहीं था। एक महिला के बेटे को NEET में सफलता नहीं मिली लेकिन जब उसने देखा अभिजीत दीपक 5 स्टार होटल में मौज करने जाता है तो उसने उसके मुंह पर कालिख पोत दी।

 

पुलिस कार्रवाई अब जोरों पर है और गाड़ियों को नुक़सान पहुंचाने वाले और पत्थरबाजी करने वाले सब धरे जाएंगे। जो नारा लगा रहे थे “संसद को उखाड़ फेंकेंगे” उन्हें हर हाल में गिरफ्तार कर UAPA में बंद करना चाहिए क्योंकि ये एक आतंकवादी नारा था। वैसे तो हर उस व्यक्ति को पकड़ना चाहिए जो भी जंतर मंतर पर गाली गलोच कर रहे थे खासकर उस आदमी को जो कह रहा था कि “मैं मोदी अमित शाह की माँ $$द दूंगा। उसका वीडियो वायरल हुआ है

जो नेता CJP के समर्थन के लिए जंतर मंतर गए थे, वो प्रदर्शन से क्यों गायब थे? प्रकाश राज, बृंदा करात, स्वरा भास्कर जैसे लोग कहां थे जो भाड़े के गुंडों को आगे कर खुद गायब हो गए?

सबसे बड़ी गिरफ़्तारी अभिजीत दिपके और सौरभ दास की होनी चाहिए और सोनम वांगचुक को स्वस्थ होने के बाद गिरफ्तार कर लेना चाहिए क्योंकि ये लोग ही तो मास्टर माइंड थे सारे उपद्रव के लिए। आज के दंगे की खबर क्या वांगचुक को नहीं मिली होगी लेकिन उसने एक बयान नहीं दिया है

कुछ दिन पहले योगेंद्र यादव ने कहा था भारत को भी बांग्लादेश और नेपाल बना देना चाहिए और आज वो दंगे को ऐतिहासिक दिन बता रहा था। CJP के गुंडों को भड़काने में उसका प्रमुख हाथ है और उसे भी देशद्रोह के आरोप में लपेटना चाहिए। 

लोकतंत्र की दुहाई देने वाले 4 दिन पहले मनरेगा मजदूरों पर पंजाब पुलिस के लाठीचार्ज को भूल गए। आप सरकार उन्हें प्रदर्शन का भी अधिकार नहीं देना चाहती और यहां दिल्ली में CJP को जंतर मंतर पर बैठने की अनुमति दी गई लेकिन उन्होंने दंगा भड़का दिया। ये लोकतंत्र ठीक नहीं लगा उन्हें

न सरकार ने ‘CJP’ से साधा कोई संपर्क, न तय हुई कोई मुलाकात: साख बचाने के लिए झूठ बोल रहा सौरव दास; संसद तक पहुँची ‘कॉकरोचों’ की भीड़, पुलिस पर भी CJP समर्थकों ने किया हमला: देखें Videos

20 जुलाई को जंतर मंतर से लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट तक INDI गठबंधन के सहयोग से जो उपद्रव मचा उसे विपक्ष खासतौर से आम आदमी पार्टी अपनी जीत मान रहा है। जबकि उसने इस उपद्रव से बांग्लादेश और नेपाल में मची खुलेआम हुई गुंडागर्दी को अंजाम देने के मंसूबों को जाहिर कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी दे मारी है। अंग्रेजी दैनिक 'द हिन्दू' भी आग में घी डालने से पीछे नहीं रहा। विपक्ष और 'द हिन्दू' ने यह भी साबित कर दिया कि भारत विरोधी ताकतों को हवा देकर भारत में उपद्रवियों की हर संभव मदद करने में पीछे नहीं रहेंगे। अभी तक यह सच्चाई भी सामने नहीं कि आखिर इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' का संरक्षण कौन है?  

जिस तरह कांग्रेस की स्थापना उस विदेशी अंग्रेज़ ने की थी उसी तरह इस उपद्रवी पार्टी की स्थापना भी एक विदेशी ने ही की है। गौरतलब बात यह है कि जब विदेशी अंग्रेज़ द्वारा कांग्रेस की स्थापना की गयी थी ब्रिटिश सरकार ने उसे देश विरोधी नहीं कहा क्योकि कांग्रेस का गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आज़ाद और भगतसिंह पार्टी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी जा रही थी उससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया था। ठीक उसी तरह विकासशील भारत में अड़चने डालने के लिए इस उपद्रवी पार्टी का गठन किया गया है। देखना यह है कि क्या यह पार्टी अपने साथ विपक्ष को भी लेकर डूबेगी? यह भविष्य के गर्भ में छिपा है।

          

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जुटे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थक मार्च करते हुए सोमवार (20 जुलाई) को संसद तक पहुँच गए। इस दौरान कॉकरोचों ने न केवल पार्लिएमेंट में घुसने की कोशिश की, बल्कि बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया और पुलिस से भिड़ने की भी कोशिश की।

स्थिति बिगड़ते देख संसद भवन की सुरक्षा अत्यंत कड़ी कर दी गई है और सभी मुख्य प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया। उपद्रवी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की पूर्व नियोजित रणनीति संसद परिसर के भीतर प्रवेश करने की थी। प्रदर्शन में शामिल सीजेपी समर्थक बयान दे रहे थे कि एकजुट होकर केंद्र की मोदी सरकार को गिरा दी जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान समर्थकों के हाथों में भीम आर्मी के झंडे देखे गए। लोगों को ‘जय भीम’ के नारे लगाते हुए देखा गया

घटना के सामने आए वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारी पुलिस बल पर पथराव करते साफ नजर आ रहे हैं। इस दौरान उपद्रवियों को खुलेआम यह कहते सुना गया, “पत्थरबाजी तो होगी ही।”

कॉकरोच जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन से पहले दावा किया था कि वह एक पीसफुल प्रोटेस्ट करेंगे। हालाँकि 20 जुलाई को दिखी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि मंशा कुछ अलग है। इस प्रदर्शन में पत्रकारों से लेकर पुलिस पर हमला हुआ। तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर आ चुकी हैं। इस दौरान सुनियोजित ढंग से भीम आर्मी के एजेंडे को बढ़ाया गया।

न सरकार ने ‘CJP’ से साधा कोई संपर्क, न तय हुई कोई मुलाकात: साख बचाने के लिए झूठ बोल रहा सौरव दास, सरकारी सूत्रों ने मीडिया दावों को नकारा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने 20 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ बातचीत का जो दावा कर सुर्खियाँ बटोरीं थी वो असल में फर्जी निकली हैं। सौरव दास ने X पर पोस्ट करके कहा था कि मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए संपर्क किया है और वह और आशुतोष रंका CJP की ओर से केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा से मिलने जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सुबह ही उनसे बातचीत के लिए संपर्क किया था, युवाओं का बड़ा जमावड़ा उनके साथ है और पार्टी की माँगें पूरी तरह स्पष्ट हैं।

इस खबर को ‘द हिंदू’ की पत्रकार विजइता सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर प्रमुखता से आगे बढ़ाया।

उन्होंने अपने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा केंद्र सरकार की ओर से CJP टीम से बातचीत कर रहे थे। साथ ही ये भी कहा कि CJP सदस्यों को पहले जिला मजिस्ट्रेट, फिर केंद्र सरकार के एक सचिव और उसके बाद राज्य मंत्री स्तर के अधिकारियों के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था। मगर, CJP सदस्यों ने इन सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया क्योंकि उनकी माँग थी कि उनकी सीधी बातचीत केवल प्रधानमंत्री या किसी कैबिनेट मंत्री के साथ ही हो, और उन्होंने इसके लिए डीसीपी को मंत्रियों के नामों की एक सूची भी सौंपी थी।

हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम में तब नया मोड़ आया जब यह स्पष्ट हुआ कि सौरव दास और उनका समर्थन करने वाले पत्रकारों के ये दावे कथित रूप से असत्य थे। ऑपइंडिया को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सौरव दास द्वारा किए गए सभी दावे पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं।

सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की ओर से CJP या प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए ऐसा कोई संपर्क नहीं साधा गया था और न ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सौरव दास के बीच किसी भी प्रकार की कोई बैठक या मुलाकात तय थी।

गौरतलब हो कि पूरा सच सामने आने के बाद अब ये दावा हो रहा है कि प्रदर्शन की विफलता को देखते हुए जीत का झूठा दावा किया गया और अपनी साख बचाने के मकसद से यह अफवाह फैलाई गई थी।

नहीं चाहिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, अनशन भी खत्म कर देंगे सोनम वांगचुक: CJP के संसद मार्च से पहले सुरक्षा सख्त-कई मेट्रो स्टेशन बंद

                   भूख हड़ताल खत्म करने के लिए क्या है सोनम वांगचुक की माँगे (फोटो साभार: आजतक)
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक अब किसी तरह अपनी गर्दन बचाने में लग गए हैं। पहले जहाँ वह कह रहे थे कि वह तभी अनशन खत्म करेंगे जब इस्तीफा मिलेगा वहीं अब 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च से एक दिन पहले पहले खबर आई कि उन्होंने सफदरजंग अस्पताल से हस्तलिखित संदेश जारी कर अपनी नई माँगों के बारे में बताया है।

अपने संदेश में उन्होंने बताया कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर देंगे लेकिन इसके लिए उनकी तीन शर्तें हैं।

सोनम वांगचुक की तीन शर्तें

अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि उनके समर्थक लगातार यह जानना चाह रहे हैं कि वह अपना अनशन कब समाप्त करेंगे। उन्होंने पहले बिंदु में लिखा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल के समय में सामने आई खामियों, विशेष रूप से पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

उन्होंने दूसरी शर्त में कहा कि यदि वह और उनके आंदोलन का नेतृत्व संसद तक पहुँचता है और वहाँ विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यह भरोसा देते हैं कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया जाएगा, तो भी वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

वांगचुक ने तीसरी शर्त में कहा कि यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति या अन्य परिस्थितियाँ उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देतीं, तो विभिन्न दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुँचकर उन्हें यह आश्वासन दें कि उनकी मांगों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया जाएगा। ऐसी स्थिति में भी वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

अपने संदेश के अंत में वांगचुक ने लिखा कि यह पत्र उन्होंने 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल से लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें ‘अवैध हिरासत’ में रखा गया है और उनकी आवाजाही, बोलने तथा संवाद करने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है।

दिल्ली पुलिस ने नहीं दी संसद चलो मार्च की अनुमति

20 जुलाई को सीजेपी और उनके समर्थकों का 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च करने का प्लान है। लेकिन, नई दिल्ली पुलिस ने यह साफ किया है कि उनकी ओर से ऐसे किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में डीएमआरसी ने भी सुरक्षा लिहाज से जनपत, राजीव चौक, पटेक चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ जैसे मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया है।

पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली में BNS की धारा 163 लागू की है जिसके तहत बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी और न ही 5 लोगों के एक साथ इकट्ठा होने को कहा जाएगा।

20 जुलाई से संसद सत्र शुरू होना है, इसलिए जन सुरक्षा, संरक्षित व्यक्तियों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस ने कहा है कि इन निषेधाज्ञाओं का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर धारा 223 बीएनएसएस और कानून के अन्य लागू प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

जब सोनम वांगचुक को उठाकर ले गई दिल्ली पुलिस, तब ‘समलैंगिक’ प्रवक्ता के घर थे अभिजीत दिपके: अनीश गावंडे, शरद पवार की पार्टी से क्या है कनेक्शन?

  अभिजीत दिपके और NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले के साथ गवांडे (फोटो साभार: Instagram/@anishgawande)
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को हटाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना स्थल से हटाया था। वह करीब 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। गावंडे ने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की।

गावंडे ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक को हटाना दरअसल उनकी ‘गिरफ्तारी’ थी। उनका आरोप था कि पुलिस ने बिना कोई कारण बताए और बिना किसी लिखित आदेश के यह कार्रवाई की। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था।

इसके बाद गावंडे ने यह भी दावा किया कि पुलिस की यह कार्रवाई वांगचुक की सेहत की चिंता की वजह से नहीं की गई बल्कि इसका मकसद चल रहे प्रदर्शन को बाधित करना था।

अनीश गावंडे को किसी राजनीतिक दल का पहला खुले तौर पर समलैंगिक (ओपनली गे) प्रवक्ता बनाए जाने के कारण भी पहचान मिली थी। उन्होंने खुलकर CJP के प्रदर्शन का समर्थन किया है और उससे जुड़े रहे हैं। जब पुलिस सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटा रही थी, उसी दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके कपड़े बदलने के लिए गावंडे के घर गए हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दिपके को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था।   

गावंडे ने आरोप लगाया कि जब अभिजीत दिपके उनके घर की सीढ़ियों पर थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस की पिटाई के चलते दिपके जोर-जोर से चिल्ला रहे थे।

कौन है अनीश गावंडे?

मीडिया रिपोर्ट्स में मौजूद जानकारी के अनुसार, अनीश गावंडे स्वतंत्रता सेनानी, वकील और प्रसिद्ध शिक्षाविद टी. के. टोपे के परिवार से आते हैं। उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उन्होंने वर्ली के ग्रीनलॉन्स स्कूल और फोर्ट स्थित कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक साहित्य (Comparative Literature) की पढ़ाई की। बाद में रोड्स स्कॉलर (Rhodes Scholar) के रूप में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बौद्धिक इतिहास (Intellectual History) और लोक नीति (Public Policy) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले अनीश गावंडे LGBTQ+ अधिकारों के कार्यकर्ता और लेखक रहे हैं। उन्होंने पिंक लिस्ट इंडिया की भी स्थापना की जो LGBTQ+ अधिकारों का समर्थन करने वाले नेताओं का एक डेटाबेस है।

अपनी समलैंगिक (गे) पहचान सार्वजनिक करने के बाद गावंडे ने फ्रैंकोफोन पश्चिम अफ्रीका और सेनेगल की भाषाई राजनीति पर अध्ययन किया। उनका इरादा अकादमिक क्षेत्र में प्रोफेसर बनने का था। हालाँकि, 2018 में उन्हें भारत में एक चुनावी अभियान से जुड़ने का अवसर मिला, जिसके बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया। अगस्त 2024 में उन्हें एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया।

गावंडे क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) के समर्थक हैं। उनका मानना है कि जाति आधारित आरक्षण के साथ-साथ खेल कोटा, महिलाओं और दिव्यांगों जैसी श्रेणियों के लिए भी क्षैतिज आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि देश में भेदभाव की समस्या को दूर करने के लिए एक व्यापक भेदभाव-विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए।

हाल ही में अनीश गावंडे ने खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फिल्म ‘सतलुज’ का समर्थन किया था। यह फिल्म रिलीज के तुरंत बाद Zee5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी। 

फिल्म के समर्थन में इंस्टाग्राम पर लिखी एक पोस्ट में गावंडे ने कहा था, “दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ जिसमें उन्होंने मानवाधिकार जांचकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है, भारतीय स्क्रीन पर केवल 48 घंटे ही रह सकी और फिर उसे ‘अगली सूचना तक’ चुपचाप हटा दिया गया। जिन लोगों को गायब कर दिया गया, उन पर बनी एक फिल्म भी गायब कर दी गई।”