गालीबाजों के बॉस अरविंद केजरीवाल का दोगलापन : जंतर मंतर गालीबाज लड़की को समर्थन, पंजाब की बेटियों पर लाठियां

पंजाब में छात्राएं फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों को लेकर सड़क पर हैं। भगवंत मान सरकार की अनदेखी की वजह से उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राएं पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफा, सीबीआई जांच कराने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रहे हैं। लेकिन भगवंत मान सरकार और पंजाब के सुपर सीएम अरविंद केजरीवाल को उनकी परवाह नहीं है। अरविंद केजरीवाल को उन गालीबाजों और अराजक तत्वों की फिक्र है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देते हैं, जो समाज और देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं। यहां तक कि अरविंद केजरीवाल गालीबाजों का बॉस बनकर उन्हें राजनीतिक और कानूनी संरक्षण दे रहे हैं।

पंजाब की बेटियां सड़क पर, केजरीवाल गालीबाजों के संग
गालीबाजों के समर्थन में उतरने और झूठ बोलने की वजह से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि आज पंजाब की लड़कियों को केजरीवाल की जरूरत है, लेकिन केजरीवाल पंजाब छोड़कर भाग खड़े हुए हैं। केजरीवाल के पास गालीबाज लड़कियों के समर्थन में वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का समय है, लेकिन आज पंजाब की बेटियां सड़क पर है, उनसे बात करने के लिए केजरीवाल के पास समय नहीं है। लोगों का कहना है कि गालीबाज लड़कियों को सुरक्षा की गारंटी देने वाले अरविंद केजरीवाल पंजाब के लड़कियों से नाइंसाफी कर रहे हैं।  केजरीवाल को पंजाब की लड़कियां और उनकी मांगें दिखाई नहीं दे रही हैं।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे पर अड़ी पंजाब की लड़कियां
पंजाब की लड़कियां कह रही हैं कि हम लोग पंजाब सरकार से जवाब चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान जंतर मंतर पर कहा था कि अगर पंजाब में कोई भी पेपर लीक होता है तो शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफ दिलवा देंगे। दो दिन पहले फार्मेसी का पेपर लीक हुआ तो हम चाहते हैं कि हरजोत सिंह बैंस इस्तीफा दें। अब लड़कियों की मांग है कि पंजाब सरकार को पेपर लीक की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और हरजोत सिंह बैंस को इस्तीफा देना चाहिए।

छात्राओं के समर्थन में ABVP का चंडीगढ़ में प्रदर्शन
सड़क पर प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं के समर्थन में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी आ गई है। उसने 2 अगस्त को चंडीगढ़ में पंजाब भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया और पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की।

पंजाब की छात्राओं के समर्थन में उतरी बीजेपी 
इससे पहले 30 जुलाई को पंजाब में फार्मेसी परीक्षा सहित कई परीक्षाओं में अनियमितता व पेपर लीक का आरोप लगाते हुए दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के कार्यालय के पास प्रदर्शन किया। बैरिकेड तोड़कर कार्यालय तक पहुंचने का प्रयास कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर मंदिर मार्ग थाने ले गई। लगभग एक घंटे बाद चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया गया।

केजरीवाल नहीं ले रहे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “यह प्रदर्शन पेपर लीक को लेकर है। जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, मैंने भी हरजोत सिंह बैंस से कहा है कि उन्होंने इसमें शामिल लोगों के साथ मंच साझा किया था और वहां जवाबदेही की मांग की थी। क्या आपका ज़मीर आपको यहाँ भी जिम्मेदारी लेने के लिए नहीं कहता…”

गालीबाज रुचिका को केजरीवाल का समर्थन
दरअसल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान भद्दी गालियां देने वाली लड़की रुचिका सिंह का समर्थन किया है। केजरीवाल ने इसके साथ ही यह भी कहा है कि रुचिका को अगर किसी भी तरह की जरूरत महसूस हो तो वे उन्हें बता सकती हैं। रुचिका को डरा-धमका कर माफी मंगवाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक रुचिका सिंह को झुकाया तो दस रुचिका सिंह पैदा हो गईं।

केजरीवाल ने युवाओं में डर पैदा करने का लगाया आरोप 
केजरीवाल ने 2 अगस्त, 2026 को अपने ‘एक्स’ हैंडल पर रुचिका को समर्थन दिया। केजरीवाल ने लिखा ‘मोदी जी ने जो रुचिका सिंह के साथ किया, वो एक कायराना हरकत है। आप रुचिका के साथ ऐसा करके युवाओं में डर पैदा करना चाहते हो। पर युवाओं के मन से अब आपका और आपकी पुलिस का डर निकल चुका है। आप एक रुचिका को डराते हो, सोशल मीडिया पर दस और रुचिका आपके खिलाफ वीडियो डाल रही हैं। रुचिका, मैं आपके साथ हूं। कभी किसी भी तरह की जरूरत हो, आप हमें बताना।’  

केजरीवाल ने अच्छे वकील देने की पेशकश की
केजरीवाल ने कहा ‘मोदी जी कह रहे हैं कि मैंने सबको माफ किया। रुचिका सिंह बेचारी 15 साल की बच्ची है। उसको पुलिस के जरिए ट्रोल आर्मी के जरिए धमकियां दी गईं डराने की कोशिश कर रहे हैं। तो मोदी जी को मैं कहना चाहता हूं कि जब आपके नेता, ट्रोल आर्मी और कार्यकर्ता गालियां देते हैं तब आपको कुछ नहीं होता। दूसरों को गालियां देते हैं तब कुछ नहीं होता। एक बहुत बड़ी बात ये हुई है कि इस आंदोलन ने लोगों के मन में मोदी जी के लिए डर था वो डर खत्म कर दिया। अब मोदी जी पूरी ताकत लगा कर लोगों के मन में वो डर दोबारा पैदा करना चाहते हैं। लेकिन वो डर हो नहीं रहा। बच्चों के मन से डर खत्म हो गया है मोदी जी का।’
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा’ मैं उस बच्ची (रुचिका) को यह कहना चाहता हूं कि पूरा देश आपके साथ है बच्चे। मैं पर्सनली आपको सपोर्ट करता हूं और अगर आपको कभी भी किसी भी चीज की जरूरत हो अच्छे वकील की जरूरत और कोई आपको तंग करे हम आपको हमेशा सपोर्ट करेंगे।’

रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी माफी
जिस रुचिका सिंह को लेकर अरविंद केजरीवाल बात कर रहे हैं, वह सोशल मीडिया में खुद वीडियो जारी कर माफी मांग रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर गालीबाज प्रदर्शनकारियों के मामले में किसी प्रकार का एफआईआर दर्ज न करने की बात कही। पिछले दिनों इंस्टाग्राम रील के जरिए उन्होंने इस प्रकार के मामलों में आरोपी छात्र-युवाओं को माफ करने की बात कही। इसके बाद रुचिका सिंह का बयान सामने आया। उसने प्रधानमंत्री मोदी से दिल से माफी मांगने की बात कही। रुचिका ने कहा कि मैंने जो किया वो माफी लायक नहीं था। मैंने बहुत गांदी चीजें बोली हैं। मेरी ये पहली और आखिरी गलती है, दोबारा ऐसा नहीं करूंगी। मैं पूरे देश से माफी मांगता हूं। इतना शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरे भी नहीं उठा पा रही हूं।

केजरीवाल की खुली पोल, रुचिका ने कहा- मेरे पर कोई दबाव नहीं था
छात्रा रुचिका सिंह ने मीडिया से बातचीत के क्रम में सोशल मीडिया पर डाले गए माफी के वीडियो पर बयान दिया। उसने कहा कि मैंने दिल से माफी मांगी है। रुचिका से पूछा गया कि क्या आप पर दबाव था कि आप माफी मांगें। आप पर कोई प्रेसर बना रहा था या आपने दिल से माफी मांगी है। इस पर रुचिका ने कहा कि मैंने दिल से माफी मांगी है। मैंने जो वर्ड्स यूज किए थे, एक्चुअली वे अच्छे नहीं थे। मुझे उस चीज का बहुत गिल्ट है। मैंने तभी माफी मांगी, क्योंकि वे वर्ड्स मैं खुद नहीं सुन पा रही थी। फ्लो-फ्लो मैंने इतना कुछ बोल दिया, मुझे उस टाइम पर यह रियलाइज भी नहीं हुआ। मैंने जब वह वीडियो देखा तो मुझे लगा कि यह अच्छा नहीं हुआ।

रुचिका की मां ने कहा- बिना डर के, मैं दिल से बोल रही हूं
प्रधानमंत्री मोदी के माफ करने के फैसले पर रुचिका की मां ने आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बेटी को ‘जीवनदान’ दिया है। प्रधानमंत्री ने बदले की कार्रवाई के बजाय माफी का रास्ता चुना। मीडिया से बातचीत के दौरान रुचिका की मां ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश का अखंड विश्वास हैं। चाहे कोई यह बोले कि डर कर बोल रही है। उन्हें मैं आत्मा नहीं दिखा सकती। मैं दिल से बोल रही हूं, भगवान राम को साक्षी मानकर बोल रही हूं कि मुझे यकीन नहीं था, मेरी बेटी इस तरीके के शब्दों का प्रयोग करेगी। मां ने आगे कहा कि मुझे नहीं लगता था, यह इतने गंदे शब्द यूज भी कर सकती है। इसकी शुरुआत इंस्टाग्राम से हुई।

प्रदर्शन में ऐसे बच्चों का सिर्फ फायदा उठाते हैं- रुचिका की मां
रुचिका की मां ने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं क्या बोलूं। ये बेटी नहीं, बल्कि देश के बहुत सारे बच्चे इस समय इस उम्र के जितने भी बच्चे है दस से बीस वाले सारे ही इस स्थिति में आ चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी से मेरा विनम्र निवेदन है कि कृपया इंस्टाग्राम,फेसबुक नए बच्चों के लिए दस से बीस साल के बच्चों के लिए रोक दिया जाए। इनको सिर्फ पढ़ने दिया जाए। ऐसे प्रदर्शन में छोटे बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाए। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका जाए। इनका सिर्फ फायदा उठाया जाता है।


झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार क्यों हैं खामोश? कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब गला फाड़ रहे थे

रवीश कुमार… यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। खुद को निष्पक्ष पत्रकार कहने वाले रवीश कुमार असल में प्रोपोगेंडा की दुकान चलाने वाले पत्रकार हैं। ये अपनी छवि चमकाने और मोटी कमाई करने के लिए सिर्फ वही मुद्दे उठाते हैं जिससे इनका एजेंडा पूरा हो सके। जब बात इनके आकाओं को खुश करने की हो, तो यह अपनी कलम और माइक का पूरा इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जहाँ इनके मालिकों को गुस्सा आने का डर होता है, वहाँ इनकी बोलती बंद हो जाती है। दिल्ली में हुए हालिया कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और झारखंड के पेपर लीक मामले पर इनकी चुप्पी इस दोमुँही पत्रकारिता का सबसे बड़ा सबूत है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब बहाए थे आँसू

 दिल्ली में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान रवीश कुमार का असली रंग पूरी तरह से सामने आ गया था। इस प्रदर्शन को हवा देने के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का जमकर इस्तेमाल किया। उनके यूट्यूब चैनल पर सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़े 15 से ज्यादा वीडियो भरे पड़े हैं। इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम पर अलग से Reels शेयर की गईं और X पर लगातार भ्रामक पोस्ट किए गए।

इन वीडियोज के जरिए आम जनता को भड़काने की पूरी कोशिश की गई। प्रधानमंत्री को निशाना बनाया गया और विरोध प्रदर्शन के नाम पर उत्पात मचाने वाले दंगाइयों का खुला समर्थन किया गया। हद तो तब हो गई जब दिल्ली पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले उपद्रवियों को रवीश कुमार ने बेचारा और लाचार साबित करते हुए बचाने की पूरी कोशिश की। सच्चाई से कोसो दूर रहकर उन्होंने इस पूरे ड्रामे को ऐसे दिखाया जैसे वे कोई बहुत बड़े क्रांतिकारी हों। हाथों में पत्थर-लाठी लिए और मुँह में भरी गाली-गलौज के साथ उत्पात मचाने वालों को ये छात्र कहते नजर आए थे।

इसके अलावा, रवीश कुमार ने सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। संसद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और जवानों पर पथराव करने वाले, मॉब लिंचिंग करने वाले, सड़क पर घेरकर मारपीट करने वाले और तो और हथियार लहराकर धमकी देने वाले उपद्रवियों को प्रोपेगेंडाई रवीश कुमार छात्र कहते रहे। रवीश कुमार ने एक X पर पोस्ट, Video या अपनी Reel में दिल्ली पुलिस का कहीं बचाव या उनके काम की सराहना नहीं की थी। उल्टा देश की सुरक्षा करने वालों को ही अपराधी कहकर लोगों को घुमराह करते रहे।

झारखंड पेपर लीक पर अचानक क्यों सूंघ गया साँप?

रवीश कुमार का एक नजरिया यहाँ भी देख लेते हैं। जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन खत्म हुआ, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, दिल्ली का माहौल जमकर खराब किया, उसके बाद इन भाईसाहब को साँप सूंघ गया। और अब देश में युवाओं के भविष्य से जुड़ा झारखंड पेपर लीक का गंभीर मुद्दा सामने आया, रवीश कुमार की सारी पत्रकारिता हवा हो गई। इनके किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झारखंड से जुड़ा एक भी शब्द लिखा नहीं मिलेगा।

रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल को खंगालकर देखा। उनके पिछले कुछ दिनों के वीडियोज की लिस्ट देखी। पिछले 8 दिनों में उनके चैनल पर अपलोड किए गए आखिरी 9 वीडियोज के टॉपिक आपको इन मुद्दों पर मिलेंगे, जिनमें उनकी पत्रकारिता चमकेगी। इसमें प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, संसद से क्यों गायब रहे अमित शाह?, क्यों डूब रहा असम?, अमित शाह इस्तीफा दें- राहुल गाँधी, यही हैं हमारे नए शिक्षा मंत्री, संसद में पेपर लीक पर बहस, पुलिस हिंसा पर नई रिपोर्ट, जेनरेशन गटर!? यह क्या कंगना?, झुक गई बिहार सरकार, जेन जी होंगे रिहा और भगवा भरोसे बीजेपी…

इन सभी वीडियोज में आपको सरकार को घेरने वाले तमाम मसाले मिल जाएँगे, लेकिन झारखंड के छात्रों के दर्द पर एक भी वीडियो नहीं मिलेगा। बता दें कि फिल्हाल रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल पर 14.8 मिलियन सब्सक्राइबर है और कुल वीडियो 1.6K डाली गई है। बात करें इंस्टाग्राम की तो रवीश कुमार के इंस्टाग्राम पर फॉलोवर्स 4.9 मिलियन है और कुल पोस्ट 2900 से ज्यादा है। इसके अलावा, रवीश कुमार के X हैंडल (पहले ट्विटर) पर फॉलोवर्स की संख्या 4.2 मिलियन है और 49.2K पोस्ट है।

फायदे की पत्रकारिता और आकाओं को खुश करने की मजबूरी

सवाल यह उठता है कि आखिर झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार ने पूरी तरह चुप्पी क्यों साध रखी है? इसका सीधा सा जवाब है कि इस मुद्दे से उन्हें या उनके आकाओं को कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला है। अगर वे इस पर बोलेंगे, तो शायद उनके अपने लोग ही नाराज हो जाएँगे।

रवीश कुमार केवल उन्हीं मुद्दों पर अपना गला फाड़ते है जहाँ उन्हें लगता है कि इससे बीजेपी को बदनाम किया जा सकता है। जहाँ हिंसा करने वालों या हंगामा मचाने वालों को हीरो बनाया जा सकता है, वहाँ ये सबसे आगे रहते हैं। लेकिन जहाँ सचमुच देश के युवाओं का नुकसान हो रहा हो, वहाँ ये अपनी आँखें मूँद लेते हैं।

इस पूरी स्थिति से यह साफ हो जाता है कि रवीश कुमार जैसे लोग पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ अपना दुकान चला रहे हैं। दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, दंगाइयों के सिर पर हाथ रखना और पुलिस का अपमान करना इनके एजेंडे का हिस्सा था। लेकिन झारखंड के युवाओं के भविष्य की जब बात आई, तो इनका मौन इनकी असलियत बयाँ कर रहा है। जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है और ऐसे चेहरों के दोगलेपन को अच्छी तरह पहचानती है।

‘अभिजीत दिपके-सौरव दास पर POCSO लगाकर हो जीरो FIR’ : बंगाल की महिला वकील ने क्राइम ब्रांच में शिकायत देकर की माँग; नाबालिग बच्चियों को आंदोलन में क्यों शामिल होने दिया?

                            दिपके- दास पर जीरो एफआईआर दर्ज करने की माँग (फोटो साभार-X@abp)
NEET पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर हुए सीजेपी के विरोध- प्रदर्शन में बच्चों के शामिल होने पर विवाद शुरू हो गया है। वकील रिंकी चटर्जी ने सौरव दास, अभिजीत दिपके और CJP के विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ POCSO एक्ट की धाराओं के तहत जीरो FIR दर्ज करने की बंगाल के सिलीगुड़ी क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि प्रदर्शन में 12 साल की बच्ची को शामिल क्यों किया गया था? अगर हिंसक हुए आंदोलन में बच्ची या बच्चियों की मौत हो गयी होती कौन जिम्मेदार होता? 

वैसे ऐसी ही FIR हर उस प्रदर्शन/पत्थरबाजों पर भी हो जहाँ छोटे बच्चों और महिलाओं को ढाल बनाकर आगे कर दिया जाता है ताकि उनकी मौत होने पर सियासती रोटियां और लाशों पर बैठ मालपुए खाए जा सके।

  

एडवोकेट रिंकी चटर्जी सिंह के मुताबिक, “विरोध प्रदर्शन में बच्चों को शामिल करने के लिए आयोजकों के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 13, 14, और 15 और BNS की धारा 153 के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।”

वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन हो रहा था। इस दौरान लाठीचार्ज हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक लाइव वीडियो पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि उन्होंने युवाओं को उनकी भद्दी गालियों के लिए माफ कर दिया है और उनके भविष्य को देखते हुए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वकील के मुताबिक, CJP के ऑर्गनाइजर अभिजीत दिपके और सौरव दास ने बाद में 12 साल की लड़कियों पर पुलिस के लाठीचार्ज और उनके साथ दुर्व्यवहार को लेकर पीएम मोदी से माफी की माँग की और इसको लेकर वीडियो पोस्ट किया।

इसको लेकर वकील रिंकी चटर्जी ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी छोटी बच्चियों को विरोध प्रदर्शन में कौन लेकर आया और जिस उम्र में सुरक्षा देने की जरूरत होती है, उस उम्र में उसे विरोध प्रदर्शन में शामिल कैसे किया गया। उन्होंने इसके लिए आयोजकों पर पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की माँग की।

उन्होंने सवाल किया कि विरोध प्रदर्शन को कौन फंड कर रहा है, और पैसा कहाँ से आ रहा है? यह बिल्कुल ‘डीप स्टेट’ का काम है। उनका कहना है कि इसमें कुछ दलाल और देशद्रोही शामिल हैं। हमारे अपने देश के लोग जो इसका भला नहीं चाहते। वे सभी मोदी सरकार को गिराने की कोशिश में एक साथ आ गए हैं।

दरअसल जंतर मंतर के प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों के शामिल होने पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि पुलिस के लाठीचार्ज में इनमें से कई बच्चे घायल हुए हैं।

शहजाद पूनावाला क्यों सटक गए?

सुभाष चन्द्र

शहजाद पूनावाला आपको मैं बहुत समझदार व्यक्ति समझता था, आपके लिए मेरे दिल में सम्मान था भले ही आपने मुझे अपने व्हाट्सएप  पर ब्लॉक कर दिया था लेकिन आपने तो मुझे निराश कर दिया अपनी छवि मेरे मस्तिष्क में धूमिल कर दी। 

आपने मोदी जी को कहा “12 साल हो गए उनको ठीक से डिक्टेटर बनना नहीं आ रहा वो फेल हैं वो गाली देने वाले बच्चों को कहते हैं माफ़ कर दो और दूसरी तरफ राहुल गांधी नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी का वंशज तानाशाही से बात करता है

मोदी जी असली इमर्जेन्सी क्या होती है उससे सीखो केरल में केस हो गए कर्नाटक में केस हो गए और आप यहां माफ़ी दे रहे हो फ्रीडम ऑफ़ स्पीच किसने curb की नेहरू जी ने इमरजेंसी किसने लगाई इंदिरा जी ने सबको जेल में डाला, साधु संतो को जेल में डाला और  AASU के लोगों को जेल में डाल दिया गोली चला दी और आप यहां माफ़ कर रहे हो 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आप 12 साल से डिक्टेटर नहीं बन पा रहे है”

“There is Something mentally Wrong with you Shahjad Poonawala”.

तुम उस नरेंद्र मोदी को dictator बनने को कह रहे हो जिसने अपने को देश का प्रधान सेवक कहा, जिसने देश को ही परिवार समझा अपने जीवन के 35 साल संघ प्रचारक बनकर समाज को दे दिए और 12 वर्ष में गुजरात को देश की शान बना दिया

उस मोदी को डिक्टेटर बनाना चाहते हो जिसने पिछले 12 साल में देश को आत्मनिर्भर बना दिया जिसने 25 करोड़ गरीबों का जीवन स्तर उठा दिया घर घर नल से जल पहुंचा दिया हर घर को बिजली दे दी, हर ग्रामीण महिला को गैस के चूल्हे दे दिए; हर घर को शौचालय दे दिए UPI को विश्व में उत्तम स्थान पर पंहुचा दिया जिस कांग्रेस के पास एक राफेल खरीदने के पैसे नहीं थे, उस मोदी ने लाखों करोड़ के हथियारों मिसाइलों से सेना की क्षमता बढ़ा दी

जो मोदी राष्ट्र प्रथम को अपना मिशन कहता है, उसे तुम हर वो पाप करने को कह रहे हो जो नेहरू इंदिरा गांधी और कांग्रेस ने किए तुम उस मोदी को Dictatorship राहुल गांधी से सीखने को कह रहे हो

जो मोदी सारे देश को अपना परिवार कहता है, तुम चाहते हो वो अपने ही देश के लोगों पर गोली चलाए जो पाप कांग्रेस ने किए, वो ही पाप अगर मोदी करेंगे तो उनमे और कांग्रेस में क्या फर्क रह जाएगा? 

तुम्हे मोदी को डिक्टेटर बनने के लिए कहते हुए लाज नहीं आई, तुम्हारी जुबान क्यों नहीं सड़ गई? 

आज मोदी की आवाज़ दुनिया के देश उसे सुनते हैं, कल को dictator बन गया तो कौन उन्हें पूछेगा जबकि आज 35 देश उसे अपना Highest Honour दे चुके हैं

कुछ काम और सुनो जो मोदी ने किये -

GST कम कर दिया, 12 लाख की आय करमुक्त कर दी; दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब ब्रिज बना दिया भारत को चन्द्रमा पर पहुंचा दिया; सबसे आधुनिक संसद भवन बना दिया; राम मंदिर बना दिया कांग्रेस 26/11 पर खामोश रही लेकिन मोदी ने 3 बार पाकिस्तान को घर में घुस के मारा और आज उसे पानी को तरसा दिया; मिजोरम जैसे दुर्गम राज्य में ट्रेन पहुंचा दी देश में आज लाखों Start Up हैं वक्फ बिल पास कर दिया, तीन तलाक ख़त्म कर दिया, मेडिकल कॉलेज बढ़ा दिए, 22 AIIMS बना दिए लगभग 100% रेलवे का electrification कर दिया 

तुमने मोदी को समझा ही नहीं शहजाद पूनावाला! उसके सम्मान में लाखों लोग स्वागत के लिए खड़े रहते हैं देश में ही नहीं विदेशों में भी 

लेकिन तुम मोदी को dictator बनाना चाहते हो कॉकरोचों ने दंगा क्या किया तुम चाहते हो उन्हें गोली मार देनी चाहिए थी? वो ही तो उनका लक्ष्य था मोदी ने गाली देने वालो माफ़ करने से भविष्य में युवाओ को उस गंदगी में जाने से बचाने का काम किया है

कुछ शर्म करो! तुम्हे नहीं पता तुम्हारे शब्दों से मोदी जैसे साधु को कितनी पीड़ा हुई होगी और परिणाम तुम्हे भुगतना पड़ेगा, क्योंकि वो खुद कुछ नहीं कहता, लेकिन ईश्वर उसके साथ है 

जयललिता से तृषा कृष्णन तक: कैसे तमिलनाडु की राजनीति में बार-बार निशाने पर आईं महिलाएँ

                                                    जयललिता, CM विजय और तृषा कृष्णन
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से बहुत तीखी और खतरनाक लड़ाइयों के लिए जानी जाती रही है। यहाँ पार्टियों के बीच का झगड़ा कई बार सारी हदें पार कर जाता है। राजनीति का यह गंदा रूप कई बार महिलाओं को सीधे तौर पर निशाना बना चुका है। करीब 36 साल पहले, 25 मार्च 1989 को तमिलनाडु विधानसभा में एक ऐसी घटना हुई थी, जिसे आज भी राज्य के राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े विवादों में गिना जाता है। उस दिन तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष जे जयललिता फटी हुई साड़ी, बिखरे बाल और चोट के निशानों के साथ विधानसभा से बाहर निकली थीं।

अब एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में एक महिला का नाम चर्चा में है। इस बार विवाद अभिनेत्री तृषा कृष्णन से जुड़ा है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के एक कथित दोहरे अर्थ वाले बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी तृषा कृष्णन को निशाना बनाकर की गई थी।

दोनों घटनाएँ पूरी तरह अलग हैं। एक मामला विधानसभा के अंदर कथित शारीरिक हमले से जुड़ा था, जबकि दूसरा एक राजनीतिक मंच से दिए गए बयान को लेकर है। लेकिन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं का नाम बार-बार विवादों में क्यों आता है।

वह काला दिन जिसने बदल दिया जयललिता का जीवन

 यह कहानी 25 मार्च 1989 की है जो विधानसभा के इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। उस समय जे जयललिता की उम्र 41 साल थी और वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थीं। बजट सत्र के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की सरकार पर जमकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

इन आरोपों के बाद सदन के भीतर अचानक भयंकर हंगामा शुरू हो गया। एआईएडीएमके (AIADMK) और डीएमके विधायकों के बीच हाथापाई और तीखी झड़प होने लगी। इस पूरी अराजकता के दौरान जयललिता पर गंभीर शारीरिक हमले किए गए।

जयललिता ने बाद में खुद यह आरोप लगाया कि उन पर सदन के अंदर हमले किए गए थे। उनके अनुसार, विधायकों ने उनकी तरफ चीजें फेंकी थीं। जब पार्टी के दूसरे विधायक उन्हें सुरक्षित बाहर ले जा रहे थे, तब एक DMK मंत्री ने उनकी साड़ी खींच दी थी।

घटना के बाद जब जयललिता विधानसभा के मुख्य दरवाजे से बाहर आईं, तो उनका हाल बहुत बुरा था। उनकी साड़ी जगह-जगह से फटी हुई थी और उनके बाल पूरी तरह बिखरे हुए थे। उनकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे और शरीर पर चोट के निशान साफ दिख रहे थे।

यह दिल दहला देने वाला दृश्य पूरे देश की मीडिया की बड़ी सुर्खियाँ बन गया। तमिलनाडु की राजनीति में यह तस्वीर आज भी सबसे बड़ी और यादगार तस्वीरों में गिनी जाती है। इस अपमान के बाद जयललिता ने वहीं सबके सामने एक बहुत बड़ी कसम खाई थी।

उन्होंने गुस्से में ऐलान किया था कि वह विधानसभा के अंदर अब दोबारा कभी कदम नहीं रखेंगी। उन्होंने कहा था कि वह सदन में तभी लौटेंगी जब वह खुद इस राज्य की मुख्यमंत्री बनेंगी। अपनी इस जिद को उन्होंने सच करके भी दिखाया।

सिर्फ दो साल में पूरा किया अपना संकल्प

जयललिता ने हार नहीं मानी और जनता के बीच जाकर इस अपमान का बदला लेने की ठानी। जनता का भारी समर्थन उनके साथ आ खड़ा हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि सिर्फ दो साल बाद यानी 1991 में चुनाव हुए।

उन्होंने अपनी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) को बहुत बड़ी और प्रचंड जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालकर अपना संकल्प पूरा कर लिया। वह दिन उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ साबित हुआ था।

1989 की घटना पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

उस ऐतिहासिक दिन क्या हुआ था, इसको लेकर दोनों पार्टियों के अपने-अपने दावे रहे हैं। जयललिता जिंदगी भर यही कहती रहीं कि उनके साथ विधानसभा के अंदर बहुत बड़ी बदसलूकी और मारपीट की गई थी।

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और उनकी पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके विधायक पूरी तरह शांत बैठे थे। उन्होंने उल्टा विरोधी पार्टी के विधायक केए सेंगोट्टैयन पर गंभीर आरोप लगाए थे।

करुणानिधि का दावा था कि एआईएडीएमके विधायक ने ही उन पर हमला किया था और उनका चश्मा तोड़ दिया था। चाहे जो भी सच रहा हो, लेकिन उस दिन की घटना ने हमेशा के लिए इतिहास में अपनी एक अलग और डरावनी जगह बना ली है।

तृषा कृष्णन और उदयनिधि स्टालिन का नया विवाद

अब आते हैं आज के समय के ताजा विवाद पर जो कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर शुरू हुआ था। डीएमके पार्टी ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन रखा था, जिसमें पार्टी के बड़े नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन भी शामिल थे।

इस रैली के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने सरकार पर निशाना साधते हुए कुछ ऐसा कहा जिससे नया बवंडर खड़ा हो गया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि भीड़ में मौजूद कुछ लोग लगातार मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम ले रहे हैं।

राजनीतिक विरोधियों और सोशल मीडिया के लोगों ने इस बात को तुरंत पकड़ लिया। लोगों का मानना था कि यह बयान मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और अभिनेत्री तृषा के बीच चल रही पर्सनल चर्चाओं पर एक गंदा तंज था। 

सफाई के बाद भी नहीं थमा विवाद

जब इस बयान पर चारों तरफ हंगामा मचने लगा, तो उदयनिधि स्टालिन ने तुरंत अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनका मतलब कावेरी नदी से था, किसी और चीज से नहीं। लेकिन उनकी यह सफाई आग को बुझा नहीं पाई।

उनकी इस टिप्पणी की राजनीतिक गलियारों में बहुत तीखी आलोचना हुई। सत्तारूढ़ TVK पार्टी ने इसे महिलाओं का खुला अपमान बताया और नेशनल कमीशन फॉर वुमन यानी राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।

तमिलनाडु की भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस बयान को बेहद अश्लील और घटिया बताया। उन्होंने माँग की कि इस तरह की भाषा बोलने वाले नेता के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

महिलाओं को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि

तृषा कृष्णन को लेकर हुआ यह विवाद कोई पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन महिलाओं पर दिए गए बयानों से फंसे हों। इससे पहले भी वह कई बार ऐसे बयानों के कारण आलोचना झेल चुके हैं।

कुछ समय पहले जब वह मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर हमला बोल रहे थे, तब उन्होंने विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम का नाम भी बीच में घसीट लिया था। उन्होंने उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों को अपने राजनीतिक भाषण का मुख्य हिस्सा बनाया था।

उस समय भी विपक्ष ने उन पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि वह अपनी राजनीतिक लड़ाई जीतने के लिए परिवार की महिलाओं को बीच में लेकर आते हैं। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था।

शशिकला का नाम लेकर भी उठाए थे सवाल

2021 के चुनाव प्रचार के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एडप्पडी के पलानीस्वामी पर जमकर निशाना साधा था। उस भाषण में उन्होंने वी के शशिकला का नाम जबरदस्ती बीच में घसीट लिया था।

उन्होंने शशिकला का नाम लेकर उनकी राजनीतिक साख और विश्वसनीयता पर कई तरह के सवाल खड़े किए थे। इन सभी पुराने मामलों को देखकर विपक्ष हमेशा यही कहता आया है कि डीएमके नेता राजनीति में महिलाओं का इस्तेमाल सिर्फ अपनी दुश्मनी निकालने के लिए करते हैं।

विपक्षी पार्टियों का साफ आरोप है कि राजनीतिक विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए उनके घरों की महिलाओं को निशाना बनाना इस पार्टी की पुरानी आदत बन चुकी है।

अतीत और वर्तमान: परिस्थितियों में अंतर लेकिन सोच वही

अगर हम 1989 की जयललिता वाली घटना और आज के तृषा कृष्णन विवाद को देखें, तो दोनों की परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग हैं। एक मामला सीधे तौर पर विधानसभा के अंदर हुए शारीरिक हमले और बदसलूकी से जुड़ा हुआ था।

जबकि दूसरा मामला किसी राजनीतिक मंच से सार्वजनिक रूप से दिए गए विवादित बयान और छींटाकशी का है। दोनों घटनाओं के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन इन दोनों ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

यह सवाल यह है कि तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा महिलाओं को ही क्यों निशाना बनाया जाता है? राजनीति के इस गंदे खेल में महिलाओं को बार-बार बीच में क्यों घसीटा जाता है?

जयललिता के लिए 25 मार्च 1989 का वह दिन बहुत बड़ा झटका था, लेकिन वही उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट भी बन गया था। फटी साड़ी में बाहर आती उनकी तस्वीरों ने उन्हें एक कमज़ोर महिला की जगह एक बहुत बड़ी आयरन लेडी बना दिया था।

आज का तृषा कृष्णन विवाद भी राजनीतिक भाषा और जनप्रतिनिधियों की मर्यादा पर एक गहरी चोट है। नेता अपनी कुर्सी और फायदे के लिए यह भूल जाते हैं कि सार्वजनिक मंचों से महिलाओं के खिलाफ कैसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह वक्त ही बताएगा कि तृषा कृष्णन से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में पूरी तरह खत्म होगा या यह भी राज्य की राजनीति का एक नया और बड़ा अध्याय बनकर रह जाएगा। लेकिन इस पूरे मामले से एक बात बहुत साफ हो जाती है कि 1989 की उस खौफनाक घटना के लगभग चार दशक बीत जाने के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। आज भी तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं को राजनीतिक हमलों का आसान शिकार बनाया जा रहा है।

जब तक नेता अपनी घटिया राजनीति से बाहर आकर महिलाओं का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक ऐसे विवाद बार-बार उठते रहेंगे। जनता अब इन सब चीजों को बहुत गौर से देख रही है और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।

तृषा कृष्णन और CM विजय पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, पहले भी महिलाओं पर दे चुके हैं विवादित बयान: सनातन को खत्म करने का भी देखते हैं सपना

                     तृषा कृष्णन और सीएम विजय पर अश्लील टिप्पणी कर फंसे उधयनिधि स्टालिन, गिरफ्तार
जब नेता महिला का सम्मान नहीं कर सकते फिर किस कीमत पर उनके वोट और उनके हित की बात करते हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड तमिल नाडु में जयललिता के साथ विधानसभा में शर्मनाक हरकत पर किस आधार पर महिलाएं इन पार्टियों में हैं? यह सोंचने की बात है।  

तमिलनाडु की राजनीति में विरोधी दलों से जुड़ी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसी सिलसिले में DMK के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की आलोचना करते हुए अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

तृषा कृष्णन को निशाना बनाकर की गई इस मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में मंगलवार (4 अगस्त 2026) को पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।

3 अगस्त को कर्नाटक के साथ कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर तंजावुर में आयोजित एक विरोध रैली को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सीएम विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार कावेरी का पानी नहीं मिलने के मुद्दे पर चुप है और उसका पूरा ध्यान DMK नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामले दर्ज कराने पर है।

इसी दौरान रैली में मौजूद DMK कार्यकर्ताओं ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर उदयनिधि स्टालिन कुछ पल रुके, मुस्कुराए और एक ऐसी टिप्पणी की, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी के तौर पर देखा।

तृषा कृष्णन का नाम लिए बिना उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “हमारे यहाँ पानी आए या न आए, वहाँ पानी जरूर पहुँचना चाहिए। उन्हें बस इसी की चिंता है।” इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “मेरा मतलब कावेरी के पानी से था।”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है, जिस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और वैचारिक पृष्ठभूमि के लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को लेकर उदयनिधि स्टालिन की कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की आलोचना की है।

तृषा इन दिनों अभिनेता से राजनेता बने और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ अपने कथित निजी संबंधों को लेकर भी चर्चा में हैं। उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी को लेकर तमिलनाडु की राजनीति भी गरमा गई है।

TVK विधायक रेवन्थ चरण ने इसे ‘घृणित और अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा, “इसी वजह से तमिलनाडु की जनता ने आपको नकार दिया और आज आप जिस स्थिति में हैं, वहीं सीमित कर दिया। अरिवालयम के पहले से ही बेहद निम्न स्तर के बावजूद यह उससे भी नीचे की बात है।”

तमिलनाडु भाजपा ने भी विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। पार्टी ने इसे ‘घृणित, अश्लील, अभद्र और शर्मनाक’ करार देते हुए उनके बयान पर सवाल उठाए।

तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वह अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन की एक महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर मौन क्यों हैं। उन्होंने उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी की भी माँग की थी।

इधर सत्तारूढ़ TVK ने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को पत्र लिखकर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। पार्टी का कहना है कि उनकी भाषा सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को वस्तु समझने और मौखिक उत्पीड़न (Verbal harassment) को सामान्य बनाती है तथा सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से अपेक्षित मर्यादा को गंभीर रूप से ठेस पहुँचाती है।

TVK ने यह भी कहा कि इस तरह का आचरण सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति व्यवहार को लेकर एक ‘खतरनाक मिसाल’ कायम करता है। TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग से आग्रह किया है कि वह उदयनिधि स्टालिन से इस मामले में स्पष्टीकरण माँगे और उन्हें बिना शर्त सार्वजनिक माफी जारी करने का निर्देश दे।

साथ ही पार्टी ने माँग की है कि उनके खिलाफ सार्वजनिक अश्लीलता फैलाने और महिला की मर्यादा का कथित रूप से अपमान करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।

राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए महिलाओं को घसीटने के आरोपों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि स्टालिन

अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर कथित तौर पर निशाना साधते हुए की गई दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन को भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से जुड़ी महिलाओं को निशाना बनाते हुए लैंगिक (सेक्सिस्ट) टिप्पणियाँ करने के आरोप पहले भी उन पर लग चुके हैं।

2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, प्रचार के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “जब भी मैं अपने चुनावी भाषण में एडप्पडी सरकार का जिक्र करता हूँ, लोग मुझसे एडप्पडी नहीं, बल्कि ‘एडुपुडी’ (किसी के इशारों पर चलने वाला) कहने को कहते हैं। मैं पूछता हूँ कि एडुपुडी कौन है, तो लोग कहते हैं, मोदी का एडुपुडी। मेरी हाल की एक रैली में भीड़ से किसी ने कहा कि वह एडुपुडी नहीं, बल्कि ‘डेड बॉडी’ है, क्योंकि वह शशिकला के पैरों में गिर चुका है।”

इसी वर्ष जब TVK ने सरकार बनाई, तब उदयनिधि स्टालिन ने TVK प्रमुख जोसेफ विजय पर अपने राजनीतिक हमलों में उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम को भी घसीटा था। उन्होंने कहा था, “उनका (विजय का) ‘कुट्टी स्टोरी’ सुनाने वाला भाषण विधानसभा की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। चेंगलपट्टू कोर्ट में अपने पति को तलाशती पत्नी की कहानी पूरे तमिलनाडु को पता है।”

मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी के बीच निजी विवाद को अपने राजनीतिक हमलों में घसीटने को लेकर उदयनिधि स्टालिन की उस समय कड़ी आलोचना हुई थी। और अब एक बार फिर उदयनिधि स्टालिन ने छोटे राजनीतिक लाभ के लिए तृषा कृष्णन और सीएम विजय के कथित निजी संबंधों को अपने राजनीतिक हमले का हिस्सा बनाया है।

उदयनिधि स्टालिन पिछले कई वर्षों में अलग-अलग कारणों से विवादों में रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू, मलेरिया’ से करते हुए इसके ‘उन्मूलन’ का आह्वान किया था। उस समय देशभर में उनके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी डीएमके नेता को फटकार लगाई थी।

‘अभिजीत दिपके को तत्काल करो गिरफ्तार’ : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान ने पुलिस से की माँग, CJP संस्थापक पर लगाया पिटवाने का आरोप


भारत विरोधी हाथों की कठपुतली बनी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विपक्ष बिन सिर-पैर के मुद्दों पर खुद ही विवादों में घिरती नज़र आ रही है। CAA प्रोटेस्ट से लेकर अब जंतर मंतर पर हुए हंगामे आदि सभी बेनकाब होकर इन्हीं को मुसीबत डाल रहे हैं। जनता इनकी जन विरोधियों को अच्छी तरह से समझ गयी है। आंदोलन अगर मुद्दों तक ही सीमित रहते प्रभावशाली होते लेकिन देश विरोधियों के पक्ष में नारेबाजी, मोदी को गालियां आदि देने से जनता इनकी हरकतों को समझ रही है।   
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अंसारी ने 4 अगस्त 2026 को अपनी शिकायत में कहा है कि दिपके के समर्थकों ने पुणे और औरंगाबाद में उन पर हमला किया।

शिकायतकर्ता ने दिल्ली पुलिस से अभिजीत दिपके को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग की।

 एएनआई से बात करते हुए फैजान अंसारी ने कहा, “आज मैंने सीजेपी पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ दिल्ली के डीसीपी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है, क्योंकि मेरे पास इस बात का सबूत है कि उनके समर्थकों ने मुझ पर हमला किया था। मुझ पर पुणे और औरंगाबाद में हमला हुआ था। इस संबंध में पहले से ही दो मामले दर्ज हैं।”

फैजान अंसारी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक की समय पर गिरफ्तारी से दिल्ली में स्थिति बिगड़ने से बच गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिपके अपने स्वार्थ के लिए काम कर रहा है।

 

अंसारी ने आगे कहा, “मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस दिपके को तुरंत गिरफ्तार करे। इसके अलावा, मैं दिल्ली के मुख्यमंत्री और पुलिस को सही समय पर सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने के लिए सलाम करता हूँ, जिसकी वजह से दिल्ली का माहौल बिगड़ने से बच गया… दिपके अपने स्वार्थ के लिए सब कुछ कर रहा है।”

अभिजीत दिपके आम आदमी पार्टी के पूर्व पदाधिकारी हैं। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर नई दिल्ली में हुए जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करके राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था।

इथेनॉल के पीछे की राजनीति: ये विरोध बहुत बड़ा खेल है जिसमें अंदर की और विदेशी शक्तियां शामिल हैं

सुभाष चन्द्र 

Ethanol Blending भारत में 2001 से हो रही है। शुरू में 1% थी, 2006 में 5% हुई, 2021-22 में 10% और 25-26 में 20% । लेकिन आज अचानक उसके खिलाफ मोर्चेबंदी क्यों हो रही है? कभी कोई गाड़ी इथेनॉल की वजह से ख़राब होती नहीं सुनी गई? 

सबसे पहले समझने की बात है कि -

-यह इथेनॉल 55% गन्ने से और 45% सड़े हुए या नष्ट हुए अनाज से प्राप्त होता है;

-गन्ना किसानों की कमाई का मुख्य जरिया है इथेनॉल जिसका विरोध करने वाले किसानों के पेट पर लात मारना चाहते हैं। देश के 50 बिलियन लीटर पेट्रोल में 20% इथेनॉल की खपत होती है और 31 मिलियन metric tonnes कच्चे तेल का आयात कम होता है जिसका मतलब है विदेशी मुद्रा की बचत होती है;

-इथेनॉल गन्ने से बनाने में किसानों को 35,000 करोड़ सालाना मिलता है और 2014 से 2026 के बीच किसानों को 1.58 लाख से 1.60 लाख करोड़ का भुगतान हुआ है। 2024 में ही किसानों को 92,409 करोड़ का भुगतान हुआ; अब सोचिये किसान भला इथेनॉल का विरोध क्यों करेंगे?

लेखक 
चर्चित YouTuber 
-भारत ही नहीं विदेशों में भी Ethanol Blending की जा रही है, अमेरिका, कनाडा, थाईलैंड, फ़िलीपीन्स और अधिकतर यूरोप के देशों में E-10 (10%) इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है; थाईलैंड और फ़िलीपीन्स में अनेक पेट्रोल पम्पों से E-20 पेट्रोल बेचा जाता है जबकि भारत में इसे राष्ट्रीय मानक बनाया गया है;

-E25 और E30 (25 से 30% इथेनॉल) - ब्राज़ील में कानूनन 27.5 से 30% Blending चल रही है, Paraguay में E30 अनिवार्य है और Bolivia में E25 अनिवार्य है 

अचानक इथेनॉल विरोध के पीछे कई कारण हो सकते हैं पहला तो यह है कि जो भी मोदी और उसकी सरकार का काम है, विपक्ष ने उसका विरोध करना है और उनके विरोध का साफ़ मतलब समझा जाना चाहिए कि मोदी का वह काम 100 टका सही है

दूसरा कारण है, इथेनॉल नहीं मिलाया जाएगा तो गन्ना किसान भूखा मरेगा और विपक्ष को उसे सड़कों पर उतरना आसान होगा। अपना विरोध किसानों को नहीं बताएंगे और सारा दोष मोदी को दे देंगे कि मोदी की वजह से तुम्हारी कमाई ख़त्म हो गई। आर्थिक नुकसान न केवल किसानों का होगा बल्कि सरकार का भी होगा क्योंकि ज्यादा कच्चा तेल आयात करना पड़ेगा 

तीसरा कारण वह देश भी हो सकते हैं जो भारत के रूस से तेल खरीद पर आपत्ति करते हैं क्योंकि फिर भारत हो सकता है उनसे तेल खरीदने पर मजबूर हो जाए

चौथा कारण भारत की तेल बेचने वाली कंपनियां ही चाहती हों कि इथेनॉल मिश्रित तेल न बेचा जाए जिससे उनका 100% तेल बिके बिना किसी इथेनॉल के

पांचवां कारण है विपक्ष मोदी के खिलाफ एक और अनावश्यक आंदोलन खड़ा करना चाहता है भारत की और विदेशी तेल कंपनियों की मिलीभगत से और कोई बड़ी बात नहीं एक दिन सभी गाड़ियों को विरोध प्रदर्शन करते हुए विपक्ष सड़कों पर खड़ा कर दे मोदी के लिए किसानों का हित प्रथम है और विपक्ष इथेनॉल पर चोट करके किसानों को ही बर्बाद करना चाहता है

एक Consumer कोर्ट ने एक कंपनी को गाड़ी ही बदलने का निर्देश दे दिया यह कह कर कि इथेनॉल की वजह से गाड़ी ख़राब हुई है। गाड़ी ख़राब होने के कई कारण हो सकते हैं और सरकार ने 20% Ethanol Blending की है तो पूरी वैज्ञानिक तकनीक को समझ कर की होगी और इसलिए अदालतों को सोच समझ कर फैसले देने चाहिए

100 लोगों की भीड़ लेकर अरविंद केजरीवाल PM आवास तक करना चाहते थे मार्च, दिल्ली पुलिस ने नहीं दी परमिशन

    केजरीवाल PM Awas के बाहर धरना करना चाहता था, दिल्ली पुलिस ने सिखाया सबक (फोटो साभार : Video SS)
आज 
E20 पेट्रोल पर विपक्ष जनता को गुमराह कर रही है। ये पेट्रोल आज से नहीं पिछली सरकारों के समय से बिक रहा है। गौरतलब बात है कि यूपीए कार्यकाल में पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर ने 11 अगस्त 2005 को पार्लियामेंट में लोगों से शराब कम पीने के लिए कहा था क्योकि हमें E20 पेट्रोल बनाना है।

राजनीतिक रोटियाँ सेकने की अपनी फितरत से बाज न आते हुए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार (4 अगस्त) को एक बार फिर सस्ता प्रोपेगेंडा फैलाने की घटिया कोशिश की। E20 पेट्रोल के झूठे मुद्दे पर केजरीवाल अपने 100 अंधभक्त समर्थकों की भीड़ लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास (PM Awas) के बाहर धरना-प्रदर्शन करने पहुँच रहे थे, लेकिन सतर्क दिल्ली पुलिस ने उनके इस ड्रामे पर पानी फेरते हुए परमिशन देने से साफ इनकार कर दिया। अरविंद केजरीवाल और उनके समर्थकों को दिल्ली पुलिस ने फिरोजशाह रोड पर ही रोक दिया था, जिसके बाद सभी प्रदर्शनकारी उसी रोड पर बैठ गए।

दिल्ली पुलिस ने नहीं दी इजाजत

प्रधानमंत्री आवास (PM Awas) और 7 लोक कल्याण मार्ग के आसपास का इलाका देश के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील क्षेत्रों में आता है। यहाँ कोई भी सिरफिरा अपनी मनमानी नहीं कर सकता।
नो प्रोटेस्ट जोन- पीएम आवास (PM Awas) के 1 किलोमीटर के दायरे का पूरा इलाका सख्त रूप से ‘नो प्रोटेस्ट जोन’ है, जहाँ किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या जुलूस के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति अनिवार्य होती है।
त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था- इस अति-सुरक्षित क्षेत्र में पीएम आवास (PM Awas) के बाहर हमेशा दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स का कड़ा पहरा रहता है, जबकि अंदर एसपीजी (SPG) का अचूक सुरक्षा कवच होता है।
धारा 163 का शिकंजा– यहाँ हमेशा धारा 163 लागू रहती है, जिसके तहत किसी भी तरह के अवैध जमावड़े की सख्त मनाही है। नियम तोड़ने या संदिग्ध हरकत करने पर पुलिस सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार रखती है।
इन्हीं कड़े नियमों का हवाला देते हुए पुलिस ने साफ कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है। याद कीजिए, ठीक इसी तरह जब 21 जुलाई 2026 को बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई काँग्रेसी नेता छात्रों की आड़ में ड्रामा करने पीएम आवास (PM Awas) पहुँचे थे, तो दिल्ली पुलिस ने उनकी हेकड़ी निकालते हुए सबको हिरासत में ले लिया था। अब बिल्कुल वैसा ही हाई-वोल्टेज और घटिया ड्रामा केजरीवाल अपने साथियों के साथ वहाँ रचने की फिराक में थे।

केजरीवाल की नौटंकी और उनका खोखला एजेंडा

आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल का रोना है कि उन्होंने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर E20 पेट्रोल पर अपनी फर्जी चिंताएँ जताई थीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसलिए वे 2 लाख लोगों के फर्जी हस्ताक्षर वाले कागजात लेकर खुद पीएम मोदी को सौंपने का ढोंग रचना चाहते थे।
वे जनता को यह मूर्खतापूर्ण ज्ञान दे रहे हैं कि E20 के साथ शुद्ध पेट्रोल का विकल्प भी मिलना चाहिए। लेकिन शुद्ध पेट्रोल का ढोंग रचने वाले केजरीवाल अच्छी तरह जानते हैं कि देश में 10 फीसदी इथेनॉल मिश्रित (E10) पेट्रोल साल 2022 से ही सफलतापूर्वक मिल रहा है।
इसे बढ़ाकर अप्रैल 2026 में E20 (यानी 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) किया गया है। जहाँ तक शुद्ध पेट्रोल का सवाल है, तो ‘XP100’ जैसे प्रीमियम ब्रांड बाज़ार में पहले से मौजूद हैं, जिनकी कीमत उनकी प्रीमियम क्वालिटी के हिसाब से है।
सरकार पहले ही दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए यह स्पष्ट कर चुकी है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालातों और संकट के समय इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विकल्प न अपनाया जाता, तो देश में पेट्रोल की कीमतें आसमान छूते हुए 125 रुपए प्रति लीटर तक पहुँच जातीं। इन तथ्यों से पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद केजरीवाल सिर्फ जनता को भड़काने और आंदोलित करने के कुत्सित प्रयासों में जुटे हैं।

मीडिया की सुर्खियों में बने रहने की सस्ती भूख

असली सच्चाई तो यह है कि कुछ समय पहले जब राहुल गाँधी ने छात्र आंदोलन के नाम पर पीएम मोदी के घर (PM Awas) के बाहर नौटंकी की थी और देश भर का मीडिया उन्हें कवर कर रहा था, तब से केजरीवाल की बेचैनी बढ़ गई थी।
राहुल गाँधी की देखा-देखी अब अरविंद केजरीवाल भी वही सस्ती लोकप्रियता पाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि E20 जैसे झूठे मुद्दे पर वे पीएम आवास (PM Awas) के सामने पहुँचकर एक बार फिर ‘सीन क्रिएट’ कर लेंगे और मीडिया में लाइमलाइट बटोर लेंगे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनकी इस गंदी चाल को पहले ही नाकाम कर दिया।

कांग्रेस और AAP की पालतू मीडिया, राहुल और सोनिया के गुणगान पर मिलते थे पद्म श्री अवार्ड


2014 में जब से बीजेपी सरकार आयी है तब से कांग्रेस की पालतू मीडिया ने गोदी-मीडिया का भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रखा है जबकि हकीकत यह है कि मीडिया आज भी कांग्रेस की तर्ज पर काम कर रही है। अगर मीडिया गोदी-मीडिया होती तो राहुल गाँधी की दोहरी नागरिकता और दो नामों - राहुल गाँधी और राहुल विन्ची -पर शोर मचा रही होती। लेकिन सब मुंह में दही जमाए बैठी है। अगर स्थिति विपरीत होती देखो कितना शोर मच रहा होता। सच्चाई यह है कि विपक्ष ही ऐसे बेसिर पैर के मुद्दे उठाता रहता है जो खुद ही विस्फोट हो जाते हैं। और मीडिया अपनी TRP के चक्कर उसे भुनाता है।    

हिंदी के महान कवि दुष्यंत कुमार की कविता की दो पंक्तियां हैं, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” इन पंक्तियों से प्रेरणा लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में भाषण देने आते हैं, लेकिन उनका मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना होता है, इससे अभी तक ना सूरत बदली और ना ही सीरत। राहुल गांधी ने 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान 50 मिनट तक भाषण दिया। इस दौरान राहुल गांधी ने अपनी परंपरा को जारी रखा और इडियट जैसे असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिसको लेकर जमकर हंगामा हुआ। लेकिन देश की पालतू मीडिया इसे राहुल के नए अवतार के रूप में पेश कर रही है।

 राहुल गांधी के बचाव में उतरी पालतू मीडिया

अब आपको दिखाते हैं, किस तरह पालतू मीडिया राहुल गांधी के असंसदीय भाषा का बचाव कर रही है। उनके बचाव में नए-नए तथ्य गढ़ रही है। क्योंकि उन्हें राहुल गांधी को देखकर पुराने दिन याद आने लगते हैं, जब सत्ता की मलाई चाटने, पुरस्कार पाने, जमीन और फ्लैट पाने, विदेश यात्रा पर जाने, मंत्रिमंडल में अपने पसंद के लोगों को मंत्री बनाने का मौका मिलता था, जो मोदी सरकार में बंद हो गया है। इससे परेशान पत्रकार राहुल गांधी का कवच बनकर सामने आते हैं और नमक का हक अदा करते हैं। ऐसे में ही एक तथाकथित राजनीतिक विश्लेषक कुमार आशुतोष हैं, जो पहले पत्रकार से राजनेता और राजनेता से फिर पत्रकार बनकर गोदी मीडिया पर ज्ञान देते हैं। लेकिन पालतू पत्रकार बनकर राहुल गांधी का बचाव करने का कोई मौका नहीं चुकते हैं।  
कांग्रेस राज में पालतू पत्रकारों को मिला पद्म श्री पुरस्कार 
पालतू मीडिया के पत्रकार अपने निजी स्वार्थ के लिए ना सिर्फ पत्रकारिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि दूसरों पत्रकारों की जान का दुश्मन बन गए हैं। ऐसे पत्रकार अपनी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता खो चुके हैं। इसलिए दूसरों की विश्वसनीयता खत्म करना चाहते हैं। पालतू मीडिया के पत्रकार गांधी परिवार को छोड़कर किसी दूसरे की तारीफ नहीं सुनना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि उनकी तरह गांधी परिवार की गुलामी सभी पत्रकार करें। क्योंकि कांग्रेस सरकार से मिली सुविधाओं की कीमत पर अपनी निष्ठा बेच दी और पालतू पत्रकार बन गए। पालतू पत्रकारोंं की नजरों में नेहरू-गांधी परिवार इस देश का पालनहार है। नेहरू-गांधी परिवार का वारिस ही इस देश पर राज करने के लिए पैदा हुए हैं। कांग्रेस ने भी अपने पालतू पत्रकारों का पूरा ख्याल रखा। उनकी निष्ठा को देखते हुए कांग्रेस राज में पद्म श्री पुरस्कार से समानित किया था। 
पालतू पत्रकारों द्वारा गुणगान और महिमामंडन
2 अक्टूबर, 2022 को कर्नाटक के मैसूर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बारिश के बीच जनसभा को संबोधित किया। राजा बारिश में भीगकर भाषण क्या दिया, मानो उसने 2024 की बड़ी जंग जीत ली हो। राजा का शौर्य देखकर पालतू पत्रकार काफी खुश नजर आए। उन्होंने राहुल की शान में किस तरह कसीदे पढ़े उसे आप देख सकते हैं।  
AAP की पालतू मीडिया