पाकिस्तान में भीषण धमाका, कार में ब्लास्ट से ढही पुलिस चौकी: विद्रोहियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग भी की; 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका

                                                                                                                            साभार News18  
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में शनिवार (9 मई 2026) की देर रात एक बड़ा हमला हुआ। विद्रोहियों ने पहले पुलिस चौकी के पास एक कार को बम धमाके से उड़ा दिया और इसके बाद भीषण गोलीबारी की है। इसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर हिला कर रख दिया
 इस हमले में पहले एक कार बम धमाका किया गया और उसके तुरंत बाद पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हमला किया गया 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका है रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में हुआ, जो अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित है यहां एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया गया पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को चौकी के पास उड़ा दिया

15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका

धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी पुलिस पोस्ट ढह गई इस हमले में कम से कम तीन पुलिस अधिकारियों की मौत की पुष्टि हुई है लेकिन नुकसान इससे कहीं ज्यादा बताया जा रहा है पुलिस अधिकारी सज्जाद खान के मुताबिक, चौकी पर उस समय करीब 15 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे, जिनमें से ज्यादातर के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है हालांकि अंतिम आंकड़े ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही सामने आएंगे

यह इलाका अफगानिस्तान सीमा से सटा हुआ है और लंबे समय से आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय हमला हुआ, उस वक्त चौकी में 15 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद थे और कई अन्य के घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस अधिकारी जाहिद खान ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को सुरक्षा चौकी के पास उड़ा दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि चौकी पूरी तरह ढह गई। इसके तुरंत बाद विद्रोहियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और मौके पर पहुँच रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया।

स्थानीय मीडिया डॉन के अनुसार, धमाके से आसपास के रिहायशी इलाकों को भी भारी नुकसान पहुँचा है और दो आम नागरिक घायल हुए। घटना के बाद बन्नू के सरकारी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले को कैसे दिया गया अंजाम?

हमले का तरीका बेहद खतरनाक था पहले कार को मेन गेट से टक्कर मार करे धमाका किया गया. ब्लास्ट के बाद आसपास से पुलिसकर्मी मदद के लिए मौके पर पहुंचे और हमलावरों ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया इस दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य पुलिस अधिकारी जाहिद खान ने बताया कि इस हमले में एक आत्मघाती हमलावर भी शामिल था, जिसने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को चौकी के पास उड़ा दिया इसके बाद कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया, जिससे यह हमला और ज्यादा खतरनाक हो गया. यह दिखाता है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे 

दक्षिण विजय के लिए भाजपा को क्या करना होगा ?

डॉ राकेश कुमारआर्य
गंगोत्री से गंगासागर तक अपना विशाल साम्राज्य खड़ा करने वाली भाजपा के लिए दक्षिण अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का मनोविज्ञान मजबूत करने वाली भाजपा के लिए यह आवश्यक है कि वह दक्षिण को भी भगवा ध्वज के नीचे लाए। अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों ( असम, पांडिचेरी, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु ) के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जहां असम और पश्चिम बंगाल में धुआंधार मचाई है और पांडिचेरी में भी सरकार बनाने में सफल हुई है, वहीं केरल और तमिलनाडु में उसकी पराजय सचमुच चुभने वाली है। इन दोनों ही प्रदेशों ने भाजपा के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोक दिया है। निश्चित रूप से भाजपा को अंतरमंथन करना ही होगा। यह इसलिए भी आवश्यक है कि भाजपा संपूर्ण देश को एक इकाई के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त करती है। साथ ही वह सारे संसार को यह दिखाना चाहती है कि हमारे यहां का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भाषा ,प्रांत ,क्षेत्र, जाति, संप्रदाय आदि की सारी संभावनाओं और विसंगतियों को पीछे छोड़कर 'एक' होने की क्षमता रखता है।
लेखक 
दक्षिण भारत के 6 राज्यों अर्थात कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भाजपा को विशेष ध्यान देना है। इन आधा दर्जन राज्यों में कांग्रेस के द्वारा भाषा के नाम पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता रहा है। उन्हें यह बताया जाता रहा है कि भाजपा हिंदी- हिंदू- हिंदुस्तान की बात करती है। यदि यह सत्ता में बनी रहेगी और स्थानीय लोग अपनी भाषाई पहचान को छोड़कर भाजपा के ' हिंदी -- हिंदुस्तान ' के साथ जाने का मन बनाएंगे तो एक दिन ऐसा आएगा जब भाजपा इन प्रांतों की स्थानीय भाषाओं को मिटा देगी। इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं -एक तो यह कि भारत में भाषाई पूर्वाग्रह है। इसके लिए हम चाहे कितना ही यह दिखाने और कहने का प्रयास करें कि हम भाषा के नाम पर बंटे हुए नहीं हैं ,परन्तु सच यह है कि भाषा हमें दूसरे प्रान्तों के लोगों से अलग करती है। दूसरी बात यह है कि भारत में भाषाओं के नाम पर यदि प्रान्तों का विभाजन किया गया है तो भाषा राजनीति में एक वैधानिक आधार प्राप्त कर चुकी है अर्थात भाषा के नाम पर प्रान्तों का विभाजन करना भाषाई विवाद को वैधानिकता प्रदान करता है।
भाजपा को अपनी रणनीति में इस बात को सम्मिलित करना पड़ेगा कि वह संस्कृतनिष्ठ हिंदी की समर्थक है और दक्षिणी की सभी भाषाओं के संस्कृतनिष्ठ शब्दों को हिंदी शब्दों के रूप में स्वीकृति देने को तैयार है। इसी मत के प्रतिपादक सावरकर जी थे। भाजपा को दक्षिण के लोगों को यह भली प्रकार समझाना होगा कि कांग्रेस उर्दूनिष्ठ खिचड़ी भाषाओं की समर्थक रही है। कांग्रेस की इसी नीति का विरोध दक्षिण भारत करता है। लोगों को मान्यता है कि भाजपा की हिंदी का अभिप्राय कांग्रेस की इसी उर्दूनिष्ठ हिंदी से है अर्थात दक्षिण भारत उस उर्दूनिष्ठ खिचड़ी हिन्दी का विरोधी है, जो उसकी अपनी भाषाओं से कहीं भी मेल नहीं खाती है। भाजपा को ध्यान रखना चाहिए कि उसके अंग्रेजी या उर्दू के नारे दक्षिण भारत के लोगों को रास नहीं आते हैं।
भाजपा ने भाषा के नाम पर तुष्टिकरण का खेल खेलते हुए दक्षिण को उन्हीं की अपनी भाषा में संबोधित करने का क्रम चलाया है अर्थात पार्टी हंस की चाल चली तो अपनी चाल भूल गई। भाजपा को सावरकर जी के भाषा संबंधी चिंतन को क्रियान्वित करने के लिए ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कि दक्षिण की सभी भाषाओं के संस्कृतनिष्ठ शब्दों को हिंदी के संस्कृतनिष्ठ स्वरूप के साथ समन्वित किया जा सके। कांग्रेस ने भाषा को अभिव्यक्ति का माध्यम मान लिया है। जबकि भाषा राष्ट्रीय एकता की सजग प्रहरी होती है। इसी स्वरूप में भाजपा को अपना भाषा संबंधी चिंतन स्पष्ट करना चाहिए।
हमें ध्यान रखना चाहिए कि दक्षिण भारत के इन 6 राज्यों में लोकसभा की 130 सीटें आती हैं। जिनमें से भाजपा के पास ढाई दर्जन भी नहीं हैं। इससे पता चलता है कि भाजपा को दक्षिण में पैर जमाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा।
कर्नाटक में भाजपा के लिए बहुत अनुकूल अवसर हैं। वहां पर उसकी सरकार भी रही है। भविष्य में वहां पर भाजपा की सरकार आने की प्रबल संभावनाएं हैं। कर्नाटक को आधार बनाकर दूसरे प्रान्तों को जीतने की एक सफल योजना बनाई जा सकती है। कर्नाटक को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। जिसमें विशेष रूप से भाषा के प्रति उदार दृष्टिकोण रखा जाए। कर्नाटक के लोगों को यह विश्वास दिलाया जाए कि भाजपा ' सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय' में विश्वास रखती है और वह भाषा को राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम मानती है। तमिलनाडु में जिस प्रकार से वहां के स्थानीय दल सत्ता में आते रहे हैं, उससे पता चलता है कि यहां के लोग क्षेत्रीय पार्टियों को प्राथमिकता देते हैं। अब उन्होंने तमिलनाडु में टीवीके को एक विकल्प के रूप में स्वीकार कर लिया है। भारतीय जनता पार्टी को इन तीनों के विकल्प के रूप में अपने आप को स्थापित करना है। इसके लिए भाजपा को चाहिए कि वह जिस प्रकार बंगाल को लगभग डेढ़ लाख छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन करके विजय करने में सफल हुई है, उसी प्रकार उसे तमिलनाडु में भी करना होगा। मंचों पर दिए गए भाषणों से अधिक यह छोटी-छोटी बैठकर प्रभावशाली होती हैं। भाजपा को तमिलनाडु के लोगों को भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में इस प्रान्त के महत्वपूर्ण योगदान से परिचित कराना होगा। यह भी दिखाना होगा कि राम हमारी आस्था के और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं। उन्हें स्थानीय स्तर पर तमिलनाडु के लोग रावण के दृष्टिकोण से देखना बंद करें। दक्षिण में जिस प्रकार भाजपा के पास लोकसभा के लिए सीटों का अकाल पड़ा हुआ है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यहां के लोगों ने भाजपा को अभी कांग्रेस जैसा भी सम्मान देना ठीक नहीं माना है। यही कारण है कि दक्षिण भारत के लोग भाजपा को वोट भी बहुत कम देते हैं। यह भी एक तथ्य है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश में बीजेपी को मात्र एक प्रतिशत वोट मिले थे।
ऐसा नहीं है कि दक्षिण भारत के लोग सनातन से दूर हैं, वहां पर कार्यरत ईसाई मिशनरीज स्थानीय लोगों को भारत के सनातनी स्वरूप से दूर ले जाने का हर संभव प्रयास करती रही हैं, परंतु इसके उपरांत भी बहुसंख्यक लोग भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में आस्था रखते हैं। भाजपा को इसी आस्था को पकड़ना चाहिए। वहां के मंदिरों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। मंदिरों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर अच्छे भाषण करने वाले लोगों को वक्ता के रूप में स्थापित किया जाए। इनका विशेष कार्य उत्तर दक्षिण का भेद मिटाना होना चाहिए।
( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं)

हापुड़ : महाराणा प्रताप जयंती की शोभायात्रा पर पत्थर फेंकने वाले कट्टरपंथियों को भीड़ ने छत पर चढ़ कर पीटा: Video

  हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभा यात्रा के दौरान पथराव, हिंदुओं ने कट्टरपंथियों को पीटा (साभार: एक्स @ocjain4)
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के धौलाना थाना क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती पर निकाली जा रही भव्य शोभायात्रा के दौरान शनिवार (9 मई 2026) को अचानक हिंसा भड़क उठी। यहाँ हजारों लोगों की मौजूदगी में निकाली जा रही यात्रा जब मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रही थी, तभी मामूली कहासुनी को लेकर कट्टरपंथियों ने जमकर पथराव शुरू कर दिया।

हालाँकि, शोभायात्रा में शामिल भीड़ ने छतों पर चढ़कर पत्थर फेंक रहे जिहादियों को पीट दिया। पलटवार कर हिन्दुओं ने कट्टरपंथियों को सख्त सन्देश दे दिया है कि अब हिन्दू यात्रा पर पत्थरबाज़ी करने वाले कट्टरपंथियों को बक्शा नहीं जाएगा। इस पलटवार ने एक सन्देश कट्टरपंथियों का समर्थन करने वालों को भी दे दिया गया है। 

पथराव से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में कई युवक घायल हुए हैं, जबकि एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया और देर तक क्षेत्र में गहमागहमी बनी रही।

कट्टरपंथियों ने घरों और वाहनों में की तोड़फोड़, कई लोग घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर देहरा गाँव में बड़ी शोभायात्रा निकाली जा रही थी, जिसमें हजारों लोग शामिल थे। यात्रा जब गाँव के मुस्लिम बाहुल्य इलाके से गुजर रही थी, उसी दौरान कुछ युवक रास्ते में एक दुकान पर गुटखा खरीदने पहुँचे।

इसी दौरान किसी बात को लेकर युवकों के बीच कहासुनी हो गई। शुरुआत में मामूली विवाद लग रहा मामला कुछ ही मिनटों में उग्र हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इसके बाद इलाके में अचानक पथराव शुरू हो गया, जिससे शोभायात्रा में शामिल लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

उपद्रव के बीच कुछ लोगों द्वारा घरों में घुसकर तोड़फोड़ किए जाने की भी सूचना है। कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस के मुताबिक, 2 से 3 लोगों को मामूली चोटें आई हैं, वहीं एक युवक की हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस बल ने सँभाला मोर्चा, दो आरोपित गिरफ्तार

बवाल की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा और काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया। एसपी हापुड़ कुँवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने पत्थरबाजी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, रैली बाद में सकुशल संपन्न करा दी गई और वर्तमान में क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था सामान्य है।

पौराणिक गाथा : शिव का रौद्र रूप भैरों बाबा

सनातन धर्म के महाकाव्य रामायण, महाभारत, भागवत गीता, वेद, पुराण, उपनिषद और अन्य ग्रन्थ मात्र धार्मिक पुस्तकें नहीं बल्कि जीवनशैली का मार्गदर्शन हैं। रामायण में दर्शाया कि महान तपस्वी और तीनो लोकों में शक्तिशाली रावण को मोक्ष दिलवाने प्रत्येक देवी-देवता का किसी न किसी रूप में धरती पर अवतरण हुआ।    
प्राचीन काल की बात है, जब पृथ्वी पर 'ज्वरासुर' नामक एक भयंकर असुर का आतंक फैल गया था। वह असुर रोगों का साक्षात स्वरूप था। उसके स्पर्श मात्र से लोगों के शरीर तपने लगते, अंगों पर दाने निकल आते और पूरी मानवता महामारी की चपेट में आ गई थी।

शक्ति का प्राकट्य
जब हाहाकार मच गया, तब समस्त देवगण भगवान शिव की शरण में गए। महादेव के अंश से और आदिशक्ति की कृपा से एक देवी का प्राकट्य हुआ, जिनका स्वरूप अत्यंत शीतल और ममतामयी था। उन्हें 'शीतला' कहा गया। वे नीम की पत्तियों के गहने पहने, हाथ में कलश और झाड़ू लिए गधे पर सवार होकर पृथ्वी पर उतरीं।

माँ शीतला ने जैसे ही अपनी झाड़ू से रोगों को बुहारना और कलश के जल से शांति फैलाना शुरू किया, ज्वरासुर और उसके सहायक प्रेत-पिशाच क्रोधित हो उठे। उन्होंने माता के कार्य में विघ्न डालना शुरू कर दिया ताकि महामारी बनी रहे।
तब देवी की सहायता के लिए महादेव ने अपने रौद्र रूप 'भैरव' को प्रकट किया। भगवान शिव ने भैरव से कहा:
"हे भैरव! तुम देवी के अंगरक्षक और क्षेत्रपाल बनकर उनके साथ रहो। जो भी आसुरी शक्तियाँ या रोगरूपी दानव देवी के मार्ग में आएंगे, उनका संहार करना तुम्हारा उत्तरदायित्व है।"

भैरव जी ने माता के आदेश को शिरोधार्य किया। तंत्र ग्रंथों के अनुसार, भैरव ने जहाँ एक ओर दुष्टों के लिए काल का रूप धरा, वहीं भक्तों के लिए वे 'बटुक भैरव' (बालक रूप) बनकर माता के साथ चलने लगे। उन्होंने ज्वरासुर का मान मर्दन किया और उसे माता के चरणों में झुकने पर विवश कर दिया।
तब से यह परंपरा बन गई कि माँ शीतला जहाँ भी निवास करती हैं, वहाँ भैरव द्वारपाल या क्षेत्रपाल के रूप में पहरा देते हैं। बिना भैरव की अनुमति और उनके दर्शन के, शीतला माता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
कथा का आध्यात्मिक सार
यह कहानी केवल दो शक्तियों के मिलन की नहीं है, बल्कि आयुर्वेद और सुरक्षा का संगम है:
माँ शीतला: आरोग्य और स्वच्छता का प्रतीक हैं।
भैरव: अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
निष्कर्ष: माँ शीतला की झाड़ू गंदगी (बीमारी की जड़) साफ करती है, कलश का जल घावों को भरता है और भैरव का दंड उन बाहरी नकारात्मक ऊर्जाओं को रोकता है जो दोबारा बीमारी ला सकती हैं। 

Narendra Modi द्वारा तमिलनाडु में शुरू की गई प्रमुख परियोजनाएं (2014–2026)

सुभाष चन्द्र 

तमिलनाडु में भाजपा को मात्र एक सीट मिली है। जबकि सनातन विरोधी DMK की सत्ता बेशक चली गई लेकिन उसे भाजपा से कहीं अधिक सीट मिली। 

तमिलनाडु से ही मेरे एक परम मित्र ने मुझे बताया कि DMK ने लोगों के दिमाग में फितूर भर दिया था कि मोदी ने तमिलनाडु के साथ भेदभाव किया है। वैसे DMK का प्रचार हिंदी विरोध का ज्यादा रहता है। 

सब कुछ गँवा के होश मे आये तो क्या किया

तमिलनाडू DMK के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के स्टालिन ने कहा कि, मैने जो अपने कार्यकाल में सनातन संस्कृति का अपमान किया हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया ये सब मैंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कहने पर किया।
आज मुझे इसके लिए बड़ा पछतावा हो रहा है। मैं इसके लिए देश के सभी हिन्दूओं से माफी मांगता हूं।

आज सबकुछ लुटवाकर सच्चाई बोलने का क्या फायदा? उस समय अक्ल क्या भैंस चरने गयी थी?   

आज मुझे चाणक्य की वो बात याद आ रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेशी औरत से जन्मा बच्चा कभी देश भक्त नहीं हो सकता। लेकिन राहुल जहां जहां जायेगा विनाश ही करेगा।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब देखते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के विकास के लिए पिछले 12 वर्ष में क्या किया

2014 से 2026 तक केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में सड़क, रेलवे, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी अनेक बड़ी परियोजनाएं शुरू कीं। इस दौरान राज्य में 4,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और विस्तार किया गया और रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े निवेश किए गए।

मुख्य परियोजनाएँ इस प्रकार हैं —

* राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और नए बाईपास निर्माण की कई परियोजनाएं शुरू की गई, जिन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं - NH-332A ( ₹2,100 crore) और  NH-87 ( ₹1,800 crore) की लागत से शुरू किए गए;

* प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 370 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया ताकि गांवों को बेहतर संपर्क मिल सके;

* रेलवे आधुनिकीकरण के तहत तमिलनाडु के 77 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है;

* भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल “पंबन ब्रिज” राष्ट्र को समर्पित किया गया;

* राज्य को 9 वंदे भारत ट्रेनों सहित कई नई रेल सेवाएं दी गई तथा कई रेल लाइनों का विद्युतीकरण और दोहरीकरण किया गया;

* ऊर्जा क्षेत्र में गैस वितरण नेटवर्क, बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाएँ और चेन्नई में इंडियन ऑयल का बड़ा ल्यूब ब्लेंडिंग प्लांट शुरू किया गया -(Project in Nilgiris and Erode districts by BPCL (approx. ₹3,700 crore).IOCL Lube Blending Plant: Dedicated to the nation in Chennai (investment of ₹1,490 crore).Kudankulam Power Transmission);

* तूतीकोरिन स्थित VOC पोर्ट के विकास और बंदरगाह संपर्क सड़कों के विस्तार की परियोजनाएं शुरू की गईं;

* तमिलनाडु में 11 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए;

* प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत हजारों घरों में सोलर रूफटॉप लगाए गए;

* आदिचनल्लूर जैसे ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना शुरू की गई;

केंद्र सरकार के अनुसार पिछले एक दशक में तमिलनाडु के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई

लगता है तमिलनाडु की जनता को विकास से मतलब नहीं है जबकि मोदी ने उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया। उन्होंने एक फ़िल्मी सितारे को सत्ता सौंप दी

बंगाल : TMC नेता के करीबी के घर से भारी मात्रा में हथियार बरामद, 140 राउंड कारतूस के साथ एक महिला गिरफ्तार

                                          हथियारों के साथ महिला गिरफ्तार (फोटो साभार: ANI)
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में शनिवार (9 मई 2026) को पुलिस ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक नेता के करीबी के घर से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरहामपुर के सैदाबाद गिरजापाड़ा इलाके में पुलिस ने छापेमारी के दौरान करीब 140 राउंड कारतूस, तीन 7.65 एमएम रिवॉल्वर और एक मैगजीन जब्त की।

मौके से टुकू सरकार नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, दो अन्य आरोपित पापाई घोष और उसका सहयोगी आशीम सरकार फरार बताए जा रहे हैं।

यह बरामदगी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में TMC की चुनावी हार के बाद कई इलाकों से छिटपुट हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। आरोप है कि TMC का नेतृत्व जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर रहा और अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को भड़का रहा है कि पार्टी को किसी भी हालत में चुनाव नहीं हारना चाहिए था।

इसी बीच बीजेपी विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने आज राज्य के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर बंपर जीत हासिल की है।

पंजाब : कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की कार्रवाई

साभार पंजाब केसरी 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (9 मई 2026) को पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। केंद्रीय एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की है। इससे पहेल ED ने संजीव अरोड़ा के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।

PTC न्यूज के मुताबिक, सुबह से ही ED की टीमें लगातार अरोड़ा के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं और इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। (ED) की अलग-अलग टीमें संजीव अरोड़ा और उनके सहयोगियों के चार ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। ED के अधिकारी उनके सरकारी आवास पर भी पूछताछ और जाँच कर रहे हैं। 

पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर छापा मारने के बाद ईड़ी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेड की बताया जा रहा है कि उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कुछ लोगों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच में सुबह यह छापा पड़ा

 इसमें संजीव अरोड़ा का चंडीगढ़ स्थित सरकारी घर भी उन पांच जगहों में शामिल है, जहां छापे मारे गए रेड में दिल्ली और गुरुग्राम (हरियाणा) के भी कई ठिकाने हैं, इनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड नाम की कंपनी का दफ़्तर भी शामिल है

तीसरी बार उनके घर बीजेपी की ईडी आई

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर लिखा, आज फिर से बीजेपी की ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है एक साल में ये तीसरी बार उनके घर बीजेपी की ईडी आई है पिछले एक महीने में दूसरी बार फिर भी कुछ नहीं मिला है उन्होंने आगे लिखा, ईडी-बीजेपी के इस अनैतिक गठबंधन का अंत पंजाब से ही होगा

सच उगलने तक कस्टडी में रखो’: TCS नासिक कांड में निदा खान को नहीं मिली बेल, प्रेग्नेंसी के नाम पर माँग रही थी राहत

                                      निदा खान की जमानत याचिका खारिज (साभार : Dall-E)
नासिक की एक अदालत ने 2 मई को TCS धर्मांतरण मामले की आरोपित निदा एजाज खान को अग्रिम 
जमानत देने से मना कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि अब तक की जाँच से साफ है कि निदा एक सोची-समझी साजिश में शामिल थी, जिसका मकसद पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसका धर्म बदलवाना था

जज केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला काफी गंभीर है, इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए निदा को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करना बहुत जरूरी है। निदा के खिलाफ देवलाली पुलिस स्टेशन में अलग-अलग धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज है।

कोर्ट में निदा खान की सफाई: क्या थीं बचाव पक्ष की दलीलें?

निदा खान के वकील ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि निदा और पीड़िता बस साथ में काम करने वाले सहकर्मी थे और एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने निदा पर लगे सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर फँसाया गया है, जबकि मुख्य आरोप तो दानिश और तौसीफ पर हैं। वकील का यह भी कहना था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि निदा ने सबके सामने जाति को लेकर पीड़िता का अपमान किया हो।

आगे दलील दी गई कि महाराष्ट्र में धर्म बदलने को लेकर कोई अलग कानून नहीं है और जिस धारा (BNS 299) का जिक्र हो रहा है, वह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए है, न कि धर्म परिवर्तन के लिए। वकील के मुताबिक, धर्म पर सामान्य चर्चा करना कोई अपराध नहीं है और इसमें केवल जमानत मिलने वाली धाराएँ ही लगनी चाहिए। साथ ही, निदा के गर्भवती होने का हवाला देते हुए कहा गया कि इस हालत में गिरफ्तारी उनके होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

अभियोजन पक्ष का कड़ा रुख: ‘निदा खान सिर्फ मूकदर्शक नहीं, बल्कि मुख्य साजिशकर्ता’

अभियोजन पक्ष ने निदा खान की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट को बताया गया कि जुलाई 2023 से 2026 के बीच निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। सरकारी वकील ने दलील दी कि निदा ने न केवल पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई, बल्कि FIR में भी उसके नाम और भूमिका का स्पष्ट जिक्र है। जाँच से यह संकेत मिले हैं कि सभी आरोपितों ने आपस में संपर्क कर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया है।

कोर्ट को सूचित किया गया कि निदा खान इस मामले में कोई मामूली भूमिका में नहीं थी। वह ऑफिस में ब्रेक के दौरान पीड़िता से बात करती थी और इस्लाम कबूलने के लिए उसका ब्रेनवॉश करती थी। आरोप है कि उसने पीड़िता को खास मजहबी प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर करने में अहम भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में पीड़िता, उसकी माँ और भाई के बयानों को आधार बनाया।

जाँच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि निदा खान ने ही पीड़िता को बुर्का और इस्लाम से जुड़ी किताबें मुहैया कराई थीं। पीड़िता के फोन में एक ऐसा ऐप भी मिला, जिसे धर्मांतरण के इरादे से इंस्टॉल करवाया गया था। इसके अलावा, निदा उसे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के ऐसे लिंक भेजती थी जिनमें मजहबी उपदेश होते थे। पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों के सोर्स (Source) और निदा के बाहरी संपर्कों की गहराई से जाँच करना जरूरी है।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि निदा खान पीड़िता के घर भी जाती थी। वहाँ उसने पीड़िता को नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग दी और उसे हिजाब व बुर्का पहनने के निर्देश दिए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने की योजना थी। यही नहीं, उसे मलेशिया भेजने की भी तैयारी थी और इसके लिए ‘मालेगाँव पार्टी’ की मदद से दस्तावेज बनवाए जाने थे। इन तमाम विदेशी कड़ियों और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कोर्ट से आरोपित की कस्टडी (हिरासत) की माँग की गई।

पीड़िता के वकील का दावा: पद का फायदा उठाकर बनाया धर्मांतरण का दबाव

सुनवाई के दौरान पीड़िता के वकील ने विस्तार से बताया कि कैसे निदा खान और अन्य आरोपितों ने मिलकर पीड़िता का ब्रेनवॉश किया। वकील ने आरोप लगाया कि निदा और बाकी आरोपितों ने कंपनी में अपने ऊँचे पदों का गलत इस्तेमाल किया ताकि पीड़िता पर दबाव बनाया जा सके। उन्हें न केवल इस्लाम का पालन करने के लिए मजबूर किया गया, बल्कि उनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें मांसाहारी (Non-veg) खाना खाने के लिए भी विवश किया गया। इसके अलावा, कोर्ट को बताया गया कि आरोपित हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणियाँ करते थे और ऑफिस में पीड़िता को उनकी जाति को लेकर अपमानित किया जाता था।

पीड़िता के पक्ष ने एक और गंभीर बात कोर्ट के सामने रखी। उन्होंने कहा कि निदा खान सिर्फ पीड़िता तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उसने उसके परिवार को भी धर्मांतरण के लिए मजबूर करने की कोशिश की। इसके लिए बाकायदा धमकी भरे और डराने वाले तरीके अपनाए गए ताकि पूरे परिवार पर दबाव बनाया जा सके। इन दलीलों के जरिए कोर्ट को यह समझाने की कोशिश की गई कि यह मामला केवल आपसी बातचीत का नहीं, बल्कि एक गहरी और डरावनी साजिश का हिस्सा है।

कोर्ट का फैसला: ‘पहली नजर में आरोपित की भूमिका साफ दिखती है’

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने सह-आरोपितों और निदा खान की भूमिकाओं के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया। जज ने गौर किया कि जहाँ अन्य दो आरोपित पहली नजर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 75 के तहत अपराधों में शामिल थे, वहीं निदा खान की भूमिका धारा 299 और SC/ST एक्ट के प्रावधानों के तहत दिखाई दे रही है।

जज ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि FIR में न केवल निदा खान का नाम शामिल है, बल्कि उसकी भूमिका का भी साफ जिक्र है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि आरोपितों ने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में ‘आपत्तिजनक कहानियाँ’ सुनाईं और पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज किया गया है कि निदा खान ने पीड़िता को बुर्का दिया था। इसके अलावा, आरोपितों ने उसे पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर आधारित एक किताब दी और निदा खान खुद पीड़िता के घर जाकर उसे मजहबी ट्रेनिंग देती थी।

कोर्ट की टिप्पणी: ‘यह कोई साधारण बातचीत नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश’

कोर्ट ने अपनी बातों को और स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़िता और निदा खान के बीच धर्म पर हुई बातचीत कोई इत्तेफाक या साधारण चर्चा नहीं थी। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत साफ दिखाते हैं कि पीड़िता को फँसाने के लिए बहुत ही सलीके से और योजना बनाकर काम किया गया था। जज ने इस बात को गंभीरता से रखा कि यह अपराध कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरी परतें और एक बहुत बड़ी साजिश छिपी हुई है।

अदालत ने उन सबूतों पर भी कड़ी चिंता जताई, जिनसे पता चला कि आरोपित पीड़िता का नाम बदलना चाहते थे और उसे मलेशिया भेजने की तैयारी में थे। जज ने साफ कहा कि हमारा संविधान हर किसी को अपनी पसंद का धर्म और नाम चुनने की आजादी देता है, लेकिन किसी का ब्रेनवॉश करके या साजिश रचकर उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है। कोर्ट ने माना कि व्यक्ति के अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन किसी को धोखे का शिकार बनाकर उसका धर्म बदलवाना कानूनी रूप से अपराध है।

कोर्ट का फैसला: ‘सच उगलवाने के लिए पुलिस कस्टडी है जरूरी’

कोर्ट ने साफ कहा कि इस केस की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपित को पुलिस की गिरफ्त में रखना जरूरी है। कोर्ट का मानना है कि यह मामला काफी पेचीदा है, क्योंकि जाँच में ‘मालेगाँव पार्टी’ के साथ-साथ कई अन्य शहरों और विदेशों के नाम भी जुड़े मिले हैं। खासकर मलेशिया में बैठे ‘इमरान’ जैसे लोगों और इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में पूछताछ करना बेहद आवश्यक है, ताकि इस पूरी साजिश की हर कड़ी को जोड़ा जा सके।

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प्रेग्नेंसी की दलील भी नहीं आई काम, कोर्ट ने ठुकराई राहत

निदा खान के वकील ने दलील दी कि वह गर्भवती है और गिरफ्तारी का उसके होने वाले बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में सिर्फ प्रेग्नेंसी के आधार पर कानून में कोई अलग छूट नहीं मिलती। कोर्त ने इस बात को सही माना और कहा कि अग्रिम जमानत जैसी बड़ी राहत केवल बहुत ही खास और मजबूरी वाले हालात में दी जाती है, जो इस केस में कहीं नहीं दिखते। इन्हीं वजहों से जज ने निदा खान की याचिका में कोई दम न पाते हुए उसकी जमानत की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया।

तेलंगाना : हिन्दू विरोधी कांग्रेस सरकार ने बुलडोजर से ढहाया 800 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर

                                                                                                                                साभार: NDTV
तेलंगाना के वारंगल में विकास के नाम पर विनाश का एक खौफनाक मामला सामने आया है। प्रशासन ने एक स्कूल बनाने के लिए खानापुर में काकतीय काल के करीब 800 साल पुराने प्राचीन शिव मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। इस घटना के बाद इतिहासकारों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है, जिसके बाद केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग ने केस दर्ज कर लिया है।

इतिहास पर चला दिया बुलडोजर

यह मंदिर महज पत्थर की दीवारें नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी की अनमोल विरासत थी। यह महान काकतीय राजा गणपतिदेव के शासनकाल का प्रतीक था। मंदिर परिसर में फरवरी 1231 ईस्वी का एक दुर्लभ शिलालेख भी था, जिसमें राजा को ‘महाराजाधिराज’ बताया गया था। प्रशासन की एक लापरवाही ने सदियों पुराने इस गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिला दिया।

प्रशासन की बेतुकी सफाई और शिकायत

विवाद बढ़ता देख जिला प्रशासन अब लीपापोती में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि वहां केवल ‘जर्जर अवशेष’ थे और वह जगह ‘संरक्षित स्मारक’ में दर्ज नहीं थी। हालाँकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि 1965 में ही हेरिटेज विभाग ने इसे डॉक्युमेंट किया था। इस मामले में अधिवक्ता रामाराव ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में शिकायत की है, जिसके बाद अधिकारियों पर ‘तेलंगाना हेरिटेज एक्ट’ की धारा 30 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की माँग की जा रही है।

बढ़ते विरोध के बाद सरकार के बदले सुर

धरोहर पर हुए इस हमले के बाद जब हिंदू संगठनों और पुरातत्व विशेषज्ञों ने मोर्चा खोला, तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। वारंगल कलेक्टर और स्थानीय विधायक ने घटनास्थल का दौरा किया। भारी विरोध को देखते हुए अब सरकार ने आश्वासन दिया है कि उसी स्थान पर प्राचीन पारंपरिक शैली में मंदिर का दोबारा निर्माण कराया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जो ऐतिहासिक शिलालेख और प्राचीन अवशेष नष्ट हो गए, क्या उनकी भरपाई हो पाएगी?

सुवेंदु अधिकारी को भगवामय बंगाल का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई; अब हिंदुओं को सोया हुआ कह कर गाली देना बंद करो; हिन्दू को इसी तरह जागे रहना होगा

सुभाष चन्द्र

याद करो 1555 में फ्रेंच ज्योतिष ने कहा था कि हिन्द(भारत) को असली आजादी 2014 में मिलेगी। जो शनैः शनैः शत-प्रतिशत सत्य हो रही है। लेकिन हिन्दुओं को भी एकचित होकर जागे हुए सोने के नाटक करने की बजाए सेकुलरिज्म के नशे में मदहोश हुए हिन्दुओं को भी सेकुलरिज्म के नशे को उतार जगाए रखना होगा। कालनेमि हिन्दुओं, जातिगत सियासत करने वालों दलाल वकीलों और सनातन को कलंकित करने वालों का बहिष्कार करना होगा। सेकुलरिज्म हिन्दू विरोधी है, सेकुलरिज्म की सियासत में एक हाथ से ताली बजाना बंद करनी होगी।     

कांग्रेस के 30 साल, CPM के 34 साल और ममता के 15 साल यानी कुल 79 साल के बाद बंगाल सही मायने में आज़ाद हुआ और उपहार में हिंदू शक्ति ने उसे भगवामय कर दिया इस भगवामय बंगाल की कमान सुवेंदु अधिकारी (एक और कुंवारे) को दे दी गई ममता बनर्जी की TMC को छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले सुवेंदु अधिकारी ने पिछले 5 साल में कठिन परिश्रम किया और दो दिन पहले ही उन्होंने एक नया नारा दिया - “जो हमारे साथ है, हम उसके साथ हैं” जाहिर है इसमें सन्देश साफ़ है क्योंकि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा उन लोगों को पसंद नहीं आया जो सब कुछ मोदी से लेकर भी साथ तो देते ही नहीं थे बल्कि विश्वासघात करते थे

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अभी कुछ दिन पहले कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने मुस्लिमों के लिए घर बनाने और उनके क्षेत्रों के विकास के लिए 600 करोड़ का बजट आबंटन किया है मतलब घर बनेंगे तो केवल मुस्लिमों के लिए कुछ ऐसा ही नज़ारा अब सुवेंदु अधिकारी को बंगाल में दिखा देना चाहिए जो भाजपा को नहीं चाहते उन्हें खैरात देना बंद कर देना चाहिए

बहुत से लोगों की आदत है हर समय हिंदुओं को कोसने की जब भी भाजपा हार जाती है तो तुरंत उछलते हैं, हिंदू सोया रहता है, हिंदुओं में एका नहीं हो सकता, हिंदू ऐसे हैं, वैसे हैं लेकिन बंगाल को देख कर अब ऐसा कहना बंद कर देना चाहिए एक वरिष्ठ यूटूबर ने तो बंगाल में UGC को घुसेड़ दिया था कि उसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा सब फेल हो गए

मेरी एक बहुत पुरानी मांग है जिस पर अब कार्यवाही हो सकती है बंगाल के 9 जिलों और असम के 4 जिलों को जोड़ कर एक केंद्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए इस सभी जिलों की सीमाएं बांग्लादेश के साथ लगती हैं और इस वजह से सबसे ज्यादा घुसपैठ इनमे ही हुई है ममता के राज में घुसपैठ की वजह से मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है

बंगाल के ये जिले हैं दार्जिलिंग (3.4%); जलपाई गुडी (13.25%); कूच बिहार (25.54%); उत्तरी दीनापुर (49.92%); दक्षिणी दीनापुर (24%); मालदा (51.27%); मुर्शिदाबाद (66.27%); नादिया (26.76%); और उत्तरी 24 परगना (25.82%) - मुस्लिम आबादी ब्रैकेट में दी हुई है

असम के ऐसे 4 जिले हैं धुबरी (79.67%), करीमगंज (56.36%), कछार (36.13%) और साउथ सलमारा (95.2%)

सुना है कुछ बांग्लादेशी वापस लौटना शुरू हो गए हैं जो भी घुसपैठिए हैं उन्हें एक निश्चित अवधि में भारत छोड़ने के लिए कहना चाहिए वरना फिर जबरन निकाल दिया जाएगा

इसके अलावा जो CBI पर ममता ने बैन लगाया हुआ था राज्य में वह तत्काल हटा देना चाहिए जो भी मुकदमे ममता की पार्टी के लोगों पर ED/CBI ने चलाए हुए हैं, उनका निपटारा शीघ्र करने के लिए कोशिश होनी चाहिए जिसके लिए Fast Courts का गठन कर देना चाहिए

बंगाल के 2021 चुनाव में जो हिंसा हुई थी, उसके लिए याचिकाएं अभी 5 साल बाद भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं उन पर जल्द फैसले के लिए अपील दायर की जानी चाहिए 

सुवेंदु अधिकारी के PA चन्द्रनाथ रथ के बिना सुवेंदु को शपथ ग्रहण अधूरा लगेगा उसके हत्यारों को किसी भी तरह ढूंढ कर एनकाउंटर कर देना चाहिए कानून के रास्ते से वो 20 साल आज़ाद रहेंगे

भारत-वियतनाम रिश्तों को मिली नई ऊंचाई: प्रधानमंत्री मोदी- तो लाम की बैठक में रणनीतिक साझेदारी


नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज 6 मई को कूटनीति की एक नई इबारत लिखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत ने भारत-वियतनाम रिश्तों को एक नया आयाम दे दिया। ज्वाइंट प्रेस मीट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के महज एक महीने के भीतर तो लाम का भारत दौरा इस बात का संकेत है कि वे इस साझेदारी को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति तो लाम का स्वागत करते हुए उनके बोधगया दौरे का विशेष जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच केवल व्यापार का ही नहीं, बल्कि आत्मा और संस्कृति का भी रिश्ता है। वियतनाम की 15 प्रतिशत आबादी ने पिछले साल भारत से गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन किए थे, जो यह बताता है कि बुद्ध के विचार हमें कितनी मजबूती से जोड़ते हैं।

अब इस विरासत को डिजिटल युग में ले जाने की तैयारी है। भारत वियतनाम की प्राचीन चम्पा सभ्यता के मंदिरों का जीर्णोद्धार तो कर ही रहा है, साथ ही अब वहां की प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल धरोहर को सहेजने की मोदी सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है।

एक दशक पहले पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देश ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनर’ बने थे। लेकिन आज इस रिश्ते को एक कदम और ऊपर ले जाते हुए ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का नाम दिया गया है। इससे साफ है कि अब सहयोग सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिफेंस, सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे गंभीर क्षेत्रों में दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।

व्यापार के मोर्चे पर दोनों देशों ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं। पिछले 10 सालों में व्यापार दोगुना होकर 16 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जिसे 2030 तक 25 बिलियन डॉलर करने का टारगेट है। जल्द ही वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेंगे, जबकि भारतीय बाजारों में वियतनाम के डूरियन और पोमेलो जैसे फल देखने को मिलेंगे।

इतना ही नहीं, अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की पहुंच और आसान होगी। डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का UPI और वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द ही आपस में जुड़ने जा रहे हैं। यानी अब पैसे का लेन-देन चुटकियों में होगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को पंख लगेंगे।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को लेकर दोनों देशों का नजरिया एक जैसा है। पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए वियतनाम का आभार जताया। उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एक साथ हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग न केवल भारत और वियतनाम के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने बुद्ध की एक सीख का जिक्र करते हुए अपनी बात खत्म की- “यदि आप किसी और के लिए दीप जलाते हैं, तो वह आपके अपने मार्ग को भी प्रकाशमान करता है।” इसी भावना के साथ भारत और वियतनाम एक-दूसरे की तरक्की में मददगार बनेंगे। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद ये दोनों देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं और अब इनका लक्ष्य मिलकर ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के सपने को सच करना है। 

बंगाल : सत्ता बदलते ही 1600 करोड़ रूपए का घोटालेबाज़ महफूज आलम कानपुर भागा : उत्तर प्रदेश पुलिस ने दबोचा

                   1600 करोड़ के फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड महफूज आलम गिरफ्तार (साभार: इंडिया टूडे)
तृणमूल कांग्रेस(TMC) के संरक्षण में बंगाल के कोलकाता में छिपे 1600 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार के सरगना महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी को कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 24 लाख रुपए की लूट की जाँच के दौरान जिस बड़े हवाला नेटवर्क का खुलासा हुआ था।

महफूज ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी बैंक खातों का विशाल जाल खड़ा किया और उन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन को अंजाम दिया। पुलिस जाँच में अब तक करीब 1600 करोड़ रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन के सीधे प्रमाण मिले हैं, जबकि कुल लेनदेन 3200 करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है।

गरीबों के दस्तावेजों से खुलते थे फर्जी खाते

पुलिस जाँच में सामने आया है कि महफूज मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला लगाने वालों और बेरोजगार युवकों को लोन दिलाने या आर्थिक मदद का झाँसा देकर उनके आधार, पैन और अन्य दस्तावेज जुटाता था। इसके बाद अलग-अलग बैंकों में उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते थे।

पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी, जिनकी मदद से करोड़ों रुपए का लेनदेन बिना शक के चलता रहा। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपित ने 16 बैंकों में 100 से ज्यादा खातों का इस्तेमाल किया।

आरती इंटरप्राइजेज और राजा इंटरप्राइजेज जैसी कई फर्जी कंपनियों के जरिए हवाला कारोबार संचालित किया गया। पुलिस को इस नेटवर्क के तार GST फ्रॉड और स्लॉटर हाउस से जुड़े आर्थिक अपराधों से भी जुड़े मिले हैं।

ससुराल बना ‘सेफ हाउस’, TMC के संरक्षण में था आरोपित, सत्ता बदलते धराया

पुलिस के अनुसार, महफूज लंबे समय से फरार चल रहा था और कोलकाता में अपनी ससुराल में छिपा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसे वहाँ कुछ TMC नेताओं का संरक्षण भी मिला हुआ था, जिसकी वजह से वह लगातार गिरफ्तारी से बचता रहा। कानपुर पुलिस उसकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए कोलकाता पुलिस के संपर्क में भी थी।

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने और गिरफ्तारी का खतरा बढ़ने के बाद महफूज ने कानपुर लौटने का फैसला किया। पुलिस पहले ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी और शहर पहुँचते ही उसे गिरफ्तार कर लिया। एसीपी अभिषेक पांडे के मुताबिक, पता लगाया जा रहा है कि फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और किन-किन ठिकानों पर छिपा रहा।

ED, RBI और आयकर विभाग भी जाँच में जुटे

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कई केंद्रीय एजेंसियाँ भी जाँच में शामिल हो गई हैं। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और RBI पूरे नेटवर्क की वित्तीय जाँच कर रहे हैं। पुलिस अब इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि कहीं हवाला के जरिए टेरर फंडिंग या अन्य संगठित अपराधों को पैसा तो नहीं पहुँचाया गया।

इस मामले में महफूज के बेटे मासूम और साले महताब आलम को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं उसकी बीवी समेत नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक, अब तक आरोपित के खिलाफ पाँच गंभीर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और आने वाले दिनों में इस घोटाले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट से नहीं मिली जमानत

दंगाई हों, बलात्कारी हों, पत्थरबाज हों या फिर मजहब बदलने वाले/वाली हो भांडा फूटने पर छिपे-छिपे फिरते है, क्यों? अदालतों को चाहिए कि इन उपद्रवियों को तलाशने में जो खर्चा हुआ है उसकी वसूली करनी चाहिए। इन उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए।        
TCS धर्मांतरण मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गुरुवार (7 मई 2026) को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।

पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस की मदद से की गई। मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और अब तक आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि TCS से जुड़े BPO यूनिट के भीतर मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किए जाने के आरोप सामने आए थे।

पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं निदा खान महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीके अपनाने और मजहबी सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को कुछ मोबाइल एप और मजहबी कंटेंट भेजे गए थे और उसका नाम बदलने की योजना तक बनाई जा रही थी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, SIT ने बताए कई अहम लिंक

गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में अलग से कोई धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और जबरन धर्मांतरण के आरोप बेबुनियाद हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियाँ सामने आई हैं, इसलिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

SIT ने कोर्ट को यह भी बताया कि जाँच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगाँव और यहाँ तक कि मलेशिया तक पहुँच गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।

कई धाराओं में केस दर्ज, लगातार बदल रही थी ठिकाने

पुलिस के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही निदा खान फरार चल रही थी और उसके मोबाइल फोन समेत कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके शौहर से पूछताछ के बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार पुलिस को बंद मकान ही मिले। इसके बाद राज्यभर में तलाश अभियान तेज किया गया।

मामले में निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएँ आहत करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

भरी फ्लाइट में TMC सांसद महुआ मोइत्रा की फजीहत, ‘पिशी चोर(आंटी चोर)’, ‘भाइपो चोर (भतीजा चोर), तृणमूल के सब चोर… यात्रियों ने जोर-जोर से की नारेबाजी: Video

                                                           TMC MP महुआ मोइत्रा
बंगाल में हुई ममता बनर्जी की करारी हार और बीजेपी की जीत की गूंज सिर्फ भारत ही नहीं विदेशों में बैठे भारत विरोधियों और भारत में बैठे उनके sleeper cells की नींद हराम करने वाली है। विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत के विरुद्ध षड़यंत्र रचने वालों को चारों खाने चित कर दिया है। ममता के राज में जिस तरह सनातन को रोंदने की कोशिश हो रही थी वह साबित करती है ममता इन सनातन विरोधियों की कठपुतली बन सबकुछ कर रही थी। इस गंभीर घटनाक्रम पर समूचा मीडिया खामोश है, क्यों?    

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी की नेता महुआ मोइत्रा की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह फ्लाइट में बैठी हुई हैं और कुछ लोग उनके खिलाफ जोर-जोर से नारे लगा रहे हैं।

वीडियो में लोग उन्हें ‘पिशी चोर (आंटी चोर)’, ‘भाइपो चोर (भतीजा चोर)’ और ‘तृणमूल के सब चोर’ जैसे नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं। इसके साथ ही ‘जय श्रीराम’, ‘जय माँ दुर्गा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए जा रहे हैं। देख सकते हैं कि जिस समय ये घटना घटी उस वक्त महुआ मोइत्रा फ्लाइट के अंदर खड़ी थीं और चुपचाप बाहर निकलने का इंतजार कर रही थीं।

अवलोकन करें:-

बंगाल में BJP की जीत से विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत विरोधियों के मंसूबों पर पा
बंगाल में BJP की जीत से विदेशों में बैठे मुस्लिम कट्टरपंथियों और भारत विरोधियों के मंसूबों पर पा
 

घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को टैग करते हुए माँग की कि नारेबाजी करने वाले यात्रियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने एयरलाइन से भी यात्रियों की जानकारी देने को कहा।