फ्रांस में भी दंगाइयों से निपटने के लिए गूंजा योगी मॉडल


फ्रांस में यूपी के योगी मॉडल की चर्चा हो रही है। वहां के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस मॉडल को अपनाने की बात चल रही है। जानते हैं क्यों? फ्रांस के अलग-अलग हिस्सों में दंगाइयों ने जो तोड़फोड़ की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, अब वहां की सरकार उसी नुकसान की भरपाई दंगाइयों के पैसों और उनकी प्रॉपर्टी से कराने की तैयारी कर रही है।

इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल को अपनाने की चर्चा हो रही है। यूपी में साल 2020 में ऐसा कानून लाया गया था, जिसके तहत दंगों या विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से उस नुकसान की भरपाई कराई जा सकती है।
आखिर कानून-व्यवस्था को लेकर योगी मॉडल की चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों हो रही है? इसे थोड़ा विस्तार से समझना होगा।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने साल 2020 में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक और निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम बनाया था। इसका मकसद दंगाइयों और हिंसा करने वालों पर कार्रवाई करना था, खासकर उन लोगों पर जो आगजनी करते हैं, सरकारी संपत्ति तोड़ते हैं या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं।
इस कानून के तहत बंद, हड़ताल, दंगे, सार्वजनिक जगहों पर हंगामा और विरोध प्रदर्शन के दौरान अगर कोई सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उससे उस नुकसान की भरपाई कराई जा सकती है।
इसके लिए एक दावा अधिकरण यानी क्लेम्स ट्रिब्यूनल बनाया गया है। यह अधिकरण देखता है कि कितना नुकसान हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जिम्मेदारी तय होने के बाद यह नुकसान की भरपाई करने का आदेश भी दे सकता है।
अब फ्रांस की बात करते हैं। वहां हुई हिंसा के दौरान कई दुकानों, सरकारी इमारतों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था। इसके बाद फ्रांस की सरकार ने साफ कर दिया कि दंगाइयों को सिर्फ आपराधिक सजा देना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्होंने जो नुकसान किया है, उसकी भरपाई भी उन्हीं के पैसों से कराई जानी चाहिए।
इसके बाद 16 सितंबर 2026 को फ्रांस की सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ से हुए नुकसान की भरपाई कराने और मुआवजे की वसूली से जुड़ा एक विधेयक पेश किया।
इस प्रस्ताव में यह व्यवस्था करने की बात है कि सामूहिक हिंसा में शामिल लोगों की आर्थिक जिम्मेदारी तय की जाए। कुछ परिस्थितियों में इसमें शामिल लोगों को नुकसान की भरपाई के लिए संयुक्त रूप से भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
यानी बात सिर्फ दंगाइयों को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने जो नुकसान किया है, उसकी कीमत भी उनसे वसूलने की है।
और अब इसी वजह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल की चर्चा फ्रांस में हो रही है। जिस तरीके से यूपी में दंगों और तोड़फोड़ के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूलने के लिए कानून बनाया गया था, उसी तरह की व्यवस्था फ्रांस में भी लागू करने की तैयारी की बात सामने आ रही है।

जॉर्जिया मेलोनी ने दंगाइयों के खिलाफ बनाया सख्त प्लान, नाबालिग दंगाइयों के लिए माता-पिता जिम्मेदार


जॉर्जिया मेलोनी ने 24 घंटे के अंदर वो कर दिखाया, जो यूरोपियन यूनियन (EU) के बड़े-बड़े नेता 30 साल में भी नहीं कर पाए। मेलोनी ने इटली में दंगों को रोकने के लिए ऐसी पॉलिसी बनाई है, जिसकी वजह से पूरे यूरोप में चर्चा शुरू हो गई है। स्टूडेंट प्रोटेस्ट और हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए उन्होंने एक सख्त प्लान तैयार किया है, जिसे 'एंटी-रायट डॉक्ट्रिन' कहा जा रहा है।

मेलोनी ने साफ कह दिया है कि अगर कोई सड़क पर दंगा करेगा, तो उसके परिवार को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। अगर कोई हिंसक प्रदर्शन में शामिल होता है, तो उसे 5 साल तक की जेल और 20,000 का जुर्माना देना पड़ सकता है। मेलोनी समझ गई हैं कि नकाब पहनकर हिंसा करने वाली भीड़ को सिर्फ आंसू गैस चलाकर नहीं रोका जा सकता। इसके लिए उनके पैसे और हिंसा की तैयारी में मदद करने वाले पूरे नेटवर्क पर चोट करनी होगी।
और जैसे ही इटली में दंगाइयों के माता-पिता पर जुर्माना लगाने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात सामने आई, मिलान में 500 सैनिकों को तैनात करने की भी बात हुई। इसके बाद अचानक वहां के युवा प्रदर्शनकारी सड़कों से गायब हो गए। पता नहीं कहां छिप गए, जैसे जमीन में समा गए हों!
मेरे हिसाब से यह उस पूरे सिस्टम के खिलाफ एक सीधा जवाब है, जिसमें बड़े-बड़े अमीर लोग एनजीओ (NGOs) को पैसा देते हैं और फिर उन्हीं के जरिए युवाओं को आगे करके किसी देश में अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं। इन युवाओं को आगे करके उन्हें एक तरह से ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है, ताकि देश की सरकार को कमजोर किया जा सके और देश में अस्थिरता पैदा हो।
जब आप हिंसक प्रदर्शन करने वालों के पैसे के इंतजाम और कानून से बचने के रास्ते बंद कर देते हैं, तो इस तरह की गतिविधियों के पीछे काम करने वाले लोगों की असलियत सामने आने लगती है।
मेरे हिसाब से भारत को भी इसी तरह के मॉडल पर विचार करना चाहिए। अगर कोई अधिकारों के नाम पर हाईवे जाम करता है, सरकारी या आम लोगों की संपत्ति तोड़ता है या उसे आग लगाता है, तो नुकसान की भरपाई भी उसी से कराई जानी चाहिए। देश की जनता को परेशान करके और पूरे देश को बंधक बनाकर रखना लोकतंत्र नहीं है।
हां, विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन विरोध करने का भी एक तरीका होता है। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों के अधिकार छीन लें, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं या आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दें।

राहुल गांधी भी सोचता होगा, मोदी को हटा दो यार, मैं हर जगह हार हार कर हार चुका हूं; EVM को छोड़ो, बैलट पेपर भी नहीं जिता रहे

सुभाष चन्द्र

राहुल गांधी से न होगा। खरगे बकता है “मोदी का बाप भी जाएगा” और राहुल गांधी सोचता है कभी कॉकरोचों की पीठ पर चढ़ कर, कभी खुद रैलियां निकाल कर मोदी को उखाड़ फेंकेगा लेकिन चुनाव दर चुनाव जनता ही राहुल की कांग्रेस को उखाड़ फ़ेंक रही है, फिर चाहे बैलट पेपर से ही वोटिंग क्यों न हो?

अभी हाल ही में हुए विधान परिषदों के चुनाव में उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, कांग्रेस शासित कर्नाटक की 4 और महाराष्ट्र की 5 सीटों में कांग्रेस को जीरो सीट मिली और राहुल को शुन्यवीर बना दिया।

इन चुनावों में EVM का नहीं बैलट बॉक्स का उपयोग हुआ। अगर वोट चोरी होती है तो DK Shivkumar कर्नाटक में करा लेता।

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
ऐसा कहना सही होगा “ज़ीरो से मोहब्बत कर बैठा, नादान बेचारा राहुल ही तो है”।

लेकिन फिर भी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में हुड़दंग करने को आतुर है।

-इसके पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के चुनाव में भी कांग्रेस की NSUI को शून्य मिला। ABVP 4 में से 3 सीट जीत गई;

-केरल की सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी ABVP ले गई जहां सी.पी.एम. का डिब्बा गोल हो गया और Government Sanskrit College in Tripunithura में ABVP ने चुनाव जीत कर सी.पी.एम. का 35-40 साल पुराना किला ढहा दिया;

-इसी महीने हुए गुजरात के कारपोरेशन चुनाव में गांधीनगर में भाजपा को 44 में 38 सीट मिली और कांग्रेस को केवल 5; थरा नगरपालिका की 24  में से भाजपा को 19 सीट मिली और कांग्रेस को 5 और ओखा नगरपालिका की 36 सीट में से भाजपा को 33 सीट मिली और कांग्रेस को 3;

-असम की सिल्चर कारपोरेशन में 42 सीट में से 32 सीट भाजपा को मिली और कांग्रेस को मात्र 2 जबकि उसने 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 

ये सब निगमों के चुनाव बैलट पेपर से हुए थे। हर जगह कांग्रेस नाकाम लेकिन फिर भी राहुल गांधी चाहता है कि प्रदर्शन और हुड़दंग कर व्यापार जगत को नुकसान पहुंचा कर किसी तरह मोदी को हटा दिया जाए।

उसे अब तक समझ आ जाना चाहिए कि उसका नेतृत्व विफल हो चुका है और उसमे न कोई दम है और न काबिलियत है। पता नहीं कांग्रेस क्यों इस गांधी परिवार को ढो रही है? इस परिवार से मुक्ति पाए बिना कांग्रेस का उद्धार नहीं हो सकता।

अरे राहुल भैया खड़के ने करवा दिया वोट चोरी, निकालो पार्टी से

मोदी, तू क्या, तेरा बाप भी जाएगा! तेरा बाप भी जाएगा!

ये कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी पटना में एक सभा के दौरान ऐसा कहा।
और फिर एक बार कांग्रेस के साथ वही हुआ, जिसे देखकर लगता है कि वोट चोरी हो गई। कांग्रेस के खाते से लाखों वोट कट गए और बीजेपी के खाते में जुड़ गए।
हुआ यूँ कि पटना में खरगे जी एक सभा में भाषण दे रहे थे। वही पुराना राग अलाप रहे थे, वोट चोरी हो रही है, न जाने क्या-क्या। तभी कांग्रेस का एक कार्यकर्ता खड़ा हुआ और खरगे जी को आईना दिखाते हुए कह दिया कि मोदी कहीं नहीं जा रहे हैं।
फिर क्या था! खरगे जी गुस्से से लाल हो गए और चिल्लाकर बोले, "मोदी... मोदी का बाप भी जाएगा, बाप भी जाएगा! मोदी का बाप भी जाएगा, चल!"
वैसे मोदी जी की किस्मत भी कमाल की है। जब-जब कांग्रेस उन्हें गालियाँ देती है, तब-तब उनका वोट शेयर बढ़ता हुआ दिखाई देता है। सोनिया गांधी ने मोदी जी को 'मौत का सौदागर' कहा था, उसके बाद मोदी जी बार-बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। राहुल गांधी पूरे देश में 'चौकीदार चोर है' का नारा लेकर घूमे और नतीजा ये हुआ कि मोदी जी दोबारा प्रधानमंत्री बन गए।
इसी तरह, जब जंतर-मंतर पर इन लोगों ने मोदी जी की माँ को जमकर गालियाँ दीं, तो उसके बाद हुए उपचुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, जिन यूनिवर्सिटी के चुनावों में जेन-ज़ी यानी नई पीढ़ी के युवा वोट कर रहे थे, वहाँ भी बीजेपी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवारों को बड़ी जीत मिली।
अब इन लोगों को कौन समझाए कि अगर मोदी जी को सत्ता से हटाना है, तो जनता के सामने उनसे बेहतर गवर्नेंस मॉडल और काम करने का तरीका पेश करना पड़ेगा। लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस इस झंझट में पड़ना ही नहीं चाहते। उन्हें तो बस किसी तरह सरकार बदलवानी है, यानी रिजीम चेंज करवाना है।

इसीलिए कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों को इकट्ठा करके विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
अब वहाँ भी मोदी जी को गालियाँ दी जाएँगी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का फिर से इस्तीफा माँगा जाएगा। लेकिन चिंता की बात ये है कि कांग्रेस ने कहा है कि इसके बाद वो मार्च भी निकालेगी। अब सवाल ये है कि 10 लाख लोगों की ये मार्च कहाँ निकाली जाएगी, इसकी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है।
देखिए, आजकल फ्रांस और यूरोप के दूसरे देशों में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उनमें एक नया तरीका देखने को मिल रहा है। वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी खतरनाक पटाखे जलाकर सरकारी इमारतों पर फेंकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस भी दिल्ली में इसी तरह का रास्ता अपनाने वाली है? इसलिए अमित शाह और दिल्ली पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहना पड़ेगा।

वैसे, इन लोगों और राहुल गांधी ने अक्टूबर में दिल्ली में जो आंदोलन किया था, उससे दिल्ली के व्यापारियों को 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही जा रही है। और अगर कांग्रेस ने फिर से दिल्ली में हंगामा और अराजकता फैलाने की कोशिश की, तो दिवाली तक व्यापारियों का नुकसान बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।

अब आप ही बताइए, ऐसे हालात में कोई भी समझदार इंसान इन दिमागी नक्सलियों और हर बात पर नाराज रहने वाले फ़ुफ़ाओं को वोट क्यों देगा? अगर जनता का वोट चाहिए, तो जनता के लिए काम करना पड़ेगा, बेहतर विकल्प देना पड़ेगा। सिर्फ गालियाँ देने, वोट चोरी का आरोप लगाने और विरोध प्रदर्शन करने से सरकार नहीं बदलती।

गालीबाज विपक्षी नेताओं की कुंडली: मोदी को अब तक 134 गालियां

गुजरात मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक जितनी गालियां नरेंद्र मोदी को पड़ रही हैं शायद ही भारत के इतिहास में किसी भी नेता को मिली हों। विपक्ष मोदी की कार्यशैली और योजनाओं की आलोचना करने की बजाए ऐसे गाली-गलोच कर रहे जैसे गली का कोई गुंडा देता है। क्या विपक्ष विपक्ष के नाम पर इतनी नीचता पर उतरेगा? मोदी के जो माँ-बाप राजनीति में नहीं रहे उन्हें गालियां किस आधार पर दी जा रही हैं?    
नरेन्द्र मोदी को गाली देने का सिलसिला जारी है। विपक्ष के छोटे से लेकर बड़े नेता तक नफरत से भरे हुए हैं और वे एक के बाद एक प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जहरीले बयान दे रहे हैं। अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार की राजधानी पटना में विवादित बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर अशोभनीय टिप्पणी की। खरगे पीएम मोदी के खिलाफ बोल रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि पीएम मोदी कहीं नहीं जाएंगे। जिस पर खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा।

कब-कब विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया –

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा- मोदी का बाप
25/10/2026
देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देने का सिलसिला जारी है। विपक्ष के छोटे से लेकर बड़े नेता तक नफरत से भरे हुए हैं और वे एक के बाद एक प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जहरीले बयान दे रहे हैं। अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर अशोभनीय टिप्पणी की। बिहार के पटना में डॉ. श्री कृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पीएम मोदी के विरोध में बोल रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि पीएम मोदी कहीं नहीं जाएंगे। जिस पर खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा।

संजय राउत ने कहा अघोरी
13/06/2026
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अघोरी और औरंगजेब जैसे अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया है। संजय राउत ने कहा कि ‘भारतीय राजनीति में इतना अघोरी व्यक्ति कभी पैदा नहीं हुआ। इतना क्रूर व्यक्ति कभी पैदा नहीं हुआ। इसी देश की मिट्टी में पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, पीवी नरसिम्हा राव, राजीव गांधी, बाबासाहेब अंबेडकर और बालासाहेब ठाकरे जैसे महान नेता जन्मे हैं। लेकिन जब हम मोदी जी का पूरा चरित्र देखते हैं, तो डर लगता है कि ये कहां से पैदा हो गए? जिस मिट्टी से औरंगजेब पैदा हुआ था, उसी मिट्टी से ये लोग आए हैं। औरंगजेब गुजरात में ही पैदा हुआ था, है ना?’

अजय राय ने कहा गां#$ फाड़ दी
22/05/2026
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए बेहद अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया है। वाराणसी के कांग्रेस नेता ने आपत्तिजनक बयान देते हुए कहा कि कह देना अजय राय ने प्रधानमंत्री मोदी की गां#$ फाड़ दी है। इतना ही नहीं अजय राय उस एक वाक्य को दोहराते भी हैं। महोबा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान अभद्र और अपशब्दों के इस्तेमाल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग सोशल मीडिया पर लताड़ लगाते हुए कह रहे हैं कि कांग्रेस नेताओं का यही स्तर है।

राहुल गांधी ने कहा गद्दार
20/05/2026
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को गद्दार कहा। रायबरेली में एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने कहा कि जब भी बीजेपी- आरएसएस के लोग आपके सामने आएं और नरेंद्र मोदी-अमित शाह की बात करें तो आप उनसे खुलकर कहिए नरेंद्र मोदी-अमित शाह गद्दार हैं। बीजेपी- आरएसएस गद्दार हैं, क्योंकि आप लोगों ने मिलकर देश को बेचने का काम किया है। बीजेपी और आरएसएस ने संविधान पर, वीरा पासी जी, गांधी जी और अंबेडकर जी पर हमला किया है।

सपा सांसद अजेंद्र कुमार ने कहा हरामी
11/05/2026
महोबा से समाजवादी सांसद अजेंद्र कुमार ने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को हरामी कहकर संबोधित किया। इतना ही नहीं अजेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को देशद्रोही भी कहा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इतना हरामी, इतना देशद्रोही प्रधानमंत्री आजतक नहीं हुआ।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बताया आतंकवादी
21/04/2026
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने काफी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को आतंकवादी बताया है। तमिलनाडु के चेन्नई में मीडिया से बात करते हुए खरगे के कहा कि ‘वे (AIADMK) मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वह एक आतंकवादी हैं और वह समानता में विश्वास नहीं रखते। उनकी पार्टी भी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती। और ये लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।’

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने बताया दुर्योधन
29/08/2025
महाराष्ट्र कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादित बयान दिया है। कांग्रेस नेता ने पत्रकार नीरज झा के साथ एक पॉडकास्ट के दौरान कहा है कि ‘ये धृतराष्ट्र की औलाद हैं, ये दुर्योधन हैं। और चुनाव आयोग को मैं इनका छोटा भाई कहूंगा, जिसे दुशासन कहेंगे, जिसने द्रौपदी की इज्जत पर हाथ डाला था। तो चुनाव आयोग दुशासन है और नरेंद्र मोदी दुर्योधन हैं।’

सुप्रिया श्रीनेत ने दादा-नाना को लेकर कहे अपशब्द
04/11/2024
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की करीबी कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विवादित बयान दिया है। झारखंड के रांची में मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए गालीबाज आंटी के नाम से मशहूर सुप्रिया ने पत्रकारों के एक सवाल पर कहा कि अपने नाना के घर से लाए थे पैसे…मोदी जी के दादा के घर से आया था पैसा।’ सुप्रिया श्रीनेत अपने बयानों के लेकर काफी विवादों में रही हैं, लेकिन बीजेपी नेताओं के खिलाफ अपने अपशब्दों को लेकर कांग्रेस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी की चहेती बनी हुई हैं।

संजय राउत- मोदी का दिमाग सड़ा हुआ है
16/09/2024
शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री को लेकर विवादित बयान दिया है। संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पता नहीं होता है कि वो अब क्या बोलेंगे। उनके मानसिक संतुलन के बारे में पता नहीं चलता है। उनका दिमाग सड़ा हुआ है।’

सपा नेता हाजी रजा- छुल-छुल करके…
20/06/2024
अखिलेश यादव के करीबी समाजवादी पार्टी नेता हाजी रजा ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। सपा नेता हाजी रजा ने पार्टी सांसद नरेश उत्तम पटेल के स्वागत कार्यक्रम के दौरान कहा, “हम आपको इस मंच के माध्यम से बताना चाहते हैं और सांसद जी तरफ से भी आश्वस्त करना चाहते हैं कि अब ये फतेहपुर जनपद में नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में नहीं चलने वाले। जिस समय हमारा सांसद लोकसभा में शेर की तरह दहाड़ेगा ना मोदी छुल-छुल करके मूतेगा। बोलने वाला चाहिए। अपनी बात रखने वाला चाहिए।”

औरंगजेब से तुलना कर दी जमीन में गाड़ने की धमकी
09/05/2024
शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को जमीन में गाड़ने की धमकी दी। प्रधाममंत्री पद और भाषा की मर्यादा भूल राउत तू-तड़ाक भी करने लगे। उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना औरंगजेब से करने के साथ मराठी में दिए गए भाषण में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र में हुआ और औरंगजेब का जन्म गुजरात में हुआ। आप इतिहास देखिए, औरंगजेब का जन्म नरेन्द्र मोदी के गांव में हुआ है। अहमदाबाद के बगल में दाहोद नाम का गांव है, जहां औरंगजेब का जन्म हुआ था। गुजरात में औरंगजेब का जन्म हुआ, यही कारण है कि वह हमारे साथ औरंगजेब की तरह बर्ताव कर रहे हैं। लेकिन याद रहे कि एक औरंगजेब को हमने इस महाराष्ट्र की धरती में गाड़ा है। हमने उस औरंगजेब को महाराष्ट्र की धरती में गाड़ दी। मोदी तू क्या चीज है? मोदी तू कौन है?

राहुल गांधी ने साबित कर दिया कि वह केवल हिंदुओं का घोर शत्रु है और दीपावली का पर्व, व्यापार ठप करना और दंगा करना चाहता है; चीफ जस्टिस अपनी बेंच के साथ रैली में जाएं और देखें क्या करते हैं राहुल के लोग?

सुभाष चन्द्र

बहाना ज्ञानेश कुमार का बना कर राहुल गांधी और कांग्रेस दिल्ली में बड़ा दंगा कराने के मूड में दिखाई देते है। अगर नवंबर के पहले हफ्ते में ईद या क्रिसमस  होता तो राहुल गांधी 1 नवंबर की रैली कभी नहीं करता।

लेकिन क्योंकि दीपावली के साथ 5 दिन के त्योहार आने वाले हैं, राहुल गांधी और कांग्रेस “हिंदुओं” का त्योहार बर्बाद करना चाहते हैं। 

आपको याद होगा क्रिसमस के मौके पर राहुल गांधी ने अपनी कथित “भारत जोड़ो यात्रा” 9 दिन के लिए स्थगित कर दी थी। बस दुश्मनी तो हिंदुओं से है इसे।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
दीपावली के अवसर पर व्यापार से जुड़े लोग भी पूंजी लगाए बैठे होते हैं जिन्होंने ने राहुल को अपील की है कि वो रैली स्थगित कर दे लेकिन राहुल ने उन्हें कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा ले आओ, हम रैली नहीं करेंगे। भला व्यापार जगत ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा कैसे ला सकता है? ज्ञानेश कुमार से लड़ना है तो कोर्ट में जाकर पेश हो या महाभियोग शुरू करे।

बस राहुल की वोट चोरी की फीलिंग पर तो ज्ञानेश कुमार नहीं हटेगा।

व्यापार जगत को 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है लेकिन राहुल को परवाह नहीं है।

दिल्ली पुलिस के साथ केंद्र को भारी संख्या में CRPF भी लगा देनी चाहिए क्योंकि रामलीला मैदान के आस पास तो बड़े बड़े बाजार हैं और कांग्रेसी गुंडे उन बाज़ारो में आग लगाने की कोशिश करेंगे। राहुल गांधी देश का बढ़ता GDP बर्दाश्त नहीं कर पाता और देश को आर्थिक चोट देना चाहता है। 

20-25 जुलाई के बीच हुई CJP की रैली के बाद जिसमें बड़े बड़े पैमाने पर पुलिस बल पर हमले हुए थे, चीफ जस्टिस ने बड़ी बड़ी तक़रीर की थी और 142 के अंतर्गत सभी छात्रों की FIR रद्द करा दी थी। पुलिस के लिए भी प्रवचन दिए थे।

अब बेहतर होगा चीफ जस्टिस खुद और उनकी बेंच के जज रामलीला मैदान की रैली में पुलिस के साथ खड़े होकर देखें कि पुलिस कैसे काम करती है और रैली में आने वाले क्या करते हैं?

कुछ ढक्कन मोदी को “महामानव” कह कह कर उसका मजाक उड़ाते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि मोदी को गिराने की कोशिश के बाद राहुल जैसे अराजक तत्व सत्ता में आएंगे जो न जीने देंगे और न मरने देंगे।

कांग्रेस के नेता गालीबाज हैं और नरेंद्र मोदी को गाली देने के लिए अपना अध्यक्ष भी ऐसा दलित नेता बनाया हुआ है जो मोदी के लिए कोई भी गाली दे सकता है। कांग्रेस ने खड़गे के बयान “मोदी का बाप भी जाएगा” का बचाव करते हुए कहा है कि खड़गे RSS के लिए कह रहे थे क्योंकि बीजेपी का बाप तो RSS है। ये खड़गे और कांग्रेस के लोग भूल जाते हैं कि RSS 100 वर्ष पुराना संगठन है। मोदी बेशक चले जाएं लेकिन RSS कहीं नहीं जाएगा चाहे तुम लाख सर पटक लो।

भारत में ‘रिजीम चेंज’ की विदेशी पटकथा, मोहरा बने राहुल गांधी, 270 गुप्त विदेशी दौरों का सच

जो कांग्रेस भारत को आज़ादी दिलवाने की दुहाई देती रहती है, आज वही कांग्रेस भारत विरोधियों के साथ मिल भारत को खंडित करने में लगने से इसकी आज़ादी की लड़ाई में गंभीर होने पर प्रश्नचिन्ह लगाने में कांग्रेस ही जिम्मेदार है। वरना कांग्रेस बताये कि राहुल गाँधी विदेशों में किन से मिलने जाते हैं और क्या बातें होती हैं। चीन के साथ क्या MoU साइन हुआ है? भारत में राहुल के आगे-पीछे डोलने वाला मीडिया भी खामोश, क्यों?    

भारतीय राजनीतिक गलियारों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के गुप्त विदेशी दौरों को लेकर अक्सर तीखा सियासी घमासान देखने को मिलता है। एक जिम्मेदार नेता होने के बावजूद राहुल गांधी बजट सत्र, चुनाव और उप-राष्ट्रपति शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण असवरों पर विदेश रवाना हो जाते हैं। आम नागरिकों के मन में भी अक्सर यह जिज्ञासा और सवाल रहता है कि एक प्रमुख राजनीतिक दल और प्रतिपक्ष के नेता आखिर इतनी बार विदेश क्यों जाते हैं, उनके इन दौरों का असली मकसद क्या होता है और वे वहां किससे मिलते हैं? लोकतंत्र में पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही की मांग करने वाली कांग्रेस इन सवालों का जवाब नहीं दे रही है। लेकिन देश और विदेश में चल रहे प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के नेटवर्क से सवालों के जवाब मिलने लगे हैं। दरअसल, इन गुप्त विदेश यात्राओं का एक बड़ा मकसद भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने यानी ‘रिजीम चेंज’ के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचना है।

राहुल गांधी ने 10 वर्ष में 270 बार विदेश दौरा किया-दुबे
भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों पर यह दावा किया कि विपक्ष भारत विरोधी विदेशी ताकतों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि चीन में बैठे नेविल रॉय सिंघम, हवाला फंडिंग नेटवर्क, सोरोस फाउंडेशन और अमेरिकी सांसद इल्हान उमर जैसी भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश के भीतर ‘रेिजीम चेंज’ की पटकथा लिखी जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि पिछले 10 वर्षों में 270 बार विदेश जाकर वे किन शक्तियों के संपर्क में रहे। इसका जवाब उन्हें देश को देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “क्या इसके पीछे सरोस थे? क्या सैम पित्रोदा भी इस साजिश में प्रमुख रूप से शामिल है?

वैश्विक कार्टेल और लॉबी मोदी सरकार के खिलाफ- दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया, क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा मानने से इनकार किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर सख्त नीतिगत नेतृत्व दिया। इसी वजह से इन तीनों क्षेत्रों के वैश्विक कार्टेल और लॉबी भारत सरकार के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। विपक्ष उनके हाथ का औजार बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गैंबलिंग 30-35 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार बन चुका है, जबकि बिना किसी कानूनी वजूद वाली क्रिप्टोकरेंसी पूरी दुनिया में लोगों को बर्बाद कर रही है।

भारत में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश-दुबे
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से आम नागरिकों के साथ ही व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को परेशानी हो रही है। पर्व के समय प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे प्रदर्शनों को कुछ भारत विरोधी तत्वों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने मलेशिया में बैठे जाकिर नाइक, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू और कराची में बैठे दाऊद इब्राहिम का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ऐसे तत्व देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। सांसद ने दावा किया कि उनका उद्देश्य भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसी हालत की ओर धकेलना और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना है।

 

राहुल गांधी पर युवाओं की भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
निशिकांत दुबे ने राहुल पर आरोप लगाया कि वह उन विदेशी ताकतों से मिलते हैं, जो भारत को तोड़ने की भावना रखती हैं और फिर उनके ही इशारे पर भारत में आंदोलन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयानों और विरोध प्रदर्शनों से युवाओं की भावनाएं भड़कती हैं, जिसके कारण कई युवाओं को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जबकि इस दौरान राहुल गांधी विदेश चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के ही इशारे पर यहाँ आंदोलन भड़काया गया और इसी का परिणाम है कि आशुतोष रांका और सौरभ दास जैसे युवाओं को कुछ दिन जेल में रहना पड़ा। इसके बाद गांधी वियतनाम चले गए।
राहुल, सलील और ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ कनेक्शन
सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर फरवरी 2023 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी के साथ चल रहे सलील शेट्टी और निखिल डे की तस्वीरें शेयर की हैं। सलील शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा समर्थित ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ के वैश्विक उपाध्यक्ष थे। सलील शेट्टी के राहुल गांधी के साथ चलने और कांग्रेस के जॉर्ज सोरोस के साथ ‘रिश्ते’ पर सवाल उठाए गए। उनके पुराने ट्वीट्स को खंगालते हुए यह दावा किया गया कि सलील सीएए-विरोधी (CAA) प्रदर्शनों में शामिल रहे थे और उन्होंने फाइजर (Pfizer) तथा मॉडर्ना (Moderna) टीकों की पैरवी की थी।
वामपंथी संगठन ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ से जुड़े हैं निखिल डे
राहुल गांधी के करीबी निखिल डे प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के निर्णय लेने वाले मुख्य कार्यकारी निकाय तथा सलाहकार परिषद का हिस्सा हैं। निखिल डे भारत में ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ (MKSS) के संस्थापक सदस्य भी हैं। प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल एक अंतरराष्ट्रीय संगठन या नेटवर्क है, जिसका दावा है कि वह दुनिया भर में वामपंथी, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करने का काम करता है। यह आरोप लगाया जाता रहा है कि यह कई देशों में घरेलू आंदोलनों को समर्थन देकर वहां की सरकारों के खिलाफ माहौल बनाने या कथित तौर पर ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) के एजेंडे में शामिल रहता है। दावा किया जा रहा है कि भारत के भीतर होने वाले विभिन्न विरोध-प्रदर्शनों, अराजकता या राजनीतिक माहौल को हवा देने के पीछे ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ जैसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स और संगठनों की सहभागिता रहती है। अप्रैल 2025 में राहुल गांधी ने प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी। 
‘ओपन सोसाइटी’ का भारत में निवेश और ईडी की कार्रवाई 
सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में भारत में ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ से जुड़े संगठनों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई का आंकड़ा पेश किया। इसके मुताबिक ईडी ने सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) द्वारा भारत की 12 कंपनियों में 300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की जांच की है। 18 मार्च 2025 को बेंगलुरु में आठ परिसरों की तलाशी ली गई, जिनमें Open Society Foundations (OSF) से संबंधित कार्यालय और Aspada Investments Pvt. Ltd. भी शामिल थे। दस्तावेज़ के अनुसार, SEDF ने तीन कंपनियों के माध्यम से लगभग 25–26 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि बाकी नौ कंपनियों में अधिक पूंजी पहुंचने का संदेह जताया गया।
‘ओपन सोसाइटी’ पर FCRA के उल्लंघन का आरोप
आरोप है कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और परामर्श शुल्क के जरिए विदेशी अंशदान नियमन कानून (FCRA) से जुड़ी पाबंदियों को दरकिनार करने की कोशिश की गई। ईडी के हवाले से दस्तावेज़ में कहा गया है कि Compulsorily Convertible Preference Shares (CCPS) के जरिए निवेश किया गया। केवल एक कंपनी Rootbridge Services को ऐसे शेयरों के माध्यम से 18.6 करोड़ रुपये मिलने का उल्लेख है। मॉरीशस स्थित AIC और भारत में स्थापित सलाहकार कंपनियों के माध्यम से निवेश के प्रबंधन का उल्लेख है। दस्तावेज़ में यह भी सवाल उठाया गया है कि निवेश से जुड़ी गतिविधियों में पारदर्शिता थी या नहीं। दस्तावेज़ का दावा है कि विदेशी निवेश के माध्यम से धन पहुँचाने की संरचना और उसके नियामकीय अनुपालन की जाँच की जा रही है। निशिकांत दुबे ने दस्तावेज़ के माध्यम से दावा किया है कि 2024–2026 के दौरान गृह मंत्रालय के नियमों में बदलाव से ऐसी फंडिंग पर अधिक निगरानी, खुलासे और उपयोग संबंधी सीमाएं लागू हो सकती हैं।
इल्हान उमर जैसे भारत विरोधियों से राहुल की मुलाकात
नेता प्रतिपक्ष होकर भी राहुल गांधी विदेशों में भारत विरोधी इल्हान उमर, डोनाल्ड लू, जेरेमी कॉर्बिन, सुनीता विश्वनाथ, गुनथर फेलिंगर और खालिस्तानी समर्थक से मिलते हैं। राहुल गांधी सितंबर 2024 में तीन दिनों के दौरे पर अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिन पर विवाद हो गया। इन तस्वीरों में राहुल गांधी के साथ भारत विरोधी अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर नजर आ रही हैं। यह मुलाकात वॉशिंगटन डीसी में रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में हुई थी। इल्हान उमर को उनके भारत विरोधी विचारों के लिए जाना जाता है। इल्हान ने साल 2022 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का दौरा किया था। उन्होंने पीएम मोदी के अमेरिकी संसद में दिए गए भाषण का बहिष्कार भी किया था। वे भारत को अल्पसंख्यक विरोधी भी बता चुकी हैं। एक बयान में बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधते हुए इल्हान उमर ने कहा था कि भारत में लंबे समय से मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने तब यहां तक कह दिया था कि भारत में मुस्लिम होना अपराध जैसा है।
मुस्लिम परस्त इल्हान उमर पर ट्रंप का शिकंजा
सांसद निशिकांत दुबे ने केंद्र सरकार से राहुल गांधी की विदेश यात्रा के दौरान भारत विरोधी ताकतों से मुलाक़ात पर एक न्यायिक आयोग बनाने की मांग की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर के खिलाफ लगाए गए कई गंभीर आरोपों का जिक्र किया हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने इल्हान उमर से संसद (कांग्रेस) से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है। ट्रंप ने दावा किया है कि इल्हान उमर का असली नाम ‘इल्हान नूर सईद एल्मी’ है और उन्होंने कांग्रेस सदस्य के रूप में शपथ लेते समय एक फर्जी नाम का उपयोग किया। वाशिंगटन डीसी में इल्हान उमर के घर पर हुई फेडरल (संघीय) एजेंसियों की छापेमारी के बाद, ट्रंप ने कहा कि वह जेल जा सकती हैं या उन्हें देश से निकाला (डिपॉर्ट) किया जा सकता है। यह जांच उनकी नागरिकता और आव्रजन दस्तावेजों से जुड़े मामलों की हो रही है। ट्रंप ने सांसद की शादी पर सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘उनका सरनेम उनके भाई, अहमद नूर सईद एल्मी के सरनेम से बिल्कुल मेल खाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने भाई से ही शादी की थी और उनके बच्चे भी हैं – खैर, ऐसा करना कानूनी है या नहीं, मुझे नहीं पता।’
भारत विरोधी बांग्लादेशी पत्रकार मुश्फिकुल अंसारे से मुलाकात
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सितंबर 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान उनकी बांग्लादेशी पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे के साथ बातचीत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। अंसारे ‘जस्ट न्यूज बीडी’ के लिए व्हाइट हाउस के संवाददाता रहे हैं और उनके संगठनों तथा गतिविधियों को लेकर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। अमेरिकी विदेश विभाग और संयुक्त राष्ट्र की प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश के पत्रकार मुश्फिकुल फजल अंसारे ने भारत के आंतरिक मामले में दखल देते हुए सवाल उठाए थे। उस पर सवाल उठे थे कि बांग्लादेशी पत्रकार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की खबर को उठाने में इतनी दिलचस्पी क्यों है?
जर्मनी में भारत विरोधी और चीन समर्थकों से राहुल की मुलाकात
राहुल गांधी के विदेशी दौरों की सच्चाई एक-एककर बाहर आ रही है। दिसंबर 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र के बीच में राहुल गांधी ने जर्मनी की पांच दिवसीय यात्रा की थी। इस दौरान राहुल गांधी ने कॉर्नेलिया वोल से जर्मनी के हर्टी स्कूल में मुलाकात की थी। ये सिर्फ यहां की प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि सेंटर फॉर यूरोपियन यूनिवर्सिटी की बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में भी हैं। इस संस्थान को लेकर सोरोस से जुड़े फंडिंग नेटवर्क्स के साथ कथित संबंधों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। लार्स क्लिंगबाइल जर्मनी के उप-चांसलर और SPD पार्टी के अध्यक्ष हैं। क्लिंगबाइल सितंबर 2024 और नवंबर 2025 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मिले। जून 2023 में उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात की थी। और अब वही क्लिंगबाइल राहुल गांधी से मिले। यानि चीन से नज़दीकियां रखने वाले नेता से राहुल गांधी की मुलाकात ने नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रेडरिक एबर्ट स्टिफ्टुंग यह एक जर्मन राजनीतिक फाउंडेशन है, जिसकी गतिविधियों और भारत संबंधी विचारों को लेकर आलोचक सवाल उठाते रहे हैं। इसे कथित तौर पर ग्लोबलिस्ट, प्रो-NATO थिंक टैंक के रूप में भी पेश किया जाता है। इसके संबंधों को लेकर सोरोस समर्थित Open Society और Ford Foundation जैसे नेटवर्क्स का नाम भी चर्चाओं में आता रहा है।

एक बार फिर राहुल गांधी कोर्ट का दामाद बन गया; सुल्तानपुर कोर्ट ने 8 साल बाद अमित शाह के खिलाफ अपशब्द कहने के लिए बरी कर दिया; अब राहुल कहेगा एक “हत्यारा” हमारा गृहमंत्री है

सुभाष चन्द्र

मैं बार बार कहता रहा हूं कि राहुल गांधी अदालतों का दामाद है जो उस पर कोई आंच नहीं आने देती।  

2018 में राहुल गांधी ने टिप्पणी की थी कि “एक हत्यारा सत्ताधारी दल का अध्यक्ष है”। उसके खिलाफ भाजपा नेता विजय मिश्रा ने कोर्ट में मुकदमा/शिकायत दर्ज की थी।

आज 8 साल के बाद सुल्तानपुर MP-MLA कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने इस मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। 

महान जज ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा दिया गया बयान या की गई टिप्पणी मानहानिकारक श्रेणी में नहीं आती है;

सीडी को माना गया मजबूत सबूत: राहुल गांधी के वकीलों द्वारा कोर्ट में पूरे बयान की जो सीडी (CD) दाखिल की गई थी, उसे अदालत ने एक मजबूत साक्ष्य माना और यह स्पष्ट हुआ कि उनका इरादा किसी की मानहानि करना नहीं था।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
शिकायतकर्ता की स्थिति/अधिकार: इस मामले में शिकायत स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी; अदालत का यह भी मानना था कि यदि बयान से कथित तौर पर मानहानि अमित शाह की हुई थी, तो तीसरे पक्ष (शिकायतकर्ता) द्वारा मुकदमा कायम करने या आरोप साबित करने को लेकर कानूनी आधार पर्याप्त नहीं थे।

अब ये जज साहब बताएं कि क्या राहुल गांधी की तरफ से पेश की गई CD में ये शब्द नहीं सुने गए जो उन्होंने मान लिया कि राहुल गांधी का इरादा किसी की मानहानि करने का नहीं था?

सच्चाई तो यह है जिसे मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने नज़रअंदाज किया कि 2005-06 में सोहराबुद्दीन, उसकी बीवी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति की हत्या के आरोप में कांग्रेस की केंद्र सरकार ने अमित शाह को फंसाया और उसे राज्य से तड़ीपार तक कर दिया। लेकिन 30 दिसंबर, 2014 को CBI जज MB Gosavi ने अमित शाह को आरोप मुक्त कर दिया। उसके बाद भी राहुल गांधी का 2018 में निर्दोष साबित हो चुके अमित शाह को हत्यारा कहना किस औचित्य से शुभम वर्मा को मानहानिकारक नहीं लगा? मानहानि का इरादा नहीं था तो ऐसा बयान देने की जरूरत क्या थी?

बस यही लक्षण है राहुल गांधी के इस कोर्ट दामाद होने के।

मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने एक और वाहियात निर्णय दिया कि “यदि बयान से कथित तौर पर मानहानि अमित शाह की हुई थी, तो तीसरे पक्ष (शिकायतकर्ता) द्वारा मुकदमा कायम करने या आरोप साबित करने को लेकर कानूनी आधार पर्याप्त नहीं थे”। 

शुभम वर्मा जी भूल गए या जानबूझकर अनजान बन गए कि पार्टी अध्यक्ष के विरुद्ध अपमानजनक भाषा से पार्टी का कोई भी कार्यकर्त्ता आहत हो सकता है। आपका क्या मतलब है कि शिकायत अमित शाह को ही दर्ज करनी चाहिए थी? ऐसा फैसला दे कर तो आपने राहुल गांधी को आज़ादी दे दी कि अब वो कह सके कि “एक हत्यारा देश का गृहमंत्री है”। 

राहुल गांधी को कांग्रेस परिवार से आने वाले जस्टिस बीआर गवई ने उसकी सजा पर रोक लगा कर उद्दंड बना दिया।

सोनिया गांधी को लिए उसे असली नाम से पुकारने पर सोनिया गांधी ने शिकायत नहीं की बल्कि पार्टी के लोगों ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अलग अलग राज्यों में 100 FIR दर्ज की।

आज खड़गे के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। क्या कोर्ट भविष्य में यही कहेगा कि प्रधानमंत्री मोदी को गाली दी गई है तो उन्हें ही केस दर्ज करना चाहिए? फिर मंदिर की तरफ से केस लड़ने के लिए सीधे भगवान को समन किया करें।

मुक़दमे कितने भी हो जाएँ राहुल गांधी के खिलाफ, वो हर मामले में बरी कर दिया जायेगा अदालतों में। लेकिन फिर विजय मिश्रा को इस निर्णय के विरुद्ध इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील करनी चाहिए।