अब कहानी साफ़ हुई : मणिपुर में कांग्रेस की क्या खिचड़ी पकी थी और क्यों मोदी को मणिपुर भेजना चाहती थी कांग्रेस; कांग्रेस का हीरो है मैथ्यू

सुभाष चन्द्र

मणिपुर की हिंसा किसी विशेष वजह से नहीं थी बल्कि कांग्रेस की विदेशी शक्तियों के साथ मिलकर रची हुई साजिश प्रतीत होती थी आखिर क्यों कांग्रेस के बड़े बड़े नेता प्रधानमंत्री मोदी को मणिपुर जाने की जिद करते थे और क्यों यूरोप के देश भी मणिपुर में रूचि दिखा रहे थे? यह भी याद रहे राहुल गांधी भी उन दिनों बेल्जियम जाकर यूरोपीय यूनियन के नेताओं से मणिपुर पर चर्चा करने गया था उसका मुख्य कारण था मणिपुर की घाटियों में घात लगा कर बैठे कुकी मोदी की हत्या करने में सक्षम थे अब मामला साफ़ होता नज़र आया है

NIA ने CIA के मिशनरी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को मणिपुर म्यांमार सीमा पर कुकी ईसाइयों को भारतीय सुरक्षाबलों से लड़ने की ट्रेनिंग देने के आरोप में पकड़ा है वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे पर आव्रजन ब्यूरो ने हिरासत में लिया, जबकि तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली के हवाई अड्डों पर हिरासत में लिया गया। ये सभी पर्यटक वीजा पर भारत में दाखिल हुए, गुवाहाटी पहुंचे, फिर मिजोरम गए और बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र (परमिट) में प्रवेश कर गए प्रतिबंधित क्षेत्र का उल्लंघन करने वाला पर्यटक, ऐसा कभी-कभार हो ही जाता है लेकिन एनआईए का कहना है कि वे म्यांमार में विद्रोही समूहों को पूर्वोत्तर भारत में हमले करने के लिए प्रशिक्षित करने गए थे 

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
यह सभी कट्टर क्रिश्चियन है जो कुकी ईसाइयों को भारत सरकार से लड़ने के लिए आतंकवादी ट्रेनिंग दे रहे थे और यह म्यांमार में इनका आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप चल रहा है। 

इन्होंने यूरोप के कई देशों से ड्रोन के पार्ट इंपोर्ट किया और म्यांमार में बाकायदा इन्होंने ड्रोन असेंबली फैक्ट्री लगाई थी जहां ड्रोन को असेंबल कर कुकी आतंकियों को ट्रेनिंग देते थे 

अमेरिका की कुख्यात संस्था सीआईए कई तरीके से काम करती है

जैसे अगर किसी देश की सरकार अमेरिकी हितों के खिलाफ हो तो उसे सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए भी अपने लोगों को भेजती है जैसे उन्होंने बांग्लादेश में किया अब मैथ्यू के पीछे मणिपुर और अन्य भारतीय राज्यों में कहां कहां बलवा पैदा करने के लिए कौन था, कह नहीं सकते लेकिन जाहिर कुछ विदेशी शक्तियां निश्चित रूप से थी  

उसने यूक्रेन में भी वहां के नागरिकों को ट्रेनिंग दी थी और रूस में भी वहां के नागरिकों को ट्रेनिंग दिया है उसके बाद यह भारत में टूरिस्ट वीजा पर आया और मणिपुर होते हुए म्यांमार में उसने कई कुकी ट्रेनिंग कैंप चलाएं

कितने बड़े खतरे हैं देश के सामने जिनसे साधारण मानव का जीवन खतरे में पड़ सकता है लेकिन हमारे देश में कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग छोटी मोटी बातों पर अटके रहते हैं अब और कुछ नहीं तो दो दिन की गैस की लाइन से परेशान हो गए जबकि 12 साल से कभी कोई लाइन नहीं देखी लेकिन जो लाइन देखी, वो थी लगातार होने वाले बम धमाकों की, वो याद नहीं और तो और इतने गंभीर विषय पर भी एक दो तो लिख ही देंगे “जू जी छी लौल बैक”

NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सतर्क न हो तो देश को कुछ भी अहित हो सकता है - एजेंसियां कोई न कोई रोज साजिश बेनकाब कर रही हैं कल खबर थी दिल्ली से अमृतसर तक सेना की मूवमेंट पर नज़र रखने की पाकिस्तानी साजिश बेनकाब की गई आज खबर है अल-फलाल यूनिवर्सिटी नेटवर्क ध्वस्त होने के बाद जैश ने एक बार फिर रची थी बड़े हमले की साजिश

आज दुनिया भर में तेल और गैस का संकट है लेकिन फिर भी हम बहुत हद तक बचे हुए हैं, कम से कम इतना तो समझना ही चाहिए

हैदराबाद : अदरक-लहसुन पेस्ट के नाम पर परोसा जा रहा ‘जहर’, मिलावटखोर ‘शहजादा फूड मास्टर’ मोहम्मद जफर गिरफ्तार: 1155 किलो नकली पेस्ट और 2.5 लाख रूपए की मशीनरी जब्त

              नकली लहसुन-अदरक पेस्ट, आरोपित मोहम्मद ज़फ़र गिरफ्तार (साभार : X_@hydcitypolice)
हैदराबाद में मिलावटी पेस्ट बनाने का एक और मामला सामने आया है। कमिश्नर टास्क फोर्स (खैरताबाद जोन) ने टप्पाचाबुतरा इलाके में छापेमारी कर मोहम्मद जफर आलम को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपित ‘सहारा इंडिया’ के नाम से बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में नकली पेस्ट तैयार कर रहा था। पुलिस ने मौके से 1,155 किलोग्राम मिलावटी पेस्ट और मशीनरी जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 2.5 लाख रूपए आँकी गई है।

गंदगी के बीच साइट्रिक एसिड का खेल

जाँच में पता चला कि आरोपित मोहम्मद जफर आलम अदरक-लहसुन के पेस्ट में साइट्रिक एसिड और भारी मात्रा में नमक मिलाकर उसे तैयार करता था। यह काम धूल, मक्खियों और गंदगी के बीच खुले प्लास्टिक के डिब्बों में किया जा रहा था, जो इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपित का FSSAI लाइसेंस जिस पते पर था, काम उससे अलग जगह पर अवैध रूप से चल रहा था।

हैदराबाद के होटलों में हो रही थी सप्लाई

यह मिलावटी और असुरक्षित पेस्ट हैदराबाद के थोक किराना स्टोरों और फूड कैटरिंग सेवाओं (होटल-शादियों) को धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा था। इससे पहले भी मल्लेपल्ली इलाके में मोहम्मद फारूक नाम का शख्स ‘शहजादा फूड मास्टर’ के नाम से करीब 1,090 किलो नकली पेस्ट बनाते पकड़ा गया था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद मसालों की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कांग्रेसी ऐसे बोल रहे हैं जैसे वे सत्ता में होते तो देश में तेल और गैस की कमी नहीं होती, देखिए सच्चाई


जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गाँधी की सरकारों को छोड़ो, जब पायलट राजीव गांधी देश का प्रधानमंत्री बना था तब भी देश इतनी समस्याओं से झूझ रहा था कि अक्ल से पैदल महामूर्खों से भी महामूर्ख जनता कांग्रेस की चालों को नहीं समझ सकी।

इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में तो घर में बच्चे के मुंडन में 25 से ज्यादा लोगों के खाने पर पाबन्दी ही नहीं लड़के की शादी में 100 और लड़की की शादी में 200 से ज्यादा लोगों पर सख्त पाबन्दी होने के सिर्फ 100 आदमियों के भोजन की इजाजत थी बाकियों को चाय और पकोड़े खिलाने की इजाजत थी। अगर किसी वजह से छापा पड़ने पर आदेश का उलंघन पर जेल का प्रावधान था। इतना ही नहीं और आगे देखिए कांग्रेस सरकारों की जनता पर क्रूरता:-

1. दो बोरी सीमेंट के लिए तहसीलदार के दफ्तर से परमिट लेना पड़ता था।
2. चीनी के लिए राशन कार्ड की जरूरत थी। शादी ब्याह में एक बोरी चीनी के लिए जिला खाद्य निरीक्षक से परमिट लेना पड़ता था।
3. गैस कनेक्शन के लिए 5 से 7 साल का वेटिंग था।
साभार सोशल मीडिया 
4. गैस सिलेंडर के लिए मीलों लंबी लाइन लगती थी। सुबह 4 बजे से लोग गैस एजेंसी के सामने जमा हो जाते थे।
लोग गैस सिलेंडर ब्लैक में खरीदते थे।
5. बंद घी का टीन तक बेचने पर सख्ती थी।
6. 2014 के चुनाव में साल में सिर्फ 10 सिलेंडर देने का वादा कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक था।
यह सिलसिला सोनिया मनमोहन की सरकार तक जारी रहा है।
ईरान इजरायल युद्ध जो पूरे खाड़ी देशों में फैल गई है, गैस की आमद लगभग बंद हो गया है, की आड़ में कांग्रेस मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में है।
कांग्रेसी आज के लौंडो को बरगला सकती है। जिसकी याददाश्त कमजोर नहीं है, जिन्होंने 2014 के पहले का जमाना देखा है, वे कांग्रेसियों के नकारेपन को कभी नहीं भूल सकते।
मोदी ने सत्ता संभालने के बाद गैस की उपलब्धता इतनी बढ़ा दी कि गरीब लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जाने लगा।
अब सब को इतना तो समझ लेना चाहिए कि क्यों इन फट्टू चालाक तुच्चों ने हर घर तक LPG पहुंचाने की गलती क्यों नहीं की, क्यों कभी भी आने वाली आकस्मिक आपदा की वजह से कांग्रेस ने 60 साल बाद भी LPG की पहुंच करीब 50% तक ही रखी थी
अभी भी गैस की इतनी किल्लत नहीं हुई है कि लोग ज्यादा परेशान हों। जिन उद्योगों में LPG/PNG/LNG का इस्तेमाल होता है उन्हें कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है ताकि डोमेस्टिक जरूरत पूरी हो सके।
तथ्य समझिए कि क्यों बेवजह LPG Cylinder की एजेंसी पर भीड़ लगी है लेकिन दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि LPG Cylinders की कोई समस्या नहीं है, लेकिन चूंकि अफ़वाह उड़ा दी गई है कि LPG Cylinder नहीं मिलेगा जिसके चलते जो लोग एक दो महीने में 1 LPG Cylinder की बुकिंग करवाते थे वो भी 2 बुकिंग कर रहे हैं और दूसरी ओर जिनके घरों में Multiple कनेक्शन हैं वो भी एकसाथ Extra बुकिंग कर रहे हैं। Online Booking और Missed Phone Call के माध्यम से LPG Cylinder की बुकिंग करने वाली सुविधा कुछ समय के लिए बाधित हो गई है या कर दी गई है और जिसके चलते लोग Agency पर जाकर Booking करा रहे हैं, Offline वाले Cylinder उठाने के लिए वहां अलग से लगे हुए हैं।
समाजसेवक बने फिर रहे नेताओं से पूछो कि:-
लालू गाय-गोबर-दूध-दही बेच कर 2000 करोड़ का मालिक बन गया।
चिदंबरम गमला में गोभी उगा कर 4000 करोड़ का मालिक बन गया।...
अभी तो रुको
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले 10 एकड़ जमीन में सब्जियों उगाके अरबों खरबों की मालिक बन गई।
और तो और फ़र्ज़ी गाँधी बिना कुछ किए 80000 करोड़ के मालिक बन गए।
टिकैत अनाज बेच कर 1500 करोड़ का मालिक बन गया।

सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री मोदी का अपमान चाहता है; यह साबित कर दिया नेहा राठौर को “अग्रिम जमानत” दे कर

सुभाष चन्द्र

मैं पहले ही कह चुका हूं देश में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट बंद कर देने चाहिए क्योंकि जब हर काम सुप्रीम कोर्ट ने ही करना है तो उनका क्या लाभ है। जो प्रधानमंत्री मोदी को अपमानित करने कोई मौका नहीं छोड़ती बल्कि उन्हें अपमानित करने के बहाने ढूंढती फिरती है, उस नेहा राठौर को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना कि आरोपी जांच प्रक्रिया में शामिल हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि वह आगे भी जांच में सहयोग करती रहें अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के मुताबिक जांच एजेंसियां अपना काम जारी रखेंगी साथ ही आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल गिरफ्तारी जैसी कोई सख्त कार्रवाई जरूरी नहीं है इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी जा रही है

जांच में शामिल तो हो गई लेकिन यह भी देखिए कब तक जांच से भागती फिरती रही पुलिस के समन नकारती रही और शोर मचाती रही कि क्या पीएम से सवाल भी नहीं पूछ सकते हाई कोर्ट ने उसे अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया क्योंकि तब वह जांच में शामिल नहीं हो रही थी

इस बेलगाम महिला ने कहा था मोदी जी बिहार आए पाकिस्तान को धमकाने के लिए मोदी शाह और भाजपा पहलगाम जैसे मामलों से देश को युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं अब इसमें जांच का क्या मतलब रह जाता जो एक के बाद एक कोर्ट से उसे छूट मिलती रही बोलने से पहले या कहो तो “भौंकने” से पहले नहीं सोचते कि परिणाम क्या हो सकता है अब बोला था तो केस को भुगतो और साबित करो कि सही कहा था। वह जांच में शामिल तब ही हुई जब उसने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम याचिका दायर की

लेखक 
चर्चित YouTuber 
जमानत मिलते ही उसका एक बयान देखा “खामनेई तेरी मर्दानगी को सलाम” अब आप इस बात का मतलब निकाल सकते हैं क्या कहना चाहती है और क्या इशारा कर रही है पीएम के लिए लेकिन उसे सब कुछ बकवास करने की छूट मिल गई है सुप्रीम कोर्ट से 

एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ वर्ष पहले व्यवस्था दी थी कि अग्रिम जमानत तब तक लागू रहती है जब तक केस का अंतिम निर्णय न हो जाए

आप याद कीजिए राहुल गांधी का बयान, उसके कहने का क्या मतलब था कि “ऐसा कैसे है कि सब मोदी चोर होते हैं” नाम नीरव मोदी का भी लिया लेकिन निशाना नरेंद्र मोदी ही थे सजा हुई 2 साल की और अगर वह सजा माफ़ नहीं हुई होती तो आज राहुल गांधी संसद में न होता और इस कदर विदेशों में जाकर मोदी और भारत का अपमान न कर रहा होता लेकिन उसे छोड़ दिया अपने को कांग्रेसी परिवार का बताकर जस्टिस गवई ने और उसे अभय दान दे दिया

4 दिसंबर, 2025 को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने राहुल गांधी द्वारा सेना के अपमान मामले को 5 महीने के लिए स्थगित कर 22 अप्रैल, 2026 तारीख तय कर दी जिन जजों ने राहुल को फटकार लगाई थी, उन्हें ही बदल दिया गया और यह 22 अप्रैल भी आगे बढ़ेगी क्योंकि शबरीमला मंदिर की Review Petition की सुनवाई 8 साल बाद 9 जजों की बेंच 7 अप्रैल से 22 अप्रैल, 2026 तक करेगी अगर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा को शबरीमला बेंच में शामिल कर लिया गया तो राहुल को एक बार और शायद 6 महीने की छूट मिल जाये वीर सावरकर के अपमान के लिए भी उसे झाड़ पड़ी थी आज किसी को पता नहीं सुप्रीम कोर्ट में उस केस का क्या स्टेटस है

संविधान और न्यायपालिका के प्रति संवेदनशील प्रधानमंत्री मोदी मिला हुआ है सुप्रीम कोर्ट को लेकिन उसे फिर भी वह कबूल नहीं है न्यायपालिका के जजों का भरतनाट्यम इंदिरा गांधी के सामने होता था क्या वही ठीक था?

‘भोपाल में ईद से पहले भिड़े मुस्लिम गुट :पेशाब की बूँदें टपकती हैं तो नहीं पढ़वा सकते नमाज’: ‘प्रोस्टेट’ पर दारुल इफ्ता ने दिया फतवा

          ईद से पहले भिड़े मुस्लिम गुट, 'प्रोस्टेट' पर दारुल इफ्ता ने दिया फतवा (साभार : Aajtak & Bhaskar)
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ईद से ठीक पहले एक फतवे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। दारुल इफ्ता की ओर से जारी एक मजहबी राय (फतवे) में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को प्रोस्टेट की बीमारी है या पेशाब टपकने की समस्या रहती है, तो वह इमामत नहीं कर सकता यानी दूसरों को नमाज नहीं पढ़ा सकता।

हालाँकि, इस दस्तावेज में किसी का नाम नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे सीधे तौर पर भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी से जोड़कर वायरल किया जा रहा है। मुस्लिम पर्व कमेटी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे शहर काजी की छवि खराब करने की साजिश बताया है और जाँच की माँग की है।

क्या है इस फतवे में?

यह पूरा विवाद 9 मार्च 2026 को नायब मुफ्ती सैयद अहमद खान कासमी द्वारा जारी किए गए एक जवाब से शुरू हुआ। फतवे में शरीयत के नियमों का हवाला देते हुए बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी ऐसी समस्या है जिसमें पेशाब की बूँदें अनियंत्रित रूप से टपकती हैं, तो वह व्यक्ति इमाम बनकर लोगों की नमाज की अगुवाई नहीं कर सकता। हालाँकि, वह अपनी नमाज खुद अदा कर सकता है। दारुल इफ्ता जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के नाम से निकले इस फतवे ने समाज के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है।

शहर काजी को निशाना बनाने का आरोप

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी इस विवाद में कूद पड़ी। कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन का कहना है कि ईद की नमाज से ठीक पहले इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करना समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश है।

शमशुल हसन ने सीधा आरोप लगाया कि यह फतवा शहर काजी मुश्ताक अली नदवी को निशाना बनाने के लिए जानबूझकर वायरल किया गया है। कमेटी के मुताबिक, फतवा जारी करने वाले मौलवी अब्दुल कलाम और इसके पीछे के लोगों की भूमिका संदिग्ध है। कमेटी ने मामले की पुलिस जाँच कराने के संकेत भी दिए हैं।

इस्लामिक जानकारों और संगठनों की राय

एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ‘ताजुल मसाजिद’ में नमाज पढ़ाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में मुस्लिम समाज दो धड़ों में बंटता नजर आ रहा है। एक तरफ जहाँ त्योहार कमेटी इसे साजिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ इस्लामिक जानकारों का मानना है कि यह केवल शरीयत के नियमों की एक साधारण व्याख्या है।

उनके अनुसार, मौलवी द्वारा दिए गए ऐसे जवाब अक्सर नियमों को स्पष्ट करने के लिए होते हैं और इन्हें किसी खास व्यक्ति से जोड़कर देखना गलत है। फिलहाल, भोपाल में इस मुद्दे को लेकर तनावपूर्ण चर्चाएँ जारी हैं और पुलिस प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

उत्तर प्रदेश : आपदा में अवसर तलाश करने वाले LPG की कालाबाजारी पर सख्त योगी सरकार, 4800+ जगहों पर छापेमारी: 70 FIR दर्ज, 10 गिरफ्तार

इसे
कहते हैं "आपदा में अवसर" मिलना, पर इस बार पासा उल्टा पड़ गया और गैस माफियाओं का बरसों पुराना काला खेल बेनकाब हो गया...!
अभी कुछ पहले News18 पर एंकर रुबिका लियाकत के शो गूंज में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता प्रो धर्मेंद्र यादव के साथ आए कार्यकर्ता ने कहा कि "जिससे गैस लेते हैं वह अब 3000 रूपए में दे रहा है. .." जब उससे एजेंसी का नाम पूछा गया तो बता नहीं पाया, हालाँकि एंकर ने एजेंसी का नाम बताने के लिए बहुत जोर दिया, लेकिन अफवाह फ़ैलाने वाले ने नाम नहीं बताया। योगी सरकार को उस व्यक्ति की तलाश कर अफवाह फ़ैलाने के आरोप में सजा देनी चाहिए। भारत में वर्तमान में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार ने भविष्य की सुरक्षा और आपूर्ति को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए सावधानीवश गैस रिफिल बुकिंग हेतु 25 दिनों की समय सीमा निर्धारित कर दी है। सरकार का उद्देश्य प्रबंधन सुधारना था, किंतु इस नियम के लागू होते ही देश भर की गैस एजेंसियों पर मची अफरातफरी ने एक बहुत बड़े घोटाले की कलई खोलकर रख दी है।
सच्चाई यह है कि गैस एजेंसी मालिकों ने एक व्यवस्थित सिंडिकेट बना रखा था। ये लोग आम घरेलू उपभोक्ताओं के नाम पर, उनकी जानकारी के बिना ही स्वयं घरेलू गैस रिफिल बुक कर लेते थे और उन सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर होटल, रेस्टोरेंट और औद्योगिक इकाइयों जैसे व्यावसायिक संस्थानों पर 'ब्लैक' में बेच रहे थे। जब तक बुकिंग की कोई समय सीमा नहीं थी, उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता था कि उसके हिस्से की गैस कहीं और बेची जा चुकी है। किंतु अब जैसे ही 25 दिन की शर्त लागू हुई, और जब वास्तविक उपभोक्ता ने अपना सिलेंडर बुक करने का प्रयास किया, तो सिस्टम ने "Already Booked" दिखाकर बुकिंग रिजेक्ट कर दी। उपभोक्ता हैरान और परेशान कि उसने तो काफी समय यानि विगत एक महीने से सिलेंडर लिया ही नहीं तो फिर यह बुकिंग रिजेक्ट कैसे हो गई...?
उपभोक्ता पैनिक में आकर गैस एजेंसियों के बाहर बुकिंग अथवा सिलेंडर के लिए लाईन लगाकर खड़े हो गए...!
ऐसी स्थिति में एजेंसी मालिक मुंह छिपाकर भागने लगे या वहां हंगामा खड़ा होने लगा...!
क्यों...?
क्योंकि गैस कंपनियों के सिस्टम/सर्वर पर उपस्थित डाटा के अनुसार उपभोक्ता के सिलेंडर को तो गैस एजेंसी मालिकों ने बेच कर खा लिया था।
यह स्पष्ट है कि भारत में गैस की कोई किल्लत नहीं है, बल्कि यह कृत्रिम संकट इन बिचौलियों यानि गैस एजेंसी मालिकों की काली करतूतों का परिणाम है। सरकार के इस एक निर्णय ने घरेलू गैस की अवैध बिक्री के इस बड़े रैकेट को सार्वजनिक कर दिया है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच दुनियाभर में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है। भारत में भी ईंधन को लेकर कई नए नियम बनाए गए हैं और इस बीच देशभर में कालाबाजारी और जमाखोरी किए जाने के मामले सामने आए हैं।
इस बीच योगी आदित्यानाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने एलपीजी (LPG) की कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पूरे उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन टीमों ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।
आँकड़ों के अनुसार, 12 मार्च से सोमवार (16 मार्च) तक प्रदेश में कुल 4,816 जगहों पर निरीक्षण और छापेमारी की जा चुकी है। इस दौरान 70 FIR दर्ज की गई हैं जबकि 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जाँच अधिकारियों ने बताया कि 67 लोग अवैध LPG गतिविधियों में संलिप्तता के शक में अभियोजन का सामना कर रहे हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की जा रही है जब देश के कई हिस्सों में मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण LPG की घबराहट में बुकिंग (Panic Booking) बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, 4108 LPG वितरकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को उनकी बुकिंग के अनुसार समय पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित हो सके। सरकार ने LPG स्टॉक की नियमित समीक्षा करने का भी फैसला किया है और सिलेंडरों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी और जमाखोरी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही यूपी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और LPG की लगातार उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जिलों में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
एजेंसियाँ पूरे प्रदेश में सक्रिय रहकर आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं ताकि कहीं भी कालाबाजारी या कमी की स्थिति न बने। स्थिति पर नजर रखने के लिए सरकार ने खाद्य आयुक्त कार्यालय और सभी जिलों में 24 घंटे कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं और आपूर्ति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
यदि आप भी इस समस्या से त्रस्त हैं या आपके नाम पर भी घरेलू गैस सिलेंडर की अवैध बुकिंग करके गायब कर दी गई है, तो चुप न बैठें और तुरंत संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
शिकायत दर्ज करने हेतु महत्वपूर्ण नंबर:
* MOPNG हेल्पलाइन (LPG): 1906 (24/7 आपातकालीन और शिकायत सेवा)
* भारत गैस (Bharat Gas): 1800-22-4344
* इंडेन (Indane): 1800-233-3555
* एचपी गैस (HP Gas): 1800-233-3555
* राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: 1800-11-4000 या 1915
जागरूक बनें और इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी आवाज उठाएं।

भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने के आरोप में 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी गिरफ्तार, यूरोप से ड्रोन मँगाकर म्यांमार भेज रहे

        यूरोप से ड्रोन मंगवाकर म्यांमार भेज रहे थे विदेशी, भारत में रची आतंकी साजिश (साभार : Moneycontrol)
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें 6 यूक्रेन के और 1 अमेरिका का नागरिक शामिल है। इन आरोपितों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी विधानसभा में पुष्टि की कि अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई विदेशी नागरिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाकर उग्रवादियों को हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे हैं। इनमें से कुछ के रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल होने की भी खबर है।

NIA के मुताबिक, ये लोग यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप मँगाकर भारत के रास्ते म्यांमार के विद्रोही समूहों को सप्लाई कर रहे थे, जो भारतीय उग्रवादियों की मदद करते हैं। जाँच में सामने आया है कि ये सभी आरोपित वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन अनिवार्य ‘प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट’ (RAP) के बिना मिजोरम पहुँच गए।

वहाँ से इन्होंने सीमा पार कर म्यांमार में भारत विरोधी जातीय समूहों से मुलाकात की। NIA ने कोर्ट को बताया कि ये आरोपित ड्रोन की सप्लाई के साथ-साथ आतंकी ट्रेनिंग और हथियारों के नेटवर्क में भी शामिल थे।

पटियाला हाउस कोर्ट ने साजिश की गहराई और फंडिंग के स्रोतों का पता लगाने के लिए आरोपितों की हिरासत 27 मार्च तक बढ़ा दी है। एजेंसी अब इनके मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही है ताकि भारत में छिपे इनके अन्य साथियों और विदेशी हैंडलर्स का पर्दाफाश किया जा सके।

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अस्पताल पर बरसाए बम, 400 की मौत और 250 घायल

                         पाकिस्तान ने अस्पताल को बनाया निशाना (साभार: X/ Hamdullah Fitrat)
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान की जंग भी गंभीर रूप लेती जा रही है। पाकिस्तान ने सोमवार (16 मार्च 2026) की रात अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की हैं और राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया है। पाकिस्तान ने काबुल में एक अस्पताल को भी निशाना बनाया है जिसमें नशे के आदी लोगों का इलाज किया जाता था।

400 की मौत और 250 घायल

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने X पर इस हमले से जुड़ी जानकारियाँ साझा की हैं। फितरत ने X पर लिखा, “पाकिस्तानी सैन्य शासन ने रात करीब 9 बजे ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हवाई हमला किया। यह 2,000 बेड वाला अस्पताल था, जहाँ नशे की लत का इलाज किया जाता था।”

फितरत ने आगे बताया, “अब तक मरने वालों की संख्या 400 तक पहुँच चुकी है जबकि लगभग 250 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमले के कारण अस्पताल के बड़े हिस्से पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल बचाव दल मौके पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने के साथ-साथ मलबे से बाकी पीड़ितों के शव निकालने का काम कर रहे हैं।”

स्थानीय नागरिकों और समाचार एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर इस हमले के बाद के भयावह वीडियो शेयर किए हैं जिनमें अस्पताल के भीतर भीषण आग दिखाई दे रही है।

मानवता के खिलाफ अपराध: भड़के तालिबान का पाकिस्तान पर निशाना

तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने इस हमले को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। मुजाहिद ने X पर लिखा, “पाकिस्तानी सैन्य शासन ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन करते हुए काबुल में स्थित एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया। इस हमले में वहाँ इलाज करा रहे कई नशा पीड़ित लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। हम इस अपराध की कड़ी निंदा करते हैं और ऐसे कृत्य को मानवीय सिद्धांतों के खिलाफ और मानवता के खिलाफ अपराध मानते हैं।”

मुजाहिद ने X पर अस्पताल में इलाज कराने वाले लोगों की तस्वीर भी शेयर की है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तानी सैन्य हलकों की बमबारी के कारण कल रात 2,000 बेड वाले अस्पताल में बड़ी संख्या में बेगुनाह नागरिकों और नशे की लत से जूझ रहे मरीजों की मौत हो गई। हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर हमें लौटकर जाना है।”

पाकिस्तान ने हमले से किया इनकार

इस मामले पर अब पाकिस्तान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने कहा कि अफगानिस्तान में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि हमले काबुल और नांगरहार प्रांत में मौजूद सैन्य ठिकानों, तकनीकी उपकरणों के भंडार और हथियारों के स्टोरेज स्थानों पर किए गए थे। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों का मकसद केवल सैन्य ढाँचे को निशाना बनाना था, किसी अस्पताल या नागरिक संस्थान को नहीं।

क्या सुप्रीम कोर्ट के जजों की आत्मा मर जाती है जो 5 साल की बच्ची के बलात्कारी और हत्यारे की फांसी की सजा पर भी रोक लगा देते हैं?

सुभाष चन्द्र

अभी 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की पीठ ने 5 साल की बच्ची के बलात्कारी और हत्यारे अतुल निहाले की फांसी की सजा पर तब तक के लिए रोक लगा दी जब तक उसकी अपील पर निर्णय न ले लिए जाए। यह कोई पहला मामला नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट या विभिन्न हाई कोर्ट अपराधियों के प्रति दया न दिखाई हो और यही कारण है बलात्कार के मामले बढ़ रहे हैं जिसकी जिम्मेदारी अदालतों को लेनी होगी

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
मध्यप्रदेश के एक केस में आपको याद होगा एक 4 वर्षीय बच्ची के बलात्कारी और हत्यारे की फांसी की सजा भी सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दी थी और बड़े फक्र से किसी विदेशी का Quote का उद्धरित किया था “Every saint has a past and every Sinner has a future”. पाप करने वाले की चिंता थी लेकिन उस बच्ची की नहीं जिस पर पाप किया गया और ऐसे आदेश तब ही दिए जा सकते हैं जब किसी जज की आत्मा मर जाती है

वर्तमान केस 24 सितंबर, 2024 का है जिसमें ट्रायल कोर्ट ने 18 मार्च, 2025 को (केवल 6 महीने में)  BNS और पोक्सो एक्ट में आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी सजायाफ्ता ने हाई कोर्ट में अपील की लेकिन जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की खंडपीठ ने जनवरी, 2026 में फांसी की सजा को बरकरार रखा तारीखों पर ध्यान दीजिए मात्र 16 महीने में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों से फैसले दे दिए इससे जल्द न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अटका दी

The High Court “rejected mitigating factors such as his socio-economic background, marital status, and family responsibilities, holding that these could not outweigh the gravity of the offence. It had observed that the assault reflected a lust-driven barbarity and an utter disregard for human dignity, particularly that of a defenceless child”.

हाई कोर्ट ने आरोपी के उस दावे को भी ख़ारिज कर दिया जिसमें कहा गया था (जैसा लगभग सब मामलों में कहा जाता है) कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी कोर्ट ने कहा मेडिकल रिपोर्ट ऐसा कुछ नहीं कहती कि उसे अपने एक्शन्स पर कोई कंट्रोल नहीं था ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने उसके अपराध को “rarest of the rare” कहा

आज मैंने कहीं यह भी पढ़ा था कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल और हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के साथ यह भी जानकारी मांगी है कि अभियुक्त का जेल में बर्ताव कैसा रहा है क्या डेढ़ साल में अच्छा आचरण उसकी सजा को बदलने के लिए संज्ञान में लाया जाना चाहिए? हो सकता है कि अगर अच्छे आचरण की रिपोर्ट मिले तो सुप्रीम कोर्ट उसे जमानत दे दे और फिर केस चलता रहे

न्यायपालिका की सभी अदालतों को बच्चियों पर होने वाले सेक्स अपराधों पर निर्णय देते हुए सही मायने में “application of mind” apply करना चाहिए क्योंकि गलत फैसले समाज पर बुरा असर डाल रहे हैं अपराधी का हौसला बढ़ता ही इसलिए है कि उसे विश्वास दिला दिया जाता है कि तुम्हारा कुछ नहीं होगा 10 साल तो लग ही जायेंगे एक नहीं अनेक केस है जिनमे गलत फैसले हुए हैं एक जज भाई साहब ने 5 वक्त की नमाज़ के आधार पर ही सजा कम कर दी थी -ऐसे भी निर्णय होते है?

योगी के राज में पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी का कलावा काटा गया, वायरल वीडियो पर बोर्ड ने लिया संज्ञान: कहा- पुलिसकर्मी पर करेंगे कठोर कार्रवाई

                                अभ्यर्थी का कलावा काटता पुलिसकर्मी (वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर एक पुलिसकर्मी द्वारा अभ्यर्थी का कलावा काटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बोर्ड ऐक्शन में आ गया है। वायरल वीडियो पर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने संज्ञान लिया है और कलावा काटने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने की बात कही है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वाराणसी में एक पुलिसकर्मी परीक्षा केंद्र के बाहर एक युवक का कलावा काटता हुआ नजर आ रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों को गुस्सा फूट पड़ा और लोग सवाल उठाने लगे की क्या कलावे की मदद से भी नकल की जा सकती है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर कार्रवाई करने की माँग की।

UPPRPB ने एक यूजर द्वारा शेयर की गई इस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर लिखा, “अभ्यर्थियों के धार्मिक चिन्हों जैसे कलावा, मंगलसूत्र आदि नहीं काटने के निर्देश पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा समस्त अधिकारियों को पूर्व से ही दिए गए हैं।” UPPRPB ने आगे लिखा, “सोशल मीडिया पर वायरल वाराणसी के प्रकरण में एक पुलिसकर्मी द्वारा उसका उल्लंघन किया गया है। इस उल्लंघन के चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए पुलिस आयुक्त वाराणसी को पत्र लिखा गया है।”

इसके अलावा बोर्ड ने X पर परीक्षा नियंत्रक का एक बयान भी जारी किया है। इसमें कहा गया है, “UPPRPB की परीक्षाओ के दौरान अभ्यर्थियों की चेकिंग के संबंध में निरंतर यह निर्देश दिए जाते हैं कि किसी भी अभ्यर्थी द्वारा धारण किए गए धार्मिक सांस्कृतिक चिन्हों जैसे कलावा, मंगलसूत्र आदि को न तो हटवाया जाएगा ना ही उतारने का प्रयास किया जाएगा।”

परीक्षा नियंत्रक ने आगे कहा, “ऐसे प्रकरणों का संज्ञान में आना दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। इस संदर्भ में दोषी कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना ना हो।”

आज गैस की 2 दिन की किल्लत में बिलबिलाने वाले कांग्रेसी अपना जमाना भी याद करें

सुभाष चन्द्र

यूगोस्लाविया के कम्युनिस्ट तानाशाह मार्शल टीटो नेहरू के सबसे अच्छे जिगरी दोस्त थे।  

 उन्होंने ही नेहरू को सलाह दिया था की अपनी जनता को इतना तरसा कर रखो और किसी भी प्राइवेट इंडस्ट्रीज को पनपने मत दो किसी को भी बिजनेस करने की इजाजत मत दो हर चीज में लाइसेंस परमिट कोटा सिस्टम कर दो ताकि जनता पूरी जिंदगी इन सब चीजों के पीछे भागती रहे!

और दूसरी किसी भी चीज पर जनता का ध्यान न जाए!

और नेहरू ने अपने कम्युनिस्ट तानाशाह मित्र मार्शल टीटो के सलाह पर अमल किया!

लेखक 
चर्चित YouTuber 
हालांकि कुछ दशको बाद यूगोस्लाविया के लोगों ने बगावत किया और युगोस्लाविया देश टूट गया आज यूगोस्लाविया नाम का कोई देश इस धरती पर नहीं है बल्कि 6 नए देश बन गए!

 नेहरू ने सबसे पहले रतन टाटा से उनका एयर इंडिया छीनकर उसको सरकारी बना दिया कई सीमेंट की फैक्ट्री और स्टील की फैक्ट्री छीन ली उनको सरकारी बना दी और तो और जो कांग्रेसी कुत्ते कहते हैं कि हमारे नेहरू ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड बनाया तो उन कांग्रेसी  को पता होना चाहिए उसे भी यह गुजराती जैन व्यापारी बालचंद भाई ने बनाया था नेहरू ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भी बालचंद भाई से छीन लिया!

मतलब की बिजनेस करना इंडस्ट्री खड़ी करना एक अपराध बना दिया गया!

नेहरू के समय में बॉलीवुड को भी कह दिया गया कि आप ऐसी फिल्में बनाए जिसमें उद्योगपति को खून चूसने वाला बताया गया हो जिसमें समाजवाद को शानदार बताया गया हो जिसमें मजदूर नेताओं को मजदूरों के अधिकार के लिए लड़ने वाला बताया गया और फिर ऐसी उसे दौर में सैकड़ो फिल्में बनी!

अब अगर आपको अपना घर बनाना है सीमेंट खरीदना है तो आप तहसीलदार का सैकड़ो चक्कर लगाइए फिर तहसीलदार आपके घर का नक्शा देखेगा उसके बाद वह 10 बोरा प्रति महीना सीमेंट का आपको परमिट बना कर देगा!

परमिट आपको मुफ्त में नहीं मिलेगा बल्कि सीमेंट के साथ-साथ परमिट का भी फीस आपको देना पड़ेगा!

यानी हर महीने आप 10 बोरा से ज्यादा सीमेंट नहीं खरीद सकते फिर आप साल 2 साल अपना घर बनाने के पीछे कुत्ते की तरह भागते रहिए यही काम स्टील में कर दिया!

 कांग्रेस के जमाने में बजाज के अलावा किसी को स्कूटर बनाने की इजाजत नहीं दी क्योंकि जमनालाल बजाज नेहरू के दोस्त थे!

कुछ विदेशी कंपनी आई तो उनके ऊपर इतना लाल फीताशाही लगा दिया कि वह कंपनियां बंद हो गई!

 एक स्कूटर लेना होता था तो 10 साल 20 साल की वेटिंग चलती थी आपको बिजली का कनेक्शन लेना है तो 5 साल की वेटिंग टेलीफोन के कनेक्शन में तो 20 साल की वेटिंग चलती थी!

हर चीज को कांग्रेस ने एक सपना बना दिया

 अगर आपको रेडियो पर गाना सुनना है तो उसके लिए आपको लाइसेंस लेना पड़ेगा और उसे लाइसेंस को हर साल रिन्यू भी करना पड़ेगा!

फिर इंदिरा गांधी आई वह अपने पिताजी से भी 10 कदम आगे चलकर भारत में तमाम निजी बैंक को अपने कब्जे में ले लिया उद्योगपतियों को लात मारा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बैंक चलाने की बैंक हम चलाएंगे!

किसानों को ट्रैक्टर खरीदने के लिए भी 10 साल की वेटिंग थी!

आप अपने दादाजी से पूछिएगा आप अपने परदादा जी से पूछिएगा कि भारत में क्या माहौल होता था!

 आज जो कांग्रेसी  कहते हैं कि इंडियन ऑयल  नेहरू ने बनाया उन कुत्तों को पता होना चाहिए कि यह भी पहले निजी कंपनी थी इसका नाम बर्मा शैल ऑयल हुआ करता था और उसे जमाने में ऐसा होता था कि अगर कोई आदमी 20 बोरा सीमेंट लाने में सफल हो जाता था तो वह कांग्रेस को धन्यवाद देता था कि आज मुझे कांग्रेस की कृपा से 10 बोरा सीमेंट मिला!

या किसी आदमी को बिजली का कनेक्शन मिल जाता था तो वह इंदिरा गांधी का शुक्रिया अदा करता था कि आज मुझे इंदिरा गांधी की वजह से बिजली का कनेक्शन मिल गया!

नरेंद्र मोदी ने सबसे बड़ी गलती यह कर दी कि जो गैस कनेक्शन लग्जरी मानी जाती थी उसे मोदी जी ने सबको दे दिया सब्सिडी पर दिया और उसे उज्जवला योजना के तहत 12 करोड़ गैस कनेक्शन दे दिया गैस पर लाइन खत्म हो गई सब कुछ ईजी मिलने लगा था किसी भी चीज में ना लाइसेंस सिस्टम रहना परमिट सिस्टम रहा!

आज अगर आपको कार चाहिए तो आप तुरन्त कार ले सकते हैं स्कूटर ले सकते हैं बिजली मोबाइल टेलीफोन सब कुछ है आपको जितना सीमेंट चाहिए उतना सीमेंट ले सकते हैं कोई भी सरकारी सुविधा का आपको  फॉर्म भरना है या कुछ भी करना है सब कुछ ऑनलाइन है!

कांग्रेस के जमाने में रेलवे रिजर्वेशन के लिए लंबी-लंबी लाइन लगती थी मोदी के जमाने में सबके मोबाइल में एप आ गया वह लाइन भी खत्म हो गई!

अब ऐसे में अगर गैस की सप्लाई में कोई समस्या होगी तो आम आदमी मोदी को ही गाली देगा क्योंकि उसे मोदी जी ने कांग्रेस के जमाने में  जैसी जिंदगी थी उससे मुक्त कराकर उसे एक सभ्य  इंसान जैसी जिंदगी दे दी तो आप अगर उसकी कोई भी समस्या होगी तो उसे कांग्रेस का जमाना याद नहीं आएगा!

वह तो मोदी को ही गाली देगा?

मुझे याद है कुछ साल पूर्व मेरा एक दोस्त ट्रैफिक जाम में 10 मिनट लेट होने पर गुजरात की भाजपा सरकार को गाली दे रहा था!

तब उसके पिताजी ने बोला बेटा 10 मिनट लेट ही सही पर तुम घर आ तो गए हमने वह जमाना देखा है की 30 दिन में से 20 दिन अहमदाबाद में कर्फ्यू लगा रहता था!

 हर तरफ आगजनी और कत्लोगारद  मची रहती थी कोई अगर बाहर निकलता था तो जब तक वह घर पर नहीं आ जाता था तब तक घर वाले उसकी राह देखते थे दूसरे शहर या गांव से अगर कोई अहमदाबाद आना चाहता था तब वह रेडियो पर समाचार देखता था की अहमदाबाद में माहौल कैसा है!

भाई कांग्रेस कोई मूर्ख नहीं थी जो 70 सालों तक लोगों को गैस का कनेक्शन नहीं दिया उसे पता था कि भारत की जनता को जितना तरसा कर रखो जितना तड़पा कर रखो उतना ही अच्छा है!👍

साभार

एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप का जॉर्ज सोरोस पर बहुत बड़ा खुलासा


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के लिए कुख्यात अरबपति व्यापारी जॉर्ज सोरोस की बड़ी साजिश का खुलासा किया है। ट्रंप ने कहा कि अरबपति जॉर्ज सोरोस के संगठनों ने भारत और बांग्लादेश समेत कई देशों में उथल-पुथल मचाने के लिए यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) से 26,00,00,000 डॉलर हासिल हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि सोरोस ने इस पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर के देशों में अराजकता फैलाने और सरकारें बदलने के लिए काम किया।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि 'जॉर्ज सोरोस ने USAID से 26 करोड़ डॉलर हासिल किए और इस पैसे का इस्तेमाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, यूक्रेन, सीरिया, ईरान, पाकिस्तान, भारत, ब्रिटेन और अमेरिका में अराजकता फैलाने, सरकारें बदलने और निजी लाभ के लिए किया।' ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उनके प्रशासन ने USAID के बजट को फ्रीज कर दिया है और अमेरिकी विदेशी सहायता पर जांच बढ़ा दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पिछले 15 सालों में, USAID ने सोरोस से जुड़े संगठनों को 27 करोड़ डॉलर से ज्यादा दिए ऐसा ही एक संगठन ईस्ट-वेस्ट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट है, जिसने सोरोस के ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के साथ साझेदारी की और USAID से फंड हासिल किया है इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलनों में अमेरिकी सरकार की भूमिका पर चिंताएं बढ़ा दी हैं
यूएसएड और जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी द्वारा ट्रेनिंग आयोजित कर मोदी सरकार के खिलाफ न्यूज़ फैलाने, फेक नैरेटिव बनाने, उसे सनसनीखेज हेडिंग देने के लिये भारत के 75000 मीडियाकर्मियों को बाकायदा ट्रेंड किया गया।
इन संस्थाओं द्वारा 6000 से ज्यादा मीडिया पर्सनालिटियों को लाखों डॉलर बाँटे गये। प्रशांत भूषण, पुण्य प्रसून वाजपेयी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम और साक्षी जोशी जैसे जितने भी मोदी विरोधी पत्रकार हैं - इन सबको यूएसएड से मोटा पैसा दिया गया है।
पिछले कुछ वर्षों से मोदी के खिलाफ जो कई पत्रकार जहर उगल रहे थे, वह दरअसल यूएसएड का पैसा बोल रहा था।

इस्लामी उम्माह के नाम पर भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे इस्लामी कट्टरपंथी, हैदराबाद के अडानी-एलबिट प्लांट की जानकारियाँ की सार्वजनिक: दुश्मन मुल्कों तक पहुँचा रहे डिफेंस सीक्रेट

    भारतीय इस्लामिस्ट हैदराबाद में अडानी-एलबिट JV की गलत तस्वीर पेश कर रहे (साभार- TNM, एलबिट सिस्टम्स )
इस्लामिस्टों की वफादारी दूसरे देशों और नेताओं के लिए एक्सपोर्ट की जाती है। यह वफादारी अक्सर धर्म के आधार पर देशों और नेताओं के लिए बिना किसी शर्म के सपोर्ट और एकजुटता दिखाने के लिए दिखती है। इसके बदले भले ही भारत की विदेश नीति और नेशनल सिक्योरिटी को नुकसान उठाना पड़े।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की इजरायली हमलों में हत्या पर आँसू बहाने वाले ये लोग अब अपनी इजरायल विरोधी भडास को भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर आक्रमण कर निकाल रहे हैं। हैदराबाद में भारत-इजरायल जॉइंट अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया ड्रोन समेत डिफेंस से जुड़े कई हथियार बनाती है। इस पर ये लोग अब हमलावर हैं।

भारत के खिलाफ नफरत फैलाने के दौरान ये भूल जाते हैं कि वे भारत में रहते हैं और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग उनके अपने देश को बाहरी खतरों से सुरक्षा मुहैया कराती है।

भारतीय इस्लामिस्ट हैदराबाद में अडानी-एलबिट जॉइंट वेंचर की खतरनाक रूप से तोड़-मरोड़कर तस्वीर पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट पटे पड़े हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत किस तरह ईरान के खिलाफ इजरायल को हथियार, खासकर हर्मीस 900 UAV ड्रोन एक्सपोर्ट कर रहा है।

वे इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते झगड़े के बीच भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। बताया जा रहा है कि अडानी-एलबिट जॉइंट वेंचर की हैदराबाद फैक्ट्री में बनने वाली ड्रोन का इस्तेमाल इजरायल हमले में कर रहा है। पहले इसका इस्तेमाल गाजा में हुआ और अब ईरान में हो रहा है।

इस्लामिस्ट पोस्ट लिख रहे हैं और इमोशनल वीडियो बना रहे हैं, जिनमें अक्सर अडानी-एलबिट ज्वाइंट वेंचर की हैदराबाद फैक्ट्री की सही लोकेशन की डिटेल्स होती हैं। ऐसी ही एक पोस्ट में, मुशीर खान नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया कि इजरायल पिछले 11 सालों से भारत में ड्रोन और मिसाइल बना रहा है और इन ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल पहले इजराइल के फिलिस्तीन के खिलाफ युद्ध में किया गया था और अब ईरान के खिलाफ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “किसी को यह पसंद नहीं आता, जब आपके पड़ोस में किसी दूसरे देश के लिए हथियार बनाने वाली फैक्ट्री हो।”  

अनीस अहमद नाम के एक यूजर ने X पर यही वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “अगर पिछले 11 सालों से गौतम अडानी और इजरायल हैदराबाद में ड्रोन-मिसाइल बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं… और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल गाजा पट्टी में नरसंहार और ईरान के खिलाफ किया जा रहा है… तो सवाल यह है कि एक नाजायज देश के साथ पार्टनरशिप करके दुनिया को क्या मैसेज दिया जा रहा है? असदुद्दीन ओवैसी साहब और राहुल गाँधी जी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? क्या यह सिर्फ एक अफवाह है… या एक बड़ा सच है जिसे दबाया जा रहा है?”

एक आदिल सिद्दीकी ने भी मुशीर खान का वीडियो शेयर करते हुए इस गलत दावे को आगे बढ़ाया कि इजरायल भारत में मिसाइल और ड्रोन बना रहा है, ताकि गाजा और ईरान को निशाना बनाया जा सके।

कविश अजीज, जो खुद को पत्रकार कहता है और एक घोर कट्टरपंथी है। उसने दावा किया कि इजरायल भारत में हथियार बना रहा है, जिनका इस्तेमाल फिलिस्तीन के बाद ईरान में किया जा रहा है।

अजीज ने 9 मार्च 2026 के पोस्ट में लिखा, “क्या आप जानते हैं??? इज़राइल पिछले 11 सालों से हैदराबाद में मिसाइल और ड्रोन बना रहा है। अडानी डिफेंस ने 2016 में इजरायल के एल्बिट सिस्टम्स के साथ मिलकर हर्मीस 900 ड्रोन बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर बनाया था। ये वो ड्रोन हैं जिनका इस्तेमाल फिलिस्तीन युद्ध में किया गया था और अब ईरान युद्ध में किया जा रहा है। अडानी डिफेंस इजरायली हथियार इंडस्ट्री के साथ मिलकर Tavor TAR-21, X-95 Tavor, नेगेव लाइट मशीन गन, गैलिल ACE असॉल्ट राइफ़ल, गैलिल DMR, और मसाडा पिस्टल जैसे छोटे हथियार भी बनाती है। 2020 में भारतीय सेना के लिए 16,479 Negev NG-7 LMGs के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था।”

क्या भारत ने फिलिस्तीन और ईरान के खिलाफ इजरायल को अडानी-एलबिट के बनाए ड्रोन और मिसाइल सप्लाई किए? इन इस्लामिस्टों की सोच को समझने से पहले, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे मामलों को भी इस्लामिक उम्माह के नजरिए से देखते हैं, उनके बारे में कुछ बातें साफ करना जरूरी है।हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी जरूरी नहीं कि मिसाइल ही बनाती हो।

2016 में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इजरायली डिफेंस मैन्युफैक्चरर एलबिट सिस्टम्स ने भारत में हर्मीस 900 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस अनमैन्ड एरियल व्हीकल बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर, अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड बनाया था। 2018 में अडानी एलबिट JV ने तेलंगाना के हैदराबाद में अपनी पहली मानवरहित UAV मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी खोली। JV द्वारा भारत में बनाए गए हर्मीस 900 के वर्शन को दृष्टि 10 कहा जाता है। हालाँकि भारतीय सेना कंपनी की मुख्य कस्टमर है, लेकिन यह ड्रोन एक्सपोर्ट करने के लिए भी आजाद है।

यह याद रखना चाहिए कि 2024 में, भारतीय इस्लामो-लेफ्टिस्ट ग्रुप इस बात से नाराज था कि भारत ने हैदराबाद अडानी-एलबिट फैसिलिटी में बने 20 हर्मीस 900 ड्रोन इजरायल को सप्लाई किए थे। हालाँकि, ये भारत के पूरे डिफेंस इकोसिस्टम का बहुत छोटा हिस्सा था। अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री मुख्य रूप से भारतीय डिफेंस जरूरतों को पूरा करती है, इजरायल की नहीं।

ये ड्रोन खास तौर पर भारत की सुरक्षा कर रहे हैं, जहाँ ये इस्लामिस्ट रहते हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए संयंत्र बनाया गया है।

भारत को इजरायल के लिए एक बड़े हथियार एक्सपोर्टर के तौर पर दिखाना असलियत से बिल्कुल अलग है। भारत पहले फिलिस्तीन और अब ईरान के खिलाफ इजरायल को हथियार दे रहा है, ये कहना बिलकुल गलत है। भारत इजरायल से सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है, जो इजरायल के कुल डिफेंस एक्सपोर्ट का 34% है। इजरायल ने हाल के सालों में भारत को बराक-8 मिसाइलें और हेरॉन ड्रोन सप्लाई किए हैं।

गाजा युद्ध के वक्त भारत ने साफ तौर पर कहा था कि वह गाजा में इस्तेमाल के लिए इजराइल को हथियार या गोला-बारूद सप्लाई नहीं करेगा। सभी एक्सपोर्ट एक एंड-यूजर एग्रीमेंट के तहत होंगे। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने पहले ही तय कर दिया था कि हर्मीस 900 ड्रोन निगरानी और टोही मिशन के लिए बनाए गए थे और इन्हें हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

ईरान-इजरायल युद्ध पर वापस आते हैं, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि भारत ने ईरान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए इजरायल को हर्मीस 900 ड्रोन या कोई भी ‘मिसाइल’ एक्सपोर्ट की है। यह पूरा दावा कि हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ईरान के खिलाफ इजरायल के युद्ध के लिए ड्रोन बना रही है, पूरी तरह से एक प्रोपेगैंडा है और देश को जनता को गुमराह करने वाला है।

हर्मीस 900 एक इजरायली ड्रोन है, और इजरायली डिफेंस फोर्स पहले से ही बड़ी संख्या में हर्मीस 900 ड्रोन और उनके पुराने वर्जन हर्मीस 450 ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं। हर्मीस असल में दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मिलिट्री ड्रोन में से एक है। कई देशों ने इसे अपनी फोर्स के लिए खरीदा है। सिर्फ इसलिए कि हैदराबाद अडानी-एलबिट फैसिलिटी हर्मीस 900 ड्रोन बनाती है, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ईरान में लड़ाई में इस्तेमाल के लिए इन ड्रोन को इजरायल को एक्सपोर्ट कर रहा है।

कट्टरपंथी सोच वाले मुशीर खान ने ईरान के खिलाफ अपने हमले में इजरायल द्वारा हर्मीस 900 सर्विलांस ड्रोन का इस्तेमाल करने के बारे में अपने सवाल पर ChatGPT के जवाब पर भरोसा किया। लेकिन, चैटबॉट में कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि ईरान विरोधी ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन भारत में बने हैं। यह साफ है कि इजरायल लोकल बने हर्मीस 900 UAVs का इस्तेमाल कर रहा है। फिर भी मुशीर खान और दूसरे इस्लामी कट्टरपंथी झूठी और डरावनी स्टोरी बनाकर सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं, ये पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना रवैया है। इसमें साजिश की बू आती है क्योंकि इस दौरान बड़ी चालाकी से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

भारत की सोच संतुलित रहा है, चाहे वह इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध हो या ईरान और इजरायल-US के बीच चल रहा युद्ध। मोदी सरकार ने इजरायल के साथ डिफेंस टेक पार्टनरशिप के जरिए, ईरान के साथ एनर्जी और लॉजिस्टिक्स संबंधों के जरिए, और अरब देशों के साथ बड़े आर्थिक संबंधों के जरिए संबंधों को संतुलित बना कर रखा है। भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके उन देशों के साथ अच्छे संबंध हैं जिनके साथ पुरानी दुश्मनी है या जो युद्ध में हैं, चाहे वह रूस-यूक्रेन हो, इजरायल-फिलिस्तीन हो, थाईलैंड-कंबोडिया हो, और इजरायल-ईरान हो या ईरान-गल्फ देश हों।

हालाँकि हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफ़ेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की लोकेशन सीक्रेट नहीं है, लेकिन मैप इमेज को हाईलाइट करना, हमला करने के लिए उकसाने जैसा है।

भारत और इजरायल के बीच अडानी-एलबिट डिफ़ेंस मैन्युफ़ैक्चरिंग जॉइंट वेंचर को ईरान के साथ किसी तरह का ‘धोखा’ बताना बेबुनियाद, बेईमानी भरा और असल में भारतीय इस्लामिस्टों द्वारा भारत के साथ धोखा है। भारतीय इस्लामिस्ट जो प्रोपेगैंडा चला रहे हैं, वह एक कुत्ते के भोंकने जैसा है, जिसे कम IQ वाली सांप्रदायिक नफरत भड़काने, हैदराबाद में अडानी-एलबिट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को टारगेट बनाने, भारत के अपने डिफेंस सेक्टर को नुकसान पहुँचाने और भारत के खिलाफ देश और दुनिया भर में गुस्सा भड़काने के लिए बनाया गया है।

इस्लामिस्ट भूल जाते हैं कि वे एक सुरक्षित और मजबूत भारत में रह रहे हैं, न कि युद्ध से जूझ रहे गाजा या ईरान में। किसी देश में बने हथियार न सिर्फ उस देश को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि वे जरूरी मिलिट्री लेवरेज और स्ट्रेटेजिक रिलेशन भी खरीदते हैं, जिससे वह देश लड़ाई और डिप्लोमेसी में मजबूत बनता है। भारत में कोई भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, जो भारतीय मिलिट्री को सप्लाई करता है और दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करता है, वह एक जरूरी पिलर है, जो भारत को दुनिया में सुरक्षित और मजबूत बनाए रखता है।

ये इस्लामिस्ट युद्ध में झुलस रहे गाजा और ईरान से दूर भारत में सुरक्षित हैं। ये एक मजबूत और स्थिर भारत में रह रहे है, जिसके अच्छे डिप्लोमैटिक और स्ट्रेटेजिक रिलेशन हैं। इसके बदौलत यहाँ शांति है।

भारत की विदेश और रक्षा नीति उन लोगों की भावनाओं या ‘धार्मिक’ भावनाओं से तय नहीं होती और न ही होनी चाहिए, जो विदेशी नेताओं और देशों को अपने देश और उसके हितों से ज्यादा अहमियत देते हैं।

हैदराबाद में चल रहे भारत-इजरायल जॉइंट वेंचर के खिलाफ भारतीय इस्लामी कैंपेन उस प्रोपेगैंडा कैंपेन जैसा है जो पाकिस्तानी जिहादी फरवरी 2026 के आखिर में ईरान और इजरायल+अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से कर रहे हैं। पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के वीडियो बनाए और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए, जिसमें वे ‘मान रहे’ थे कि भारत ने ईरान के खिलाफ इजराइल की मदद की।

इन झूठे बयानों को ईरान के खिलाफ भारत का ‘खुला धोखा’ बताया, ताकि भारत के खिलाफ दुनिया भर में नफरत फैलाई जा सके। ये लोग यह साबित करने में लगे हैं कि भारत ने ईरान को धोखा दिया। इसके लिए झूठ प्रपंच और प्रोपेगेंडा सबकुछ फैला रहे हैं। यह तब भी फैलाई जा रही है, जब भारत ने कम से कम तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों को पनाह देने की पेशकश की, और ईरान ने नई दिल्ली को धन्यवाद भी दिया।

भारतीय इस्लामिस्ट भारत से नफरत करने वाले पाकिस्तानी जिहादियों से अलग नहीं हैं। उनका बर्ताव असल में ईरान और फिलिस्तीन के साथ ‘इस्लामिक उम्मा सॉलिडैरिटी’, मोदी-विरोधी झुकाव, दंगा भड़काने की मंशा रखने वाले हैं, वे अपने देश के हितों को भूल जाते हैं। इस्लामिस्टों को पक्का पता है कि मोदी सरकार को ‘प्रो-इजरायल’ दिखाने से वे अपने आप ‘एंटी-मुस्लिम’ लगेंगे। चल रहे प्रोपेगैंडा का असली मकसद सिर्फ भारत की डिफस मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ नफरत पैदा करने तक ही सीमित नहीं लगता, बल्कि देश में अशांति फैलाना भी इसका मकसद है।

यह देखा गया कि कैसे, इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के मारे जाने की खबरें आने के बाद, लखनऊ, जम्मू और कश्मीर, कारगिल और दूसरे इलाकों में शिया मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई लोगों ने तो युद्ध से जूझ रहे ईरान जाकर खामेनेई के लिए इजरायल और अमेरिका से लड़ने की इच्छा भी जताई। इनमें से ज्यादातर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की कभी निंदा नहीं की। भारत की आधिकारिक विदेश नीति के खिलाफ जाकर भी विदेशी नेताओं और देशों को इस तरह का धर्म के आधार पर सपोर्ट करना खतरनाक और देशद्रोह जैसा है।

हालाँकि बातें अलग-अलग है। लेकिन, 2022 में नूपुर शर्मा के ‘ईशनिंदा’ वाले मामले में भी ऐसी ही कोहराम मचाया गया था। इन्हीं इस्लामिस्ट लोगों ने कुरान की एक बात कोट करने पर BJP की पूर्व प्रवक्ता के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग की थी। कुछ ही समय में देश भर में दंगाई कट्टरपंथी भीड़ ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। ये गुस्सा खाड़ी देशों तक फैल गया। ऐसा लगता है कि नूपुर शर्मा वाले मामले की तरह ही कट्टरपंथी अब अडानी-एलबिट जॉइंट डिफेंस वेंचर के पीछे पड़ गए हैं और हैदराबाद फैक्ट्री के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग कर रहे हैं।