पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा सृष्टि के कल्याण के लिए पुष्कर में एक महान यज्ञ का आयोजन कर रहे थे। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी बड़े यज्ञ की पूर्णता के लिए पत्नी का साथ होना अनिवार्य होता है। पत्नी साक्षात् लक्ष्मी स्वरूप होती है। पत्नी का जीवन ही नहीं प्रत्येक स्थान पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसे साधारण मानव से लेकर देवता भी आदर-सत्कार देते हैं। इसीलिए छोटी पूजा से लेकर बड़ी पूजा में नारी यानि देवी को प्रमुखता दी गयी है। अगर विवाहित स्त्री के नाम से पहले श्रीमती और अविवाहित कन्या के नाम से पहले सुश्री लिखा जाता है क्योकि दोनों का अर्थ ही देवी होता है।
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पौराणिक गाथा : माता गायत्री की उत्पत्ति की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा सृष्टि के कल्याण के लिए पुष्कर में एक महान यज्ञ का आयोजन कर रहे थे। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी बड़े यज्ञ की पूर्णता के लिए पत्नी का साथ होना अनिवार्य होता है। पत्नी साक्षात् लक्ष्मी स्वरूप होती है। पत्नी का जीवन ही नहीं प्रत्येक स्थान पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसे साधारण मानव से लेकर देवता भी आदर-सत्कार देते हैं। इसीलिए छोटी पूजा से लेकर बड़ी पूजा में नारी यानि देवी को प्रमुखता दी गयी है। अगर विवाहित स्त्री के नाम से पहले श्रीमती और अविवाहित कन्या के नाम से पहले सुश्री लिखा जाता है क्योकि दोनों का अर्थ ही देवी होता है।
फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR: ‘मैनेजर को मारो और सुलगाओ शहर’: मानेसर से नोएडा तक मजदूरों की आड़ में छिपकर हो रही हिंसा की साजिश, वॉट्सऐप-इंस्टा-X पर मिले सबूत?
नोएडा में हिंसक प्रदर्शन (साभार- दैनिक भास्कर)
नोएडा में सैलरी की माँग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन में भड़की हिंसा को लेकर भड़काऊ पोस्ट करने पर RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर शेयर किया था। इस पुराने वीडियो में पुलिस को प्रदर्शनकारी को पीटते दिखाया गया था।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले ही इन वीडियो का फैक्टचेक किया था। पुलिस ने वीडियो को गलत बताते हुए कहा कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल झूठ है।
#UPPFactCheck -
— UP POLICE (@Uppolice) April 14, 2026
मध्यप्रदेश के शहडोल जनपद के बुढार थाना क्षेत्र में एक युवक द्वारा नशे की अवस्था में हंगामा किए जाने की घटना के वीडियो को भ्रामक रूप से जनपद गौतमबुद्ध नगर की घटना बताकर कतिपय सोशल मीडिया एकाउंट से प्रसारित किया जा रहा है, जो पूर्णतः असत्य एवं भ्रामक है।
सभी… pic.twitter.com/4wHkrBlM4h
पुलिस ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के अलावा भी भड़काऊ पोस्ट करने वाले कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है।
ऐसे में अदालतों से भी प्रश्न है कि हिंसा भड़काने वालों पर कानूनी डंडा चलेगा? ऐसे फेक वीडियो फैलाकर हिंसा भड़काने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। देश में अशांति फैलाना बहुत ही संगीन अपराध माना जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई नेता या पार्टी ऐसा घिनौना काम नहीं कर सके। लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि जिस अपराध के लिए आम नागरिक को आसानी से जमानत नहीं मिलती उसी अपराध में नेताओं को मिल जाती है, क्यों?
नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि समेत ज्यादातर माँगों को सरकार ने मान लिया है और उसे 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया है। इसके बावजूद मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन जारी है। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को प्रदर्शनकारियों ने 2 से 3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और आगजनी की।
अब सवाल उठ रहा है कि सरकार जब मजदूरों के असंतोष का पता चलते ही एक्शन में आ गई, उनके साथ संवाद किया और सुनिश्चित किया कि उनकी माँगे पूरी हों, इसके बाद भी आगजनी और पथराव की घटनाएँ हो रही है, तो सवाल उठता है कि इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं…
हिंसा का नक्सली और पाकिस्तानी कनेक्शन की आशंका
साजिश का तो जाँच के बाद में पता चलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि ये नक्सलवाद को फिर से जीवित करने का प्रयास हो सकता है। सीएम ने कहा कि देश में नक्सलवाद खात्मे के कगार पर है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है।
प्रदर्शनकारियों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो वास्तव में मजदूर हैं, उनसे ही बातचीत की जानी चाहिए। अक्सर बाहरी लोग मजदूर के प्रतिनिधि बनकर आंदोलन में घुसपैठ करते हैं।
वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पाकिस्तान लिंक की भी जाँच करने की बात कही थी। उन्होंने हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मेरठ और नोएडा से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।
सरकार के आला अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। राज्य में उद्योगों को लेकर योगी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाया है। कानून व्यवस्था दुरुस्त किया गया है। साजिश कर इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
गलत वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई
POLICE SOURCES CLAIM WHATSAPP NETWORK BEHIND MOBILISATION EVEN AS UNREST CONTINUES IN SECTOR 70 NOIDA TODAY.
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) April 14, 2026
Police are facing continuous stone pelting. Efforts are underway to bring the crowd under control.
POLICE SOURCES CLAIM PROTESTERS ADDED TO GROUPS OVERNIGHT VIA QR CODES.… pic.twitter.com/WtZnsZ8JRG
अब नोएडा का मामले में साजिश का पता तो जाँच पूरी होने के बाद चलेगा, लेकिन मानेसर को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसने साफ हो गया है कि यहाँ मजदूरों की आड़ में साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।
मानेसर में रची गई गहरी साजिश का हुआ खुलासा
9 अप्रैल 2026 को गुरुगाम के मानेसर में आईएमटी कंपनी में वेतन वृद्धि की माँग लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान 300 से 400 की भीड़ जमा हो गई और कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस पर पथराव किया। घटना की जाँच के दौरान पता चला है कि व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाई गई थी, जिसमें मैनेजर रामबीर को मारने की बात थी और फिर दंगा भड़काने की साजिश की गई थी। इस मैसेज में लिखा था कि रामबीर को बाहर लेकर आओ।
दूसरे मैसेज में रात तक इंतजार करने और फिर आग लगाने को कहा गया था। दरअसल साजिशकर्ता चाहते थे कि रात के अंधेरे का फायदा उठा कर काम को अंजाम दिया जाए। इतना ही नहीं मैसेज से पता चलता है कि पेट्रोल बम से हमले की तैयारी की गई थी। मैसेज में कहा गया है कि ठेके से बीयर की बोतल लेकर आना और पेट्रोल भरकर कंपनी पर फेंक देना। इससे पता चलता है कि साजिश कर मजदूरों की आड में कंपनियों को जलाने और मैनेजर को मारने की योजना थी।
पुलिस का कहना है कि व्हाट्स एप में जिस तरह के मैसेज मिले हैं, उससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। जल्द ही ऐसे नकाबपोशों को बेनकाब किया जाएगा, जिन्होंने मजदूरों की आड में हिंसा फैलाने की कोशिश की। इस घटना ने बता दिया है कि कैसे भोलेभाले मजदूरों को भड़का कर, उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा कर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश अराजक तत्व करते हैं।
केजरीवाल का वकील सिंघवी राज्यसभा में बैठा है; स्वर्ण कांता शर्मा पर क्यों नहीं महाभियोग शुरू करा देता; केजरीवाल अपने गिरेबान में झांक कर देखे
कल दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज को बदलने की एक याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि वादी के मनमुताबिक अदालत के आदेश न होना इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि जज ने पक्षपात किया। केजरीवाल ने तो सीधे हाई कोर्ट में खड़े होकर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपाती होने का आरोप लगा दिया और कहा कि आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है क्योंकि आप तो RSS से जुड़े संगठन की सभा में गई थी। केजरीवाल की तरफ से जस्टिस शर्मा के बच्चो पर भी कीचड उछाला गया है। केजरीवाल को याद होना चाहिए अनेक जज जैन जिनके बच्चे वकील है, तो क्या सब जगह गड़बड़ होती है। जस्टिस RF Nariman के पिता फली नरीमन सुप्रीम कोर्ट में ही वकील थे, फिर कोई भी कह सकता था बेटे के कोर्ट के लिए बाप सेटिंग करता होगा।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
लेकिन जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की ED द्वारा गिरफ़्तारी को वैध कहा जिस पर जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता फैसला नहीं कर सके और बड़ी बेंच को भेज दिया लेकिन वह बेंच 12 जुलाई, 2024 से अभी तक गठित नहीं हुई है। वकील था अभिषेक मनु सिंघवी और क्या यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि संजीव खन्ना को कांग्रेस सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में नियुक्त किया था। सिंघवी और खन्ना ने मिलकर ED की गिरफ़्तारी की वैधता को ऐसे लटकाया कि केजरीवाल की मौज चल रही है। ये दो जज जस्टिस शर्मा के फैसले को बदलने की काट नहीं ढूंढ सके लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दूसरे दो जज राष्ट्रपति को आदेश दे दिए। जाहिर है राष्ट्रपति को आदेश भी राजनीतिक था और केजरीवाल के लिए फैसला भी राजनीतिक था।
केजरीवाल को चाहिए अभिषेक मनु सिंघवी से कह कर राज्यसभा में जस्टिस शर्मा के खिलाफ महाभियोग शुरू करा दे। ऐसा माहौल बना दे कि ये तो RSS से जुड़ी है। और नहीं तो कपिल सिब्बल की मदद ले ले। उसने तो जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग शुरू करने की कोशिश की थी क्योंकि वो भी एक हिंदू संस्था की बैठक में गए थे और हिंदुओं के पक्ष में बयान भी दिया था।
केजरीवाल की नीयत एक ईमानदार और संभ्रांत महिला जज को बदनाम करने की है। उसे पता है उसका केस कमजोर है क्योंकि उसने ट्रायल कोर्ट में गड़बड़झाला किया जो जज ने बिना केस के ट्रायल के लिए केजरीवाल और उसके चट्टों बट्टों को डिस्चार्ज कर दिया। स्वर्ण कांता जी अगर उसके खिलाफ निर्णय देती हैं तो यही शोर मचाएगा कि मैंने तो पहले ही कहा था मेरे खिलाफ फैसला आएगा। अर्बन नक्सलों और राहुल गांधी की तरह ये आज से नहीं शुरू से चल रहा है, आरोप लगा कर किसी को भी बदनाम कर दो और फिर भाग लो - लेकिन इस बार ये Contempt of Court में रगड़ा खाएगा जो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बार बार कोर्ट से कह रहे हैं।
केजरीवाल याद रख, नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कितने मुक़दमे झेले लेकिन कभी किसी जज पर आरोप नहीं लगाए। आफ़ताब आलम सुप्रीम कोर्ट में मोदी के सभी केस देखते थे और अमित शाह को गुजरात से बाहर करने वाली अभिलाषा कुमारी थी जो हिमाचल के CM की बेटी थी लेकिन फिर भी कभी उफ्फ नहीं की लेकिन तेरा तो अभी से पिछवाड़ा जल रहा है।
सिंगापुर के विदेश मंत्री ने बताया स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज क्यों बंद नहीं कर सकता था ईरान
सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने अपने देश की संसद में जोरदार भाषण में बताया कि कैसे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को बंद नहीं किया जा सकता जो पहले ईरान ने किया हुआ था और अब अमेरिका ने नाकाबंदी की है। उनके वक्तव्य का हिंदी अनुवाद ChatGpt से करा कर नीचे प्रस्तुत कर रहा हूं।
सिंगापुर Hormuz से सुरक्षित मार्ग के लिए टोल क्यों नहीं देगा?
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| लेखक चर्चित YouTuber |
हमारे लिए इसमें कोई “अगर-मगर” का सवाल नहीं है — स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है।
यहाँ “ट्रांजिट पेसेज़ (Transit Passage)” का अधिकार है।
यह कोई ऐसा विशेषाधिकार नहीं है जो सीमावर्ती देश की कृपा से दिया जाए,
यह कोई लाइसेंस नहीं है जिसे मांगना पड़े,
और न ही यह कोई टोल है जिसे चुकाना पड़े।
यह सभी देशों के जहाजों का मौलिक अधिकार है कि वे इन जलमार्गों से गुजरे।
यह अधिकार United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) में निहित है, जिस पर सिंगापुर ने हस्ताक्षर किए हैं और उसे अनुमोदित भी किया है।
आप सोच सकते हैं कि मैं इतनी कानूनी और सख्त भाषा में क्यों बात कर रहा हूँ।
यह इसलिए नहीं कि मुझे कानून से कोई विशेष लगाव है, बल्कि इसलिए कि मलक्का जलडमरूमध्य और सिंगापुर जलडमरूमध्य भी उतने ही महत्वपूर्ण वैश्विक “चोकपॉइंट” हैं।
आपको जानकर आश्चर्य हो सकता है कि समुद्री तेल (कच्चा और परिशुद्ध) का कुल प्रवाह वास्तव में Strait of Hormuz से भी अधिक मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
यदि आप वैश्विक व्यापार, विशेषकर कंटेनर व्यापार पर विचार करें, तो यहाँ से कहीं अधिक आवागमन होता है।
और एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य, जिससे अधिकांश लोग अनजान हैं:
Hormuz जलडमरूमध्य का सबसे संकरा हिस्सा लगभग 21 नॉटिकल मील है,
जबकि सिंगापुर जलडमरूमध्य का सबसे संकरा हिस्सा 2 नॉटिकल मील से भी कम है।
तो अब आप समझ सकते हैं कि हमें क्यों यह स्पष्ट रुख अपनाना पड़ता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और UNCLOS ही “महासागरों का संविधान” हैं, और नौवहन की स्वतंत्रता जहाजों और विमानों का अधिकार है, कोई विशेषाधिकार नहीं।
यह सिंगापुर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सिद्धांत के रूप में — और किसी पक्ष का समर्थन करने के लिए नहीं — मैं जहाज़ों के सुरक्षित मार्ग के लिए कोई बातचीत नहीं कर सकता, न ही टोल दरों पर कोई समझौता कर सकता हूँ, क्योंकि ऐसा करना इस कानूनी सिद्धांत को कमजोर करना होगा।
इस प्रकार, यह एक और उदाहरण है कि सिंगापुर पक्ष लेने के बजाय सिद्धांतों का पालन करता है।
वैसे सुना है आज ट्रंप ने होर्मुज खोलने की घोषणा कर दी है। दूसरे, यह कि होमुर्ज पर ईरान दादागिरी सिर्फ इस्लामिक मुल्क होने की वजह से कर रहा है। जिस तरह मुसलमान सड़क पर नमाज पढ़ने की जिद में माहौल ख़राब करने की कोशिश करते हैं वही दादागिरी ईरान कर रहा है। ईरान की इस दादागिरी को ख़त्म करने के लिए समस्त विश्व को ईरान से हर लेन-देन बंद कर देना चाहिए। नग्न नग्नता की ही भाषा समझता है।
घुसपैठियों को ‘बेचारा’ दिखा BBC ने फैलाया बंगाल में SIR पर प्रोपेगेंडा, 90 लाख नाम हटने पर रोया ‘मुस्लिम प्रताड़ना’ का रोना
एक समय था जब भारतीय BBC द्वारा प्रसारित किसी समाचार पर आंख मीच कर विश्वास करते थे, लेकिन कालचक्र ऐसा घुमा वही BBC बन रहा है (बी)Bhramit (बी)Biased (सी)Campaigner, भारत विरोधी आज इसी BBC का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमारा कहलाए जाने वाला राष्ट्रीय मीडिया खामोश रहता है। या यूँ समझा जाए कि "यार जो प्रकाशित/प्रसारित करना है करो हम चुप रहेंगे। तुम भी अपनी रोजी-रोटी कमाओ और हम भी।" यह आम नागरिक से लेकर राजनेताओं के चिंतन का विषय है।
चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने भी पुष्टि की कि संशोधन प्रक्रिया के अंतिम चरण में 27,16,393 मतदाता अयोग्य पाए गए। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर कुछ इस्लामी-वामपंथी झुकाव वाले राजनीतिक और मीडिया गुटों ने मुस्लिम-पीड़ित की कहानी को हवा देना शुरू कर दिया।
“Political turmoil in Indian border state as nine million lose voting rights” हेडलाइन के साथ इस आर्टिकल में स्निग्धेंदु भट्टाचार्य ने एक तरह का डर का माहौल बनाने की कोशिश की। उन्होंने नाम हटाए जाने को राजनीतिक साजिश के तौर पर पेश करते हुए इसे ‘वोटिंग अधिकार छिन जाने’ का मामला बताया, जो राज्य की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। अपने इस एकतरफा लेख में कोलकाता के इस तथाकथित ‘स्वतंत्र पत्रकार’ ने खासतौर पर मुस्लिमों को निशाना बनाए जाने की एक काल्पनिक कहानी को ज्यादा उभारने की कोशिश की।
इस आर्टिकल में चालाकी से आँकड़े, भौगोलिक संदर्भ, राजनीतिक बयान और सहानुभूति जगाने वाली व्यक्तिगत कहानियों को इस तरह पेश किया गया है कि पाठक खुद ही इन बिंदुओं को जोड़कर एक कथित साजिश का अंदाजा लगाने लगें। मानो बंगाल के मुस्लिमों के वोटिंग अधिकार छीनने की कोशिश हो रही हो, जो आमतौर पर BJP के खिलाफ वोट करते हैं।
12 अप्रैल 2026 को प्रकाशित BBC के इस आर्टिकल में लिखा गया है, “भारत की बांग्लादेश के साथ 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जो काफी हद तक खुली और कुछ हिस्सों में नदी के किनारे-किनारे गुजरती है। इसका एक बड़ा हिस्सा बंगाल से होकर जाता है। यही वजह है कि राज्य में प्रवासन और मतदाता सूची को लेकर होने वाली बहस को एक संवेदनशील और राजनीतिक रूप दे दिया गया है।”
स्निगधेंदु भट्टाचार्य ने इशारों-इशारों में यह जताने की कोशिश की कि सुप्रीम कोर्ट ने सही फैसला नहीं लिया, जब उसने सभी ‘विवाद सुलझाए बिना ही इस अप्रैल में चुनाव कराने की अनुमति दे दी।’ उन्होंने यह भी लिखा की इस वजह से ‘करीब 27 लाख मतदाताओं का भविष्य अब भी अनिश्चित’ बना हुआ है।
बंगाल SIR में मतदाता हटाना पारदर्शी जाँच या मुस्लिमों का मत छीनने की कोशिश?
दिसंबर 2025 में चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची से 58.25 लाख नाम हटाए थे। ये वे लोग थे जो या तो मृत पाए गए, कहीं और शिफ्ट हो चुके थे, लंबे समय से अनुपस्थित थे या जिनके नाम दोहराए गए थे। इसके बाद कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। फिर 28 फरवरी को अंतिम सूची से करीब 5 लाख और नाम हटाए गए, जिससे कुल मिलाकर हटाए गए नामों की संख्या करीब 91 लाख के आसपास पहुँच गई।
शुरुआत में 60.06 लाख मतदाताओं को जाँच के दायरे में रखा गया था, जिनमें से लगभग आधे लोग अयोग्य पाए गए। सबसे ज्यादा नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहाँ 11 लाख संदिग्ध मतदाताओं में से 4.55 लाख से ज्यादा अयोग्य निकले। मुर्शिदाबाद की सीमा बांग्लादेश से लगती है। यहाँ बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ और भीड़ जुटाकर हिंसा जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में अयोग्य मतदाताओं का सामने आना इसी पृष्ठभूमि से जुड़ा माना जा रहा है। मालदा और अन्य सीमावर्ती जिलों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली।
सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटना और बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ की बढ़ती संख्या जैसे संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इन जिलों की धार्मिक जनसंख्या संरचना को बदलने की एक सुनियोजित कोशिश हो सकती है। हालाँकि, इस पूरे मामले पर पर्दा डालने के लिए कुछ इस्लामी-वामपंथी झुकाव वाले गुट यह कहानी गढ़ रहें है कि चुनाव आयोग और BJP मिलकर मुस्लिमों को मनमाने तरीके से वोटिंग अधिकार से वंचित कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि हटाए गए ज्यादातर नाम सामान्य श्रेणियों में आते हैं। जैसे मृतक, लंबे समय से अनुपस्थित, स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके लोग, दिए गए पते पर न मिलने वाले या फर्जी एंट्रीज। मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियाँ आम होती हैं और SIR अभियान का मकसद ही इन्हें ठीक करना था। यह प्रक्रिया सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि अब तक शामिल 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी उद्देश्य से चलाई गई। ताकि घोस्ट वोटर, पलायन और पुरानी एंट्रीज जैसी समस्याओं को दूर किया जा सके।
SIR में चुनाव आयोग ने तय प्रक्रिया का पालन किया, जबकि उसे राज्य की TMC सरकार के दबाव और विरोध का भी सामना करना पड़ा। लेकिन BBC के आर्टिकल में इस बात का जिक्र तक नहीं है कि चुनाव आयोग के अधिकारी लगातार दबाव में काम कर रहे थे और मालदा में तो न्यायिक अधिकारियों को अपने काम के दौरान इस्लामी भीड़ की हिंसा तक झेलनी पड़ी। जाहिर है, ये बातें उस ‘मुस्लिम पीड़ित’ वाली कहानी में फिट नहीं बैठतीं, जिसे पेश करने की कोशिश की गई है।
BBC के आर्टिकल में दावा किया गया है, “राजनीतिक दलों द्वारा जुटाए गए आँकड़ों के मुताबिक, जिन 27 लाख मामलों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है, उनमें करीब 65 प्रतिशत मुस्लिम हैं। कुल मिलाकर हटाए गए 90 लाख नामों में से 31.1 लाख यानी लगभग 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं, जो कि 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी से ज्यादा है।”
हालाँकि, BBC की इस कहानी के उलट सच यह है कि जिन 27 लाख मामलों को ‘अभी तय नहीं’ बताया जा रहा है, या जिन 27,16,393 मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्हें बिना जाँच के बाहर नहीं किया गया। बल्कि हर मामले की न्यायिक समीक्षा हुई। इन नामों को कुछ गड़बड़ियों की वजह से चिन्हित किया गया था और करीब 705 न्यायिक अधिकारियों ने इनकी जाँच की। यह पूरी प्रक्रिया हाई कोर्ट की निगरानी में और सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हुई। कुल 60.06 लाख मामलों में से 32.68 लाख लोगों को योग्य माना गया, जबकि 27.16 लाख को अयोग्य घोषित किया गया।
सबसे अहम बात यह है कि जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, उनके लिए आपत्ति दर्ज कराने का रास्ता भी खुला है। इसके लिए 19 खास ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जहा वे अपील कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान कराने की अनुमति जरूर दी है और यह भी कहा कि दूसरे राज्यों में SIR प्रक्रिया ‘सुचारू रूप’ से पूरी हुई, जबकि बंगाल में ‘कानूनी विवादों’ के चलते स्थिति अलग रही। साथ ही, शीर्ष अदालत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि बिना SIR या चुनाव को रोके पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा और तय समय सीमा का ध्यान रखा जाए।
वहीं BBC के आर्टिकल में ‘राजनीतिक दलों’ के आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया, “हटाए गए 90 लाख नामों में से 3.11 लाख यानी करीब 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं, जो कि राज्य की आबादी में उनकी 27 प्रतिशत हिस्सेदारी से ज्यादा हैं।”
लेकिन BBC ने इस बात को नजरअंदाज किया कि कुल संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा नाम हिंदुओं के ही हटाए गए, जो करीब 63 प्रतिशत हैं। यहाँ तक कि कुछ हिंदू बहुल इलाकों जैसे पश्चिम बर्धमान और उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय वाले क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। इसके बावजूद BBC का आर्टिकल SIR प्रक्रिया को इस तरह पेश करता है मानो यह बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ और किसी ‘मुस्लिम-विरोधी साजिश’ से जुड़ा मामला हो, जिससे राज्य में डर और तनाव का माहौल बन सकता है।
चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी जाँच के बाद की गई है, न कि किसी खास समुदाय को निशाना बनाने के लिए। मुस्लिम मतदाताओं को जानबूझकर बाहर करने का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। इसके बावजूद BBC ने कमजोर दलीलों और अस्पष्ट वजहों के सहारे अपनी साजिश वाली कहानी को सही ठहराने की कोशिश की है।
अगर एक पल के लिए मान भी लें कि चुनाव आयोग और BJP ने मिलकर चुनावी सूची को अपने पक्ष में करने की कोशिश की, तो फिर सवाल उठता है कि खुद को हिंदू समर्थक बताने वाली पार्टी ऐसी प्रक्रिया क्यों होने देंगी, जिसमें हटाए गए नामों में 63 प्रतिशत हिंदू हों? और बंगाल में पहली बार जीत हासिल करने की कोशिश कर रही BJP आखिर ऐसा खुद को नुकसान पहुँचाने वाला कदम क्यों उठाएगी?
इसके बावजूद द वायर, न्यूजलॉन्ड्री, द क्विंट और आर्टिकल-14 जैसे प्लैटफॉर्म्स के लिए लिखने वाले स्निग्धेंदु भट्टाचार्य ने आधिकारिक आँकड़ों या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी को तवज्जो देने के बजाए कुछ चुनिंदा उदाहरणों और TMC जैसे दलों के सूत्रों पर ज्यादा भरोसा किया। यहाँ तक कि द क्विंट में अपने एक आर्टिकल में उन्होंने बंगाल के SIR अभियान को ‘घोषित किए बिना लागू किया NRC’ तक बता दिया।
वोटर लिस्ट फ्रीज होने के चलते हटाए गए मतदाता बंगाल चुनाव में नहीं कर सकते वोट
जिन मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से हटा दिए गए हैं, उन्हें सिर्फ इस वजह से दोबारा वोट देने की इजाजत नहीं दी जा सकती कि उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम हैं। चुनाव आयोग पहले ही बंगाल की मतदाता सूची को फ्रीज कर चुका है यानी जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई निर्देश नहीं देता, तब तक इसमें नए नाम नहीं जोड़े जा सकते।
इस बात की पुष्टि 13 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी कर दी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोमल्या बागची की बेंच ने साफ कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं और जिनकी दोबारा शामिल होने की अर्जी लंबित है, उन्हें आने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह टिप्पणी कोर्ट ने उस समय की जब 13 लोगों की याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिन्होंने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ कोर्ट से दखल देने की माँग की थी। हालाँकि, कोर्ट ने उनकी याचिका को ‘समय से पहले’ बताया और उन्हें पहले अपील ट्रिब्यूनल के पास जाने की सलाह दी।
TMC नेता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट से कहा था कि करीब 16 लाख लोगों ने अपील की है और उन्हें चुनाव में वोट देने की इजाजत दी जाए। इस पर CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा, “यह बिल्कुल संभव नहीं है। अगर ऐसा किया गया, तो इशसे जुड़े लोगों के वोटिंग अधिकारों को ही रोकना पड़ेगा।”
वहीं जस्टिस बागची ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 34 लाख अपीलें दायर की गई हैं। कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता (कुरैशा यासमीन और अन्य) पहले ही अपील ट्रिब्यूनल के पास जा चुके हैं… ऐसे में हमें लगता है कि उनकी चिंता अभी समय से पहले की है। अगर उनकी माँग मान ली जाती है, तो उसके जरूरी कानूनी परिणाम भी सामने आएँगे।”
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने का आवेदन 9 अप्रैल 2026 या उसके कुछ दिन बाद मंजूर हो जाता है, तो उसका नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा और वह वोट दे सकेगा। लेकिन कोर्ट ने यह भी बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि जिन लोगों के मामले अभी लंबित हैं, उन्हें चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
BBC आर्टिकल के लेखक की हिंदू-विरोधी, BJP-विरोधी और कभी प्रो-TMC आर्टिकल लिखने की आदत
हालाँकि, स्निधेंदु भट्टाचार्य का बार-बार ‘मुस्लिम-पीड़ित’ वाली कहानी को आगे बढ़ाना हैर करने वाला नहीं है, क्योंकि पहले भी वह हिंदू और हिंदुत्व के खिलाफ लिखे गए आर्टिकल को लेकर चर्चा में रहे हैं।
इतना ही नहीं चुनावों के दौरान उनके TMC के पक्ष में लिखे गए आर्टिकल का भी एक रिकॉर्ड रहा है, जिससे उनकी रिपोर्टिंग पर सवाल उठते रहे हैं।
जहाँ तक बंगाल का सवाल है, यह उन राज्यों में शामिल है जहाँ बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के मामले ज्यादा सामने आते हैं। पिछले तीन साल में 2600 से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया और वापस भेजा गया है। राज्य के कुल 10 जिले ऐसे हैं जो बांग्लादेश की सीमा से जुड़े हुए हैं। जैसे उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी। ऐसे सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ और उससे जुड़े मुद्दे लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं।
सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों की जातीय और भाषा की समानता की वजह से आवाजाही को पकड़ना हमेशा मुश्किल रहा है। इसी का फायदा उठाकर कई बांग्लादेशी घुसपैठिए, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम बताए जाते हैं, यहाँ स्थानीय पहचान पत्र बनवाने और मतदाता सूची में अपने नाम जुड़वाने में सफल हो जाते हैं। ऐसे में SIR जैसे अभियान के जरिए उनकी पहचान करना और उन्हें मतदाता सूची से हटाना एक तरीका माना जा सकता है। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या कुछ राजनीतिक दल और उनके समर्थक मीडिया समूह ऐसे लोगों को वोटबैंक के रूप में बनाए रखना चाहते हैं।
पिछले साल भी ऐसा देखा गया था कि जैसे ही नवंबर 2025 में SIR के दूसरे चरण के तहत घर-घर जाकर जाँच की घोषणा हुई, कई अवैध घुसपैठियों में घबराहट फैल गई। कुछ लोगों ने तो यह भी माना कि वे बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में आए थे। इसके बाद अचानक कई लोगों का वहाँ से चले जाना इस बात का संकेत था कि उन्हें पकड़े जाने का डर था।
वहीं, यह भी हैरानी की बात नहीं मानी जा रही कि BBC ने स्निगधेंदु भट्टाचार्य जैसे पत्रकार को मंच दिया, जिन्होंने इस मुद्दे पर ‘मुस्लिम-पीड़ित’ वाली कहानी को आगे बढ़ाया। BBC पर पहले भी भारत और हिंदू समाज से जुड़े मामलों में एकतरफा रिपोर्टिंग के आरोप लगते रहे हैं। चाहे 2022 की लीसेस्टर हिंसा हो, 2020 के दिल्ली दंगे या फिर बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ घटनाों की कवरेज।
हैरानी की बात नहीं है कि BBC ने स्निगधेंदु भट्टाचार्य जैसे एक पक्षपाती ‘स्वतंत्र पत्रकार’ को मंच दिया, जिन्होंने बंगाल के SIR को लेकर मुस्लिम पीड़ित वाली कहानी पेश की। ब्रिटेन के इस मीडिया संस्थान पर पहले भी कई बार भारत और हिंदू समाज से जुड़े मामलों में एकतरफा रिपोर्टिंग के आरोप लग चुके हैं। चाहे 2022 में लीसेस्टर की हिंसा की कवरेज हो, 2020 के दिल्ली दंगों की रिपोर्टिंग या फिर हिंदू-घृणा वाले पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जैसे लोगों को नरम छवि में दिखाना। इन सभी मामलों में उस पर सवाल उठे हैं।इसके अलावा ईरान युद्ध से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत के तेल भंडार को लेकर डर फैलाने वाली खबरें हो या 2024 में बांग्लादेश में हिंदू-विरोधी नरसंहार को छिपाने का प्रयास करने जैसे उदाहरण हों।
महिला साथी के स्तन को घूरना अपराध नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द की FIR
प्रतीकात्मक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दफ्तरों में व्यवहार को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि ऑफिस में महिला सहकर्मी के सीने को घूरना या एक टक लगाकर देखना अभद्र आचरण या नैतिक रूप से गलत हो सकता है लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-C के तहत दंडनीय ‘ताक-झाँक’ (voyeurism) का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस मामले में 2015 से दर्ज एक FIR रद्द कर दी है।
क्या था मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबकि, यह मामला 7 अप्रैल 2015 को मुंबई में बोरीवली पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR के बाद शुरू हुआ था। शिकायत के मुताबिक, उस समय 39 वर्षीय आरोपित अभिजीत निगुडकर एक निजी बीमा कंपनी में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत था जबकि 24 वर्षीय महिला शिकायतकर्ता उसी कंपनी में डिप्टी सेल्स मैनेजर थी। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपित अक्सर उसके साथ अपमानजनक व्यवहार करता, सामान्य तरीके से आँख मिलाने के बजाय उसके सीने को घूरता था और उस पर अनुचित टिप्पणियाँ करता।
शिकायत में बताया गया कि नवंबर 2014 में एक ऑफिस मीटिंग के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ ऐसा व्यवहार किया। इसके बाद महिला ने अपने वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जानकारी दी जिन्होंने मामले को उच्च प्रबंधन तक पहुँचाया।
महिला का कहना था कि आरोपित ने उसके काम में कमियाँ निकालनी शुरू कर दीं, जिसके चलते कंपनी ने उसे नोटिस जारी किया और नौकरी से निकालने की चेतावनी भी दी। कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने इस मामले की जाँच की थी। जाँच के बाद ICC ने आरोपी निगुडकर को क्लीन चिट दे दी थी। इसी दबाव के बीच महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। FIR दर्ज होने के दो दिन बाद 9 अप्रैल 2015 को आरोपित को गिरफ्तार किया गया। हालाँकि, बाद में उसे जमानत मिल गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित बोरकर ने कहा, “आरोप सिर्फ इतना है कि आरोपित ने ऑफिस मीटिंग के दौरान महिला के सीने को घूरा। मान भी लें कि यह सच है, तो भी यह वॉयूरिज्म की परिभाषा में नहीं आता। कानून के शब्दों को उनकी सीमा से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।”
अदालत में समझाया गया कि IPC की धारा 354C उस स्थिति में लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी महिला को उसकी निजी गतिविधि (private act) के दौरान देखता है या उसकी तस्वीर/वीडियो बनाता है तो ऐसे माहौल में जहाँ महिला को उम्मीद होती है कि उसे कोई नहीं देख रहा होगा।
आरोपी के वकील अमोल पाटणकर ने दलील दी कि पहली नजर में यह मामला धारा 354-C के तहत नहीं आता। इस पर कोर्ट ने भी सहमति जताई और कहा कि यह धारा हर तरह के आपत्तिजनक नजर या खराब व्यवहार को कवर करने वाली सामान्य धारा नहीं है।
जस्टिस बोरकर ने कहा, “यह कानून तभी लागू होता है जब कोई व्यक्ति किसी महिला की निजी गतिविधि में दखल देता है या उसे रिकॉर्ड करता है, खासकर ऐसे निजी माहौल में जहाँ उसकी निजता की उम्मीद होती है। इस अपराध की जड़ ही प्राइवेसी में दखल देना है।”
वहीं, सरकारी वकील योगेश नखवा और महिला के वकील अजिंक्य उदाने ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा व्यवहार महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाता है, इसलिए इसे 354C के तहत अपराध माना जाना चाहिए। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस धारा को ध्यान से पढ़ने पर साफ होता है कि हर वह हरकत, जो महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाए, 354C के तहत नहीं आती।
जस्टिस बोरकर ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “क्रिमिनल कानून का इस्तेमाल हर कार्यस्थल की शिकायत को वॉयूरिज्म जैसे अपराध में बदलने के लिए नहीं किया जा सकता।” उन्होंने आगे कहा कि महिला को घूरना, अपमानजनक व्यवहार करना या कार्यस्थल पर उत्पीड़न करना ज्यादा से ज्यादा ‘दुर्व्यवहार’ (misconduct) या ‘अशोभनीय हरकत’ (indecency) हो सकता है लेकिन यह 354C की सीमित परिभाषा में फिट नहीं बैठता।
कोर्ट ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता को वास्तव में अपमानित और आहत महसूस हुआ होगा और कार्यस्थल का माहौल खराब हो गया होगा लेकिन केवल इन आरोपों के आधार पर 354C के तहत आपराधिक मुकदमा चलाना संभव नहीं है।
प्राइवेट पार्ट पर बात, गंदे इशारे और देवी-देवताओं का अपमान: नासिक TCS मामले में मुस्लिम गैंग कैसे करते थे हिंदू महिलाओं को परेशान, 9 FIR की सारी डिटेल्स
नासिक के अशोका मार्ग पर स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, शारीरिक दुर्व्यवहार और धर्म के आधार पर भेदभाव का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया। महज 48 घंटों के भीतर, मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में एक ही विभाग के पाँच मुस्लिम पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई हैं। ऑपइंडिया (OpIndia) के पास मौजूद इन FIR की कॉपियों से पता चला है कि इस BPO में काम करने वाली हिंदू महिलाएँ पिछले कई सालों से यौन शोषण और धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हो रही थीं।
इन मामलों में आरोपित शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख सभी ओडीसी-02 (ODC-02) यूनिट से जुड़े हैं, जो कॉलिंग के जरिए एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड कलेक्शन का काम संभालते हैं। दर्ज की गई शिकायतों में तीन हिंदू महिला कर्मचारियों (जिनमें दो 23 साल की सहयोगी और एक 36 साल की टीम लीडर) ने दफ्तर के बेहद खराब माहौल का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि वहाँ लगातार यौन उत्पीड़न, निजी जिंदगी को लेकर बेतुके सवाल, गलत तरीके से छूने की कोशिश और हिंदू धार्मिक मान्यताओं पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की जाती थीं।
(FIR नंबर: 156/2026) हिंदू देवी-देवताओं पर अश्लील टिप्पणी और यौन शोषण
नासिक की TCS कंपनी में काम करने वाली एक 23 वर्षीय हिंदू छात्रा ने सहकर्मी दानिश शेख, तौसीफ अख्तर और निदा खान के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धार्मिक प्रताड़ना पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। FIR के अनुसार, आरोपित दानिश शेख ने अपने निकाह और दो बच्चों की बात छिपाकर युवती को प्रेम जाल में फँसाया और शादी का झांसा देकर जुलाई 2022 से फरवरी 2026 तक अलग-अलग होटलों में उसका शारीरिक शोषण किया। इस दौरान आरोपित तौसीफ और निदा खान ने पीड़िता को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया और शिवलिंग व भगवान कृष्ण सहित हिंदू देवी-देवताओं पर बेहद अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।
हद तो तब हो गई जब तौसीफ अख्तर ने पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए ऑफिस की पेंट्री और लॉबी में यौन उत्पीड़न किया और धमकी दी कि यदि उसने उसकी शारीरिक माँगें पूरी नहीं कीं, तो वह उसके घर वालों को सब बता देगा। इस पूरे मामले में आरोपितों ने न केवल पीड़िता का विश्वास तोड़ा, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी धार्मिक भावनाओं और गरिमा को छलनी किया।
(FIR नंबर: 163/2026) रजा मेमन और शाहरुख पर गंभीर आरोप, हेड अश्विनी पर भी कार्रवाई
नासिक की TCS कंपनी (BPO यूनिट) में काम करने वाली एक 25 वर्षीय शादीशुदा महिला कर्मचारी ने टीम लीडर रजा मेमन और सहकर्मी शाहरुख कुरैशी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई। FIR के अनुसार, रजा मेमन मई 2023 से ही पीड़िता को अकेले पाकर गंदी नीयत से छूने, अश्लील पहेलियाँ बुझाने और घूरने जैसी हरकतें कर रहा था। पीड़िता की शादी होने के बाद आरोपित ने उसकी पर्सनल लाइफ पर भद्दे और ‘सेक्सुअली सजेस्टिव’ कमेंट्स किए, जैसे- ‘रात में क्या करती हो कि दिन में नींद आती है?’ और गोवा ट्रिप के नाम पर ‘हनीमून और शराब’ जैसे शर्मनाक सवाल पूछे।
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपीशिकायत में यह भी आरोप है कि जब पीड़िता ने विरोध किया, तो टीम लीडर रजा ने उसका नाम ऑफिस बॉय से जोड़कर चरित्र हनन किया और दानिश-तौसीफ के साथ मिलकर उस पर काम का बोझ बढ़वा दिया। हद तो तब हो गई जब गुड़ी पड़वा पर साड़ी पहनकर आने पर शाहरुख ने उसे गंदी नजरों से देखा और अश्लील टिप्पणी की। पीड़िता का सबसे गंभीर आरोप कंपनी की ऑपरेशनल हेड अश्विनी चौनानी पर है, जिन्होंने बार-बार शिकायत के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया, बल्कि आरोपितों का साथ देकर पीड़िता की आवाज दबाने की कोशिश की।
(FIR नंबर: 164/2026) हिंदू महिलाओं के अंगों को घूरते थे मुस्लिम कर्मचारी, मिसकैरेज होने पर जबरन ‘अजमेर के मौलवी’ के पास भेजने का दबाव
नासिक की TCS कंपनी में एक 36 वर्षीय हिंदू महिला टीम लीडर ने मुस्लिम सहकर्मियों के एक खास गुट पर धार्मिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का सनसनीखेज आरोप लगाया। FIR के अनुसार, शफी शेख, तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी जैसे मुस्लिम कर्मचारी दफ्तर में एकजुट होकर गैर-मजहबी लड़कियों और लड़कों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं। पीड़िता ने बताया कि आरोपित शफी शेख मीटिंग के दौरान सार्वजनिक रूप से उसके प्राइवेट पार्ट्स (छाती) को गंदी नजरों से घूरता था और विरोध करने पर गंदी मुस्कान देता था, जिसकी शिकायत के बावजूद उसे सिर्फ दूसरे विभाग में भेज दिया गया जहाँ से वह लगातार पीड़िता का पीछा करता रहा।
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपीहद तो तब पार हो गई जब फरवरी 2026 में पीड़िता का मिसकैरेज (गर्भपात) हुआ, तो तौसीफ अत्तर ने उसकी व्यक्तिगत पीड़ा का मजाक उड़ाते हुए उसे ‘अजमेर के मौलवी’ का नंबर दिया और जबरन वहाँ जाने का दबाव बनाया। आरोपितों पर आरोप है कि वे दफ्तर में हिंदू लड़कियों पर अश्लील कमेंट करते हैं, उन्हें सिर से पैर तक गंदी नजरों से घूरते हैं और उनकी निजी जिंदगी में दखल देकर उन्हें मजहबी आधार पर प्रताड़ित और शर्मिंदा करते हैं।
(FIR नंबर: 165/2026) हिंदू देवी-देवताओं पर भद्दी टिप्पणी और महिला कर्मचारी को प्राइवेट पार्ट दिखाकर किया यौन उत्पीड़न
नासिक की TCS कंपनी में कार्यरत 25 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी ने बिजनेस प्रोसेस लीडर तौसीफ अत्तर के खिलाफ यौन प्रताड़ना और हिंदू धर्म के अपमान की FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, आरोपित तौसीफ दफ्तर में हिंदू लड़कियों को सिर से पैर तक घूरता और उनके अंगों को देखकर आँखें मारता था। पीड़िता ने बताया कि तौसीफ आने-जाने वाली लड़कियों के फिजिकल साइज पर भी बात करता था। हद तो तब पार हो गई जब दिसंबर 2025 में पीड़िता को छाछ पीते देख आरोपित ने अपने प्राइवेट पार्ट की ओर इशारा करते हुए बेहद अश्लील टिप्पणी की और कहा- ‘मेरे पास भी छाछ है, तुझे चाहिए क्या?’
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपीयही नहीं, आरोपित ने दफ्तर में हिंदू धर्म और आस्था पर भी जहरीला हमला बोला। पीड़िता की टेबल पर रखी महादेव की मूर्ति को देखकर मुझसे पूछा कि क्या महादेव सच में भगवान हैं? अगर पार्वती ने गणपति को बनाया, तो महादेव को इसके बारे में क्यों नहीं पता? गणेश सच में महादेव के बेटे है? यह कहते हुए तौसीफ ने देवी पार्वती के चरित्र पर कीचड़ उछाला। इसके अलावा, उसने भगवान ब्रह्मा के लिए भी टिप्पणी कर कहा कि ब्रह्मा अपनी ही बेटी का रेपिस्ट है। और प्रभु श्री राम व माता सीता के बारे में अपमानजनक बातें कहीं कि उन्होंने वनवास में मांस खाया होगा, वे कंद खाकर नहीं रह सकते। तौसीफ ने जहर उगलते हुए हिंदू देवताओं को ‘झूठा’ और ‘दिखावे वाला’ बताया और इस्लाम को श्रेष्ठ साबित करने के लिए हिंदू भावनाओं को बुरी तरह कुचला।
(FIR नंबर: 166/2026) हिंदू कर्मचारी को जबरन खिलाया नॉन-वेज, पत्नी के लिए बोली बेहद शर्मनाक बात
नासिक की TCS कंपनी में काम करने वाले एक वरिष्ठ विश्लेषक ने सहकर्मी तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, शाहरुख शेख और रजा मेमन के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, ये आरोपित दफ्तर में एक संगठित गिरोह की तरह काम करते थे और हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनका धर्मांतरण कराने का दबाव डालते थे। पीड़ित, जो रुद्राक्ष की माला पहनते हैं और धार्मिक मार्ग पर चलते हैं, उन्हें आरोपितों ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोपितों ने छत्रपति संभाजी महाराज को ‘इस्लाम का गुलाम’ बताकर अपमानित किया। हद तो तब हो गई जब आरोपितों ने पीड़ित के शाकाहारी होने के बावजूद उन्हें देर रात जबरन नॉन-वेज खिलाया और मना करने पर जान से मारने की धमकी दी।
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपीइस गिरोह की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। जब आरोपितों को पता चला कि पीड़ित की संतान नहीं हो रही है, तो तौसीफ और दानिश ने सारी मर्यादाएँ लाँघते हुए घटिया टिप्पणी की। आरोपितों ने पीड़ित से कहा, “दवा से बच्चे नहीं हो रहे, तो अपनी पत्नी को हमारे पास भेज दो।” इसके अलावा, पीड़ित को धोखे से घर ले जाकर जबरन टोपी पहनाई गई, कलमा पढ़वाया गया और उसकी तस्वीरें वायरल कर दी गईं। FIR में यह भी आरोप है कि ये आरोपित दफ्तर की महिलाओं को देखकर गंदे कमेंट्स करते थे और कहते थे कि ‘तुम जो भी पसंद करोगी, उसे खुश करना होगा।’ जब पीड़ित ने इस धर्मांतरण और उत्पीड़न का विरोध किया, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई और काम के बहाने प्रताड़ित किया गया।
(FIR नंबर: 167/2026) हिंदू महिला के अंगों को हाथ से छुआ, भगवान कृष्ण को बताया ‘औरतबाज’
नासिक की TCS कंपनी में 25 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी (जो एक पावरलिफ्टर भी हैं) ने आसिफ अंसारी, शफी शेख और तौसीफ अत्तर के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के मुताबिक, आरोपित आसिफ अंसारी ने पीड़िता की छाती को सरेआम घूरते हुए अश्लील सवाल पूछा, “तुम्हारी पसंद छोटी है या बड़ी?” पीड़िता के वजन और शरीर की बनावट का मजाक उड़ाते हुए आरोपित तौसीफ और आसिफ उस पर गंदे कमेंट्स करते थे। दिसंबर 2024 में आरोपित शफी शेख ने पीड़िता के पास बैठकर पैर से पैर रगड़ा और काम सिखाने के बहाने उसके सीने और प्राइवेट पार्ट्स को हाथ से छुआ। जब पीड़िता ने विरोध किया, तो आरोपित गंदी मुस्कान देकर वहाँ से चला गया।
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपीयही नहीं, आरोपितों ने दफ्तर के माहौल को मजहबी जहर से भर दिया था। आरोपित तौसीफ अत्तर ने हिंदू आस्था को चोट पहुँचाने के लिए भगवान कृष्ण को ‘औरतबाज’ कहा और भगवान शिव व माता पार्वती के रिश्ते पर निहायत ही गंदी और अश्लील टिप्पणी की। पीड़िता का आरोप है कि ये आरोपित दफ्तर में एकजुट होकर हिंदू लड़कियों को उनके शरीर और धर्म के आधार पर शर्मिंदा करते थे।
(FIR नंबर: 168/2026) नई नवेली हिंदू दुल्हन से ‘हनीमून’ पर अश्लील सवाल, भगवान ‘नंगे’ रहने पर टिप्पणी
नासिक की TCS कंपनी से एक 23 वर्षीय विवाहित हिंदू महिला कर्मचारी ने शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख के खिलाफ सामूहिक उत्पीड़न की FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, पीड़िता की शादी के महज एक महीने बाद ही टीम लीडर रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी ने उसे दफ्तर में घेर लिया और उसके हनीमून को लेकर गंदे और अश्लील सवाल पूछे लगे, जैसे- ‘हनीमून पर क्या किया? क्या तुम्हारे पति ने तुम्हें गाजर दी?’ आरोपितों ने पीड़िता का नाम ‘प्लेयर’ रख दिया था और उसे अपने पति को छोड़कर दूसरा बॉयफ्रेंड बनाने के लिए मजबूर किया।
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपीप्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। आरोपित आसिफ अंसारी दफ्तर में पीड़िता को जबरन गले लगा लेता था, उसकी कमर, पेट और जाँघों को गंदी नीयत से छूता था और उसके अंदर के कपड़ों (innerwear) के साइज के बारे में भद्दी बातें पूछता था। आरोपित तौसीफ अत्तर भी काम सिखाने के बहाने पीड़िता के अंगों पर हाथ फेरता था और ‘संतरे छोटे हैं या बड़े’ जैसी अश्लील टिप्पणियाँ करता था। आरोपितों ने हिंदू धर्म पर भी जहर उगला। आसिफ अंसारी ने कहा कि ‘तुम्हारे भगवान नंगे घूमते हैं और तुम लोग नकाब नहीं पहनती, इसीलिए तुम हिंदुओं का रेप होता है।’ गुड़ी पड़वा के दिन आरोपितों ने पीड़िता की साड़ी का पल्लू तक खींच लिया। इन दरिंदों ने पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे वह दफ्तर जाने से भी डरने लगी थी।
(FIR नंबर: 169/2026) महिला कर्मचारी की बीमारी का मजाक उड़ाया, प्राइवेट पार्ट और ‘फिजिकल रिलेशन’ पर पूछते अश्लील सवाल
(FIR नंबर: 171/2026) हिंदू युवती के शरीर पर भद्दे कमेंट्स, गुड़ी पड़वा पर ड्रेस को लेकर उड़ाया मजाक और डाली गंदी नजर
प्रताड़ना की हद तब पार हो गई जब 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर पीड़िता नई ड्रेस पहनकर ऑफिस आई। आरोपित रजा मेमन ने उसे सबके सामने बुलाकर सिर से पैर तक गंदी नजर से घूरा और हिंदू त्योहारों का अपमान करते हुए ताना मारा कि ‘क्या तुम पूजा नहीं करती, बस तैयार होकर ऑफिस आ जाती हो?’ आरोपितों ने दफ्तर में ऐसा खौफ पैदा कर रखा था कि पीड़िता शिकायत करने से भी डरती थी। पीड़िता का आरोप है कि ये लोग उस पर लगातार नजर रखते थे और गंदे इशारे कर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाते थे।
नासिक TCS कंपनी से सामने आई यह रिपोर्ट न केवल यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की पराकाष्ठा है, बल्कि एक इस्लामिक संगठित गिरोह द्वारा हिंदू आस्था और मानवाधिकारों पर किया गया गहरा प्रहार भी है। दफ्तर जैसे पेशेवर माहौल को मजहबी कट्टरता, लव जिहाद और धर्मांतरण की साजिशों का अड्डा बनाना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह बेहद शर्मनाक है कि जहाँ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान प्राथमिकता होनी चाहिए थी, वहाँ उनकी धार्मिक पहचान को हथियार बनाकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से छलनी किया गया।(साभार)
AMU के हॉस्टल से मिले जाली नोट और कारतूस, शहबाज फरार: पहली बार नहीं है यूनिवर्सिटी में संदिग्धों की तलाश, आतंकी मॉड्यूल तक का यहाँ से हो चुका खुलासा
इतिहास साक्षी है कि भारत में जवाहरलाल यूनिवर्सिटी और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दोनों ही अपनी स्थापना से लेकर आज तक विवादित रही है। नेहरू सरकार से लेकर आज मोदी सरकार तक कोई यहाँ हो रही देश विरोधी गतिविधियों पर हंटर चलाने में पूर्णरूप से नाकाम रही है। संदिग्धों को गिरफ्तार कर सरकारें अपना दामन बचा लेती हैं। एक यूनिवर्सिटी में टुकड़े-टुकड़े गैंग सक्रीय है तो दूसरी में पाकिस्तान समर्थक। नोटबंदी लेकर जनता तक विरोधियों के दुष्प्रचार में फंस मोदी सरकार को कोसती नज़र आती है। लेकिन भूल जाती है कि नोटबंदी होने पर कितना जाली नोट कार्टन भर-भर कर नदियों और कब्रिस्तानों में फेंका गया था। जिस पर हर राष्ट्रीय मीडिया चुप्पी साधे रहा लेकिन सोशल मीडिया पर फोटो सहित खूब प्रसारित किया गया था।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं, और इस बार मामला और भी गंभीर है। एक छात्र, शहबाज, के कमरे से पुलिस को जाली नोट और जिंदा कारतूस मिले हैं। छापेमारी से पहले ही वह फरार हो गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने 13 अप्रैल को उसे सस्पेंड कर दिया।
पुलिस अब उसकी तलाश कर रही है। जाँच के दौरान 113 संदिग्धों की सूची भी बनाई गई है। इनकी तलाशी ली जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब एएमयू का नाम ऐसे मामलों में आया है। इससे पहले भी यहाँ कट्टरपंथ और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।
जिस दिन शहबाज़ गिरफ्तार होगा जितने भी मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन और इनके समर्थक सियासत पार्टियां victim card खेलने की नौटंकी कर कहेंगे कि "मुस्लिम है इसलिए फंसाया जा रहा है, गरीब है, दिमाग से पागल है, मज़लूम है" आदि आदि और एक से बढ़कर एक महंगा वकील खड़ा किया जायेगा और अदालतें उन वकीलों को सम्मान देते हुए उनकी दलीलों को सुनने में देश का समय बर्बाद कर गुमराह होकर देश को भी गुमराह कर जमानत दे देंगी।
शहबाज की तलाश में पुलिस
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शहबाज एमसीए का छात्र है। पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर एएमयू सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर कॉलेज हॉस्टल में छापेमारी की थी, इसको लेकर कॉलेज प्रशासन की मदद से एटीएस ने कमरे की छापेमारी की थी। इस दौरान उसके कमरे से 32 बोर पिस्टल की गोलियाँ, 12 बोर हथियार के चार कारतूस, नकली नोट, आठ मोबाइल फोन, खोखे और मैगजीन के अलावा नकली आईडी कार्ड मिले थे, लेकिन शहबाज कमरे में मौजूद नहीं था।
उसका अब तक सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई है। इस बीच यूनिवर्सिटी ने उसे सस्पेंड कर दिया है। बरामद सामानों की फॉरेंसिक जाँच की जा रही है। ये भी पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट और छिपाकर रखे गए हथियार किस उद्देश्य के लिए और किसके कहने पर शहबाज ने रखे थे?
कॉलेज के हॉस्टल में छापेमारी हाल ही में हुए सिविल लाइंस क्षेत्र में फायरिंग को लेकर की गई थी। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में ही शहबाज का नाम सामने आया था।
एएमयू की दो डिग्रियाँ और फर्जी सर्टिफिकेट
शहबाग ने इससे पहले डिप्लोमा इन कैमिकल इंजीनियरिंग करने के लिए भी नामांकन लिया था। उसके पास एएमयू के हाईस्कूल और 12वीं के फर्जी सर्टिफिकेट भी मिले हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब उसकी कुंडली खँगाल रही है। ये बात भी सामने आई है कि शहबाज को रूम अलॉट नहीं किया गया था। उसने कमरे पर अवैध रूप से महीनों से कब्जा कर रखा था। वह गैर आवासीय छात्र था।
#WATCH अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) हॉस्टल में पुलिस की रेड के बाद स्टूडेंट के कमरे से नकली नोट और कारतूस मिले।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 13, 2026
इस पर AMU के प्रॉक्टर मोहम्मद नावेद खान ने कहा, "... हमने बच्चे के बारे में अपने रिकॉर्ड चेक किए और उसने यूनिवर्सिटी में 2 अलग-अलग समय पर… pic.twitter.com/r2qTwphmIr
शहबाज ने अलग-अलग वक्त पर अलग कोर्स में एडमिशन लिया था। उसने डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग में भी पहले नामांकन लिया था। दूसरी बार एमसीए में नामांकन लिया। उसके कमरे से कई सर्टिफिकेट और दस्तावेज मिले हैं। दो एएमयू की मार्कशीट मिली है, जो फर्जी बताया गया है। वह हाईस्कूल और 12वीं की है। यूनिवर्सिटी ने साफ कहा है कि उसने 12वीं यहाँ से नहीं किया है और वह फर्जी सर्टिफिकेट है। उसे सस्पेंड कर दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 113 संदिग्धों की लिस्ट बनाई
एएमयू प्रशासन ने कॉलेज में आने जाने वालों पर कड़ी नजर रखने के सख्त हिदायत दिए हैं, साथ ही 113 संदिग्ध और अराजक तत्वों की लिस्ट तैयार की है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि कुछ छात्रों की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी का नाम खराब होता है और करीब 26 हजार छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ता है।
कॉलेज प्रशासन का मानना है कि 99 फीसदी बच्चा पढ़ने आता है। बहुत कम बच्चे हैं, जो कॉलेज किसी और मकसद से आते हैं। उन्हें अलग किया जा रहा है। अब छात्र-छात्राएँ भी गोपनीय तरीके से इनकी जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने स्टूडेंट नियमित कॉलेज आते हैं और कितने बाहरी बच्चें हैं, जो गलत काम में शामिल हैं। उन पर कार्रवाई की जा रही है।
एएमयू के कुछ छात्रों का ISIS कनेक्शन सामने आया था
यह पहला मामला नहीं है जब एएमयू के छात्र संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हों। नवबंर 2023 में ISIS मॉड्यूल का अलीगढ़ में भंडाफोड़ हुआ था जिसमें 7 एएमयू के छात्र थे। इसका पता तब चला जब एक फर्जी दस्तावेज और चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और उसकी जाँच के दौरान एटीएस को आईएसआईएस मॉड्यूल का पता चला था। इनमें से दो छात्र शाहनवाज और रिजवान एएमयू के छात्र संगठन एसएएमयू के सदस्य थे।
दरअसल छात्र संगठन SAMU पर CAA-NRC विरोधी हिंसा के दौरान ही खुफिया एजेंसियों की नजर थी। उस वक्त भी एटीएस ने एएमयू के कुछ छात्रों को हिरासत में लिया था। इसमें नवंबर 2025 में गिरफ्तार एएमयू के छात्र भी थे।
2023 में सामने आया था मामला
ISIS लिंक को लेकर नवंबर 2023 से फरार चल रहे दो छात्रों, अब्दुल समद मलिक और फैजान बख्तियार पर सरकार ने 25-25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। ये लोग भी SAMU से जुड़े थे।
ATS की FIR के मुताबिक, फैजान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक सोशल मीडिया के साथ कई अन्य माध्यमों से ISIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिल कर कई युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की कोशिशों में जुटे थे। इन दोनों को जनवरी 2024 में एटीएस ने गिरफ्तार किया।
दिल्ली में हुई थी कई गिरफ्तारियाँ
अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई आतंकियों को दिल्ली से लेकर अलीगढ़ तक गिरफ्तार किया था। ये आतंकी आईएसआईएस का मॉड्यूल संचालित कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में पता चला था कि शहनवाज, रिजवान और अरशद नाम के आतंकी, जिसमें शहनवाज पुणे में यूएपीए केस में गिरफ्तारी के बाद से फरार था, वो उत्तरी भारत में आईएसआईएस का पूरा मॉड्यूल खड़ा कर रहे थे और दीपावली के त्योहार के समय कई जगहों पर धमाकों-हमलों की फिराक में थे।
इससे पहले 2023 में ही AMU से पीएचडी करने वाले ISIS आतंकी वजीउद्दीन की छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारी हुई थी।
दरअसल एएमयू को आतंकी छिपने का अड्डा बनाते रहे है। हर तरह के कोर्स इस यूनिवर्सिटी में होते हैं। स्कूल से पीएचडी तक की पढ़ाई यहाँ होती है। ऐसे में किसी कोर्स में एडमिशन लेकर छिपना आसान होता है। छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना भी तुलनात्मक रूप से आसान होता है, क्योंकि पढ़ने लिखनेवाले छात्र एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे पर विश्वास कर लेते हैं। यही वजह है कि कई बार छात्रों के कनेक्शन आतंकियों, कट्टरपंथियों और देश में अराजकता फैलाने वालों से हो जाते है।
‘उम्माह’ के लिए कुछ भी करेगा ‘इस्लामी’ इकोसिस्टम, इनका दोहरापन; अरफा के लिए US-इजरायल की मार से तबाह हुआ ईरान ‘विश्वगुरु’, वो सुपरपॉवर भी
अरफा खानम शेरवानी (फोटो साभार: arfakhanum/Instagram/@khanumarfa/X)
अरफा खानम शेरवानी जिन्हें हम सब ‘अरफा’ के नाम से जानते हैं, एक बार फिर अपने दोगले चेहरे का प्रदर्शन कर रही हैं। बुधवार (08 अप्रैल 2026) को ही उन्होंने दो पोस्ट किए। पहले पोस्ट में लिखा कि “ईरान उभर के सामने आया है” और दूसरे में सीधे घोषणा कर दी- “I have no hesitation in saying that after defeating America, Iran is now the ultimate ‘Vishwa Guru’ of the world”। फिर ईरान दूतावास की पोस्ट को कोट करते हुए लिख दिया, “Hello Superpower ”। वाह रे अरफा! विश्वगुरु? सचमुच?
याद दिला दें कि जब भारत के संदर्भ में ‘विश्वगुरु’ शब्द आता है तो इन कॉन्ग्रेसियों और इस्लामी इकोसिस्टम वालों को चिढ़ मच जाती है। जब पीएम मोदी ने जब भारत को विश्वगुरु बनाने की बात की तो इन्हें हँसी आ गई, ट्रोलिंग शुरू हो गई। लेकिन आज अस्थाई संघर्ष-विराम के मौके पर अचानक ईरान को ‘विश्वगुरु’ और ‘सुपरपावर‘ बताने लगी हैं। समझते भी हैं ये लोग कि विश्वगुरु होने का मतलब क्या होता है? या फिर बस उम्माह का झंडा लेकर घूमने का बहाना चाहिए?
I have no hesitation in saying that after defeating America, Iran is now the ultimate “Vishwa Guru” of the world.
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) April 8, 2026
अरफा, कल तक तुम अयातोल्ला की ख़िलाफ़त कर रही थीं। महिला अधिकार, मानवाधिकार, फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के नाम पर ईरान की तानाशाही को कोस रही थीं। फिर अचानक अमेरिका के खिलाफ़ ‘इस्लामी उम्माह’ का नारा लगाने लगीं।
और अब? अस्थाई सीजफायर होते ही ईरान को विश्वगुरु साबित करने में जुट गईं। क्यों?
क्योंकि तुम्हारा सहोदर पाकिस्तान वहाँ दलाली करने लगा था। बात अब उम्माह की हो गई है ना?
वर्ना उसी ईरान के मूल निवासियों (पारसियों) को भारत ने अपने घर में पनाह दी है। बिना किसी परेशानी के। वे यहाँ फल-फूल रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं, पढ़ रहे हैं, परिवार चला रहे हैं। लेकिन अरफा को समस्या भारत से इस बात की है कि वो तमाम झंझावातों के बीच भी अपने सभी लोगों का ख्याल रख रहा है। उसी ईरान से लोगों को बाहर निकालकर ला रहा है, जिसमें अधिकतर इसके मुस्लिम भाई ही हैं। फिर भी इन नमकहरामों के मन में भारत के प्रति इतनी घृणा बैठी हुई है कि बर्बाद हो चुके ईरान में उन्हें विश्वगुरु दिखने लगा है।
इसे ही कहते हैं दोगलापन। ये खाएँगी भारत का, भारत की हवा-पानी, भारत की आजादी, भारत की मीडिया में छूट, भारत की सिक्योरिटी। लेकिन गाएँगी ईरान का, पाकिस्तान का, लेबनान का, गाजा का… या हर उस जगह का जहाँ इनके उम्माह वाले दिखेंगे। हाँ भाई, क्यों नहीं? क्योंकि ये तो ‘काफिरों’ का देश है ना। तो इनका प्रेम ‘अपने’ उम्माह भाइयों पर ही रहेगा। चाहे वहाँ लाखों मार दिए जाएँ (अयातोल्लाओं की ओर से) या इनके बंधु पूरी दुनिया को बम-धमाकों में उड़ाते रहें जन्नत के नाम पर।
अभी उसी ईरान से तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें अपने पुलों को बचाने के लिए ईरान महिलाओं और बच्चों की ह्यूमन चेन बना रहा है। महिलाएँ, बच्चे – जिनकी सुरक्षा के नाम पर अरफा पहले चिल्लाती थीं- आज उनको ढाल बनाकर पुल बचा रहे हैं। और अरफा? उन्हें ‘विश्वगुरु’ कह रही हैं। वाह रे दोगलों! कल तक महिला-वाद के नाम पर अयातोल्ला को कोसती थीं, आज वही महिलाएँ ह्यूमन शील्ड बन रही हैं तो मुँह बंद। क्योंकि अब उम्माह का मुद्दा आ गया।
JUST IN: New video shows crowds locking arms around Iranian power plants, creating HUMAN SHIELDS – a striking scene as Trump's 8p.m. deadline for the Islamic Republic nears.
— Fox News (@FoxNews) April 7, 2026
Iran has rejected the latest terms, raising the stakes with just hours to go. pic.twitter.com/XNB3w4BQRV
अरफा तुम The Wire की सीनियर एडिटर हो, AMU की एलुम्ना हो। तुम्हारा पूरा इकोसिस्टम कॉन्ग्रेस और इस्लामी लॉबी का है। तुम्हें हमेशा ‘सेकुलरिज्म’ का ढोंग रचाना पड़ता है। लेकिन जब बात अपनी आती है तो असली चेहरा सामने आ जाता है। पाकिस्तान से प्यार, ईरान से प्यार, गाजा से प्यार – लेकिन भारत? भारत तो बस ‘फासीवादी’ है, ‘इस्लामोफोबिक’ है। भारत ने ईरानियों को शरण दी, उनको सुरक्षा दी, लेकिन तुम्हें ये सहन नहीं होता। क्योंकि तुम्हारा दिल कहीं और बसता है। तुम्हें भारत की तरक्की, भारत की मजबूती, भारत की विश्व पटल पर बढ़ती पहचान कभी रास नहीं आई।
देखो अरफा, विश्वगुरु बनने के लिए सिर्फ़ एक युद्ध में अमेरिका से टकराना काफी नहीं होता। विश्वगुरु वो होता है जो अपने नागरिकों की रक्षा करे, महिलाओं को आजादी दे, बच्चों को भविष्य दे, अर्थव्यवस्था को मजबूत करे। ईरान में आज महिलाएँ हिजाब के नाम पर कोड़े खा रही हैं, विरोध करने पर जेल जा रही हैं। लेकिन तुम्हें वो ‘सुपरपावर’ दिख रहा है। क्योंकि तुम्हारा एजेंडा हिंदुस्तान को नीचा दिखाना है। तुम चाहती हो कि भारत हमेशा ‘दूसरे’ देशों के मुकाबले छोटा दिखे।
Hello Superpower 👋 https://t.co/Xqtth6g1JO
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) April 8, 2026
ये दोगलापन सिर्फ़ तुम्हारा नहीं, पूरे उस इकोसिस्टम का है जिसमें तुम खड़ी हो। कल अमेरिका दुश्मन था, आज ईरान हीरो बन गया। कल पाकिस्तान ‘पीस’ का दूत था, आज ईरान ‘विश्वगुरु’। कल महिला अधिकार, आज उम्माह। कल सेकुलर, आज इस्लामी ब्रदरहुड। ये चरित्रहीनता है। ये नमकहरामी है।
अरफा, तुम भारत में बैठकर ईरान का गान गा सकती हो। लेकिन हकीकत ये है कि भारत ने तुम्हें वो आजादी दी है जो ईरान में कभी नहीं मिलेगी। तुम बिना हिजाब के घूम सकती हो, बिना डरे बोल सकती हो, बिना जेल गए आलोचना कर सकती हो। लेकिन तुम्हें ये आजादी भी भारत से ही मिली है। फिर भी तुम्हारा दिल ईरान और पाकिस्तान के लिए धड़कता है।
ये ही तो दुख की बात है। भारत तुम्हें खिला-पिला रहा है, लेकिन तुम्हारा प्रेम ‘अपने’ उम्माह भाइयों के लिए है। बर्बाद ईरान में विश्वगुरु ढूँढ रही हो, जबकि असली विश्वगुरु वो देश है जो तुम्हें शरण दे रहा है। लेकिन तुम्हारा? वाह रे दोगलों… वाह!

