पौराणिक गाथा : पुरी में जगन्नाथ जी ने राम भक्त हनुमान को स्वर्ण जंजीर में बांधकर अपराधी की तरह क्यों रखा है?

जब राजा इंद्रदुम्न ने पुरुषोत्तम क्षेत्र यानी पुरी में भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण किया तो समुद्र के अधिपति वरुण देव के मन में अपने प्रभु के दर्शन की तीव्र इच्छा जागी। वे जानते थे कि साक्षात नारायण अब उनके तट पर निवास कर रहे हैं। अपनी इसी भक्ति के वशीभूत होकर वरुण देव ने मंदिर की ओर प्रस्थान किया। क्योंकि वरुण देव जल के स्वामी हैं। उनके आगमन के साथ ही समुद्र की प्रचंड लहरें भी नगर की सीमाओं को लांघ कर भीतर प्रवेश कर गई। देखते ही देखते पुरी का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और मंदिर के प्रांगण तक पानी पहुंच गया। यह कोई साधारण प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि एक भक्त का अपने आराध्य से मिलने का आवेग था जिसने अनजाने में पुरी धाम के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया था। 
मन्दिर के अन्दर प्रवेश करने पर ध्यान से सुनने पर समुद्र की लहरों का मधुर स्वर कानों में सुनाई पड़ता है। जबकि समुद्र और मन्दिर में दूरी है। जबकि समुद्र के पास जाने पर उतनी मधुर ध्वनि नहीं सुनाई पड़ती। अब इसे प्रभु का चमत्कार ही कहा जाएगा।    
यह स्थिति नगरवासियों के लिए अत्यंत चिंताजनक थी। लोगों के घर बहने लगे और खेती नष्ट होने लगी। तब समस्त नगरवासी अपनी करुण पुकार लेकर श्री जगन्नाथ धाम पहुंचे। उन्होंने महाप्रभु के श्री चरणों में साष्टांग प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा हे प्रभु यदि आप इस नीलांचल धाम में निवास करना चाहते हैं और चाहते हैं आपकी सेवा करें तो कृपा कर हमें इस संकट से बचाएं। वरुण देव बार-बार आपके दर्शन के बहाने हमारे नगर को डूबा रहे हैं। यदि यही स्थिति रही तो यह सुंदर नगर और आपकी सेवा करने वाले भक्त कैसे जीवित रहेंगे? 
हे जगत के स्वामी इस विनाशकारी बाण को रोकिए। तब महाप्रभु के मन में एक गहरा विचार चला। वरुण देव का यह प्रेम अब मर्यादा तोड़ रहा है। मेरे दर्शन की उनकी यह प्यास मेरे अन्य भक्तों के लिए संकट बन गई है। इसे रोकने के लिए मुझे एक ऐसे रक्षक की आवश्यकता है जिसके भीतर अथाह शक्ति भी हो और अटूट धैर्य भी। जिसने माता सीता की खोज कर मेरे हृदय के संताप को हरा था वही आज मेरे नगरवासियों के भय को भी हर सकता है। 
भगवान ने विचार किया कि वरुण देव का जल तत्व है और हनुमान पवन पुत्र है। पवन ही जल की लहरों को नियंत्रित करती है। इसलिए भगवान ने हनुमान जी को बुलाया क्योंकि वे जानते थे कि जो समुद्र को लांघ सकता है वही समुद्र को बांध भी सकता है। यह तुच्छ सेवक धन्य हुआ कि आपने एक बार फिर इस दास को अपनी सेवा के योग्य समझा। हे महावीर तुम इस नीली जलराशि के सम्मुख एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हो जाओ। वरुण देव की एक बूंद भी मेरे भक्तों के आंगन तक नहीं पहुंचनी चाहिए। प्रभु आपके आदेश की गुरुता को मैं समझता हूं। समुद्र की गर्जना मेरे राम नाम के उद्घोष के सामने मौन हो जाएगी। आपकी आज्ञा मेरे लिए अमिट रेखा है। जिसे लांघने का साहस स्वयं वरुण देव भी नहीं कर पाएंगे। जय श्री जगन्नाथ। 
हे पवन पुत्र मेरा उद्देश्य प्रभु के भक्तों को कष्ट देना नहीं था। मैं तो बस अपने स्वामी के उन नूतन विग्रहों के दर्शन करना चाहता था जो इस भव्य मंदिर में विराजे हैं। लहरों का उफान मेरी भक्ति का आवेग था। हे वरुण भक्ति वही श्रेष्ठ है जो संसार का कल्याण करे विनाश नहीं। प्रभु का आदेश है कि तुम अपनी मर्यादा में रहो। यदि तुमने इस रेखा को लांघा तो मेरी गदा और प्रभु का सुदर्शन चक्र तुम्हारा मार्ग रोक देंगे। 
बस, उस समय से भगवान जगन्नाथ को भोग में केवल खिचड़ी अर्पित की जाती थी जो चावल और दाल से बनी होती थी। वही भोग हनुमान जी को भी दिया जाता था। लेकिन हनुमान जी को अयोध्या में रहते हुए अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का अनुभव था। अच्छा खिचड़ी। धीरे-धीरे वे केवल खिचड़ी खाते-खाते ऊब गए। हनुमान जी के मन में यह विचार आने लगा। प्रभु की महिमा अपरंपार है और यह खिचड़ी भी दिव्य है। मैं तो वानर सेना का सेनापति हूं। मुझे तो मीठे फल और लड्डुओं का स्वाद प्रिय है। क्या प्रभु को मेरी पसंद याद नहीं? क्या मुझे युगों युगों तक बस इसी खिचड़ी पर गुजारा करना होगा। खिचड़ी से ऊबकर और मीठे व्यंजनों की लालसा में हनुमान जी ने एक युक्ति निकाली। वे जानते थे कि प्रभु जगन्नाथ जो राम ही हैं के वास अयोध्या और अन्य स्थानों पर आज भी उनके मनपसंद भोग लगते हैं। 
जब भी वरुण देव यानी समुद्र शांत होते हनुमान जी चुपके से अपना पहरा छोड़ते और आकाश मार्ग से उड़कर अयोध्या या वाराणसी पहुंच जाते। वहां वे भरपेट लड्डू, मालपुआ और ताजे फलों का भोग पाते। वे सोचते प्रभु तो भीतर ध्यान मग्न है। उन्हें क्या पता चलेगा? मैं जल्दी से प्रसाद खाकर वापस लौट आऊंगा। लेकिन जैसे ही हनुमान जी वहां से हटते वरुण देव को मौका मिल जाता। समुद्र की लहरें फिर से मंदिर की दीवारों को छूने लगती और पुरी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता। जब यह बार-बार होने लगा तो भगवान जगन्नाथ समझ गए कि हनुमान जी का मन इस खिचड़ी प्रसाद से भर गया है और वे स्वाद के चक्कर में अपनी ड्यूटी छोड़ रहे हैं। हनुमान तुम अपनी जगह क्यों छोड़ रहे हो? क्या तुम्हें मेरी दी हुई खिचड़ी पसंद नहीं? प्रभु आपकी खिचड़ी अमृत है। पर इस वानर को कभी-कभी लड्डुओं की भी याद आती है। 
हे महावीर तुम तो जानते हो कि मेरे लिए भक्तों के कल्याण से बड़ा कुछ नहीं है। तुम्हारी शक्ति और तुम्हारी भूख दोनों ही असीमित हैं। मुझे प्रसन्नता है कि तुमने अपने मन की बात मुझसे छिपाई नहीं। पर हनुमान पुरी धाम की रक्षा का भार केवल तुम्हारे सबल कंधों पर है। यदि तुम स्वाद के वश में होकर तट छोड़ोगे तो वरुण देव मर्यादा का उल्लंघन करेंगे और मेरे हजारों भक्त जलमग्न हो जाएंगे। हनुमान तुम स्वयं को वश में नहीं कर पा रहे हो। इसलिए अब मैं तुम्हें प्रेम और कर्तव्य की इन स्वर्ण जंजीरों में बांधता हूं। यह जंजीरें तुम्हें दंड देने के लिए नहीं बल्कि इस स्थान पर तुम्हारे अडिग होने का प्रमाण होंगी। जब तक तुम बंधे रहोगे वरुण देव की शक्ति तुम्हें पार नहीं कर पाएगी और ना ही तुम विचलित हो पाओगे। 
हनुमान जी ने देखा कि वे जंजीरें केवल स्वर्ण की निर्जीव वस्तु नहीं थी। जब उन्होंने जंजीर के हर एक कड़े को ध्यान से देखा तो उन्हें प्रत्येक कड़े पर राम नाम अंकित दिखाई दिया। इतना ही नहीं उन जंजीरों से वही मधुर ध्वनि निकल रही थी जो हनुमान जी के हृदय में सदैव गूंजती रहती है। राम राम राम हे महाप्रभु मैं कितना अज्ञानी था जो इसे दंड समझ रहा था। आपने तो मुझे दंड नहीं बल्कि अपना साक्षात नाम पहना दिया है। यह बेड़ियां स्वर्ण की नहीं है। यह तो आपके नाम की शक्ति है। प्रभु इस संसार में हनुमान के लिए राम नाम के बंधन से बड़ा कोई मोक्ष नहीं है। 
हे अंजनी पुत्र संसार तुम्हें अनेक नामों से जानता है। किंतु यहां तुम्हारी ख्याति बेड़ी हनुमान के रूप में होगी। जो भी भक्त जगन्नाथ धाम आएगा वो तुम्हारे इस स्वरूप का दर्शन कर यह सीखेगा कि भगवान का नाम राम नाम की बेड़ी ही जीव को भटकने से रोकता है। तुम इसी तट पर दरिया महावीर बनकर मेरे धाम की रक्षा करोगे। 
हनुमान सुनो आज से मैं इस पुरी धाम की मर्यादा और तुम्हारी सन्तुष्टि के लिए एक नई परंपरा का आरंभ करता हूं। आज से इस मंदिर की रसोई साक्षात महालक्ष्मी के संरक्षण में होगी। अब से यहां केवल खिचड़ी नहीं बल्कि छप्पन भोग का विधान होगा। इसमें तुम्हारे प्रिय लड्डू भी होंगे, मालपुआ भी होगा और वह दिव्य पोड़ा पीठा भी होगा। जिसकी सुगंध पाकर स्वयं देवता भी स्वर्ग छोड़कर यहां दौड़े आएंगे। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि 56 प्रकार के इन व्यंजनों का विस्तार इतना विशाल हो कि मेरे भक्त को कभी किसी और द्वार की ओर न ताकना पड़े। 
हनुमान यह 56 भोग मेरे और तुम्हारे प्रेम का प्रतीक होंगे। आज से जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद दुनिया का सबसे पवित्र अन्न होगा। जिसे पाकर मनुष्य जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाएगा। नील माधव हे नील माधव मैं केवल मुट्ठी भर लड्डुओं के मोह में भटक रहा था। पर आपने तो मेरे बहाने समस्त चराचर जगत के लिए अमृत का द्वार ही खोल दिया। आज इस हनुमान ने जान लिया कि आपके चरणों को छोड़कर कहीं और सुख खोजना केवल मृत तृष्णा है। प्रभु आपकी जय हो। आपके इस महाप्रसाद की जय हो। 
हनुमान जी ने एक हाथ में अपनी गदा संभाली और दूसरे हाथ से अपनी बेड़ियों को माथे से लगाया। भगवान जगन्नाथ मंदमंद मुस्कुराते हुए मंदिर के गर्भगृह की ओर लौट गए। उसी दिन से पुरी में महाप्रसाद और छप्पन भोग की परंपरा शुरू हुई। वरुण देव ने अपना सिर झुका लिया और हनुमान जी दरिया महावीर बनकर अनंत काल के लिए पहरे पर बैठ गए। आज भी पुरी जाने वाला हर भक्त जानता है कि मंदिर के भीतर जो शांति है वो बाहर खड़े उसी महावीर की पहरेदारी का फल है जिसे भगवान ने खुद राम नाम की बेड़ियों में बांधा था। जय जगन्नाथ जय दरिया महावीर। 

क्या राघव चड्ढा भी बीजेपी में शामिल होकर साबिर अली, नरेश अग्रवाल और शहजाद अली आदि की तरह भीड़ में गुम हो जाएंगे?

उत्तर प्रदेश की सियासत के एक बड़े माहिर खिलाड़ी हुआ करते थे, नरेश अग्रवाल। हरदोई जिले में नरेश अग्रवाल के परिवार का खासा दबदबा माना जाता था। जिला पंचायत, नगर पालिका से लेकर हरदोई विधानसभा तक, 40 साल तक उनका कब्ज़ा रहा है। कहने को तो वो खाँटी सपाई थे मगर प्रदेश में सरकार किसी की भी रही हो, नरेश अग्रवाल का जलवा हमेशा बरकार रहा।

अपने बयानों को लेकर नरेश अग्रवाल हमेशा अखबारों और मीडिया में चर्चा का विषय रहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हिंदू देवी-देवताओं तक पर वो विवादित बयान दे देते थे। उन पर हिन्दू देवी देवताओं को लेकर गलत बयानबाज़ी के चलते एफआइआर तक दर्ज हुई थी। फिर 2018 में वो भाजपा में शामिल हो गए। भक्त परेशान हो गए, जुगनू बन गए, भाजपा को गरियाने लगे।
नरेश अग्रवाल का भाजपा में शामिल होना 'खबर' थी, लेकिन उसके बाद नरेश अग्रवाल खबरों से गायब हो गए। किसी ने नरेश अग्रवाल का कोई बयान, कोई चर्चा या अखबार में उनकी फोटो देखी है? जेडीयू के एक नेता साबिर अली हुआ करते थे। कट्टरपंथी विचारों और विवादित बयानबाज़ी के लिए मशहूर थे। पीएम मोदी तो खास तौर से उनके निशाने पर रहते थे।
वरिष्ठ पत्रकार एम जे अकबर जिनकी राजीव गाँधी के राज में बड़ी तूती बोलती थी। मुसलमानों का डर दिखा राजीव सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानों के पक्ष में दिए फैसले को ही रुकवा दिया लेकिन वही अकबर बीजेपी में आने पर मोदी द्वारा तीन तलाक बिल पर चुप्पी साध गया। मुंह से एक शब्द नहीं निकाल पाया।
इतना ही नहीं, चर्चा थी कि उन्ही दिनों Calcutta High Court द्वारा कुरान की 124 आयतों के विरुद्ध आने वाले जजमेंट को भी सुनाये जाने में अहम् भूमिका रही। जबकि 31 जुलाई 1986 को तीस हज़ारी कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रट लोहट 24 आयतों के खिलाफ फैसला देने में सफल हो गए जिससे मुल्लावाद में मातम छा गया था।
जब भाजपा-जेडीयू में छत्तीस का आंकड़ा था तो साबिर अली टीवी पर आकर जेडीयू की ओर से मोदी के खिलाफ ज़हर उगलते थे। साबिर अली कहते थे कि मोदी को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। लगभग हर दूसरे दिन अखबार में उनका कोई न कोई बयान छपता था। फिर एक दिन वो बीजेपी में शामिल हो गए। भक्त परेशान, जुगनू की टिमटिम। भाजपा में भी विरोध हुआ, 24 घण्टे में साबिर अली बाहर कर दिए गए। मगर अंदरखाने भाजपा से जुड़े रहे।
पिछले साल मई में साबिर अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ा पद मिला था। किसी को खबर हुई? एक शहज़ाद अली हुआ करते थे, एक्टिविस्ट कहलाते थे। CAA को लेकर शाहीन बाग में धरना दे रहे थे। सोशल मीडिया पर भी CAA और मोदी के खिलाफ ज़हर उगलते थे। शहज़ाद अली वामपंथियों के नए माई-बाप थे जिनसे वामियों को बड़ी क्रांति की उम्मीद थी। फिर एक दिन शहज़ाद अली भाजपा में शामिल हो गए। भक्त फिर परेशान।
शहज़ाद अली भाजपाई होते ही कहने लगे भाजपा मुसलमानों की दुश्मन नहीं है। हम मोदी जी के साथ मिलकर CAA का हल निकाल लेंगे। भाजपा में शामिल होने तक तो शहज़ाद अली 'खबर' थे, उसके बाद एकदम से गायब हो गए। न उन्होंने CAA को लेकर अब तक कोई बयान दिया और न ही अब तक किसी 'क्रांति' की 'मूली' उखाड़ी। मुम्बई हमला आरएसएस की साज़िश बताने वाले कृपा शंकर सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए थे, भक्त तब भी परेशान थे।
कभी खबर बने रहने वाले कृपा शंकर सिंह अब खबरों से ही गायब है। कांग्रेस के धुर हिंदुत्व विरोधी अशोक चह्वाण, मिलिंद देओरा, रंजीत चौटाला, गीता कोड़ा, तपस राय, टीएमसी के अर्जुन सिंह, सुवेन्दु अधिकारी, और दिलीप मंडल भाजपा में शामिल होने के बाद या तो शांत हैं या हिंदुत्व के लिए लड़ रहे हैं। और अब राघव चड्ढा के भाजपा में आने के बाद वातावरण में जुगनुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
राघव चड्ढा या तो चुप रहकर खबरों से गायब हो जाएंगे या देश और हिंदुत्व के लिए काम करेंगे। भाजपा गंगा नहीं है, जो सब पवित्र कर देगी। भाजपा वासेपुर है..यहाँ कबूतर भी एक पंख से उड़ता है ..और दूसरे से अपनी इज्ज़त बचाता है। भाजपा में सब धान बाईस पसेरी है। भाजपा भुने चने खेत मे बोकर भी फसल तैयार कर देती है।

वाकई राहुल गाँधी Leader of Opposition नहीं Leader of Propaganda है पुलिस ने किया सचेत ; अगर यही काम किसी और ने किया होता क्या पुलिस गिरफ्तार करने की बजाए सचेत कर छोड़ देती?


लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हुई एक घटना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। गाजीपुर पुलिस ने राहुल के आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें फैक्ट चेक किया है। पुलिस ने अपील की है कि वे बिना पुष्टि के अफवाहें न फैलाएँ। 

अगर यही गलत बयानी किसी आम नागरिक ने की होती क्या पुलिस उसको अफवाह फ़ैलाने के जुल्म में गिरफ्तार नहीं करती? फिर राहुल को क्यों नहीं? क्या देश में नेताओं और आम नागरिकों के लिए दो कानून हैं? अगर राहुल के प्रोपेगंडा से वहां दंगा हो गया होता क्या तब भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी होती?   

                               साभार: सोशल मीडिया IHateAAPParty, अप्रैल 26, 2026    
दरअसल राहुल गाँधी ने दावा किया था कि गाजीपुर में विश्वकर्मा समुदाय की एक बेटी के साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई और परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियाँ दी गईं। राहुल गाँधी ने कहा कि हर बार पीड़ित कमजोर वर्ग से होता है, अपराधियों को संरक्षण मिलता है और सत्ता में बैठे लोग चुप रहते हैं।

राहुल गाँधी ने लिखा, “जिस देश और प्रदेश में माँ-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख माँगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं। मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए आपके राज में बेटियाँ इतनी असुरक्षित क्यों हैं?” गाजीपुर पुलिस ने राहुल गाँधी के आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए खारिज किया है।

गाजीपुर पुलिस ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “कृपया सही तथ्यों से संज्ञानित हों। 15 अप्रैल 2026 की सुबह 5:44 बजे मृतका के पिता ने डायल 112 पर कॉल करके बताया था कि लड़की ने पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली है।” पुलिस ने आगे लिखा, “प्रकरण में मृतका के पिता की तहरीर पर दर्ज FIR में भी रेप का कोई उल्लेख नहीं है। मृतका के पीएम में भी कोई बलात्कार संबंधी तथ्य नहीं आया है।”

पुलिस ने राहुल गाँधी को आगाह करते हुए कहा कि कृपया कोई ऐसी असत्यापित, तथ्यहीन एवं भ्रामक अफवाह ना फैलाएँ जिससे समाज में शांति भंग हो। पुलिस ने यह भी बताया कि मामले में हत्या के एक आरोपित समेत पथराव करने वाले 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आगे की कार्रवाई जारी है।

डोनाल्ड ट्रंप की हत्या का प्रयास विफल

सुभाष चन्द्र

आज सुबह के समाचारों के अनुसार वाशिंगटन DC के हिल्टन होटल में राष्ट्रपति ट्रंप पर हमला हुआ वे, उनकी पत्नी और वाईस प्रेजिडेंट जे दी वन्स सुरक्षित हैं। 

हमलावर जो कैलिफोर्निया का है गिरफ्तार कर लिया गया और उससे पूछताछ हो रही है 

उसका नाम कोल थॉमस एलेन बताया गया है और उसने होटल की किचन से गोलीबारी की

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चर्चित YouTuber 
एक सुरक्षाकर्मी को गोली लगी जो सुरक्षित है और अस्पताल में है

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सुरक्षाकर्मियों की तारीफ की है और कहा है उन्होंने बहुत अच्छा काम किया

हमलावर का उद्देश्य क्या था ये जांच के बाद पता चलेगा  अभी अटकलें लगाना उचित नहीं है

ट्रंप ने कहा है हमले का ईरान से कुछ लेना देना नहीं है 

बाल-बाल बचे ट्रंप, वॉशिंगटन हिल्टन होटल में डिनर के दौरान फायरिंग: हमलावर की तस्वीर आई सामने; इसी होटल में 45 साल पहले रोनाल्ड रीगन पर भी हुआ था जानलेवा हमला

                                                    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और हमलावर
जबसे डोनाल्ड ट्रम्प चुनावी मैदान में उतरे तभी से इनके विरोधी इन पर जानलेवा हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। चुनावी प्रचार में हुए हमले में भी बाल-बाल बचे थे तब गोली इनके कान पर लगी थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर बाल-बाल बच गए हैं। जब व्हाइट हाउस के पत्रकारों के साथ आयोजित डिनर कार्यक्रम के दौरान अचानक एक शख्स ने कमरे के बाहर अचानक फायरिंग कर दी जिसके बाद ट्रंप को बाहर निकाला गया है। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन हिल्टन होटल में चल रहा था।

फायरिंग की आवाज के बीच सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स तुरंत हरकत में आए और राष्ट्रपति ट्रंप को कड़े सुरक्षा घेरे में लेकर कार्यक्रम स्थल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तत्काल पूरे इलाके को सील कर दिया। घटना के समय अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप कैबिनेट के कई वरिष्ठ सदस्य भी वहाँ मौजूद थे और उन्हें भी एहतियातन तुरंत बाहर ले जाया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

 ट्रंप ने हमलावर की एक तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर शेयर की है। हमलावर की पहचान 31 साल के कोल टॉमस ऐलन के रूप में हुई है और वो कैलिफॉर्निया का रहने वाला बताया जा रहा है।

                                                     ट्रंप द्वारा शेयर की गई तस्वीर

इसी होटल में 45 साल पहले रोनाल्ड रीगन पर भी हुआ था जानलेवा हमला
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डिनर पार्टी में जिस ऐतिहासिक होटल वाशिंगटन हिल्टन में फायरिंग हुई है वो 45 साल पहले भी एक बड़े हमले का गवाह बन चुका है। इसी होटल के बाहर 1981 में तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्‍ड रीगन पर जानलेवा गोलीबारी हुई थी।
ताजा घटना व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुई, जहाँ ट्रंप, उनकी पत्नी मेलेनिया ट्रंप और उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बड़े नेता और गणमान्य लोग मौजूद थे। अचानक हुई फायरिंग से कार्यक्रम में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक्शन लेते हुए ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालाँकि इस घटना में उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचा।
इस होटल का इतिहास पहले से ही ऐसी खौफनाक घटना से जुड़ा रहा है। 30 मार्च 1981 को यहीं से निकलते वक्त रीगन पर जॉन हिंकले जूनियर (John Hinckley Jr) ने गोली चलाई थी। हमले में रीगन गंभीर रूप से घायल हो गए थे, गोली उनके फेफड़े तक जा पहुँची थी लेकिन समय पर इलाज से उनकी जान बच गई थी।
उस घटना के बाद स्थानीय लोग इस होटल को ‘हिंकले हिल्टन’ तक कहने लगे थे। अब एक बार फिर इसी जगह पर फायरिंग होने से सुरक्षा व्यवस्था और इसकी लोकेशन को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल एजेंसियाँ मामले की जाँच में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस बार की घटना के पीछे क्या वजह रही।












पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट जाए, उसके पहले दबोच लेना चाहिए, गुवाहाटी हाई कोर्ट ने Custodial Interrogation की अनुमति दे दी है

सुभाष चन्द्र

गुवाहाटी हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने कल पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत की अर्जी ख़ारिज करते हुए कहा कि उसका Custodial Interrogation आवश्यक है यह पता लगाने के लिए कि किसने उसे झूठे दस्तावेज़ दिए जिनमें आरोप लगाया गया कि CM हिमंता बिश्वा सरमा की पत्नी के पास 3 पासपोर्ट हैं और अमेरिका में एक कंपनी है। 

खेड़ा ने चुनाव के नाजुक समय पर hit and run वाली ओछी हरकत की है उसके लिए जल्दी से जल्दी इसको हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ करनी चाहिए। अरविन्द केजरीवाल की ओछी हरकत को कांग्रेस भी कर रही है।  

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कोर्ट ने कहा कि if Kheda had made allegations against the chief minister, it would have been called political rhetoric but he dragged an innocent lady into controversy; it was not a simple case of defamation, Kheda is yet to prove his claim”.

खेड़ा ने कोर्ट में कहा था कि वे दस्तावेज़ उसे उसके साथियों ने दिए, इस पर ही कोर्ट ने कहा कि “इसलिए ही हिरासत में पूछताछ जरूरी है यह पता लगाने के लिए कि वो किन साथियों की बात कर रहे हैं और उनसे दस्तावेज़ किसने प्राप्त किये” कोर्ट ने कहा कि खेड़ा पुलिस जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं जबकि उस पर आरोप BNS के section 339 के अंतर्गत आते है (possession of forged documents)

खेड़ा ने रिंकी भुइया पर जोर शोर से आरोप तो लगा दिए और अब कह रहा है कि उसके पब्लिक में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान उस पर क्रिमिनल केस दर्ज किया गया उसने कहा कि “FIR was registered to satisfy ulterior motive/political vendetta of the complainant who is the wife of the Assam CM”.

और ड्रामेबाजी देखिए, वो कह रहा है कि “the petitioner (वो खुद), being a prominent political figure and spokesperson, has been targeted for statement made in discharge of his public duties and impugned FIR constitutes an abuse of process of law, aimed at harassment and intimidation and in furtherance of such ulterior motive, particularly at the instance of complainant who is closely associated to the incumbent CM of the state of Assam".

प्रेस कॉन्फ्रेंस में झूठे दस्तावेजों के आधार पर किसी महिला पर बेबुनियाद आरोप लगाना खेड़ा की कौन से पब्लिक ड्यूटी है और अगर आरोप लगाए हैं तो उन्हें सिद्ध भी करे तुम अगर आरोप नहीं लगाते तो केस भी दर्ज नहीं होता और केस दर्ज किया गया है तो वो Political Vendetaa कैसे हो गया और रिंकी भुइया का Ulterior Motive क्या हो सकता है? तुम तो उसकी इज़्ज़त पब्लिक में उतार दो और वो FIR भी दर्ज नहीं करा सकती

गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश बिल्कुल स्पष्ट हैं खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए

आज जयराम रमेश ने कहा है कि “पूरी भारतीय कांग्रेस अपने मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ पूरी मजबूती से एकजुट खड़ी हैगुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया चल रही है हमें विश्वास है कि धमकी/डराने-धमकाने और उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की जीत होगी”

अब डराना धमकाना याद आ रहा है लेकिन जब नहीं सोचा कि मिथ्या आरोप लगाने का परिणाम क्या हो सकता है? राहुल गांधी तो चुनाव आयोग के आयुक्तों को अभी ही डरा रहा है कि आपको रिटायर होने के बाद भी हम नहीं छोड़ेंगे

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले खेड़ा को दबोच लेना चाहिए ऐसा न हो सुप्रीम कोर्ट Coercive Action पर रोक लगा दे

‘See my Banana’: प्राइवेट पार्ट की फोटो भेज हिंदू लड़की से बोला अशरफ सिद्दीकी, जिहादी का सपा कनेक्शन आया सामने

                              आरोपित अशरफ सिद्दीकी का निकला सपा कनेक्शन  (साभार : Organiser)
मुंबई के एग्रीपाड़ा इलाके में एक 19 साल की हिंदू लड़की को उसके पूर्व मुस्लिम सहकर्मी ने अश्लील मैसेज, वीडियो और गंदी बातों से मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में आरोपित अशरफ सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित समाजवादी पार्टी की पार्षद इरम सिद्दीकी का भतीजा है।

व्हाट्सएप ग्रुप से नंबर चोरी कर शुरू की गंदी बातें

पीड़िता महालक्ष्मी स्थित पिरामल कंस्ट्रक्शन में टेलीकॉलर का काम करती थी। नौकरी छोड़ने के बाद, आरोपित अशरफ सिद्दीकी ने कंपनी के व्हाट्सएप ग्रुप से उसका नंबर निकाल लिया। 21 अप्रैल 2026 को उसने मैसेज कर अपनी पहचान ‘अशरफ पिरामल वाला’ के तौर पर दी।

शुरुआत में उसने लड़की को ‘क्यूट’ बताया, लेकिन जल्द ही वह अपनी औकात पर आ गया। उसने करीब एक घंटे तक लड़की से व्हाट्सएप कॉल पर बात की और बेहद गंदी माँगें रखीं। पीड़िता ने पड़ोसी के फोन से कॉल रिकॉर्ड कर ली, जिसमें अशरफ उसे ‘लव फ्रेंडशिप’ करने, लॉज चलने और शारीरिक संबंध (Sex) बनाने के लिए मजबूर कर रहा था। उसने फोन पर ओरल सेक्स जैसी घिनौनी बातें भी कीं।

प्राइवेट पार्ट की फोटो भेजी और कहा- ‘See my banana’

अगले दिन यानी 22 अप्रैल को अशरफ की बदतमीजी और बढ़ गई। उसने पीड़िता को अन्य लड़कियों की तस्वीरें भेजीं और दावा किया कि उसने उन सबके साथ संबंध बनाए हैं। हद तो तब हो गई जब उसने अपने प्राइवेट पार्ट की फोटो लड़की को भेजी और मैसेज में लिखा, “See my banana”।
इसके बाद उसने पीड़िता को कई अश्लील वीडियो भेजे और बेहद भद्दे मैसेज किए जैसे, “Show me your ass”। इन हरकतों से पीड़िता बुरी तरह डर गई और उसने अपने पिता को सब बताया।

‘हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के पसंद हैं’

FIR में यह भी दर्ज है कि जब पीड़िता ने अपने धर्म का हवाला दिया, तो अशरफ ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, “आजकल हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के पसंद आते हैं।” उसने लड़की को फँसाने के लिए यह भी कहा कि अगर वे शादी करते हैं, तो वह उसे धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं करेगा।

पीड़िता के पिता का आरोप है कि आरोपित ने कंपनी के डेटा का गलत इस्तेमाल कर कई हिंदू लड़कियों के नंबर निकाले थे। जब पीड़िता ने अपनी अन्य सहेलियों से बात की, तो पता चला कि अशरफ उन्हें भी ऐसे ही अश्लील मैसेज भेज चुका था, जिसके बाद उन्होंने उसे ब्लॉक कर दिया था।

पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक कनेक्शन

एग्रीपाड़ा पुलिस ने 23 अप्रैल 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR (नंबर 187/2026) दर्ज की। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 78(2), 79 और आईटी एक्ट की धारा 67(A) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।

आरोपित के परिवार से जुड़े साजिद सिद्दीकी ने कहा है कि पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस कॉल रिकॉर्डिंग और चैट की जाँच कर रही है ताकि आरोपित को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

एअर इंडिया में हिन्दू कर्मियों के बिंदी-सिंदूर-तिलक-मंगल सूत्र पर रोक, वायरल हुआ ग्रूमिंग पॉलिसी का डॉक्यूमेंट


लेन्सकार्ट कंपनी में ड्रेस कोड को लेकर छिड़े विवाद के बाद अब एअर इंडिया की ड्रेसिंग पॉलिसी पर भी सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एअर इंडिया के केबिन क्रू हैंडबुक में बिंदी, सिंदूर, तिलक और कलावा जैसे हिंदू धर्म के चिन्हों पर रोक लगाई गई। इसको लेकर इंटरनेट पर बहस तेज हो गई है और कई लोग इसे हिंदू पहचान छीनने से जोड़ रहे हैं।
वैसे अगर देखा जाए तो किसी भी एयर लाइन्स के किसी भी महिला क्रू को अपनी सनातनी पहचान में नहीं देखा। क्या कोई क्रू हिन्दू महिला विवाहित नहीं? अगर विवाहित है तो मांग में सिन्दूर और गले में मंगलसूत्र क्यों नहीं? दूसरे, एयरलाइन्स ही नहीं जितने भी सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय चैनल तक यही रोना है। सिन्दूर लगाया जाता है मांग में लेकिन लगाया जाता है छोटा-सा वह भी बालों में छिपा कर, क्यों? महिलाओं को मालूम होना चाहिए कि मांग में सिन्दूर का कितना बड़ा धार्मिक महत्व होता है। महिलाओं को इस कटु सच्चाई को जानना होगा।       
हिन्दू राष्ट्र या सेकुलरिज्म की बात करने वालों को इस गंभीर मुद्दे पर महिला आयोग, महिला वेलफेयर ओर्गनइजेशन्स और पुरोहितों से चर्चा करनी चाहिए।   

एक ‘एक्स’ यूजर ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, जिनमें ऐसे नियम बताए गए हैं। इसके बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर एक भारतीय एयरलाइन अपने कर्मचारियों की धार्मिक पहचान को क्यों सीमित कर रही है। कुछ यूजर्स ने इसे वेस्टर्न स्टैंडर्ड का असर बताया, तो कुछ ने कहा कि ज्यादातर कॉर्पोरेट में ऐसे नियम होते हैं।

हालाँकि, एअर इंडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ किया कि कर्मचारी बिंदी पहन सकते हैं और जो तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वे पुराने मैनुअल की हैं जो अब लागू नहीं है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बहस जारी है, जहाँ लोग धार्मिक स्वतंत्रता, कॉर्पोरेट नियम और समानता जैसे मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

दंगा नियंत्रण कानून : हिंदुओं के विनाश वाला काला बिल जिसे काँग्रेस ने दो बार 2005 और 2011मे संसद मे पेश किया, परन्तु आज भी यह पेंडिंग है, सुनिए वीडियो

कांग्रेस जिसे हिन्दू देशभक्त और समाजवाद का चेहरा मान अपना सिरमौर बनाए रहा वास्तव में यह पार्टी मुस्लिम लीग से कहीं ज्यादा हिन्दू विरोधी है। और हिन्दुओं को सेकुलरिज्म की शराब में डुबोए रही। सेकुलरिज्म एक तरफ़ा नहीं होता जिस तरह कभी एक हाथ से ताली नहीं बजती। लेकिन सेकुलरिज्म के नशे में डूबा हिन्दू एक ही हाथ से ताली बजाता रहा।
कांग्रेस का हिन्दू विरोधी चेहरा सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद से सामने आना हो गया। लेकिन हिन्दू सोनिया को देश की बहु बताकर बचाव करने में लगे रहे। परिवार ने अपने दो सदस्यों ने देश के लिए शहीद हुए। इंदिरा गाँधी हो या राजीव गाँधी हों दोनों की हत्या हुई थी, सीमा पर देश के लिए लड़ते मरने वालों को शहीद का सम्मान दिया जाता है हत्या में मरने वालों को नहीं।
दूसरे, देखिए जिस सोनिया को देश की बहु कहकर सिरमौर बनाये हुए हैं किस तरह हिन्दुओं को प्रताड़ित करने का खेल खेला गया। हिंदू समाज के लिए फांसी का फंदा, बहुत से लोगों को दंगा नियंत्रण कानून बिल के बारे में पता होगा, 2011 में इस बिल की रुपरेखा को सोनिया गाँधी की विशेष टीम ने बनाया था जिसे NAC भी कहते थे, इस टीम में दर्जन भर से ज्यादा सदस्य थे और सब वही जिन्हें आजकल अर्बन नक्सली कहा जाता है..
कांग्रेस का कहना था की इस बिल के जरिये वो देश में होने वाले दंगों को रोकेंगे। अब इस बिल में कई प्रावधानो पर जरा नजर डालिए:--
अगर कोई अल्पसंख्यक सिर्फ यह आरोप लगा दे कि मुझसे भेदभाव किया गया है तो पुलिस को अधिकार था आपके पक्ष को बिना सुने आपको जेल में डालने का हक होगा और इन केसों में जज भी अल्पसंख्यक ही होगा..
अगर आपके घर में कोई कमरा खाली है और कोई मुस्लिम आपके घर आता है उसे किराए पर मांगने के लिए तो तो आप उसे कमरा देने से इंकार नहीं कर सकते थे क्योंकि उसे बस इतना ही कहना था कि आपने उसे मुसलमान होने की वजह से कमरा देने से मना कर दिया यानि आपकी बहन बेटी को छेड़ने वाले किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ भी हम कुछ नहीं कर सकते थे। मतलब कि अगर कोई छेड़े तो छेड़ते रहने दो वर्ना वो आपके खिलाफ कुछ भी आरोप लगा देता…..आपकी सीधी गिरफ़्तारी और ऊपर से जज भी अल्पसंख्यक..
देश के किसी भी हिस्से में दंगा होता, चाहे वो मुस्लिम बहुल इलाका ही क्यों न हो, दंगा चाहे कोई भी शुरू करता पर दंगे के लिए उस इलाके के वयस्क हिन्दू पुरुषों को ही दोषी माना जाता और उनके खिलाफ केस दर्ज कर जांचें शुरू होती। और इस स्थिति में भी जज केवल अल्पसंख्यक ही होता ऐसे किसी भी दंगे में चाहे किसी ने भी शुरू किया हो..
अगर दंगों वाले इलाके में किसी भी हिन्दू बच्ची या हिन्दू महिला का रेप होता तो उसे रेप ही नहीं माना जाता । बहुसंख्यक है हिन्दू इसलिए उसकी महिला का रेप रेप नहीं माना जायेगा और इतना ही नहीं कोई हिन्दू महिला बलात्कार की पीड़ित हो जाती और वो शिकायत करने जाती तो अल्पसंख्यक के खिलाफ नफरत फ़ैलाने का केस उस पर अलग से डाला जाता..
इस एक्ट में एक और प्रस्ताव था जिसके तहत आपको पुलिस पकड़ कर ले जाती अगर आप पूछते की आपने अपराध क्या किया है तो पुलिस कहती की तुमने अल्पसंख्यक के खिलाफ अपराध किया है, तो आप पूछते की उस अल्पसंख्यक का नाम तो बताओ, तो पुलिस कहती – नहीं शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखा जायेगा
कांग्रेस के दंगा नियंत्रण कानून में ये भी प्रावधान था की कोई भी इलाका हो बहुसंख्यको को अपने किसी भी धार्मिक कार्यक्रम से पहले वहां के अल्पसंख्यकों का NOC लेना जरुरी होता यानि उन्हें कार्यक्रम से कोई समस्या तो नहीं है। ऐसे हालात में अल्पसंख्यक बैठे बैठे जजिया कमाते क्योकि आपको कोई भी धार्मिक काम से पहले उनकी NOC लेनी होती, और वो आपसे पैसे की वसूली करते और आप शिकायत करते तो भेदभाव का केस आप पर और ऐसे हालात में जज भी अल्पसंख्यक
और भी अनेको प्रावधान थे कांग्रेस के इस दंगा नियंत्रण कानून में जिसे अंग्रेजी में # Communal Violence Bill भी कहते है
सुब्रमण्यम स्वामी ने इस बिल का सबसे पहले विरोध शुरू किया था और उन्होंने इस बिल के बारे में लोगों को जब बताया था तो 2012 में हिन्दू काँप उठे थे तभी से कांग्रेस के खिलाफ हिन्दुओं ने एकजुट होना शुरू कर दिया था। सुब्रमण्यम स्वामी का पूरा लेक्चर इस #**Communal_Violence_Bill पर आज भी मौजूद है, 45 मिनट से ज्यादा का है। आप चाहे तो *YOUTUBE* पर सर्च कर लें, और अच्छे से सुन लें
*अब इस के बाद भी जो हिन्दू कांग्रेस को support करता है वे जाने अनजाने अपने ही लोगो के लिए नरक का द्वार खोल रहे हैं।

नीदरलैंड के नेता गीर्ट विल्डर्स के भाषण का हिंदी अनुवाद

सुभाष चन्द्र

कुछ समय पहले विल्डर्स ने अमेरिका में भाषण दिया उसकी बातें अमेरिका ही नहीं भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए आज भी प्रासंगिक हैं जो उन्होंने कहा वह मैंने इंस्टाग्राम पर उनके भाषण से लिया है। 

जिस अमेरिकी सांसद ने भारत को “नरक” कहा, ये बातें उसे जरूर सुननी चाहिए क्योंकि विल्डर्स अमेरिका के जल्द ही नरक बनने की चेतावनी दे रहे हैं

“वे जो कुछ आपसे कहते हैं, उसका हर शब्द गंभीरता से लीजिए और उन्हें शाब्दिक रूप से समझिए

क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो यही होने वाला है

वे करेंगे — और मैं बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कह रहा हूँ — वे आपके समाज को जला देंगे वे आपकी सड़कों के बीचों-बीच स्वयं को विस्फोट से उड़ा देंगे

लेखक 
चर्चित YouTuber 
ये कट्टरपंथी अमेरिका से नफरत करते हैं वे अमेरिकी सपने का हिस्सा नहीं बनना चाहते, वे उसे समाप्त करना चाहते हैं और यही उनका एजेंडा है

मेरे मित्रों, संयुक्त राज्य अमेरिका में 2700 से अधिक मस्जिदें बन चुकी हैं, जिनमें से 300 तो  यहीं टेक्सास में हैं और उन प्रत्येक मीनारों को क्षेत्र पर दावे के रूप में देखा जाता है, और हर अज़ान (Prayer) को विजय के संकेत के रूप में

हर वर्ष दर्जनों नई मस्जिदें बनाई जा रही हैं, और केवल प्रार्थना स्थल के रूप में नहीं, जैसा हमने देखा है, बल्कि इस्लाम की विजय और दूसरों को पीछे हटाने की निशानी के रूप में और मैं आपसे पूछता हूँ, यह सब यहाँ कैसे पहुँचा?

वे, मुझे यह कहते हुए दुख है, आपके मुख्य द्वार से अंदर आए लेकिन यह द्वार खुला किसने रखा? कट्टर वामपंथ ने, जिसमें आपके राष्ट्रपति, आपके पूर्व राष्ट्रपति ओबामा भी शामिल थे

वे जागरूक अभिजात वर्ग, जो अपनी स्वतंत्रता से अधिक अपनी विरासत से घृणा करते हैं

उन्होंने इस्लाम के साथ आत्मघाती समझौता कर लिया है उन्होंने भेड़िए को बच्चों के कक्ष में बुला लिया और बच्चों को सहिष्णु बनना सिखाया उन्होंने आपके बच्चों को अपने इतिहास पर शर्म करना सिखाया, जबकि उन लोगों का स्वागत किया जो उसे समाप्त करना चाहते हैं

जैसा कि चार्ली ने सही कहा, और मैं उद्धृत करता हूँ चार्ली को:

“इस्लाम एक तलवार है, जिसका उपयोग वामपंथ अमेरिका का गला काटने के लिए कर रहा है”

कांग्रेस के नेता आते हैं, तब तक तो ठीक था, अब “आप” के भी आ रहे, ये तो कमाल है; कहीं ये शराब घोटाले में तो नहीं शामिल थे?

सुभाष चन्द्र

केजरीवाल ने, जब से उसकी “आम आदमी पार्टी” बनी, तब से वह संस्थापक सदस्यों को मिलाकर 25 से ज्यादा नेताओं को या तो निकाल चुका था या उन्हें निकलने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन आज एक ही बार में उसके 7 राज्यसभा सांसदों पार्टी छोड़ कर केजरीवाल को ऐसा झटका दिया कि उसकी कमर तोड़ दी। और उससे भी बड़ी बात ये सारे भाजपा में शामिल हो गए 

कांग्रेस से नेता भाजपा में आ रहे थे, तब तक तो ठीक था लेकिन 10 में से 7 “आप” राज्यसभा सांसद भाजपा में आ गए, ये तो कमाल है केजरीवाल ममता से कह रहा था कि अबकी बार भी आप ही जीतेंगी और मोदी की हार होगी लेकिन यहां उसका काफिला उसके अपनों ने ही लूट लिया। आ तो गए हैं लेकिन मंत्री शायद ही कोई बन पाए

लेखक 
चर्चित YouTuber 
बीजेपी अध्यक्ष नबीन ने भ्रष्ट पार्टी के सांसदों को पार्टी में शामिल जरूर कर लिया है, लेकिन दूरी बनाए रखना जरुरी है। यूँ ही कारवां नहीं लूटता। एक साथ भ्रष्ट पार्टी को छोड़ने के पीछे कोई न कोई बहुत गहरा राज है, जिसे ये लोग आसानी से नहीं कबूलेंगे। लगता है दिल्ली हाई कोर्ट जस्टिस शर्मा की शराब घोटाले पर सख्त टिप्पणी की आंच में तो नहीं झुलस रहे ये थे ये सांसद कि अपना दामन बचाने के लिए बीजेपी की गोदी में? स्वाति मालीवाल की पिटाई में कितने लोग मालीवाल के साथ खड़े थे? चर्चा यह भी है, पुष्टि नहीं हो पायी है, कि राघव की भी मुर्गा बनाकर पिटाई होने पर आंख पर लगी चोट का इलाज करवाने विदेश भागे थे? यह भी समाचार था कि केजरीवाल राघव को अपना दामाद बनाना चाहते थे।        

वैसे ये आने वाले लोगों में कुछ को छोड़ कर, सब केजरीवाल के पाप में भागीदार रहे हैं राघव चढ़ा भी कोई दूध का धुला नहीं है हरभजन सिंह एक ऐसा व्यक्ति था जिसके “आप” में जाने पर मैं हैरान था लेकिन अब वह भी निकल आया अशोक मित्तल पर अभी कुछ दिन पहले ED का छापा पड़ा था उसके लिए कह सकते हैं कि वो डर कर निकला लेकिन ऐसा अन्य के साथ तो नहीं था

10 में 7 सांसदों का एक साथ निकलना कोई छोटी बात नहीं है इसके लिए अत्यधिक गुप्त रणनीति बनाई गई होगी जिसमें हो सकता है भाजपा का भी कोई नेता शामिल रहा होगा

7 सदस्यों के एक साथ निकलने ने उन्हें दल बदल कानून से बचाव मिल गया लेकिन संजय सिंह केवल 3 के लिए कह रहा है (जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में थे) कि उन्हें अयोग्य घोषित करना चाहिए और इसके लिए वो सभापति को पत्र लिखेगा और सभापति न माने तो हाई कोर्ट, सुप्रीम चले जाना लेकिन सिंघवी की फीस कहां से दोगे?

अन्ना हजारे के आंदोलन से निकली “भ्रष्टों” की पार्टी ने दिल से जनता को लूटा और अब खुद टूट गई ये अन्ना हजारे को बता कर पार्टी नहीं बनाए थे लेकिन अन्ना के दिल में अभी भी केजरीवाल के लिए दर्द है जो उनके आज के बयान से प्रकट हो रहा है 

उन्होंने 2 विपरीत बातें कही हैं - पहली, निजी हितों के लिए इन 7 ने पार्टी छोड़ी होगी; और दूसरी बात, पार्टी में दोष होगा, तब ही पार्टी छोड़ी” केजरीवाल के सत्ता से बाहर होने के बाद ये लोग क्या निजी हित साध रहे होंगे, यह कह कर क्यों केजरीवाल का बचाव कर रहे हो अन्ना जी और पार्टी की किस कमी की बात कर रहे हो जब आप के केजरीवाल के हर भ्रष्टाचार पर आप खामोश रहे

एक बार भगवंत मान सरकार और निपट जाए, फिर केजरीवाल का “मुफ्त” के हवाई जहाजों में घूमने की मौज मस्ती ख़त्म लोगो को “मुफ्त” के रेवड़ियां बांटता था और खुद “मुफ्त” की रेवाड़ी खा रहा है भगवंत मान के हवाई जहाजों में सैर सपाटा करके

केजरीवाल के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल


आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से अलग होने का ऐलान कर दिया। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वे अकेले नहीं, बल्कि राज्यसभा में ‘AAP’ के दो-तिहाई सांसदों के गुट के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं।

राघव चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने खून-पसीने से इस पार्टी को सींचा था, लेकिन अब यह अपने बुनियादी मूल्यों और नैतिकता से पूरी तरह भटक चुकी है। राघव चड्ढा ने खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ बताते हुए कहा कि पार्टी अब देश के हित के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रही है।

राघव चड्ढा के साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे प्रमुख सांसदों ने भी समर्थन के संकेत दिए हैं। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 के साथ होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत यह कदम उठा रहे हैं।

राघव चड्ढा के इस फैसले से आम आदमी पार्टी के भीतर एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है, जो आने वाले समय में दिल्ली की सत्ता समीकरणों को बदल सकता है।

आत्मघाती इतिहास और वर्तमान का धैर्य क्यों बंधे हैं मोदी-शाह के हाथ? क्योकि हिन्दुओं से कही ज्यादा समझदार मुसलमान है जो बीजेपी को हराने एकजुट वोट देता है लेकिन हिन्दू आरक्षण और सेकुलरिज्म के नशे में जातिगत सियासत में डूबा रहता है

इतिहास खुद को दोहराता है, लेकिन विडंबना देखिए कि हम इतिहास से सीखने के बजाय बार-बार वही गलतियां दोहराने में गर्व महसूस करते हैं। आज जो लोग सोशल मीडिया पर बैठकर पूछते हैं कि "मोदी-शाह कड़ा फैसला क्यों नहीं लेते?" उन्हें एक बार 1992 और 2004 के आईने में अपनी तस्वीर देख लेनी चाहिए।
जिस दिन मोदी ने कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए, कोई यह सोंचकर मोदी सरकार को वापस लाने की बात नहीं करेगा कि इसने देश को कहां से कहां पहुंचा दिया, आतंकवाद और इसके समर्थकों को नेस्ताबूत किया जा रहा है, किस तरह तीन तलाक और हलाला के नाम मुस्लिम महिलाओं का शोषण किया जा रहा था, किस तरह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का दुरुपयोग हो रहा था, कल तक जो अनाज गोदामों में सड़ता था और किसी काम का नहीं रहता था उसे BPL के नाम पर उपयोग किया जा रहा है, किस तरह सनातन को धूमिल किया जा रहा था आदि आदि एक लम्बी सूची है मुस्लिम महिलाएं तो क्या हिन्दू भी भूल कर विरोधियों को वोट देने में देर नहीं करेगा।
कल्याण सिंह: शौर्य का वह उपहार, जिसे 'अपनों' ने ठुकराया
1992 में अयोध्या में कलंक का ढांचा गिरा, तो कल्याण सिंह ने एक क्षण की भी परवाह किए बिना अपनी सत्ता का बलिदान दे दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि "राम मंदिर के लिए एक नहीं, सौ सरकारें कुर्बान।" लेकिन इसके बाद क्या हुआ? जिन कारसेवकों पर मुलायम सिंह ने गोलियां चलवाई थीं, उन्हीं को हिंदू समाज के एक बड़े हिस्से ने 'जाति' के नाम पर वोट देकर सत्ता की दहलीज पार करा दी। यह वही दौर था जब "मिले मुलायम-कांशीराम हवा में उड़ गए जय श्रीराम" के नारों ने सांस्कृतिक पुनरुत्थान की कमर तोड़ दी थी।
अटल बिहारी वाजपेयी: विकास को 'व्यक्तिगत लालच' की भेंट चढ़ाया
2004 का चुनाव भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा 'धोखा' था। अटल जी ने देश को सड़कों का जाल दिया, परमाणु शक्ति बनाया और अर्थव्यवस्था को गति दी। लेकिन जनता ने क्या दिया? छोटे-छोटे व्यक्तिगत स्वार्थों और विपक्षी 'गठबंधन' के भ्रमजाल में फंसकर एक तपस्वी को सत्ता से बाहर कर दिया। परिणाम? 10 साल का वह रिमोट कंट्रोल शासन, जिसने देश को भ्रष्टाचार और आतंकवाद के गहरे गर्त में धकेल दिया। बारूद के ढेर पर बैठे भारत में इस्लामिक आतंकियों को बचाने बेकसूर हिन्दू साधु/संत और साध्वियों को जेल में डाल भगवा आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद के नाम पर हिन्दुओं को बदनाम किया जा रहा था। और हिन्दू सेकुलरिज्म के नशे में धुत होकर झूठ को सच मान रहा था।
लालबहादुर शास्त्री :
लालबहादुर शास्त्री की अकाल मृत्यु का असली कारण था 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान देश में छुपे गद्दारों पर कार्यवाही। आज कितने नेता शास्त्री जी का नाम लेते हैं? इस बौने प्रधानमंत्री ने अपने साहसिक कार्यों से नेहरू के 18 सालों को अपने अल्प 18 महीने के कार्यकाल से दाब दिया था। अगर शास्त्री जी के काम उजागर किये जाएं तो देश स्तब्ध रह जाएगा की ऐसा था हमारा "बौना" प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री।
आज मोदी और शाह के सामने दुश्मन केवल बाहर नहीं, बल्कि भीतर की 'जातिवादी दीवारों' के रूप में खड़ा है।
खालिस्तानी और वामपंथी संगठन: ये संगठन जानते हैं कि वे सीधे तौर पर मोदी सरकार से नहीं लड़ सकते। इसलिए वे क्या करते हैं? वे 'किसान', 'दलित' या 'पिछड़ा' कार्ड खेलते हैं।
हिंदुओं की कमजोरी: दुर्भाग्य यह है कि जब भी राष्ट्रवाद की बात आती है, विपक्ष एक ऐसी 'जातिगत ढाल' आगे कर देता है जहाँ हिंदू बिखर जाता है। जैसे ही हिंदू अपनी 'जाति' में सिमटता है, मोदी और शाह की वह ताकत आधी हो जाती है जो 'तांडव' करने की क्षमता रखती है
2026 का सच: मलाई बनाम राष्ट्रवाद
आज 2026 में भी स्थिति वही है। दशकों तक जिन्होंने सिस्टम की मलाई खाई, जिनके लिए भ्रष्टाचार ही ऑक्सीजन था, उन्हें आज सूखी हड्डी भी नसीब नहीं हो रही। इसीलिए ये 'बलवा' का रास्ता चुन रहे हैं। कभी डकैत संगठनों के नाम पर, कभी विदेशी फंडिंग के दम पर अराजकता फैलाई जा रही है। मोदी-शाह का धैर्य उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी 'मजबूरी' है, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उन्होंने कड़ा कदम उठाया, तो उनका अपना ही 'हिंदू भाई' किसी अफवाह या जातिगत राजनीति के कारण फिर से 2004 न दोहरा दे।
2014 चुनाव के बाद जिस बात को मुसलमान, मुस्लिम कट्टरपंथी और इनको समर्थक देने वाली पार्टियां समझ गयी कि बीजेपी को हराना है तो एकजुट होकर वोट दो। लेकिन हिन्दू आरक्षण और जातिगत सियासत से बाहर नहीं आ पाया। अगर हिन्दू आरक्षण और जातिगत सियासत से बाहर आ गया होता जातियों पर आधारित चाहे वह सत्ता में हैं या विपक्ष में कभी इन पार्टियों को वोट नहीं देता। रामायण को फाड़ने की और सनातन को कलंकित करने की किसी की हिम्मत नहीं होती।
जब तक हिंदू 'वोटर' रहेगा, 'नागरिक' नहीं बनेगा...जब तक हिंदू खुद को 'ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, जाट या दलित' के खांचे में रखकर देखेगा, तब तक देश के दुश्मनों को ऑक्सीजन मिलती रहेगी। मोदी-शाह को 'फ्री हैंड' कानून नहीं देता, बल्कि जनता की अटूट एकजुटता देती है।
अगर हम चाहते हैं कि देशद्रोहियों के खिलाफ 'तांडव' हो, तो पहले हमें अपनी 'जातिवादी ढालों' को तोड़कर एक मजबूत सनातनी दीवार बनना होगा। वरना इतिहास फिर से वही लिखेगा—कि नायक लड़ते रहे, और हम स्वार्थ में अपनों को ही धोखा देते रहे। मुग़ल आक्रांता और ब्रिटिशर्स अपने साथ फौज नहीं लेकर आए थे उनको मालूम था भारत में थोक के भाव में बिकाऊ जयचन्द और मीर ज़ाफ़र मिल जाएंगे।

बंगाल के प्रथम चरण के चुनाव के लिए चुनाव आयोग, सुरक्षाबल, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बधाई के पात्र हैं

सुभाष चन्द्र

बंगाल में प्रथम चरण के चुनाव में रिकॉर्ड 92.88 % छुटपुट घटनाओं को छोड़ कर शांतिपूर्ण मतदान के लिए चुनाव आयोग (खासकर ज्ञानेश कुमार जी), सुरक्षा बल और केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बधाई के पात्र हैं। 

वास्तव में तत्कालीन चुनाव आयुक्त TN Seshan ने जो गति चुनाव आयोग को दी उसे वर्तमान आयुक्त ने कहीं आगे बढ़ा दिया। शेषन से ज्यादा विरोध ज्ञानेश का हुआ। लेकिन अपनी सीमाओं में रहते हर काम को बखूबी निभा रहे हैं।  

चुनाव आयोग ने जिस तरह SIR का काम संभाला और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आयोग को पूरा समर्थन मिला उसने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है चुनाव में आयोग ने केंद्र सरकार से जितने भी सुरक्षा बल मांगे शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए वे उसे मिले 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
केंद्र सरकार ने पैरामिलिट्री संगठनों को मिला कर एक अलग संगठन बनाया Central Armed Police Forces (CAPF) और इसमें शामिल BSF, CRPF, SSB, ITBP और CISF के प्रमुखों ने कोलकाता में बैठ कर सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की

CAPF की 2500 कंपनियां तैनात की गई और एक कंपनी में 100 से 110 सुरक्षाकर्मी होते हैं, मतलब कुल मिलाकर 2.5 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई शायद इसलिए ही 92.88% रिकॉर्ड मतदान हुआ जो पिछले चुनाव के 82.30% से 10% ज्यादा है इसका श्रेय आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुरक्षाबलों, मोदी सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट को भी जाता है 

सुरक्षाबलों की वजह से मतदाता भयमुक्त होकर मतदान कर सके

अभी दूसरे चरण का चुनाव होना शेष है लेकिन पिछले चुनावों से तुलना की जाए तो हम देखते हैं ममता को 2016 के मुकाबले 2021 में मात्र 3.11% वोट ज्यादा मिले थे (यानी 48.02%) और सीट बढ़ी थी केवल 4 दूसरी तरफ भाजपा को 2016 के मुकाबले 2021 में 28% वोट ज्यादा मिले थे (यानी 38.15%) लेकिन सीट बढ़ी थी 74 (3 से 77 हो गई)

2011 में 84.33% मतदान भी रिकॉर्ड था और ममता CPM को हटा कर सत्ता में आई थी अब रिकॉर्ड मतदान के बाद भाजपा भी ममता को सत्ता से हटा कर सत्ता में आ सकती है

अगर दूसरे चरण में भी यही स्थिति रहती है और भाजपा के वोट 38% से 6-7% भी बढ़ गए तो सत्ता की चाबी उसके हाथ में होगी एक फैक्टर और नज़र आया है कि हुमायूँ कबीर का जिस तरह टकराव हुआ है TMC के साथ, उसे देख कर लगता है मुस्लिम वोट निश्चित रूप से बंटा है, जबकि हिंदू वोट एकजुट हुआ है SIR में 91 लाख वोट कटने से ममता का वोट गिरना तय है लेकिन कितना गिरेगा यह समय ही बताएगा 

चुनाव आयोग के काम में कोलकाता हाई कोर्ट की तरफ से वोटिंग के एक दिन पहले अड़ंगा लगाया गया जब कोर्ट ने आयोग द्वारा चुनाव में गड़बड़ी फ़ैलाने वाले 800 संदिघ्द लोगो के लिए आदेश पर रोक लगा दी और सुनवाई की तारीख 30 जून तक के लिए उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी उससे क्या फर्क पड़ना था जब भारी सुरक्षाबल तैनात हैं 30 जून का क्या मतलब है जब चुनाव 29 अप्रैल को संपन्न हो जाना है

कुल मिलाकर अनुमान यही लगाया जा सकता है बंगाल से ममता की विदाई तय है 

पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट से बड़ा झटका, अंतरिम जमानत याचिका खारिज


सुप्रीम कोर्ट के बाद अब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने खेड़ा की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है।

दरअसल, पवन खेड़ा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिंकी सरमा पर कई पासपोर्ट रखने और विदेश में संपत्तियाँ होने के आरोप लगाए थे। इसके बाद रिंकी सरमा ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया।

मामले की सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह ज्यादा से ज्यादा मानहानि का मामला है और उनके मुवक्किल के फरार होने की कोई आशंका नहीं है, इसलिए गिरफ्तारी से राहत दी जानी चाहिए। वहीं, असम सरकार की तरफ से महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर है और इसमें जालसाजी जैसे आरोप शामिल हैं।

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गिरफ़्तारी से बचने हैदराबाद भागा पवन खेड़ा: असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा, कांग्रेस नेता
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करीब तीन घंटे चली बहस के बाद जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे अब सुनाते हुए कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद पवन खेड़ा की गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है।