रामचंद्र गुहा ने कांग्रेस को 'पारिवारिक फर्म' बताकर गाँधी परिवार की क्षमताओं पर उठाया सवाल तो छीना 'इतिहासकार' का लाइसेंस
"खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से, सच्चाई छुप नहीं सकती कभी बनावट के असूलों से" बात कांग्रेस पर सटीक बैठती है। इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस ने सच बोल पार्टी को आईना दिखाने वालों को दरकिनार किया है, चाहे वो कोई भी हो। राहुल गाँधी और प्रियंका के दादा फ़िरोज़ जहांगीर जब संसद में कुछ बोलने के खड़े होते थे ससुर जवाहर लाल नेहरू के पसीने छूटने लगते थे। अंजाम देख सबके सामने है। परिवार नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक की समाधियों पर माथा टेकने चले जाते हैं लेकिन कभी अपने दादा की कब्र पर नहीं जाते। बहुत हैं नाम जिन्हे कांग्रेस का धुरंधर कहा जाता था, अपनी चौधराहट बनाए रखने के लिए सबको भुलवा दिया। लेकिन शर्म आती है दरबारियों पर जो सच्चाई जानना ही नहीं चाहते। अरे परिवार के गुलामों रामचंद्र गुहा से ही सीख लो। जिसे पार्टी बहुत बड़ा इतिहासकार बनाए घूमती थी आज उसी गुहा ने जैसे ही आईना दिखाया इतिहासकार वाला लाइसेंस छीन लिया। अरे दरबारियों तुम्हारी क्या औकात?
Ramachandra Guha: How the Gandhi family has helped Modi consolidate power https://t.co/Au9xjm2Kp5
— Ramachandra Guha (@Ram_Guha) May 31, 2026
स्क्रॉल ने इस लेख को “गाँधी परिवार ने मोदी को सत्ता मजबूत करने में कैसे मदद की” शीर्षक से छापा है। वहीं ‘द टेलीग्राफ’ ने इसे “मोदी के समर्थक” नाम दिया है। इस लेख में प्रियंका गाँधी के वायनाड से चुनाव लड़ने को गुहा ने गलत फैसला बताया गया। संविधान की 75वीं वर्षगाँठ पर प्रियंका को मुख्य वक्ता बनाने को भी गुहा ने अजीब बताया क्योंकि उनकी दादी इंदिरा गाँधी ने ही आपातकाल लगा कर संविधान को नुकसान पहुँचाया था।
गुहा का मानना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि मई 2014 से ‘गणतंत्र के पतन’ के मुख्य सूत्रधार नरेंद्र मोदी, अमित शाह और उनकी पार्टी भाजपा है। गुहा ने साथ में यह भी कहा कि इसमें गाँधी परिवार ने जाने-अनजाने उनकी मदद ही की है। वे 2029 की भविष्यवाणी करते हुए कहते हैं कि पीएम मोदी की अजेय छवि टूट सकती है लेकिन साथ में यह भी कहा कि उस वक्त जो नेता इस नाराजगी को राजनीतिक चुनौती में बदलेंगे, वो राहुल या प्रियंका गाँधी नहीं होंगे।
My column in @ttindia on the state of the Congress Party and the fate of the Indian Republic: https://t.co/EclidzrtLf
— Ramachandra Guha (@Ram_Guha) May 30, 2026
गुहा जो कह रहे हैं वो न तो भाजपा की तारीफ है न ही कोई एकतरफा बात। वो मानते हैं कि भाजपा की सत्ता को आगे बढ़ाने मोदी फैक्टर है और शाह की रणनीति है। साथ में तथ्यों के साथ में इसका श्रेय कांग्रेस को देने के पीछे भी वजह सामने रखी। यानी गुहा ने जो कहा वो तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं है, बस कांग्रेसी इसे पचा नहीं पा रहे हैं। और जैसे ही उन्होंने गाँधी परिवार की आलोचना की, कांग्रेस समर्थक उनके इतिहासकार होने पर ही सवाल उठाने लगे। अब इनसे पूछो गुहा ने वही कहा जो सच है। जब पार्टी परिवार भक्ति करती रहेगी सत्ता से दूर ही रहेगी। किसी राज्य में सरकार बन जाये तो बन जाये पार्टी का यही हाल रहा तो क्षेत्रीय दलों से बुरी हालत होने वाली है।
रामचंद्र गुहा के लेख से कांग्रेसियों को लगी मिर्ची
कांग्रेस इकोसिस्टम ने रामचंद्र गुहा के इस लेख की खूब आलोचना की। कांग्रेसी रामचंद्र गुहा के ‘इतिहासकार’ वाला लाइसेंस रद्द करने में जुट गए। किसी ने लेख को ‘बौद्धिक बेईमानी’ बताया और कहा कि यह विश्लेषण भाजपा के लिए ही काम करता है। किसी ने सीधा सवाल पूछा कि दूसरों को दोष देने से पहले बताइए कि आपने खुद मोदी को कमजोर करने के लिए क्या किया? एक ने तो गुहा को सीधे ‘फ्रॉड’ तक बुला दिया।
पेशे से पत्रकार और कांग्रेस के चाटूकार औनिंद्यो चक्रवर्ती ने कहा कि गुहा हमेशा से मोदी सरकार के आलोचक रहे हैं, इसलिए गाँधी परिवार की आलोचना करने से वो भाजपा समर्थक नहीं हो जाते। साथ में गुहा पर सवाल उठाया कि सिर्फ आर्काइव किताबें लिखने से कोई इतिहासकार नहीं बन जाता।
Prof Ram Guha has always been an outspoken critic of the Modi government. Opposing the Gandhi family or writing analytical pieces about why Narendra Modi wins doesn’t make one pro-Modi. Just as writing books with a lot of archival information doesn’t make one a historian.
— Aunindyo Chakravarty (@Aunindyo2023) June 1, 2026
राजेश ग्रीगलानी, जो खुद कांग्रेस कार्यकर्ता हैं, उन्होंने गुहा के लेख को ‘बौद्धिक बेईमानी’ बताया। उन्होंने राहुल गाँधी की तरफ लेते हुए कहा कि संसद में अडानी, NEET और संस्थाओं पर कब्जे जैसे मुद्दे लगातार उठा रहे हैं और 2024 में भाजपा का बहुमत तोड़ना उनकी रणनीति का नतीजा है। वो कहते हैं कि गुहा का ‘दोनों तरफ गलती है’ वाला रुख खतरनाक है और यह विपक्षी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ता है।
Dear @Ram_Guha, Your "Modi's Enablers" Piece is Intellectual Dishonesty That Only Helps BJP & Fundamentalists!
— Rajesh Griglani (@griglani) May 31, 2026
Link: https://t.co/AdOyOfaan1
As a long-time Congress worker who has worked closely with the party ecosystem, I stand firmly with @RahulGandhi . Your article, Mr. Guha,…
शिवानी वर्मा ने तंज कसा कि गुहा सालों से राहुल गाँधी पर कॉलम पर कॉलम लिखते आ रहे हैं, अगर राहुल इतने ही अप्रासंगिक हैं तो वो उनके बारे में लिखना बंद क्यों नहीं कर पाते। वो नाम चॉमस्की का हवाला देते हुए कहती हैं कि सबसे खतरनाक बुद्धिजीवी वो होता है जो बिना पैसे लिए भी बारीक विश्लेषण के जरिए सत्ता के लिए सुविधाजनक निष्कर्ष पर पहुँचता है।
प्रोफेसर रामचंद्र गुहा सालों से उल्लेखनीय समर्पण के साथ राहुल गांधी की कमियों के बारे में लिखते आ रहे हैं।
— SHIVANI VERMA (@ShivaniV2901) May 31, 2026
पन्ने के पन्ने। कॉलम के बाद कॉलम। एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो खुद को निराश (भ्रममुक्त) बताता है, उनके लेखन की यह मात्रा लगभग प्रभावित करने वाली है।
अगर वह (राहुल गांधी)… pic.twitter.com/qPe6wJA0RC
कांग्रेसी इकोसिस्टम से जुड़ा ‘एक्स’ हैंडल Rofl Democrazy का कहना है कि गुहा ने जानबूझकर यह नजरअंदाज किया कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत में अँधे हो चुके बहुसंख्यक वोटरों ने मोदी को मजबूत किया है। वो राहुल को अकेला लड़ने वाला बताते हैं और कहते हैं कि उदारवादियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
Ramachandra Guha deliberately missed how the majority of this country blinded by Anti-Muslim hatred has helped Modi consolidate power.
— Rofl Democrazy (@FakeerHun) May 31, 2026
Instead he is blaming the lone fighter who is fighting against the ideology of hate despite so many electoral defeats.
Trust a snake but not a… https://t.co/dOO7KnzQEm
सौरभ ने गुहा से सीधा सवाल पूछा कि चलो मान लिया गाँधी परिवार ने मोदी को मजबूत किया, लेकिन आपने मोदी को कमजोर करने के लिए क्या किया? भाजपा जब नेहरू-गाँधी पर झूठ फैला रही थी तब इतिहासकार के तौर पर आप कहाँ थे?
रामचद्र गुहा साहब चलिए मान लिया कि मोदी जी की सत्ता मजबूत करने में गांधी फैमिली ने मदद की...लेकिन आप अपना तो बताइए कि आपने उनकी सत्ता कमजोर करने के लिए क्या किया❓
— Saurabh (@sauravyadav1133) May 31, 2026
आप लेखक हैं तो आपने उनकी पोल खोलते हुए कितने लेख लिखे❓
आप इतिहासकार हैं तो बीजेपी जब नेहरू-गांधी के खिलाफ झूठ फैला… https://t.co/sTLo7Gdx7r
जवाहरलाल नेहरू के करीबी वीके कृष्ण मेनन के पैरॉडी ‘एक्स’ अकाउंट ने गुहा को ‘फ्रॉड’ करार दिया और कहा कि एक सच्चे इतिहासकार को राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। आगे कहा कि गाँधी परिवार को नीचा दिखाने के लिए गुहा ने नेहरू के बारे में भाजपा के झूठ को भी आगे बढ़ाया है।
@Ram_Guha is fraud ; neither knows history nor geography nor civics. A true historian should never involve in political activism and commentary. It is conflict of interest. In order to undercut Gandhis, Guha perpetrated many of BJP lies on Jawaharlal Nehru. Congress is too stupid…
— Jay Velury (@velury_jay) May 30, 2026
कैसे रामचंद्र गुहा ने कांग्रेस को बताया ‘पारिवारिक फर्म’?
गुहा लिखते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद लगा था कि कांग्रेस बदल रही है, लेकिन 2024 के चुनाव खत्म होते ही पार्टी फिर ‘पारिवारिक फर्म’ बन गई। राहुल के वायनाड छोड़ते ही वहाँ प्रियंका गाँधी को बिठा दिया गया और दावा किया गया कि राहुल उत्तर भारत और प्रियंका दक्षिण का प्रतिनिधित्व करती हैं। गुहा यह भी आपत्ति जताते हैं कि संविधान की 75वीं वर्षगाँठ पर कॉन्ग्रेस ने प्रियंका को मुख्य वक्ता बनाया, जबकि उनकी दादी इंदिरा गाँधी ने ही आपातकाल लगाकार उसी संविधान को सबसे बड़ा नुकसान पहुँचाया था।
(स्क्रीनशॉट साभार: The Telegraph)गुहा आँकड़े देते हुए बताते हैं कि 2008 से जब से राहुल ने कमान संभाली है तब से देशभर में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 1,204 से घटकर 676 रह गई है। प्रियंका के बारे में भी गुहा लिखते हैं कि 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी अगुवाई में कांग्रेस को महज 2.27% वोट मिले। फिर भी 99 सीटें आते ही चापलूसों और दिल्ली के कुछ हिंदू-विरोधी पत्रकारों ने राहुल को ‘भविष्य का प्रधानमंत्री’ घोषित कर दिया, नतीजा यह हुआ कि आज कांग्रेस ज्यादातर हिस्सों में धीरे-धीरे जमीन खो रही है जबकि गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में भाजपा ‘शासन की स्वाभाविक पार्टी’ बन चुकी है।
(स्क्रीनशॉट साभार: The Telegraph)राहुल में क्या कमी देखते हैं गुहा?
गुहा लिखते हैं कि राहुल गाँधी व्यक्तिगत रूप से अच्छे इंसान हैं लेकिन 55 साल की उम्र में भी वो अपनी माँ सोनिया गाँधी की इच्छा के साधन हैं। उन्होंने UPA के 10 साल में मंत्री बनने से मना कर दिया, कभी कोई असली काम नहीं किया तो फिर इतने बड़े और विविध देश के प्रधानमंत्री के तौर पर भरोसा कैसे बनेगा।
गुहा यह भी लिखते हैं कि राहुल किसी मुद्दे पर टिककर काम नहीं करते, कभी चुनाव आयोग के पक्षपात पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे तो अगले ही दिन यूरोप या लैटिन अमेरिका की यात्रा पर निकल जाएँगे। सिर्फ भारत जोड़ो यात्रा के कुछ महीनों में ही उन्होंने भाजपा नेताओं जैसा फोकस्ड काम दिखाया, बाकी उनकी राजनीति ज्यादातर ट्विटर (एक्स) तक सिमटी रहती है जो 24 घंटे में भुला दी जाती है।
गुहा आगे लिखते हैं कि 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ वाला अभियान बुरी तरह फेल हुआ, लेकिन राहुल ने उससे कोई सबक नहीं लिया और आज भी मोदी पर निजी हमले जारी हैं। गुहा यह भी लिखते हैं कि मोदी, शाह और भाजपा गणतंत्र के मुख्य दुश्मन हैं, लेकिन गांधी परिवार जाने-अनजाने उनका साथ देने वाला बन गया है।
अंत में गुहा हंगरी का उदाहरण देते हैं जहाँ एक बिल्कुल नए और साफ चेहरे ने गाँव-गाँव घूमकर वहाँ के ताकतवर नेता को चुनौती दी और साफ तौर पर कहते हैं कि 2029 में जब मोदी के खिलाफ नाराजगी राजनीतिक चुनौती बनेगी, तो उसे आगे ले जाने वाला नेता राहुल या प्रियंका गाँधी नहीं होंगे।
कौन है रामचंद्र गुहा और उनसे जुड़े विवाद?
रामचंद्र गुहा का जन्म 1958 में देहरादून में हुआ। दून स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में डिग्री ली। फिर समाजशास्त्र में डॉक्टरेट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुहा येल, स्टैनफोर्ड और कैलिफोर्निया के विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर रहे हैं। महात्मा गाँधी की जीवनी और भारत के इतिहास पर कई किताबें भी लिखी हैं। खुद को इतिहासकार कहते हैं, हालाँकि इतिहास में उनका कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं है। वामपंथी मीडिया द टेलीग्राफ, द वायर जैसे पोर्टल में नियमित कॉलम लिखते हैं।
लेकिन इनका एक और चेहरा भी है। साल 2018 की बात करें जब गुहा गोवा गए और वहाँ से एक ट्वीट किया। लिखा कि ‘चूँकि यह भाजपा शासित राज्य है, इसीलिए मैंने बीफ खाकर जश्न मनाया’ यानी खाने को भी राजनीति बना दिया। जब बवाल मचा तो माफी माँग ली और कहा कि ट्वीट गैरजरूरी था। लेकिन मकसद साफ था, किसी भी बहाने भाजपा को घेरना।
फिर 2019 में देश में CAA के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे। गुहा बेंगलुरु की सड़कों पर उतर आए, प्रदर्शन में शामिल हुए और हिरासत में लिए गए। यानी सिर्फ लिखना नहीं, सड़क पर भी उतरते हैं, जब मुद्दा मोदी सरकार के खिलाफ हो।
फिर एक विवाद और। इन्होंने ट्वीट किया, “गुजरात के पास सिर्फ पैसा है, संस्कृति नहीं। बंगाल के पास संस्कृति है।” तब बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार थी। यानी प्रधानमंत्री के गृह राज्य की संस्कृति पर सीधा हमला किया गया। इस पर भी लताड़े गए और जवाब मिला कि गरबा, सोमनाथ, नरसिंह मेहता, सरदार पटेल, महात्मा गाँधी, ये सब गुजरात की संस्कृति नहीं है तो क्या है?
2022 में गुजरात दंगों की 20वीं बरसी पर स्क्रॉल के लिए एक लेख लिखा। इसमें 2002 के दंगों को ‘Pogrom’ यानी एक समुदाय के खिलाफ सुनियोजित हमला बताया। लेकिन उसी लेख में गोधरा में जिंदा जलाए गए 59 कारसेवकों का जिक्र तक नहीं था। और इसके साथ ही कांग्रेस की तारीफ करते हुए लिखा कि मोदी ने गुजरात दंगों पर माफी नहीं माँगी, यह जानते हुए भी कि नानावती आयोग मोदी को क्लीन चिट दे चुका था।
और केदारनाथ में जब पीएम मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया तो उस पर भी आपत्ति जताने वालों में गुहा शामिल थे।
यानि हिंदू आस्था हो, भाजपा शासित राज्य हो, मोदी सरकार का कोई भी फैसला हो, गुहा निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ते। और बीच-बीच में कांग्रेस पर भी कुछ लिख देते हैं ताकि निष्पक्ष दिखें। अब जब इन्होंने गाँधी परिवार की आलोचना की है तो वही कांग्रेस इनके इतिहासकार होने पर सवाल उठा रही है। यानी जब तक काम का था, बुद्धिजीवी थे। जैसे ही गाँधी परिवार पर लिखा, फ्रॉड हो गए।

