20 जुलाई को जंतर मंतर से लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट तक INDI गठबंधन के सहयोग से जो उपद्रव मचा उसे विपक्ष खासतौर से आम आदमी पार्टी अपनी जीत मान रहा है। जबकि उसने इस उपद्रव से बांग्लादेश और नेपाल में मची खुलेआम हुई गुंडागर्दी को अंजाम देने के मंसूबों को जाहिर कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी दे मारी है। अंग्रेजी दैनिक 'द हिन्दू' भी आग में घी डालने से पीछे नहीं रहा। विपक्ष और 'द हिन्दू' ने यह भी साबित कर दिया कि भारत विरोधी ताकतों को हवा देकर भारत में उपद्रवियों की हर संभव मदद करने में पीछे नहीं रहेंगे। अभी तक यह सच्चाई भी सामने नहीं कि आखिर इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' का संरक्षण कौन है?
जिस तरह कांग्रेस की स्थापना उस विदेशी अंग्रेज़ ने की थी उसी तरह इस उपद्रवी पार्टी की स्थापना भी एक विदेशी ने ही की है। गौरतलब बात यह है कि जब विदेशी अंग्रेज़ द्वारा कांग्रेस की स्थापना की गयी थी ब्रिटिश सरकार ने उसे देश विरोधी नहीं कहा क्योकि कांग्रेस का गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आज़ाद और भगतसिंह पार्टी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी जा रही थी उससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया था। ठीक उसी तरह विकासशील भारत में अड़चने डालने के लिए इस उपद्रवी पार्टी का गठन किया गया है। देखना यह है कि क्या यह पार्टी अपने साथ विपक्ष को भी लेकर डूबेगी? यह भविष्य के गर्भ में छिपा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जुटे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थक मार्च करते हुए सोमवार (20 जुलाई) को संसद तक पहुँच गए। इस दौरान कॉकरोचों ने न केवल पार्लिएमेंट में घुसने की कोशिश की, बल्कि बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया और पुलिस से भिड़ने की भी कोशिश की।
स्थिति बिगड़ते देख संसद भवन की सुरक्षा अत्यंत कड़ी कर दी गई है और सभी मुख्य प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया। उपद्रवी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
सैकड़ों की संख्या में संसद के बाहर इकट्ठा हुए कॉकरोच, भीतर घुसने की थी प्लानिंग
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 20, 2026
भीड़ में दिखे Bhim Army के झंडे, प्रदर्शनकारियों को संसद से दूर कर रहे सुरक्षाकर्मी@Anurragmishra pic.twitter.com/uwvSUgst00
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की पूर्व नियोजित रणनीति संसद परिसर के भीतर प्रवेश करने की थी। प्रदर्शन में शामिल सीजेपी समर्थक बयान दे रहे थे कि एकजुट होकर केंद्र की मोदी सरकार को गिरा दी जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान समर्थकों के हाथों में भीम आर्मी के झंडे देखे गए। लोगों को ‘जय भीम’ के नारे लगाते हुए देखा गया
NEET पर शुरू हुआ प्रदर्शन PM मोदी को गिराने तक पहुँचा
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बूढ़े कॉकरोच ने कहा, "सब एक हो के मोदी को गिरा दो"
Sansad March में इकट्ठा हुई है भीड़, @anurragmishra की ग्राउंड रिपोर्ट pic.twitter.com/vW2OLh6q5A
घटना के सामने आए वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारी पुलिस बल पर पथराव करते साफ नजर आ रहे हैं। इस दौरान उपद्रवियों को खुलेआम यह कहते सुना गया, “पत्थरबाजी तो होगी ही।”
Jantar Mantar पर Cockroach हुए आक्रामक, RAF जवानों पर बरसाए पत्थर pic.twitter.com/H9wkDDHSNW
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 20, 2026
कॉकरोच जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन से पहले दावा किया था कि वह एक पीसफुल प्रोटेस्ट करेंगे। हालाँकि 20 जुलाई को दिखी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि मंशा कुछ अलग है। इस प्रदर्शन में पत्रकारों से लेकर पुलिस पर हमला हुआ। तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर आ चुकी हैं। इस दौरान सुनियोजित ढंग से भीम आर्मी के एजेंडे को बढ़ाया गया।
न सरकार ने ‘CJP’ से साधा कोई संपर्क, न तय हुई कोई मुलाकात: साख बचाने के लिए झूठ बोल रहा सौरव दास, सरकारी सूत्रों ने मीडिया दावों को नकारा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने 20 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ बातचीत का जो दावा कर सुर्खियाँ बटोरीं थी वो असल में फर्जी निकली हैं। सौरव दास ने X पर पोस्ट करके कहा था कि मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए संपर्क किया है और वह और आशुतोष रंका CJP की ओर से केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा से मिलने जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सुबह ही उनसे बातचीत के लिए संपर्क किया था, युवाओं का बड़ा जमावड़ा उनके साथ है और पार्टी की माँगें पूरी तरह स्पष्ट हैं।
इस खबर को ‘द हिंदू’ की पत्रकार विजइता सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर प्रमुखता से आगे बढ़ाया।
उन्होंने अपने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा केंद्र सरकार की ओर से CJP टीम से बातचीत कर रहे थे। साथ ही ये भी कहा कि CJP सदस्यों को पहले जिला मजिस्ट्रेट, फिर केंद्र सरकार के एक सचिव और उसके बाद राज्य मंत्री स्तर के अधिकारियों के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था। मगर, CJP सदस्यों ने इन सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया क्योंकि उनकी माँग थी कि उनकी सीधी बातचीत केवल प्रधानमंत्री या किसी कैबिनेट मंत्री के साथ ही हो, और उन्होंने इसके लिए डीसीपी को मंत्रियों के नामों की एक सूची भी सौंपी थी।
हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम में तब नया मोड़ आया जब यह स्पष्ट हुआ कि सौरव दास और उनका समर्थन करने वाले पत्रकारों के ये दावे कथित रूप से असत्य थे। ऑपइंडिया को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सौरव दास द्वारा किए गए सभी दावे पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं।
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की ओर से CJP या प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए ऐसा कोई संपर्क नहीं साधा गया था और न ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सौरव दास के बीच किसी भी प्रकार की कोई बैठक या मुलाकात तय थी।
गौरतलब हो कि पूरा सच सामने आने के बाद अब ये दावा हो रहा है कि प्रदर्शन की विफलता को देखते हुए जीत का झूठा दावा किया गया और अपनी साख बचाने के मकसद से यह अफवाह फैलाई गई थी।

