E20 मामले में Fake Video के खिलाफ मेटा-गूगल और X पर नितिन गडकरी करेंगे केस, बॉम्बे HC ने दी मंजूरी: फर्जी दावों के साथ वीडियो बनाना पड़ेगा भारी

ई20 पेट्रोल विवाद में मेटा-गूगल और एक्स पर मानहानि मुकदमा करने की मंजूरी, प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: AI ChatGPT)
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें इंटरनेट पर उनके खिलाफ चलाए जा रहे फर्जी और मानहानिकारक (Defamatory) कंटेंट के खिलाफ दीवानी मुकदमा (Civil Suit) दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब मेटा (Meta), गूगल (Google), यूट्यूब और एक्स (X) जैसी बड़ी कंपनियों को कोर्ट में जवाब देना होगा।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद केंद्र सरकार की ई-20 (E20 Fuel) यानी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति से जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर कुछ समय से ऐसे वीडियो, ऑडियो और पोस्ट लगातार फैलाए जा रहे हैं, जिनमें झूठा दावा किया गया है कि गडकरी और उनके परिवार ने इस नीति से निजी और आर्थिक मुनाफा कमाया है। इन वीडियो में एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल करके उनकी नकली आवाज और चेहरा (Deepfake) बनाकर भ्रामक बातें फैलाई जा रही थीं।

गडकरी की ओर से पेश हुए वकील संदीप एस लड्डा ने कोर्ट को बताया कि यह फर्जी सामग्री मुंबई के साथ-साथ पूरे देश में देखी जा रही है। याचिका में स्पष्ट किया गया कि एथेनॉल नीति का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, न कि सड़क परिवहन मंत्रालय। इसलिए गडकरी पर लगे निजी फायदे के आरोप पूरी तरह से झूठे, निराधार और उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए बनाए गए हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दी। चूँकि सामग्री इंटरनेट पर हर जगह मौजूद है, इसलिए हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तय करने के लिए यह इजाजत जरूरी थी। अब गडकरी इस याचिका के जरिए कंपनियों को इन वीडियो को हटाने और भविष्य में ऐसा कंटेंट रोकने के लिए आदेश (Injunction) की माँग करेंगे।

याचिका में गडकरी ने साफ किया है कि इसका मकसद सरकार की नीतियों पर होने वाली निष्पक्ष आलोचना को रोकना बिल्कुल नहीं है। सही तथ्यों पर आधारित आलोचना का स्वागत है, लेकिन एआई का गलत इस्तेमाल करके बनाई गई फर्जी तस्वीरें, बनावटी आवाज और अभद्र भाषा को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं कहा जा सकता। यह किसी व्यक्ति के सम्मान और व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का हनन है।

इस मामले में केंद्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और अनजान वीडियो बनाने वालों को भी पक्षकार बनाया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कदम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी खबरें और डीपफेक कंटेंट फैलाने वालों पर नकेल कसेगी और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय हो सकेगी।

बीजेपी शासित राज्यों में ही उपद्रव क्यों? गैर-बीजेपी राज्यों में लीक हुए पेपर पर धरने/प्रदर्शन क्यों नहीं? आंदोलन के नाम पर हिंसा करने वाले उपद्रवियों पर बिहार पुलिस ने कसा शिकंजा ; 350+ गिरफ्तार, 200+ हिरासत में, 1500+ रडार पर…:

           लखीसराय में पथराव करने वाले 19 संदिग्धों की तस्वीरें जारी (फोटो साभार: एक्स @LakhisaraiP)
कॉकरोच और इनको समर्थन देने वाली पार्टियां पेपर लीक मुद्दे पर सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में उपद्रव किये जा रहे हैं? जिन गैर-बीजेपी शासित राज्यों में पेपर हुए हैं वहां के शिक्षा मंत्रियों का इस्तीफा क्यों नहीं माँगा जाता? जो साबित करता है कि उपद्रव प्रायोजित है। कहाँ से कौन इसकी फंडिंग कर रहा है, गृह मंत्रालय, रॉ और गुप्तचर एजेंसियों को जाँच कर उन लोगों पर कार्यवाही करनी चाहिए। अगर मुद्दा NEET पेपर लीक का है तो खालिद उमर के नारे क्यों? सनातन विरोधी नारे क्यों? मंशा साफ है भारत विरोधियों की भीख पर नाचने वाले देश में उपद्रव कर देश को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। CAA विरोध से लेकर अब NEET पेपर लीक तक जितने भी उपद्रव हुए हैं सभी लगभग एक ही नारों का इस्तेमाल हो रहा है।       

दिल्ली के बाद NEET पेपर लीक को लेकर बिहार में भी छात्रों का आंदोलन देखा गया था। विपक्षी दलों के छात्र संगठनों ने प्रतिरोध मार्च के दौरान हिंसा फैलाई थी। अब इस मामले को लेकर बिहार पुलिस ने जाँच तेज कर दी है।

बिहार पुलिस CCTV कैमरों के जरिए दंगाइयों और उपद्रवियों की पहचान कर ली है। पुलिस के अनुसार पटना समेत पाँच जिलों में अभियान चलाकर 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और सबसे ज्यादा गिरफ्तारी पटना में हुई।

 पटना से 258 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं सारण जिले में पुलिस ने 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से 30 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

वहीं सासाराम में हिंसा में शामिल 35 लोगों की पहचान की गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस की रडार पर कुल 1500 से ज्यादा उपद्रवी हैं।

ड्रोन, सीसीटीवी और सोशल मीडिया फुटेज से हो रही पहचान

पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई 2026 को आयोजित प्रतिरोध मार्च के दौरान समाहरणालय गेट और आसपास के इलाके में हुई पूरी घटना की रिकॉर्डिंग ड्रोन कैमरों, CCTV और अन्य Video माध्यमों से की गई थी। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद 19 संदिग्धों की तस्वीरें पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी की गई हैं।

अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि वे इनमें से किसी भी व्यक्ति को पहचानते हैं तो पुलिस को तत्काल सूचना दें। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन और संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल हर व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

13 नामजद, 100 अज्ञात पर प्राथमिकी, एक आरोपी गिरफ्तार

घटना के संबंध में कबैया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। FIR में युवा राजद के जिलाध्यक्ष विनय कुमार साव, छात्र नेता रौशन कुमार सिन्हा सहित 13 लोगों को नामजद आरोपित बनाया गया है, जबकि 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

जाँच के दौरान वीडियो फुटेज के आधार पर अमहरा थाना क्षेत्र के विक्कम निवासी अनुज कुमार के पुत्र पीयूष कुमार की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। थाना अध्यक्ष रणधीर कुमार ने बताया कि अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।

नीट पेपर लीक के विरोध में निकला मार्च, पथराव में महिला सिपाही घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीट परीक्षा पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और अन्य माँगों को लेकर विपक्षी दलों के छात्र संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन के तहत लखीसराय में प्रतिरोध मार्च निकाला था। जब प्रशासन ने समाहरणालय गेट पर मार्च को आगे बढ़ने से रोका तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस का कहना है कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया और पुलिस बल पर ईंट, पत्थर, डंडे, बोतलें तथा अन्य वस्तुएँ फेंकी। इस दौरान आसपास खड़े निजी वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई और सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने का प्रयास किया गया।

हिंसा में महिला सिपाही वर्षा कुमारी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनके सिर में पत्थर लगने से गहरी चोट आई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बेल्जियम में NATO के मिलिट्री हेडक्वार्टर से चीनी मूल की कनाडाई नागरिक महिला इंटर्न जासूसी के आरोप में गिरफ्तार: रिपोर्ट


बेल्जियम में नाटो (NATO) के सैन्य मुख्यालय में काम कर रही एक कनाडाई महिला को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह महिला वहाँ इंटर्न के तौर पर काम कर रही थी और उस पर किसी ‘तीसरे देश’ के लिए जासूसी करने और एक आपराधिक संगठन का सदस्य होने का शक है।

बेल्जियम के संघीय अभियोजक कार्यालय ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को जारी अपने बयान में बताया कि आरोपित महिला चीनी मूल की कनाडाई नागरिक है। हालाँकि अभियोजकों ने न तो उसकी पहचान उजागर की और न ही यह बताया कि वह किस देश या संगठन के लिए जासूसी कर रही थी।

यह महिला नाटो के सुप्रीम हेडक्वार्टर्स अलाइड पावर्स यूरोप (SHAPE) में इंटर्न के रूप में तैनात थी, जो बेल्जियम के मोंस शहर में स्थित है। SHAPE दरअसल नाटो का सबसे बड़ा सैन्य मुख्यालय है और यह एलाइड कमांड ऑपरेशंस का आधार है, जो 32 देशों के इस सैन्य गठबंधन के सभी अभियानों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का काम देखता है।

जाँच की शुरुआत तब हुई जब SHAPE की सुरक्षा टीम को इस महिला की गतिविधियों पर शक हुआ। सुरक्षा टीम ने अपना शक बेल्जियम की सैन्य खुफिया एजेंसी तक पहुँचाया, जिसके बाद यह मामला संघीय अभियोजक कार्यालय को सौंपा गया और वहाँ जाँच शुरू हुई। गुरुवार को अधिकारियों ने महिला के घर और नाटो मुख्यालय स्थित उसके कार्यस्थल की तलाशी ली। इस तलाशी में कंप्यूटर अपराध से जुड़ी विशेष टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। इसके अगले दिन, यानी शुक्रवार(जुलाई 24) को महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

कनाडा सरकार के लोक सुरक्षा विभाग (Public Safety Canada) ने पुष्टि की है कि उसे नाटो में कार्यरत एक कनाडाई नागरिक की गिरफ्तारी की जानकारी है। विभाग ने कहा कि चूंकि मामला अभी जाँच के दायरे में है, इसलिए वह इस पर विस्तार से कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। साथ ही विभाग ने कनाडाई नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियाँ अपने साझेदार देशों की एजेंसियों के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए हैं, जो ऐसे खतरों से निपटने में मदद करती हैं।

न्यूज एजेंसी AP से बात करते हुए SHAPE के एक प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना का नाटो या SHAPE के परिचालन कार्यों, कमांड और कंट्रोल व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है और मुख्यालय अपनी सामान्य जिम्मेदारियाँ पहले की तरह निभा रहा है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिमी देश लगातार चीन और अन्य विदेशी ताकतों की ओर से जासूसी की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। इससे पहले भी नाटो और उससे जुड़ी एजेंसियों के अधिकारियों पर जासूसी के आरोप लग चुके हैं, जिससे गठबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल जाँच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

NEET-UG पेपर लीक और कोचिंग माफिया, CBI ने सॉल्वर गैंग से जुड़े 45 के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

                      नीट पेपर लीक और प्रशासनिक सुधारों का विश्लेषण। (फोटो साभार - AI)
साल 2024 का NEET-UG पेपर लीक किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रश्नपत्र से भरा ट्रंक खोल देने से शुरू नहीं हुआ था। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, यह एक ऐसे संगठित नेटवर्क का नतीजा था, जिसने एडमिशन कंसल्टेंट्स, करियर काउंसलिंग ऑपरेटरों, परीक्षा केंद्र के अधिकारियों, अभ्यर्थियों तक पहुँच बनाने वाले एजेंटों, सॉल्वर के रूप में नियुक्त MBBS छात्रों, गेस्ट हाउस संचालकों, ड्राइवरों, प्रिंटरों और वित्तीय बिचौलियों को एक-दूसरे से जोड़ रखा था।

दो साल बाद तरीका भले ही बदल गया, लेकिन जाँच एजेंसी के अनुसार इस पूरे कारोबारी तंत्र का अस्तित्व बना रहा। NEET-UG 2026 मामले में CBI ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा विषय विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त लोगों ने गोपनीय प्रश्नों को निजी कोचिंग क्लासों और कोचिंग से जुड़े बिचौलियों के माध्यम से आगे पहुँचाया।

केमिस्ट्री के व्याख्याता पीवी कुलकर्णी को इस पूरे मामले में एक प्रमुख स्रोत बताया गया। जाँच के अनुसार, उनके घर पर आयोजित विशेष कक्षाओं के दौरान बताए गए प्रश्न 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे।

ये दोनों मामले दिखाते हैं कि पेपर लीक को केवल सीलबंद प्रश्नपत्रों की आवाजाही में हुई चूक के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोचिंग माफिया एक संगठित बाजार की तरह काम करता है।

यह ऐसे परिवारों की तलाश करता है जो पैसे देने को तैयार हों, गोपनीय जानकारी तक पहुँच रखने वाले अंदरूनी लोगों को खोजता है, प्रश्न हल करने या पढ़ाने में सक्षम लोगों की भर्ती करता है, उम्मीदवारों के रहने और आने-जाने की व्यवस्था करता है, पैसे और जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करता है और परीक्षा शुरू होने से पहले ही उन्हें अनुचित लाभ पहुँचाने का काम करता है।

यहाँ कोचिंग माफिया शब्द का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि देश के सभी कोचिंग संस्थान, शिक्षक या करियर काउंसलर परीक्षा से जुड़े अपराधों में शामिल हैं।

इस शब्द का उपयोग केवल उन संगठनों और व्यक्तियों के लिए किया गया है, जिन्होंने CBI के बयानों और अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार शिक्षा, काउंसलिंग या एडमिशन से जुड़े अपने नेटवर्क का इस्तेमाल अभ्यर्थियों की भर्ती करने और नकल या परीक्षा में धांधली कराने के लिए किया। ऑपइंडिया देशभर के पूरे कोचिंग नेटवर्क पर किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप नहीं लगा रहा है।

पटना-हजारीबाग से जुड़े मुख्य मामले की शुरुआत शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से हुई थी। इसके बाद 23 जून 2024 को यह मामला केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया, जहाँ एजेंसी ने एक नई FIR दर्ज की।

जाँच के दौरान CBI ने कुल 45 लोगों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल कीं। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए ऑपइंडिया ने मुख्य रूप से अदालत के आदेशों और FIR पर भरोसा किया है। इन सभी दस्तावेजों को लेख के अंत में उपलब्ध कराई गई एक ZIP फाइल में एक साथ जोड़ा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह नेटवर्क 2024 की परीक्षा से पहले से था मौजूद

2024 के नीट पेपर लीक के घटनाक्रम उन दो लोगों द्वारा बनाई गई योजना से शुरू हुई जो 2015-16 से एक-दूसरे को जानते थे। CBI के अनुसार, मुख्य आरोपितों में से एक, अमित कुमार सिंह, राज कुमार सिंह उर्फ राजू सिंह को 2015-16 से जानता था।

दोनों कंसल्टेंसी या एजेंसी सेवाओं में काम करते थे जो प्रोफेशनल कोर्सेज में दाखिला दिलाने का काम करती थीं। पंकज कुमार उर्फ आदित्य उर्फ साहिल भी इसी क्षेत्र में काम करता था और 2021-22 के दौरान अमित के संपर्क में आया था।

जाँच एजेंसी ने अमित और रंजीत कुमार बेउरा उर्फ पिंटू के बीच एक पुराने जुड़ाव का भी जिक्र किया। बेउरा की जमानत कार्यवाही के दौरान, अभियोजन पक्ष ने कहा कि वे दोनों 2019 से एक-दूसरे को जानते थे और उसी साल ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी परीक्षा में गड़बड़ी के एक मामले में गिरफ्तार हुए थे।

हालाँकि यह पुराना मामला नीट पेपर लीक से जुड़ा नहीं था, लेकिन यह इसलिए प्रासंगिक था क्योंकि CBI ने 2024 के इस ऑपरेशन को दाखिले और प्रतियोगी परीक्षाओं के इर्द-गिर्द पहले से बने संबंधों के विस्तार के रूप में पेश किया।

‘करियर एकेडमी एजुकेशन ट्रस्ट’ उम्मीदवारों की भर्ती करने वाले मुख्य चैनलों में से एक बन गया। यह 3 अगस्त 2023 को ओडिशा में रजिस्टर्ड हुआ था। बेउरा ने अदालत को बताया कि यह गरीब छात्रों को शैक्षिक सुविधाएँ और परामर्श प्रदान करने के लिए बनाया गया एक NGO था।

वहीं CBI का कहना था कि इसका इस्तेमाल नीट उम्मीदवारों की पहचान करने, उनके परिवारों से कमिटमेंट लेने और गारंटी के तौर पर असली शैक्षणिक सर्टिफिकेट और चेक इकट्ठा करने के लिए किया जाता था।

बेउरा को इस संगठन का मैनेजिंग डायरेक्टर बताया गया था। अमित प्रसाद महाराणा और धीरेन कुमार पांडा की पहचान इसके पदाधिकारियों के रूप में की गई थी। एजेंसी ने कहा कि अमित कुमार सिंह ने ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश से उम्मीदवारों का इंतजाम करने के लिए उनके और संजय कुमार के साथ मिलकर काम किया।

सत्रह उम्मीदवारों को हजारीबाग भेजा गया और उन्हें ‘राज गेस्ट हाउस’ या ‘सिंदूर’ स्थित एक घर में ठहराया गया। बाकी उम्मीदवार भुवनेश्वर या पटना में ही रहे। CBI ने उम्मीदवारों, कर्मचारियों और ड्राइवरों के बयानों का हवाला दिया।

एक उम्मीदवार ने करियर एकेडमी को अपने शैक्षणिक सर्टिफिकेट सौंपे थे। एक अन्य ने कहा कि महाराणा ने हल किया हुआ नीट पेपर शेयर किया था। भुवनेश्वर की एक उम्मीदवार ने बताया कि उसे एक होटल में प्रिंटेड कॉपी मिली थी और उसने पांडा की पहचान की थी।

एजेंसी ने कहा कि महाराणा ने स्कोर्पियो से उम्मीदवारों को लाने-ले जाने का काम किया, ‘होटल ट्रीफो पैलेस’ में एक प्रिंटर की व्यवस्था की और हल किए गए पेपर बांटे। CBI ने उसके खाते में 2 लाख रुपए और ‘चिरंजीवी मल्टीवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ (जिसमें वह डायरेक्टर था) द्वारा प्राप्त 12 लाख रुपए का हवाला दिया।

पांडा को करियर एकेडमी का ट्रेजरर बताया गया था और वह भी ट्रांसपोर्ट, होटल ट्रीफो पैलेस में पेपर बांटने और 12 लाख रुपए के भुगतान से जुड़ा हुआ था। CBI ने कहा कि गारंटी के तौर पर असली सर्टिफिकेट और चेक लिए गए थे। इससे आयोजकों को उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर काफी दबाव बनाने का मौका मिल गया होगा।

अगली कड़ी परीक्षा प्रणाली के भीतर थी। जमालुद्दीन उर्फ जमाल हजारीबाग का एक पत्रकार था जो ‘प्रभात खबर’ से जुड़ा हुआ था और ओएसिस स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को नियमित रूप से कवर करता था।

ओएसिस स्कूल वही परीक्षा केंद्र था जहाँ से प्रश्नपत्र चोरी हुआ था। CBI ने कहा कि इस वजह से वह प्रिंसिपल डॉ अहसानुल हक और वाइस-प्रिंसिपल मो इम्तियाज आलम के करीब आ गया।

एजेंसी ने 3 जून 2023 से 18 जून 2024 तक हक और जमालुद्दीन के बीच 814 कॉल्स का हवाला दिया। हालाँकि केवल कॉल की संख्या ही साजिश साबित करने के लिए काफी नहीं थी, लेकिन CBI ने इसका इस्तेमाल उनके निरंतर जुड़ाव को स्थापित करने के लिए किया।

एजेंसी के अनुसार, जमालुद्दीन ने अमित कुमार सिंह की मुलाकात हक और इम्तियाज से कराई थी। अमित ने बाद में पंकज कुमार को उनसे मिलवाया। CBI ने अमित, हक, इम्तियाज, जमालुद्दीन, पंकज, राजू सिंह और अमन कुमार सिंह की बैठकों का भी जिक्र किया।

अभियोजन पक्ष की व्यापक थ्योरी साफ थी, जमालुद्दीन ने बाहर के दाखिला नेटवर्क को उस सुरक्षित केंद्र को नियंत्रित करने वाले अधिकारियों से जोड़ा, जबकि अमित ने पंकज को उस दायरे में शामिल किया।

पेपर चोरी होने से पहले सॉल्वर और कैंडिडेट हुए इकट्ठा

एक कोरे प्रश्नपत्र का तब तक कोई खास व्यावसायिक मूल्य  नहीं था जब तक कि उसे जल्दी से हल करके पैसे देने वाले उम्मीदवारों तक न पहुँचाया जाए। CBI ने कहा कि कम से कम तीन सॉल्वर ग्रुप्स  को हजारीबाग लाया गया था। इसके कई सदस्य MBBS छात्र थे।

संजय कुमार को उस व्यक्ति के रूप में बताया गया जिसने सॉल्वर, लाभार्थियों, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था की थी। अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसने AIIMS पटना के छात्र चंदन सिंह से पढ़ाई में अच्छे मेडिकल छात्रों को भर्ती करने के लिए कहा था।

पटना ग्रुप में चंदन सिंह, कुमार शानू, राहुल आनंद, करण जैन, सुरभि कुमारी, रौनक राज और अमित कुमार शामिल थे। अमित अपने कॉलेज के साथी सनोज कुमार यादव को लाया था, हालाँकि CBI ने कहा कि सनोज पेपर हल करने के लिए ‘राज गेस्ट हाउस’ के अंदर नहीं गया था।

इन छात्रों से पहले ‘इम्पर्सनेशन’ (दूसरों के स्थान पर परीक्षा देने यानी डमी कैंडिडेट बनने) के लिए संपर्क किया गया था। CBI ने कहा कि संजय चंदन, कुमार शानू, राहुल आनंद और करण जैन को एम्स पटना के पास एक फोटो स्टूडियो में ले गया।

नीट आवेदनों के लिए उनकी तस्वीरें ली गईं। रौनक राज और अमित कुमार ने व्हाट्सएप के जरिए तस्वीरें और सिग्नेचर भेजे। डमी-कैंडिडेट की योजना को बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन इन्हीं नए लोगों को सॉल्वर के रूप में फिर से काम सौंप दिया गया।

राजस्थान ग्रुप का संबंध अमित कुमार सिंह से था। CBI ने कहा कि उसने फरवरी 2024 में भरतपुर की यात्रा की और कुमार मंगलम विश्नोई, दीपेंद्र शर्मा और अन्य मेडिकल छात्रों से मुलाकात की।

श्री जगन्नाथ पहाड़िया सरकारी मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र कुमार मंगलम ने एक ग्रुप का इंतजाम किया, जिसमें दीपेंद्र शर्मा, संदीप कुमार, सुरेश कुमार और इशिता शामिल थे। इनसे भी शुरुआत में संभावित डमी उम्मीदवारों के रूप में संपर्क किया गया था। कुमार मंगलम ने बाद में ट्रेन टिकटों की व्यवस्था की और ग्रुप के सदस्यों को हजारीबाग लेकर आया।

यह ऑपरेशन परीक्षा से एक सप्ताह से भी अधिक समय पहले लोगों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने लगा था। 26 अप्रैल की रात को संजय कुमार, चंदन सिंह, कुमार शानू और राहुल आनंद गंगा दामोदर एक्सप्रेस से पटना से रवाना हुए और कोडरमा पहुँचे।

सुरभि कुमारी रांची से अलग आई थी। यह ग्रुप पहले ‘रैमसन होटल’ और फिर ‘होटल तारा टॉवर’ में रुका। बुकिंग संजय और कुमार अभिषेक द्वारा की गई थी।

अमित कुमार 2 मई को चेन्नई से रांची गया और अगले दिन कोडरमा पहुँचा। रौनक राज मुंबई से आया था। करण जैन ने कुमार अभिषेक द्वारा बुक किए गए टिकट पर पटना से यात्रा की। 3 मई को पटना ग्रुप हजारीबाग के ‘होटल श्री विनायक’ में शिफ्ट हो गया।

उनका इतनी जल्दी आना CBI के इस दावे का समर्थन करता है कि उन्हें गोपनीय सामग्री की उम्मीद में पहले से ही वहाँ तैनात किया गया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि तैयारियाँ ओएसिस स्कूल के भीतर भी चल रही थीं।

इम्तियाज आलम की जमानत कार्यवाही में इसके जवाबी हलफनामे में कहा गया कि 3 मई को कंट्रोल रूम में एक टूलकिट बैग रखा गया था। बाद में इन टूल्स का इस्तेमाल NTA ट्रंक के पीछे के कब्जों से छेड़छाड़ करने, उसकी पैकेजिंग खोलने और पेपर की फोटो खींचने के बाद उसे वापस वैसे ही ठीक करने के लिए किया गया था।

इम्तियाज आलम के जमानत आदेश में शामिल CBI के जवाबी हलफनामे के अनुसार, आलम ने 3 मई को कंट्रोल रूम में टूलकिट बैग रखा था। एजेंसी ने कहा कि पंकज ने बाद में ट्रंक को खोलने और उसे वापस ठीक करने के लिए उन टूल्स का इस्तेमाल किया।

उम्मीदवारों का 3 और 4 मई को हजारीबाग में जुटना शुरू हो गया था। बेउरा करियर एकेडमी के कर्मचारी देबाशीष पाणिग्रही और ड्राइवर रंजन सेठी उर्फ मानस के साथ एक एमजी हेक्टर गाड़ी से पहुँचा था।

इस गाड़ी का इस्तेमाल उम्मीदवारों को लाने-ले जाने के लिए किया गया था। बेउरा ‘एके इंटरनेशनल होटल’ में रुका। ओडिशा के उम्मीदवारों को राज गेस्ट हाउस और सिंदूर भेजा गया।

राजू सिंह राज गेस्ट हाउस का प्रबंधन करता था। CBI ने कहा कि इस परिसर को जानबूझकर खाली और उपलब्ध रखा गया था। खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी और उम्मीदवारों व सॉल्वरों को लाने-ले जाने के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया था।

राजू ने अपना पक्ष रखा कि उसने केवल कमरे किराए पर दिए थे और उसे इसके पीछे का मकसद नहीं पता था। पटना हाई कोर्ट ने शुरुआत में अभियोजन पक्ष के इस मामले का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि उम्मीदवारों को तैयार करने के लिए जानबूझकर गेस्ट हाउस उपलब्ध कराया गया था।

पटना में सिकंदर यादवेन्दु ने अखिलेश कुमार, अवधेश कुमार, शिवनंदन कुमार और उम्मीदवार अनुराग यादव के साथ तालमेल बिठाया। CBI ने कहा कि उनसे 4 मई को रात करीब 10:30 बजे सेंट करेन्स हाई स्कूल के पास उम्मीदवारों को लाने के लिए कहा गया था।

उस रात तक इस नेटवर्क की अलग-अलग शाखाएँ अपनी-अपनी जगह पर तैनात थीं, स्कूल के भीतर के अंदरूनी लोग, पास के होटलों में सॉल्वर, गेस्ट हाउसों और निजी परिसरों में उम्मीदवार, और गाड़ियाँ, प्रिंटर व ठहरने की जगह पूरी तरह तैयार थीं।

5 मई को पेपर कैसे निकाला और बांटा गया

सुबह लगभग 5:30 बजे, चंदन सिंह, राहुल आनंद, सुरभि कुमारी और करण जैन एक काले रंग की हुंडई क्रेटा कार में ‘होटल श्री विनायक’ से निकले और ‘राज गेस्ट हाउस’ पहुँचे। उनके पीछे-पीछे कुमार शानू, अमित कुमार और रौनक राज भी वहाँ पहुँचे।

CBI ने कहा कि सनोज कुमार यादव को छोड़कर पटना सॉल्वर ग्रुप का हर सदस्य चोरी का पेपर आने से पहले ही गेस्ट हाउस के अंदर मौजूद था। मोबाइल लोकेशन, ट्रैवल रिकॉर्ड और गवाहों की पहचान के जरिए राजस्थान ग्रुप के दीपेंद्र शर्मा और संदीप कुमार की मौजूदगी भी वहीं पाई गई।

                                              2024 में NEET का पेपर कैसे लीक हुआ

सुबह लगभग 7:40 बजे, ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल अहसानुल हक ने हजारीबाग में SBI के एक वॉल्ट से नीट के प्रश्नपत्रों से भरे दो ट्रंक लिए। हक NTA के सिटी कोऑर्डिनेटर भी थे। ये ट्रंक सेंटर सुपरिटेंडेंट और वाइस-प्रिंसिपल इम्तियाज आलम को सौंप दिए गए, जो सुबह लगभग 7:53 बजे स्कूल पहुँचे और उन्हें कंट्रोल रूम में रख दिया।

CBI ने पैकेजिंग चेन के जरिए चोरी हुई बुकलेट का पता लगाया। ट्रंक संख्या 13093 में 13560 से 13563 तक के बंच थे। बंच 13560 में पैकेट नंबर 38988, 38989 और 38990 शामिल थे।

पैकेट 38990 में 6136465 से 6136488 तक नंबर वाली 24 बुकलेट थीं। बुकलेट संख्या 6136488 की पहचान उस मूल कॉपी के रूप में की गई जिसकी स्कूल के अंदर नकल की गई थी।

CBI ने कहा कि आलम ने इशारा किया कि पंकज को अंदर आने दिया जाए। इसके बाद पंकज स्टाफ रूम में बैठ गया। गौर करने वाली बात यह है कि ‘इनोवेटिव व्यू’ परीक्षा केंद्रों पर तैनात की गई आधिकारिक सुरक्षा और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन एजेंसी थी।

शाकिब ने इसकी जानकारी आलम को और बाद में हक को दी। सादुल ने भी यह मुद्दा उठाया। CBI द्वारा उद्धृत बयानों के अनुसार, आलम इस पर चिढ़ गए और उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि वे इस मामले को उन पर छोड़ दें। शाकिब और सादुल ने बाद में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिए। शाकिब ने एक टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में पंकज की पहचान भी की।

जाँच एजेंसी ने कहा कि पंकज ने एक आईफोन 13  से पहले और आखिरी पन्ने को छोड़कर हर पेज की फोटो खींची, जिसके बारे में CBI का कहना है कि इसका इस्तेमाल इस पूरे ऑपरेशन में किया गया था। उसने किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके एक सिम कार्ड भी हासिल किया था।

CBI ने कहा कि अस्त-व्यस्त हो चुकी टेबल क्लॉथ को स्कूल के CCTV फुटेज में देखा जा सकता था। बाद में इन औजारों को जब्त कर लिया गया और पंकज ने CBI की कस्टडी में इस पूरी प्रक्रिया को दोबारा करके दिखाया।

खींची गई तस्वीरों को राज गेस्ट हाउस भेजा गया। सॉल्वरों को विषयों के हिसाब से बांट दिया गया। कुमार शानू, दीपेंद्र शर्मा और संदीप कुमार को बायोलॉजी का जिम्मा सौंपा गया था। सुरभि कुमारी और रौनक राज ने केमिस्ट्री को संभाला।

चंदन सिंह, राहुल आनंद और अमित कुमार ने फिजिक्स का पेपर हल किया। करण जैन को कठिन या अधिक समय लेने वाले प्रश्न दिए गए थे। चंदन को पटना ग्रुप के लीडर और कुमार मंगलम को राजस्थान ग्रुप के लीडर के रूप में बताया गया।

पंकज ने हल की गई सामग्री की PDF बनाई और उन्हें सिंदूर, एके इंटरनेशनल होटल, बोकारो, भुवनेश्वर और पटना में मौजूद हैंडलर्स को भेज दिया। शशिकांत पासवान ने सिंदूर ब्रांच को संभाला। एक कॉपी अमित कुमार सिंह के भाई अमन कुमार सिंह द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्हाट्सएप नंबर पर भेजी गई थी।

भुवनेश्वर में पंकज के भाई घनश्याम से जुड़े हैंडलर्स ने दो इलेक्ट्रीशियन, गौतम और विकास के साथ मिलकर काम किया। 2024 के इस लीक मामले में CBI की जाँच के दौरान ‘करियर एकेडमी’ सबसे व्यापक रूप से दर्ज किए गए उम्मीदवार-भर्ती और लॉजिस्टिक्स चैनलों में से एक बनकर उभरी।

केमिस्ट्री का पेपर सुबह 11:05 बजे और फिजिक्स का पेपर सुबह 11:40 बजे आया। यह क्रम दर्शाता है कि जैसे ही संबंधित सॉल्वर ग्रुप ने अपना हिस्सा पूरा किया, वैसे ही प्रत्येक सेक्शन को आगे भेज दिया गया।

चार्जशीट के विवरण के अनुसार प्रिंटिंग और वितरण के दौरान बलदेव, पिंटू कुमार, नीतीश कुमार, अभिमन्यु पटेल, आशुतोष कुमार और मनीष प्रकाश उसी परिसर में मौजूद थे। लर्न प्ले स्कूल लीक हुए पेपर नेटवर्क की पटना ब्रांच के लिए वितरण और जवाब याद कराने का एक प्रमुख केंद्र था।

पुलिस इंटरसेप्शन जिसने रैकेट का किया पर्दाफाश

लगभग 2:05 बजे, शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अमर कुमार को सूचना मिली कि एक संगठित गिरोह ने NEET प्रश्नपत्र की सुरक्षा शृंखला को तोड़ दिया है। उन्हें यह भी बताया गया कि इस नेटवर्क के सदस्य रजिस्ट्रेशन नंबर JH01BW0019 वाली एक सफेद रेनॉल्ट डस्टर कार में घूम रहे हैं।

पुलिस ने राजवंशी नगर मोड़ के पास डस्टर गाड़ी को रोका और सिकंदर यादवेन्दु, अखिलेश कुमार व बिट्टू कुमार को हिरासत में ले लिया। गाड़ी की आगे की सीट के पास से चार फोटोकॉपी किए गए एडमिट कार्ड मिले। ये एडमिट कार्ड अभिषेक कुमार, शिवनंदन कुमार, आयुष राज और अनुराग यादव के थे। सिकंदर के पास से दो फोन भी बरामद किए गए।

आयुष राज BSEB कॉलोनी के डीएवी पब्लिक स्कूल में परीक्षा दे रहा था। FIR के मुताबिक, उसने बताया कि उसे और लगभग 20 से 25 छात्रों को ‘लर्न बॉयज हॉस्टल’ और ‘लर्न प्ले स्कूल’ ले जाया गया था, जहाँ उन्हें हल किए गए प्रश्न दिए गए और उन्हें याद करने के लिए कहा गया। उसने यह भी कहा कि परीक्षा में आए प्रश्न उपलब्ध कराई गई सामग्री से मेल खाते थे। पुलिस ने उसका एडमिट कार्ड, टेस्ट बुकलेट और पहचान दस्तावेज जब्त कर लिए।

इसके बाद जाँचकर्ताओं ने लर्न प्ले स्कूल की तलाशी ली और छत से नीट पेपर के आधे जले और गीले टुकड़े बरामद किए। CBI ने बाद में कहा कि इन टुकड़ों की मदद से वे लीक के तार ओएसिस स्कूल को आवंटित की गई बुकलेट से जोड़ने में कामयाब रहे। इस बरामदगी  ने पटना के वितरण केंद्र को हजारीबाग के पेपर से जोड़ दिया।

इस तरह मात्र एक दिन के भीतर, सॉल्वर सूर्योदय से पहले राज गेस्ट हाउस में दाखिल हुए, सुबह 8 बजे के बाद पेपर की कॉपी की गई, सुबह 11:40 बजे तक विषय-वार उत्तर पटना पहुँच गए और दोपहर 12:30 बजे तक उम्मीदवार अपने केंद्रों के लिए रवाना हो चुके थे।

मुख्य ऑर्गनाइजर और उनकी बताई गई भूमिकाएँ

CBI ने किसी एक व्यक्ति को इस पूरे नेटवर्क की हर शाखा के नियंत्रक के रूप में चिन्हित नहीं किया। जाँच एजेंसी का मामला एक बहुस्तरीय ऑपरेशन को दर्शाता है, जिसमें अलग-अलग लोगों ने परीक्षा केंद्र तक पहुँच, उम्मीदवारों की भर्ती, पेपर हल करने, वितरण और पैसों के लेनदेन को संभाला।

कुमार मंगलम और दीपेंद्र शर्मा को रांची में अमित से जुड़े एक फ्लैट में ठहराया गया था। एजेंसी ने यह भी कहा कि कुमार मंगलम को रत्ना खान के एक खाते से 2.4 लाख रुपए मिले थे, जिसे अमित ऑपरेट करता था। अमित ने इस फ्लैट, भुगतान और मुलाकातों के दावों का खंडन किया। उसके घर की तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।

पंकज कुमार को सुरक्षित परीक्षा केंद्र और बाहरी नेटवर्क के बीच की ऑपरेशनल कड़ी बताया गया था। CBI ने उस पर टूल्स और आईफोन खरीदने, झूठी पहचान बताकर ओएसिस स्कूल में प्रवेश करने, ट्रंक खोलने, पेपर की फोटो खींचने और हल किए गए PDF भेजने का आरोप लगाया।

हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत की अवधि और अन्य आरोपितों के साथ समानता पर विचार करने के बाद मई 2025 में उसे जमानत दे दी। हालाँकि इस आदेश ने उसे आरोपों से बरी नहीं किया।

बलदेव को विषय-वार फाइलें मिली थीं। नीतीश ने उपकरणों की व्यवस्था की और पेपर्स को अपने आवास पर ले गया। रॉकी ने इस मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया और बाद में उसे जमानत मिल गई।

हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया कि अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं और अभियोजन पक्ष ने 589 गवाहों की सूची पेश की है। जमालुद्दीन को उस मध्यस्थ के रूप में बताया गया जिसने दाखिला नेटवर्क की मुलाकात हक और इम्तियाज से कराई थी।

हक और इम्तियाज ही उस सुरक्षित केंद्र के लिए जिम्मेदार अधिकारी थे। CBI ने कहा कि पंकज के प्रवेश को आसान बनाया गया, स्टाफ के विरोध के बावजूद उसकी मौजूदगी को नजरअंदाज किया गया और कंट्रोल रूम तक उसकी पहुँच सुनिश्चित की गई। दोनों ने इस मामले में शामिल होने से इनकार किया और अभियोजन पक्ष के घटनाक्रम पर सवाल उठाए।

अलग गोधरा नेटवर्क ने OMR शीट को बनाया निशाना

गोधरा मामले में एक अलग तरीका अपनाया गया था। यह पेपर चुराने और उम्मीदवारों को जवाब याद कराने पर निर्भर नहीं था। CBI ने कहा कि कोचिंग से जुड़े एक नेटवर्क ने एक परीक्षा केंद्र को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया था ताकि उम्मीदवारों के जाने के बाद चुनिंदा OMR शीटों पर सही उत्तर भरे जा सकें।

इस मामले में तुषार रजनीकांत भट्ट, परशुराम बिंदनाथ रॉय, आरिफ नूर मोहम्मद वोरा, विभोर उमेश्वर प्रसाद सिंह आनंद, पुरुषोत्तम शर्मा और दीक्षित कांतिभाई पटेल को नामजद किया गया था।

तुषार भट्ट ‘ज्ञान मंदिर करियर इंस्टीट्यूट’ में काम करता था, जो एक निजी कोचिंग संस्थान था। CBI ने कहा कि उसे ‘जय जलाराम स्कूल’ में एक शिक्षक और पर्यवेक्षक के रूप में पेश किया गया था ताकि उसे डिप्टी सेंटर सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया जा सके। स्कूल के प्रिंसिपल और NTA के सिटी कोऑर्डिनेटर पुरुषोत्तम शर्मा ने इस नियुक्ति को आसान बनाया।

दीक्षित पटेल ‘जय जलाराम एजुकेशन ट्रस्ट’ का चेयरमैन था, जो परीक्षा केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्कूलों को चलता था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसने केंद्रों और अधिकारियों की व्यवस्था करने में भाग लिया था। उसके वकीलों ने कहा कि वे नियुक्तियाँ NTA द्वारा की गई थीं और उसकी संलिप्तता से इनकार किया।

इसका उद्देश्य यह संभावना बढ़ाना था कि उन्हें इस नेटवर्क के प्रभाव वाले केंद्रों में आवंटित किया जाए। उम्मीदवारों से कहा गया था कि वे केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर दें जो वे जानते हैं और बाकी को खाली छोड़ दें। इसके बाद उनकी OMR शीट पर सही विकल्प भर दिए जाते हैं। परिवारों से 20 लाख रुपए से 25 लाख रुपए के बीच भुगतान करने को कहा गया था।

जस्टिस उज्जवल भुईया कुछ तो ख्याल रखना चाहिए कि हिंदुओं का मानमर्दन करने वालों की वकालत करने से पहले

सुभाष चन्द्र

जुलाई 25 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुईया ने भारत में उन याचिकाओं के प्रति अदालतों के ढुलमुल और लापरवाह रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई, जो उन नागरिकों द्वारा दायर की जाती हैं जिनके विरुद्ध असहमति व्यक्त करने या विरोध-प्रदर्शन करने के कारण आपराधिक कार्रवाई की जाती है। 

इस संदर्भ में उन्होंने हाल ही की उस घटना का उल्लेख किया जिसमें 14 मुस्लिम युवकों को रमजान के दौरान गंगा नदी में नाव पर रोजा खोलते समय चिकन बिरयानी खाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था

उन्होंने कहा,

"उदाहरण के लिए, कुछ युवकों का मामला लें, जो गंगा नदी पर नाव में रोजा खोलते समय चिकन बिरयानी खा रहे थे मुझे पूरा विश्वास है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। यह अपराध हो ही नहीं सकता गंगा नदी पर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है फिर भी उन्हें केवल इसी कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा"

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
जस्टिस भुईया आप किसी भी कानून की व्याख्या अपनी मर्जी से कर सकते हैं क्योंकि आप सुप्रीम कोर्ट हैं लेकिन आप इस बात को भूल रहे हैं कि किसी धर्म की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया गया कार्य अपराध की श्रेणी में आता है

वो 14 मुस्लिम युवक आखिर रोजा खोलने गंगा जी पर गए ही क्यों, मांस का सेवन किया भले ही चिकन बिरयानी में किया उन पर आरोप था कि उन्होंने बचा खुचा खाना और हड्डियां गंगा जी में फेंकी इसके पीछे उद्देश्य हिंदुओं के लिए पवित्र गंगा माँ का अपमान करना था और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना था। लगता है आपकी रग रग में हिंदुओं को अपमानित करना भरा हुआ है और इसलिए ही आप उन मुस्लिम युवकों की वकालत कर रहे हैं धार्मिक विद्वेष फ़ैलाने का कार्य तो आपने भी कर दिया

जस्टिस भुईया के ऐसे बेतुके बयान आते रहते हैं 24 जनवरी, 2026 को उन्होंने कहा था कि UAPA के अत्यधिक उपयोग से हासिल नहीं हो सकता विकसित भारत का लक्ष्य उन्होंने कहा कि 2019 से 2023 के बीच इस एक्ट में दोषसिद्धि मात्र 5% है हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हो सके 

आप UAPA में 5% दोषसिद्धि को लेकर कानून पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन CBI का Success Rate तो 76% होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह CBI के कार्यों की समीक्षा करेंगे - मतलब 5% भी पसंद नहीं और 76% भी पसंद नहीं

पिछले दिनों जस्टिस भुइयां ने कॉलेजियम की सिफारिशों के लिए केंद्र सरकार पर उंगली उठाते हुए कहा था कि केंद्र को कॉलेजियम की सिफारिशें खारिज करने का अधिकार नहीं है

बड़ी विडंबना है, पुलिस को सुप्रीम कोर्ट फटकार मारता है, प्रशासन को नहीं छोड़ता, सेना के कार्य में कमी निकालता है, केंद्र और राज्य सरकारों की तो बात ही छोड़ दो जब सभी में कमी निकालनी हैं तो सत्ता में आने का तरीका ढूंढिए

यानी सुप्रीम कोर्ट 1967 में बने UAPA कानून को विकसित भारत के बनने में रोड़ा समझता है मतलब कानून बनाने वाली संसद जैसे कोई पागलों की संस्था हो फिर तो एक लाठी में सभी आरोपियों पर से UAPA हटा दीजिए फिर चाहे वो आतंकी हो या दंगाई हों जिनकी वजह से सैंकड़ों लोगों की जान गई हो

शराब घोटाले में सभी लोगों को जमानत दे गई लेकिन केजरीवाल को जमानत देते हुए जस्टिस भुईया ने कहा कि  Article 20(3) के अनुसार किसी अभियुक्त को उसके स्वयं के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता फिर आरोप सिद्ध कैसे होगा क्योंकि केजरीवाल ही नहीं सभी आरोपी मुंह बंद करके बैठ जाएंगे 

सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपनी निजी राय अपने तक ही सीमित रखनी चाहिए 

अमेरिका से युद्ध की आड़ में ईरानी सरकार विरोधियों को निपटाने में लगी, सिर्फ जून में करीब 100 लोगों को दी फाँसी: कई के परिजनों को भी नहीं बताया

                                                       फाइल फोटो (साभार-rferl.org)
अमेरिका–ईरान युद्ध की ओर पूरी दुनिया की नजरें है। इस बीच ईरानी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक विरोधियों, प्रदर्शनकारियों और कथित जासूसों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान के कई मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों से ये पता चलता है कि सिर्फ जून महीने में ही 100 से ज्यादा लोगों को फाँसी दी गई है।

हालाँकि ईरानी सरकार का कहना है कि ये कदम ‘विदेशी साजिश’, ‘आतंकवाद’ और ‘इजराइल – अमेरिका के लिए जासूसी करने वालों’ से निपटने के लिए उठाए गए हैं। सरकार न सिर्फ खामोशी से फाँसी दे रही है, बल्कि लोगों की धर- पकड़ भी तेज कर दी है।

राजनीतिक विरोधियों को दी जा रही फाँसी

ईरान दुनिया के उन अग्रणी देशों में शामिल हो गया है, जहाँ राजनीतिक विरोधियों को भी फाँसी की सजा दी जा रही है। यह कदम लोगों में भय पैदा करने के लिए उठाया गया है, ताकि दिसंबर 2025 में ईरानी शासन के खिलाफ हुआ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन फिर कभी न हो सके। दरअसल ईरान ये सब कुछ अमेरिकी हमले की आड़ में कर रहा है। ईरान हाउस की संस्थापक अजादेह अफसाही ने ईरान इंटरनेशनल के आई फॉर ईरान पॉडकास्ट में भी यह बात मानी है।
उनका कहना है कि ईरान में युद्ध के बहाने तेजी से जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों और उसकी अगुवाई करने वालों को फाँसी की सजा दी जा रही है। कई मामलों में परिवारों से भी इसे छिपाया जा रहा है। दरअसल दुनिया उन धमाकों को सुन रही है, जो अमेरिकी मिसाइल-ड्रोन से हो रहे हैं, लेकिन उन खामोश मौतों को नहीं देख पा रही, जो चुपचाप ईरानी सरकार अपने राजनीतिक कैदियों को दे रही है।
ईरान मानवाधिकार संगठन ने भी इसकी पुष्टि की है। संगठनों का मानना है कि अब तक करीब 100 राजनीतिक कैदियों और प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है और 100 से ज्यादा इस कतार में खड़े हैं। संगठन के मुताबिक, इस्फहान की दस्तगेर्द जेल में ही 70 से अधिक राजनीतिक कैदियों को फाँसी दिया जाने वाला है।
संगठन का मानना है कि जनवरी 2026 में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों में से 24 लोगों को फाँसी दी जा चुकी है। इनमें 22 जुलाई को कानून स्नातक मेहदी खानेकी शामिल है। जिन लोगों को फाँसी दिया गया है, उनमें से अधिकांश 8 जनवरी को इस्फहान विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आरोपितों को निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया से भी वंचित रखा गया। न तो ट्रायल तरीके से हुआ और न ही सुनवाई और फाँसी की सजा मुकर्र कर दी गई।
संयुक्त राष्ट्र के फैक्ट चेक मिशन ने ईरानी अधिकारियों से कहा है कि वे इस्फहान के विरोध प्रदर्शन को लेकर फाँसी की सजा पाए 10 नौजवानों की फाँसी को तुरंत रोके। मिशन ने 19 जुलाई को 2 युवकों को दी गई फाँसी की भी कड़ी निंदा की है। ये लड़के थे 18 वर्षीय एस्फंदियारी और 23 वर्षीय अफगान नागरिक गोल मोहम्मद मोहम्मदी।
मिशन की जानकारी के मुताबिक, 10 लोगों में से 2 के परिजनों को मुलाकात के लिए बुलाया गया है। इसका मतलब है कि जल्द ही उन्हें भी फाँसी दिया जाएगा।

विरोध प्रदर्शन के सारे मामले निपटा दिए गए- प्रॉसिक्यूटर जनरल

28 दिसंबर 2025 को ईरानी इस्लामिक सत्ता के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को अब फाँसी दिया जा रहा है। मार्च 2026 में सबसे पहले तीन युवकों को फाँसी दी गई। इनपर सुरक्षाकर्मियों की हत्या का आरोप था। इसके बाद अप्रैल 2026 में तेहरान के बासिज अड्डे पर कथित हमले के आरोप में 4 युवकों को फाँसी दी गई।
संयुक्त राष्ट्र के फैक्ट चेक मिशन को आशंका है कि फाँसी की सजा में और बढ़ोतरी होगी, क्योंकि 15 जुलाई 2026 को ईरान के ज्यूडिशरी के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई ने मामले की जल्दी सुनवाई का निर्देश दिया। इसके बाद तेहरान के प्रॉसिक्यूटर जनरल अली सालेही ने 2025-26 में हुए विरोध प्रदर्शनों के सारे मामले निपटा दिए जाने का ऐलान किया। ईरान के आधिकारिक ऐलान के बाद दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन एक्टिव हो गए हैं और ईरान के क्रूरता का विरोध कर रहे हैं।

जून में 100 से ज्यादा लोगों को दी गई फाँसी

आर्टिकल 19 के मुताबिक, ईरान में जून में ही 109 लोगों को फाँसी दी गई, जिनमें 3 महिलाएँ शामिल थी। यह आंकड़ा पिछले साल जून से 10 फीसदी ज्यादा है। संगठन के मुताबिक इनमें से केवल 7 फाँसी दिए जाने की आधिकारिक जानकारी दी गई, बाकी का खुलासा भी नहीं किया गया। यहाँ तक कि कम से कम 12 परिवारों को अपने सदस्यों को फाँसी दिए जाने की खबर बाद में दी गई। कई लोगों को तो स्थानीय मीडिया से ये चला कि उनके परिवार के सदस्य को फाँसी दी जा चुकी है।
एएफपी के मुताबिक, साइंटिस्ट वाहिद बनियामेरियन के परिवार को फाँसी की जानकारी बाद में मिली, उस वक्त परिवार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार अर्जी पर सुनवाई का इंतजार कर रहा था।

युद्ध की आड़ में गिरफ्तारी भी जोरों पर

हाल के महीनों में ईरान में जिस तरह से फाँसी की सजा तेजी से अमल की जा रही है। उसी तरह छात्र नेताओं, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सोशल मीडिया एक्टिविस्टों, विपक्षी दलों के समर्थकों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत गिरफ्तार किए जाने के मामले में काफी वृद्धि हुई है।
सरकार का कहना है कि ये लोग विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर देश में अस्थिरता पैदा कर रहे थे। ईरान इन लोगों को इजरायल और अमेरिका के जासूस, प्रतिबंधित पीएमओआई और एमईके जैसे संगठनों के सदस्य, ‘मोहारेबेह’ यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ना और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर धड़ाधड़ कार्रवाई कर रही है। वहीं मानवाधिकार संगठन इसे असहमति दबाने की कार्रवाई बताते हैं।
मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि आरोपों के पर्याप्त सार्वजनिक सबूत नहीं दिए गए, मुकदमे बहुत जल्दी पूरे किए गए, आरोपियों को स्वतंत्र वकील नहीं मिला, यहाँ तक कि जुल्म के दम पर गुनाह कबूल कराए गए।
सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के दौरान ईरानी सत्ता ने इंटरनेट और मीडिया पर कड़ा नियंत्रण रखा। कई वेबसाइटें ब्लॉक की गईं, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध बढ़े, इंटरनेट की गति कम की गई या कुछ क्षेत्रों में बंद कर दिया गया, लोगों को मीडिया खास कर विदेशी मीडिया के साथ संपर्क नहीं रखने को कहा गया और ऐसे लोगों पर पैनी नजर रखी गई जो मीडिया से बात कर सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इससे ‘फर्जी खबरों’ और ‘दुश्मन के साइबर अभियान’ को रोका जा सकता है।
ईरान ने दर्जनों लोगों पर आरोप लगाया कि वे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर रहे थे और सैन्य ठिकानों की जानकारी दे रहे थे। यहाँ तक कहा गया कि ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी इजरायल के ड्रोन हमलों में इनलोगों ने मदद की है। ऐसे कुछ मामलों में लोगों को फाँसी की सजा हुई है। ईरानी सरकार इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताती है।
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठन लगातार कह रहे हैं कि ईरान में न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है। आरोपितों की बंद कमरे में सुनवाई हुई, परिवारों को समय पर जानकारी नहीं दी गई, अपील का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, कुछ मामलों में जबरदस्ती और यातना देकर दबाव बनाया गया और सजा दी गई। हालाँकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि उसकी न्यायिक प्रक्रिया देश के कानूनों के अनुसार चलती है।
ईरान लगातार देश में भय का माहौल बना रहा है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ईरानी विश्वविद्यालयों में निगरानी बढ़ी है, सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और बुद्धिजीवियों पर दबाव काफी है। यही वजह है कि कई राजनीतिक कार्यकर्ता देश छोड़कर चले गए हैं।

ईरान ऐसा क्यों कर रहा है

ईरान को जानने वाले विश्लेषकों के अनुसार, ईरानी सत्ता अपने राजनीतिक विरोधियों को कुचल कर देश में ऐसा माहौल बनाना चाहती है कि उसके खिलाफ कोई भी आवाज ऊँची करेगा तो उसकी आवाज को हमेशा हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाएगा। इजरायल- अमेरिका युद्ध ऐसा मौका है, जब देश में खामेनेई की सत्ता के साथ विरोधी भी आ गए हैं। राष्ट्रवाद उफान पर है और प्रतिद्वदियों को खामोशी से निपटाने का इससे अच्छा सुनहरा मौका नहीं मिल सकता।
अमेरिका के साथ युद्ध के दौरान जनता को आवश्यक चीजों की कमी हो गई है। लगातार बमबारी को देखते हुए आंतरिक विद्रोह की आशंका है। वैसे भी कुछ महीनों पहले ही सत्ता विरोधी प्रदर्शन हुए थे। ऐसे में भय पैदा कर सत्ता विरोधी लहर को रोकना, साथ ही देश की सुरक्षा व्यवस्था और सत्ता प्रतिष्ठान पर अपना नियंत्रण मजबूत करना ईरानी सरकार का मकसद है। खामेनेई की सत्ता को विदेशी खुफिया एजेंसियों की घुसपैठ का डर है।

गोवा के CJP प्रोटेस्ट में उमर खालिद का पोस्टर, पुलिस ने मोहम्मद दानिश को आजाद मैदान से पकड़ा: BJP कार्यकर्ताओं ने की एक्शन की माँग


गोवा की राजधानी पणजी स्थित आजाद मैदान में शनिवार (25 जुलाई 2026) की शाम को माहौल उस समय अचानक गरमा गया, जब पुलिस ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक युवक को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा पकड़े गए इस युवक की पहचान मोहम्मद दानिश के रूप में हुई है, जो प्रदर्शन के दौरान हाथ में विवादित पोस्टर लेकर जेल में बंद उमर खालिद के समर्थन में नारेबाजी कर रहा था।

दरअसल, आजाद मैदान में लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन के समर्थन में और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान छात्र आंदोलन की आड़ में देश विरोधी मामलों के आरोपितों का महिमामंडन (Glorification) होते देख पुलिस तुरंत हरकत में आई और युवक को अपनी कस्टडी (Custody) में ले लिया।

यह पूरी घटना शाम लगभग 7 बजे की है, जब आजाद मैदान में प्रदर्शनकारी जमा होकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच भीड़ में मौजूद मोहम्मद दानिश नाम का युवक एक पोस्टर हाथ में लहराते हुए दिखाई दिया। इस पोस्टर पर स्पष्ट शब्दों में ‘फ्री उमर खालिद, शरजील इमाम, भीमा कोरेगाँव 16’ लिखा हुआ था। इस तरह के पोस्टर दिखने से वहाँ मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया।

बिना आईडी के घूम रहा था दानिश

मैदान पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब इस पोस्टर को देखा, तो वे तुरंत युवक के पास पहुँचे और उससे उसके संबंध में पूछताछ शुरू कर दी। अधिकारियों ने उससे उसकी पहचान साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज (identity document) दिखाने को कहा, लेकिन वह नाकाम रहा।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब युवक से पहचान पत्र माँगा गया तो उसने साफ मना कर दिया कि उसके पास कोई आईडी (ID) नहीं है।

मामले की जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले वहाँ मौजूद कुछ स्थानीय पत्रकारों ने उस युवक को घेरा और पोस्टर के बारे में सवाल-जवाब किए। इसके तुरंत बाद आजाद मैदान में तैनात पुलिस बल के जवानों ने हस्तक्षेप किया और उससे उसका पहचान पत्र दिखाने को कहा। हालाँकि उस व्यक्ति ने अधिकारियों से कहा कि वह उस समय कोई भी पहचान पत्र साथ लेकर नहीं चल रहा है।”

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया, “मैदान में किसी भी तरह की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था (Law & Order) की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए हम उस व्यक्ति को तुरंत पणाजी पुलिस स्टेशन ले आए, जहाँ उससे विस्तार से पूछताछ की जा रही है।” इस पूरी कार्रवाई का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें पुलिस अधिकारी युवक से उसका पहचान पत्र माँगते हुए दिख रहे हैं।

उधर जैसे ही इस घटना की जानकारी फैली, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता पणजी पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्र हो गए। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना दिया और माँग की कि ‘फ्री उमर खालिद’ के पोस्टर लहराने वालों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

पणजी में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर कई FIR दर्ज

पणजी में इस तरह के अनाधिकृत प्रदर्शन को लेकर पहले भी पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। जिसमें गोवा पुलिस ने बिना अनुमति के निकाली गई सीजेपी की एकजुटता रैली को लेकर अज्ञात समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बीते सोमवार की शाम सैकड़ों की संख्या में लोग मिरामार सर्कल पर जमा हुए थे और वहां से मार्च निकालते हुए आजाद मैदान पहुँचे थे। बाद में जाँच में खुलासा हुआ कि आयोजकों ने इस प्रदर्शन के लिए स्थानीय प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति (Prior Permission) नहीं ली थी।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों 2020 में खालिद का अहम रोल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र और पूर्व सिमी (SIMI) सदस्य के बेटे उमर खालिद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 14 सितंबर 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर गैर-कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है। फरवरी 2020 में भड़के इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी।

पुलिस जाँच के अनुसार, खालिद इस हिंसा की बड़ी साजिश (Conspiracies) के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सड़कों को जाम करने और हिंसा भड़काने की योजना बनाई थी। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि उसने जरूरी इंतजामों पर चर्चा करने के लिए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और सह-आरोपी खालिद सैफी से मुलाकात की थी और जाँच के दायरे में शामिल संगठनों से भी उसके संबंध थे।

खालिद ने यह कहकर मुसलमानों को दंगे करने, सड़कें रोकने और लोगों को परेशान करने के लिए इकट्ठा किया था कि नया कानून ‘मुसलमानों के खिलाफ’ है। उसने ‘चक्का जाम’ में महिलाओं और बच्चों को भी शामिल करने की योजना बनाई थी।

विदेशी पैसे से भारत को बांटने और जलाने की बड़ी साजिश; विदेशी टूल किट, विदेशी खाना, विदेशी प्रदर्शनकारी


पिछले दो-तीन महीनों से सोशल मीडिया में अचानक उन खबरों की बाढ़ आ गई थी, कि अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खराब समय आने वाला है। वो 2026 में सत्ता से बाहर हो जाएंगे। इस तरह की तमाम बातें हो रही थीं। दरअसल ये बातें उस टूल किट से निकल रही थीं, जो विदेशों में रची जा रही थी। नागपुर के फैजल खान का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें कहा गया है कि 2022 श्रीलंका, 2024 बंग्लादेश, 2025 नेपाल, अगर जल्दी कुछ नहीं किया तो 2026 कहीं इंडिया…। दिल्ली में जो प्रदर्शन हो रहा है, उसी टूल किट का अगला कदम है।

 

इतना सामान बिना फंडिंग के नहीं आ सकता
विदेशी टूल किट की पुष्टि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का अमेरिका से भारत आना, सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल पर बैठना, 20 जुलाई का प्रदर्शन, हिंसा और उसके बाद की घटनाओं ने कर दी हैं। यह प्रदर्शन पूरी तरह विदेशी टूल किट से संचालित हो रहा है। भारत को श्रीलंका, बंग्लादेश और नेपाल की तरह जलाने के लिए की पूरी तैयारी है।

अब प्रदर्शन को आगे जारी रखने के लिए बांग्लादेश, कतर, जर्मनी और अन्य देशों से खाने, पीने और अन्य आर्थिक मदद दी जा रही है।

मोदी की मौत का कामना, खाना बांटते प्रदर्शनकारी
अब आप देख सकते हैं कि 140 करोड़ जनता के निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौत की कामना करने वाले लोग उनकी तेरहवीं का खाना खिला रहे हैं। एक लड़की बड़ी खुशी के साथ बता रही है कि ये मोदी की तरहवीं का खाना है। अगर किसी को एन्जॉय करना है तो यहां आ सकता है।

बांग्लादेश से प्रदर्शनकारियों के लिए आ रहा खाना
अब सवाल है कि ये खाना कहां से आ रहा है और कौन दे रहा है? दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन विदेशों से संचालित हो रहा है। बांग्लादेश में बैठे लोग रात ग्यारह बजे जंतर-मंतर पर खाना भेज रहे है। जंतर मंतर पर देखा जा सकता है कि ऑन लाइन खाना ऑर्डर करने वाले एप्प स्विगी और ज़ोमैटो से खाना आ रहा है। ये खाना बांग्लादेश से आ रहा है।

कतर से आ रहा प्रदर्शनकारियों के लिए खाना
एक डिलीवरी बॉय ने जो खुलासा किया, वो हैरान करने वाला है। उसने कहा कि डिलीवरी धरना स्थल पर किसी को देने के लिए बोला गया है। ये तो कतर से किसी ने बोला है कि वहां पर ले जाकर दे दो। कई बार कतर से फोन आया था। धरना स्थल पर जो स्टूडेंट है, उनको देने के लिए बोला गया है। बहुत सारे ऑर्डर आते हैं। दिनभर यहां का चक्कर लगता है। कभी मुंबई से आता है, कभी कोलकाता से आता है। कहीं से भी आता रहता है।

जर्मनी, दुबई और सऊदी अरब से आ रहा खाना
एक डिलीवरी बॉय ने बताया, “अब तक दस ऑर्डर दे चुका हूं। सारे बाहर के, दूसरे कॉन्ट्री के ऑर्डर को दे रहा हूं। बात करता हूं तो कई कहता है, जर्मनी से हूं। कोई कहता है मैं दुबई (UAE) से हूं। कोई कहता मैं सऊदी अरब से हूं। कोई कहता है मैं गोवा से बात कर रहा हूं। आप वहां बच्चों को खाना दे देना। प्रोटेस्ट पर बैठे हुए सीजेपी वाले। उनको दे देना खाना जाकर। आलिया नाम के एक विदेशी मैडम ने खाना देने कहा।”

दुबई से एक ही व्यक्ति ने भेजा 2000 प्लेट खाना
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “ऑर्डर से खाना आ रहा है। ऑर्डर वाला खाना पकड़ाता है और चला जाता है। कितने लोग खाना भेज रहे हैं। विदेश से खाना आ रहा है। दुबई से 2000 प्लेट खाना एक ही बंदे ने भेजा आठ बार…लगातार खाना आ रहा है।”

विदेशों से आ रहा हद से ज्यादा खाना
विदेशों से हद से ज्यादा खाना आ रहा है कि प्रदर्शनकारी अब डिलीवरी बॉय को भी खिला रहे हैं। केएफसी का चिकन, बर्गर, पिज्जा, खाना दिया रहा है।

एक हजार से अधिक पिज्जा का ऑर्डर
एक हजार से अधिक पिज्जा का ऑर्डर दिया गया था। एक डिलेवरी बॉय ने कहा कि ऑर्डर मिलने के बाद ये एक हजार पिज्जा जंतर मंतर पर लेकर जा रहे हैं। लगातार लंच और डीनर के लिए पिज्जा की सप्लाई की जा रही है।

नेपाल से आया भारत को जलाने 
नेपाल के पोखरा से आए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि नेपाल में जला डाला, प्रधानमंत्री को भगा-भगाकर मारा, वहीं माहौल यहां पर होना चाहिए दिल्ली में भी। वहां पर देखा होगा कि प्रधानमंत्री को युवकों ने भगा भगा कर मारा है। और अपने हक उनसे मांगा है।

नेपाल से आकर भारत में सरकार बदलने की तैयारी
नेपाल को जलाने वाले कुछ नेपाली भारत को जलाने के लिए जंतर-मंतर पर आना चाहते हैं। उनका कहना है कि जंतर-मंतर को देखकर खून खौल रहा है। नेपाल की तरह इंडिया में भी सरकार चेंज होना चाहिए। हम लोगों को सपोर्ट करेंगे तो जंतर-मंतर पर आएंगे।

प्रदर्शन में शामिल विदेशी नागरिक द्वारा पीएम मोदी को गाली

भारतीय सेना को गाली देता हिन्दू भेष में अमेरिकी नागरिक

 

लंदन में पाकिस्तान समर्थित संगठन HFHR का प्रदर्शन
CJP के विरोध-प्रदर्शनों को लंदन के ‘हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स’ (Hindus for Human Rights) का समर्थन मिल रहा है। इस संगठन को पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा समर्थन दिया जाता है। लंदन में आयोजित इस प्रदर्शन में एचएफएचआर (HFHR) के राजीव सिन्हा ने भाग लिया और पूरे नैरेटिव को बदल दिया। उन्हें सीजेपी के विरोध-प्रदर्शनों में ‘मुसलमानों और ईसाइयों पर अत्याचार हो रहा है’ वाले अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए देखा गया।

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का दावा -CJP नेताओं के साथ की थी जूम बैठक
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में लिखा, “पैसे कहां से आ रहे हैं? साजिश क्या है? पिछले 20 दिनों में राहुल गांधी जी विदेश यात्रा में किन-किन लोगों से मिले? असली खिलाड़ी कौन?” उनका यह पोस्ट उस वायरल वीडियो के बाद आया है, जिसमें खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू CJP नेताओं के साथ कथित जूम बैठक और आर्थिक मदद का दावा करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

भारत को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने के लिए 10 करोड़ रुपये की मदद
वायरल वीडियो में पन्नू कथित तौर पर दावा करता है कि उसकी CJP नेताओं के साथ जूम बैठक हुई थी। वह यह भी कहता है कि ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) CJP को भारत को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने के मकसद से करीब 10 करोड़ रुपये (10 लाख डॉलर) की मदद देगा। वीडियो में पन्नू कथित तौर पर कहता है कि “दिल्ली और मोदी का पतन तय है।” इसके साथ ही वह यह भी दावा करता है कि सिर्फ सरकार बदलना समाधान नहीं है, बल्कि भारत का बंटवारा ही उसका मकसद है।