बांग्लादेश : कट्टरपंथ फैलाते-फैलाते यूनुस ने भर ली जेब, एक साल में 1.61 करोड़ टका बढ़ी संपत्ति: बीवी भी हुईं मालामाल


मुस्लिम कट्टरपंथियों के इशारे पर नाचने वाले उपद्रवियों को आंखें खोलनी चाहिए। उन्हें मिलती गोली, जेल या फिर जिस्मानी चोट, जबकि उनके आका अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश इसकी मिसाल है। ये हाल सभी जगह है। दंगों में मरता आम नागरिक है किसी कट्टरपंथी और उनके आकाओं के घर के परिंदे तक कुछ नहीं होता। मरती जनता ही है चाहे वह उपद्रवी ही क्यों न हो।   

बांग्लादेश चुनाव से दो दिन पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सलाहकारों की संपत्ति का ब्योरा जारी किया गया है कैबिनेट डिवीजन ने इसे मंगलवार को जारी किया इस ब्योरा के अनुसार 30 जून तक अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहाकार मोहम्मद यूनुस की कुल संपत्ति 15 करोड़, 62 लाख, 44 हजार और 65 टका है

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की संपत्ति में पिछले एक साल के दौरान बड़ी बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, जून 2024 में मोहम्मद यूनुस की कुल संपत्ति 14.01 करोड़ टका थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 15.62 करोड़ टका हो गई है।

यानी महज एक साल में उनकी दौलत करीब 1.61 करोड़ टका बढ़ गई। दिलचस्प बात यह है कि देश का नेतृत्व कर रहे यूनुस पूरी तरह कर्ज मुक्त हैं। यूनुस की कमाई में यह उछाल मुख्य रूप से बैंक बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), निवेश योजनाओं और विरासत में मिले शेयरों की वजह से आया है।

मोहम्मद यूनुस की वित्तीय संपत्ति अब 14.76 करोड़ टका है, जबकि विदेशों में मौजूद उनकी संपत्ति भी बढ़कर लगभग 64.73 लाख टका हो गई है। साथ ही, उनकी बीवी अफरोजी यूनुस की संपत्ति भी 2.11 करोड़ से बढ़कर 2.27 करोड़ टका हो गई है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नेताओं की संपत्ति सार्वजनिक करने की बढ़ती माँग के बीच ये आँकड़े सामने आए हैं।

एक साल पहले यह 14 करोड़, 13 लाख, 96 हजार और 73 टका थी. यानी, एक साल में मोहम्मद यूनुस की संपत्ति में 1 करोड़, 61 लाख, 4 हजार 392 टका की बढ़ोतरी हुई

उन्होंने कहा कि सेविंग्स सर्टिफिकेट को कैश कराने, सेविंग्स या टर्म डिपॉजिट में बढ़ोतरी, विरासत में मिले शेयर वगैरह की वजह से कुल संपत्ति बढ़ी

जानें यूनुस की पत्नी के पास कितनी संपत्ति

चीफ एडवाइजर की पत्नी अफरोजी यूनुस की कुल संपत्ति एक करोड़, 27 लाख, 63 हजार और 360 टका है यह पिछले साल दो करोड़, 11 लाख, 77 हजार, 278 टका था. इस तरह से उनकी संपत्ति में 84 लाख, 13 हजार और 914 टका की कमी आई है

प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक, संपत्ति किसी टैक्सपेयर के मालिकाना हक वाली अचल, चल, फाइनेंशियल और कैपिटल संपत्ति का जोड़ है

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का किया था वादा

उन्होंने अपने भाषण में यह भी बताया कि राज्य लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संविधान के आर्टिकल 77 में किए गए वादे के मुताबिक एक ओम्बड्समैन नियुक्त करने के लिए एक ऑर्डिनेंस बनाया जाएगा
उस साल 1 अक्टूबर को, अंतरिम सरकार के एडवाइजर और बराबर हैसियत वाले लोगों की इनकम और संपत्ति के खुलासे की पॉलिसी, 2024 जारी की गई थी
पॉलिसी में कहा गया है कि अंतरिम सरकार के एडवाइजर और बराबर हैसियत वाले लोग, जो सरकार या रिपब्लिक की सेवा में काम कर रहे हैं, हर साल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख के 15 वर्किंग डेज के अंदर कैबिनेट डिवीजन के जरिए चीफ एडवाइजर को अपनी इनकम और संपत्ति जमा करेंगे
अगर पत्नी या पति की अलग इनकम है, तो वह भी जमा करनी होगी चीफ एडवाइजर इस बयान को अपनी समझ के हिसाब से पब्लिश करेंगे

संपत्ति के ब्योरा नहीं देने पर आलोचना

लेकिन इसे अब तक पब्लिश न करने पर आलोचना भी हुई थी इस बारे में चीफ एडवाइजर के प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम ने सोमवार को कहा था कि अंतरिम सरकार के सलाहकारों के एसेट स्टेटमेंट एक-दो दिन में पब्लिश कर दिए जाएंगे
5 अगस्त, 2024 को हिंसक छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार गिरने के बाद, 8 अगस्त को प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी

प्रियंका गाँधी के उकसाने पर 20-25 कांग्रेसी सांसदों ने ओम बिरला के साथ चैम्बर में की गाली गलौज; कांग्रेस राजनीति नहीं सफेदपोशी गुंडागर्दी कर रही है


जिस तरह लोकसभा अध्यक्ष में जाकर गाली गलोच कर कांग्रेस किस गन्दी और घिनौनी सियासत कर रही है? क्या INDI गठबंधन कांग्रेस की इस हरकत के साथ है या विरोध में? पहले तो राहुल ही हंगामे के लिए बहुत था लेकिन अब प्रियंका भी आ गयी। यदि INDI गठबंधन ने इस हरकत को गंभीरता से नहीं लिया भविष्य में लोकसभा में कुछ भी अनहोनी हो सकती है। क्योकि कांग्रेस राजनीति नहीं सफेदपोशी गुंडागर्दी कर रही है।   

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार (11 फरवरी) को सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कांग्रेस के 20 से 25 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुसकर उनके साथ गाली-गलौज की है। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर के चेंबर में जाकर गाली गलौज की। इस दौरान उन्हें बहुत बुरा भला कहा। बता दें कि विपक्ष ने ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर पद से हटाने के लिए संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, "कम से कम 20-25 कांग्रेस MP लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। मैं भी वहीं था। स्पीकर बहुत नरम इंसान हैं, नहीं तो सख्त कार्रवाई होती। प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत सीनियर कांग्रेस नेता भी अंदर मौजूद थे, और वे उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहे थे।"

ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए जाने वाले प्रस्ताव पर वर्तमान बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन 9 मार्च को सदन में चर्चा कराई जा सकती है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने कहा, "संभावना है कि बजट सत्र के दूसरे भाग के पहले दिन, यानी 9 मार्च को ही लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।"

 

घटना की जानकारी दे रहे केन्द्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि ये लोग स्पीकर की बात नहीं मानते हैं। राहुल गाँधी कहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता। किरन रिजिजू ने कहा कि राहुल गाँधी अपनी मर्जी से जो भी मन करे वो बोलते हैं। ये सब रिकॉर्ड में है। लेकिन स्पीकर की परमिशन के बिना वे कैसे बोल सकते हैं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद स्पीकर बिरला से बात की है।

स्पीकर ओम बिरला के स्वभाव को लेकर उन्होंने कहा कि वे नरम दिल आदमी हैं, इसलिए कुछ नहीं किया। कोई दूसरा होता तो कठोर कदम उठाता और सजा देता। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता जैसे प्रियंका गाँधी और केसी वेणुगोपाल भी वहाँ मौजूद थे। इसके बावजूद ये सब हुआ। ये कोई तरीका नहीं है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि मामले का निपटारा होने तक बिरला आसन पर नहीं बैठेंगे। बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि वह विपक्ष के नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें।

विपक्ष ने बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा। विपक्ष ने बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।

इस बीच, खबर है कि ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस में कई कमियां पाई गई थी। इसके बाद खुद ओम बिरला ने इसमें सुधार करवा के कार्यवाही करने का निर्देश अपने सचिवालय को दिया। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि नोटिस में कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए चार जगहों पर साल 2026 के बजाय वर्ष 2025 लिखा गया था । इस आधार पर नोटिस को खारिज भी किया जा सकता था।

राहुल का ‘किताब कांड’ पड़ा उल्टा: क्या आंच शशि थरूर तक पहुंचेगी? पब्लिशर के बयान ने खोली पोल, अब FIR के फंदे में फंसी कांग्रेस, हिली राहुल की चूलें!


बर्बाद करने को एक ही उल्लू काफी है यहाँ INDI गठबंधन में उल्लुओं की कोई कमी नहीं अन्जामें इनकी मतमारी सियासत का क्या होगा? जनता को कब तक पागल बनाते रहेंगे ये महामूर्ख गैंग? CAA विरोध से लेकर अब 
पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ पर किए बबाल ने कांग्रेस समेत पूरे INDI गठबंधन को चारों खाने चित कर दिया। आखिर कौन पागल इन महामूर्खों को ऐसी सलाह दे रहा है? दरअसल भारत विरोधी विदेशी आकाओं के इशारों पर नाचने वाले INDI गठबंधन में देश में बढ़ती सोने और चांदी की कीमतें एवं महंगाई आदि समस्याओं पर सरकार को घेरने की बजाए उन मुद्दों से संसद का समय बर्बाद कर करदाताओं के धन को भी बर्बाद कर रहे हैं। आने वाले चुनावों में जनता को इन बिकाऊ पार्टियों का बहिष्कार कर इनको इनकी औकात दिखानी चाहिए।  
 

दिल्ली की सियासत में इन दिनों एक किताब ने ऐसा बवाल मचाया है कि कांग्रेस और लोकसभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। मामला है पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ का, जिसे लेकर संसद से लेकर सोशल मीडिया तक हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस किताब के कुछ हिस्सों का हवाला देकर सरकार पर हमला करने की कोशिश की। मगर यहीं पर खेल उल्टा पड़ गया।

दूसरे, क्या इस किताब से लगी आंच शशि थरूर तक भी पहुंचेगी? किताब कांड से दो दिन पहले ही थरूर की मल्लिकार्जुन खड़के और राहुल के साथ होती है। फिर सोशल मीडिया पर चर्चा है कि किताब का प्रेफरस शशि ने लिखा है, इसमें कितनी सच्चाई है, पुष्टि नहीं, यह जाँच में ही सामने आएगा।    

राजनीति में कहावत है- आधी-अधूरी जानकारी सेहत के लिए हानिकारक होती है, लेकिन कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के लिए यह सिर्फ सेहत नहीं, बल्कि कानूनी मुसीबत का सबब बनती दिख रही है। दरअसल में संसद में जिस किताब को ‘ब्रह्मास्त्र’ बनाकर राहुल गांधी सरकार पर वार कर रहे थे, अब उसी किताब के पब्लिशर ने उनके दावों की हवा निकाल दी है। पब्लिशर ने साफ कह दिया- किताब छपी ही नहीं है। पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर सबको चौंका दिया है। पेंगुइन ने साफ कहा कि किताब न तो अभी पब्लिश हुई है, न ही इसकी कोई कॉपी (डिजिटल या प्रिंट) जनता के लिए जारी की गई है।

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर कोई कॉपी कहीं घूम रही है, तो वह सीधा-सीधा कॉपीराइट का उल्लंघन है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर पब्लिशर ने किताब छापी ही नहीं, तो राहुल गांधी सदन में क्या लहरा रहे थे? क्या राहुल गांधी के पास किताब की कोई गैर-कानूनी कॉपी है? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में पहले ही कहा था कि किताब अभी पब्लिश नहीं हुई है, जिसे राहुल ने ‘झूठ’ करार दिया था। लेकिन अब पब्लिशर की सफाई ने राहुल गांधी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अब मामला सिर्फ राजनीतिक तू-तू मैं-मैं तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। जांच इस बात की हो रही है कि जो किताब अभी रक्षा मंत्रालय के रिव्यू में है और पब्लिश नहीं हुई, उसकी ‘टाइपसेट पीडीएफ’ इंटरनेट पर कैसे पहुंची? अगर राहुल गांधी उसी लीक कॉपी का इस्तेमाल कर रहे थे, तो उन पर कॉपीराइट एक्ट और आईटी एक्ट के तहत गाज गिर सकती है।

साफ है कि कांग्रेस जिस नैरेटिव के जरिए सरकार को घेरना चाहती थी, वह अब उसके अपने ही गले की फांस बन गया है। अब सोशल मीडिया पर तो जैसे मीम्स और आलोचनाओं की बाढ़ आ गई है। लोग राहुल गांधी को ट्रोल कर रहे हैं, तो कई लोग पूछ रहे हैं कि संसद को सर्कस क्यों बनाया गया? यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या राहुल गांधी ने देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी वाली किताब को गैर-कानूनी तरीके से हासिल किया? कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि उन पर ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ लगना चाहिए। कुछ लोग इसे भारतीय लोकतंत्र का सबसे घटिया विपक्ष का सबसे घिनौना चेहरा बता रहे हैं। आप भी देखिए लोग सोशल मीडिया पर किस तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं…


क्या जनरल नरवणे अपनी किताब पर फसाद की जड़ हैं? प्रकाशित होने से पहले राहुल गांधी को किसने दी?

सुभाष चन्द्र

मदारी बन राहुल गाँधी ने अब तक जितने भी बेसिर पैर के मुद्दे उठाए हैं लगभग सभी में मात खाई है, जिसका फायदा बीजेपी को हुआ। INDI गठबंधन जिस तरह राहुल के बधुआ मजदूर बन साथ दे रहा है अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है। राहुल, सोनिया और प्रियंका ने तो कांग्रेस का जनाजा निकालने की कसम खाई हुई है। राहुल जब भी विदेशों में बैठे अपने आकाओं से मिलकर वापस आता है, कोई न कोई झुनझुना लेकर सबको गुमराह कर कांग्रेस का बेड़ागर्क कर रहा है। INDI गठबंधन गैंग बिना अक्ल के राहुल के पीछे नाचना शुरू कर देता है।  

ईंट का जवाब पत्थर से देने का समय आ गया है। मोदी सरकार को चाहिए की कांग्रेस के समय मोहम्मद यूनुस(Trade Fair Authority के तत्कालीन चेयरमैन) आदि परिवार के विरुद्ध प्रकाशित किताबों से बैन हटा देना चाहिए ताकि जनता ही नहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पता चले नेहरू-गाँधी परिवार में कितना गंद है।      

लेखक 
चर्चित YouTuber 
राहुल गांधी ने लोकसभा में जमकर गंदगी फैलाई है संसद की मर्यादा को तार तार करके। जनरल नरवणे की किताब “Four Stars of Destiny” के कुछ अंश पढ़ कर जो संसद के नियमों के विरुद्ध था। उसका आरोप रहता है सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर कब्ज़ा कर रही है, लोगो को बोलने नहीं दिया जा रहा और लोकतंत्र खतरे में। जबकि लोकसभा का ही उसने और कांग्रेस ने स्वयं अपहरण कर लिया, अराजकता फैला दी, जो चाहे वह बोला और प्रधानमंत्री मोदी की कुर्सी के पास 8 कलंकिनी पिशाचिनियां भेजकर उन्हें बोलने तक से रोक दिया। इस तरह लोकतंत्र की तो खुद राहुल और कांग्रेस ने हत्या कर दी और रोज करते हैं

प्रश्न यह उठता है कि राहुल गांधी के पास पुस्तक कहां से आई जिसे वह लोकसभा और उसके बाहर लहरा कर दिखा रहा था। मुझे नहीं पता इस बात में कितनी सच्चाई है लेकिन एक यूट्यूब चैनल “Alternate Media” पर गायत्री देवी को इंटरव्यू में शिवम् चौधरी ने कहा कि जनरल नरवणे ने वह पोस्टल राहुल गांधी को पढ़ने को दी थी लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वो उसे लोकसभा में खोल कर पढ़ देगा। 

अगर यह सच है तो जनरल नरवणे प्रथम अपराधी की श्रेणी में आते हैं लेकिन एक तथ्य यह भी है कि जो पुस्तक उन्होंने राहुल को दी, वह किसने छापी जिसे छपने की अनुमति अभी तक रक्षा मंत्रालय ने नहीं दी। एक किताब राहुल को देने का मतलब है उनके पास केवल प्रति तो नहीं होगी इसलिए जाहिर है किसी ने तो पुस्तक छाप दी बिना सरकार की अनुमति के

गूगल सर्च पर एक जगह साफ़ बताया गया है कि “The Publisher of former Indian Army Chief General Manoj Mukund Narvane’s memoir, ‘Four Stars of Destiny,’ is  Penguin Random House India” - Publication delays due to security reviews by the Ministry of Defence.

गूगल सर्च में ही दूसरी जगह अन्य जानकारी में कहा गया कि “Penguin Random House India confirmed they have not published the book and that it remains under review, stating that no copies —in print or digital form—were released by them”. 

गूगल सर्च में तीसरी जगह जानकारी देता है कि “Penguin Random House, the publishers, stated that the book has not been released, published, or distributed by them”. 

इसका मतलब यह भी निकलता है कि पेंगुइन ने पुस्तक छाप तो दी है लेकिन release, publish, या distribute नहीं की गई है। 

मामला साफ है पुस्तक कहीं न कहीं से तो राहुल गांधी के पास पहुंची है। जनरल नरवणे से, Penguin Publishers से या फिर रक्षा मंत्रालय में ही किसी ने खेल किया जिसने पुस्तक की Manuscript को गोपनीय नहीं रखा

 

दिल्ली पुलिस को फुर्ती दिखानी चाहिए और सबसे पहले प्रकाशन के मालिक को गिरफ्तार करना चाहिए और उसका स्टॉक चेक करके देखना चाहिए कि छापी हुई पुस्तकों में से कितनी गायब हैं। राहुल गांधी को भी गिरफ्तार कर पूछना चाहिए कि उसे किताब किसने दी और जनरल नरवणे को भी Interrogate करना चाहिए कि उनकी बातें राहुल गांधी तक कैसे पहुंची। 

जनरल नरवणे को कानूनी प्रक्रिया से छूट नहीं है और उन पर कोर्ट मार्शल भी हो सकता है। कभी कभी मुझे शंका होती है कि इस फसाद के पीछे कहीं जनरल नरवणे ही तो नहीं हैं। जनरल नरवणे 30 अप्रैल 2022 को रिटायर हुए और उसके 6 महीने बाद 28 सितंबर, 2022 को जनरल अनिल चौहान को CDS बनाया गया। हो सकता है जनरल नरवणे के दिल में CDS न बनाए जाने का मलाल हो जिसकी वजह से उन्होंने ही यह रायता फैलाया हो जिसके लिए राहुल गांधी उत्तम व्यक्ति को चुना उन्होंने 

इन सब पर  Official Secrets Act (OSA), 1923 में केस दर्ज होना चाहिए जिसके अनुसार any person, including military personnel, who compromises national security, shares classified information, or engages in spying can face up to 14 years in prison.

राष्ट्रीय सुरक्षा के इस विषय को इतनी गंभीरता से लेना चाहिए कि कोई भी दोषी हो, उसे छोड़ना नहीं चाहिए। अभी गौरव गोगोई और उसकी पत्नी के पाकिस्तान से रिश्ते भी कटघरे में हैं

जिस किताब से राहुल गाँधी फैला रहे ‘चीनी प्रोपेगेंडा’, वह अब तक किसी भी फॉर्मेट में नहीं छपी: पब्लिशर ‘पेंगुइन’ ने दिया स्पष्टीकरण, सार्वजनिक कॉपियों पर कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी; पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे खामोश क्यों?

पब्लिशर 'पेंगुइन' ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की किताब पर स्पष्टीकरण देते हुए बयान जारी किया (फोटो साभार: IndiaToday/X)
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की जिस ‘फोर स्टार ऑफ डेस्टिनी’ किताब को संसद में दिखाया, वह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। यह स्पष्ट तौर पर किताब की पब्लिकेशन कंपनी ‘पेंगुइन रेंडम हाउस इंडिया’ ने आधिकारिक तौर पर दी है। इस मामले में दिल्ली पुलिस भी FIR दर्ज कर चुकी है।

पब्लिशर ने यह भी कहा कि न ही सिर्फ किताब, बल्कि अब तक किताब की कोई भी कॉपी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। पब्लिशर ने कहा कि जो भी कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, वह गैर-कानूनी है। यह बयान सोशल मीडिया पर किताब के कुछ अंशों की वैधता पर सवाल उठाने जाने के बाद सामने आया है। इसी के चलते पिछले हफ्ते संसद में खूब हंगामा भी हुआ था।

ऐसे में सवाल यह भी होता है कि नरवणे की जो किताब प्रकशित ही नहीं हुई, उस पर हो रहे विवाद और राहुल द्वारा उस किताब को लोकसभा में दिखाने पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की चुप्पी क्यों? बल्कि विवाद शुरू होते ही सबसे पहले इन्ही को FIR करवानी चाहिए थी। क्या इस साज़िश में नरवणे भी शामिल हैं? रक्षा मंत्रालय को पूर्व सेनाध्यक्ष से प्रश्न करना चाहिए।

      

पब्लिशर ‘पेंगुइन’ ने किताब के स्टेटस की दी जानकारी

किताब के पब्लिशर ‘पेंगुइन’ ने बयान जारी कर कहा, “हाल में इस पुस्तक को लेकर सार्वजनिक चर्चा और मीडिया रिपोर्टिंग सामने आई है। इस संबंध में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया यह स्पष्ट करना चाहता है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’, जो भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा है, उसके प्रकाशन के सभी अधिकार केवल पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के पास हैं।”

                                     ‘पेंगुइन’ द्वारा जारी किया गया बयान (फोटो साभार: X)

पब्लिशर ने बयान में आगे कहा, हम साफ तौर पर यह बताना चाहते हैं कि यह पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से इस किताब की कोई भी प्रति- चाहे वह प्रिंट हो या डिजिटल, न तो छापी गई है, न वितरित की गई है और न ही बिक्री या किसी अन्य रूप में सार्वजनिक की गई है।

पब्लिशर ‘पेंगुइन’ कानूनी कार्रवाई करेगा

विवाद पर पब्लिशर ने कहा, “अगर इस पुस्तर की कोई प्रति, पूरी या आंशिक रूप में, प्रिंट, डिजिटल, PDF या किसी अन्य फॉर्मेट में, ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, तो वह पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के कॉपीराइन का उल्लंघन है। ऐसे सभी फॉर्मेट को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।”

                                   ‘पेंगुइन’ द्वारा जारी किया गया बयान (फोटो साभार: X)

पब्लिशर ने इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही। उन्होंने कहा, “पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस पुस्तर के अवैध और अनाधिकृत प्रसार के खिलाफ कानून के तहत उपलब्ध सभी कानूनी कदम उठाएगा।” पब्लिशर ने स्पष्ट किया कि यह बयान प्रकाशक की स्थिति को बताने और रिकॉर्ड पर रखने के लिए जारी किया गया है।

TMC का विरोध पड़ा महँगा? पार्टी की गुंडागर्दी पर रील बनाने वाले इन्फ्लुएंसर की गिरफ्तारी पर विवाद

                                     शमिक अधिकारी (साभार: Instagram/yournonsane)
कोलकाता पुलिस ने 25 साल के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शमिक अधिकारी को यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। शमिक को ऑनलाइन ‘नॉनसेन’ के नाम से जाना जाता है। उन्हें गुरुवार (5 फरवरी 2026) को दमदम से पकड़ा गया। पहले उन्हें गलत तरीके से कैद करने, हमला करने और महिला की इज्जत से खिलवाड़ करने के आरोप में पकड़ा किया गया था, लेकिन बाद में 22 साल की पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने रेप का केस भी जोड़ दिया।

शमिक को शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को कोर्ट में पेश किया गया और अब उन्हें 16 फरवरी 2026 तक पुलिस कस्टडी में रखा गया है। पुलिस के मुताबिक, महिला ने शिकायत की थी कि शमिक ने उसे 2 फरवरी 2026 की रात करीब साढ़े नौ बजे से अगले दिन शाम 5 बजे तक अपने बेहाला वाले घर में जबरन रोका रखा।

इस दौरान महिला का आरोप है कि उसे मारा-पीटा गया, धमकाया गया। उसने कहा कि शमिक ने उसे गलत तरीके से छुआ, कपड़े खींचे और फिर जबरन यौन हमला किया।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता का मेडिको-लीगल टेस्ट एमआर बांगुर अस्पताल में हुआ। एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसका बयान दर्ज किया और इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की रेप वाली धारा FIR में जोड़ी गई। पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान मिले और वह काफी आघात में थी, इसलिए शिकायत करने में देरी हुई।

पुलिस ने आगे कहा कि शमिक ने पीड़िता को अश्लील फोटो भेजकर धमकाया था। जाँचकर्ताओं के मुताबिक टावर लोकेशन से पता चला कि शिकायत में बताए समय पर दोनों आरोपित और पीड़िता अपराध वाली जगह पर मौजूद थे।

शमिक की तरफ से कहा गया कि दोनों पुराने दोस्त हैं और लंबे समय से जानते हैं। उस रात गलतफहमी हुई थी, लेकिन कोई जबरदस्ती नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जाँच में कुछ बचा ही नहीं है तो पुलिस कस्टडी की क्या जरूरत है।

वायरल रील जिसने छेड़ दी राजनीतिक बहस

शमिक कोई आम इंफ्लुएंसर नहीं हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 4.20 लाख और फेसबुक पर 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। लेकिन राजनीतिक सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@yournonsane’ पर 21 जनवरी को एक रील पोस्ट की। पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले की बात है।

यह रील वायरल हो गई, 30 लाख से ज्यादा व्यूज और 3.5 लाख से ज्यादा लाइक्स आए। इसमें शमिक ने टीएमसी सरकार पर तीखा हमला किया था। वीडियो में वे खुद को आम वोटर दिखाते हैं जो वोट डालने जा रहा है। वहाँ एक लोकल टीएमसी गुंडा वोटरों को सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को वोट देने का दबाव डालता है और नहीं मानने पर धमकी देता है।

वीडियो में आगे राज्य की स्थिति दिखाने वाले फ्लैशबैक थे। इसमें 26 हजार सरकारी टीचर्स की नौकरी जाने और उसका भावनात्मक असर दिखाया गया। रात में अकेली चलती महिला को कुछ लोग पीछे चल रहे हैं।

रील में आरजी कर रेप-मर्डर केस का भी जिक्र था। उस केस में कोलकाता कोर्ट ने दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई और राज्य सरकार को पीड़िता के माता-पिता को 17 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया, हालाँकि पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं।

वीडियो ने सीधे सत्ताधारी सरकार को निशाना बनाया और चुनाव से ठीक पहले आया, इसलिए कई लोगों ने इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना। वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आने लगीं।

TMC ने BJP से लिंक का किया दावा

रील वायरल होने के बाद कई टीएमसी लीडर्स और सपोर्टर्स ने दावा किया कि शमिक का बीजेपी से लिंक है। उनका कहना था कि वह सिर्फ कंटेंट क्रिएटर नहीं, राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।

TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने सोशल मीडिया पर कड़ा बयान दिया और शमिक को ‘बीजेपी यूट्यूबर’ कहा। पोस्ट में उन्होंने कहा कि वही शख्स जो पश्चिम बंगाल सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में नाकाम होने का आरोप लगा रहा था, अब खुद महिला की इज्जत से खिलवाड़ और मारपीट के केस में फंसा है।

दत्ता ने केस में दर्ज धाराओं का जिक्र किया और बताया कि पीड़िता ने करीब 12 घंटे कैद रखने, मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया है। एक विवादास्पद टिप्पणी में उन्होंने शमिक को बीजेपी आईटी सेल चीफ अमित मालवीय से जोड़ा और कहा कि महिलाओं का गलत इस्तेमाल करने वाले बीजेपी में शामिल हो जाते हैं।

अब टीएमसी की बात है कि यह सीधा-सादा क्रिमिनल मामला है और विपक्ष अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दे रहा है।

गिरफ्तारी पर उठे सवाल, झूठे मामले में फँसाने का शक

दूसरी तरफ बीजेपी सपोर्टर्स और कई इंफ्लुएंसर्स ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने इशारा किया कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई हो सकती है, खासकर क्योंकि शमिक की रील ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की थी।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स तो यहाँ तक कह रहे हैं कि यौन उत्पीड़न की शिकायत झूठी बनाई गई है ताकि उन्हें चुप कराया जाए। उनका तर्क है कि वायरल वीडियो के ठीक बाद और चुनाव से पहले गिरफ्तारी हुई, जिससे शक पैदा होता है।

बीजेपी आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ा हमला बोला। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल ‘तानाशाही शासन’ बन गया है जहाँ आलोचकों को झूठे और दुर्भावनापूर्ण FIR से निशाना बनाया जाता है।

मालवीय ने लिखा, “यह टीएमसी का शासन मॉडल है: अभिव्यक्ति की आजादी को दबाओ, आलोचकों को डराओ, पुलिस का इस्तेमाल करो और सत्ता में बने रहने के लिए प्रतिष्ठा बर्बाद करो। लेकिन बंगाल देख रहा है। और बंगाल चुप नहीं रहेगा। बीजेपी हर उस शख्स के साथ खड़ी है जो ममता बनर्जी के शासन का शिकार बना है।”

उन्होंने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ मिलकर हम डर को हराएँगे, सत्ता के दुरुपयोग को बेनकाब करेंगे और लोकतंत्र बहाल करेंगे। यह न्याय नहीं है। यह राजनीतिक उत्पीड़न है। और इसका अंत होगा।”

साथी इंफ्लुएंसर्स ने किया शमिक का समर्थन

शमिक को कुछ साथी कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स का भी समर्थन मिला है। एक एक्स यूजर ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बोलने वाले इंफ्लुएंसर्स के खिलाफ क्यों केस हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक आक्रोश क्यों नहीं होता।

समर्थकों का कहना है कि शासन और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके लिए कानूनी परेशानी नहीं होनी चाहिए। हालाँकि दूसरे लोग कहते हैं कि क्रिमिनल आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए और राजनीतिक बहस से अलग जाँच होनी चाहिए।

फिलहाल शमिक अधिकारी ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही और जाँच के नतीजे इस मुद्दे में बड़ी भूमिका निभाएँगे।

केस एक अपराध की शिकायत से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह राजनीतिक बहस बन गया है जो आरोपी पर लगे आरोपों के साथ-साथ अभिव्यक्ति की आजादी, राजनीतिक दुश्मनी और चुनाव के समय सोशल मीडिया की भूमिका पर सवाल उठा रहा है।

पाकिस्तान को भारत पर हमला कर देना चाहिए अगर वह समझता है कि भारत वहां आतंक फैला रहा है

सुभाष चन्द्र

पाकिस्तान ने उरी पर हमला किया, पुलवामा में आतंकी हमला किया और पहलगाम में धर्म पूछ  कर लोगों की नृशंस हत्या की तीनो बार आतंक का उत्तर भारत ने 10-15 दिन में पाकिस्तान में घुस कर दिया और हर बार उसका जबड़ा तोड़ा उन हमलों की और भारत के जवाब की तारीख देख सकते है। 

18 /9 /2016 उरी पर हमला,

September 28–29, 2016 (भारत की सर्जिकल स्ट्राइक)

14 फरवरी, 2019 पुलवामा हमला,

26 फरवरी, 2019 भारत की बालाकोट एयर स्ट्राइक 

22 अप्रैल, 2025 पहलगाम में हमला,

ऑपरेशन सिंदूर 7 - 10 मई, 2025 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अब बलूचिस्तान में BLA ने (BLA) ने 29 जनवरी, 2026 को  "Operation Herof 2.0" पाकिस्तान सेना को निशाना बनाते हुए किया और 250 पाकिस्तानी सैनिकों को 72 हूरों के पास भेज दिया एशिया कप का ट्रॉफी चोर मोहसिन नक़वी ने तुरंत कहा बलूचिस्तान के आतंक के पीछे भारत का हाथ है इसके अलावा भी जब कभी पाकिस्तान में आतंकी हमले उसके ही आतंकी करते हैं तब पाकिस्तानी नेता भारत को दोष देते हैं जबकि वह खुद भारत में अपने पालतू आतंकी भेजकर हमले कराता है और भारत में बैठे स्लीपर सेल्स से भी खुराफात कराता है

अभी 6 फरवरी को इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में शिया मुसलमानों की खदीजा तुल कुबरा मस्जिद में आत्मघाती आतंकी हमला हुआ जिसमें 30-35 लोग मारे गए और 170 से ज्यादा घायल हुए उसका दोष भी भारत के सिर मढ़ दिया पाकिस्तान ने जिसका भारत ने खंडन किया है ये हमला 20 सितंबर, 2008 को इस्लामाबाद के मैरियट होटल में हुए हमले जैसा बताया गया है मैरियट होटल में विस्फोटक से भरे एक ट्रक ने घुस कर धमाके किए थे जिसकी वजह से 60 लोग मारे गए थे और 250 से ज्यादा घायल हुए थे

पाकिस्तान से यह भी आरोप लगाया जाता रहा है कि भारत ही “अज्ञातों” (unknown gunmen) से हत्याएं करा रहा है अरे भाई, जितने अज्ञातों ने मारे हैं वे सब आतंकी थे और वो तुम्हारे ही थे, उन “अज्ञातों” से भारत का क्या लेना देना

भारत तो ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों की जड़ें ही काटना जानता है और एक एक आतंकी के परिवारों को ही एकसाथ ख़त्म करता है, उसे इक्का दुक्का आतंकियों की हत्या कराने की क्या जरूरत है

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस्लामाबाद का हमला मुल्ला मुनीर के कराया है क्योंकि वह अमेरिका के सामने अपने ऐसे हालात दिखा कर Gaza Peace Board में अपने सैनिक भेजने से बचना चाहता है क्योंकि उन सैनिकों को हमास से उसके हथियार छीनने के लिए लड़ना पड़ेगा जो न शाहबाज शरीफ चाहता है और न मुनीर बलूचिस्तान रगड़ रहा है जो पाकिस्तान संभल नहीं पा रहा रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने स्वीकार किया है कि हमारी सेना बलूचों को काबू करने में असमर्थ है - Asif stated that Baloch rebels possess rifles worth Rs 2 million (approx. 20 lakh) and thermal weapon sights worth $4,000-$5,000, saying "we don't have that rifle". 

उधर अफ़ग़ानिस्तान भी यदा कदा पाकिस्तान की सेवा कर रहा है और जब मर्जी ठोकता रहता है और POJK तो पहले ही बगावत पर उतारू है TTP पख्तूनिस्तान में पाकिस्तान का पिछवाड़ा लाल किए हुए है ईरान के खिलाफ अमेरिका से हाथ मिला कर मुनीर ने ईरान को खुला हाथ दे दिया और वो जब मर्जी पाकिस्तान में घुस सकता है क्योंकि ईरान का बॉर्डर पाकिस्तान से लगता है  

अब पाकिस्तान के पास पाकिस्तानियों को मूर्ख बनाने और उनका ध्यान भटकाने के लिए एक ही उपाय है कि वो बलूचिस्तान और इस्लामाबाद हमले का भारत से बदला लेने के लिए भारत पर या तो हमला कर दे और या भारत की तरह कोई सर्जिकल या एयर स्ट्राइक कर दे और भारत को सबक सिखा दे जैसे मोदी तुरंत हिसाब चुकता कर देता है उठो बढ़ो पाकिस्तानियों हिम्मत करो और भारत को ठोक दो अब कश्मीर मांगना बंद कर दो क्योंकि POJK को भी तुम्हारे अब्बा अमेरिका ने भारत का हिस्सा बता दिया 

ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा विपक्ष: लोकसभा स्पीकर को हटाने का नियम और कब-कब लाया गया प्रस्ताव

आखिर राहुल गाँधी के गुलाम बन INDI गठबंधन देश को कहां ले जाना चाहता है? वैसे लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला जो अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने जा रहे हैं उसके जिम्मेदार वे स्वयं हैं। लोक सभा में हंगामा कर रोज के करोड़ों रूपए बर्बाद करने वालों को सदन से बाहर नहीं करना। आखिर मार्शल किस लिए हैं? लोक सभा अध्यक्ष की अपेक्षा विधान सभा के अध्यक्ष हंगामा करने वालों के विरुद्ध मार्शल को बुलाकर उन सदस्यों को सदन से बाहर करते हैं। बिरला को हंगामा करने वाले सदस्यों को बाहर निकलवाकर सदन की कार्यवाही को चालू रखना चाहिए। जब तक ईंट का जवाब पत्थर नहीं दिया जाएगा उपद्रवी बाज़ नहीं आने वाले।   
लोकसभा में विपक्ष लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी को संसद में बोलने नहीं देने का आरोप विपक्ष लगा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान राहुल गाँधी पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे के अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए सरकार पर आरोप लगा रहे थे। उस वक्त स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए राहुल गाँधी को रोका। इस मुद्दे पर कई दिनों तक विपक्ष ने सदन को नहीं चलने दिया।

कांग्रेस इस बात से भी नाराज है कि जब महिला सांसदों ने पीएम की सीट को सदन में घेरा, तो स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि कोई अप्रत्याशित घटना घट सकती थी, इसलिए प्रधानमंत्री को सदन आने से उन्होंने रोका। लेकिन ऐसी घटनाएँ सदन में पहली बार हुई कि महिला सांसद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा को संबोधित नहीं कर पाए। इसकी वजह महिला सांसदों का इस तरह से पीएम की सीट को घेरना था। चर्चा यह है कि नरेंद्र मोदी पर हमले की सूचना ओम बिरला को कांग्रेस में इस घिनौनी हरकत के विरोधी सदस्यों ने दी थी।  

विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी और दूसरे प्रधानमंत्रियों पर आरोप लगाया। संसद में हंगामे के दौरान 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। सासंदों के निलंबन और महिला सांसदों द्वारा पीएम की सीट घेरने को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगे थे। इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी बोलना चाहते हैं, लेकिन बोलने की अनुमति नहीं मिली।

स्पीकर के खिलाफ ‘हटाने का प्रस्ताव’ लाया जाता है

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, उससे थोड़ा अलग होता है। इसमें लोकसभा स्पीकर को ‘हटाने का प्रस्ताव’ यानी मोशन ऑफ रिमूवल ऑफ स्पीकर लाया जाता है। यह संविधान की अनुच्छेद 94 सी के तहत लाया जाता है। इस अनुच्छेद में लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताई गई है।

लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश करने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना होता है। ये नोटिस लिखित होना चाहिए। इस प्रस्ताव पर कम से कम 50 सांसदों का हस्ताक्षर होना जरूरी है यानी कोई भी सांसद लोकसभा में खड़े होकर अपने दम पर स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव नहीं ला सकता। स्पीकर पर स्पष्ट और ठोस आरोप लगे हों। प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद इस पर सदन में चर्चा होती है और फिर सांसद वोटिंग करते हैं। इस दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं करते हैं, बल्कि डिप्टी स्पीकर या सदन का वरिष्ठ सदस्य सदन की अध्यक्षता करते हैं।

हटाने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत

लोकसभा में प्रस्ताव सदन में उपस्थित सांसदों द्वारा बहुमत से पास होना जरूरी है, कोई दो-तिहाई बहुमत की जरूरत नहीं होती। स्पीकर को हटाने के लिए सिर्फ बहुमत की जरूरत होती है। जितने सांसद वोट दे रहे हों, उनका 50 फीसदी से एक ज्यादा जरूरी है।

अगर प्रस्ताव पास हो जाता है तो तुरंत ही स्पीकर पद से हट जाता है। वह सांसद बना रहता है, लेकिन स्पीकर नहीं और फिर सदन को दूसरा स्पीकर चुनना होता है।

स्पीकर को हटाने के लिए आज तक कभी वोटिंग नहीं हुई

सदन में स्पीकर को हटाने के लिए कई बार नोटिस दिया गया है। सदन में प्रस्ताव पर बहस भी हुई है, लेकिन वोटिंग नहीं हुई है।

पहली बार 1954 में तत्कालीन स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस पर सदन में बहस हुई। विपक्ष ने उनपर कांग्रेस का पक्ष लेने का आरोप लगाया था। सदन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और वोटिंग हुई नहीं।

दूसरी बार लोकसभा स्पीकर डॉक्टर नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ 1967 में हटाने का प्रस्ताव पेश किया। इन पर कांग्रेस का पक्ष लेने का विपक्ष ने आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस वक्त भी मतदान नहीं हुआ।

तीसरी बार 8वीं लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड के खिलाफ विपक्ष ने 1987 में अविश्वास प्रस्ताव रखा। उस वक्त बोफोर्स को लेकर कांग्रेस सरकार पर विपक्ष हमलावर था। विपक्ष का आरोप था कि जाखड नियमों का हवाला देकर विपक्ष को बोलने से रोकते हैं और सरकार को बचाते हैं। इस प्रस्ताव पर भी वोटिंग की नौबत नहीं आई।

13वीं लोकसभा स्पीकर जीएमसी बालयोगी को हटाने के लिए विपक्ष ने नोटिस दिया। उस वक्त एनडीए की सरकार थी। 2001 में नोटिस दिया गया, लेकिन प्रस्ताव खारिज हो गई। उन पर आरोप था कि सरकार के पक्ष में स्थगन प्रस्ताव को वह खारिज कर देते हैं।

2011 में 15वीं लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें 2जी, सीडब्लूजी घोटालों को लेकर बहस में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। स्पीकर सरकार का बचाव कर रही हैं। इस नोटिस को भी खारिज कर दिया गया और वोटिंग तक बात नहीं पहुँची।

17वीं लोकसभा में 2020 में वर्तमान स्पीकर ओम बिरला ने कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष के जबरदस्त हंगामे पर विपक्षी सांसदों को निलंबित किया था। इसके विरोध में विपक्ष ने स्पीकर को हटाने का नोटिस देने की बात सार्वजनिक रूप से कीकांग्रेस लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने पर प्रस्ताव सदन में लाया ही नहीं जा सका।

भारत में रहते हुए भी पाकिस्तानी बॉस को रिपोर्ट कर रही गौरव गोगोई की पत्नी, भेजी कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट: जानिए- असम पुलिस की SIT ने क्या-क्या बताया; बेटा हिन्दू लेकिन लड़की ईसाई

                                                गौरव गोगोई और पत्नी एलिजाबेथ ( साभार-ABP)
कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई के पाकिस्तानी लिंक की जाँच असम स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी ने पूरी कर ली है। रिपोर्ट को 8 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक कर दी। इसमें लोकसभा में विपक्ष के डिप्टी लीडर और उनकी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए गए।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरा केस केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिए हैं, क्योंकि असम पुलिस के पास सीमित अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि ये लिंक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और इनकी विस्तृत जाँच की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी जाँच में जो खुलासे हुए हैं वे बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मौजूदा सांसद का शामिल होना, मामले को ज्यादा ‘गंभीर’ बनाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोगोई ने 2015 में नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में एक युवक के साथ जाकर हाई कमिश्नर अब्दुल बासित से मुलाकात की थी।

सीएम के मुताबिक, मैं सिंगापुर में था जब मुझे यह तस्वीर मिली कि हमारे असम के सांसद एक युवक के साथ पाकिस्तानी दूतावास गए थे। उन्होंने कहा कि आज तक कॉन्ग्रेस का भी कोई नेता गोगोई की तरह किसी प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तानी दूतावास नहीं गया।

सरमा के मुताबिक, एलिजाबेथ पहले US के पूर्व सीनेटर टॉम उडाल की सहयोगी थीं, जो भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े हैं। ये लोग मोदी सरकार समेत दुनिया भर में राष्ट्रवादी सरकारों को गिराना चाहते हैं।

सरमा ने इस मीटिंग की एक वायरल तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में लगा कि तस्वीर फोटोशॉप की हुई हैं, लेकिन बाद में पता चला कि यह तस्वीर असली थी। बताया जाता है कि इसके बाद अब्दुल बासित ने असम का दौरा किया, जो कोई इत्तेफाक नहीं था।

उन्होंने कहा कि एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के ‘संबंधों’ का भी उन्हें पता चला। जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, एलिजाबेथ ने 18 मार्च, 2011 से 17 मार्च, 2012 तक पाकिस्तान में LEAD पाकिस्तान नाम के एक पाकिस्तानी संगठन के लिए काम किया। इस दौरान, कथित तौर पर उनके अली तौकीर शेख के साथ करीबी रिश्ते बन गए, जिन्हें CM सरमा ने पाकिस्तानी आर्मी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और देश के प्लानिंग कमीशन से कनेक्शन रखने वाला ‘पाकिस्तानी एजेंट’ बताया।

सरमा के मुताबिक, शेख सिर्फ पर्यावरणविद नहीं था, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति था जिसने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ‘भारत विरोध’ को बढ़ावा दिया। खासकर सिंधु जल संधि और दूसरे भारत-पाकिस्तान के झगड़ों को लेकर भारत की छवि धुमिल करने की कोशिश की। शेख ने 2010 और 2013 के बीच कम से कम 13 बार भारत का दौरा किया, जिससे भारत विरोधी गतिविधियों में उनकी भूमिका का शक जताया गया। सीएम सरमा ने कहा कि UPA सरकार ने उन्हें भारत आने से नहीं रोका, जबकि उनके भारत विरोधी कमेंट्स के बारे में सबको पता था।

सरमा ने SIT रिपोर्ट से कई चौंकाने वाली बातें बताईं, जिसमें दावा किया गया कि एलिज़ाबेथ का भारत ट्रांसफर हो गया था, लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद भी उन्हें पाकिस्तानी फर्म से सैलरी मिलती रही। इतना ही नहीं, ट्रांसफर से एक साल पहले उन्हें भारत आने का अपॉइंटमेंट लेटर जारी किया गया था।

SIT जाँच के मुताबिक, LEAD इंडिया को LEAD पाकिस्तान के तहत लाया गया, ताकि एलिजाबेथ की सैलरी पाकिस्तान से भारत ट्रांसफर की जा सके।

सरमा ने कहा कि LEAD पाकिस्तान सीधे एलिजाबेथ को सैलरी नहीं भेज सकता था, क्योंकि FCRA के तहत फंड ट्रांसफर सिर्फ भारतीयों को की जा सकती है और वह भारतीय नागरिक नहीं हैं। इसलिए उनकी सैलरी देने के लिए एक भारतीय संस्था LEAD इंडिया को फंड भेजा जाता था।

एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई, लीड इंडिया में भावना लूथरा के अंडर काम करती थीं, जिनसे SIT ने इस केस के सिलसिले में पूछताछ की थी। लीड इंडिया के फाइनेंशियल रिकॉर्ड की जाँच से पता चला कि LEAD इंडिया को ऑर्गनाइज़ेशनल काम के नाम पर LEAD पाकिस्तान से फंड मिला था। असल में यह पैसा गोगोई की सैलरी के लिए था।

सरमा ने कहा कि एलिजाबेथ के पाकिस्तान में एक्टिव बैंक अकाउंट थे, लेकिन उसने SIT को अकाउंट की डिटेल्स बताने से मना कर दिया। एक और चौंकाने वाली बात यह थी कि उसकी सैलरी भारत में उसके सीनियर से बहुत ज़्यादा थी। जहाँ उसे ₹2,50,000 मिलते थे, वहीं भावना लूथरा की सैलरी ₹50,000 थी।

जाँच के अनुसार, गोगोई को FCRA के ज़रिए पाकिस्तान से कुल ₹82.41 लाख मिले। LEAD इंडिया को LEAD पाकिस्तान से ₹63.48 लाख मिले, जबकि सितंबर 2012 से नवंबर 2014 तक कुल ₹91.27 लाख मिले। इसमें से 90% रकम अकेले गौरव गोगोई की पत्नी को मिली।

इससे यह साफ हो जाता है कि LEAD इंडिया पूरी तरह से LEAD पाकिस्तान के अंडर था, यह एक अजीब अरेंजमेंट है क्योंकि आम तौर पर, इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन की कंट्री यूनिट्स का रैंक और स्टेटस बराबर होता है, और उन्हें रीजनल/ग्लोबल हेड्स चलाते हैं। लेकिन इस मामले में, एक लोकसभा MP की पत्नी पाकिस्तान के सीधे कंट्रोल वाले ऑर्गनाइज़ेशन के अंडर काम करती थी। सीएम ने इसे गंभीर मामला बताया।

जाँच के दौरान SIT ने यह एग्रीमेंट हाथ लगी। CM सरमा के मुताबिक, जब एलिजाबेथ पाकिस्तान से इंडिया ट्रांसफर हुई, तो वह इंडिया में काम करने वाली LEAD पाकिस्तान की ‘शैडो एम्प्लॉई’ बनी रही। उन्होंने कहा कि SIT ने LEAD इंडिया ऑफिस से पाकिस्तान से इंडिया में पैसे के फ्लो को दिखाने वाले डॉक्यूमेंट्स ज़ब्त किए हैं, और भावना लूथरा ने भी इसकी पुष्टि की है।

सरमा ने एक और सनसनीखेज आरोप लगाया कि एलिजाबेथ ने भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान को दी। इसमें शेख को भेजा गया 50 पेज का एक कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट भी शामिल है। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के सोर्स का जिक्र था। रिपोर्ट को कॉन्फिडेंशियल मार्क किया गया था। यह ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के सेक्शन 2 का सीधा उल्लंघन है।

पूछताछ के दौरान एलिजाबेथ ने माना कि उसने रिपोर्ट लिखी थी। CM के मुताबिक रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह है जिसमें एलिजाबेथ पर लो रिस्क, लो विजिबिलिटी रणनीति को बढ़ावा देने का आरोप है। इस रणनीति के तहत पाकिस्तानी एजेंटों को सलाह दी गई थी कि वे केंद्र सरकार के बजाय राज्य सरकारों और क्षेत्रीय राजनीतिक तनावों का फायदा उठाएँ। उन्होंने लिखा था कि PM मोदी के राज में केंद्र और राज्यों के बीच तनाव बढ़ेगा।

जब वह LEAD इंडिया में काम कर रही थीं, तो 6 बार इस्लामाबाद गईं। LEAD इंडिया छोड़ने और ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट में जुड़ने के बाद तीन बार फिर पाकिस्तान गईं। CM सरमा के मुताबिक, हर बार उन्होंने फ्लाइट के बजाय अटारी बॉर्डर के रास्ते का इस्तेमाल किया। SIT के मुताबिक, LEAD इंडिया की हेड भावना लूथरा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि एलिजाबेथ पाकिस्तान क्यों गईं।

SIT का एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई का खुलासा

  • सीनेटर टॉम उडाल के जरिए जॉर्ज सोरोस से लिंक
  • अली तौकीर शेख के अंडर LEAD पाकिस्तान में नौकरी
  • पाकिस्तानी बैंक अकाउंट की जानकारी देने से मना कर दिया
  • LEAD इंडिया के साथ पहले से तय नौकरी का कॉन्ट्रैक्ट (जॉइन करने से 18 महीने पहले जारी किया गया)
  • भारत में एंट्री आसान बनाने के लिए ‘शैडो नौकरी’ का इंतजाम
  • रिपोर्टिंग मैनेजर से 500% ज्यादा सैलरी और FCRA का उल्लंघन
  • पाकिस्तान से फंडिंग का सोर्स छिपाया
  • LEAD इंडिया मैनेजमेंट की तरफ से कोई निगरानी नहीं, सीधे पाकिस्तान को रिपोर्ट की गई
  • पाकिस्तान को कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट भेजना (5 अगस्त, 2014)
  • रिपोर्ट में सीक्रेट IB कम्युनिकेशन का जिक्र था
  • पाकिस्तानी एक्टर्स के लिए ‘लो रिस्क लो विज़िबिलिटी’ स्ट्रैटेजी की वकालत की गई
  • राज्य-लेवल पर बातचीत करने और केंद्र सरकार को बायपास करने की सलाह दी गई
  • खुफिया रिपोर्ट में केंद्र-राज्य के राजनीतिक तनाव का फायदा उठाया गया
  • अली तौकीर शेख के साथ नौकरी से पहले एक साथ 3 बार यात्रा
  • LEAD इंडिया में रहते हुए पाकिस्तान की 6 बार बिना इजाजत दौरा
  • ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट जॉइन करने के बाद पाकिस्तान के 3 और दौरे
मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई के बारे में भी बात की और कहा कि 2013 में अपने पहले लोकसभा चुनाव जीतने से 5 महीने पहले, गोगोई इजरायल की यात्रा के दौरान अपना पासपोर्ट खो जाने के बाद ज़मीनी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गए थे। CM सरमा ने पाकिस्तान पहुँचने पर गोगोई के सिंगल एंट्री वीजा को मल्टीपल-एंट्री में अपग्रेड करने और बॉर्डर पर झड़पों के बीच पाकिस्तानी शहरों में ISI के आकाओं से मुलाकात का आरोप लगाया।
CM के मुताबिक, गोगोई का वीजा सिर्फ लाहौर के लिए था, लेकिन पाकिस्तान पहुँचने के बाद, उनके वीजा को इस्लामाबाद और कराची तक के लिए बढ़ा दिया गया। यह एक्सटेंशन पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा लिखे गए एक लेटर के आधार पर किया गया था। CM सरमा ने कहा कि SIT ने वीजा लोकेशन बढ़ाने के लिए मंजूरी दिखाने वाला पासपोर्ट हासिल कर लिया है।

CM के मुताबिक, पाकिस्तान जाने के बाद गोगोई की पर्सनैलिटी पूरी तरह बदल गई और उन्होंने दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में न्यूक्लियर पावर प्लांट, यूरेनियम रिज़र्व, बॉर्डर सिक्योरिटी, डिफेंस हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, एयर पावर, घरेलू हथियार बनाने, जासूसी जैसे कॉन्फिडेंशियल मामलों से जुड़े पार्लियामेंट्री सवाल उठाए। उन्होंने नेशनल वॉटर मिशन स्ट्रेटेजी पर भी सवाल पूछे, जो एलिजाबेथ के काम के एरिया से जुड़ा मामला था।
CM ने एक इंटरव्यू का वीडियो क्लिप भी दिखाया, जिसमें गौरव गोगोई ने कहा था कि वह पाकिस्तान इसलिए गए थे क्योंकि उनकी पत्नी वहाँ काम कर रही थीं, लेकिन CM सरमा ने बताया कि उनकी पत्नी का उनके दौरे से एक साल पहले LEAD इंडिया में ट्रांसफर हो गया था।
हालाँकि गौरव गोगोई की बेटी ब्रिटिश नागरिक है, क्योंकि उसका जन्म लंदन में हुआ था। CM सरमा के मुताबिक उन्होंने अपने भारत में जन्मे बेटे का इंडियन पासपोर्ट सरेंडर कर दिया। उन्होंने दिल्ली में रीजनल पासपोर्ट द्वारा जारी किया गया सरेंडर सर्टिफिकेट दिखाया, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट 12 मई 2022 को सरेंडर किया गया था। CM सरमा ने इसे बहुत अफसोस की बात बताया कि असम के पूर्व CM तरुण गोगोई के बेटे ने अपने बेटे का इंडियन पासपोर्ट सरेंडर कर दिया।
CM ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि जब बेटे कबीर गोगोई के पास इंडियन पासपोर्ट था, तो उसका धर्म हिंदू लिखा था, लेकिन उसके ब्रिटिश पासपोर्ट में किसी धर्म का जिक्र नहीं है। दूसरी तरफ बेटी माया गोगोई के ब्रिटिश पासपोर्ट में उसका धर्म क्रिश्चियन लिखा है।
CM सरमा ने कहा कि उनके बेटे का ईसाई में धर्मांतरण हो रहा है और गौरव गोगोई अब अपने ही परिवार में धार्मिक अल्पसंख्यक हैं।
हिमंता सरमा ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा, “SIT ने सबूत दिया है कि तीन लोगों का पाकिस्तान से सीधा लिंक है— अली तौकीर शेख, एलिजाबेथ गोगोई और गौरव गोगोई। SIT रिपोर्ट देखने के बाद हमारे कैबिनेट मंत्री भी हैरान रह गए।”
उन्होंने आगे कहा कि शुरू में असम पुलिस की CID जाँच कर रही थी। उसमें जब गंभीरता का अंदाजा लगा तो इंटरपोल की मदद की जरूरत पड़ी और असम पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्लासिफाइड डेटा तक पहुँच की जरूरत थी। कैबिनेट ने 7 फरवरी को रिपोर्ट पर चर्चा की। कैबिनेट ने कॉन्फिडेंशियल बातों को छोड़कर इसके कुछ हिस्से को बताने की मंजूरी दी। कैबिनेट ने आगे की जाँच के लिए रिपोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी सवाल उठाया है कि गौरव गोगोई से शादी के इतने साल बाद भी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई ने अपना UK वीजा क्यों रखा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि उनके बच्चे भी ब्रिटिश नागरिक क्यों हैं और भारतीय नागरिकता के लिए कोई आवेदन क्यों नहीं किया गया है।

असम : कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा रैली में महिला नेता के सामने करते रहे अश्लील इशारे, हँसते रहे कांग्रेसी नेता

                               भूपेन बोरा अश्लील इशारा करते (साभार - एक्स/@Namami_Bharatam)
असम में राजनीतिक माहौल गरमाने के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा पर रैली के दौरान महिला नेता के सामने अश्लील हाथ का इशारा करने का आरोप लगा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

भूपेन बोरा पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान अनुचित हाथ का इशारा करते दिखे। उस समय कांग्रेस नेता गौरव गोगोई बस पर खड़े होकर जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वीडियो में दिखता है कि भूपेन बोरा, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया और कांग्रेस नेता मीरा बोरठाकुर से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान बोरा ने अपने दाहिने हाथ से बेहद आपत्तिजनक इशारा किया।

मीरा बोरठाकुर ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन बोरा ने इशारा जारी रखा। वहीं, देबब्रत सैकिया को इस दौरान मुस्कुराते हुए भी देखा गया।

मीडिया को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को इस घटना की कड़ी आलोचना की और सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक महिला के प्रति किया गया यह अश्लील इशारा पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह सम्मान की गंभीर कमी को दर्शाता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “अगर कांग्रेस सच में महिलाओं की गरिमा के लिए खड़ी है, तो उसे भूपेन बोरा को तुरंत पार्टी से निष्कासित करना चाहिए। इस तरह का व्यवहार राजनीति में स्वीकार्य नहीं है, खासकर उनके जैसे वरिष्ठ नेता से।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि वे कल्पना भी नहीं कर सकते कि राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने वरिष्ठ पार्टी नेताओं, जिनमें एक महिला नेता भी शामिल थीं, उनकी मौजूदगी में ऐसा इशारा किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ऐसे लोग महिला मामलों के मंत्री, सामाजिक मामलों के मंत्री बनने की सोच रखते हैं, यहाँ तक कि मुख्यमंत्री बनने के सपने देखते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इस तरह का अशोभनीय इशारा कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह कैबिनेट बैठक के बाद होने वाली अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर विस्तार से बात करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले को महिला आयोग के पास भेज दिया गया है और आयोग से इसे गंभीरता से संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा, हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों और डिजिटल पोर्टलों ने इस वीडियो को प्रसारित नहीं किया और कार्यक्रम के फुटेज से क्लिप को हटा दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह संभव है कि मीडिया की नजर इस घटना पर नहीं पड़ी हो।