यूएन वॉच रिपोर्ट में बेन सॉल पर गंभीर आरोप। (फोटो साभार - UNOG न्यूजरूम) दुनिया में अंतरराष्ट्रीय भिखारियों की कमी नहीं। भीख लो और भारत के खिलाफ बयानबाज़ी करो। आखिर UNO और मानवाधिकार वाले ऐसे लोगों को क्यों नहीं ब्लैकलिस्ट करते? या यूँ कहा जाए इन लोगों की मिलीभगत से भारत के विरुद्ध ये खेल खेला जा रहा है? अगर ये संस्थाएं ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर सकते UNO और Human Rights Commission को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए। फंडिंग पर गलत बयान देने से भारत में माहौल ख़राब हो गया होता उसका कौन जिम्मेदार होता? ऐसे लोग चाहे किसी भी पद पर हो भिखारी से भी बदतर हैं।
चीन जिस तरह चालें चल रहा है भारतीयों को हर चीनी उत्पाद का बहिष्कार करना चाहिए।
UN वॉच की एक रिपोर्ट ने आतंकवाद-रोधी मामलों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टियर बेन सॉल पर वैचारिक पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सॉल को चीनी सरकार से फंडिंग मिल रही है।
स्काई न्यूज के अनुसार, जिनेवा स्थित इस समूह की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सॉल में पश्चिम-विरोधी और इजरायल-विरोधी पक्षपात है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सॉल ने अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन अल-कायदा के वरिष्ठ सदस्य और आतंकवादी नेता अयमान मोहम्मद रबी अल-जवाहिरी की हत्या की निंदा की थी।
यूएन वॉच के कार्यकारी निदेशक हिलेल नोयर ने स्काई न्यूज से बात करते हुए कहा, “उन्हें एक कार्यकर्ता (एक्टिविस्ट) नहीं होना चाहिए, उन्हें एक अकादमिक होना चाहिए। हमें विद्वतापूर्ण दृष्टिकोण देखने को मिलना चाहिए।”
नोयर ने कहा “संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ को सबसे पहले हमास के आतंकवादियों का विरोध करना चाहिए, ईरान के इस्लामी शासन का विरोध करना चाहिए, लेकिन बेन सॉल ईरान के इस्लामी शासन और उसके आतंकवादी सहयोगियों की बातों को दोहराते हुए दिखाई देते हैं।”
“U.N. special rapporteur Ben Saul claims to be an ‘independent’ expert. But how can you be independent while receiving $150,000 from China? He gives a free pass to Beijing — and instead attacks America, the West, and Israel.”
रिपोर्ट का हवाला देते हुए नोयर ने कहा कि सॉल को चीनी कम्युनिस्ट शासन से 1,50,000 डॉलर प्राप्त हुए। उन्होंने यह भी कहा कि सॉल ने रिपोर्ट की सामग्री का कोई खंडन नहीं किया है। नोयर ने कई ऐसे संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों का नाम लिया, जिनके कार्यालयों को चीन से फंडिंग मिली है।
हिलेल नोयर ने स्काई न्यूज से कहा, “वह खुद को एक स्वतंत्र विशेषज्ञ बताते हैं। वह सिडनी में कानून के प्रोफेसर हैं और खुद को स्वतंत्र विशेषज्ञ कहते हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि जब उन्हें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से 1,50,000 डॉलर मिल रहे हैं, तो वह स्वतंत्र विशेषज्ञ कैसे हो सकते हैं? मैं स्पष्ट कर दूँ। कोई यह नहीं कह रहा कि यह पैसा उनकी निजी जेब में जा रहा है ताकि वह कोई फेरारी खरीद सकें, लेकिन यह उनके कार्यालय को जा रहा है। वही कार्यालय जिसने कभी भी चीन द्वारा आतंकवाद-रोधी कार्रवाई के नाम पर दस लाख उइगरों को शिविरों में रखने की निंदा नहीं की, जबकि यही वह विषय है जिसके वह विशेषज्ञ होने का दावा करते हैं।”
उन्होंने कहा कि जबरदस्ती के उपायों (कोअर्सिव मेजर्स) पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टियर एलेना दोहान के कार्यालय को रूस, चीन और कतर से 13 लाख डॉलर प्राप्त हुए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के एक अन्य विशेषज्ञ जॉर्ज कैट्रूगालोस का भी नाम लिया, जो संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के कार्यालय के अध्यक्ष हैं।
नोयर ने कहा कि उनके कार्यालय को चीन से 1,00,000 डॉलर मिले थे, उसी वर्ष जब उन्होंने एथेंस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पुस्तक के प्रचार के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया था।
UN वॉच ने संयुक्त राष्ट्र के कई विशेषज्ञों द्वारा चीन, कतर, रूस जैसे देशों से संदिग्ध फंडिंग प्राप्त करने और मानवाधिकारों के नाम पर विशेष वैचारिक हितों को बढ़ावा देने के कई मामलों को चिन्हित किया है। संगठन का आरोप है कि ये विशेषज्ञ आतंकवादी घटनाओं और इस्लामी आतंकवाद के पीड़ितों की स्थिति की अनदेखी करते हैं।
बेन सॉल समेत UN रिपोर्टर्स ने पहलगाम हमले पर भारत को घेरा
सॉल उन आठ संयुक्त राष्ट्र विशेष रैपोर्टियरों में शामिल थे, जिन्होंने पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय अधिकारियों द्वारा अपनाए गए आतंकवाद-रोधी उपायों को लेकर मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता व्यक्त करते हुए एक संयुक्त प्रेस बयान जारी किया था।
ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि संयुक्त राष्ट्र के इस विशेष विशेषज्ञ ने आतंकवादी हमले की निंदा तो की थी, लेकिन भारत के आतंकवाद-रोधी अभियानों को, जिनमें अस्थायी मीडिया प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाओं का निलंबन और 8000 सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक करना शामिल था, असंगत (डिसप्रोपोर्शनेट) और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन बताया था।
भारत की आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों को सामूहिक दंड (कलेक्टिव पनिशमेंट) बताते हुए संयुक्त राष्ट्र के रैपोर्टियरों ने दावा किया कि अधिकारियों ने संदिग्ध आतंकवादियों से जुड़े परिवारों के घरों, व्यवसायों और संपत्तियों को बिना किसी न्यायालयी आदेश या विधिक प्रक्रिया के मनमाने ढंग से ध्वस्त कर दिया।
UN वॉच की रिपोर्ट के बाद यह समझना आसान हो जाता है कि बेन सॉल, जिनसे आतंकवादी कृत्यों की निंदा करने की अपेक्षा की जाती है, पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई की आलोचना क्यों कर रहे थे।
किसी तरह संयुक्त राष्ट्र के रैपोर्टियरों ने असम और गुजरात में अवैध अतिक्रमण विरोधी अभियानों को भी पहलगाम हमले के बाद देशभर में चलाए गए कार्रवाई अभियान से जोड़ दिया। उनका तर्क था कि आतंकवाद से असंबंधित मुसलमानों को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उनका धर्म पहलगाम हमले के आरोपियों जैसा है।
जबकि असम और गुजरात में अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई लंबे समय से चल रही है, जिनमें मुख्य रूप से सरकारी जमीन पर कब्जा कर मजार या दरगाह बनाने वाले इस्लामवादी तत्वों तथा अवैध रूप से भूमि पर कब्जा करने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या शामिल हैं। ये अतिक्रमण-रोधी अभियान एक वर्ष से भी अधिक समय से जारी हैं।
हालाँकि इनका पहलगाम हमले से कोई संबंध नहीं था। गुजरात में पहलगाम हमले के कुछ दिनों बाद जो एकमात्र ध्वस्तीकरण अभियान चला, वह सरकार द्वारा चंडोला झील और उसके आसपास बने अवैध ढाँचों को हटाने के लिए था, जिसे अवैध बांग्लादेशियों का केंद्र माना जाता है। यह कार्रवाई भी गुजरात हाई कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद की गई थी।
इसके अलावा, यह दावा भी गलत बताया गया कि ‘निर्दोष कश्मीरी नागरिकों’ के घर गिराए गए। अधिकारियों ने घरों को ध्वस्त किया था, लेकिन वे निर्दोष नागरिकों के नहीं थे।
अधिकारियों ने केवल प्रमाणित आतंकवादियों के घरों को ही गिराया। सुरक्षा बलों ने विस्फोटकों का इस्तेमाल कर आतंकवादी शाहिद अहमद कुट्टे के शोपियाँ स्थित घर, कुलगाम में सक्रिय जिहादी जाकिर के घर, पुलवामा के मुरन में एहसान-उल-हक शेख के घर, जो 2018 में पाकिस्तान गया था और इसी वर्ष घाटी में घुसपैठ कर लौटा था, फारूक तीवड़ा के घर, जो 1990 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान चला गया था और कभी वापस नहीं लौटा, तथा लश्कर-ए-तैयबा के जिहादियों आदिल हुसैन ठोकर (बीजबेहड़ा, अनंतनाग) और आसिफ शेख (त्राल, पुलवामा) के घरों को ध्वस्त किया। लेख के अनुसार, इनमें से कोई भी व्यक्ति निर्दोष या शांतिप्रिय नागरिक नहीं था।
साभार: एक्स @SouleFacts ईरान के लिए छाती पीटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों और खुलकर मदद करने वालों अगर जरा भी शर्म बची है तो कहीं डूब मरो। जिन नमकहरामों के लिए तुमने मदद भेजी देखो तुम्हारे ही देश के झंडे को जलाया जा रहा है। क्या भारतीय झंडे के अपमान के लिए ईरान के लिए छाती पीट रहे हो और अपनी मेहनत की कमाई लुटा रहे हो? यहाँ तो बोलते हो हम गरीब हैं, मजलूम हैं और आतंकवाद को पालने वाले को मदद भेज रहे हो? क्या किसी ने ईरान उच्चायोग से विरोध जताया?
Devil is dead
Hamas commander Walid Haniyeh who roasted two Jewish newborns by putting them in a microwave, who killed a Christian tourist by ripping out her intestines after r@ping her on October 7 has been killed in an intelligence based operation. He was hiding as a barber. pic.twitter.com/RUOlo9Nkcd
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद भारत में कई कट्टरपंथियों ईरान के समर्थन में आवाज उठाई थी। सोशल मीडिया पर ईरान के पक्ष में पोस्ट किए गए, मदद की अपील की गई और कुछ लोगों ने आर्थिक सहायता भेजने की भी बात कही। लेकिन अब X पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो भारतीय यूजर्स के बीच नाराजगी की वजह बन गए हैं।
वायरल वीडियो में कुछ लोग भारत का झंडा जलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन्हें लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कई यूजर्स का कहना है कि भारत ने कभी ईरान पर हमला नहीं किया और न ही अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान का हिस्सा बना, फिर भी भारत का झंडा जलाना समझ से परे है।
Why they are Burning Flag of India ??
India never attacked Iran along with US and Israel??
This is why, you can never trust these Katuwas, their hate for India is natural, they just live here to destroy India internally. pic.twitter.com/lM6dtGDTbT
पहले वायरल पोस्ट में एक यूजर ने लिखा, “हिंदुओं और हिंदू धर्म से अब्राहमिक पंथों के लोग स्वाभाविक रूप से नफरत करते हैं।” ऐसे ही एक दूसरे पोस्ट में सवाल उठाया गया कि जब भारत ने ईरान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, तब आखिर भारतीय तिरंगे को क्यों जलाया जा रहा है।
Hindus and Hinduism is fundamentally hated by all Abrahamic cults.
यूजर ने कहा कि भारत कभी भी अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने वालों में शामिल नहीं रहा। एक अन्य पोस्ट में एक यूजर ने दावा किया कि ऐसे वीडियो साबित करते हैं कि भारत विरोधी मानसिकता रखने वाले लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पोस्ट में कहा गया कि भारत के प्रति नफरत कुछ लोगों की स्वाभाविक सोच बन चुकी है।
Indian flag is being burnt there and some people are showing sympathy for Iran. https://t.co/MwHuWk642N
ईरान और US ने एक-दूसरे पर हाल में किए हमले के बाद एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किए गए। इसके बाद अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला बंद करने और होर्मुज स्ट्रेट पर अपने विवाद को सुलझाने के लिए सहमत हो गए हैं।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए अमेरिकी मीडिया ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार (30 जून 2026) को कतर की राजधानी दोहा में बैठक करेंगे।
दरअसल होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया। US ने ऑयल टैंकरों और दूसरे जहाजों को धमकियाँ देने और अमेरिकी मिलिट्री साइट्स पर बमबारी के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया।
हालाँकि ईरान ने शुरुआती हमले से इनकार किया, लेकिन कुवैत और बहरीन में अमेरिकी मिलिट्री केन्द्र को निशाना बनाया और इसे US के ईरान पर किए जा रहे हमलों का जवाब कहा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल के अमेरिकी हमलों को यूएन चार्टर और एमओयू दोनों का उल्लंघन बताया। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी हमलों का बचाव किया और कहा कि ईरान के सीजफायर तोड़ा है, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी मिसाइल, ड्रोन और रडार को निशाना बनाया था।
नए सिरे से शुरू हुए इन हमलों को लेकर मिडिल ईस्ट और दुनिया भर में चिंता व्यक्त की गई।
आखिरकार दोनों पक्ष हमले रोकने और इसे सुलझाने के लिए कतर में मिलने जा रहे हैं। एक सीनियर US अधिकारी ने एक्सियोस को बताया, “हमने सभी काइनेटिक एक्टिविटी को रोकने का फ़ैसला किया है।” काइनेटिक एक्टिविटी का मतलब है मिलिट्री हमले समेत हर तरह के हमले।
क्या अमेरिका-ईरान युद्ध के पीछे Gulf Nations को बर्बाद करने का षड़यंत्र तो नहीं?
पिछले महीने से सारी दुनिया अमेरिका-ईरान युद्ध देख रही है और इनकी लड़ाई से उत्पन्न संकटों को भी झेल रहा है। लेकिन चर्चा है कि कहीं अमेरिका और ईरान Gulf Nations को बर्बाद कर तेल पर अपना एकाधिकार करने की योजना पर तो काम नहीं कर रहे? शंका इसलिए होती है कि अमेरिका हमला करता है ईरान पर, लेकिन ईरान अमेरिका पर पलटवार करने की बजाए सऊदी अरब, क़तर या अन्य Gulf Nations पर करता है। अगर ईरान इतना ताकतवर है तो क्यों नहीं अमेरिका धरती पर सीधे हमला क्यों नहीं कर रहा? अर्थव्यवस्था बर्बाद हो रही Gulf Nations की? यह Gulf Nations को बर्बाद की गुप्त मंत्रणा तो नहीं? लेकिन इसे शिया बनाम सुन्नी बनाया जा रहा है। हमला कर रहा अमेरिका लेकिन जवाब झेल रहे Gulf Nations, क्या दाल में काला नहीं दिखता? जब ईरान इजराइल पर हमला कर सकता है फिर अमेरिका पर क्यों नहीं? इस सच्चाई को जानना होगा। क्या कर रहा है मुस्लिम संगठन OIC? क्या OIC भी शिया सुन्नी में भेदभाव करता है?
दिल्ली सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 75 सीएम श्री (CM SHRI) स्कूलों के व्यापक उन्नयन को मंजूरी दे दी है। करीब 265 करोड़ रुपए की इस परियोजना का उद्देश्य स्कूल परिसरों को सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षण केंद्रों में बदलना है।
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में पारित किया गया। बैठक में लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, शिक्षा मंत्री आशीष सूद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
दिल्ली के 75 CM SHRI Schools को आधुनिक सुविधाओं और उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर से सशक्त बनाने के लिए ₹265 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है।
सुरक्षित परिसर, स्मार्ट लर्निंग सुविधाएं, बेहतर खेल अवसंरचना और छात्र-केंद्रित सुविधाओं के साथ ये स्कूल शिक्षा के नए मानक स्थापित करेंगे।… pic.twitter.com/KxGutKDUJj
स्कूल भवनों, खेल सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे का होगा नवीनीकरण
परियोजना के तहत स्कूलों की जर्जर हो चुकी संरचनाओं को सुधारा जाएगा और विभिन्न सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसमें सीमा दीवारों का निर्माण व मरम्मत, सीपेज और नमी से प्रभावित कक्षाओं की मरम्मत, भवनों की रंगाई-पुताई तथा परिसर का सौंदर्यीकरण शामिल है।
सभी सीएम श्री स्कूलों के प्रवेश द्वारों को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ स्कूल के नाम के साथ नया सीएम श्री लोगो भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा शौचालय, पेयजल व्यवस्था, ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम, बहुउद्देशीय हॉल, खेल मैदान और बास्केटबॉल कोर्ट को भी आवश्यकता के अनुसार उन्नत किया जाएगा।
दिल्ली सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
₹265 करोड़ की लागत से 75 CM श्री विद्यालयों का व्यापक उन्नयन किया जाएगा। इसके अंतर्गत विद्यालय भवनों की मरम्मत, जलरोधक कार्य, रंगाई-पुताई, शौचालयों का आधुनिकीकरण, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था,… pic.twitter.com/MDAONQfRo6
सरकार इस परियोजना के जरिए स्कूलों में सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं को भी मजबूत करेगी। अग्नि सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाया जाएगा तथा खराब एलईडी लाइट, पंखे और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली बदली जाएगी। कंप्यूटर लैब और बहुउद्देशीय हॉल में एयर कंडीशनिंग, एलईडी साइनबोर्ड, आरओ वाटर कूलर, नई वायरिंग और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी।
दिव्यांग छात्रों के लिए रैंप, टैक्टाइल पाथवे और हैंडरेल विकसित किए जाएंगे। साथ ही सीसीटीवी निगरानी, कंपाउंड लाइटिंग और खेल परिसरों का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। सरकार ने इस पूरी परियोजना को वर्ष 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
लेकिन यमुना को साफ करने के लिए किए बड़े-बड़े वायदे ठंठे बस्ते में आराम फरमा रहे हैं। दिल्ली में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। जहां पानी आता है बिना RO के पीया नहीं जा सकता, मानों RO कंपनी और पानी माफिया से दिल्ली सरकार का कोई गुप्त समझौता हो। जिस दिन जनता को स्वच्छ जल मिलना शुरू हो जाएगा कि जनता को RO प्रयोग ही नहीं करना पड़े, 80 प्रतिशत पानी की समस्या ख़त्म हो जाएगी क्योकि जितना पानी RO फ़िल्टर कर RO टंकी में देता है उससे ज्यादा पानी बेकार होकर नालियों में चला जाता है।
2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से जनता इस भ्रमजाल में है कि मीडिया मोदीभक्त हो गयी है। मीडिया आज भी विपक्ष के हाथ का खिलौना है। शायद यही वजह है कि मीडिया राममन्दिर चंदा चोरी को ऐसा उछाल रहा है जैसे इसके अलावा किसी मजहब में कोई घोटाला नहीं हो रहा है। किसी मीडिया वाले ने माँ का दूध नहीं पिया जो उन पर अपना मुंह तक खोल सके चर्चा तो बहुत दूर की बात है। SIT और मीडिया को विपक्ष से खासतौर से अखिलेश यादव से पूछना चाहिए कि किन सूत्रों से उन्हें घोटाले की जानकारी मिली, देखिए उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। ये सारा खेल योगी को बदनाम कर सत्ता से हटाने का है।
विभिन्न चैनलों पर घुमा फिर कर राम मंदिर चोरी प्रकरण में चंपत राय जी को लपेट कर मीडिया ट्रायल किया जा रहा है। जो भी पत्रकार ऐसा कर रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए कि जितनी उन लोगों की आयु है उससे ज्यादा समय तो चंपत राय जी समाज, देश और श्री राम मंदिर को दे चुके हैं। उनका जन्म 1946 का है और युवा अवस्था से ही वे संघ के प्रचारक बन गए थे। शादी नहीं की घर बार सब छोड़ दिया। इसलिए उनके बारे में प्रश्न खड़े करते हुए अपनी शब्दावली पर पत्रकारों को लगाम लगानी चाहिए। एक चैनल ने हैडिंग दिया - “मंदिर से चोरी का पैसा लेकर कौन चम्पत हुआ?”। यह प्रश्न ही उन पर ऊँगली उठा रहा हैं।
लेखक चर्चित YouTuber
उत्तर प्रदेश सरकार ने जो SIT का गठन किया इसके सदस्य हैं -
-विजय विश्वास पंत (Divisional Commissioner of Lucknow (SIT के मुखिया);
-किरन एस (Inspector General of Police - IG Range, Lucknow; और
-नील रतन (Special Secretary of the Finance Department)
SIT को कार्य दिया गया था वह था -
-कॅश की गणना कैसे होती है उसको Audit करना, कर्मचारियों का verification process, CCTV Surveillance और दान की राशि कैसे मंदिर से ट्रस्ट और बैंकों को भेजी जाती है, इसकी जांच करना;
-कीमती वस्तुओं जैसे गोल्ड, सिल्वर और हीरों के लॉग्स का निरीक्षण करना और कमियों को ढूंढना; और
-अंतरिम रिपोर्ट एक हफ्ते में और अंतिम रिपोर्ट 15 दिन में जमा करना (जो आज तक जमा हो जानी चाहिए थी)
इस कार्यक्षेत्र में यह कहीं नहीं कहा गया कि SIT ट्रस्ट के पुनर्गठन और CEO की नियुक्ति की भी अनुशंसा (Recommendation) करेगी लेकिन SIT ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में ऐसी अनुशंसा करके अपने कार्यक्षेत्र का अतिक्रमण और इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार को इस अनुशंसा को स्वीकार नहीं करना चाहिए। जो कुछ भी कदम उठाने हैं वे ट्रस्ट पर ही छोड़ देने चाहिए। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में केवल महासचिव चंपत राय ही मंदिर प्रशासन के लिए जिम्मेदार नहीं थे। ट्रस्ट में 15 सदस्य हैं और यह सबकी सामूहिक जिम्मेदारी थी।
ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी मंदिर निर्माण और मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारी को देखना।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस ट्रस्ट में निम्नलिखित IAS पद के Ex-Officiao अधिकारी भी शामिल थे वो चोरी प्रकरण को होता देख कर क्या घुईया छील रहे थे।
-नृपेंद्र मिश्रा (1967 बैच के IAS जो प्रधानमंत्री के भी मुख्य सचिव रह चुके हैं;
-शशांक त्रिपाठी - 2016 बैच के IAS जो अयोध्या के जिलाधिकारी हैं;
-संजय प्रसाद - 1995 बैच के IAS जो उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि हैं; और
-प्रशांत लोखंडे - 2001 बैच के IAS जो केंद्र सरकार के प्रतिनिधि हैं।
इन सभी IAS अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी थी और क्या उनसे SIT ने पूछताछ की। अकेले चंपत राय को कटघरे में कैसे खड़ा किया जा रहा है जबकि चंपत राय ने पहले ही दिन SIT सब Procedure दिखा दिया था। इस बारे में किसी मीडिया चैनल ने बात नहीं की।
सुना है नृपेंद्र मिश्रा जी ने कहा है कि क्योंकि चंपत राय जी के पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है, इसलिए CEO की नियुक्ति होनी चाहिए। मिश्रा जी आपके और अन्य IAS अधिकारियों के पास किस प्रशासनिक अनुभव की कमी थी जो सब कुछ हुआ और आप सभी Administration के एक्सपर्ट चुपचाप देखते रहे। ट्रस्ट के पास मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी थी तो आप लोग क्या कर रहे थे।
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए SIT की अनुशंसा को स्वीकार नहीं करना चाहिए और न ही चंपत राय जी के त्यागपत्र को स्वीकार करना चाहिए।
जो है हाय तौबा अखिलेश यादव मचा रहे हैं, उन्हें नहीं भूलना चाहिए 8 गिरफ्तार लोगों में मनीष यादव और रमाशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव दोनों यादव हैं। कल को इनके तार आपके यादव परिवार से जुड़े न मिल जाएं।
त्योहार किसी भी समुदाय का हो, रमजान हो, होली हो, रामनवमी हो या मुहर्रम इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा फैलाने की घटनाएँ सामने जरुर आती हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से मुहर्रम के दौरान विवाद, झड़प और हिंसा की कई घटनाएँ सामने आई हैं। मजे की बात यह है कि झड़प/हिंसा आपस में ही हुई। कहीं जुलूस के दौरान इस्लामी कट्टरपंथी आपस में ही लड़ पड़े और जान लेने तक पर उतर आए तो कहीं उपद्रव शांत करने पहुँचे सुरक्षाकर्मियों को भी इनकी हिंसा का सामना करना पड़ा। हैरानी तो तब हुई जब मुंबई पुलिस ने दर्द की दवा के नाम पर चूहों को मारने वाली दवा को कैप्सूलों में भरकर बाँटने वाले फ़ैयाज़ को गिरफ्तार किया। अगर पुलिस ने नहीं पकड़ा हो, कितना भयानक होता मंजर?
इस्लामी कट्टरपंथी कहीं तलवार लहराते दिखे तो कहीं से एके47 लहराने का वीडियो सामने आया। हिंदू त्योहार तो इनके निशाने पर रहते ही है, अपने कथित पाक त्योहारों पर भी इनकी हिंसात्मक प्रवृत्ति सामने आ ही जाती है। ऑपइंडिया ऐसी ही सारी घटनाओं को एक साथ संकलित कर रहा है।
बिहार के समस्तीपुर में मुहर्रम पर हिंसा, युवक की चाकू गोदकर हत्या, पुलिस पर भी लाठियों से हमला
बिहार के समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक युवक की चाकू मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया। घटना कल्याणपुर थाना क्षेत्र के गोपालपुर भुट्टा चौक की बताई जा रही है, जहाँ मोहर्रम के अवसर पर ताजिया जुलूस निकाला जा रहा था।
मृतक की पहचान 22 वर्षीय जावेद के रूप में हुई है। जुलूस के दौरान जावेद करतब देख रहा था या उसमें शामिल था, तभी गाँव के ही हैदर नामक युवक ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। आरोप है कि हैदर ने सीधे जावेद के सीने पर वार किया और मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद जावेद गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उपचार के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपित पहले से आपराधिक प्रवृत्ति का है और उसकी जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए।
मामले में सदर DSP-2 संजय कुमार ने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
मुहर्रम के जुलूस में खुलेआम भड़काऊ गाने बजाए जा रहे हैं और भारत के तिरंगे के अपमान किया जा रहा है
दूसरी घटना मथुरापुर थाना क्षेत्र के रामनगर सारी गाँव में हुई, जहाँ मोहर्रम जुलूस के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। कहासुनी जल्द ही हिंसक मारपीट में बदल गई, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। झड़प की सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस और प्रशासन की टीम पर उग्र भीड़ ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
हमले में तीन पुलिस जवान घायल हो गए, जिन्हें समस्तीपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल जवानों का इलाज चल रहा है।
मुंबई में मुहर्रम जुलूस में जहर से भरे चूहे मारने वाले 14900 कैप्सूल जब्त
मुंबई में मुहर्रम जुलूस के दौरान जहर मिली चूहे मारने वाली गोलियाँ बाँटने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से 14 हजार से ज्यादा कैप्सूल जब्त किए हैं। घटना जेजे और भायखला इलाके से गुजर रहे मुहर्रम जुलूस के दौरान सामने आई।
पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने एक व्यक्ति को संदिग्ध तरीके से कैप्सूल वितरित करते देखा, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई और उसके पास मौजूद सामग्री जब्त कर ली गई। जाँच में बरामद कैप्सूलों को लेकर पुलिस ने दावा किया कि उनमें जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था, जो अत्यधिक जहरीला रसायन माना जाता है।
DCP जयंत मीणा के अनुसार, आरोपित के पास से 14,900 भरे हुए कैप्सूल मिले हैं। पूछताछ में उसने बताया कि उसने 30 हजार खाली कैप्सूल और लगभग 50 किलो जिंक फॉस्फाइड मंगवाया था और कई दिनों तक उन्हें भरने का काम किया। मामले में एक व्यक्ति के बीमार पड़ने की भी जानकारी सामने आई है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मुंबई-मुहर्रम जुलूस में दर्द की दवा बताकर जहरीले कैप्सूल बांटे: पुलिस ने 14,900 कैप्सूल के साथ व्यक्ति को पकड़ा; चूहे मारने वाला जहर भरा था;
मुंबई पुलिस के मुताबिक, आरोपी फैयाज ‘दर्द से राहत’ के नाम पर लोगों को ये कैप्सूल देने की कोशिश कर रहा था.!! pic.twitter.com/FjkJ2mCpwl
Mumbai Police arrested Fayaz Premji for planning to kill 30,000 people. I wonder what what will happen to Wipro shares when market opens on Monday pic.twitter.com/g5XA5uQrHu
जाँच में यह भी पता चला है कि फैयाज वर्ष 2019 से 2025 के बीच कई बार ईरान और इराक गया था, जबकि पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था। पुलिस अब इन यात्राओं के उद्देश्य, डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की जाँच कर रही है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में मुहर्रम जुलूस के दौरान हिंसक झड़प
बिहार के मुजफ्फरपुर में भी मुहर्रम जुलूस के दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। मुजफ्फरपुर जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र में निकाली जा रही मातमी जुलूस के दौरान इस्लामी कट्टरपंथी आपस में भिड़ गए। विवाद की शुरुआत दो महिलाओं के बीच हुई कहासुनी से हुई, जो धीरे-धीरे बढ़कर दो समूहों के बीच मारपीट में बदल गई।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने लगे। इस झड़प में कई लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है। घटना की जानकारी मिलते ही पहले से तैनात पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची और किसी तरह स्थिति पर काबू पा लिया गया।
मामले को लेकर मुजफ्फरपुर के SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि जुलूस के दौरान दो महिलाओं के बीच शुरू हुआ विवाद बाद में दो गुटों के बीच संघर्ष में बदल गया। उन्होंने बताया कि इस घटना में तीन लोग घायल हुए हैं और पूरे मामले की जाँच की जा रही है।
मुजफ्फरपुर के कई इलाकों में भड़की हिंसा, ड्यूटी पर तैनात ASI मुस्तकिम खान ने भी उठाई तलवार
मुजफ्फरपुर जिले के हथौड़ी, औराई, पीयर और कांटी थाना क्षेत्रों में अलग-अलग जगहों पर तनाव की स्थिति बनी। पीयर थाना क्षेत्र के बरियारपुर चौक पर ताजिया मिलन के दौरान शुरू हुआ विवाद बाद में हिंसक झड़प में बदल गया और दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चले।
इसके अलावा कांटी थाना क्षेत्र के दामोदरपुर स्थित सेंट्रल बैंक के पास ताजिया जुलूस के दौरान करतब दिखाने और रास्ता देने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया, जो बाद में मारपीट तक पहुँच गया। इसी बीच मुजफ्फरपुर से एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी तलवार से करतब दिखाते नजर आए।
शरीर पर वर्दी और हाथ में तलवार। मुहर्रम के दिन इंटरनेट पर छा गए मुजफ्फरपुर का यह पुलिसकर्मी। pic.twitter.com/9sXXRiDcAl
बताया गया कि वीडियो कांटी थाने में तैनात ASI मुस्तकिम खान का है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनकी ड्यूटी मुहर्रम जुलूस में लगी थी और उसी दौरान किसी ने वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
बिहार के भागलपुर में रेलवे स्टेशन पर तलवारें लेकर घुसे कट्टरपंथी, नारेबाजी कर पैदा की दहशत
बिहार के भागलपुर में मुहर्रम के दौरान रेलवे स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों के घुसने का मामला सामने आया है। यहाँ 100 से अधिक कट्टरपंथी हाथों में तलवारें लेकर स्टेशन परिसर में पहुँच गए और सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म पर नारेबाजी करते रहे।
रेलवे स्टेशन है या कर्बला का मैदान!
जहां देखो हथियार निकालकर मुस्लिम कट्टरपंथियों का प्रदर्शन शुरू हो जाता है!
इस दौरान स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में असहजता और डर का माहौल देखने को मिला।
घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों पर शस्त्र प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए हैं तथा कार्रवाई की माँग की है। मामले पर पहले स्टेशन मास्टर अजय ने कहा था कि वीडियो की जाँच की जाएगी।
इसके बाद रेल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया। मालदा रेल मंडल की जनसंपर्क पदाधिकारी रूपा मंडल ने बताया कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) से विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई थी। जाँच के आधार पर रेलवे अधिनियम की धारा 147 और 145 के तहत FIR दर्ज की गई है।
वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
‘ले फिर आ गए’ लिखी वैन को क्रेन पर लटकाकर उड़ाया, मोहर्रम के जुलूस में कट्टरपंथियों ने मचाया हुड़दंग
मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंगलवार (23 जून 2026) की रात मोहर्रम के जुलूस के दौरान किए गए एक प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हंगामा मच गया। वायरल वीडियो में एक टाटा मैजिक वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट की ऊँचाई पर लटकाया गया था।
वैन के ऊपर दो युवक लाल झंडे लहराते दिखाई दिए और कुछ देर बाद वाहन में जोरदार विस्फोट जैसा दृश्य नजर आया। वैन पर ‘ले फिर आ गए’ लिखा हुआ था।
#उज्जैन में मोहर्रम के दौरान क्रेन से आसमान में कार लटकाकर उसमें आतिशबाजी की गई. इस घटना का वीडियो अभी वायरल हो रहा है. आसमान में लगभग 40 फीट ऊपर कार में विस्फोट करना किसी अनहोनी को दावत देने जैसा था. अब इस मामले में पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है#Ujjain#Muharram#ViralVideopic.twitter.com/vXwfYySj5q
— Journalist Ravendra kumar (@Chhotukingoffi1) June 25, 2026
घटना का वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट ‘परवेज एडिट्स 2.0’ पर भी शेयर किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद हरिद्वार के संत स्वामी शिवानंद गिरि और हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। हिंदू जागरण मंच ने जिला प्रशासन से पूछा कि क्या इस तरह के प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी।
मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। उज्जैन पुलिस के अनुसार जुलूस की अनुमति थी, लेकिन किसी भी तरह के विस्फोटक इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने आयोजक शोएब खान, झंडे लहराने वाले जाहिद खान और तस्लीम खान तथा क्रेन मालिक गोपाल माली के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
यूपी के देवरिया में मुहर्रम जुलूस के दौरान करतब दिखाते आग की चपेट में आया युवक
उत्तर प्रदेश के देवरिया में मुहर्रम जुलूस के दौरान करतब दिखाते समय एक युवक आग की चपेट में आकर घायल हो गया। घटना जिला मुख्यालय स्थित मालवीय रोड पर हुई। युवक को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ इलाज के बाद उसकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के बांस देवरिया निवासी सद्दाम खान फाइव स्टार क्लब की ओर से ताजिया जुलूस में शामिल हुआ था। जुलूस के दौरान वह लोहे के एक ड्रम के भीतर बैठकर करतब प्रस्तुत कर रहा था। इसी बीच ड्रम में जल रही आग अचानक भड़क गई और उसके कपड़ों तक पहुँच गई, जिससे वह झुलस गया।
घटना के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालाँकि अखाड़े के सदस्यों और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए आग बुझाई और युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। समय पर आग पर काबू पा लेने के कारण बड़ा हादसा टल गया।
इसके बाद सद्दाम खान को तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है। क्षेत्राधिकारी नगर संजय रेड्डी ने बताया कि मालवीय रोड पर मुहर्रम जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान यह घटना हुई। पुलिस के अनुसार स्थिति नियंत्रण में रही और कोई अन्य अप्रिय घटना नहीं हुई।
बरेली में मुहर्रम जुलूस में नोट उड़ाने पर बवाल, चले लाठी-डंडे, 20 घायल
उत्तर प्रदेश के बरेली में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बिथरी क्षेत्र के पदारथपुर गाँव में रुपए उड़ाने को लेकर मुस्लिमों में आपस में ही विवाद हो गया, जो कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट और लाठी-डंडे चले, जिसमें करीब 15 से 20 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
हालात बिगड़ते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा। गाँव में शाम के समय मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था और बड़ी संख्या में लोग उसमें शामिल थे। इसी दौरान जुलूस में कुछ लोगों ने रुपए उड़ाने शुरू कर दिए। रुपए उठाने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
इसी बात को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो बाद में झगड़े में बदल गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने पहले दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती दिखाई दी तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और लाठियाँ फटकारकर भीड़ को हटाया।
बाद में थाने से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया गया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, झगड़े और माहौल खराब करने में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और चिह्नित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।
वाराणसी में मुहर्रम जुलूस के दौरान बढ़ा विवाद
मुहर्रम के मौके पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में नई सड़क–औरंगाबाद मार्ग पर निकाले जा रहे ताजिया जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में मुस्लिम मौके पर जमा हो गए, जिससे कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरातफरी और तनाव जैसा माहौल बन गया।
घटना चेतगंज और लक्सा थाना क्षेत्रों की सीमा पर होने के कारण दोनों थानों की पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और स्थिति को संभालने में जुट गई। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से संयम बरतने और जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की। हालांकि कुछ लोगों के हंगामे के कारण हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
इसके बाद पुलिस ने विवाद कर रहे लोगों को मौके से हटाया और भीड़ को नियंत्रित कर स्थिति सामान्य कर दी। हालात शांत होने के बाद ताजिया जुलूस अपने तय मार्ग पर आगे बढ़ गया। घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है।
प्रयागराज में मुहर्रम के जुलूस में DJ की टक्कर से टूटा मंदिर का चबूतरा
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक विवाद सामने आया। बहरिया थाना क्षेत्र के नेवादा गाँव में जुलूस के दौरान डीजे वाहन की टक्कर से मंदिर का चबूतरा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद गाँव में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और एहतियात के तौर पर इलाके में पीएसी तैनात कर दी गई ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त हुए मंदिर के चबूतरे की मरम्मत भी कराई गई।
सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियोज मौजूद हैं, जिनमें कट्टरपंथी तलवारें लहराते, उत्पात मचाते, नारेबाजी करते और यहाँ तक की राइफल लहराते भी दिख रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध एक बार फिर शुरू हो गया है और दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर रविवार (28 जून 2026) को अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
अमेरिका का दावा है कि ईरान ने सीजफायर समझौते का उल्लंघन करते हुए एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। वहीं, अब ईरान ने भी पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों के साथ-साथ तटीय रडार साइटों को निशाना बनाया है।
उन्होंने कहा कि ईरान ने एक बार फिर सीजफायर तोड़ा है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना तो अमेरिका उस अभियान को पूरा करेगा जिसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि ऐसी नौबत आई तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व भी खत्म हो सकता है।
United States aircraft just struck Iranian missile and drone storage locations, and coastal radar sites, for violating the Cease Fire Agreement, AGAIN! It is very possible that they will never learn! There may come a point when we are no longer able to be reasonable, and will be… pic.twitter.com/8sKbkA40kU
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) June 27, 2026
अमेरिकी सेना ने क्या बताया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से एक कमर्शियल ऑयल टैंकर ‘किकू’ पर कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई। अमेरिका का दावा है कि जहाज करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर होरमुज से गुजर रहा था।
इसके बाद अमेरिकी सेना ने होरमुज के आसपास ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान का पलटवार, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने संयुक्त अभियान चलाते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
IRGC के अनुसार यह कार्रवाई हालिया अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई। संगठन ने यह भी कहा कि सीजफायर का उल्लंघन इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की पहली शर्त के खिलाफ है और इससे सभी कूटनीतिक प्रक्रियाएँ पूरी तरह रुक सकती हैं।
अबर कवास, जोहरान ममदानी और डारियालिजा अवीला शेवेलियर (बाएँ से दाएँ)
दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ मुस्लिम आतंकवाद का विरोध करने की बजाए victim card खेलने से पीछे नहीं। जबकि आतंकवाद कितने बेगुनाहों की जान ले रहा है वो नही दिखता। अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले से जो मीडिया यह बता रहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का उनके ही देश में विरोध हो रहा। जबकि हकीकत यह है कि जिस तरह Surgical Air Strike, Operation Sindoor आदि के समय भारतीय विपक्ष पाकिस्तान की बोली बोल रहा था और मीडिया विपक्ष को प्रमुखता दे रहा था, ठीक उसी तरह अमेरिका में मुस्लिम कट्टरपंथी ट्रम्प के विरुद्ध बोल रहे थे। जिसे मीडिया ने नहीं बताया, इस मसले पर ट्रम्प का "मीडिया को बिकाऊ" कहना बिलकुल सही है। वैसे भारतीय मीडिया की भी लगभग यही हालत है। "जहां दिखे तवा परात वहीं बिसाई सारी रात।" मीडिया को बस चिंता है अपनी TRP की।
अमेरिका में इस साल नवंबर में होने वाले जनरल इलेक्शन में अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए हर पार्टी अपने आंतरिक चुनाव कराती है, जिसे देश में प्राइमरी चुनाव (Primary Election) कहा जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी (DSA) के भीतर भी प्राइमरी चुनाव हुआ और 23 जून 2026 को नतीजे सामने आए। इन नतीजों में चर्चा न्यूयॉर्क से चुने मुस्लिम प्रतिनिधि अबर कवास (Aber Kawas) और दारियालिजा एविला शेवेलियर (Darializa Avila Chevalier) की हो रही है। इन ‘हिजाबन’ को न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का समर्थन मिला है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जोहरान ममदानी के समर्थन से जीते नेताओं पर प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने इस पर मीडिया को घेरते हुए कहा, “मेयर ममदानी ने 3 पक्के वामपंथियों को चुनाव जितवा दिया और इसके लिए बिकाऊ मीडिया (Fake News Media) उनकी जमकर तारीफ कर रहा है। मेयर साहब को बधाई! कल रात मैंने 16-0 का रिकॉर्ड बनाया (यानी जिन 16 लोगों का मैंने समर्थन किया, वे सब जीत गए) और शानदार अमेरिकी देशभक्तों को चुनाव जिताने में मदद की, लेकिन मीडिया ने इस पर एक शब्द भी नहीं बोला।”
Mayor Mamdani pulled through 3 solid Communists, and has received loud and universal applause from the Fake News Media. Congratulations Mr. Mayor! I went 16-0 last night, helping to elect wonderful American Patriots, and the Media doesn’t say a word. Over the last two years, my… pic.twitter.com/0DNiHyt1JA
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) June 24, 2026
उन्होंने अपनी तारीफ में आगे लिखा, “पिछले दो सालों में, मेरे समर्थन से लोगों को प्राइमरी चुनाव में 259 जीत मिली हैं, और लगभग कोई हार नहीं हुई, फिर भी मीडिया इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता!!! बिकाऊ मीडिया।”
डोनाल्ड ट्रंप जो कह रहे हैं, वह सच है। चर्चा तो हो रही है जोहरान ममदानी का समर्थन मिलने वाले जीते हुए नेताओं की। खासकर अबर कवास और दारियालिजा एविला शेवेलियर की। जहाँ पश्चिमी मीडिया इन नेताओं की जीत पर बड़े-बड़े लेख लिख रही है, वहीं सोशल मीडिया पर इनके पुराने बयान और इनकी पहचान काफी चर्चा में चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर अमेरिकी इन दोनों मुस्लिम नेताओं के मुस्लिम-प्रोपेगेंडा, हमास का समर्थन और अमेरिकियों के लिए घृणा वाली सोच को सामने ला रहे हैं।
कौन हैं अबर कवास?
अबर कवास खुद को फिलिस्तीन का निवासी बताती हैं। उनका दावा है कि उनके अम्मी-अब्बा फिलिस्तीन से माइग्रेट होकर अमेरिका आए थे। कवास के अनुसार, उनका जन्म भी न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन में ही हुआ है। कवास ने सिटी कॉलेज ऑफ न्यूयॉर्क से ‘इंटरनेशनल स्टडीज’ की पढ़ाई की है। इससे अलग कवास ने अपनी पहचान अमेरिका में सख्त प्रवासन नीतियों और देश में मुस्लिम-विरोधी रवैये के पीड़ित के रूप में बनाई है।
वो दावा करती है कि जब वह किशोरावस्था में थीं, तब उनके पिता को अमेरिका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया और देश से डिपोर्ट कर दिया था। अपनी चुनावी अभियान की वेबसाइट में भी उन्होंने यह जानकारी लिखी है।
इसी पहचान के साथ कवास न्यूयॉर्क के डिस्ट्रिक्ट 12 क्विन्य सीट से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में 58.3 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कवास ने असेंबली मेंबर स्टीवन रागा को 20 प्रतिशत वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ अब वे नवंबर में होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार बन सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस जीत के साथ अबर कवास ने इतिहास रचा है क्योंकि वे न्यूयॉर्क सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली फिलिस्तीनी मुस्लिम महिला बन गई हैं।
फिलिस्तीन और मुस्लिम-पीड़ित का रोना रोने वाली अबर कवास का बैकग्राउंड निकला ‘आपराधिक’
कवास ने बेशक फिलिस्तीन और अमेरिका में मुस्लिम पीड़ित की रोना रोकर चुनाव लड़ा हो, लेकिन असलियत कुछ और है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में सामने आया कि उनके द्वारा गढ़ी गई इमिग्रेशन के कारण परिवार को डिपोर्ट करने वाली कहानी झूठी है। कवास के परिवार को इसीलिए डिपोर्ट किया गया क्योंकि उनके अब्बा ‘अब्दुलकरीम कवास’ एक दोषी अपराधी थे।
अमेरिकी की एक कोर्ट में इसके सबूत भी हैं, जिसे न्यूयॉर्क पोस्ट ने कवर भी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अबर कवास के अब्बा अब्दुलकरीम कवास जॉर्डन के नागरिक थे, जो 1989 में टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका आए थे और कभी वापस नहीं गए। यहाँ अब्दुलकरीम का जघन्य अपराधों में नाम सामने आया। 1995 में उन्हें वर्जीनिया की रिचमंड सिटी सर्किट कोर्ट में झूठी गवाही का दोषी पाया गया और इसके 10 साल बाद न्यू जर्सी में प्रॉपर्टी चोरी के आरोप में दोषी पाने के बाद अगस्त 2006 में तीन साल की जेल तक हुई थी।
इसी बीच उनका इमिग्रेशन का मामला भी अदालतों में चलता रहा। एक फेडरल इमिग्रेशन जज ने शुरू में उन्हें 2004 की सुनवाई में उपस्थित न होने पर देश से निकालने का आदेश दिया था। इसके बाद देश में जॉर्ज बुश (George W. Bush) की सरकार के दौरान उन्हें जॉर्डन डिपोर्ट कर दिया गया था। लेकिन अबर कवास अपने चुनावी अभियान के दौरान लगातार ट्रंप प्रशासन की सख्त इमेग्रेशन नीतियों पर इसका ठीकरा फोड़ती रही हैं।
9/11 आतंकी हमलों पर अबर कवास का अमेरिकी-विरोधी बयान
यही नहीं, अबर कवास की सोच भी अमेरिकी-विरोधी है। यह तब और ज्यादा मुखर होकर सामने आया जब अबर कवास ने अमेरिकी के काले पन्नों में दर्ज 9/11 आतंकी हमले पर अपना पक्ष रखा। कवास ने इस आतंकी हमले का जिम्मेदार अमेरिकियों को ही ठहरा दिया और अलकायदा का बचाव किया। कवास के बयान की वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
🚨Daughter of illegals Aber Kawas blames 9/11 on America’s capitalism, racism & Islamophobia. Endorsed by Zohran Mamdani for NY Assembly.
This is exactly why we must END birthright citizenship NOW. America is not Islam's conquest pic.twitter.com/QhvmnoqTgK
इस क्लिप में अबर कवास कहती हैं, “पूँजीवाद, नस्लवाद, गोरों को दूसरों से श्रेष्ठ समझना और इस्लामोफोबिया- इन सब चीजों का इस्तेमाल हमेशा से दूसरों की जमीनों पर कब्जा करने और उनके संसाधनों को छीनने के लिए किया गया है। यह बहुत लंबे समय से चला आ रहा है और 9/11 का हमला भी इसी पुरानी सोच और सिलसिले का ही एक हिस्सा था।
कवास आगे कहती हैं, “यह सोचना कि हमें (मुस्लिमों को) एक ऐसे आतंकवादी हमले के लिए माफी माँगनी चाहिए जो सिर्फ चंद लोगों ने किया था जबकि इतिहास में हुए बड़े-बड़े नरसंहारों और गुलामी की प्रथा के लिए कभी किसी ने माफी नहीं माँगी और न ही कोई मुआवजा दिया, यह बात मुझे बहुत गलत और घिनौनी लगती है।”
जिस 9/11 आतंकी हमले की अबर कवास यहाँ बात कर रही हैं, वह आतंकी संगठन अलकायदा ने अंजाम दिया था। इस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। उसके नेतृत्व में 11 सितंबर 2001 को अलकायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका के 4 विमानों को हाइजैक किया और उन्हें आत्मघाती बम की तरह इस्तेमाल किया था। इस पूरे हमले में 2,977 मासूम लोगों ने जानें गवाई थीं, जिनमें 90 प्रतिशत अमेरिकन थे।
कौन हैं डारियालिजा अवीला शेवेलियर?
डारियालिजा अवीला शेवेलियर ने भी अपनी पहचान प्रवासी नागरिक के तौर पर मजबूत की है। उनकी चुनावी अभियान की वेबसाइट के अनुसार, वह खुद को अप्रवासन की सख्त नीतियों का पीड़ित होने का दावा करती हैं। उनका डोमिनिकन परिवार है जो फ्लोरिडा से अमेरिका माइग्रेट हुआ था। शेवेलियर बताती हैं कि वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहाँ उनके अब्बा ट्रक ड्राइवर और अम्मी एक केस वर्कर हैं, जिसने अपने बचपन का ज्यादा समय वेनेजुएला में अपनी दादा के साथ बिताया है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मिडिल ईस्टर्न, साउथ एशियन और अफ्रीकन स्टडीज में ग्रेजुएशन पूरी की है और फिलहाल सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क (CUNY Graduate Center) से सोशियोलॉजी में पीएचडी की डिग्री पूरी कर रही हैं। कॉलेज के समय से ही शेवेलियर कट्टर वामपंथी आंदोलनों का हिस्सा रही हैं, इस दौरान वह हिजाब भी पहना करती थीं लेकिन प्राइमरी चुनाव में अभियान के दौरान उनका हिजाब गायब दिखा।
शेवेलियर ने फिलिस्तीन समर्थित, ब्लैक लाइव्स मैटर और खासकर अप्रवासन नीतियों के खिलाफ अभियानों का हिस्सा रहकर अपनी पहचान बनाई। इसी पहचान के साथ शेवेलियर ने प्राइमरी चुनाव में 13वें डिस्ट्रिक्ट सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने 5 बार के मौजूदा और बेहद शक्तिशाली सांसद एड्रियानो एस्पेलियाट (Adriano Espaillat) को 2,326 वोटो के अंतर से चुनाव में मात दी है।
शेवेलियर के अमेरिकी-विरोधी और प्रो-हमास होने पर सोशल मीडिया पर आलोचना
शेवेलियर को चुनाव में जोहरान ममदानी का समर्थन मिला। इसके बावजूद भी सोशल मीडिया पर अमेरिकन शेवेलियर के खिलाफ बोल रहे हैं, लोग उनके इस्लामी हित और अमेरिकी-विरोधी बयानों और विवादित बैकग्राउंड पर बात कर रहे हैं। यह भी सामने आया है कि शेवेलियर ने अपना इस्लाम में धर्म परिवर्तन कर लिया है। इसके अलावा लोग उनके डोमिनिकन मूल से होने पर भी सवाल उठा रहे हैं, लोगों का कहना हैं कि वह हैतीयन (Haitian) मूल की हैं।
Please meet Darializa Avila Chevalier, the Mamdani-endorsed DSA candidate for Congress:
A self-proclaimed communist born in Florida to Dominican (or Haitian, it’s not clear) immigrant parents, she converted to Islam claiming that Palestine is the most important issue in her… pic.twitter.com/MpDWXiejgZ
शेवेलियर की सोशल मीडिया हिस्ट्री खंगालकर अमेरिकी बता रहे हैं कि वह अमेरिकन झंडे का इस्तेमाल नैपकिन की तरह करती हैं। इसके अलावा 07 अक्टूबर 2025 को ठीक एक दिन बाद, उन्होंने इजरायली नागरिकों की हत्या का जश्न मनाने वाली एक रैली में भी हिस्सा लिया था। उनके अमेरिकी-विरोधी होने का भी राज खोलते हुए कहा कि वह गोरी महिलाओं को ‘बदसूरत उपनिवेशवादी’ बताती हैं।
इतना ही नहीं अमेरिकन ने बताया कि शेवेलियर कह चुकी हैं कि अपराधियों सहित किसी भी व्यक्ति का निर्वासन (देश से निकालना) उचित नहीं है। वह पुलिस से नफरत करती हैं और उन्हें ‘सूअर’ कहती हैं, अमेरिकी सैनिकों को युद्ध अपराधी बताती हैं और कहती हैं कि अमेरिका एक शर्मनाक देश है। वह सिर्फ़ न्यूयॉर्क से चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें पता है कि फ्लोरिडा में उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है।”
Darializa Avila Chevalier, who just won the NY-13 Democrat primary, says “Inshallah” if she makes it to Congress, she wants to make sure to reflect her Muslim faith “in the halls of power”. pic.twitter.com/AWMYi40AcO
ऐसा ही उनका एक पुराना वीडियो भी सामने आया, जिसमें शेवेलियर कहती दिख रही हैं कि अगर वह कॉन्ग्रेस में पहुँचती हैं तो ‘इंशाल्लाह’ यह पक्का करना चाहेंगी कि ‘सत्ता के गलियारों’ में उनके मुस्लिम मजहब की झलक दिखे।
निष्कर्ष: न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी ने अपने जैसे दो को बनाया अगला प्रतिनिधि
शेवेलियर और कवास के बैकग्राउंड को देखते हुए लगता है कि यह भी जोहरान ममदानी की राह पर ही हैं। इन्होंने भी न्यूयॉर्क में मुस्लिम-पीड़ित पहचान, हमास को समर्थन और अमेरिकी नीतियों की आलोचना करके ही चुनाव जीता है। लगता है कि न्यूयॉर्क को कई जोहरान मिल गए हैं और इनका प्राइमरी चुनाव जीतने यही अंदेशा है कि ऐसे अमेरिकी विरोधी नेता आम चुनाव भी आसानी से जीत जाएँगे, क्योंकि न्यूयॉर्क पहले से ही सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ रहा है।
हालाँकि इससे यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या न्यूयॉर्क में सचमुच लोग ट्रंप प्रशासन की नीतियों से परेशान हैं या फिर शहर में मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है। वैसे भी आए दिन सोशल मीडिया पर वीडियोज सामने आते रहते हैं कि जिसमें न्यूयॉर्क की सड़कों पर मुहर्रम के शोक हो रहे हैं, टाइम्स स्क्वायर से अजान की आवाजें आती हैं और इसी न्यूयॉर्क में बैठकर जोहरान ममदानी और उसके जैसे नेता अमेरिका के विरोध में बयान देते हैं और आतंकियों के मरने पर शोक मनाते हैं। क्या ऐसे नेताओं को सत्ता में लाकर अमेरिका इस्लामीकरण की ओर है?
मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस पीबी बालाजी की खंडपीठ ने 25 जून को एक फैसले में तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च, 2024 के आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया और कहा कि मतांतरण करने वालों को बैकवर्ड क्लास मुस्लिम के रूप में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। एक हिंदू ने इस्लाम अपना कर अपना नाम समीर अहमद रख लिया और उसके बाद उसने स्वयं को मुस्लिम लेब्बाई समुदाय का बता कर पिछड़े वर्ग का सदस्य बताते हुए प्रमाण पत्र की मांग की जो तहसीलदार ने स्वीकार नहीं की। इसी के सन्दर्भ में दोनों जजों ने यह फैसला सुनाया।
अब चलते हैं आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के 2007 के फैसले की तरफ। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने 5:2 के बहुमत के फैसले में आंध्र प्रदेश सरकार के ANDHRAPRADESH RESERVATION FOR SOCIALLY BACKWARD AND EDUCATIONALLY BACKWARD CLAUSES OF MUSLIM ACT 2007 को ख़ारिज करते हुए कहा कि IT IS UNSUSTAINABLE AND VILOLATIVE OF ARTICLE 14 OF (EQUALITY BEFORE LAW), 15(4) AND 16(4) AND OTHER PROVISIONS PERTAINING TO PROHIBITION OF DISCRIMATION BY STATE ON THE GROUNDS OF RELIGION, RACE, CAST, SEX OR PLACE OF BIRTH”.
लेखक चर्चित YouTuber
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस KG Balakrishnan, Justice JM Pancholi और Justice BS Chauhan की पीठ ने आंध्र प्रदेश के मुस्लिमों को दिए गए 4% आरक्षण को अनुमति दे दी। साथ में मामले को संविधान पीठ को भेज दिया जो राज्य के आदेश की संवैधानिकता को परखेगी क्योंकि इसमें संविधान के संबंधित मामला उठाया गया है। फिर आपको आरक्षण की अनुमति देनी ही नहीं चाहिए थी।
अब आप देखिए 16 साल से वह संविधान पीठ गठित नहीं हुई है। कल को अगर संविधान पीठ भी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रख देती है और राज्य सरकार के 4% आरक्षण को अवैध कह देती है तो जो लोग 16 साल से आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं, उन्हें क्या सुप्रीम कोर्ट नौकरी से निकालने के भी आदेश देगा और जो सैलरी उन्होंने 16 साल में ली है, वो क्या वापस करने के भी आदेश सुप्रीम कोर्ट देगा।
देश के अलग अलग राज्यों में “सेक्युलर दलों” से मुस्लिम आरक्षण मांगते हैं और उनका वोट लेने के लिए ये दल उन्हें आरक्षण देने का भरोसा भी दे देते हैं जो संविधान के अनुसार वैध नहीं है। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट 16 साल तक ऐसे मामले को लटकाए बैठा रहेगा तो देश में अराजकता बढ़ना स्वाभाविक है। सेक्युलर दलों को मरोड़ उठती है मुस्लिमों को आरक्षण देने की जैसे तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश सरकार को उठी थी।
इस लेख में मैंने सुप्रीम कोर्ट के लिए कुछ अशोभनीय नहीं लिखा है। मेरा मकसद सुप्रीम कोर्ट तक यह बात पहुंचाना है कि इस तरह की न्याय व्यवस्था देश के लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर सकती है। यह कहना बड़ा आसान है कि सोशल मीडिया पर हम ध्यान नहीं देते और whatsapp university की बात हमारे सामने मत कीजिए लेकिन ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया और whatsapp पर सब कुछ बकवास लिखा जाता है। हो सकता है कुछ बातें गलत भी होती होंगी लेकिन मैंने जो विषय उठाया है, उसे तो चीफ जस्टिस को पढ़ना चाहिए।
डेनमार्क में सड़कों पर नमाज अदा करते मुस्लिम (फोटो साभार: Getty Images) चीन ने तो पहले से ही इस्लाम पर नकेल कसने के साथ-साथ कई त्योहारों तक पर भी पाबन्दी लगाई हुई है। भारत पल रहे मुस्लिम कट्टरपंथियों से लेकर किसी भी मुस्लिम देश और UNO तक की चीन के खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं। मानवाधिकार भी किसी कालकोठरी में छिपा बैठा है। लेकिन अब कुछ समय से आतंकवादी गतिविधियों और कट्टरपंथियों द्वारा उत्पात मचाने को देख यूरोप ने भी कमर कसनी शुरू कर दी है। कई देशों ने तो बुर्का/हिजाब और नकाब और सड़क पर नमाज़ तक पर पाबन्दी लगा दी है।
अब यूरोपियन देश डेनमार्क जल्द ही सड़कों पर नमाज पर रोक लगाने जा रहा है। डेनमार्क के आप्रवासन मंत्री मोर्टेन बोडस्कोव ने चेतावनी दी है कि देश के कुछ हिस्से इस्लामाबाद जैसे लग सकते हैं। उन्होंने घोषणा की कि सोशल डेमोक्रेट सरकार पूरे देश में नमाज पर रोक लगाने के मामले की फिर से जाँच शुरू करेगी।
डेनमार्क की न्यूज एजेंसी ‘रिटजाऊ’ (Ritzau) को मंत्री मोर्टेन बोडस्कोव ने बताया कि अधिकारी इस बात की कानूनी जाँच फिर से शुरू करेंगे कि क्या ऐसी पाबंदी लागू की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि हालाँकि कोपेनहेगन समेत कुछ इलाकों में शोर-शराबे से जुड़े कड़े नियमों की वजह से बाहर नमाज पर पहले से ही पाबंदी है। लेकिन अब डेनमार्क की सरकार और भी सख्त पाबंदी पर विचार कर रही है।
मंत्री बोडस्कोव ने कहा कि डेनमार्क में मस्जिदों से दिन में पाँच बार दी जाने वाली नमाज की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “डेनमार्क की छतों से अजान की आवाज नहीं सुनाई देनी चाहिए। डेनमार्क में इसकी कोई जगह नहीं है और जब आप डेनमार्क में घूमें तो आपको यह शक नहीं होना चाहिए कि आप इस्लामाबाद के किसी इलाके में आ गए हैं।”
यह पहली बार नहीं है जब डेनमार्क अपने देश में नमाज पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है। इससे पहले 2020 और 2025 में भी इस पर चर्चा हुई थी लेकिन उससे देशभर में प्रतिबंध नहीं लग पाया।
मीडिया को अपनी TRP की चिंता तो नेताओं को अपने वोटबैंक की। पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर में चढ़ावे में हुई चोरी पर मीडिया और विपक्ष ने फर्श से लेकर अर्श तक को सर पर उठा रखा है। इनमें से कोई ईमानदारी से बताए क्या किसी मजहबी जगह पर घोटाले नहीं। दिल्ली के ही एक स्थानीय मुस्लिम ने कई बार मस्जिदों और दरगाहों में हो रहे घोटाले को सरकार और वक़्फ़ बोर्ड के सामने लाने की कोशिश की जबकि वक़्फ़ बोर्ड तो क्या सभी जानते हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं। राममन्दिर की तरह जिस दिन दूसरे मजहबों पर हाथ डाला सबकी आंखें फटी रह जाएँगी। चोरी चोरी ही है चाहे वह मंदिर में हो या मस्जिद में।
— banwari Maheshwari (@banwariMaheshw1) June 26, 2026
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और हैंडलिंग में कथित गड़बड़ी का मामला अब जाँच के सबसे अहम दौर में पहुँच गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर इस मामले में FIR दर्ज हुई है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती, रखरखाव और उससे जुड़ी व्यवस्था में बड़े स्तर पर अनियमितताएँ हुईं।
यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद यूपी सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया। SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के दो दिन बाद कार्रवाई तेज हुई और मंदिर से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपितों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। इस रिपोर्ट में जानेंगे कि ये 8 लोग कौन हैं इन पर क्या आरोप हैं।
FIR की कॉपी का एक हिस्सा
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित चेहरा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जाता है और VHP के कारसेवकपुरम से भी जुड़ा रहा है। बताया गया है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में उसका हस्तक्षेप रहता था और दानपात्रों की निगरानी से लेकर उन्हें बेसमेंट तक पहुँचाने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका थी।
आरोप है कि दानपात्रों की चाबियाँ भी उसी के पास रहती थीं और ट्रस्ट के लोगों से करीबी होने के कारण वह मनमाने तरीके से काम करता था। FIR और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी शुरुआती चरण में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी हुई और उससे अयोध्या व आसपास के जिलों में संपत्तियाँ बनाने के आरोप लगे। हालाँकि, टिन्नू यादव ने कैश काउंटिंग में अपनी भूमिका से इनकार किया है और आरोपों के पीछे कुछ ‘जलने वाले लोगों‘ को जिम्मेदार बताया है।
रामशंकर मिश्रा
रामशंकर मिश्रा भी दान की रकम गिनने वाली टीम से जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर दूसरे कर्मचारियों के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने बेटे अनुकल्प मिश्रा और दामाद लवकुश मिश्रा को भी चढ़ावा गिनने के काम में लगवाया।
पुलिस के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रामशंकर मिश्रा अन्य आरोपितों के साथ मिलकर दान की रकम में कथित हेराफेरी करते थे और कैश सॉर्टिंग प्रक्रिया के दौरान CCTV फुटेज में भी दिखे। जाँच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने तय वित्तीय प्रक्रिया को दरकिनार करने में भूमिका निभाई और लंबे समय तक कथित गड़बड़ी को आसान बनाया।
अनुकल्प मिश्रा
अनुकल्प मिश्रा, रामशंकर मिश्र का बेटा है और वह भी दान की रकम गिनने और संभालने की प्रक्रिया में शामिल था। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र के बसावन गाँव का निवासी है। उसका संबंध ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी बताया गया है।
अनुकल्प की ड्यूटी चढ़ावा गिनने के काम में लगती थी। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि कैश काउंटिंग के दौरान रकम में कथित हेराफेरी की गई और अनुकल्प के घर से चोरी की रकम बरामद होने का दावा भी किया गया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि CCTV फुटेज और बरामदगी के आधार पर उसकी भूमिका की जाँच की जा रही है।
लवकुश मिश्रा
लवकुश मिश्रा भी दान की रकम गिनने वाली टीम का हिस्सा था। आरोप है कि चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के बाद उसके निपटान यानी ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी लवकुश पर थी। कहा गया है कि उसने मंदिर से चोरी कर करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई है।
शुरुआती जाँच में उसके घर से रकम बरामद होने के दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्ट्स में उसके घर से करीब 12 लाख रुपए कैश मिलने की बात कही गई है। जाँच एजेंसियाँ इस रकम के स्रोत की जाँच कर रही हैं और आरोप है कि वह अनुकल्प मिश्रा के साथ मिलकर दान की रकम की हेराफेरी में सक्रिय रूप से शामिल था।
अविनाश शुक्ला
अविनाश शुक्ला को मंदिर की व्यवस्था और दान की रकम से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति बताया गया है। रिपोर्ट्स में उसे मंदिर का अटेंडेंट या काउंटिंग टीम से जुड़ा सदस्य बताया गया है। आरोप है कि वह दान की रकम को सुरक्षित तरीके से काउंटिंग रूम तक पहुँचाने और गिनती की प्रक्रिया में शामिल था।
पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वह उस कथित सिंडिकेट का अहम सदस्य था, जिस पर चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी का आरोप है। उसके बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपए बरामद होने की चर्चा भी रिपोर्ट्स में सामने आई है। उस पर दान की रकम के कथित दुरुपयोग और उससे संपत्ति बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
मनीष कुमार यादव
मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का भतीजा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह टिन्नू यादव के छोटे भाई बलराम यादव का बेटा है। पुलिस के हवाले से कहा गया है कि मनीष मंदिर में दान की रकम गिनने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसके घर से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान उसके घर से करीब 36 लाख रुपए नकद मिलने का दावा किया गया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह रकम कहाँ से आई और इसका संबंध कथित गबन से किस तरह जुड़ता है।
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव पूर्व बैंक कर्मचारी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राम मंदिर में कैश काउंटिंग स्टाफ का प्रभारी बनाया गया था। उनकी जिम्मेदारी दान की रकम की गिनती करने वाले कर्मचारियों की निगरानी और पूरी काउंटिंग प्रक्रिया को देखना था। बैंकिंग पृष्ठभूमि के कारण उन्हें इस काम की निगरानी के लिए रखा गया था।
FIR और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर निगरानी में कथित लापरवाही और अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप हैं। जाँच एजेंसियाँ यह देख रही हैं कि उनके प्रभारी रहते हुए दान की रकम की गिनती में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।
करुणेश पांडेय
करुणेश पांडेय पर दान की रकम से जुड़ी रसीदों और वित्तीय रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का आरोप है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के साथ पूरी साजिश में शामिल था। जाँच एजेंसियों का दावा है कि वह श्रद्धालुओं के चढ़ावे को संभालने वाली कोर टीम का हिस्सा थे।
एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी जिम्मेदारी दान की रकम को गिनती वाले कमरे तक पहुँचाने से भी जुड़ी थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने रकम और रिकॉर्ड की हेराफेरी में भूमिका निभाई और कथित गड़बड़ी से संपत्ति अर्जित की।