‘....राहुल गाँधी धोखेबाज’: DMK का कांग्रेस पर तीखा हमला


जब कोई नेता अपनी अक्ल की बजाए विदेशों में बैठे अपने आकाओं के कठपुतली बन बोलता हो, क्या ऐसे नेता से किसी हित की कल्पना की जा सकती है? वास्तव में नेता प्रतिपक्ष को इतना संवेदनशील, दूरगामी और परिपक़्व होना चाहिए कि जब वह बोले सत्तापक्ष ध्यान से सुने और विपक्ष नेता के मुंह बात पर चिंता करे। लेकिन देश को ऐसा विपक्षी नेता मिला है जो खुद मजाक बन रहा है। कोई गंभीरता नाम की चीज ही नहीं, उपद्रवी भाषा। अगर राहुल विदेश में बैठे अपने आकाओं के चक्कर काटने की बजाए अपने दादा फिरोज जहांगीर की कब्र पर जाकर दुआ मांगते शायद दादा फिरोज अल्लाह मियां को बोलकर कुछ अक्ल दिलवा देते। कांग्रेस पार्टी को सिर्फ show piece बना दिया।      

तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच राजनीतिक अलगाव के बाद एक-दूसरे पर तीखे वाण छोड़े जा रहे हैं।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ और पार्टी की आईटी विंग ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोला है और उन्हें ‘पीठ में छुरा घोंपने वाला’ और ‘राजनीतिक रूप से अपरिपक्व’ के साथ-साथ ‘एक बड़ा मजाक’ करार दिया है।

डीएमके ने अपने मुखपत्र के संपादकीय में आरोप लगाया कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों में इंडी गठबंधन के सहयोगियों के खिलाफ काम किया और उन्हें कमजोर किया। पार्टी का कहना है कि राहुल गाँधी इंडी गठबंधन की बैठकों में विपक्षी एकजुटता की बात करते हैं, लेकिन उन्होंने ही अलग-अलग राज्यों में विपक्ष की एकजुटता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है।

दरअसल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे की ‘दोस्ती की मिसाल’ देने वाली ये दोनों पार्टियाँ चुनाव बाद के नतीजों के बाद एक-दूसरे की दुश्मन बन गई हैं। डीएमके का कहना है कि कांग्रेस ने राज्य में गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया और गठबंधन में होने के बावजूद, सरकार बनाने के लिए अभिनेता विजय की पार्टी यानी टीवीके को समर्थन दे दिया। डीएमके ने दावा किया है कि कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही थी, तब उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया, लेकिन नया विकल्प मिलते ही उन्होंने डीएमके को धोखा दे दिया।

समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट, भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है पूरी समाजवादी पार्टी; रामगोपाल यादव ने अमित शाह को सौंपी चिट्ठी


उत्तर प्रदेश में चुनाव होने से पहले ही लगता है चुनाव परिणाम घोषित हो गया है। राहुल गाँधी की छत्रसाया में रहने वाली एक और पार्टी अपने अंत की ओर चल पड़ी है। महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस(TMC) में टूट और दल-बदल चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर भी बड़ा दावा सामने आया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि सपा में जल्द ही बड़ी टूट हो सकती है।

उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है। खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है। महाराष्ट्र बंगाल छोड़िए, समूची सपा, भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।”

एक बयान में राम गोपाल यादव ने कहा, “अब यूपी का नंबर है, राम गोपाल जी एक चिट्ठी अमित शाह को थमा दिए हैं और उनसे कह दिए हैं उनसे कि इतने लोगों का नाम है। इन लोगों को अपने पास ले लीजिए, हम लोगों की जान बचाकर रखिएगा।”

राजभर ने अपने बयान में कई घोटालों का भी जिक्र किया है जिसके बाद सियासी हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है।

राँची के RSS के दफ्तर पर देर रात पेट्रोल बम से अटैक, बम फेंकने का CCTV फुटेज आया सामने

                                  देर रात RSS के दफ्तर पर बम फेंकते दिखे लोग (फोटो साभार: X/@ANI)
पेट्रोल के दाम बढ़ने पर शोर मचाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने वालों से पूछो 'क्या पेट्रोल 50 रूपए सस्ता हो गया है?' जो पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं।  
झारखंड की राजधानी राँची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला किया गया है। निवारणपुर स्थित संघ कार्यालय पर मंगलवार (16 जून 2026) देर रात दो अज्ञात युवकों ने पेट्रोल बम फेंका। हालाँकि, दोनों बोतलें कार्यालय परिसर के अंदर नहीं पहुँच सकीं जिससे बड़ा हादसा टल गया। यह घटना रात करीब 12:36 बजे की बताई जा रही है।

घटना की जानकारी बुधवार सुबह उस समय हुई जब स्वयंसेवक कार्यालय परिसर में पहुँचे। परिसर के बाहर संदिग्ध बोतलें मिलने पर CCTV फुटेज की जाँच की गई और उसमें दो युवक पेट्रोल बम फेंकते हुए दिखाई दिए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि हमलावरों ने चिली सॉस की काँच की बोतलों में पेट्रोल भरकर उन्हें पेट्रोल बम की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की। पहला बम फेंके जाने के दौरान उसमें लगी जलती हुई सुतली जमीन पर ही गिर गई, जिससे वह प्रभावी नहीं हो सका। दूसरा बम भी कार्यालय की बाउंड्री पार नहीं कर पाया और बाहर ही गिर गया। इस कारण कार्यालय को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचा है।

घटना के समय कार्यालय परिसर में प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख आनंद तुलस्यान, प्रांत कार्यालय प्रमुख नरसिंह सिंह समेत कई स्वयंसेवक, विद्यार्थी और कर्मचारी मौजूद थे। घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी तथा भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता कार्यालय पहुँचे।

बाबूलाल मरांडी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर किसी वाहन से आए थे और घटना की गहन जाँच की जानी चाहिए। वहीं रांची पुलिस ने कहा है कि मामले की जाँच के लिए एफएसएल समेत कई टीमों को लगाया गया है। CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही घटना में शामिल लोगों को पकड़ लिया जाएगा।

30 देशों की 120 सीक्रेट बायोलैब्स में अमेरिकी फंडिंग: कुर्सी छोड़ने से पहले तुलसी गबार्ड ने खोले US के राज, कहा- खतरनाक Pathogens पर हुई रिसर्च

                                                                         तुलसी गबार्ड
अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी सरकार ने दुनिया के 30 से अधिक देशों में 120 से ज्यादा जैविक प्रयोगशालाओं (Biolabs) को फंडिंग दी है, जिनमें यूक्रेन की लैब्स भी शामिल हैं। गबार्ड ने कहा कि इन लैब्स में खतरनाक रोगाणुओं (Pathogens) पर रिसर्च की गई और इसकी जानकारी अमेरिकी जनता से सालों तक छिपाई गई।

गबार्ड ने शुक्रवार (12 जून 2026) को जारी एक बयान में कहा कि कई महीनों तक खुफिया दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद उन्हें पता चला कि अमेरिकी फंडिंग से दुनिया भर में बायोलैब्स का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से यूक्रेन में मौजूद लैब्स को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इन प्रयोगशालाओं को नुकसान पहुँचने, कब्जे में जाने या हमला होने का खतरा बना हुआ है।

गबार्ड ने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पहले की रिपोर्टों में भी चेतावनी दी गई थी कि यूक्रेन की कुछ लैब्स में संभावित रूप से खतरनाक रोगाणु रखे गए हैं। युद्ध के दौरान अगर ये लैब्स प्रभावित होती हैं तो बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लैब्स की लोकेशन, फंडिंग और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जानबूझकर छिपाई गई।

गबार्ड ने कहा, “अमेरिकी फंडिंग वाली इन बायोलैब्स के अस्तित्व, इतिहास, स्थान और फंडिंग को प्रभावशाली लोगों ने जानबूझकर छिपाया। जो लोग इनके बारे में सवाल उठाते थे, उन्हें विदेशी एजेंट और अमेरिका का गद्दार तक बताया गया।”

गबार्ड ने ‘गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च’ (Gain-of-Function Research) पर भी चिंता जताई। यह ऐसी रिसर्च होती है जिसमें वायरस या रोगाणुओं को बदलकर यह समझने की कोशिश की जाती है कि वे कैसे फैलते हैं या ज्यादा खतरनाक बन सकते हैं। इस तरह की रिसर्च को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। गबार्ड ने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 मई 2025 के उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से जोड़ा है जिसमें दुनिया भर में ऐसी रिसर्च के लिए फेडरल फंडिंग रोकने का फैसला लिया गया था।

उन्होंने पूर्व अमेरिकी सरकारों, कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और खासतौर पर एंथनी फाउची पर भी निशाना साधा। गबार्ड ने आरोप लगाया कि अमेरिकी जनता से इन लैब्स के बारे में सच छिपाया गया और जो लोग सवाल उठाते थे उन्हें दबाने की कोशिश की गई। गबार्ड ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को विदेशों में मौजूद इन बायोलैब्स पर ज्यादा जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं।

गबार्ड ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफे का भी ऐलान किया है। उन्होंने 22 मई को बताया था कि वह 30 जून से पद छोड़ देंगी। गबार्ड ने कहा कि उनके पति अब्राहम विलियम्स को हड्डियों के कैंसर की एक दुर्लभ बीमारी हुई है और वह परिवार के साथ समय बिताना चाहती हैं। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि विदेश नीति समेत कई मुद्दों पर प्रशासन के कुछ हिस्सों से उनके मतभेद थे।

आतंकी संगठन पाल रहे ईरान के लिए ट्रंप भरोसेमंद इज़रायल को धोखा दे रहे हैं; डील अमेरिका-ईरान की है तो इज़रायल और हिज़्बुल्लान कैसे पार्टी हो गए?

सुभाष चन्द्र

ट्रंप ईरान के साथ कथित समझौते में भरोसेमंद साथी इज़रायल के साथ धोखा कर रहे हैं जबकि उन्हें पता है कि ईरान खुद और उसके पाले हुए आतंकी संगठन हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती इज़रायल को दुनिया के मानचित्र से मिटा देना चाहते है। ट्रंप नेतन्याहू को कहते हैं कि लेबनान पर हमले बंद करें लेकिन हिज़्बुल्लाह को नहीं कहते कि वो इज़रायल के खिलाफ हथियार न चलाए

क्या धोखा देना अमेरिका के DNA में है? इजराइल को हिजबुल्लाह के खिलाफ हथियार न चलाए की नसीयत देने वाले ट्रम्प ने हिजबुल्लाह को आतंकी हमले नहीं करने के लिए क्यों नहीं बोला? ये वही अमेरिका है जिसने पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की मदद से सोवियत यूनियन को तोड़ पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान को भी धोखा देने में देरी नहीं की। आज इन दोनों मुल्कों की क्या हालत है दुनिया के सामने है। क्या नागों को दूध पिलाना अमेरिका की फितरत में है? दूसरे, यह कि जब पाकिस्तान द्वारा भारत पर आतंकी हमले करने पर भारत उसका जवाब देता है तो अमेरिका परदे के पीछे से पाकिस्तान की मदद करता है। अब इसे अमेरिका का दोगलापन ही कहा जाएगा।    

लेखक 
चर्चित YouTuber 
ट्रंप की नसीहत इज़रायल के लिए तब उचित होती अगर वह समझौते में शर्त रखते कि ईरान हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती को इज़रायल पर हमले करने से रोकेगा इसलिए इज़रायल का इस समझौते को मानने से मना करना पूरी तरह उचित है 

ट्रंप पिछले कुछ दिनों में नेतन्याहू पर 5 बार बरसे हैं, नेतन्याहू को पागल तक कह दिया और यह भी कह दिया कि “अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते” ऐसे ही अहंकार भरे शब्द ट्रंप ने आज भी कहे हैं कि इज़रायल अमेरिका की वजह से है, इज़रायल बहुत पहले तबाह हो गया होता, ईरान के पास परमाणु हथियार होता तो वह उससे जंग के दौरान इज़रायल पर हमला करता” तो क्या इज़रायल के पास परमाणु हथियर सजाने के लिए रखे हैं, वह क्या उपयोग नहीं करता ईरान पर?

ट्रंप भूल रहे हैं कि इज़रायल जितने अवरोध झेल कर युद्ध कर खड़ा हुआ है, वह आज तक कोई देश नहीं कर सका अमेरिका ने एक बार पहले भी धमकी दी थी कि हम इज़रायल को हथियार देना बंद कर देंगे और तब नेतन्याहू ने कहा था कि अगर हमारे पास हथियार नहीं भी होंगे तो अपने हाथों की नाखूनों से युद्ध करेंगे यह जज्बा है इज़रायल का और आज कहते है इज़रायल का पूरा विपक्ष नेतन्याहू के साथ खड़ा है

ये समझौता देखा जाए तो एक दिखावा है और उसके टिके रहने की संभावना बहुत कम है। ट्रंप अपनी ही हाँक रहे हैं कि ईरान के साथ हुए समझौते का अहम यह है कि तेहरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उन्होंने इस पर सहमति दी है जबकि ईरान की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया 

ट्रंप ने यह भी कहा है कि होर्मुज समुद्री मार्ग जल्द खुल जाएगा और ईरान को वहां से निकलने वाले जहाजों से टैक्स वसूलने का अधिकार नहीं होगा लेकिन ईरान ने कहा है कि वह समुद्री मार्ग उसकी व्यवस्था के तहत खुलेगा। कितना बड़ा विरोधाभास है!

उधर ईरान के विदेश मंत्री अरघाची ने कहा है कि इस MOU में दो पार्टी हैं एक तरफ अमेरिका और इज़रायल है और दूसरी तरफ ईरान और हिज़्बुल्लाह और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध बंद होना चाहिए लेकिन लेबनान पर हमले से समझौते का उल्लंघन माना जाएगा इज़रायल कैसे पार्टी हो गया और हिजबुल्लाह क्या कोई देश है जिसे ईरान MOU में पार्टी बता रहा है? अलबत्ता लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध रोकने की बात MOU में कही गई है जबकि लेबनान का मामला इज़रायल का है और अमेरिका को उस पर दखल देने का अधिकार नहीं है

MOU में 60 दिन में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी जब बात होनी है तो ट्रंप का दावा सही नहीं है कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने के लिए सहमति दी है

यह भी कहा गया है ईरान के फ्रीज़ आधे Assets 12 बिलियन डॉलर के अमेरिका समझौता होने से पहले मुक्त कर देगा और आधे बाद में

इसके अलावा ईरान ने पुनर्निर्माण के लिए 300 बिलियन डॉलर की भी मांग की है जिसके बारे में MOU में कुछ नहीं स्पष्ट नहीं है लेकिन जो ईरान को विजई कह रहे हैं उन्हें यह जानना जरूरी है कि कितना भारी नुकसान हुआ है ईरान का जिसके लिए इतनी मोटी रकम मांग रहा है

मूर्ख और चालाक ईरान के लिए अमेरिका का इज़रायल को त्यागना उसके लिए ही हानिकारक सिद्ध होगा

उत्तर प्रदेश : अब जब्त अफीम से बनेगी जीवनरक्षक दवा, योगी सरकार का अपराध से जनकल्याण तक का सफर

            जब्त अफीम से बनेगी दवा, योगी सरकार ने अपराध को बदला जनकल्याण में (फोटो साभार : ChatGPT)
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से पहले जिस उत्तर प्रदेश में माफियाओं का डंका बजता था, पुलिस मंत्रियों की भैंस ढूंढने में लगी रहती थी, आज स्थिति एकदम बदल चुकी है।   

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जिस तरह अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति बनाई है, उसी तरह अब उनसे जब्त की गई सामग्री को भी प्रयोग में लाया जाएगा। दरअसल गाजियाबाद पुलिस ने अलग-अलग थानों के मालखानों में सालों से बंद पड़े 16,378 किलोग्राम से ज्यादा के नशीले पदार्थ जब्त कर उसे पूरी तरफ नष्ट किया है।

इसी के साथ, अपराधियों से पकड़ी गई 4.206 किलोग्राम शुद्ध अफीम को नष्ट करने के बजाय सरकारी अफीम कारखाने (गाजीपुर) भेजा गया है। इस अफीम का इस्तेमाल अब नशे के लिए नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की दवाएँ बनाने में किया जाएगा। योगी सरकार का यह कदम दिखाता है कि कैसे अपराध की सामग्री का इस्तेमाल अब जन-कल्याण के लिए हो रहा है।

थानों में जमा ड्रग्स को ऐसे किया गया नष्ट

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के थानों में सालों से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जमा थे। इन मादक पदार्थों की वजह से थानों के मालखानों में जगह कम पड़ रही थी और इनके दुरुपयोग का खतरा भी बना हुआ था। इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय ड्रग डिस्पोजल कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में अपर पुलिस आयुक्त अपराध और अपर पुलिस उपायुक्त यातायात जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया था।

इस विशेष कमेटी ने कोर्ट, संबंधित विभागाध्यक्षों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से सभी जरूरी कानूनी अनुमतियाँ और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त किए। इसके बाद बुधवार (10 जून) को धौलाना स्थित एक अधिकृत बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट एंड डिस्पोजल केंद्र में कुल 63 मुकदमों से जुड़े मादक पदार्थों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। नष्ट किए गए सामान में सबसे अधिक मात्रा नंदग्राम थाने से बरामद हुई 15,735 लीटर कोडीन युक्त नशीली कफ सिरप की थी। नियमों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई।

जब्त अफीम से दवा बनने की पूरी प्रक्रिया

अफीम एक खास पौधे से मिलती है। इस पौधे का नाम ‘अफीम पोस्त‘ है। इसे वैज्ञानिक भाषा में पैपावर सोम्रिफेरस कहते हैं। इस पौधे पर हरे रंग के कच्चे फल लगते हैं। इन कच्चे फलों को ‘डोडा’ कहा जाता है। जब इन डोडों पर हल्का सा चीरा लगाया जाता है, तो उनमें से सफेद रंग का गाढ़ा दूध जैसा रस निकलता है। यही रस हवा के संपर्क में आकर सूख जाता है और गोंद जैसा काला-भूरा बन जाता है। इसी सूखे रस को हम अफीम कहते हैं।

अफीम के अंदर कई तरह के प्राकृतिक तत्व होते हैं। विज्ञान की भाषा में इन तत्वों को ‘एल्कलॉइड्स’ कहते हैं। अफीम में ऐसे 25 से ज्यादा अलग-अलग तत्व पाए जाते हैं। जब पुलिस अपराधियों से यह अफीम पकड़ती है, तो उसे गाजीपुर के सरकारी कारखाने में भेजा जाता है। इस कारखाने को ‘सरकारी अफीम और अल्कलॉइड वर्क्स’ (GOAW) कहते हैं। यहाँ वैज्ञानिक सबसे पहले लैब में अफीम की पूरी जाँच करते हैं। वह देखते हैं कि अफीम कितनी असली है। इसके बाद मशीनों की मदद से अफीम को अच्छी तरह साफ किया जाता है।

अफीम से कैसे निकाली जाती है दवा?

साफ करने की इस प्रक्रिया को ‘प्रोसेसिंग’ कहते हैं। प्रोसेसिंग के दौरान वैज्ञानिक अफीम के अंदर से दो सबसे जरूरी तत्व अलग करते हैं। पहले तत्व का नाम ‘मॉर्फीन’ है। दूसरे तत्व का नाम ‘कोडीन’ है। ये दोनों तत्व बहुत काम के होते हैं। जब ये तत्व अफीम से अलग हो जाते हैं, तो सरकार इन्हें दवा बनाने वाली बड़ी कंपनियों को बेच देती है। ये कंपनियाँ इन तत्वों की मदद से बहुत ही असरदार और तेज दर्द को ठीक करने वाली दवाएँ तैयार करती हैं।

इन दोनों तत्वों का काम अलग-अलग बीमारियों में होता है। उदाहरण के लिए, ‘कोडीन’ नाम के तत्व का इस्तेमाल सूखी खांसी को ठीक करने के लिए किया जाता है। इससे खांसी के कफ सिरप बनाए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ‘मॉर्फीन’ नाम का तत्व बहुत तेज दर्द को रोकने के काम आता है। डॉक्टर इसका इस्तेमाल गंभीर मरीजों के लिए करते हैं। मॉर्फीन की मदद से दर्द को दबाने वाले इंजेक्शन और गोलियाँ (टैबलेट) बनाई जाती हैं। इस तरह यह अफीम मरीजों का जीवन बचाने के काम आती है।

क्या हर पकड़ी गई अफीम से दवा बन सकती है?

यहाँ एक बात समझना बहुत जरूरी है। पुलिस जो भी अफीम पकड़ती है, उस हर अफीम से दवा नहीं बनाई जा सकती। असल में, नशा बेचने वाले तस्कर बहुत चालाक होते हैं। वे ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अफीम में मिलावट कर देते हैं। वे अफीम का वजन बढ़ाने के लिए उसमें स्टार्च, पाउडर या खराब केमिकल मिला देते हैं। कभी-कभी तो इसमें आर्सेनिक और लेड जैसी जहरीली चीजें भी मिला दी जाती हैं। ऐसी मिलावटी अफीम इंसानी शरीर के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक और जानलेवा हो जाती है।

जब पुलिस इस अफीम को गाजीपुर या नीमच के सरकारी कारखाने में भेजती है, तो वहाँ सबसे पहले उसकी शुद्धता जाँची जाती है। इसके लिए लैब में एक खास टेस्ट होता है। अगर टेस्ट में अफीम मिलावटी निकलती है, तो कारखाना उसे लेने से मना कर देता है। यही नहीं, अगर अफीम में सीलन (नमी) या फंगस लगी हो, तो भी वह रिजेक्ट हो जाती है। ऐसी खराब अफीम को दवा बनाने के लायक नहीं माना जाता। बाद में, इस खराब अफीम को भी बाकी नशीले पदार्थों की तरह आग में जलाकर या केमिकल डालकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है। कारखाने में सिर्फ और सिर्फ एकदम शुद्ध अफीम का ही इस्तेमाल दवा बनाने के लिए होता है।

योगी सरकार: अपराध खत्म कर लोगों की भलाई का नया सफर

उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार आई है, कामकाज का तरीका बिल्कुल बदल गया है। पहले के समय में पुलिस जो करोड़ों रुपए की अफीम पकड़ती थी, वह थानों के मालखानों में सालों तक बंद रहती थी। वह रखी-रखी सड़ जाती थी या फिर कई बार चोरी भी हो जाती थी। लेकिन अब योगी सरकार ने इस पूरे सिस्टम को साफ-सुथरा और बेहतर बना दिया है। अब पकड़ी गई चीजों का सही इस्तेमाल हो रहा है।

सरकार की इस नई नीति से एक साथ दो बड़े फायदे हो रहे हैं। पहला फायदा यह है कि पुलिस नशे का काला कारोबार करने वाले अपराधियों को पकड़कर उनका पूरा नेटवर्क तोड़ रही है। दूसरा फायदा यह है कि उनसे जो अफीम मिल रही है, उसका इस्तेमाल बीमार और लाचार लोगों के इलाज के लिए किया जा रहा है। सरकार एक तरफ अपराधियों पर कड़ा एक्शन ले रही है, तो दूसरी तरफ उनकी जब्त की गई चीजों को जनता की भलाई में लगा रही है। यह सरकार की एक बहुत अच्छी और दूर की सोच को दिखाता है।

पुलिस और कानून के लिए क्यों जरूरी है यह कदम?

कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई बहुत जरूरी है। थानों के मालखानों में बहुत ज्यादा नशा जमा रखना खतरे से खाली नहीं होता। हमेशा डर रहता है कि कहीं यह नशीले पदार्थ चोरी न हो जाएँ। यह भी डर रहता है कि कोई इन्हें दोबारा चोरी-छिपे बाजार में न बेच दे। इसलिए समय-समय पर अभियान चलाकर इन्हें नष्ट करना बहुत जरूरी है। इससे थानों का रिकॉर्ड एकदम साफ हो जाता है और पुलिस के कामकाज में ईमानदारी बनी रहती है।

गाजियाबाद पुलिस ने इन नशीले पदार्थों को खुले में नहीं जलाया। खुले में जलाने से हवा जहरीली हो जाती है। इसके बजाय पुलिस इन्हें धौलाना के एक विशेष वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में लेकर गई। वहाँ पूरी सावधानी और नियमों के साथ इन्हें नष्ट किया गया। इससे पर्यावरण को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुँचा। उत्तर प्रदेश पुलिस का यह कदम देश के बाकी राज्यों के लिए भी एक मिसाल है। यह दिखाता है कि कैसे कड़े नियमों का पालन करके जनता की भलाई और सुरक्षा की जा सकती है।

18000 करोड़ रूपए के प्रोजेक्ट के लिए किसानों से जबरदस्ती जमीन ले रही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार


कर्नाटक में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) यानी बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ भाजपा और जेडी(एस) ने मोर्चा खोल दिया है और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी से हस्तक्षेप करने की माँग की है।

भाजपा और जेडी(एस) का आरोप है कि किसानों की सहमति के बिना हजारों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है।

क्या है पूरा मामला और कितना बड़ा है प्रोजेक्ट?

कर्नाटक सरकार के अनुसार, बेंगलुरु पर बढ़ते दबाव को कम करने और शहर के विस्तार के लिए बिदादी और हरोहल्ली के बीच लगभग 18 हजार करोड़ रुपए की लागत से ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। सरकार इसे भविष्य के शहरी विकास और नई टाउनशिप मॉडल के तौर पर पेश कर रही है।

विपक्ष का दावा है कि इसके लिए हजारों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। दावों के मुताबिक, करीब 7,481 एकड़ से लेकर 9,600 एकड़ तक जमीन अधिग्रहण की योजना बताई जा रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि जून के अंत तक भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अधिसूचनाएँ पूरी की जाएँगी और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।

BJP ने बताया- किसान कर रहे विरोध, नहीं हो रही सुनवाई

भाजपा और जेडी(एस) ने इस परियोजना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने राहुल गाँधी को लिखे पत्र में दावा किया कि 25 गाँवों के 3,500 से ज्यादा किसान पिछले करीब 470 दिनों से विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी आपत्तियों पर सार्वजनिक सुनवाई तक नहीं की गई।

जेडी(एस) नेता निखिल कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के पारदर्शिता और सहमति संबंधी प्रावधानों को नजरअंदाज किया। उन्होंने दावा किया कि अंतिम भूमि अधिग्रहण अधिसूचना जारी करने से पहले पर्याप्त जनसहमति नहीं ली गई।

इसी बीच जेडी(एस) ने वित्त विभाग के दस्तावेज भी सार्वजनिक किए, जिनमें परियोजना के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल, फंडिंग व्यवस्था और एक साथ बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहण पर सवाल उठाए जाने का दावा किया गया। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि परियोजना के लिए HUDCO से लगभग 12 हजार करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई जा रही है।

भाजपा ने कहा- यह राज्य प्रायोजित भूमि कब्जा

केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि यह विकास परियोजना नहीं बल्कि रियल एस्टेट हितों को फायदा पहुँचाने वाला मॉडल बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की इच्छा के खिलाफ उपजाऊ जमीन ली जा रही है और विरोध करने वालों पर प्रशासनिक दबाव डाला जा रहा है।

वहीं भाजपा ने इसे ‘राज्य प्रायोजित भूमि कब्जा’ बताते हुए राहुल गाँधी से मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप कर जमीन अधिग्रहण रोकने का निर्देश देने की माँग की है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना पहले से चली आ रही शहरी योजना का हिस्सा है और इसे रोका नहीं जाएगा।

NEET-UG री-एग्जाम से पहले फर्जीवाड़ा और ठगी रोकने के लिए भारत सरकार ने Telegram ऐप पर लगाई अस्थायी रोक


NEET-UG 2026 की री-एग्जाम को सुरक्षित कराने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर 22 जून 2026 तक अस्थायी रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही टेलीग्राम का मैसेज एडिट फीचर भी 30 जून तक बंद रहेगा।

यह फैसला 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

NTA के मुताबिक, कुछ ठग गिरोह टेलीग्राम चैनलों के जरिए छात्रों को नकली प्रश्नपत्र बेच रहे थे। ये लोग ‘Paper Leaked NEET’ और ‘Private Mafia’ जैसे नामों से चैनल चला रहे थे। वे पेपर के बदले छात्रों के परिवारों से लाखों रुपए माँग रहे थे।

NTA ने साफ किया है कि नीट का असली प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित है। परीक्षा से पहले यह किसी के पास भी मौजूद नहीं है। जाँच में सामने आया कि ठग टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।

वे परीक्षा खत्म होने के बाद पुराने मैसेज को बदल देते थे। उसमें असली प्रश्नपत्र जोड़कर ऐसा दिखाते थे, मानो पेपर पहले ही लीक हो गया हो। इसी फर्जीवाड़े और अफवाहों को रोकने के लिए सरकार ने टेलीग्राम पर यह पाबंदी लगाई है। 

राहुल गाँधी ने ट्रेन में जिस युवक की वीडियो को शेयर करके सरकार को घेरने की कोशिश की है उस घटना का कोई सोर्स नहीं


आखिर कांग्रेस का इकोसिस्टम कब तक अफवाह फैलाकर जनता को गुमराह करता रहेगा? कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ट्रेन में एक व्यक्ति की कथित तौर पर दम घुटने से मौत का दावा किया गया। बताया गया कि यह वीडियो पाटलिपुत्र स्टेशन की है और वीडियो में दिख रहा व्यक्ति एग्जाम देने जा रहा था। इस वीडियो को कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने भी रीपोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। लेकिन रेलवे ने कांग्रेस ने फैलाई इस वीडियो की हकीकत पर सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गाँधी ने वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा, “इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया। ये उस भारत के लाचार युवा हैं, जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती। चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है – भीड़, घुटन, और बेबसी।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूँज सुनना ही नहीं चाहती। पर मैं वादा करता हूँ – हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।”

वीडियो पर पूर्व मध्य रेलवे ने संज्ञान लिया। रेलवे ने जाँच के बाद बताया कि यह वीडियो पाटलिपुत्र स्टेशन की नहीं है। इसी के साथ रेलवे ने बताया कि इस वीडियो में व्यक्ति की मौत का कोई आधिकारिक सोर्स भी नहीं है। इसके अलावा रेलवे ने व्यक्ति की दम घुटने से मौत के दावे को भी खारिज किया।

रेलवे ने कहा, “वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के हाव-भाव और हालत देखकर ऐसा लगता है कि शायद वो किसी बीमारी या ज्यादा थकान की वजह से जूझ रहा हो।”

अखिलेश यादव सरकार में केवल मुसलमानों का कल्याण


उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति किसी से छिपी नहीं है। सपा ने खुद को हमेशा अल्पसंख्यकों की पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया। विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के बीच अपना जनाधार बनाए रखने के लिए पार्टी ने अपने विभिन्न कार्यकालों में अनेक योजनाओं के केंद्र बिंदु में मुस्लिमों को ही रखा। यहां तक कि कई योजनाओं तो उन्होंने सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही शुरू कीं। मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अखिलेश यादव के कार्यकाल तक अल्पसंख्यक कल्याण को राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया गया। यही कारण है कि भाजपा सहित अन्य दल अक्सर समाजवादी पार्टी पर “मुस्लिम तुष्टिकरण” की राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं।

सपा ने चार कार्यकाल में मुस्लिमों में ही पहचान बनाई

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार चार प्रमुख कार्यकालों में सत्ता में रही। मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 के बीच मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 तक राज्य की कमान संभाली। इन अवधियों में मुस्लिम समुदाय की शिक्षा, छात्रवृत्ति, रोजगार, मदरसा आधुनिकीकरण, अल्पसंख्यक महिलाओं के उत्थान और सामाजिक सुरक्षा के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव तक समाजवादी पार्टी ने अल्पसंख्यक कल्याण को अपनी राजनीति और शासन की केंद्रीय धुरी बनाए रखा। छात्रवृत्ति, मुस्लिम लड़कियों के लिए आर्थिक सहायता, मदरसा आधुनिकीकरण, उर्दू शिक्षा और आरक्षण की मांग जैसी पहलों ने मुस्लिम समुदाय के बीच पार्टी की मजबूत पहचान बनाई। दूसरी ओर, इन्हीं नीतियों को विपक्ष ने “मुस्लिम तुष्टिकरण” करार दिया।

कब्रिस्तानों की चारदीवारी योजना: वोट बैंक के लिए कब्जे 

अखिलेश यादव सरकार के सबसे चर्चित फैसलों में से एक राज्यभर के कब्रिस्तानों की चारदीवारी का निर्माण था। वर्ष 2012-13 के बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किया गया। सरकार का तर्क था कि भूमि विवादों और अतिक्रमण को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हजारों कब्रिस्तानों की चारदीवारी के लिए एक हजार करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए गए। विपक्ष ने इसे खुलकर मुस्लिम तुष्टिकरण बताया। यह योजना मुस्लिम समाज में बेहद लोकप्रिय रही और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिला। सपा सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मो. आजम खां के पास था। उन्होंने ही कब्रिस्तानों की चारदीवारी के निर्माण की योजना चलाई। इस योजना पर पांच साल में 1200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जबकि हकीकत यह है कि कई जिलों में योजना पर काम ही नहीं हुआ। जहां काम हुआ भी वहां भी घपले की शिकायतें हैं।

लैपटॉप वितरण योजना में उर्दू शिक्षा और उर्दू सॉफ्टवेयर को बढ़ावा

अखिलेश यादव सरकार ने लैपटॉप वितरण योजना में उर्दू सॉफ्टवेयर शामिल करने की घोषणा की। रामपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि विद्यार्थियों को दिए जाने वाले लैपटॉप में हिंदी और अंग्रेजी के साथ उर्दू सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराया जाएगा। मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग ने इसे उर्दू भाषा के संरक्षण और डिजिटल युग में उसके विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना।

सच्चर समिति के तहत मुस्लिमों को सरकारी नौकरी में आरक्षण की पैरवी

दिसंबर 2012 में समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सत्ता में आने पर सपा विधि विषेशज्ञों की राय लेकर केरल तथा आंध्र प्रदेश की तर्ज पर मुसलमानों को इतना आरक्षण देगी, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुसलमानों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे। हालांकि यह नीति पूरी तरह लागू नहीं हो सकी, लेकिन मुस्लिम समुदाय के बीच इसे सपा की राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत किया गया।

‘हमारी बेटी उसका कल’: मुस्लिम लड़कियों के लिए सबसे चर्चित योजना

10 दिसंबर 2012 को रामपुर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने “हमारी बेटी उसका कल” योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत हाईस्कूल उत्तीर्ण अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को 30,000 रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाती थी। इसका उद्देश्य लड़कियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह संबंधी सहायता देना था। योजना का सबसे बड़ा लाभ मुस्लिम छात्राओं को मिला। क्योंकि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय का है। प्रारंभिक चरण में लगभग 14,000 लड़कियों को इसका लाभ मिला। बाद में यह संख्या और बढ़ी। सरकार ने इस योजना के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। “हमारी बेटी उसका कल” योजना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका तक दाखिल हुई थी।

 वोट बैंक को साधने के लिए 84 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे

2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार समाजवादी पार्टी ने 2012 विधानसभा चुनाव में लगभग 84 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। सपा के 42 मुस्लिम उम्मीदवार विजयी होकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में कुल 63 मुस्लिम विधायक विधानसभा पहुंचे थे, जिनमें सबसे अधिक सपा के थे। 15 मार्च 2012 को बनी पहली अखिलेश यादव सरकार में कुल 48 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इनमें 9 मुस्लिम मंत्री शामिल थे।
प्रदेश में हज यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार
मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए अखिलेश सरकार ने हज यात्रियों की सुविधा के लिए लखनऊ हज हाउस और अन्य व्यवस्थाओं का विस्तार किया। हज प्रशिक्षण शिविरों, आवास और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया। गाजियाबाद में 1886 हज यात्रियों के रुकने के लिए बनाए गए हज हाउस में शासन ने 51.16 करोड़ रुपये खर्च किए। 11 साल में बनकर तैयार हुए इस हज हाउस शिलान्यास 30 मार्च 2005 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम ¨सिंह ने किया था और उद्घाटन उनके पुत्र व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 5 सितंबर 2016 को किया। नगर विकास मंत्री आजम खान ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों के हज पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जाने के लिए व्यवस्था की गई है।

हिंदुओं को जहरीला कह रहा अखिलेश का सांसद, सनातन विरोधियों "अगर माँ का दूध पिया है तो किसी अन्य मजहब के लिए ऐसा बोलकर दिखाओ?" फिर कैसे हिंदुओं की वकालत कर रहे अखिलेश?

सुभाष चन्द्र

समाजवादी पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं आखिर कब तक अपने नेताओं के गुलाम बनकर सनातन का अपमान सहते रहोगे? अगर कालनेमि या जयचन्द हो बात दूसरी है और नहीं अगर रगों में हिन्दू खून है बिना किसी देरी के समाजवादी पार्टी को छोड़ सनातन के खिलाफ जहर उगलने को सबक बंगाल की तरह सबक सिखाना होगा। पूछो इन सनातन विरोधियों से "अगर माँ का दूध पिया है तो किसी अन्य मजहब के लिए ऐसा बोलकर दिखाओ?" 

अखिलेश यादव ने कुछ दिन पहले हिंदुओं के लिए ऐसा बयान दिया जो किसी के गले से नहीं उतर सकता।  उन्होंने कहा -

लेखक 
चर्चित YouTuber 
“मैंने और पिताजी ने हिंदुत्व के लिए क्या नहीं किया, लेकिन मुझे कदम कदम पर यह अहसास कराया गया कि हम हिंदू नहीं शूद्र हैं, पर मैं अडिग हूँ, सनातन की राह नहीं छोड़ने वाला”

एक और बयान में अखिलेश ने कहा - “मैं हर दिन भगवान श्री राम, भगवान शिव और जितने भी देवी देवता हैं, उन्हें प्रणाम करके ही घर से निकलता हूँ और जिन बीजेपी वालों को लगता है कि ऐसा मैं नहीं करता, वे आके देख सकते हैं।”

कल राम मंदिर में हुई कथित चोरी की जांच पर अखिलेश ने कहा कि मंदिर के पंडितों की भी जांच की जाएगी जो ब्राह्मणों का घोर अपमान है। बड़ा दूध उतर रहा है ब्राह्मणों और हिंदुओं के लिए हिंदू वोट के लिए लेकिन क्या हिंदू तुम्हें वोट देंगे? उधर आपने सापाचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को खुला छोड़ रखा है मोदी और योगी को गाली बकने के लिए और फिर भी हिंदुओं का वोट चाहिए। 

आपने और पिताजी जी ने हिंदुओं के लिए जो किया वो किसी से छिपा नहीं है। अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाना भी तो हिंदुत्व की सेवा करना था न और उत्तर प्रदेश में दंगों में आप हमेशा मुस्लिमों के साथ खड़े रहे, गंगा जी में मुस्लिमों द्वारा इफ्तार पार्टी के दौरान गौमांस के टुकड़े और हड्डियां फेंकी गई लेकिन आपने उसकी निंदा करने की बजाय उसका समर्थन कर दिया और बात करते हो हिंदुत्व के लिए सेवा करने की

भगवान राम और भगवान शिव और देवी देवताओं को प्रणाम करके निकलते हो तो फिर आज तक श्री राम मंदिर के दर्शन करने क्यों नहीं गए? आपको रामलला की प्राणप्रतिष्ठा का निमंत्रण मिला लेकिन आप नहीं गए केवल इसलिए क्योंकि मुसलमान वोटर नाराज़ न हो जाए।

स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस, भगवान राम और हिंदुओं के लिए जहर उगलता रहा लेकिन आपने सनातन का कथित सिपाही होने के बाद भी उसे कभी नहीं रोका

राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों को वेश्याओं से भी गया गुजरा कहा और इतने से भी दिल नहीं भरा तो आगे कहा कि गुर्जरों और जाट महिलाओं में एक से ज्यादा पति रखने की प्रथा है। दोनों बयानों के लिए उसने बाद में माफ़ी मांगी लेकिन अखिलेश जी आपने तो चूं तक नहीं की और न राजकुमार भाटी को कुछ कहा

आज आपके एक सिपहसालार जावेद अली ने हिंदुओं को “जहरीला” कहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की वजह से हिंदू समाज “काफी हद तक जहरीला” हो गया है। हिंदू समाज ने जहर निगलना शुरू कर दिया है। उसने यह भी कहा कि मुलायम सिंह के समय में संभल में आपसी भाईचारा था जबकि 1978 के दंगों के बाद वहां हिंदू घटते चले गए जो आज केवल 20% रह गए और मुसलमान 80% हो गए

जावेद अली रोज रोज जबरन हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन के षड़यंत्र सामने आ रहे है और “सर तन से जुदा” के नारे ही नहीं लगते, कर भी दिए जाते हैं। हिंदुओं को भोजन में थूक और पेशाब मिला कर खिलाने के किस्से आम हो गए है। उनसे कौन सा सौहाद्र बढ़ता है। हिंदू समाज को कह रहे हो कि जहर निगल रहा है तो मुस्लिम समाज कौन सा अमृतपान कर रहा है?

क्या अखिलेश यादव हिंदुओं को जहरीला कहने पर जावेद अली से कुछ कहेंगे या खुद उनके बयान के लिए माफ़ी मांगेंगे?

असम : जब ‘रजस्वला’ होती हैं माँ कामाख्या: 3 दिन रुक जाती है पूजा, खुलते हैं सृजन, शक्ति और साधना के रहस्य; अंबुबाची मेले की अनोखी कथा

             कामाख्या मंदिर के अंबूबाची मेले में हर साल लाखों श्रद्धालुओं की लगती है भीड़ (फोटो साभार: AI)
भारत की धार्मिक परंपराएँ केवल पूजा-पाठ या आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें प्रकृति, जीवन, स्त्री शक्ति और सृजन का गहरा दर्शन भी छिपा हुआ है। देश में कई ऐसे पर्व मनाए जाते हैं जो मनुष्य और प्रकृति के संबंध को समझाते हैं। इन्हीं में से एक है अंबुबाची मेला, जो हर साल असम के गुवाहाटी स्थित माँ कामाख्या मंदिर में आयोजित किया जाता है।

यह मेला अपने स्वरूप, मान्यताओं और धार्मिक रहस्य के कारण बाकी मेलों से बिल्कुल अलग माना जाता है। यहाँ न तो केवल दर्शन का महत्व है और न ही केवल अनुष्ठानों का, बल्कि यह आयोजन उस समय से जुड़ा माना जाता है जब देवी स्वयं विश्राम करती हैं।

मान्यता है कि इन दिनों माँ कामाख्या वार्षिक रजस्वला अवस्था (मासिक धर्म) में रहती हैं और इसी वजह से मंदिर के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

पूर्वोत्तर भारत का यह सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, तांत्रिक साधक और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जुटते हैं। इन दिनों पूरा क्षेत्र भक्ति, साधना, रहस्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है।

क्या है अंबुबाची मेला और इसकी मान्यता क्यों है अलग?

अंबुबाची मेला देवी शक्ति की उपासना से जुड़ा एक वार्षिक धार्मिक आयोजन है। इसकी सबसे विशेष मान्यता यह है कि इस अवधि में माँ कामाख्या को रजस्वला माना जाता है। इस कारण देवी को विश्राम दिया जाता है और मंदिर में सामान्य पूजा-पाठ रोक दिया जाता है।

यह परंपरा स्त्री शरीर और सृजन प्रक्रिया के सम्मान का प्रतीक भी मानी जाती है। जहाँ कई संस्कृतियों में मासिक चक्र को अलग नजर से देखा गया, वहीं इस परंपरा में इसे सृजन शक्ति और जीवन के स्रोत के रूप में सम्मान दिया गया है। अंबुबाची शब्द को भी कई लोग जल, उर्वरता और सृजन से जोड़कर देखते हैं।

यही वजह है कि यह मेला केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और दार्शनिक महत्व भी रखता है। तंत्र साधना से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में साधना और मंत्र सिद्धि का विशेष महत्व होता है, इसलिए बड़ी संख्या में साधक यहाँ पहुँचते हैं।

अंबुबाची मेला 2026: कब शुरू होगा और क्या रहेगा कार्यक्रम?

साल 2026 में अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून की रात से होगी। इसी दिन रात लगभग 9 बजकर 8 मिनट पर मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाएँगे। इसके बाद 23 जून, 24 जून और 25 जून तक मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह बंद रहेगा। इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को देवी के प्रत्यक्ष दर्शन की अनुमति नहीं होती।

मंदिर परिसर में भी सामान्य धार्मिक गतिविधियों को सीमित रखा जाता है। चार दिवसीय इस आयोजन का समापन 26 जून की सुबह विशेष अनुष्ठानों और शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन दोबारा शुरू किए जाएँगे। हर साल यहाँ आने वाले लोगों की संख्या लाखों में होती है।

पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने के बाद प्रशासन और मंदिर समिति विशेष व्यवस्था करती रही है। इस बार भी सुरक्षा, सफाई, पेयजल, चिकित्सा और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं।

प्रवृत्ति और निवृत्ति: मेले के दो आध्यात्मिक चरण

अंबुबाची मेले की पूरी प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में पूरी होती है- प्रवृत्ति और निवृत्ति। प्रवृत्ति चरण देवी के रजस्वला काल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी को विश्राम दिया जाता है। इन दिनों पूजा, आरती और नियमित धार्मिक गतिविधियां नहीं होतीं।

इसके बाद आता है निवृत्ति चरण। इसे देवी के विश्राम काल की समाप्ति और पुनः ऊर्जा के साथ दर्शन देने की अवस्था माना जाता है। विशेष शुद्धिकरण और वैदिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर खोला जाता है। यही वह समय होता है जब सबसे ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं और मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।

धरती माँ के विश्राम और स्त्री शक्ति का संदेश

अंबुबाची मेले का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ा एक गहरा प्राकृतिक और सांस्कृतिक संदेश भी माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार, जैसे एक स्त्री मासिक धर्म के दौरान विश्राम करती है, उसी तरह इस अवधि में धरती भी विश्राम करती है।

यह समय सामान्य रूप से मानसून के आगमन और भूमि की नई उर्वरता से भी जोड़ा जाता है। इसी सोच के कारण आज भी कई परिवार इन दिनों खेती-बाड़ी, भूमि की खुदाई या कुछ शुभ कार्यों को टालते हैं। इसका उद्देश्य किसी भय से नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और सृजन प्रक्रिया को समझने से जुड़ा माना जाता है।

यह मान्यता बताती है कि धरती केवल संसाधन नहीं बल्कि जीवन देने वाली शक्ति है, जिसे समय-समय पर विश्राम और सम्मान की आवश्यकता होती है।

अंगोदक, अंगवस्त्र और मेले से जुड़ी विशेष परंपराएँ

अंबुबाची मेले की एक महत्वपूर्ण पहचान है यहाँ मिलने वाला विशेष प्रसाद। परंपरा के अनुसार, मंदिर बंद करने से पहले गर्भगृह में विशेष वस्त्र रखे जाते हैं। कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को अंगोदक और अंगवस्त्र प्रदान किया जाता है। अंगोदक पवित्र जल को कहा जाता है जबकि अंगवस्त्र लाल वस्त्र के छोटे भाग को माना जाता है।
श्रद्धालु इसे देवी की कृपा और शक्ति का प्रतीक मानकर अपने साथ ले जाते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर में देशभर से आए साधु-संतों और तांत्रिक परंपरा से जुड़े लोगों का भी विशेष जमावड़ा देखने को मिलता है, जिससे मेले का आध्यात्मिक स्वरूप और अधिक विशिष्ट हो जाता है।

माँ कामाख्या मंदिर: जहाँ मूर्ति नहीं, शक्ति के प्रतीक की होती है पूजा

अंबुबाची मेले की आत्मा माँ कामाख्या मंदिर ही है। असम के गुवाहाटी शहर की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के शरीर के विभिन्न अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। कामाख्या को उस स्थान से जोड़ा जाता है जहाँ देवी का योनि भाग गिरा माना जाता है।
इसी कारण यह मंदिर शक्ति, सृजन और देवी उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहाँ देवी की पारंपरिक मूर्ति नहीं है। गर्भगृह में प्राकृतिक शिला स्वरूप की पूजा की जाती है, जो हमेशा जलधारा से सिक्त रहती है। यही स्वरूप इस मंदिर को बाकी शक्तिपीठों से अलग बनाता है।
मुख्य मंदिर के आसपास देवी के विभिन्न स्वरूपों और भगवान शिव को समर्पित कई मंदिर भी स्थित हैं, जो पूरे नीलाचल क्षेत्र को एक विशाल आध्यात्मिक परिसर का रूप देते हैं। इसी वजह से अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आस्था, स्त्री शक्ति, प्रकृति, सृजन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत उत्सव माना जाता है।

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 : ममता की तरह धमकाने पर उतरे अखिलेश यादव, कहा- सरकार बनी तो करेंगे सख्त कार्रवाई: एनकाउंटर्स को बताया फर्जी

जिस तरह बंगाल में ममता बनर्जी मुसलमानों का डर दिखाकर हिन्दुओं को धमका रही थी, ठीक उसी रास्ते पर अखिलेश यादव चल निकले हैं। योगी आदित्यनाथ से पहले उत्तर प्रदेश में जो जंगल राज था उसी की वापसी करने की तैयारी की जा रही है। जो पुलिस समाजवादी पार्टी के मंत्री की भैंस ढूंढने कानून व्यवस्था को छिन बिन्न कर रखा था वही वापस लाने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया है। जब सत्ता से 10 साल दूर रहने की इतनी तड़प हो रही है कि पुलिस अधिकारियों को धमका रहे हैं हिन्दुओं का क्या होगा? क्या हिन्दू योगी राज से पहले की तरह समाजवादी पार्टी के राज में अपने त्यौहारों को खुलकर नहीं मना सकेंगे? बंगाल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के हिन्दुओं को ही नहीं बल्कि सभी धर्मों को समाजवादी पार्टी के खिलाफ लामबंद होना होगा।  
चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होने सत्ता के बिना किस तरह बिलबिला रहे हैं कि प्रदेश में सत्ताभोग नहीं तो चलो संसद पहुँच कर राजशाही करो। ऐसे नेताओं को ना ही देश की चिंता है और ना ही जनता की इन्हे चाहिए विलासिता जीवन और तिजोरी भरने का साधन।  
देखिए सोशल मीडिया पर वायरल ‎ये है असली रुप इन कांग्रेसी,सपा,आरजेडी,टीएमसी और अन्य पारिवारिक पार्टी का।
हिंदुओं के वोट पाने के लिए 2014 के बाद से हमें मजबूरन पूजा करने मंदिरों में जाना पड़ रहा है। लेकिन उससे आप कोई गलतफहमी मत पाल लेना कि हम अब बदल गए हैं, खुदा कसम हम वही है और वही रहेंगे जो 2014 पहले हुआ करते थे
देखिए न, हम जो भी तोड़फोड़ करते हैं हिंदुओं में ही करते हैं मुसलमानों को जातियों में बांटकर आपस में लड़ाने का काम ना हम तब करते थे और न आज कर रहे हैं, ऐसा गंदा काम करने की बात तो हम कभी सोचते भी नहीं
 2027 में रहम मेरे ऊपर ही करना किसी और पर नहीं,आपको खुदा का वास्ता  
आज राज्य की जनता योगी मॉडल अपनाने की मांग कर रही है, और समाजवादी पार्टी और INDI गठबंधन हिन्दुओं को जातियों में बाँट राज करने की हिमाकत कर रहे हैं। मुसलमानों को भी सोंचना होगा कि जो अपने धर्म का नहीं किसी दूसरे के मजहब नहीं हो सकता। अगर हिन्दुओं को ये लोग बांट रहे हैं तो बदनाम मुसलमान भी हो रहा है।   
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब धमकाने पर उतर आए हैं। अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बयान देते हुए धमकी दी है कि प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो जिन अधिकारियों ने फर्जी एनकाउंटर किए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने रोजगार के मुद्दे पर योगी सरकार और केंद्र की BJP सरकार पर आरोप लगाया कि युवाओं को नौकरी देने के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने वादा किया कि समाजवादी सरकार बनने पर एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और गरीबों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर तथा मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। अखिलेश ने पेट्रोल-डीजल में कथित मिलावट का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे लोगों की गाड़ियों को नुकसान हो रहा है।

असम में 5 मुस्लिम छात्रों ने की हिंदू छात्रों को बीफ खिलाने की कोशिश, स्कूल ने नहीं लिया एक्शन तो पीड़ितों ने कराई FIR: 1 की माँ को पुलिस ने किया गिरफ्तार

                                                                                                                साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश
असम के गोलपारा जिले के एक स्कूल में बीफ खाने से जुड़ी घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। हब्रागघाट हायर सेकेंडरी स्कूल क्रिश्नई में कक्षा 9 के कुछ छात्रों से जुड़ी इस घटना को लेकर पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि पाँच मुस्लिम छात्रों ने स्कूल परिसर में बीफ लाकर खाया और दो साथ पढ़ने वाले हिंदू छात्रों को खिलाने की कोशिश भी की।

स्कूल परिसर में हुई घटना

मामला गोलपाड़ा जिले के अंतर्गत कृष्णाई स्थित हाबराघाट हायर सेकेंडरी स्कूल का बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (5 जून 2026) को कक्षा 9 के पाँच छात्रों ने लंच ब्रेक के दौरान बीफ खाया।

इसी दौरान उन्होंने अपने साथ पड़ने वाले दो हिंदू छात्रों को वही माँस खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। घटना के बाद पीड़ित छात्रों ने स्कूल के एक शिक्षक को इसकी जानकारी दी।

शिकायत, प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस जाँच

बताया गया है कि शुरुआत में स्कूल प्रशासन ने मामले को शांत करने की कोशिश की और छात्रों को चुप रहने की सलाह दी। बाद में परिजनों को जानकारी मिलने पर वे स्कूल पहुँचे और कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद मामले में कृष्णई पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। पुलिस ने छात्रों और उनके अभिभावकों से पूछताछ की, जबकि एक छात्र की माँ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदीप तिमुंग और नवनीत महंता ने स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और जाँच जारी रखने की बात कही है।

विपक्ष के नेता भाजपा से सीखें जो 2 सीट पर आ गई लेकिन टूटी नहीं और न देशद्रोह के मार्ग पर चली

सुभाष चन्द्र

आज ममता बनर्जी की पार्टी एक हार के बाद खंड खंड हो गई है और खुद ममता अपनी पार्टी को कांग्रेस में शामिल करने की सोच रही है। उसकी पार्टी की 80 सीट, भाजपा की 1984 की लोकसभा में 2 सीट से कहीं ज्यादा सम्मानजनक हैं

भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। पहले यह भारतीय जनसंघ हुआ करती थी जिसने अपना सफर 1951 के लोकसभा चुनाव में 3 सीट से शुरू किया। 1957 में 4 हुई, 1962 में 14, 1967 में 35 और 1971 में 22 हुई

लोकसभा का 1977 का चुनाव 5 दलों ने एक जनता पार्टी बना कर लड़ा और 295 सीट जीत कर इंदिरा गांधी को पटक दिया जिसकी कांग्रेस को मात्र 153 सीट मिली। जनता पार्टी की 295 सीटों में जनसंघ घटक की सबसे अधिक 93 सीट थी। 1980 के चुनाव में जनता पार्टी की मात्र 31 सीट आई जिनमें मुझे याद पड़ता है जनसंघ की 15 या 16 सीट थी

लेखक 
चर्चित YouTuber 
उसके बाद 1984 का चुनाव राजीव गांधी ने इंदिरा जी की लाश को कंधे पर ढो कर लड़ा और भाजपा को मात्र 2 सीट मिली। इतना ही नहीं उस समय चुनाव के दौरान Organiser Weekly में शीर्षक Lakhs of BJP voters removed from voter list रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। यानि खुलेआम वोट चोरी। लेकिन न तो भाजपा में कोई टूट हुई और न किसी और दल में विलय का ख्याल किया। 1989 में कांग्रेस पिछले चुनाव की 404 सीट से 197 और भाजपा 2 से बढ़ कर 85 पर पहुँच गई। 1984 के बाद कभी कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला लेकिन 2014 में 30 साल बाद मोदी के नेतृत्व में भाजपा को बहुमत मिला और 282 सीट मिली लेकिन कांग्रेस 44 सीट पर सिमट गई। भाजपा का आधारभूत ढांचा मजबूत है जबकि कांग्रेस का खोखला है

भाजपा ने 2 सीट आने पर भी और 1951 से 1996 तक जब वाजपेयी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने तक 45 साल विपक्ष में बैठने के बावजूद कभी नहीं कहा कि कांग्रेस ने वोट चोरी की, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में ले लिया। लोकतंत्र खत्म कर दिया कांग्रेस ने। 1989 से 2014 तक भाजपा की तरफ से विपक्ष के नेता की कुर्सी पर अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी जी और सुषमा स्वराज रहे लेकिन कभी किसी ने स्वयं सत्ता पक्ष के खिलाफ नारेबाजी नहीं की लेकिन आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी का व्यवहार देख लीजिए। मैंने किसी मुख्यमंत्री को विधानसभा में स्वयं नारे लगाते हुए नहीं देखा लेकिन ममता बनर्जी ऐसी मुख्यमंत्री थी जिसने सदन में नारे लगाए -”मोदी चोर, भाजपा चोर”। नारेबाजी केजरीवाल ने भी कम नहीं की

राहुल गांधी ने देश में ही नहीं विदेशों में भी भारत का अपमान किया और एक बात तोते की तरह रट कर बोली कि भारत में लोकतन्त्र ख़तम हो चुका है, आप लोकतंत्र बहाल करने में मदद करें। इतना ही नहीं मणिशंकर अय्यर ने तो 2014 में ही पाकिस्तान में जाकर उससे कहा आप मोदी को हटाएं और हमें लाएं। कांग्रेस के जयराम रमेश ने मोदी द्वारा नेहरू के चुने हुए प्रधानमंत्री काल को पार करने पर भी एक बकवास की है कि “मोदी का दूसरा पहलू है कि वो लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार है” 

अगर मोदी ने लोकतंत्र की हत्या की होती तो तुम ऐसी बकवास करने की हिम्मत न करते। लोकतंत्र की हत्या तो तुम्हारी दादी इंदिरा गांधी ने की थी जब इमरजेंसी लगाई थी। क्या चाहते हो मोदी भी वही करे जो इंदिरा ने किया? 

कांग्रेस वो कर ही नहीं सकती जो विपक्ष का नेता होते हुए वाजपेयी ने किया। 1994 में जिनेवा में कश्मीर पर भारत का पक्ष जिस तरह उन्होंने रखा वो आज की कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है

इतना ही नहीं वाजपेयी से प्रधानमंत्री के तौर पर जब अमेरिका में कांग्रेस के बारे सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया - “while the ruling party and the opposition might have their differences at home, ‘in foreign countries, we are all Indians first.’ He consistently maintained that political disputes should remain within India’s borders. दूसरी तरफ राहुल गांधी है जो विदेशों में जाकर भाजपा, आरएसएस और मोदी को गाली बकता फिरता है

विपक्ष कभी भी भाजपा से कुछ नहीं सीख सकता।