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क्या The Hindu भारत विरोधियों के साथ है? The Hindu, दिल्ली को दहलाने वाले TERRORIST हैं… आदमी-आरोपित या संदिग्ध नहीं: वामपंथी मीडिया कब सुधारेगी अपनी भाषा, आतंकियों की पहचान छिपाने का इतिहास बहुत पुराना

                                   द हिंदू ने अपनी खबरो में दिल्ली ब्लास्ट के आतंकियों को अक्यूज लिखा है
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए भयानक कार ब्लास्ट ने पूरे राष्ट्र को स्तब्ध कर दिया। एक सफेद ह्युंडई i20 कार में भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक लादकर सुसाइड बॉम्बर डॉक्टर उमर उन नबी ने धमाका किया। इस धमाके में 15 निर्दोष लोग मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए।

दिल्ली पुलिस ने तत्काल यूएपीए और एक्सप्लोसिव्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया, जबकि केंद्र सरकार ने इसे साफ तौर पर आतंकी हमला घोषित कर दिया। एनआईए की जाँच में सामने आया कि उमर पुलवामा का डॉक्टर था, जो फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था और जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद जैसे इस्लामिक मिलिटेंट ग्रुप्स से जुड़ा था।

उसके सहयोगी डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई, अदील मजीद राथर, शकील और शाहीन सईद भी गिरफ्तार हुए, जो ‘टेरर डॉक्टर्स’ के नेटवर्क का हिस्सा थे। इस घटना ने ‘व्हाइट-कॉलर टेररिज्म’ को सबके सामने उजागर किया।

इसके बाद तो इसे आतंकी हमला कहने में कोई भी गुंजाइश भी नहीं बची। केंद्र सरकार की कैबिनेट ने भी इसे ‘एंटी-नेशनल फोर्सेस’ द्वारा किया गया हेसियन टेरर एक्ट करार दिया। जाँच में सीसीटीवी फुटेज से ये भी सामने आया कि उमर ने कार को रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास पार्क किया और ट्रैफिक सिग्नल पर विस्फोट किया।

डीएनए टेस्ट से उमर की पहचान हुई, जो फरीदाबाद रेड्स के बाद घबराकर दिल्ली की ओर भागा था। एनआईए ने 2900 किलो विस्फोटक बरामद किए, जो जैश के हैंडलरों से जुड़े थे। यह साफ हो गया था कि पाकिस्तान में पल रहे टेरर मॉड्यूल एक्टिव हैं और उन्होंने ही देश में अशांति फैलाने की कोशिश की।

आतंकी शब्द से परहेज करता ‘द हिंदू’

ऐसे स्पष्ट प्रमाणों के बावजूद ‘द हिंदू’ जैसे वामपंथी मीडिया हाउस अपने पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट्स में ‘आतंकी’ शब्द लिखने से पूरी तरह परहेज किया।

द हिंदू ने ब्लास्ट के बाद से लेकर अब तक उमर को ‘डॉक्टर’, ‘आरोपित’, ‘संदिग्ध’ या ‘मैन’ ही लिखा है। 17 दिन बीतने के बाद भी उनकी हेडलाइंस अब तक अस्पष्ट हैं। हेडलाइन्स में ‘डॉक्टर उमर की कार में ब्लास्ट’, ‘आरोपित डॉक्टर गिरफ्तार’, ‘रेड फोर्ट ब्लास्ट में संदिग्ध की भूमिका’ लिखा गया है।

यहाँ तक कि जहाँ ‘टेररिस्ट’ लिखा, वहाँ इस शब्द को सिंगल कोट्स में डाल दिया, मानो अब तक उन्हें संदेह ही है। और ये वह पाठक के मन में भी पैदा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट्स में भी ‘कार ब्लास्ट’, ‘एक्सप्लोडिंग कार’ आदि का पैटर्न रहा बिना ‘आतंकवादी हमला’ लिखे।एक तरह से यह पत्रकारिता नहीं बल्कि टेरर सिम्पैथी कहा जाना चाहिए।​

पहले भी दिखा वामपंथ का नैरेटिव पैटर्न

यह कोई पहली बार नहीं है। द हिंदू की रिपोर्टिंग में अक्सर यह पैटर्न दिखता है कि जब भी किसी घटना को धो-पोंछना होता है, किसी आरोपित को पाक साफ दिखाना होता है को तो शब्दों से खेला जाता है। दिल्ली ब्लास्ट में भी द हिंदू की अब तक रिपोर्ट्स की हेडलाइंस इसी पैटर्न को दर्शाती हैं।
  • पहली– ‘रेड फोर्ट के पास कार ब्लास्ट, डॉक्टर संदिग्ध’- पर आतंकी नहीं।
  • दूसरी– ‘फरीदाबाद डॉक्टर आरोपित के रूप में नामित’
  • तीसरी– ‘ब्लास्ट जाँच में मैन की भूमिका’
  • चौथी– ‘उमर नबी- डॉक्टर जो कार चला रहा था’
  • पाँचवीं– ‘आरोपित डॉक्टरों का नेटवर्क’
  • छठी– ‘रेड फोर्ट इंसिडेंट में संदिग्ध गिरफ्तार’
  • सातवीं– ‘डॉक्टर उमर की आखिरी ड्राइव’
  • आठवीं– ‘ब्लास्ट के मैन की पहचान’
  • नौवीं– ‘आरोपित का बैकग्राउंड’
  • दसवीं– ‘संदिग्ध डॉक्टरों पर नजर’
ये हेडलाइंस द हिंदू की दुविधा साफ तौर पर दिखाती हैं। सरकार आतंकी कह रही, NIA यूएपीए (UAPA) लगा रही, लेकिन द हिंदू 27 नवंबर 2025 तक भी ‘टेररिस्ट’ बोलने से हिचक रही।​ उनकी रिपोर्ट्स में अक्सर ‘terrorist’ की जगह ‘militant’, ‘gunman’, ‘accused’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। यह वही अप्रोच है जो अल-जजीरा जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में दिखती है। वहाँ भी आतंकी कहने से बचा जाता है और भाषा को इस तरह गढ़ा जाता है कि पाठक के मन में संदेह पैदा हो।

पुराने ढर्रे पर चल रहा द हिंदू

द हिंदू जैसे वामपंथी मीडिया हाउसेज का ये पुराना हथकंडा है। पुलवामा अटैक, 26/11 या ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी इन्होंने टेररिस्ट को ‘मिलिटेंट’, ‘आरोपित’ कहा। शब्दों से खेलकर ये वामपंथी मीडिया हाउस अलग नैरेटिव बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं- आतंकवादी हमले को ‘इंसिडेंट’ और हमलावर को आतंकी के बजाय ‘डॉक्टर’ और आरोपित लिखते हैं जैसे उसने लोगों को मारा नहीं बल्कि सिर्फ चप्पल चुराई हो।
द हिंदू, अल जजीरा की तर्ज पर ही काम करता है। जैसे अल-जजीरा हमास को ‘मिलिटेंट’ कहता है वैसे ही द हिंदू भी आतंकी को मानवीकरण करता दिखता है। इसके पीछे उसका उद्देश्य साफ है- पाठकों में संदेह डालना कि ‘क्या बंदा सच में टेररिस्ट था?’
वामपंथी मीडिया की कलाबाजी अब भी जारी है, भले आम जनता जाग चुकी हो। सोशल मीडिया पर ट्रोल्स इन्हें आड़े हाथों ले रहे हैं, लेकिन ये अपनी लाइन नहीं छोड़ते।​ इनकी कोशिश यही रहती है कि किसी भी घटना को इस तरह पेश किया जाए कि पाठक के मन में सरकार और एजेंसियों की बात पर सवाल उठे।
द हिंदू की यह मानसिकता कहीं न कहीं राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है। जब NIA जैश लिंक बता रही, तो ‘डॉक्टर नेटवर्क’ कहना आंतक को ग्लोरिफाई करता है फरीदाबाद में 2900 किलो आईईडी बरामद हुए, जो कार बॉम्ब में इस्तेमाल किए गए, फिर भी द हिंदू उसे ‘ब्लास्ट’ लिखता है। यह पत्रकारिता नहीं, प्रोपगैंडा है।
ऐतिहासिक संदर्भों को देखा जाए तो ‘द हिंदू’ का वामपंथी झुकाव साफ है। नेहरू युग से ये कॉन्ग्रेस-समर्थक रहे। इमरजेंसी में भी चुप्पी साधे रखी। अब मोदी सरकार के खिलाफ नैरेटिव बुनते रहते हैं।

जाँच में दिखा जैश से संपर्क, द हिंदू ने छिपाया

रेड फोर्ट ब्लास्ट पर भी पाकिस्तान से जुड़ा लिंक और तथ्यों को छिपाया और जैश-ए-मोहम्मद को महज एक ‘ग्रुप’ कहा। दिल्ली ब्लास्ट में पकड़े गए सभी आरोपितों का सीधा जुड़ाव पाकिस्तान-स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से था।
जाँच एजेंसियों ने पाया कि ‘हंजुल्ला’ नामक जैश हैंडलर ने डॉक्टरों और छात्रों को बम बनाने के वीडियो भेजे और उन्हें कट्टरपंथी बनाया। डॉक्टर उमर उन नबी, मुजफ्फर अहमद राठर और शहीन शाहिद जैसे आरोपितों ने छात्रों को भर्ती कर ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ तैयार किया।
2019 में हुए पुलवामा हमलों में आरोपित तुफैल अहमद भी इसी नेटवर्क का हिस्सा था और दिल्ली हमलों में भी इसका हाथ था। इस मॉड्यूल को 26 लाख रुपये की फंडिंग मिली थी। इस लिहाज से ये पूरी तरह साफ है कि यह हमला कोई स्थानीय घटना या दुर्घटना नहीं थी बल्कि जैश का संगठित आतंकी ऑपरेशन था। इसके बावजूद द हिंदू संशय में दिख रहा है।
अल जजीरा फिलिस्तीन कवरेज में इजरायल को ‘ऑक्यूपायर’ कहता है वैसे ही द हिंदू भारत को ‘ऑप्रेसर’। दोनों का पैटर्न विक्टिम कार्ड खेलना है। लेकिन राष्ट्रहित में पत्रकारिता होनी चाहिए, न कि संदेह फैलाना।​
अल जजीरा फिलिस्तीन कवरेज में इजरायल को ‘ऑक्यूपायर’ कहता है वैसे ही द हिंदू भारत को ‘ऑप्रेसर’। दोनों का पैटर्न विक्टिम कार्ड खेलना है। लेकिन राष्ट्रहित में पत्रकारिता होनी चाहिए, न कि संदेह फैलाना।​

जनता को दिख रहा द हिंदू का सच

जब किसी को संदिग्ध कहा जाता हो तो इसका अर्थ है कि वह व्यक्ति जिसके बारे में शक हो कि उसने अपराध किया है, लेकिन उसके खिलाफ औपचारिक आरोप या सबूत अभी तक पुख्ता नहीं हुए। संदिग्ध शब्द पाठक के मन में और भी ज्यादा अनिश्चितता पैदा करता है। यह बताता है कि व्यक्ति पर शक है, लेकिन यह पक्का नहीं कि उसने अपराध किया।
इसके अलावा जब हम किसी को अक्यूज्ड या आरोपित लिखते हैं तो इसका मतलब है कि उसके ऊपर अपराध का महज आरोप लगा है। वह आतंकी नहीं हो सकता या कोर्ट ने उसे दोषी नहीं ठहराया तो वह सही भी हो सकता है।
इसके अलावा द हिंदू का ‘मैन’ शब्द का उपयोग अपराध की गंभीरता को कम करने जैसा है। यह व्यक्ति को सिर्फ एक आम इंसान की तरह पेश करता है, न कि आतंकी या अपराधी की तरह। इससे पाठक के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या वह सच में आतंकी था या सिर्फ एक आम आदमी जिसे फँसाया गया।
अब पाठकों के सोचने का तरीका बदल चुका है। वे सही और गलत लिखने का फर्क समझने लगे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर #HinduHidesTerror ट्रेंड हुआ। इस पर लोग द हिंदू की हेडलाइंस को साझा कर रहे थे।
ज्यादातर पाठक अब डिजिटल न्यूज पढ़ते हैं, जिसमें स्पष्ट रिपोर्टिंग और बात शामिल हो। मीडिया की भूमिका लोकतंत्र का चौथा खंभा है, लेकिन द हिंदू इसे तोड़ रहा। अगर आतंकी को ‘डॉक्टर’ कहा/लिखा जाएगा तो युवाओं में रेडिकलाइजेशन/ कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा। द हिंदू को आईना देखना चाहिए कि 17 दिन बाद भी वह किस दुविधा में है कि आतंकी को आतंकी लिखने में डर रहा है।
भले ही आज पाठक ज्यादा जागरूक हो गए हैं और उनके सोचने का तरीका बदल गया है, लेकिन द हिंदू जैसे वामपंथी मीडिया हाउस अब भी अपने पैंतरे दिखाने से बाज नहीं आते। इनकी कोशिश यही रहती है कि लोगों के दिमाग में शक की परत छोड़ दी जाए।

एक साध्वी को पोर्न दिखाने, अंडा खिलाने, निर्वस्त्र करने वाले पुरुष पुलिस वालों को दंड कब? रात भर पिटाई, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, 24 दिनों तक रखा भूखा… आज भी ‘कांग्रेस का टॉर्चर’ भोग रहीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर

                   साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो- facebook- sadhvi pragya singh thakur)
मालेगांव ब्लास्ट पर जुलाई 31 को आया निर्णय मामूली निर्णय नहीं। इन निर्णय ने कांग्रेस ही इसकी सारी समर्थक पार्टियों UPA से लेकर INDI गठबंधन सभी को बेनकाब कर दिया है। इतना ही नहीं, हिन्दू और मुसलमान सभी के लिए आंखे और दिमाग खोलने वाला है। किस तरह देश में हिन्दू-मुस्लिम फसाद बनाये रखा था। जो पार्टियां अपने धर्म की नहीं हो सकती किसी की नहीं हो सकती। हिन्दुओं कांग्रेस, वामपंथियों और INDI गठबंधन को वोट देने से पहले इन फसादी पार्टियों से पूछो कि क्या कसाब समेत जितने भी इस्लामिक आतंकवादियों को पकड़ जेलों में रखने पर उन्हें हलाल खिलाया था या झटका? जब उनके मजहब देखते हुए हलाल परोसा गया फिर एक साध्वी को अंडा खिलाकर क्यों साध्वी की सात्विकता को बर्बाद किया? किसके कहने पर ऐसा घिनौना अत्याचार किया गया था? जब साध्वी एक महिला थी फिर क्यों पुरुष पुलिस कर्मियों को उसे निर्वस्त्र करने को कहा गया? क्या देश में महिला पुलिसकर्मियों का अकाल पड़ गया था? 
समाचार है कि इस फैसले के खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट जाने का प्लान कर रहे हैं, हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट उपरोक्त प्रश्नों का भी जवाब इन हिन्दू विरोधियों, ATS और सरकार से पूछे। साध्वी प्रज्ञा कसूरवार थी या नहीं एक महिला थी। क्यों एक महिला वो भी एक साध्वी को पोर्न दिखाई?   

  

मालेगाँव ब्लास्ट 2008 मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। 17 वर्षों बाद भले ही ‘भगवा आतंकवाद’ की कहानी झूठी साबित हो गई हो लेकिन आरोपित बनाई गईं साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़ना कांग्रेस के काले कारनामों का चिट्ठा दिखाती है।

कोर्ट के निर्णय आने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने जज के सामने अपनी बात भी रखी। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा ही कहा कि जिन्हें भी जाँच के लिए बुलाया जाता है, उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए। मुझे बिना किसी आधार के जाँच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया। मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया। मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, पर मुझे फँसाकर झूठे आरोप लगाए गए। कोई भी हमारे साथ खड़ा होने को तैयार नहीं था।”

अपनी बात जारी रखते हुए साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा, “मैं जिंदा हूँ क्योंकि मैं एक संन्यासी हूँ। एक साजिश के तहत भगवा को बदनाम किया गया। आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है और ईश्वर उन आरोपितों के दंड देगा। हालाँकि, जिन्होंने भारत और भगवा को बदनाम किया, उन्हें अभी तक आपने गलत साबित नहीं किया है।”

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगाँव में भिक्खू चौक मस्जिद के पास धमाका हुआ। मोटरसाइकिल में बांधकर किए गए इस धमाके में 6 लोग मारे गए थे और 100 से भी अधिक लोग घायल हुए थे। इसके तहत साध्वी प्रज्ञा समेत 7 लोगों पर UAPA, आतंकवाद, आर्म्स एक्ट और IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। 17 वर्षों तक इसे लेकर मुकदमा चला। 323 गवाह पेश किए गए। इनमें से 37 गवाह अपने बयान से मुकर गए। इसके अलावा बचाव पक्ष के भी 8 गवाह पेश हुए।

प्रताड़ना के 17 वर्ष

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा को ब्लास्ट के बाद 23 अक्टूबर 2008 को ATS ने गिरफ्तार किया। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप लगा कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल के इंजन और चेसिस नंबर से पता चला कि वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालाँकि रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी पाया गया था।

महाराष्ट्र ATS ने दावा किया था कि उस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल विस्फोटक लगाने के लिए किया गया और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया गया कि मेडिकल इमरजेंसी के तहत वह वेंटिलेटर तक पहुँच गईं।

अप्रैल 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया, जिसने ATS की जाँच में कई खामियाँ पाईं। NIA ने अपनी जाँच में ये भी कहा कि मोटरसाइकिल भले ही प्रज्ञा के नाम पर थी, लेकिन उसका इस्तेमाल रामचंद्र कलसांगरा नामक फरार आरोपित कर रहा था।

UAPA के तहत साध्वी पर की गई कार्रवाई भी दोषपूर्ण मानी गई। NIA ने जब जमानती वारंट जारी किया तब साध्वी प्रज्ञा ने साल 2020 में अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर रिपब्लिक टीवी को एक साक्षात्कार दिया।

इसमें उन्होंने बताया था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के सामने 3-4 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ना दी थी। उन्हें हिरासत में लेकर पूरी रात बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बताया कि हिरासत के दौरान उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पॉर्न वीडियो दिखाया जाता था और साध्वी होने का लिहाज किए बिना उनसे भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

भूख, मार और बिजली के झटके

साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था। उनको बिजली के झटके दिए जाते थे। गाली-गलौज तो उनके साथ आम बात हो गई थी। उनको लगातार पीटने के लिए 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे। इनके पैरे के तलवे तक में बेल्ट से पीटा गया। पिटाई के दौरान उनका पूरा नर्वस सिस्टम सुन्न पड़ जाता था।

साध्वी प्रज्ञा की यातनाएँ सिर्फ बेल्ट की मार तक ही सीमित नहीं रहीं थीं। उन्हें उल्टा लटकाकर मारा जाता था और हाथों को गर्म पानी में नमक डालकर डुबोया जाता था। हाथ फट जाते थे तो जख्मों पर नमक छिड़का जाता था।

उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें इतनी गंदी-गंदी गालियां दी जाती थीं जिन्हें कोई स्त्री सुन भी नहीं सकती। उन्हें निर्वस्त्र किए जाने की बार-बार धमकी दी जाती थी। भोजन में उन्हें अंडा खाने के लिए मजबूर किया जाता था जबकि वे शाकाहारी हैं।

साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़नाओं से उनके पूरे शरीर में सूजन आ गई थी। कई हिस्सो में पस पड़ गया था। आज भी वह कई शारीरिक परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी तक हो गई। अपनी प्रताड़ना के बारे में बताते हुए साध्वी प्रज्ञा कोर्ट में रो पड़ी थीं।

अवलोकन करें:-

आज जब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी आरोपितों के बरी किया गया तो साध्वी ने कहा कि षडयंत्र के तहत भगवा को बदनाम किया गया, आज हिंदुत्व की जीत हुई है।

कोयंबटूर बम ब्लास्ट : अहमद अली, अब्दुल्ला और शेख दाऊद समेत 4 गिरफ्तार, जिहादी विचारधारा के लिए कर रहे थे भर्ती: प्राचीन मंदिर के सामने उड़ाई थी गाड़ी, NIA ने बताया- अरबी कॉलेज वाला जमील बाशा भी था शामिल

                                   कोयंबटूर कार बम ब्लास्ट की तस्वीर (फोटो साभार : The Hindu)
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कोयंबटूर कार बम ब्लास्ट में 4 और आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम अहमद अली, जवाहर सातिक, राजा अब्दुल्ला उर्फ एमएसी राजा और शेख दाऊद के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक कुल 8 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

इन गिरफ्तारियों से एक बड़े आतंकी भर्ती नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें मद्रास अरबी कॉलेज के संस्थापक जमील बाशा का नाम भी शामिल है। NIA का दावा है कि आरोपितों ने तमिलनाडु के युवाओं को भड़काकर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था।

बाशा, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, अरबी भाषा की कक्षाओं की आड़ में सलाफी-जिहादी विचारधारा फैला रहा था। उसका मकसद ‘जिहाद के ज़रिए खिलाफत बनाना’ और भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर इस्लामिक शासन लागू करना था।

कोयंबटूर धमाका: क्या है ISIS कनेक्शन?

अक्टूबर 2022 में कोयंबटूर में एक कार में धमाका हुआ था। इसमें जमीशा मुबीन नाम का शख्स मारा गया था। भारत की जाँच एजेंसी NIA का कहना है कि यह धमाका एक आतंकी ग्रुप की लोगों को कट्टरपंथी बनाने की कोशिशों का नतीजा था।

 शुरुआत में लगा था कि मुबीन एक पुराने मंदिर को उड़ाना चाहता था, लेकिन सूत्रों से पता चला है कि उसका असली मकसद शहर के बीच में जाकर ज़्यादा तबाही मचाना था। उसने पुलिस चौकी देखकर मंदिर के सामने गाड़ी रोकी, और फिर गैस लीक होने से धमाका हो गया।

मुबीन की लाश से 7 लोहे की पिन मिली थीं। उसके घर की तलाशी और उसके शरीर पर लिखी बातों से साफ हुआ कि वह इस्लामिक स्टेट (ISIS) नाम के आतंकी संगठन की सोच से जुड़ा था। वह लोगों को ‘मुस्लिम’ या ‘काफ़िर’ (गैर-मुस्लिम) में बाँटकर ‘जिहाद’ (धर्म युद्ध) की बात करता था।

जाँच और आगे की कार्रवाई

NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) ने 30 अक्टूबर 2022 को इस धमाके की जाँच शुरू की थी। शुरुआत में इस मामले में पहले भी कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके नाम मुहम्मद तालका, मोहम्मद अजहरुद्दीन, मोहम्मद रियाज, फिरोज इस्माइल और मोहम्मद नवाज इस्माइल थे।

NIA का मानना है कि यह सब भारत के खिलाफ आतंकी सोच फैलाने की साजिश है और वे इसकी पूरी गहराई से जाँच कर रहे हैं। उनका मकसद है कि तमिलनाडु पुलिस और बाकी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस आतंकी ग्रुप को पूरी तरह से खत्म किया जाए। NIA ने यह भी बताया है कि अभी और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

दक्षिण भारत में आतंकी गतिविधियाँ

पिछले कुछ सालों से भारत की जाँच एजेंसी NIA साउथ इंडिया के कई राज्यों में आतंकवाद से जुड़े मामलों की जाँच कर रही है।

  • जनवरी 2023: केरल के कोल्लम से PFI (एक प्रतिबंधित संगठन) का एक रिपोर्टर मोहम्मद सादिक पकड़ा गया। यह शख्स गैर-मुस्लिमों (जिन्हें वे ‘काफिर’ कहते हैं) की जानकारी इकट्ठा करता था।
  • दिसंबर 2022: केरल से PFI का वकील मोहम्मद मुबारक गिरफ्तार हुआ। यह चरमपंथियों को गला काटने जैसी खतरनाक ट्रेनिंग दे रहा था।
  • जुलाई 2019: तमिलनाडु में वाहदत-ए-इस्लामी हिंद नाम के एक कट्टरपंथी संगठन का पर्दाफाश हुआ और इसके 14 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इस संगठन का मकसद भारत को एक इस्लामिक देश बनाना था। ये सभी घटनाएँ बताती हैं कि दक्षिण भारत में कट्टरपंथी सोच को फैलाने और युवाओं को आतंकी कामों में शामिल करने की लगातार कोशिशें हो रही हैं।

मुंबई को फिर दहलाने की धमकी: ईमेल भेज कर दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम, कहा- बम विस्फोट को रोक सको तो रोक लो

महाराष्ट्र सरकार मंत्रालय को मिला धमकी भरा ईमेल (साभार : X अकाउंट Vayam Bharat)
महाराष्ट्र सरकार मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विभाग को सोमवार (12 मई 2025) शाम एक अनजान ईमेल मिला है, जिसमें अगले 48 घंटों में बम विस्फोट की धमकी दी गई है। इसके बाद पुलिस ने तुरंत मंत्रालय के पूरे इलाके की तलाशी ली, लेकिन उन्हें कोई भी शक पैदा करने वाली चीज नहीं मिली। ईमेल में यह नहीं बताया गया था कि बम कहाँ रखा जाएगा।

आपदा प्रबंधन विभाग के बड़े अधिकारी ने बताया कि उन्हें सोमवार (12 मई 2025) को यह ईमेल मिला था। ईमेल में लिखा था कि अगले दो-तीन दिनों में या 48 घंटों में देश में कहीं भी धमाका हो सकता है। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब देश की सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है, जिसके चलते मुंबई पुलिस और नौसेना पहले से ही सतर्क हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग के कंट्रोल रूम ने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन को इस बारे में जानकारी दी। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। इसके साथ ही, आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) की एक टीम भी मंत्रालय में आई और उन्होंने भी जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ईमेल भेजने वाले का पता लगाने के लिए उसके इंटरनेट एड्रेस (IP Address) को ट्रैक कर रही है।

एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि मंत्रालय, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) जैसी जरूरी जगहों की सुरक्षा जाँच करने की योजना बनाई गई थी। अधिकारी ने कहा, “हमने सोमवार (12 मई 2025) को मंत्रालय की सुरक्षा का जायजा लिया। यह सिर्फ एक संयोग था कि उसी दिन आपदा प्रबंधन विभाग को यह धमकी भरा ईमेल मिला।” बड़े अधिकारियों के मुताबिक, ईमेल भेजने वाले ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए सावधानी बरतें।

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच राजस्थान में मिला 2000 किलो विस्फोटक, लावारिस गाड़ी से पुलिस ने किया बरामद: जयपुर का मामला, FIR दर्ज

                 विस्फोटक भरी गाड़ी (बाएँ) को पुलिस ने जब्त कर लिया है (प्रतीकात्मक फोटो साभार: Jagran)
राजस्थान के भीतर एक गाड़ी में 2 हजार किलोग्राम से अधिक विस्फोटक मिला है। यह विस्फोटक एक लावारिस गाड़ी में रखा गया था। विस्फोटक को पुलिस ने जब्त कर लिया है। पुलिस इस विस्फोटक के मालिक का पता लगाने का प्रयास कर रही है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विस्फोटक जयपुर में जयपुर-भरतपुर हाईवे पर खड़े एक पिकअप से बरामद हुआ है। इस पिकअप से 2075 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और ऑप्टी स्टार विस्फोटक जब्त किया गया है। यह बरामदगी 10 मई 2025 की रात करीब 2.30 बजे मोहनपुरा पुलिया के पास आगरा रोड पर एक दुकान से बरामद हुआ है।

पुलिस ने बताया कि यहाँ एक लावारिस सफेद रंग का पिकअप ट्रक खड़ा था। इस गाड़ी का स्टीयरिंग लॉक था और भीतर कई संदिग्ध डिब्बे दिखाई दे रहे थे। पुलिस को ट्रक से 63 डिब्बे मिले। इसमें मौजूद हर डिब्बे में 12 बंडल थे, जिनका वजन 25 किलोग्राम था। पुलिस ने ऐसे 756 बंडल बरामद किए।

डिब्बों पर ऑप्टी स्टार एक्सप्लोसिव क्लासिक का लेबल लगा था। यहाँ इसके अलावा 10 प्लास्टिक बैग भी मिले। 50 किलोग्राम वजनी इन बैग पर अमोनियम नाइट्रेट का लेबल लगा था। जाँच में पुष्टि हुई कि बरामद किया गया सामान विस्फोटक सामग्री था।

पुलिस ने इस बरामदगी के बाद पिकअप के रजिस्ट्रेशन नंबर की जाँच की। इसमें पता चला कि पिकअप भीलवाड़ा के ईश्वर सिंह के नाम से रजिस्टर्ड है। पुलिस ने पिकअप के मालिक और ड्राइवर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क स्थापित नहीं हो पाया। पुलिस ने पिकअप को जब्त कर लिया है।

पुलिस ने अब मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता करने का प्रयास कर रही है कि विस्फोटक कहाँ से आए और इसका उपयोग कहाँ किया जाना था ? यह भी पता लगाने का प्रयास हो रहा है कि इसका इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में तो नहीं होना था। यह सावधानी भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े हुए तनाव के चलते और भी बढ़ गई है।

जिस आतंकी ने कहा था ‘मोदी को मार देंगे’, मर गया अस्पताल के बेड पर : कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट का दोषी था बाशा, उसके ही साथी की जेल में ‘मालिश’ करवाती थी DMK सरकार

                      कोयंबटूर धमाके के मुख्य अभियुक्त एस ए बाशा की मौत (फोटो साभार: newstaglive)
अल उम्मा नाम के प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के संस्थापक और कोयंबटूर ब्लास्ट केस के दोषी एस. ए. बाशा की सोमवार (16 दिसंबर 2024) को मौत हो गई। उसकी उम्र 83 साल थी और बढ़ती उम्र की वजह से वो लंबे समय से बीमार चल रहा था। बता दें कि कोयंबटूर ब्लास्ट केस में बाशा और अल उम्मा के 16 अन्य सदस्यों को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सजा काट रहे एस. ए. बाशा को अक्टूबर 2023 में इलाज के लिए अस्थायी पैरोल दी गई थी, जिसे सरकार ने उसके स्वास्थ्य के आधार पर बढ़ा दिया था। वह चेन्नई के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहा था।

 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर के आर.एस. पुरम और शहर के अन्य हिस्सों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 58 लोगों की जान गई और 231 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह हमला उस समय हुआ जब भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी आर.एस. पुरम में चुनाव प्रचार के लिए पहुँचने वाले थे।

पुलिस ने इस मामले में 166 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें बाशा भी शामिल था। स्पेशल कोर्ट ने ने 158 लोगों को दोषी ठहराया और 43 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाद में 41 लोगों ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने इनमें से दो नाबालिगों को रिहा कर दिया, जबकि 17 लोगों को उम्रकैद और 22 को बरी कर दिया।

मोदी को दी थी जान से मारने की धमकी, उस समय थे गुजरात के सीएम

प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अल-उम्मा के अध्यक्ष एसए बाशा ने जुलाई 2003 में कोयंबटूर का दौरा करने पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने की धमकी भी दी थी। बाशा और आठ अन्य लोगों ने यह धमकी उस समय खुले आम दी थी जब हिंदू मुन्नानी नेता की हत्या से संबंधित एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पत्रकार कोयंबटूर अदालत परिसर में इन मुजरिमों से बात कर रहे थे। बाशा ने कहा था कि अगर गुजरात के सीएम मोदी कोयंबटूर आएँगे, तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

बाशा के साथी महदानी की जेल में मालिश कराती थी डीएमके सरकार

यहाँ ये बताना जरूरी है कि बाशा और उसके साथियों पर डीएमके सरकार कितनी मेहरबान रहती थी। दरअसल, 24 जुलाई 2006 को इंडियन एक्सप्रेस में एक समाचार प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था –“कोयंबटूर आतंकी घटनाओं के आरोपी के लिए द्रमुक ने जेल को स्पा में बदला”। समाचार में बताया गया था, “अब्दुल नासिर महदानी की आयुर्वेदिक मालिश का खर्च वहन सरकार कर रही थी और उसकी बीवी के खिलाफ गिरफ्तारी का वॉरंट होने के बावजूद वह महदानी से बेरोकटोक मिल सकती थी। इन हालात में आतंक पर नकेल कसने की जरूरत पर सख्त बातें करने वालों पर हँसा जा सकता है। महदानी 1998 के कोयंबटूर सीरियल विस्फोटों का मुख्य आरोपी है, जिसमें बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाने की कोशिश करते हुए 58 लोगों की हत्या कर दी गई थी।”
इसमें आगे लिखा था, “जब से करुणानिधि ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, तब से यहाँ उच्च सुरक्षा वाली जेल में रखे गए महदानी और अल उम्मा के अन्य 166 कैदियों के बीच माहौल खुशनुमा है। इनमें से ज्यादातर को कोयंबटूर विस्फोटों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। करुणानिधि की बदौलत, 10 मालिश वालों और चार वरिष्ठ आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक टीम ने 2001 से जेल के अस्पताल में रखे गए महदानी पर ‘उच्च गुणवत्ता वाला उपचार’ शुरू किया है …”

रोहिणी ब्लास्ट के पीछे खालिस्तानी? दिल्ली पुलिस ने टेलीग्राम से माँगी जानकारी; क्या जनता ने विपक्ष मजबूत करने की आड़ में देश को दुबारा 2014 से पहले होते दंगों और आतंकी हमलों की आग में झोंक दिया है?


भारत की जनता लगता है शांति के माहौल में रहना नहीं चाहती। शायद यही वजह है कि जब से जनता ने देश में मजबूत विपक्ष के पक्ष में मतदान दिया तभी से नितरोज शोभा यात्रा की आड़ में तो कभी किसी न किसी बहाने दंगे हो रहे हैं। भारत विरोधी अराजक तत्वों ने सिर उठा लिया है। जब तक विपक्ष कमजोर था सब अपने-अपने बिलों में घुसे बैठे थे, मौका मिलते ही देश का माहौल ख़राब करने कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। सबूत सबके सामने है कोई प्रमाण देने की जरुरत नहीं। जिस संविधान बदलने का डर बैठा और खटाखट 8500 रूपए हर महीने मिलने के लालच में जनता ने अपना अनर्थ कर लिया। भारत को बांग्लादेश की तरह आग में झोंकने की पूरी कोशिश है। अगर भारत बांग्लादेश की तरह आग में झुलसा उसकी सारी जिम्मेदारी उन सभी मतदाताओं की होगी, जिन्होंने मजबूत विपक्ष में नाम पर उत्तेजक तत्वों को वोट दिया। अभी कश्मीर में नयी सरकार बने 5 ही दिन हुए 2 आतंकी हमले हो गए। बाकि तो सबके सामने है ही। मुग़ल और ब्रिटिश ताकतवर नहीं थे, इन्हे ताकत दी देश के गद्दार जयचन्दों और मीर ज़ाफरों ने। देख लो क्या हाल है उनका, कोई नाम लेवा तक नहीं। उनके ख़ानदान और पानदान तक का कुछ पता नहीं।    

CAA विरोध और तथाकथित किसान आंदोलन में किस तरह की नारेबाजी हुई, क्या जनता अंधी और बहरी थी? जेएनयू के 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को समर्थन देने वाली पार्टियों से कैसे देश चलाने की बात सोंची? टूलकिट द्वारा प्रायोजित इन आंदोलनों में किसने रूपया पानी की बहाया, क्या जनता को नहीं मालूम? सबकुछ समाचारों में आने के बाद भी इन अराजकों को अपना समर्थन देने का मतलब है जनता ही गुलामी में रहने की आदी है, एक आज़ाद नहीं बल्कि एक गुलाम की भांति खुद और अपनी आने वाली पीढ़ियों को गुलामी में रहने को मजबूर कर रही है।          

जहाँ तक संविधान की बात है किसी ने राहुल गाँधी, कांग्रेस या अन्य किसी भी विपक्षी से यह पूछने की हिम्मत नहीं दिखाई कि संविधान को जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक संविधान में संसोधन कर देश को गजवा-ए-हिन्द की ओर धकेला जा रहा था तब संविधान खतरे में था या जब संविधान को जब संविधान निर्माताओं द्वारा रचित मूल संविधान की ओर लाया जा रहा है? यह वह गंभीर ज्वलंत प्रश्न है जिस पर हर शांतिप्रिय भारतीय विशेषकर हिन्दुओं को सोंचना होगा। फिर संविधान में कहाँ लिखा है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग को समर्थन दो।     

     

 https://youtube.com/shorts/s4wltkrYlQ0?si=RIG106PIPNFDBCoM       

दिल्ली के रोहिणी में 20 अक्टूबर 2024 को हुए बम धमाके को लेकर चल रही जाँच में खालिस्तानी एंगल होने की आशंका जताई जा रही है। अभी तक उस हमले की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पुलिस अपनी जाँच कर रही है। खालिस्तानी एंगल की बात करें तो एक टेलीग्राम चैनल से सुराग मिला है।

कहा जा रहा है कि टेलीग्राम चैनल जस्टिस लीग इंडिया पर धमाके की सीसीटीवी फुटेज वीडियो मिली है। इसी चैनल पर दावा हुआ था कि हमले में खालिस्तान का हाथ था। चैनल में वीडियो के साथ दावा किया गया था कि खालिस्तान कार्यकर्ता हमले के पीछे और वो भारत के खिलाफ किसी भी समय हमला करने की क्षमता रखते हैं।

इस दावे के बाद बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने टेलीग्राम चैनल से जानकारी माँगी है ताकि आगे विस्तृत जाँच हो सके। ये भी मालूम हो कि इस टेलीग्राम चैनल पर जो दावा हुआ है वे पाकिस्तान द्वारा संचालित कई टेलीग्राम चैनलों पर भी किया गया है।

हिजबुल्लाह के हर पेजर में 3gm विस्फोटक, मोसाद ने सिग्नल हैक कर बैट्री किए गर्म, इजरायल ने सप्लाई चेन में किया घुसपैठ

                                                        धमाके वाले पेजर (बाएँ) और घायल लोग (दाएँ)
मध्य पूर्व के देश लेबनान के भीतर मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को हजारों धमाके एक साथ हुए। यह धमाके संदेश भेजने-पाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पेजर में हुए। लेबनान और पड़ोसी देश सीरिया के भीतर हजारों पेजर एक साथ फट गए। इस कारण लगभग 3000 लोग घायल हुए हैं, 9 लोगों की मौत की भी सूचना है। घायल होने वाले अधिकांश लोग इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से जुड़े हुए थे। पेजर में धमाके करने का आरोप हिजबुल्लाह ने इजरायल पर लगाया है।

यह अभी साफ़ नहीं हो सका है कि एक साथ इतने पेजरों में धमाके कैसे हुए। इसको लेकर अलग-अलग थ्योरी चलाई जा रही हैं। कहीं यह कहा जा रहा है कि पेजरों को एक सिग्नल भेज कर धमाका कर दिया गया तो कहीं कोई और तरीका इस संबंध में बताया गया। लेबनान के लोगों ने भी इस संबंध में इजरायल पर आरोप लगाए हैं।

बैटरी गरम करके किया धमाका?

लेबनान के भीतर हुए धमाकों में देखा गया कि पेजर इकट्ठे गरम हो कर फट गए। इनमें तेज धमाके हुए और इनको रखने वाले के साथ ही आसपास के लोग इसकी चपेट में आ गए। इस कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। सबसे पहले कहा गया कि इन हजारों पेजरों के बीच के सिग्नल को इजरायल ने हैक कर लिया और इसमें ऐसी फ्रीक्वेंसी के संदेश भेजे जिससे उनकी बैटरी गरम हो गई और उसमें विस्फोट हो गया। हालाँकि, इसके विरोध में तर्क दिया गया कि बैटरियों में गरम हो कर आग नहीं लगी और वह सीधे फट ही गए, ऐसा इस तरीके से नहीं हो सकता।

पेजरों में कर दी गड़बड़?

पेजरों में हुई गड़बड़ के पीछे एक और थ्योरी यह दी जा रही है कि इजरायल ने इन पेजरों की आपूर्ति के बीच में ही गड़बड़ कर दी। बताया गया कि 5000 पेजर ताइवान से मँगाए गए थे और इसी साल की शुरुआत में हिजबुल्लाह के पास पहुँचे थे। लेबनान से जुड़े लोगों ने मीडिया को बताया कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इन पेजरों के भीतर एक ऐसा बोर्ड लगाया जिससे धमाका हुआ। इस बोर्ड को आसानी से पहचाना नहीं जा सकता और इसी कारण हिजबुल्लाह इस बारे में अनभिज्ञ रहा।
यह भी कहा जा रहा है कि इजरायल ने यह पेजर हिजबुल्लाह के पास पहुँचने से पहले ही इनमें यह गड़बड़ कर दी और जब यह हिजबुल्लाह के लोगों के पास पहुँचे तो उनमें धमाका कर दिया। लेबनान के लोगों ने बताया कि इन पेजर में पड़े बोर्ड को जब मोसाद ने एक कोड वाला मैसेज भेजा तो यह फट गए। हालाँकि, इन पेजरों में इनको बनाने वाली फैक्ट्री में छेड़छाड़ हुई या फिर रास्ते में कहीं पर इनमें बोर्ड डाले गए, इसको लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है।
हिजबुल्लाह के लोगों के पास फटने वाले पेजरों के भीतर 3 ग्राम विस्फोटक रखने की बात भी सामने आई है। कहा गया है कि इतनी छोटी मात्रा में पेजरों के भीतर रखा गया विस्फोटक हिजबुल्लाह पहचान नहीं पाया और उसने इन्हें अपने लोगों के बीच बाँट दिया। इसके बाद जब इजरायल ने सही मौक़ा देखा तो इनके भीतर धमाका कर दिया। हालाँकि, अभी इस थ्योरी को लेकर कोई पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस धमाके का निशाना हिजबुल्लाह के लोग बने हैं, इसलिए पूरा शक इजरायल की तरफ है।

पेजर का इस्तेमाल क्यों करते हैं हिजबुल्लाह के लोग?

हिजबुल्लाह पर हुए इस पेजर हमले के बीच यह प्रश्न भी उठा कि आखिर यह हजारों करोड़ का मालिक यह आतंकी समूह दशकों पुरानी तकनीक पर क्यों निर्भर है। बताया गया कि हिजबुल्लाह ने कई सालों से अपने आतंकियों और बाकी लोगों के फोन उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इजरायल इन्हें हैक कर सकता है और बातचीत सुन कर बड़ा नुकसान पहुँचा सकता है। पेजर का इस्तेमाल इसकी तकनीक साधारण और आसानी से हैक ना हो पाने के कारण किया जाता है। इजरायल ने इसमें भी सेंध लगा दी।

कंपनी ने नकारे दावे, हिजबुल्लाह ने बोला- बदला लेंगे

ताइवान की जिस कंपनी से यह पेजर मँगाए जाने की बात कही जा रही है, उसने यह सभी दावे नकार दिए हैं। ताइवान की गोल्ड अपोलो कंपनी ने कहा है कि उसने हिजबुल्लाह के पास पहुँचने वाले पेजर नहीं बनाए थे। गोल्ड अपोलो ने बताया है कि यूरोप की एक कंपनी पेजर बनाती है और उसने गोल्ड अपोलो से ही लाइसेंस ले रखा है।
इसीलिए फटने वाले पेजरों पर गोल्ड अपोलो का स्टीकर लगा हुआ था और डिजाइन भी वही थी जो गोल्ड अपोलो के पेजरों पर थी। हिजबुल्लाह ने इस घटना के बाद कहा है कि वह बदला लेंगे और उसने इजरायल को ही इसका जिम्मेदार माना है।

राम मंदिर को उड़ाने और मुख्यमंत्री योगी की हत्या की धमकी: बिहार के भागलपुर से मकसूद अंसारी गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी से था संपर्क


अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार के भागलपुर से मोहम्मद मकसूद को गिरफ्तार किया है। मकसूद ने इस साल 14 जून को राम मंदिर को उड़ाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके पुलिस ने बड़ी खंजरपुर में छापेमारी करके उसे गिरफ्तार कर लिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करके उसे यूपी ले आई।

जिस समय पुलिस ने मोहम्मद मकसूद अंसारी को गिरफ्तार किया, उस समय वह अपने बहन के ससुराल से आ रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल नम्बर ट्रेस करके पुलिस ने उसे भागलपुर के गुरहट्टा चौक से दबोच लिया। वहीं, कुछ रिपोर्ट में उसकी गिरफ्तारी भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र के बड़ी खंजरपुर स्थित मस्जिद गली स्थित उसके घर से गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है।

पिछले कुछ दिनों से पुलिस उसके घर पर पहुँचकर उसकी माँ से पूछताछ कर रही थी। हालाँकि, उसका सुराग नहीं मिल पा रहा था। मोहम्मद मकसूद के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ से भी जुड़े होने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने उसके पास से चार मोबाइल फोन बरामद किया है। इनमें से एक मोबाइल वह भी है, जिसके फेसबुक से धमकी दी गई थी।

यह बात भी सामने आई है कि मकसूद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आमिर के संपर्क में था। उसका देश विरोधी पोस्ट भी मकसूद शेयर किया करता था। इतना ही नहीं, साइबर ठगी में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है। संगठन के नाम पर भी लाखों रुपए इकट्ठा करने और नए लड़कों की संगठन में भर्ती को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है। बरामद मोबाइल से आमिर से जुड़ी जानकारी भी मिली है।

मकसूद की अम्मी का कहना है कि वह कैंसर की मरीज है और उसका बेटा उसकी देखभाल करता था। उसने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उसकी अम्मी का कहना है कि उसके बेटे का फोन कुछ दिन उसके साला के पास था। उसके साले ने उस फोन से क्या किया, क्या नहीं किया, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। फिलहाल पुलिस उसके संभावित साथियों की भी तलाश कर रही है।

उसकी अम्मी ने यह भी कहा कि मकसूद अंसारी अपनी नौकरी के लिए फोन पर बातें किया करता था। उसने नौकरी के लिए चंडीगढ़ में आवेदन भी दिया था। वहाँ से उसका वीजा बनाने की बात हो रही थी। वीजा बन जाने के बाद वह विदेश जाने वाला था। उसकी अम्मी का कहना है कि मकसूद के विदेश जाने से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि हुसैनाबाद के सकरुल्ला चक में रहने वाले 26 साल के मोहम्मद मकसूद अंसारी के साला अमन का मोबाइल खराब हो गया था। उसने बताया कि अमन ने इस दौरान उसके मोबाइल से क्या किया उसे इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस इस मामले में उसके साले अमन की संलिप्ता की भी जाँच कर रही है।

इस साल 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का उद्घाटन हुआ था। इसके बाद 14 जून 2024 को राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी गयी थी। इसके साथ ही सीएम योगी को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी भरे मैसेज मिलने के बाद यूपी पुलिस सहित देश की सुरक्षा एजेंसी अलर्ट हो गई थीं। इस धमकी में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आया था।

ऑडियो मैसेज सामने आने के बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाना में केस दर्ज किया गया था। यूपी पुलिस को उस मोबाइल के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि यह मोबाइल किसी मकसूद अंसारी नाम के शख्स का है और वह बिहार के भागलपुर जिले का रहने वाला है। फिलहाल इस मामले में पुलिस खुलकर कुछ भी बताने से परहेज कर रही है।

पश्चिम बंगाल : EVM-VVPAT की लूट, संदेशखाली और भाँगड़ में बमबाजी: महिलाओं को धमकाकर TMC के गुंडे डलवा रहे वोट

           कहीं हिंसा, कहीं बमबाजी, कहीं ईवीएम की लूट (साभार : X_ANI/PTI/SubhiVishwakarma)
लोकसभा चुनाव 2024 में सातवें और आखिरी चरण का मतदान जारी है। मतदान की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं की खबरें सामने आने लगी हैं। हर बार की तरह इस बार भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमला किया। कहीं बमबाजी की है, तो कहीं लाठियों का सहारा लिया है। वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले में टीएमसी के गुंडों द्वारा धमकाने पर बिफरी भीड़ ने ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को तलाब के पानी में फेंक दिया। इस बीच, संदेशखाली और भाँगड़ में बम भी चलाए गए हैं।

चुनाव आयोग ने बताया है कि दक्षिण 24 परगना जिले के कुलताई में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को निशाना बनाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी है कि ‘आज (1 जून 2024) की सुबह 6.40 बजे 19-जयनगर (एससी) पीसी के 129-कुलतली एसी में बेनीमाधवपुर एफपी स्कूल के पास सेक्टर अधिकारी के रिजर्व ईवीएम और कागजात स्थानीय भीड़ द्वारा लूट लिए गए और 1 सीयू, 1 बीयू, 2 वीवीपीएटी मशीनों को एक तालाब के अंदर फेंक दिया गया… सेक्टर अधिकारी द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सेक्टर के तहत सभी छह बूथों में मतदान प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल रही है। सेक्टर अधिकारी को नए ईवीएम और कागजात उपलब्ध कराए गए हैं।’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के कुलतई में बूथ संख्या 40, 41 पर भीड़ द्वारा कथित तौर पर ईवीएम और वीवीपैट मशीन को पानी में फेंक दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मतदाताओं को कथित तौर पर टीएमसी समर्थकों ने धमकी दी है। इससे गुस्साई भीड़ ने ईवीएम को निशाना बनाया और मशीनों को तालाब में फेंक दिया। हालाँकि यहाँ मशीनों को बदला गया और मतदान का काम जारी है।

पत्रकार सुभी विश्वकर्मा ने 2 जगहों पर बमबारी की घटना की जानकारी दी है। उन्होंने वीडियो भी पोस्ट किए हैं। पहली घटना जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र के भाँगड़ इलाके की है, जहाँ बमबाजी की गई। वहीं, संदेशखाली में भी बमबाजी की वारदात सामने आई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अधिकारी महिलाओं और महिला बूथ कार्यकर्ताओं के साथ ही मतदाताओं को टीएमसी के पक्ष में वोटिंग के लिए धमका रहे हैं।

पश्चिम बंगाल बीजेपी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। बीजेपी ने पूछा है कि ये बम कहाँ से आ रहे हैं। पश्चिन बंगाल बीजेपी ने एक्स पर लिखा, “सातवें चरण के मतदान में भी टीएमसी का आतंक जारी है। सतुलिया, भांगड़ में बम धमाके हो रहे हैं। ममता बनर्जी, जो जानती हैं कि ये बम कौन बना रहा है, फिर भी ये धमाके होने दे रही हैं। ममता बनर्जी, ये सारे बम कहाँ से आ रहे हैं?”

लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण में सुबह 9 बजे तक 11.31 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 14.35%, झारखंड में 12.15%, बिहार में 10.58%, चंडीगढ़ में 11.6%, यूपी में 12.94%, ओडिशा में 7.69%, पंजाब में 9.64% और पश्चिम बंगाल में 12.64% मतदान हुआ है।

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 57 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट भी शामिल है। जिन सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, उसमें पंजाब और यूपी की 13-13 सीटें, पश्चिम बंगाल की 9 सीटें, बिहार की 8 सीटें, ओडिशा की 6 सीटें, हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें, झारखंड की 3 सीट और एक चंडीगढ़ सीट शामिल है।

पश्चिमी बंगाल : देसी बम बनाते TMC नेता जिन्ना अली बुरी तरह घायल, EC ने माँगी रिपोर्ट

                                            देसी बम की तस्वीर (फोटो साभार: इंडिया टुडे)
बंगाल में लोकसभा चुनावों के बीच तृणमूल कांग्रेस का नेता/कार्यकर्ता देसी बम बनाते समय घायल हो गया। घटना मुर्शिदाबाद की है। कार्यकर्ता का नाम जिन्ना अली है। बताया जा रहा है कि जिन्ना कथिततौर पर बम बना रहा था जब वही बम उसके हाथ में फट गया और उसका सीधा हाथ चोटिल हो गया।

घटना के संबंध में डेक्कन क्रॉनिकल ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। बताया गया है कि विस्फोट बुधवार(अप्रैल 24) को हुआ था। पड़ोसियों ने रात में जब ये आवाज सुनी तो वो भागकर जिन्ना के घर गए। वहाँ उन्होंने जिन्ना को बेहोश खून से लथपथ देखा।

स्थानीय फौरन उसे बीरभूम इलाज के लिए लेकर गए। बाद में मुर्शिदाबाद के कांग्रेस प्रवक्ता जयंत दास ने इस संबंध में बताया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता क्रूड बम बना रहे थे ताकि प्रतिद्वंदी पार्टी के कार्यकर्ताओं को चुनाव से पहले डराया जा सके।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस घटना के संबंध में चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया है। चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस और जिला प्रशासन से घटना के संबंध में रिपोर्ट माँगी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि बेहरामपुर के बुरवान गाँव के मुनई कांद्रा में घटना घटी है उस पर रिपोर्ट दी जाए। ये जगह पोलिंग स्टेशन के 50 यार्ड के भीतर है। 13 मई को यहाँ लोकसभा चुनाव होने हैं।

बंगाल में देसी बम फेंकने की घटना हो रही आम

बंगाल में चुनावों के समय में देसी बमों का मिलने की घटनाएँ हर चुनाव में सामान्य होती जा रही हैं। मुर्शिदाबाद में पिछले साल बड़ी तादाद में देसी बम मिल चुके हैं। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव तक में बमबाजी की जाती है।
पिछले साल ही पंचायत चुनाव की रिपोलिंग के दिन तालाब के पास मुर्शिदाबाद में 35 बम मिले थे। इसी तरह इन चुनावों में भी प्रथम चऱण की वोटिंग वाले दिन बमबाजी की घटनाएँ सामने आई थीं। भाजपा कार्यकर्ता के घर के बाहर भी बम मिले थे।

क्या कांग्रेस के पाकिस्तान प्रेम का असर एक दिन में नज़र आ गया; पहले पाकिस्तान जिंदाबाद हुआ और अगले दिन बेंगलुरु में धमाका

 सुभाष चन्द्र

कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव के पहले से ही मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू विरोधी नीतियां शुरू कर दी थी। अब हाल ही में मंदिरों को लूटने का भी कार्यक्रम बना कर पैसा मस्जिदों, मदरसों और चर्चों में लगाने का बिल विधान सभा से पास करा लिया था जो विधान परिषद में गिर गया लेकिन ये विचार कांग्रेस की कुटिल बुद्धि में घुस चुका है तो उसे पूरा करने का जुगाड़ ये लगाते ही रहेंगे

लेखक 
अभी याद होगा कुछ दिन पहले भी मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर पाकिस्तान जाकर पाकिस्तान की शान में कसीदे पढ़े थे और 29 फरवरी को राज्यसभा के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सईद नासिर हुसैन की जीत के बाद उसके समर्थकों ने विधानसभा परिसर में “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए

विधानसभा में भाजपा द्वारा विरोध जताने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि हमने “वॉयस रिपोर्ट जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में भेज दी और यदि इसमें “पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा लगाया गया पाया गया तो ऐसे व्यक्ति को गंभीर सजा दी जाएगी दूसरी तरफ खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने ऐसे नारे से इंकार किया और इसे भाजपा की साजिश बता दिया नारे सुनकर भी इन लोगों को पता नहीं लगता कि क्या नारा लगा है 

अब खबर है कि फॉरेंसिक जांच में साबित हो गया है कि पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाया गया था जिसके लिए पुलिस ने हावेरी जिले के एक मिर्च व्यापारी को हिरासत में लिया है लेकिन  उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी क्या क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता बीके हरिप्रसाद ने तो पाकिस्तान को एक तरह कांग्रेस का “मित्र देश” बता दिया है और कोर्ट इसे “अभिव्यक्ति की आज़ादी” भी कह सकता है

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भाजपा के लिए “शत्रु देश” है जबकि हमारे लिए एक “पड़ोसी मुल्क” है और सहारा लिया आडवाणी जी की लाहौर यात्रा का जिसमे उन्होंने जिन्ना की तारीफ़ की थी आडवाणी की एक यात्रा को कंधा बनाए रहते हैं कांग्रेस के लोग जबकि पाकिस्तान को जन्म देकर कांग्रेस ने तभी से पाकिस्तान की लल्लोचप्पो ही की है

एक दिन “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगवाए कांग्रेस ने और दूसरे दिन बेंगलुरु में बम धमाका होता है जबकि पिछले 10 सालों से कोई आतंकी हमले नहीं हुए क्या कांग्रेस मोदी सरकार के इसी दावे को पलीता लगाना चाहती है कि भाजपा राज में कांग्रेस राज की तरह आतंकी हमले नहीं हुए कांग्रेस भूल रही है कि इस धमाके की जिम्मेदारी भी कांग्रेस सरकार पर होगी जो अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगवा कर और फिर पाकिस्तान को “मित्र देश’ बता कर पाकिस्तान के साथ खड़ी है 

यह धमाका भारत विरोधी निताशा कौल को वापस भेजने के बाद हुआ कांग्रेस सरकार वैसे ही इस महिला को निमंत्रण पर बुला कर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की दोषी है क्योंकि निताशा कौल पाकिस्तान प्रेमी और भारत विरोधी है, कहती है कश्मीर भारत का नहीं है और 370 हटाना गलत है जबकि यह महिला कश्मीरी है और ऐसी भारत विरोधी महिला से कांग्रेस के संबंध का क्या मतलब है 

जो माहौल कांग्रेस ने कर्नाटक में बनाया हुआ है और जिस तरह राज्य सरकार का खजाना खाली हो चुका है और विकास के पैसा बचा ही नहीं है ऐसे में कोई निवेश राज्य में होना नामुमकिन है, कांग्रेस के विदेशी आका चाहते हैं  कि भारत को खोखला करते रहो और अडानी अंबानी टाटा का विरोध करते रहो

अभी तो कांग्रेस का युवराज राहुल “कालनेमि” लंदन से कोई नया टूल किट लेकर आया होगा जो हो सकता है चुनाव से पहले देश में दंगे भड़काने के काम आएगी