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दिल्ली धमाके के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: सभी एयरबेस पर रेड अलर्ट, हाई अलर्ट पर फौज; NOTAM किया गया जारी


दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए कार धमाके के बाद अब पाकिस्तान में भी हड़कंप मच गया है। सोमवार (10 नवंबर 2025) को हुए इस धमाके में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद पाकिस्तान ने सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया है। खबर है कि पाकिस्तान ने अपने सभी एयरबेस और हवाई ठिकानों पर रेड अलर्ट जारी कर दिया है।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को खुफिया एजेंसियों से चेतावनी मिली है कि भारत की ओर से किसी तरह की जवाबी कार्रवाई या सीमा पार तनाव बढ़ने की संभावना है। इसी कारण पाकिस्तान की थलसेना, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है। पाकिस्तान के सेंट्रल कमांड ने सेना की सभी शाखाओं को निर्देश दिया है कि वे हालात पर कड़ी नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।

इसके अलावा, एयर डिफेंस सिस्टम को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि भारत की ओर से किसी संभावित हमले की कोशिश पर तुरंत जवाबी कार्रवाई की जा सके। पाकिस्तान ने अपने सभी सैन्य विमानों और अहम ठिकानों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की ओर से किसी प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक (पहले से की गई जवाबी कार्रवाई) या किसी अन्य सैन्य कदम की आशंका को देखते हुए यह सतर्कता बरती जा रही है। पाकिस्तान की हवाई सीमाओं पर अब एयर डिफेंस रडार लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसी के तहत पाकिस्तान ने 11 नवंबर से 12 नवंबर तक के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है, यानी इन दो दिनों में सीमा क्षेत्र के आसमान में उड़ानों पर कई तरह की पाबंदियां और सुरक्षा नियम लागू रहेंगे।

‘महाराज बहुत हो गया अब रोक दीजिए’: राजनाथ सिंह ने संसद से बताया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कैसे पाकिस्तान कर रहा था बाप-बाप

  लोकसभा में बोलते रक्षामंत्री राजनाथ सिंह/कश्मीर में ढेर हुए आतंकी (फोटो साभार: X@SansadTV/IndiaToday)
लोकसभा में सोमवार 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ जोरदार प्रहार करते हुए विपक्ष को आईना दिखाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कभी-कभी विपक्षी दलों के लोग सवाल उठाते हैं कि हमारे कितने विमान गए? लेकिन उनका यह सवाल हमारी राष्ट्रीय भावनाओं का सही से प्रतिबिंब नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने एक बार भी यह नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान मार गिराए? यदि सवाल ही करना है तो सही सवाल यह होना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकी ठिकानों को प्रभावी तरीके से तबाह किया और ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो उसका उत्तर है, हां।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर सरकार का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 6-7 मई 2025 की रात भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले का बदला लेना और आतंकवाद की नर्सरियों को नष्ट करना था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए।

रक्षामंत्री ने कहा कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछकर 26 लोगों की हत्या की थी, जिसमें ज्यादातर हिंदू थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी।

इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने सेना को निर्णायक कार्रवाई की छूट दी। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ 22 मिनट में सभी आतंकी हमलों को हिट किया और 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया।

इसके बाद पाकिस्तान की ओर से हमले 7 मई से 10 मई की रात 1 बजकर 30 मिनट तक मिसाइल और लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया। उसके निशाने पर हमारे सैन्य अड्डे थे। हमारा डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर दिया और पाकिस्तान किसी भी टार्गेट को हिट नहीं कर पाया। भारत के रक्षा तंत्र ने सभी हमलों को विफल कर दिया।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान एक भी लक्ष्य को हिट नहीं कर पाया। इसके जवाब में 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरफील्ड पर करारा प्रहार किया, जिसके बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से संपर्क कर कार्रवाई रोकने की अपील की।

रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन को केवल पॉज किया गया है और यदि पाकिस्तान ने फिर उकसाया तो इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन युद्ध छेड़ने के लिए नहीं, बल्कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए था, जिसमें भारत ने अपने सभी लक्ष्य हासिल किए।

ऑपरेशन महादेव में हासिम मूसा समेत 3 आतंकी ढेर, जारी है एनकाउंटर

वहीं, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के तहत श्रीनगर के लिदवास में 28 जुलाई को सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों सुलेमान साहा, अबु हमजा और यासिर को मार गिराया। चिनार कॉर्प्स के अनुसार, मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू हुई, जब 24 राष्ट्रीय राइफल्स और 4 पैरा ने आतंकियों को घेर लिया।

मारे गए आतंकी सुलेमान साहा को मीडिया रिपोर्ट्स में हासिम मूसा बताया जा रहा है, जो पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था।

आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और ग्रेनेड बरामद हुए। माना जा रहा है कि ये आतंकी पहलगाम हमले से जुड़े थे, जिसके लिए एनआईए ने पहले दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन अभी जारी है, क्योंकि एक अन्य आतंकी की तलाश चल रही है।

रक्षामंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सही सवाल नहीं पूछ रहे। उन्होंने जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक शक्ति का प्रतीक है। भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता पर किसी भी हमले का करारा जवाब देगा।

राजनाथ सिंह ने कॉन्ग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को दोनों देशों की डायलॉग प्रॉसेस से 2009 की सरकार ने डीलिंक कर दिया था। साल 2006 में यह मान लिया गया था कि पाकिस्तान आतंक से पीड़ित है। इसने भारत की रणनीति को कमजोर किया। हमारे डेलिगेशन ने दुनिया के देशों में जाकर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के स्टैंड को प्रभावी तरीके से रखा।

रक्षामंत्री ने कहा, “पीएम मोदी ने भी कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर रुका है, समाप्त नहीं हुआ है। पाकिस्तान अगर फिर कोई हरकत करता है, तो हम और भी कठोर कार्रवाई करेंगे। पाकिस्तान के मन में गलतफहमी थी, उसे हमने ऑपरेशन सिंदूर से दूर कर दिया। अगर कुछ बचा होगा तो उसे भी दूर कर देंगे।”

पहलगाम में जिस TRF ने दिया था हिंदुओं के नरंसहार को अंजाम, उसे अब अमेरिका ने भी आतंकी संगठन माना

डोनाल्ड ट्रंप (बाएँ), TRF का LOGO (बीच में), मोदी (दाएँ), (साभार : The White House, Aajtak & The Economic Times)
एक तारीख जो भारत के दिल में नासूर बनकर दर्ज हो गई, वो है 22 अप्रैल 2025 की। पहलगाम की शांत घाटियों में गूंजती गोलियों की आवाजों ने 26 बेगुनाह जिंदगियों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। इस बार आतंकियों ने न धर्म छिपाया, न नीयत- ‘क्या तुम हिंदू हो’? पूछने के बाद सीधे गोली मार दी। ये कोई छिपा हमला नहीं था, ये एक धार्मिक नरसंहार था।

जिस आतंकी संगठन TRF ने इस कत्लेआम की जिम्मेदारी ली थी, उसे भारत पहले ही आतंकी संगठन घोषित कर चुका था। TRF कोई आम संगठन नहीं है। ये पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की गोद में पला वो खूनी भेड़िया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा ने नया नाम और नया चेहरा देकर छोड़ा है। लेकिन अब अमेरिका ने भी आधिकारिक रूप से TRF को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह जानकारी दी। मार्को रुबियो ने बताया कि यह फैसला ट्रंप सरकार ने आतंकवाद से लड़ने और पहलगाम हमले में न्याय दिलाने के लिए लिया है।

                          अमेरिका ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर TRF को आतंकी संगठन घोषित किया

वहीं, भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका ने TRF को आतंकी संगठन घोषित करके अच्छा किया। उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि यह भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद के खिलाफ मजबूत साथ होने का सबूत है। जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी विदेश विभाग की तारीफ भी की।

टीआरएफ क्या है और कैसे काम करता है?

द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) एक आतंकी संगठन है। यह पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ही एक नया रूप है। TRF सीधे-सीधे बड़ा संगठन नहीं है। यह छोटे-छोटे आतंकी समूहों की तरह काम करता है, जिन्हें टेरर मॉड्यूल कहते हैं। इनमें फाल्कन स्क्वाड जैसे नाम शामिल हैं।

ये समूह किसी खास काम के लिए तैयार होते हैं और काम खत्म होने के बाद या तो खत्म हो जाते हैं या अपना चेहरा बदल लेते हैं। TRF के आतंकी बहुत चालाक होते हैं। वे आम लोगों की तरह रहते हैं।

हमला करने से पहले वे अपनी जगह की रेकी करते हैं, यानी वहाँ की पूरी जानकारी जुटाते हैं। फिर वे हथियार इकट्ठा करते हैं और ट्रेनिंग लेते हैं। हमले के बाद वे अपने हथियार छिपा देते हैं और घाटियों या जंगलों में छिप जाते हैं।

ये आतंकी सोशल मीडिया का भी खूब इस्तेमाल करते हैं। वे इसके जरिए इस्लामिक कट्टरता फैलाते हैं और युवाओं का ब्रेनवॉश करते हैं, ताकि वे उनके साथ जुड़ जाएँ। ऐसा करने से उन्हें दो फायदे होते हैं। पहला, वे हमलों के लिए स्थानीय लड़कों का इस्तेमाल कर पाते हैं। दूसरा, स्थानीय लोगों को चुनने से उन्हें सहानुभूति भी मिलती है और छिपने के लिए जगह भी मिल जाती है।

TRF जैसे आतंकी संगठन हाइब्रिड मिलिटेंट्स का भी इस्तेमाल करते हैं। ये ऐसे आम नौजवान होते हैं जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता। ये ऑनलाइन माध्यम से इन आतंकी समूहों से जुड़ते हैं।

फिर इन्हें ट्रेनिंग दी जाती है और हमला करने का लक्ष्य बताया जाता है। हमला करने के बाद ये फिर से अपने गाँव या शहर जाकर आम जिंदगी जीने लगते हैं। चूंकि इनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए इन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

TRF जैसे संगठन आर्टिक्स 370 हटाए जाने के बाद सामने आए। ये ऑनलाइन ही शुरू हुए थे और बाद में दूसरे बड़े आतंकी गुटों से जुड़ गए। ऊपर से देखने पर ये ऐसे लगते हैं जैसे नए बने हों, लेकिन इनका मकसद एक ही होता है- कश्मीर के स्थानीय लोगों के मन में गैर-कश्मीरियों के लिए डर और गुस्सा पैदा करना।

साथ ही, कश्मीर को आतंकवाद से अस्थिर बनाए रखना। ये आतंकी एक ‘शैडो वॉर’ (अदृश्य युद्ध) चला रहे हैं, जिसमें वे खुद को ‘हम’ और बाकी देश व सेना को ‘वे’ बताते हैं, जो उनके साथ गलत कर रहे हैं।

टीआरएफ ने अब तक कितने हमले किए हैं?

टीआरएफ ने अब तक कई आतंकी हमले किए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हमले नीचे दिए गए हैं।

अप्रैल 2020 में कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ करने के बाद इस हमले में सेना के 5 जवान बलिदान हुए थे, जिनमें एक जेसीओ भी शामिल थे।

30 अक्टूबर 2020 को साउथ कश्मीर के कुलगाम जिले में बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

26 नवंबर 2020 को श्रीनगर के लवेपोरा इलाके के पास श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर उन्होंने दो सैनिकों को गोली मारी और उनके हथियार छीन लिए। उन्होंने इस हत्या का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया था।

26 फरवरी 2023 को कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

20 अक्टूबर 2024 को गांदरबल के गगनगीर इलाके में श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर टनल बनाने वाली जगह पर फायरिंग की। इस हमले में बडगाम के डॉक्टर शहनवाज मीर और पंजाब-बिहार के 6 मजदूर मारे गए थे।

अमरनाथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी TRF ने ही ली थी। यह हमला टीआरएफ ने अपने फाल्कन स्क्वाड की मदद से किया था, जिसे बेहद खूंखार और तेज-तर्रार माना जाता है।

अमेरिकी अधिकारियों मार्को रुबियो ने इस हमले को 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला बताया।

                                                       अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का स्टेटमेंट

पहलगाम हमला

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ। यह हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर प्लान किया था।

इसे पाकिस्तान के नेताओं और सेना के कहने पर अंजाम दिया गया था। यह हमला सिर्फ पाकिस्तानी आतंकियों ने ही किया था। ISI ने पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर साजिद जट्ट को साफ निर्देश दिए थे कि वह पहलगाम में केवल विदेशी आतंकियों का इस्तेमाल करे।

हमले को गुप्त रखने के लिए किसी भी कश्मीरी आतंकी को इसमें शामिल नहीं किया गया। इसके बजाय, जम्मू-कश्मीर में पहले से मौजूद लश्कर के विदेशी आतंकियों को यह काम सौंपा गया।

पहलगाम हमले की अगुवाई सुलेमान नाम का एक शख्स कर रहा था। वह पाकिस्तान के विशेष बल का एक संदिग्ध कमांडो रह चुका है। उसने 2022 में LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पार करके जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की थी।

सुलेमान ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लश्कर के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण लिया था। इस दस्ते में सुलेमान के अलावा दो और पाकिस्तानी आतंकी थे। सैटेलाइट फोन से पता चला कि सुलेमान 15 अप्रैल 2025 को त्राल के जंगल में था।

इससे पता चलता है कि वह हमले से करीब एक हफ्ते पहले ही पहलगाम के पास पहुँच गया था। सुलेमान अप्रैल 2023 में पुंछ में सेना के एक ट्रक पर हुए हमले में भी शामिल था, जिसमें पाँच सैनिक शहीद हुए थे।

हालाँकि, ISI और लश्कर के इस बड़े मिशन को अंजाम देने से पहले वह दो साल तक शांत रहा था। हमलावरों ने 26 लोगों को चुना और मार दिया, जिनमें सभी पुरुष थे और 25 हिंदू थे। अभी घाटी में करीब 68 विदेशी आतंकी और 3 स्थानीय आतंकी एक्टिव हैं।

‘एक ही धर्म (हिंदुओं को) के लोगों को चुन-चुन कर मारा’: मोदी सरकार के आल पार्टी मिशन पर गए शशि थरूर ने खोली पाकिस्तान की पोल

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                          अमेरिका में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (फोटो साभार: X_IndiainNewYork)
हलगाम आतंकी हमले में हिंदुओं के नरसंहार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दुनिया के सामने बयाँ किया। थरूर उस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जिसे मोदी सरकार ने अलग-अलग देशों में भेजा है ताकि इस हमले और ऑपरेशन सिंदूर के रूप में भारत की प्रतिक्रिया के बारे में दुनिया को बताया जाए।

न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास में बोलते हुए थरूर ने आतंकियों के इरादों को पूरी दुनिया को बताया। शशि थरूर ने आतंकियों के इरादों को साफ करते हुए बताया कि आतंकियों ने पहले लोगों की धर्म की पहचान की और फिर सिर्फ उसी आधार पर उनकी हत्या की। जो हिंदू थे-वो मार दिए गए, जो मुस्लिम थे – उन्हें छोड़ दिया गया।

कश्मीर की तरक्की को रोकने की साजिश

शशि थरूर ने बताया कि इस हमले का समय और क्रूरता सोची-समझी थी, ताकि कश्मीर की बढ़ती साख को नुकसान पहुँचे। कश्मीर अब एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यटन स्थल बन रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले साल कश्मीर में अमेरिका के ऐस्पन, कोलोराडो से ज्यादा पर्यटक आए। यह सिर्फ सामान्य स्थिति नहीं, बल्कि समृद्धि का प्रतीक है।” अनुच्छेद 370 हटने के बाद मोदी सरकार के विकास कार्यों से कश्मीर में शांति और प्रगति दिख रही थी, जिसे आतंकी रोकना चाहते थे।
थरूर ने जोर देकर कहा कि यह हमला कोई सामान्य आतंकी घटना नहीं थी। यह सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की सुनियोजित कोशिश थी। उन्होंने कहा, “यह ऐसा नहीं था कि कोई बम धमाके में अंधाधुंध लोगों को मार रहा था। आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों को चुना और उनकी हत्या की।”

सिर्फ हिंदुओं को निशाना बनाया गया

इस आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक थे। शशि थरूर ने बताया कि सभी मृतक हिंदू थे और उन्हें उनके धर्म के कारण मारा गया। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें एक हिंदू प्रोफेसर ने इस्लामी कलमा पढ़कर अपनी जान बचाई, क्योंकि आतंकियों ने उन्हें मुस्लिम समझ लिया।
थरूर ने कहा, “कुछ मामलों में पति को गोली मारी गई और पत्नी को कहा गया कि वह जाकर दुनिया को बताए कि उसे उसके धर्म के कारण मारा गया।” फिर भी उन्होंने भारत की जनता की तारीफ की कि इस उकसावे के बावजूद देश में कोई जवाबी हिंसा नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि भारत में कोई जवाबी हिंसा नहीं हुई।” भारतीय समाज ने एकजुट होकर दुख और दृढ़ता दिखाई।

आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी

आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने हमले के एक घंटे के भीतर इसकी जिम्मेदारी ले ली। थरूर ने कहा, “भारत को इस बात पर कोई शक नहीं था कि यह हमला कहाँ से हुआ।” हालाँकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।
मोदी सरकार ने तुरंत एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने का फैसला किया। थरूर इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। हालांकि कुछ विपक्षी नेताओं को इस प्रतिनिधिमंडल और थरूर जैसे नेताओं के चयन पर आपत्ति थी, लेकिन सरकार ने सभी विचारधाराओं को शामिल करके भारत की बात को और विश्वसनीय बनाया। ऑपरेशन सिंदूर के विवरण को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से रखा गया।

‘पाकिस्तान से हुआ जंग तो नहीं लड़ेगे सिख सैनिक’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू को ‘हथियार’ बना पाकिस्तानी मीडिया कर रहा प्रोपेगेंडा


ऑनलाइन यूट्यूब चैनल ने रविवार (27 अप्रैल 2025) को भारत-विरोधी कालिस्तानी महल गुरपतवंत सिंह पी बॉलीअंड का इंटरव्यू किया। इस साक्षात्कार में गुरपतवंत सिंह पेज ने कई दुष्टों, बेबुनियादों और आंदोलनकारियों पर आरोप लगाए, जो भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने की अपनी नापाक व्यवस्था को दिखाते हैं। फिल्म में दावा किया गया है कि पंजाब के दो करोड़ सिख भारत सरकार को कभी भी पाकिस्तान पर हमला करने से नहीं रोकेंगे।

साथ ही हाल ही में उन्होंने पहले गेम में आतंकवादी हमलों को लेकर भारतीय गुप्तचरों की साजिश रची और कहा कि इसका मकसद बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बढ़ावा देना था। यह साक्षात्कार वक्त सामने आया, जब पहले गेम अटैक में 27 साल की मासूम हिंदू फिल्म की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

इस साक्षात्कार में पाकिस्तान द्वारा यूक्रेनी इस्लामिक आतंकवादियों को उखाड़ने की घटिया कोशिश की बात कही गई है। पी अलाउल्स ने बेशर्मी से दावा किया कि पहला गेम पाकिस्तान पर हमला करने का काम नहीं था, बल्कि भारतीय मस्जिद की करतूत थी। इसके अनुसार, यह बीजेपी पर बिहार चुनाव में ध्रुवीकरण करने और राजनीतिक फ़ायदा उठाने के लिए हमला किया गया। इस टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि जब-जब अमेरिका के बड़े नेता भारत आते हैं, तब-तब ऐसे हमले होते रहते हैं, ताकि पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर खराब हो सके। इसमें शामिल का कोई सबूत नहीं है, और ये सिर्फ भारत को बदनाम करने की इसकी साजिश का हिस्सा हैं।

 गुरपतवंत सिंह पी शेयरहोल्डर नाम के इस स्त्रैती ने एक और घिनौना ने दावा किया कि पंजाब के लोग और भारतीय सेना में सिख सैनिक और अधिकारी शामिल हैं जो पाकिस्तान के साथ जुड़े हुए हैं। भारत के उस फैसले का जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया था कि भारत अब सिंधु जल संधि का पूरी तरह से पालन नहीं करेगा। इस आतंकवादी ने इसे भारत की आपत्तिजनक टिप्पणी में दावा किया है कि भारत-पाकिस्तान का पानी लाभ चाहता है।

पी बब्लू ने पाकिस्तान की सेना के प्रमुखों और प्रधान मंत्री के उन लाॅकडाउन का बहिष्कार किया, जिसमें पानी पर प्रतिबंध को युद्ध की कार्रवाई माना जाता है। पी एब्यूज़न ने भारतीय पंजाब में रहने वाले सिखों की स्थिति लेकर सवाल उठाया कि अगर भारत-पाकिस्तान में जंग हुई तो सिखों का क्या होगा? यह साफ़ा साज़िश है कि यह मैट्रेस सिख समुदाय भारत के ख़िलाफ़ भड़काने की कोशिश कर रहा है।

गुरपतवंत सिंह पी वॉलीबॉल ने दावा किया कि सिख समुदाय पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा और भारत पर पंजाब के रास्ते हमला करने से रोकेगा। एपीएसए ने कहा कि 2025 में 1965 और 1971 जैसे हालात नहीं हैं, और अब इसके साथ सिखाएं। लेकिन यह शर्त रखी कि सिख इसी तरह पाकिस्तान का साथ देंगे, अगर पाकिस्तान फ्रैंक खालिस्तान की मांग का समर्थन करे। इस मित्र ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खालिस्तान के हमलों और खालिस्तान के अवशेषों को आतंकवादी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में समझाने की मांग की। यह साफ है कि यह भारत को तोड़ने की साजिश में पाकिस्तान को उकसा रहा है।

पन्नू ने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान खालिस्तान का समर्थन करता है, तो दुनिया भर के सिख इसके साथ एकजुट हो जाएँगे। उसने 1971 के युद्ध का जिक्र किया, जब भारत की मदद से बांग्लादेश बना। इस नीच ने आरोप लगाया कि अब भारत बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करना चाहता है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयानों में जिक्र किया। इसने दावा किया कि खालिस्तान का समर्थन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है। उससे भारत के पंजाब में लाखों सिख इसके साथ आ जाएँगे। यह भारत की एकता के लिए खुला खतरा है, और इसकी मंशा साफ है कि यह सिखों को भारत के खिलाफ हथियार बनाना चाहता है।

इस खालिस्तानी आतंकी ने दावा किया कि इसने भारतीय सेना के सिख सैनिकों को भारत के प्रति वफादारी छोड़ने के लिए उकसाने की कोशिश की है। इसने कहा कि इसके इन गंदे कामों की वजह से भारत में इस पर देशद्रोह के कई मामले दर्ज हैं। इस नीच ने भारतीय सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सिखों को अब समझ आ गया है कि उनका असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत सरकार है। इसने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र किया, जब भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके अलावा, इसने नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों और 1984 से 1995 तक पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाइयों का हवाला दिया, जिनमें हजारों सिख युवा मारे गए। यह साफ है कि यह आतंकी पुरानी घटनाओं को तोड़-मरोड़कर सिखों में भारत के खिलाफ नफरत फैलाना चाहता है।

इंटरव्यू के दौरान पन्नू ने पाकिस्तान सरकार की तारीफ की, जो सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब जाने की इजाजत देती है, लेकिन भारतीयों को वीजा नहीं देती। इसने इसे एक अच्छा कदम बताया, लेकिन कहा कि भारत की कथित आक्रामकता को रोकने के लिए यह काफी नहीं है। इसने फिर जोर दिया कि पाकिस्तान को खालिस्तान का खुलकर समर्थन करना चाहिए, ताकि सिख इसके साथ खड़े हों। यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने खालिस्तान रेफरेंडम का जिक्र किया और कहा कि यह सिख समुदाय के दम पर चल रहा है, भले ही किसी सरकार का समर्थन न हो। इसने बताया कि जल्द ही यह रेफरेंडम भारत के पंजाब में होगा, जिसमें हिंदू और मुस्लिम भी वोट दे सकेंगे। उसने 17 अगस्त 2025 को वाशिंगटन डीसी में होने वाले रेफरेंडम को अहम बताया और कहा कि यह ‘पंजाब वोट फॉर इंडिपेंडेंस’ कैंपेन के तहत व्हाइट हाउस और अमेरिकी कॉन्ग्रेस में लॉबिइंग कर रहा है। यह साफ है कि यह आतंकी विदेशी धरती पर बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

इस नीच ने भारत पर खालिस्तानी आतंकियों और समर्थकों के खिलाफ सख्ती का आरोप लगाया। इसने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और यूके में इसके सहयोगी परमजीत सिंह पम्मा पर हुए कथित हमले का जिक्र किया। पन्नू ने दावा किया कि एक बीजेपी सांसद ने उसके सिर पर 5 लाख डॉलर का इनाम रखा है, लेकिन वो मौत से नहीं डरता। पन्नू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेशर्मी से चुनौती दी कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सिखों के बीच सीधा मुकाबला करें। यह इसकी हिमाकत दिखाता है कि यह भारत के नेतृत्व को खुलेआम धमकी दे रहा है।

इस आतंकी ने कश्मीर के कथित आजादी आंदोलन का समर्थन किया और जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को अंजाम देने वालों को 'आजादी का संग्राम' बताया। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाले कश्मीरियों पर भी आधारित है, जो कश्मीर में सक्रिय प्रशिक्षण के समर्थन में भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन नहीं करते हैं। यह सिद्ध होता है कि यह आतंकी सिर्फ खालिस्तान नहीं, बल्कि कश्मीर में भी घुसपैठ की कोशिश कर रहा है।

22 फरवरी को फर्स्टगेम आतंकी हमला हुआ था, जिसमें पाकिस्तान के सहयोगी संगठन एमबीएम-ए-तैयबा के सहयोगी द रेसिस्टेंस फोर्स (टी फाइनैंशियल फोर्स) ने 27 मासूम हिंदू ऑर्केस्ट्रा को म्यूजिकल बनाया था। क्रिस्टोफर ने अपनी धार्मिक पहचान की, कलमा पढ़ने को कहा और उनके कपड़े निकालने वाले की जांच की कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जो इस जांच में 'विफल' हो गया, उन्हें स्नातक से गोली मार दी गई।

गुरपतवंत सिंह पी वॉली एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक हैं, जो खुद वकील हैं। यह सिखों की अधिकारिता के खिलाफ़ खालिस्तानी भावना भड़काता है और भारत के समाजवादी धमाके देता है। भारत ने इसे साइबेरियाई कला (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत नागरिकता घोषित कर दिया है। इसके संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' की भी भारत में एक सूची है। यह भारत का कट्टर दुश्मन है, जो विदेशी धरती से भारत की एकता और शांति को तोड़ने की साजिश रच रहा है।

कल्पना से भी बड़ी सजा दूँगा, आतंकियों को मिट्टी में मिला दूँगा: पहलगाम अटैक पर PM मोदी का खुला ऐलान, मददगारों को भी खोज-खोजकर मारेगा भारत; भारत में बैठे पाकिस्तानी sleeper cells पर भी कार्यवाही होनी चाहिए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मधुबनी में आतंकियों और उनके आकाओं को कड़ी चेतावनी दी। पीएम मोदी ने कहा इस हमले में आतंकियों ने मासूम लोगों को जिस बेरहमी से मारा, उससे हर भारतीय दुखी और गुस्से में है। इस हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने भाई तो किसी ने अपना जीवनसाथी। करगिल से कन्याकुमारी तक पूरा देश इस दुख में एकजुट है और हमारा गुस्सा भी एक जैसा है।

प्रधानमंत्री मोदी यह भी नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर की तरह शेष भारत में भी sleeper cells की भी कमी नहीं। जो आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक हैं। 

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, “22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिससे पूरा देश व्यथित है। सभी पीड़ित परिवारों के दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। जिन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है, वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है।”

 पीएम मोदी ने कहा, “मैं स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ कि जिन्होंने हमला किया है और जिन्होंने इसकी साजिश रची है, उन्हें उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। सजा मिलकर रहेगी। मैं पूरी दुनिया को बिहार की धरती से कहता हूँ कि भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूँढकर सजा देगा। हम उन्हें धरती के किसी भी कोने से खोज निकालेंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद से नहीं तोड़ा जा सकता। आतंकवाद को बख्शा नहीं जाएगा। हर आतंकी को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति आतंक आकाओं की कमर तोड़ कर रहेगी।”

पीएम ने उन देशों और उनके नेताओं का शुक्रिया अदा किया, जो इस मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “सभी पीड़ित परिवारों के दुख में पूरा देश साथ खड़ा है। इस हमले में किसी ने अपना बेटा, भाई, पति मारा गया। देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। जिन्होंने ये हमला किया है उन आतंकियों को, इस हमले की साजिश करने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी और मिलकर रहेगी। आतंक को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मैं पूरी दुनिया को बिहार की धरती से कहता हूं कि भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूँढकर सजा देगा। हम उन्हें धरती के किसी भी कोने से खोज निकालेंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद से नहीं तोड़ा जा सकता। आतंकवाद को बख्शा नहीं जाएगा। हर आतंकी को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति आतंक के आकाओं की कमर तोड़ देगी। सभी जो मानवता में विश्वास रखते हैं, वे हमारे साथ हैं। मैं उन देशों और उनके नेताओं का शुक्रिया अदा करता हूँ जो हमारे साथ खड़े हैं।”

पीएम ने आतंकवाद की जड़ें खत्म करने के लिए भारत के हर कदम उठाने का संकल्प जताया और कहा कि न्याय जरूर होगा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपने भाषण में बिहार के विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि गाँव मजबूत होंगे, तभी भारत मजबूत होगा। पूज्य बापू भी यही मानते थे कि गाँवों का विकास देश की तरक्की के लिए जरूरी है। पिछले एक दशक में पंचायतों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। टेक्नोलॉजी के जरिए पंचायतों को सशक्त बनाया गया है। जमीनों के दस्तावेजों को डिजिटल करने से विवाद कम हो रहे हैं। 30 हजार नए पंचायत भवन भी बनाए गए।

इस दौरान बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पीएम का स्वागत किया और कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में बिहार में बहुत काम हुआ है। उन्होंने सड़क, बाढ़ नियंत्रण और स्वास्थ्य के लिए केंद्र की घोषणाओं का जिक्र किया। नीतीश कुमार ने मखाना बोर्ड के ऐलान की भी तारीफ की। पीएम मोदी ने इस मौके पर बिहार की 869 करोड़ की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया और पीएम आवास योजना के तहत लोगों को घर की चाबियां सौंपीं।

जिस आतंकी ने कहा था ‘मोदी को मार देंगे’, मर गया अस्पताल के बेड पर : कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट का दोषी था बाशा, उसके ही साथी की जेल में ‘मालिश’ करवाती थी DMK सरकार

                      कोयंबटूर धमाके के मुख्य अभियुक्त एस ए बाशा की मौत (फोटो साभार: newstaglive)
अल उम्मा नाम के प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के संस्थापक और कोयंबटूर ब्लास्ट केस के दोषी एस. ए. बाशा की सोमवार (16 दिसंबर 2024) को मौत हो गई। उसकी उम्र 83 साल थी और बढ़ती उम्र की वजह से वो लंबे समय से बीमार चल रहा था। बता दें कि कोयंबटूर ब्लास्ट केस में बाशा और अल उम्मा के 16 अन्य सदस्यों को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सजा काट रहे एस. ए. बाशा को अक्टूबर 2023 में इलाज के लिए अस्थायी पैरोल दी गई थी, जिसे सरकार ने उसके स्वास्थ्य के आधार पर बढ़ा दिया था। वह चेन्नई के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहा था।

 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर के आर.एस. पुरम और शहर के अन्य हिस्सों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 58 लोगों की जान गई और 231 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह हमला उस समय हुआ जब भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी आर.एस. पुरम में चुनाव प्रचार के लिए पहुँचने वाले थे।

पुलिस ने इस मामले में 166 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें बाशा भी शामिल था। स्पेशल कोर्ट ने ने 158 लोगों को दोषी ठहराया और 43 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाद में 41 लोगों ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने इनमें से दो नाबालिगों को रिहा कर दिया, जबकि 17 लोगों को उम्रकैद और 22 को बरी कर दिया।

मोदी को दी थी जान से मारने की धमकी, उस समय थे गुजरात के सीएम

प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अल-उम्मा के अध्यक्ष एसए बाशा ने जुलाई 2003 में कोयंबटूर का दौरा करने पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने की धमकी भी दी थी। बाशा और आठ अन्य लोगों ने यह धमकी उस समय खुले आम दी थी जब हिंदू मुन्नानी नेता की हत्या से संबंधित एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पत्रकार कोयंबटूर अदालत परिसर में इन मुजरिमों से बात कर रहे थे। बाशा ने कहा था कि अगर गुजरात के सीएम मोदी कोयंबटूर आएँगे, तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

बाशा के साथी महदानी की जेल में मालिश कराती थी डीएमके सरकार

यहाँ ये बताना जरूरी है कि बाशा और उसके साथियों पर डीएमके सरकार कितनी मेहरबान रहती थी। दरअसल, 24 जुलाई 2006 को इंडियन एक्सप्रेस में एक समाचार प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था –“कोयंबटूर आतंकी घटनाओं के आरोपी के लिए द्रमुक ने जेल को स्पा में बदला”। समाचार में बताया गया था, “अब्दुल नासिर महदानी की आयुर्वेदिक मालिश का खर्च वहन सरकार कर रही थी और उसकी बीवी के खिलाफ गिरफ्तारी का वॉरंट होने के बावजूद वह महदानी से बेरोकटोक मिल सकती थी। इन हालात में आतंक पर नकेल कसने की जरूरत पर सख्त बातें करने वालों पर हँसा जा सकता है। महदानी 1998 के कोयंबटूर सीरियल विस्फोटों का मुख्य आरोपी है, जिसमें बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाने की कोशिश करते हुए 58 लोगों की हत्या कर दी गई थी।”
इसमें आगे लिखा था, “जब से करुणानिधि ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, तब से यहाँ उच्च सुरक्षा वाली जेल में रखे गए महदानी और अल उम्मा के अन्य 166 कैदियों के बीच माहौल खुशनुमा है। इनमें से ज्यादातर को कोयंबटूर विस्फोटों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। करुणानिधि की बदौलत, 10 मालिश वालों और चार वरिष्ठ आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक टीम ने 2001 से जेल के अस्पताल में रखे गए महदानी पर ‘उच्च गुणवत्ता वाला उपचार’ शुरू किया है …”

उमर अब्दुल्लाह के मुख्यमंत्री बनने के 10 दिन के अन्दर चौथा आतंकी हमला

                          जम्मू-कश्मीर में सेना के जवानों पर आतंकी हमला (फोटो साभार: iampartha)
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग क्षेत्र में सेना के काफिले पर आतंकवादी हमले की खबर है। घटना 24 अक्टूबर 2024 को घटी। इस दौरान आतंकवादियों ने बोटापथरी के नागिन पोस्ट के पास सेना के वाहनों पर अंधाधुंध फायरिंग की। हमले में दो सैनिक बलिदान हो गए और दो स्थानीय नागरिक भी मारे गए। इसके अलावा, हमले में तीन अन्य सैनिकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि जिस समय सेना का वाहन बोटापथरी इलाके से नागिन चौकी की ओर जा रहा था उसी वक्त ये हमला किया गया। आतंकवादियों ने अचानक से सेना के वाहनों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे चालक ने संतुलन खो दिया और वाहन गहरी खाई में गिर गया। इस हमले की सूचना होने पर अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और हमलावरों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

जम्मू-कश्मीर में हुआ यह हमला पिछले आठ दिनों में जम्मू-कश्मीर में चौथा आतंकवादी हमला है। इससे पहले 20 अक्टूबर को जेड-मोड़ सुरंग के स्टाफ क्वार्टर पर एक बड़ा हमला हुआ था, जिसमें सात लोग मारे गए थे और पाँच घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के ऑफ़शूट टीआरएफ ने ली थी।

इसके अलावा यदि पिछले 10 दिनों की खबरें देखें तो पता चलेगा कि राज्य में उनर अब्दुल्लाह की सरकार बनने के बाद गैर-कश्मीरी मजदूरों पर हमले फिर शुरू हो गए हैं। पिछले हफ्ते तीन अलग-अलग घटनाओं में गैर-स्थानीयों को निशाना बनाकर मारा गया है। सबसे ताजा मामला 24 अक्टूबर का ही है। पुलवामा जिले के त्राल इलाके में भी एक प्रवासी मजदूर शुभम कुमार पर हमला हुआ, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा 18 अक्टूबर को भी शोपियाँ जिले में बिहार के रहने वाले अशोक कुमार चव्हाण की आतंकियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

कश्मीर में गैर-कश्मीरी लोगों पर बढ़ते हमलों की घटनाओं से हर किसी में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। आलम ये है कि गैर-कश्मीरी अपना काम छोड़कर अपने घर लौटने का फैसला ले रहे हैं।

रूस : चर्च में फायरिंग, यहूदियों के धर्मस्थल को जलाया, पादरी का काटा गला: आतंकी हमले में 15 पुलिसकर्मियों की मौत, 6 आतंकवादी भी ढेर

                                                रूस में चर्च पर हमला (फोटो साभार: इंडिया टुडे)
रूस में रविवार (23 जून 2024) को दक्षिणी प्रांत दागेस्तान के दो शहरों (माखचकाला और डर्बेंट) में आतंकी हमला हुए। घटना में 15 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, पादरी का सिर कलम कर दिया गया और 25 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में रूस के सुरक्षाबलों ने भी 6 बंदूकधारियों को मार गिराया है।

जानकारी के मुताबिक, रविवार को आतंकियों ने दो ऑर्थोडॉक्स चर्चों, एक यहूदी प्रार्थना घर और एक पुलिस चौकी पर हथियारों से लैस होकर हमला किया। अटैक में मरने वालों में ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी भी थे। आतंकियों ने उन्हें अलग से गला काटकर मारा है। उनकी उम्र 66 साल थी। वह 40 साल से चर्च में सेवा दे रहे थे। इसके अलावा चर्च के बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड को भी मौत के घाट उतार दिया गया।

वहीं रूसी यहूदी कॉन्ग्रेस ने इस संबंध में बताया है कि डर्बेंट और माखचकाला में एक-एक सिनेगॉग पर हमला किया गया है। डर्बेंट के सिनेगॉग में जब हमला किया गया, उसके 40 मिनट पहले प्रार्थना हो चुकी थी और वहाँ कोई मौजूद नहीं था। हमलावरों ने मोलोटोव कॉकटेल बम से सिनेगॉग (यहूदियों का धर्मस्थल) की बिल्डिंग में आग लगा दी। इस दौरान बाहर खड़े पुलिसकर्मी और सुरक्षा गार्ड हमले में मारे गए।

इस पूरे हमले पर अभी किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन TASS ने बताया कि हमलावर एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन के सदस्य थे। वहीं रूस ने हमलों के पीछे पीछे यूक्रेन और NATO देशों को जिम्मेदार ठहराया है। दागिस्तान के नेता अब्दुलखाकिम गडजियेव ने टेलीग्राम पर लिखा, “इसमें कोई शक नहीं है कि ये आतंकी हमले किसी न किसी तरह से यूक्रेन और NATO देशों की खुफिया सेवाओं से जुड़े हैं।”

इससे पहले रूस में मार्च में आतंकी हमला हुआ था। उस हमले में 143 लोगों की मौत हो गई थी। हमले की जिम्मेदारी ISIS-K ने ली थी। हालाँकि, रूस ने इसमें यूक्रेन की मिलीभगत होने के आरोप लगाए थे। इस बार अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ये सामने आया है कि दागेस्तान रूस का एक बड़ी मुस्लिम आबादी वाला प्रांत है, जो चेचन्या के पड़ोस में है। क्षेत्र में 14, 25, 26 जून को तीन दिनों के लिए शोक रखा गया है।

क्या पंजाब में अलगाववादी राजनीति की शुरुआत हो गई?

पंजाब चुनाव परिणाम आने से पूर्व आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर जिस अलगाववाद की शंका व्यक्त की जा रही थी, वह अब सामने आनी शुरू हो गयी, जो देश की सुरक्षा की दृष्टि से अच्छे संकेत नहीं हैं, और केंद्रीय गृह मंत्रालय, एवं सतर्कता तंत्रों को गंभीरता से इस पर निगाह रखनी होगी। 
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की कार्यशैली को देख 5 राज्यों के हुए चुनावों में पंजाब के अतिरिक्त बाकी चारों राज्यों ने फ्री की रेवड़ियों को ठुकरा कर इस पार्टी को बराबर धूल चटा कर देशहित में काम किया है। और अब पंजाब में शुरू हुई अलगाववादी हरकतों को देख समस्त देश को इस पार्टी से सतर्क रहकर उत्तर प्रदेश, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड की भांति चारों खाने चित करना होगा। 
पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता भगवंत मान ने चंडीगढ़ को तत्काल पंजाब को ट्रांसफर करने की माँग करते हुए शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र सरकार पर केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन में संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। साथ ही चंडीगढ़ को तुरंत पंजाब को ट्रांसफर करने की माँग की गई। 
चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ-साथ पंजाब और पड़ोसी हरियाणा दोनों की ही राजधानी है। केंद्र सरकार चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में बदलाव कर रहा है। इससे केंद्र सरकार के अधिकारियों की तरह चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को भी लाभ मिल रहा है।
विधानसभा से पास अपने प्रस्ताव में भगवंत मान ने कहा है कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत पंजाब को हरियाणा राज्य में पुनर्गठित किया गया था। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और पंजाब के कुछ हिस्सों को तत्कालीन केंद्र शासित प्रदेश हिमाचल प्रदेश को दे दिया गया था। उन्होंने कहा, “तब से पंजाब और हरियाणा राज्य के नामांकित व्यक्तियों को कुछ अनुपात में प्रबंधन पदों को देकर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMS) जैसी सामान्य संपत्ति के प्रशासन में एक संतुलन का उल्लेख किया गया था। अपनी कई हालिया कार्रवाइयों के माध्यम से केंद्र सरकार इस संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।”
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल में में विधानसभा में दावा किया कि पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद उन्हें केंद्र सरकार की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें ऑपरेशन के लिए भेजी गई सेना पर हुए खर्च की भरपाई के लिए 7.5 करोड़ रुपए की माँग की गई थी।

मान ने कहा कि पत्र के बाद वह तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने गए और उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया था। मान ने कहा, “मैंने राजनाथ जी से कहा कि मेरे और मेरे सहयोगी साधु सिंह के सांसद निधि से पैसे काट लें, लेकिन मुझे लिखित में दें कि आपने पंजाब को सेना किराए पर दी है और राज्य देश का हिस्सा नहीं है।”

दिलचस्प बात यह है कि सीएम मान के दावे तथ्यात्मक रूप से गलत प्रतीत होते हैं। पहली साल 2016 में भगवंत मान पंजाब के संगरूर निर्वाचन क्षेत्र से केवल संसद सदस्य थे। अगर केंद्र सरकार पंजाब सरकार से कोई पत्राचार करती तो वह किसी सांसद को पत्र नहीं भेजती, वह मुख्यमंत्री या गृह सचिव को भेजती। दूसरी बात यह है कि राजनाथ सिंह तब गृहमंत्री थे और सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है। इसलिए, सेना के मामले में उनसे मिलने से कोई फायदा नहीं होगा।

तीसरा बिंदु इस तथ्य से संबंधित है कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य में अर्धसैनिक बलों को भेजने के बदले उससे शुल्क लेती है। केंद्रीय सशस्त्र बलों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कर्तव्यों के लिए राज्यों द्वारा शुल्क वहन किया जाता है और पंजाब कोई अपवाद नहीं है। वर्तमान में गृह मंत्रालय उन राज्यों से प्रति वर्ष लगभग 13 करोड़ रुपए वसूलता है, जहाँ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) तैनात है। ‘अत्यधिक जोखिम’ और बेहद ‘कठिनाई’ वाले क्षेत्रों में सीएपीएफ की तैनाती के लिए केंद्र सरकार प्रति वर्ष लगभग 34 करोड़ रुपए शुल्क लेती है।

इस तरह की सोच अलगावाद की ओर झुकाव का इशारा: बोले नेटिजन्स

सीएम मान की इस टिप्पणी पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी। एक ट्विटर यूजर ने बयान को अलगाववादी टिप्पणी बताते हुए लिखा, “अब मुझे एहसास हुआ कि जम्मू के कुछ ट्विटर यूजर्स इस पार्टी का समर्थन क्यों कर रहे हैं। बेशक, इस प्रकार का व्यवहार उनके समर्थकों के इरादों के अनुरूप है।”
एक लोकप्रिय ट्विटर यूजर theskindoctor13 ने कहा कि क्या सही है या गलत पर बहस की जा सकती है, लेकिन पंजाब की तरह अन्य राज्यों में भी सीएपीएफ की तैनाती के लिए शुल्क लिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के भाषण अलगाववादी भावनाओं को भड़काते हैं।
एक अन्य यूजर ने कहा, “AAP का एजेंडा सामने आ ही गया। पंजाब को भारत से अलग करने का पूरा प्लान बना रखा है केजरीवाल ने। शुरुआत हो चुकी है।”
एक यूजर ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, “जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि पंजाब में आप(AAP) का सरकार बनाना आईएसआई (पाकिस्तान की खुफिया एजेेंसी) की जीत है। यह अलगावादी खालिस्तान आंदोलन को एक अलग स्तर पर ले जाएगा। इन जोकरों ने अपनी असली मंशा दिखाने से पहले एक महीने भी इंतजार नहीं किया।”
पंजाब सरकार को 2 जनवरी से 27 जनवरी के बीच पठानकोट और आसपास के इलाकों में अर्धसैनिक बलों के जवानों की 20 कंपनियों की तैनाती के बदले भुगतान का अनुरोध करते हुए एक बिल जारी किया गया था। आतंकी हमले के दौरान एयरबेस को मजबूत करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 11 कंपनियाँ और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 9 कंपनियों को तैनात किया गया था। पंजाब सरकार को 6,35,94,337 रुपए का बिल भेजा गया था, जिसका भुगतान करने से उसने इनकार कर दिया था।

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