कांग्रेस के कार्यकाल से जब White Collar जिहाद शुरू हुआ तब किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उसका कारण था क्योकि तब की सरकारें मुस्लिम कट्टरपंथ के हाथों बिकी पड़ी थी, हैं तो आज भी है। ज़ाकिर नायक क्या अनपढ़ था? नहीं, इमाम जिसने इन डॉक्टरों को आतंकवाद की ओर धकेला क्या अनपढ़ था? कई बार इस ब्लॉग पर लिखा जा चुका है और सोशल मीडिया में भी चर्चा होती है कि जब तक आतंकवाद और दंगे में शामिल और इनको संरक्षण देने वालों-चाहे अदालतें क्यों न हो-को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जाना चाहिए।
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 की शाम हुआ विस्फोट केवल एक साधारण शरद संध्या को नहीं बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा की प्रकृति को भी झकझोर गया। जाँच एजेंसियों का कहना है कि यह कोई अकेला, अशिक्षित आतंकी द्वारा किया गया हमला नहीं था बल्कि एक व्यापक, गुप्त लॉजिस्टिक्स और तकनीकी मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसमें उच्च शिक्षित, पेशेवर रूप से प्रशिक्षित लोग जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर और विश्वविद्यालय-शिक्षित ऑपरेटिव शामिल थे।
इन लोगों ने विस्फोटक सामग्री की खरीद, छिपाने और तकनीकी सहायता जैसे कार्यों को अंजाम दिया। सुरक्षा विश्लेषक अब इस प्रवृत्ति को ‘व्हाइट कॉलर जिहाद’ कह रहे हैं, अर्थात शिक्षा और पेशेवर विश्वास का दुरुपयोग कर देश के भीतर ऐसी हिंसा को अंजाम देना, जिसे नकारा जा सके और जिसका प्रभाव घातक हो।
प्रारंभिक जाँच और फोरेंसिक निष्कर्ष
विस्फोट के कुछ ही दिनों बाद बहु-एजेंसी छापों और जाँचों का दायरा दिल्ली से बाहर तक फैल गया। अधिकारियों ने ऐसे नमूने बरामद किए, जिनमें प्रयुक्त विस्फोटक सामान्य अमोनियम नाइट्रेट से कहीं अधिक शक्तिशाली थे। प्रेस ब्रीफिंग्स और मीडिया रिपोर्टों में विभिन्न राज्यों से बड़ी मात्रा में बम बनाने की सामग्री और रसायनिक घटकों की बरामदगी का विवरण आया।
समेकित रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली-NCR, श्रीनगर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हुए इन ऑपरेशनों से सैकड़ों किलो विस्फोटक जब्त किए गए। कुछ रिपोर्ट्स ने इस पूरी मात्रा को टन स्तर तक बताया। गिरफ्तार लोगों में कुछ डॉक्टर और शिक्षण संस्थानों से जुड़े व्यक्ति भी शामिल थे।
रणनीतिक संदर्भ: ऑपरेशन सिंदूर और प्रॉक्सी वॉर की दिशा
सुरक्षा विश्लेषक इस मॉड्यूल को सीधे तौर पर साल 2025 के मध्य में भारत की सीमा-पार की कार्रवाई, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जोड़कर देखते हैं। इस अभियान के तहत कई आतंकी ढाँचों को तबाह किया गया था। उसके बाद यह साफ दिखा कि प्रतिपक्ष ने अपनी रणनीति बदल ली है।
जब भारत की सीधी सैन्य कार्रवाइयाँ उसके लिए महँगी और कठिन साबित हुईं, तब उसने ‘डिनाएबल’ यानी नकारे जा सकने वाले स्थानीय प्रॉक्सी नेटवर्क सक्रिय कर दिए। दूसरे शब्दों में कहें तो जब बाहरी विकल्प सीमित हो जाते हैं, तो बाहरी सरगनाओं के लिए यह आसान हो जाता है कि वे भीतर के कम-संदिग्ध चेहरों को सक्रिय करें और हिंसा को अंदर से अंजाम दें।
शिक्षित पेशेवरों को क्यों बनाया जाता है हथियार?
लक्षित समूह के रूप में शिक्षित लोगों को चुनने के पीछे कठोर तर्क है। डॉक्टर, इंजीनियर और विश्वविद्यालय-प्रशिक्षित व्यक्ति समाज में भरोसेमंद माने जाते हैं। उनके पास तकनीकी दक्षता, गतिशीलता, सप्लाई-चेन तक पहुँच और सामाजिक विश्वसनीयता होती है। ये सभी गुण उन्हें कम संदिग्ध बनाते हैं जबकि आतंकी नेटवर्क के लिए उन्हें अधिक उपयोगी बना देते हैं।
इनकी पेशेवर पहचान उन्हें औद्योगिक रसायनों की वैध खरीद, परिवहन, भंडारण और विस्फोटक प्रणालियों की संरचना में सहायता देती है। कई मामलों में यह भी पाया गया है कि जो तथाकथित ‘प्रेरक’ या कट्टर मौलवी स्वयं तकनीकी रूप से अनपढ़ हैं, वे शिक्षित युवाओं को प्रभावित करने में सफल हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, शिक्षा और कट्टरता का यह संयोजन अत्यंत घातक रूप ले लेता है।
घरेलू चुनौती: वैध अवसरों का दुरुपयोग
भारत सरकार की छात्रवृत्तियाँ, लैपटॉप वितरण, उच्च शिक्षा का विस्तार और कौशल विकास योजनाएँ देश की ताकत हैं। लेकिन इन्हीं अवसरों का दुरुपयोग भी कट्टर तत्व अपने प्रचार और हिंसा के औजारों में बदल रहे हैं।
जाँच में सामने आया है कि कुछ मामलों में सरकारी योजनाओं से मिले संसाधनों जैसे उपकरण, डिजिटल एक्सेस या यात्रा की सुविधा को आतंकी कार्यों के लिए प्रयोग किया गया। नीति निर्धारकों के सामने यह दोहरी चुनौती है। एक ओर अवसरों को जारी रखना और दूसरी ओर संस्थागत सुरक्षा के ऐसे उपाय सुनिश्चित करना जो इन अवसरों के दुरुपयोग को रोक सकें।
देश कितनी बड़ी त्रासदी से बचा?
अधिकारियों की ब्रीफिंग और मीडिया रिपोर्टे्स इस बात पर जोर देती हैं कि इस मामले में रोकथाम और तबाही के बीच की दूरी बेहद कम थी। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पकड़े गए विस्फोटक पदार्थों का नेटवर्क यदि सफलतापूर्वक सक्रिय होता तो यह देश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों पर व्यापक हमलों की क्षमता रखता था।
जाँच में संकेत मिले हैं कि नियोजित लक्ष्य उच्च जनसंख्या घनत्व वाले और प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण स्थल थे। यदि खुफिया एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई न की होती तो परिणाम भयानक हो सकते थे। यह सफलता संयोग नहीं थी। यह लंबे समय तक की गई मानवीय खुफिया निगरानी, कई एजेंसियों के समन्वय और फोरेंसिक विश्लेषण का परिणाम थी।
मौन प्रहरी: इंटेलिजेंस ब्यूरो की निर्णायक भूमिका
इन घटनाओं के पीछे जो सबसे निर्णायक और अदृश्य शक्ति रही, वह भारत की इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) है। जो देश की सबसे पुरानी और गुप्त सुरक्षा एजेंसी है। इस पूरे अभियान में IB की मानव स्रोतों से मिली जानकारी, राज्यों के बीच समन्वय और विश्लेषणात्मक कड़ियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
IB के अधिकारी बिना किसी प्रशंसा या पुरस्कार की अपेक्षा के दिन-रात काम करते हैं। वे महीनों तक सूचनाओं को जोड़ते हैं, संपर्कों को विकसित करते हैं और गुप्त निगरानी से जमीनी हकीकत तक पहुँचते हैं। इन्हीं मौन रक्षकों के कारण कई बड़े हमले समय रहते विफल कर दिए जाते हैं। उनकी पेशेवर निष्ठा और मौन सेवा ही देश की वास्तविक ढाल है। यह ‘शांत सुरक्षा’ भारत की रक्षा का सबसे सशक्त स्तंभ है।
सामुदायिक जिम्मेदारी और शिक्षित वर्ग की भूमिका
यह प्रवृत्ति केवल सुरक्षा नहीं बल्कि नैतिक और सामाजिक चुनौती भी है। भारत के मुस्लिम इस राष्ट्र की आत्मा, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। उनमें से विशाल बहुमत हिंसा को अस्वीकार करता है और देश की प्रगति में भागीदार बनना चाहता है। लेकिन जब कट्टर तत्व शिक्षित युवाओं को लक्ष्य बनाते हैं तो समाज और परिवारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, प्रोफेशनल संस्थाओं और धार्मिक संगठनों को सतर्क निगरानी तंत्र और परामर्श प्रणाली विकसित करनी चाहिए। स्कॉलरशिप या डिजिटल कार्यक्रमों में नागरिक नैतिकता और डिजिटल सुरक्षा के तत्वों को शामिल करना आवश्यक है ताकि युवाओं को ब्रेनवॉश होने से बचाया जा सके। शिक्षित वर्ग को न केवल स्वयं सचेत रहना चाहिए बल्कि अपने ज्ञान और विवेक से दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।
नीति-स्तर पर दोहरी रणनीति
इस चुनौती से निपटने के लिए जवाब भी दो स्तरों पर होना चाहिए:
खुफिया नेटवर्क को और गहराई देना ताकि लॉजिस्टिक चैन जल्दी पकड़ी जा सके।
शैक्षणिक और कल्याणकारी योजनाओं में डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता के नए मानक बनाना।
सामुदायिक स्तर पर ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना जो असहिष्णुता के बजाए संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करें।
और राष्ट्रीय विमर्श को इस दिशा में ले जाना कि अहिंसा, नागरिक उत्तरदायित्व और साझा समृद्धि ही असली राष्ट्र-धर्म हैं।
लालकिला क्षेत्र में हुआ विस्फोट और उससे जुड़े मॉड्यूल ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक आतंकवाद अब शिक्षा, तकनीकी दक्षता और सामाजिक विश्वास का भी हथियार बना रहा है। इसका उत्तर भय या बहिष्कार नहीं है बल्कि दोहरी क्षमता में है। एक ओर मौन, पेशेवर खुफिया काम जो खतरे को जड़ से रोक सके और दूसरी ओर समाज की वह सजीव चेतना जो कट्टरता को अस्वीकार करे।
यदि हमारे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षित नागरिक राष्ट्रनिर्माण की दिशा में अपनी भूमिका निभाएँ और इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी संस्थाएँ उसी निष्ठा से अपने कार्य करती रहें, तो ‘व्हाइट कॉलर जिहाद’ जैसी विकृत प्रवृत्तियों को समाप्त किया जा सकता है। शांत खुफिया कौशल और जागरूक नागरिकता- यही भारत की सबसे मजबूत सुरक्षा की ढाल है।
इशाक डार, डोनाल्ड ट्रंप (साभार: YT-aljazeera/NYT) राहुल गाँधी और INDI गठबंधन Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान के DGMO द्वारा सफ़ेद झंडा दिखा cease fire के लिए कहने पर देश को गुमराह करता रहा कि डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दोस्त नरेंद्र मोदी को कहा "नरेंद्र मोदी cease fire कर, मोदी surrender ", लेकिन उस झूठ को पाकिस्तान के ही विदेश मंत्री इशाक डार नेबेनकाब कर राहुल और INDI गठबंधन ही नहीं अपने हितैषी अमेरिका को दुनिया में बेनकाब कर चारों खाने चित कर दिया। अब देखना यह है कि ये तीनों पाकिस्तान के क्या सलूक करते हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाई। वे कहते हैं कि उन्होंने दोनों देशों को धमकी दी थी कि अगर जंग नहीं रुकी तो व्यापार बंद कर देंगे। लेकिन अब पाकिस्तान के ही विदेश मंत्री इशाक डार ने ट्रंप की पोल खोल दी है। डार ने साफ कहा कि भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं मानी। सब कुछ द्विपक्षीय था, यानी सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच।
पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने अल जजीरा को इंटरव्यू में ट्रंप के दावे को झूठा साबित कर दिया। डार ने कहा, “हम तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के खिलाफ नहीं, लेकिन भारत ने डार ने बताया कि मई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने युद्ध विराम का प्रस्ताव दिया था। रुबियो ने कहा था कि किसी तीसरी जगह पर बातचीत होगी, लेकिन 25 जुलाई को वॉशिंगटन में रुबियो से मिले तो रुबियो से उन्होंने भारत से बात के बारे में पूछा। इस पर रुबियो ने जवाब दिया, “भारत ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। भारत ने कहा कि ये उनका द्विपक्षीय मामला है।” हमेशा कहा कि ये द्विपक्षीय मुद्दा है।”
डार ने जोड़ा, “हम किसी से भीख नहीं माँग रहे। पाकिस्तान शांति चाहता है। डायलॉग ही रास्ता है, लेकिन बातचीत दोनों तरफ से हो। अगर भारत तैयार हो तो हम बात करने को तैयार हैं।” डार ने साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका से कोई मदद नहीं माँगी।
हालाँकि डार ये कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने मदद नहीं माँगी, लेकिन भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान ने पहले घुटने टेके और ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से गुहार लगाई थी। खैर, दावे अमेरिका की तरफ से भी हुए, पाकिस्तान की तरफ से भी। लेकिन हकीकत क्या है, ये सारी दुनिया देख चुकी है। भारत ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर में न सिर्फ पंगु कर दिया था, बल्कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली को पंगु करते हुए अंदर तक जोरदार हमले किए। अभी तक पाकिस्तान के सभी एयरबेस ऑपरेशन नहीं हो पाए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों देशों ने पूर्ण युद्धविराम कर लिया। ट्रंप कहते रहे हैं, “मैंने दो न्यूक्लियर देशों की जंग रोकी। लाखों लोग मर सकते थे।” ट्रंप ने दावा किया था कि व्यापार की बात करके भारत को मनाया। लेकिन भारत ने हमेशा इनकार किया।
अब डार के बयान ने सबकुछ साफ कर दिया है। डार का बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। पहले पाकिस्तान ने ट्रंप के दावे का समर्थन किया था, लेकिन अब डार ने पलट दिया। भारत ने हमेशा कहा कि आतंकवाद पर बात होगी, लेकिन कश्मीर को अलग मुद्दा बनाना गलत। व्यापार या मध्यस्थता का कोई लिंक नहीं।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिसमें अधिकतर हिंदू पर्यटक थे। भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नौ कैंपों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की और हवाई झड़पें हुईं। जिसमें भारतीय वायुसेना ने पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान गिराए।
ट्रंप के दावे पर राहुल गाँधी को यकीन ( साभार-x@rahulgandhi, ht) 2014 चुनाव के बाद से होने वाले हर चुनाव में कांग्रेस खुद अपने आपको बेनकाब कर अपनी असली पहचान दिखा रही है। कांग्रेस का गठन किसी भारतीय ने नहीं बल्कि एक ब्रिटिश ने किया था, मकसद आज़ादी नहीं बल्कि आज़ादी के लिए उमड़ते सैलाब को भटकाने का था। आज उसी राह पर कांग्रेस सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनते ही चल निकल पड़ी है। पार्टी में बात मानी जाती है पार्टी अध्यक्ष की लेकिन अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के कहते है कि फैसला हाई कमांड लेगा। आखिर किस को पागल बनाया जा रहा है? अध्यक्ष हाई कमांड होता है या फिर कोई सड़क पर घूमने वाला राहगीर? ब्रिटिश नागरिक द्वारा कांग्रेस स्थापित करने के बाद से पार्टी में जिसने भी गुलामी की मानसिकता से अलग काम किया उसे दरकिनार कर दिया गया। इतिहास गवाह है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार पटेल, सीताराम केसरी, लालबहादुर शास्त्री, आदि एक लम्बी लिस्ट है।
फिर आज जीता-जागती मिसाल राहुल की है। जो LoP तो है भारतीय संसद में विपक्ष का लेकिन आवाज़ बुलंद की जा रही भारत विरोधियों की, क्यों? अगर राहुल किसी भी वजह से भारत में उपद्रव करवाने में सफल हो जाते हैं तो मोदी सरकार को हिटलर बन लठ और गोली से कोई गुरेज नहीं करना चाहिए। कांग्रेस की बदतमीजी को देख कांग्रेस को वोट देने वाले भी अपने संस्कारों को जाहिर करेंगे।
सरकार के बार-बार कहने, संसद में बयान देने, सेना के खुले तौर पर बताने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को भरोसा है, तो सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप पर, जो बार-बार सीजफायर का श्रेय लेने के लिए बेताब हैं। ट्रंप 40 से ज्यादा बार दुनिया को ये बता चुके हैं कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया है, लेकिन भारत शुरू से ही कह रहा है कि पाकिस्तान ताबड़तोड़ हमले के बाद नाक रगड़ते हुए सीजफायर के लिए भारत से गुहार लगाई थी।
संसद के अंदर और बाहर सरकार स्थिति कर चुकी है साफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में आधिकारिक रूप से दो टूक कहा था कि सीजफायर के लिए सिर्फ पाकिस्तान के डीजीएमओ का फोन आया था। इसको लेकर किसी भी देश से कोई बात नहीं हुई। पीएम मोदी ने संसद में एक और खुलासा किया था कि 9 मई की रात जेडी वैंस का कई बार फोन आया था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान भारत पर बहुत बड़ा हमला करने वाला है। पीएम मोदी ने उन्हें बता दिया था कि पाकिस्तान ऐसा करता है, तो वो बहुत बड़ी गलती करेगा। इसके बाद जो हुआ वो सबको पता है, बात खत्म।
राहुल गाँधी ने ट्रंप के दावे को दोहराया
लेकिन राहुल गाँधी की बात है जो खत्म ही नहीं होती। ट्रंप के बयान के बाद राहुल गाँधी का दावा सामने आ जाता है। बिहार में ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान एक रैली में फिर उन्होंने दावा किया, “ट्रंप ने आज कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था, तो मैंने फोन उठाया और नरेंद्र मोदी को बताया और कहा कि वह जो कुछ भी कर रहे हैं उसे 24 घंटे के भीतर बंद कर दें। नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे नहीं, बल्कि पाँच घंटे में सब कुछ बंद कर दिया।”
#WATCH | Muzaffarpur, Bihar | Addressing during the 'Voter Adhikar Yatra', Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, "Trump said today that when the war between India and Pakistan was going on, I picked up the phone and told Narendra Modi and told him to stop whatever he was doing within… pic.twitter.com/ap4ih0Ruqt
उनके बोलने का अंदाज और भाषा शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गाँधी ने कहा, “ट्रंप ने मोदी से कहा- सुन जो तू ये कर रहा है, इसे 24 घंटे में बंद कर। जिसको नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में बल्कि पाँच घंटों में बंद कर दिया।”
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही राहुल गाँधी और उनकी कॉन्ग्रेस ट्रंप- ट्रंप का रट लगाए हुए है। उन्हें सेना के बयान पर भी विश्वास नहीं है। सेना ने खुले तौर पर कहा कि दोनों सेनाओं के डीजीएमओ स्तर पर बातचीत हुई और पाकिस्तान के कहने पर भारत ने हमले रोके।
हर आतंकी हमले को भारत मानेगा युद्ध
ये वही कॉन्ग्रेस है जिसके राज में मुंबई सीरियल ब्लास्ट, 26/11 जैसी घटनाएँ घटी, लेकिन डोजियर देने के अलावा कुछ नहीं कर सकी कॉन्ग्रेस सरकार। पाकिस्तान के प्रति सख्ती 2014 के बाद दिखलाई दी और पीएम मोदी ने पिछले 11 सालों में दुनिया को दिखाया कि भारत बदल गया है। अब तो मोदी सरकार ने ये भी घोषणा कर दी है कि पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकी हमलों को भारत युद्ध की तरह मानेगा। यानी अगर अब आतंकी हमला होता है, तो भारत उसे छोड़ेगा नहीं।
ट्रंप का भारत-पाक युद्ध रुकवाने पर फिर बयान
27 अगस्त 2025 को अपनी कैबिनेट बैठक में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने बताना शुरू किया कि कैसे उन्होंने यूक्रेन-रूस संघर्ष में एक विश्व युद्ध को उन्होंने टाल दिया था और फिर बात को मोड़कर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत होने का जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा, “मैं एक शानदार व्यक्ति की बात कर रहा था, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मैंने पूछा कि पाकिस्तान के साथ क्या चल रहा है। नफरत काफी थी और ये कई सालों से चल रहा है।”
ट्रंप ने अपना बात में आगे कहा, “मैंने उनसे कहा कि मैं आपके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा। आप परमाणु युद्ध में उलझ जाएँगे। मैंने कहा, मुझे कल फोन करना। मैं आपके साथ कोई डील नहीं करूँगा या फिर इतना ज्यादा टैरिफ लगा दूँगा कि आपका सिर चकरा जाएगा।”
ट्रंप के मुताबिक, “भारत और पाकिस्तान के बीच जो स्थिति थी, उससे न्यक्लियर वॉर हो सकती थी। उन्होंने पहले ही 7 जेट मार गिराए थे, हालात बेहद खतरनाक थे। तब मैंने उनसे कहा – क्या आप व्यापार करना चाहते हैं? अगर आप लड़ाई जारी रखते हैं, तो अमेरिका आपके साथ कोई व्यापार या सहयोग नहीं करेगा। आपके पास इसे सुलझाने के लिए सिर्फ 24 घंटे हैं।” अगर ट्रंप की माने तो बातचीत के 5 घंटे के अंदर ही भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो गया।
ट्रंप का ये बयान उस समय आया है जब भारत पर नए टैरिफ नियम लागू हो गया है। इसके साथ ही अब भारतीय सामानों के आयात पर 50% टैरिफ लागू हो गया है। यानी व्यापार की जो धमकी देने का दावा ट्रंप कर रहे हैं, वह भारत पर नहीं चला। सरकार ने कई बार साफ किया है कि वो किसानों, पशुपालकों के हितों के खिलाफ कोई समझौता नहीं करेगी। अगर व्यापार के नाम पर सीजफायर होता, तो भारत अमेरिका के सामने अपनी शर्तों पर इस तरह अडिग नहीं रहता।
इस बीच दावा ये भी किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई फोन कॉल्स को नजरअंदाज कर दिया। 50% टैरिफ दरों को लेकर भारत ने ‘अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक’ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही अमेरिका को बार-बार यह संकेत दिया है कि वह रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखेगा।
मोदी जापान के दौरे पर हैं। इसके बाद वो चीन जाने वाले हैं जहाँ चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात होगी। इनकी बैठक पर दुनिया की नजर है। ये बैठक ट्रंप के टैरिफ को ‘फुस्स’ कर सकता है।
Operation Sindoor सिर्फ एक Operation नहीं, पता नहीं इस Operation से कितनों का Operation हो गया है। कुछ की चीखे अभी तक बंद नहीं हुई, कुछ सिसकियाँ ले रहे है तो कुछ बिलकुल ही गुम हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में हिन्दुओं के लिए जो कहा वह उन टीवी एंकरों के भी है जो परिचर्चा में आये जेहादी मौलाना द्वारा हिन्दू नाथूराम गोडसे को पहला आतंकवादी और वो बेवकूफ एंकर महाबेशर्मों की तरह सुनता है। वो मौलाना की आड़ में हिन्दुओं को बदनाम कर रहा है और बेशर्म एंकर खामोश रहता/रहती है। किसी में यह पूछने या कहने की हिम्मत नहीं होती कि "अगर गोडसे कसूरवार था तो क्यों उसके कोर्ट में दर्ज 150 बयान, जिन्हे माइक से पढ़ने इजाजत मिली थी, क्यों तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन बयानों को सार्वजानिक होने पर पाबन्दी लगाई थी?" कांग्रेस को डर था कि कहीं बयान सार्वजानिक होने पर जनता में गोडसे को रिहा करने के लिए विद्रोह न हो जाए।
किसी भी एंकर में उस जेहादी मौलाना से इतनी हिम्मत यह पूछने की होती कि नाथूराम गोडसे महात्मा गाँधी को गोली मारकर भगा नहीं था, अपने आप को गिरफ्तार करने की मांग कर रहा था। जबकि आतंकी गोली मारकर भाग जाता है। दूसरे, यह नहीं पूछता कोई नासमझ एंकर गाँधी से पहले राजपाल की हत्या करने वाला कौन था? फिर राजपाल से पहले स्वामी श्रद्धानन्द के हत्यारे कौन थे? सभी मुस्लिम थे फिर गोडसे कैसे आतंकी हो गया?
गोडसे पर अभद्र बयानबाज़ी करने वालों को गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को पढ़ना चाहिए। उसने आतंकवादियों/दंगाइयों की तरह कोई victim card नहीं खेला बल्कि गाँधी को मारने के कारण बताए कि क्यों गाँधी को देशहित में मारना जरुरी हो गया था। अगर गाँधी को नहीं मारा होता देश में 2014 चुनाव से पहले जो माहौल बना हुआ था उसे देखते हुए भारत का क्षेत्रफल पाकिस्तान से छोटा होता। गोडसे की क़ुरबानी को किसी आज़ादी के क्रन्तिकारी से कम नहीं थी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राज्य सभा में 30 जुलाई को हुई विशेष चर्चा में भाग लिया। चर्चा में भाग लेते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने पहलगाम हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। विपक्षी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 26/11 के बाद ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसी शर्मनाक थ्योरी किसने फैलाई? मैं पूरी दुनिया को साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, हिंदू का संस्कार हिंसा नहीं, सेवा है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि कोई भी हिंदू आतंकवादी नहीं हो सकता।
अमित शाह ने कहा कि विपक्षी सरकार के तत्कालीन गृह मंत्री “आतंकी पाकिस्तान से आये थे” इसका सबूत मांग कर पाकिस्तान और लश्कर को बचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी अपने वोट बैंक के लिए पाकिस्तान का समर्थन करने और लश्कर को बचाने से भी नहीं डरेगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी कहती है कि ऑपरेशन का नाम धर्म के आधार पर रखने के अलावा हमें कुछ नहीं आता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नहीं मालूम कि हर हर महादेव सिर्फ धर्म का नारा नहीं है बल्कि शिवाजी महाराज ने मुगलों के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी तब ये उनकी सेना का युद्धघोष था। श्री शाह ने कहा कि ये प्रतीक है भारत, भारत की संप्रभुता पर हमले और भारत की सीमाओं के अतिक्रमण पर दिये जाने वाली जवाबी कार्रवाई का। उन्होंने कहा कि ये हमारी सेनाओं के जवानों के मन से निकलने वाला युद्धघोष है औऱ इसे हिंदू – मुस्लिम की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।
हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता है, ये बात मैं गर्व से कहता हूं- अमित शाह
उन्होंने कहा कि इन आतंकियों को मारना इतना सरल नहीं था। उन्होंने कहा कि 22 दिनों तक सीआरपीएफ, सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों ने ड्रोन द्वारा भेजे गये भोजन पर रहकर बेहद कठिन परिस्थितियों में इन आतंकियों का पीछाकर इन्हें मारा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की जनता विपक्षी पार्टी को देख रही है कि इनकी प्रायोरिटी देश की सुरक्षा नहीं है, राजनीति है, इनकी प्रायोरिटी आतंकवाद को समाप्त करना नहीं बल्कि अपना वोटबैंक है, इनकी प्रायोरिटी हमारी सीमाओं की सुरक्षा नहीं बल्कि सेक्युलरिज़्म और अपीज़मेंट की पॉलिटिक्स है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमला 22 अप्रैल, 2025 को दोपहर 1 बजे हुआ और वे स्वयं शाम होने से पहले ही श्रीनगर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि अगले दिन वे मृत लोगों को श्रद्धांजलि देने गए और वो उनके जीवन का एक ऐसा दिन है जो वे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर चुन-चुनकर परिजनों के सामने लोगों को मारने का जघन्य अपराध आज तक कभी नहीं हुआ था। गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवादी ये संदेश देना चाहते थे कि वे कश्मीर को आतंकवाद से कभी मुक्त नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि आज इस सदन से आतंकियों को ये संदेश देना चाहता हूं कि कश्मीर आतंकवाद से मुक्त होकर रहेगा और ये नरेन्द्र मोदी जी का संकल्प है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने बिहार में कहा था कि आतंकवादियों की बची खुची ज़मीन मिट्टी में मिला देंगे और आज आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप, हेडक्वार्टर और लॉंच पैड्स ज़मींदोज़ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि आतंकवादियों के आकाओं को नहीं छोड़ेंगे और आज आतंकियों को भेजने वालों को भी हमारी सेनाओं ने मिट्टी में मिला दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि आतंकवादियों को भी नहीं छोड़ेंगे और ऑपरेशन महादेव के तहत उन तीनों आतंकवादियों को खत्म कर दिया गया। श्री शाह ने कहा कि एक प्रकार से मोदी जी द्वारा कहे गए हर वाक्य को हमारी सेना, वायुसेना, नौसेना और सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस ने अपना लक्ष्य बना लिया और आतंकवादियों को कठोर दंड दिया।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव में देश के सुरक्षा बलों ने भारत का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश की 140 करोड़ जनता की इच्छा के अनुरूप पाकिस्तान को सटीक जवाब देने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई, इसके लिए उनका भी अभिनंदन है।
शाह ने कहा कि ऑपरेशन महादेव के तहत दिनांक 28 जुलाई को कश्मीर में लश्कर के तीन आतंकवादियों – सुलेमान, अफगान और जिब्रान – को हमारे सुरक्षाबलों ने मौत के घाट उतार दिया और इससे ष्ट हो गया है कि पहलगाम के हमले में लश्कर का ही हाथ था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से आतंकियों के आकाओं को मारा और ‘ऑपरेशन महादेव’ में पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को मिट्टी में मिलाया।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के द्वारा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत के सुरक्षा बलों ने दुनिया के सभी आतंकी हमलों में अब तक का सबसे सटीक और त्वरित जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि लश्कर के एक आउटफिट TRF ने पहलगाम हमले की ज़िम्मेदारी ली थी और वे स्वयं उसी दिन वहां पहुंच गए थे और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा हुई और इसकी व्यवस्था की गई कि ये लोग देश छोड़कर भागने न पाएं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने सदन को बताया कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए 3 आतंकियों के पास से तीन राइफल मिलीं- एक 19 एम-4 कार्बाइन और दो एके 47। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद वहां से एनआईए ने खाली कारतूसों को बरामद किया था और इनकी जांच फ़ॉरेंसिक साइंस लैब में की गई। जब ये आतंकी मारे गए तो इनके पास से मिली राइफल की टेस्टिंग की गई और फॉरेंसिक मिलान करने पर शत प्रतिशत सिद्ध हो गया कि इन्हीं तीन राइफल्स का उपयोग पहलगाम हमले में किया गया। इसके बाद ये मालूम हुआ कि इनमें से 44 कारतूस 19 एम-4 कार्बइन के और 25 कारतूस एके 47 राइफल्स के थे। श्री शाह ने कहा कि एनआईए ने गहन जांच की और 1055 लोगों के बयान लिए और संदिग्धों के स्केच बनाए और जिन 3 लोगों ने इन्हें आसरा दिया था उन्हें भी गिरफ्तार किया गया।
अमित शाह ने कहा कि हमारी ऐजेंसियों ने आतंकियों के मौजूद होने की सूचना को पुख्ता करने के लिए 22 मई से 22 जुलाई तक लगातार प्रयास किए। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को हमें सफलता मिली और आतंकवादियों की उपस्थिति की पुष्टि हो गई। उन्होंने कहा कि सेना के 4 पैरा के नेतृत्व में CRPF और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों ने एक साथ आतंकियों को घेरा और दिनांक 28 जुलाई को हुए ऑपरेशन में हमारे निर्दोष नागरिकों को मारने वाले तीनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया।
उन्होंने कहा कि 23 अप्रैल को Cabinet Committee on Security (CCS) की बैठक बुलाई गई और इसमें न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया को कठोर संदेश देने का काम किया गया कि भारत की सीमा, सेना नागरिक और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि CCS की बैठक में 1960 की जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई एकतरफा पाकिस्तान के फायदे वाली सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। उन्होनें कहा कि सिंधु जल संधि एकतरफा है और इस पानी पर भारत के किसानों का अधिकार है और अब कुछ ही समय में कश्मीर, पंजाब, हरियाणा राजस्थान और दिल्ली के लिए पीने का पानी सिंधु के रास्ते पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद अटारी के माध्यम से चल रही एकीकृत जांच चौकी को बंद किया गया, पाकिस्तानी नागरिकों के सार्क वीज़ा को सस्पेंड कर सभी को पाकिस्तान वापिस भेजने का काम किया गया। नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में कार्यरत रक्षा, सैन्य, नौसेना के सलाहकारों को अवांछनीय व्यक्ति घोषित किया गया और उनकी संख्या को 55 से घटाकर 30 किया। उन्होंने कहा कि CCS बैठक में यह संकल्प लिया गया कि आतंकवादियों को भेजने वालों और कृत्य करने वालों को दंडित किया जाएगा और इसके लिए सेना को खुली छूट देने का काम CCS बैठक में किया गया।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने 30 अप्रैल को सशस्त्र सेनाओं को ऑपरेशनल फ्रीडम देने का काम किया कि रक्षा मंत्रालय और सेना दोनों मिलकर तय करेंगे कि टारगेट, तरीका, स्थान और समय क्या होगा। उन्होंने कहा कि 7 मई को रात 1 बजकर 4 मिनट पर पाकिस्तान के 9 आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दिया जिसमें कम से कम 100 आतंकी मारे गए औऱ लश्कर, जैश और हिज़्बुल के हेडक्वार्टर को ध्वस्त करने का काम मोदी सरकार और हमारी सेनाओं ने किया। उन्होंने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर विपक्षी पार्टी ने दिया था लेकिन इसे वापिस लेने का काम हमारी सरकार ही करेगी। उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के ठिकानों पर हमला किया जिसे पाकिस्तान ने अपने ऊपर हमला मान लिया और 8 मई को पाकिस्तान ने हमारे रिहायशी इलाकों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस ध्वस्त किए और आतंकवाद को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पाकिस्तान ने घुटनों पर आकर हमले रोकने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के दिल पर भारत का पहला प्रहार है।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों से कश्मीर में आतंकवाद 70% कम, शांति की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पहले आतंकी बाहर से नहीं आते थे, कश्मीरी युवा ही बंदूकें उठाते थे, अब आतंकी संगठनों में एक भी कश्मीरी युवा शामिल नहीं होता। उन्होंने कहा कि धारा 370 हटाने से कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद पर लगाम लगी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के डिफेन्स इंस्टॉलेशन तबाह हो गए और ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना का पराक्रम दिखा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत: सैन्य साजो-सामान का निर्यात बढ़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की तुष्टिकरण नीतियों ने आतंकवाद बढ़ाया था और अब पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकियों के इकोसिस्टम को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी और हड़तालें शून्य हो गई हैं और शांति की नई शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आतंकियों के जनाज़े पर रोक लगा दी है और कठोर कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अब ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों से लैस हो जबकि पहले नमक-चीनी तक की की कमी थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोकतंत्र की जीत के रूप में 98.03% मतदान के साथ पंचायत चुनाव सफल हुए हैं। श्री शाह ने कहा कि आतंकवादियों के वित्तपोषण पर लगाम लगी है और 347 संपत्तियाँ ज़ब्त की गई हैं।
मोदी सरकार में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं समाप्ति की कगार पर हैं।
जम्मू-कश्मीर में 2010 से 2015 के बीच 2,564 ऑर्गनाइज्ड पथराव की घटनाएं हुई थीं। 2024 के बाद एक भी घटना नहीं हुई।
ऑर्गेनाइज्ड हड़ताल- जो पाकिस्तान में बैठे हुर्रियत के आका ऐलान करते थे और सालाना 132 दिन घाटी… pic.twitter.com/zZeKlRoXiI
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी अड्डों और ट्रेनिंग कैंपों को भारतीय सेना ने नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में 53 परियोजनाओं के साथ 59 हजार करोड़ का निवेश हुआ है जिससे विकास की नई राह खुली है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी तो आतंकवाद का पोषण करने वाली पार्टी है। श्री शाह ने कहा कि जब उरी में हमला हुआ तो हमने सर्जिकल स्ट्राइक की, पुलवामा हमले के जवाब में एयर स्ट्राइक की औऱ पहलगाम के बाद घर में घुसकर परखच्चे उड़ाने का काम हमने किया है।
श्री शाह ने कहा कि हमने 2019 में UAPA में संशोधन किया जिसके तहत 57 लोगों को आतंकवादी घोषित किया है। उन्होंने कहा कि एनआईए (NIA) में संशोधन किया औऱ देश के बाहर जांच करने के अधिकार दिए हैं। एनएसए का सख्त उपयोग किया, 370 को निरस्त किया, पीएफआई को बैन किया, MAC को मज़बूत किया, आईसीजेएस (ICJS), नफीस (NAFIS) की स्थापना की, पीएमएलए (PMLA) से टेरर फायनेंसिंग को रोका और नेटग्रिड (NATGRID) के माध्यम से पूरे देश के आतंकी संगठनों को कम्प्यूटर के क्लिक पर रख दिया है। श्री शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार घुसपैठ और आतंकवादी घटनाओं को समाप्त करने के लिए कृत संकल्पित है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद शर्म अल शेख सम्मेलन हुआ जिसे पूरी दुनिया में बलूचिस्तान ब्लंडर के नाम से जानते हैं जिसमें प्रस्ताव रखा गया कि दोनों देश आतंकवाद के शिकार हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई पाकिस्तान को आतंकवाद का शिकार कह सकता है क्या? विपक्षी पार्टी ने पाकिस्तान को सर्टिफिकेट दे दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान से आतंकवाद नहीं रुकता है तब तक वार्ता नहीं हो सकती।
साभार पहलगाम में आतंकियों द्वारा धर्म पूछकर हुए नरसंहार पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को क्यों clean chit को दी जा रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मोदी विरोधी तक किसी ने पूरी बहस में अब्दुल्ला का नाम तक नहीं लिया, क्यों? जबकि पहलगाम जम्मू-कश्मीर में आता है। अगर जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की सरकार होती मीडिया से लेकर सारा INDI allaince बीजेपी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे होते। क्यों नहीं उमर अब्दुल्ला ने इस नरसंहार की जिम्मेदारी ली? जब कश्मीर में इतने पर्यटक जा रहे हैं उन्हें सुरक्षा प्रदान करना राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की जिम्मेदारी थी। अगर हिन्दुओं की बजाए मुसलमानों का नरसंहार हुआ होता तब अब्दुल्ला का क्या रवैया होता? इस नरसंहार के लिए जितना पाकिस्तान जिम्मेदार है जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी काम दोषी नहीं।
पाकिस्तान को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब दे दिया, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कब कटघरे में खड़ा किया जाएगा? कश्मीर में आतंकवादियों पर मोदी सरकार कार्यवाही कर रही है, राज्य का मुख्यमंत्री क्या कर रहा है? क्यों नहीं आतंकवादियों को घरों में रखने वालों पर कार्यवाही की जाती? देश में पल रहे पाकिस्तान और आतंकवादियों के sleeper cells पर आतंकवादियों की तरह कार्यवाही होनी चाहिए। अब्दुल्ला से पूछा जाए कि कितने आतंकवादी कश्मीर में छिपे हुए हैं? छिपे हुए आतंकवादियों और उनको पनाह देने वालों पर क्या कार्यवाही की? अगर पाकिस्तान से निपटने का काम केंद्र सरकार का है तो घरों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने का काम राज्य सरकार का है।
जो भारत का पक्ष नहीं देख पा रहे हैं, उन्हें आईना दिखाने आया हूं- पीएम मोदी
2014 चुनावों से पहले तक कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों ने देश को पाकिस्तान के नाम से डराकर रखा हुआ था। जगह-जगह लिखा और घोषणा की जाती थी कि "किसी लावारिस चीज को न छुए, बम हो सकता है।" जनता में पाकिस्तान का ऐसा डर बैठ चुका था कि जैसे किसी बच्चे को सुलाने यह खाना नहीं खाने पर माएं अपने बच्चे से कहती थी कि "सो जा, चुपचाप खाना खाले नहीं तो गब्बर आ जाएगा।" लेकिन चुनावों के कालचक्र ऐसा घूमना शुरू कि पाकिस्तान और भारत में उसकी समर्थक पार्टियां डरी हुई है। पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक आतंकी हमले को बचाने "हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद" देकर देश को गुमराह किया जाता था। यह कुकर्म जनहित में नहीं सिर्फ मुस्लिमों को खुश कर उनके वोट लेकर अपनी कुर्सी और तिजोरियों के भंडार भरने के लिए किया जा रहा था। और अक्ल से पैदल मुसलमान इन पार्टियों को अपना शुभचिन्तक मानती है। इन अक्ल से पैदल मुसलमानों को नहीं मालूम कि तुम्हारी इन हरकतों से कोई भी मुस्लिम देश इन्हे सम्मान से नहीं देखता, यहाँ तक पाकिस्तान भी नहीं। अगर कोई देश आतंकी घटनाओं के लिए फंडिंग करने का मतलब नहीं कि उनको भारतीय मुसलमानों की फ़िक्र है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 जुलाई को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैं इस सदन में भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूं।
मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना वक्तव्य इन लाइनों के साथ चालू किया। उन्होंने इस दौरान जहाँ भारतीय सेनाओं की सफलता पर बात की तो वहीं कॉन्ग्रेस को लगातार उलटे-सीधे प्रश्न उठाने पर आइना भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।
#WATCH ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "22 अप्रैल को पहलगाम में जो क्रूर घटना घटी, जिस तरह आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों से उनका धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी, वो क्रूरता की पराकाष्ठा थी। ये भारत को हिंसा की आग में झोंकने का एक सोचा-समझा प्रयास था। ये भारत… pic.twitter.com/C5E89Avkpc
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मैंने कहा था कि यह भारत के 'विजयोत्सव' का एक सत्र है...जब मैं 'विजयोत्सव' की बात कर रहा हूं, तो मैं कहना चाहूंगा - ये 'विजयोत्सव' आतंकी मुख्यालयों को मिट्टी में मिलाने का है, ये 'विजयोत्सव' सिन्दूर की सौगंध को पूरा करने का है।" pic.twitter.com/ky4yCqsP3h
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं 22 अप्रैल को विदेश में था। मैं तुरंत लौट आया और वापस आने के तुरंत बाद मैंने एक बैठक बुलाई और हमने स्पष्ट निर्देश दिए कि आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना है और यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है। सेना को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई और यह भी कहा गया कि सेना को यह तय करना चाहिए कि कब, कहां, कैसे और किस तरीके से कार्रवाई करनी है। ये सारी बातें उस बैठक में स्पष्ट रूप से कही गईं।
During Operation Sindoor, the synergy of the Navy, Army and Air Force shook Pakistan to its core. pic.twitter.com/GZMPpfz5KN
उन्होंने कहा कि सेना को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई और यह भी कहा गया कि सेना को यह तय करना चाहिए कि कब, कहां, कैसे और किस तरीके से कार्रवाई करनी है। हमें गर्व है कि आतंकवादियों को सजा दी गई, और यह ऐसी सजा थी कि आतंक के उन आकाओं की आज भी रातों की नींद उड़ी हुई है।
India has made it clear that it will respond to terror on its own terms, won't tolerate nuclear blackmail and will treat terror sponsors and masterminds alike. pic.twitter.com/r4T3mBUWs4
पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया का समर्थन तो मिला, लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल 2025 के बाद 3-4 दिन में ही यह उछल रहे थे। ये लोग अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए मुझ पर निशाना साध रहे थे, लेकिन इनकी बयानबाजी और इनका छिछोरापन देश के सैनिकों का मनोबल गिराती रही।”
ऑपरेशन सिंदूर पर कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाने काम किया है। इस पर पीएम ने कहा, “10 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की। इसको लेकर यहाँ भांति-भांति की बातें कही गईं। यह वही प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।”
पीएम ने आगे कहा, “देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होता जा रहा है। कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान के मुद्दे इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। जब बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई तो कॉन्ग्रेस वाले पूछने लगे कि फोटो दिखाई, पाकिस्तान भी यही पूछता था, ये भी यही पूछते थे। आतंकवादी रो रहे हैं, उनके आका रो रहे हैं और उनको रोते देख यहाँ भी कुछ लोग रो रहे हैं।”
पीएम ने कॉन्गेस के लिए कहा, “पाकिस्तान के बयान और हमारा विरोध करने वालों के बयान फुल स्टॉप और कॉमा के साथ एक हैं। देश हैरान है कि कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस को भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कॉन्ग्रेस के उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को जमकर घेरा। पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर इन्होंने (विपक्ष) कहा कि रोक क्यों दिया, पहले मानते ही नहीं थे और पूछते हैं कि रोक क्यों दिया। वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कारगिल की लड़ाई में भारत की जीत को भी अब तक नहीं अपनाया है।
कॉन्ग्रेस की गलती याद दिलाईं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार को उनकी गलती याद दिलाईं। इनमें सिंधु जल समझौता से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होंने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है।
पीएम ने आगे कहा, “1971 में पाकिस्तान के 93 हजार फौजी हमारे पास बंदी थे, उसका हजारों किलोमीटर एरिया हमने कब्जा किया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे। उस दौरान थोड़ी समझ होती तो POK वापस लिया जा सकता था। इतना सारा जब सामने टेबल पर था तो करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे।”
सिंधु जल समझौते पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “सिंधु नदी से भारत जाना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस पर पंचायत करने का अधिकार वर्ल्ड बैंक को दिया। सिंधु जल समझौता भारत के स्वाभिमान के साथ बहुत बड़ा धोखा था। राज्यों के भीतर पानी को लेकर विवाद होता रहा और पाकिस्तान मौज मनाता रहा। अगर सिंधु जल समझौता ना होता तो कई बड़ी परियोजनाएँ बनतीं। सिंधु जल समझौते के बाद नेहरूजी ने करोड़ों रूपए भी दिए ताकि पाकिस्तान नहर बना सके।”
पीएम ने आगे कहा, “बाँध हमारा है, पानी हमारा है लेकिन पाकिस्तान का निर्णय है कि आप उसकी सफाई (डीसिल्टिंग) नहीं कर सकते। नेहरू ने कहा था कि सिंधु जल समझौता बाकी समस्याओं के लिए रास्ता खोलेगा। उन्होंने बाद में कहा लेकिन हम वहीं के वहीं हैं।”
कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान देश में असुरक्षा के माहौल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “2014 से पहले असुरक्षा का जो माहौल था, उसे याद करके लोग सिहर जाते हैं… हर जगह पर घोषणा होती थी कि कोई भी लावारिस चीज दिखे छूना मत, ये बम हो सकता है। देश के कोने-कोने में यही हाल था।”
बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान सोनिया गाँधी के आँसूओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “दिल्ली में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता के आँख में आसू थे, वोट पाने के लिए इसे देश भर में प्रसारित किया गया।”
पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिंदुत्व का अपमान किया है। पीएम ने बताया, “कॉन्ग्रेस दुनिया को हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अमेरिका के राजनयिक को कह दिया था कि लश्कर से बड़ा खतरा हिंदुत्व हैं।”
लोकसभा से पाकिस्तान को लताड़ा
प्रधानमंत्री ने लोकसभा से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैलाई गई झूठी साजिशों का पर्दाफाश किया। पाकिस्तान को ‘आतंकियों का आका’ बताकर पीएम ने कहा कि उनकी रूह काँप रही है।
पीएम ने कहा, “सेना को कार्रवाई की खुली छूट दी गई कि कब, कहाँ और कैसे जवाब दिया जाए। आतंकियों के आकाओं को ऐसी सजा मिली कि उनकी अब तक रूह काँप रही है। ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट में 22 अप्रैल 2025 का बदला सेना ने निर्धारित लक्ष्य के साथ ले लिया।”
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और ना ही अब इसके सामने भारत झुकेगा। आज तक पाकिस्तान के कई एयरबेस ICU में पड़े हैं… ऑपरेशन सिंदूर तकनीक की महारत में सफल सिद्ध हुआ है, पिछले 10 साल में हमने जो तैयारियाँ की हैं, वह ना की होती तो तकनीक के युग में हमारा कितना नुकसान हो सकता था, इसका अंदाजा लगा सकते है।”
पाकिस्तान को धमकी देते हुए पीएम ने कहा, “पहले दिन से क्लियर था कि हमारा लक्ष्य आतंकी और उनके आका हैं, उनके अड्डे हैं… उनको हम ध्वस्त करना चाहते हैं, हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने अपना काम कर दिया है। पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती ना करता, उसने निर्लज्ज होकर आतंकियों के साथ खड़े होने का फैसला किया… हम पूरी तरह तैयार थे और मौके की तलाश में थे।”
प्रधानमंत्री ने सीजफायर पर बोलते हुए कहा, “पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो। उसी दौरान 9 मई, 2025 को रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात का प्रयास किया।”
पीएम ने आगे कहा, “वह घंटे भर प्रयास कर रहे थे, लेकिन सेना के साथ मीटिंग के चलते मैं फोन उठा नहीं पाया। मैंने उन्हें कॉल बैक किया… तब उन्होंने फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था- अगर पाकिस्तान का यह इरादा है तो उसे बहुत महँगा पड़ेगा। मैंने कहा था- हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”
अंत में पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।”
लोकसभा में बोलते रक्षामंत्री राजनाथ सिंह/कश्मीर में ढेर हुए आतंकी (फोटो साभार: X@SansadTV/IndiaToday) लोकसभा में सोमवार 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ जोरदार प्रहार करते हुए विपक्ष को आईना दिखाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कभी-कभी विपक्षी दलों के लोग सवाल उठाते हैं कि हमारे कितने विमान गए? लेकिन उनका यह सवाल हमारी राष्ट्रीय भावनाओं का सही से प्रतिबिंब नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने एक बार भी यह नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान मार गिराए? यदि सवाल ही करना है तो सही सवाल यह होना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकी ठिकानों को प्रभावी तरीके से तबाह किया और ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो उसका उत्तर है, हां।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर सरकार का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 6-7 मई 2025 की रात भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले का बदला लेना और आतंकवाद की नर्सरियों को नष्ट करना था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए।
रक्षामंत्री ने कहा कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछकर 26 लोगों की हत्या की थी, जिसमें ज्यादातर हिंदू थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी।
इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने सेना को निर्णायक कार्रवाई की छूट दी। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ 22 मिनट में सभी आतंकी हमलों को हिट किया और 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से हमले 7 मई से 10 मई की रात 1 बजकर 30 मिनट तक मिसाइल और लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया। उसके निशाने पर हमारे सैन्य अड्डे थे। हमारा डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर दिया और पाकिस्तान किसी भी टार्गेट को हिट नहीं कर पाया। भारत के रक्षा तंत्र ने सभी हमलों को विफल कर दिया।
Speaking in Lok Sabha during Special Discussion on India’s strong, successful and decisive ‘Operation Sindoor’. https://t.co/Vnm7TWMqSw
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान एक भी लक्ष्य को हिट नहीं कर पाया। इसके जवाब में 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरफील्ड पर करारा प्रहार किया, जिसके बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से संपर्क कर कार्रवाई रोकने की अपील की।
रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन को केवल पॉज किया गया है और यदि पाकिस्तान ने फिर उकसाया तो इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन युद्ध छेड़ने के लिए नहीं, बल्कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए था, जिसमें भारत ने अपने सभी लक्ष्य हासिल किए।
ठाकुर साहब आज संसद में फ़ायर हैं
विपक्ष पूछता है कि हमारे कितने विमान गिरे ?
विपक्ष ये क्यों नहीं पूछता कि हमने कितने विमान मार गिराए ?
कोई परीक्षा में बैठता है उसका अंक मायने रखता है... कितनी पैंसिल टूटी ये मायने नहीं रखता!
विपक्ष को पता नहीं सवाल क्या होना चाहिए...हम बताते हैं...प्रश्न ये होना चाहिए था कि क्या हमने जो लक्ष्य निर्धारित किए थे...वो हासिल… pic.twitter.com/xHqp8zkVXp
ऑपरेशन महादेव में हासिम मूसा समेत 3 आतंकी ढेर, जारी है एनकाउंटर
वहीं, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के तहत श्रीनगर के लिदवास में 28 जुलाई को सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों सुलेमान साहा, अबु हमजा और यासिर को मार गिराया। चिनार कॉर्प्स के अनुसार, मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू हुई, जब 24 राष्ट्रीय राइफल्स और 4 पैरा ने आतंकियों को घेर लिया।
— Chinar Corps🍁 - Indian Army (@ChinarcorpsIA) July 28, 2025
मारे गए आतंकी सुलेमान साहा को मीडिया रिपोर्ट्स में हासिम मूसा बताया जा रहा है, जो पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था।
आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और ग्रेनेड बरामद हुए। माना जा रहा है कि ये आतंकी पहलगाम हमले से जुड़े थे, जिसके लिए एनआईए ने पहले दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन अभी जारी है, क्योंकि एक अन्य आतंकी की तलाश चल रही है।
रक्षामंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सही सवाल नहीं पूछ रहे। उन्होंने जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक शक्ति का प्रतीक है। भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता पर किसी भी हमले का करारा जवाब देगा।
राजनाथ सिंह ने कॉन्ग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को दोनों देशों की डायलॉग प्रॉसेस से 2009 की सरकार ने डीलिंक कर दिया था। साल 2006 में यह मान लिया गया था कि पाकिस्तान आतंक से पीड़ित है। इसने भारत की रणनीति को कमजोर किया। हमारे डेलिगेशन ने दुनिया के देशों में जाकर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के स्टैंड को प्रभावी तरीके से रखा।
रक्षामंत्री ने कहा, “पीएम मोदी ने भी कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर रुका है, समाप्त नहीं हुआ है। पाकिस्तान अगर फिर कोई हरकत करता है, तो हम और भी कठोर कार्रवाई करेंगे। पाकिस्तान के मन में गलतफहमी थी, उसे हमने ऑपरेशन सिंदूर से दूर कर दिया। अगर कुछ बचा होगा तो उसे भी दूर कर देंगे।”
के मुरलीधरन, शशि थरूर (फोटो साभार: HT) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने रविवार को तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी। मुरलीधरन ने साफ कहा कि जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख नहीं बदलते, उन्हें तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा।
अब सवाल यह होता है कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा की बजाए देश विरोधी ताकतों के साथ है? अगर नहीं तो आखिर किस वजह से शशि थरूर के लिए केरल कांग्रेस ने शशि थरूर के खिलाफ ऐसा कदम क्यों उठाया? क्या कांग्रेस की दुकान पाकिस्तान और आतंकियों को समर्थन देने से चलती है? शायद यही वजह है कि कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए के कार्यकाल में आतंकी अपना खून खेल खेल रहे थे? क्या बेगुनाहों का खून यूपीए के इशारे पर हो रहा था?
के मुरलीधरन ने शशि थरूर को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य होने के बावजूद अब उन्हें ‘हम में से एक’ नहीं माना जाता। मुरलीधरन ने यह भी कहा कि थरूर के खिलाफ आगे की कार्रवाई का फैसला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब थरूर ने कोच्चि में एक कार्यक्रम में कहा कि देश और उसकी सीमाओं की सुरक्षा पहले आती है और पार्टियाँ सिर्फ देश को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने हाल के घटनाक्रमों में सशस्त्र बलों और केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया था, जिसकी वजह से उनकी अपनी पार्टी में आलोचना हो रही है।
शशि थरूर ने कहा, “मैं अपने रुख पर कायम हूँ, क्योंकि यह देशहित में है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूसरी पार्टियों से सहयोग की बात करने पर उनकी अपनी पार्टी को यह विश्वासघात लगता है, जो एक बड़ी समस्या है।
मुरलीधरन ने पहले भी थरूर की आलोचना की थी। हाल ही में एक सर्वेक्षण में थरूर को यूडीएफ की ओर से केरल के मुख्यमंत्री पद का पसंदीदा चेहरा बताया गया था, जिस पर मुरलीधरन ने तंज कसते हुए कहा था कि थरूर को पहले अपनी पार्टी की पहचान तय करनी चाहिए। इसके अलावा थरूर के एक लेख में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गाँधी की भूमिका पर टिप्पणी को लेकर भी मुरलीधरन ने उनसे स्पष्ट राजनीतिक रास्ता चुनने को कहा था।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर के बयानों ने पार्टी को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर किया, जिससे उनके और कॉन्ग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव बढ़ गया। यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर विचारधारा और नेतृत्व को लेकर गहरी खींचतान को दर्शाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि थरूर का रुख पार्टी लाइन से हटकर है, जिससे आंतरिक एकता पर सवाल उठ रहे हैं।
एक समय था जब भारत अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाता था, लेकिन कालचक्र ऐसा घूम रहा है जिसे कोई देख नहीं रहा, खासकर भारत का विपक्ष। किसी आतंकी घटना होने पर अमेरिका के आगे शिकायत करने जाता था। आज ऐसा नहीं हो रहा, भारत किसी के आगे नहीं रो रहा है खुद ही आतंकियों को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है। और इस काम के लिए जरुरत है "इच्छा शक्ति" की। ये वही बेशर्म विपक्ष है जो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका को प्रेम पत्र लिख मोदी को वीसा नहीं देने के लिए लिखता था। आज उसी मोदी ने अमेरिका को भारत की ताकत दिखा दी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बुधवार (18 जून 2025) की सुबह एक प्रेस बयान में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई।
जी-7 समिट से ट्रंप के जल्दी लौटने की वजह से दोनों नेताओं की तय मुलाकात नहीं हो पाई थी। इसके बाद ट्रंप के अनुरोध पर दोनों के बीच 35 मिनट से ज्यादा की औपचारिक फोन बातचीत हुई।
Foreign Secretary Vikram Misri announced that Prime Minister @narendramodi had a telephonic conversation with US President #DonaldTrump, which lasted approximately 35 minutes. During the discussion, PM Modi briefed President Trump about Operation Sindoor. PM Modi clarified that… pic.twitter.com/1RuPVc778V
ये फोन कॉल कई मायनों में बेहद अहम थी – न सिर्फ बातचीत के मुद्दों की वजह से, बल्कि इसके समय और उसमें दिए गए संदेशों की वजह से भी। आइए, जानते हैं कि ये बातचीत क्यों इतनी खास थी…
1- पहलगाम हमले के बाद पहली सीधी बात
विक्रम मिस्री ने साफ-साफ बताया कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले के बाद ये पहली बार था जब पीएम मोदी और ट्रंप ने सीधे बात की। इस बातचीत में ट्रंप ने हमले में मारे गए लोगों के लिए संवेदना जताई और भारत के आतंकवाद के खिलाफ रुख का समर्थन किया।
ये बात इसलिए अहम है क्योंकि ट्रंप की बड़बोली और आत्ममुग्ध मीडिया टिप्पणियों से ऐसा लग रहा था जैसे भारत और अमेरिका के बीच कई बार बात हो चुकी हो। ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने व्यापार का दबाव डालकर भारत को पाकिस्तान से बात करने और युद्धविराम के लिए ‘राजी’ किया।
मिस्री के बयान ने साफ कर दिया कि ट्रंप का ये ‘शांति स्थापित करने’ वाला दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक था। ये बयान ट्रंप की गलत बयानबाजी को खुलेआम बेनकाब करता है।
2- ‘गोली का जवाब गोला’ का दोहराया संकल्प
फोन बातचीत में पीएम मोदी ने ट्रंप को दो टूक याद दिलाया कि भारत ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि पहलगाम हमले का जवाब वो जबरदस्त तरीके से देगा। मोदी ने कहा कि 6-7 मई 2025 की रात को भारत की ऑपरेशन सिंदूर कार्रवाई एक संयमित, गैर-उकसावे वाली और सटीक सैन्य कार्रवाई थी, जो पीओके और पाकिस्तान में आतंकी ढाँचों पर केंद्रित थी।
पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को साफ बता दिया है कि भारत ने पहले भी पाकिस्तान की किसी भी उकसावे की कार्रवाई का जवाब दिया है और आगे भी देगा और वो भी बड़े पैमाने पर – ‘गोली का जवाब गोला’।
पीएम मोदी का ये बयान नये भारत की ताकत और आत्मविश्वास को दिखाता है। ये वो भारत है जो किसी विदेशी ताकत के इशारे पर नहीं चलता, बल्कि अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए दुश्मन को करारा जवाब देता है। ये बयान शांत लेकिन दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
3- जेडी वेंस की चेतावनी और भारत का और बड़ा जवाब
पीएम मोदी ने ट्रंप को ये भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण के बाद 9 मई की रात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन्हें फोन करके पाकिस्तान की ओर से एक ‘बड़े हमले’ की चेतावनी दी थी। भारत ने वेंस को बहुत साफ शब्दों में बता दिया कि पाकिस्तान की किसी भी उकसावे की कार्रवाई का जवाब भारत और जोरदार और बड़ा देगा। और भारत ने ऐसा ही किया।
पीएम मोदी ने ट्रंप को बताया कि पाकिस्तान की उकसावे की कार्रवाई के जवाब में भारत ने सटीक सैन्य हमले किए, जिन्होंने पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया और उनके हवाई अड्डों को बेकार कर दिया। भारत ने पूर्ण हवाई वर्चस्व हासिल कर लिया। इसके बाद पूरी तरह टूट चुका पाकिस्तान भारत से युद्धविराम की गुहार लगाने को मजबूर हो गया। ये भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक चतुराई का सबूत है।
4- व्यापार सौदे या मध्यस्थता की कोई बात नहीं
पीएम मोदी ने ट्रंप को साफ-साफ याद दिलाया कि न तो पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के साथ और न ही अमेरिकी नेतृत्व के साथ किसी भी बातचीत में व्यापार का जिक्र तक हुआ। उन्होंने ये भी साफ किया कि भारत ने कभी भी अमेरिका के साथ ‘मध्यस्थता’ की बात नहीं की, क्योंकि भारत पाकिस्तान के साथ अपने द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं करेगा। भारत में इस मुद्दे पर पूरी राजनीतिक सहमति है।
मोदी ने ट्रंप को बताया कि सैन्य कार्रवाई को रोकने की सारी बातचीत भारत और पाकिस्तान के स्थापित सैन्य चैनलों के जरिए हुई, जिसमें कोई तीसरा देश शामिल नहीं था और न ही कोई व्यापार सौदा इसका हिस्सा था। मोदी ने ये भी दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और भारत अब किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई मानेगा। ये बयान भारत की स्पष्ट और अटल नीति को दर्शाता है।
5- ट्रंप का स्टॉपओवर न्योता ठुकराना एक बड़ा कदम
एक साहसिक और रणनीतिक कदम उठाते हुए, पीएम मोदी ने ट्रंप के अमेरिका में स्टॉपओवर मीटिंग के न्योते को विनम्रता से ठुकरा दिया। ट्रंप ने मोदी को कनाडा से भारत लौटते वक्त अमेरिका में रुककर मुलाकात करने का न्योता दिया था, लेकिन मोदी ने कहा कि उनके पास पहले से तय कार्यक्रम और जिम्मेदारियां हैं, इसलिए स्टॉपओवर संभव नहीं है। ये विनम्र इनकार एक ताकतवर संदेश देता है।
बिना कुछ कहे मोदी ने अमेरिका को बता दिया कि भारत अब कोई ‘छोटा देश’ नहीं है, जिसके नेता बड़े देशों के बुलावे पर दौड़ पड़ें। ये इनकार भारत की प्राथमिकताओं और आज की दुनिया में उसकी ताकत और आत्मसम्मान को दिखाता है। ये कदम भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत का प्रतीक है।
6- क्या ट्रंप ने मोदी को ‘फँसाने’ की कोशिश की?
ट्रंप के स्टॉपओवर न्योते का समय बहुत अहम है। अभी पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर अमेरिका में हैं। वो 15 जून से 5 दिन के दौरे पर हैं और ट्रंप से मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का मोदी को स्टॉपओवर के लिए बुलाना शायद इस कोशिश का हिस्सा था कि वो मोदी और मुनीर को एक साथ एक कमरे में या एक मेज पर लाकर अपनी ‘शांति स्थापक’ वाली छवि को और चमकाएँ।
ट्रंप पहले भी दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’ रोका। उनकी बयानबाजी और आत्मप्रचार को देखते हुए, ये सोचना गलत नहीं कि वो मोदी और मुनीर की तस्वीरों का इस्तेमाल करके अपने ‘शांति स्थापक’ दावे को और बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते।
लेकिन मोदी ने स्टॉपओवर ठुकराकर ट्रंप की इस पीआर चाल को पूरी तरह नाकाम कर दिया। साथ ही मुनीर को भी बता दिया कि भारत उनकी तरह के नेताओं के साथ बेकार की नौटंकी में वक्त नहीं गँवाएगा। ये कदम ट्रंप और मुनीर दोनों को भारत की चतुराई और दृढ़ता का आइना दिखाता है।
7- भारत और पाकिस्तान बराबर नहीं: दुनिया को साफ संदेश
पीएम मोदी की इस फोन बातचीत ने चुपके से एक बहुत बड़ा संदेश दिया है। ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के नेताओं को एक साथ बुलाने का मौका न देकर, मोदी ने साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, एक मजबूत और आधुनिक सेना और एक स्थिर लोकतांत्रिक सरकार वाला भारत को एक टूटे-फूरे, आतंक से ग्रस्त, अस्थिर और गरीबी में डूबे पाकिस्तान के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। ये संदेश न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। मोदी ने बिना शब्दों के बता दिया कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों पर खड़ा है।
भारत यहाँ टिकने के लिए आया है। ये एक बहुध्रुवीय दुनिया है, और भारत उन ध्रुवों में से एक है जो अपने नियम बनाएगा और अपनी राह चुनेगा। भारत को नजरअंदाज करना या गलत समझना दुनिया की सबसे बड़ी भूल होगी।
ये संदेश पीएम मोदी ने जी-7 समिट से लौटते वक्त एक फोन कॉल में दे दिया। इस बातचीत ने न सिर्फ भारत की ताकत और संयम दिखाया, बल्कि ये भी साफ कर दिया कि भारत अब अपनी शर्तों पर दुनिया से बात करेगा।