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हार नंबर 96: बिहार चुनाव में भी मिली करारी हार, संविधान को झुनझुने की तरह हाथ में लेकर घूमने वाले राहुल गांधी के महागठबंधन को जिताने के दावे फुस्स


कांग्रेस के शहजादे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को एक और हार का सामना करना पड़ा है। दरअसल, कांग्रेस INDI गठबंधन के लिए एक पनौती बन चुकी है। 
INDI गठबंधन में शामिल पार्टियों को जितनी जल्दी हो कांग्रेस को गठबंधन से अलग करना होगा। यही समय की मांग भी है। ताजा उदाहरण बिहार का है। अगर RJD ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा होता चुनाव परिणाम कुछ और होते क्योकि वहां स्थानीय मुद्दे हावी थे। लेकिन भाई-बहन राहुल और प्रियंका की जोड़ी ने उन मुद्दों का दरकिनार कर दिया। पूर्वाचलों के पवित्र त्यौहार छठ को ड्रामा बोलकर दूध में नीबू की बून्द का काम कर चुनाव को एकतरफा कर दिया। फिर भी कुछ बेशर्मों ने गठबंधन को इतनी वोटें दे दी। हकीकत में जो पार्टी विदेशी सहायता और चंदे पर चल रही हो उसे अपने त्यौहार की बेइज्जती भी दिखाई नहीं पड़ती। दूसरे, कांग्रेस द्वारा अपने उन नेताओं को प्रचार में बुलाना जिन्होंने बिहारियों के लिए आपत्तिजनक बयानबाज़ी की उसने कंगाली में आटा गीला करने का काम कर दिया। संविधान को झुनझुने की तरह हाथ में लेकर घूमने का नाटक करने वालों की पार्टी जब दूसरे राज्य के अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हों, देश को एकजुट तो क्या संविधान की भी रक्षा करने में नकारा होते हैं।    

देश की राजनीति में कांग्रेस पार्टी के लिए चुनावी हार अब शायद एक सुखद ‘पैटर्न’ बन चुकी है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के निराशाजनक नतीजों ने एक बार फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कांग्रेस कब तक गाँधी परिवार को ठोती रहेगी? क्या कांग्रेस में किसी भी धुरंधर नेता में इस परिवार की सलाह के बिना काम करने की क़ाबलियत नहीं? क्या सारे कागजी शेर हैं या फिर गुलाम? पार्टी 10 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए संघर्ष करती रही। जब से राहुल गांधी ने सक्रिय रूप से पार्टी की कमान संभाली है, तब से कांग्रेस लगातार एक के बाद एक राज्यों में अपनी जमीन खोती जा रही है। वैसे तो कांग्रेस सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के बाद से बराबर निचले स्तर पर जानी शुरू हो गयी थी, और सोनिया के अधूरे काम को पूरा करने भाई-बहन की जोड़ी राहुल-प्रियंका मैदान में कूद पड़ी है। देखना है कि कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील कौन ठोकेगा भाई या बहन? 

हर चुनाव में नई रणनीति, नए गठबंधन और नए वादों के बावजूद, पार्टी की ‘हार की राह’ खत्म होती नहीं दिख रही है। बिहार में महागठबंधन की हार ने यह स्थापित कर दिया है कि राहुल गांधी का नेतृत्व न तो मतदाताओं को आकर्षित कर पा रहा है और न ही पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं को एकजुट रख पा रहा है। चुनावों के आंकड़े गवाह हैं कि राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी में जैसे-जैसे जिम्मेदारी ज्यादा हुई। वैसे-वैसे कांग्रेस की दुर्दशा बद से बदतर होती गई। राहुल गांधी ने 2004 में लोकसभा का पहला चुनाव लड़ा था। वे सांसद से लेकर पार्टी महासचिव और अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी रहे। लेकिन हालात ये हैं कि पिछले दो दशक के उनके राजनीतिक जीवन के दौरान कांग्रेस हार की सैंचुरी लगाने के करीब पहुंच चुकी है। कांग्रेस पिछले 21 साल की अवधि में लोकसभा और विधानसभाओं के 96 चुनाव हार चुकी है।

हार नंबर 96.
14.11.25
बिहार चुनाव में मिली करारी हार

बिहार विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। राहुल गांधी के नेतृत्व वाले महागठबंधन को लोगों ने एक बार फिर नकार दिया है। राहुल गांधी की कांग्रेस का तो सबसे खराब प्रदर्शन रहा। पार्टी दहाई अंक तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। पार्टी को सिर्फ 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।

हार नंबर 95.
09.09.25
उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को मिली हार

उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी जिस इंडी गठबंधन की जीत के बढ़-चढ़कर दावे कर रहे थे, उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने कांग्रेस और इंडी गठबंधन के उम्मीदवार जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के भारी अंतर से हराया। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान में कुल 788 में से 767 सांसदों ने वोट डाला। एनडीए के उम्मीदवार राधाकृष्णन को उम्मीद से कहीं ज्यादा 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को मात्र 300 वोट ही मिले।

 हार नंबर 94.

08.02.25
दिल्ली में बीजेपी को प्रचंड बहुमत, आप सत्ता से बाहर

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला है। पिछले तीन बार से दिल्ली में चुनाव जीत रही आम आदमी पार्टी की झूठ की राजनीति पर इस बार जनता-जनार्दन ने करारा तमाचा जड़ा है। यहां तक कि पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया चुनाव हार गए हैं। इस चुनाव में सबसे तगड़ा झटका राहुल गांधी और उनकी पार्टी कांग्रेस को लगा है। कांग्रेस 70 में से एक भी सीट नहीं जीत सकी है, जबकि भाजपा को 48 सीट के साथ प्रचंड जीत मिली। दिल्ली की दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर तो कांग्रेस जमानत तक नहीं बचा सकी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में कांग्रेस का यह सबसे शर्मनाक प्रदर्शन है।
हार नंबर 93.
23.11.24
महाराष्ट्र में भाजपा की सुनामी, कांग्रेस की स्थिति सबसे दयनीय 
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा और महायुति की सुनामी चली। 288 सीट के सदन में अकेली बीजेपी ने सर्वाधिक 132 सीट जीतीं। उसकी सहयोगी शिवसेना शिंदे को 57 और एनसीपी अजित को 41 सीट मिलीं। कांग्रेस की स्थिति तो शिवसेना उद्धव (20) से भी दयनीय हो गई और वह सिर्फ 16 सीटों पर जीत पाई। 
हार नंबर 92.
08.10.24
हरियाणा में भाजपा की जीत की हैट्रिक, कांग्रेस की 37 सीट पर जमानत जब्त
हरियाणा में भाजपा ने लगातार तीसरी बार प्रचंड जीत हासिल की। 90 सीटों के सदन में भाजपा ने 48 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस ना सिर्फ 37 सीटों पर सिमटी, बल्कि अन्य 37 सीटों पर उसके प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई।
हार नंबर 91.
05.06.24
लोकसभा में एनडीए गठबंधन की जीत की हैट्रिक, कांग्रेस फिर परास्त
लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने जीत की हैट्रिक लगाई। साठ साल के बाद ऐसा मौका आया, जबकि दो टर्म को पूरा करने के बाद लगातार तीसरी बार नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने। भाजपा 240 सीटें जीतकर लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी। यूपीए गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस नर्वस नाइंटीज का शिकार हुई और उसे 99 सीटें मिलीं।
हार नंबर 90.
05.06.24
आंध्रप्रदेश में एनडीए की प्रचंड जीत, टीडीपी बनी हीरो और कांग्रेस जीरो
आंध्र प्रदेश में भाजपा, तेलुगू देशम पार्टी और जनसेना के गठबंधन को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिली। टीडीपी ने 135, जनसेना ने 21 और बीजेपी ने 8 सीटें जीती। सत्तारूढ़ दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी 11 सीट मिली हैं, वहीं कांग्रेस एक भी सीट जीतने में नाकाम रही।
हार नंबर 89.
02.06.24
अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की सुनामी, कांग्रेस को निर्दलीयों से कम सीट
अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला। राज्य की 60 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 46 पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को निर्दलीयों से भी कम सीटें मिलीं। चुनाव में तीन निर्दलीय जीते, लेकिन कांग्रेस बमुश्किल एक ही सीट जीत पाई। इसके अलावा नेशनल पीपुल्स पार्टी 5, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी 3, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल 2 सीट जीती।
हार नंबर 88.
05.06.24
ओडिशा में खिला कमल, भाजपा सत्ता में, कांग्रेस की हार
ओडिशा विधानसभा की 147 सीटों में से भाजपा ने 78 सीटें हासिल कर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। कांग्रेस सिर्फ 14 सीटों पर जीत हासिल कर पाई। वहीं, भाजपा ने लोकसभा की 21 में से 20 सीटें भी जीत लीं। मात्र एक सीट कांग्रेस के खाते में गई।
हार नंबर 87.
02.06.24
सिक्किम में कांग्रेस को नोटा से भी कम वोट मिले
सिक्किम की 32 विधानसभा सीटों में से 31 पर सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने एकतरफा जीत दर्ज की है। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने एकमात्र श्यारी विधानसभा सीट जीती। एसकेएम को 58.38 और एसडीएफ को 27.37 प्रतिशत वोट मिले। चुनाव की दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस को नोटा से भी कम 0.32 प्रतिशत मत मिले। नोटा को 0.99 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को 5.18 प्रतिशत वोट मिले।
हार नंबर 86.
02.03.23
त्रिपुरा में लगातार दूसरी बार भाजपा सरकार, कांग्रेस बुरी तरह परास्त
त्रिपुरा विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल किया। भाजपा ने 60 में से 32 सीटों पर जीत दर्ज की। राज्य में 14 सीटें लेकर दूसरे नंबर पर लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन रहा। लेकिन इसमें कांग्रेस के हिस्से में केवल 3 सीटें आईं। टिपरा मोथा पार्टी ने 11 सीटों पर जीत हासिल की।
02.03.23
नगालैंड में एनडीपीपी-बीजेपी गठबंधन की वापसी, कांग्रेस जीरो
नगालैंड में सत्तारूढ़ एनडीपीपी-बीजेपी गठबंधन को फिर बहुमत मिला। एनडीपीपी को 25 सीटों पर और बीजेपी को 12 सीटों पर जीत मिली। एनसीपी 7 सीट और एनपीपी 5 सीट पर विजयी रही। यहां तक कि एनपीएफ ने 2 सीट, चिराग पासवान की एलजेपी (राम विलास) ने 2 सीट, रिपब्लिकन पार्टी ने 2 सीट, नीतीश कुमार की जेडीयू को एक सीट पर जीत का परचम फहराया, लेकिन कांग्रेस को यहां पर कोई सीट नहीं मिली।
अवलोकन करें:-
बिहार में INDI गठबंधन की शर्मनाक हार के लिए कांग्रेस जिम्मेदार; बीजेपी के स्टार प्रचारक राहुल गाँ
हार नंबर 84.
02.03.23
मेघालय में एनपीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी, कांग्रेस हारी
मेघालय में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। यहां एनपीपी ने 60 में से 26 सीटें जीती और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। एनपीपी ने मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस-2.0 बनाया, जिसमें भाजपा, यूडीपी और पीडीएफ सहगोयी बनीं। कांग्रेस को चुनाव में केवल 5 सीटें हासिल हुईं।

पार्लियामेंट में Operation Sindoor पर हुई बहस में नरेंद्र मोदी से लेकर मोदी विरोधियों तक ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को क्यों नहीं जिम्मेदार ठहराया? कांग्रेस का रिमोट पाकिस्तान के हाथ; दोनों के एक जैसे आरोप--नरेंद्र मोदी

                                                                                                                                        साभार 
पहलगाम में आतंकियों द्वारा धर्म पूछकर हुए नरसंहार पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को क्यों clean chit को दी जा रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मोदी विरोधी तक किसी ने पूरी बहस में अब्दुल्ला का नाम तक नहीं लिया, क्यों? जबकि पहलगाम 
जम्मू-कश्मीर में आता है। अगर जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की सरकार होती मीडिया से लेकर सारा INDI allaince बीजेपी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे होते। क्यों नहीं उमर अब्दुल्ला ने इस नरसंहार की जिम्मेदारी ली? जब कश्मीर में इतने पर्यटक जा रहे हैं उन्हें सुरक्षा प्रदान करना राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की जिम्मेदारी थी। अगर हिन्दुओं की बजाए मुसलमानों का नरसंहार हुआ होता तब अब्दुल्ला का क्या रवैया होता? इस नरसंहार के लिए जितना पाकिस्तान जिम्मेदार है जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी काम दोषी नहीं। 
पाकिस्तान को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब दे दिया, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कब कटघरे में खड़ा किया जाएगा? कश्मीर में आतंकवादियों पर मोदी सरकार कार्यवाही कर रही है, राज्य का मुख्यमंत्री क्या कर रहा है? क्यों नहीं आतंकवादियों को घरों में रखने वालों पर कार्यवाही की जाती? देश में पल रहे पाकिस्तान और आतंकवादियों के sleeper cells पर आतंकवादियों की तरह कार्यवाही होनी चाहिए। अब्दुल्ला से पूछा जाए कि कितने आतंकवादी कश्मीर में छिपे हुए हैं? छिपे हुए आतंकवादियों और उनको पनाह देने वालों पर क्या कार्यवाही की? अगर पाकिस्तान से निपटने का काम केंद्र सरकार का है तो घरों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने का काम राज्य सरकार का है।             

जो भारत का पक्ष नहीं देख पा रहे हैं, उन्हें आईना दिखाने आया हूं- पीएम मोदी

2014 चुनावों से पहले तक कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों ने देश को पाकिस्तान के नाम से डराकर रखा हुआ था। जगह-जगह लिखा और घोषणा की जाती थी कि "किसी लावारिस चीज को न छुए, बम हो सकता है।" जनता में पाकिस्तान का ऐसा डर बैठ चुका था कि जैसे किसी बच्चे को सुलाने यह खाना नहीं खाने पर माएं अपने बच्चे से कहती थी कि "सो जा, चुपचाप खाना खाले नहीं तो गब्बर आ जाएगा।" लेकिन चुनावों के कालचक्र ऐसा घूमना शुरू कि पाकिस्तान और भारत में उसकी समर्थक पार्टियां डरी हुई है। पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक आतंकी हमले को बचाने "हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद" देकर देश को गुमराह किया जाता था। यह कुकर्म जनहित में नहीं सिर्फ मुस्लिमों को खुश कर उनके वोट लेकर अपनी कुर्सी और तिजोरियों के भंडार भरने के लिए किया जा रहा था। और अक्ल से पैदल मुसलमान इन पार्टियों को अपना शुभचिन्तक मानती है। इन अक्ल से पैदल मुसलमानों को नहीं मालूम कि तुम्हारी इन हरकतों से कोई भी मुस्लिम देश इन्हे सम्मान से नहीं देखता, यहाँ तक पाकिस्तान भी नहीं। अगर कोई देश आतंकी घटनाओं के लिए फंडिंग करने का मतलब नहीं कि उनको भारतीय मुसलमानों की फ़िक्र है।   

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 जुलाई को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैं इस सदन में भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूं।

 

मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना वक्तव्य इन लाइनों के साथ चालू किया। उन्होंने इस दौरान जहाँ भारतीय सेनाओं की सफलता पर बात की तो वहीं कॉन्ग्रेस को लगातार उलटे-सीधे प्रश्न उठाने पर आइना भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।

ऑपरेशन सिंदूर में कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाया

 लोकसभा में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस अब पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं 22 अप्रैल को विदेश में था। मैं तुरंत लौट आया और वापस आने के तुरंत बाद मैंने एक बैठक बुलाई और हमने स्पष्ट निर्देश दिए कि आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना है और यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है। सेना को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई और यह भी कहा गया कि सेना को यह तय करना चाहिए कि कब, कहां, कैसे और किस तरीके से कार्रवाई करनी है। ये सारी बातें उस बैठक में स्पष्ट रूप से कही गईं।

उन्होंने कहा कि सेना को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई और यह भी कहा गया कि सेना को यह तय करना चाहिए कि कब, कहां, कैसे और किस तरीके से कार्रवाई करनी है। हमें गर्व है कि आतंकवादियों को सजा दी गई, और यह ऐसी सजा थी कि आतंक के उन आकाओं की आज भी रातों की नींद उड़ी हुई है।

पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया का समर्थन तो मिला, लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल 2025 के बाद 3-4 दिन में ही यह उछल रहे थे। ये लोग अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए मुझ पर निशाना साध रहे थे, लेकिन इनकी बयानबाजी और इनका छिछोरापन देश के सैनिकों का मनोबल गिराती रही।”

ऑपरेशन सिंदूर पर कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाने काम किया है। इस पर पीएम ने कहा, “10 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की। इसको लेकर यहाँ भांति-भांति की बातें कही गईं। यह वही प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।”

पीएम ने आगे कहा, “देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होता जा रहा है। कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान के मुद्दे इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। जब बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई तो कॉन्ग्रेस वाले पूछने लगे कि फोटो दिखाई, पाकिस्तान भी यही पूछता था, ये भी यही पूछते थे। आतंकवादी रो रहे हैं, उनके आका रो रहे हैं और उनको रोते देख यहाँ भी कुछ लोग रो रहे हैं।”

पीएम ने कॉन्गेस के लिए कहा, “पाकिस्तान के बयान और हमारा विरोध करने वालों के बयान फुल स्टॉप और कॉमा के साथ एक हैं। देश हैरान है कि कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस को भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कॉन्ग्रेस के उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को जमकर घेरा। पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर इन्होंने (विपक्ष) कहा कि रोक क्यों दिया, पहले मानते ही नहीं थे और पूछते हैं कि रोक क्यों दिया। वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कारगिल की लड़ाई में भारत की जीत को भी अब तक नहीं अपनाया है।

कॉन्ग्रेस की गलती याद दिलाईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार को उनकी गलती याद दिलाईं। इनमें सिंधु जल समझौता से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होंने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है।

पीएम ने आगे कहा, “1971 में पाकिस्तान के 93 हजार फौजी हमारे पास बंदी थे, उसका हजारों किलोमीटर एरिया हमने कब्जा किया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे। उस दौरान थोड़ी समझ होती तो POK वापस लिया जा सकता था। इतना सारा जब सामने टेबल पर था तो करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे।”

सिंधु जल समझौते पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “सिंधु नदी से भारत जाना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस पर पंचायत करने का अधिकार वर्ल्ड बैंक को दिया। सिंधु जल समझौता भारत के स्वाभिमान के साथ बहुत बड़ा धोखा था। राज्यों के भीतर पानी को लेकर विवाद होता रहा और पाकिस्तान मौज मनाता रहा। अगर सिंधु जल समझौता ना होता तो कई बड़ी परियोजनाएँ बनतीं। सिंधु जल समझौते के बाद नेहरूजी ने करोड़ों रूपए भी दिए ताकि पाकिस्तान नहर बना सके।”

पीएम ने आगे कहा, “बाँध हमारा है, पानी हमारा है लेकिन पाकिस्तान का निर्णय है कि आप उसकी सफाई (डीसिल्टिंग) नहीं कर सकते। नेहरू ने कहा था कि सिंधु जल समझौता बाकी समस्याओं के लिए रास्ता खोलेगा। उन्होंने बाद में कहा लेकिन हम वहीं के वहीं हैं।”

कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान देश में असुरक्षा के माहौल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “2014 से पहले असुरक्षा का जो माहौल था, उसे याद करके लोग सिहर जाते हैं… हर जगह पर घोषणा होती थी कि कोई भी लावारिस चीज दिखे छूना मत, ये बम हो सकता है। देश के कोने-कोने में यही हाल था।”

बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान सोनिया गाँधी के आँसूओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “दिल्ली में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता के आँख में आसू थे, वोट पाने के लिए इसे देश भर में प्रसारित किया गया।”

पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिंदुत्व का अपमान किया है। पीएम ने बताया, “कॉन्ग्रेस दुनिया को हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अमेरिका के राजनयिक को कह दिया था कि लश्कर से बड़ा खतरा हिंदुत्व हैं।”

लोकसभा से पाकिस्तान को लताड़ा

प्रधानमंत्री ने लोकसभा से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैलाई गई झूठी साजिशों का पर्दाफाश किया। पाकिस्तान को ‘आतंकियों का आका’ बताकर पीएम ने कहा कि उनकी रूह काँप रही है।

पीएम ने कहा, “सेना को कार्रवाई की खुली छूट दी गई कि कब, कहाँ और कैसे जवाब दिया जाए। आतंकियों के आकाओं को ऐसी सजा मिली कि उनकी अब तक रूह काँप रही है। ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट में 22 अप्रैल 2025 का बदला सेना ने निर्धारित लक्ष्य के साथ ले लिया।”

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और ना ही अब इसके सामने भारत झुकेगा। आज तक पाकिस्तान के कई एयरबेस ICU में पड़े हैं… ऑपरेशन सिंदूर तकनीक की महारत में सफल सिद्ध हुआ है, पिछले 10 साल में हमने जो तैयारियाँ की हैं, वह ना की होती तो तकनीक के युग में हमारा कितना नुकसान हो सकता था, इसका अंदाजा लगा सकते है।”

पाकिस्तान को धमकी देते हुए पीएम ने कहा, “पहले दिन से क्लियर था कि हमारा लक्ष्य आतंकी और उनके आका हैं, उनके अड्डे हैं… उनको हम ध्वस्त करना चाहते हैं, हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने अपना काम कर दिया है। पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती ना करता, उसने निर्लज्ज होकर आतंकियों के साथ खड़े होने का फैसला किया… हम पूरी तरह तैयार थे और मौके की तलाश में थे।”

प्रधानमंत्री ने सीजफायर पर बोलते हुए कहा, “पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो। उसी दौरान 9 मई, 2025 को रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात का प्रयास किया।”

पीएम ने आगे कहा, “वह घंटे भर प्रयास कर रहे थे, लेकिन सेना के साथ मीटिंग के चलते मैं फोन उठा नहीं पाया। मैंने उन्हें कॉल बैक किया… तब उन्होंने फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था- अगर पाकिस्तान का यह इरादा है तो उसे बहुत महँगा पड़ेगा। मैंने कहा था- हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”

अंत में पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।”

मुस्लिम वोट की खातिर मुगलों का महिमामंथन विपक्ष को आत्महत्या की ओर धकेल रहा है; राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहना राजस्थान विधानसभा में गूंजा

इंडी गठबंधन में सहयोगी समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण की सारी हदें पार कर दी हैं। पहले तो सपाई सिर्फ मुस्लिम हितैषी बनते थे। सनातन को अपमानित, रामायण को कलंकित करना, महाकुम्भ का अपमान आदि आदि अनेकों हरकतें हैं जो विपक्ष को आत्महत्या करने को मजबूर कर रहा है। अगर यही विपक्ष विदेश में अपने देश के इतिहास बोलता उसे जेल में डाल दिया जाता, लेकिन ये भारत जहाँ वर्तमान जयचन्दों की भीड़ लगी हुई है। औरंगजेब जैसे क्रूर शासकों के हिमायती बनते थे। लेकिन मुस्लिम प्रेम में समाजवादी पार्टी के नेता इतने गिर जाएंगे यह किसी ने सोचा भी ना होगा। इंडी गठबंधन और सपा हिंदुओं का गौरवशाली इतिहास बिगाड़ने में जुटी हुई है। अब राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने मुगलों से लोहा लेने वाले मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा संग्राम सिंह सांगा के खिलाफ बेहद अपमानजनक टिप्पणी कर दी है। उन्होंने राणा सांगा के वंशजों और उन्हें मानने वाले हिंदुओं को गद्दार तक कह डाला है।

सपा सांसद की इस अभद्र, अशोभनीय, असभ्य और अनर्गल टिप्पणी को लेकर राजस्थान समेत देशभर की सियासत में उबाल आ गया है। भाजपा ने पलटवार करते हुए इसके लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से माफी मांगने के लिए कहा है। राजस्थान के सीएम भजनलाल ने कहा कि मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करने वाला है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में गूंजा। कांग्रेस ने आपत्ति की तो भाजपा ने कहा कि इससे साफ तय हो गया कि आप लोग भी रामजीलाल सुमन के साथ हो।

सपा सांसद सुमन ने राणा सांगा पर यह विवादित बयान दिया
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में जो बयान दिया उससे पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सपा सांसद सुमन ने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते राणा सांगा को लेकर बयान में कहा था कि ‘बीजेपी के लोगों का ये तकियाकलाम बन गया है कि इनमें बाबर का DNA है। मैं जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? सुमन ने अनर्गल दावा किया कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। मुसलमान अगर बाबर की औलाद हैं तो तुम लोग उस गद्दार राणा सांगा की औलाद हो, ये हिन्दुस्तान में तय हो जाना चाहिए कि बाबर की आलोचना करते हो, लेकिन राणा सांगा की आलोचना नहीं करते। बता दें कि देश में पहले से औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इसके बाद राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है।

राजस्थान विधानसभा में गूंजा राणा को गद्दार कहने का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में उठा। बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन के जरिए राणा सांगा को गद्दार कहने का मामला उठाते हुए पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। इस पर कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा- सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। हरिमोहन शर्मा के इतना कहते ही बीजेपी विधायकों ने कड़ी आपत्ति की। इस पर बीजेपी विधायकों ने कहा- राणा सांगा के अपमान पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? कई बीजेपी विधायक जोर-जोर से बोलने लगे, इससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। बीजेपी विधायकों ने कहा कि आप राणा सांगा पर टिप्पणी का समर्थन कर रहे हो क्या? श्रीचंद कृपलानी ने कहा- आपके खड़ा होने से यह तय हो गया कि आप रामजीलाल सुमन के साथ हो? कांग्रेस ने खुद अपनी पोल खोल ली। आप मुगलों का साथ दे रहे हो। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा- कांग्रेस विधायक दल रामजीलाल सुमन के साथ खड़ा है, राणा सांगा का अपमान करने वाले के साथ खड़ा है, शर्म आनी चाहिए।

बरेली में जोरदार प्रदर्शन, सपा सांसद सुमन का पुतला फूंका
बरेली के आंवला में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। समाज वीर महाराणा सांगा पर सपा राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन की अपमानजनक टिप्पणी से नाराज है।क्षत्रिय महासभा के नेतृत्व में तहसील गेट पर एकत्र हुए लोगों ने सांसद का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम नहने राम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि राज्यसभा में सपा सांसद ने न सिर्फ क्षत्रिय समाज बल्कि पूरे हिंदू समाज के गौरव महाराणा सांगा के प्रति अमर्यादित टिप्पणी की है। समाज इससे आक्रोशित है। महासभा ने चेतावनी दी कि अगर सांसद के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो क्षत्रिय महासभा और हिंदू संगठन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अपने सांसद के बयान के लिए अखिलेश यादव देश से माफी मांगें
सपा सांसद के बयान पर राजस्थान के सीएम भजनलाल ने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘शूरवीरों की धरती राजस्थान के लाडले सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सदा अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करता है।’ उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिस महान योद्धा ने मुगलों से युद्ध में अपने शरीर पर 80 घाव झेले, उनको गद्दार कहना विपक्षी नेताओं की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। वोटो के तुष्टिकरण के लिए ये लोग इतिहास पुरुषों का अपमान करने से भी नहीं चूकते हैं। इसके लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और अपने सांसद पर अविलम्ब कार्रवाई करनी चाहिए।’

सुमन का बयान देश के शौर्य और बलिदान का अपमान है: दीया कुमारी
सपा सांसद के राणा सांगा पर दिए विवादित बयान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने भी कटु आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘वीर शिरोमणि महाराणा सांगा जी, जिनके शौर्य की गाथा राजस्थान की मिट्टी के कण-कण से सुनाई देती है। जिनकी वीरता की कहानी सुनकर यहां बच्चे बड़े हुए हैं, 80 घाव खाकर भी देश के लिए लड़ने वाले देशभक्त योद्धा के लिए कहा गया ‘गद्दार’ शब्द, ना सिर्फ महाराणा सांगा जी और राजस्थान, बल्कि देश के शौर्य और बलिदान का भी अपमान है। सपा सांसद रामजी लाल सुमन का यह बयान शर्मनाक और निंदनीय है। उन्हें देश की वीरता को कलंकित करने वाले इन कटु शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।’

कुछ तुच्छ लोग ही इस तरह की बयानबाजी करते हैं: शेखावत
राणा सांगा को लेकर दिए गए विवादित बयान पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि कुछ तुच्छ बुद्धि और छोटे हृदय के लोग इस तरह की चर्चा करते हैं। इन चर्चाओं के लिए कोई गुंजाइश भी नहीं है। उन्होंने कहा कि “भारत के इतिहास की समीक्षा करने वाले एक हजार वर्ष बाद या जब भी समीक्षा करेंगे तो कभी बाबर और राणा सांगा की तुलना नहीं कर पाएंगे। महाराणा सांगा ने स्वतंत्रता की जो अलख जगाई थी, उसने न सिर्फ मुगलों से लोहा लिया, बल्कि भारत की संस्कृति को सनातन बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। कुछ तुच्छ बुद्धि और छोटे दिल के लोग ऐसी चर्चाएं करते हैं। इसी तरह बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी बयान को राणा सांगा का बड़ा अपमान बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरा साहस, शौर्य, त्याग और बलिदान की भूमि रही है। राणा सांगा पर ऐसी टिप्पणी राजस्थान के इतिहास का अपमान है।

सुमन का बयान तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा : राज्यवर्धन
राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सुमन के बयान को “तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान पर हमला है। उन्होंने कहा कि “कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी आत्मा देश के दुश्मनों को बेच दी है। ये लोग भारत को नीचा दिखाने और महापुरुषों का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ये लोग दीमक हैं, जो देश की जड़ों को खोखला करने में लगे हैं लेकिन अब भारत जाग चुका है और ऐसे लोगों को हम और बर्दाश्त नहीं करेंगे।” वहीं मेवाड़ राजघराने से आने वाले बीजेपी विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने भी सपा सांसद के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है- संसद में ऐसे लोग भी पहुंचते है। ऐसों से महाराणा सांगा को कोई प्रमाण पत्र की जरूरत ही नहीं है, मगर सदन की गरिमा और हमारे इतिहास में से एक महान व्यक्तित्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।

कांग्रेस की सपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग
बीजेपी ही नहीं इंडिया गठबंधन में सपा के साथ खड़ी कांग्रेस के नेताओं ने भी सपा सांसद सुमन के बयान की कटु आलोचना की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “अस्सी घाव लगे थे तन पे, फिर भी व्यथा नहीं थी मन में। मातृभूमि की रक्षा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पण करने वाले, अदम्य साहस, वीरता, त्याग और स्वाभिमान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा सांगा पर सांसद रामलाल सुमन द्वारा संसद में अमर्यादित टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है व माफी योग्य नहीं है।” खाचरियावास ने इस बयान के लिए सपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग भी की है।