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जाति व्यवस्था को लेकर हिन्दुओं को घेरने वाले बता रहे पूला एंथनी को पहला ‘दलित’ बिशप: ईसाइयत अपनाने के बाद कैथोलिक को लीड करने वाला SC कैसे?

                                                         कार्डिनल बिशप पूला एंथनी (साभार-HT)
हैदराबाद के आर्कबिशप कार्डिनल पूला एंथनी को कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया का अध्यक्ष चुना गया है। CBCI भारत में कैथोलिक क्रिश्चियंस का ऐसा संगठन है, जो धार्मिक नियम कानून तय करता है।
 

पूला एंथनी को अध्यक्ष चुने जाने को मीडिया में ऐसे दिखाया गया कि एंथनी देश के पहले ऐसे दलित क्रिश्चियन हैं, जो देश के लगभग 2 करोड़ कैथोलिक को लीड करेंगे!

दलित और क्रिश्चियन एक साथ कैसे?

अब सवाल ये उठता है कि आखिर कोई दलित और क्रिश्चियन एक साथ कैसे हो सकता है? ईसाई तो कैथोलिक होते हैं, प्रोटेस्टेंट होते हैं और जाति व्यवस्था तो हिंदुओं में होती है।

ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र…अगड़ा-पिछड़ा, दलित-OBC ये सब तो हिंदुओं के वर्गीकरण हैं? फिर भला कार्डिनल एंथनी दलित कैसे हुए और ‘दलित’ रहते हुए वो ईसाइयत के प्रति कितने समर्पित हो सकते हैं। इसके बावजूद मीडिया में ये कहा जा रहा है कि वो दलित हैं! ईसाइयों में जब सब बराबर होते हैं, तो फिर कोई दलित कैसे हो गया।

ईसाइयत की किताब बाइबिल तक कहती है कि सब बराबर हैं, सबको गॉड ने बनाया है। सब गॉड के लिए बराबर हैं। भारत में गाँव-गाँव धर्मांतरण करवाती मिशनरियाँ यही बताती घूमती हैं कि सनातन छोड़ोगे, तो जाति व्यवस्था में ऊपर बढ़ोगे? ईसाई बनोगे तो बराबर हो जाओगे। जाति व्यवस्था से मुक्ति मिलेगी।

बराबरी की बात कह बरगलाते हैं मिशनरी

जो एसटी- एससी समाज के लोग ईसाइयत को अपनाते हैं, उनके लिए यह दलील दी जाती हैं कि वे जाति व्यवस्था से तंग आकर ईसाइयत की तरफ आकर्षित हुए।

लेफ्ट लिबरल लॉबी भी इसी बात को लेकर सनातन को गालियाँ देती है कि यहाँ जाति-व्यवस्था हावी है। यहाँ कथित नीची जातियों को बराबर नहीं माना जाता, यहाँ कथित तौर पर लोगों को मंदिरों में घुसने की आजादी नहीं है, यहाँ उन्हें दलित और अगड़ा-पिछड़ा में बांटा जाता है, इसीलिए लोग सनातन छोड़ कर ईसाइयत अपना लेते हैं।

तो ये जाति सूचक शब्द आखिर ईसाई बनने के बाद भी पूला एंथनी के साथ कैसे चिपका रह गया? और अगर ईसाई बनने के बाद भी कोई दलित रह जाता है, तब तो ईसाइयत अपनाने और धर्मांतरण को लेकर जो भी प्रचार-प्रसार किया जाता है, वह सब गलत है। इसका कोई जवाब ना लेफ्ट लिबरल लॉबी के पास होगा और ना सनातन को डेंगू मलेरिया बताने वाले नेताओं के पास!

मीडिया ने भी दलित कार्डिनल एंथनी की बात कही

कार्डिनल एंथनी कैसे इतने दूर तक पहुँचे और कैसे ये ऐतिहासिक है! मीडिया यही बताने में लगा है। चाहे इंडियन एक्सप्रेस हो या टाइम्स ऑफ़ इंडिया। हर कोई इस बात को हाईलाइट कर रहा है कि देखिए दलित व्यक्ति अब 2 करोड़ लोगों के धार्मिक तौर तरीके मैनेज करेगा!

उनकी कहानी बताने वाली ईसाईयत से जुड़ी वेबसाइट्स भी कार्डिनल एंथनी में ‘दलित’ को ढूँढ रही है। बताती हैं कि दलित माता-पिता के घर पैदा हुए एंथनी युवावस्था में मिशनरी की हेल्प से गरीबी से बाहर आए। अब मिशनरी की सहायता से कैसे कोई गरीब आदमी ‘गरीबी’ से बाहर निकलता है, ये सबको पता है। पैसे का लालच, पढ़ाई और इलाज का लालच धर्मांतरण के लिए आम बात है। इसको लेकर आए दिन घटनाएँ देशभर में घटती रहती हैं।

देश का संविधान भी नहीं मानता कि ईसाईयत में कन्वर्ट होने वाला दलित रह सकता है। उन्हें माइनॉरिटी कह सकते हैं, लेकिन SC/ST नहीं कहा जाता है।

ऐसे धर्मांतरण के मामलों को लेकर साल 2004 में रंगनाथ मिश्रा आयोग बनाई गई। इस आयोग ने सिफारिश दी थी कि अनुसूचित जाति का दर्जा पूरी तरह से धर्म से अलग होना चाहिए और ईसाई और मुस्लिम दलितों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

लेकिन UPA सरकार भी इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं कर पाई, क्योंकि ये आधार ही गलत है। ये सीधे तौर पर दशकों से हाशिये पर पड़े लोगों के साथ धोखा होगा। ईसाई-मुस्लिम बने लोग एससी-एसटी के अधिकारों पर डाका डालने लगेंगे।

कमेटी ने तो ये भी कहा था कि दलित क्रिश्चियन भी गैर बराबरी का शिकार है, लेकिन सवाल फिर वही है कि अगर ईसाईयत में सभी बराबर हैं तो गैर बराबरी कैसे और कोई पिछड़ा-दलित कैसे हो सकता है? सब तो चर्च जाने वाले और जीसस को मानने वाले हुए।

केरल में अगड़ा-पिछड़ा-दलित क्रिश्चियन

दरअसल ये ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल दिखाता है कि ईसाइयत अपनाने वाले लोगों को खुद मिशनरियाँ ही बराबर नहीं मानती। जो बराबरी की बात कर पिछड़ों-दलितों और जनजातीय समाज के लोगों को बरगलाते हैं और धर्मांतरण करवाते हैं, वो पहचान तब भी नहीं छूटती जब कोई ईसाइयत के ऊँचे स्थान पर पहुँच जाता है।

केरल जैसे राज्यों में तो आज भी ईसाइयों के भीतर भयानक जातिवाद है। यहाँ कुछ ईसाई अपने को ऊँची जाति का बताते हैं और दलित से ईसाइयत अपनाने वाले लोगों को हीन भावना से देखते हैं। मिशनरी यहाँ कुछ नहीं कर पातीं।

असल में बराबरी का फर्जीवाड़ा सिर्फ और सिर्फ उस सनातन को कमजोर करने के लिए है, जिसने ना सिर्फ समय आने पर अपने में बदलाव किए हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएँ बनाई हैं कि पिछड़ों की भरपाई हो। आज राम मंदिर में पुजारी दलित समाज से हैं! किसी मंदिर में कोई नहीं पूछता कि आप किस जात से हो।

जापान में तेजी से बढ़ती मुस्लिम आबादी से मुस्लिमों को दफनाने की जगह नहीं, 40 वर्ष में 38 गुना बढ़ी मस्जिदों की संख्या

                                     जापानी में बढ़ रही मुस्लिम आबादी ( फोटो साभार- waseda.jp)
जापान में मुस्लिम आबादी की बेतहाशा वृद्धि दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। यहाँ बड़े-बड़े मस्जिद बन गए हैं। यहाँ तक कि विश्वविद्यालय में भी मस्जिद देखा जा सकता है। जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी इस्लाम को मानने वालों की है। हाल ही में कब्रिस्तान को बनाने के लिए जगह देने को लेकर जापानी संसद में सवाल पूछे गए। इसके बाद मुस्लिम आबादी का मामला सुर्खियों में आ गया।

जापान में हजार से लाखों में पहुँची मुस्लिम आबादी

दुनियाभर में मुस्लिम आबादी बेहताशा बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, इस सदी के अंत तक ईसाइयों को पीछे छोड़ते हुए इस्लाम मानने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा होगी।
दुनिया में 200 से ज्यादा देशों में इनकी अच्छी खासी आबादी है। इन देशों में इस्लामी गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। 2013 में विश्व जनसंख्या में मुस्लिम आबादी 1.6 अरब थी और 2050 तक 2.9 अरब यानी विश्व जनसंख्या का करीब 26% तक पहुँचने का अनुमान है। यही वजह से की विश्व के छोटे-छोटे देशों में भी इनकी संख्या दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही है।

छोटा सा एशियाई देश जापान भी इससे अछूता नहीं है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, जापान में मुस्लिम आबादी करीब 1.30 लाख थी। इनमें से 1.20 लाख विदेशी मुस्लिम और 10 हजार जापानी मुस्लिम रहते थे। लेकिन अब इस्लाम को माननेवालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी है। मुस्लिमों की कुल आबादी जापान की आबादी का 0.18 फीसदी से 0.33 फीसदी है, जो साल-दर-साल बढ़ रही हैं।

 ये लोग ज्यादातर प्रवासी कामगार हैं, जो टेक्नोलॉजी, बिजनेस और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। जापान में मुसलमानों पर स्टडी करने वाले वासेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफुमी तनाडा के एक सर्वे के मुताबिक, इनकी संख्या 200,000 से ज़्यादा होने का अनुमान है। मार्च 2021 तक, देश भर में मस्जिदों, यानी पूजा की जगहों की संख्या 1999 में 15 से बढ़कर 113 हो गई है।

जापानी की अधिकांश मुस्लिम आबादी (लगभग 80%) ग्रेटर टोक्यो क्षेत्र, चुक्यो महानगरीय क्षेत्र और किन्ही क्षेत्र में रहते हैं। अब इनका विस्तार दूसरे क्षेत्रों में भी हो रहा है।

जापान में तेजी से बन रहे हैं बहुमंजिला मस्जिद

ईरान और पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों से मजदूरों के बढ़ते इमिग्रेशन और धर्मांतरण की वजह से जून 2024 तक यहाँ 149 मस्जिदें बन गई हैं। यानी इनकी संख्या 10 गुणा बढ़ गई हैं। कई मस्जिदों को बड़ा बनाया गया है।
टोक्यो में टोक्यो कैमी मस्जिद को हाल ही में बहुमंजिला बनाया गया है और समय-समय पर आम जनता को लुभाने के लिए इस्लामिक गतिविधियाँ चलाई जाती हैं। दिसंबर 2012 के मध्य में एक शुक्रवार को दोपहर के आसपास, टोक्यो के शिबुया वार्ड में टोक्यो कैमी मस्जिद में एक खास आवाज में आदमी ने अज़ान दिया और नमाज का समय बताया। उसने कहा, “मस्जिद घर जैसी है। अल्लाहु अकबर।”
यहाँ तक कि विश्वविद्यालय में भी मस्जिद बन चुकी है। जैसे- वासेदा विश्वविद्यालय के टोकोरोजावा परिसर के पास एक इमारत बनी थी, जिसे मस्जिद के रूप में उपयोग करने के लिए पुनर्निर्मित किया गया है।

90 के दशक में बनी बेतहाशा मस्जिदें

1990 के दशक में यहाँ मस्जिदों की संख्या तेजी से बढ़ी। 1980 में जहाँ सिर्फ 4 मस्जिदें थी, वहीं 1990 के दशक में ये बढ़ कर 90 से ज्यादा हो गई। इन वर्षों में इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए बाहरी देशों से कई लोग आए और मस्जिदों में कार्यक्रम आयोजित कर जापानियों को लुभाने की कोशिश की गई यानी जापानियों के धर्मांतरण में इन कार्यक्रमों की अहम भूमिका रही।
अब हालात ये हैं कि न सिर्फ प्रवासी मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, बल्कि जापान की मूल आबादी का धर्मांतरण तेजी से हुआ है। जापान में प्रवासी मुस्लिमों के बसने और परिवार बसाने की वजह से एक ‘हाइब्रिड मुस्लिम’ आबादी तैयार हो गई है। नमाज पढ़ना और रोजा रखना जैसे रीति रिवाज का पालन बड़ी आबादी करती है। इनमें कट्टरता भी देखी जाती है।

सांसद मिजुहो ने कब्रिस्तान बनाने पर प्रतिबंध लगाने की माँग की

जापान में हाल ही में ये खबर भी सामने आई कि सरकार ने शव दफनाने के लिए कब्रिस्तान बनाने के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है और प्रवासी मुस्लिमों को शव अपने देश लेकर दफनाने को कहा है। हालाँकि सरकार ने जापानी संसद में इसको लेकर स्पष्टीकरण दिया है।
दरअसल हाउस ऑफ काउंसिलर्स की प्रतिनिधि उमेमुरा मिजुहो ने कहा कि जापान में छोटा भू भाग है। प्राकृतिक आपदाएँ यहाँ होती रहती हैं, ऐसे में किसी बड़ी आपदा की स्थिति में दफनाने पर शवों के बाहर निकलने की संभावना है। साथ ही 99 फीसदी आबादी यहाँ दाह संस्कार करती है, इसलिए जापान की स्थिति को देखते हुए दफनाने से जुड़े नियम कड़े किए जाने चाहिए।
इसको लेकर सरकार ने स्थानीय सरकार को इसके बारे में विचार करने को कहा है। साथ ही स्थानीय रीति रिवाजों, नियमों और पर्यावरण को भी ध्यान में रखने को कहा है। क्योडो न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के बाद जापानी मुस्लिमों को दफनाने के लिए नई जगहों की जरूरत है।
एजेंसी का कहना है कि कुछ लोकल सरकारें बढ़ती मुस्लिम आबादी के लिए नए कब्रिस्तानों के लिए ज़मीन अलग रखने को तैयार हैं, जबकि दूसरी सरकारें इतनी मदद नहीं कर रही हैं।
जापान में दाह संस्कार आम बात है और 99.9% शवों का दाह संस्कार किया जाता है। इससे मुसलमान अपने दफ़नाने के तरीकों को लेकर परेशान हैं।
उत्तर-पूर्वी जापान में मौजूद मियागी प्रांत के गवर्नर ने दिसंबर में कहा था कि 2023 में इंडोनेशिया के साथ लोकल इलाकों के लिए मज़दूर देने के लिए मेमोरेंडम साइन करने के बाद एक नए कब्रिस्तान पर जापान शांति पसंद देश माना जाता है। अनुशासन प्रिय इस देश की बड़ी आबादी बुजुर्ग हो चुकी है। ऐसे में कामगार की जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से लोग यहाँ आकर बस रहे हैं। इनमें मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है। खासकर ईरान, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे देशों से कामगार आकर यहाँ स्थायी रूप से बस रहे हैं। इसका असर जापान में दिखने लगा है।विचार किया जा रहा है।

मुस्लिम वोट की खातिर मुगलों का महिमामंथन विपक्ष को आत्महत्या की ओर धकेल रहा है; राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहना राजस्थान विधानसभा में गूंजा

इंडी गठबंधन में सहयोगी समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण की सारी हदें पार कर दी हैं। पहले तो सपाई सिर्फ मुस्लिम हितैषी बनते थे। सनातन को अपमानित, रामायण को कलंकित करना, महाकुम्भ का अपमान आदि आदि अनेकों हरकतें हैं जो विपक्ष को आत्महत्या करने को मजबूर कर रहा है। अगर यही विपक्ष विदेश में अपने देश के इतिहास बोलता उसे जेल में डाल दिया जाता, लेकिन ये भारत जहाँ वर्तमान जयचन्दों की भीड़ लगी हुई है। औरंगजेब जैसे क्रूर शासकों के हिमायती बनते थे। लेकिन मुस्लिम प्रेम में समाजवादी पार्टी के नेता इतने गिर जाएंगे यह किसी ने सोचा भी ना होगा। इंडी गठबंधन और सपा हिंदुओं का गौरवशाली इतिहास बिगाड़ने में जुटी हुई है। अब राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने मुगलों से लोहा लेने वाले मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा संग्राम सिंह सांगा के खिलाफ बेहद अपमानजनक टिप्पणी कर दी है। उन्होंने राणा सांगा के वंशजों और उन्हें मानने वाले हिंदुओं को गद्दार तक कह डाला है।

सपा सांसद की इस अभद्र, अशोभनीय, असभ्य और अनर्गल टिप्पणी को लेकर राजस्थान समेत देशभर की सियासत में उबाल आ गया है। भाजपा ने पलटवार करते हुए इसके लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से माफी मांगने के लिए कहा है। राजस्थान के सीएम भजनलाल ने कहा कि मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करने वाला है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में गूंजा। कांग्रेस ने आपत्ति की तो भाजपा ने कहा कि इससे साफ तय हो गया कि आप लोग भी रामजीलाल सुमन के साथ हो।

सपा सांसद सुमन ने राणा सांगा पर यह विवादित बयान दिया
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में जो बयान दिया उससे पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सपा सांसद सुमन ने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते राणा सांगा को लेकर बयान में कहा था कि ‘बीजेपी के लोगों का ये तकियाकलाम बन गया है कि इनमें बाबर का DNA है। मैं जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? सुमन ने अनर्गल दावा किया कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। मुसलमान अगर बाबर की औलाद हैं तो तुम लोग उस गद्दार राणा सांगा की औलाद हो, ये हिन्दुस्तान में तय हो जाना चाहिए कि बाबर की आलोचना करते हो, लेकिन राणा सांगा की आलोचना नहीं करते। बता दें कि देश में पहले से औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इसके बाद राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है।

राजस्थान विधानसभा में गूंजा राणा को गद्दार कहने का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में उठा। बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन के जरिए राणा सांगा को गद्दार कहने का मामला उठाते हुए पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। इस पर कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा- सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। हरिमोहन शर्मा के इतना कहते ही बीजेपी विधायकों ने कड़ी आपत्ति की। इस पर बीजेपी विधायकों ने कहा- राणा सांगा के अपमान पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? कई बीजेपी विधायक जोर-जोर से बोलने लगे, इससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। बीजेपी विधायकों ने कहा कि आप राणा सांगा पर टिप्पणी का समर्थन कर रहे हो क्या? श्रीचंद कृपलानी ने कहा- आपके खड़ा होने से यह तय हो गया कि आप रामजीलाल सुमन के साथ हो? कांग्रेस ने खुद अपनी पोल खोल ली। आप मुगलों का साथ दे रहे हो। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा- कांग्रेस विधायक दल रामजीलाल सुमन के साथ खड़ा है, राणा सांगा का अपमान करने वाले के साथ खड़ा है, शर्म आनी चाहिए।

बरेली में जोरदार प्रदर्शन, सपा सांसद सुमन का पुतला फूंका
बरेली के आंवला में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। समाज वीर महाराणा सांगा पर सपा राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन की अपमानजनक टिप्पणी से नाराज है।क्षत्रिय महासभा के नेतृत्व में तहसील गेट पर एकत्र हुए लोगों ने सांसद का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम नहने राम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि राज्यसभा में सपा सांसद ने न सिर्फ क्षत्रिय समाज बल्कि पूरे हिंदू समाज के गौरव महाराणा सांगा के प्रति अमर्यादित टिप्पणी की है। समाज इससे आक्रोशित है। महासभा ने चेतावनी दी कि अगर सांसद के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो क्षत्रिय महासभा और हिंदू संगठन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अपने सांसद के बयान के लिए अखिलेश यादव देश से माफी मांगें
सपा सांसद के बयान पर राजस्थान के सीएम भजनलाल ने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘शूरवीरों की धरती राजस्थान के लाडले सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सदा अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करता है।’ उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिस महान योद्धा ने मुगलों से युद्ध में अपने शरीर पर 80 घाव झेले, उनको गद्दार कहना विपक्षी नेताओं की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। वोटो के तुष्टिकरण के लिए ये लोग इतिहास पुरुषों का अपमान करने से भी नहीं चूकते हैं। इसके लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और अपने सांसद पर अविलम्ब कार्रवाई करनी चाहिए।’

सुमन का बयान देश के शौर्य और बलिदान का अपमान है: दीया कुमारी
सपा सांसद के राणा सांगा पर दिए विवादित बयान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने भी कटु आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘वीर शिरोमणि महाराणा सांगा जी, जिनके शौर्य की गाथा राजस्थान की मिट्टी के कण-कण से सुनाई देती है। जिनकी वीरता की कहानी सुनकर यहां बच्चे बड़े हुए हैं, 80 घाव खाकर भी देश के लिए लड़ने वाले देशभक्त योद्धा के लिए कहा गया ‘गद्दार’ शब्द, ना सिर्फ महाराणा सांगा जी और राजस्थान, बल्कि देश के शौर्य और बलिदान का भी अपमान है। सपा सांसद रामजी लाल सुमन का यह बयान शर्मनाक और निंदनीय है। उन्हें देश की वीरता को कलंकित करने वाले इन कटु शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।’

कुछ तुच्छ लोग ही इस तरह की बयानबाजी करते हैं: शेखावत
राणा सांगा को लेकर दिए गए विवादित बयान पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि कुछ तुच्छ बुद्धि और छोटे हृदय के लोग इस तरह की चर्चा करते हैं। इन चर्चाओं के लिए कोई गुंजाइश भी नहीं है। उन्होंने कहा कि “भारत के इतिहास की समीक्षा करने वाले एक हजार वर्ष बाद या जब भी समीक्षा करेंगे तो कभी बाबर और राणा सांगा की तुलना नहीं कर पाएंगे। महाराणा सांगा ने स्वतंत्रता की जो अलख जगाई थी, उसने न सिर्फ मुगलों से लोहा लिया, बल्कि भारत की संस्कृति को सनातन बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। कुछ तुच्छ बुद्धि और छोटे दिल के लोग ऐसी चर्चाएं करते हैं। इसी तरह बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी बयान को राणा सांगा का बड़ा अपमान बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरा साहस, शौर्य, त्याग और बलिदान की भूमि रही है। राणा सांगा पर ऐसी टिप्पणी राजस्थान के इतिहास का अपमान है।

सुमन का बयान तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा : राज्यवर्धन
राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सुमन के बयान को “तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान पर हमला है। उन्होंने कहा कि “कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी आत्मा देश के दुश्मनों को बेच दी है। ये लोग भारत को नीचा दिखाने और महापुरुषों का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ये लोग दीमक हैं, जो देश की जड़ों को खोखला करने में लगे हैं लेकिन अब भारत जाग चुका है और ऐसे लोगों को हम और बर्दाश्त नहीं करेंगे।” वहीं मेवाड़ राजघराने से आने वाले बीजेपी विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने भी सपा सांसद के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है- संसद में ऐसे लोग भी पहुंचते है। ऐसों से महाराणा सांगा को कोई प्रमाण पत्र की जरूरत ही नहीं है, मगर सदन की गरिमा और हमारे इतिहास में से एक महान व्यक्तित्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।

कांग्रेस की सपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग
बीजेपी ही नहीं इंडिया गठबंधन में सपा के साथ खड़ी कांग्रेस के नेताओं ने भी सपा सांसद सुमन के बयान की कटु आलोचना की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “अस्सी घाव लगे थे तन पे, फिर भी व्यथा नहीं थी मन में। मातृभूमि की रक्षा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पण करने वाले, अदम्य साहस, वीरता, त्याग और स्वाभिमान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा सांगा पर सांसद रामलाल सुमन द्वारा संसद में अमर्यादित टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है व माफी योग्य नहीं है।” खाचरियावास ने इस बयान के लिए सपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग भी की है।


जिस केस को सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया था खारिज बांग्लादेश के पत्रकार ने अब उसी ‘सुकन्या देवी रेप’ केस पर राहुल गाँधी को घेरा: भारतीय मीडिया खामोश क्यों?


बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार और बांग्लादेशी अखबार Blitz के संपादक सलाउद्दीन शोएब चौधरी ने अपने एक्स अकॉउंट से ‘सुकन्या देवी’ मामले में ट्वीट करके एक बार फिर राहुल गाँधी को सवालों में घेरा है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि वो इस केस में जाँच शुरू कर चुके हैं और उन्हें इस क्रम में कई सौ सोशल मीडिया पोस्ट मिले हैं जो बताते हैं कि सुकन्या देवी के साथ जो रेप हुआ था उस मामले में कैसे राहुल गाँधी की संलिप्ता थी।

उन्होंने अपने लंबे पोस्ट में उन्होंने सुकन्या देवी से जुड़े कई बातों का जिक्र किया है। इससे पहले वो राहुल गाँधी से जुड़े कई दावों को अपने एक्स पर साझा कर चुके हैं। फिर चाहे वो राहुल गाँधी की किसी कैरिबियन महिला से हुई शादी पर किया गया किसी यूट्यूबर का दावा हो, या उनके दो बच्चे होने की बात।

उन्होंने कुछ तस्वीरें भी अपने अकॉउंट पर लगातार साझा की हुईं हैं और उनका कहना है कि वो राहुल विंसी उर्फ राहुल गाँधी के बारे में बहुत सी चौंकाने वाली सच्चाई खोजने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बीते दिनों राहुल गाँधी पर एक रिपोर्ट भी पेश की थी जिसका शीर्षक उन्होंने- “राहुल विंसी एक्सपोज्ड -द अटोल्ड स्टोरी ऑफ पॉवर, सीक्रेट्स एंड कॉन्ट्रोवर्सी था।” इसके बाद उनका दावा है कि उन्हें मारने की धमकियाँ दी गईं। उन्होंने पोस्ट में राहुल गाँधी की कैंब्रिज की डिग्री पर भी प्रश्न खड़े किए और सबसे ताजा ट्वीट में उन्होंने सुकन्या देवी केस उठाया।

सुकन्या देवी केस क्या है और कैसे इसके तार राहुल गाँधी से जुड़े हैं 

सुकन्या देवी मामला उस आरोप से संबंधित है, जिसमें राहुल गाँधी और उनके दोस्तों पर यूपी के एक स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता की बेटी सुकन्या देवी के साथ 2006 में अमेठी में बलात्कार करने का आरोप लगाया लगाया गया था। शुरू में इस आरोप को कई ब्लॉगर्स द्वारा उठाया गया था। उसमें कहा गया था कि कथित घटना को लेकर शिकायत करने के लिए सोनिया गाँधी से मिलने के बाद लड़की और उसके माता-पिता गायब हो गए थे।
आरोपों में कहा गया कि सुकन्या, बलराम सिंह नामक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की बेटी थी, और वह आरोपित राहुल गाँधी की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। आरोप लगाया गया कि जब राहुल गाँधी अमेठी गेस्ट हाउस में अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहे थे, तो वह उनसे मिलने के लिए वहाँ गई थीं, जहाँ आरोपित राहुल गाँधी और उनके 7 दोस्तों ने उनका कथित तौर पर बलात्कार किया था, जिनमें से 2 ब्रिटेन के थे और 2 अन्य इटली के थे।
जाहिर है कि वह किसी तरह इस घटना के बाद भाग निकली और कई लोगों से संपर्क किया लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। आरोपों में यह भी कहा गया कि सुकन्या देवी अपने पिता बलराम सिंह और माँ सुमित्रा देवी के साथ सोनिया गाँधी और मानवाधिकार आयोग से मिलीं, मगर उसके बाद उसका पूरा परिवार लापता हो गया। आरोप यह भी था कि ध्रुपद नाम का वीडियोग्राफर और एक न्यूज चैनल का एक कैमरामैन, जिन्होंने सुकन्या का बयान रिकॉर्ड किया था, उसके बाद वो भी लापता हो गए।
हालाँकि, उस समय इन आरोपों को मेन स्ट्रीम मीडिया ने पूरी तरह से नजरअंदाज किया और केवल कुछ सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा इसे उठाया गया, लेकिन जब 2011 में सपा विधायक किशोर समरते ने इसे उठाया तो मीडिया को इसकी रिपोर्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा। समरीते ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक मामला भी दायर किया था, जिसमें कथित बलात्कार और सुकन्या के माता-पिता के गायब होने को लेकर जाँच की माँग की गई थी।
विधायक ने कहा था कि जब वह गाँव गए थे, तो उन्होंने पाया था कि उसके परिवार ने घर को छोड़ दिया था और पड़ोसी उस परिवार के दिल्ली जाने के बाद रहस्यमय तरीके से गायब होने की बात से अनजान थे।
लेकिन अदालत के आदेश पर पुलिस द्वारा की गई जाँच में आरोपों में कोई सच्चाई नहीं पाई गई। जाँच में पाया गया कि किशोर समरिते द्वारा बताया गया परिवार का पता मौजूद नहीं है। इसके अलावा, गजेंद्र पाल नाम के एक अन्य व्यक्ति ने बलराम और सुकन्या के दोस्त के रूप में अदालत में एक और याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि समरिते ने एक झूठी याचिका दायर की थी जो राजनीति से प्रेरित थी।
जाँच में यह भी पाया गया कि बलराम सिंह ने अपना घर बेच दिया था और दूसरी जगह चले गए थे, और उनकी पत्नी और बेटी के नामों का ब्लॉगों में गलत उल्लेख किया गया था। उनकी पत्नी सुशीला देवी थीं और उनकी सबसे बड़ी बेटी कीर्ति सिंह थीं। उन्होंने जानकारी दी थी कि मीडिया में दावा करने वाले कुछ लोग उनके घर आए थे और उन्हें सुकन्या देवी की तस्वीर दिखाते हुए पूछा कि क्या वह उनकी बेटी है। उन्होंने उन्हें बताया था कि यह एक अलग महिला थी न कि उनकी बेटी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कीर्ति देवी एक अलग महिला थी, और उसे इस केस को कमजोर करने के लिए इसमें शामिल किया गया था। मगर हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं, किशोर सम्राट और गजेंद्र पाल को जुर्माना भरने के लिए कहा था। किशोर पर ‘झूठ’के आधार पर एक याचिका दायर करने के लिए 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें से 25 लाख कीर्ति सिंह को, 20 लाख राहुल गाँधी को और 5 लाख यूपी के डीजीपी को इनाम के रूप में दिए जाने थे।
दूसरी ओर, गजेंद्र पर 5 लाख का जुर्माना लगाया गया था, क्योंकि उनके पास मामले में उनका उस परिवार से कोई संबंध नहीं था। इस तथ्य के बावजूद कि परिवार ने कोई शिकायत दर्ज नहीं की थी, अदालत ने गजेन्द्र पाल को उस परिवार को अदालत में घसीटने के लिए भी फटकारा।
इसके बाद किशोर समरीते ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी 2012 में आरोपों को खारिज कर दिया था, और समरिते पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था, जबकि उच्च न्यायालय के जुर्माने को 50 लाख रुपए से घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया था।
अदालत ने उल्लेख किया था कि “कोई भी साक्ष्य नहीं है” यह दिखाने के लिए कि कथित घटना 2006 में हुई थी। इसके अलावा, समरिते ने सुनवाई के दौरान यू-टर्न लेते हुए कहा था कि उन्हें इस मामले की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं है और उन्होंने सपा नेतृत्व के निर्देश पर यह याचिका दायर की थी।

जेहादी पत्रकार मोहम्मद जुबैर ने 3 बार ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों पर करवाया अपना ‘मुँह काला’: हर बार करता है डिफेंड

                                                                                 ALT News वाले मोहम्मद जुबैर 
कर्नाटक में 27 फरवरी 2024 को राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नासिर हुसैन की जीत हुई थी। इसी जश्न का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसा नारा लगाते सुनाई दिए। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। इसी जाँच के दौरान अचानक मोहम्मद जुबैर की एंट्री होती है जो फैक्ट चेक की आड़ में अपना ख़ास मजहबी एजेंडा बड़े स्तर पर चला रहा है। आनन-फानन में जुबैर ने संदिग्धों को क्लीन चिट दे डाली और अपनी स्वघोषित रिपोर्ट में यह बता दिया कि नारे में ‘नासिर साहब जिंदाबाद’ बोला गया था।

जुबैर की यह साजिश तब फ़ौरन ही कामयाब होती दिखी जब कर्नाटक कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी उसकी हाँ में हाँ मिला दी। हालाँकि बाद में FSL रिपोर्ट आई जिसमें संदिग्धों द्वारा लगाए गए नारों में पाकिस्तान जिंदाबाद बोले जानी की पुष्टि हो गई। पुलिस ने इल्ताज, मुनव्वर और मोहम्मद नाशीपुडी को गिरफ्तार भी कर लिया। इसके बावजूद भी मोहम्मद जुबैर अपनी करतूत पर अड़ा रहा और उसने अपने ट्वीट को डिलीट नहीं किया।

सनातन को खत्म करने की कसम खाने वाले एक मुख्यमंत्री से सम्मानित होने के बाद अपनी हरकतों के चरम पर पहुँच चुके मोहम्मद जुबैर द्वारा ऐसी हरकत पहली बार नहीं की गई। ऐसे मामले में जुबैर के कलंकित इतिहास की फेहरिस्त काफी लम्बी है। मोहम्मद जुबैर के इसी एजेंडे वाले इतिहास में सबसे अहम बात ये है कि जहाँ सच्ची घटना होती है वहाँ वो भ्रम फैलाने लगता है लेकिन जहाँ भ्रामक घटनाएँ होती हैं उसे वह सच साबित करने में जुट जाता है।

मजहबी क्लीन चिट पर भारी FSL रिपोर्ट

कर्नाटक में 27 फरवरी 2024 को लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों के बाद जुबैर उसी दिन रात 8:44 पर अपनी थ्योरी लेकर आ जाता है। फैक्ट चेकिंग के लिए उसने Inshot ऐप का प्रयोग किया। ऐप से वीडियो को स्लो मोशन कर के उसने इसे उच्च तकनीकि वाला साबित करने की भरसक कोशिश की। अपनी मजहबी अदालत में उसने कन्नड़ चैनलों के तमाम स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए उन्हें और भाजपा समर्थको को दोषी भी करार दे दिया। भ्रम की दीवार बेहद मजबूत हो जाए इसके लिए उसने आदतन/साजिशन नीचे कई थ्रेड भी डाल दिए।
हालाँकि मोहम्मद जुबैर की मुस्लिम ब्रदरहुड वाली मजहबी क्लीन चिट पर कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई भारी पड़ी। 4 मार्च 2024 को FSL रिपोर्ट में आरोपितों द्वारा लगाए गए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों की पुष्टि हुई। पुलिस ने मोहम्मद नशीपुडी, मुनव्वर और इल्ताज को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले की रिपोर्ट कर्नाटक के गृहमंत्री को भी प्रेषित की जा रही है। इतने के बावजूद मजहबी जुबैर को अपनी करतूत पर अब इतनी भी शर्म नहीं कि वह अपने उस ट्वीट को डिलीट कर ले जिसमें AIMIM पार्टी के कई कट्टरपंथी उसकी शह पर बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा तो उनसे भी 2 कदम आगे निकल गए। उन्होंने अपनी एजेंडे वाली वेबसाइट ALT News पर तो बाकायदा आर्टिकल पब्लिश कर डाला। आर्टिकल में उन्होंने नासिर साहब जिंदाबाद बोले जाने का एलान FSL रिपोर्ट आने से पहले ही कर डाला। इस से भी बड़ी बात ये है कि यह आर्टिकल अभी तक ज्यों की त्यों मौजूद है। इस आर्टिकल को ओशिनी भट्टाचार्य द्वारा लिखा गया है।

बेलगावी मामले पर भी डाला था पर्दा

पाकिस्तान परस्तों की पैरवी मोहम्मद जुबैर ने पहली बार कर्नाटक के बेंगलुरु में नहीं की है। इससे पहले उसने यही हरकत कर्नाटक के ही बेलगावी में की थी। तब राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी की जीत हुई थी। इसी क्रम में बेलगावी विधानसभा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी आसिफ जीत कर विधानसभा पहुँचे थे। उस समय उनके विजय जुलूस में नारेबाजी हुई थी जिसमें ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहे जाने का आरोप लगा था।
27 सेकेंड लम्बे इस वीडियो में कुछ इस्लामी टोपी पहने लोग पुलिस की मौजूदगी में आपत्तिजनक नारेबाजी करते दिखे थे। इसी वीडियो के बैकग्राउंड में कुछ लोगों को यह कहते सुना गया था कि ‘वीडियो बनाओ, कुछ लोग पाकिस्तान जिंदाबाद बोल रहे हैं’।
इस मामले में भी फ़ौरन ही मोहम्मद जुबैर ने एंट्री की थी। पहले उसने @total_woke_ के ट्वीट को कोट कर के मामले को भटकाने के लिए बताया कि पुलिस ने कहा कि दूसरे प्रत्याशी की जीत पर कुछ मत बोलो। इसके बाद 13 मई 2024 को एक अन्य ट्वीट में उसने बेलगावी इंस्पेक्टर दयानन्द से बातचीत का दावा करते हुए कहा कि पुलिस के मुताबिक अभी तक पाकिस्तान जिंदाबाद बोले जाने को ले कर कुछ भी साफ़ नहीं कहा जा सकता। इसी ट्वीट की अंतिम लाइन में जुबैर ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आगे की जाँच के लिए वीडियो के FSL में भेजे जाने की बात कही है।
बाद में प्रदेश के ADG लॉ एंड ऑर्डर ने 14 मई 2023 को अपने ट्वीट में बताया था कि FIR दर्ज करके आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। ADG L/O के बयान के बावजूद मोहम्मद जुबैर के रुख और ट्वीट में ज़रा सी भी तब्दीली नहीं आई। जुबैर का वह भ्रामक ट्वीट अभी भी ज्यों का त्यों कायम रह कर भ्रम फैला रहा है।

भीलवाड़ा में भी किया जाँच को प्रभावित

मोहम्मद जुबैर खुद को और अपनी वेबसाइट ALT News को एक अदालत के तौर पर बनाने का प्रयास कर रहा है जहाँ से कोई भी पाकिस्तान समर्थक प्रथम दृष्टया क्लीन चिट ले सकता है। वह न सिर्फ संदिग्धों को क्लीन चिट देता है बल्कि उनकी हरकतों को दिखाने वाले मीडिया संस्थानों पर भी ऐसा दबाव बनाने की कोशिश करता है जिससे वो भविष्य में पाकिस्तान परस्तों की हरकतों को नजरअंदाज कर दें।
इसी क्रम में एक अन्य घटना राजस्थान के भीलवाड़ा की है। मई 2022 में जुबैर ने राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की घटना का जिक्र करते हुए एक बार फिर से पाकिस्तान परस्तों को कवर किया था। यह घटना फरवरी 2021 की थी जब प्रतिबंधित आतंकी समूह PFI की राजनैतिक शाखा SDPI के नेता अब्दुल सलाम अंसारी ने एक रैली निकली थी। इस रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे। इस वीडियो को ABP और दैनिक भास्कर सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों ने खबर के तौर पर चलाया।
घटना के लगभग सवा साल बाद 19 मई 2022 को आदतन जुबैर इस मामले में भी पकिस्तन परस्तों के साथ सीना तान कर खड़ा हो गया था। उसने दैनिक भास्कर और ABP को ही गलत ठहराते हुए घोषित कर दिया कि नारे के तौर पर ‘SDPI जिंदाबाद’ बोला गया था।
हालाँकि, 22 नवंबर 2022 को इस वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आ गई। फॉरेंसिक जाँच में पाकिस्तान जिंदाबाद नारे की पुष्टि हुई थी। तब भीलवाड़ा पुलिस ने PFI के जिलाध्यक्ष अब्दुल सलाम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बावजूद मोहम्मद जुबैर, उसकी वेबसाइट ALT News और सहयोगी अर्चित अपने झूठ पर अड़े रहे। वो खबर, ट्वीट इत्यादि अभी भी ज्यों की त्यों अपनी जगह मौजूद है।
इसके अलावा कई अन्य मौकों पर जुबैर और उसके गिरोह ने पुलिस या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की जाँच से पहले ही अपनी कथित अदालत से फैसला सुना दिया था। दबाव बनाने की यह साजिश न सिर्फ प्रशसनिक अधिकारियों बल्कि मीडियाकर्मियों के खिलाफ भी लक्षित होती है। हालाँकि इस बात की संभावना न के बराबर है कि बार-बार अपनी पोल खुलने के बावजूद जुबैर और उसके गिरोह की हरकतों में जरा सा भी सुधार होगा। फ़िलहाल पाकिस्तान परस्तों में जुबैर की पोल बार-बार खुलने और भ्रामक दबाव काम न करने की वजह से थोड़ी मायूसी जरूर है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड को झटका : DDA ने ‘अवैध’ मस्जिद ढहाई, वहाँ शब-ए-बारात पर नमाज पढ़ना चाहते थे मुस्लिम: हाई कोर्ट ने नहीं दी इजाजत

दिल्ली के महरौली इलाके में 30 जनवरी 2024 को अखूंदजी मस्जिद और बहरुल उलूम मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सरंक्षित रिज क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर यह कार्रवाई की थी। ढहाई गई इस मस्जिद में मुस्लिम शब-ए-बारात पर नमाज पढ़ना चाहते थे। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए इजाजत देने से इनकार कर दिया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शब-ए-बारात के दिन मस्जिद की जमीन पर बिना रोक-टोक आवाजाही की अनुमति माँगी थी। आज (23 फरवरी 2024) दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने यह कहते हुए याचिका खारिज की दी कि अब यह साइट डीडीए के नियंत्रण में है। इससे जुड़ी मुख्य याचिका पर 07 मार्च को सुनवाई होनी है। उन्होंने मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए नए सिरे ये निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए यथास्थिति बहाल रखने को कहा।

वकील शम्स ख्वाजा ने इस दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति की ओर से दलीलें दी। याचिका में कहा गया था कि शब-ए-बारात (प्रायश्चित की रात) पर मुस्लिम खुद और अपने पूर्वजों के पापों के लिए अल्लाह से माफी माँगते हैं। अखूंदजी मस्जिद 700 साल पुरानी थी। सालों से वहाँ नमाज अदा की जा रही थी। स्थानीय लोगों का एक कब्रिस्तान भी था। लिहाजा उन्हें शब-ए-बारात पर इस जगह पर बेरोकटोक आवाजाही की इजाजत दी जाए। हालाँकि दिल्ली वक्फ बोर्ड के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मस्जिद न तो 700 साल पुरानी है और न ही वक्फ की प्रॉपर्टी है।

गौरतलब है कि डीडीए की कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद अदालत ने उसे यथास्थिति बहाल रखने को कहा था। अदालत ने कहा था कि यह निर्देश केवल उसी हिस्से को लेकर है जहाँ अखूंदजी मस्जिद थी। उसका निर्देश संरक्षित क्षेत्रों में अन्य अवैध निर्माण पर कार्रवाई से डीडीए को नहीं रोकती। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण करीब सात सौ साल पहले रजिया सुल्तान के शासनकाल में हुआ था। वहीं डीडीए का कहना है कि संरक्षित क्षेत्र में कब्जा कर जो अवैध निर्माण किए गए थे उनमें यह मस्जिद और मदरसा भी शामिल था।

उत्तर प्रदेश : BSP के जुलूस में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे

साभार: सोशल मीडिया/ स्क्रीनशॉट
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने की घटना सामने आयी है। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पुलिस ने संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस ने बसपा प्रत्याशी समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। घटना 3 नवंबर 2022 की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आजमगढ़ जिले के जहानागंज थाना अंतर्गत एक कस्बे में आगामी निकाय चुनावों को लेकर बहुजन समाज पार्टी के नेताओं द्वारा बैठक आयोजित की गई थी। इसमें बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए थे। इस बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पप्पू खान भी पहुँचे थे। बैठक के बाद उन्होंने अपने समर्थकों सहित जुलूस निकाला था।

इस जुलूस से जुड़े वीडियो में बसपा प्रत्याशी पप्पू खान जुलूस की अगुवाई करते नजर आ रहे हैं, जबकि हाथों में बीएसपी का झंडा लेकर चल रहे उनके समर्थक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, मुबारकपुर के बीएसपी के पूर्व विधायक गुड्डू जमाली भी इस जुलूस में शामिल थे।

इस मामले में आजमगढ़ के एसपी अनुराग आर्य ने कहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो संज्ञान में आया है। इसमें आपत्तिजनक नारे लगाए जाने की शिकायत कुछ लोगों द्वारा की गई है।

उन्होंने कहा कि वीडियो की जाँच कर पप्पू खान और नारा लगाने वाले व्यक्ति खुर्शीद अहमद पुत्र शिब्ली पहलवान को हिरासत में लिया गया है। साथ इन दोनों के मोबाइल जब्त करते हुए मूल वीडियो रिकवर करने के बाद फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी।

एसपी ने यह भी कहा है कि इस मामले में जो भी आरोपित पाए जाएँगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस जुलूस की परमिशन थी या नहीं व इसमें शामिल हुए लोगों की जानकारी जुटाकर एफआईआर में धाराएँ बढ़ाई जाएँगी।