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जिस सुमैया शेख से ‘रिश्ता’ मोहम्मद जुबैर को नहीं कबूल, AltNews से उसके कितने गहरे संबंध: पोल खुलते ही गाली-गलौज पर उतर गया ‘फैक्टचेकर’

                                                        मोहम्मद जुबैर और सुमैया खान
दुनिया भर में ‘फैक्ट चेक’ का ठेका लेकर दूसरों को ज्ञान बाँटने वाला मोहम्मद जुबैर अब खुद अपने ही झूठ के जाल में फँस गया है। जिसने सालों तक हिंदू संगठनों, पत्रकारों और नेताओं को ‘फेक न्यूज फैलाने वाला’ बताया अब वही जुबैर अपनी ही पूर्व कर्मचारी को लेकर झूठ बोलता पकड़ा गया है। सोशल मीडिया पर लोग उसे आईना दिखा रहे हैं। स्क्रीनशॉट, पुराने ट्वीट और सबूतों के साथ उसका फैक्ट चेक कर रहे हैं।

क्या है सुमैया शेख से जुड़ा विवाद?

 इस विवाद की जड़ छिपी है लद्दाख हिंसा में, लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हिंसा हुई। इसका सूत्रधार बताया गया ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को। इसके बाद पुलिस ने वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया और विदेशी फंडिंग मामले में वांगचुक की NGO का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

विदेशी फंडिंग को लेकर बहस के बीच 27 सितंबर को जुबैर ने एक ट्वीट किया। इसमें पत्रकार आदित्य राज कौल के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट था जिसमें जुुबैर की विदेशी फंडिंग की जाँच करने की बात कही गई थी। इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए जुबैर ने लिखा, “विदेशी फंडिंग से याद आया, उन्हें अभी यह साबित करना है।”

जुबैर के इस ट्वीट पर ‘ऑनली फैक्ट इंडिया’ के फाउंडर और खोजी पत्रकार विजय पटेल ने जवाब दिया। विजय ने लिखा, “कट्टरपंथी जुबैर, मैं तुम्हारी विदेशी फंडिंग साबित कर दूँ। तुम्हारे दो पत्रकारों को अमेरिका स्थित ठाकुर परिवार फाउंडेशन से 50 लाख रुपए मिले थे। अब विक्टिम कार्ड खेलने के लिए तैयार हो जाओ!” इसके साथ विजय ने कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए थे जिसमें सुमैया शेख और सरफरोज सतनी (Sharfaroz Satani) का नाम था।

इसके बाद जुबैर ने अपना कुचक्र रचना शुरू किया। पोल खुलने से खफा जुबैर गाली-गलौज पर उतर आया। उसने विजय के पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा, “अबे सस्ते देसी भां**, थोड़ा और रिसर्च कर ले। ये लोग ऑल्ट न्यूज के कर्मचारी नहीं बल्कि कॉन्ट्रीब्यूटर थे।”

                                                                        विजय को जुबैर का जवाब

विजय ने इसके बाद ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “ये तुम्हारी वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है। जिसमें सुमैया को एडिटर के तौर पर दिखाया गया है, कॉन्ट्रीब्यूटर नहीं।” इस पर फिर जुबैर ने फिर लिखा कि वह ‘ऑल्ट न्यूज’ की कर्मचारी नहीं थी बल्कि कॉन्ट्रीब्यूटर थी।

‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर सुमैया को लेकर क्या लिखा है?

‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर मौजूद सुमैया शेख की वेबसाइट में उसे ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ की संस्थापक संपादक (Founding-Editor) बताया गया है। ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर लिखा है, “डॉ. शेख 2017 से 2021 तक ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ की संस्थापक संपादक रहीं। उनकी मुख्य भूमिका एक न्यूरोसाइंटिस्ट के रूप में हिंसक उग्रवाद और मनोरोग विज्ञान पर शोध करना है।”

                                         ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर मौजूद सुमैया की प्रोफाइल

जुबैर के इस दावे को लोगों ने झूठा बताकर उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। विवाद के बाद हमने सुमैया खान की X प्रोफाइल तलाशी तो उसमें कुछ पुराने पोस्ट मिले जिसमें उसने खुद को ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ का संपादक बताया था। यानी लोगों के दावे हवा-हवाई नहीं थे। मार्च 2019 के इस ट्वीट में सुमैया ने लिखा, “मैं भारत स्थित एक फैक्ट चेकिंग साइंस पोर्टल (ऑल्ट न्यूज साइंस) की संपादक हूँ।”

जाहिर है कि किसी संस्थान का ‘फाउंडिग एडिटर’ होना और उस संस्था का कर्मचारी ना होना और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा अगर था तो यह केवल मुखौटा था, इससे ज्यादा कुछ नहीं। अगर जुबैर का दावा सही भी है तो इसकी गंभीरता से जाँच किए जाने की जरूरत है। अब फिर सुमैया को मिली फंडिंग पर लौटते हैं।

सुमैया को मिली फंडिंग

असल में विवाद सुमैया को मिली फंडिंग को लेकर था। विजय ने जुबैर के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “तो क्या कॉन्ट्रीब्यूटर (योगदानकर्ताओं) को वेबसाइट पर सिर्फ 10 से 15 प्रोपेगेंडा लेख लिखने के लिए ₹50 लाख का विदेशी चंदा मिला? अगर वे वेबसाइट के लिए लेख लिखने के लिए विदेशी चंदा लेती भी हैं, तो यह भी गैरकानूनी है। यह कोई छोटी रकम नहीं है।”

जुबैर ने इस पर लिखा, “वो भारतीय नागरिक नहीं है। उसने ‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए योगदान दिया है, कर्मचारी नहीं। उसे अपने शोध के लिए फाउंडेशन से अनुदान मिला है। ऑल्ट न्यूज़ को लिखने के लिए नहीं।” जुबैर ने खुद को कूल दिखाने के लिए अपने ट्वीट में जोकर की इमोजी भी चिपका दी।

जब ‘ठाकुर फाउंडेशन’ की वेबसाइट की जाँच करने पर सामने आया कि असल में जुबैर का दावा पूरी तरह झूठ था। वेबसाइट के इम्पैक्ट सेक्शन में संस्था द्वारा जनवरी 2020 में दिए गए धन का जिक्र था। ठाकुर फाउंडेशन ने लिखा है, “हमने न्यूरोसाइंटिस्ट और लेखिका डॉ. सुमैया शेख को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा से संबंधित उनके तथ्य-जांच दावों का समर्थन करने के लिए पुरस्कार दिया।”

                                                             ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

इस वेबसाइट पर जनवरी 2020 के सेक्शन लिंक में सुमैया शेख के कम-से-कम 14 लेखों का जिक्र था और ये सभी ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट के लिए लिखे गए थे। यानी जो दावा जुबैर ने करने की कोशिश की थी वो धराशायी हो गया।

                         ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट पर सुमैया के ‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए लिखे गए लेख

फाउंडेशन की वेबसाइट पर सरफरोज सतनी को भी मार्च 2020 में फंड दिए जाने का जिक्र है। इसमें लिखा है, “हमने वैज्ञानिक और चिकित्सीय गलत सूचनाओं का मुकाबला करने में डॉ. सुमैया शेख के काम में सहायता के लिए शोधकर्ता डॉ. सरफरोज सतनी को एक अवॉर्ड दिया।” इसमें भी 11 लिंक्स का जिक्र किया गया है जिसमें से 10 लिंक्स ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट की थीं और एक लिंक गूगल शीट का था जो लॉक थी।

                   ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट पर सरफरोज के ‘आल्ट न्यूज’ के लिए लिखे गए आर्टिकल

भारत विरोधी कार्यों में संलिप्त ठाकुर फाउंडेशन

जुबैर के लिए लेख लिखने वाले पत्रकारों को जिस ठाकुर फाउंडेशन से पैसा मिला है वो खुद भारत को निशाने बनाने को लेकर सवालों में है। इसका कर्ताधर्ता दिनेश ठाकुर है जो खुद को पब्लिक हेल्थ एक्टिविस्ट बताता है लेकिन उस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। The DisinfoLab ने दिनेश ठाकुर के काले कारनामों को लेकर एक लंबी चौड़ी रिपोर्ट बनाई है।

‘द प्रोपेगेंड पिल’ नाम से 2024 में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है, “ठाकुर एक ऐसे उद्यम का मुखौटा जो कई स्तरों पर निशाना साध रहा है। पहले स्तर पर, यह रैनबैक्सी जैसी व्यक्तिगत कंपनियों को निशाना बनाता है, जिनका अमेरिकी कंपनियों के साथ विवाद चल रहा है। इसी को आधार बनाकर, अगला स्तर भारतीय जेनेरिक दवाओं को निशाना बनाता है, जो आम तौर पर अमेरिकी बड़ी दवा कंपनियों के लिए एक खतरा हैं।”

इसमें ठाकुर को लेकर लिखा गया, “इस पूरे अभियान का अंतिम लक्ष्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाना है। ठाकुर ने ऐसे लोगों और संगठनों को फंड दिया है जो खुले तौर पर भारत-विरोधी एजेंडे पर काम करते हैं, जैसे सुचित्रा विजयन् जिनके प्रोजेक्ट Polis का सोशल मीडिया एक पाकिस्तानी व्यक्ति चलाता है।”

                                       ठाकुर फैमिली फाउंडेशन की फंडिंग (फोटो -The DisinfoLab)

ऑल्ट-न्यूज और ठाकुर फाउंडेशन का नेक्सस

DisinfoLab की रिपोर्ट में ऑल्ट न्यूज और ठाकुर फाउंडेशन के नेक्सस का भी खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में लिखा गया है, “सरफरोज ने 2020 में कोविड-19 की पहली लहर के दौरान करीब 8 लेख लिखे थे। उसके लेखों का विषय मुख्य रूप से कोविड-19 से जुड़े घरेलू नुस्खों और अफवाहों की पड़ताल था। इस काम के लिए सरफरोज को साल 2020-21 के बीच कुल $5907 का भुगतान किया गया।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “सुमैया शेख को भी ठाकुर फैमिली फाउंडेशन ने काम पर रखा था। उन्होंने कुल 10 लेख लिखे, जिनमें से कुछ डॉ. सतानी के साथ मिलकर लिखे गए थे। इन लेखों के बदले सुमैया शेख को TFF से 2021 में $23,740 और 2022 में $35,260 का भुगतान किया गया।” रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि 2020 के बाद से ठाकुर फैमिली ने व्यक्तियों/पत्रकारों/कार्यकर्ताओं को भारत में धन भेजने के लिए वित्तीय सेवा संस्थानों को काम पर रख लिया था।

                                       ठाकुर फाउंडेशन द्वारा भारतीय पत्रकारों को दिया गया धन

कोविड-19 के दौर में ‘फैक्ट चेक’ की जाँच की माँग

पैसे के बदले आर्टिकल लिखने के आरोपों के बाद अब लोग इसकी जाँच किए जाने की माँग कर रहे हैं। ‘द हॉक आई’ नामक एक यूजर ने लिखा, “क्या यह FCRA का उल्लंघन हो सकता है और हितों का टकराव भी हो सकता है? योगदानकर्ता या कर्मचारी, ऑल्ट न्यूज के दो पूर्व पत्रकारों को कोविड के दौरान कुछ तथ्य-जाँच लेखों के लिए बड़ी दवा कंपनी के पैरवीकार ठाकुर फाउंडेशन से ₹50 लाख का अनुदान मिला। इसकी जाँच होनी चाहिए।”

कथित फैक्ट चेकर जुबैर पर पहले भी फंडिंग को लेकर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं। अब इन सवालों के बाद नया विवाद शुरू हो गया है। जुबैर बचने की कितनी भी कोशिश करे लेकिन सत्य कभी तो बाहर आ ही जाता है। अगर विदेशी फंडिंग को लेकर लोगों को संदेह है तो जरूरी है कि इनकी जाँच की जाए और स्थितियाँ स्पष्ट कर दी जाएँ।

उत्तर प्रदेश : FIR करवाने की जगह ट्ववीट क्यों किया? मोहम्मद जुबैर से हाई कोर्ट का सीधा सवाल, कहा- पोस्ट से लग रहा अशांति पैदा करने की थी कोशिश


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक एवं कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर से कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि यति नरसिंहानंद के भाषण को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के बजाय सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर क्यों पोस्ट किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जुबैर के ट्वीट देखकर लगता है कि वे अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।

दरअसल, जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है। खंडपीठ ने पूछा कि मोहम्मद जुबैर पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने के अपराध के लिए मामला क्यों दर्ज किया गया है। कोर्ट ने 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।

खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “यदि यह व्यक्ति (यति नरसिंहानंद) अजीब व्यवहार कर रहा है तो क्या आप पुलिस के पास जाने के बजाय और भी अजीब व्यवहार करेंगे? क्या आपने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है? मैं आपके आचरण को देखूँगा। यदि आपको उसका (यति) भाषण, चेहरा पसंद नहीं है तो आपको उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।”

दरअसल, जुबैर ने गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताते हुए ट्वीट किया था। इसको लेकर जुबैर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नरसिंहानंद के समर्थकों द्वारा दायर मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा की माँग करते हुए मोहम्मद जुबैर ने हाई कोर्ट में याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई हुई।

 दरअसल, यति नरसिंहानंद ने 29 सितंबर को एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की थी। जुबैर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें उसने इस भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताया था। इसके बाद यति नरसिंहानंद फाउंडेशन की महासचिव उदिता त्यागी ने जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

त्यागी ने डासना देवी मंडी में हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए जुबैर, अरशद मदनी और असदुद्दीन ओवैसी को दोषी ठहराते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। गाजियाबाद पुलिस ने इसके बाद जुबैर पर बीएनएस की धारा 196 (धार्मिक आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना), 228 (झूठे सबूत गढ़ना), 299 (धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), 356 (3) (मानहानि) और 351 (2) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए। इसके बाद बीएनएस की धारा 152 के तहत अपराध भी जोड़ा गया।

इसके बाद जुबैर ने एफआईआर के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गिरफ्तारी से बचने की माँग की। अपनी याचिका में जुबैर ने कहा है कि उसने यति नरसिंहानंद की बार-बार की सांप्रदायिक टिप्पणियों और महिलाओं और वरिष्ठ राजनेताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों को उजागर करने के लिए एक्स पर पोस्ट किया था।

उत्तर प्रदेश : अशांति फ़ैलाने वाले मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR: आरोप- मुस्लिमों को भड़का कर डासना मंदिर पर करवाया हमला, यति नरसिंहानंद की हत्या की रची साजिश; आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए

यति नरसिंहानंद की रिहाई और मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की माँग को लेकर गाजियाबाद में प्रदर्शन (फोटो साभार: ऑपइंडिया)
गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर पर 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार के दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि यह भीड़ मंदिर में घुसने की कोशिश कर रही थी और उन्मादी नारे लगा रही थी। पुलिस ने किसी तरह मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। इस घटना से हिंदू समुदाय में गुस्सा फैल गया, और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है। हालाँकि, लोगों की माँग थी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है।

भाजपा नेत्री डॉ. उदिता त्यागी, जो खुद को इस घटना की चश्मदीद और पीड़ित बता रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 7 सितंबर 2024 को दी गई इस शिकायत में उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से कहा कि डासना मंदिर पर हमला एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को इस हमले के लिए मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने भड़काया था। इस हमले में बाहर से आए मुस्लिमों की भी संलिप्तता बताई गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

डॉ. उदिता का दावा है कि इस हिंसा के पीछे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या की साजिश थी। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद को 5 अक्टूबर को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। डॉ. उदिता ने माँग की है कि हमलावरों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी इस शिकायत पर मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू समाज के दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं। ये वो लोग बताए जा रहे हैं जो हमले के समय डासना मंदिर के अंदर मौजूद थे।

इस शिकायत के बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के कवि नगर थाने में केस दर्ज हुआ है। यह केस भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 228, 299, 356(3) और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है।

डॉ. उदिता ने अपने वीडियो बयान में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यति नरसिंहानंद सरस्वती को रिहा करने और मोहम्मद जुबैर पर केस दर्ज करने सहित हमलावरों पर NSA न लगने की स्थिति में 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित की जाएगी। उदिता के मुताबिक, यह महापंचायत ऐतिहासिक होगी।

डॉ. उदिता ने पुलिस कमिश्नर को एक और शिकायत दी, जिसमें मोहम्मद जुबैर की कई कथित गतिविधियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जुबैर ने 10 हिंदूवादी लोगों की एक सूची बनाई है, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस सूची में उनका नाम भी शामिल है, और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने नूपुर शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि जुबैर उस मामले में 6 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार था।

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डॉ. उदिता का मानना है कि अगर मोहम्मद जुबैर को जेल नहीं भेजा गया, तो वह कई हिंदुओं के जीवन के लिए खतरा बना रहेगा। डॉ. उदिता के अलावा, हिंदू रक्षा दल ने भी यति नरसिंहानंद की रिहाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मंदिर पर हमला करने वाली भीड़ पर सख्त कार्रवाई की माँग की। इस दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे। ऑपइंडिया के पास इस ज्ञापन की प्रति मौजूद है।

उत्तराखंड : ‘रुड़की का यूट्यूबर जला रहा है कुरान, वीडियो है वायरल’: जुबैर ने फैलाया झूठ, पोल खोलकर बैठ गई पुलिस; इस नफरती पर पुष्कर धामी और अमित शाह द्वारा सख्त कार्यवाही कब?

पुलिस ने जुबैर के मंसूबो पर पानी फेर दिया (चित्र साभार: Swarajya & iamharunkhan/X)
ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने एक बार फिर एक भड़काऊ खबर साझा की है। मोहम्मद जुबैर ने कुरान जलाने को लेकर एक खबर साझा की जिसका हरिद्वार पुलिस ने फैक्ट चेक कर दिया। जुबैर ने अपने पोस्ट में कुरान जलाने की बात को एकदम सही मान लिया था लेकिन पुलिस ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
जिस Ex-Muslim समीर को बदनाम करने इस फिरकापरस्त ने कोशिश की है, इसी समीर और अन्य Ex-Muslims द्वारा youTube पर Jaipur Dialogue और News Nation चैनल पर 'इस्लाम क्या कहता है' आदि पर नूपुर शर्मा विवाद के दिनों इन जैसे कट्टरपंथियों को बेनकाब करते देखे गए हैं। सारा डरपोक मीडिया नूपुर को ही गलत बता रहे थे, लेकिन इन Ex-Muslim के प्रहारों के आगे air condition कमरों में बैठने के बावजूद बड़े-बड़े मौलानाओं को पसीने पोंछते देखा गया है। 

उत्तराखंड और केंद्र सरकार को मालूम होना चाहिए कि इसी नफरती द्वारा नूपुर शर्मा की गलत वीडियो फैलाने से देश में कितना उपद्रव मच चुका है। कट्टरपंथियों के हाथों कन्हैया लाल अपनी जान गँवा चुका है, उस दर्दनाक मौत को नहीं भूलना चाहिए। हालाँकि बीच में इसने ऐसी ही कोशिश की थी, गनीमत है मुसलमानों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन यह मुद्दा बहुत संवेदन है, इसे केवल warning देकर नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसी भ्रामक खबरें फ़ैलाने के कौन इसे finance कर रहा है, गंभीर जाँच की जरुरत है। क्या उत्तराखंड और केंद्र सरकारें दूसरा नूपुर शर्मा कांड का इंतज़ार कर रहे हैं?  

स्वघोषित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें रूड़की का एक यूट्यूबर कुरान जलाते और उसे नष्ट करते हुए दिख रहा है। इस मामले को रूड़की पुलिस जल्दी देखे।” जुबैर ने यह लिखते हुए वीडियो साझा नहीं की।

हर बात का फैक्ट चेक करने वाले जुबैर ने इस मामले में फैक्ट चेक करके सच्चाई सामने लाना सही नहीं समझा और इस खबर को इस तरीके से साझा किया कि लोग सच ही मान लें। जुबैर ने ना ही यह बताया कि यह वीडियो पुराना है और ना ही यह बात स्पष्ट की कि वीडियो बनाने वाले के बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

हालाँकि, मोहम्मद जुबैर की इस मंशा को हरिद्वार पुलिस ने ध्वस्त कर दिया। उसने इस वीडियो की सच्चाई बताते हुए लिखा, “संदर्भित प्रकरण में Ex-मुस्लिम समीर पिछले लगभग 03 साल से ‘पाडली गुर्जर’ नामक स्थान में नहीं रह रहा है और न ही जनपद हरिद्वार में कहीं भी पवित्र कुरान की बेअदबी का कोई प्रकरण हुआ है। अतः बिना जानकारी के प्रकरण को शेयर न करें अन्यथा आपके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जा सकती है।”

लोगों ने हरिद्वार पुलिस के स्पष्टीकरण के बाद जुबैर को प्रश्न उठाए और कार्रवाई की माँग की। एक यूजर ने लिखा, “पुलिस इस तरह की किसी भी घटना होने से इनकार कर रही है। तुमने तथ्यों की जाँच क्यों नहीं की और पुलिस से स्पष्टीकरण प्राप्त किए बिना इसे पोस्ट क्यों नहीं किया? तुमने स्पष्टीकरण के लिए हर दूसरी घटना की तरह उत्तराखंड पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया? उत्तराखंड पुलिस कृपया इस पोस्ट पर संज्ञान ले। जुबैर नाम का शख्स फर्जी जानकारी देकर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है।”

ऐसी खबरों से साम्प्रादायिक तनाव फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। इससे पहले जब मोहम्मद जुबैर ने भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा का एक कटा हुआ वीडियो साझा किया था, तब उन्हें मारने और ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ मिली थीं। कट्टरपंथियों ने देश में इसके बाद हिंसा की थी। इसी के बाद उदयपुर में दरजी कन्हैया लाल की हत्या कर दी गई थी। ऐसे प्रकरणों के बाद जुबैर पर कार्रवाई की माँग तेज हो गई है।

अमित शाह फर्जी वीडियो केस में ‘'Spirit of Congress'' नाम से हैंडल चलाने वाले अरुण रेड्डी गिरफ्तार होने से क्यों बिलबिलाया मोहम्मद जुबैर?

     तेलंगाना से अरुण रेड्डी के गिरफ्तार (बाएँ) होने से परेशान मोहम्मद जुबैर (फोटो साभार : Hindustan Times/X)

दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने के मामले में कांग्रेस के सोशल मीडिया टीम से जुड़े अरुण रेड्डी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने अरुण रेड्डी को दिल्ली से ही गिरफ्तार किया और अब वो शनिवार (04 मई 2024) को उसे कोर्ट में पेश कर रिमाँड की माँग करेगी। अरुण रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो फैलाने और सबूत नष्ट करने के आरोप हैं। दिल्ली पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर जाँच के लिए भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुण रेड्डी ‘Spirit of Congress’ नाम से से अकाउंट चलाता है। वो कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कॉर्डिनेटर भी है, इसके साथ ही वो तेलंगाना में भी कांग्रेस का सोशल मीडिया देखता है और वो तेलंगाना कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम और नेशनल मीडिया टीम के साथ कोर्डिनेशन का काम भी देखता है।

कौन है अरुण रेड्डी?

अरुण रेड्डी ‘स्पिरिट ऑफ कांग्रेस’ नाम का एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट चलाता है और खुद को कांग्रेस समर्थक बताता है। उसने अपनी प्रोफाइल में भी खुद को कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कोऑर्डिनेटर बताया है। अपनी प्रोफाइल फोटो में उसने राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के पोस्टर वाली तस्वीर भी लगाई है। जिसमें पोस्टर के सामने वो खुद दिख रहा है।

छटपटाया मोहम्मद जुबैर, एक्स पर लिखी ये बात

कांग्रेस सोशल मीडिया विंग से जुड़े अरुण रेड्डी की गिरफ्तारी से ‘इकोसिस्टम’ का हिस्सा मोहम्मद जुबैर तिलमिला गया है। उसने एक्स पर लिखा, “सिर्फ बीजेपी के सदस्य और समर्थक ही सोशल मीडिया पर बिना किसी डर के गलत सूचना/दुष्प्रचार फैला सकते हैं। उन्हें इसके लिए पार्टी लीडरशिप से सम्मानित भी किया जा सकता है। अन्य लोग ऐसा करने से पहले 100 बार सोच लें। क्योंकि अगर उनके (बीजेपी) नेताओं के विरोध में गलत जानकारी शेयर की, तो वो तुम्हारे पीछे लग जाएँगे। अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने वाले बहुत सारे लोगों के खिलाफ केस हो चुका है/ गिरफ्तार हो चुके हैं। अमित शाह का इंटेंशनली एडिटेड वीडियो एक व्यक्ति ने पोस्ट गिया, जिसे सोशल मीडिया पर बहुत सारे अकाउंट्स ने बिना जाँच के ही शेयर किया। अब, उस वीडियो की जाँच किए बगैर उसे शेयर करने वाले या तो जेल जा रहे हैं, या एफआईआर झेल रहे हैं। सावधान!”
गृह मंत्री अमित शाह का आरक्षण को लेकर एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इस मामले में बीते रविवार को बड़ा एक्शन लिया गया था। फर्जी वीडियो फैलाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर की गई थी। इस फर्जी वीडियो को लेकर ये भ्रम फैलाया जा रहा था कि अमित शाह ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण हटाने की बात कही, जबकि वास्तविकता में उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।
पूरे मामले पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि विपक्ष की हताशा और निराशा इस स्तर पर पहुंच गई है कि उन्होंने मेरा और कुछ भाजपा नेताओं का फेक वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया है। उनके मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष आदि ने भी इस फेक वीडियो फॉरवर्ड करने का काम किया है। शाह ने कहा कि जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली है तब से वह राजनीति के स्तर को नए निचले स्तर पर ले जाने का काम कर रहे हैं।

असम से लेकर हैदराबाद तक एक्शन

जानकारी के अनुसार, यह गिरफ्तारियाँ भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई हैं। इस शिकायत में कहा गया था कि अमित शाह का एडिटेड वीडियो चला कर आरक्षण के संबंध में गलत सूचना फैलाई गई। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम आसमा, गीता, नवीन, शिवा एवं एक अन्य हैं।
इस मामले में देश के अलग-अलग इलाकों से यह फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अहमदाबाद से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया था, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है। उसे कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।
डीपफेक वीडियो से जुड़े केस में असम के कांग्रेस कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कांग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।
इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी दिल्ली पुलिस ने समन किया था। हालाँकि, उनकी जगह उनके वकील ने दिल्ली पुलिस को बताया कि मुख्यमंत्री का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। झारखंड के कांग्रेस अध्यक्ष को भी इस मामले में समन जारी किया जा चुका है।

जेहादी पत्रकार मोहम्मद जुबैर ने 3 बार ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों पर करवाया अपना ‘मुँह काला’: हर बार करता है डिफेंड

                                                                                 ALT News वाले मोहम्मद जुबैर 
कर्नाटक में 27 फरवरी 2024 को राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नासिर हुसैन की जीत हुई थी। इसी जश्न का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसा नारा लगाते सुनाई दिए। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। इसी जाँच के दौरान अचानक मोहम्मद जुबैर की एंट्री होती है जो फैक्ट चेक की आड़ में अपना ख़ास मजहबी एजेंडा बड़े स्तर पर चला रहा है। आनन-फानन में जुबैर ने संदिग्धों को क्लीन चिट दे डाली और अपनी स्वघोषित रिपोर्ट में यह बता दिया कि नारे में ‘नासिर साहब जिंदाबाद’ बोला गया था।

जुबैर की यह साजिश तब फ़ौरन ही कामयाब होती दिखी जब कर्नाटक कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी उसकी हाँ में हाँ मिला दी। हालाँकि बाद में FSL रिपोर्ट आई जिसमें संदिग्धों द्वारा लगाए गए नारों में पाकिस्तान जिंदाबाद बोले जानी की पुष्टि हो गई। पुलिस ने इल्ताज, मुनव्वर और मोहम्मद नाशीपुडी को गिरफ्तार भी कर लिया। इसके बावजूद भी मोहम्मद जुबैर अपनी करतूत पर अड़ा रहा और उसने अपने ट्वीट को डिलीट नहीं किया।

सनातन को खत्म करने की कसम खाने वाले एक मुख्यमंत्री से सम्मानित होने के बाद अपनी हरकतों के चरम पर पहुँच चुके मोहम्मद जुबैर द्वारा ऐसी हरकत पहली बार नहीं की गई। ऐसे मामले में जुबैर के कलंकित इतिहास की फेहरिस्त काफी लम्बी है। मोहम्मद जुबैर के इसी एजेंडे वाले इतिहास में सबसे अहम बात ये है कि जहाँ सच्ची घटना होती है वहाँ वो भ्रम फैलाने लगता है लेकिन जहाँ भ्रामक घटनाएँ होती हैं उसे वह सच साबित करने में जुट जाता है।

मजहबी क्लीन चिट पर भारी FSL रिपोर्ट

कर्नाटक में 27 फरवरी 2024 को लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों के बाद जुबैर उसी दिन रात 8:44 पर अपनी थ्योरी लेकर आ जाता है। फैक्ट चेकिंग के लिए उसने Inshot ऐप का प्रयोग किया। ऐप से वीडियो को स्लो मोशन कर के उसने इसे उच्च तकनीकि वाला साबित करने की भरसक कोशिश की। अपनी मजहबी अदालत में उसने कन्नड़ चैनलों के तमाम स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए उन्हें और भाजपा समर्थको को दोषी भी करार दे दिया। भ्रम की दीवार बेहद मजबूत हो जाए इसके लिए उसने आदतन/साजिशन नीचे कई थ्रेड भी डाल दिए।
हालाँकि मोहम्मद जुबैर की मुस्लिम ब्रदरहुड वाली मजहबी क्लीन चिट पर कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई भारी पड़ी। 4 मार्च 2024 को FSL रिपोर्ट में आरोपितों द्वारा लगाए गए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों की पुष्टि हुई। पुलिस ने मोहम्मद नशीपुडी, मुनव्वर और इल्ताज को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले की रिपोर्ट कर्नाटक के गृहमंत्री को भी प्रेषित की जा रही है। इतने के बावजूद मजहबी जुबैर को अपनी करतूत पर अब इतनी भी शर्म नहीं कि वह अपने उस ट्वीट को डिलीट कर ले जिसमें AIMIM पार्टी के कई कट्टरपंथी उसकी शह पर बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा तो उनसे भी 2 कदम आगे निकल गए। उन्होंने अपनी एजेंडे वाली वेबसाइट ALT News पर तो बाकायदा आर्टिकल पब्लिश कर डाला। आर्टिकल में उन्होंने नासिर साहब जिंदाबाद बोले जाने का एलान FSL रिपोर्ट आने से पहले ही कर डाला। इस से भी बड़ी बात ये है कि यह आर्टिकल अभी तक ज्यों की त्यों मौजूद है। इस आर्टिकल को ओशिनी भट्टाचार्य द्वारा लिखा गया है।

बेलगावी मामले पर भी डाला था पर्दा

पाकिस्तान परस्तों की पैरवी मोहम्मद जुबैर ने पहली बार कर्नाटक के बेंगलुरु में नहीं की है। इससे पहले उसने यही हरकत कर्नाटक के ही बेलगावी में की थी। तब राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी की जीत हुई थी। इसी क्रम में बेलगावी विधानसभा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी आसिफ जीत कर विधानसभा पहुँचे थे। उस समय उनके विजय जुलूस में नारेबाजी हुई थी जिसमें ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहे जाने का आरोप लगा था।
27 सेकेंड लम्बे इस वीडियो में कुछ इस्लामी टोपी पहने लोग पुलिस की मौजूदगी में आपत्तिजनक नारेबाजी करते दिखे थे। इसी वीडियो के बैकग्राउंड में कुछ लोगों को यह कहते सुना गया था कि ‘वीडियो बनाओ, कुछ लोग पाकिस्तान जिंदाबाद बोल रहे हैं’।
इस मामले में भी फ़ौरन ही मोहम्मद जुबैर ने एंट्री की थी। पहले उसने @total_woke_ के ट्वीट को कोट कर के मामले को भटकाने के लिए बताया कि पुलिस ने कहा कि दूसरे प्रत्याशी की जीत पर कुछ मत बोलो। इसके बाद 13 मई 2024 को एक अन्य ट्वीट में उसने बेलगावी इंस्पेक्टर दयानन्द से बातचीत का दावा करते हुए कहा कि पुलिस के मुताबिक अभी तक पाकिस्तान जिंदाबाद बोले जाने को ले कर कुछ भी साफ़ नहीं कहा जा सकता। इसी ट्वीट की अंतिम लाइन में जुबैर ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आगे की जाँच के लिए वीडियो के FSL में भेजे जाने की बात कही है।
बाद में प्रदेश के ADG लॉ एंड ऑर्डर ने 14 मई 2023 को अपने ट्वीट में बताया था कि FIR दर्ज करके आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। ADG L/O के बयान के बावजूद मोहम्मद जुबैर के रुख और ट्वीट में ज़रा सी भी तब्दीली नहीं आई। जुबैर का वह भ्रामक ट्वीट अभी भी ज्यों का त्यों कायम रह कर भ्रम फैला रहा है।

भीलवाड़ा में भी किया जाँच को प्रभावित

मोहम्मद जुबैर खुद को और अपनी वेबसाइट ALT News को एक अदालत के तौर पर बनाने का प्रयास कर रहा है जहाँ से कोई भी पाकिस्तान समर्थक प्रथम दृष्टया क्लीन चिट ले सकता है। वह न सिर्फ संदिग्धों को क्लीन चिट देता है बल्कि उनकी हरकतों को दिखाने वाले मीडिया संस्थानों पर भी ऐसा दबाव बनाने की कोशिश करता है जिससे वो भविष्य में पाकिस्तान परस्तों की हरकतों को नजरअंदाज कर दें।
इसी क्रम में एक अन्य घटना राजस्थान के भीलवाड़ा की है। मई 2022 में जुबैर ने राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की घटना का जिक्र करते हुए एक बार फिर से पाकिस्तान परस्तों को कवर किया था। यह घटना फरवरी 2021 की थी जब प्रतिबंधित आतंकी समूह PFI की राजनैतिक शाखा SDPI के नेता अब्दुल सलाम अंसारी ने एक रैली निकली थी। इस रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे। इस वीडियो को ABP और दैनिक भास्कर सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों ने खबर के तौर पर चलाया।
घटना के लगभग सवा साल बाद 19 मई 2022 को आदतन जुबैर इस मामले में भी पकिस्तन परस्तों के साथ सीना तान कर खड़ा हो गया था। उसने दैनिक भास्कर और ABP को ही गलत ठहराते हुए घोषित कर दिया कि नारे के तौर पर ‘SDPI जिंदाबाद’ बोला गया था।
हालाँकि, 22 नवंबर 2022 को इस वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आ गई। फॉरेंसिक जाँच में पाकिस्तान जिंदाबाद नारे की पुष्टि हुई थी। तब भीलवाड़ा पुलिस ने PFI के जिलाध्यक्ष अब्दुल सलाम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बावजूद मोहम्मद जुबैर, उसकी वेबसाइट ALT News और सहयोगी अर्चित अपने झूठ पर अड़े रहे। वो खबर, ट्वीट इत्यादि अभी भी ज्यों की त्यों अपनी जगह मौजूद है।
इसके अलावा कई अन्य मौकों पर जुबैर और उसके गिरोह ने पुलिस या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की जाँच से पहले ही अपनी कथित अदालत से फैसला सुना दिया था। दबाव बनाने की यह साजिश न सिर्फ प्रशसनिक अधिकारियों बल्कि मीडियाकर्मियों के खिलाफ भी लक्षित होती है। हालाँकि इस बात की संभावना न के बराबर है कि बार-बार अपनी पोल खुलने के बावजूद जुबैर और उसके गिरोह की हरकतों में जरा सा भी सुधार होगा। फ़िलहाल पाकिस्तान परस्तों में जुबैर की पोल बार-बार खुलने और भ्रामक दबाव काम न करने की वजह से थोड़ी मायूसी जरूर है।

तमिलनाडु : सनातन विरोधी DMK की सरकार ने फेक न्यूज के उस्ताद जेहादी मोहम्मद जुबैर को दिया अवाॅर्ड

     तमिलनाडु सरकार ने गणतंत्र दिवस के मौके पर मोहम्मद जुबैर को किया सम्मानित (फोटो साभार : X_mkstalin)
तमिलनाडु में सनातन विरोधी पार्टी DMK सत्ता में है। इसके एक मंत्री ने हाल ही में सनातन को मिटाने की बात की थी। अब तमिलनाडु सरकार ने हिंदुओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर को सम्मानित किया है। गणतंत्र दिवस पर ‘सांप्रदायिक सद्भाव’ बढ़ाने और सांप्रदायिक वैमनस्यता को रोकने में मदद करने के नाम पर जुबैर को पुरस्कृत किया गया है।

जुबैर ‘सर तन से जुदा’ गैंग के लिए खाद-पानी का काम करता रहा है। इसके एडिटेड वीडियो से देश भर के कट्टरपंथी सड़कों पर उतर जाते हैं। भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के मामले में सारी दुनिया ये देख चुकी है कि तरह से वह एकतरफा प्रोपेगेंडा फैलाता है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर हिंसा हो जाती है। जुबैर को सनातनियों की ऑनलाइन लिंचिंग करने वाले गिरोह का मुख्य सरगना कहा जाता है।

तमिलनाडु सरकार ने जुबैर को ‘कोट्टई अमीर सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार‘ प्रदान किया है। हालाँकि, ये कोई हैरान करने वाली खबर नहीं है, क्योंकि डीएमके के कई नेता-मंत्री भी सनातन विरोध में आगे रहे हैं। वहीं, मोहम्मद जुबैर इस्लामिक कट्टरपंथियों का साथ लेकर सनातनियों के खिलाफ माहौल तैयार करता रहता है।

तमिलनाडु सरकार से सम्मान मिलने पर जुबैर के फॉलोवर सोशल मीडिया पर भौकाल बना रहे हैं। उसके एक फॉलोवर ने X पर लिखा, “तमिलनाडु सरकार ने फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को कोट्टई अमीर सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया है। बधाई!! आशा है कि ऑल्ट न्यूज़ सभी दलों के फर्जी समाचार फैलाने वालों के तथ्यों की जाँच जारी रखेगा!”

इसी तरह का एक और ट्वीट अरविंद गुनासेकर नाम के एक ‘पत्रकार’ ने साझा किया है। यह व्यक्ति जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़ा रहा है। उसने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स शेयर है। इस डॉक्यूमेंट मोहम्मद जुबैर को दिए गए सम्मान का विवरण दिया गया है।

इसमें लिखा है, “जुबैर ने ऑल्ट न्यूज़ नाम से एक वेबसाइट बनाई है और वह सोशल मीडिया पर आने वाली खबरों की सत्यता का विश्लेषण करते रहे हैं और अपनी वेबसाइट पर केवल वास्तविक खबरें ही प्रकाशित करते हैं। उनका काम समाज में फर्जी खबरों के कारण होने वाली हिंसा की घटना को रोकने में मदद करता है।”

डॉक्यूमेंट में आगे लिखा है कि जुबैर ने मार्च 2023 में राज्य के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठ को ‘पर्दाफाश’ करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि मार्च 2023 में सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसार हुआ कि तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिकों पर हमला किया जा रहा है, जिसका एक वीडियो फुटेज भी वायरल हुआ था।

इसमें आगे लिखा है, “वीडियो फुटेज की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के बाद जुबैर ने अपनी वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ पर प्रकाशित किया कि जो वीडियो फुटेज पोस्ट किया गया था, वह घटना वास्तव में तमिलनाडु में नहीं हुई थी। उनकी रिपोर्ट ने तमिलनाडु के खिलाफ अफवाहों के प्रसार को रोक दिया और तमिलनाडु में जाति, धर्म, नस्ल और भाषा के कारण होने वाली हिंसा को रोकने के लिए काम किया।”

मार्च 2023 में कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि तमिलनाडु में काम करने वाले बिहार के श्रमिकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ हुई हैं। हालाँकि, जुबैर ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख में बताया था कि तमिलनाडु में मजदूरों पर हमले के जो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, वो गलत हैं। हालाँकि उसने सही खबरों के बारे में कभी नहीं बताया।

इस दौरान तमिलनाडु में प्रवासियों के खिलाफ डीएमके नेताओं की बयानबाजी लगातार जारी रही। तमिलनाडु के कई मंत्रियों ने उत्तर भारतीय लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं। उन्हें ‘वडक्कन’, ‘पानी पुरी वाला’ और ‘पानपराग वायाँ’ कहकर अपमानित किया गया। डीएमके नेताओं ने उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत फैलाने वाली नस्लवादी भाषा का इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे ने तो सनातन को मिटाने वाले बयान भी दिए।


‘मौत मुबारक, नरक में जाओ: युवा राष्ट्रवादी इन्फ्लुएंसर की मृत्यु पर AltNews वाले ज़ुबैर और RLD वाले कनौजिया ने मनाया जश्न, कहा – ‘आत्मा गाजा में भटके’

मोहम्मद ज़ुबैर और प्रशांत कनौजिया (साभार- HT and India Tooday)
सोशल मीडिया एक्स पर ‘IAS Smoking Skills’ हैंडल के नाम से पोस्ट करने वाले राष्ट्रवादी इन्फ्लुएंसर की अचानक से मौत हो गई है। इस हैंडल के पीछे जो राष्ट्रवादी चेहरा था उसे लोग यश के नाम से जानते थे। रविवार (29 अक्टूबर, 2023) को जैसे ही ह्रदय गति रुक जाने से उनके मौत की सूचना मिली नेटिजन्स स्तब्ध रह गए क्योंकि यश की उम्र 30 वर्ष से भी कम थी।

सामाजिक-राजनितिक सहित विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पोस्ट करने वाले यश को जहाँ नेटिजन्स श्रद्धांजलि दे रहे हैं, वहीं अक्सर लोगों की पहचान उजागर कर उन्हें बहशियों के हाथो सौंप देने वाला मोहम्मद ज़ुबैर, यहाँ भी अपनी हरकत से बाज नहीं आया। लगातार एक के बाद एक पोस्ट कर यश की मौत का मजाक उडाता रहा। वहीं अब भारी विरोध और सोशल मीडिया पर जलील किए जाने के बाद ज़ुबैर ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है।

इतना ही नहीं RLD के प्रशांत कनोजिया ने भी यश के मारे जाने का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “यह लड़का गाजा में मारे जा रहे फ़िलिस्तीनी बच्चों पर नाच कूद रहा था @Smokingskills07। परंतु आज पता चला धर्म की रक्षा करने का ढोंग करने वाले इस व्यक्ति की मौत हो गई। बच्चों के लाशों पर मज़ा ले रहा था आज कुदरत ने इसके मज़े ले लिए। परिवार को मेरी संवेदना है और उम्मीद है उनका बेटा नर्क में जाए और उसकी आत्मा गाजा में भटकती रहे। गुमनामी की मौत मुबारक!”

देखिए किस तरह से नेटिजन्स स्मोकिंग्स किल्स हैंडल चलाने वाले यश को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। यश की मौत हार्ट अटैक से बताई जा रही है। यश को याद करते हुए टीवी पत्रकार प्रदीप भंडारी ने लिखा, “मैं तो बहुत सदमे में हूँ। यश @Smokingskills07 हमने अभी इस सप्ताह बात की है। आप बहुत छोटे, मिलनसार, स्नेही थे। आप हमेशा कहते थे – ”भैया आप आगे बढ़ो, मैं आपके साथ हूँ। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि आप हमारे साथ नहीं हैं. ओम शांति।”

वहीं चचा मॉन्क नामक हैंडल ने लिखा, “यह जानकर आश्चर्य और दुःख हुआ कि भाई! @Smokingskills07 अब नहीं है। ॐ शांति  जीवन बेहद अप्रत्याशित है। हम जीवन के प्रत्येक मिनट के लिए भगवान के प्रति आभारी रहें।”

जहाँ लोग दुःखी हैं यश की मौत से वहीं ऑल्टन्यूज़ का फाउंडर सदस्य मोहम्मद ज़ुबैर लगातार पोस्ट कर यश की मौत का मजाक उड़ाता रहा और लोगों के विरोध को देखते हुए एक पोस्ट कर अपने पुराने सभी पोस्ट जो उसने यश की मौत का मजाक उड़ाने के लिए किए थे डिलीट कर दिया। और अपने बचाव में लिखा, “मैंने उसके पुराने ट्वीट्स को उजागर करने वाले अपने ट्वीट्स हटा दिए हैं। लेकिन जिस तरह से उसने लगातार छोटे फ़िलिस्तीनी बच्चों की मौत का मज़ाक उड़ाया और जश्न मनाया….”

वहीं दूसरे नेटिजन्स ने ज़ुबैर के डिलीट किए गए सभी ट्वीट का स्क्रीनशॉट पोस्ट कर दिया। बाला नामक एक्स हैंडल ने पोस्ट करते हुए लिखा, “खून में ही इसके जहर है, अपने ट्वीट डिलीट मत कर ज़ुबैर, हम जानते हैं कि तू क्या है?”

यश की मौत पर श्रद्धांजलि देते हुए और ज़ुबैर की खैर खबर लेते हुए इस्कॉन के प्रवक्ता राधा रमण दास ने लिखा, “@Smokingskills07 की दिल का दौरा पड़ने से असामयिक मृत्यु की खबर ह्रदय विदारक है। उनकी उम्र 30 साल भी नहीं थी। ओम  शांति। हरे कृष्ण। और ये बेशर्म आतंकवादी 🐖 उनके जाने का जश्न मना रहा है। मूर्ख को यह नहीं पता कि उनका दोबारा जन्म होगा।”

                                                   पोस्ट पोस्टका स्क्रीनशॉट

मोहम्मद ज़ुबैर की ये हरकत नया नहीं है इसके पहले भी वह जहाँ जिहादियों, आतंकियों का बचाव करता आया है वहीं फैक्ट चेक के नाम पर सही लोगों के पहचान को संकट में डालने, यहाँ तक कि मौत के मुँह में भेज देने भी बाज नहीं आया। सोशल मीडिया पर लोग ज़ुबैर के इन्हीं कारनामों की चर्चा करते हुए उसे लानत भेज रहे हैं। 

‘नूपुर शर्मा की तरह अब मेरे पीछे पड़ा जिहादी मोहम्मद ज़ुबैर’: एमी मेक, अमेरिका की महिला पत्रकार

हमास आतंकियों के समर्थन के लिए मोहम्मद ज़ुबैर को इजरायली काउंसल जनरल और अमेरिकी पत्रकार ने लताड़ा (फोटो साभार: X/Attia Muhammed/Flash90)
कटा हुआ वीडियो शेयर करने के लिए कुख्यात मोहम्मद ज़ुबैर अब इजरायल-हमास युद्ध को लेकर प्रोपेगंडा फैलाने में लग गया है। सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को अमेरिका स्थित ‘RAIR फाउंडेशन’ की संस्थापक और इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट एमी मेक ने मोहम्मद ज़ुबैर के AltNews द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेगंडा को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि जैसा मोहम्मद ज़ुबैर ने नूपुर शर्मा के साथ किया था, वैसे ही अब वो अब उन्हें निशाना बना रहा है, सिर्फ इसीलिए, क्योंकि उन्होंने हमास जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों की पोल खोली।

उन्होंने भारत में अपने फॉलोवर्स को आगाह करते हुए कहा कि मोहम्मद ज़ुबैर नाम का एक ‘जिहादी’ वामपंथी फेक न्यूज़ पोर्टल चलाता है, जो उन्हें और उनके जैसे कई लोगों को निशाना बना रहा है। उन्होंने उसे हिन्दू घृणा और यहूदी घृणा से सना बताते हुए याद दिलाया कि कैसे उसने नूपुर शर्मा के जीवन को खतरे में डाला था। बता दें कि नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो शेयर करने के बाद कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे की हत्याएँ हुई थीं। ‘सर तन से जुदा’ गिरोह ने भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा को धमकियाँ दी थीं।

एमी मेक ने याद दिलाया कि कैसे नूपुर शर्मा ने इस्लाम की पुस्तकों से तथ्य उद्धृत किए थे और पैगंबर मुहम्मद की बीवियों में से एक आयशा की उम्र बताई थी जो उस समय मात्र 6 साल की थी। इसके बाद उन्हें हत्या की धमकियाँ मिलने लगीं। अमेरिकी महिला पत्रकार ने कहा कि मोहम्मद ज़ुबैर भारत में गिरफ्तार भी किया गया था और वो एक खतरनाक व्यक्ति लगता है जो अपने समर्थकों को लोगों को प्रताड़ित करने के लिए उकसाता है।

उन्होंने ये सवाल भी दागा कि क्या मोहम्मद ज़ुबैर को अरबपति जॉर्ज सोरोस की ‘ओपन सोसायटी फाउंडेशन’ से पैसे मिलते हैं? जो भारत में रह रहे भारत विरोधी तत्वों की फंडिंग करता है? उन्होंने लोगों से मोहम्मद ज़ुबैर के बारे में और सूचनाएँ साझा करने की अपील की। साथ ही कहा कि उन्होंने सुना है कि वो लोगों की प्राइवेट जानकारियाँ भी खुलेआम शेयर कर देता है। याद दिला दें कि नूपुर शर्मा मामले में ज़ुबैर ने बड़ी चालाकी से उस बहस में शामिल तस्लीम रहमानी का वीडियो काट कर हटा दिया था, जो बार-बार शिवलिंग पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहा था।

मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के काउंसल जनरल कोब्बी शोषनी ने भी मोहम्मद ज़ुबैर की ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “इजरायल को लेकर झूठ खबरें और घृणा फैलाना बंद करो। अगर तुम सच में अपने-आप को फैक्टचेकर बताते हो तो इजरायल जाओ।” मोहम्मद ज़ुबैर लगातार ट्विटर का इस्तेमाल कर के हमास को पीड़ित दिखाने में लगा हुआ है। जबकि हमास एक आतंकवादी संगठन है जिसने इजरायल में नरसंहार किया।

इजरायल इस वक्त कई फ्रंड पर युद्ध लड़ रहा है। न सिर्फ हमास, बल्कि लेबनान का हिज्बुल्ला भी उसके पीछे पड़ा हुआ है। हिज्बुल्ला ने सीमा पर इजरायल की सेना (IDF) के सर्विलांस कैमरों को तबाह करने का दावा किया है। हमास ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव में फिर से रॉकेट्स दागे हैं। इजरायल में 1400 लोग हमास के हमलों में मारे जा चुके हैं। अब तक 3968 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 351 अब भी अस्पताल में हैं।