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जिस सुमैया शेख से ‘रिश्ता’ मोहम्मद जुबैर को नहीं कबूल, AltNews से उसके कितने गहरे संबंध: पोल खुलते ही गाली-गलौज पर उतर गया ‘फैक्टचेकर’

                                                        मोहम्मद जुबैर और सुमैया खान
दुनिया भर में ‘फैक्ट चेक’ का ठेका लेकर दूसरों को ज्ञान बाँटने वाला मोहम्मद जुबैर अब खुद अपने ही झूठ के जाल में फँस गया है। जिसने सालों तक हिंदू संगठनों, पत्रकारों और नेताओं को ‘फेक न्यूज फैलाने वाला’ बताया अब वही जुबैर अपनी ही पूर्व कर्मचारी को लेकर झूठ बोलता पकड़ा गया है। सोशल मीडिया पर लोग उसे आईना दिखा रहे हैं। स्क्रीनशॉट, पुराने ट्वीट और सबूतों के साथ उसका फैक्ट चेक कर रहे हैं।

क्या है सुमैया शेख से जुड़ा विवाद?

 इस विवाद की जड़ छिपी है लद्दाख हिंसा में, लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हिंसा हुई। इसका सूत्रधार बताया गया ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को। इसके बाद पुलिस ने वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया और विदेशी फंडिंग मामले में वांगचुक की NGO का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

विदेशी फंडिंग को लेकर बहस के बीच 27 सितंबर को जुबैर ने एक ट्वीट किया। इसमें पत्रकार आदित्य राज कौल के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट था जिसमें जुुबैर की विदेशी फंडिंग की जाँच करने की बात कही गई थी। इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए जुबैर ने लिखा, “विदेशी फंडिंग से याद आया, उन्हें अभी यह साबित करना है।”

जुबैर के इस ट्वीट पर ‘ऑनली फैक्ट इंडिया’ के फाउंडर और खोजी पत्रकार विजय पटेल ने जवाब दिया। विजय ने लिखा, “कट्टरपंथी जुबैर, मैं तुम्हारी विदेशी फंडिंग साबित कर दूँ। तुम्हारे दो पत्रकारों को अमेरिका स्थित ठाकुर परिवार फाउंडेशन से 50 लाख रुपए मिले थे। अब विक्टिम कार्ड खेलने के लिए तैयार हो जाओ!” इसके साथ विजय ने कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए थे जिसमें सुमैया शेख और सरफरोज सतनी (Sharfaroz Satani) का नाम था।

इसके बाद जुबैर ने अपना कुचक्र रचना शुरू किया। पोल खुलने से खफा जुबैर गाली-गलौज पर उतर आया। उसने विजय के पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा, “अबे सस्ते देसी भां**, थोड़ा और रिसर्च कर ले। ये लोग ऑल्ट न्यूज के कर्मचारी नहीं बल्कि कॉन्ट्रीब्यूटर थे।”

                                                                        विजय को जुबैर का जवाब

विजय ने इसके बाद ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “ये तुम्हारी वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है। जिसमें सुमैया को एडिटर के तौर पर दिखाया गया है, कॉन्ट्रीब्यूटर नहीं।” इस पर फिर जुबैर ने फिर लिखा कि वह ‘ऑल्ट न्यूज’ की कर्मचारी नहीं थी बल्कि कॉन्ट्रीब्यूटर थी।

‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर सुमैया को लेकर क्या लिखा है?

‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर मौजूद सुमैया शेख की वेबसाइट में उसे ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ की संस्थापक संपादक (Founding-Editor) बताया गया है। ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर लिखा है, “डॉ. शेख 2017 से 2021 तक ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ की संस्थापक संपादक रहीं। उनकी मुख्य भूमिका एक न्यूरोसाइंटिस्ट के रूप में हिंसक उग्रवाद और मनोरोग विज्ञान पर शोध करना है।”

                                         ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर मौजूद सुमैया की प्रोफाइल

जुबैर के इस दावे को लोगों ने झूठा बताकर उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। विवाद के बाद हमने सुमैया खान की X प्रोफाइल तलाशी तो उसमें कुछ पुराने पोस्ट मिले जिसमें उसने खुद को ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ का संपादक बताया था। यानी लोगों के दावे हवा-हवाई नहीं थे। मार्च 2019 के इस ट्वीट में सुमैया ने लिखा, “मैं भारत स्थित एक फैक्ट चेकिंग साइंस पोर्टल (ऑल्ट न्यूज साइंस) की संपादक हूँ।”

जाहिर है कि किसी संस्थान का ‘फाउंडिग एडिटर’ होना और उस संस्था का कर्मचारी ना होना और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा अगर था तो यह केवल मुखौटा था, इससे ज्यादा कुछ नहीं। अगर जुबैर का दावा सही भी है तो इसकी गंभीरता से जाँच किए जाने की जरूरत है। अब फिर सुमैया को मिली फंडिंग पर लौटते हैं।

सुमैया को मिली फंडिंग

असल में विवाद सुमैया को मिली फंडिंग को लेकर था। विजय ने जुबैर के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “तो क्या कॉन्ट्रीब्यूटर (योगदानकर्ताओं) को वेबसाइट पर सिर्फ 10 से 15 प्रोपेगेंडा लेख लिखने के लिए ₹50 लाख का विदेशी चंदा मिला? अगर वे वेबसाइट के लिए लेख लिखने के लिए विदेशी चंदा लेती भी हैं, तो यह भी गैरकानूनी है। यह कोई छोटी रकम नहीं है।”

जुबैर ने इस पर लिखा, “वो भारतीय नागरिक नहीं है। उसने ‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए योगदान दिया है, कर्मचारी नहीं। उसे अपने शोध के लिए फाउंडेशन से अनुदान मिला है। ऑल्ट न्यूज़ को लिखने के लिए नहीं।” जुबैर ने खुद को कूल दिखाने के लिए अपने ट्वीट में जोकर की इमोजी भी चिपका दी।

जब ‘ठाकुर फाउंडेशन’ की वेबसाइट की जाँच करने पर सामने आया कि असल में जुबैर का दावा पूरी तरह झूठ था। वेबसाइट के इम्पैक्ट सेक्शन में संस्था द्वारा जनवरी 2020 में दिए गए धन का जिक्र था। ठाकुर फाउंडेशन ने लिखा है, “हमने न्यूरोसाइंटिस्ट और लेखिका डॉ. सुमैया शेख को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा से संबंधित उनके तथ्य-जांच दावों का समर्थन करने के लिए पुरस्कार दिया।”

                                                             ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

इस वेबसाइट पर जनवरी 2020 के सेक्शन लिंक में सुमैया शेख के कम-से-कम 14 लेखों का जिक्र था और ये सभी ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट के लिए लिखे गए थे। यानी जो दावा जुबैर ने करने की कोशिश की थी वो धराशायी हो गया।

                         ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट पर सुमैया के ‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए लिखे गए लेख

फाउंडेशन की वेबसाइट पर सरफरोज सतनी को भी मार्च 2020 में फंड दिए जाने का जिक्र है। इसमें लिखा है, “हमने वैज्ञानिक और चिकित्सीय गलत सूचनाओं का मुकाबला करने में डॉ. सुमैया शेख के काम में सहायता के लिए शोधकर्ता डॉ. सरफरोज सतनी को एक अवॉर्ड दिया।” इसमें भी 11 लिंक्स का जिक्र किया गया है जिसमें से 10 लिंक्स ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट की थीं और एक लिंक गूगल शीट का था जो लॉक थी।

                   ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट पर सरफरोज के ‘आल्ट न्यूज’ के लिए लिखे गए आर्टिकल

भारत विरोधी कार्यों में संलिप्त ठाकुर फाउंडेशन

जुबैर के लिए लेख लिखने वाले पत्रकारों को जिस ठाकुर फाउंडेशन से पैसा मिला है वो खुद भारत को निशाने बनाने को लेकर सवालों में है। इसका कर्ताधर्ता दिनेश ठाकुर है जो खुद को पब्लिक हेल्थ एक्टिविस्ट बताता है लेकिन उस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। The DisinfoLab ने दिनेश ठाकुर के काले कारनामों को लेकर एक लंबी चौड़ी रिपोर्ट बनाई है।

‘द प्रोपेगेंड पिल’ नाम से 2024 में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है, “ठाकुर एक ऐसे उद्यम का मुखौटा जो कई स्तरों पर निशाना साध रहा है। पहले स्तर पर, यह रैनबैक्सी जैसी व्यक्तिगत कंपनियों को निशाना बनाता है, जिनका अमेरिकी कंपनियों के साथ विवाद चल रहा है। इसी को आधार बनाकर, अगला स्तर भारतीय जेनेरिक दवाओं को निशाना बनाता है, जो आम तौर पर अमेरिकी बड़ी दवा कंपनियों के लिए एक खतरा हैं।”

इसमें ठाकुर को लेकर लिखा गया, “इस पूरे अभियान का अंतिम लक्ष्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाना है। ठाकुर ने ऐसे लोगों और संगठनों को फंड दिया है जो खुले तौर पर भारत-विरोधी एजेंडे पर काम करते हैं, जैसे सुचित्रा विजयन् जिनके प्रोजेक्ट Polis का सोशल मीडिया एक पाकिस्तानी व्यक्ति चलाता है।”

                                       ठाकुर फैमिली फाउंडेशन की फंडिंग (फोटो -The DisinfoLab)

ऑल्ट-न्यूज और ठाकुर फाउंडेशन का नेक्सस

DisinfoLab की रिपोर्ट में ऑल्ट न्यूज और ठाकुर फाउंडेशन के नेक्सस का भी खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में लिखा गया है, “सरफरोज ने 2020 में कोविड-19 की पहली लहर के दौरान करीब 8 लेख लिखे थे। उसके लेखों का विषय मुख्य रूप से कोविड-19 से जुड़े घरेलू नुस्खों और अफवाहों की पड़ताल था। इस काम के लिए सरफरोज को साल 2020-21 के बीच कुल $5907 का भुगतान किया गया।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “सुमैया शेख को भी ठाकुर फैमिली फाउंडेशन ने काम पर रखा था। उन्होंने कुल 10 लेख लिखे, जिनमें से कुछ डॉ. सतानी के साथ मिलकर लिखे गए थे। इन लेखों के बदले सुमैया शेख को TFF से 2021 में $23,740 और 2022 में $35,260 का भुगतान किया गया।” रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि 2020 के बाद से ठाकुर फैमिली ने व्यक्तियों/पत्रकारों/कार्यकर्ताओं को भारत में धन भेजने के लिए वित्तीय सेवा संस्थानों को काम पर रख लिया था।

                                       ठाकुर फाउंडेशन द्वारा भारतीय पत्रकारों को दिया गया धन

कोविड-19 के दौर में ‘फैक्ट चेक’ की जाँच की माँग

पैसे के बदले आर्टिकल लिखने के आरोपों के बाद अब लोग इसकी जाँच किए जाने की माँग कर रहे हैं। ‘द हॉक आई’ नामक एक यूजर ने लिखा, “क्या यह FCRA का उल्लंघन हो सकता है और हितों का टकराव भी हो सकता है? योगदानकर्ता या कर्मचारी, ऑल्ट न्यूज के दो पूर्व पत्रकारों को कोविड के दौरान कुछ तथ्य-जाँच लेखों के लिए बड़ी दवा कंपनी के पैरवीकार ठाकुर फाउंडेशन से ₹50 लाख का अनुदान मिला। इसकी जाँच होनी चाहिए।”

कथित फैक्ट चेकर जुबैर पर पहले भी फंडिंग को लेकर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं। अब इन सवालों के बाद नया विवाद शुरू हो गया है। जुबैर बचने की कितनी भी कोशिश करे लेकिन सत्य कभी तो बाहर आ ही जाता है। अगर विदेशी फंडिंग को लेकर लोगों को संदेह है तो जरूरी है कि इनकी जाँच की जाए और स्थितियाँ स्पष्ट कर दी जाएँ।

जुबैर ने कोई तथ्यात्मक जाँच (फैक्ट चेक) नहीं की: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी वकील से पूछा – ‘जुबैर पर देश की एकता एवं अखंडता को नुकसान पहुँचाने वाली धारा क्यों नहीं लगे’

यति नरसिंहानंद का क्लिप ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर करने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कई सवाल किए। इस मामले में यति नरसिंहानंद फाउंडेशन की शिकायत पर जुबैर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के साथ-साथ बीएनएस की धारा 152 में भी मुकदमा दर्ज किया गया है। कोर्ट ने जुबैर के वकील से पूछा कि उस पर देश की एकता एवं अखंडता को नुकसान पहुँचाने वाली धारा 152 क्यों नहीं लगानी चाहिए थी। वहीं, सरकार से भी इस पर जवाब माँगा था।

वहीं, अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल (AAG) ने कहा कि एफआईआर से पता चलता है कि मोहम्मद जुबैर के आचरण ने क्या किया है। इससे कितना नुकसान हुआ है और देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए कितना खतरा पैदा हुआ है। AAG ने कहा कि जुबैर ने अपने एक्स पोस्ट पर आधी-अधूरी जानकारी दे रहा था। वह यह नहीं देख रहा है कि कोर्ट ने यति नरसिंहानंद को जमानत दी है।

AAG ने कहा कि जुबैर ने कोई तथ्यात्मक जाँच नहीं की। उसने कहा कि ‘लोग मुझ पर विश्वास करते हैं, इसलिए रीपोस्ट कर रहे हैं। एक हजार लोग रीपोस्ट कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि एफआईआर हुई, उन्हें (यति नरसिंहानंद) जमानत मिल गई.. और वह ट्वीट कर रहे हैं कि कोई कार्रवाई नहीं हुई।’ उन्होंने पूछा कि क्या यह फैक्ट चेक है?

‘मौत मुबारक, नरक में जाओ: युवा राष्ट्रवादी इन्फ्लुएंसर की मृत्यु पर AltNews वाले ज़ुबैर और RLD वाले कनौजिया ने मनाया जश्न, कहा – ‘आत्मा गाजा में भटके’

मोहम्मद ज़ुबैर और प्रशांत कनौजिया (साभार- HT and India Tooday)
सोशल मीडिया एक्स पर ‘IAS Smoking Skills’ हैंडल के नाम से पोस्ट करने वाले राष्ट्रवादी इन्फ्लुएंसर की अचानक से मौत हो गई है। इस हैंडल के पीछे जो राष्ट्रवादी चेहरा था उसे लोग यश के नाम से जानते थे। रविवार (29 अक्टूबर, 2023) को जैसे ही ह्रदय गति रुक जाने से उनके मौत की सूचना मिली नेटिजन्स स्तब्ध रह गए क्योंकि यश की उम्र 30 वर्ष से भी कम थी।

सामाजिक-राजनितिक सहित विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पोस्ट करने वाले यश को जहाँ नेटिजन्स श्रद्धांजलि दे रहे हैं, वहीं अक्सर लोगों की पहचान उजागर कर उन्हें बहशियों के हाथो सौंप देने वाला मोहम्मद ज़ुबैर, यहाँ भी अपनी हरकत से बाज नहीं आया। लगातार एक के बाद एक पोस्ट कर यश की मौत का मजाक उडाता रहा। वहीं अब भारी विरोध और सोशल मीडिया पर जलील किए जाने के बाद ज़ुबैर ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है।

इतना ही नहीं RLD के प्रशांत कनोजिया ने भी यश के मारे जाने का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “यह लड़का गाजा में मारे जा रहे फ़िलिस्तीनी बच्चों पर नाच कूद रहा था @Smokingskills07। परंतु आज पता चला धर्म की रक्षा करने का ढोंग करने वाले इस व्यक्ति की मौत हो गई। बच्चों के लाशों पर मज़ा ले रहा था आज कुदरत ने इसके मज़े ले लिए। परिवार को मेरी संवेदना है और उम्मीद है उनका बेटा नर्क में जाए और उसकी आत्मा गाजा में भटकती रहे। गुमनामी की मौत मुबारक!”

देखिए किस तरह से नेटिजन्स स्मोकिंग्स किल्स हैंडल चलाने वाले यश को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। यश की मौत हार्ट अटैक से बताई जा रही है। यश को याद करते हुए टीवी पत्रकार प्रदीप भंडारी ने लिखा, “मैं तो बहुत सदमे में हूँ। यश @Smokingskills07 हमने अभी इस सप्ताह बात की है। आप बहुत छोटे, मिलनसार, स्नेही थे। आप हमेशा कहते थे – ”भैया आप आगे बढ़ो, मैं आपके साथ हूँ। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि आप हमारे साथ नहीं हैं. ओम शांति।”

वहीं चचा मॉन्क नामक हैंडल ने लिखा, “यह जानकर आश्चर्य और दुःख हुआ कि भाई! @Smokingskills07 अब नहीं है। ॐ शांति  जीवन बेहद अप्रत्याशित है। हम जीवन के प्रत्येक मिनट के लिए भगवान के प्रति आभारी रहें।”

जहाँ लोग दुःखी हैं यश की मौत से वहीं ऑल्टन्यूज़ का फाउंडर सदस्य मोहम्मद ज़ुबैर लगातार पोस्ट कर यश की मौत का मजाक उड़ाता रहा और लोगों के विरोध को देखते हुए एक पोस्ट कर अपने पुराने सभी पोस्ट जो उसने यश की मौत का मजाक उड़ाने के लिए किए थे डिलीट कर दिया। और अपने बचाव में लिखा, “मैंने उसके पुराने ट्वीट्स को उजागर करने वाले अपने ट्वीट्स हटा दिए हैं। लेकिन जिस तरह से उसने लगातार छोटे फ़िलिस्तीनी बच्चों की मौत का मज़ाक उड़ाया और जश्न मनाया….”

वहीं दूसरे नेटिजन्स ने ज़ुबैर के डिलीट किए गए सभी ट्वीट का स्क्रीनशॉट पोस्ट कर दिया। बाला नामक एक्स हैंडल ने पोस्ट करते हुए लिखा, “खून में ही इसके जहर है, अपने ट्वीट डिलीट मत कर ज़ुबैर, हम जानते हैं कि तू क्या है?”

यश की मौत पर श्रद्धांजलि देते हुए और ज़ुबैर की खैर खबर लेते हुए इस्कॉन के प्रवक्ता राधा रमण दास ने लिखा, “@Smokingskills07 की दिल का दौरा पड़ने से असामयिक मृत्यु की खबर ह्रदय विदारक है। उनकी उम्र 30 साल भी नहीं थी। ओम  शांति। हरे कृष्ण। और ये बेशर्म आतंकवादी 🐖 उनके जाने का जश्न मना रहा है। मूर्ख को यह नहीं पता कि उनका दोबारा जन्म होगा।”

                                                   पोस्ट पोस्टका स्क्रीनशॉट

मोहम्मद ज़ुबैर की ये हरकत नया नहीं है इसके पहले भी वह जहाँ जिहादियों, आतंकियों का बचाव करता आया है वहीं फैक्ट चेक के नाम पर सही लोगों के पहचान को संकट में डालने, यहाँ तक कि मौत के मुँह में भेज देने भी बाज नहीं आया। सोशल मीडिया पर लोग ज़ुबैर के इन्हीं कारनामों की चर्चा करते हुए उसे लानत भेज रहे हैं। 

‘मुझे कुछ हुआ तो मोहम्मद जुबैर होगा जिम्मेदार’: वेंकटेश प्रसाद के मीडिया मैनेजर ; फेक न्यूज पेडलर जुबैर पर न्यायालय और केंद्र सरकार खामोश क्यों?

फेक न्यूज की फैक्ट्री मोहम्मद जुबैर ने कुछ दिन पहले ही पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद का सोशल मीडिया प्रोफाइल हैंडल करने वाले अमृतांशु गुप्ता की जानकारियाँ एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की थीं। इसके बाद अमृतांशु गुप्ता को ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा था।

अब अमृतांशु गुप्ता ने कहा है कि उन्हें न सिर्फ सोशल मीडिया पर, बल्कि फोन कॉल्स के माध्यम से भी जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने इस बारे में कुछ स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए हैं। अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें कुछ भी होता है, तो उसका जिम्मेदार मोहम्मद जुबैर होगा।

अमृतांशु को मिल रही हैं फोन-सोशल मीडिया पर धमकियाँ

अमृतांशु गुप्ता ने कहा कि मोहम्मद जुबैर ने जानबूझकर उनके कुछ पुराने ट्वीट्स निकाले और उन्हें शेयर कर एंटी मुस्लिम साबित करने की कोशिश की। हालाँकि, अमृतांश के उन ट्वीट्स में इस्लामोफोबिक कंटेंट जैसा कुछ भी नहीं था। एक तो बाकायदा न्यूज लिंक का ट्वीट है। हालाँकि, फेक न्यूज पेडलर जुबैर इसे एंटी-मुस्लिम साबित करने की कोशिश रहा है। इसके बाद से उन्हें फोन और सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिल रही हैं।
अमृतांशु ने लिखा, “मोहम्मद जुबैर ने मेरे ट्वीट्स की गलत व्याख्या करके यह सुनिश्चित कर दिया है कि मुझे धमकी भरे कॉल और धमकाने वाले मैसेज मिलें। मैं 14 वर्षों से ट्विटर पर हूँ, लेकिन उन्हें ‘मुस्लिम’ कीवर्ड के साथ 3 ट्वीट मिले। उनमें से 1 एचटी का लेख है, जिसमें पत्रकार पर व्यंग्यात्मक लेख था।”

मुझे कुछ हुआ, तो जिम्मेदार होगा मोहम्मद जुबैर

अमृतांशु ने लिखा है, “मेरे ट्वीट्स का गलत मतलब लोगों को समझाया गया और लोगों को मेरे खिलाफ भड़काया गया।” उन्होंने आरोप लगाया है कि जुबैर इस मामले को हिंदू बनाम मुस्लिम बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यूपी पुलिस को टैग करते हुए लिखा है कि अगर उन्हें कुछ भी होता है तो उसका जिम्मेदार मोहम्मद जुबैर होगा।

नुपूर शर्मा की तर्ज पर अमृतांशु को शिकार बनाने की कोशिश

मोहम्मद जुबैर ने वेंकटेश प्रसाद से डाँट खाने के बाद अमृतांशु गुप्ता को निशाने पर लिया था। जुबैर ने अमृतांशु की डिटेल्स सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी, ताकि उसकी ट्रोल आर्मी अमृतांशु को अपना शिकार बना सके।
अवलोकन करें:-
ये ठीक उसी तरह का पैटर्न है, जिसकी शिकार बीजेपी नेता नुपूर शर्मा को बनाया गया था। मोहम्मद जुबैर ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद के ट्विटर हैंडल को मैनेज करने वाले डिजिटल स्ट्रेटजिस्ट और सलाहकार अमृतांशु गुप्ता पर भी अपनी ट्रोल सेना उतार दी।

कर्नाटक : सुधीर चौधरी ने पूछा ‘सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए क्यों’ तो दर्ज हुई FIR: मंत्री प्रियांक खड़गे ने दी धमकी, मोहम्मद ज़ुबैर की स्व-घोषित ‘फैक्ट चेक’ ने किया गुमराह

                                     प्रियांक खरगे, सुधीर चौधरी और फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार एक नए विवाद में फँस गई है। इसकी शुरुआत 8 सितंबर 2023 को हुई, जब भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अखबार में छपे विज्ञापन की कटिंग शेयर की। इस विज्ञापन में कर्नाटक सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजना के बारे में जानकारी दी गई थी।

इस विज्ञापन को देखकर ये लगता है कि इसे सरकार ने नहीं, बल्कि एआर-रहीम ट्रस्ट नाम के किसी निजी संगठन की ओर से दिया गया था। इसे कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम लिमिटेड की ओर से जारी किया गया है। इस विज्ञापन को लेकर ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर द्वारा साझा किए गए विज्ञापन में बताया गया है कि कर्नाटक सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों को टैक्सी, ऑटो और मालवाहक वाहन खरीदने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। बता दें कि स्वावलंबी सारथी योजना पिछले महीने कर्नाटक सरकार के आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमीर अहमद खान ने शुरू की थी।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से गैर-हिंदुओं के लिए है। यहाँ तक ​​कि आर्थिक रूप से गरीब हिंदू समुदायों को भी इससे बाहर रखा गया है। मंत्री ने इसे खुलेआम भेदभाव और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया है।

चंद्रशेखर ने कहा कि इसी पार्टी के नेता विदेश जाकर देश के संविधान के खतरे में होने की बात करते हैं। उन्होंने इसे ‘राज्य प्रायोजित धर्मांतरण प्रलोभन’ कहा। उन्होंने इस योजना को ‘कर्नाटक में राहुल गाँधी की कांग्रेस द्वारा कुछ समुदायों को रिश्वत देने की बेशर्म नीति और तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण बताया।

                                                   एआर-रहीम ट्रस्ट द्वारा दिया गया विज्ञापन

चन्द्रशेखर ने कहा, “सभी कन्नडिगाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करके एक समुदाय को बेशर्मी से रिश्वत देकर भेदभाव और संविधान की धारा 14 का उल्लंघन किया जा रहा है। धर्मांतरण के लिए राज्य-प्रायोजित प्रलोभन है ये। यह यूपीए/I.N.D.I गठबंधन के वंशवादियों की तुष्टिकरण और भ्रष्ट राजनीति है।”

8 सितंबर को ही AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने राजीव चंद्रशेखर और तेजस्वी सूर्या की पोस्ट का ‘फैक्ट चेक’ करने की कोशिश की। यहाँ ध्यान रखना जरूरी है कि AltNews और मोहम्मद जुबैर ऑफिशियली खबरों के ‘फैक्ट चेक’ के लिए कर्नाटक सरकार के साथ साझेदारी कर रही है। यह जानकारी कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे दे चुके हैं।

मोहम्मद जुबैर ने राजीव चन्द्रशेखर और तेजस्वी सूर्या के पोस्ट का फैक्ट चेक करने के चक्कर में कुछ दावे भी किए, जिसमें-

1-जुबैर ने दावा किया कि दोनों नेता इस योजना का सांप्रदायिकरण कर रहे हैं और यह योजना एससी/एसटी के लिए भी उपलब्ध है।
2- इस योजना में SC/ST को 75% या अधिकतम 4 लाख तक की सब्सिडी राशि मिल सकती है।
3- अल्पसंख्यक 50% या अधिकतम 3 लाख तक की सब्सिडी राशि के लिए पात्र हैं।
3- भाजपा के तहत भी ऐसी ही योजना थी, इसलिए चंद्रशेखर और सूर्या गलत सूचना फैला रहे थे।

चूँकि जुबैर को अपने हिसाब से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और अपना एजेंडा चलाने की पुरानी आदत है, उसने इस मामले में भी ऐसा ही किया। उसने अपनी बात साबित करने के लिए 2 स्क्रीनशॉट्स शेयर किए। जुबैर ने ‘डिस्ट्रिक्टइंफो‘ वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स को आधिकारिक जानकारी के तौर पर शेयर किया, जबकि वो वेबसाइट निजी है, जिसका सरकार से कोई लेना देना ही नहीं है।

डिस्ट्रिक्ट इंफो वेबसाइट का अबाउट अस सेक्शन, जो ये बताता है कि वेबसाइट थर्ड पार्टी से मिली जानकारियाँ साझा करती है।

जुबैर ने जिस आर्टिकल का इस्तेमाल अपने फैक्ट चेक में किया, वो 19 अगस्त 2023 को पब्लिश हुआ था, कर्नाटक सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद। ये अलग बात है कि उस दिन उस वेबसाइट के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एयर फ्रायर और इंडक्शन पर इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के विज्ञापन वाले अमेजन के लिंक पोस्ट कर रहा था। उस वेबसाइट के सोशल मीडिया पर महिलाओं के कपड़े और जूतों से जुड़े लिंक भी पोस्ट किए जाते हैं।

                        डिस्ट्रिक्ट्स इंफो के सोशल मीडिया हैंडल पर अमेजन के सामानों की मार्केटिंग

वैसे, ये वेबसाइट देखने में बिल्कुल साफ है कि वो कोई भरोसेमंद वेबसाइट नहीं है, जिसका इस्तेमाल फैक्ट चेक में किया जाए। हालाँकि जो जानकारी वेबसाइट पर है, वो पूरी तरह से गलत भी नहीं है।

कांग्रेस सरकार के बजट के अनुसार, वास्तव में इस योजना की घोषणा सरकार ने की थी। हालाँकि महत्वपूर्ण बात ये है कि उक्त वेबसाइट और मोहम्मद जुबैर ने शायद जानबूझकर पूरी बात नहीं रखी और पाठकों को ये पता करने के लिए कि क्या सही है, उन्हीं पर छोड़ दिया।

जुबैर ने इन बातों को पाठकों के विवेक पर छोड़ा

जब कोई व्यक्ति ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ के बारे में सर्च करता है, तो वह केएमडी – कर्नाटक अल्पसंख्यक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पहुँचता है। इस सरकारी वेबसाइट पर भी इस योजना के बारे में जानकारी दी गई है कि ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए है।
                            कर्नाटक सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना के बारे में जानकारी
                                                योजना का लाभ पाने की शर्तों की जानकारी
वेबसाइट स्पष्ट रूप से कहती है कि इस योजना के लिए आवेदन करने के लिए आवेदक को धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए। यह योजना अल्पसंख्यक विभाग से जुड़ी है, और चल रही है, जैसा कि “ऑनलाइन आवेदन करें” बटन से साफ पता चला है।
अब, कोई यह तर्क दे सकता है कि चूँकि यह अल्पसंख्यक विभाग की वेबसाइट है, इसलिए यह केवल अल्पसंख्यकों से जुड़ी जानकारी ही देगी। ऐसे में हमने समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट को भी देखा और ये जानने की कोशिश की कि क्या ये योजना एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए भी चल रही है, जैसा कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में घोषणा की थी?
उस वेबसाइट पर ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ नाम की कोई योजना नहीं दिखी और न ही उसके लिए आवेदन करने की कोई जगह मिली। जब ऑपइंडिया ने समाज कल्याण विभाग से बात की तो हमें साफ तौर पर बताया गया है कि इस योजना का लाभ सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही मिलेगा। एससी/एसटी समुदाय के लोगों को नहीं।
हालाँकि, यह सच है कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदाय के लिए इस योजना की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक की जानकारी से ऐसा लगता है कि यह योजना अभी तक सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई है, एससी/एसटी समुदाय के लिए नहीं। यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय इस योजना का लाभ तभी प्राप्त कर सकता है, जब इस बारे में सरकार अधिसूचना जारी करे। फिलहाल तो ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है।
इस योजना को लेकर आजतक के पत्रकार सुधीर चौधरी ने 12 सितंबर को एक शो किया था। इस शो में उन्होंने अंबेडकर विकास निगम के प्रमुख पी नागेश के हवाले से बताया था कि यह योजना अभी एससी/एसटी समुदाय के लिए लागू नहीं है। हालाँकि इसे इन समुदायों के लिए शुरू करने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने पुष्टि की थी कि ये योजना अभी तक एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए अधिसूचित नहीं की गई है।
जब मोहम्मद जुबैर अमेजन के विज्ञापनों को शेयर करने वाली एक ‘ऐरी-गैरी’ वेबसाइट पर भरोसा कर रहे था, तब भी इस बात की पूरी जानकारी मौजूद थी कि कर्नाटक सरकार ने इस योजना की घोषणा तो अल्पसंख्यकों के साथ ही एससी/एसटी वर्ग के लिए भी की थी। इसे लागू भी कर दिया गया, लेकिन सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए। एससी/एसटी के लिए इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
इस बीच एक अन्य ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने एक और भ्रामक दावा किया। जुबैर ने ट्वीट किया, ”बीजेपी सरकार में भी ऐसी ही एक योजना थी। यहाँ अल्पसंख्यक विभाग @DOMGOK के कुछ पुराने ट्वीट हैं, ‘प्रत्येक लाभार्थी को वाहन की कीमत 33% सब्सिडी मिलेगी, जिसमें ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी खरीदने के लिए अधिकतम 2.5 लाख रुपये दिए जाएँगे’।”
                                                                  जुबैर का ट्वीट
ज़ुबैर ने फिर से चालाकी से सेलेक्टिव जानकारी साझा की, ताकि इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट न हो।
हालाँकि, यह भी सच है कि ऐसी ही एक योजना भाजपा सरकार में भी चल रही थी। ये जानकारी कर्नाटक के अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 2021-2022 में दी गई थी, जिसमें बताया गया है कि 31 मार्च 2022 तक वाहनों की खरीद के लिए कितनी सब्सिडी दी गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 1,333 वाहनों पर सब्सिडी दी गई थी।
                                                   सरकारी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी
हालाँकि, जुबैर द्वारा डाले गए स्क्रीनशॉट भ्रम पैदा करने वाले थे, क्योंकि भाजपा सरकार ने 2022 में इस योजना को होल्ड (रोक) पर रख दिया था।
जुबैर ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए, उनमें से एक कर्नाटक के अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का जवाब था। ये जवाब 17 अक्टूबर 2022 को दिया गया था। इसमें विभाग ने लिखा था, “प्रत्येक लाभार्थी को वाहन मूल्य पर 33% सब्सिडी मिलेगी, अधिकतम रु 2.5 लाख रुपए। अगर ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी बैंक लोन पर खरीदा जा रहा है तो उसके लिए बैंक का पत्र भी जमा करना होगा। (1/1)”
कोई भी व्यक्ति ध्यान देगा कि अगर किसी ट्वीट में 1/1 लिखा है, तो इसका मतलब है कि जवाब अभी अधूरा है और वो दूसरे ट्वीट में आ रहा है। कम से कम असली फैक्ट चेकर तो इस बात पर ध्यान देगा ही। चूँकि अगले ट्वीट में पूरा मामला साफ हो जाता, इसलिए जुबैर ने सिर्फ अपने काम का अधूरा ट्वीट ही लगाया।
मोहम्मद जुबैर ने जिस दूसरे ट्वीट को ‘जानबूझकर’ छोड़ा, उसमें साफ लिखा है कि ये योजना अब बंद हो चुकी है। ये सभी ट्वीट्स अब भी विभाग के सोशल मीडिया हैंडल पर मौजूद हैं।
जुबैर ने दिसंबर 2022 का एक और स्क्रीनशॉट शेयर किया था। ये भी दो हिस्सों में है, लेकिन उसने जानबूझकर पहला हिस्सा ही शेयर किया है।
इस ट्वीट में भी साफ लिखा है कि ये योजना लागू की जाएगी। इसका जवाब दिसंबर माह में दिया गया है। इस बात से ये साफ है कि ट्वीट के समय ये योजना बंद थी, चल नहीं रही थी।
अब ये सब कुछ पूरी तरह से साफ है कि किस तरह से जुबैर ने KMDC के जवाबी ट्वीट का महज एक हिस्सा ही शेयर किया, दूसरे को छोड़ दिया (जिसमें साफ साफ लिखा है कि ये योजना उस समय बंद थी)। लोग गुमराह ही रहें, इसलिए उसने एक और स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया।
इन सब तथ्यों के आधार पर ये बात साफ है कि जब मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आई, तब ये योजना बंद थी। ऐसे में ये कांग्रेस सरकार की ही योजना है, जिसके बारे में सरकार ने पूरी योजना बनाई और बजट में इसकी घोषणा की। बजट में घोषणा के समय ये कहा गया था कि इस योजना का लाभ एससी/एसटी समुदाय को भी मिलेगा, लेकिन अब तक ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही चलाई जा रही है।
ऐसे में ये भी संभव है कि कर्नाटक सरकार की अन्य योजनाएँ जो एससी/एसटी/ओबीसी के लिए भी चल रही हैं, उनका भी हश्र ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ की तरह ही हुआ हो।
उदाहरण के लिए, कर्नाटक सरकार की एक और योजना है, जिसे ऐरावत योजना कहा जाता है। इस योजना के तहत एससी/एसटी समुदाय के ग्रामीण युवाओं को सब्सिडी वाली गाड़ियाँ पाने की सुविधा देने के लिए ओला और उबेर के साथ पार्टनरशिप की गई है। हालाँकि, ये योजना स्वावलंबी सारथी योजना के बराबर नहीं है, जो सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए थी, बल्कि ये योजना एससी/एसडी समुदाय के ग्रामीण युवाओं के लिए है।

आजतक के सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR और जुबैर का फेक न्यूज

जब जुबैर ने भ्रामक जानकारी फैलाना शुरू कर दिया तो प्रियांक खड़गे, जो जुबैर को ‘चीफ’ कहना पसंद करते हैं, ने सुधीर चौधरी को कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद उनके के खिलाफ रिपोर्टिंग करने के लिए एफआईआर दर्ज करा दी गई।
सुधीर चौधरी ने एक शो किया था, जिसमें उन्होंने इस योजना के बारे में बताया था कि कैसे इसे हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए लागू किया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही हिंदू विरोधी बयान देने वाले प्रियांक खड़गे ने ट्वीट किया कि सुधीर गलत सूचना फैला रहे हैं और वह एंकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
रात 11:36 बजे मोहम्मद जुबैर ने सबसे पहले ट्वीट किया था कि सुधीर चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

इन सबके बीच, सुधीर चौधरी ने एक और शो किया, जिसमें उन्होंने ये बातें साफ कीं।

1-बजट में कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि यह योजना अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदायों के लिए उपलब्ध होगी
2-अखबार और कांग्रेस सरकार की अपनी वेबसाइट के विज्ञापन से साबित होता है कि इस योजना के लिए पात्रता की आवश्यकता यह है कि व्यक्ति अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए।
3-एससी/एसटी समुदाय के लिए योजना की पात्रता अभी तक अधिसूचित नहीं की गई है।
4-इस बात की पुष्टि अंबेडकर विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने आजतक से की है।
5-साफ है कि यह योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
यहाँ ये ध्यान देने लायक बात है कि असल चीजों को अभी तक मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट नहीं किया है, जबकि सुधीर चौधरी जब शो कर रहे थे, तब यही जुबैर लगातार ट्वीट पर ट्वीट कर रहा था।
स्व-घोषित फैक्ट चेकर जुबैर ने इन मामले में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं किया। सच्चाई ये है कि उसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। इस पूरे मामले में आगे चलकर यह संभव है कि कर्नाटक सरकार अपनी घोषणा पर अमल करते हुए एससी/एसटी वर्ग के लिए भी योजना को अधिसूचित कर दे, लेकिन अभी तथ्य यही है कि ये योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
साफ है कि इस मामले में सुधीर चौधरी हों या अन्य मीडिया हाउस, उन्होंने कोई फेक न्यूज नहीं फैलाया है। फिर भी कर्नाटक सरकार ने सच्चाई को स्वीकार करने की जगह उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की है।
चूँकि कर्नाटक सरकार की ये योजना अगर एससी/एसटी वर्ग के लिए लागू होती तो वो इसका नोटिफिकेशन सार्वजनिक करते, न कि जुबैर के फर्जी फैक्ट चेक की आड़ में सुधीर चौधरी पर एफआईआर दर्ज करते।
ऐसे में साफ है कि सुधीर चौधरी पर एफआईआर सिर्फ इसलिए की गई है कि अगर कोई सच्चाई बताने का प्रयास करेगा और इससे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की असलियत बाहर आएगी, तो वो बच नहीं पाएगा। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उसे प्रताड़ित किया जाएगा।
मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।(साभार)

प्रकाश राज और RJ सायमा सहित पूरा गिरोह उतरा कानून का उल्लंघन करने वाले मोहम्मद ज़ुबैर के समर्थन में: मासूम बच्चों का वीडियो वायरल कर किया था

                     आरजे सायमा, मोहम्मद जुबैर और प्रकाश राज (दाएँ से बाएँ) (फोटो साभार :                                                                                                                        ट्विटर__sayema/starsunfolded/IMBD)
फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने वाले कथित फैक्ट चेकर जुबैर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से उसकी गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई है। आम लोग जहां एक पीड़ित बच्चे का वीडियो शेयर कर उसकी पहचान उजागर करने वाले और वीडियो को एडिट कर समाज में जहर घोलने वाले जुबैर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, तो पूरा वामपंथी गिरोह उसके बचाव में खुलकर उतर आया है। इस लिस्ट में प्रकाश राज, आरजे सायमा, सीमा चिश्ती जैसे नाम हैं।

सबसे पहले पढ़िए सायमा का ट्वीट, जिसने कौशिक राज के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यूपी पुलिस को गलत ठहरा दिया। सायमा ने लिखा, “क्या समय आ गया है, तृप्ति त्यागी नाबालिग के साथ अपराध करने के बाद भी खूब सपोर्ट पा रही है, तो इस खबर को सामने लाने वाले पर ही पुलिस ‘अटैक’ कर रही है।” सायमा ने ‘आई स्टैंड विद जुबैर’ का हैशटैग भी आगे बढ़ाया है।

वहीं, वामपंथी मीडिया संस्थान द वायर की संपादक सीमा चिश्ती को जुबैर इसलिए बेचारे लगने लगे, क्योंकि जुबैर ने आग लगाकर पानी डाल दिया था। उसका एडिट किया हुआ वीडियो सारी दुनिया में घूमने के बाद। अब सीमा चिश्ती यूपी पुलिस पर ही सवाल उठा रही हैं, पढ़िए ट्वीट…

हालाँकि प्रकाश राज के ट्वीट करते ही लोगों ने जम कर लताड़ लगाई। प्रकाश राज ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि वो जुबैर का समर्थन करने के लिए इस हैशटैग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी आई स्टैंड विद जुबैर हैशटैग के साथ ट्वीट करने की अपील की।

प्रकाश राज कई मामलों में बुरी तरह से एक्सपोज हो चुके हैं, जो एक्स (पूर्व में ट्विटर) की आम जनता भी उन्हें उसी तरह आड़े हाथों लेती है। प्रकाश राज के ट्वीट के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने प्रकाश राज को उसकी असल औकात याद दिला ली। देखिए कुछ ट्वीट्स…

दिनेश भट्ट नाम के एक यूजर ने प्रकाश राज पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने प्रकाश राज को रिप्लाई देते हुए लिखा, “एक ऐसा मूर्ख जो अपनी मक्कारी भरी हरकतों से आज तक एक निम्न स्तरीय जंतु की तरह रेंग रहा है, जिसका मन मस्तिष्क घटियापन से भरा हुआ है, वो एक ऐसे बेयर रूपी मक्कार को सहारा देकर खड़े होने की बात कर रहा है, पहले तुम मेरे खड़े हुए कड़क जंतु का सहारा लेकर अपने पृष्ठ भाग को रख कर बैठ जाओ, तुम्हारे पृष्ठ भाग की खुजली के साथ साथ तुम्हारी मानसिक खुजली भी दूर हो जाएगी।।”

अनूप रावत लिखते हैं, “फॉर्म भरते वक्त फादर वाली जगह पर अब्दुल तो नहीं लिखते हो?”

जॉन कबीर एक तस्वीर के माध्यम से बोल रहे हैं कि तुम कुछ भी करो, हमें क्या मतलब है।

योगी आदित्यनाथ नाम से बने एक पेरोडी अकाउंट से अलग ही वीडियो शेयर किया गया है। कैप्शन में उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हालत की तुलना प्रकाश राज और जुबैर से की गई है।

मोहम्मद ज़ुबैर ने वीडियो के जरिए फैलाया था प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर पर FIR दर्ज की है। ये मामला खुब्बापुर गाँव स्थित ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ के वायरल वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में शिक्षिका तृप्ता त्यागी बैठी हुई दिख रही है। साथ ही एक मुस्लिम बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवाया जाता है। वीडियो उस मुस्लिम बच्चे के चचेरे बड़े भाई ने ही बनाया था। वीडियो में वो हँसता हुआ सुनाई दे रहा है। वही शिक्षा के पास अपने भाई की शिकायत लेकर आया था।

वहीं मोहम्मद ज़ुबैर ने इस मामले में वीडियो वायरल किया था, लेकिन बच्चों के चेहरों को ब्लर नहीं किया था। इस FIR में बताया गया है कि AltNews के पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ‘किशोर न्याय अधिनियम’ का उल्लंघन करते हुए बच्चे की पहचान उजागर की गई है। इसके लिए उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की माँग की गई है। ये FIR सोमवार (28 अगस्त, 2023) को दर्ज की गई है। मोहम्मद ज़ुबैर ने बाद में इस वीडियो को डिलीट कर लिया था, लेकिन माफ़ी तक नहीं माँगी थी।

कर्नाटक : कॉलेज में लड़कियों का वीडियो शूट करने का मामला; नूपुर शर्मा को विवादित बनाने वाला जुबेर फिर एक और हिन्दू लड़की को विवादित बना रहा

                                                            बेकसूर रश्मि सामंत के घर पहुँची कर्नाटक पुलिस
हाल ही में कर्नाटक के उडुपी से एक खबर आई। खबर में कहा गया कि ‘नेत्र ज्योति कॉलेज’ की 3 छात्राओं को निलंबित कर दिया गया है। मामला था कॉलेज के वॉशरूम में कैमरा लगाने का। खबरों में कहा गया कि कैमरा लगाने वाली छात्राएँ एक विशेष समुदाय से थीं। वहीं हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि पीड़िताएँ हिन्दू समाज से थीं। बताया गया कि ये लड़कियाँ दूसरी लड़कियों के अश्लील वीडियो बना कर अपने समुदाय के लड़कों को भेजती थीं।

कर्नाटक: उडुपी के कॉलेज में लड़कियों का वीडियो बनाया

इस खबर के सामने आने के बाद ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की अध्यक्ष रहीं रश्मि सामंत का एक ट्वीट आता है। उन्होंने लिखा कि आखिर अलीमातुल शैफा, शहबानाज़ और आलिया के बारे में बात क्यों नहीं की जा रही है? बता दें कि रश्मि सामंत उडुपी से ही ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने कहा कि इन लड़कियों ने सैकड़ों हिन्दू लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाए। साथ ही ये भी बताया कि अपने समाज के व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में इन वीडियो और तस्वीरों को सर्कुलेट किया गया।
साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि कई ऐसी पीड़ित लड़कियाँ हैं जो इस कारण इतनी अवसाद में चली गई हैं कि उनके मन में आत्महत्या के भी ख्याल आ रहे हैं। रश्मि सामंत ने कहा कि इसके बावजूद इस घटना की निंदा नहीं की जा रही है। साथ ही उन्होंने 1992 में अजमेर में हुए रेप कांड की बात की। बता दें कि 1992 में अजमेर के इस काण्ड का खुलासा हुआ था, लेकिन ये वर्षों से चल रहा था। 250 हिन्दू लड़कियों को ब्लैकमेल कर उनके साथ बलात्कार किया गया था।
पकड़े जाने के बाद इन तीनों लड़कियों ने दावा किया था कि वो किसी अन्य लड़की के साथ प्रैंक करने जा रही थीं, लेकिन गलती से दूसरी लड़की का वीडियो बन गया। इसके बाद पीड़ित लड़कियों ने कॉलेज प्रबंधन से शिकायत की। कॉलेज की डायरेक्टर रश्मि कृष्णा प्रसाद ने बताया कि पीड़िताएँ पुलिस वगैरह के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती थीं, लेकिन संस्थान ने पुलिस में पेटिशन दिया। जिन मोबाइल फोन्स में वीडियो होने की बात कही गई, उन्हें भी जाँच के लिए दे दिया गया।

रश्मि सामंत के घर में घुस गई पुलिस: वकील

आरोप है कि रश्मि सामंत के इस ट्वीट के बाद कर्नाटक पुलिस उनके पीछे पड़ गई। अधिवक्ता आदित्य श्रीनिवास ने ट्वीट कर के बताया कि सोमवार (24 जुलाई, 2023) को रात के 8 बजे कर्नाटक पुलिस के अधिकारी रश्मि सामंत के घर पहुँचे। उस समय वो घर से बाहर थीं। इसके बाद पुलिस वालों ने उनके माता-पिता से पूछताछ की और कई बार पूछा कि आखिर उनकी बेटी कहाँ हैं। आरोप है कि उनके पिता को कई बार फोन कॉल कर-कर के परेशान किया गया और उनकी बेटी के लोकेशन के बारे में पूछा गया।
आदित्य श्रीनिवासन ने बताया, “ये स्पष्ट है कि पुलिस मेरी क्लाइंट रश्मि सामंत के पीछे इसीलिए पड़ी है, क्योंकि उन्होंने उडुपी के कॉलेज में हिन्दू लड़कियों के वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की घटना की निंदा की। वो मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और देश-विदेश में इन मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं। उन्होंने ब्रिटिश संसद के ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स’ में लेस्टर में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा पर रिपोर्ट प्रकाशित की। उनके ताज़ा ट्वीट्स भी अभियक्ति की आज़ादी के तहत ही किए गए हैं।”
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि चूँकि संविधान के दायरे में रह कर ये किया गया है, इसीलिए कर्नाटक पुलिस ने टॉर्चर करने के लिए असंवैधानिक तरीका अपनाया है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा देश भर में जा चुका है, ऐसे में रश्मि सामंत के घर जाने से ये नहीं थमेगा। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रात के समय किसी महिला को इस तरह से गिरफ्तार करने के लिए पुलिस नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि अपने गृह जिले में हुए एक अपराध को लेकर रश्मि सामंत ने जागरूकता फैलाई।

फिर एक महिला के पीछे पड़ा मोहम्मद ज़ुबैर

रश्मि सामंत के घर कर्नाटक पुलिस का पहुँच जाना महज एक संयोग नहीं था। इससे पहले AltNews वाले मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्वीट कर के रश्मि सामंत और शेफाली वैद्य को निशाना बनाया था। बता दे कि मोहम्मद ज़ुबैर ने ही नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो वायरल किया था, जिस कारण एक वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद वो घर में कैद रहने को मजबूर हैं। इसके बाद राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तो महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की गला रेत कर हत्या कर दी गई।
मोहम्मद ज़ुबैर ने दावा कर डाला कि रश्मि सामंत लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने उन पर ‘महिला कार्ड’ खेलने का भी आरोप लगा डाला और अनजान यूट्यूब चैनल के हवाले से प्रोपेगंडा चलाने का आरोप मढ़ा। उसने दावा कर दिया कि ‘इंडिया टुडे’ के आर्टिकल में भी दक्षिणपंथियों को कोट किया गया, जबकि ये भ्रामक सूचनाएँ हैं। उसने उडुपी पुलिस को टैग कर के रश्मि सामंत के खिलाफ एक्शन लेने के लिए भड़काया।
अवलोकन करें:-
जबकि ये साफ़ है कि सच्चाई यही है कि ये मामला दो समुदायों का था। यहाँ तक कि ‘द न्यूज मिनट’ ने स्पष्ट लिखा कि निलंबित की जाने वाली छात्राएँ मुस्लिम समाज से थीं। वहीं मीडिया संस्थान ने ये भी लिखा कि जिन लड़कियों के वीडियो बनाने की बात कही गई वो मुस्लिम समाज से थीं। इसी तरह ‘मंगलौर टुडे’ ने भी लिखा कि एक समुदाय की लड़कियों ने दूसरे समुदाय की लड़कियों का वीडियो बनाया, जिसके बाद तनाव हुआ। ऑपइंडिया आरोपितों के नामों की पुष्टि की कोशिश कर रहा है।