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कर्नाटक : कॉलेज में लड़कियों का वीडियो शूट करने का मामला; नूपुर शर्मा को विवादित बनाने वाला जुबेर फिर एक और हिन्दू लड़की को विवादित बना रहा

                                                            बेकसूर रश्मि सामंत के घर पहुँची कर्नाटक पुलिस
हाल ही में कर्नाटक के उडुपी से एक खबर आई। खबर में कहा गया कि ‘नेत्र ज्योति कॉलेज’ की 3 छात्राओं को निलंबित कर दिया गया है। मामला था कॉलेज के वॉशरूम में कैमरा लगाने का। खबरों में कहा गया कि कैमरा लगाने वाली छात्राएँ एक विशेष समुदाय से थीं। वहीं हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि पीड़िताएँ हिन्दू समाज से थीं। बताया गया कि ये लड़कियाँ दूसरी लड़कियों के अश्लील वीडियो बना कर अपने समुदाय के लड़कों को भेजती थीं।

कर्नाटक: उडुपी के कॉलेज में लड़कियों का वीडियो बनाया

इस खबर के सामने आने के बाद ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की अध्यक्ष रहीं रश्मि सामंत का एक ट्वीट आता है। उन्होंने लिखा कि आखिर अलीमातुल शैफा, शहबानाज़ और आलिया के बारे में बात क्यों नहीं की जा रही है? बता दें कि रश्मि सामंत उडुपी से ही ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने कहा कि इन लड़कियों ने सैकड़ों हिन्दू लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाए। साथ ही ये भी बताया कि अपने समाज के व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में इन वीडियो और तस्वीरों को सर्कुलेट किया गया।
साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि कई ऐसी पीड़ित लड़कियाँ हैं जो इस कारण इतनी अवसाद में चली गई हैं कि उनके मन में आत्महत्या के भी ख्याल आ रहे हैं। रश्मि सामंत ने कहा कि इसके बावजूद इस घटना की निंदा नहीं की जा रही है। साथ ही उन्होंने 1992 में अजमेर में हुए रेप कांड की बात की। बता दें कि 1992 में अजमेर के इस काण्ड का खुलासा हुआ था, लेकिन ये वर्षों से चल रहा था। 250 हिन्दू लड़कियों को ब्लैकमेल कर उनके साथ बलात्कार किया गया था।
पकड़े जाने के बाद इन तीनों लड़कियों ने दावा किया था कि वो किसी अन्य लड़की के साथ प्रैंक करने जा रही थीं, लेकिन गलती से दूसरी लड़की का वीडियो बन गया। इसके बाद पीड़ित लड़कियों ने कॉलेज प्रबंधन से शिकायत की। कॉलेज की डायरेक्टर रश्मि कृष्णा प्रसाद ने बताया कि पीड़िताएँ पुलिस वगैरह के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती थीं, लेकिन संस्थान ने पुलिस में पेटिशन दिया। जिन मोबाइल फोन्स में वीडियो होने की बात कही गई, उन्हें भी जाँच के लिए दे दिया गया।

रश्मि सामंत के घर में घुस गई पुलिस: वकील

आरोप है कि रश्मि सामंत के इस ट्वीट के बाद कर्नाटक पुलिस उनके पीछे पड़ गई। अधिवक्ता आदित्य श्रीनिवास ने ट्वीट कर के बताया कि सोमवार (24 जुलाई, 2023) को रात के 8 बजे कर्नाटक पुलिस के अधिकारी रश्मि सामंत के घर पहुँचे। उस समय वो घर से बाहर थीं। इसके बाद पुलिस वालों ने उनके माता-पिता से पूछताछ की और कई बार पूछा कि आखिर उनकी बेटी कहाँ हैं। आरोप है कि उनके पिता को कई बार फोन कॉल कर-कर के परेशान किया गया और उनकी बेटी के लोकेशन के बारे में पूछा गया।
आदित्य श्रीनिवासन ने बताया, “ये स्पष्ट है कि पुलिस मेरी क्लाइंट रश्मि सामंत के पीछे इसीलिए पड़ी है, क्योंकि उन्होंने उडुपी के कॉलेज में हिन्दू लड़कियों के वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की घटना की निंदा की। वो मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और देश-विदेश में इन मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं। उन्होंने ब्रिटिश संसद के ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स’ में लेस्टर में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा पर रिपोर्ट प्रकाशित की। उनके ताज़ा ट्वीट्स भी अभियक्ति की आज़ादी के तहत ही किए गए हैं।”
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि चूँकि संविधान के दायरे में रह कर ये किया गया है, इसीलिए कर्नाटक पुलिस ने टॉर्चर करने के लिए असंवैधानिक तरीका अपनाया है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा देश भर में जा चुका है, ऐसे में रश्मि सामंत के घर जाने से ये नहीं थमेगा। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रात के समय किसी महिला को इस तरह से गिरफ्तार करने के लिए पुलिस नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि अपने गृह जिले में हुए एक अपराध को लेकर रश्मि सामंत ने जागरूकता फैलाई।

फिर एक महिला के पीछे पड़ा मोहम्मद ज़ुबैर

रश्मि सामंत के घर कर्नाटक पुलिस का पहुँच जाना महज एक संयोग नहीं था। इससे पहले AltNews वाले मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्वीट कर के रश्मि सामंत और शेफाली वैद्य को निशाना बनाया था। बता दे कि मोहम्मद ज़ुबैर ने ही नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो वायरल किया था, जिस कारण एक वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद वो घर में कैद रहने को मजबूर हैं। इसके बाद राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तो महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की गला रेत कर हत्या कर दी गई।
मोहम्मद ज़ुबैर ने दावा कर डाला कि रश्मि सामंत लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने उन पर ‘महिला कार्ड’ खेलने का भी आरोप लगा डाला और अनजान यूट्यूब चैनल के हवाले से प्रोपेगंडा चलाने का आरोप मढ़ा। उसने दावा कर दिया कि ‘इंडिया टुडे’ के आर्टिकल में भी दक्षिणपंथियों को कोट किया गया, जबकि ये भ्रामक सूचनाएँ हैं। उसने उडुपी पुलिस को टैग कर के रश्मि सामंत के खिलाफ एक्शन लेने के लिए भड़काया।
अवलोकन करें:-
जबकि ये साफ़ है कि सच्चाई यही है कि ये मामला दो समुदायों का था। यहाँ तक कि ‘द न्यूज मिनट’ ने स्पष्ट लिखा कि निलंबित की जाने वाली छात्राएँ मुस्लिम समाज से थीं। वहीं मीडिया संस्थान ने ये भी लिखा कि जिन लड़कियों के वीडियो बनाने की बात कही गई वो मुस्लिम समाज से थीं। इसी तरह ‘मंगलौर टुडे’ ने भी लिखा कि एक समुदाय की लड़कियों ने दूसरे समुदाय की लड़कियों का वीडियो बनाया, जिसके बाद तनाव हुआ। ऑपइंडिया आरोपितों के नामों की पुष्टि की कोशिश कर रहा है।

‘AIMIM का शहर अध्यक्ष हूँ’: हिजाब वाली लड़की को गाली देकर पूछ रहा था – हिन्दू के साथ क्यों घूम रही?

                मेरठ में मुस्लिम युवती से बदसलूकी करने वाला उमेर गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut, Uttar Pradesh) में खुद को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का शहर अध्यक्ष बताकर युवती से बदसलूकी करने वाले आरोपित उमैर को पुलिस ने ​गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना ​​​​लालकुर्ती पैंठ बाजार की है। इसका वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिख रहा है कि उमैर खुद को AIMIM का अध्यक्ष बताकर हिजाब पहनी हुई मुस्लिम युवती को टॉर्चर कर रहा है। वह उससे कहता है, “तू अपना नाम बता। तू मुस्लिम नहीं है। अपना आधार कार्ड दिखा।” वह युवती से आगे कहता है, “तू मुस्लिम है, हिंदू लड़के के साथ घूम रही।”

दैनिक भास्कर के मुताबिक, यह घटना 5 जून 2023 की है, लेकिन इसका वीडियो बुधवार (7 जून 2023) को सामने आया है। एसपी सिटी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि वीडियो सामने आने के बाद आरोपित उमैर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ केस दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।

रिपार्ट के अनुसार, लालकुर्ती पैंठ बाजार में एक मुस्लिम युवती हिंदू लड़के के साथ घूम रही थी, तभी भीड़ ने दोनों को चारों तरफ से घेर लिया। वीडियो में काली टी-शर्ट पहने लंबे बालों वाला दिख रहा शख्स उमैर है। वह बार-बार युवती से हिंदू युवक के साथ घूमने पर सवाल पूछता है।

उमैर उस युवती से बार-बार उसकी आईडी माँग रहा था। इसके साथ ही उस युवती से वह गाली-गलौच भी कर रहा था। खुद को चारों तरफ से घिरा देखकर और उमैर तथा उसके साथियों की बदतमीजी से परेशान होकर युवती रोने लगती है। हालाँकि, भीड़ को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। भीड़ उसका लगातार वीडियो बनाती रही। इसकी पैंठ बाजार में कपड़े की दुकान है। 

इससे पहले इस साल मई में भी मेरठ का एक ऐसा ही वीडियो सामने आया था, जिसमें मुस्लिमों को अपने ही मजहब की लड़कियों के साथ बदसलूकी करते हुए देखा गया था। यूपी पुलिस ने इस घटना का संज्ञान लिया था। दोनों मुस्लिम युवतियाँ एक हिन्दू युवक के साथ घूम रही थीं, जिस पर कट्टर मुस्लिम भड़क गए और उनके साथ बदसलूकी करने लगे थे। यही नहीं, जबरन उनका चेहरा दिखाने के लिए भी मजबूर किया गया था।

इमरान खान को बवासीर बीमारी की वजह से नंगा नहीं करना है, न ही रेप… बाँस-सरिया डालने पर रोक

इमरान खान के 'दाग' को चेक कर रहा उनका पाकिस्तानी समर्थक? (फाइल फोटो)
पाकिस्तान में चल रही हिंसा और इमरान खान की गिरफ्तारी के बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के स्टैंप से एक लेटर वायरल हुआ है। इस लेटर में दावा था कि पाकिस्तान सरकार ने पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान से वादा किया था कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद बाद उन्हें कोई नंगा नहीं करेगा, उनके साथ रेप नहीं होगा और उन्हें सरिया-बाँस आदि से नहीं प्रताड़ित किया जाएगा।

इस लेटर में यूएस राजदूत डोनाल्ड ब्लूम का भी नाम है जिन्हें (लेटर के मुताबिक) जिम्मेदारी दी गई है कि वो इस बात की देख-रेख करें कि पुलिस कस्टडी में पूर्व प्रधानमंत्री के साथ ये सब न हो।

अब जियो फैक्ट चेक ने इस लेटर को फर्जी बताया है। लेटर में कहा गया है कि एक अधिकारी ने उन्हें नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस तरह का कोई एग्रीमेंट इमराऩ खान, पाकिस्तान सरकार और यूएस राजदूत के बीच नहीं हुआ था। इस लेटर में एक यूसुफ नसीम खोकर का नाम है, जिनको इंटीरियर सेक्रेट्री बताया गया है। जियो फैक्ट चेक के अनुसार, यूसुफ नसीम 7 मार्च को रिटायर हो चुके हैं और लेटर की तारीख 8 मई 2023 की डाली गई है।

बता दें कि इस लेटर में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के इमरान खान और पाकिस्तानी सरकार को दो पार्टियाँ बताया गया है जिनके बीच यह करार हुआ। इसमें लिखा है कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके साथ निम्नलिखित बर्ताव नहीं होंगे।

  1. पीटीआई के इमरान खान अहमद नियाजी को पूछताछ के दौरान नंगा नहीं किया जाएगा।
  2. किसी को ये इजाजत नहीं दी जाएगी कि वो पीटीआई के इमरान खान का रेप करे। खासकर तब जब वो बवासीर के मरीज हैं।
  3. इमरान खान को किसी भी तरह के बाँस-सरिया-डंडे से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
पत्र में यह भी लिखा है कि ये सारी नियम और शर्तों की देखरेख अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लूम द्वारा की जाएगी क्योंकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खा, यूएस राजदूत डोनाल्ड ब्लूम के अलावा किसी पर विश्वास नहीं कर सकते। इस पत्र में देख सकते हैं कि इमरान अहमद खान नियाजी, इंटीरियर सेक्रेट्री यूसुफ नसीम खोकर और अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लूम के हस्ताक्षर दिखाए गए है। जियो फैक्ट चेक ने पूरे पत्र को फर्जी बताया है।

केरल : मदरसा में इस्लाम सिखाने के बहाने महिलाओं का मौलवी ने किया यौन शोषण

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: DNA India)
केरल के कोझीकोड मुखदार तरबियाथुल इस्लामी सेंटर में इस्लाम कबूल करने वाली एक युवती ने मदरसा को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। महिला ने सेंटर के प्रमुख पर महिलाओं और लड़कियों को इस्लाम ‘सिखाने’ के बहाने प्रताड़ित करने और उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है।

जनम टीवी के साथ अपने इंटरव्यू में, महिला ने कहा कि इस्लामी मदरसा का प्रमुख बड़ी संख्या में लड़कियों का यौन शोषण कर चुका है। महिला ने केंद्र की तुलना जेल से की और कहा कि महिलाओं और लड़कियों को मजहबी मदरसा छोड़ने पर प्रतिबंध है।

महिला के मुताबिक केंद्र के मुखिया मुस्लिम मौलवी ने एक दिन 18-19 साल की बच्ची के साथ रेप किया। इसके बाद लड़की को बताया गया कि स्नान करने के बाद उसके सभी पाप माफ हो जाएँगे। घटना के बारे में उसे कैसे पता चला, इस बारे में जानकारी देते हुए, महिला ने जनम टीवी को बताया कि पीड़िता ने ही उसके साथ आपबीती शेयर की थी।

महिला ने कहा कि पीड़िता को उसके परिवार वाले उसी दिन वहाँ से ले गए। महिला ने बताया कि कैसे मुस्लिम मौलवियों ने मजहबी केंद्र में शामिल होने के लिए असुरक्षित और कमजोर महिलाओं एवं लड़कियों को टारगेट किया और फिर इसके बाद उन्होंने उनके खिलाफ असहनीय अत्याचार किया। महिलाओं और लड़कियों को रहने के लिए घर और उनके खर्च के लिए पैसे देने के बहाने मदरसा में शामिल होने के लिए बहकाया गया।

महिला ने कहा कि लड़कियों को 40 दिनों के लिए केंद्र में रहने के लिए कहा गया था। इस दौरान मदरसा के प्रमुख ने उनमें से प्रत्येक के साथ व्यक्तिगत रूप से समय बिताया। महिला ने खुलासा किया कि उसने लड़कियों के कमरे में जाकर प्रताड़ित किया और उनका यौन शोषण किया। 19 वर्षीय लड़की द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के बारे में बात करते हुए, महिला ने कहा कि घटना 8 जून को हुई थी, लेकिन पुलिस में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी क्योंकि लड़की को कथित तौर पर पुलिस में घटना की रिपोर्ट करने के खिलाफ अपराधी द्वारा धमकी दी गई थी।

उइगर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार : नंगा करो, हथकड़ी लगाओ, चीनी मर्दों के पास भेजो… गुदा द्वार में छड़ी घुसा कर करंट

                                              उइगर मुस्लिम महिलाओं की हालत (फोटो साभार: बीबीसी)
चीन के शिनजियांग प्रांत में नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर उइगर मुसलमानों पर अत्याचार दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में अभी तक चीनी अधिकारियों की तानाशाही और जुल्म की खबरें आती थीं। मगर, अब पता चल रहा है कि वहाँ किस तरह री-एड्यूकेशन के नाम पर उइगर महिलाओं का एक सिस्टम के तहत बलात्कार किया जाता है और कैसे शीं जिनपिंग के नेतृत्व में चीन का मकसद किसी समुदाय में कोई सुधार करना नहीं बल्कि उन्हें पूरी तरह बर्बाद करना है। 

हाल में बीबीसी में प्रकाशित खबर में उइगर मुस्लिम महिलाओं पर होते जुल्म की विस्तृत चर्चा है। रिपोर्ट में बीबीसी ने कुछ पीड़िताओं का जिक्र किया है, जिन्हें उस डिटेंशन कैंप में महीनों रखा गया। इनमें से तुरसुनय जियावुडुन (Tursunay Ziawudun) आरोप लगाती हैं कि कैंप में चीनी अधिकारी देर रात जेल में आते हैं और अपने लिए एक महिला का चुनाव करते हैं। इसके बाद उसे अंधेरे कमरे में ले जाया जाता है, जहाँ सर्विलांस के लिए कोई कैमरे नहीं होते।

कई रात चीनी पुरूषों के हवस का शिकार हो चुकी जियावुडुन अब अमेरिका में हैं। लेकिन उनके लिए वो समय भुला पाना असंभव है। वह कहती हैं कि महिलाएँ हर रात जेल से निकाली जाती हैं और एक के बाद एक मास्क पहना हुआ चीनी आदमी उनका रेप करता है। वह खुद कई बार प्रताड़ित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 3 मौकों पर उनके साथ गैंग रेप भी हुआ। एक समय में दो या तीन लोग उन पर हावी हुए।

बीबीसी की रिपोर्ट में एक अन्य महिला गुलजिरा ऑलखान (Gulzira Auelkhan) का भी जिक्र है। वह भी कैंप में 18 महीने रही थीं। गुलजिरा बताती हैं कि कैंप में उनसे महिलाओं के कपड़े उतरवा कर उन्हें चीनी मर्दों के पास भेजने को कहा जाता था। जिसके कारण वह महिलाओं को नंगा करती थीं, उन्हें हथकड़ी लगाती थीं और फिर चीनी मर्दों के पास उन्हें कमरे में भेज कर बाहर बैठती थीं। जैसे ही सारे मर्द निकलते थे, वह वहाँ दोबारा जाती थीं। कमरे को साफ करती थीं और महिलाओं को नहलाने के लिए ले जाती थीं।

पीड़िताओं के अनुसार, चीनी पुरूष रात बिताने के लिए सबसे खूबसूरत उइगर महिलाओं को चुनते थे और उसके लिए भुगतान भी करते थे। गुलजिरा इस पूरे तंत्र को संगठित बलात्कार की व्यवस्था कहती हैं। वह बताती हैं कि उन्हें कमरे में अपना काम करने के बाद बाहर लौट आना होता था। वह शक्तिहीन होने के कारण विरोध भी नहीं कर पाती थीं। वहीं जियावुडुन बताती हैं कि जो महिलाएँ सेल से निकलती थीं, उनमें कुछ तो लौट आती थीं और कुछ हमेशा के लिए गायब हो जाती थीं। जो लौटती थीं, उन्हें कुछ भी बताने की मनाही होती थी।

जियावुडुन के अनुसार, आप किसी को कुछ बता नहीं सकते सिर्फ़ चुपचाप वहाँ जाकर लेट जाना है। पूरी व्यवस्था पर बात करते हुए वह कहती हैं कि ये सब सिर्फ़ हर किसी की आत्मा को मारने के लिए किया जाता है। कई-कई लोगों के सामने एक अकेली महिला का बलात्कार होता है। शरीर के हरेक हिस्से पर दाँतों से काटा जाता है। पता ही नहीं चलता बलात्कार करने वाला इंसान है या जानवर।

शिनजियांग की एक महिला केलबिनूर सेदिक जो कैंप में चीनी भाषा सिखाने के लिए भेजी जाती थीं, वह भी अब चीन से कहीं और जा चुकी हैं और अपने अनुभवों पर खुलकर बताती हैं। उनके अनुसार कैंप में महिलाओं को बहुत नियंत्रित रखा जाता है। उन्हें एक पुलिस महिला ने स्वयं बताया कि वहाँ रेप एक कल्चर बन गया है। महिला पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि बात सिर्फ़ रेप तक सीमित नहीं है। महिलाओं को बिजली के करंट से भी मारा जाता है।

चार तरह से उइगर महिलाओं को बिजली के करंट दिए जाते हैं- पहला चेयर से, दूसरा दस्तानों से, तीसरा हेलमेट से और चौथा गुदा द्वार में छड़ी घुसा कर। वह कहती हैं कि ये दर्द इतना भयंकर होता है कि क्लास के दौरान भी उन्हें आवाजें सुनाई पड़ती हैं। 

पहली बार उइगर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार की कहानी प्रकाश में नहीं आई है। इससे पहले भी कई बार विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा चुका है कि कैसे वहाँ चीनी अधिकारी मुस्लिम महिलाओं का रेप करते हैं। उनका गर्भ गिरवाते हैं। उनके गुप्तांगों में मिर्ची का पेस्ट आदि डालते हैं।

इसके अलावा कॉन्सनट्रेशन कैंप में रह चुके पूर्व बंदी इन बातों को भी बता चुके हैं कि उइगर मुस्लिमों को वहाँ सुअर का माँस जबरन खिलाया जाता है और मंडारिन बोलने का दबाव बनाया जाता है। इतना ही नहीं, चीन में जिन मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्प में भेजा जाता है, उनके घर की निगरानी रखने के लिए चीनी नागरिकों को हायर किया गया है। ये चीनी नागरिक उइगर मुस्लिमों के घर पर निगरानी रखते हैं। निगरानी के नाम पर इन उइगरों के घर-परिवार की महिलाओ के साथ जाकर उनके बिस्तर पर भी सोते हैं।

उत्तर प्रदेश : भारत के कानून को भूल जाओ, सिर्फ़ शरिया को मानो : दारोगा मंसूर अहमद, कानपुर पुलिस

ट्रिपल तलाक पीड़िता हिना परवीन
पीड़िता हिना परवीन 
उत्तरप्रदेश के कानपुर में हिना परवीन को उसके शौहर नूरजादे ने सऊदी अरब जाकर मोबाइल से तीन तलाक दे दिया। ससुराल वालों ने पीट-पीटकर घर से भगा दिया। देवर ने ‘छपाक-2’ बनाने की धमकी दी। जब न्याय की गुहार लगाई तो इंसाफ की जगह उसे शरीयत मानने की सलाह दी गई।
कार्रवाई के बदले थाने के मुस्लिम दारोगा मंसूर अहमद ने उसे बताया कि तीन तलाक कानून कुछ नहीं होता। शरीयत के हिसाब से उसका तलाक हो गया है। अब वह उसी को माने। दरोगा ने महिला के विरोध पर यह भी कहा कि उसके जैसी लड़कियों के कारण ही लोग मुस्लिमों के मामले में हस्तक्षेप करते हैं।
दारोगा ने महिला से यह भी कहा, “तुम पहली लड़की नहीं हो, जिसे तीन तलाक मिला। ये मुस्लिमों में शरिया कानून के तहत होता आया है, जिसे तुम्हें मानना चाहिए, भारत के कानून को भूल जाओ, सिर्फ़ शरिया को मानो।”
क्या है पूरा मामला 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर के सुजातगंज निवासी हिना परवीन का निकाह पिछले साल 5 जुलाई को अजीतगंज के नूरजादे उर्फ इशान से हुआ था। निकाह के तीन माह बाद ही नूरजादे सऊदी अरब चला गया। 27 अक्टूबर को उसने परवीन को मोबाइल के जरिए तीन तलाक दिया। ससुराल ने भी तलाक की जानकारी पाते ही उसे पीट-पीटकर घर से निकाल दिया।
इसके बाद हिना ने पति नूरजादे, सास-ससुर, देवर, नंद, बहनोई समेत 8 लोगों के ख़िलाफ़ 4 नवंबर को बाबूपुरवा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। हिना ने आरोप लगाया कि निकाह के बाद उसके ससुराल वाले 5 लाख रुपए की माँग कर रहे थे। लेकिन उसके पिता ये बड़ी रकम देने असमर्थ थे। इसलिए साजिश के चलते उसका तलाक करवाया गया।
महिला के मुताबिक जब उसे ससुराल वालों के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई तो उसके देवर फैसल ने एसिड अटैक करके छपाक-2 बनाने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने इसी साल जनवरी में वीडियो बनाकर मदद माँगी थी।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हिना परवीन को डर था कि उनके मामले की जाँच में बाधा आ जाएगी, क्योंकि उनके ससुराल वाले बाबू पुरवा थाने में पुलिस को प्रभावित कर सकते हैं। इसकी वजह से, उसने अधिकारियों से उसका मामला रेल बाजार पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित करने की माँग की। फिर उसका केस रेल बाजार में स्थांतरित करवाया गया। वहाँ मंसूर अहमद को जाँच सौंपी गई। लेकिन उन्होंने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। फिर ये केस पवन दुबे को दिया गया।
तीन तलाक पर कानपुर पुलिस की निष्क्रियता 
11 अगस्त को इस मामले में इंस्पेक्टर पवन दुबे ने हिना के पति नूरजादे को गिरफ्तार करके जेल भेजा। हैरानी की बात ये है कि एफआईआर से नूरजादे को छोड़कर सभी का नाम हटा दिया गया है। हिना ने इसके लिए पुलिस की निष्क्रियता को आरोप लगाया। उसने कहा कि उसे अपने शौहर और उसके परिवार के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाए 9 महीने हो गए हैं। लेकिन उनके खि़लाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हिना का यह भी कहना है कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि उसके पति ने पुलिस को 50 हजार की घूस दी ताकि उसके परिवार वालों का नाम एफआईआर से हटा दिया जाए। फोन रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए हिना ने बताया कि उससे साफ पता चल रहा है कि उसके शौहर ने अपने परिवार के साथ मिल कर कर उसके ख़िलाफ़ साजिश रची। उसने उस रिकॉर्डिंग में माना है कि उसने हिना से निकाह भी पैसों के लिए किया था।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में नूरजादे को पुलिस प्रशासन और प्रधानमंत्री को लेकर भी घटिया भाषा का प्रयोग करते सुना जा सकता है। ऐसे में हिना का सवाल है कि इतना पुख्ता सबूत होने के बाद भी पुलिस एक्शन क्यों नहीं ले रही।
हिना यह भी पुष्टि करती है कि वह बाबू पुरवा थाने के सीओ आलोक सिंह से मिली थी और यह पूछा था कि पुलिस ने आरोपितों का नाम एफआईआर से क्यों हटाया। आलोक सिंह ने कथित तौर पर हिना को आश्वासन दिया कि वह इस मामले में तेजी लाएँगे। उसने कहा कि आलोक सिंह के निर्देश पर, IO पवन दुबे ने उसे फोन किया और कॉन्फ्रेंस कॉल पर पूर्व IO मंसूर अहमद को ले लिया। हिना के मुताबिक, पहले पवन दुबे ने ही उसे बताया कि मॅंसूर अहमद ने मामले के अन्य आरोपितों के नाम हटा दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया।
हिना परवीन जो पिछले 9 महीनों से पर्याप्त सबूतों के आधार पर न्याय माँग रही हैं, उसकी अब भी यही माँग है कि पुलिस को सारे आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए।

चीन के 'यातना शिविरों' में घंटों भूखे रखे जाते हैं उइगर मुसलमान

Uighurs rally in New Yorkचीन के शिंजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के मानवाधिकार पैनल ने अगस्‍त में यहां करीब 10 लाख उइगर मुसलमानों को विभिन्‍न शिव‍िरों में नजरबंद रखे जाने की बात कही थी। अब ह्यूमन राइट्स वाच ने इसका खुलासा किया है कि इन शिविरों में किस तरह उइगर मुसलमानों पर अलग राजनीतिक विचारों को थोपा जाता है और इन्‍हें नहीं मानने पर तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की एक टीम ने शिंजियांग के शिविरों में पूर्व में रह चुके 58 लोगों का इंटरव्‍यू किया है, जिससे क्षेत्र में उइगर मुसलमानों को दी जाने वाली यातनाओं का खुलासा हुआ है। ह्यूमन राइट्स वाच की रिपोर्ट के अनुसार, इन शिविरों में बंद उइगर मुसलमानों को चीनी भाषा मैंडरिन सीखने पर मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, उन्‍हें चीन का प्रॉपगैंडा गीत गाने पर भी मजबूर किया जाता है।
uighur communityरिपोर्ट के अनुसार, निर्देश नहीं मानने पर उन्‍हें घंटों भूखा रखा जाता है और दिन-रात खड़े रहने पर मजबूर किया जाता है। यहां तक कि उन्‍हें एकांत कोठरियों में बंद कर मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। यही नहीं, उन्‍हें किसी भी वक्‍त हिरासत में ले लिया जाता है और इस संबंध में प्रक्र‍ियाओं का भी पालन नहीं किया जाता। यहां तक कि उन्‍हें धार्मिक रीति-रिवाजों के पालन से भी रोक दिया जाता है।
चीन हालांकि इस तरह के शिविर होने की बात से इनकार करता रहा है और उसने इसे म‍हज 'ट्रेनिंग सेंटर' बताया है, जिसका मकसद क्षेत्र के आर्थिक विकास को मजबूती प्रदान करना है। लेकिन ह्यूमन राइट्स वाच के अनुसार, शिंजियांग में इस्‍लामिक चरमपंथियों व अलगाववादियों से निपटने के नाम पर चीन ने क्षेत्र में रहने वाले अल्पसंख्यक उइगर मुसलमानों पर कठोर पाबंदियां लगाई हैं और हाल के वर्षों में इन्‍हें अधिक कड़ा कियाहै। 
शिंजियांग के इन शिविरों में रह चुके लोगों का इंटरव्‍यू करने वाली हांगकांग की ह्यूमन राइट्स वाच रिसर्चर माया वांग का कहना है कि क्षेत्र में धार्मिक रीतियों के अनुपालन पर लगातार नजर रखी जाती है। लोगों से अक्‍सर उनकी प्रार्थना पद्धति को लेकर सवाल किए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में सरकारी अधिकारियों का नियमित दौरा भी होता रहता है, जिससे क्षेत्र में इस्‍लाम का अनुपालन लगभग प्रतिबंधित हो गया है। 
क्यों इस्लामिक देश उड़गर मुसलमानों को मिल रही यातनाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं?  
दुनिया के किसी भी हिस्से में मुस्लिम समाज के खिलाफ हिंसा के संबंध में इस्लामिक देश खासतौर से सऊदी अरब, पाकिस्तान आवाज उठाते हैं। लेकिन चीन में उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकार हनन के मामले में ये देश चुप्पी साधे हुए हैं। इतना ही नहीं, चीन में मुस्लिम त्यौहार, इस्लामिक मान्यताएँ तो दूर, नमाज आदि पर पाबन्दी है। ये बात अलग है कि यूरोप और अमेरिका इस संबंध में चीन की आलोचना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की टीम ने करीब तीन हफ्ते पहले चीन का दौरा किया था। टीम ने कहा था कि ये समझ के बाहर है कि उइगर समुदाय के लोगों को चीन ने री एजुकेशन कैंप में क्यों रखा है।
अमेरिका के दोनों प्रमुख दल रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने चीन की इस बात के लिए आलोचना की थी कि वो उइगर समुदाय के लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सीनेटर मार्को रुबियो का कहना था कि चीनी दमन के खिलाफ समान विचार वाले देशों को एक मंच पर आना होगा। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो से अपील करते हुए कहा था उन्हें इस संबंध में कड़ी कार्रवाई के बारे में सोचना चाहिए। 
यूरोपियन यूनियन के देशों ने भी इस संबंध में चिंता जताई है। लेकिन दुनिया के कई मुस्लिम देशों मसलन इंडोनेशिया, मलेशिया पाकिस्तान और सऊदी अरब की तरफ से चीन की आलोचना सुनने को नहीं मिला है। इसके अलावा तुर्की के रवैये पर जानकारों को आश्चर्य हो रहा है। दरअसल तुर्की भाषी उइगर समुदाय के लोगों को बसाने के लिए वहां की सरकार की तरफ से पहल की गई थी। लेकिन तुर्की सरकार अब खामोश है। बताया जा रहा है कि चीन के साथ कारोबारी संबंध होने की वजह से इस्लामिक देश विरोध करने से बच रहे हैं। दुनियाँ में मुसलमान चीन उत्पादन का दिल खोलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी में चीनी उत्पादन का बहिष्कार करने का साहस नहीं।