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उइगर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार : नंगा करो, हथकड़ी लगाओ, चीनी मर्दों के पास भेजो… गुदा द्वार में छड़ी घुसा कर करंट

                                              उइगर मुस्लिम महिलाओं की हालत (फोटो साभार: बीबीसी)
चीन के शिनजियांग प्रांत में नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर उइगर मुसलमानों पर अत्याचार दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में अभी तक चीनी अधिकारियों की तानाशाही और जुल्म की खबरें आती थीं। मगर, अब पता चल रहा है कि वहाँ किस तरह री-एड्यूकेशन के नाम पर उइगर महिलाओं का एक सिस्टम के तहत बलात्कार किया जाता है और कैसे शीं जिनपिंग के नेतृत्व में चीन का मकसद किसी समुदाय में कोई सुधार करना नहीं बल्कि उन्हें पूरी तरह बर्बाद करना है। 

हाल में बीबीसी में प्रकाशित खबर में उइगर मुस्लिम महिलाओं पर होते जुल्म की विस्तृत चर्चा है। रिपोर्ट में बीबीसी ने कुछ पीड़िताओं का जिक्र किया है, जिन्हें उस डिटेंशन कैंप में महीनों रखा गया। इनमें से तुरसुनय जियावुडुन (Tursunay Ziawudun) आरोप लगाती हैं कि कैंप में चीनी अधिकारी देर रात जेल में आते हैं और अपने लिए एक महिला का चुनाव करते हैं। इसके बाद उसे अंधेरे कमरे में ले जाया जाता है, जहाँ सर्विलांस के लिए कोई कैमरे नहीं होते।

कई रात चीनी पुरूषों के हवस का शिकार हो चुकी जियावुडुन अब अमेरिका में हैं। लेकिन उनके लिए वो समय भुला पाना असंभव है। वह कहती हैं कि महिलाएँ हर रात जेल से निकाली जाती हैं और एक के बाद एक मास्क पहना हुआ चीनी आदमी उनका रेप करता है। वह खुद कई बार प्रताड़ित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 3 मौकों पर उनके साथ गैंग रेप भी हुआ। एक समय में दो या तीन लोग उन पर हावी हुए।

बीबीसी की रिपोर्ट में एक अन्य महिला गुलजिरा ऑलखान (Gulzira Auelkhan) का भी जिक्र है। वह भी कैंप में 18 महीने रही थीं। गुलजिरा बताती हैं कि कैंप में उनसे महिलाओं के कपड़े उतरवा कर उन्हें चीनी मर्दों के पास भेजने को कहा जाता था। जिसके कारण वह महिलाओं को नंगा करती थीं, उन्हें हथकड़ी लगाती थीं और फिर चीनी मर्दों के पास उन्हें कमरे में भेज कर बाहर बैठती थीं। जैसे ही सारे मर्द निकलते थे, वह वहाँ दोबारा जाती थीं। कमरे को साफ करती थीं और महिलाओं को नहलाने के लिए ले जाती थीं।

पीड़िताओं के अनुसार, चीनी पुरूष रात बिताने के लिए सबसे खूबसूरत उइगर महिलाओं को चुनते थे और उसके लिए भुगतान भी करते थे। गुलजिरा इस पूरे तंत्र को संगठित बलात्कार की व्यवस्था कहती हैं। वह बताती हैं कि उन्हें कमरे में अपना काम करने के बाद बाहर लौट आना होता था। वह शक्तिहीन होने के कारण विरोध भी नहीं कर पाती थीं। वहीं जियावुडुन बताती हैं कि जो महिलाएँ सेल से निकलती थीं, उनमें कुछ तो लौट आती थीं और कुछ हमेशा के लिए गायब हो जाती थीं। जो लौटती थीं, उन्हें कुछ भी बताने की मनाही होती थी।

जियावुडुन के अनुसार, आप किसी को कुछ बता नहीं सकते सिर्फ़ चुपचाप वहाँ जाकर लेट जाना है। पूरी व्यवस्था पर बात करते हुए वह कहती हैं कि ये सब सिर्फ़ हर किसी की आत्मा को मारने के लिए किया जाता है। कई-कई लोगों के सामने एक अकेली महिला का बलात्कार होता है। शरीर के हरेक हिस्से पर दाँतों से काटा जाता है। पता ही नहीं चलता बलात्कार करने वाला इंसान है या जानवर।

शिनजियांग की एक महिला केलबिनूर सेदिक जो कैंप में चीनी भाषा सिखाने के लिए भेजी जाती थीं, वह भी अब चीन से कहीं और जा चुकी हैं और अपने अनुभवों पर खुलकर बताती हैं। उनके अनुसार कैंप में महिलाओं को बहुत नियंत्रित रखा जाता है। उन्हें एक पुलिस महिला ने स्वयं बताया कि वहाँ रेप एक कल्चर बन गया है। महिला पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि बात सिर्फ़ रेप तक सीमित नहीं है। महिलाओं को बिजली के करंट से भी मारा जाता है।

चार तरह से उइगर महिलाओं को बिजली के करंट दिए जाते हैं- पहला चेयर से, दूसरा दस्तानों से, तीसरा हेलमेट से और चौथा गुदा द्वार में छड़ी घुसा कर। वह कहती हैं कि ये दर्द इतना भयंकर होता है कि क्लास के दौरान भी उन्हें आवाजें सुनाई पड़ती हैं। 

पहली बार उइगर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार की कहानी प्रकाश में नहीं आई है। इससे पहले भी कई बार विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा चुका है कि कैसे वहाँ चीनी अधिकारी मुस्लिम महिलाओं का रेप करते हैं। उनका गर्भ गिरवाते हैं। उनके गुप्तांगों में मिर्ची का पेस्ट आदि डालते हैं।

इसके अलावा कॉन्सनट्रेशन कैंप में रह चुके पूर्व बंदी इन बातों को भी बता चुके हैं कि उइगर मुस्लिमों को वहाँ सुअर का माँस जबरन खिलाया जाता है और मंडारिन बोलने का दबाव बनाया जाता है। इतना ही नहीं, चीन में जिन मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्प में भेजा जाता है, उनके घर की निगरानी रखने के लिए चीनी नागरिकों को हायर किया गया है। ये चीनी नागरिक उइगर मुस्लिमों के घर पर निगरानी रखते हैं। निगरानी के नाम पर इन उइगरों के घर-परिवार की महिलाओ के साथ जाकर उनके बिस्तर पर भी सोते हैं।

चीन में नरसंहार पर USA की रिपोर्ट : जबरन गर्भ-निरोधन, प्रताड़ना कैंपों में उइगर मुस्लिमों का सफाया

                       डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के अंतिम दिन उइगर मुस्लिमों को लेकर अमेरिका की बड़ी रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखने वाले स्टेट डिपार्टमेंट ने चीन को शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के ‘नरसंहार’ के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि चीन अपने उत्तर-पश्चिमी हिस्से में उइगर व अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ बड़े स्तर पर दमनकारी अभियान चला रहा है, जो मानवता के खिलाफ अपराध है। नजरबंदी कैम्पों और जबरन गर्भ-निरोधन की खास तौर पर निंदा की गई है।

इसे पिछले दशक में चीन का सबसे बड़ा मानवाधिकार उल्लंघन माना जाता है। गौर करने वाली बात ये है कि डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति के रूप में व्हाइट हाउस में अपना अंतिम दिन व्यतीत कर रहे हैं और इसी दौरान ये रिपोर्ट आई। पिछले 4 वर्षों से दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों में नए ‘खोज’ के बाद और दरार पड़ सकती है। अमेरिकी विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिका में कोई भी सरकार आ जाए, अगले कई वर्षों तक चीन एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी माइक पोम्पियो ने कहा कि नरसंहार अभी भी चालू है और क्रमबद्ध तरीके से चीन की सरकार द्वारा उइगर मुस्लिमों का सफाया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन पूरी तरह से इस एथनिक समूह को मिटा देना चाहता है। अब इस टिप्पणी के बाद जो बायडेन के अंतर्गत भी अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ नए प्रतिबंध लगा सकता है। वो खुद इसे एक भाषण में नरसंहार करार चुके हैं।

अमेरिका ने चीन की इस तरह से भर्त्सना अब तक नहीं की थी, जैसा उइगर मामले में किया गया है। यूएस ने कहा है कि एक राष्ट्रीय, एथ्निकल, रेसियल और धार्मिक समूह को बर्बाद किया जा रहा है। स्टेट डिपार्टमेंट के कई अधिकारी और अधिवक्ता इस पर कई दिनों से बहस कर रहे थे, लेकिन रिपोर्ट अब ट्रम्प प्रशासन के अंतिम दिन पेश की गई है। इस मामले में भी अमेरिका के कई अधिकारी आमने-सामने हैं। कुछ चीन पर कड़े प्रतिबंध की वकालत नहीं भी करते।

चीन पहले ही अमेरिका के आरोपों को नकार चुका है। उसका कहना है कि ये अमेरिकी राजनेताओं की एक ‘बेईमानी भरी छलरचना’ है। इसे वो ‘सदी की सबसे बड़ी कंस्पीरेसी’ कहता रहा है। शिनजियांग में प्रोपेगंडा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सु सुइसियांग ने कहा कि चीन का हर समुदाय का हर व्यक्ति सुरक्षित, सटीक और उचित बर्थ कंट्रोल मेजर अपनाने को स्वतंत्र है। उन्होंने ‘जबरन गर्भ-निरोधन’ के आरोप नकार दिए।

अमेरिकी मीडिया इसे देश में कोरोना वायरस से मरने वाले 4 लाख लोगों और कैपिटल हिल इमारत में हुई हिंसा की खबरों को ढकने का माध्यम भी बता रहे हैं। वहीं उइगर नेताओं ने अमेरिका की इस रिपोर्ट पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि ये पीड़ितों पर हो रहे अत्याचार को वैश्विक स्तर पर उठाने में काम आएगा। एक उइगर मुस्लिम की अम्मी ऐसे ही कैइस डिटेंशन कैंप में है। उसने भी इसका स्वागत किया। इसे पहले कनाडा ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को इस अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

एंटोनी जे ब्लिंकन को अमेरिका का नया स्टेट सेक्रेटरी नॉमिनेट किया गया है और उन्होंने भी इस रिपोर्ट का समर्थन किया है। उन्होंने चीन को सबसे बड़ी चुनौती बताया। कुछ अमेरिकी अधिकारी चाहते थे कि अमेरिका इसे ‘नरसंहार’ न कहे, क्योंकि उसने म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार को ‘एथनिक क्लींजिंग’ कहा था। जो बायडेन विभिन्न पदों पर रहते हुए चीन की कई बार सार्वजनिक आलोचना कर चुके हैं।

हाल ही में अमेरिका स्थित चीनी दूतावास के एक ट्वीट में चीन के शिनजियांग प्रान्त स्थित यातना शिविरों में रखी गई उइगर औरतों के लिए दावा किया गया था कि वे अब ‘स्वच्छंद’ हैं और अब वह बच्चे ‘पैदा करने की मशीन’ नहीं रह गई हैं। ट्वीट के सामने आते ही इसकी जम कर आलोचना हुई, जिसके बाद ट्विटर ने भी इस ट्वीट को हटा दिया था। दूतावास द्वारा शेयर किए गए लेख में दावा किया गया था कि चीन ने उस क्षेत्र में ‘मजहबी कट्टरपंथ’ समाप्त कर दिया है।

चीन : 18 लाख उइगर मुस्लिम कैद, 613 इमाम गायब; इस्लामिक तरीके से दफनाने भी नहीं दे रहा है चीन

                                                                                                                              प्रतीकात्मक 
चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के सरकारी दमन को लेकर कई रिर्पोटें सामने आ चुकी है। अब पता चला है कि सैकड़ों इमाम भी हिरासत में लिए जा चुके हैं। इमामों को हिरासत में लिए जाने से उइगरों के बीच दहशत का माहौल है। वे मरने से भी डरते हैं, क्योंकि इस्लामिक तरीके से उन्हें दफनाने वाला भी कोई नहीं है। रेडियो फ्री एशिया के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने य​ह ​बात कही है। नॉर्वे में रहने वाले इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ रिफ्यूज नेटवर्क (ICORN) के अब्दुवेली अयुप ने बताया कि शिनजियंगा के उइगरों से बातचीत के बाद यह तथ्य सामने आया। इससे पता चला कि करीब 613 इमाम गायब हैं। 2017 से ही करीब 18 लाख उइगरों और अल्य अल्पसंख्यक मुस्लिमों को कैंपों में कैद करके रखा गया है।

वाशिंगटन स्थित उइगर मानवाधिकार प्रोजेक्ट (UHRP) द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। वेबिनार का विषय था: कहॉं हैं इमाम, उइगर धार्मिक हस्तियों को बड़े पैमाने पर हिरासत में रखने के साक्ष्य। अयूप ने बताया कि उन्होंने 2018 में मई से नवंबर के बीच उइगरों से बातचीत की। इससे पता चला कि इमामों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है।

उइगर समुदाय की भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के लिए लड़ने की वजह से अयुप को 2013-2014 के दौरान महीनों तक कैद में रह कर यातनाएँ झेलनी पड़ी थी। उन्होंने कैंपों में रह चुके 16 कैदियों से भी बातचीत की थी जिन्होंने बताया कि शिनजियांग में उइगरों को हिरासत में लेने की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

नीदरलैंड में अब निर्वासित जीवन बिता रहे एक कैदी ने बताया था कि शिनजियांग की राजधानी उरुमकी के कैंपों में तो जाने के लिए इतनी भीड़ है कि लोगों को पंजीकरण करने के बाद इंतजार करना पड़ता है। जब कोई मर जाता है तो दूसरा कैदी अंदर भेजा जाता है। उनकी मस्जिदें ध्वस्त कर दी गई हैं। इमाम गिरफ्तार हो चुके हैं। यहॉं तक कि मौत के बाद इस्लामिक तरीके से दफनाने तक का अधिकार नहीं है।

लंदन यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ़ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ (SOAS) में प्रोफेसर रैशेल हैरिस ने बताया कि उइगर समुदाय के सिर्फ पुरुष इमामों को ही निशाना नहीं बनाया जा रहा है। औरतों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस मुद्दे पर कहना था कि ऐसे इमाम जो पुरुष हैं, सिर्फ वही ऐसे धार्मिक चेहरे नहीं हैं जिन्हें उइगर समाज में निशाना बनाया जा रहा है। रैशेल ने कहा, “वह मस्जिदों में सक्रिय नहीं होती हैं स्वाभाविक तौर पर उनकी भूमिका घरों में अहम होती है। लेकिन वह हर ज़रूरी काम काम करती हैं जो पुरुष इमाम करते हैं। वह (महिला इमाम) महिलाओं की मदद करती हैं इसलिए वह महिलाओं के अंतिम संस्कार में भूमिका निभाती हैं। वह बच्चों को कुरान पढ़ाने में मदद करती हैं। इसके अलावा वह सामजिक विवादों को सुलझाने में भी काफी मदद करती हैं।” 

उइगर मुस्लिमों को भेज सकता है कॉन्सेंट्रेशन कैंप : रमदान में रोजा रखना ‘अतिवाद’ का चिह्न

रमदान चीन उइगर मुस्लिम
नागरिकता संशोधक कानून से लेकर आज व्यापक रूप से फैली कोरोना बीमारी से भारत ही नहीं विश्व लड़ रहा है, लेकिन भारत में अराजक तत्व बेगुनाहों को सच्चाई से दूर रख, इसे इस्लामॉफ़ोबिआ नाम देकर मुस्लिम समाज को भड़काने में व्यस्त हैं। जबकि सच्चाई यह है कि जितना खुशहाल मुस्लिम भारत में है, उतना विश्व तो क्या, किसी मुस्लिम देश में भी नहीं। 
भारत में ही भारतीय कानूनों और प्रधानमंत्री के विरुद्ध जहर उगलने का साहस कर सकते हैं, लेकिन किसी मुस्लिम देश में ऐसा करने पर जेलों में ढूंस दिया होता। भारत में आक्रांता बाबर की मस्जिद के लिए कितना सियापा किया, परन्तु मक्का में हिलाल मस्जिद कहाँ गयी, किसी में बोलने का साहस नहीं। 
चीन के शिनजियांग में उइगर मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक आबादी के लोगों के साथ होने वाला बर्ताव अब किसी से छिपा नहीं है। विश्व उइगर कांग्रेस के अनुसार रमदान के महीने में वहाँ से खबर है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने अपने अत्याचार उन लाचार लोगों पर और बढ़ा दिए हैं।
एक ओर जहाँ अन्य देशों में इस्लाम को मानने वाले इन दिनों रोजा रखकर अपनी इबादत कर रहे हैं। वहीं शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों व अन्य अल्पसंख्यक (कज़ाक और किर्गिज लोगों) को पीड़ा देने के लिए उनकी कुरानें जलाई जाती हैं, हलाल खाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। साथ ही रोजे के महीने में रेस्टुरेंट आदि को भी खुले रखने के लिए मजबूर किया जाता है।
सुबह से लेकर शाम तक रोजा रखना रमदान की पहचान है। लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशलन में पिछले साल प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि शिनजियांग में सीसीपी ने इसे ‘अतिवाद का चिह्न’ बताया है। साथ ही रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के अनुसार रमदान के दौरान, चीन के सीसीपी का मानना है कि ‘अतिवाद’ के अन्य चिह्नों में उइगर मुस्लिम का रमदान के दौरान ‘सामान्य रूप से व्यवसाय का संचालन करना’ और महिलाओं का मजहबी कपड़े पहनना आदि शामिल है।
रिपोर्ट बताती है कि धार्मिक संबद्धता के ये प्रदर्शन, चाहे खुले हों या निजी, कम्युनिस्ट राष्ट्र द्वारा निषिद्ध हैं। इस तरह के रिवाज को प्रदर्शित करने के लिए उइगर मुस्लिमों को चीनी कॉन्सेंट्रेशन कैंपों में काम करने की सजा दी जा सकती है।
चीन में उइगर मुसलमानों को दी जाने वाली प्रताड़नाओं का कोई अंत होता नहीं दिख रहा। वहाँ उक्त प्रांत में चीनीकरण के नाम पर उइगर मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। उनपर आम दिनों में भी इस्लामिक रीति-रिवाजों और इस्लामी टोपी लगा कर घूमने पर पाबंदी है। इसके अलावा नमाज भी पुलिस की निगरानी में अनुमति लेकर ही पढ़ी जा सकती है। इतना ही नहीं वहाँ के हालात ये हैं कि अल्पसंख्यकों के घरों की साज-सज्जा भी चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तय करती है।
कुछ दिन पहले की खबर पढ़ें तो मालूम पड़ेगा कि रेडियो फ्री एशिया ने ही बताया था कि उइगर मुसलमानों पर अपना घर चीनी परंपरा के अनुरूप डेकोरेट करने का दबाव बनाया गया और इसके लिए चीन ने 575 मिलियन डॉलर का फंड केवल उइगर मुस्लिमों के आधुनिकीकरण के लिए जारी किया। जिसमें उनके पारंपरिक डिजाइन के घरों को नष्ट करना भी शामिल था।
चीन में कब्रिस्तानों की तबाही का आलम  
चीन ने 5 साल में तबाह कर दिए कई इस्लामी कब्रगाह
उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार के लिए चीन हमेशा नए-नए तरीके अपनाता रहा है। अब चीन ने उइगर मुस्लिमों के मरने के बाद भी उनकी शांति छीनने वाला काम शुरू किया है। चीन में उइगर मुस्लिमों के कई कब्रगाहों को तबाह कर दिया गया है। ये वो कब्रगाह थे, जहाँ उइगर मुस्लिमों की कई पीढ़ियों के लोगों को मरने के बाद दफ़न किया जाता रहा है। मृतकों की हड्डियाँ बिखरी पड़ी हैं और कब्रों को तहस-नहस कर दिया गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन ने उइगर मुस्लिमों को पूरी तरह मिटाने की ठान ली है। शिनजियांग में केवल 2 सालों में ही कई दर्जन कब्रगाहों को तबाह कर दिया गया है।
सैटेलाइट इमेज के अनुसार हुए खुलासे से इस बात का पता चला है। एएफपी ने कई फोटो जारी किए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि मृतकों की हड्डियाँ इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं और कब्रगाहों की ईंटें फैली हुई हैं। यह दिखाता है कि चीन ने इन कब्रगाहों को तबाह करने में जरा सी भी संवेदनशीलता का परिचय नहीं दिया और मृतकों तक को नहीं बख़्शा।

चीन ने इन कब्रगाहों को विकास की आड़ में तबाह किया है। कई कब्रगाहों को तबाह करने के पीछे विकास और इंडस्ट्री बिठाने जैसे कारण आधिकारिक रूप से बताए गए। वहीं कई अन्य कब्रगाहों को तबाह करने के पीछे का कारण उन्हें मॉडर्न बनाने का प्रयास बताया गया। उइगर मुस्लिमों का कहना है कि चीन की सरकार उनके जीवन के हर एक क्षेत्र पर कब्ज़ा करना चाहती है। एक उइगर कार्यकर्ता ने बताया कि चीन उनके समाज की हर एक निशानी को मिटा रहा है ताकि कुछ दिनों बाद वे लोग ख़ुद के बारे में ही अनजान बन जाएँ।
एक उइगर कार्यकर्ता ने बताया कि उसके दादा के दादा जिस कब्रगाह में दफ़न किए गए थे, उस कब्रगाह को तबाह कर दिया गया है। उइगर कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके इतिहास, उनकी पहचान और उनकी पूर्वजों की हर एक निशानी मिटाई जा रही है। लगभग 10 लाख उइगर मुस्लिमों को पकड़ कर शिक्षा देने के नाम पर चीन के डिटेंशन कैम्पस में रखा गया है। वहाँ उन्हें अपने मजहब का कोई भी चीज प्रैक्टिस नहीं करने दिया जाता। अगर कुछ उइगर मुस्लिम बाहर भी हैं तो उन्हें वही सब करना होता है, जो चीन की सरकार चाहती है। खुले में नमाज पढ़ने से लेकर क़ुरान रखने तक, उन पर कई पाबंदियाँ हैं।
कई लोकप्रिय उइगर नेताओं या स्थानीय वरिष्ठ लोगों के मरने के बाद उनके कब्र पर उनका विवरण और तस्वीरें लगाई जाती हैं। चीन ने इन सब तक को भी तबाह कर दिया। चीन की सरकार ने कई उइगर कब्रगाहों को कहीं और शिफ्ट कर दिया है। हर कब्रगाह को तबाह करने के पीछे अलग-अलग आधिकारिक कारण गिनाए गए हैं। चीन ने जहाँ नए कब्रगाह बनाए हैं, वहाँ लिखा गया है कि ये कब्रगाह वातावरण को नुकसान नहीं पहुँचाता है और यहाँ सभ्य तरीके से अंतिम क्रिया संपन्न की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि उइगर अब किस रीति-रिवाज से अपने समाज के मृतकों को दफ़नाएँगे, यह भी चीन ही तय करेगा।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने बदजबान शोएब जमाई को अपने शो से निकाल ब.....
2017 से अब तक एक अनुमान है कि 1 मिलियन से लेकर 3 मिलियन मुस्लिम अल्पसंख्यकों को चीन में कन्संट्रेशन कैंप में भेजा जा चुका है। हालाँकि, चीन हमेशा अपने ऊपर लगे इन इल्जामों को खारिज करता रहा है और कहता रहा है कि वे सब अनार के दानों की तरह संगठित हैं। लेकिन चीन में मुस्लिमों की दशा को दिखाता एक वीडियो भी सामने आया था। जिसे वॉर ऑन फियर नाम के यूट्यूब चैनल पर पिछले महीने अपलोड किया था। इसमें देखा गया था कि कई सौ की तादाद मे मुस्लिमों को बंदी बनाकर और उनकी आँखों को मूँदकर ट्रेन से शियानजिंग में स्थांतरित किया जा रहा था।

चीन को ऐसे घेरेगा अमेरिका : उइगुर मुसलमानों का मुद्दा UN में

उइगर चीन
चीन में उईग़ुर मुसलमानों पर हो रहे जिन अत्याचारों को पाकिस्तान या दूसरे मुस्लिम देशों ने उठाना था, उस मुद्दे को अमेरिका अंजाम देने जा रहा है। चीन में केवल उईग़ुर मुसलमानों पर ही अत्याचार नहीं हो रहे, बल्कि अन्य मुसलमानों पर भी इतने अत्याचार हो रहे हैं, जिन पर विश्व का समस्त मुस्लिम समाज मुँह में दही जमाए बैठे हैं, यदि चीन के मुकाबले भारत में उसका ...000000001 प्रतिशत होता, मुस्लिम समाज के सारे ठेकेदार सडकों पर आकर आसमान को सिर पर उठाने के साथ दंगाइयों को प्रोत्साहित करते, परन्तु चीन में रह रहे मुसलमान पर हो रहे ज़ुल्मों सितम पर सब ख़ामोश हैं, सारे गूंगे, बहरे और अंधे बने हुए हैं। 
वहां का मुसलमान अपनी ईद तो क्या, रोज नमाज़ भी छुपकर पढ़ता है। यहाँ तो बस एक बाबरी के नाम पर उकसाते रहते हैं, परन्तु वहां पर कम होती मस्जिदों की चिंता नहीं। किसी में चीनी दूतावास पर धरना या प्रदर्शन करने का साहस नहीं। मुसलमानों से चीनी उत्पादों के इस्तेमाल के बहिष्कार करने का फतवा जारी करने तक का साहस नहीं। चीन के आगे सभी भीगी बिल्ली बने हुए हैं। पाकिस्तान को कश्मीरी मुसलमानों की चिन्ता है, लेकिन चीन से वहां मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों पर बोलने का साहस नहीं, जबकि कश्मीर मुद्दे पर चीन के आगे नतमस्तक है।    
अमेरिका और चीन के मध्य विभिन्न मसलों को लेकर चल रही जंग के बीच अब दोनों देशों के बीच एक अन्य मसले पर भी ठन सकती है। दरअसल, अमेरिका ने चीन के उइगुर मुस्लिमों के लिए यूएन की जनरल असेंबली में समर्थन हासिल करने की घोषणा की है। इस कदम से अमेरिका एक बार फिर से चीन को घेरने की कोशिश करेगा। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने इसकी जानकारी दी।
पॉम्पियो ने कहा कि सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाली यूएन की जेनरल एसेंबली में इस बात को रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कई और सभाएँ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन सभाओं में वो बाकी देशों से इस मामले में संपर्क करेंगे और समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि वो चीन को इस अमानवीय कृत्य को रोकने में अन्य देशों से मदद माँगेंगे। 
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन में उइगुर मुस्लिमों को सामूहिक रूप से कैद में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उइगरों के साथ बर्ताव कर रहा है, वह दुनिया पर बदतरीन धब्बा है। उन्होंने इस मसले को चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा से इतर बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें अब तक कुछ सफलता मिली है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है और यह प्रक्रिया अभी भी चल रहा है।
पॉम्पियो ने कहा कि यूँ तो चीन के साथ उनकी बहुत सारी चुनौतियाँ हैं, लेकिन फिलहाल वो उइगुर मुस्लिमों की आजादी चाहते हैं, उन लोगों को मौलिक अधिकार दिलाना चाहते हैं, जिससे वो लोग वंचित हैं। साथ ही उन्होंने उन चीनी दावों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि शिविर धार्मिक चरमपंथ से प्रभावित लोगों को शिक्षित करने और बचाने के लिए लगाए गए थे।
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चीन में उइगर मुसलमानों पर अत्याचारों की बात किसी से छिपी नहीं है और अब दूसरे देशों में रह रहे उइगरों पर नकेल कसने की...

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जिम मैटिस डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार में रक्षा सचिव रह चुके हैं संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पूर्व रक्षा सचिव जिम मैटि....

चीन ने व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों को उइगरों के किसी भी दुर्व्यवहार से लगातार इनकार किया है, जो कहते हैं कि यह चरमपंथ और हिंसा का मुकाबला करने में बेहद सफल रहा है। हाल ही के वर्षों में बीजिंग द्वारा इस्लामवादियों और चरमपंथियों पर लगाए गए आरोप के बाद झिंजियांग में फैली अशांति में सैकड़ों लोग मारे गए। अधिकार समूहों और निर्वासन का कहना है कि हिंसा उइगुर लोगों के चीन के दमन के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है।