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कर्नाटक : कॉलेज में लड़कियों का वीडियो शूट करने का मामला; नूपुर शर्मा को विवादित बनाने वाला जुबेर फिर एक और हिन्दू लड़की को विवादित बना रहा

                                                            बेकसूर रश्मि सामंत के घर पहुँची कर्नाटक पुलिस
हाल ही में कर्नाटक के उडुपी से एक खबर आई। खबर में कहा गया कि ‘नेत्र ज्योति कॉलेज’ की 3 छात्राओं को निलंबित कर दिया गया है। मामला था कॉलेज के वॉशरूम में कैमरा लगाने का। खबरों में कहा गया कि कैमरा लगाने वाली छात्राएँ एक विशेष समुदाय से थीं। वहीं हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि पीड़िताएँ हिन्दू समाज से थीं। बताया गया कि ये लड़कियाँ दूसरी लड़कियों के अश्लील वीडियो बना कर अपने समुदाय के लड़कों को भेजती थीं।

कर्नाटक: उडुपी के कॉलेज में लड़कियों का वीडियो बनाया

इस खबर के सामने आने के बाद ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की अध्यक्ष रहीं रश्मि सामंत का एक ट्वीट आता है। उन्होंने लिखा कि आखिर अलीमातुल शैफा, शहबानाज़ और आलिया के बारे में बात क्यों नहीं की जा रही है? बता दें कि रश्मि सामंत उडुपी से ही ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने कहा कि इन लड़कियों ने सैकड़ों हिन्दू लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाए। साथ ही ये भी बताया कि अपने समाज के व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में इन वीडियो और तस्वीरों को सर्कुलेट किया गया।
साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि कई ऐसी पीड़ित लड़कियाँ हैं जो इस कारण इतनी अवसाद में चली गई हैं कि उनके मन में आत्महत्या के भी ख्याल आ रहे हैं। रश्मि सामंत ने कहा कि इसके बावजूद इस घटना की निंदा नहीं की जा रही है। साथ ही उन्होंने 1992 में अजमेर में हुए रेप कांड की बात की। बता दें कि 1992 में अजमेर के इस काण्ड का खुलासा हुआ था, लेकिन ये वर्षों से चल रहा था। 250 हिन्दू लड़कियों को ब्लैकमेल कर उनके साथ बलात्कार किया गया था।
पकड़े जाने के बाद इन तीनों लड़कियों ने दावा किया था कि वो किसी अन्य लड़की के साथ प्रैंक करने जा रही थीं, लेकिन गलती से दूसरी लड़की का वीडियो बन गया। इसके बाद पीड़ित लड़कियों ने कॉलेज प्रबंधन से शिकायत की। कॉलेज की डायरेक्टर रश्मि कृष्णा प्रसाद ने बताया कि पीड़िताएँ पुलिस वगैरह के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती थीं, लेकिन संस्थान ने पुलिस में पेटिशन दिया। जिन मोबाइल फोन्स में वीडियो होने की बात कही गई, उन्हें भी जाँच के लिए दे दिया गया।

रश्मि सामंत के घर में घुस गई पुलिस: वकील

आरोप है कि रश्मि सामंत के इस ट्वीट के बाद कर्नाटक पुलिस उनके पीछे पड़ गई। अधिवक्ता आदित्य श्रीनिवास ने ट्वीट कर के बताया कि सोमवार (24 जुलाई, 2023) को रात के 8 बजे कर्नाटक पुलिस के अधिकारी रश्मि सामंत के घर पहुँचे। उस समय वो घर से बाहर थीं। इसके बाद पुलिस वालों ने उनके माता-पिता से पूछताछ की और कई बार पूछा कि आखिर उनकी बेटी कहाँ हैं। आरोप है कि उनके पिता को कई बार फोन कॉल कर-कर के परेशान किया गया और उनकी बेटी के लोकेशन के बारे में पूछा गया।
आदित्य श्रीनिवासन ने बताया, “ये स्पष्ट है कि पुलिस मेरी क्लाइंट रश्मि सामंत के पीछे इसीलिए पड़ी है, क्योंकि उन्होंने उडुपी के कॉलेज में हिन्दू लड़कियों के वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की घटना की निंदा की। वो मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और देश-विदेश में इन मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं। उन्होंने ब्रिटिश संसद के ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स’ में लेस्टर में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा पर रिपोर्ट प्रकाशित की। उनके ताज़ा ट्वीट्स भी अभियक्ति की आज़ादी के तहत ही किए गए हैं।”
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि चूँकि संविधान के दायरे में रह कर ये किया गया है, इसीलिए कर्नाटक पुलिस ने टॉर्चर करने के लिए असंवैधानिक तरीका अपनाया है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा देश भर में जा चुका है, ऐसे में रश्मि सामंत के घर जाने से ये नहीं थमेगा। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रात के समय किसी महिला को इस तरह से गिरफ्तार करने के लिए पुलिस नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि अपने गृह जिले में हुए एक अपराध को लेकर रश्मि सामंत ने जागरूकता फैलाई।

फिर एक महिला के पीछे पड़ा मोहम्मद ज़ुबैर

रश्मि सामंत के घर कर्नाटक पुलिस का पहुँच जाना महज एक संयोग नहीं था। इससे पहले AltNews वाले मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्वीट कर के रश्मि सामंत और शेफाली वैद्य को निशाना बनाया था। बता दे कि मोहम्मद ज़ुबैर ने ही नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो वायरल किया था, जिस कारण एक वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद वो घर में कैद रहने को मजबूर हैं। इसके बाद राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तो महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की गला रेत कर हत्या कर दी गई।
मोहम्मद ज़ुबैर ने दावा कर डाला कि रश्मि सामंत लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने उन पर ‘महिला कार्ड’ खेलने का भी आरोप लगा डाला और अनजान यूट्यूब चैनल के हवाले से प्रोपेगंडा चलाने का आरोप मढ़ा। उसने दावा कर दिया कि ‘इंडिया टुडे’ के आर्टिकल में भी दक्षिणपंथियों को कोट किया गया, जबकि ये भ्रामक सूचनाएँ हैं। उसने उडुपी पुलिस को टैग कर के रश्मि सामंत के खिलाफ एक्शन लेने के लिए भड़काया।
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जबकि ये साफ़ है कि सच्चाई यही है कि ये मामला दो समुदायों का था। यहाँ तक कि ‘द न्यूज मिनट’ ने स्पष्ट लिखा कि निलंबित की जाने वाली छात्राएँ मुस्लिम समाज से थीं। वहीं मीडिया संस्थान ने ये भी लिखा कि जिन लड़कियों के वीडियो बनाने की बात कही गई वो मुस्लिम समाज से थीं। इसी तरह ‘मंगलौर टुडे’ ने भी लिखा कि एक समुदाय की लड़कियों ने दूसरे समुदाय की लड़कियों का वीडियो बनाया, जिसके बाद तनाव हुआ। ऑपइंडिया आरोपितों के नामों की पुष्टि की कोशिश कर रहा है।

क्या हिजाब की आड़ में लड़के बुर्का इस्तेमाल कर रहे हैं?

कर्नाटक के हिजाब विवाद को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर कई तरह की गलत जानकारियाँ लगातार शेयर की जा रही हैं। इन गलत जानकारियों से लोगों को भड़काने की कोशिश भी हो रही है। ऐसी ही एक वायरल पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर की जा रही है।

सोशल मीडिया पर किया जाने वाला दावा

यह वीडियो इस दावे के साथ वायरल की जा रही है कि कर्नाटक पुलिस ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब प्रतिबंध का विरोध करने वाले मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोग बुर्का पहने हुए थे और बुर्का उतारने पर पता चलता है कि उनमें से 40% पुरुष थे।
कर्नाटक पुलिस की फैक्ट चेक साइट के अनुसार यह वीडियो कर्नाटक की नहीं, बल्कि तेलंगाना की है। घटना 18 अगस्त 2020 की है। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को तेलंगाना से गिरफ्तार किया गया था। वह आंध्र प्रदेश में शराब की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था। उसने खुद की पहचान को छिपाने के लिए बुर्का पहन रखा था।
यह घटना कर्नाटक में नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के पंचलिंगाला चेक पोस्ट पर हुई थी। ऐसे में इस वीडियो की सच्चाई जाने बिना लोग इसे खूब शेयर कर रहे हैं और पुलिस की आलोचना कर रहे हैं।
कर्नाटक में चल रहे बुर्का विवाद (Hijab Controversy) पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। सोमवार (21 फरवरी 2022) को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई एक बार फिर बिन किसी नतीजे पर पहुँचे टल गई। इस दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने इस बात को स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने 5 फरवरी वाले सरकारी आदेश में हिजाब पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने सिर्फ कॉलेज विकास समितियों को यूनिफॉर्म पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

बेंगलुरु दंगा : कर्नाटक सरकार ने दिए न्यायिक जाँच का आदेश

बेंगलुरु दंगा न्यायिक जाँच
कर्नाटक गृहमंत्री बसवराज बोम्मई
बेंगलुरु की सड़कों पर उग्र मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ पत्थर चलाते हुए और जम कर तोड़-फोड़ करती हुई नज़र आई। अब कर्नाटक की राज्य सरकार और प्रशासन दंगाइयों पर कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर चुका है। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।
न्यायिक जाँच का फैसला कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में लिया गया था। इस जाँच की अगुवाई मजिस्ट्रेट करेंगे। बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हुए इन दंगों में 3 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं।  
कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “बेंगलुरु में हुई दंगों की न्यायिक जाँच होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तमाम नीति-निर्देशों को मद्देनज़र रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जाँच मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। इस जाँच के बाद षड्यंत्र रचने वाले असल आरोपित सामने आएँगे।”
मंगलवार की शाम कांग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर हज़ारों मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं। 
बेंगलुरु दंगा प्लानिंग
बेंगलुरु में हुए दंगों का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलने की इजाज़त मांग रहे थे। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि इस्लामियों की अनियंत्रित भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति माँगी।
जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे कट्टरंथी मुसलमानों की भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया।
इसके अलावा कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा था कि राज्य सरकार बेंगलुरु हिंसा की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा। 
अब आरिफ साहब के इस पुराने वीडियो को गंभीरता से सुनिए, 
सूत्रों के अनुसार, चर्चा यह भी हो रही है कि केवल क्षति भरपाई नहीं, बल्कि दंगे में मारे गए लोगों के परिवारों का भी खर्चा इन दंगाइयों से करवाने की बात पर भी चर्चा हो सकती है, किसी महीने न देने पर ब्याज सहित भुगतान करवाने का प्रावधान हो। अपने परिवार से पहले उस पीड़ित परिवार को खर्चा देना होगा। ताकि भविष्य में कोई दंगा करने से पहले आत्म मंथन करे। अगर क्षति के साथ इस बात पर सहमति बनती है, तो यह कदम देश में साम्प्रदायिक दंगे रोकने में सहायक होगा। 
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वीडियो से लिए गए स्क्रीनशॉट राम मंदिर भूमि पूजन के बाद 5 अगस्त का दिन पूरे देश में दीपावली की तरह मनाया गया। हर हिंद.....
मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”
हजारों मुसलमानों की भीड़ ने पुलिस स्टेशन को घेर लिया, डीसीपी सहित पुलिस की गाड़ियों को आग लगा दी गई। विधायक विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर में तोडफ़ोड़ और उनकी गाड़ियों को आग लगा दी,आसपास के इलाकों में दंगे शुरू हो गए, पुलिस मूकदर्शक और खुद को बचाती दिखी। फिर भी 80 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हैं एवं इसमें कितने पुलिसकर्मी, हिन्दु मरे, कितने घरों को आग लगाई, कितने लूटे इनके आँकड़े कल तक मिल सकेगें।
यहाँ विधायक तथाकथित दलित है (दृष्टि में मात्र हिन्दु है) परन्तु देखिए यहाँ एक भी दलित चिंतक इन जेहादियों के इस दंगा फसाद पर नहीं बोलेगा। अब सोचना यह है कि भारत, सनातन संस्कृति - सभ्यता - धरोहर और खुद हिन्दु क्या इन जेहादियों के बीच जिंदा रह सकता है?
वे कमलेश तिवारी की हत्या कर देते हैं हम क्या कर पाते हैं ? वे राम, कृष्ण , ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सीता, सरस्वती सबको गाली दे जाते हैं और हम मूकदर्शक रहते हैं। हम तो इस अपमान के खिलाफ दो शब्द लिखने में भी काँप जाते हैं। इधर खुलेआम  एक बेशर्म प्रधानमंत्री घोषणा कर गया कि भारत के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है।
"वे जितने आक्रामक हैं, हमें मिटाने को हम उतने ही निश्चिंत हैं, भाईचारा निभाने को।" 
क्योंकि हमें भरोसा है - पुलिस पर, सरकार पर, न्यापालिका पर, मीडिया पर बेशक ये सब हमें कश्मीर, पंजाब, बंगाल, केरल, मेवात आदि आदि में बचा न सकें हों।

पर अधिकांशतः हिंदुओं को ये बातें राजनैतिक, साम्प्रदायिक और महत्वहीन लगती हैं।

बेंगलुरु दंगे की पूरी प्लानिंग : पहले CCTV कैमरों और स्ट्रीटलाइट्स को तोड़ा, फिर धारदार हथियार से थाने पर हमला

बेंगलुरु दंगा प्लानिंग
बेंगलुरु में फेसबुक पर पैगेम्बर के लिए हुई टिप्पणी पर हुए दंगे से भारत में सेकुलरिज्म का ढोल पीटने वाले समस्त नेताओं को तुष्टिकरण, सेकुलरिज्म और गंगा-जमुना तहजीब का ढोल पीटना बंद कर देना चाहिए। अब सेकुलरिज्म के नाम पर वोट देने वाले समस्त मतदाताओं--चाहे वह किसी भी जाति अथवा मजहब से हो--को भी आंखें खोलकर अपने मत का अधिकार करना चाहिए। दिल्ली में कट्टरपंथी बक रहे हैं, "राम नहीं अल्लाह बोलो ...."(नीचे लिंक देखें) वास्तव में इन कट्टरपंथियों की नींद अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय वाले दिन से हराम हुई है, जो इस बात को भी प्रमाणित करती है कि इनकी सोंच सेकुलरिज्म की नहीं बल्कि मुगलों वाली है।  
दंगे में क्या मुसलमान नहीं मरा, लेकिन इनको उकसाने वाला नहीं, मरा बेगुनाह मुसलमान। ये कट्टरपंथी मजहब के नाम पर अपने तिजोरियां भरते हैं और फिर दंगों में मरे बेगुनाहों की लाशों पर बैठ मालपुए खाते हैं। दूसरे, यह दंगा चाहे दिल्ली में हो या बेंगलुरु एकदम धारदार हथियार, पेट्रोल बम और रॉड कहाँ से आ जाती है, कर्नाटक सरकार को इन दंगाइयों के घरों की सघन तलाशी लेकर, जिन घरों से भी इस तरह के हथियार बरामद हो, पत्थर बरामद हो या जमा पत्थरों के निशान भी मिलने पर तुरंत कोर्ट में पेशकर जेलों में डालें। 
दूसरे, सभी को एकजुट होकर सरकार और कोर्ट पर दबाव बनाएं कि "जो भी हिन्दुओं के देवी-देवताओं पर भद्र टिप्पणी करे, उसे तुरंत सलाखों के पीछे डाल दिया जाए। ऐसी बोलने की आज़ादी पर प्रतिबन्ध का सख्ती से पालन करना होगा।"  
सेक्युलरिज्म के खोखले नारों के द्वारा... विचारों, संस्कृति और व्यवहार में हमारी चार पीढ़ियों को बेवकूफ बना कर.. और हमारे देश के पचास साल बर्बाद करने के बाद, अब अचानक इन पाखंडी धूर्तों को 'ज्ञान' प्राप्त हो गया है ।
यह ज्ञान भी इनकी इस वास्तविक मजबूरी का परिणाम है कि देश के हिन्दू समाज ने आश्चर्य जनक एकजुटता दिखा कर इन धूर्तों को इनकी औकात दिखा दी है।
'सेक्यूलर' के नाम पर चलाई जा रही, हिंदुओं से घृणा की इनकी फैक्ट्रियों द्वारा, समाज और देश में फैलाए जा रहे 'सांस्कृतिक-प्रदूषण' को अब सब समझदार लोग पहचान चुके हैं ।
बेंगलुरु में कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए दंगों के दौरान उग्र कट्टरपंथियों की भीड़ डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बेसमेंट में घुस गई और कथित तौर पर 200-250 वाहनों में आग लगा दी। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस विधायक के आवास पर तोड़फोड़ करने वाली कट्टरपंथियों की भीड़ ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को पुलिस थाने में यह मानकर तोड़फोड़ और वाहनों को क्षतिग्रस्त किया कि पुलिस ने आरोपितों को हिरासत में रखा है।
जिन पुलिसकर्मियों ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की, उन पर भी मुस्लिम भीड़ ने हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप 60 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। मंगलवार रात पूर्वी बेंगलुरु में भड़की इस हिंसा में 3 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
इस बीच, बेंगलुरु अर्बन के उपायुक्त जीएन शिवमूर्ति ने डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन का दौरा किया और पुष्टि की कि हिंसा में बहुत सारी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा है। डीसीपी शिवमूर्ति ने कहा, “बीती रात हुई घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। सार्वजनिक संपत्ति को बहुत नुकसान हुआ है। मैं शहर के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि इस घटना से उत्तेजित या परेशान न हों।”
डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों का सशस्त्र दंगाई मुस्लिम भीड़ ने पीछा किया और उन्हें आस-पास के इलाकों में शरण लेनी पड़ी, यहाँ तक ​​कि उन्हें सुरक्षाबल के आने का इंतजार करना पड़ा।
इन दंगों में कई मीडियाकर्मी भी घायल हुए, कुछ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। जबकि, कुछ लोगों को मुस्लिम भीड़ के रोष का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ को दंगों की स्थिति को कवर करने के दौरान दंगाइयों की हिंसा का शिकार होना पड़ा।
इसके अलावा, पत्थरबाजी के दौरान लगभग 70 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। भीड़ ने उन पर धारदार हथियार भी फेंके। इनमें, 40 घायल पुलिस डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के थे, 10 केजी हल्ली स्टेशन के थे जबकि, शेष 20 अधिकारी आसपास के थानों से थे।
उपद्रवियों ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों में स्ट्रीटलाइट्स और सीसीटीवी कैमरों को भी नुकसान पहुँचाया, ताकि वो निश्चिन्त रहें कि पुलिस बाद में उनकी पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने में कामयाब नहीं हो पाएगी।
डीसीपी गेल्ड के वाहन चालक वेलयुधा पर भीड़ ने हथियारों से हमला किया, जिस कारण उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पुलिस कमिश्नर कमल पंत द्वारा किए गए फोन के बाद भीड़ ने पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया। भीड़ ने उनके वाहनों को निशाना बनाते हुए उन पर हमला कर दिया और उन्हें प्रतिक्रिया करने तक का समय नहीं दिया।
देवराजीवनहल्ली पुलिस स्टेशन और कडुगोंडानहल्ली पुलिस स्टेशन पर भीड़ ने हमला किया। यह सब तब शुरू हुआ, जब पुलिस अधिकारी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के एक कार्यकर्ता मुज़म्मिल पाशा की शिकायत पर बातचीत कर रहे थे।
मुजम्मिल पाशा ने कांग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन पी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। मुजम्मिल का आरोप था कि नवीन ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक पोस्ट किया था।
मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ इस बात से आक्रोशित थी कि पुलिस ने नवीन को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया और देखते ही देखते डीजे हॉल पुलिस स्टेशन में हिंसा भड़क उठी। कुछ ही देर बाद जब पुलिस की एक टीम नवीन के घर से वापस आ गई तो मुस्लिम भीड़ ये देखकर नाराज हो गई कि पुलिस वैन में उनके साथ नहीं था।
कर्नाटक सरकार के रेवेन्यू मिनिस्टर आर अशोक ने विधानसभा में कांग्रेस नेता श्रीमूर्ति से मुलाकात की और कहा कि हमलावर चाहे जो हों, चाहे जहाँ छिपे हों, हम उन्हें खोज निकालेंगे। अशोक का आरोप है कि मुस्लिम दंगाई कॉन्ग्रेस विधायक की हत्या करना चाहते थे।
पूर्व नियोजित थी दंगे की साज़िश 
रेवेन्यू मिनिस्टर अशोक ने कहा कि इस मामले से बहुत सख्ती से निपटा जाएगा ताकि आगे इस तरह की घटनाएँ न हों। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दंगा भड़का, उससे स्पष्ट होता है कि इसके लिए गहरी साजिश रची गई थी।
अशोक ने कहा- “दंगाई शहर के दूसरे हिस्सों में आग फैलाना चाहते थे। जिस तरह से मूर्ति के घर तोड़फोड़ और लूटपाट हुई, उससे साफ हो जाता है कि हमलावर मूर्ति को मारने के इरादे से आए थे। हम ये पता लगा रहे हैं कि साजिश रचने वाले लोग राज्य के हैं या बाहर के। लेकिन, वे चाहे जहाँ छिपे हों, हम उन्हें खोज निकालेंगे। उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि भविष्य में लोग कानून को हाथ में लेने की हिम्मत नहीं करेंगे। हमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हिंसा में PFI का हाथ है या SDPI का! जो गुनाहगार है, बो बख्शा नहीं जाएगा।”
जब पुलिस वालों ने रोते हुए सीनियर ऑफिसर से माँगी गोली चलाने की इजाजत
इस घटना का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वीडियो में डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलाने की इजाज़त माँग रहे हैं। वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि इस्लामी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ी है। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिस कर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति माँगी। 
जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें, वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 कर्नाटक द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे उग्र मुसलमानों की भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया।
 
पूरे बेंगलुरु में हुई तोड़-फोड़ और आगजनी की घटनाओं में कई पुलिस वाले घायल तक हुए और उनकी गाड़ियों में तोड़-फोड़ भी हुई। घटना नियंत्रित करने के लिए कुछ समय बाद KSRP प्लाटून्स को मौके पर बुलाया गया था। उनके द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ दंगाइयों ने उन पर छतों से पत्थर फेंके। कई मौक़ों पर पुलिस वालों को हालात नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले तक चलाने पड़े।
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साभार : News18 पूर्वी बेंगलुरु में पुल्केशी नगर के कांग्रेस विधायक अखं...
मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”