पवन कल्याण और के. अन्नामलाई (फोटो साभार- एक्स/@PawanKalyan ) जब आंध्र प्रदेश में नई सरकार द्वारा शपथ लेने के बाद मंच पर उपस्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवन कल्याण के लिए कहा था "ये पवन नहीं तूफान है"। वास्तव में देश को आज ऐसे ही तूफानी नेताओं की जरुरत है जो हिन्दू धर्म का चोला ओढे कालनेमि हिन्दू बन सनातन का अपमान कर अपनी रोटियां सेंकते हैं। योगी, हिमंत सरमा और पवन जैसे और तूफानी नेता राजनीति में आने चाहिए जो सियासतखोरों को उनकी औकात दिखा सके। वैसे तेलंगाना में भी ऐसा ही तूफान टी राजा सिंह भी है।
भारत विरोधी विदेशियों की कठपुतली बनकर हमारा विपक्ष देश को अंधकार में ले जाने का असफल प्रयास कर रहा है। जो नेता और उनकी पार्टियां अपनी बुद्धि और विवेक से राजनीति करने की बजाए सियासत का गन्दा और घिनौना खेल खेलकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, ऐसे लोगों को एक भी वोट नहीं देना चाहिए। और वह समय भी अब ज्यादा दूर नहीं जब इनके परिवार वाले ही इनको आईना दिखाएंगे।
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने रविवार (22 जून 2025) को मदुरै में फर्जी सेकुलरों पर तीखा हमला किया। हिंदू मुन्नानी द्वारा आयोजित ‘मुरुगा भक्तरगल मानदु’ कार्यक्रम में बोलते हुए पवन कल्याण ने कहा कि ये लोग ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ की आड़ में हिंदू देवी-देवताओं और आस्थाओं को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं।
मुख्य रूप से तमिल भाषा में दिए गए अपने भाषण में पवन कल्याण ने खुद को ‘कट्टर हिंदू’ बताया और कहा कि उन्हें अपने धर्म के लिए वही सम्मान चाहिए जो दूसरों को मिलता है।
पवन कल्याण ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए, लेकिन आज इसे केवल हिंदू धर्म को छोड़कर बाकी सभी की रक्षा के रूप में पेश किया जा रहा है।
भाजपा नेता के.अन्नामलाई और AIADMK के प्रतिनिधियों समेत कई बड़े नेता और बड़ी संख्या में भक्त इस कार्यक्रम में मौजूद थे। पवन कल्याण ने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की चीजों से हिंदू धर्म की जड़ों को नुकसान पहुँच रहा है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे शब्द कुछ लोगों के लिए सुविधाजनक हथियार बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि आजकल अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर हिंदू देवताओं को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है, जो एक गंभीर समस्या है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह चलन नहीं रुका, तो हमारे धर्म और आस्था को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।
पवन कल्याण ने यह भी साफ किया कि वह कट्टरपंथी नहीं हैं, बल्कि एक प्रतिबद्ध हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि वह ईसाई और इस्लाम धर्म का भी सम्मान करते हैं और बस यही चाहते हैं कि उनके विश्वास का भी सम्मान किया जाए। उन्होंने भारत की ताकत को धर्म (या धार्मिक मूल्यों) में बताया और कहा कि तमिलनाडु में हिंदू सम्मेलनों पर उठाए जा रहे सवाल बहुत खतरनाक हैं और इससे समाज में बेवजह का विभाजन पैदा हो रहा है।
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मदुरै में हिंदू मुन्नानी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए धर्मनिरपेक्षता के दोहरे मापदंडों पर तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, “ईसाई को ईसाई और मुसलमान को मुसलमान होने की आजादी है, लेकिन जब कोई हिंदू अपने धर्म की बात करता है, तो उसे सांप्रदायिक कह दिया जाता है। यही नकली धर्मनिरपेक्षता है।”
पवन कल्याण ने कहा कि हिंदुओं के धैर्य को उसकी कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने कहा, “अगर आप मेरी आस्था का सम्मान नहीं कर सकते, तो कम से कम उसका अपमान भी न करें।” पारंपरिक मुरुगन भक्त की पोशाक में आए कल्याण ने कंद षष्ठी कवचम् जैसे पवित्र भजनों का मजाक उड़ाने पर दुख जताया और इसे गलत बताया। उन्होंने सभी से एकजुट होकर धर्म की रक्षा करने का आग्रह किया और विश्वास जताया कि बदलाव जरूर आएगा।
इस कार्यक्रम में भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने कहा कि यह सम्मेलन राजनीतिक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सवाल उठाना और अधिकारों की माँग करना है। उन्होंने कहा, “हम किसी के दुश्मन नहीं हैं, हम बस अपने धर्म के लिए न्याय चाहते हैं।” कार्यक्रम का समापन कंद षष्ठी कवचम् के सामूहिक पाठ के साथ हुआ, जिससे इसकी भक्ति भावना और सांस्कृतिक एकता का संदेश सामने आया।
The Kashmir Files हो, Tashkant Files हो या अब The Kerala Story आखिर क्यों हो रहा है विरोध? समय आ गया है, जब इस गंभीर मुद्दे पर जयचन्दी हिन्दुओं (सच्चाई जानने वाले मुसलमानों की संख्या बहुत ही कम है) को छोड़ समस्त हिन्दू समाज, भारत सरकार, न्यायालय, पुलिस और इतिहासकारों को एक छत के नीचे बैठ उन इतिहासकारों और नेताओं के विरुद्ध सख्त से सख्त निर्णय लेने होंगे, जिन्होंने मुल्लावाद के आगे घुटने टेक देश के वास्तविक इतिहास को धूमिल कर मुग़ल आक्रांताओं के खूनी और हिन्दू महिलाओं के यौन-शोषण से भरे इतिहास पर चादर डाल उनको महान बता दिया। शर्म आनी ऐसे इतिहासकारों और नेताओं और इनको संरक्षण देने वाली पार्टियों को। यदि ऐसा नहीं होता -भारत का गौरवशाली हिन्दू इतिहास पढ़ाया जाता- ऐसी स्थिति ही नहीं आती और न ही ऐसी फिल्में बनती। न कोई टुकड़े-टुकड़े गैंग बनता और न ही कोई 'सिर से तन जुदा' करने वाला गैंग। इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में लाने वाली फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) से जुड़े एक क्रू मेंबर को धमकी दी गई है। धमकी सोमवार (8 मई 2023) को एक अनजान नंबर से मैसेज कर भेजी गई। धमकी देने वाले ने कहा है कि फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया गया है। मुंबई पुलिस ने क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया कराई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 मई को द केरल स्टोरी के एक क्रू मेंबर को एक अनजान नंबर से मैसेज आया। मैसेज करने वाले व्यक्ति ने धमकाते हुए लिखा, “अकेले घर से बाहर मत निकलना। तुमने फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया।” फिल्म के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने इसकी शिकायत मुंबई पुलिस से की है। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया करवाई। हालाँकि शिकायत कॉपी न मिलने के चलते अभी तक केस दर्ज नहीं किया गया है।
फिल्म से जुड़े किस व्यक्ति को धमकी मिली है, यह स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि धमकी फिल्म डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को ही दी गई है।
प्रशंसकों को भी मिली हैं धमकियाँ
इससे पहले ‘द केरल स्टोरी’ के प्रशंसकों को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल चुकी है। पुणे में इस फिल्म को देखने के लिए लोगों को फ्री राइड देने का एलान करने वाले ऑटो ड्राइवर साधु मगर को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल रहीं हैं। साधु ने पुलिस में देश-विदेश के कुछ अनजान नंबरों की शिकायत देते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
इसके अलावा राजस्थान के जोधपुर में VHP से जुड़े राजू सरगरा पर भी इसलिए हमला किया गया, क्योंकि वे लोगों से ‘द केरल स्टोरी’ देखने की अपील कर रहे थे। आरोप है कि कट्टरपंथियों ने राजू सरगरा के व्हाट्सएप स्टेटस को देखने के बाद उन पर हमला किया था। स्टेटस में उन्होंने फिल्म का पोस्टर लगाते हुए उसकी तारीफ की थी। राजू को सिर तन से जुदा की धमकियाँ भी मिली हैं।
हमारा हिंदू धर्म बहुत शानदार है दुनिया का एकमात्र ऐसा धर्म है जो पूरी तरह विज्ञान पर आधारित है। हमने इस दुनिया को कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर और अजंता और एलोरा के विशाल शिव मंदिर दिए जो आज की टेक्नोलॉजी भी नहीं बना सकती है।
हजारों साल पहले की सभ्यता यानी सिंधु घाटी की सभ्यता हड़प्पा मोहनजोदड़ो की सभ्यता तक्षशिला जिस पर इन सब चीजों पर आज पाकिस्तान गर्व करता है वह हमारे पूर्वजों पूर्वजों की देन है।
पाकिस्तान के एक विद्वान हसन निगार ने जब एक चैनल पर कहा कि हमारे पूर्वजों की ऐसी क्या विरासत है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं, तब समूचे हाल में सन्नाटा पसर गया और उन्होंने कहा कि आज जो पूरे दुनिया के पाकिस्तानी दूतावास में हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की बड़ी सी पेंटिंग तस्वीर लगी होती है और नीचे लिखा होता है पाकिस्तान एक 10000 साल पुरानी सभ्यता कितने शर्म की बात है कि वह हमारी सभ्यता नहीं बल्कि हिंदुओं की सभ्यता है... हम हिंदुओं की विरासत पर ही गर्व कर सकते हैं क्योंकि हमने इस दुनिया को कुछ दिया ही नहीं।
हम हिन्दुओ ने 15000 साल पहले गटर सिस्टम कैनाल सिस्टम, ईट बनाने की कला, नगर संयोजन टाउन प्लैनिंग इत्यादि सीख ली थी जबकि मक्का और मदीना जैसे शहरों में यह सारी सुख सुविधाएं पेट्रोल की खोज होने यानी क्रूड की खोज होने के बाद 19वी सदी में बनी।
इजिप्ट के पिरामिड भी हमने बनाएं क्योंकि एकमात्र हिंदू धर्म है जो पुनर्जन्म पर विश्वास करता है और पिरामिड को आज की टेक्नोलॉजी भी नहीं बना सकती... जॉर्डन में पूरे पहाड़ों को काटकर हमने एक नगर बनाया जिसे आज पेट्रा कहते हैं जो आज जार्डन की कमाई का सबसे बड़ा आधार है उसमें कई हिंदू देवी देवताओं के मंदिर हैं।
हमारे धर्म में जो कालखंड और ग्रहों की गणनाएं हैं उसे जानकर आप चौक जाएंगे आज जब सैटेलाइट और जीपीएस टेक्नोलॉजी इतनी उन्नत हो चुकी है फिर भी आज के लाखों साल पहले हम किस तरह से ग्रहों की चाल की गणना कर लेते थे।
जेनेटिक्स की खोज तो 19 वी सदी में हुई गुणसूत्र यानी क्रोमोसोम्स डीएनए और आरएनए की खोज हुई 20 वीं सदी में हुई लेकिन उसके पहले हमारे धर्म ग्रंथों में सेपरेशन आफ जींस के बारे में विस्तार से बताया गया है और समस्त हिंदू समुदाय को सात ऋषियो के नाम पर सात गोत्र में बांट दिया गया है और कहा गया है कि सगोत्रीय विवाह मत करो क्योंकि जींस का सेपरेट होना जरूरी है और आज यही कारण है की जींस लिंकेज बीमारी यानी जींस से रिलेटेड बीमारियां हिंदुओं में नहीं पाई जाती।
और आप अपने शहर के किसी सरकारी बड़े हॉस्पिटल में जाइएगा और वहां देखिएगा की जींस से रिलेटेड बीमारियां जैसे हीमोफीलिया थैलीसिमिया, बार-बार अबॉर्शन, सिस्टिक फाइब्रोसिस, डाउन सिंड्रोम, हीमोफीलिया और मंगोलिज्म एल्बिनिज्म आदि से कौन पीड़ित है।
अब पाकिस्तान में भी मांग उठने लगी कि नजदीकी रिश्तेदारों से यानी कजिन विवाह पर रोक लगाई जाए क्योंकि पाकिस्तान का पूरा मेडिकल सिस्टम इन बीमारियों से थक चुका है।
यदि कोई हिंदू लड़की या लड़का भी अपने किसी नजदीकी रिश्तेदार से विवाह करता है तब उसके आने वाले बच्चों में भी इन तमाम बीमारियों के होने की संभावना बेहद बढ़ जाती है।
तमिलनाडु में बिहारी लोगों के प्रति नस्लवाद का माहौल देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में कई बिहारी मजदूरों की हत्याएँ हुई हैं और अनेकों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए एक टीम तमिलनाडु भेजने का निर्णय लिया है। इस बीच सामने आया है कि कैसे तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के लिए नस्लवादी टिप्पणियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आश्चर्य समस्त सेक्युलरिस्ट गैंग की चुप्पी साधने पर हो रहा है। अगर यही अप्रिय घटना किसी भाजपा शासित राज्य में हो रही होती, यही गैंग कोहराम मचाकर आसमान सिर पर उठाकर सियापा कर रहे होते। आपातकाल में कांग्रेस ने विपक्ष की गैर-मौजूदगी में संविधान में Secular शब्द जोड़ दिया, लेकिन आज तक यह नहीं मालूम कि Secular शब्द का भावार्थ क्या होता है, वही तुष्टिकरण और नस्लभेद चल रहा है। इन छद्दम सेक्युलरिस्टों ने Secular शब्द का मजाक बना दिया है।
मीडिया संस्थान ‘The Commune’ ने एक खबर में बताया है कि बिहार के प्रवासियों के लिए तमिलनाडु में ‘पानी-पूड़ी’ और ‘पान मसाला’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर के नस्लवाद का परिचय दिया जा रहा है। बता दें कि जब तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की हत्याओं का मामला पूरे देश में गूँज रहा था, तब बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की 70वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे।
तमिलनाडु में भाषा के प्रति कट्टरता कई बार देखी जा चुकी है। क्षेत्रवाद के नाम पर भी हिंसा तो घटनाएँ हुई हैं। ऐसे में हिंदी बोलने वाली बिहारियों के प्रति वहाँ के एक कट्टर धड़े में घृणा पहले से ही है। बता दें कि द्रविड़ राजनीति ने राज्य के एक बड़े हिस्से में कट्टरता को जन्म दिया, जिस कारण ब्राह्मण विरोधी घृणा भी फैली। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक तमिल व्यक्ति को ट्रेन में एक बिहारी को गाली देते हुए देखा जा सकता है।
This assault is a hate crime which is a result of hate politics happening in the state . From name calling to physical assault , the guy abuses the prime minister of the country . @mkstalin inaction in such cases is a sin putting tamils elsewhere at risk . @annamalai_k@AmitShahpic.twitter.com/HBpLVyS4wz
इसमें पहले वो पूछता है कि तुम हिंदी हो या तमिल? फिर पीछे से एक व्यक्ति कहता है कि हम सब हिंदी हैं। इसके बाद तमिल व्यक्ति कहता है, “मैं तुम सबको मार डालूँगा। तुमलोग यहाँ आते ही क्यों हो? मोदी के मुँह में अपना $%# घुसेड़ दूँगा। ” बीच-बीच में उसने तमिल में कुछ शब्दों का प्रयोग किया, जिसके अर्थ होंगे ‘वेश्या के बेटे, महिलाओं का जननांग’ इत्यादि। इसके बाद वो एक दूसरे व्यक्ति को थप्पड़ भी मारता है।
इसके बाद एक अन्य तमिल व्यक्ति कहता दिख रहा है कि ये लोग यहाँ काम करने आते हैं, लेकिन मारपीट करते हैं। जिस व्यक्ति ने कैमरा रखा होता है, वो कहता है कि ये सब मोदी का किया-धरा है। इस वीडियो में तमिलों को बिहारियों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। ये सब एक ट्रेन के अनारक्षित बोगी की घटना है। रेलवे पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज किए जाने की बात कही है। केलमबक्कम में एक बंगाली को भी चोर बता कर उस पर हमला कर दिया गया।
बिहार सरकार इन घटनाओं की जाँच के लिए 4 सदस्यीय टीम तमिलनाडु भेज रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि घटना पर उनकी नजर है। उन्होंने ‘समाचार पत्रों’ के माध्यम से इन घटनाओं की जानकारी मिलने की बात बताते हुए कहा कि बिहार के वरिष्ठ अधिकारी तमिलनाडु में अपने समकक्षों से संपर्क में हैं। तिरुप्पुर की पुलिस का कहना है कि कई फेक वीडियोज भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उधर ‘साउथ इंडियन मिल एसोसिएशन (SIMA)’ ने बिहारियों से अपील की है कि वो दक्षिण भारत को छोड़ कर अपने घर नहीं लौटें। उनका कहना है कि अगर ये जारी रहा तो तमिलनाडु की पूरी की पूरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री ध्वस्त हो जाएगी। इन घटनाओं पर ‘Confederation of Indian Textile Industry (CITI)’ ने भी चिंता जताई है। हालाँकि, तमिलनाडु का प्रशासन कह रहा है कि अधिकतर फेक चीजें ऑनलाइन शेयर हो रही हैं।
तेलंगाना में देश में सबसे अधिक मुद्रास्फीति की दर बनी हुई है। 31 जनवरी को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में कहा गया है कि तेलंगाना में अप्रैल और दिसंबर 2022 के बीच इसी अवधि के राष्ट्रीय औसत 6.8 प्रतिशत के मुकाबले 8.7 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रामीण तेलंगाना में मुद्रास्फीति 9.2 प्रतिशत थी जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.3 प्रतिशत थी। तेलंगाना के शहरी से लेकर गांवों के लोग महंगाई से त्रस्त हैं लेकिन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) को जनता की परवाह ही नहीं है। विकास के पैमाने पर तेलंगाना अन्य राज्यों से पिछड़ती जा रही है। राज्य की जनता केसीआर की कार्यशैली और तुष्टिकरण की नीति और कामकाज से परेशान है। यही वजह है कि केसीआर की लोकप्रियता अब काफी निचले स्तर पर आ गई है।
एक तरफ तेलंगाना की जनता महंगाई से परेशान है वहीं केसीआर प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने की अपनी चाहत को पूरा करने पर पूरा जोर लगा रहे हैं। राज्य की परेशानी से ध्यान हटाने के लिए वह विपक्षी नेताओं को एकजुट करने का नाटक करते हैं। केसीआर के मन में भी पीएम उम्मीदवार बनने की आकांक्षा इस कदर हिलोरे मारी कि उन्होंने अपनी पार्टी का नाम तक बदल दिया। तेलंगाना राष्ट्र समिति(टीआरएस) अब भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) हो गई है। वह बीआरएस को राष्ट्रीय पार्टी बनाकर चाहते हैं, हालांकि इसे अभी राष्ट्रीय पार्टी बनने में लंबा रास्ता तय करना है। लोगों की नाराजगी इस बात से भी बढ़ रही है कि केसीआर पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं जो कि देश के मूड के हिसाब से उनके खिलाफ जा सकती है। उनकी सरकार में उनका बेटा केटी रामाराव, बेटी कविता सहित कई रिश्तेदार भरे-पड़े हैं।
महंगाई के लिए बीआरएस सरकार जिम्मेदारः बंदी संजय
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने उच्च मुद्रास्फीति के लिए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार को दोषी ठहराया। बंदी संजय ने कहा कि महंगाई बढ़ने में ईंधन का बड़ा हाथ है। उन्होंने कहा, “बीआरएस सरकार पेट्रोल/डीजल की कीमतों पर वैट कम नहीं करेगी, भले ही केंद्र और अधिकांश राज्यों ने इसे कम कर दिया हो। केसीआर ने आम आदमी पर बोझ डालना जारी रखा।” भाजपा नेता ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण का बहिष्कार करने के लिए भी बीआरएस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस और मुख्यमंत्री केसीआर का एकमात्र फोकस उनका अपना परिवार है। उन्होंने कहा कि उनके मन में संविधान, परंपराओं और सामान्य शिष्टाचार के लिए कोई सम्मान नहीं है।
पीएम मोदी ने दिया विकास की सौगात, केसीआर को तेलंगाना के विकास की परवाह नहीं
हैरानी की बात यह है कि पिछले साल एक तरफ तो प्रधानमंत्री तेलंगाना राज्य को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देने गए थे लेकिन तब भी केसीआर को राजनीति ही सूझ रही थी। इन परियोजनाओं से जहां राज्य की तरक्की सुनिश्चित होगी वहीं युवाओं के अनेक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि केसीआर को तेलंगाना की जनता की परवाह नहीं है। यही वजह है कि जनता भी अब केसीआर से मुंह मोड़ने लगी है। हाल के चुनाव परिणाम में बीजेपी को मिल रही सफलता इसी ओर संकेत करते हैं। तेलंगाना को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी राज्य में थे, लेकिन प्रोटोकाल का उल्लंघन करते हुए वे खुद अगवानी के लिए नहीं आए। इतना ही नहीं केसीआर नीति आयोग जैसी संस्था की बैठक में भी भाग लेने से कतराते हैं। इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है। यही वजह है कि वहां की जनता अब उन्हें सत्ता से बेदखल करने का मन बना चुकी है।
अंधविश्वासी हैं केसीआर
मोदी ने अंधविश्वास को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, “इस आधुनिक शहर में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि तेलंगाना की सरकार ने अंधविश्वास को राज्याश्रय दिया हुआ है। यहां अंधविश्वास के नाम पर क्या हो रहा है ये पूरे देश के लोगों को जानना चाहिए। किसे कहां जाना है’ किस दफ्तर में जाना है’ किसे मंत्री बनाना है’ ये सब अंधविश्वास तय करता है। यहां के विकास के लिए और इसे पिछड़ेपन से निकालने के लिए हर तरह के अंधविश्वास को दूर करना होगा। यहां सुशासन और तेज विकास की अकांक्षा प्रबल है। भ्रष्टाचार और परिवारवाद लोकतंत्र का सहसे बड़ा दुश्मन है। आज आपने देखा होगा कि कुछ लोग कार्रवाई से बचने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचारियों का गठजोर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और परिवारवाद गरीबों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। भाजपा सरकार इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और जनता के बीच बिचौलियों की क्या जरूरत है।’”
केसीआरः सचिवालय का ‘भूत’, वास्तु यज्ञ, न्यूमरोलॉजी का चक्कर
सीएम बनने के बाद केसीआर कभी सचिवालय नहीं गये। उन्हें किसी ने बताया कि सचिवालय का वास्तु ठीक नहीं है। इसके लिए उन्होंने 2016 में 50 करोड़ की लागत से घर पर ही एक कार्यालय बनवाया। वे कभी सचिवालय नहीं गए जबकि उनकी सरकार के अधिकारी वहीं से काम करते हैं। उन्होंने बेगमपेट में अपने कैंप ऑफिस की मरम्मत कराई और इसे 5 मंजिल ऊंचा और 6 ब्लॉक्स तक बढ़ा दिया। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि शासक को ऐसी जगह से काम करना चाहिए जो दूसरों की तुलना में ज्यादा ऊंचाई पर हो। पिछले 5 साल से केसीआर सचिवालय की बजाय अपने सरकारी आवास से काम कर रहे हैं।
कोई भी काम बिना मुहूर्त देखे नहीं करते केसीआर
केसीआर 6 नंबर को अपने लिए बहुत लकी मानते हैं। वे जब भी कुछ नया या बड़ा करते हैं तो उसमें 6 अंक जरूर होता है। उनके काफिले की गाड़ियों के नंबर में 6 जरूर होता है। कोई भी काम बिना मुहूर्त देखे नहीं करते। मुहूर्त में भी इसका ध्यान रखा जाता है कि उसके जोड़ के अंक 6 जरूर हो। वे जब पहली बार सीएम बने तो उन्होंने दोपहर 12:57 मिनट पर शपथ ली, जिसके अंकों का जोड़ 6 होता है। एक बार वह महबूब नगर जिला गए तो वहां 51 बकरों की बलि चढ़ाई गई। लोगों का दावा है कि 51 बकरों की बलि इसीलिए चढ़ाई गई क्योंकि इसका जोड़ भी 6 होता है। चंद्रशेखर राव जो कमेटियां बनाते हैं, उनके सदस्यों की संख्या भी इस तरह रखते हैं जिसके अंकों का जोड़ 6 हो। शायद यही वजह है कि उन्होंने किसानों के लिए जो को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई उसमें 15 सदस्य रखे। उनकी पार्टी की जिला समिति में 24 सदस्य हैं, राज्य स्तरीय समिति में 42 सदस्य हैं और इन सबका जोड़ 6 है।
न्यूमरोलॉजी के चक्कर में केसीआर ने विधानसभा भंग कर दिया
मुख्यमंत्री केसीआर ने सितंबर 2018 में विधानसभा भंग कर दी थी। 6 अंक को शुभ मानने वाले केसीआर ने इस अहम फैसले के लिए 6 सितंबर के दिन को चुना। बैठक भी ज्योतिष के आधार पर बुलाई थी। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की। केसीआर हैदराबाद की मशहूर हुसैन सागर झील कभी नहीं जाते, क्योंकि कहा जाता है कि हुसैन सागर झील जाने के बाद ही एनटी रामाराव से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी छिन गई थी।
केसीआर की ओछी राजनीति
ऐसे में तेलंगाना के मुख्यमंत्री को फिर से चुनाव जीतना मुश्किल लग रहा है। हाल ही में राज्य में उपचुनाव में पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी ने यहां अपना परचम लहरा दिया है। हार के डर से केसीआर बौखला गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर केसीआर की पार्टी के नेताओं ने मोदी गो बैक के नारे लगाए। जगह-जगह मोदी विरोधी पोस्टर भी लगाए। इससे राज्य की जनता में भी मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति गुस्सा है। लोगों का साफ मानना है कि विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करने आ रहे प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर केसीआर गलत कर रहे हैं।
सिकंदराबाद से सांसद और केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी कहा था कि यह तेलंगाना के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात है कि प्रधानमंत्री राज्य को लाभान्वित करने वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ कर रहे हैं और राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी से तेलंगाना नहीं आने के लिए कहने वाले पोस्टर लगाने की निंदा की। भाजपा नेता रामचंदर राव ने कहा, “क्या नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं हैं? या तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं है? केसीआर एक बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वह और उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति दक्षिणी राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या कर रहे हैं। रामचंदर राव ने कहा,” एमके स्टालिन और वाईएस जगन मोहन रेड्डी दोनों भाजपा के राजनीतिक विरोधी हैं। अगर वे प्रधानमंत्री का स्वागत कर सकते हैं तो केसीआर क्यों नहीं?”
केसीआर की सरकार में मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव खुद को मुस्लिम तुष्टिकरण का चैंपियन साबित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पार्टी के विस्तार को पंख लग सके। केसीआर की सरकार में मुस्लिमों को खुश करने के लिए जहां उन्हें पूरी छूट दी जा रही है और उनके निर्देशों को लागू किया जा रहा है, वहीं हिन्दुओं और महिलाओं को दमन का शिकार होना पड़ा रहा है। तेलंगाना में अक्टूबर 2022 में आयोजित Group-1 की परीक्षा के दौरान हिन्दू महिलाओं से भेदभाव करते देखा जा सकता है। परीक्षा केंद्र पर बुर्का और हिज़ाब की खुली छूट थी। सुरक्षाकर्मी बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं की तलाशी भी नहीं ले रही थी। उन्हें सीधे परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दी जा रही थी। वहीं हिन्दू महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया। हिन्दू लड़कियों और महिलाओं की चूड़ियां,पायल और कुंडल तक उतरवाया गया।
तुष्टिकरण का स्पष्ट उदाहरण ग्रुप -1 एग्जामिनेशन सेंटर तेलंगाना में जहां पर ईयरिंग, बैंगल,पायल तो निकाल दिए जा रहे है लेकिन बुर्का पहनने पे कोई रोक नहीं बहुत ही शर्मनाक है ये कृत्य तेलंगाना सरकार का । केसीआर जी इतनी नीचे गिरकर कबतक वर्ग विशेष का तुष्टिकरण करेंगे pic.twitter.com/Uu9gyeDd01
हिंदी की जगह उर्दू को दिया दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा
तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए राज्य में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने का एलान किया। यानी सरकारी कामकाज में तेलुगू के बाद उर्दू में भी कामकाज होगा। मुख्यमंत्री केसीआर का लंबे समय से मुस्लिमों के प्रति रुझान रहा है। लिहाजा, माना जा रहा है कि उन्होंने तुष्टिकरण की नीति पर चलते हुए उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया है। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि हिन्दी को दूसरी आधिकारिक भाषा होने का गौरव प्राप्त होगा मगर मुख्यमंत्री ने ऐसा नहीं किया।
हिजाब पर फैसला हुआ नहीं, रायता जरूर फ़ैल गया। जिस पर हर मुस्लिम को गहन चिंतन करने की जरुरत है। एक तरफ भारत में कट्टरपंथी हिजाब को इस्लामिक प्रथा बता रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ ईरान में इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। स्विट्ज़रलैंड में पब्लिक में चेहरा ढकने पर 85000 रूपए का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव वहां की संसद में भेज दिया गया है, जिसके जल्दी पारित होने की सम्भावना है। ईरान में हो रहे प्रदर्शन से अन्य देशों ने सचेत होना शुरू कर दिया है, जबकि भारत में मुल्लावाद विदेशी खैरात पर मुस्लिम समाज को अपनी दुकान चलाए रखने के लिए भड़का रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान ने लड़कियों के पर्दा को लेकर फिर बयान दिया है। बर्क के बयान ने पूरे देश में हलचल पैदा कर दी है। उनका कहना है कि लड़कियां अगर बेपर्दा घूमेंगी तो आवारगी बढ़ेगी। हिजाब विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर(करवाचौथ के दिन) को अपना फैसला नहीं सुना पाया। सुप्रीम कोर्ट के दोनों ही जजों की राय इस मामले में अलग-अलग थी। जिसके बाद मामले को बड़ी बेंच को सौंपने की सिफारिश की गई है। अब समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए हिजाब अनिवार्य है। उन्होंने दावा भी किया कि सार्वजनिक रूप से हिजाब नहीं पहनना पूरे समाज के लिए हानिकारक है।
सपा सांसद इससे पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था, ‘इस्लाम के मुताबिक हिजाब इसलिए भी जरूरी है कि बच्चियां कंट्रोल में रहें, जिससे हालात भी संभले रहेंगे। हिजाब पहनने से दूसरे लोग उन पर बुरी नजर नहीं डाल सकेंगे।’ इस बार बर्क ने कहा है कि हिजाब इस्लाम का मामला है। हमें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट इसमें सही फैसला करेगा।
After Shaheen bag’s ‘Kudarati Biryani’, now its time for ‘Kudarati kids’…. Regarding population control law, SP MP Shafiqur Rahman Burke said – humans don’t produce children, they are ‘kudarati’.. ☛ https://t.co/LNgrXO3HHY
इससे पहले सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर कहा था कि औलाद इंसान नहीं कुदरत पैदा करती है। बर्क ने कहा था, ‘औलाद पैदा करने का ताल्लुक इंसान से नहीं कुदरत और अल्लाह से है। अल्लाह-ताला जब किसी बच्चे को पैदा करने का इरादा करता है तो उसके साथ ही उसके खाने का इंतजाम भी करता है।”
जब टीवी पर लाइव शो में मौलाना रशीदी की जबरदस्त बेइज्जती हुई
हकीकत यह है कि तीन तलाक से लेकर अब हिजाब पर जब किसी भी कट्टरपंथी के पास कोई जवाब नहीं होने पर अंधे होकर हिन्दू धर्म पर प्रहार शुरू कर देते हैं। चाहे वह मुग़ल काल में हिन्दू मंदिरों को मस्जिद अथवा दरगाह बनाने की सच्चाई सामने आने की बात हो। कट्टरपंथियों ने समझा था कि जिस तरह शाहबानो केस को तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार ने दबा दिया गया था, उसी तरह वर्तमान मोदी सरकार भी दबाव में आकर मुद्दों को दफ़न कर देगी, लेकिन हो एकदम विपरीत रहा है। नूपुर शर्मा की बात को तूल देने से कट्टरपंथी जेहादियों ने इस्लाम की कुरीतियों को उजागर करवाने को मजबूर कर दिया। खैर, अक्टूबर 13 को News18 पर वेदों का ज्ञान नहीं होने पर शो में मौलाना रशीदी की जिस तरह बेइज्जती की गयी, अगर शर्म हो कभी किसी डिबेट में नहीं आना चाहिए। ऋग्वेद में अग्नि देवता के लिए वर्णन को घूँघट पर बताने पर क्रोध में शब्दों के तीखे बाणों से प्रहार किये जाने पर बेशर्म दूसरी मुस्लिम महिला भी उसी व्हाट्सअप को पढ़ती दिखी। देखिए वीडियो:-
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हिजाब के विरोध में ईरानी एक्ट्रेस ने उतारे शरीर से सारे कपड़े
हिजाब के विरोध में एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी ने उतारे कपड़े (फोटो साभार: @iam
एक दिन में फैसला हो जायेगा
जिम्मेदार रिटायर्ड CJI रमना -अदालतों में मुस्लिम महिला वकील काला कोट उतार कर “हिजाब” में जाना शुरू कर दें - एक दिन में फैसला हो जाएगा।
हिज़ाब पर दो जजों ने अलग अलग फैसले देकर न्याय करने की बजाय रायता फैला दिया - जब 2 जज आपस में एक राय नहीं बना सकते तो विभिन्न वर्गों और धर्मों के समाज में समरसता कैसे हो सकती है। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी अपीलें खारिज कर दी जबकि जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कर्नाटक सरकार के नियमों को ख़ारिज किया है।
इस तरह के फैसले से मसला सुलझा नहीं बल्कि और उलझ गया - फ़िलहाल तो हिज़ाब पर बैन को जारी रखने के आदेश दिए हैं और मामला CJI यू यू ललित के पास भेज दिया गया है जिससे बड़ी या संविधान पीठ बनाई जा सके सुनवाई के लिए।
मसले का बंटाधार करने वाले फैसले के लिए जिम्मेदारी तो पूर्व CJI रमना की बनती है क्योंकि उन्हें पहले ही 3 जजों की बेंच गठित करनी चाहिए थी ना कि 2 जजों की और अगर 3 जजों की बेंच गठित होती तो संभवतः फैसला 2 - 1 से होता।
आज भी फैसला आने के बाद कुछ मुस्लिम वक्ता वही इस्लाम की दुहाई देते हुए कह रहे हैं कि हिजाब इस्लाम के अनुसार पहनना जरूरी है - क्या भारत का इस्लाम अलग है क्योंकि ईरान में अपने इस्लाम के इसी हिजाब के खिलाफ महिलाएं देश की इस्लामिक सरकार से टकरा रही है। महिलायें अपने बाल कटवा रही हैं, नायिका सारे कपडे उतार रही है। इसीलिए कहते हैं "अति हर बात की बुरी होती है।"
आर्टिकल 14 और आर्टिकल 25 का हवाला दिया गया है मुस्लिम लड़कियों की तरफ से और अभी भी उसी पर जोर दिया जा रहा है - आर्टिकल 14 कानूनी तौर पर सबको बराबरी का अधिकार देने की बात करता है - मगर ड्रेस कोड की अवहेलना कर किसी एक वर्ग को अलग ड्रेस की अनुमति कैसे दी जा सकती है - इससे बराबरी का हक़ नहीं मिलेगा बल्कि गैर बराबरी कायम होगी - (Inequality is created because of so called Equality)
आर्टिकल 25 कहता है all persons are equally entitled to freedom of conscience and the right freely to profess, practise and propagate religion subject to public order morality and health - इसका मत्लाफ साफ़ है कि आप अपने धर्म का प्रचार अपनी कौम के बनाये गए स्कूलों में करने के हक़दार है लेकिन जहाँ सभी धर्मो के लोग या बच्चे हों, तब उन सस्थानों के नियमों का पालन करना होगा -
अब CJI ललित नई बड़ी बेंच बनाते हैं या संविधान पीठ बनाते है ये देखना होगा और बनाते हैं भी या नहीं यह भी देखना होगा क्योंकि हो सकता है वो ये मसला चंद्रचूड़ के लिए छोड़ जाएँ - एक सम्भावना मुझे जरूर दिखाई देती है कि जो भी बेंच बनेगी, उसमे चंद्रचूड़ और अब्दुल नज़ीर जरूर होंगे और कोई सेकुलर फैसला आएगा इस मसले में जो इस्लाम के नाम पर हिजाब की वकालत कर रहे हैं और जस्टिस धुलिया ने भी हिजाब को सही ठहरा दिया, उन्हें बताना होगा कि ये हिजाब केवल शिक्षण संस्थाओं में क्यों चलाना चाहते हो, उर्फी जावेद को कपड़े पहनाने की कोशिश क्यों नहीं करते -
सुप्रीम कोर्ट और अन्य सभी अदालतों में आज ही अगर मुस्लिम वकील और मुस्लिम जज काला कोट उतार कर हिजाब पहन कर जाना शुरू कर दें, तो मैं देखता हूँ कौन सी अदालत उन्हें आर्टिकल 14, 19, 21 और 25 में ऐसा करने की अनुमति देती है - दिन में तारे नज़र आ जायेंगे हर कोर्ट के चीफ जस्टिस को।
सेकुलरिज़्म का दूसरा नाम फरेब है।
इमरजेंसी में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने विपक्ष की गैर-मौजूदगी में संविधान में secular शब्द डालकर कट्टरपंथियों को शक्तिशाली बनाकर हिन्दुओं के साथ बहुत बड़ा छल किया।
कोई शक़ अगर हो...तो इन तथ्यों पर ध्यान दीजिये...!
सेक्युलर कहते हैं कि...करवाचौथ नारी उत्पीड़न है, तीन तलाक़ धार्मिक आस्था..!
सेक्युलर कहते हैं कि...देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति थी, हलाला पवित्र नारी-शुद्धिकरण...!
सेक्युलर कहते हैं कि...बहु विवाह एक अनैतिक प्रथा थी, चार-निक़ाह ईश्वरीय आदेश...!
सेक्युलर कहते हैं कि...यज्ञोपवीत पहनना धार्मिक कट्टरवाद है, लेकिन अरबी लबादा ओढ़ना धार्मिक पहचान है...!
सेक्युलर कहते हैं कि...कर्ण छेदन असभ्य क्रूरता है,ख़तना अलौकिक प्रक्रिया...!
सेक्युलर कहते हैं कि...पितृपक्ष तर्पण एक ढोंग है, लेकिन मरहूमों की मज़ारों पर चढ़ावा चढ़ाना श्रद्धा...!
सेक्युलर कहते हैं कि...तीर्थ-यात्रा पैसा कमाने का मनुवादी ढोंग, लेकिन लाखों रुपये फूँककर हज़-उमरा पवित्र ईश्वर का दर्शन...!
सेक्युलर कहते हैं कि...जल्लीकट्टू पशु उत्पीड़न है, लेकिन पशुओं की गला रेतकर क़ुर्बानी धार्मिक आस्था...!
सेक्युलर कहते हैं कि...गौरक्षा मांसाहार के अधिकार का हनन है,लेकिन सूअर खाने वाले शैतान हैं...!
सेक्युलर कहते हैं कि...दही-हांडी ख़ेल ख़तरनाक़ है, लेकिन छाती-पीट कर ख़ूनी मातम करना धार्मिक आस्था...!
सेक्युलर कहते हैं कि...संस्कृत गुरुकुल कट्टरवाद सिखाते थे,लेकिन मदरसों में आधुनिक वैज्ञानिक शोध होते हैं...!
सेक्युलर कहते हैं कि...व्रत-उपवास दकियानूसी ढोंग हैं,लेकिन रोज़े वैज्ञानिक शारीरिक तपस्या है...!
सेक्युलर कहते हैं कि...हिंदुओं में खानपान की छुआछूत अमानवीय है,लेकिन शिया-सुन्नी-अहमदिया का आपसी क़त्लेआम स्नेहिल भाईचारा है...!
सेक्युलर कहते हैं कि...हज़ारों साल पुरानी सारी इंसानी किताबें झूठी-बकवास हैं, लेकिन धरती को चपटी बताने वाली 1400 साल पुरानी आसमानी किताब में ब्रह्माण्ड का सारा ज्ञान-विज्ञान है...!
सेक्युलर कहते हैं कि...गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा दंगा हुआ, लेकिन हज़ारों कश्मीरी पण्डित मारे खुशी के स्वर्ग सिधार गए और लाखों ने हँसते हुए कश्मीर में अपना घरबार सब छोड़ दिया...!
सेक्युलर कहते हैं कि...बाक़ी मज़हबों पर संविधान लागू होता है, लेकिन हुज़ूर का मज़हब ख़ुद में संविधान है...!
सेक्युलर कहते हैं कि...रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी हैं, लेकिन पाकिस्तानी-अफगानी शरणार्थी हिन्दू भारत के लिए बोझ हैं...!
कहने को तो और बहुत कुछ है, लेकिन शालीनतावश सब कुछ नहीं लिख सकते..... लेकिन इतना ही काफी है ये समझने और समझाने के लिए कि सेकुलरिज़्म का ही दूसरा नाम फरेब है।
देश भर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के खिलाफ चल रही छापेमारी के बीच 27 सितम्बर 2022 तक कुल 170 सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। ये गिरफ्तारियाँ 8 अलग-अलग राज्यों में हुई हैं। केरल वाली स्थिति को देखते हुए दिल्ली के शाहीन बाग और जामिया क्षेत्र में धारा 144 लागू कर अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये छापेमारी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और महाराष्ट्र में हुई है। इसमें अबतक 170 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। अकेले कर्नाटक से 45 गिरफ्तारियाँ होने की सूचना है। दिल्ली के शाहीन बाग़, निजामुद्दीन और जामिया इलाकों में भी NIA ने छापेमारी की है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम से भी कई दर्जन हिरासत में
महाराष्ट्र में भी रेड के दौरान कई संदिग्धों के हिरासत में लिए जाने की खबर है। औरंगाबाद और नांदेड़ में ATS की छापेमारी के दौरान लगभग 14 संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर है। असम के विभिन्न जिलों से PFI के 25 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा, कर्नाटक के विभिन्न जिलों में भी छापेमारी के बाद कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। कर्नाटक के कोलार से PFI के 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, गुजरात ATS ने अहमदाबाद, सूरत, नवसारी और बनासकांठा से 15 लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों के तार विदेशों जुड़े मिले हैं।
दिल्ली से PFI के 30 संदिग्ध गिरफ्तार
दिल्ली के जामिया, शाहीन बाग और निजामु्द्दीन सहित विभिन्न इलाकों से NIA और दिल्ली पुलिस ने करीब 30 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के मोबाइल फोन और अन्य डिवाइस समेत कई दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। वहीं, जामिया नगर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह कर्फ्यू 17 नवंबर तक के लिए लगाया गया है।
इसके साथ ही जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को एक जगह इकट्ठा होने से रोक दिया गया है। उनसे कहा गया है कि वे कैंपस के अंदर ही रहे हैं। अगर वे कैंपस के बाहर एक जगह इकट्ठा होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यूपी से वकील सहित कई गिरफ्तार
यूपी के 8 जिलों में NIA, ATS और पुलिस ने मिलकर छापेमारी की। इस रेड में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। यूपी के बुलंदशहर के स्याना के मोहल्ला चौधरियान से एक वकील अफजल को गिरफ्तार किया गया है। वकील लंबे समय से PFI से जुड़ा था।
मेरठ में पीएफआई दफ्तर पर इसका लगातार आना-जाना था। एटीएस करीब एक साल से इसकी निगरानी कर रही थी। वहीं, बुलंदशहर के मोहल्ला फैसलाबाद से एटीएस की टीम ने दो संदिग्धों को रियाज़ और खालिद को एटीएस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया।
यूपी के ही शामली में छापेमारी कर 4 लोगों को हिरासत में लिया। ATS ने शामली जिले के कैराना में सुबह 4 बजे मामौर गाँव से दो भाइयों मौलाना जाहिद और साबिर को उठाया। वहीं, गाँव पावटली कलां से SDPI के जिला पंचायत सदस्य परवेज के बड़े भाई जाबिर को कस्टडी में लिया गया। गाँव गोगवान से सरवन अली को पकड़ा गया है।
मध्य प्रदेश से कई गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के भोपाल, उज्जैन, इंदौर समेत 8 जिलों में PFI सदस्यों के ठिकानों पर रेड के बाद 22 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन संदिग्धों की जानकारी पूर्व में पकड़े गए 4 आरोपियों की पूछताछ में मिली थी। वहीं, 3 संदिग्ध फरार होने में कामयाब हो गए हैं।
भोपाल के शाहजहाँनाबाद इलाके में स्थित PFI की राजनीतिक विंग SDPI के ऑफिस में रेड डालकर अब्दुल रऊफ को पकड़ा है। रऊफ SDPI का मध्य प्रदेश अध्यक्ष है। ऑफिस से कुछ दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जो आपत्तिजनक बताए जा रहे हैं। SDPI का ऑफिस शाहजहाँनाबाद थाने से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर स्थित है।
वहीं, उज्जैन जिले से 4 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उज्जैन शहर के नयापुरा से मस्जिद के इमाम जुबेर को हिरासत में लिया गया है। वहीं, नगारची बाखल इलाके से इसाक को पकड़ा गया है। इसकी नलिया बाखल में जामा-ए-शाकेब मस्जिद के पास एसएस स्टील नाम से फेब्रिकेशन की दुकान है।
मुस्लिमों पर जुल्म की झूठी कहानियाँ सुना गल्फ से फंडिंग
गिरफ्तार किया गया PFI का सदस्य शफीक पाएथ लखनऊ-दिल्ली से लेकर नेपाल बॉर्डर तक PFI का नेटवर्क फैलाया था। वह भारत में मुस्लिमों पर जुल्म की झूठी कहानियाँ सुनाकर जकात के नाम पर खाड़ी देशों से रकम बटोरता था। इसका इस्तेमाल लव जिहाद, धर्मांतरण और हिंसा के लिए करता था।
ईडी के सूत्रों के मुताबिक, शफीक ‘गल्फ तेजस डेली’ अखबार के जरिए नफरत फैलाने का काम करता था। ‘गल्फ तेजस डेली’ केरल से प्रकाशित होने वाले ‘तेजस’ अखबार का हिस्सा है। इसी अखबार जुड़ा सिद्दीक कप्पन हाथरस कांड की कवरेज करने पहुँचा था। इसके बाद यूपी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
फिर इसका इस्तेमाल पीएफआई भारत में कट्टरता का पाठ पढ़ाने में होता था। टारगेट पर होते थे छोटे काम-धंधे पर लगे लोग। उन्हें एजुकेशन और इलाज के नाम पर दी जाने वाली मदद से धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा था। यहां आपको बता दें कि शफीक पाएथ को केरल के कोझिकोड से गिरफ्तार किया था।
पिछले सप्ताह भी NIA ने डाला था रेड
करीब 5 दिन पहले NIA और ED ने मिलकर 11 राज्यों के विभिन्न शहरों और इलाकों में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में 106 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में इनसे लिंक के आधार पर 27 सितंबर 2022 को NIA के साथ विभिन्न एजेंसियों ने फिर से एक्शन लिया है।
गिरफ्तार किए लोगों पर विदेशी फंडिंग करने, दो समुदायों के बीच हिंसा फैलाने, दंगा कराने, लव जिहाद, देश में अराजकता फैलाने, हथियार इकट्ठा करने, लोगों का ब्रेनवॉश कर कट्टर बनाने जैसे कई देशद्रोही गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
कहते हैं कि 'सकारात्मक सोंचो, परिणाम भी सकारात्मक आएगा', देखिए नूपुर विवाद को भाजपा विरोधी, मुल्लावाद और तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां भले ही सच को छिपाने जेहादियों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देकर बड़ी भयंकर भूल कर रहे हैं। उन्हें शायद नहीं मालूम नूपुर विवाद उन्हें उस चौराहे पर ले आया है कि समझ नहीं पा रहे इधर जाऊं या उधर। इनका हिन्दू विरोध जगजाहिर हो रहा है। इन्हे वोट हिन्दू का भी चाहिए लेकिन सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दुओं की ही पीठ में छुरा घोंपा जा रहा है। क्या सेकुलरिज्म सिर्फ हिन्दुओं पर ही लाजिम है? आखिर सेकुलरिज्म के नाम पर कब तक हिन्दुओं को धोखे में रख उनके अधिकारों का हनन किया जाता रहेगा? इमरजेंसी के दौरान जब लगभग सारा विपक्ष जेल में था, तब संविधान में डाला गया, क्यों? क्या नेताओं को सेकुलर(secular) का मतलब मालूम हैं? यदि मालूम होता तो आज जेहादियों और आतंकवादियों को छद्दम धर्म-निरपेक्ष समर्थन नहीं देते। कांग्रेस पार्टी बांटो और राज करो की नीति से भी आगे हिंदुओं को तोड़ो और मुस्लिमों को जोड़ो की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस पार्टी मुस्लिमों के वोट को अपनी बपौती समझती है और जब भी उसे लगता है कि मुस्लिम वोट छिटकने की आशंका है तो वो उन्हें एकजुट करने और रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है। अभी गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर के बयान से उठा तूफान थमा भी नहीं था कि इसी बीच प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कादिर पीरजादा के एक बयान ने कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण और पाटीदारों से नफरत को उजागर कर दिया। पीरजादा ने पाटीदारों का अपमान करते हुए कहा कि पाटीदारों के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस की जीत के लिए मुसलमानों को एकजुट करने और ताकत बढ़ाने की जरूरत है।
कांग्रेस 11 प्रतिशत पाटीदार वोटों के लिए दौड़ रही है-पीरजादा
दरअसल कादिर पीरजादा ने मुस्लिमों को संबोधित करते हुए कहा था कि आप (कांग्रेस और नेता) हार्दिक पटेल और नरेश पटेल के पीछे 11 प्रतिशत वोटों के लिए दौड़ रहे हैं, आप भूल गए हैं कि अतीत में कांग्रेस अल्पसंख्यक वोटों के साथ सरकार बना रही थी, आपको सरकार बनाने की कोशिश करनी चाहिए और अल्पसंख्यकों के समर्थन से 120 सीटें जीतनी चाहिए। हमसे जुड़ें। अगर आप हमें पार्टी में प्रतिनिधित्व नहीं देते हैं तो पार्टी का भविष्य क्या होगा। सभा में मौजूद मुसलमानों से उन्होंने कहा, अब फरियाद करना छोड़ दें, अपनी यूनिटी और ताकत बढ़ाएं।
पीरजादा के बयान से पाटीदार समाज को पहुंचा आघात
पीरजादा ने नरेश पटेल को लेकर जिस तरह का बयान दिया है, उससे लगता है कि कांग्रेस के अंदर एक खेमा नरेश पटेल जैसे पाटीदार नेताओं को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहता है। कांग्रेस नरेश पटेल को सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। पीरजादा के बयान से पाटीदार समाज को काफी आघात पहुंचा है। कांग्रेस विधायक ललित वसोया ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को पत्र लिखा कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ने पाटीदारों के खिलाफ बयान दिया है, बयान से पाटीदार समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है और हम इससे नाराज हैं।
संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का- जगदीश ठाकोर
कुछ ही दिन पहले गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर ने मुस्लिमों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के बयान का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ”इस देश के प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) कहा करते थे कि हिंदुस्तान के खजाने पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है। इस देश के कांग्रेसी प्रधानमंत्री डंके की चोट पर ये बात कर रहे थे। कांग्रेस ये जानती है कि ऐसा कहने से कितना नुकसान हुआ।”
कन्हैया लाल हत्याकांड में कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टिकरण राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की निर्मम हत्या ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। दो आतंकियों ने इस्लामिक आतंकवाद का जो विभत्स रूप दिखाया उसके बाद देश भर में जो हमले हो रहे हैं, उससे हिन्दुओं में खौफ और आक्रोश देखा जा रहा है। दरअसल कन्हैया लाल की हत्या राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार के मुस्लिम तुष्टिकरण का परिणाम है। राजस्थान पुलिस ने मुसलमानों को खुश करने के लिए कन्हैया लाल की गिरफ्तारी में चुस्ती दिखाई, लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथियों से मिल रही धमकी के बावजूद उसे सुरक्षा देने में नाकाम रही। यहां तक कि कन्हैया लाल ने रेकी किए जाने और जान पर खतरा होने को लेकर 15 जून, 2022 को पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। कन्हैयाल लाल की गुहार को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। कन्हैया को गिरफ्तार करने में तेजी दिखाने वाली पुलिस ने धमकी देने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने या गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं समझी।
मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से हिन्दू प्रतीकों से नफरत राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को लेकर शोर मचाने वाले कांग्रेसी हिन्दू प्रतीकोंं से कितना नफरत करते हैं। इसका प्रमाण मध्य प्रदेश के परासिया इलाके में निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान देखने को मिला। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा सांसद नकुलनाथ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें नकुलनाथ अपने माथे से तिलक पोंछते हुए नज़र आ रहे हैं। जब हिन्दू प्रतीक के अपमान को लेकर मामला गरमाने लगा तो इस वीडियो को नकुलनाथ के फेसबुक अकाउंट से हटा दिया गया।दरअसल, नकुलनाथ परासिया में कांग्रेस के प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो कर रहे थे। रोड शो को फेसबुक अकाउंट से लाइव किया जा रहा था। इसी दौरान उन्हें एक जगह पर अपने ललाट पर लगे तिलक को साफ करते देखा गया। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि जिस जगह पर नकुलनाथ ने माथे से तिलक हटाया वो इलाका मुस्लिम बहुल है। नकुलनाथ ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिन्दू प्रतीक को अपने माथे मिटा दिया।
कांग्रेस की मुस्लिमों में डर पैदा करने की साजिश मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति में कांग्रेस पार्टी इतना गिर गई है कि उसके नेता शशि थरूर ने कहा था कि अगर 2019 में भाजपा जीतती है और भाजपा दोबारा सरकार में आती है तो देश ‘हिंदू पाकिस्तान’ बन जाएगा।कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने सिर्फ भाजपा के जीतने पर हिंदू पाकिस्तान बनाए जाने का ही डर पैदा नहीं किया था बल्कि कहा था, “भाजपा एक नया संविधान लिखेगी जो भारत को पाकिस्तान जैसे राष्ट्र में बदलने का रास्ता साफ करेगा। जहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन किया जाएगा, उनका कोई सम्मान नहीं होगा।” उन्होंने कहा था कि भाजपा दोबारा लोकसभा चुनाव जीतती है तो देश का लोकतांत्रिक संविधान खत्म हो जाएगा। भाजपा द्वारा लिखा गया नया संविधान पूरी तरह से हिंदू राष्ट्र के सिद्धांतों पर आधारित होगा, जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों को पूरी तरह से खत्म कर देगा और राष्ट्र को ‘हिंदू पाकिस्तान’ बना देगा। शशि थरूर के इस बयान का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हुआ था।
कांग्रेस की नीति है मुस्लिमों को जोड़ो, हिंदुओ को तोड़ो कांग्रेस पार्टी सिर्फ मुसलमानों को जोड़ने की ही कोशिश नहीं करती है बल्कि इससे भी आगे हिंदुओं को तोड़ने की साजिश भी करती है। कांग्रेस को पता है कि यदि हिंदू एकजुट रहे तो उसकी दाल नहीं गलेगी। इसलिए उसका जोर हिंदुओं को जाति के आधार पर बांटने पर रहता है। कांग्रेस नेता शशि थरूर का बयान इसी रणनीति का हिस्सा था। कांग्रेस 2019 के पहले मुसलमानों में बीजेपी का भय दिखा कर एक जुट करने की कोशिश में लगी थी।
मुस्लिम बुद्धिजीवियों से गुपचुप मिले राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी रणनीति को परवान चढ़ाने के लिए सुनियोजित तरीके से काम करते रहे हैं। 11 जुलाई,2018 को राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से गुपचुप मुलाकात की थी। अब सवाल यह उठता है कि राहुल ने गुपचुप मुलाकात क्यों की? मिलना ही था तो सबके सामने ठोक बजा कर मिलने में क्या दिक्कत? दलअसल राहुल गांधी को हिंदुओं को जनेऊ के नाम पर और मंदिरों में दर्शन कर गुमराह करते रहना चाहते हैं। दूसरी तरफ मुसलमानों से मुलाकात कर यह दिखाना चाहते हैं कि वे उनके सबसे बड़ा शुभचिंतक हैं। हिंदू कहीं राहुल की इस मुलाकात से नाराज नहीं हो जाएं, इसीलिए मुस्लिम बुद्धिजीवियों से गुपचुप मुलाकात की। हैरत की बात ये है कि उन्होंने दलित और ओबीसी समाज के लोगों से खुलेआम मुलाकात की थी। जाहिर है उनका मकसद मुसलमानों का एकमुश्त वोट पाना है और हिंदुओं को झांसे में रखना है कि वे उनके साथ हैं।
राहुल का ‘जनेऊ’ दिखावा, दिल में हैं ‘मुस्लिम’ ”राहुल गांधी सिर्फ हिंदू ही नहीं जनेऊधारी हिंदू हैं।” 29 नवंबर, 2017 को कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने देश को यह बताने की कोशिश की थी कि राहुल गांधी ‘धर्म’ से हिंदू हैं। हालांकि सच्चाई इसके इतर है क्योंकि वे बदलती राजनीति का चेहरा हैं, गुजरात में जहां जनेऊधारी हिंदू थे तो यूपी-बिहार में मौलाना बन जाते हैं। राहुल गांधी जनेऊ पहनते हैं तो उसे सबको दिखाते हैं, जबकि मुस्लिमों से चुपके-चुपके मिलते रहे हैं। उन्होंने एक इफ्तार पार्टी में Skull Cap भी पहनी थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी जामा मस्जिद के शाही इमाम से सोनिया गांधी ने मुलाकात की थी। दरअसल एंटनी कमेटी ने 2014 में रिपोर्ट दी थी कि मुस्लिम परस्ती के कारण कांग्रेस हिंदुओं के दिल से उतर गई है। जाहिर है इसके बाद से राहुल गांधी ने दिखावे के लिए हिंदू बनना शुरू कर दिया और मुस्लिमों से छिपकर मिलते रहे, यही सब आज भी कर रहे हैं।
कांग्रेस ने किया था देशभर में शरियत कोर्ट का समर्थन मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस पार्टी कुछ भी कर गुजरने को तैयार है इसका एक उदाहरण उस समय देखने को मिला जब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के हर जिले में शरियत कोर्ट स्थापित करने के फैसले का कांग्रेस ने समर्थन किया। जाहिर है AIMPLB का यह फैसला भारतीय संविधान के विरोध में है और देश की न्याय व्यवस्था के खिलाफ है। कांग्रेस पार्टी AIMPLB के इस फैसले का समर्थन करने में सबसे पहले सामने आई। कर्नाटक सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री जमीर अहमद ने देशभर में शरियत अदालत स्थापित करने के मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले का समर्थन किया था। खबरों के मुताबिक कर्नाटक तत्कालीन कांग्रेस सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री जमीर अहमद से स्पष्ट कहा था कि समानांतर शरियत अदालतों से मुस्लिमों को पारिवारिक विवाद निपटाने में सहूलित होगी। जाहिर है कि भारतीय न्याय व्यवस्था और संविधान को चुनौती देने वाले इस फैसले के साथ कांग्रेस पार्टी खड़ी रही। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की इस मुद्दे पर चुप्पी से साफ था कि वो भी इस मामले में अपने मंत्री के साथ खड़े थे।
मुस्लिम बच्चियों के खतने पर भी कांग्रेस का समर्थन मुस्लिम वोट बैंक के लिए कांग्रेस पार्टी लगातार कट्टरपंथ का साथ दे रही है। कांग्रेस हमेशा से तीन तलाक, बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं के साथ खड़ी रही है। कांग्रेस ने मुस्लिम बच्चियों के खतने जैसी क्रूर प्रथा का भी समर्थन किया। दरअसल मुसलिम समाज में मजहब के नाम पर खतना जैसी अमानवीय कुरीति को बंद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि आखिर किसी के शरीर के साथ हिंसक छेड़छाड़ क्यों होनी चाहिए? मजहब के नाम पर रिवाज के तहत किसी के जननांग को छूने की इजाजत कैसे दी जा सकती है? कोर्ट के इन सवालों का जवाब दाउदी बोहरा के धर्मगुरु की तरफ से कांग्रेस के सांसद व वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दिया। सिंघवी ने कोर्ट से कहा था कि इस्लाम में खतना एक जरूरी रिवाज है। इस्लामिक दुनिया में हर पुरुष खतना कराते हैं, ऐसे में मुस्लिम महिलाओं के लिए खतना प्रतिबंधित क्यों? सिंघवी ने इस्लाम का खास रिवाज बताते हुए मुस्लिम महिला के खतना को वाजिब बताया था।
तीन तलाक के समर्थन में रही कांग्रेस पार्टी एक तरफ मोदी सरकार ने कानून बनाकर मुस्लिम समाज के महिलाओं को सदियों पुरानी तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाने की कोशिश की है, वहीं कांग्रेस पार्टी इसकी राह में रोड़े अटका रही। सुप्रीम कोर्ट में जब तीन तलाक के मुद्दे पर बहस चल रही थी तब कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने मुल्ले-मौलवियों द्वारा औरतों के शोषण का हथियार बन चुके तीन तलाक के पक्ष में दलील दी थीं। जाहिर है कि अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कांग्रेसी सांसद और वकील जब सुप्रीम कोर्ट में ऐसे मध्ययुगीन और बर्बरतापूर्ण इस्लामी रिवाजों का समर्थन करते हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण और वोट बैंक के लालच में मुसलमानों के कट्टर सोच के साथ खड़ी है। कांग्रेस पार्टी को सिर्फ अपने वोट बैंक से मतलब है और इसके लिए भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने से भी उसे कोई गुरेज नहीं है।
सैफुद्दीन सोज ने सुलगाई थी कश्मीर में ‘आजादी’ की आगकांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा था, ‘’कश्मीरी पाकिस्तान के साथ जुड़ना नहीं चाहते, उनकी पहली इच्छा आजादी है।‘’ सोज का यह बयान कांग्रेस की उसी सोच को जाहिर करता है इन्हें न कश्मीर से मतलब है और न ही भारत देश से। मतलब है तो सिर्फ अपनी मुस्लिम परस्त राजनीति चमकाने से। जब लश्कर-ए-तैयबा से कांग्रेस का कनेक्शन सामने आ था, इससे सवाल उठा था कि क्या कांग्रेस देश की राजनीतिक पार्टी है या पाकिस्तान परस्त आतंकवादी संगठन?
आतंकवादियों के विरुद्ध सेना की सख्ती का विरोधी है कांग्रेस कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने और केंद्र शासित बनने के बाद से ही भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन शुरू कर चुकी है। आइएस और जैश के सात से अधिक आतंकी ढेर किए जा चुके हैं। साफ है सेना पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों के सफाये के प्लान पर आगे बढ़ रही है। ऐसे में सेना के विरोध में कांग्रेस पार्टी और लश्कर का एक सुर में बोलना कई सवाल खड़े कर रहा है।