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ट्रंप की बेटी इवांका को मारना चाहता था मोहम्मद बाकेर, ईरानी सेना से मिली थी ट्रेनिंग: सुलेमानी की मौत का बदला लेना था मकसद

    ट्रंप और बेटी इवांका (बाएँ), हत्या की साजिश रचने वाला आतंकी मोहम्मद बाकेर (दाएँ), (साभार : CNN & Newyorkpost)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप पर एक बड़ा खतरा टल गया है। अमेरिकी अखबार ‘न्यू यॉर्क पोस्ट’ के अनुसार, इवांका की हत्या की साजिश रचने वाले एक ट्रेंड आतंकी मोहम्मद बाकेर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस आतंकी के पास से इवांका के फ्लोरिडा वाले घर का पूरा नक्शा मिला है। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं।

पकड़े गए आतंकी का पूरा नाम मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी है। उसकी उम्र 32 साल है। छह साल पहले बगदाद में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी मारा गया था। अल-सादी उसे अपना अब्बू जैसा मानता था। वह सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। उसने लोगों से कहा था कि वह इवांका को मारकर ट्रंप से अपना बदला पूरा करेगा।

इंटरनेट पर दी थी खुली धमकी

आरोपित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर काफी एक्टिव था। उसने वहाँ इवांका और उनके पति के 24 मिलियन डॉलर (225 करोड़ रुपए) के घर का नक्शा डाला था। उसने अरबी भाषा में लिखा था कि अमेरिकी महल या सीक्रेट सर्विस भी उन्हें नहीं बचा पाएगी। उसने लिखा कि हमारा बदला बस कुछ ही समय की बात है। वह लोगों को डराने के लिए साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भी भेजता था।

तुर्की में पकड़ा गया आरोपित

इस बड़े आतंकी को 15 मई को तुर्की में पकड़ा गया। वह वहाँ से रूस भागने की तैयारी में था। गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत अमेरिका भेज दिया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों का आरोप है। अभी उसे ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। वहाँ उसे सबसे अलग एक कड़े पहरे वाली कोठरी में बंद किया गया है।

कई देशों में फैलाया था खौफ

यह आतंकी सिर्फ ट्रंप की बेटी इवांका के पीछे नहीं था। वह ‘कथैब हिजबुल्लाह’ और ईरान के ‘IRGC’ जैसे खतरनाक संगठनों से जुड़ा है। उसने एम्स्टर्डम में एक बैंक पर पेट्रोल बम फेंका था। उसने लंदन में दो लोगों पर चाकू से हमला किया था। उसने टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी भी की थी। इसके अलावा बेल्जियम और रोटरडैम में भी उसने हमले किए थे।

सरकारी पासपोर्ट का उठाया फायदा

रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित के पास इराक का खास ‘सर्विस पासपोर्ट’ था। यह पासपोर्ट सिर्फ वहाँ के प्रधानमंत्री की इजाजत से मिलता है। इस VIP पासपोर्ट के कारण एयरपोर्ट पर उसकी जाँच नहीं होती थी। उसे हर जगह VIP लाउंज की सुविधा मिलती थी। इसी का फायदा उठाकर वह आसानी से दूसरे देशों में जाता था। वहां वह बड़े आराम से अपने आतंकी नेटवर्क को चला रहा था।

ट्रैवल एजेंसी के नाम पर धोखा

अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए उसने एक तरकीब निकाली थी। उसने मजहबी यात्राएँ कराने वाली एक ट्रैवल एजेंसी खोली थी। इसी एजेंसी की आड़ में वह पूरी दुनिया में घूमता था। वह अलग-अलग देशों में जाकर अपने साथियों से मिलता था। वह सोशल मीडिया पर एफिल टावर जैसी मशहूर जगहों के साथ फोटो डालता था। कई बार वह मिसाइलों और हथियारों के साथ भी अपनी फोटो पोस्ट करता था।

इस मामले पर अभी सब शांत

इवांका ट्रंप ने साल 2009 में अपनी शादी से पहले यहूदी धर्म अपना लिया था। इस बड़ी साजिश के सामने आने के बाद भी अभी सब शांत हैं। न्यू यॉर्क पोस्ट ने इस मामले पर बात करने के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया था। उन्होंने आरोपित के वकील से भी बात करने की कोशिश की। हालाँकि, अभी तक किसी की भी तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सिलेक्टिव है RJ सायमा का नारीवाद… हिजाब पर करनी थी बात, करने लगी मजहब का बचाव: सोचिए क्या सच में इस्लाम में ‘मर्जी’ चला सकता है इंसान?

           RJ सायमा ने कहा इस्लाम में मर्जी चलती जबरदस्ती नहीं (साभार : X_@_sayema & Chatgpt)
इस्लाम में इंसान की मर्जी की महत्वता है, जबरदस्ती की कोई जगह नहीं- मजहब की ये परिभाषा हाल में आरजे सायमा ने दी है। उन्होंने बड़ी चालाकी से हिजाब-बुर्का मुद्दे पर इस्लाम को डिफेंड किया है कि दुनियाभर में घटना कोई भी हो जाए, लेकिन बात मजहब की आलोचना पर न आए।

ये तरीका ऑस्ट्रेलिया आतंकी हमले के समय अरफा खानम शेरवानी ने भी अपनाया था। हालाँकि, उनकी स्ट्रैटेजी चली नहीं और उनके अपने ही समुदाय के लोग उनपर सवाल खड़ा करने लगे। सायमा के साथ भी यही हुआ है लेकिन वो आँख मूंदकर रखेंगी क्योंकि उन्हें नैरेटिव ये बनाना है कि जो लोग हिजाब पहनने को मजबूर कर रहे हैं वो अच्छे से इस्लाम को नहीं जानते।

दिलचस्प बात है कि सायमा जैसे बुद्धिजीवियों की हिजाब पर राय मौका, घटना और स्थान देखकर बदलती रहती है। जैसे भारत की बात आती है तो ये हिजाब पहनने को सीधा मजहबी अधिकार से जोड़ती हैं, शैक्षणिक संस्थानों में उसे पहने जाने की पैरवी करती हैं और किसी बाहर मुल्क में ये मुद्दा बनता है तो नारीवादी पक्ष निकल आता है, तब ये क्रांतिकारी भी बनती हैं, हिजाब को च्वाइस भी बताती हैं और इस्लाम को डिफेंड करने का लिबरल वर्जन भी खोजती हैं।

मगर, अफसोस उनका ये वर्जन जमीनी हकीकत और मीडिया में मौजूद तमाम उदाहरणों से बिलकुल निकलता है। बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं है। 2025 के दिसंबर माह में ही यूपी के शामली में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी बीवी और दो नाबालिग बेटियों की हत्या कर दी। कारण? तीनों बिना बुर्का पहने घर से बाहर निकल गई थीं। 2021 में असम से खबर आई थी एक महिला को दुकान से सिर्फ इसलिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि उसने जींस पहनी थी, बुर्का नहीं। 2022 में कर्नाटक से रिपोर्ट आई थी कि एक संगठित समूह मुस्लिम महिलाओं पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब या बुर्का के न दिखें।

यह सब भारत की घटनाएँ हैं, किसी दूर-दराज के कट्टर इस्लामिक देश की नहीं। क्या इन पर कभी सायमा कि कोई प्रतिक्रिया या विरोध देखने को मिला? क्या ऐसी खबरों को सुनने के बाद कभी आरजे सायमा ये कहने गईं कि इस्लाम में तो मर्जी चलती है, जबरदस्ती नहीं।

इसी तरह विदेशों में महिलाओं के साथ हिजाब न पहनने पर क्या हुआ, इसके भी तमाम उदाहरण हैं। ईरान की महसा अमीनी याद है आपको? 22 साल की वह लड़की जिसे ‘ठीक से हिजाब न पहनने’ के आरोप में हिरासत में लिया गया और इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसकी मौत हो गई।

2014 में ईरान के इस्फाहान में महिलाओं पर तेजाब हमलों की घटनाएँ सामने आईं। जाँच में पता चला कि निशाना वे महिलाएँ थीं जो ‘ढंग से’ हिजाब या बुर्का नहीं पहन रही थीं।
इसी तरह कनाडा की अक्सा परवेज, महज 16 साल की लड़की, जिसकी हत्या उसके अपने परिवार ने इसलिए कर दी क्योंकि वह खुद को ढककर बाहर नहीं जाती थी।

ये तो सिर्फ वे मामले हैं जो मीडिया में आ सके। कितनी घटनाएँ चार-दीवारी के भीतर दबा दी जाती होंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। आरजे सायमा क्या इन सभी मामलों में पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को यह समझाने जाएँगी कि इस्लाम मर्जी का मजहब है, जबरदस्ती का नहीं? या फिर हमेशा की तरह यह कहकर पल्ला झाड़ लेंगी कि यह ‘असल इस्लाम’ नहीं है?

विडंबना यह है कि जिस इस्लाम की परिभाषा सायमा गढ़ती हैं, उसे बार-बार गलत उन्हीं लोगों ने साबित किया है जो इस मजहब को सबसे ज्यादा कट्टरता से मानते हैं। अगर आम लोगों को ‘नासमझ’ मान भी लिया जाए, तो उन मुल्ला-मौलानाओं की तकरीरों का क्या जवाब है, जिनकी बातें सुनकर समाज दिशा तय करता है?

खुले मंचों से बार-बार कहा जाता है कि कुरान में हिजाब का जिक्र है और लड़कियों को इसे पहनना ही चाहिए। कई बार तो ये भी बताया जाता है कि महिलाओं को आजादी देना ही गलत बात है। उनके स्कूल जाने से लेकर उनके खुले सर घूमने की चाह तक को इस्लाम के खिलाफ बता दिया जाता है। तब सवाल उठता है- क्या समस्या कुछ ‘भटके हुए लोगों’ की है, या फिर उस विचारधारा की, जिसे हर बार बचाने के लिए कभी आरफा को और कभी आरजे सायमा को नया नैरेटिव गढ़ना पड़ता है?

बिहार : जेल में बंद उम्मीदवार के समर्थन में लालू का रोड शो, RJD विधायक रीतलाल यादव जो तीन बार जेल से लड़ा है चुनाव; बिहार के पिछड़ापन का कारण है जातिगत और गुंडों का आतंक

            बाहुबली रीतलाल यादव के लिए लालू ने की 15KM लंबी रोड शो (साभार : MSN & Jansatta)
आज बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बिहारियों को जातिगत और गुंडों के आतंक के विरुद्ध सड़क पर आकर आना होगा। वैसे जातिगत सियासत पूरे भारत में है। हिन्दुओं को सोंचना होगा कि कोई भी पार्टी मुसलमानों और ईसाईयों में भयंकर जातिवाद के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं और ये कुर्सी के भूखे नेता हिन्दुओं को जातियों में बाँट सियासत करते हैं और महापागल हिन्दू भी इनके मकड़जाल में फंस लड़ते रहते हैं। और इस काम में मीडिया भी पीछे नहीं। देखिए 243 सीटों वाली विधानसभा में देखिए कितनी जातिगत पार्टियां बनी हुई है। सभी चुनावों में सौदेबाज़ी करते हैं। क्या देश या प्रदेश चलाएंगे ऐसे सौदेबाज़? 

हिन्दुओं को हिन्दुओं को जातियों में बांटने वाले नेताओं, पार्टियों और मीडिया के खिलाफ एकजुट होकर सबका विरोध करना होगा   

बिहार के पहले चरण के मतदान में मीडिया हिन्दुओं की जातियों का प्रतिशत दिखाते हैं लेकिन मुसलमानों को एकजुट दिखाता है, क्यों? जातिगत घिनौनी सियासत में फंसे हिन्दुओं को मालूम होना चाहिए कि हिन्दू किसी भी जाति का हो एक ही शमशान पर दाह संस्कार होता है और एक ही मन्दिर में जाकर अपने इच्छित ईश्वर की पूजा अर्चना करते हैं। जबकि मुसलमानों और ईसाईयों में यही स्थिति एकदम उलटी है। एक जाति का मुसलमान या ईसाई दूसरी जाति की मस्जिद या चर्च में नहीं जा सकता। अपने मुर्दे को भी दूसरे जाति के कब्रिस्तान में दफ़न नहीं सकते। हिन्दुओं को हिन्दुओं को जातियों में बांटने वाले नेताओं, पार्टियों और मीडिया के खिलाफ एकजुट होकर सबका विरोध करना होगा। चुनावों में ऐसे नेताओं और उनकी पार्टियों को चारों खाने चित करना होगा।   

पटना की सड़कों पर एक अजीबोगरीब दृश्य देखने को मिला। जिधर देखिए, हरे झंडे लहरा रहे थे और भीड़ में एक पुराना करिश्माई चेहरा, लालू प्रसाद यादव, अपनी बंद गाड़ी से जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। यह रोड शो किसी समाज सुधारक या आम नेता के लिए नहीं था। लालू यादव खुद मैदान में उतरे थे, ताकि बाहुबली कहे जाने वाले उम्मीदवार रीतलाल यादव को जिता सकें।

यह चुनावी प्रचार कम और अपराध के महिमामंडन जैसा ज्यादा लगा, क्योंकि लालू यादव उस उम्मीदवार के लिए वोट माँग रहे थे जो खुद गंभीर आपराधिक आरोपों के चलते जेल में बंद है। यह घटना बिहार की राजनीति के एक गहरे सच को उजागर करती है। अपराध और राजनीति का गठजोड़। आईए एक बार आपको भी वाकिफ करा देते हैं रीतलाल यादव की आपराधिक हिस्ट्री।

लालू यादव ने रीतलाल यादव के लिए किया रोड शो

लालू यादव ने पटना के दानापुर विधानसभा क्षेत्र में 3 नवंबर 2025 को करीब 15 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इसका मकसद था- RJD के उम्मीदवार और सिटिंग विधायक रीतलाल यादव को जीताना।

लेकिन रीतलाल यादव जेल में हैं। हाँ, आपने सही पढ़ा- जेल में बंद उम्मीदवार के लिए रोड शो। रीतलाल 17 अप्रैल से बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगने और धमकी देने के मामले में जेल में हैं। चुनावी नियम के कारण वे खुद प्रचार में नहीं उत सकता था। हालाँकि, रीतलाल यादव ने नामांकन के लिए कोर्ट से अनुमति माँगी, जो नहीं मिली। अब रीतलाल का परिवार ही चुनाव प्रचार संभाल रहा है।

रोड शो का कारण?

लालू यादव का दानापुर में उतरना महज रीतलाल की सीट बचाने की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीतिक चाल थी, जिसका मुख्य उद्देश्य विरोधियों को हराना और अपना वोट बैंक सुरक्षित करना था।
दानापुर विधानसभा क्षेत्र, लालू के दामाद रामकृपाल यादव (जो अब भाजपा में हैं) को हराने वाली मीसा भारती के पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। रीतलाल की जीत मीसा भारती के भविष्य के रास्ते को आसान बनाएगी। लालू का आना यह स्पष्ट संदेश देता है कि परिवार के वर्चस्व के लिए किसी भी कीमत पर सीट जीतनी है, भले ही उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि का हो।
इसके अलावा, दानापुर में यादव वोटर करीब 22% हैं। इसके बाद करीब 20% फॉरवर्ड, करीब 15% दलित, 20-25% EBC और 6-8% मुस्लिम हैं। NDA के उम्मीदवार रामकृपाल यादव (जो खुद लालू के पूर्व शिष्य रहे हैं) की छवि ‘सॉफ्ट’ है। इस इलाके में यादव वोटर बँट सकते थे। खुद को यादवों का सबसे बड़ा नेता मानने वाले लालू यादव ने सड़क पर उतरकर यह सुनिश्चित किया कि यादव वोट एकजुट होकर केवल रीतलाल को ही मिलें। यह एकजुटता अपराध की पृष्ठभूमि को दरकिनार कर केवल जातीय आधार पर वोट डालने का संकेत है।
लालू के करीबी रामकृपाल यादव, 2014 में टिकट न मिलने पर बीजेपी में चले गए थे और उन्होंने मीसा भारती को हराया था। लालू यादव अपने पुराने शिष्य को हराने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। लालू का रोड शो, रामकृपाल के यादव वोटों को अपनी तरफ खींचने के प्रयास को विफल करने की रणनीति का हिस्सा है।

कौन हैं रीतलाल यादव?

रीतलाल यादव, जिन्हें मीडिया में ‘बाहुबली‘ कहा जाता है, लालू यादव के पुराने संपर्क वाले हैं। रीतलाल का राजनीतिक सफर 2003 में लालू यादव की ‘तेल पिलावन, लाठी घुमावन‘ रैली के दौरान शुरू हुआ था। एक दौर ऐसा भी कहा जाता है कि जब दानापुर डिवीजन से रेलवे के जितने भी टेंडर निकलते थे, वो रीतलाल यादव ही डील करते थे।

रीतलाल 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगने और धमकी देने के मामले में जेल में बंद हैं। यह मामला बिल्डर कुमार गौरव से जुड़ा है। रीतलाल के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन पर हत्या, रंगदारी, वसूली और धमकी देने जैसे कुल 11 आपराधिक मामले लंबित हैं।

रीतलाल तब चर्चा में आए जब उन पर भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या का आरोप लगा। 2010 में विधानसभा चुनाव से पहले रीतलाल ने सरेंडर कर दिया था। रीतलाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जेल से ही चुनाव लड़ा और हारे। हालाँकि, रीतलाल को भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या मामले में हाल ही में जमानत मिली, लेकिन वे रंगदारी के मामले में फिर जेल में गए और पुलिस की हिरासत में नामांकन करने पहुँचे।

एक ऐसे उम्मीदवार के लिए, जिस पर संगीन आरोप हैं और जो चुनाव प्रचार की अनुमति के बावजूद जेल से बाहर नहीं आ सका, खुद पार्टी सुप्रीमो का प्रचार के लिए उतरना यह दिखाता है कि पार्टी की प्राथमिकता ‘अपराधमुक्त छवि’ नहीं, बल्कि ‘वोट बैंक की जीत’ है। यह सीधे तौर पर एक बार फिर से ‘जंगलराज’ और आपराधिक तत्वों को राजनीति में संरक्षण देने की मानसिकता को दर्शाता है।

अपराधी को टिकट: ‘दोहरी सोच’ की राजनीति

यह घटना लालू यादव की ‘दोहरी सोच‘ को उजागर करती है। एक तरफ, उनके परिवार के सदस्य (जैसे तेजस्वी यादव) अक्सर आपराधिक छवि वाले नेताओं पर बयान देते हैं, लेकिन जब दानापुर में रीतलाल यादव जैसे जेल में बंद उम्मीदवार की बात आती है, तो वे खुद प्रचार में उतर आते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालू के लिए नैतिकता या कानून मायने नहीं रखता, बल्कि केवल चुनाव जीतना मायने रखता है। एक ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारना, जो गंभीर आरोपों में फँसा है और जिसके लिए खुद पार्टी मुखिया को उतरना पड़े, यह दिखाता है कि RJD की राजनीति में अपराध और राजनीति को अलग-अलग मानने की सोच है। यदि कोई नेता बीजेपी का हो तो वह अपराधी है, लेकिन अगर RJD का हो, तो उसे ‘साजिश का शिकार’ बताकर उसे समर्थन दिया जाता है।

पंजाब : AAP नेता अनोख मित्तल ने अवैध संबंधों का राज खुलने पर बीवी को मरवा दिया

                                   आप नेता अनोख मित्तल (फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
लुधियाना पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता अनोख मित्तल को अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मित्तल ने अपनी प्रेमिका प्रतिक्षा के साथ मिलकर सुपारी किलर्स को 2.50 लाख रुपये में हत्या के लिए हायर किया था। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपित फरार है।

पुलिस कमिश्नर कुलदीप सिंह चहल के मुताबिक, शनिवार (15 फरवरी 2025) की रात अनोख मित्तल अपनी पत्नी मानवी उर्फ लिप्सी के साथ डिनर कर घर लौट रहा था। रास्ते में उसने कार रोकी और तभी पाँच हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। उन्होंने तेज धारदार हथियारों से मानवी पर वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को लूटपाट जैसा दिखाने के लिए हमलावर मित्तल की कार और पत्नी की ज्वेलरी लेकर फरार हो गए।

पुलिस ने जब मामले की गहराई से जाँच की तो पता चला कि अनोख मित्तल ने खुद ही इस हत्या की साजिश रची थी। उसकी पत्नी को उसके प्रेम संबंध के बारे में जानकारी हो गई थी, जिस वजह से दोनों के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। आए दिन झगड़े बढ़ रहे थे, जिसके चलते मित्तल ने अपनी प्रेमिका प्रतिक्षा के साथ मिलकर पत्नी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पुलिस के मुताबिक, हत्या के लिए 2.50 लाख रुपये की डील हुई थी, जिसमें से 50,000 रुपये एडवांस दिए गए थे। बाकी पैसे हत्या के बाद देने की योजना थी।

पुलिस ने इस मामले में अनोख मित्तल, उसकी प्रेमिका प्रतिक्षा और चार सुपारी किलर्स-अमृतपाल सिंह उर्फ बली (26), गुरदीप सिंह (25), सोनू (24) और सागरदीप उर्फ तेजी (30) को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक अन्य आरोपित गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी अब भी फरार है।

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट, आई-20 और रिट्ज कार को जब्त कर लिया है। साथ ही एक तलवार भी बरामद की गई है, जिससे वारदात को अंजाम दिया गया था। 

योगी को धमकी देने वाली निकली फातिमा खान, महाराष्ट्र पुलिस ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश  के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले का पता लगा गया है। मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र के ही उल्हासनगर से फातिमा खान नाम की महिला एक को गिरफ्तार किया है। फातिमा B.Sc (IT) की छात्रा है और उसके अब्बू फर्नीचर का काम करते हैं।

गौरतलब है कि शनिवार (2 नवम्बर, 2024) को मुंबई ट्रैफिक पुलिस को CM योगी के नाम धमकी मिली थी। इसमें कहा गया था कि योगी 10 दिन में इस्तीफ़ा दें या फिर उन्हें बाबा सिद्दीकी की तरह मार दिया जाएगा। इसके बाद मुंबई और यूपी पुलिस ने तलाश चालू की थी।

अवलोकन करें : -

उत्तर प्रदेश : 10 दिन में इस्तीफा दें योगी आदित्यनाथ, नहीं तो बाबा सिद्दीकी की तरह हत्या कर देंगे:

मुंबई पुलिस ने ATS के साथ मिलकर नम्बर ट्रैक करके फातिमा खान को गिरफ्तार किया है। अभी यह नहीं साफ़ हुआ है कि वह किसी गैंग से जुड़ी है या फिर ऐसे ही उसने धमकी दी है।

विपक्ष के हाथ कठपुतली बनी 56 इंच वाले मोदी की भाजपा ; नूपुर शर्मा की तरह कंगना रनौत का भाजपा में ही विरोध क्यों ? जनता के सामने सच्चाई लाने से क्यों डर रही भाजपा? वीडियो

                                    'किसान आंदोलन' पर कंगना रनौत के बयान से भाजपा ने झाड़ा पल्ला
नूपुर शर्मा के बाद कंगना रनौत से क्यों किनारा कर रही भाजपा? 
कंगना ने क्या गलत बोला है? क्यों कंगना द्वारा सच्चाई सामने लाने से 56 इंच वाले नरेंद्र मोदी की पार्टी और सरकार किनारा कर रही है? अगर नूपुर शर्मा के मामले में मोदी सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों और विपक्ष को प्रेस कांफ्रेंस कर छेड़छाड़ वाली और असली वीडियो बशर्ते डंडा हाथ में लेकर यह आदेश देकर कि प्रेस कांफ्रेंस को लाइव नहीं दिखाने चैनल को 6 महीने के बैन कर दिया जाएगा कहकर दिखाई होती, किसी कन्हैया की जान नहीं जाती। हैदराबाद में टी राजा सिंह के मामले में भी बीजेपी ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए थे। राजा सिंह को पार्टी से निकाल दिया, क्यों? जिसका जब किया सनातन का अपमान करता रहता है, मोदी सरकार चुप रहती है,क्यों? कितनों के विरुद्ध मोदी सरकार ने सनातन का अपमान करने पर कार्यवाही की? आखिर कब भारत विरोधियों और सनातन विरोधियों के मंसूबों पर कुठाराघात किया जाएगा? जब देश ही सुरक्षित नहीं रहेगा, कौन करवाएगा चुनाव?          

भाजपा ने अपने सांसद कंगना रनौत के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ के संबंध में कहा था कि उस दौरान बलात्कार और हत्या की घटनाएँ हुई थीं। अब भाजपा ने आधिकारिक बयान जारी कर के खुद को इससे अलग कर लिया है। भाजपा ने कहा है कि सांसद कंगना रनौत द्वारा ‘किसान परिप्रेक्ष्य’ में दिया गया बयान पार्टी का मत नहीं है। साथ ही पार्टी ने कंगना रनौत के बयान से असहमति भी व्यक्त की है।

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि पार्टी की ओर से नीतिगत विषयों पर बोलने के लिए न तो कंगना रनौत को अनुमति है और न ही वो बयान देने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही BJP ने कंगना रनौत को ये भी निर्देश दिया है कि भविष्य में वो इस प्रकार का बयान न दें। पार्टी ने दोहराया कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा सामाजिक समरसता के सिद्धांतों पर चलने के लिए कृतसंकल्पत है। कॉन्ग्रेस लगातार कंगना रनौत के बयान का विरोध कर रही थी।

कंगना रनौत ने इस दौरान ये भी कहा था कि फ़िल्मी लोगों को पता होना चाहिए कि देश नहीं रहेगा तो वो भी नहीं बचेंगे। अब कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि भाजपा को कंगना रनौत को पार्टी से निकालना चाहिए। बता दें कि इन्हीं सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत के लिए लोकसभा चुनाव के समय अश्लील शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद उन्हें इंस्टाग्राम पोस्ट डिलीट करना पड़ा था। अब वही कॉन्ग्रेस पार्टी कंगना रनौत के नाम पर भाजपा को घेर रही है।

बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि अगर देश का शीर्ष नेतृत्व को बेहद मजबूत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो किसान आंदोलन के दौरान पंजाब को भी बांग्लादेश बना दिया जाता। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रवी हिंसा फैला रहे थे। प्रदर्शन स्थल पर रेप और हत्याएँ हो रही थीं।

 कंगना ने एक मीडिया हाउस दो दिए इंटरव्यू में कहा, “आज हमारा शीर्ष नेतृत्व कमजोर होता तो भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति हो सकती थी। यहाँ किसान आंदोलन के दौरान क्या हुआ, उसे सबने देखा। प्रोटेस्ट के नाम पर वायलेंस फैलाया गया। वहाँ रेप हो रहे थे। मारकर लाशों को लटकाया जा रहा था।” उन्होंने कहा कि उपद्रवियों ने बहुत लंबी योजना बना रखी थी।

अभिनेत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले को सही ठहराया और कहा, “जब उस बिल को वापस लिया गया तो ये उपद्रवी चौंक गए, क्योंकि उनकी प्लानिंग तो बहुत लंबी थी। उन पर समय रहते कंट्रोल पा लिया गया, वरना वे कुछ भी कर सकते थे।” उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया, जहाँ ड्रग्स रैकेट और धर्मांतरण रैकेट सक्रिय हैं।

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “पंजाब में क्या हो रहा है, यह सारी दुनिया देख रही है। ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म में वहाँ की रियलिटी भी दिखाई गई है। इस समय पंजाब में ड्रग्स माफिया, धर्म परिवर्तन गैंग और अलगाववादी खालिस्तान समर्थक खूब फल-फूल रहे हैं। वहाँ पर कुछ लोग हर वक्त कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।”

महिला सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा महिलाओं के सपोर्ट में आवाज बुलंद की है। आज से 10 साल पहले आमिर खान जी के शो सत्यमेव जयते में मैंने फिल्मों में आइटम नंबर्स का खुला विरोध किया था। आइटम सॉन्ग में महिला को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है। एक महिला का शरीर सिर्फ मनोरंजन के लिए है? इससे समाज में गलत मैसेज जाता है।”

उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘रामलीला’ में आइटम सॉन्ग करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह, फराह खान ने भी अपनी फिल्म के लिए उन्हें कॉल किया था, लेकिन कंगना ने उन्हें भी मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मेरा वजूद मुझे यह सब करने की इजाजत नहीं देता, क्योंकि इसे मैं महिला के अपमान के तौर पर देखती हूँ।”

फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का उनसे खफा रहने के सवाल पर कंगना ने कहा, “लोगों को लगता है कि कंगना कुछ ज्यादा ही सच बोल देती है। मैंने इंडस्ट्री में फैले सेक्सिज्म, नेपोटिज्म और आइटम नंबर्स के खिलाफ हमेशा से ही बोला है। मीटू मूवमेंट के वक्त भी मैंने काफी लोगों के पोल खोले थे। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के वक्त भी मैंने काफी खुलासे किए, जिसकी वजह से काफी लोगों को मिर्ची लगी थी।”

किसान आंदोलन और पंजाब को लेकर कंगना रनौत द्वारा दिए गए बयान पर पंजाब के कॉन्ग्रेस नेता राजकुमार वेरका ने निशाना साधा है। वेरका ने कहा, “कंगना लगातार किसानों पर ऐसे बयान दे रही हैं। उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उन पर NSA लगाया जाए।” राजकुमार वेरका 2 बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। 2017 से 2022 तक पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। 


बांग्लादेश : बड़े कारोबारी और उसके हीरो बेटे की हत्या: बचने के लिए पिस्टल से गोली चलाई, भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला – शेख मुजीबुर रहमान पर भी बना चुके थे मूवी

                                 बांग्लादेश में कारोबारी सेलीम खान और उनके बेटे शंतो खान की हत्या
बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सत्ता परिवर्तन की वजह बना। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहाँ भीड़ ने कई हिन्दुओं की हत्याएँ कर दी हैं और मंदिरों पर भी हमले किए गए हैं। अब ‘लक्ष्मीपुर मॉडल यूनियन परिषद’ के अध्यक्ष सेलीम खान और उनके फिल्म स्टार बेटे शंतो खान को भीड़ ने मार डाला है। घटना सोमवार (5 अगस्त, 2024) के दोपहर की है। दोनों भीड़ से बचने के लिए चाँदपुर सदर उपजिला स्थित अपने आवास से भाग रहे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया।

बलिया यूनियन स्थित फोरक्काबाद बाजार में भीड़ ने उन्हें देख लिया और पहचान लिया। उन्होंने खुद को बचाने के लिए पिस्टल से गोलियाँ भी चलाई, लेकिन सब बेकार। वो किसी तरह आगे बढ़ कर बागरा बाजार तक पहुँचे, लेकिन वहाँ फिर से भीड़ ने उन्हें घेर लिया। वहाँ भीड़ ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, सेलीम खान कई वर्षों से नौसैन्य सीमा में पद्मा-मेघना नदी से सैकड़ों ड्रेजरों की मदद से अवैध रूप से रेत निकाल रहे थे और करोड़ों टका जमा कर रहे थे।

उन्हें इन गतिविधियों के कारण जेल भी हुई थी। बांग्लादेश के ‘एंटी-करप्शन कमीशन’ (ACC) में उनके खिलाफ अभी भी केस चल रहा है। चाँदपुर सदर मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिस-इन-चार्ज (OIC) मोहम्मद शेख मोहसिन आलम ने कहा कि पुलिस को दोनों पिता-पुत्र की मौत के बारे में पता चला है, लेकिन घटना के दौरान उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि जवान अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर नहीं गए। सेलीम खान ‘शापला मीडिया’ के भी संस्थापक हैं।

‘शापला मीडिया’ के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण भी हो कर चुके थे। इस कंपनी के ‘शहंशाह’ और ‘विद्रोही’ नामक फ़िल्में काफी लोकप्रिय हुई थीं। उन्हें शेख हसीना का करीबी माना जाता था, उन्होंने शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर रहमान की बायोपिक फिल्म ‘बंग बंधु’ का निर्माण भी किया था। उन्होंने अपने बेटे को लॉन्च करने के लिए शेख मुजीबुर रहमान के बचपन पर आधारित फिल्म ‘तुंगी परार मियाँ भाई’ बनाई थी। अभिनेत्री कौशानी मुखोपाध्याय ने शंतो खान की मौत पर दुःख जताते हुए कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है। कई अन्य बंगाली फिल्म हस्तियों ने दुःख जताया है।

क्या पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करवाना चाहता है ईरान? अंदर थे ट्रंप, बाहर AK-47-चाकू लेकर घूम रहे थे लोग: एक को पुलिस ने मार गिराया-दूसरा गिरफ्तार

चाकूधारी को मारने के बाद तैनात पुलिस (बाएँ) और RNC में मौजूद ट्रम्प (दाएँ) (चित्र साभार; The Jerusalam Post & The Sun US)
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर पेंसिलवेनिया में हुए हमले के पहले उनकी हत्या की साजिश के बारे में खुफिया जानकारी सामने आई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि ईरान डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या के लिए हमला करवा सकता है। इस कारण से उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प की हत्या की साजिश की यह सूचना जून महीने में प्राप्त हुई थी। इसके बाद उनके आसपास अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। बताया गया कि यह सूचना एक मानव स्रोत के जरिए आई थी क्योंकि बीते कुछ दिनों में लगातार ईरान में ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा चल रही है।

पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के शासनकाल में इराक के भीतर बड़े ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी पर ड्रोन हमला हुआ था। इसमें सुलेमानी की मौत हो गई थी। यह हमला अमेरिका ने ही किया था। इसके बाद से लगातार ट्रम्प की जान को लेकर ईरान से खतरा है।

व्हाईट हाउस ने इस संबध में कहा है कि वह लगातार ट्रम्प के जीवन पर ईरानी खतरों का जायजा लेते रहते हैं। व्हाईट हाउस ने कहा कि यह खतरे ईरान की सुलेमानी की हत्या का बदला लेने की इच्छा के कारण पैदा होते हैं।

ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और द्वेषपूर्ण बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के एक प्रवक्ता ने इसी के साथ ट्रम्प को एक अपराधी बताया है। ईरान ने इस मामले पर कहा, “ईरान के दृष्टिकोण से, ट्रम्प एक अपराधी हैं, जिन पर जनरल सुलेमानी की हत्या का आदेश देने के लिए मुकदमा चलाया जाना चाहिए उन्हने उसे कानून की अदालत में दंडित किया जाना चाहिए। ईरान ने उन्हें कटघरे में लाने के लिए कानूनी रास्ता चुना है।”

ट्रम्प पर हमला करने वाले हमलावर का अभी कोई ईरान कनेक्शन सामने नहीं आया है। यह खतरा अलग से ही मालूम हुआ है। गौरतलब है कि 13 जुलाई, 2024 को रैली को संबोधित करते समय ट्रम्प पर एक 20 वर्षीय हमलावर ने गोलियाँ बरसा दी थीं। उसको मौके पर ही मार गिराया गया था।

रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन के पास चाकूधारी का एनकाउंटर

वर्तमान में अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन चल रही है। इसमें देश बहर से रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य शामिल हुए हैं। इस कंवेंशन में डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार JD वेंस भी शामिल हो रहे हैं। यह मिल्कॉवे शहर में हो रही है।
इस आयोजनस्थल के पास ही पुलिस ने एक चाकूधारी व्यक्ति को मार गिराया। वह इस कायर्क्रम के पास ही हाथों में दो चाकू लेकर लहरा रहा था। पहले पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास किया और आत्मसमर्पण करने को कहा। हालाँकि, चाकू लिए व्यक्ति ने उनकी बात नहीं सुनी और एक आदमी पर हमला कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने उसे गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। यह एनकाउंटर यहाँ मौजूद ओहायो राज्य की पुलिस ने किया। बताया गया कि मारा गया व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था और सड़कों पर ही घूमा करता था।
इसी कायर्क्रम स्थल के पास पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसके पास से एक AK-47 रायफल और उसकी गोलियाँ बरामद हुईं। बताया गया कि यह व्यक्ति मुंह पर मास्क पहने हुए था और कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूरी पर था। उसके पास सुरक्षाबलों द्वारा उपयोग किए जाने वाला एक बैग भी था।
पुलिस को उसकी हरकतों पर शक हुआ और उसकी तलाशी ली गई। इसके पास AK-47 का कोई वैध परमिट बरामद नहीं हुआ। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

सांसद की उतारी खाल, मांस का कीमा बना पैकेटों में भर दिया: अनावरुल अजीम की हत्या में ‘हनी ट्रैप’ का भी आया एंगल

बांग्लादेशी सांसद की निर्मम हत्या (फोटो साभार: NDTV/Butchersequipment)

बांग्लादेशी सांसद अनवारुल अजीम अनार की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। खबर है कि इस हत्या में एक कसाई भी शामिल था। इस कसाई को पश्चिम बंगाल की सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। कसाई ने ही बांग्लादेशी सांसद के शव से खाल उतारने का और उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में कीमे की तरह काटने का काम किया था।

कसाई की पहचान 24 साल के जिहाद हवलदार के रूप में हुई है। वह मुंबई में अवैध अप्रवासी के तौर पर रह रहा था और उसका अब्बा जोयनल हवलदार बांग्लादेश के खुलना में रहता है। अधिकारियों ने छानबीन के बाद बताया कि कसाई को अजीम की हत्या से दो महीने पहले मुंबई से कोलकाता लाया गया था।

इस काम की सुपारी उसे बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी नागरिक अखतरुज्जमां ने दी थी, जो कि बांग्लादेशी सांसद का दोस्त था। जिहाद ने अन्य चार बांग्लदेशी नागरिकों के साथ मिलकर सांसद की हत्या फ्लैट में ही की थी। हत्या के बाद इन्होंने पहचान मिटाने के लिए शव से खाल उतारी, शव से मांस काटा और अलग-अलग पैकेट में भरकर उसे कोलकाता के अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया
है।

अब इस आरोपित को पुलिस बारासात कोर्ट में भेजकर बयान दर्ज करवाएगी और उसके बाद सांसद के अलग अलग अंगों को बरामद करने के लिए इसे पुलिस कस्टडी में लिया जाएगा। इस मामले में हनीट्रैप एंगल का भी खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि एक महिला ने ही सांसद को उस फ्लैट में जाने को कहा था जहाँ उनके शव के टुकड़े हुए।

सांसद की हत्या दोस्त ने कराई

इससे पहले बांग्लादेश में पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार करते हुए हत्या की पूरी कहानी का खुलासा किया था। पता चला था कि अजीम की कोलकाता में हत्या उन्हीं के एक दोस्त ने करवाई थी। उसी ने अनवारुल अजीम को अपने कोलकाता वाले फ्लैट पर बुलवाया था जहाँ उनकी हत्या कर दी गई।
बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के सांसद अनवारुल अजीम 12 मई को भारत इलाज के लिए आए थे। यहाँ वह पहले दो दिन अपने एक सुनार दोस्त के यहाँ रुके थे, इसके बाद वह इलाज की बात कह कर उसके घर से निकले और फोन पर बताया कि वह दिल्ली जा रहे हैं।
हालाँकि, इसके बाद से वह गायब हो गए और उनका कोई पता नहीं लगा। इसके बाद उनकी हत्या की खबर आई। उनकी हत्या की योजना बनाने वाला अख्तरुज्ज्मान उनका पुराना दोस्त और व्यापारिक पार्टनर था। वह उनसे एक पुराने विवाद में बदला लेना चाहता था। इसलिए उसने अनवारुल अजीम की हत्या की साजिश रची थी।
अख्तरुज्ज्मान एक अमेरिकी-बांग्लादेशी नागरिक है और वह अमेरिका से भारत और बांग्लादेश इसी काम के लिए आया था। उसने अपने साथियों के साथ मिल कर कोलकाता में सांसद हत्या की साजिश रची। इस हत्या में उसके साथ अमानुल्लाह अमान, सियाम जिहाद, फैसल शजी और मोस्ताफियाज भी शामिल थे। इस हत्या में अख्तरुज्मान की गर्लफ्रेंड भी शामिल थी। यह सभी बारी बारी से भारत आए थे।
अख्तरुज्ज्मान ने इस हत्या के लिए ₹5 करोड़ देने की बात कही थी। उसने कुछ पैसे पहले दे भी दिए थे। अभी कुछ धनराशि ही दी थी। बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अमान को गिरफ्तार कर लिया है, वह हत्या को अंजाम देने का आरोपित है। उसके अलावा दो और लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

मर गया ‘मानवता का मसीहा’ दाऊद इब्राहिम, पाकिस्तानी PM ने किया ट्वीट : सोशल मीडिया पर वायरल खबर की सच्चाई

  दाऊद इब्राहिम (बाएँ) और अनवार उल हक काकड़ (दाएँ) (चित्र साभार: India Today & Anwaar_Kaakar/X)
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के कराची में रह रहे अंडरवर्ल्ड डॉन और भारत का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम को जहर दे दिया गया है। इससे उसकी मौत हो गई है। दाऊद की मौत को लेकर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ का एक ट्वीट भी वायरल हो रहा है।

दरअसल, 17 दिसम्बर 2023 की रात से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया गया कि दाऊद इब्राहिम को जहर दे दिया गया है। उसे गंभीर हालात में पाकिस्तान के कराची में स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इसके कुछ देर बाद ये दावे किए गए कि जहर देने के कारण दाऊद इब्राहिम की मौत हो गई है। इसी सम्बन्ध में यह भी दावा किया गया कि दाऊद इब्राहिम की मौत पर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ ने ट्वीट किया है। इस ट्वीट में काकड़ के हवाले से दावा किया गया कि दाऊद की मौत जहर देने के कारण हो गई है।

इस ट्वीट में लिखा है, “मानवता का मसीहा, हर पाकिस्तानी के दिलअजीज हमारे प्यारे महान दाऊद इब्राहिम की अज्ञात व्यक्तियों द्वारा जहर दिए जाने से मौत हो गई है। उन्होंने कराची में आखिरी साँस ली। अल्लाह उन्हें जन्नत में सबसे ऊँचा मुकाम दे। इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलाही राजि’उन।”

हालाँकि, यह दावा कितना सच और कितना झूठ है, इसका फैक्ट चेक ऑपइंडिया ने किया है। पहली नजर में यह ट्वीट एकदम सच नजर आता है। अनवार उल काकड़ की वही तस्वीर, नाम और ट्विटर हैंडल भी एक जैसा ही दिखता है, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह ट्वीट फर्जी है।

दरअसल, जिस ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किया गया है, वह @Anwaar_Kakkar है, यानी काकड़ की स्पेलिंग में इसमें दो K है। वहीं, अनवार उल हक काकड़ के असली अकाउंट देखने पर पता चलता है कि यह ट्विटर हैंडल @Anwaar_Kakar है और इसमें एक ही K है।

अनवार उल हक काकड़ के असली ट्विटर हैंडल को खंगालने पर ऐसा कोई ट्वीट नहीं मिला। उनकी ट्विटर टाइमलाइन पर आखिरी ट्वीट 16 दिसम्बर 2023 का है। इसमें वह कुवैत के अमीर की मौत पर दुःख जता रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

जिस फर्जी अकाउंट से यह ट्वीट किया गया है, उसे खंगालने पर पता चला कि अब इसके नाम में अनवार उल हक काकड़ के साथ ही ‘फैन्स’ शब्द भी जोड़ दिया गया है। इसी के साथ ही अनवार उल काकड़ के प्रधानमंत्री बनने के अलावा और कोई ट्वीट नहीं है।


यदि दाऊद को जहर दिए जाने और उसके मरने की खबर सही भी है तो पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इसे नहीं मानेगा। दरअसल, भारत लम्बे समय से कहता आया है कि दाऊद इब्राहिम कराची के ‘क्लिफ्टन’ क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा के बीच रह रहा है। पाकिस्तान की सेना और ISI उसकी सुरक्षा करती है। हालाँकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा यह ट्वीट करने की गुंजाइश नहीं है।

इसके साथ ही इन्टरनेट पर यह भी दावा किया जा रहा है कि दाऊद इब्राहिम की मौत के कारण पाकिस्तान में इन्टरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं। दावा किया गया कि पाकिस्तान के लोग अब फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसी वेबसाइट नहीं चला पा रहे।

इस बात का भी सच थोड़ा अलग है। यह बात सही है कि पाकिस्तान में 17 दिसम्बर 2023 को इन्टरनेट सेवाएँ प्रभावित हुई थीं, लेकिन इसका कारण दाऊद इब्राहिम की मौत नहीं है।

इंटरनेट डाउन होने के पीछे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक-ए-इन्साफ’ की एक वर्चुअल रैली थी। तहरीक-ए-इन्साफ ने खुद भी यह साफ़ किया है कि पाकिस्तान की सरकार उन्हें दबाने और उनकी आवाज जनता तक पहुँचने से रोकने के लिए ऐसा कर रही है।

ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में जहाँ दाऊद की कथित मौत पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ का ट्वीट फर्जी निकला, वहीं पाकिस्तान में दाऊद की मौत पर इन्टरनेट बंद किए जाने का दावा भी अर्धसत्य निकला। दाऊद की मौत को लेकर स्थिति अभी साफ़ नहीं हो पाई है।

बिहार : गोपालगंज में पुजारी का गुप्तांग काटा, जीभ निकाली, आँख नोचकर झाड़ी में फेंकी

पुजारी मनोज कुमार (दाएँ) और विरोध प्रदर्शन (बाएँ) (चित्र साभार: News18 & Live Hindustan)
बिहार के गोपालगंज में एक पुजारी की निर्मम हत्या की खबर सामने आई है। उसकी हत्या गोली मार कर दी गई और शव को भी क्षत-विक्षत कर दिया गया। हत्यारों ने पुजारी की आँखे निकाल ली, गुप्तांग और जीभ काट दिए और शव को झाड़ियों में फेंक दिया।

न्यूज 18, आजतक और जागरण जैसे मीडिया संस्थानों में प्रकाशित खबर के अनुसार, जिला गोपालगंज के थाना दानापुर के मांझा गाँव के रहने वाले मनोज कुमार अपने गाँव में ही बने मंदिर में पूजा करते थे। वह यहाँ के पुजारी थे और यहीं रहते थे। वह 11 दिसम्बर, 2023 की शाम से गायब थे। पुलिस को भी इस मामले की सूचना दी गई थी लेकिन पुलिस उन्हें सप्ताह भर तक नहीं ढूँढ पाई और खानापूर्ति करती रही।

आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जाँच करने से पता चला था कि वह रात 12 बजे मंदिर का कमरा बंद करके बाहर निकले थे और इसके बाद गायब हो गए। मनोज कुमार के भाई अशोक कुमार साह भाजपा के मंडल अध्यक्ष और गाँव के पूर्व मुखिया हैं।

मनोज कुमार के गायब होने के बाद जब पुलिस को इसकी सूचना दी गई तो उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया और लगभग एक सप्ताह तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। 16 दिसम्बर, 2023 को मनोज कुमार शव गाँव के पास ही झाड़ियों में पड़ा मिला।

मनोज कुमार के शव के साथ काफी बर्बरता की गई थी। मनोज कुमार को गर्दन के पास गोली मारी गई थी। उनकी आँखे निकाल ली गई थी और गुप्तांग को काट दिया गया था। शव पर और भी मारपीट के निशान थे। शव मिलने के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए।

ग्रामीणों ने पुलिस की इस विफलता पर गोपालगंज से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 27 जाम कर दिया। कुछ आक्रोशित ग्रामीणों ने आगजनी और पथराव भी किया। पुलिस ने इस भीड़ को शांत करने के लिए लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की। आक्रोशित ग्रामीण हत्यारों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे।

गोपालगंज पुलिस ने इस मामले में कहा है कि इस मामले में सीसीटीवी के आधार पर कुछ तथ्य स्थापित कर लिए गए हैं। इस मामले की जाँच के लिए एक पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इससे पहले भी जुलाई 2023 में बिहार से एक पुजारी की हत्या की खबर सामने आई थी जिसे बिहार पुलिस ने हार्ट अटैक बताया था।

बिहार में अपराध लगातार बढ़ रहा है। बिहार की नीतीश सरकार कानून व्यवस्था के मामले विफल रही है। हाल ही में आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 के मुकाबले वर्ष 2022 में बिहार में 23% अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2022 में अपराध के 3.47 लाख मामले दर्ज हुए हैं जो कि 2021 के दौरान 2.82 लाख थे। वहीं वर्ष 2021 के दौरान प्रदेश में हत्या के 2799 मामले सामने आए थे जो कि वर्ष 2022 में बढ़कर 2930 हो चुके हैं।


पंजाब जेल में करणी सेना अध्यक्ष की हत्या की साजिश, 10 महीने पहले ही राजस्थान पुलिस के पास थी सूचना

राजस्थान में ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद 2 शूटर्स को गिरफ्तार किया गया है। वहीं एक अन्य व्यक्ति नवीन सिंह शेखावत मौके पर ही मौत हो गई थी। अब सामने आया है कि पंजाब के बठिंडा जेल में बंद संपत नेहरा ने इस हत्याकांड की साजिश रची थी। वो लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का गैंगस्टर है। राजस्थान पुलिस को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। जयपुर पुलिस ने अपील की है कि शांति बनाए रखा जाए।

राजस्थान पुलिस ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की फर्जी खबर न फैलाई जाए। DGP उमेश मिश्रा ने जानकारी दी कि हरियाणा में उनके समकक्ष से बातचीत की गई है। सीमाओं पर निगरानी रखी जा रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए माहिर माने जाने वाले ADG (कानून व्यवस्था) दिनेश MN की छुट्टी को रद्द कर दिया गया है। बीकानेर में भी दबिश दी जा रही है। रोहित गोदारा का वहाँ प्रभाव है, जिसने इस हत्याकांड की फेसबुक के माध्यम से जिम्मेदारी ली है।

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के एक परिचित अजीत भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जयपुर के अलावा जोधपुर, कुचामन, जैसलमेर, कोटा और बूंदी जैसे इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। उदयपुर और सिरोही में भी बंद का ऐलान किया गया है। राजपूत समाज ने बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को राजस्थान में बंद का आह्वान किया है। व्यापार मंडल से भी पुलिस संवाद कर रही है। लोगों की माँग है कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उच्च न्यायालय के जज से इस मामले की जाँच कराई जाए।

पुलिस ने जयपुर के झोटवाड़ा निवासी रोहित राठौड़ को गिरफ्तार किया है। वो मूल रूप से नागौर के मकराना का रहने वाला है। वहीं हरियाणा के महेंद्रगढ़ के रहने वाले नितिन फौजी को भी गिरफ्तार किया गया है। बाड़मेर, चूरू और राजसमंद में भी विरोध प्रदर्शन चालू है और बाजार बंद करवा दिए गए हैं। बता दें कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर में घुस कर हत्यारों ने बातचीत करते-करते अचानक 20 सेकेण्ड में ताबड़तोड़ 17 राउंड फायरिंग कर डाली जिसमें उनकी मौत हो गई।

वीडियो में देखा जा सकता है कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के सामने 2 युवक बैठ कर उनसे बातचीत कर रहे होते हैं, बगल में नवीन शेखावत बैठा होता है। वो एक कॉल रिसीव करते हैं तभी सामने बैठे युवक गोलियाँ बरसाने लगते हैं। नवीन शेखावत को ही गोली मारी जाती है। हमलावर जाते-जाते करणी सेना के अध्यक्ष के सिर में भी गोली मार कर जाते हैं। उनका गार्ड उन्हें बचाने की कोशिश करता है लेकिन सफल नहीं हो पाता। गोगामेड़ी आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और ‘पद्मावत’ को लेकर निर्देशक संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मारने के कारण चर्चा में आए थे।

अवलोकन करें:-

फरवरी 2023 का एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा राजस्थान पुलिस को संपत नेहरा द्वारा जेल से सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की साजिश रचने की जानकारी दी गई है। सूचना में बताया गया था कि राजस्थान में सांप्रदायिक दंगे भड़काने के लिए इस हत्या की साजिश रची जा रही थी। सूचना में ये भी बताया गया था कि संपत नेहरा ने इस काम के लिए AK-47 का जुगाड़ भी कर लिया है।

तेलंगाना : ‘T राजा सिंह का मर्डर कर दूँगी’: असदुद्दीन ओवैसी के सामने मुस्लिम महिला ने BJP विधायक को धमकी

                             असदुद्दीन ओवैसी के सामने महिला ने की T राजा सिंह की हत्या की बात
तेलंगाना में 30 नवंबर, 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सत्ताधारी BRS, हैदराबाद में प्रभाव रखने वाली BRS, विपक्षी कॉन्ग्रेस और उभरती हुई भाजपा – सब मैदान में डटे हुए हैं। चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने अपने विधायक T राजा सिंह का निलंबन वापस लेकर उन्हें हैदराबाद के गोशमहल से प्रत्याशी बनाया। वहीं असदुद्दीन ओवैसी अपना हैदराबाद का गढ़ मचाने में लगे हैं। वहाँ उनके 7 विधायक हैं। साथ ही वहाँ की नगरपालिका पर भी उनकी ही पार्टी का कब्ज़ा है।

असदुद्दीन ओवैसी के भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी हिन्दुओं के खिलाफ घृणात्मक बयान देने के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने हिन्दुओं को धमकाते हुए 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की धमकी दी थी। वहीं अब असदुद्दीन ओवैसी का एक नया वीडियो सामने आया है। चुनाव प्रचार के दौरान के इस वीडियो में एक महिला विधायक टी राजा सिंह की हत्या की बात कह रही है। महिला ओवैसी को देख कर बार-बार कहती है, “शेर माँ का बच्चा है ये।”

इसके बाद वो कहती है, “दुश्मनों को खत्म करो। मुसलमानों की दुआ है बेटा आपलोगों को। सारी दुनिया आपलोगों के पीछे है। उस मजलूम कमीने, राजा सिंह के मोहल्ले से मुझे खड़ा करो। मैं उसका मर्डर कर दूँगी।” असल में असदुद्दीन ओवैसी उस महिला के घर पर वोट माँगने पहुँचे थे। खास बात ये है कि इस वीडियो में हत्या की धमकी वाले बयान पर उस महिला को ओवैसी टोकते भी नहीं हैं। महिला उनके कामयाब होने की दुआ भी देती है।

उधर राजा सिंह भी गोशमहल से बतौर विधायक हैट्रिक लगाने के लिए तैयार हैं। उनके खिलाफ BRS ने नंदकिशोर व्यास को उतारा है। राजा सिंह ने तेलंगाना में भाजपा सरकार बनने की बात भी कही है। उन्होंने ओवैसी भाइयों पर केवल अपनी संपत्ति बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इनके कारण पुराने हैदराबाद शहर के मुस्लिम पिछड़े ही रह गए। उन्होंने कहा कि ओवैसी मुस्लिमों के वोट बीआरएस को बेचते हैं। राजा सिंह ने कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा।