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पाकिस्तान में पत्रकार पर चला सरकार का चाबुक, अमेरिका जा रहे ‘तोते वाले पत्रकार’ असद अली तूर को इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर रोका: PNIL में डाला नाम, प्रेस फ्रीडम में सबसे नीचे है देश

                                                                                                                         साभार: फ्राइडे टाइम्स
पाकिस्तान में मीडिया की हालत बद से बदतर होती जा रही है और वहाँ पत्रकारों पर शिकंजा कसना कोई नई बात नहीं है। इस बार पाकिस्तान ने अपने पत्रकार असद अली तूर को इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने से रोक दिया। असद कुछ दिनों पहले तोता खरीद को लेकर चर्चा में आए थे, जब तोता खरीदने के बाद इनके बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया था।

असद अली तूर इस्लामाबाद से अमेरिकी विदेश मंत्रालय के 12 दिवसीय इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम (IVLP) में भाग लेने के लिए वॉशिंगटन जा रहे थे। इमिग्रेशन अधिकारियों ने तूर ने कहा कि उनका नाम पाकिस्तान की प्रोविजनल नेशनल आइडेंटिफिकेशन लिस्ट (PNIL) में है। पाकिस्तान में इस लिस्ट में शामिल लोगों को कुछ समय तक विदेश यात्रा से रोक दिया जाता है।

तूर ने पाकिस्तानी सरकार को घेरा

तूर ने शनिवार (9 अगस्त 2025) को एक्स पर एक पोस्ट में पाकिस्तानी सरकार की आलोचना की है। तूर ने लिखा, “मैंने बार-बार PNIL में अपना नाम जोड़ने का कारण पूछा लेकिन अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था।”

तूर ने कहा, “पाकिस्तान में पत्रकारिता और सत्ता के सामने सच बोलना अपराध माना जाता है। हाँ, मैंने यह अपराध किया है और मैं यह अपराध दोहराता रहूँगा। एक पत्रकार को रोकना इस ‘हाइब्रिड’ शासन की एक और उपलब्धि है, जिसके शासन में पाकिस्तान विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 152वें स्थान से 6 अंक गिरकर 158वें स्थान पर आ गया है।”

पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRCP) ने तूर को विदेश जाने से रोके जाने की निंदा की हैं और पत्रकारों के उत्पीड़न को रोकने की माँग की है।

तूर की एक्स प्रोफाइल से पता चलता है कि वह ब्लूचिस्तान के गायब हुए लोगों को लेकर प्रदर्शन करने वालों का समर्थन कर रहे थे। तूर ने कई पोस्ट में पाकिस्तान की सरकार पर सवाल भी उठाए थे।

                                                                         तूर की X पोस्ट

पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में शामिल पाकिस्तान

रिपोटर्स विदआउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी 2025 के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों की सूची में 158वें नंबर पर है। RSF ने अपनी प्रोफाइल में कहा है कि पाकिस्तान पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है और जहाँ हर साल कई पत्रकारों की हत्याएँ होती हैं।

अगर कोई पाकिस्तानी पत्रकार वहाँ की सेना के नियमों के खिलाफ जाता है तो उसके अपहरण होने, कई वर्षों तक जेल में रहने का खतरा बना रहता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI किसी भी आलोचना करने वाले को ‘चुप’ करा देती है। पत्रकारिता की सुरक्षा की आड़ लेकर पाकिस्तानी कानून का उपयोग सरकार और सेना की किसी भी आलोचना को सेंसर करने के लिए किया जाता है।

पाकिस्तान में मुश्किल होती पत्रकारिता

पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए स्थितियाँ मुश्किल होती जा रही हैं। सरकार से सवाल करने वाले पत्रकारों पर हमले किए जाने का लंबा इतिहास है। हामिद मीर जैसे कई पत्रकारों को उनकी पत्रकारिता के लिए निशाना बनाया गया है। 2025 के शुरुआत में आई HRCP की रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता के पक्षधर मीडिया आउटलेट्स को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बिगड़ती स्थिति का वर्णन किया गया था।

कराची को तबाह करने के लिए तैयार थी नौसेना, केवल आदेश का था इंतजार: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में नेवी ने पाकिस्तान को कर दिया था ब्लॉक

   वाइस एडमिरल एएन प्रमोद : कराची बंदरगाह पर नौसेना हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी। (साभार-                wion/indian navy x account)
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इसके तहत भारत ने पाकिस्तान को काफी तगड़ा नुकसान पहुँचाया। सीजफायर लागू होने के बाद सेना ने हमले रोक दिए।

इसके बाद जल, थल और वायु सेना ने मिलकर एक प्रेस ब्रीफिंग की। इसमें डायरेक्टर जनरल ऑफ नेवल ऑपरेशन (DGNO) के वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने बताया कि नौसेना पाक पर हमले के लिए पूरी तरह से तैयार थी। कराची बंदरगाह समेत अन्य जगहों पर हमले के लिए सिर्फ आदेश का इंतजार था।

वाइस एडमिरल ने बताया, “‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू होते ही नौसेना अपनी पूरी तैयारी और क्षमता के साथ अरब सागर में तैनात थी। हमने अरब सागर को ब्लॉक कर दिया था। हम कराची बंदरगाह समेत समंदर और जमीन पर तय समय पर हमला करने के लिए लक्ष्य साध चुके थे।”

उन्होंने आगे कहा, “आतंकी हमले के 96 घंटे के अंदर ही नौसेना ने अपने हथियारों, युद्ध पोतों और अन्य तैयारियों को परखा और एक्शन के लिए तैनात हो गए ताकि तय समय पर अपने लक्ष्यों पर निशाना साध कर दुश्मन को सबक सिखाया जा सके।”

 ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत 7 मई को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बसे 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के एक दर्जन से अधिक लोगों समेत लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल के लगभग 100 आतंकी मारे गए।

वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, “भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान की एरियल यूनिट और नेवी को बंदरगाह पर ही इस तरह रोक कर रखा कि वे अपनी जगह से हिल न सकें। वे बंदरगाहों पर और पोर्ट पर काफी नजदीक थे। इससे हमने उन पर लगातार नजर बनाए रखी ताकि आदेश मिलने पर उन पर एक्शन ले सकें।”

ऑपरेशन सिंदूर कार्रवाई से तिलमिलाए पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए लेकिन भारत ने सभी हमले नाकाम कर दिए।

दाऊद इब्राहिम को ‘अज्ञात’ ने जहर देकर नहीं मारा, अनाम रिश्तेदार द्वारा मौत की खबरों को गलत बताना एक गहरा षड़यंत्र, जबकि ट्वीट प्रधानमंत्री का था

इस्लामी आतंकी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को कराची में अज्ञात व्यक्ति द्वारा जहर दिए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे सही नहीं हैं। यह उसके एक रिश्तेदार ने बताया है। इससे पहले 17 दिसम्बर 2023 को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था कि दाऊद को जहर दिया गया है और अस्पताल में उसकी मौत हो गई है।

रिश्तेदार द्वारा दाऊद की मौत का खंडन करना, लेकिन प्रधानमंत्री के ट्वीट को फेक बताना, क्या कोई गहरा षड़यंत्र है? कोई न कोई तो राज है? क्योकि बिना चिंगारी के कभी धुआँ नहीं होता। शंका व्यक्त की जा रही है, कि एक, समाचार में वजन है या फिर अज्ञात हत्यारों का डर इतना है कि दाऊद को अज्ञातवास में गुमनामी की मौत करने के छुपा दिया है।  जिस तरह भारत के most wanted आतंकियों की आए दिन अज्ञात लोगों द्वारा हत्या होने के डर से उनके सरगनाओं को ISI संरक्षण में रखे हुए है, क्या उसी तरह दाऊद को किसी अज्ञात जगह पर छिपाया गया है? दाल में कुछ काला तो जरूर है। प्रधानमंत्री द्वारा ट्वीट करना, सरकारी स्तर पर उसका खंडन नहीं होना और ये कहना कि fake account है, यदि fake account है तो किसने किया? क्योकि किसी देश के प्रधानमंत्री के twitter account से कुख्यात तस्कर के मौत की खबर आना अपने आपमें बहुत कुछ स्पष्ट कर रहा है।  

इन दावों में कहा गया था कि दाऊद इब्राहिम को जहर किसी अज्ञात आदमी ने दिया और इसके बाद उसे कराची स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहाँ गंभीर हालत में दो दिन रहने के बाद उसकी मौत हो गई। हालाँकि, ना ही दाऊद के परिवार ने और ना ही किसी अन्य आधिकारिक स्रोत से इसकी पुष्टि हुई थी।

दरअसल, वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाके करवाने वाला दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान के कराची के बेहद पॉश एवं सुरक्षित क्लिफ्टन इलाके में रहता है। भारतीय एजेंसियाँ लंबे समय से इसकी बारे में कहती रही हैं। हालाँकि, 1993 के बाद से उसकी कोई भी फोटो बाहर तक नहीं आई है।

अब सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों को लेकर समाचार वेबसाइट रिपब्लिक ने एक रिश्तेदार के हवाले से कहा है कि दाऊद इब्राहिम को जहर दिए जाने की खबर सही नहीं है। रिपब्लिक ने दाऊद के रिश्तेदार का नाम स्पष्ट नहीं किया है। उसने रिश्तेदार के हवाले से बताया है कि दाऊद को जहर देने की बात अफवाह है।

उस कथित रिश्तेदार ने यह भी बताया कि दाऊद अभी कहाँ है, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल खबरों में यह भी कहा गया था कि दाऊद की मौत के चलते पाकिस्तान में इन्टरनेट भी बंद कर दिया गया था। दाऊद की मौत पर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ के नाम से एक ट्वीट भी वायरल हुआ था।

हालाँकि, सामने आया था कि पाकिस्तान में इन्टरनेट में आ रही समस्याओं का सम्बन्ध 18 दिसम्बर 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ‘तहरीक-ए-इन्साफ'(PTI) की एक वर्चुअल रैली से था। PTI का कहना था कि सरकार उनकी रैली को रोकने के लिए इन्टरनेट में रुकावट डाल रही है।

अवलोकन करें:-

मर गया ‘मानवता का मसीहा’ दाऊद इब्राहिम, पाकिस्तानी PM ने किया ट्वीट : सोशल मीडिया पर वायरल खबर की

वही, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ के नाम पर वायरल किए गए ट्वीट की जाँच करने पर पता चला था कि यह ट्वीट एक फर्जी अकाउंट से किया गया था। यह पाकिस्तान के कार्यवाही प्रधानमंत्री के नाम पर बनाया गया था। बाद में इस अकाउंट का नाम भी बदल दिया गया।


मर गया ‘मानवता का मसीहा’ दाऊद इब्राहिम, पाकिस्तानी PM ने किया ट्वीट : सोशल मीडिया पर वायरल खबर की सच्चाई

  दाऊद इब्राहिम (बाएँ) और अनवार उल हक काकड़ (दाएँ) (चित्र साभार: India Today & Anwaar_Kaakar/X)
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के कराची में रह रहे अंडरवर्ल्ड डॉन और भारत का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम को जहर दे दिया गया है। इससे उसकी मौत हो गई है। दाऊद की मौत को लेकर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ का एक ट्वीट भी वायरल हो रहा है।

दरअसल, 17 दिसम्बर 2023 की रात से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया गया कि दाऊद इब्राहिम को जहर दे दिया गया है। उसे गंभीर हालात में पाकिस्तान के कराची में स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इसके कुछ देर बाद ये दावे किए गए कि जहर देने के कारण दाऊद इब्राहिम की मौत हो गई है। इसी सम्बन्ध में यह भी दावा किया गया कि दाऊद इब्राहिम की मौत पर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ ने ट्वीट किया है। इस ट्वीट में काकड़ के हवाले से दावा किया गया कि दाऊद की मौत जहर देने के कारण हो गई है।

इस ट्वीट में लिखा है, “मानवता का मसीहा, हर पाकिस्तानी के दिलअजीज हमारे प्यारे महान दाऊद इब्राहिम की अज्ञात व्यक्तियों द्वारा जहर दिए जाने से मौत हो गई है। उन्होंने कराची में आखिरी साँस ली। अल्लाह उन्हें जन्नत में सबसे ऊँचा मुकाम दे। इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलाही राजि’उन।”

हालाँकि, यह दावा कितना सच और कितना झूठ है, इसका फैक्ट चेक ऑपइंडिया ने किया है। पहली नजर में यह ट्वीट एकदम सच नजर आता है। अनवार उल काकड़ की वही तस्वीर, नाम और ट्विटर हैंडल भी एक जैसा ही दिखता है, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह ट्वीट फर्जी है।

दरअसल, जिस ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किया गया है, वह @Anwaar_Kakkar है, यानी काकड़ की स्पेलिंग में इसमें दो K है। वहीं, अनवार उल हक काकड़ के असली अकाउंट देखने पर पता चलता है कि यह ट्विटर हैंडल @Anwaar_Kakar है और इसमें एक ही K है।

अनवार उल हक काकड़ के असली ट्विटर हैंडल को खंगालने पर ऐसा कोई ट्वीट नहीं मिला। उनकी ट्विटर टाइमलाइन पर आखिरी ट्वीट 16 दिसम्बर 2023 का है। इसमें वह कुवैत के अमीर की मौत पर दुःख जता रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

जिस फर्जी अकाउंट से यह ट्वीट किया गया है, उसे खंगालने पर पता चला कि अब इसके नाम में अनवार उल हक काकड़ के साथ ही ‘फैन्स’ शब्द भी जोड़ दिया गया है। इसी के साथ ही अनवार उल काकड़ के प्रधानमंत्री बनने के अलावा और कोई ट्वीट नहीं है।


यदि दाऊद को जहर दिए जाने और उसके मरने की खबर सही भी है तो पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इसे नहीं मानेगा। दरअसल, भारत लम्बे समय से कहता आया है कि दाऊद इब्राहिम कराची के ‘क्लिफ्टन’ क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा के बीच रह रहा है। पाकिस्तान की सेना और ISI उसकी सुरक्षा करती है। हालाँकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा यह ट्वीट करने की गुंजाइश नहीं है।

इसके साथ ही इन्टरनेट पर यह भी दावा किया जा रहा है कि दाऊद इब्राहिम की मौत के कारण पाकिस्तान में इन्टरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं। दावा किया गया कि पाकिस्तान के लोग अब फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसी वेबसाइट नहीं चला पा रहे।

इस बात का भी सच थोड़ा अलग है। यह बात सही है कि पाकिस्तान में 17 दिसम्बर 2023 को इन्टरनेट सेवाएँ प्रभावित हुई थीं, लेकिन इसका कारण दाऊद इब्राहिम की मौत नहीं है।

इंटरनेट डाउन होने के पीछे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक-ए-इन्साफ’ की एक वर्चुअल रैली थी। तहरीक-ए-इन्साफ ने खुद भी यह साफ़ किया है कि पाकिस्तान की सरकार उन्हें दबाने और उनकी आवाज जनता तक पहुँचने से रोकने के लिए ऐसा कर रही है।

ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में जहाँ दाऊद की कथित मौत पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ का ट्वीट फर्जी निकला, वहीं पाकिस्तान में दाऊद की मौत पर इन्टरनेट बंद किए जाने का दावा भी अर्धसत्य निकला। दाऊद की मौत को लेकर स्थिति अभी साफ़ नहीं हो पाई है।

पाकिस्तान : कराची की अहमदिया मस्जिद पर मुस्लिम भीड़ का हमला, तोड़फोड़ करते रहे लोग-देखती रही पुलिस

     पाकिस्तान में अहमदिया की मस्जिद पर कट्टरपंथी मुस्लिमों का हमला (फोटो साभार : वायरल वीडियो का स्क्रीनग्रैब)
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं और मंदिरों पर हमले की घटना होती रहतीं हैं। अब कट्टरपंथी मुस्लिमों ने अहमदिया समुदाय की मस्जिद को निशाना बनाया है। मस्जिद में तोड़फोड़ करने वाले लोग इस्लामी पार्टी ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP)’ के सदस्य बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदिया समुदाय की यह मस्जिद कराची में है। इसे कादियानी मस्जिद कहा जाता है।जहाँ कुछ कट्टरपंथी हमलावरों ने मस्जिद में चढ़कर मीनारों और छज्जे में तोड़फोड़ की है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में 4 हमलावर हथौड़े से तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानीय लोग भी नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि अहमदिया मस्जिद में हुई तोड़फोड़ के समय पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद थे। हालाँकि, किसी ने भी इन इस्लामिक कट्टरपंथियों को रोकने की कोशिश नहीं की। मस्जिद में हमला करने वाले लोगों को पाकिस्तान की कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP)’ का सदस्य बताया जा रहा है। हमलवार फिलहाल फरार हैं। पुलिस मामले की जाँच करने की बात कह रही है।

बीते एक महीने में अहमदिया मुस्लिमों से जुड़े मजहबी स्थल पर यह दूसरा हमला है। इससे पहले, कराची के ही जमशेद रोड में स्थित अहमदी जमात खाने पर हमला हुआ था। इस हमले में जमात खाने की मीनारें टूट गई थीं। बता दें कि साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने संविधान में संशोधन कर अहमदिया मुस्लिमों को गैर मुस्लिम घोषित करार दिया था। इसके बाद से अहमदिया मुस्लिमों को भेदभाव, उत्पीड़न और हमलों का सामना कर रहा है।

इससे पहले पाकिस्तान के पेशावर शहर में सोमवार (30 जनवरी, 2023) को एक मस्जिद में आत्मघाती बम धमाका हुआ था। इस फिदायीन हमले में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। वहीं करीब 200 लोग घायल हुए थे। बम धमाके के वक्त नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में करीब 400 लोग मौजूद थे। ‘तहरीक-ए-तालिबान (TTP)’ ने हमले की जिम्मेदारी ली।

पाकिस्तान में 25000 से ज्यादा अल्पसंख्यक मार दिए गए, हजारों लापता: कराची के पूर्व मेयर ने ही खोली इमरान की पोल

पाकिस्तान, कराची, न्यूऑर्क
आतंकवाद और कश्मीर को लेकर आज पाकिस्तान प्रधानमंत्री की विश्व में किरकिरी जो हो रही है, उसके ज़िम्मेदार कोई और नहीं 1947 में पाकिस्तान बनने से लेकर इमरान खान से पूर्व समस्त शासक हैं, वह चाहे जनता के चुने हुए नेता ही क्यों न हों, उनके काँटों भरी बोयी फसल पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री को काटनी पड़ रही, इस सच्चाई को पाकिस्तान के हुक्ममरानो को स्वीकार करनी होगी। 
पूर्व शासकों की काली करतूतों को उजागर करते इमरान खान 
यदि भारत और बांग्लादेश की भांति इमरान से पूर्व हुक्मरानों ने केवल कश्मीर का आलाप रोने की बजाए विकास की ओर ध्यान दिया होता और फौज को सरकार पर हावी नहीं देने दिया होता, पाकिस्तान की इतनी दुर्गति नहीं हो रही होती। 
अमेरिका को ना पाकिस्तान में हुए हिन्दुओ पर अत्याचार दिखा और ना ही कभी उसे पाकिस्तान में कल्चरल डाइवर्सिटी खतरे में दिखी! केवल भारत में ही उसे ये खतरा दिखता है और वो भी चुनावो के वक्त या किसी और नाजुक समय में!
अमेरिका को ना पाकिस्तान में हुए हिन्दुओ पर अत्याचार दिखा
और ना ही कभी उसे पाकिस्तान में कल्चरल डाइवर्सिटी
 खतरे में दिखी! केवल भारत में ही उसे ये खतरा दिखता है
और वो भी चुनावो के वक्त या किसी और नाजुक समय में!
दूसरे, आज जो कुछ भी इमरान खान बोल रहे हैं, वह वास्तव में बहुत ही साहस का काम है। पाकिस्तान में आतंकवाद और आईएसआई की गैर-मुस्लिम हरकतें इमरान खान के कार्यकाल से पूर्व से चलती आ रही हैं। परन्तु इमरान से पूर्व जितने भी शासक रहे हैं, किसी ने देश में चल रहे आतंकवादी गतिविधियों को नहीं कबूला, जो विश्व स्तर पर इमरान कबूल रहे हैं। 
अगर इमरान से पूर्व रहे शासकों ने फौज के विरुद्ध जाकर इन हरकतों पर लगाम लगाई होती, पाकिस्तान की विश्व में इतनी किरकिरी नहीं होती। देखा जाए तो आज पाकिस्तान को अपना वजूद बचाना मुश्किल हो रहा है। इसके लिए पाकिस्तान के राजनीतिक दल ही नहीं, जनता भी बराबर की दोषी है। क्यों नहीं चुनावों में नेताओं से वायदा लिया, कि फौज के इशारे पर राज नहीं करेंगे। उस समय वहां की जनता को भी भारत विरोधी गतिविधियों में आनंद आ रहा था। 
तीसरे, सोवियत संघ (Soviet Union) को तोड़ने में अमेरिका ने किस तरह पाकिस्तान को पाला-पोसा, आज तक पाकिस्तान के किसी नेता ने सच्चाई बोलने का साहस नहीं किया, जो इमरान खान ने अमेरिका की ही धरती पर अमेरिका की कलाई खोल दी। इमरान की बातों को नकारात्मक लेने के साथ-साथ सकारात्मक रुख को भी पहचानना होगा। 
पाकिस्तानी जनता को भारत नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध सडकों पर आना होगा 
पाकिस्तान की धरती पर 40,000 आतंकवादियों और लगभग 40 आतंकवादी सरगनाओं का होना, कोई अचानक नहीं हुआ है। इमरान से पूर्व जितने भी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और तानाशाहों ने पाकिस्तान पर राज किया, सभी भारत विरोधी गतिविधियों को भुनाकर विदेशों के चन्दे पर राज करते रहे। 
भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों को भी शर्म आनी चाहिए कि 1947 में भारत से गए मुसलमानों को मुहाजिर यानि शरणार्थी क्यों कहा जाता है? उल्टी सीधी बातों पर फतवे देकर भारत में अशान्ति फ़ैलाने का साहस कर सकते हैं, लेकिन चीन में रह रहे मुसलमानों पर लग रहीं पाबंदियों के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं। क्या कश्मीर का मुसलमान ही मुसलमान है, चीन का नहीं? फिर पाकिस्तान में मुहाजिरों और अल्पसंख्यकों पर होते अत्याचारों के विरुद्ध क्यों नहीं बोलते? इन अत्याचारों के लिए जितना पाकिस्तान और वहां की फौज ज़िम्मेदार है, उतने भी भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थक, चाहे वो हिन्दू है या मुसलमान? ये लोग भाजपा, संघ, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, हिन्दू महासभा आदि का हौवा बना कर भारतीय मुसलमानों को डराकर अपनी तिजोरियां भरते रहे।  
मुहाजिरों और अल्पसंख्यकों पर होते अत्याचार    
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति कितनी बदहाल है? ये किसी से छिपा नहीं हैं। विश्व के कोने-कोने से पाकिस्तान को अपनी कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए थू-थू मिल रही है। अब ऐसे में कराची के पूर्व मेयर वासे जलील ने भी न्यूयॉर्क में पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों और मुहाजिरों पर होते अत्याचारों की पोल-पट्टी खोलकर पाक की हकीकत को और पारदर्शी कर दिया है। उन्होंने सितंबर 26, 2019 को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और मुहाजिरों पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जताई है।
न्यूयॉर्क में उन्होंने पाकिस्तान में दशकों से मुहाजिरों पर होते जुल्म पर अपना बयान दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में 25 हजार से ज्यादा अल्पसंख्यक लोग मारे जा चुके हैं। हजारों लोग लापता हो गए। हम पाकिस्तान में अपनी स्थिति से दुनिया को अवगत कराना चाहते हैं।”
उन्होंने बताया, “पाकिस्तान मुहाजिरों को अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने की अनुमति नहीं देता है। हमारे पास अपनी माँगों के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। यह हमारा नैतिक, मानवीय और लोकतांत्रिक अधिकार है।”
पाकिस्तान नेशनल असेंबली के एक सदस्य की हत्या का जिक्र करते हुए पूर्व मेयर ने कहा, “पाक के पंजाबी मुस्लिम बहुसंख्यकों के अल्पसंख्यकों के साथ किए अत्याचार की सैकड़ों कहानियाँ हैं। 2018 में पाकिस्तान नेशनल असेंबली के एक सदस्य सैयद अली रज़ा आब्दी को पाकिस्तान की सेना के इशारे पर मार दिया गया था।”
इस समय पाकिस्तान द्वारा अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ न्यूयॉर्क की सड़कों पर बड़ी तादाद में प्रदर्शन चल रहा है। ये सब उस समय हो रहा है जब पाक पीएम इमरान UNGA में भाषण देने वाले हैं।

कई सौ की तादाद में डिस्प्ले स्क्रीन के साथ टैक्सी और ट्रक न्यूयॉर्क की सड़कों पर देखने को मिल रहे हैं, जहाँ पाकिस्तान के अत्याचारों के ख़िलाफ़ तस्वीरों और स्लोगन्स के जरिए प्रदर्शन हो रहा है। इसे अमेरिका के मुहाजिर एडवोकेसी ग्रुप वॉयस ऑफ कराची ने लॉन्च किया है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के आसपास खड़ी गाड़ियों पर दिखे कुछ विज्ञापनों में लिखा है, “पाकिस्तान: मानव अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को न मानने वाला देश” और “मुहाजिर पाकिस्तान में यूएन हस्तक्षेप की माँग करते हैं।” (“Pakistan: A country in denial of UN charter on Human rights” and “Mohajirs demand the UN intervention in Pakistan.”)
वॉयस ऑफ कराची के अध्यक्ष नदीम नुसरत की मानें तो पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को इसलिए उठा रहा है, ताकि लोगों का ध्यान पाक सेना के अत्याचारों पर न जाए। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अल्पसंख्यक अमेरिकी कॉन्ग्रेसियों और सीनेटरों के पास पहुँच रहे हैं और वे उनसे पाक पर दबाव बनाने के लिए भी मदद माँग रहे हैं।
वहीं, एक मुहाजिर कार्यकर्ता कहकशां हैदर का कहना है, ‘‘पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए। उसे दी जा रही सभी वित्तीय सहायता रोक देना चाहिए। यह आतंक का देश है। पाक पूरी दुनिया में आतंकवाद फैला रहा है। मोदी और ट्रम्प से गुजारिश है कि हमारे समुदाय को बचाने में मदद करें।’’

‘मुसलमान भाइयों, मारो तो जान से मारो, लाशें उनके घरों में जाएँगी फिर एहसास होगा जिंदगी क्या होती है?’ : जावेद मियांदाद

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आर.बी.एल निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अनुच्छेद 370 को लेकर पाकिस्तान से आए दिन कोई न कोई जाना-माना चेहरा अपनी बौखलाहट निकालकर सुर्खियाँ बटोर रहा है। अब ये काम पाक क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के समधी जावेद मियांदाद ने किया है। उन्होंने अपनी तिलमिलाहट निकालने के लिए भारत को परमाणु बम की धमकी दी है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जिस देश का प्रधानमंत्री आए दिन ये साबित करने पर लगा हो कि वो शांति से मामलों का हल चाहते हैं, उसी देश के जावेद मियांदाद कश्मीर मामले पर खुलेआम कहते हैं कि अगर आपके पास लाइसेंसी हथियार है तो आपको हमला करना चाहिए। क्योंकि ये नियम हर जगह है कि बचाव में ऐसा किया जा सकता है।
वायरल वीडियो में मियांदाद अपने मुसलमान भाईयों से गुहार लगाते हुए कह रहे हैं कि हर जगह यह नियम है कि अगर सेल्फ डिफेंस, अपनी प्रोटेक्शन के लिए कुछ चीज रख सकते हो तो रखो। वह बोलते हैं, “तुम मुसलमान भाइयों, मारो तो जान से मारो, जब उनकी लाशें उनके घरों में जाएँगी फिर उनको एहसास होगा कि इंसान की जिंदगी क्या होती है?”

मियांदाद शायद यह भूल रहे हैं, कि जो सन्देश वह भारतीय मुसलमानों को दे रहे हैं, कहीं यही बात, पाक के अधिकार वाले कश्मीर, सिन्ध, बलूचिस्तान और पंजाब आदि पाकिस्तान के ही प्रान्तों में ही अगर लागू हो गयी, पाकिस्तान फौज और परमाणु सब के सब धरे रह जाएंगे। 
दूसरे, मियांदाद के इस बयान से पाकिस्तान का दोगलापन जरूर जाहिर हो गया है, जो हर पाकिस्तान समर्थक को समझने के जरुरत है, कि इस तरह के भड़काऊ बयानों से भारतीय मुसलमानों को ही नहीं साथ ही साथ पाकिस्तान समर्थकों को भी दंगे की आग में झोंकने की कोशिश की जा रही है, यानि दूसरे अर्थों में इसका यह भी मतलब लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान को मुसलमानों की जी-जान से कोई मतलब नहीं, बल्कि अपनी भ्रमित चालों से मुसलमानों को मुसीबत में डालने का प्रयास किया जा रहा है। अब भारतीय मुसलमानो और भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों को पाकिस्तान की असलियत और मुस्लिम विरोधी मंसूबों की असलियत समझनी चाहिए। इतना ही नहीं, ये वही पाकिस्तान है, जो 1947 में पाकिस्तान गए भारतीय मुसलमानों को आज तक "शरणार्थी" कहा जाता है।    
इसके अलावा भारत को संदेश देने की बात पर मियांदाद कहते हैं, “मोदी साहब को तो पता ही है, मैंने पहले भी कहा था ये डरपोक लोग हैं। अभी तक इन्होंने किया क्या? ये तो न्यूक्लियर पॉवर ऐसे ही है। लेकिन हम न्यूक्लियर पॉवर ऐसे नहीं हैं। हमने परमाणु बम चलाने के लिए रखे हैं, हमें मौक़ा चाहिए और हम साफ़ कर देंगें।”
जावेद क्रिकेट क्षेत्र से जुड़े पहले ऐसे शख्स नहीं हैं जिन्होंने विवादित बयान दिया हो, इससे पहले शाहिद अफरीदी, शोएब अख्तर, सरफराज अहमद भी इसपर अपना गुस्सा निकाल चुके हैं।