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महरंग बलोच पर मलाला मौन… अफगान महिलाओं के लिए मंच-मंच भाषण, लेकिन पाकिस्तानी फौज के बलोचों के दमन पर नोबेल विजेता मलाला यूसुफजई खामोश क्यों?

                                      महरंग बलोच (बाएँ), मलाला यूसुफजई (दाएँ), (फोटो साभार : ChatGPT)
पाकिस्तान में अत्याचारों का कोई अंत नहीं होता है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन के खिलाफ संघर्ष करने वाली बलोच याकजेहती कमेटी (BYC) की मुखिया महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जिस डॉक्टर ने स्टेथोस्कोप के बदले जनता की आवाज को हथियार बनाया था, जिसे टाइम मैगजीन ने 2024 में ‘TIME100 नेक्स्ट’ में शामिल किया था और BBC ने 100 सबसे प्रेरणादायक महिलाओं में जगह दी थी उसे उम्रभर के लिए जेल में डाल दिया।

तभी से सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक गूँज रहा है… लेकिन तब दुनिया के कोने-कोने से मानवाधिकार का झंडा उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला युसूफजई की टाइमलाइन पर सन्नाटा है। हाँ, उन्हें फिक्र है तो अफगानिस्ता की, तालिबान की और वहाँ की महिलाओं की.. बाकी उनके खुद के मुल्क में महिलाओं के साथ जो होता हो वो होता रहे, उस पर कोई चिंता नहीं।

महरंग बलोच: ‘बलूचिस्तान की शेरनी’

महरंग बलोच को समझना हो तो पहले बलूचिस्तान को समझना होगा। पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा प्रांत दशकों से ‘एनफोर्स्ड डिसअपियरेंस’ यानी सरकारी तंत्र द्वारा लोगों के जबरन गायब कर दिए जाने की त्रासदी झेल रहा है। महरंग के अब्बू अब्दुल गफ्फार लंगोव खुद इस तंत्र के शिकार हुए। जब महरंग मात्र 16 साल की थी तब 2009 में उनके अब्बू को हिरासत में ले लिया गया। तभी से इस लड़की ने विरोध को अपनी जिंदगी बना लिया।
बलोच मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई करते हुए भी महरंग सड़कों पर रही। उनके अब्बू का तो शव कुछ समय बाद मिल गया और तब से उन्होंने BYC के बैनर तले लॉन्ग मार्च निकाले, धरने दिए और हजारों लापता बलोचों के परिजनों की आवाज बनीं।
जुलाई 2024 में ग्वादर में हुए ‘राजी मुची’ बलोच राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुई हिंसा में फ्रंटियर कॉर्प्स के एक सिपाही शब्बीर बलोच की मृत्यु हो गई। पाकिस्तानी सरकार ने इसका ठीकरा महरंग पर फोड़ा। मार्च 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। फिर ट्रायल को खुली अदालत से जेल ट्रायल में बदला और फिर उन्हें उम्रकैद मिली। लेकिन इस पर दुनियाभर में महिला अधिकारों की झंडाबरदार मलाला युसूफजई खामोश हैं।

मलाला के मौन पर सवाल

आप में से कई लोग इस नाम से परिचित होंगे, जो नहीं जानते होंगे उन्हें बताएँ कि मलाला आतंक के खिलाफ महिलाओं की आवाज का कथित प्रतीक हैं। मलाला यूसुफजई का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान की स्वात घाटी में हुआ था।। जब तालिबान ने स्वात पर कब्जा किया और लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी लगाई, तब ग्यारह साल की मलाला ने BBC उर्दू के लिए ‘गुल मकई’ नाम से डायरी लिखनी शुरू की। अक्टूबर 2012 में तालिबान के एक बंदूकधारी ने उनके स्कूली बस में उन्हें गोली मार दी। मलाला बचीं और ब्रिटेन में इलाज के बाद महिला अधिकारों की आवाज बन गईं। 2014 में महज 17 साल की उम्र में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
अब वह महिलाओं के लिए आवाज तो उठाती हैं लेकिन कहा जाता है कि तभी तक जब तक कि उनकी अपनी छवि को कोई नुकसान न हो? मार्च 2025 में जब महरंग को पहली बार गिरफ्तार किया गया था, तब मलाला ने कहा था, “मैं महरंग बलोच की हिरासत को लेकर परेशान और चिंतित हूँ, यह उनका अधिकार है कि वे आवाज उठाएँ। उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।” यह सराहनीय था।
लेकिन 22 जून 2026 को जब उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जब दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन बोल उठे, जब BYC ने इसे ‘बलोच राष्ट्र के प्रति नफरत की अभिव्यक्ति’ कहा तब मलाला की आवाज कहाँ थी? दूसरी तरफ अफगानिस्तान की महिलाओं के लिए मलाला की आवाज निरंतर और मुखर है। वे तालिबान को ‘जेंडर अपार्थेड’ का दोषी कहती हैं, UN में भाषण देती हैं, हार्वर्ड में सेमिनार करती हैं। यह काम जरूरी है और इसकी तारीफ होनी चाहिए। लेकिन एक सवाल अनुत्तरित रहता है कि अफगानिस्तान की महिलाओं पर तालिबान का जुल्म जितना बड़ा मुद्दा है, क्या बलोचिस्तान में राज्य-प्रायोजित गुमशुदगियाँ, बलोच महिलाओं की पुकार और एक डॉक्टर-एक्टिविस्ट की उम्रकैद उतना बड़ा मुद्दा नहीं?
इससे और आगे बढ़ें तो पाकिस्तान में हर साल हजारों हिंदू और ईसाई लड़कियों का अपहरण कर जबरन धर्म-परिवर्तन और शादी करवाई जाती है। संयुक्त राष्ट्र के 2025 के विश्लेषण के अनुसार, इन मामलों में 75% पीड़ित हिंदू महिलाएँ हैं और 80% मामले सिंध प्रांत से हैं।
मलाला ने कभी सीधे पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म-परिवर्तन को नाम लेकर नहीं कोसा। जब एक ट्विटर यूजर ने उनसे इन लड़कियों के लिए आवाज उठाने की गुजारिश की, तो मलाला ने उन्हें ब्लॉक कर दिया। यहाँ सवाल चुनाव का है। जब मलाला तालिबान को ‘जेंडर अपार्थेड’ का मुजरिम कहती हैं तो वे सही हैं। लेकिन जब उसी पाकिस्तान में हिंदू बच्चियों को उठाकर उनकी जिंदगी तबाह की जाती है और जब एक बलोच डॉक्टर को उम्रकैद की सजा मिलती है तो यही मलाला क्यों चुप हो जाती हैं?
अफगानिस्तान की महिला पर बोलना आसान है क्योंकि तालिबान उनकी दुश्मन है, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय उनकी बात सुनता है और वहाँ उन्हें नहीं जाना है तो कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम नहीं है। लेकिन पाकिस्तान की फौज के खिलाफ बलोचों के दमन पर बोलना, वहाँ की हिंदू अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए लड़ना यह राजनीतिक रूप से जोखिमभरा है। और शायद यही कारण है कि मलाला की आवाज वहाँ पहुँचते-पहुँचते दब जाती है।

 

पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का भीषण हमला, फौजियों को ले जा रही ट्रेन को उड़ाया: 24 की मौत और 100+ घायल, बोगियों में लगी आग के Video


पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार (24 मई 2026) को सेना के जवानों को ले जा रही एक ट्रेन को निशाना बनाकर बड़ा धमाका किया गया। इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में सेना के जवान भी शामिल हैं। यह भीषण धमाका बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के पास चमन फाटक (Chaman Phatak) रेलवे स्टेशन के नजदीक हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी और उसमें फौजी अपने परिवारों के साथ सफर कर रहे थे। कई लोग ईद की छुट्टियाँ मनाने के लिए जा रहे थे। बताया गया कि ट्रेन जब क्वेटा में चमन पट्टक इलाके में एक सिग्नल पार कर रही थी, उसी दौरान विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी ने ट्रेन के एक डिब्बे को टक्कर मारी, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की मजीद ब्रिगेड ने इस ‘फिदायीन हमले’ की जिम्मेदारी ली है। BLA ने कहा कि हमले में ट्रेन में यात्रा कर रहे पाकिस्तानी फौजियों को निशाना बनाया गया था।

धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरकर पलट गए और उनमें आग लग गई। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में ट्रेन का एक डिब्बा बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर किनारे पलटा हुआ दिखाई दिया। हादसे के बाद लोग मलबे पर चढ़कर जीवित लोगों की तलाश करते नजर आए।

धमाके के असर से आसपास की इमारतों की खिड़कियों और शीशे भी टूट गए। पुलिस के अनुसार, ट्रेन को नुकसान पहुँचा है जबकि आसपास खड़े कम से कम 10 वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। सामने आए कुछ वीडियो में घटनास्थल पर जली हुई गाड़ियाँ भी नज़र आ रही है।

 घायल लोगों को तुरंत आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वीडियो और तस्वीरों में लोगों को खून से लथपथ घायलों को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए देखा गया जबकि सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और मौके पर तैनाती बढ़ा दी।

बलूचिस्तान में BLA के ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ से दहला पाकिस्तान, 12 शहरों में लड़ाकों का राज: 41 लोगों की हत्या का बदला 20 पाक फौजियों की मौत

    BLA का क्वेटा समेत 12 शहरों पर भीषण हमला, पाकिस्तान की ज्यादतियों का बदला (साभार : X_@News_File3)
बलूचिस्तान इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है, जहाँ बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शनिवार (31 जनवरी 2026) सुबह से पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जंग के दूसरे चरण का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तानी फौज की कथित ज्यादतियों और 41 लोगों की हत्या के जवाब में बलोच लड़ाकों ने ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के तहत राजधानी क्वेटा समेत 12 प्रमुख शहरों पर भीषण हमले शुरू किए हैं।

विद्रोहियों ने कई पुलिस थानों और सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में कम से कम 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर है। हालत इतने खराब हैं कि कई जगहों पर पाकिस्तानी फौज को अपनी चौकियाँ छोड़कर भागना पड़ा है और अब वे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के जरिए आसमान से हमले कर रहे हैं।

क्वेटा से ग्वादर तक बारूद की गूँज और थानों पर कब्जा

शनिवार (31 जनवरी 2026) सुबह करीब 6 बजे राजधानी क्वेटा एक जबरदस्त धमाके से दहल उठी, जिसके बाद लगातार दो घंटे तक गोलीबारी होती रही। BLA के हथियारबंद लड़ाकों ने न सिर्फ क्वेटा, बल्कि ग्वादर, नुश्की, मस्तुंग और पसनी जैसे जिलों में एक साथ मोर्चा खोल दिया है।

मस्तुंग में विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशन पर कब्जा कर करीब 30 कैदियों को रिहा कर दिया है। क्वेटा के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है और रेल सेवाओं को पूरी तरह रोक दिया गया है। लड़ाकों ने सड़कों पर गश्त करते हुए वीडियो जारी किए हैं, जिनमें पाकिस्तानी फौज की गाड़ियों को जलते हुए देखा जा सकता है।

‘करो या मरो’ की जंग और BLA चीफ की अपील

बीएलए के कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलूच ने एक वीडियो संदेश जारी कर इस हमले को अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए ‘निर्णायक दौर’ बताया है। उन्होंने आम जनता से घरों से बाहर निकलकर लड़ाकों का साथ देने की अपील की है। प्रवक्ता जियांद बलोच का कहना है कि यह कब्जा करने वाली ताकतों के खिलाफ अंतिम प्रतिरोध है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बलूच हर गली और मोहल्ले से दुश्मन का सफाया करेंगे। यह हमला अगस्त 2024 में शुरू हुए ‘ऑपरेशन हेरोफ’ का अगला हिस्सा है, जिसके पहले चरण में विद्रोहियों ने 130 सैनिकों को मारने का दावा किया था।

इंटरनेट बंद और चीन को भी बड़ी चेतावनी

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने क्वेटा, सिबी और चमन जैसे इलाकों में मोबाइल डेटा सर्विस बंद कर दी है ताकि विद्रोहियों के बीच संपर्क न हो सके। नसीराबाद में रेलवे ट्रैक पर एंटी-टैंक माइन और विस्फोटक बरामद हुए हैं, जिससे बड़ी तबाही की साजिश का पता चलता है।

इस बीच, बलोच विद्रोहियों ने चीन को भी सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह ग्वादर और बलूचिस्तान के प्रोजेक्ट्स से दूर रहे, वरना अंजाम बहुत बुरा होगा। फिलहाल बलूचिस्तान के रेड जोन से लेकर सुदूर इलाकों तक भारी गोलीबारी और धमाकों का सिलसिला जारी है।

पाकिस्तानी फौज कर रही BLA के सामने सरेंडर, डरे जवानों ने छुट्टी माँगी: बलोच एक्टिविस्ट का दावा - रस्सियों से बँधे हाथ और मुँह पर नकाब

                                    बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फौज ( फोटो साभार- x@miryarbaluch)
आतंकवादियों को पालने वाला पाकिस्तान क्या आतंकवाद की ट्रेनिंग के अलावा अपने फौजियों को युद्ध लड़ने की ट्रेनिंग नहीं देता? पाकिस्तान आर्मी चीफ ये जो मैडल लटकाये घूमते हैं ये मैडल क्या गलियों में होती लड़ाइयों को जीत कर मिलते हैं? भारत के साथ हुए युद्धों में मार खाई और Operation Sindoor में पीटने के बाद तो आर्मी चीफ मुनीर फील्ड मार्शल बन गया। गजब मुल्क है पाकिस्तान, जहां लड़ाई हारने पर जीत का जश्न मनाया जाता है।  

अब बलूचिस्तान के कई इलाकों में बलोच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी फौजियों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया है। ये दावा बलूचिस्तान के एक्टविस्ट मिर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर किया है।

उन्होंने एक्स पर लिखा है कि “जो फौजी आत्मसमर्पण कर रहे हैं उन्हें पाकिस्तानी सेना गिरफ्तार कर कोर्ट मार्शल कर रही है। इन फौजियों को कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही के लिए पंजाब, कराची और इस्लामाबाद निर्वासित किया जा रहा है।”

उनका कहना है कि अब हालात ये हो गए हैं कि पाकिस्तान के कई फौजी अपनी जान बचाने के लिए बलूचिस्तान न जाना पड़े, इसके लिए जुगत लगा रहे हैं। कई ने आपातकालीन छुट्टी की माँग की है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान की फौज की हालत कितनी पस्त है। वहीं बलूचिस्तान को आजाद करने की माँग कर रहे बीएलए के हौसले बुलंद हो गए हैं।

दावा किया जा रहा है कि बलूचों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर चेकपोस्ट बना लिए हैं और फौजी वाहनों पर कब्जा कर लिया है। पाकिस्तानी फौज के हथियार और दूसरे सामान भी जब्त कर लिए हैं।

सबसे अहम बात है कि बीएलए ने सामरिक रूप से काफी अहम सुरब के खिसोन दून क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो क्वेटा, कराची और ग्वादर को जोड़ता है। यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है। कराची के लिए ऊर्जा और आपूर्ति सुरब से होकर ही जाता है।

शहबाज-मुनीर अमेरिका में हैं

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर इस वक्त अमेरिका के दौरे पर हैं। इस दौरान बलुचिस्तान के दुर्लभ खनिज को निकालने के लिए अमेरिका से पाकिस्तान डील करने जा रहा है। लेकिन ताजा घटनाक्रम से ये तय हो गया है कि ये दुर्लभ खनिज अब पाकिस्तान के कब्जे में पूरी तरह नहीं है। क्योंकि दो खनिज समृद्ध क्षेत्रों पर बीएलए का कब्जा हो गया है। इसको लेकर बलूच नेता और एक्टविस्ट मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

उन्होंने लिखा, “कल रात बलूच रक्षा और सुरक्षा इकाइयों ने सुरब और कलात के दो महत्वपूर्ण जिलों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर चौकियां स्थापित कर दीं हैं। कब्जा करने वाली सेना (पाक आर्मी) के दो वाहनों को हथियारों और रसद के साथ जब्त कर लिया गया है। यह इस बात का और सबूत है कि बलूच आंदोलन मजबूत हो रहा है और कब्जा करने वाली पाकिस्तानी फौज अपना नियंत्रण खो चुकी हैं।”

उन्होंने अमेरिका को दुर्लभ खनिज के समझौते को लेकर पाकिस्तान से नहीं बल्कि सीधे बलूचिस्तान से बात करने की भी सलाह दी है।

बलूचिस्तान में ‘अमेरिकी खुदाई’ का बनाया जा रहा रास्ता, सोना निकालने वाली कनाडाई कंपनी ने G7 देशों से माँगे 29050 करोड़ रूपए: सऊदी अरब ने फंडिंग से कर दिया है इनकार

                                                                                                                   साभार - एक्सप्रेस ट्रिब्यून
बलूचिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। इस बार कारण है इसके प्राकृतिक संसाधनों को लेकर बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी। कनाडा की कंपनी बैरिक माइनिंग ने विवादित रेको दिक तांबा-सोना परियोजना के लिए 3.5 अरब डॉलर (29,050 करोड़ रुपए) की फंडिंग की माँग की है।

सऊदी अरब ने इस परियोजना में निवेश से इनकार कर दिया है। अब कंपनी अमेरिकी नेतृत्व में G7 फाइनेंसिंग पैकेज तैयार कर रही है, जिससे 2028 तक खदान से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

बैरिक माइनिंग के सीईओ मार्क ब्रिस्टो के अनुसार, अमेरिकी सरकार, एशियाई विकास बैंक, अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC), अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम, कनाडा, जापान और जर्मनी के वित्तीय संस्थान इस परियोजना में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि अमेरिका के समर्थन से पाकिस्तान को कॉपर कॉन्सन्ट्रेट (तांबे का कच्चा रूप) तक पहुँच मिलेगी, हालाँकि इसके लिए अभी और प्रोसेसिंग की आवश्यकता है। यह परियोजना न केवल पाकिस्तान के आर्थिक भविष्य के लिए अहम मानी जा रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे वैश्विक ताकतें बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में संसाधनों को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

बलूचिस्तान की सबसे बड़ी खनिज परियोजना

रेको दिक खदान को दुनिया की सबसे बड़ी और अब तक अविकसित तांबा-सोना परियोजनाओं में से एक माना जाता है। अनुमान है कि अगले 37 वर्षों के खनन काल में यह परियोजना लगभग 70 अरब डॉलर (5.81 लाख करोड़ रुपए) का फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) और करीब 90 अरब डॉलर (7.47 लाख करोड़ रुपए) का कुल ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) उत्पन्न कर सकती है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की मालिकाना हिस्सेदारी तीन पक्षों के बीच साझा है। जिसमें कनाडा की बैरिक गोल्ड कंपनी, पाकिस्तान की संघीय सरकार और बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार शामिल है।
इसकी फंडिंग के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बातचीत चल रही है। इस साल की शुरुआत में टिम क्रिब ने बताया था कि रेको दिक परियोजना को अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA) और अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) से लगभग 650 मिलियन डॉलर (5,395 करोड़ रुपए) की सहायता मिलने की उम्मीद है।

वहीं, अमेरिकी निर्यात-आयात बैंक (US EXIM Bank) से 500 मिलियन से 1 अरब डॉलर (4,150 करोड़ रुपए से 8,300 करोड़ रुपए) तक की फंडिंग की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, परियोजना जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल को ऑपरेशन, एक्सपोर्ट डेवलपमेंट कनाडा और एशियाई विकास बैंक जैसे अन्य वित्तीय संगठनों से भी 500 मिलियन डॉलर (4,150 करोड़ रुपए) की अतिरिक्त राशि जुटाने का प्रयास कर रही है।

यह परियोजना पाकिस्तान के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर मानी जा रही है और इसमें वैश्विक स्तर पर बढ़ती दिलचस्पी बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों की अहमियत को भी दिखाती है।

भारत के साथ टैरिफ युद्ध के बीच ट्रंप के करीब आने की कोशिश कर रहा पाक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर टैरिफ वॉर छेड़ दिया है। इससे भारत-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। इसी दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका और ट्रंप से नजदीकियाँ बढ़ा ली हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और असली ताकत रखने वाले सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने ट्रंप की खुलकर चमचागिरी की है, जिससे अमेरिका से उनके रिश्ते मजबूत हुए हैं।

पाकिस्तानी फौज समर्थित सरकार ने कई बार ट्रंप को इस ‘दावे’ के लिए धन्यवाद दिया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) समझौते में कोई भूमिका निभाई। हालाँकि, असलियत यह है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को सैन्य रूप से करारी हार दी थी। यह ऑपरेशन पाकिस्तान-प्रायोजित पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।

इस शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तान ने खुद भारत से संघर्षविराम की अपील की थी, जिसे भारत ने रणनीतिक रूप से मान लिया। इसके बाद से पाकिस्तान की फौज के प्रमुख असीम मुनीर दो बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं।

पाकिस्तान की खुशामदी नीति से प्रभावित होकर ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में बलूचिस्तान की आज़ादी के लिए लड़ रही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मजीद ब्रिगेड को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया है। इससे बलूच स्वतंत्रता सेनानियों को अब अमेरिका की नजर में आतंकवादी बताया गया है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तान का विरोध

बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे उपेक्षित और शोषित प्रांत माना जाता है, लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय लोगों के दमन का शिकार रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने वर्षों से पाकिस्तानी फौज, चीनी कर्मियों और चीन की उन परियोजनाओं पर हमले किए हैं, जो बलूच संसाधनों का दोहन करती हैं।
बलूच समुदाय का आरोप है कि पाकिस्तान और चीन मिलकर उनके खनिज और ऊर्जा संसाधनों का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका कोई लाभ नहीं मिलता। इस बीच, अमेरिका की भूमिका भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में पाकिस्तान के कथित विशाल तेल भंडार को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए एक नया व्यापार समझौता पेश किया था। यह ऐलान उस समय हुआ जब अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर भारी टैरिफ और दंडात्मक शुल्क लगाने की घोषणा की थी।
ट्रम्प ने यहाँ तक कह दिया कि एक दिन पाकिस्तान भारत को तेल बेच सकता है। इसी दौरान अमेरिका ने BLA को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया, जो ट्रम्प के पाकिस्तान समर्थक रुख और बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों में बढ़ती अमेरिकी दिलचस्पी को और भी संदिग्ध बना देता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानियों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत ग्वादर बंदरगाह में चीनी प्रभाव का लगातार विरोध किया है।
अब कनाडा की कंपनी बैरिक माइनिंग रेको डिक तांबा-सोना परियोजना के लिए 3.5 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाने में लगी है, जिसमें अमेरिकी संस्थानों की भी भागीदारी है। इससे यह साफ झलकता है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान के बहुमूल्य संसाधनों को डॉलर के बदले विदेशी कंपनियों को सौंप रही है, जबकि बलूच जनता दमन और हिंसा का शिकार बनी हुई है।
इतिहास गवाह है कि बलूचिस्तान से मिलने वाली गैस और बिजली हमेशा पंजाब और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों को दी जाती रही है, जबकि बलूच लोग खुद मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। अब विदेशी कंपनियाँ, जिनमें अमेरिकी समर्थन वाली कंपनियाँ भी शामिल हैं, बलूचिस्तान के खनिजों से अरबों का मुनाफा कमाएँगी। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि बलूचिस्तान आने वाले समय में अमेरिका के लिए एक नया तेल युद्ध स्थल बन सकता है।


पाकिस्तान से अलग होना चाहता है सिंध, बलूचिस्तान, गिलगित…: क्या रिपीट होगा ‘बांग्लादेश’ वाला चैप्टर, इस्लामी मुल्क में चल रहीं आजादी की कितनी लड़ाई

                           सिंध, बलूचिस्तान और गिलगित, यह सभी राज्य पाकिस्तान से आजादी चाहते हैं
"Operation Sindoor" से बहुत पहले से NSA प्रमुख डोभाल और अन्य कहते रहे हैं कि PoK अपने आप भारत में आएगा। दूसरे, पाकिस्तान के और भी टुकड़े होंगे। लेकिन 
"Operation Sindoor" के चलते उम्मीद की जा रही थी कि PoK पर भारत अपना कब्ज़ा कर लेगा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कूटनीति के चलते ऐसा नहीं किया। अगर मोदी ने ऐसा कर लिया होता आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई दूसरा मोड़ लेकर आतंकवाद के मुद्दे को हवा-हवाई कर देता। और विपक्ष ही नहीं सारा देश मोदी से यही पूछता कि "धर्म पूछकर उनकी पैंट खोलकर धर्म देखकर सुहागनों के उजाड़ने वालों से बदला क्यों नहीं लिया।" परन्तु जानकारों के साथ राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है कि मोदी ने एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं। 

राहुल गाँधी और इसके पिछलग्गू पार्टियां उल्टे-पुल्टे बयान देकर पाकिस्तान के लाडले बने हुए हैं। किसी में राहुल या कांग्रेस से यह पूछने की हिम्मत नहीं कि चीन के साथ क्या MoU हुआ है, दूसरे सोनिया गाँधी कश्मीर विरोधी कमेटी की co-chairman क्यों हैं? आखिर मोदी का विरोध करने के चक्कर में देश का क्यों विरोध किया जा रहा है? मोदी सरकार ने अपने विरोधियों को दूसरे देशों में "Operation Sindoor" के बारे में भेज जो खेल खेला है उसे भी राहुल और इसके समर्थक बिलकुल भी नहीं समझ पा रहे। जो इन सबकी मंदबुद्धि का जीता-जागता सबूत है। मोदी द्वारा भेजे इस delegation के बहुत दूरगामी परिणाम होने वाले हैं। जिसे मोदी विरोधी तो क्या गोदी-मीडिया कहलाए जाने वाला मीडिया भी खामोश है। जिस तरह पाकिस्तान सेना ने मन्दिरों और गुरुद्वारों पर बमबारी की है अगर वही बमबारी मस्जिदों और दरगाहों पर हुई होती सारे चैनल अपनी TRP बढ़ाने खूब चर्चाएं कर रहे होते।   

खैर, भारत में आतंकी भेजने और पहलगाम में निर्दोषों की हत्या के लिए खाद पानी देने वाला पाकिस्तान खुद विभाजन की तरफ बढ़ रहा है। भारत से युद्ध की गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान में लगातार कई समूह आजादी की लड़ाई तेज कर रहे हैं। खराब आर्थिक हालातों से जूझता पाकिस्तान इन आवाजों को दबाने में भी विफल है।

पाकिस्तान में सिंधी, बलूच और पश्तून समुदाय लंबे समय से आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह अपना अलग देश बनाना चाहते हैं। इन समुदायों का पाकिस्तान और उसकी फ़ौज लगातार शोषण करती आई है। इनसे लगातार भेदभाव किया जाता है।

 भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सैन्य तनाव के बीच, बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान से आजादी के लिए अपने आंदोलन को दोबारा चालू कर दिया है। उन्होंने अपनी आजादी की घोषणा भी कर दी है। बलूचों के अलावा अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भी आजादी की माँग उठी है।

सिंध प्रांत को पाकिस्तान से आजाद करके सिंधु देश के अलग देश के निर्माण की माँग करने वाले संगठन ‘जय सिंधु स्वतंत्रता आंदोलन’ (JSFM) ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपने आजादी के अभियान को तेज कर दिया है।

इसके अलावा पश्तूनिस्तान नामक अलग देश की माँग करने वाली आवाजें भी उठी हैं। पश्तूनिश्तान की माँग करने वाले खैबर पख्तूनख्वा और उत्तरी बलूचिस्तान के हिस्सों को पाकिस्तान से अलग करके अपना देश बनाना चाहते हैं।

बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई

भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान BLA ने पाकिस्तान से आजादी की घोषणा की और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान के लोकतांत्रिक गणराज्य को मान्यता देने का आग्रह किया। काफी कम आबादी वाले और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बलूचिस्तान लम्बे समय से उग्रवाद से जूझ रहा है।
ऐतिहासिक रूप से, बलूचिस्तान ‘खान ऑफ कलात’ के अधीन एक स्वतंत्र देश था। हालाँकि, भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद यह मार्च 1948 में यह पाकिस्तान में शामिल हो गया। खान ऑफ कलात ने दबाव में आकर अपनी और बलूच समुदाय की इच्छा के विरुद्ध विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
इससे पहले 11 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों की निगरानी में कलात और पाकिस्तान के बीच एक स्टैंडस्टिल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में कलात को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी गई थी। कलात को ही अब बलूचिस्तान के नाम से जाना जाता है।
1948 में समझौते के बावजूद पाकिस्तान ने खान ऑफ कलात को बलूचिस्तान को पाकिस्तान में विलय करने के लिए मजबूर किया। पाकिस्तान चाहता था कि बलूचिस्तान उसमे शामिल हो जाए। इस विलय के बाद से बलूचिस्तान में पाँच बार विद्रोह हो चुके हैं।
यह विद्रोह 1948, 1958, 1962, 1973-77 में हुए हैं। इसके बाद 2000 से चालू हुई लड़ाई आज तक जारी है। बलूच खुद को राजनीतिक हाशिए पर धकेले जाने, हिंसक और यातनापूर्ण दमन और संसाधनों के दोहन के चलते हथियार उठाने पर मजबूर हैं।
बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व अब BLA कर रही है। हाँलाकि, पाकिस्तान की 2009 में शुरू की गई नीति ‘मारो और फेंको’ के चलते इसके सदस्य लगातार मारे जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग गायब भी किए गए हैं। हजारों की संख्या में लोगों को पाकिस्तान की फ़ौज ने उठाया और वह फिर कभी वापस नहीं लौटे।

सिंध भी चाहता है स्वतंत्रता

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की आजादी की माँग ‘जय सिंधु स्वतंत्रता आंदोलन’ (JSFM) द्वारा की जा रही है। जो सिंधु देश के एक अलग देश के गठन की वकालत करता रहा है। सिंध के लोगों की लंबे समय से माँग रही है कि सिंध का एक अलग स्वतंत्र देश हो।
अल्पसंख्यक सिंधी समुदाय ने इस्लामी मुल्क पाकिस्तान पर उर्दू थोपने और जमीन हड़पने के आरोप लगाए हैं। सिंधियों का कहना है कि पाकिस्तान उनकी स्थानीय संस्कृति को मिटा रहा है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा कई स्वतंत्रता समर्थक कार्यकर्ताओं को न सिर्फ मारा और प्रताड़ित किया गया है बल्कि जबरन गायब भी कर दिया गया है।

पश्तूनिश्तान की लड़ाई भी हुई तेज

पंजाबियों के बाद पश्तून पाकिस्तान में दूसरा सबसे बड़ा जातीय समूह है। ये पाकिस्तान की कुल आबादी का 15% हिस्सा हैं। यह समुदाय भी भेदभाव और उत्पीड़न के कारण एक स्वतंत्र देश की माँग कर रहा है।
पश्तूनों की बड़ी आबादी पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके में रहती है। यह इलाका पश्तूनिस्तान अख्लाता है। इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान और कुछ हिस्सा अफगानिस्तान में आता है। पाकिस्तान और अफगान पश्तूनों ने 1893 में बनाई गई डूरंड लाइन के सीमांकन को खारिज किया है। यह सीमा अब अफगानिस्तान और पाकिस्तान को विभाजित करती है।
पश्तूनों का कहना है दोनों तरफ उनके लोग रहते हैं, ऐसे में वह इस सीमा को नहीं मान सकते। हाल के दिनों में पश्तून समुदाय के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) ने किया है। इसके मुखिया मंजूर पश्तीन हैं। मंजूर पश्तीन की आवाज भी लगातार पाकिस्तान दबाता रहा है।
लोगों की माँगों को उठाने के लिए बनाया गया PTM एक सामाजिक आंदोलन है। यह पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी फ़ौज की मनमानी और हर तरह के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाता है। इसके भी कई कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की फ़ौज ने यातनाएँ दी हैं।

गिलगित और बाल्टिस्तान में भी उठी आवाज

पाकिस्तानी फौज को गिलगित-बाल्टिस्तान में रहने वाले लोगों से भी प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। गिलगित-बाल्टिस्तान उस पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा रखा है।
प्राकृतिक और भौगोलिक रुप से सुंदर इस क्षेत्र को पाकिस्तानी सरकार द्वारा नजरअंदाज किया गया है। गिलगित-बाल्टिस्तान रणनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि यह उत्तर में अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर, उत्तर-पश्चिम में चीन के शिनजियांग प्रांत, पूर्व में लद्दाख और दक्षिण में कश्मीर से घिरा हुआ है।
पाकिस्तानी सरकार की लापरवाही के कारण इस क्षेत्र में रहने वाले लोग मुश्किलों से भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ विकास का भी अभाव है। यहाँ के स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी फ़ौज पर उनकी जमीनों पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है।
धार्मिक आधार पर भारत को विभाजित करके बनाए गए इस्लामी देश पाकिस्तान में कई अलगाव की आवाजें उठती आई हैं। इसका कारण पाकिस्तान की अपनी कोई पहचान नहीं होना है। पाकिस्तान के चार प्रदेशों में रहने वाले लोगों को लगातार प्रताड़ित किया जाता है।
इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि पाकिस्तान को उसकी जनता द्वारा चुनी गई सरकार नहीं बल्कि फ़ौज चलाती है। यह फ़ौज इस्लाम के आधार पर चलती है। पाकिस्तानी फ़ौज के हाथों मारे जाने के डर के चलते सिंधी हो या बलूच, सभी आजादी चाहते हैं।
आजादी की यह चिंगारी उत्तर में गिलगित बाल्टिस्तान से लेकर अफगान सीमा पर FATA और सिंध तथा बलूचिस्तान तक लग चुकी है। यह कोई पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान की फ़ौज किसी जातीय समूह पर अपनी इस्लामी थोप रही हो।
इससे पहले पूर्वी पाकिस्तान में रहने वाले बंगाली लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा इसी तरह की दमनकारी नीतियाँ लागू की गई थी। इसकी वजह से 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम हुआ और बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र देश का गठन हुआ। इस बार लगी चिंगारी का अंत भी पाकिस्तान के नए विभाजनों के रूप में नजर आ रहा है।

पाकिस्तान को पड़ रही दो तरफ से मार, BLA ने गैस पाइपलाइन उड़ाई: बलोच के लेखक मीर यार ने UN से माँगी मान्यता, भारत ने भी किया है परचम बुलंद

BLA ने पाकिस्तानी सेना की गाड़ी को बम से उड़ा दिया (साभार- BLA के वीडियो के स्क्रीनशॉट)
आतंकवादियों को पनाह देकर उन्हें पालने पोसने वाले इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान की खैर मुश्किल में है। भारत से बैर लेकर एक ओर लाहौर और इस्लामाबाद को अपने निशाने पर ले लिया तो वहीं दूसरी ओर दशकों से मन में आजादी की ज्वाला लिए बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने भी मौका देखकर पाकिस्तान पर धावा बोल दिया है।

बलोचिस्तान के प्रसिद्ध लेखक और बलूच लोगों की अधिकारों के लिए लड़ने वाले करने वाले मीर यार बलूच ने दावा किया है कि BLA ने पाकिस्तान के डेरा बुगती के गैस क्षेत्रों पर हमला कर दिया था। इस जगह पर 100 से भी अधिक गैस के कुएँ बने हैं। ये पाकिस्तान के लिए गैस आपूर्ति की मुख्य जगहों में से एक है।

 इसके अलावा BLA ने पाकिस्तान की सेना की अलग अलग चौकियों पर हमला कर दिया। BLA का दावा है कि उनकी सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले बलोचिस्तान के कीच, मुस्तंग, कच्ची और जामरान समेत अलग अलग 6 जगहों पर हमले किए हैं। रिमोट कंट्रोल बम और अन्य हथियारों के जरिए किए गए हमलों में पाक सेना को नुकसान भी हुआ है।

इसके साथ ही मीर यार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर संयुक्त राष्ट्र से बलूच को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने की माँग की है।

अपनी पोस्ट में मीर यार बलूच ने लिखा, “हमने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान का अंत निकट है। हम भारत से अनुरोध करते हैं कि नई दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास बनाने की अनुमति दें। साथ ही UN से अनुरोध है कि वे ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’की आझादी को मान्यता देकर सदस्य देशों की बैठक के साथ समर्थन दें।”

बलोचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए लेखक मीर यार काफी सक्रिय भूमिका में नजर आते हैं। एक्स पर वह भारत और बलोचिस्तान की दोस्ती की तस्वीरें साझा करते रहते हैं। एक अन्य पोस्ट में मीर यार ने पाकिस्तान के सैन्य ट्रक को उड़ाने की वीडियो साझा की है। इसमें 14 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है।

मझधार में पाकिस्तान

भारतीय सेना ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों को मिसाइल अटैक कर ध्वस्त कर दिया। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के घर के 14 लोगों समेत जैश, लश्कर- ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमले किए लेकिन भारतीय सैन्य प्रणालियों ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

अब पाकिस्तान को एक तरफ भारत की अभेद सैन्य शक्तियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बलोच ने भी मौका देखकर आजादी का मोर्चा खोल दिया है। इससे पाकिस्तानी सेना को देश के बाहर के साथ अपने मुल्क के अंदर भी जंग लड़नी पड़ रही है।


जाफर एक्सप्रेस के सभी 214 बंधक मारे गए: BLA का ऐलान, पाकिस्तानी फौज सबको छुड़ाने का कर रही थी दावा; बलूचिस्तान में पुलिस स्टेशन, चेकपोस्ट और कंस्ट्रक्शन कंपनी पर भी अटैक

          बलोच विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस को बोलान दर्रे के पास बंधक बना लिया था (फोटो साभार: India TV)
पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस हाइजैक मामला लगातार उलझता चला जा रहा है। पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावों के उलट बलोच विद्रोहियों ने 200 से अधिक फौजियों की हत्या की बात कही है। वहीं पाक फ़ौज ने दावा किया है कि मात्र 23 ही फौजी इस ऑपरेशन के दौरान मारे गए हैं। पाक फ़ौज के प्रवक्ता ने भारत को इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाली बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को एक बयान जारी किया है। BLA ने कहा है कि उसने ट्रेन हाइजैक करने के बाद 48 घंटे पाकिस्तान सरकार को दिए थे, जिसमें उन्हें बलोच बंदियों को छोड़ना था।

BLA के अनुसार, 48 घंटे के बाद भी यह माँग पूरी होने के चलते उन्होंने जाफर एक्सप्रेस से बंधक बनाए गए सभी 214 फौजी मौत के घाट उतार दिए। BLA ने कहा है कि यह पाकिस्तान सरकार और फ़ौज की जिद का नतीजा है जबकि वह हमेशा नियमों से ही लड़ाई लड़ती आई है।

ट्रेन हाइजैक और इसके बाद हुई पाक फ़ौज से लड़ाई में BLA के 12 विद्रोही मारे गए हैं, यह भी बयान में बताया गया है। BLA ने कहा कि उन्होंने पकड़े गए फौजियों को एक बोगी में बंद कर रखा था और जब पाक फ़ौज के दूसरे कमांडो उन्हें छुड़वाने के लिए आए तो BLA के फिदायीन लड़ाकों ने उनकी हत्या कर दी।

वहीं पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावे इससे उलट हैं। पाकिस्तान के DG ISPR लेफ्टिनेंट अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि पूरी घटना के दौरान 31 लोगों की मौत हुई जिनमें 23 फौजी थे। DG ISPR ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान 33 बलोच विद्रोही मारे गए हैं।

पाकिस्तान फ़ौज ने दावा किया है कि उसने 350 से अधिक बंधक हाइजैक की गई ट्रेन से मुक्त करवाए थे। हालाँकि, बलोच विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि फौजियों को छोड़ कर उन्होंने बाकी सभी यात्रियों को रिहा कर दिया था। पाक फ़ौज ने अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए एक बार फिर भारत पर आरोप भी जड़े हैं।

DG ISPR ने आरोप लगाया है कि इस हमले का मुख्य आयोजक उनका पूर्वी पड़ोसी देश (भारत) है। इस हमले में पाक फ़ौज ने अफगानिस्तान का नाम भी घसीटा है। हालाँकि, भारत और अफगानिस्तान पहले ही पाकिस्तान के इन आरोपों को नकार चुके हैं।

वहीं इस बीच बलूचिस्तान के और भी शहरों में हमले हुए हैं। बलूचिस्तान के क्वेटा, पंज्गूर और खुजदार में हमले गुरुवार रात को हुए हैं। क्वेटा में हमलावरों ने एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया जबकि खुजदार में एक निर्माण कम्पनी पर हमला किया गया और उसके साजोसामान में आग लगा दी गई। पंज्गुर में एक चेकपोस्ट पर हमला हुआ और यहाँ से हथियार लूटे गए।

बलूचिस्तान में बीते कुछ दिनों से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बलोच विद्रोही लगातार फ़ौज पर हमले कर रहे हैं और उन्होंने बड़े इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं फ़ौज उनके दावे नकार कर प्रोपेगेंडा करने और इल्जाम भारत तथा अफगानिस्तान पर डालने में जुटी है।

‘बलूच बच्चियों को नंगा कर करते हैं टॉर्चर, लड़कियों के शरीर में मशीन से ड्रिल’: पाकिस्तानी फौज के ‘रेप हाउस’ से नायला कादरी ने उठाया पर्दा

डॉ. नायला कादरी  (फोटो साभार: Devdis course)
यूनाइटेड नेशन में भारतीय मुसलमानों का हितैषी बनने की कवायत में अपनी नापाक आवाज़ उठाने वाला  पाकिस्तान अपने ही देश में उसकी फौज बलूच बच्चियों के साथ कितना अत्याचार कर रही है, उस पर क्यों खामोश है? पाकिस्तान फौज ने क्यों "रेप हाउस" बनाये हुए हैं? क्यों वहां बलूच लड़कियों को ले जाकर निवस्त्र किया जाता है? क्या बलूच महिलाओं का कोई आत्मसम्मान नहीं?
पाकिस्तान से बलूचों की आजादी की संघर्ष काफी पुराना है। पाकिस्तानी फौजें इस इलाके में किस तरह मानवाधिकारों का दमन करती है, यह भी छिपी नहीं है। पाकिस्तनी फौज के अत्याचारों का जिक्र करते हुए डॉ. नायला कादरी (Dr. Naela Quadri Baloch) ने कहा है कि जो हालात हैं उसमें बलूचों के लिए जीना कठिन, जबकि मौत आसान लगती है।

नायला कादरी विश्व बलोच महिला संघ की अध्यक्ष और बलोच निर्वासित सरकार की प्रधानमंत्री हैं। 2012 में निर्वासित होने के बाद से उन्होंने कनाडा में शरण ले रखी है। इस समय वे बलूचिस्तान की आजादी के लिए समर्थन जुटाने को भारत दौरे पर हैं। इसी क्रम में वे 15 जुलाई 2022 को राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुँचीं।

दैनिक भास्कर को पाकिस्तानी फौज की प्रताड़नाओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “इस वक्त पाकिस्तान बलोच के साथ जो कर रहा है, उससे किसी की भी रूह काँप जाएगी। वहाँ लड़कियों की बॉडी को मशीन से ड्रिल किया जा रहा है।” नायला कादरी ने बताया कि पाकिस्तानी फौज ने रेप हाउस बना रखे हैं। जहाँ बलूचों की छोटी-छोटी बच्चियों को नंगा कर टॉर्चर किया जाता है।

उन्होंने बताया, “मुझे बलूचिस्तान की आजादी सबसे प्यारी है। आजादी की जंग में हमारे 2 लाख से ज्यादा बलूच युवा और महिलाएँ, बच्चे, बूढ़े शहीद हो चुके हैं। पिछले 15 सालों में पाकिस्तान और चीन की सेना ने बलूचिस्तान में लगभग 55 हजार से ज्यादा लोगों को गायब कर दिया है। इनमें 90 साल के बूढ़े से लेकर 7 दिन की बच्ची तक शामिल हैं। महिलाओं की हालत बद से बदतर है। वहाँ ना तो जिंदगी है और ना ही इज्जत। महिलाओं, बच्चियों को घरों से उठाकर ले जाते हैं। कोई पूछने वाला नहीं है। हम चाहते हैं हिन्दुस्तान की जनता बलूच के साथ जुड़कर आजादी के संघर्ष में हर लेवल पर हमारा साथ दे।”

इससे पहले डॉ. नायला कादरी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा पहुँची थीं। वहाँ उन्होंने मीडिया से कहा था, “अगर भारत, बांग्लादेश, भूटान को अमन, चैन, शांति चाहिए तो बलूचिस्तान को आतंकवाद से आजाद कराना होगा। आतंकवाद की फैक्ट्री पाकिस्तान को खत्म करना होगा।”

पाकिस्तान में 25000 से ज्यादा अल्पसंख्यक मार दिए गए, हजारों लापता: कराची के पूर्व मेयर ने ही खोली इमरान की पोल

पाकिस्तान, कराची, न्यूऑर्क
आतंकवाद और कश्मीर को लेकर आज पाकिस्तान प्रधानमंत्री की विश्व में किरकिरी जो हो रही है, उसके ज़िम्मेदार कोई और नहीं 1947 में पाकिस्तान बनने से लेकर इमरान खान से पूर्व समस्त शासक हैं, वह चाहे जनता के चुने हुए नेता ही क्यों न हों, उनके काँटों भरी बोयी फसल पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री को काटनी पड़ रही, इस सच्चाई को पाकिस्तान के हुक्ममरानो को स्वीकार करनी होगी। 
पूर्व शासकों की काली करतूतों को उजागर करते इमरान खान 
यदि भारत और बांग्लादेश की भांति इमरान से पूर्व हुक्मरानों ने केवल कश्मीर का आलाप रोने की बजाए विकास की ओर ध्यान दिया होता और फौज को सरकार पर हावी नहीं देने दिया होता, पाकिस्तान की इतनी दुर्गति नहीं हो रही होती। 
अमेरिका को ना पाकिस्तान में हुए हिन्दुओ पर अत्याचार दिखा और ना ही कभी उसे पाकिस्तान में कल्चरल डाइवर्सिटी खतरे में दिखी! केवल भारत में ही उसे ये खतरा दिखता है और वो भी चुनावो के वक्त या किसी और नाजुक समय में!
अमेरिका को ना पाकिस्तान में हुए हिन्दुओ पर अत्याचार दिखा
और ना ही कभी उसे पाकिस्तान में कल्चरल डाइवर्सिटी
 खतरे में दिखी! केवल भारत में ही उसे ये खतरा दिखता है
और वो भी चुनावो के वक्त या किसी और नाजुक समय में!
दूसरे, आज जो कुछ भी इमरान खान बोल रहे हैं, वह वास्तव में बहुत ही साहस का काम है। पाकिस्तान में आतंकवाद और आईएसआई की गैर-मुस्लिम हरकतें इमरान खान के कार्यकाल से पूर्व से चलती आ रही हैं। परन्तु इमरान से पूर्व जितने भी शासक रहे हैं, किसी ने देश में चल रहे आतंकवादी गतिविधियों को नहीं कबूला, जो विश्व स्तर पर इमरान कबूल रहे हैं। 
अगर इमरान से पूर्व रहे शासकों ने फौज के विरुद्ध जाकर इन हरकतों पर लगाम लगाई होती, पाकिस्तान की विश्व में इतनी किरकिरी नहीं होती। देखा जाए तो आज पाकिस्तान को अपना वजूद बचाना मुश्किल हो रहा है। इसके लिए पाकिस्तान के राजनीतिक दल ही नहीं, जनता भी बराबर की दोषी है। क्यों नहीं चुनावों में नेताओं से वायदा लिया, कि फौज के इशारे पर राज नहीं करेंगे। उस समय वहां की जनता को भी भारत विरोधी गतिविधियों में आनंद आ रहा था। 
तीसरे, सोवियत संघ (Soviet Union) को तोड़ने में अमेरिका ने किस तरह पाकिस्तान को पाला-पोसा, आज तक पाकिस्तान के किसी नेता ने सच्चाई बोलने का साहस नहीं किया, जो इमरान खान ने अमेरिका की ही धरती पर अमेरिका की कलाई खोल दी। इमरान की बातों को नकारात्मक लेने के साथ-साथ सकारात्मक रुख को भी पहचानना होगा। 
पाकिस्तानी जनता को भारत नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध सडकों पर आना होगा 
पाकिस्तान की धरती पर 40,000 आतंकवादियों और लगभग 40 आतंकवादी सरगनाओं का होना, कोई अचानक नहीं हुआ है। इमरान से पूर्व जितने भी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और तानाशाहों ने पाकिस्तान पर राज किया, सभी भारत विरोधी गतिविधियों को भुनाकर विदेशों के चन्दे पर राज करते रहे। 
भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों को भी शर्म आनी चाहिए कि 1947 में भारत से गए मुसलमानों को मुहाजिर यानि शरणार्थी क्यों कहा जाता है? उल्टी सीधी बातों पर फतवे देकर भारत में अशान्ति फ़ैलाने का साहस कर सकते हैं, लेकिन चीन में रह रहे मुसलमानों पर लग रहीं पाबंदियों के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं। क्या कश्मीर का मुसलमान ही मुसलमान है, चीन का नहीं? फिर पाकिस्तान में मुहाजिरों और अल्पसंख्यकों पर होते अत्याचारों के विरुद्ध क्यों नहीं बोलते? इन अत्याचारों के लिए जितना पाकिस्तान और वहां की फौज ज़िम्मेदार है, उतने भी भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थक, चाहे वो हिन्दू है या मुसलमान? ये लोग भाजपा, संघ, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, हिन्दू महासभा आदि का हौवा बना कर भारतीय मुसलमानों को डराकर अपनी तिजोरियां भरते रहे।  
मुहाजिरों और अल्पसंख्यकों पर होते अत्याचार    
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति कितनी बदहाल है? ये किसी से छिपा नहीं हैं। विश्व के कोने-कोने से पाकिस्तान को अपनी कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए थू-थू मिल रही है। अब ऐसे में कराची के पूर्व मेयर वासे जलील ने भी न्यूयॉर्क में पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों और मुहाजिरों पर होते अत्याचारों की पोल-पट्टी खोलकर पाक की हकीकत को और पारदर्शी कर दिया है। उन्होंने सितंबर 26, 2019 को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और मुहाजिरों पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जताई है।
न्यूयॉर्क में उन्होंने पाकिस्तान में दशकों से मुहाजिरों पर होते जुल्म पर अपना बयान दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में 25 हजार से ज्यादा अल्पसंख्यक लोग मारे जा चुके हैं। हजारों लोग लापता हो गए। हम पाकिस्तान में अपनी स्थिति से दुनिया को अवगत कराना चाहते हैं।”
उन्होंने बताया, “पाकिस्तान मुहाजिरों को अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने की अनुमति नहीं देता है। हमारे पास अपनी माँगों के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। यह हमारा नैतिक, मानवीय और लोकतांत्रिक अधिकार है।”
पाकिस्तान नेशनल असेंबली के एक सदस्य की हत्या का जिक्र करते हुए पूर्व मेयर ने कहा, “पाक के पंजाबी मुस्लिम बहुसंख्यकों के अल्पसंख्यकों के साथ किए अत्याचार की सैकड़ों कहानियाँ हैं। 2018 में पाकिस्तान नेशनल असेंबली के एक सदस्य सैयद अली रज़ा आब्दी को पाकिस्तान की सेना के इशारे पर मार दिया गया था।”
इस समय पाकिस्तान द्वारा अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ न्यूयॉर्क की सड़कों पर बड़ी तादाद में प्रदर्शन चल रहा है। ये सब उस समय हो रहा है जब पाक पीएम इमरान UNGA में भाषण देने वाले हैं।

कई सौ की तादाद में डिस्प्ले स्क्रीन के साथ टैक्सी और ट्रक न्यूयॉर्क की सड़कों पर देखने को मिल रहे हैं, जहाँ पाकिस्तान के अत्याचारों के ख़िलाफ़ तस्वीरों और स्लोगन्स के जरिए प्रदर्शन हो रहा है। इसे अमेरिका के मुहाजिर एडवोकेसी ग्रुप वॉयस ऑफ कराची ने लॉन्च किया है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के आसपास खड़ी गाड़ियों पर दिखे कुछ विज्ञापनों में लिखा है, “पाकिस्तान: मानव अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को न मानने वाला देश” और “मुहाजिर पाकिस्तान में यूएन हस्तक्षेप की माँग करते हैं।” (“Pakistan: A country in denial of UN charter on Human rights” and “Mohajirs demand the UN intervention in Pakistan.”)
वॉयस ऑफ कराची के अध्यक्ष नदीम नुसरत की मानें तो पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को इसलिए उठा रहा है, ताकि लोगों का ध्यान पाक सेना के अत्याचारों पर न जाए। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अल्पसंख्यक अमेरिकी कॉन्ग्रेसियों और सीनेटरों के पास पहुँच रहे हैं और वे उनसे पाक पर दबाव बनाने के लिए भी मदद माँग रहे हैं।
वहीं, एक मुहाजिर कार्यकर्ता कहकशां हैदर का कहना है, ‘‘पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए। उसे दी जा रही सभी वित्तीय सहायता रोक देना चाहिए। यह आतंक का देश है। पाक पूरी दुनिया में आतंकवाद फैला रहा है। मोदी और ट्रम्प से गुजारिश है कि हमारे समुदाय को बचाने में मदद करें।’’