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क्या शरिया लागू होने पर मॉडर्न फलक को इंस्टाग्राम पर आने की आज़ादी होगी? ‘योगी बंदर, चायवाला मोदी, तड़ीपार शाह’: ‘गलीचपने’ में सईदा फलक निकली ओवैसी की उस्ताद

AIMIM नेता सैयदा फलक(जो पब्लिक मीटिंग में हिजाब और इंस्टाग्राम पर मॉडर्न) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी की (Instagram: syedafalakk)
असदुद्दीन ओवैसी की मजहबी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता आए दिन विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। कभी मुंब्रा की पार्षद सहर शेख खुलेमंच से पूरे इलाके को ‘हरा रंग‘ में रंगने का ख्वाब बुनती हैं, तो कभी असदु्द्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ‘15 मिनट के लिए पुलिस हटाने‘ की धमकी देती हैं। तो अब ताजा उदाहरण हैं सईदा फलक। ये देश के उच्च पदों पर बैठे नेताओं के लिए ‘गंदी भाषा’ का इस्तेमाल करती हैं।

सईदा फलक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी की है। मुस्लिम भीड़ को संबोधित करते हुए सईदा फलक अपमानजनक टिप्पणी करते यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग सईदा फलक की इन अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

सईदा फलक ने पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी पर की अपमानजनक टिप्पणी

सामने आए वीडियो में AIMIM नेता सईदा फलक सीएम योगी आदित्यनाथ को ‘बंदर’ कहती है। सईदा ने कहा, “ये ‘बंदर’ योगी बंगाल में कहता है कि बंगाल को काबा नहीं बनने देंगे। ये क्या आपके बाप की जागीर है।” वे चेतावनी देते हुए कहती है, “इंशाल्लाह, कयामत तक हम दाढ़ी करेंगे, हिजाब पहनेंगे, टोपी पहनेंगे, अजान पढ़ेंगे, नमाज पढ़ेंगे, शरियत पर चलेंगे।”

असदुद्दीन ओवैसी की हिजाब पहनने वाली महिला को भारत का प्रधानमंत्री बनने वाले बयान का जिक्र करते हुए सईदा फलक ने आगे कहा, “जब ओवैसी ऐसा कहते हैं, तो सब कहते हैं कि ये गजवा-ए-हिंद की बात कर रहे हैं… क्यों नहीं बन सकते? जब कल का तड़ीपार आज होम मिनिस्टर बनकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है, जो कल का चायवाला था वो प्राइम मिनिस्टर बनकर देश को बेच रहा है।” सईदा की इस अपमानजनक टिप्पणी पर मुस्लिम भीड़ जोर-जोर से हँस रही है और नारेबाजी कर रही है।

सईदा फलक के खिलाफ लोगों ने कार्रवाई की माँग की

AIMIM नेता सईदा फलक की पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ लोगों ने कार्रवाई की माँग की है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोग यूपी पुलिस, गृह मंत्रालय और योगी कार्यालय को टैग करते हुए कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

अमिताभ चौधरी नाम के ‘एक्स’ यूजर लिखते हैं, “AIMIM नेता सईदा फलक सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर रही है।
@Uppolice @myogioffice @AmitShahOffice मामले में दखल दें।”

‘फाइटर 3.0’ नाम से यूजर कहते हैं, “आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन मर्यादा की सीमा लांघकर की गई टिप्पणी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हो सकती। सईदा फलक द्वारा योगी आदित्यनाथ और अमित शाह पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियाँ सीधे-सीधे राजनीतिक शालीनता पर सवाल उठाती हैं। सीधा संदेश: असहमति हो सकती है, लेकिन अभद्रता नहीं।”

वे आगे कहते हैं, “राजनीति में स्तर गिराकर नहीं, तर्क और काम के दम पर जवाब दिया जाता है। जरूरत है कि ऐसी भाषा पर कड़ा संज्ञान लिया जाए, ताकि सार्वजनिक विमर्श की गरिमा बनी रहे और कोई भी नेता सीमाएँ पार करने की हिम्मत न करे। @Uppolice @myogioffice @AmitShahOffice“

दीपक शर्मा नाम के यूजर लिखते हैं, “हैलो @Uppolice सईदा फलक हमारे CM योगीजी के लिए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही है। इस खुदीली खातून के खिलाफ कार्यवाही करें।”

कौन हैं सईदा फलक?

हैदराबाद की रहने वाली 31 साल की सईदा फलक कराटे की खिलाड़ी रह चुकी हैं। सईदा ने 20 राष्ट्रीय और 22 अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप जीते हैं। वे तेलंगाना की पहली खिलाड़ी हैं जिन्होंने वर्ल्ड कराटे चैंपियनशिप और एशियाई कराटे चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। खिलाड़ी के तौर पर सईदा की सबसे बड़ी उपलब्धि 2016 में यूएस ओपन कराटे चैंपियनिशिप और 2022 में दुबई के शोरिन काई कराटे कप में स्वर्ण पदक जीतकर हासिल की। इसके अलावा सईदा फलक पेशेवर तौर पर एक एडवोकेट भी हैं।

खेल में करियर बनाने के बाद सईदा ने राजनीति ज्वाइन की। साल 2020 में सईदा ने ओवैसी की पार्टी AIMIM का दामन थाम लिया। तभी से वह AIMIM की विचारधारा का प्रचार करते नजर आती हैं। AIMIM ज्वाइन करने के बाद सईदा फलक की एक अलग पहचान बनी। सईदा को बुर्के में भड़काऊ भाषण देते देखा गया, जो सीधे नेताओं को टारगेट कर बोलती हैं, इसीलिए उन्हें ‘लेडी ओवैसी’ भी कहा जाने लगा।

सईदा फलक का हिजाब पर समर्थन और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान को लेकर

सईदा फलक एक तरफ हिजाब पहनने का समर्थन करती हैं और दूसरी तरफ महिलाओं की आवाज बुलंद करने के लंबे-लंबे भाषण देती हैं। यही वजह है कि सईदा को उनके ही भाषणों के लिए कई बार घेरा जा चुका है। 4 साल पहले न्यूज 18 की डिबेट में सईदा फलक ने कहा कि ‘मदरसों में लड़कियों को हिजाब की अहमियत समझाई जाएगी’, तब होस्ट अमन चोपड़ा ने उनसे सवाल किया, “आप भी हिजाब नहीं पहनती थी।” तो सईदा ने इसे विकल्प बताया, लेकिन अगली ही लाइन में इसे इस्लाम में जरूरी बताया, जिसके बाद वे टीवी डिबेट में घिरती नजर आईं।

और जब अकबरुद्दीन ओवैसी ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते हुए कहा था, “कई इन लोगों के खुदा हैं। वो क्या-क्यो जो पूजा करते हैं। कितने राम-लक्ष्मण-दुर्गा क्या क्या है? हर 8 दिन में एक नया पैदा हो जाता है। अब हनुमान जयंती आ गई, लक्ष्मू मालूम थी और अब भाग्य लक्ष्मी आ गई।” तब सईदा फलक ने न्यूज 18 के साथ डिबेट में अकबरुद्दीन ओवैसी का बचाव किया था।

पहले भी सीएम योगी पर की अभद्र टिप्पणी, जानिए पुराने विवादित बयान

सईदा फलक को यूँ ही AIMIM में ‘लेडी ओवैसी’ नहीं कहा जाता है बल्कि उनके बयान भी ओवैसी से मिलते जुलते हैं। सईदा फलक कभी-भी मंच से किसी भी नेता को धमकी दे देती हैं, कभी किसी के लिए अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करती हैं।

वे पहले भी सीएम योगी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी कर चुकी हैं, “उनका (सीएम योगी) खुद का नाम पहले अजय बिष्ट था, नाम बदलकर योगी आदित्यनाथ रख लिया। तो बेहतर यह होगा कि एक बार फिर से वो अपना नाम बदलकर नाम बदलने वाला बंदर रख लें।”

हाल ही में बिहार चुनाव और मुंबई के BMC चुनावों में भी सईदा फलक के कई विवादित बयान सामने आए थे। किशनगंज में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सईदा शेख ने पीएम मोदी और सीएम योगी को ‘छोटा शैतान‘ कहा था। वहीं BMC चुनावों में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस को चुनौती देते हुए सईदा ने कहा था, “सुन लो फडणवीस, अगर अल्लाह ने चाहा तो एक दिन इसी नकाब और हिजाब को पहनकर एक मुस्लिम औरत हिंदुस्तान की प्राइम मिनिस्टर बनेगी।”

AIMIM नेताओं की ‘गलीचपने’ की रही पृष्ठभूमि

अब सईदा शेख की इन अपमानजनक टिप्पणियों को सुनने के बाद ज्यादा हैरानी भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये उसी पार्टी की नेता हैं, जिसमें सहर शेख और अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे नेता शामिल हैं। और यही AIMIM की पहचान है, कि देश के प्रधानमंत्री और प्रशासन को सीधी ‘गाली’ या ‘धमकी’ देकर चर्चा में आओ और फिर खुद को बड़ा नेता बनाओ। इन सभी नेताओं से ऐसे बयान करने की उम्मीद भी है, क्योंकि इनके मुखिया असदु्द्दीन ओवैसी ही आए दिन हिंदू-विरोधी और कट्टर बयान देते नजर आते हैं और मंच के सामने बैठी कौम इसपर ठहाके मारकर हँसती है।

बिहार : बीजेपी सरकार की सुविधाओं के लाभ उठाने वाले हरामफरमोश मुस्लिमों को विकास का एजेंडा नहीं कबूल, मजहब और BJP विरोध ही अब भी मतदान का पैटर्न


बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्षी महागठबंधन की बुरी हार हुई है। 243 सीटों वाली विधानसभा में जहाँ NDA को 200 से अधिक सीटें मिलीं तो वहीं महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया है। हालाँकि, 28 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी इस चुनाव में 5 सीटें जीती हैं। ओवैसी की सारी सीटें मुस्लिम बहुल सीमांचल इलाके में आई हैं।

इस चुनाव में AIMIM की सफलता दिखाती है कि बिहार के एक बड़े मुस्लिम वर्ग के लिए अब मजहबी पहचान पर आधारित राजनीति ही निर्णायक बनती जा रही है। मुसलमान अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में हैं जो उनकी मजहबी पहचान के साथ और अधिक खुलकर खड़ा हो। AIMIM की राजनीति की जड़ें मजहबी पहचान में ही हैं। पार्टी खुद को एक ‘मुस्लिम प्लेटफॉर्म’ की तरह पेश करती है।

ओवैसी की इस जीत से एक बात और साफ होती है कि उन्होंने सीमांचल में दमदार ‘घुसपैठ’ कर ली है। RJD की रीढ़ माने जाने वाले MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को उन्होंने तोड़ दिया है। AIMIM के प्रदर्शन से साफ है कि ओवैसी ने RJD के मुस्लिम वोटों को अपने पाले में कर लिया है। उन्होंने अब सीमांचल में अपना एक जनाधार खड़ा कर लिया है।

हालाँकि, ये वोटर भी कब तक ओवैसी के साथ हैं, यह भी अपने आप में एक सवाल होगा क्योंकि यही वोटर बीजेपी विरोध में लंबे वक्त तक RJD के साथ खड़ा था। इन्हीं वोटरों ने अपने प्रतिनिधित्व के लिए उप-मुख्यमंत्री का पद माँगने के लिए आवाज उठानी शुरू की और RJD-कॉन्ग्रेस की तरफ से सब उन्हें यह गारंटी नहीं मिली तो वो ओवैसी की तरफ शिफ्ट हो गए। क्योंकि इन्हें जब प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो कम-से-कम एक कट्टर मजहबी पार्टी को मिल ही गई है।

आम तौर पर मुस्लिम वोटों को पैर्टन यही रहता है कि वो ऐसे दल को वोट करते हैं जिसका अपना एक तय जनाधार हो और जो उनकी नजरों में ‘सांप्रदायिक’ BJP को हरा सकता हो। जैसे उत्तर प्रदेश इसका एक उदाहरण है, यहाँ सपा के पास एक तय जातिगत वोट बैंक है तो आम तौर पर मुस्लिम उससे मिलकर BJP को हराने के लिए वोटिंग करते हैं।

बिहार में अभी ऐसे जनाधार वाला कोई दल उनको नजर नहीं है क्योंकि RJD का फिक्स माना जाने वाला यादव वोट बैंक भी उनसे छिटका-छिटका है। अगर भविष्य में कोई दल बिहार में ऐसा उभकर सामने आता है जिसका पास अपना एक जनाधार हो और जो BJP के विरोध में सरकार बनाने के लिए तैयार हो तो मुस्लिम उसके साथ भविष्य में नहीं जाएँगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। मगर अभी ओवैसी ने MY समीकरण का गणित ध्वस्त कर दिया है, यह भी पूरी तरह से सही है।

ओवैसी ने तोड़ दिया RJD का भ्रम?

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ओवैसी ने कई बार कोशिश की थी कि वह किसी भी तरह महागठबंधन का हिस्सा बन जाएँ। ओवैसी ने RJD से 6 सीटों की माँग की थी और लालू यादव को दो बार खत लिखा था। लालू यादव ने इन खतों का कोई जवाब नहीं दिया।

 खुद ओवैसी ने एक रैली में इससे जुड़ी जानकारी दी है। उन्होंने कहा था, “हमने RJD से कभी भी मंत्री पद की माँग नहीं की। अगर यह दरियादिली नहीं है तो और क्या है? हमने गठबंधन के लिए हर संभव प्रयास किए। अब फैसला RJD के हाथ में है।” तब ओवैसी को कुछ हाथ नहीं लगा लेकिन अब उन्होंने तेजस्वी को हाथ मलने को मजबूर कर दिया है।

औवेसी ने जो पाँच सीटें जीतीं हैं वो सभी मुस्लिम बहुल इलाकों में हैं और उन सभी पर मुस्लिम उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की है। AIMIM ने जोकीहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी सीट से क्रमश मोहम्मद मुर्शिद आलम, मौहम्मद तौसीफ आलम, मौहम्मद सरवर आलम, अखतरुल ईमान, गुलाम सरवर ने जीत दर्ज की है।

एक खास बात ये भी है कि AIMIM ने ये सीटें नजदीकी मुकाबले में नहीं जीती हैं बल्कि इन पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। उनका सबसे कम जीत का अंतर ही 23,000 से ऊपर का है। इन सीटों पर मुस्लिम वोटों की भरमार है। इन सभी पाँचों सीटों पर मुस्लिमों की संख्या 64% से अधिक है। कोचाधामन में तो मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 72.4% है।

                              AIMIM द्वारा जीती गई सीटें और हार-जीत का अंतर (फोटो: ECI)

ओवैसी ने खुद को 5 सीटें जीतीं हैं इसके अलावा कम-से-कम 8 ऐसी सीटें भी हैं जहाँ उन्होंने महागठबंधन के उम्मीदवार को हराने में भूमिका निभाई है। यानी उन सीटों पर AIMIM के उम्मीदवार को मिले वोटों की संख्या हार-जीत के अंतर से अधिक रही है।

केवटी, शेरघाटी, प्राणपुर, कसबा, गोपालगंज और महुआ जैसी कम-से-कम 8 सीटें हैं, जहाँ AIMIM महागठबंधन की हार की वजह बनी है। RJD को जो यह भ्रम था कि मुस्लिम वोटों पर उसका एकमुश्त अधिकार है और मुस्लिम केवल उसके साथ ही जाएँगे यह भ्रम ओवैसी ने तोड़ दिया है।

मुस्लिमों वोटरों की प्राथमिकता- मजहबी पहचान और BJP विरोध

बिहार के इस चुनाव में एक बार फिर दिखा है कि मुस्लिम मतदाताओं की प्राथमिकताएँ दो मुख्य स्तंभों पर टिकती हैं। पहला है मजहबी पहचान और दूसरा है ऐसा राजनीतिक विकल्प चुनना जो BJP को प्रभावी रूप से चुनौती दे सके और उसे हराने की स्थिति में हो।

मुस्लिम समाज के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं होता कि किसने कितनी सड़क बनाई या किसने कितनी योजनाएँ लागू कीं बल्कि यह कि कौन-सी राजनीतिक शक्ति उनकी मुस्लिम पहचान को मजबूत करने का काम करेगी। AIMIM को चुनकर एक बार फिर वही प्राथमिकता मुस्लिम वोटरों ने दिखाई है।

यही वजह है कि उनकी राजनीति में मजहबी पहचान, प्रतिनिधित्व और उनके विचार की प्रमुखता सबसे ऊपर रहती हैं। जब उन्हें लगता है कि कोई दल उनकी पहचान को सीधे तौर पर संबोधित कर रहा है या उन्हें एक मजहबी पहचान दे रहा है तो वे उसके साथ खड़े होते हैं।

दूसरा पहलू रणनीतिक वोटिंग है। मुस्लिम मतदाता अक्सर यह देखते हैं कि चुनावी मुकाबले में BJP के खिलाफ सबसे मजबूत दावेदार कौन है। यदि कोई गठबंधन या पार्टी BJP को हराने में सक्षम दिखती है, तो मुस्लिम वोट बड़ी संख्या में उसके पक्ष में एकजुट हो जाते हैं।

मुस्लिमों का यह वोटिंग पैटर्न पूरे भारत में नजर आता है। गैर-बीजेपी दलों के सत्ता में आने के बाद उन्हें मिलने वाली खुली छूट के चलते मुस्लिम BJP के खिलाफ लामबंद रहते हैं। अधिकतर गैर बीजेपी सरकारें मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति कर किसी भी तरह उन्हें अपने पाले में रखना चाहती है। इसलिए उन्हें हर काम करने की खुली छूट मिलती है।

हर चुनाव से पहले बड़ी पार्टियाँ विकास योजनाएँ, रोजगार और शिक्षा के मुद्दे गिनाती हैं लेकिन मुस्लिम मतदाता उसी विकल्प की ओर झुकते हैं जो उन्हें अपनी मजहबी पहचान की ‘सुरक्षा’ का आश्वासन देता हो। यह पैटर्न प्रदेश भर में साफ दिखाई दिया है।

जहाँ RJD या कांग्रेस मुस्लिम वोट को ‘तुष्टीकरण’ का जरिया मान रहे थे लेकिन AIMIM ने उससे आगे जाकर ‘प्रत्यक्ष नेतृत्व’ का वादा किया। इसी वजह से मुस्लिम मतदाता AIMIM को एक ऐसे विकल्प के रूप में देखने लगे हैं जो उनकी पहचान को बिना किसी समझौते के राजनीतिक रूप देता है। ओवैसी की यही ‘घुसपैठ’ कई सीटों पर इतनी गहरी हुई कि मुख्यधारा की पार्टियाँ उसका मुकाबला नहीं कर पाईं।

बिहार के मौजूदा नतीजों से यही संकेत मिलता है कि मुस्लिम वोटों में पहचान आधारित राजनीति आने वाले समय में मजबूत ही होती जाएगी। युवा मुस्लिम मतदाता सोशल मीडिया और भाषणों के जरिए ऐसे मुस्लिम नेतृत्व की ओर झुक रहे हैं जो उनकी मजहबी पहचान को खुले तौर पर प्रस्तुत करे।

पाकिस्तान की जेल में रहकर आतंकी बन जाता है अब्बा… शशि थरूर के बाद अब ओवैसी वाले डेलिगेशन ने विदेश में आतंकी मुल्क का सच दुनिया को बताया, FATF से कहा- इन्हें ग्रे लिस्ट में डालो

पाकिस्तान के विरुद्ध आतंकवाद को लेकर चल रहे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के शशि थरूर, आनंद शर्मा और मनीष तिवारी की है। ओवैसी का विरोधी होने के बावजूद इस प्रकरण में उनकी प्रशंसा करता हूँ। उनका कहना कि लड़ाई मोदी से हो या बीजेपी सरकार से ये तो चलती रहेगी, लेकिन जब बात देश की हो सबको एकजुट होना चाहिए। लेकिन राहुल और इसके पिछलग्गू विपक्ष को इन लोगों से सीखना चाहिए, परन्तु ये वही बोली बोल रहे है जो दुश्मन मुल्क पाकिस्तान चाहता है।   
हैदराबाद के सांसद और AIMIM प्रमुख AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अल्जीरिया में पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को बेनकाब किया। असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (31 मई 2025) को आतंकवादी जकीउर रहमान लखवी का उदाहरण दिया, जो पाकिस्तान की जेल में रहते हुए बेटे का अब्बू बना।

ओवैसी के इस बयान को हलके में लेना महामूर्खता होगी। जेल में रहते आतंकवादी का अब्बा बनना बहुत कुछ जाहिर कर रहा है। ओवैसी के इस बयान से जाहिर है कि पाकिस्तान सरकार और फ़ौज के संरक्षण में पल रहे आतंकियों की औरतें तक सुरक्षित नहीं। जो चाहे किसी भी आतंकवादी के घर की किसी भी औरत का जब चाहे कुछ भी कर सकता है। 

ओवैसी ने कहा कि दुनिया का कोई देश आतंकवादियों को ऐसी छूट नहीं देता, लेकिन पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है। उन्होंने भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डालना जरूरी है, ताकि आतंकवादी घटनाएँ कम हों।

ओवैसी सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अल्जीरिया में हैं, जो दुनिया भर में पाकिस्तान की आतंकवाद-समर्थक नीतियों को उजागर कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रणनीति दक्षिण एशिया में अस्थिरता पैदा करती है। ओवैसी ने पाकिस्तान को ‘भिखमंगा देश’ करार देते हुए उसके आतंकवाद में संलिप्तता पर सवाल उठाए।

पहले हैदराबाद में घुसकर ओवैसी को दी चुनौती, अब लोकसभा सदस्यता खत्म करवाने राष्ट्रपति को लिखा- फिलिस्तीन का नारा संविधान का उल्लंघन, यह राष्ट्रद्रोह जैसा


महाराष्ट्र के अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने माँग की है कि जय फिलिस्तीन का नारा लगाने के कारण AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की सदस्यता रद्द की जाए। उन्होंने जय फिलिस्तीन का नारा लगाने को राष्ट्रद्रोह बताया है।

नवनीत राणा ने गुरुवार (27 जून, 2024) को राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए यह पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में शपथ लेने के बाद ‘जय फिलिस्तीन’ के नारे लगाए। फिलिस्तीन वह देश है, जिसका भारतीय नागरिक या भारतीय संविधान से कोई लेना-देना है।

सांसद नवनीत राणा ने आगे अपने पत्र में लिखा कि असदुद्दीन ओवैसी ने फिलिस्तीन के नारे संसद में लगा कर अपनी निष्ठा और लगाव इस देश के प्रति स्पष्ट कर दिया है और यह संविधान का उल्लंघन है। नवनीत राणा ने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बताया है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी का यह बयान राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरा है।

पूर्व सांसद नवनीत राणा ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 102 का हवाला भी दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत कार्रवाई करते हुए ओवैसी की सांसदी खत्म करने की माँग की है।

क्या कहता है अनुच्छेद 102 और 103

संविधान के अनुच्छेद 102 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है। इसके अलावा उसे इस आधार पर भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि वह दूसरे राष्ट्र के प्रति श्रृद्धा रखता है।
वहीं संविधान का अनुच्छेद 103, अनुच्छेद 102 के तहत किसी संसद सदस्य को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर फैसला सम्बन्धी शक्तियाँ देश के राष्ट्रपति को देता है। इसमें कहा गया है कि यदि अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता का मामला उठता है इस मामले में इसे राष्ट्रपति को भेजा जाना चाहिए और उसका ही निर्णय अंतिम होगा। इसी अनुच्छेद में कहा गया है कि अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह लेगा और उसी के अनुसार निर्णय लेगा।

ओवैसी ने ‘जय फिलिस्तीन’ के लगाए थे नारे

हैदराबाद से सांसद चुने गए असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (26 जून, 2024) को लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद जय फिलिस्तीन के नारे लगाए। उन्होंने अपनी शपथ उर्दू में ली। उर्दू में शपथ लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने अंत में ‘जय भीम, जय मीम’ कहा और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया, लेकिन अंत में उन्होंने ‘जय फिलिस्तीन’ भी कहा। इस दौरान पूर्वी चम्पारण से भाजपा के सांसद राधामोहन सिंह पीठासीन थे और नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे थे। 
जब असदुद्दीन ओवैसी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये संविधान के खिलाफ कैसे हुआ, ये संविधान के कौन से प्रावधान के हिसाब से गलत है? G किशन रेड्डी के विरोध पर उन्होंने कहा कि उनका काम है विरोध करना, हम उन्हें खुश करने के लिए क्यों बोलेंगे। उन्होंने इस दौरान फिलिस्तीन को लेकर महात्मा गाँधी के विचार पढ़ने की सलाह भी दी।
इससे पहले वकील हरि शंकर जैन ने असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ इस मामले में राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत शिकायत की थी। हरि शंकर जैन ने ओवैसी की सदस्यता संसद सदस्य के रूप में खत्म करने की माँग की है। ऐसी ही एक शिकायत एक और वकील विभोर आनंद ने भी लोकसभा सचिवालय से की है।
नवनीत राणा इससे पहले भी असदुद्दीन ओवैसी को चुनौती दे चुकी हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान हैदराबाद में कहा था, “एक छोटा भाई है, एक बड़ा भाई है…छोटा (अकबरुद्दीन ओवैसी) बोलता है कि पुलिस को 15 मिनट हटा दो तो हम दिखाएंगे की क्या कर सकता है। छोटे को मेरा कहना है कि तेरे को 15 मिनट लगेंगे और हमको सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे। 15 सेकेंड पुलिस को हटाया तो छोटे और बड़े (असदुद्दीन ओवैसी) को पता नहीं लगेगा कि कहाँ से आया और कहाँ से गया। सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे।”

क्या खत्म होगी ओवैसी की लोकसभा सदस्यता? जो लड़ रहे मथुरा-काशी की लड़ाई हरी शंकर जैन ने ‘जय फिलिस्तीन’ पर राष्ट्रपति से की शिकायत, जानिए क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 102 और 103

ओवैसी के खिलाफ वकील हरी शंकर जैन ने शिकायत की है (चित्र साभार : Asaduddin Owaisi - The Imperator/FB & NBT)
भारत का मुसलमान कट्टरपंथियों और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स के मकड़जाल से कब निकलेगा? इन लोगों की वजह से भारत ही नहीं, बल्कि मुस्लिम देशों में भी भारतीय मुसलमानों की कितनी बेइज्जती हो रही है, जिसे मुसलमान नहीं समझ रहा। जब मुसलमान कहता है कि 'हम अल्लाह के अलावा किसी से डरते', अगर उनकी इस बात में दम है तो इन लोगों से पूछो कि 'जब कोई मुस्लिम देश फिलिस्तीनों और रोहिंग्यों को अपने मुल्क में आबाद करने को तैयार नहीं, फिर तुम क्यों इन्हे भारत में आबाद करने हमें भड़काते हो?' जिस दिन मुसलमान इस सच्चाई को जान जाएगा, इनकी दुकानें ही बंद हो जाएंगी। कोई दंगा-फसाद नहीं होगा। देश में शांति ही नहीं मुस्लिम देशों तक में इज्जत होगी। 

मालूम हो, कुछ वर्ष पहले फिलिस्तीन और इजराइल के बीच हो रही लड़ाई में पाकिस्तान ने लगभग 33,000 फिलिस्तीनो को तत्कालीन राष्ट्रपति जिया-उल-हक़ ने पनाह दे दी थी, लेकिन युद्ध ख़त्म होने के बाद वापस नहीं जाने पर जिया ने फिलिस्तीनियों पर गोली चलवा दी थी। 

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के लोकसभा में शपथ लेने के बाद जय फिलिस्तीन का नारा लगाने के मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत की गई है। दूसरे राष्ट्र के प्रति आस्था दिखाने के कारण उनकी संसद की सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है। उनके जय फिलिस्तीन बोलने को भी लोकसभा की कार्रवाई के रिकॉर्ड से बाहर कर दिया गया है। जय फिलिस्तीन को लोक सभा कार्यवाही से बाहर निकालना ही नहीं, सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। 

वकील हरी शंकर जैन ने असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ इस मामले में राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत शिकायत की है। उनके बेटे विष्णु शंकर जैन ने यह जानकारी एक्स (ट्विटर) के जरिए दी है। उन्होंने बताया है कि हरी शंकर जैन ने ओवैसी की सदस्यता संसद सदस्य के रूप में खत्म करने की माँग की है। ऐसी ही एक शिकायत एक और वकील विभोर आनंद ने भी लोकसभा सचिवालय से की है।

क्या कहता है अनुच्छेद 102 और 103

संविधान के अनुच्छेद 102 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है। इसके अलावा उसे इस आधार पर भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि वह दूसरे राष्ट्र के प्रति श्रृद्धा रखता है।
                                   अनुच्छेद 102, जिसके तहत संसद सदस्य अयोग्य घोषित हो सकते हैं
वहीं संविधान का अनुच्छेद 103, अनुच्छेद 102 के तहत किसी संसद सदस्य को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर फैसला सम्बन्धी शक्तियाँ देश के राष्ट्रपति को देता है। इसमें कहा गया है कि यदि अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता का मामला उठता है इस मामले में इसे राष्ट्रपति को भेजा जाना चाहिए और उसका ही निर्णय अंतिम होगा। इसी अनुच्छेद में कहा गया है कि अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह लेगा और उसी के अनुसार निर्णय लेगा।
                                        संसद सदस्यों के संबंध में राष्ट्रपति की शक्तियाँ

ओवैसी ने ‘जय फिलिस्तीन’ के लगाए थे नारे

हैदराबाद से सांसद चुने गए असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (26 जून, 2024) को लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद जय फिलिस्तीन के नारे लगाए। उन्होंने अपनी शपथ उर्दू में ली। उर्दू में शपथ लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने अंत में ‘जय भीम, जय मीम’ कहा और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया, लेकिन अंत में उन्होंने ‘जय फिलिस्तीन’ भी कहा। इस दौरान पूर्वी चम्पारण से भाजपा के सांसद राधामोहन सिंह पीठासीन थे और नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे थे। 
जब असदुद्दीन ओवैसी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये संविधान के खिलाफ कैसे हुआ, ये संविधान के कौन से प्रावधान के हिसाब से गलत है? G किशन रेड्डी के विरोध पर उन्होंने कहा कि उनका काम है विरोध करना, हम उन्हें खुश करने के लिए क्यों बोलेंगे। उन्होंने इस दौरान फिलिस्तीन को लेकर महात्मा गाँधी के विचार पढ़ने की सलाह भी दी।
जहाँ तक महात्मा गाँधी के विचार की बात है तो महात्मा गाँधी 'जय सीता राम' बोलते थे, क्यों नहीं बोलते। दूसरे, जो कहता है कि 'मेरी गर्दन पर छुरी भी रख दोगे तो 'भारत माता की जय' नहीं बोलूंगा। फिर किसके दबाव में ‘जय फिलिस्तीन’ बोला?
असद्द्दीन ओवैसी के शपथ के बाद जय फिलिस्तीन का नारा लगाने के मामले में संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, “हमारी फिलिस्तीन या अन्य किसी राष्ट्र के साथ कोई दुश्मनी नहीं है। संसद सदस्यों का शपथ लेने के बाद दूसरे देश के समर्थन में नारे लगाना सही है या नहीं, हमें इसके लिए नियमों को देखना होगा।” विरोध के बाद के ओवैसी के जय फिलिस्तीन बोलने को लोकसभा की कार्रवाई के रिकॉर्ड से निकाल दिया गया है।
वहीं दूसरी तरफ ओवैसी के खिलाफ शिकायत करने वाले और उनका विरोध करने वालों ने तर्क दिया है कि उन्होंने जय फिलिस्तीन का नारा लगाया है जो कि उनकी दूसरे देश के प्रति श्रृद्धा दिखाता है, ऐसे में उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

हैदराबाद : क्या ‘सालार के बेटे’ के खिलाफ चुनाव भी नहीं लड़ सकती एक हिंदू बेटी? AIMIM समर्थक भीड़ ने माधवी लता को दी 'चल निकल, माँ की $# तेरी’, देखती रही पुलिस

माधवी लता को गंदी गालियाँ देता शख्स

लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण में सोमवार (13 मई, 2024) को 96 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें से एक हैदराबाद भी था। तेलंगाना की राजधानी को AIMIM का गढ़ माना जाता है, जहा पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार का कब्ज़ा है। इस बार असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भाजपा ने कोम्पेल्ला माधवी लता को उतारा है। उनका आरोप है कि बड़ी मात्रा में फर्जी मतदान हुआ है और पुलिस ने बुर्कानशीं महिलाओं की फोटो उनके पहचान-पत्र से मिलान नहीं किया।

अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें AIMIM समर्थक भीड़ जुटा कर माधवी लता को गाली देते हुए दिख रहे हैं। एक शख्स ‘चल निकल, माँ की $# तेरी’ चीख रहा है। उक्त शख्स ने नीले रंग की शर्ट पहन रखी है और ब्लैक गॉगल्स लगा रखा है। इस दौरान माधवी लता वहाँ शांत खड़ी रहीं और उन्होंने पलट कर जवाब भी नहीं दिया। बड़ी बात ये है कि ये सब हैदराबाद पुलिस के सामने हुआ। पुलिसकर्मियों ने गंदी-गंदी गालियाँ देने वाले उस व्यक्ति को गिरफ्तार भी नहीं किया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस उसे समझा रही है और पीछे जाने को कह रही है, लेकिन वो लगातार माँ की गालियाँ देते हुए चीख रहा है। माधवी लता उस दौरान फोन पर किसी से बात कर रही थीं, उन्हें उनके सुरक्षाकर्मियों ने अपने घेरे में ले लिया। वहाँ इकट्ठी भीड़ उन्हें वहाँ से निकलने को कह रही थी। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद भीड़ वहाँ से तितर-बितर नहीं हुई। बता दें कि पोलिंग बूथ पर बुर्कानशीं महिलाओं का चेहरा उनके पहचान-पत्र से मिलाने को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी

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माधवी लता ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या ऐसी गालियाँ दिए जाने से वो डर जाएँगी? उन्होंने कहा कि वो भी इस पाता बस्ती की गलियों में खेलते हुए बड़ी हुई हैं। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि एक महिला वहाँ लड़ने आ गई और जनता को भी पसंद आ गई, इससे विरोधी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि विपक्ष का हर चमचा रो रहा है। माधवी लता अपने हिन्दुवत्ववादी चेहरे के लिए जानी जाती हैं और राष्ट्रीय मीडिया में भी उन्हें अच्छी कवरेज मिली है।

बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाई अकबरुद्दीन को ‘सालार का बेटा’ बताया था। वो अकबरुद्दीन ही है, जिसने 15 मिनट के लिए पुलिस हटा देने के बाद अंजाम देखने की धमकी हिन्दुओं को दी थी। बता दें कि ओवैसी भाइयों के अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन को ‘सालार-ए-मिल्लत’ कहा जाता था, इसका अर्थ है – जननेता। सलाहुद्दीन के अब्बा अब्दुल वहीद ने AIMIM की स्थापना की थी। सलाहुद्दीन ने 4 दशक के अपने राजनीतिक करियर में अखंड आंध्र प्रदेश के मुस्लिम वोटरों को अपने साथ रखा, अपने मनमुताबिक पाले में उन्हें झुकाया।


‘हैदराबाद में 90% बूथों पर गड़बड़ी, मरे हुए लोगों के भी डले वोट’: माधवी लता ने बताया क्यों बुर्का वालियों की उन्हें खुद करनी पड़ी पहचान

भाजपा प्रत्याशी कोम्पेल्ला माधवी लता का मतदान में गड़बड़ी का आरोप
लोक सभा चुनाव 2024 के चौथे चरण के लिए सोमवार (13 मई, 2024) को जिन 96 सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें एक हाईप्रोफाइल सीट हैदराबाद भी है। तेलंगाना के हैदराबाद में मुख्य मुकाबला AIMIM के बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा की कोम्पेल्ला माधवी लता के बीच है। माधवी लता उस क्षेत्र में लंबे समय से समाजसेवा का कार्य करती आ रही हैं, वहीं ये सीट पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार के कब्जे में है। अब मतदान के दिन ही माधवी लता के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई है।

असल में माधवी लता को कई मतदान केंद्रों पर बुर्कानशीं महिलाओं के चेहरे और उनके वोटर आईडी कार्ड में दर्ज तस्वीर का मिलान करते हुए देखा गया। माधवी लता पहले से ही आरोप लगाती रही हैं कि हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी लाखों फर्जी मतों के दम पर जीतते हैं और बुर्के में महिलाओं को फर्जी मतदान के लिए लाया जाता है। इस दौरान माधवी लता ने इन महिलाओं को बुर्का हटाने के लिए कहा। ‘ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ के कमिश्नर के आदेश पर ये FIR दर्ज की गई है।

कमिश्नर रोनाल्ड रोज को ही चुनाव आयोग ने हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र के लिए रिटर्निंग ऑफिसर भी बनाया है। मालकपट पुलिस थाने में माधवी लता के विरुद्ध IPC की धारा-171C (मताधिकार के प्रयोग की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना), 186 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बाधा डालना) और 505(1)(c) (किसी वर्ग को भड़काने के लिए बयान देना) के तहत FIR दर्ज हुई है। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-132 भी लगाई गई है।

माधवी लता ने आरोप लगाया है कि कई मतदाताओं के नाम वोटर्स लिस्ट में से डिलीट भी कर दिए गए हैं। सफाई में माधवी लता ने कहा है कि वो एक उम्मीदवार हैं और उन्हें मतदाताओं की पहचान की पुष्टि करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि वो खुद एक महिला हैं, ऐसे में वो दूसरी महिलाओं का सम्मान करती हैं। बकौल माधवी लता, उन्होंने सिर्फ बुर्कानशीं महिलाओं से निवेदन किया था कि वो अपनी पहचान बताएँ। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि जिनकी गड़बड़ियाँ उजागर हो रही हैं वो हो-हल्ला कर रहे हैं।

उन्होंने कई मतदान केंद्रों पर बड़े स्तर पर बोगस वोटिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिनलोगों की मौत हो गई है उनके नाम पर भी वोट डाले गए हैं। आज़मपुरा और गोशमहल में गड़बड़ियों को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत देने की बात भी कही है। माधवी लता ने कहा कि 90% बूथों पर गड़बड़ियाँ हो रही हैं, महिला कॉन्स्टेबलों को बुर्कानशीं महिलाओं के चेहरे का उनके पहचान-पत्र से मिलान करने को नहीं कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को शिकायत करने पर वो कह रहे हैं कि ये उनकी जिम्मेदारी नहीं है।


‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ के नारे लगा वोट माँग रहे ओवैसी; बाबरी के नाम पर कहाँ से आया पैसा? मिली जमीन पर मस्जिद क्यों नहीं बन पायी? मुकदमेबाज़ी के लिए कौन दे रहा जकात?

आज मुसलमानों में एक बहस छिड़ी हुई है कि बाबरी और अन्य विवादित मस्जिदों की पैरवी के लिए कहाँ से आया पैसा? कितना आया और कितना खर्च हुआ? हिसाब दो। क्या हेराफेरी से मुसलमानों का ध्यान भटकाने के लिए शोर मचा रहे हो? सिरफिरे कट्टरपंथी मुसलमानों को बाबरी के नाम पर कब तक गुमराह कर उनकी लाशों पर बैठ मालपुए खाते रहेंगे? मुसलमानों इन सिरफिरे नेताओं से पूछो मस्जिद के नाम पर मिली जमीन पर इतने सालों में मस्जिद क्यों नहीं बन पायी, जबकि अयोध्या में हिन्दुओं ने तो मंदिर भी बना लिया? मुकदमेबाज़ी में करोड़ों रूपया पानी की तरह बहा दिया, लेकिन मस्जिद बनाने के लिए पैसा नहीं? मुकदमेबाज़ी के लिए वकीलों की फ़ौज के लिए कहां-कहां से भीख आयी? मंदिर के दान में तथाकथित घोटाले पर शोर मचाकर हिन्दुओं को बाँटने का काम करने से पहले बताओं मस्जिद के नाम पर तुम लोगों ने कितना घोटाला किया है? हिसाब दो। 

AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी अपनी सभाओं में ‘बाबरी मस्जिद’ के समर्थन में जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। वह अपनी सभाओं में इन नारों के जरिए वोट माँग रहे हैं। उनका यह करने का वीडियो भी वायरल हो रहा है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

AIMIM मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपने प्रत्याशी इम्तियाज जलील के समर्थन में सोमवार (6 मई, 2024) को एक जनसभा को संबोधित किया जहाँ उन्होंने ‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ के नारे लगाए। ओवैसी ने कहा कि 6 दिसम्बर, 1992 को गुनाह किया था। इसके बाद उन्होंने संसद में बाबरी के लिए लगाए गए नारों की याद दिलाई। 

ओवैसी ने इस जनसभा में कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव) पर हमला भी बोला। उन्होंने पूछा कि विपक्षी INDI गठबंधन ने 48 सीटों में से किसी भी सीट पर किसी मुस्लिम को टिकट क्यों नहीं दिया। उन्होंने उद्धव ठाकरे को नया-नया सेक्युलर बताया। उन्होंने कहा कि जिस दिन उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी, वह सब भूल जाएँगे।

मोदी ने बीड में कॉन्ग्रेस पर किया हमला

मोदी ने मंगलवार (7 मई, 2024) को महाराष्ट्र के बीड में एक जनसभा को संबोधित किया। मुंडे परिवार के राजनीतिक प्रभाव वाली इस सीट पर उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे को याद किया। उन्होंने इस रैली में कॉन्ग्रेस पर हमला भी किया।
उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस वर्तमान में तुष्टिकरण की राजनीती कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आने पर राम मंदिर को कैंसल करवा देगी, यह कॉन्ग्रेस में ही लम्बे समय तक रहे एक नेता ने कहा है। उन्होंने यहाँ आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान लोगों को बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने का मन बना चुके हैं।
मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन के नेता अन्य किसी धर्म को लेकर कुछ नहीं बोलते लेकिन वोटों के लिए प्रभु राम का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन के लोग वोट जिहाद की अपील कर रहे हैं। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस 26/11 के आतंकियों के साथ रिश्तेदारी निभा रही है।
पीएम मोदी ने यहाँ मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस बात का पुरजोर विरोध किया था कि देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा, लेकिन कॉन्ग्रेस दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीन कर एक धर्म के लोगों को देना चाहती है। पीएम मोदी ने कर्नाटक में मुस्लिमों को दिए गए आरक्षण का उदाहरण इस जनसभा में दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर राज्य में यही काम करना चाहता है।
मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन पूरा आरक्षण मुस्लिमों को देना चाहते हैं, यह खतरे की घंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक मोदी ज़िंदा है तब कोई भी ताकत दलितों और पिछड़ों का आरक्षण नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नकली वीडियो बना रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस को काम रोकने वाला बताया।

तेलंगाना : हैदराबाद BJP प्रत्याशी माधवी लता को गले लगाने वाली ASI उमा देवी निलंबित

                                    ASI उमा देवी और भाजपा प्रत्याशी माधवी लता
हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के. श्रीनिवास रेड्डी ने भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी के. माधवी लता को गले लगाने वाली ASI को निलंबित कर दिया है। निलंबित की गई ASI सैदाबाद में तैनात थी और उनका नाम उमा देवी है। माधवी लता हैदराबाद लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। उमा देवी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह माधवी लता से हाथ मिलाते और गले लगते हुए दिख रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर ने इसका संज्ञान लिया है। पुलिस कमिश्नर ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए उन पर कार्रवाई की और उन्हें निलंबित कर दिया। दरअसल, माधवी लता सैदाबाद थाने की सीमा में चुनाव प्रचार कर रही थीं, तब उमा देवी वर्दी में ड्यूटी पर थीं। इसी दौरान उन्होंने भाजपा उम्मीदवार से मुलाकात की थी।

दरअसल, हैदराबाद के वर्तमान सांसद असदुद्दीन ओवैसी के समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने हैदराबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी इसमें टैग करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के जाँच के जाँच के आदेश दिए और आखिर में उन्हें निलंबित कर दिया।

वास्तव में असदुद्दीन को ऐसे ही विरोधी उम्मीदवार चाहिए जो इसे ईंट का जवाब पत्थर से देने की हिम्मत रखता हो। अगर हैदराबाद के उन मुस्लिम मतदातों ने माधवी को वोट नहीं दिया, जिनके लिए लगभग 8 सालों से काम कर रही थी, माधवी को चिन्ता नहीं करनी चाहिए। असदुद्दीन के गढ़ में सेंध लगा कर अगला चुनाव उतना ही सुगम कर दिया है। दरअसल, इन ओवैसी भाइयों को बीजेपी से ऐसे ही fire brand चाहिए, जो इनकी चुलें हिला दे। माधवी ने तीर छोड़ा कहाँ, और लगा कहां? तेलंगाना को माधवी और राजा सिंह जैसे 2/4 fire brand मिलने पर तेलंगाना में बीजेपी को मात देने वाला नहीं होगा।   

माधवी लता ने पिछले सप्ताह रामनवमी पर निकाले गए जुलूस में शामिल हुई थीं। इस दौरान उन्होंने सांकेतिक रूप से धनुष पर बाण रखकर छोड़ा था। जिस तरफ वह ऐसा कर रही थीं, उसी तरफ एक मस्जिद था। इसको लेकर विपक्षियों ने हंगामा कर दिया कि उन्होंने मस्जिद पर बाण चलाई है। शेख इमरान नाम के एक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत भी दी।

पुलिस ने माधवी लता के खिलाफ अपने भड़काऊ हाव-भाव से एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया है। यह मामला बेगम बाजार थाने में दर्ज किया गया है। उन पर धारा 295A (जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण कार्यों से किसी धर्म के विश्वासों का अपमान कर भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, माधवी लता का यहाँ मुकाबला AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से है। ओवैसी साल 2004 से यानी लगातार चार बार से यहाँ से सांसद हैं। पाँचवीं बार के लिए भी उन्होंने नामांकन करा लिया है। इसके पहले उनके अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी साल 1984 से 1999 तक यहाँ से सांसद रहे। इसके पहले वे यहाँ से विधायक थे।

हैदराबाद : ‘रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद’ ‘काटते रहो’: असदुद्दीन ओवैसी का वीडियो वायरल; दलित हिन्दुओं आंखे खोलो, और ओवैसी से पूछो : "क्या हिन्दू दलित बीफ खाता है?"

'रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद' कहकर वोट माँगते दिखे ओवैसी (फोटो साभार : X_SVishnuReddy)
हैदराबाद वाकई hot Lok Sabha सीट बन गयी है। तेलंगाना में हैदराबाद लोक सभा सीट का परिणाम चाहे कुछ भी हो, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी उम्मीदवार माधवी लता के प्रचार और ओवैसी पर नितरोज हमलों से अपना दिमागी संतुलन खोते जा रहे हैं। अगर ओवैसी जीत भी जाता है, तो इसने अपनी जीत का आधार भी बौखलाहट में बता दिया है, और इस गंभीर बात पर केंद्र में मोदी सरकार द्वारा वापस आने पर हैदराबाद में रह रहे रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को देश से निकालना होगा। जो शायद इन दोनों भाइयों को वोट देकर इनको जितवाते हैं। लता जो लगभग 8 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही है, उनको भी और अधिक सक्रिय होकर उन अधिकारियों और नेताओं पर कार्यवाही करवाने के लिए संघर्ष करने होगा, जिन्होंने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को सरकारी सुविधाएं दिलवाने में मदद की। 
ये दोनों ओवैसी भाई मुस्लिम क्षेत्रों में मुसलमानों को भड़काने और हिन्दू क्षेत्रों में दलित कार्ड खेल हिन्दुओं को विभाजित करने की गन्दी सियासत करते हैं। उम्मीदवार लता, गोशामहल से विधायक टी राजा सिंह और केंद्रीय गृह मंत्रालय को ओवैसी द्वारा बौखलाहट में दिए जा बयानों का संज्ञान लेना होगा। यदि हैदराबाद ही नहीं तेलंगाना राज्य से रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को खदेड़ने में राज्य और केंद्र सरकारें सफल होती है, तुष्टिकरण पर जबरदस्त प्रहार होगा।   
दूसरे, जब छद्दम सेक्युलरिस्ट्स हिन्दुओं को विभाजित कर रहे हैं, फिर सेक्युलरिस्ट्स ईसाई और मुस्लिम समाज में जाति भेदभाव को क्यों नहीं उछालते? क्यों एक जाति का ईसाई दूसरी जाति के चर्च और कब्रिस्तान में क्यों नहीं जा सकता? ठीक यही स्थिति मुस्लिम समाज में। हिन्दुओं जागो और इन तुष्टिकरण करने वालों को इन्हीं की भाषा में जवाब दो। सनातन को अपमानित करने और 'सर तन से जुदा' के लिए उकसाने वालों के विरुद्ध भी सड़क पर आना होगा।

 

 

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक मीट शॉप पर पहुँचते हैं और ‘रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद’ कहते हैं। इस वीडियो में वो माँस काटने वाले लोगों के साथ हाथ मिलाते हैं और फिर कहते हैं ‘काट ते रहो।’ ये वीडियो असदुद्दीन ओवैसी के चुनाव प्रचार के दौरान का है, जब वो हैदराबाद के अंदरुनी इलाकों में पैदल ही चुनाव प्रचार कर रहे थे और लोगों से मिल रहे थे। उनका ये वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी ने उन पर हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति का यही स्टाइल है। 

ओवैसी का ‘काट ते रहो’ वीडियो वायरल

असदुद्दीन ओवैसी वायरल हो रहे वीडियो में कहते दिख रहे हैं, “रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद, खैरियत है भाई? सलाम अलैकुम। काटते रहो।”
इस वीडियो को शेयर करते हुए विष्णु वर्धन रेड्डी नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी द्वारा विभाजनकारी बयानबाजी का एक खतरनाक पैटर्न सामने आया है। वो बेशर्मी से हिंदू भावनाओं को भड़काने और अपमानित करने वाले शब्दों और भाषा का इस्तेमाल करता है। इस वीडियों में वो ‘रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद’ बोल कर बीफ का समर्थन कर रहा है और हिंसा की वकालत कर रहा है। इस तरह की जानबूझकर की गई हरकतें केवल नफरत को बढ़ावा देती हैं और हमारे समाज में खाईं को बढ़ाती हैं।”
इस वीडियो को शेयर करते हुए शीतल कुमार नेहरा ने लिखा, “रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद. देखें-कैसे ओवैसी जानबूझकर हिंदुओं का मजाक उड़ा रहा है।”
इस घटना को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ओवैसी पर तंज कसा है। निर्मला सीतारमण ने अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “असदुद्दीन ओवैसी अभद्र राजनीतिक बयान देते हैं। उनके ऐसे बयानों से मुझे आश्चर्य नहीं होता। सांसद असदुद्दीन ओवैसी और विधायक व उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ऐसे ही एक्सट्रीम बयान देने में माहिर हैं। इसलिए मुझे ऐसे बयान पर आश्चर्य नहीं होता।”

बीफ के नाम पर पहले भी वोट माँग चुके हैं ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी पहले भी बीफ के नाम पर वोट माँग चुके हैं। साल 2016 में उन्होंने कहा था, “अगर ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसपल कॉरपोरेशन के आगामी चुनावों में एमआइएम हारी तो इस शहर में बीफ खाने और उसकी बिक्री पर पाबंदी लग जाएगी।”
तेलंगाना की हैदराबाद लोकसभा सीट से 4 बार के सांसद असदुद्दीन ओवैसी चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने बीजेपी ने सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदू शेरनी के तौर पर पहचान रखने वालीं माधवी लता को टिकट दिया है। इन दोनों नेताओं के बीच लगातार जुबानी जंग छिड़ी हुई है। तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों पर 13 मई को चौथे चरण में वोटिंग होनी है।

 


‘दुनिया में रहेंगे तो गाज़ी की तरह…’: जानें इस्लामी किताबों में क्या है इसका अर्थ, क्या काफिरों के कत्लेआम के लिए भड़का रहे हैं ओवैसी?

कालचक्र इतनी तेजी से बदल रहा है, जिसकी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स कल्पना नहीं कर सकते। मोदी-योगी विरोध में संविधान और सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दुओं से छल-कपट करने वाले सामने आने शुरू हो चुके हैं। निम्न लेख उसी पर रौशनी डाल रहा है। 

हिन्दुओं और शांतिप्रिय मुसलमानों को आंखे और दिमाग को खोल उन सभी नेताओं और उनकी पार्टियों का सामाजिक बहिष्कार करों जिन्होंने गाज़ियों को महान मुग़ल बादशाह बता कर देश को गुमराह किया। 

इन्ही जैसे तथाकथित जनहितैषी नेताओं की वजह से ही देश में दंगे होते हैं, जिनमे बेगुनाह -चाहे वह हिन्दू है या मुसलमान- लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। ये ओवैसी जब मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बोलता है ऐसी ही भाषा बोलता है और जब हिन्दू क्षेत्रों में बोलता है हिन्दुओं को विभाजित करने दलितों का मसीहा बनकर बोलता है। 
असदुद्दीन ओवैसी ने कोई हैरान करने वाली बात नहीं की, बल्कि सच्चाई को कबूला है। इस्लाम की वास्तविकता जानने के लिए अनवर शेख को पढ़ना चाहिए, नूपुर शर्मा विवाद के दिनों के Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation पर 'इस्लाम क्या कहता है' एपिसोड देखने चाहिए जिस पर एक्स-मुस्लिमों के तीखे सवालों ने 
वातानुकूलित कमरों में बैठे होने के बावजूद बड़े-बड़े मौलानाओं और मौलवियों को पसीना पोंछते देखा जा सकता। 
देखिए कुछ वीडियो, जो ओवैसी जैसे गाज़ी सोंच वालो को बेनकाब कर रही है। ये तो केवल मुस्लिम के हैं, हिन्दुओं के नहीं। महाराज देवकी नंदन ठाकुर ने भी इन कट्टरपंथियों को चारों खाने चित किया हुआ है।  
  

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने रविवार (7 अप्रैल 2024) को पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का एक छोटा वीडियो एक्स पर पोस्ट किया। इस वीडियो में ओवैसी लोगों को संबोधित कर रहे हैं, जिसमें ओवैसी कह रहे हैं कि वो ‘गाजी’ के रूप में जीना या मरना पसंद करते हैं। उन्होंने अपने साथी मुस्लिमों से भी गाजी के तौर पर जीने-मरने की बात कही। बता दें कि गौरतलब है कि इस्लामिक पुस्तकों में गाजी का मतलब अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने वाला इस्लामिक लड़ाका होता है। एक गाजी काफिरों (मतलब इस्लाम को न मानने वालों) के खिलाफ लड़ता है। वह या तो काफिरों और अनेकेश्वरवादियों को मार डालता है या लड़ाई में मारा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि असदुद्दीन ओवैसी भारत में मुस्लिमों से आख़िर क्या करने को कह रहे हैं?

इस वीडियो में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ”तुम हमको मारना चाहते हो तो मारो प्यारे, कौन रोक रहा है तुमको? मेरी जिंदगी अल्लाह ने लिख दी, जब मैं अपनी माँ के पेट में था। मेरी जिल्लत, मेरी इज्जत सबकुछ अल्लाह लिख चुका है। तुम क्या लोगे मुझसे? अरे याद रखो, दुनिया में रहेंगे तो गाजियों की तरह रहेंगे, या फिर मौत आएगी तो शहादत को पसंद करेंगे। हम अपने माता-पिता को शर्मिंदा नहीं होने देंगे, इंशाल्लाह!”

गाजी का क्या मतलब होता है?

सबसे पहले तो ये समझने की जरूरत है कि गाजी का मतलब आखिर क्या होता है? गाजी शब्द की पैदाइश अरबी भाषा में हुई, जिसमें ग़ज़व का अर्थ लड़ाई है। गाज़ी का अर्थ है लड़ने वाला, या योद्धा। इस्लामी संदर्भ में गाज़ी शब्द स्पेशल माना जाना है। इस्लाम में गाज़ी का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम और उसकी शिक्षाओं के लिए जिहाद में लड़ता है। जिहाद का मूल मतलब काफिरों और गैर-इस्लामियों या इस्लाम त्यागने वालों के खिलाफ धर्म की लड़ाई है। यह हर किसी और हर उस चीज़ के खिलाफ लड़ाई है जो इस्लाम में विश्वास नहीं करता है। इस प्रकार गाजी का मतलब अनिवार्य रूप से एक जिहादी है जो गैर-मुस्लिमों के खिलाफ लड़ने को तैयार है। इस युद्ध में वह या तो मरने या दूसरों को मारने के लिए तैयार रहता है।
सुन्नन अन-नसाई 2625 (पुस्तक 24, हदीस 7) के अनुसार, गाजी अल्लाह के तीन सबसे प्रिय मेहमानों में से एक हैं। इस्लामिक धर्मग्रंथों की एक वेबसाइट पर इस हदीस की व्याख्या में कहा गया है, “अबू हुरैरा द्वारा सुनाई गई हदीस के अनुसार, अल्लाह के दूत ने तीन प्रकार के लोगों का उल्लेख किया है जिन्हें अल्लाह का मेहमान माना जाता है। इनमें एक गाजी, एक हज यात्री और एक मुतामिर शामिल हैं। गाज़ी वह है जो इस्लाम और उसकी शिक्षाओं के लिए जिहाद में लड़ता है। हज यात्री वह व्यक्ति होता है जो अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार मक्का की तीर्थयात्रा करता है यदि उसके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। अंत में, मुतामिर वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान प्राप्त करने या अल्सेलाह से ईनाम पाने करने के लिए व्यापार या शिक्षा जैसे किसी भी उद्देश्य के लिए यात्रा करता है। इन तीनों को अल्लाह का अतिथि माना जाता है और उसके लिए किए गए कामों या प्रयासों के हिसाब से उन्हें ईनाम भी दिया जाता है।

एक गाजी की मदद करना भी गाजी होने के बराबर

इस्लामी किताबों में सिर्फ गाजी को ही सम्मान नहीं मिला, बल्कि उन लोगों को भी सम्मान मिलता है, जो गाजी की मदद करता है। या फिर गाजी के परिवार के सदस्यों की मदद करता है या देखरेख की जिम्मेदारी लेता है। साहिह अल-बुखारी 2843  ( किताब 56, हदीस 59) ने इसे विस्तार से बताया है। यह उन लोगों के लिए इनाम की बात करता है, जो गाजी के बच्चों या परिवार की देखभाल करते हैं और उनकी मदद करते हैं या फिर गाजियों को इस्लाम के लिए लड़ने के लिए तैयार करते हैं। इस हदीस के अनुसार , पैगंबर मुहम्मद ने कहा, “जो अल्लाह के रास्ते पर जाने के लिए एक गाजी को तैयार करता है, उसे एक गाजी के बराबर इनाम दिया जाता है। और जो अल्लाह की राह में जाने वाले गाजी के परिजनों की ठीक से देखभाल करता है, उसे भी गाजी के बराबर इनाम दिया जाता है।
इसके अलावा, रियाद अस-सलीहिन (किताब 11 हदीस 22) के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद ने कहा था, “वह जो अल्लाह के रास्ते में एक गाजी (लड़ाकू) को तैयार करता है, ऐसा लगता है जैसे उसने खुद लड़ाई में भाग लिया हो; और जो गाज़ी की अनुपस्थिति में उसके आश्रितों की देखभाल करता है, वह मानो स्वयं लड़ाई में भाग लेता है।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘हम गाजियों की तरह जिएँगे’

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘हम (खुद और अन्य मुस्लिम जिनका वह दावा करते हैं कि वह प्रतिनिधित्व करते हैं) गाजियों की तरह रहेंगे।’ एआईएमआईएम प्रमुख के इस भाषण के बाद स्वाभाविक रूप से उठने वाले सवालों को इस्लामिक धर्मग्रंथ में इस शब्द के स्पष्ट अर्थ और संदर्भ को देखते हुए हेरफेर करना आसान नहीं है। क्या ओवेसी का मतलब यह है कि वह और भारत में जिन मुस्लिमों का वह नेतृत्व करने का दावा करते हैं, वे देश में गैर-मुस्लिमों के खिलाफ लड़ाई कर रहे हैं? क्या इसका मतलब यह है कि गाजी बनकर ओवैसी और उसके साथी गैर-मुस्लिमों, काफिरों, इस्लाम त्यागने वालों को मारना चाहते हैं या ऐसी उनपर हुक्म करने की इच्छा रखते हैं?
असदुद्दीन ओवैसी ने बलिदान और मौत को वरीयता देने की बात कही है, जैसे ही वो गाजी शब्द पर आए, वैसे ही ‘मैं’ की जगह ‘हम’ कहने लगे। इसका मतलब साफ है कि वो अन्य मुस्लिमों को भी गाजी बनने के लिए उकसा रहा है। ऐतिहासिक रूप से, मुहम्मद बिन कासिम, गजनी के महमूद, मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, बाबर, औरंगजेब आदि इस्लामी अत्याचारियों को इस्लामिक हलकों में गाज़ियों के रूप में पहचाना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने भारत पर हमला किया, जोकि अनेकेश्वरवादियों और गैर-मुस्लिमों का देश है। उन्होंने यहाँ रहने वाले लोगों को लूटा और मार डाला, क्योंकि वे गैर-मुस्लिम थे। इस तरह से वे ग़ाज़ी कहलाने के योग्य हो गए। खुद को और अपने साथियों को ग़ाज़ी कहकर, असदुद्दीन ओवेसी यकीनन खुद को और उन्हें मानने वालों को इन गाजियों से जोड़ रहे हैं।

क्या इस क्लिप को पोस्ट करने के समय में कोई संदेश छिपा है?

AIMIM ने यह वीडियो क्लिप 7 अप्रैल को पोस्ट किया – हिंदू नव वर्ष से ठीक दो दिन पहले, जो 9 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा के साथ शुरू हुआ था। 17 अप्रैल को, देश राम नवमी मनाएगा – हिंदू देवता भगवान राम का जन्म उत्सव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में उनके जन्मस्थान पर बने भव्य मंदिर में भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली राम नवमी होगी।
पिछले कुछ सालों में देश के विभिन्न हिस्सों में रामनवमी जुलूसों और शोभा यात्राओं पर हमले हुए हैं। खास तौर पर 2022 और 2023 में, भारत में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शांतिपूर्ण जुलूसों पर पथराव और हमले किए। इसके बाद कानूनी कार्रवाई में जब दंगाइयों के घरों को जमींदोज किया गया, तो ये खुद को पीड़ित दिखाने लगे। और अब रामनवमी से कुछ ही दिन पहले ओवैसी ने गाजियों वाली अपील की है।
इस साल 2024 की रामनवरी 17 अप्रैल को है, जो लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार का आखिरी दिन है। 19 अप्रैल को देश के 21 राज्यों के 102 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। अब तक के चुनाव प्रचार में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपने विरोधियों पर भारी पड़ती दिख रही है। बीजेपी उम्मीदवार और हिंदू शेरनी माधवी लता हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी को चुनौती दे रही हैं और ओवैसी पर भारी पड़ती दिख रही हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और एनडीए अजेय दिख रहे हैं, तो दूसरी तरफ हताश हो चुके विपक्ष को ये तक नहीं समझ आ रहा कि वो मोदी का सामना कैसे करें। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ओवैसी के इस वीडियो पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें(साभार)

तेलंगाना : राहुल गाँधी जिसे बताते हैं ‘मोदी का यार’, उस ओवैसी के खिलाफ कैंडिडेट नहीं देगी कांग्रेस

लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस पार्टी हैदराबाद में अपना उम्मीदवार नहीं देगी। यह बात तेलंगाना कांग्रेस के महासचिव ने कही है। उन्होंने कहा है कि वोटों का बँटवारा रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी का समर्थन करेगी।

कांग्रेस के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस सत्ता हथियाने के सनातन को गालियां देने वालों के तलवे तक चाट सकती है। कुछ समय पूर्व संपन्न हुए तेलंगाना विधान सभा चुनावों में एक बात सामने आयी कि बीजेपी को कांग्रेस और AIMIM का सूपड़ा साफ करने के लिए तेलंगाना को योगी आदित्यनाथ और टी राजा सिंह जैसे दबंग हिन्दू नेताओं की जरुरत है। अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा अपने अपने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने पर ईंट का जवाब पत्थर देने पर 'सर तन से जुदा' गैंग के सक्रीय होने पर अगर बीजेपी सिंह के पीछे खड़ी होती तेलंगाना में कांग्रेस सरकार नहीं बनती। ओवैसी जो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मुस्लिम हितों की बात करता है, लेकिन मुस्लिम क्षेत्र से बाहर दलित आदि कार्ड खेलकर हिन्दुओं को विभाजित करने की बात करता है। ये तो मीडिया अपनी TRP के चक्कर में डिबेट्स में उस AIMIM को बुलाते हैं, जिसमे तेलंगाना में अपने उम्मीदवार उतारने की हिम्मत नहीं। यानि क्षेत्रीय पार्टी भी नहीं। तेलंगाना में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद सबसे ज्यादा दबदबा टी राजा सिंह है। 

कांग्रेस नेता फिरोज खान ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब इस बार हैदराबाद लोकसभा सीट से AIMIM के मुखिया की राह मुश्किल बताई जा रही है। बीजेपी ने यहाँ से माधवी लता को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें उनके समर्थक ‘हिंदू शेरनी’ कहते हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि आज ओवैसी के खिलाफ कैंडिडेट नहीं देने की बात करने वाली कांग्रेस उन्हें ‘बीजेपी का बी-टीम’ बताती रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ओवैसी को ‘मोदी का यार’ कहते रहे हैं।

कांग्रेस ने किया ओवैसी को समर्थन देने का ऐलान

टाइम्स नाउ से बातचीत में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और हैदाराबाद लोकसभा सीट से साल 2019 में लोकसभा चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता मोहम्मद फिरोज खान ने इस बात का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “हैदराबाद में दो लोकसभा सीटें हैं, सिकंदराबाद और हैदराबाद लोकसभा। मेरा निर्वाचन क्षेत्र सिकंदराबाद में है, हैदराबाद में नहीं। हैदराबाद में ओवैसी जीतेंगे, क्योंकि AIMIM और कांग्रेस पार्टी के बीच ‘कॉम्प्रोमाइज’ हो गया है, असदुद्दीन निश्चित तौर पर हैदराबाद जीतेंगे।” बता दें कि तेलंगाना में कांग्रेस ने 17 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है, लेकिन हैदराबाद सीट को लेकर चुप्पी साध रखी है।

बीजेपी प्रत्याशी माधवी लता की प्रतिक्रिया

कांग्रेस द्वारा असदुद्दीन ओवैसी को समर्थन देने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए हैदराबाद से बीजेपी उम्मीदवार कोम्पेला माधवी लता ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस AIMIM के साथ गठबंधन, लेकिन दावा यह कि वो बीजेपी की बी टीम है। सीपीआई बंगाल में INDI गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन केरल में नहीं। AAP दिल्ली में गठबंधन है, लेकिन पंजाब में नहीं। कांग्रेस के साथ समस्या यह है कि उसे यह स्पष्ट नहीं है कि क्या करना है। कांग्रेस मुक्त भारत = प्रगति युक्त भारत।”

कांग्रेस के तहसीन पूनावाला ने जताई नाराजगी

हैदराबाद लोकसभा सीट पर असदुद्दीन ओवैसी को समर्थन देने पर कांग्रेस के भीतर ही नाराजगी दिख रही है। महत्वपूर्ण मुद्दों पर कई बार पार्टी से अलग लाइन लेने वाले राजनीतिक विश्लेषक एवं कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अभी तक कांग्रेस पार्टी की तरफ से आधिकारिक बयान नहीं आया है कि वो जनाब असदुद्दीन ओवैसी को हैदराबाद लोकसभा सीट पर ‘फ्री रन’ देगी। हालाँकि कांग्रेस अगर ओवैसी साहब के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला लेती है, तो ये अपराध करने जैसा होगा। ऐसा करना कांग्रेस के लिए बड़ी भूल साबित होगी, जो अंतत: कांग्रेस की ताकत खत्म कर देगी।”
उन्होंने आगे लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता। उनका मिशन है कांग्रेस को बर्बाद करना। उन्होंने हमेशा राहुल गाँधी जी का मजाक उड़ाया है और बेईज्जती की है। अगर कांग्रेस पार्टी ओवैसी को समर्थन देती है, तो मैं इसके बिल्कुल खिलाफ हूँ। अगर कांग्रेस पार्टी नफरत के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है, तो फिर लड़ाई लड़कर ही अंतर पैदा किया जा सकता है। असदुद्दीन ओवैसी और उनकी जहरीली राजनीति वापस लोकसभा में नहीं पहुँचनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी की असदुद्दीन ओवैसी जैसे सांसद को हराना एक जिम्मेदारी भी है।”

राहुल ने ओवैसी को कहा था ‘मोदी का यार’

कुछ माह पहले ही हुए तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। उस चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने असदुद्दीन ओवैसी और तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री केसीआर को पीएम मोदी का यार कहा था। तेलंगाना में केसीआर की बीआरएस और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का गठबंधन है।
हैदराबाद सीट पर असदुद्दीन ओवैसी का सीधा मुकाबला बीजेपी की प्रत्याशी माधवी लता से है। हैदराबाद की हिंदू शेरनी कही जाने वाली माधवी लता पहली बार चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में ये बात उठ रही है कि वो असदुद्दीन ओवैसी पर सीधे मुकाबले में भारी पड़ रही हैं। माधवी लता हैदराबाद की जानी-मानी समाज सेविका हैं और उनके नाम की अब पूरे देश में चर्चा हो रही है। बहरहाल, तेलंगाना कांग्रेस ने ओवैसी के समर्थन की जो घोषणा की है, उस पर अभी कांग्रेस के हाई कमान की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। हैदराबाद लोकसभा सीट पर कांग्रेस अगर ओवैसी को समर्थन देती है, तो इसका असर पूरे देश की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।