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विपक्ष से नहीं पच रहे Exit Poll के आँकड़े, बोले- इंडी गठबंधन जीतेगी 300+ सीट

वर्षो से एक चलन रहा है कि लोक सभा चुनाव संपन्न होने के बाद Exit Poll आने शुरू हो जाते हैं। बरहाल, इन Exit Poll में तीसरी बार नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से मोदी विरोधियों में इतनी बेचैनी हो गयी कि आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती ने तो मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तो 'मै सिर मुंडवा लूंगा' बात बोलने पर केंद्रीय मंत्री बाल्यान ने जवाब में कहा दिया कि बता दें कब करवाना है 'मै नाइ भेज दूंगा'।

साल 2024 लोकसभा चुनावों का मतदान खत्म होने के बाद एक्जिट पोल जारी हो गए हैं। लगभग सभी Exit Poll में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनती दिख रही है। Exit Poll के बाद जहाँ NDA गठबंधन के सभी घटक दलों और उनके समर्थकों में ख़ुशी की लहर है तो वहीं विपक्ष के तमाम नेता इसे पचा नहीं पा रहे हैं। इंडी गठबंधन के तमाम नेताओं के बयान भी सामने आने लगे हैं जिसमें उन्होंने एक्जिट पोल को सिरे से नकार दिया है।

कॉन्ग्रेस नेत्री और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे जनता नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी का एक्जिट पोल करार दे डाला है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन ने इस बार वैज्ञानिक विधि से अनुमान लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि INDI गठबंधन इस बार कम से कम 295 लोकसभा सीटें जीतने जा रहा है। आज जारी हुए एक्जिट पोल को सुप्रिया ने टीवी पर बज रहा झुनझुना बताया है।

पंजाब के कॉन्ग्रेस नेता और गुरुदासपुर से लोकसभा प्रत्याशी सुखजिंदर सिंह रंधवा ने भी इंडी गठबंधन के ही जीतने का दावा किया है। उन्होंने कहा, “एग्जिट पोल कुछ भी हों लेकिन सरकार इंडी गठबंधन की ही बनेगी।”

महाराष्ट्र से कॉन्ग्रेस नेता नाना पटोले का दावा है कि इस बार के चुनावों में इंडी गठबंधन 300 से अधिक सीटें जीतेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव भाजपा और जनता के बीच में था। नाना पटोले ने 4 जून को हर हाल में इंडी गठबंधन की जीत का भरोसा जताया है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल के आंकड़ों से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जनता मुँह मोड़ चुकी है और आने वाले 4 जून को इंडी गठबंधन ही सरकार बनाएगा। NDA को अखिलेश यादव अधिकतम 140 सीटों पर सिमटता हुआ बता रहे हैं। अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल जारी करने वाली मीडिया पर ही आरोप जड़ दिया और कहा कि ये सब अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

1 जून को तमाम मीडिया व सर्वे संस्थानों ने अपने-अपने एक्जिट पोल जारी कर दिए हैं। लगभग सभी संस्थानों के पोल के अनुसार भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में आ रही है। अधिकतर अनुमानों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 350 से अधिक सीटें मिलती दिख रहीं हैं। इंडी गठबंधन को इन सभी आंकड़ों में 150 सीटों के आसपास सिमटता दिखाया गया है।


कागज दिखा कर इस्तीफा माँगने वाले शराब घोटाले के आरोपित तानाशाह अरविंद केजरीवाल ने गिनाए CM पद नहीं छोड़ने के कारण: रंगा सियार कौन?

आरोप लगते ही दूसरे नेताओं के इस्तीफा मांगने वाला दिल्ली शराब घोटाले में तिहाड़ से जमानत पर बाहर आने पर भी अपने आपको ईमानदार बताकर जनता को पागल बनाने का मौका नहीं चूक रहा। माना अभी आरोपित ही है, दोषी नहीं, लेकिन interim bail मिलने का स्पष्ट सबूत है कि कोर्ट भी केजरीवाल को दोषी मान रही है। अब किस दबाव और कारणों से जमानत मिली यह तो गंभीर जाँच का विषय है। क्योकि यदि इसकी गंभीरता से जाँच नहीं हुई, तो वह दिन अधिक दूर नहीं जब हर कोर्ट में खुले आम भ्रष्टाचार फैल जाएगा। 

माना कानून अँधा होता है, सबूत मांगता है। लेकिन कई केस ऐसे भी होते हैं, जो चीख-चीखकर फर्जी केस होने का सबूत दे रहे होते हैं। लेकिन जज केस फाइल को गंभीरता से देखते ही नहीं। और बेकसूर को अपने आपको बेकसूर साबित करने अपनी बचत और समय की बर्बादी करनी पड़ती है। मृतक को पार्टी बना दिया जाता है, जब पहली ही तारीख पर साबित हो जाये कि एक पार्टी मुकदमा दर्ज होने से लगभग दो साल पहले ही स्वर्ग सिधार चुकी है, जबकि केस दर्ज करने वाला अपने आपको उसी मकान में रहने का दावा कर रहा है। जब बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में खड़े होते ही कोर्ट से पूछा कि 'क्या अब मुर्दों को भी समन दिए जाएंगे?' सारी कोर्ट स्तब्ध। केस फाइल करने वाला और वकील एक दूसरे की शक्ल देखते रहे। क्यों नहीं उसी समय झूठा और बेकसूर को डराने और ब्लैकमेल करने के इरादे से दर्ज केस को dismiss किया गया? क्या कोई मृतक जीवित से झगड़ा कर सकता है? क्यों नहीं ऐसे केस फाइल करने वाले को ब्लैकलिस्टेड किया गया? वकील तो His Master's Voice होता है।  

हकीकत में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने की असली वजह है कि 'वह मुख्यमंत्री की हैसियत से सुख-सुविधाएं प्राप्त करना चाहता है। लेकिन केजरीवाल को नहीं मालूम एक दिन वही सुप्रीम कोर्ट ही डांट पिलाकर इस्तीफा देने के लिए बोलेगी। काठ की हांड़ी ज्यादा दिन आग पर नहीं रह सकती। 
शराब घोटाले में अंतरिम जमानत पर बाहर आए आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं छोड़ा। केजरीवाल ने कहा कि वे 50 दिन बाद जेल से लौटे हैं, क्योंकि उन पर बजरंग बली की कृपा है। बजरंग बली ने उन्हें दिल्ली और देश की राजनीति में परिवर्तन लाने के लिए भेजा है। वे तानाशाही से लड़ रहे हैं। जबकि तानाशाह होने का वह खुद वही सबसे बड़ा सबूत है। 

केजरीवाल ने कहा, “कई लोगों का सवाल है कि आखिर केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया? सबसे ज्यादा बीजेपी वाले यह सवाल उठा रहे थे। आज मैं आपको इसके पीछे की सच्चाई बताता हूँ।” उन्होंने कहा कि बीते 75 साल में भारत में कितने ही राज्यों में चुनाव हुए, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि दिल्ली जितनी ऐतिहासिक जीत किसी पार्टी को मिली हो।

राजनीतिक नाटक रचने हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में ऐतिहासिक अंतर से AAP की सरकार की बनी। इतनी भारी बहुमत से जीतने के बाद वह (भाजपा वाले) जानते थे कि केजरीवाल यहाँ से अगले 20 साल तक चुनाव नहीं हार सकता। इसलिए उन्होंने साजिश रची कि झूठे केस में उन्हें फँसा दो। वह खुद जेल चला जाएगा और उसे इस्तीफा देना पड़ेगा। उसके बाद उसकी सरकार चली जाएगी।”

केजरीवाल ने आगे कहा, “मैंने ठान लिया था कि मैं जनतंत्र जेल से चलाकर दिखाऊँगा। सरकार जेल से चलाकर दिखाऊँगा। इसलिए आज अगर मैं जेल से इस्तीफा नहीं दे रहा हूँ तो इसका एक कारण है कि मैं तानाशाह से लड़ रहा हूँ। अगर कल इनकी सरकार बनी तो ये अन्य राज्यों के सीएम को झूठे केस में फँसाकर जेल में डाल देंगे और उनकी सरकार गिरा देंगे। मैं इनकी यह मंशा पूरी नहीं होने दूँगा।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पूरे तन-मन-धन से तानाशाह के खिलाफ लड़ रहे हैं। ये लड़ाई सिर्फ उनके लड़ने से नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए वे लोगों से साथ देने की भीख माँगने बाहर आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने नहीं आया हूँ। मैं इनकम टैक्स कमिश्नर की नौकरी करता था। ये नौकरी छोड़कर मैंने एक-दो साल नहीं, 10 सालों तक दिल्ली झुग्गियों में काम किया है।”

 केजरीवाल ने आगे कहा, “मुझे पद का लालच नहीं हैं। जब पहली बार सीएम बना तो मैंने 49 दिन में खुद पद छोड़ दिया था। ऐसे सीएम का पद हजार बार कुर्बान। लेकिन, आज मैं इसलिए सीएम पद से इस्तीफा नहीं दे रहा, क्योंकि मुझे राजनीतिक षडयंत्र रचकर जेल भेजा गया। मेरी लड़ाई तानाशाही के खिलाफ है। मेरे जेल जाने से लोग बहुत भावुक हुए हैं। मैं सभी का आभार जताता हूँ।”

‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ के नारे लगा वोट माँग रहे ओवैसी; बाबरी के नाम पर कहाँ से आया पैसा? मिली जमीन पर मस्जिद क्यों नहीं बन पायी? मुकदमेबाज़ी के लिए कौन दे रहा जकात?

आज मुसलमानों में एक बहस छिड़ी हुई है कि बाबरी और अन्य विवादित मस्जिदों की पैरवी के लिए कहाँ से आया पैसा? कितना आया और कितना खर्च हुआ? हिसाब दो। क्या हेराफेरी से मुसलमानों का ध्यान भटकाने के लिए शोर मचा रहे हो? सिरफिरे कट्टरपंथी मुसलमानों को बाबरी के नाम पर कब तक गुमराह कर उनकी लाशों पर बैठ मालपुए खाते रहेंगे? मुसलमानों इन सिरफिरे नेताओं से पूछो मस्जिद के नाम पर मिली जमीन पर इतने सालों में मस्जिद क्यों नहीं बन पायी, जबकि अयोध्या में हिन्दुओं ने तो मंदिर भी बना लिया? मुकदमेबाज़ी में करोड़ों रूपया पानी की तरह बहा दिया, लेकिन मस्जिद बनाने के लिए पैसा नहीं? मुकदमेबाज़ी के लिए वकीलों की फ़ौज के लिए कहां-कहां से भीख आयी? मंदिर के दान में तथाकथित घोटाले पर शोर मचाकर हिन्दुओं को बाँटने का काम करने से पहले बताओं मस्जिद के नाम पर तुम लोगों ने कितना घोटाला किया है? हिसाब दो। 

AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी अपनी सभाओं में ‘बाबरी मस्जिद’ के समर्थन में जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। वह अपनी सभाओं में इन नारों के जरिए वोट माँग रहे हैं। उनका यह करने का वीडियो भी वायरल हो रहा है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

AIMIM मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपने प्रत्याशी इम्तियाज जलील के समर्थन में सोमवार (6 मई, 2024) को एक जनसभा को संबोधित किया जहाँ उन्होंने ‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ के नारे लगाए। ओवैसी ने कहा कि 6 दिसम्बर, 1992 को गुनाह किया था। इसके बाद उन्होंने संसद में बाबरी के लिए लगाए गए नारों की याद दिलाई। 

ओवैसी ने इस जनसभा में कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव) पर हमला भी बोला। उन्होंने पूछा कि विपक्षी INDI गठबंधन ने 48 सीटों में से किसी भी सीट पर किसी मुस्लिम को टिकट क्यों नहीं दिया। उन्होंने उद्धव ठाकरे को नया-नया सेक्युलर बताया। उन्होंने कहा कि जिस दिन उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी, वह सब भूल जाएँगे।

मोदी ने बीड में कॉन्ग्रेस पर किया हमला

मोदी ने मंगलवार (7 मई, 2024) को महाराष्ट्र के बीड में एक जनसभा को संबोधित किया। मुंडे परिवार के राजनीतिक प्रभाव वाली इस सीट पर उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे को याद किया। उन्होंने इस रैली में कॉन्ग्रेस पर हमला भी किया।
उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस वर्तमान में तुष्टिकरण की राजनीती कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आने पर राम मंदिर को कैंसल करवा देगी, यह कॉन्ग्रेस में ही लम्बे समय तक रहे एक नेता ने कहा है। उन्होंने यहाँ आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान लोगों को बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने का मन बना चुके हैं।
मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन के नेता अन्य किसी धर्म को लेकर कुछ नहीं बोलते लेकिन वोटों के लिए प्रभु राम का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन के लोग वोट जिहाद की अपील कर रहे हैं। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस 26/11 के आतंकियों के साथ रिश्तेदारी निभा रही है।
पीएम मोदी ने यहाँ मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस बात का पुरजोर विरोध किया था कि देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा, लेकिन कॉन्ग्रेस दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीन कर एक धर्म के लोगों को देना चाहती है। पीएम मोदी ने कर्नाटक में मुस्लिमों को दिए गए आरक्षण का उदाहरण इस जनसभा में दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर राज्य में यही काम करना चाहता है।
मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन पूरा आरक्षण मुस्लिमों को देना चाहते हैं, यह खतरे की घंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक मोदी ज़िंदा है तब कोई भी ताकत दलितों और पिछड़ों का आरक्षण नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नकली वीडियो बना रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस को काम रोकने वाला बताया।

तेलंगाना : हैदराबाद BJP प्रत्याशी माधवी लता को गले लगाने वाली ASI उमा देवी निलंबित

                                    ASI उमा देवी और भाजपा प्रत्याशी माधवी लता
हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के. श्रीनिवास रेड्डी ने भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी के. माधवी लता को गले लगाने वाली ASI को निलंबित कर दिया है। निलंबित की गई ASI सैदाबाद में तैनात थी और उनका नाम उमा देवी है। माधवी लता हैदराबाद लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। उमा देवी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह माधवी लता से हाथ मिलाते और गले लगते हुए दिख रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर ने इसका संज्ञान लिया है। पुलिस कमिश्नर ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए उन पर कार्रवाई की और उन्हें निलंबित कर दिया। दरअसल, माधवी लता सैदाबाद थाने की सीमा में चुनाव प्रचार कर रही थीं, तब उमा देवी वर्दी में ड्यूटी पर थीं। इसी दौरान उन्होंने भाजपा उम्मीदवार से मुलाकात की थी।

दरअसल, हैदराबाद के वर्तमान सांसद असदुद्दीन ओवैसी के समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने हैदराबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी इसमें टैग करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के जाँच के जाँच के आदेश दिए और आखिर में उन्हें निलंबित कर दिया।

वास्तव में असदुद्दीन को ऐसे ही विरोधी उम्मीदवार चाहिए जो इसे ईंट का जवाब पत्थर से देने की हिम्मत रखता हो। अगर हैदराबाद के उन मुस्लिम मतदातों ने माधवी को वोट नहीं दिया, जिनके लिए लगभग 8 सालों से काम कर रही थी, माधवी को चिन्ता नहीं करनी चाहिए। असदुद्दीन के गढ़ में सेंध लगा कर अगला चुनाव उतना ही सुगम कर दिया है। दरअसल, इन ओवैसी भाइयों को बीजेपी से ऐसे ही fire brand चाहिए, जो इनकी चुलें हिला दे। माधवी ने तीर छोड़ा कहाँ, और लगा कहां? तेलंगाना को माधवी और राजा सिंह जैसे 2/4 fire brand मिलने पर तेलंगाना में बीजेपी को मात देने वाला नहीं होगा।   

माधवी लता ने पिछले सप्ताह रामनवमी पर निकाले गए जुलूस में शामिल हुई थीं। इस दौरान उन्होंने सांकेतिक रूप से धनुष पर बाण रखकर छोड़ा था। जिस तरफ वह ऐसा कर रही थीं, उसी तरफ एक मस्जिद था। इसको लेकर विपक्षियों ने हंगामा कर दिया कि उन्होंने मस्जिद पर बाण चलाई है। शेख इमरान नाम के एक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत भी दी।

पुलिस ने माधवी लता के खिलाफ अपने भड़काऊ हाव-भाव से एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया है। यह मामला बेगम बाजार थाने में दर्ज किया गया है। उन पर धारा 295A (जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण कार्यों से किसी धर्म के विश्वासों का अपमान कर भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, माधवी लता का यहाँ मुकाबला AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से है। ओवैसी साल 2004 से यानी लगातार चार बार से यहाँ से सांसद हैं। पाँचवीं बार के लिए भी उन्होंने नामांकन करा लिया है। इसके पहले उनके अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी साल 1984 से 1999 तक यहाँ से सांसद रहे। इसके पहले वे यहाँ से विधायक थे।