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केजरीवाल मीडिया का नया शिगूफा : ‘कोर्ट ने केजरीवाल को सभी गुनाहों से किया बरी…’ AAP नेताओं की ‘ईमानदारी’ के शिगूफे

                                                    केजरीवाल को कोर्ट ने नहीं किया है बरी
सोशल मीडिया पर एक बार फिर पुराना खेल शुरू हो गया है। अधूरी खबर, आधा सच और पूरा प्रोपेगैंडा। गुजरात में आम आदमी पार्टी के कुछ नेता और समर्थक पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को लेकर नया नैरेटिव बनाने में लग गए है। इनका कहना है कि दिल्ली की एक कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है।

यह दावा ऐसे बेचा जा रहा है जैसे केजरीवाल को दिल्ली शराब पॉलिसी स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई हो, जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो और अब BJP ‘झूठे आरोप’ लगाकर केजरीवाल को बदनाम कर रही हो।

कुछ ‘मीडिया’ पेज और हैंडल्स भी इस झूठ को आगे बढ़ाने में एक्टिव दिख रहे हैं, जिनमें ‘निर्भय न्यूज़’ जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन लोगों का काम खबर देना नहीं, बल्कि ‘पार्टी-स्पेसिफिक’ के लिए माहौल बनाना है। हेडलाइन्स इस तरह से बनाई जाती हैं कि आम आदमी उन्हें पढ़कर मान ले कि ‘केजरीवाल बरी हो गए हैं।’

लेकिन सच तो यह है कि केजरीवाल को शराब स्कैम या मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने ‘निर्दोष’ नहीं बताया है। जिस फैसले को गलत तरीके से ‘दोषी नहीं’ बताया जा रहा है, वह एक अलग और टेक्निकल मामला है। दरअसल यह ED के भेजे समन से जुडा है, न कि शराब घोटाला से। इस पूरे मामले को समझना जरूरी है, क्योंकि जनता को गुमराह करने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है।

AAP का झूठा दावा

आम आदमी पार्टी गुजरात के ऑफिशियल X हैंडल से किए गए पोस्ट में दावा किया गया है, “आज दिल्ली की कोर्ट ने ED के दर्ज झूठे मामलों में अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है।” पोस्ट की भाषा और टोन ऐसी है जैसे कोर्ट ने केजरीवाल को किसी बड़े स्कैम से बरी कर दिया हो।

पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने भी यही प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी गुजरात के जनरल सेक्रेटरी मनोज सोरठिया ने भी ऐसा ही दावा किया है कि केजरीवाल ‘सभी जुर्मों’ से बरी हो गए हैं। उन्होंने एक वीडियो में तो यह भी दावा किया है कि ‘अगर केजरीवाल ईमानदार नहीं हैं, तो दुनिया में कोई भी ईमानदार नहीं है।’ उन्होंने ‘सत्यमेव जयते’ के साथ बकवास की है और BJP पर इल्जाम लगाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि BJP ने भ्रष्टाचार, शराब, फाइनेंशियल गड़बड़ियों वगैरह के कई आरोप लगाए, लेकिन कोर्ट ने ‘केजरीवाल को सभी जुर्मों से बरी कर दिया।’

इसी तरह, गुजरात AAP की गौरी देसाई और AAP प्रेसिडेंट यसुदन गढ़वी ने भी वीडियो बनाकर केजरीवाल को ‘बेगुनाह’ बताया है और उन्हें ‘कट्टर ईमानदार’ का टैग दे दिया है। गौरी ने तो यहाँ तक ​​कहा, “ED के आरोप झूठे साबित हुए हैं।” इसके अलावा, ‘सच को परेशान किया जा सकता है, हराया नहीं जा सकता’।

अब सवाल यह है कि क्या कोर्ट ने सच में केजरीवाल को ‘सभी जुर्मों’ से बरी कर दिया है? जवाब है — नहीं। ‘जिम्मेदार और समर्पित’ मीडिया भी बड़ी ही चालाकी से सॉफ्ट ब्रेनवॉश करने से नहीं चूक रहा। इनमें सबसे बड़ा नाम ‘निर्भय न्यूज़’ का है। ‘निर्भय न्यूज़’ ने जो हेडलाइन चलाई, उसमें सीधे कहा गया था कि ‘दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल को बरी कर दिया’ और उसी के आधार पर AAP नेता चैतर वसावा का बयान जोड़ा गया।

यह प्रोपेगैंडा फैलाने की पुरानी ट्रिक है। पहले कोई गलत नतीजा निकालो, फिर किसी नेता का रिएक्शन दिखाकर उसे ‘न्यूज’ बना दो। ऐसी हेडलाइंस जिससे दर्शक समझें कि केजरीवाल ‘बच गए’, ‘बेगुनाह और बेकसूर’, ‘क्लीन चिट मिल गई’। यह झूठ फैलाने का एक तरीका है।

दरअसल ED ने केजरीवाल को कुछ समन भेजे थे और आरोप यह था कि केजरीवाल ने उन समन को नजरअंदाज किया। इसी मुद्दे पर कोर्ट ने कजरीवाल को राहत दी।

यह राहत किसी घोटाले से बरी करने का नहीं है। यह राहत एक प्रोसिजरल/टेक्निकल पहलू पर आधारित है, यानी समन के प्रोसेस, सर्विस, वैलिडिटी और उससे जुड़े लीगल मामलों पर। आसान भाषा में कहें तो यह घोटाले में बरी होना नहीं है, बल्कि ‘समन प्रक्रिया’ से जुड़े मामले में राहत है।

यह ऐसा है जैसे कोई आदमी मेन केस में आरोपी हो, लेकिन उसे एक अलग केस में राहत मिल जाए और उसके सपोर्टर यह कहकर जश्न मनाने लगें कि वह ‘सभी चार्ज से बरी’ है। यह कोई जश्न नहीं है, बल्कि जनता को उल्टा चश्मा पहनाने की एक चाल है।

तो क्या शराब पॉलिसी/मनी लॉन्ड्रिंग केस खत्म हो गया है? बिल्कुल नहीं

आम आदमी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता यह बात छिपा रहे हैं कि दिल्ली शराब स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस अलग-अलग हैं और उनका लीगल प्रोसेस चल रहा है। जिस तरह से AAP सपोर्टर ‘निर्दोष’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे लोगों को लगता है कि कोर्ट ने केजरीवाल को शराब पॉलिसी केस में भी क्लीन चिट दे दी है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ है।

मुख्य बात यह है कि केजरीवाल को शराब केस में कोई राहत नहीं मिली है, मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी भी चल रहा है, दूसरे सीरियस केस भी चल रहे हैं और उन्हें जो राहत मिली है, वह सिर्फ उसी केस में है जिसमें ED ने उन्हें समन दिया है और अब वह उससे परेशान भी नहीं हैं, क्योंकि केजरीवाल ने समन भी नहीं माने हैं और तिहाड़ जेल में भी रहे हैं और बेल पर बाहर भी आए हैं। इसलिए अब समन जैसी छोटी-मोटी बातों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

असलियत यह है कि केजरीवाल पर अभी भी शराब पॉलिसी स्कैम, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में सुनवाई चल रही है और कोर्ट ने उनमें कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया है। यह पहली बार नहीं है जब AAP ने किसी कानूनी घटना को ‘सच की जीत’ और ‘क्लीन चिट’ के तौर पर पेश किया है। पार्टी पॉलिटिक्स का एक लगातार पैटर्न रहा है-

  1. जाँच एजेंसी पर हमला करना
  2. हर एक्शन को ‘पॉलिटिकल बदला’ दिखाना
  3. टेक्निकल राहत के जरिए ‘बेगुनाही साबित करना’
  4. सपोर्टर्स द्वारा सोशल मीडिया पर नैरेटिव को आगे बढ़ाना
  5. मीडिया पेजों से हेडलाइन चलाना।
इससे जनता को नुकसान होता है, क्योंकि आम नागरिक के पास हर खबर की कानूनी परतें खोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। वह सिर्फ हेडलाइन पढ़ता है और मान लेता है कि ‘कोर्ट ने बरी कर दिया।’ यही इस प्रोपेगैंडा का लक्ष्य है, सिर्फ नैरेटिव गढ़ना।

पंजाब : AAP सरकार की नाकामी बनी आफत की वजह; यूँ ही नहीं बाढ़ से बेहाल हुआ पंजाब…जब करनी थी तैयारियाँ तब दिल्ली चुनाव में जुटी थी भगवंत मान सरकार, नजरअंदाज की मौसम विभाग की चेतावनी; अब केंद्र से माँग रहे पैसा


पंजाब इस वक्त बाढ़ की भीषण मार से जूझ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह पिछले 37 वर्षों की सबसे भयावह बाढ़ है। राज्य के सभी 23 जिले इस भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है और 3.5 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 1,650 से ज्यादा गाँव पानी में डूब गए हैं। 1,75,286 हेक्टेयर फसल बाढ़ से प्रभावित है। घर-मकान ढहे जा रहे हैं और इलाके झील में बदल गए हैं। वहीं, हालातों से निपटने के लिए राज्य में NDRF की 22 टीमें तैनात की गई हैं और सेना भी मदद में जुटी हुई है।

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष राहत पैकेज जारी करने की माँग की है। कुलतार सिंह ने केंद्र से 60,000 करोड़ रुपए का फंड तुरंत जारी करने की अपील की है। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से माँग की है कि फसल के नुकसान पर ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाना चाहिए।

AAP सरकार की नाकामी बनी आफत की वजह

पंजाब की बाढ़ लोगों पर आफत बनकर टूटी है लेकिन इसकी जितनी जिम्मेदार कुदरत है, उनकी ही सत्तारूढ AAP भी है। बीते फरवरी में जब बाढ़ की तैयारियों के लिए AAP पंजाब के नेताओं को बैठकें करनी थी तब वे दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जुटे हुए थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार की लापरवाही के चलते बाढ़ की तैयारियों से जुड़ी पहली बैठक 5 जून को हुई और AAP सरकार को तैयारी के लिए केवल 17 दिनों का वक्त मिला। 22 जून को राज्य में मॉनसून ने दस्तक दे दी है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 2,800 किलोमीटर धुसी बाँध की मरम्मत और नालों की सफाई के लिए सरकार ने 117 करोड़ रुपए जारी किए लेकिन यह टाइमलाइन व्यावहारिक नहीं थी। उन्होंने कहा, “30 जून की समय-सीमा अवास्तविक थी।”

इससे पहले बाढ़ की तैयारियों के लिए फरवरी और मार्च में बाढ़ नियंत्रण बैठकें आयोजित जाती थीं। अधिकारी ने कहा, “मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी लेकिन सरकार ने उसे नजरअंदाज कर दिया। दो वर्ष पहले ही राज्य ने भीषण बाढ़ झेली थी।”

पूर्व मंत्रियों ने भी उठाए AAP पर सवाल

पूर्व सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों ने कहा, “प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल में, बैठकें अप्रैल या मई में होती थीं। जब भारी बारिश का अनुमान था, तो उन्होंने फ़रवरी में भी बैठकें बुलाईं। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही धनराशि जारी कर दी जाती थी और सभी काम 30 जून तक पूरे करने होते थे।” सेखों ने दावा किया कि माधोपुर हेडवर्क्स में 28 में से केवल 4 गेट ही चालू थे क्योंकि उनकी मरम्मत नहीं हुई थी।

कांग्रेस के पूर्व जल संसाधन मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने कहा, “इससे पहले फरवरी में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सभी उपायुक्तों की उपस्थिति में बैठकें होती थीं। हमने 100 करोड़ रुपये जारी किए थे और यह पर्याप्त था। आज, वे 200 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा करते हैं लेकिन मुझे कोई काम नजर नहीं आता।”

रिपोर्ट के मुताबिक, NHAI ने सड़क परियोजनाओं के लिए सरकार से गाद माँगी थी लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। वहीं, एक पूर्व चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह दुल्लत ने माधोपुर हेडवर्क्स की गड़बड़ी को लेकर कहा कि अपने इंजीनियरों को भरोसा करने के बजाय निजी कंपनी को रिपोर्ट के लिए 23 लाख दिए गए। दुल्लत ने कहा, “117 करोड़ रुपए जारी किए होंगे लेकिन कोई काम नजर नहीं आया।”

हालाँकि, जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने मरम्मत का काम पूरा किए जाने का दावा किया है। वहीं, एक इंजीनियर ने बाढ़ के लिए नदियों के अपना रास्ता बदलने को जिम्मेदार ठहराया है।

पंजाब में हालात खराब हैं और अब तमाम सरकारी एजेंसियाँ, NGO और लोग प्रभावितों को राहत पहुँचाने में जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब के मुख्यमंत्री से बात की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी जायजा लेने जा रहे हैं। अगर पंजाब सरकार ने वक्त रहते तैयारियाँ की होतीं, चुनाव में हार-जीत से पहले लोगों को महत्व दिया होता तो हालात आज ऐसे नहीं होते।

फ्री की चीजें देकर नहीं हटा सकते गरीबी: रोजगार से आएगी समृद्धि, सब्सिडी की हो मॉनिटरिंग: ‘रेवड़ी कल्चर’ पर नारायणमूर्ति ने उठाए सवाल

एक समय था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनाव रैलियों में फ्रीबीस को कोसते थे, लेकिन दिल्ली हथियाने के लिए खुद ही केजरीवाल के जाल में फंस फ्रीबीस के आधार पर दिल्ली हथियाने में सफल हो गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बांटे जा रहे हैं, लाखों को फ्री राशन देने और BPL के अंतर्गत जो राशन बांटा जा रहा है क्या कभी इन सबका आर्थिक सर्वे किया? यदि नहीं तो क्यों? आखिर सरकारी धन का दुरूपयोग कब बंद होगा? या फिर कहा जाये कि जो प्रधानमंत्री मोदी करे वह ठीक दूसरा करे तो फ्रीबीस? 
फ्रीबीस के लालच में वोट देने वाले लालचियों को सोंचना चाहिए कि तेल हमेशा तिल से ही निकलता है। जब फ्रीबीस के लालच में वोट देते हो फिर महंगाई को क्यों रोते हैं? रेवड़ी कल्चर को ख़त्म कर इन सियासतखोरों के पीछे भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी ख़त्म करने के लिए कहे। ये लालची भूल रहे हैं कि भ्रष्टाचार कितना फ़ैल रहा है। एक भी public dealing विभाग ऐसा नहीं जहाँ बिना रिश्वत लिए कोई काम होता हो। ईमानदारी से काम करने पर इतनी उलझनों का सामना करना पड़ता है कि पीड़ित को आखिर रिश्वत की ही शरण में जाना पड़ता है।         
IT क्षेत्र की शीर्ष भारतीय कम्पनियों में शामिल इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने ‘रेवड़ी कल्चर’ पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि देश में मुफ्त चीजें देने से गरीबी नहीं खत्म होने वाली है। उन्होंने गरीबी खत्म करने का तरीका ज्यादा से ज्यादा नौकरियाँ पैदा करना बताया है। उन्होंने इसके साथ ही सरकारी सब्सिडी की कड़ी देखरेख की वकालत की है।

मुंबई में स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर आयोजित एक इवेंट में बोलते हुए नारायणमूर्ति ने कहा, “मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि आप में से हर आदमी आने वाले समय में लाखों नौकरियाँ पैदा करेगा और ऐसे ही आप गरीबी की समस्या का समाधान कर सकते हैं, आप फ्रीबीस (रेवड़ियों) से गरीबी की समस्या का समाधान नहीं कर सकते, कोई भी देश इसमें सफल नहीं हो सका है।”

नारायणमूर्ति ने इस दौरान कहा कि सरकार जो भी सुविधाएँ मुफ्त दे, उनको लेकर कड़ी मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने इसके लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली का उदाहरण दिया। नारायणमूर्ति ने कहा कि जिस भी परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए, 6 महीने बाद उसको लेकर जाँच की जाए कि वह इसका उपयोग कैसे करते हैं।

रेवड़ी कल्चर पर नारायणमूर्ति ने स्पष्ट किया है कि वह किसी पार्टी के वादों पर टिप्पणियाँ नहीं कर रहे बल्कि नीतिगत व्यवस्था पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई फायदा जनता को दिया जा रहा है तो इसके बदले में सरकार को कुछ शर्तें भी लगानी चाहिए।

नारायणमूर्ति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियाँ नकद ट्रांसफर, मुफ्त बिजली, मुफ्त बस यात्रा, राशन या फिर बाकी तरीकों का इस्तेमाल करके चुनाव में उतर रही हैं। बीते कुछ चुनावों में यह चलन तेजी से बढ़ा है।

भारतीय राजनीति में रेवड़ी और मुफ्त में सुविधाएँ दिए जाने का चलन आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में आजमाया था और उसे 2015 तथा 2020 के चुनाव में बड़ी सफलता मिली थी। इसके बाद कॉन्ग्रेस को भी ऐसे ही वादों के सहारे कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में बड़ी सफलताएँ मिलीं।

रेवड़ी कल्चर का पहला विरोध करने वाली भाजपा ने भी बाद में महिलाओं को नकद राशि जैसे वादे किए हैं। हालाँकि, अर्थशास्त्रियों ने इस चलन को बजट के लिए खतरनाक बताया है और इसे अर्थव्यवस्था पर बोझ बताया है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के रेवड़ी बाँटने के असर बजट पर दिखाई भी दिए हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार दलितों और जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए बनाया गया बजट अपनी ‘गारंटी स्कीम’ में लगा दिया है। हजारों करोड़ रूपए की धनराशि गारंटी स्कीम में लगाई गई है। कर्नाटक ने कई टैक्स भी बढ़ा दिए हैं। हालाँकि, इससे कर्नाटक में गरीबी रेखा पर कोई असर पड़ा हो, ऐसी जानकारी नहीं सामने आई है। नारायणमूर्ति ने इसी से जुड़ी बात कही है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी देश इसमें सफल नहीं हुआ है। दरअसल, उनका इशारा वेनेजुएला जैसे देशों की तरफ था। वेनेजुएला ने भी तेल की कमाई के सहारे अपने नागरिकों को रेवड़ियाँ बाँटनी चालू की थी। उसने सरकारी नौकरियाँ आदि भी खूब बाँटी थी। बाद में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई।

AC, कुर्सी, टीवी, पंखा… सरकारी ऑफिस से सब कुछ लेकर चले गए मनीष सिसोदिया


विधानसभा चुनाव हारने के बाद AAP नेता मनीष सिसोदिया कैम्प कार्यालय से लाखों का सामान चुरा ले गए। वह पटपडगंज में बने PWD के विधानसभा कैम्प कार्यालय से AC, LED TV, कुर्सी-मेज समेत साउंड सिस्टम भी उठा ले गए। यह आरोप पटपडगंज के नए विधायक रविंदर सिंह नेगी ने लगाया है।

उन्होंने इस कार्यालय पर जाकर स्थिति बताई है। रविंदर सिंह नेगी ने कहा, “ईमानदारी का ढोंग रचने वाले सरकारी समान लेकर चले गए… खाली ढाँचा खड़ा है।” रविंदर सिंह नेगी ने दावा किया कि सिसोदिया 250-300 कुर्सियाँ, हॉल में लगे हुए AC और ₹2-3 लाख का टीवी भी ले गए। उन्होंने कहा कि अब केवल टीवी का स्टैंड बचा हुआ है।

रविंदर सिह नेगी ने यह भी आरोप लगाया है कि सिसोदिया ₹12 लाख साउंड सिस्टम भी उखाड़ ले गए। नेगी ने हर कमरे का हाल दिखाया है। रविंदर नेगी ने आरोप लगाया कि चोरी के साथ ही सिसोदिया के लोगों ने कार्यालय को क्षतिग्रस्त भी किया और दरवाजे तोड़े।

https://www.facebook.com/reel/9645921525418313

नेगी ने नाराजगी जताते हुए कहा, “इन लोगों को इतना शर्म नहीं आई कि नया विधायक कहाँ बैठेगा।” नेगी ने ऐलान किया है कि भाजपा की सरकार सिसोदिया को कानूनी नोटिस भेजेगी और इस मामले में कार्रवाई होगी।

पंजाब : AAP नेता अनोख मित्तल ने अवैध संबंधों का राज खुलने पर बीवी को मरवा दिया

                                   आप नेता अनोख मित्तल (फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
लुधियाना पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता अनोख मित्तल को अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मित्तल ने अपनी प्रेमिका प्रतिक्षा के साथ मिलकर सुपारी किलर्स को 2.50 लाख रुपये में हत्या के लिए हायर किया था। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपित फरार है।

पुलिस कमिश्नर कुलदीप सिंह चहल के मुताबिक, शनिवार (15 फरवरी 2025) की रात अनोख मित्तल अपनी पत्नी मानवी उर्फ लिप्सी के साथ डिनर कर घर लौट रहा था। रास्ते में उसने कार रोकी और तभी पाँच हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। उन्होंने तेज धारदार हथियारों से मानवी पर वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को लूटपाट जैसा दिखाने के लिए हमलावर मित्तल की कार और पत्नी की ज्वेलरी लेकर फरार हो गए।

पुलिस ने जब मामले की गहराई से जाँच की तो पता चला कि अनोख मित्तल ने खुद ही इस हत्या की साजिश रची थी। उसकी पत्नी को उसके प्रेम संबंध के बारे में जानकारी हो गई थी, जिस वजह से दोनों के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। आए दिन झगड़े बढ़ रहे थे, जिसके चलते मित्तल ने अपनी प्रेमिका प्रतिक्षा के साथ मिलकर पत्नी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पुलिस के मुताबिक, हत्या के लिए 2.50 लाख रुपये की डील हुई थी, जिसमें से 50,000 रुपये एडवांस दिए गए थे। बाकी पैसे हत्या के बाद देने की योजना थी।

पुलिस ने इस मामले में अनोख मित्तल, उसकी प्रेमिका प्रतिक्षा और चार सुपारी किलर्स-अमृतपाल सिंह उर्फ बली (26), गुरदीप सिंह (25), सोनू (24) और सागरदीप उर्फ तेजी (30) को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक अन्य आरोपित गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी अब भी फरार है।

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई एक स्विफ्ट, आई-20 और रिट्ज कार को जब्त कर लिया है। साथ ही एक तलवार भी बरामद की गई है, जिससे वारदात को अंजाम दिया गया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने किसके दबाव में यमुना सफाई पर रोक लगाई थी और क्यों? पहले ही साफ हो गई होती यमुना, लेकिन केजरीवाल ने नहीं होने दिया: दिल्ली के LG ने AAP सरकार की कारस्तानी उजागर की

दिल्ली में यमुना की सफाई चालू 
पिछले कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर उंगलियां उठ रही है। यह भी शक किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट जनहित में निर्णय देने की बजाए Deep State के इशारे पर अपने फैसले देती है। आखिर किस के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने यमुना की सफाई पर रोक लगाई थी? क्या यमुना के गन्दा रहने में भूतपूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ सुप्रीम कोर्ट और कोर्ट में अर्जी लगाने वाला वकील भी दोषी है? सभी खोजी पत्रकार और चैनल भी इस षड़यंत्र पर चुप्पी साधे रहे, क्यों? दिल्ली और केंद्र सरकारों को इन जन-विरोधियों पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। कौन था सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाने वाला वकील?     

दिल्ली सरकार गठन से पहले अगर ये विनाशकारी षड़यंत्र सामने आने लगे हैं, गठन के बाद और कितना गंद बाहर आएगा यह मुफ्त रेवड़ियों के मकड़जाल फंस लालची लोगों को अपनी आत्मा/जमीर को धिक्कारना होगा। Many heads to roll. कितना बड़ा अनर्थ किया रहा था? यमुना गन्दी होने से मछली उद्योग भी प्रभावित था क्योकि इतने गंदे पानी में मछली तो क्या कोई जन्तु जीवित नहीं रह सकता।  

उपराज्यपाल विनय सक्सेना का वीडियो सुन स्मरण आते हैं शायद भगत थे, उन्होंने ने वर्तमान उपराज्यपाल की तरह पैदल चल लोगों की समस्याओं को जाना था। उपराज्यपाल सक्सेना ही धन्य है कि वह विकास पुरुष नरेंद्र मोदी के राज में है अन्यथा इनका भी भगत जी वाला हश्र होता।

बात 1986/87 की है जामा मस्जिद क्षेत्र में सुबह मुर्गा मंडी लगती थी। ट्रैफिक जाम रहता था, जिस वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों को जरुरत से ज्यादा दिक्कत होती थी। अख़बारों में समाचार छपते थे, लेकिन पुलिस से लेकर सरकार तक मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हुए थे। उपराज्यपाल महोदय स्वयं मौके पर गए और लगभग 2 घंटे तक उनकी कार फंसी रही। सचिव ने पुलिस को सूचित करने को जैसे ही कहा उन्होंने मना कर दिया। खैर क्षेत्र का दौरा कर चुपचाप कार्यालय जाकर अतिक्रमण हटाने को आदेश दे दिया। अंजाम यह हुआ कि इलाके के प्रभावी द्वारा अधिकारी के थप्पड़ मारने पर उनका चश्मा गिर गया। अपना चश्मा उठाने जब अधिकारी झुका प्रभावी के इशारे पर अधिकारी का ढोल बजा दिया। लेकिन उस थप्पड़ और पब्लिक द्वारा अधिकारी का ढोल बजाने की गूंज ने उपराज्यपाल महोदय को सख्त होने पर मजबूर कर दिया।

अपने अधिकारी की बेइज्जती देख क्षेत्र को छावनी बना जामा मस्जिद सर्विस लेन साफ, मुर्गा मंडी साफ अतिक्रमण साफ और मोटर पार्ट्स वालों का सामान क्रेन से दुकानों के अंदर फेंकवा दिया। चावड़ी बाजार मोड़ से लेकर दरिया गंज तक तंग दिखने वाली सड़क चौड़ी दिखने लगी। दुर्भाग्य से सरकार ने उनकी सख्ती देख उनको उनके पद से हटा दिया। आज क्षेत्र में फिर जरुरत से ज्यादा अतिक्रमण हो गया है। देखना है सरकार का इस तरफ कब ध्यान होगा?     

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार जाते ही यमुना नदी की सफाई चालू हो गई है। यमुना की सफाई के लिए सबसे पहले बड़ी मशीनें गंदगी निकालने को लगाई गई हैं। यमुना सफाई का यह काम दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के प्रयास के बाद चालू हुआ है। इस बीच उनका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह बता रहे हैं कि केजरीवाल सरकार के दौरान क्यों यमुना साफ़ नहीं हो पाई और कैसे मुख्यमंत्री रहते हुए अरविन्द केजरीवाल ने ही यमुना की सफाई के खिलाफ रोक लगवा दी थी।

दिल्ली में रविवार (16 फरवरी, 2025) को  ट्रैश स्कीमर, वीड हार्वेस्टर और ड्रेज यूटिलिटी क्राफ्ट जैसी बड़ी-बड़ी मशीनें यमुना के लिए भेजी गईं। इन मशीनों को यमुना में उतार कर जलकुम्भी और पानी की सतह पर पड़ा कचरा उठाया जाने लगा। इसके अलावा ड्रेजर के जरिए यमुना के भीतर से कूड़ा निकाला जा रहा है। इसकी वीडियो भी सामने आई हैं। यमुना में कूड़ा निकालने के अलावा खरपतवार निकालने पर भी काम चल रहा है। यमुना गन्दी ना हो, इसके लिए 4 सूत्रीय कार्यक्रम बनाया गया है।

LG विनय कुमार सक्सेना ने बताया है कि सबसे पहले यमुना से कूड़ा कचरा निकाला जाएगा। दूसरे चरण में यमुना में गंदगी लाने वाले हर प्रकार के नाले की सफाई की जाएगी। तीसरे चरण में दिल्ली सीवर ट्रीटमेंट कैपेसिटी को सही चलाने पर काम होगा। इसके बाद चौथे चरण में दिल्ली में सीवर क्षमता बढ़ाने, नए STP बनाने, नए नाले बनाने समेत बाकी इन्फ्रा से जुड़े हुए काम होंगे। यह रणनीति लागू करने के लिए LG सक्सेना ने दिल्ली सरकार के अफसरों से भी मुलाक़ात की है।

यमुना साफ़ करने को लेकर लगातार प्रयास चलते आए हैं लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार ही इसमें अडंगा लगाती रही है। यह खुलासा भी विनय सक्सेना ने किया है। उन्होंने इस संबंध में भाजपा के पूर्व राज्यसभा एमपी विनय सहस्त्रबुद्धे के साथ पॉडकास्ट में खुलासा किया है कि यमुना सफाई का काम अरविन्द केजरीवाल की AAP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाकर रुकवाया था।

LG सक्सेना ने बताया, “नजफगढ़ नाले से ही 74% कचरा यमुना में आता है। हमने उसको साफ़ करने का बीड़ा उठाया था। नजफगढ़ नाले का 20 किलोमीटर और यमुना का 11 किलोमटर का एरिया हमने साफ करवाना चालू किया था। इसमें जनता ने भी सहभागिता की। हमने NGT के मुखिया को बुलाया और यमुना तथा नजफगढ़ नाला दिखाया… उन्होंने हमारे काम को देख कर सभी विभागों की एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई जिसमें राज्य और केंद्र के विभाग शामिल थे। उन्होंने मुझे इसका चेयरमैन बना दिया।”

उन्होंने आगे बताया, “केजरीवाल साहब मुझसे हमेशा मिलते थे और मेरे काम की प्रशंसा करते थे। वह कहते थे कि हम यह नहीं कर पाए लेकिन आप कर रहे हैं और हम इस में आपका साथ देंगे। मैंने एक बार उनको नजफगढ़ नाला दिखाने के लिए बुलाया। उनको इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि 57 किलोमीटर का नजफगढ़ नाला भी दिल्ली में है। इसके कुछ ही दिनों के बाद एक सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आया और यमुना की सफाई पर रोक लग गई।” LG विनय सक्सेना की यह बातचीत आप नीचे लगे वीडियो में 30 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

LG सक्सेना ने बताया कि इस आदेश के लिए केजरीवाल सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। उन्होंने बताया कि केजरीवाल यमुना सफाई का क्रेडिट नहीं किसी को ले जाने देना चाहते थे, इसीलिए वह सुप्रीम कोर्ट गए। उन्होंने बताया कि तब से ही यमुना में सफाई का काम रुक गया।

पंजाब : ईसाइयत और ड्रग में जल रहा पंजाब ; केजरीवाल की मान सरकार लड़कियों को सेक्स वर्कर बना रहा ‘उड़ता पंजाब’; ड्रग्स की गोली दो, फिर मेरे साथ कुछ भी करो… , अनाज मंडी में ‘धंधा’: हाई कोर्ट बोला- नशाखोरी दीमक की तरह खा रहा

                                                 प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: GROK ai)
पंजाब सीमावर्ती राज्य है और सीमावर्ती राज्य में महिलाओं की हो रही दुर्दशा पर वहां की सरकार, प्रशासन और राजनीतिक पार्टियां चुप क्यों? इस गंभीर मुद्दे पर वहां के राज्यपाल को ही कोई सख्त कदम उठाना चाहिए। यह देखना चाहिए कि क्या पंजाब को बर्बाद करने पाकिस्तान षड़यंत्र रच रहा है। केवल चुनावों में नशे को मुद्दा बनाने की बजाए अभी मुद्दा बनाने का समय है। समय रहते वहां के विपक्ष को सचेत होना पड़ेगा।    
दिल्ली और पंजाब मॉडल लेकर घूमते अरविन्द केजरीवाल जनता को मुफ्त रेवड़ियों के जाल में फांस किस तरह पागल बनाते रहे हैं। दिल्ली नमूना तो सबने देख लिया और पंजाब की दुर्दशा देखो। आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब में महिलाओं को ड्रग एडिक्ट बना सेक्स वर्कर बनने को मजबूर कर दिया। जिस राज्य में महिलाओं की इतनी दुर्दशा हो रही हो, क्या वह राज्य विकास की ओर जा सकता है।   

‘नशा मुक्ति अभियान’ लंबे समय से देश के कोने-कोने में चल रहा है लेकिन इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं है। पंजाब में AAP सरकार जोर-शोर से दावा करती कि वो राज्य से नशे का खात्मा कर देंगे। वहीं दूसरी ओर एक लड़की की आपबीती सामने आती है जो बताती है कि राज्य में नशे के कारण कैसे लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो रही है और उन्हें नशा दे-देकर वेश्यावृत्ति में धेकला जा रहा है।

प्रशासन के लिए अगर उस लड़की की आपबीती एक धक्का है तो सवाल उठता है कि क्या ‘नशा मुक्ति अभियान’ जमीन तक पहुँचा भी है और अगर अधिकारी ऐसी स्थितियों से वाकिफ हैं तो फिर अब तक राज्य में ऐसे हालात क्यों हैं।

लड़की की आपबीती मीडिया में प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट बताती हैं कि जिस समय नशा विरोधी कमेटी की टीम मार्च निकाल रही थी तभी उन्हें कोट ईसे खाँ के मसीता रोड पर लड़की सड़क किनारे खाना खाते हुए मिली। लड़की से सवाल-जवाब हुए तो उसने सरेआम जो कहना शुरू किया उससे सभी लोग हिल गए। लड़की ने कहा, “मुझे बस नशे के लिए छह कैप्सूल चाहिए और उसके बाद कोई मेरे साथ कोई कुछ भी करे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। एक महिला ने पहले मुझे नशे की लत लगाई और मुझे अब जिस्मफिरोशी में धकेल दिया है। मेरे जैसी कई युवतियों को हवस के भूखे भेड़ियों के समक्ष परोसती है और बदले में 300 रुपए लेती है। आधा हिस्सा 150 रुपए मुझे मिलते हैं। पहले 600-700 रुपए की कमाई होती थी पर अब जो पैसा मिलता है, उससे केवल नशे की पूर्ति हो पाती है।”

लड़की ने इस दौरान ये भी जानकारी दी कि वेश्यावृत्ति का काम अनाज मंडी में होता है। वहाँ लगे कुछ तंबू में जिस्म का सौदा करवाया जाता है लेकिन उससे पहले उन्हें नशे का आदी बनाते हैं। वो खुद जब कैप्सूल नहीं मिलती तो अस्पताल से मिलने वाली ‘बुपरीमार्फिन’ गोली पानी में मिलाकर इंजेक्शन लगा लेती है। युवती के मुताबिक ये इंजेक्शन लगाना भी उसे उसी औरत ने ही सिखाया है जिसने उसे वेश्यावृत्ति में धकेला। वहीं गोली उसे सरकारी अस्पताल के पास वाले मेडिकल स्टोर से मिल जाती है।

बच्ची की आपबीती आने के बाद पुलिस ने इस मामले को दर्ज तो कर लिया है लेकिन इसके बाद पूरे प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि जब राज्य में नशे की कैप्सूल सब बंद हैं तो इनके पास वो कैसे पहुँच रही है।

नशे से हो रही पंजाब में जिंदगियाँ बर्बाद

ये पहली बार नहीं है जब पंजाब में नशे की लत के कारण किसी की जिंदगी बर्बाद हुई हो। 1 साल पहले एक डांसर की खबर आई थी जिसकी पूरी जिंदगी नशे की लत के कारण खराब हो गई थी।
खुद उसके भाई-बहनों ने उसे पहचानने से मना कर दिया था। इसके अलावा उसका पति भी छो़डकर चला गया था। बाद में उसे घर चलाने के लिए सेक्स वर्कर बनना पड़ा। मगर जब उम्र ढली तो उसे वो काम मिलना भी बंद हो गया।
ऐसे ही एक अन्य खबर बताती है कि कैसे अमृतसर के गाँव में नशे की आदत के कारण 100 से ज्यादा महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। रिपोर्ट के अनुसार सभी के पतियों की पिछले तीन से छह साल में नशे के कारण मौत हुई थी।
महिलाओं ने शिकायत में पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस इन नशा तस्करों को नहीं पकड़ती। नशे से हमारा भविष्य बर्बाद हो रहा है। कई लोग तो इस क्षेत्र से जा चुके हैं। हाल ऐसे हैं कि अब तो लोग यहाँ मकान खरीदने में भी संकोच करते हैं।
इसी तरह 4 दिन पहले एक खबर पंजाब के फिल्लौर से आई थी। यहाँ नशे की एक्स्ट्रा डोज लेने पर 22 साल के युवक की मौत हो गई। उसका शव पेड़ के पास पड़ा मिला। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही पूरे परिवार में कोहरा मच गया।

कोर्ट बार-बार लगा चुका है फटकार

पंजाब में नशाखोरी इतने चरम पर है कि कोर्ट तक इस मामले पर राज्य की आलोचना कर चुका है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा था कि नशाखोरी देश के भविष्य को दीमक की तरह खा रही है। विशेष रूप से पंजाब में ये बड़ी चिंता का विषय है।
पिछले वर्ष अगस्त 2024 भी बठिंडा कोर्ट ने ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त स्टैंड लेने को पुलिस को आदेश दिया था। उन्होंने एक तस्कर की याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस से कहा था कि वह बताएँ कि राज्य में एनडीपीएस के कितने मामले हैं, जिनमें आरोपी 6 महीने से अधिक समय से फरार हैं। अगर पुलिस द्वारा ड्रग मामलों में आरोपितों को उचित समय अवधि के भीतर गिरफ्तार नहीं किया जाता है, तो ऐसे आरोपितों को तुरंत घोषित अपराधी (पीओ) घोषित किया जाना चाहिए और कानून के प्रावधान के अनुसार बिना किसी देरी के उनकी संपत्ति जब्त की जानी चाहिए।
मार्च 2024 में भी कोर्ट ने पंजाब में पुलिस अधिकारियों से ड्रग तस्करों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट को देने को कही थी। हाईकोर्ट ने पंजाब की जेलों से नशे की तस्करी के बढ़ते मामलों पर टिप्पणी करते हुए इसे एसएसओसी की नाकामी बताई थी। साथ ही कहा था कि इन केसों की जाँच सीबीआई और ईडी द्वारा होनी चाहिए। पंजाब में स्थिति नियंत्रण से बाहर है और जेल अधिकारियों के खिलाफ जँच करने में पंजाब पुलिस सक्षम नहीं है।
इसी प्रकार साल 2023 में भी कोर्ट ने नशे के कारोबार और तस्करी के आँकड़ों को देख इन्हें डराने वाला बताया था। कोर्ट ने कहा था कि नशे की जड़ों को समाज से काटना बहुत जरूरी है। आरोपितों के खिलाफ न केवल एनडीपीएस का बल्कि मनी लॉंड्रिंग का मामला दर्ज होना चाहिए। अपराधियों को कम से कम 10 से 20 साल कैद की सजा सुनाई जानी चाहिए और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

पंजाब की AAP सरकार और उनके नशा मुक्त पंजाब को लेकर वादे

साल 2022 में जब पंजाब में चुनाव थे तब AAP प्रमुख केजरीवाल ने राज्य की जनता से वादा किया था कि AAP की सरकार आने के चार महीने के भीतर नशीले पदार्थ पर अंकुश लगवा देंगे। बाद में साल 2023 में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पटियाला में सभा को संबोधित करते हुए कहा ता कि वह अगले स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2024 तक पंजाब से चिट्टे के खतरे को खत्म कर देंगे। हालाँकि वो अपना वादा पूरा करने में विफल रहे जिसके कारण विपक्षी पार्टियों ने उन्हें घेरा भी और उनके वादे को महज ‘लॉलीपॉप’ बताया।
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अब हर साल-छह महीने पर खबरों में कुछ आँकड़े दिए जाते हैं। बताया जाता है कि एक अवधि में पंजाब में कितने ड्रग तस्कर पकड़े गए, कितनों के मादक पदार्थ जब्त हुए आदि। कभी मुख्यमंत्री घोषणा करते हुए कि जो गाँव नशा मुक्त होगा उन्हें विशेष अनुदान मिलेगा, तो कभी कोई टीम बनाकर नशा रोकने की बात होती है… लेकिन इन घोषणा से ज्यादा जरूरी तो ये है न कि देखा जाए जो प्रयास शुरू हुए उससे जमीनी स्तर पर क्या फर्क पड़ रहा है। अगर इसी चरण पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो ‘100 महिलाओं के विधवा’ होने वाली जैसी खबरें कभी आना बंद नहीं होगीं। लड़कियाँ नशे की लत लगाकर वेश्यावृत्ति में धकेली जाती रहेंगी। ड्रोन तस्करों को पकड़ लेगा लेकिन मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली नशीली दवाइयों पर कार्रवाई नहीं होगी।

हमारे इलाके मत आना पता नहीं चलेगा कहाँ गए कहने वाला फोन बंद कर गायब है AAP विधायक अमानतुल्लाह खान : दिल्ली पुलिस CP को ‘एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी’ वाले अंदाज में लिखा पत्र


दिल्ली के आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान की तलाश में दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक छापेमारी की है। अमानतुल्लाह खान पर पुलिस की एक टीम पर हमला करवाने का आरोप है। इस मामले में उसके खिलाफ FIR दर्ज हुई है। अमानतुल्लाह ने दावा किया है कि वह दिल्ली में ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमानतुल्लाह खान मामला दर्ज होने के बाद से अपना फोन बंद करके गायब है। वह अपने घर पर भी नहीं मौजूद था। दिल्ली पुलिस स्पेशंल सेल और क्राइम ब्रांच की टीमें उसकी तलाश में उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक गईं थीं। यहाँ एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की गई। हालाँकि, अभी वह गिरफ्तार नहीं हो सका है।

दिल्ली पुलिस को शक है कि अमानतुल्लाह को कुछ लोग शरण दे रहे हैं। अमानतुल्लाह खान पर मकोका के तहत कार्रवाई भी कर सकती है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि वह जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लेगी। इसके लिए टीमें भी गठित हो गई है।

इस बीच अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को एक पत्र लिखा है। इसमें उसने दावा किया है कि वह दिल्ली में ही है। उसने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस उसे फंसाना चाहती है। उसने उस अपराधी का भी बचाव किया है, जिसके भागने में मदद करने का MLA अमानतुल्लाह का आरोप है।

उसने अपने पत्र में लिखा, “मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में हूं, मैं कहीं भागा नहीं हूँ। दिल्ली पुलिस के कुछ लोग मुझे झूठे मामले में फंसा रहे हैं। जिस व्यक्ति को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार करने आई थी, उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। जब उस व्यक्ति ने अपने कागजात दिखाए, तो पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए मुझे झूठे मामले में फंसा रही है।”

सोमवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम जामिया नगर में एक भगोड़े अपराधी शाहबाज को पकड़ने गई थी। इसी दौरान अमानतुल्लाह अपने समर्थकों के साथ आ गया और दिल्ली पुलिस की टीम को घेर लिया। अमानतुल्लाह और उसके साथ की भीड़ ने आरोपित को भगा दिया।

उन्होंने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और मारपीट की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की। दिल्ली पुलिस ने अमानतुल्लाह खान के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई धाराएं लगाईं और उसकी तलाश चालू की लेकिन वह नहीं मिला।

दिल्ली दारू घोटाले में फिर जेल जा सकते हैं केजरीवाल-सिसोदिया, CBI ने अदालत में दी अर्जी: पंजाब में भगवंत मान की कुर्सी पर खतरा, कांग्रेस का दावा- AAP के 30 MLA संपर्क में


दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को मिली करारी हार के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ती जा रही है। पार्टी को अब राजनैतिक और कानूनी फ्रंट पर समस्याएँ आ रही हैं। दिल्ली के बाद उसका पंजाब का सिंहासन डोल रहा है।

कांग्रेस पंजाब में उसकी सरकार गिराने की फिराक में हैं। दूसरी तरफ शराब घोटाला मामले में मुखिया केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ CBI ने जल्दी मुकदमा चलाने को कदम बढ़ा दिए हैं। AAP को एकसाथ कई फ्रंट पर चुनौती मिलने वाली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में हार के बाद पंजाब की कांग्रेस ईकाई सरकार गिराने में जुट गई है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार (9 फरवरी, 2025) को दावा किया है कि सत्तारूढ़ AAP के 30 विधायक कांग्रेस के सम्पर्क में हैं।

उन्होंने दावा किया है कि यह सम्पर्क पिछले एक वर्ष से बना हुआ है। उन्होंने कहा है कि यह सभी विधायक AAP छोड़ कर कांग्रेस को समर्थन देने को भी तैयार हैं। उन्होंने पार्टी में भीतरी लड़ाई का भी हवाला दिया है।

प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटा कर खुद सीएम बनने का कदम उठा सकते हैं। बाजवा ने कहा है कि आगामी दिनों में पंजाब में एक सीट पर उपचुनाव होना है और इस सीट से केजरीवाल अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अपने करीबियों की बड़ी फ़ौज को समायोजित करने के साथ ही केन्द्रीय एजेंसियों की जाँच एवं कार्रवाई से बचें और फंड्स जुटाने को AAP मुखिया पंजाब का मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करेंगे।”

बाजवा ने यह भी दावा किया कि भगवंत मान दिल्ली में भाजपा के हाईकमान से अपने संबंध सुधारने में जुटे हैं। बाजवा जैसे ही कुछ सुर पंजाब कांग्रेस के मुखिया और सांसद अमरिंदर सिंह ‘राजा वरिंग’ के हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में राज्य के भीतर कई नेता AAP छोड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा है कि अब पंजाब में कांग्रेस असफल ‘पंजाब मॉडल’ और असफल ‘दिल्ली मॉडल’ को लेकर सरकार पर हमलावर होगी। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में AAP की हार, पंजाब में कांग्रेस के लिए ‘आपदा में अवसर’ जैसी है।

वरिंग ने कहा है कि AAP को पंजाब से भी अपना बोरिया बिस्तर बाँध लेना चाहिए। वहीं AAP ने पार्टी में टूट के सभी दावों को नकारा है। पंजाब AAP के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा, “केजरीवाल हमारे राष्ट्रीय संयोजक हैं और भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस का ग्राफ रसातल को जा रहा है। दिल्ली में लगातार तीसरी बार उसका प्रदर्शन जीरो रहा है।”

नील गर्ग ने दावा किया कि 2027 चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन 2022 के मुकाबले और भी बुरा होगा। गौरतलब है कि 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में वर्तमान में AAP को प्रचंड बहुमत हासिल है। उसके पास 93 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास मात्र 16 विधायक हैं।

राज्य में शिरोमणि अकाली दल के पास 3 जबकि भाजपा के पास 2 विधायक हैं। कांग्रेस------ लगातार कहती आई है कि उसका अधिकांश वोट AAP ने ही लिया है। वह अब दिल्ली में AAP की हर और पंजाब में अंदरूनी लड़ाई के शेयर वापसी करने के मूड में है।

AAP के लिए सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि दिल्ली में भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। उसके दोनों बड़े नेताओं केजरीवाल और सिसोदिया पर चुनाव हारने के बाद जेल जाने की तलवार लटक रही है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जमानत पर चल रहे दोनों के खिलाफ जाँच एजेंसी CBI ने मुकदमा जल्दी चालू करने की अर्जी अदालत को दी है।

CBI की एक विशेष अदालत ने सिसोदिया और केजरीवाल के वकीलों से कहा है कि वह मुकदमे के कागजों की जाँच जल्दी पूरी कर लें ताकि जल्द से जल्द मुकदमा चालू किया जा सके। अदालत ने यह बात 3 फरवरी, 2025 को कही। इससे पहले CBI ने कहा है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में 23 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चालू करना चाहती है।

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मैं झूम के नाचूँ आज… AAP की झाड़ू बिखर गई तो क्या, मैंने छोड़ दी सबकी लाज; क्या पंजाब सरकार बीजेपी/क
मैं झूम के नाचूँ आज… AAP की झाड़ू बिखर गई तो क्या, मैंने छोड़ दी सबकी लाज; क्या पंजाब सरकार बीजेपी/क
 

केजरीवाल समेत बाकी लोगों पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की आबकारी नीति ने बदलाव किया जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इस नीति बदलने से निजी विक्रेताओं फायदा पहुंचाया गया और उनसे वापसी में मिले 100 करोड़ रूपए को गोवा चुनाव में खपाया गया।

मैं झूम के नाचूँ आज… AAP की झाड़ू बिखर गई तो क्या, मैंने छोड़ दी सबकी लाज; क्या पंजाब सरकार बीजेपी/कांग्रेस सरकार बन रही है? दिल्ली से लेकर पंजाब तक आप में गुटबाज़ी तेज


दिल्ली चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। आम आदमी पार्टी सत्ता से बेदखल हो गई है और कांग्रेस  लगातार तीसरी बार दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपना खाता नहीं खोल पाई है। लेकिन अपना खोया हुआ वोटबैंक वापस लेने में कुछ हद तक सफल हुई। जिससे INDI गठबंधन में भी जबरदस्त उथल-पथल मच गयी कि अगर कांग्रेस ने अपना वोटबैंक वापस ले लिया हमारा क्या होगा? बावजूद इसके दो ऐसी वीडियोज सामने आई है जिसे देख आप हैरान रह जाएँगे। एक वीडियो दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी की है और दूसरी कांग्रेस नेता रागिनी नायक की। दोनों वीडियो को देख ऐसा लग रहा है जैसे इन लोगों को पार्टी के जीतने की नहीं हारने की ही उम्मीद थी।   

दिल्ली में AAP के हारने के बाद जहाँ पार्टी का हर नेता दुखी था वहीं आ्तिशी खुशी से नाच रही थीं। उन्हें सत्ता जाने का, पार्टी के हारने का, बड़े-बड़े नेताओं के न जीत पाने का कोई दुख नहीं था, उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपनी उस जीत की खुशी थी जो उन्हें आखिरी राउंड की वोटिंग के दौरान बड़ी मुश्किल से मिली। 

आतिशी का ख़ुशी में नाचने की असली वजह थी कि केजरीवाल की कोशिशों के बावजूद खुद हार गए लेकिन वह जीत गयी। बीजेपी हो, कांग्रेस हो या फिर खुद की आप, सब जानते थे कि केजरीवाल खुद अपने नेताओं को हराने में लगा हुआ था, ताकि इनका कद मुझसे बड़ा न होने पाए। जबकि ये सब केजरीवाल को हराने में लगे थे। फिर आतिशी का नाचना तो बनता ही है।     

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने उनकी वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में आतिशी अपने कार्यकर्ताओं के साथ नाचती दिखाई दे रही हैं। स्वाति ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है- ये कैसा बेशर्मी का प्रदर्शन है? पार्टी हार गई, सब बड़े नेता हार गए और आतिशी ऐसे जश्न मना रही है?

लोग इसके नीचे कॉमेंट करके लिख रहे हैं- ये बेशर्मी आतिशी मार्लेना ने अपने मालिक केजरीवाल से सीखी होगी। अब मौका मिला तो बेशर्मी दिखाने में आगे निकल गई। कोई-कोई ये भी लिख रहा है कि हो सकता है कि आतिशी जल्द बीजेपी ज्वाइन कर ले। 

सत्ता के गलियारों में चर्चा जोरों पर है, कुछ नहीं पता, समाचार की पुष्टि नहीं हो पायी है, पूरी पंजाब सरकार कब बीजेपी या कांग्रेस बन जाये। इस समय आम आदमी पार्टी का वजूद ही खतरे में हैं। सब जानते हैं कि CAG प्रस्तुत होने पर केजरीवाल के साथ कितने लोग जेल जायेंगे। केजरीवाल पार्टी के ख़त्म होते ही कांग्रेस अपने खोये वोटबैंक को वापस लेकर INDI गठबंधन पर ही भारी बनने की उम्मीद लगाई जा रही है। इतना ही नहीं दिल्ली में जीते सभी 22 विधायक अपनी इज्जत बचाने कांग्रेस/बीजेपी में जाने की जुगाड़ में हैं। 

    

अगली वीडियो बीजेपी नेता राधिका खेड़ा ने शेयर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “दिल्ली में 4.26% वोट वाली कॉन्ग्रेस का ‘भांगड़ा’ देख कर लगा, जैसे सियासी दफ्तर नहीं, ‘पागलखाने का वार्ड’ खुल गया हो! जिनकी राजनीति को जनता ने बार-बार नकारा,वो अब अपनी हार पर ही जश्न मनाने में मस्त हैं! कॉन्ग्रेस का नया नारा—‘हारो, नाचो, भूल जाओ!”

दिल्ली में मतगणना की प्रतिक्रिया 8 फरवरी को पूरी हुई। भारतीय जनता पार्टी को इन चुनावों में 48 सीटें मिलीं जबकि आम आदमी पार्टी 22 सीट पाकर सिमट कर रह गई। कॉन्ग्रेस भी इन चुनावों में रेस में मानी जा रही थी, लेकिन उन्हें पूरी दिल्ली में सिर्फ 6.34% वोट मिले जो चुनाव में 1 सीट भी नहीं दिला पाए। बीजेपी का वोट शेयर इस बार 45.56% का रहा जबकि AAP का 43.57% का।

कांग्रेस का जश्न ऐसा जैसे AAP को उसने ही हराया: एक होकर भी दिल्ली जीत नहीं पाता INDI गठबंधन; योगी का 'बटोगे तो कटोगे एक रहोगे तो सुरक्षित' नारा कामगर रहा

दिल्ली चुनाव भी में योगी का 'बटोगे तो कटोगे एक रहोगे तो सुरक्षित' नारा कामगर रहा। पीछे हुए नगर निगम चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार हिन्दू बहुल क्षेत्रों से जीतता हुआ आता है लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों की EVM खुलने पर जमानत बचाने के लाले पड़ जाते थे क्योकि मुसलमानों की तरह हिन्दू वोट एकजुट नहीं पड़ता था। लेकिन इस बार हिन्दू ने एकजुटता का परिचय दिया, हालांकि योगी महाकुम्भ में हादसा होने के कारण ज्यादा रैलियां नहीं हो सकी।    
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की है। पार्टी 27 वर्षों के सूखे के बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी है। उसने 10 साल से दिल्ली की गद्दी पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) को बुरी तरह हराया है।

चुनावों में घुसपैठियों का गरमाया मुद्दा शांत नहीं होना चाहिए बल्कि अब सख्ती से एक-एक घुसपैठी को ढूंढ निकालना होगा। मुख्यमंत्री बनने वाले को ढुलमुल नीति अपनाने की बजाए योगी की तरह काम करना होगा। ताकि अब कोई दंगाई किसी शोभा यात्रा पर कोई पत्थरबाज़ी न कर पाए।  

इस चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 45.85 रहा, आम आदमी पार्टी 43.55 तो कांग्रेस 6.35 सीपीआई 0.02 और जेडीयू 0.78 आदि यानि INDI गठबंधन दिल्ली में नहीं के बराबर।  

भाजपा को दिल्ली में 48 सीट मिली हैं जबकि AAP इस चुनाव में 22 सीटों पर सिमट गई है। उसके मुखिया केजरीवाल तक अपनी सीट नहीं बचा पाए। इस चुनाव में कांग्रेस ने अपना पुराना प्रदर्शन दोहराया है, वह लगातार तीसरी बार एक भी सीट पाने में विफल रही है।

कुछ दिनों तक AAP को 50 से अधिक सीटें दे रहे लिबरल और वामपंथी पत्रकार इस जीत को नहीं पचा पा रहे हैं। कई कथित विशेषज्ञ इस जीत को कम करके आंकने का प्रयास कर रहे हैं। स्पष्ट जनादेश को लेकर अलग-अलग तरह के प्रपंच बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषण की दुकान खोलने वालों का दावा है कि AAP की यह हार इसलिए हुई है, क्योंकि इस बार उसे पीछे के दरवाजे से भाजपा को कांग्रेस का साथ मिल गया। जम्मू कश्मीर के नेता उमर अब्दुल्ला ने एक मीम तक पोस्ट किया है, जिसका इशारा है कि AAP-कांग्रेस की लड़ाई से भाजपा जीती है।

AAP की हार के पीछे भाजपा के कार्यकर्ताओं की मेहनत, उसका मजबूत संगठन और रणनीति को श्रेय ना देकर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि यदि कॉन्ग्रेस और AAP मिलकर लड़ते तो भाजपा सत्ता में नहीं आती।

कुल मिलाकर भाजपा की जीत का सेहरा कांग्रेस के माथे बाँधने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस भी इसी आत्ममुग्धता में खुश है कि वह भले नहीं जीती लेकिन अरविन्द केजरीवाल को नीचे लाने में उसका योगदान रहा। उसके दफ्तर से नाचने-भंगड़ा करने के वीडियो आ रहे हैं।

भाजपा की इस जीत की सच्चाई पूरी तरह अलग है। भाजपा की इस जीत का सबसे बड़ा कारण दिल्ली में 10 वर्षों से काबिज AAP के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है। इस एंटी इनकम्बेंसी का सीधा फायदा भाजपा को मिला है। उसका वोट प्रतिशत लगभग 8% बढ़ा है।

जबकि इसी दौरान AAP का वोट प्रतिशत राज्य में 10% घटा है। केजरीवाल से त्रस्त दिल्ली की जनता उन्हें वोट नहीं देना चाहती थी। ऐसे में उसके पास भाजपा का ही विकल्प था। कांग्रेस को AAP की हार और भाजपा की जीत में मदद करने वाला बताने वालों को देखना चाहिए कि कांग्रेस का खुदका वोट प्रतिशत इस बार भी कुछ ख़ास नहीं बढ़ा।

2020 चुनावों में 4.26% वोट लाने वाली कांग्रेस खूब प्रयास करके भी 2025 में दहाई आँकड़ा तक नहीं छू पाई। उसे इस बार 6.3% वोट से संतोष करना पड़ा है। स्पष्ट है कि दिल्ली में कांग्रेस के जो मतदाता AAP की तरफ गए थे, वह अब भी कांग्रेस को एक विकल्प के तौर पर नहीं देखते।

उन्हें AAP के जवाब में भाजपा ही बेहतर लगती है। कांग्रेस इसी के चलते लगातार तीसरी बार एक भी सीट नहीं जीत पाई। कांग्रेस के वोट में जो हलकी सी बढ़ोतरी हुई भी है, वह एंटी इनकम्बेंसी वाले वोट का ही एक हिस्सा है।

जो लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि अगर AAP और कांग्रेस मिल जाते तो दिल्ली में भाजपा नहीं आती, जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं। दरअसल, AAP इसलिए नहीं हारी है क्योंकि कांग्रेस उसके खिलाफ थी, बल्कि इसलिए हारी है क्योंकि दिल्ली की जनता उससे नाराज थी।

अगर कांग्रेस उसके साथ मिलकर भी लड़ती तो भी नतीजा लगभग यही रहता। क्योंकि इस गठबंधन से एंटी इनकम्बेंसी का फैक्टर नहीं खत्म होने वाला था। जिन चुनावों में सरकार के खिलाफ प्रबल एंटी इनकम्बेंसी का फैक्टर होता है, वहाँ उस पार्टी की भी दुर्गति होती है, जो सत्ताधारी पार्टी के साथ गठबंधन करती है।

2017 के उत्तर प्रदेश के चुनाव इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। कांग्रेस ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा से गठबंधन किया था। लेकिन दोनों ही पार्टियाँ बुरी तरह हारीं और भाजपा रिकॉर्ड 300+ सीटों के साथ सत्ता में आई। और इस चुनाव में भी AAP को अखिलेश यादव तथा ममता बनर्जी ने समर्थन दिया था, उनका कोई भी असर चुनाव पर नहीं दिखा। 

दूसरी तरफ भाजपा की जीत में एंटी इनकम्बेंसी के अलावा उसके दिल्ली के अपने वोटबैंक का भी बड़ा हाथ है। दिल्ली में भाजपा का लगातार 35%-40% वोट प्रतिशत हर चुनाव में बना रहा है। यह उसे निश्चित तौर पर मिलता है। इस जीत में उसका यह निश्चित वोटबैंक और साथ ही एंटी इनकम्बेंसी के चलते उसकी तरफ आए दिल्ली वालों का वोट शामिल है।

कॉन्ग्रेस ने पिछले चुनावों में कोई असर डाल पाई थी और ना इस बार कुछ कर पाई है। अगर AAP+कांग्रेस गठबंधन हो भी जाता तो भी नतीजा कोई ख़ास अलग नहीं होता, दोनों पार्टियों के गठबंधन का हश्र कुछ ही महीने पहले देश भर ने दिल्ली में देखा है।

यदि तर्क यह दिया जाए कि AAP और कांग्रेस मिलकर भाजपा से ज्यादा वोट ले आते और सरकार बन जाती तो उन्हें लोकसभा चुनाव याद करना चाहिए। लोकसभा में दोनों पार्टियों के गलबहियाँ करने के बावजूद भाजपा ने लगातार तीसरी बार 7 की 7 सीट जीत ली थीं।

और यहाँ याद रखना होगा कि लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एकदम अलग होता है। ऐसे में गठबंधन के समय जो व्यक्ति AAP से गुस्सा होकर वोट देता तो भाजपा की तरफ जाता ना कि कांग्रेस के साथ होने के चलते रुकता।

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ऐसे में बेहतर होगा कि कांग्रेस को इस जीत का श्रेय देने के बजाय विश्लेषक भाजपा की एक संगठन के रूप में प्रशंसा करें। उसके चुनावी मैनेजमेंट को समझें। साथ ही वह कांग्रेस को उसकी खामियाँ बताएँ, जिसके चलते उसे लोग सत्ता देना तो दूर, एक सीट भी देने को राजी नहीं थे।