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क्या 6 जून को दिल्ली में दंगे की साज़िश? : ‘एयरपोर्ट से शुरू करेंगे हंगामा, हाथ में लाठी-पेपर स्प्रे लेकर आना’ : कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक सरेआम कर रहे हिंसा भड़काने का प्रयास, बोल रहे- इस बार नेपाल बना देंगे

   दिल्ली का माहौल बिगाड़ने के लिए CJP समर्थक लोगों को उकसा रहा (फोटो साभार : X_@AnkurSingh Video SS
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक 6 जून को प्रदर्शन के नाम पर हिंसा भड़काने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्होंने अभी से कोशिशें शुरू कर दी हैं। सोशल मीडिया पर एक Video वायरल हुई, जिसमें एक CJP समर्थक हर्षित उकसाऊ बातें करता सुनाई पड़ता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनका मकसद जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नहीं बल्कि माहौल बिगाड़ने का है।

Video में ये समर्थक साफ तौर पर धमकी देता दिख रहा है कि अगर अभिजीत डीपके को इमिग्रेशन पर रोका गया, तो एयरपोर्ट से ही भारी हंगामा खड़ा किया जाएगा… इस बार ‘आर-पार’ की लड़ाई होगी। Video में खुलेआम कहा गया कि ‘अब बहुत सह लिया, इस बार दिल्ली को नेपाल बना देंगे… अपने साथ लाठियाँ और पेपर स्प्रे लेकर आना।

गौरतलब है कि 6 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने कहीं किसी से कोई परमिशन नहीं ली है। उलटा उसके प्रवक्ता इस बात पर गर्व कर रहे हैं कि वो इसी सिस्टम से लड़ने के लिए तो प्रदर्शन कर रहे हैं, तो परमिशन क्यों लेंगे?

कहने को तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) इसे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन बता रहा है, लेकिन अंदरूनी हकीकत कुछ और ही है। Video में साफ सुना जा सकता है कि लोगों से सुरक्षा के बहाने लाठियाँ, डंडे और पेपर स्प्रे खरीदकर लाने को कहा जा रहा है ताकि पुलिस का सामना किया जा सके।

दावा किया जा रहा है कि इस बड़ी साजिश में वामपंथी छात्र संगठन AISA और JNU गैंग भी शामिल हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर दिल्ली को हिंसा की आग में झोंकने के लिए पूरी प्लानिंग कर ली गई है। प्रशासन को इस भड़काऊ Video पर तुरंत सख्त एक्शन लेना चाहिए।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के पीछे दंगे वाली पुरानी साजिश

सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने माना है कि 6 जून के प्रदर्शन के लिए कोई परमिशन नहीं ली गई है। अभिजीत फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहा है। वह दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का पुराना समर्थक है। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास भी उमर खालिद का खुलकर साथ देते रहे हैं।

साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे अचानक नहीं हुए थे। वह उमर खालिद और उसके वामपंथी-इस्लामी ग्रुप की एक सोची-समझी साजिश थी। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय जानबूझकर हिंसा भड़काई गई थी।

अब यह संगठन एक बार फिर दिल्ली में वैसा ही माहौल बनाना चाहता है। Video में ‘नेपाल’ का जिक्र होना इसका बड़ा सबूत है। नेपाल में पिछले साल बेहद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये लोग अब भारत की राजधानी में भी उसी हिंसा और अराजकता को दोहराना चाहते हैं।

केजरीवाल मीडिया का नया शिगूफा : ‘कोर्ट ने केजरीवाल को सभी गुनाहों से किया बरी…’ AAP नेताओं की ‘ईमानदारी’ के शिगूफे

                                                    केजरीवाल को कोर्ट ने नहीं किया है बरी
सोशल मीडिया पर एक बार फिर पुराना खेल शुरू हो गया है। अधूरी खबर, आधा सच और पूरा प्रोपेगैंडा। गुजरात में आम आदमी पार्टी के कुछ नेता और समर्थक पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को लेकर नया नैरेटिव बनाने में लग गए है। इनका कहना है कि दिल्ली की एक कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है।

यह दावा ऐसे बेचा जा रहा है जैसे केजरीवाल को दिल्ली शराब पॉलिसी स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई हो, जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो और अब BJP ‘झूठे आरोप’ लगाकर केजरीवाल को बदनाम कर रही हो।

कुछ ‘मीडिया’ पेज और हैंडल्स भी इस झूठ को आगे बढ़ाने में एक्टिव दिख रहे हैं, जिनमें ‘निर्भय न्यूज़’ जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन लोगों का काम खबर देना नहीं, बल्कि ‘पार्टी-स्पेसिफिक’ के लिए माहौल बनाना है। हेडलाइन्स इस तरह से बनाई जाती हैं कि आम आदमी उन्हें पढ़कर मान ले कि ‘केजरीवाल बरी हो गए हैं।’

लेकिन सच तो यह है कि केजरीवाल को शराब स्कैम या मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने ‘निर्दोष’ नहीं बताया है। जिस फैसले को गलत तरीके से ‘दोषी नहीं’ बताया जा रहा है, वह एक अलग और टेक्निकल मामला है। दरअसल यह ED के भेजे समन से जुडा है, न कि शराब घोटाला से। इस पूरे मामले को समझना जरूरी है, क्योंकि जनता को गुमराह करने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है।

AAP का झूठा दावा

आम आदमी पार्टी गुजरात के ऑफिशियल X हैंडल से किए गए पोस्ट में दावा किया गया है, “आज दिल्ली की कोर्ट ने ED के दर्ज झूठे मामलों में अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है।” पोस्ट की भाषा और टोन ऐसी है जैसे कोर्ट ने केजरीवाल को किसी बड़े स्कैम से बरी कर दिया हो।

पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने भी यही प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी गुजरात के जनरल सेक्रेटरी मनोज सोरठिया ने भी ऐसा ही दावा किया है कि केजरीवाल ‘सभी जुर्मों’ से बरी हो गए हैं। उन्होंने एक वीडियो में तो यह भी दावा किया है कि ‘अगर केजरीवाल ईमानदार नहीं हैं, तो दुनिया में कोई भी ईमानदार नहीं है।’ उन्होंने ‘सत्यमेव जयते’ के साथ बकवास की है और BJP पर इल्जाम लगाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि BJP ने भ्रष्टाचार, शराब, फाइनेंशियल गड़बड़ियों वगैरह के कई आरोप लगाए, लेकिन कोर्ट ने ‘केजरीवाल को सभी जुर्मों से बरी कर दिया।’

इसी तरह, गुजरात AAP की गौरी देसाई और AAP प्रेसिडेंट यसुदन गढ़वी ने भी वीडियो बनाकर केजरीवाल को ‘बेगुनाह’ बताया है और उन्हें ‘कट्टर ईमानदार’ का टैग दे दिया है। गौरी ने तो यहाँ तक ​​कहा, “ED के आरोप झूठे साबित हुए हैं।” इसके अलावा, ‘सच को परेशान किया जा सकता है, हराया नहीं जा सकता’।

अब सवाल यह है कि क्या कोर्ट ने सच में केजरीवाल को ‘सभी जुर्मों’ से बरी कर दिया है? जवाब है — नहीं। ‘जिम्मेदार और समर्पित’ मीडिया भी बड़ी ही चालाकी से सॉफ्ट ब्रेनवॉश करने से नहीं चूक रहा। इनमें सबसे बड़ा नाम ‘निर्भय न्यूज़’ का है। ‘निर्भय न्यूज़’ ने जो हेडलाइन चलाई, उसमें सीधे कहा गया था कि ‘दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल को बरी कर दिया’ और उसी के आधार पर AAP नेता चैतर वसावा का बयान जोड़ा गया।

यह प्रोपेगैंडा फैलाने की पुरानी ट्रिक है। पहले कोई गलत नतीजा निकालो, फिर किसी नेता का रिएक्शन दिखाकर उसे ‘न्यूज’ बना दो। ऐसी हेडलाइंस जिससे दर्शक समझें कि केजरीवाल ‘बच गए’, ‘बेगुनाह और बेकसूर’, ‘क्लीन चिट मिल गई’। यह झूठ फैलाने का एक तरीका है।

दरअसल ED ने केजरीवाल को कुछ समन भेजे थे और आरोप यह था कि केजरीवाल ने उन समन को नजरअंदाज किया। इसी मुद्दे पर कोर्ट ने कजरीवाल को राहत दी।

यह राहत किसी घोटाले से बरी करने का नहीं है। यह राहत एक प्रोसिजरल/टेक्निकल पहलू पर आधारित है, यानी समन के प्रोसेस, सर्विस, वैलिडिटी और उससे जुड़े लीगल मामलों पर। आसान भाषा में कहें तो यह घोटाले में बरी होना नहीं है, बल्कि ‘समन प्रक्रिया’ से जुड़े मामले में राहत है।

यह ऐसा है जैसे कोई आदमी मेन केस में आरोपी हो, लेकिन उसे एक अलग केस में राहत मिल जाए और उसके सपोर्टर यह कहकर जश्न मनाने लगें कि वह ‘सभी चार्ज से बरी’ है। यह कोई जश्न नहीं है, बल्कि जनता को उल्टा चश्मा पहनाने की एक चाल है।

तो क्या शराब पॉलिसी/मनी लॉन्ड्रिंग केस खत्म हो गया है? बिल्कुल नहीं

आम आदमी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता यह बात छिपा रहे हैं कि दिल्ली शराब स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस अलग-अलग हैं और उनका लीगल प्रोसेस चल रहा है। जिस तरह से AAP सपोर्टर ‘निर्दोष’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे लोगों को लगता है कि कोर्ट ने केजरीवाल को शराब पॉलिसी केस में भी क्लीन चिट दे दी है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ है।

मुख्य बात यह है कि केजरीवाल को शराब केस में कोई राहत नहीं मिली है, मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी भी चल रहा है, दूसरे सीरियस केस भी चल रहे हैं और उन्हें जो राहत मिली है, वह सिर्फ उसी केस में है जिसमें ED ने उन्हें समन दिया है और अब वह उससे परेशान भी नहीं हैं, क्योंकि केजरीवाल ने समन भी नहीं माने हैं और तिहाड़ जेल में भी रहे हैं और बेल पर बाहर भी आए हैं। इसलिए अब समन जैसी छोटी-मोटी बातों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

असलियत यह है कि केजरीवाल पर अभी भी शराब पॉलिसी स्कैम, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में सुनवाई चल रही है और कोर्ट ने उनमें कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया है। यह पहली बार नहीं है जब AAP ने किसी कानूनी घटना को ‘सच की जीत’ और ‘क्लीन चिट’ के तौर पर पेश किया है। पार्टी पॉलिटिक्स का एक लगातार पैटर्न रहा है-

  1. जाँच एजेंसी पर हमला करना
  2. हर एक्शन को ‘पॉलिटिकल बदला’ दिखाना
  3. टेक्निकल राहत के जरिए ‘बेगुनाही साबित करना’
  4. सपोर्टर्स द्वारा सोशल मीडिया पर नैरेटिव को आगे बढ़ाना
  5. मीडिया पेजों से हेडलाइन चलाना।
इससे जनता को नुकसान होता है, क्योंकि आम नागरिक के पास हर खबर की कानूनी परतें खोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। वह सिर्फ हेडलाइन पढ़ता है और मान लेता है कि ‘कोर्ट ने बरी कर दिया।’ यही इस प्रोपेगैंडा का लक्ष्य है, सिर्फ नैरेटिव गढ़ना।

झारखण्ड में बंटने पर कटने की नौबत आ गयी ; ‘तुम कमल फूल में वोट दिया है, तुमको गाँव से बेदखल करेंगे, मार कर फेंक देंगे’: झारखंड में INDI गठबंधन के जीतते ही इस्लामी गुंडागर्दी शुरू

झारखंड के साहिबगंज और मधुपुर में JMM समर्थकों ने भाजपा के वोटरों को धमकाया, पुलिस से बात करते पीड़ित (फोटो साभार: FB/सोनू गुप्ता)
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'बंटोगे तो कटोगे' झारखण्ड में सच साबित होना शुरू हो गया है। किसी INDI गठबंधन की आवाज़ नहीं निकल रही। हिन्दू कब नींद से जागेगा?  झारखंड विधानसभा चुनावों INDI गठबंधन की जीत के बाद बीजेपी समर्थकों को धमकी देने की घटनाएँ सामने आई है। साहिब गंज जिले में बीजेपी समर्थक एक मुस्लिम युवक को उसके ही बिरादरी के लोग गाँव से निकालने और हत्या की धमकी दे रहे हैं। वहीं मधुपुर में एक बीजेपी समर्थक के घर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। कथित तौर पर हमलावरों ने घर पर लगे भाजपा के झंडे को उखाड़कर उस पर पेशाब किया।

पहला मामला साहिबगंज जिले के रांगा थाना क्षेत्र की है। मोहम्मदपुर गाँव के इमाम मिर्जा ने रविवार (24 नवंबर 2024) को पुलिस में तहरीर दी। उन्होंने बताया है कि भाजपा को वोट देने के कारण रिजल्ट आने के बाद से गाँव के ही महबूब शेख, मजहरुल शेख, मुन्ना शेख, मुस्तफा शेख और आशिक शेख के साथ मोहब्बतपुर का शमीम शेख उसे मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहे हैं।

पीड़ित ने बताया कि उसको मौत की धमकियाँ मिल रही हैं। कथित तौर पर आरोपितों ने पीड़ित से कहा, “तुम कमल फूल में वोट दिया है, इसीलिए हम तुमको गाँव से बेदखल कर देंगे। तुमको जान से मार कर वैसी जगह में फेंक देंगे कि नामोनिशान मिट जाएगा। तू मेरा बाल भी नहीं बिगाड़ पाएगा। मुख्यमंत्री से लेकर थाना प्रभारी तक हमारे कब्जे में आ गया है।”

चुनाव में हार का सामना करने वाले भाजपा प्रत्याशी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि पीड़ित के घर पर पत्थरबाजी की भी गई है। 2 लोगों को को चोटें भी आई हैं। भाजपा नेता ने साहिबगंज पुलिस से माँग की है कि वे आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे। भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए कहा है कि पूरे प्रदेश में भाजपा के कार्यकर्ताओं को टारगेट किया जा रहा है।

भाजपा के झंडे पर किया पेशाब

दूसरा मामला झारखंड के ही मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मदनकट्टा इलाके का है। विधानसभा चुनावों में यहाँ से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी हफीजुल हसन ने जीत दर्ज की है। रविवार (24 नवंबर 2024) को उनकी जीत की ख़ुशी में मदनकट्टा इलाके में विजय जुलूस निकाला गया था। यह जुलूस जैसे ही भाजपा समर्थक संजय गुप्ता के घर से आगे से गुजरा, इसमें शामिल कुछ लोगों ने उपद्रव शुरू कर दिया।
आरोप है कि विजय जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने संजय गुप्ता के घर पर लगा भाजपा का झंडा उखाड़ कर फेंक दिया। बाद में इसी झंडे पर पेशाब भी किया। जब संजय गुप्ता ने इसका विरोध किया तो उनकी पिटाई की गई। गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी गई। इसमें से कुछ हरकतों का CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

Thank You उत्तर प्रदेश हुड़दंगियों को जिताने के लिए : इमरान मसूद के जीतते ही समर्थकों ने दिखाया ‘रंग’, 150+ बाइक पर सवार हो सहारनपुर की सड़कों पर किया हुड़दंग

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कॉन्ग्रेस के नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद इमरान मसूद की जीत के बाद उनके समर्थकों ने सड़कों पर जमकर हुड़दंग किया और महिलाओं से अश्लील इशारे किए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि सैकड़ों बाइक पर सवार उनके हुड़दंगी समर्थक हंगामा कर रहे हैं। एक-एक बाइक पर चार-चार हुड़दंगी बैठे और खड़े थे। इसमें चारपहिया वाहन पर शामिल थे।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और पश्चिमी यूपी में एक बार फिर अराजकता को लेकर लोग चिंता जाहिर करने लगे। फिलहाल, पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है और 5 नामजद सहित 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हुड़दंग करने वाले लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है। जागरण के अनुसार, रैली में 150 बाइक शामिल थी।

कहा जा रहा है कि बाइकों पर सवार हुड़दंगियों का काफिला कुतुबशेर थाने के सामने हूटिंग करते हुए और महिलाओं को अश्लील इशारे करते हुए निकला। इस दौरान पुलिस विवश नजर आती रही। सहारनपुर शहर के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कार्रवाई की माँग की है। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया है।

दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन ने इमरान मसूद को मैदान उतारा था। उन्हें इस लोकसभा चुनाव में भारी जीत मिली है। इमरान मसूद को 5,47,967 वोट मिले हैं। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा को 4,83,425 वोट मिले। इस तरह इमरान मसूद ने 64,542 वोटों से जीत हासिल की है।

इसी जीत को लेकर उनके समर्थक हुड़दंग मचा रहे थे। बाइक रैली में एक-एक बाइक पर चार-चार, पाँच-पाँच लोग बैठे थे। कुछ बाइकों पर तो दो लोग बैठे दिखे और दो लोग खड़े दिखे। इस दौरान लोगों ने जमकर नारे लगाए और हंगामा किया। कुछ समर्थकों के सिर पर नमाजी टोपी भी दिखी। रैली के दौरान जाम की स्थिति बन गई। इसी दौरान किसी राहगीर ने इसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो 4 जून 2024 की रात का है। वीडियो अंबाला रोड के पास की है। अंबाला रोड कुतुबशेर थाने के पास का है। इस मामले में सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विपिन टाडा ने कहा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए 50 अज्ञात लोगों और 5 नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे के बाद कुछ युवक हंगामा कर रहे थे।

मध्य प्रदेश : जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही गुंडई पर उतरे समर्थक: महाकाल मंदिर में तोड़ डाले दरवाजे

                         महाकाल मंदिर में जीतू पटवारी के समर्थकों ने की तोड़फोड़ (फोटो साभार: नई दुनिया)
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार (19 दिसंबर, 2023) को पद सँभाल लिया। भोपाल में 
कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने से पहले वो उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना के बाद भोपाल पहुँचकर अध्यक्ष पद की कुर्सी सँभाली। इस बीच, महाकाल मंदिर में जीतू पटवारी के समर्थक कांग्रेसियों ने जमकर दबंगई की और महाकाल के मंदिर में ही धक्कामुक्की करते हुए गेट का काँच ही तोड़ दिया। इस मामले में CCTV फुटेज के साथ मंदिर प्रबंधन ने जीतू पटवारी के समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुँचे। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल के मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आए जीतू पटवारी के साथ ढोल-नगाड़े बजाने वालों तक की टीम थी और समर्थकों का बड़ा हुजूम भी। जब वो मंदिर में पूजा के लिए घुसने लगे, तो उनके समर्थकों ने भी मंदिर में घुसने की कोशिश की। उन्हें जब रोका गया, तब समर्थकों ने धक्का-मुक्की की और काँच से बना गेट भी तोड़ दिया। अब इस मामले में मंदिर प्रबंधन समिति ने महाकाल पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया है।

महाकाल मंदिर के प्रशासक संदीप कुमार सोनी के हवाले से ‘नई दुनिया’ ने बताया है कि जीतू पटवारी के अलावा कुछ लोगों को दर्शन की विशेष अनुमति दी गई थी। उनके साथ कार्यकर्ताओं के आने का अनुमान भी था। इसे देखते हुए श्री महाकाल महालोक, वीआइपी गेट, काला गेट तथा नगाड़ा गेट पर भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बल सुरक्षा बल तैनात किया गया था। इसमें पुलिस व मंदिर समिति के गार्ड शामिल थे। सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को भीतर प्रवेश करने से रोका, बावजूद इसके कुछ लोग नगाड़ा गेट तक पहुँच गए। इन लोगों ने गेट को पार करके नंदी हाल में प्रवेश करने का प्रयास किया, सुरक्षाकर्मियों ने इन्हें रोका। इस दौरान धक्का-मुक्की में गेट का काँच फूट गया।

इस मामले में सीसीटीवी की फुटेज के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नंदी हाल में सिर्फ 20 लोगों के प्रवेश की अनुमति थी, जबकि इससे कहीं ज्यादा लोग घुस गए। अब अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बताया कि महाकाल थाना पुलिस ने अज्ञात कांग्रेसियों पर धारा 294, 323, 506, 34 भादवी धारा 37 (च) (छ) महाकाल मंदिर अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में आरोपितों की पहचान की जा रही है, इसके बाद नामजद मामला दर्ज किया जाएगा।

इंदौर से उज्जैन फिर भोपाल पहुँचे जीतू

जीतू पटवारी के साथ बड़ा काफिला इंदौर से उज्जैन पहुँचा था। इसके बाद ये काफिला भोपाल पहुँचा। भोपाल में जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए चुनावी वादों को पूरा करवाना है। अगर बीजेपी सरकार ऐसा नहीं करेगी, तो जल्द ही भोपाल में 2 लाख से अधिक लोगों की रैली बुलाई जाएगी। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि कॉन्ग्रेस में अब कोई गुटबाजी नहीं रह गई है।

केजरीवाल स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं : कुमार विश्वास

कृषि कानूनों के विरोध में हुए मोदी विरोधियों द्वारा समर्थित तथाकथित किसान आंदोलन में भी खालिस्तान नज़र आया। 26 जनवरी को लाल किला पहुँच उपद्रव करने पर भी मोदी विरोधी पार्टियां इस आंदोलन को अपना समर्थन देती रहीं। यानि भारत में राजनीति नहीं सियासत इतने निचले स्तर पर पहुंची हुई, जहाँ कुर्सी के भूखे नेताओं और इनकी पार्टियों की नज़र सिर्फ सत्ता पर है देश पर नहीं। जिस खालिस्तान ने देश की प्रधानमंत्री की जान ले ली, उसके बावजूद विपक्ष द्वारा सरकार के साथ नहीं खड़ा होना इनका छद्दम देशप्रेम दर्शा रहा है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से इस सरहदी राज्य में खालिस्तानी शक्तियां फिर से सिर उठा रही हैं। विदेशों में बैठे खालिस्तानी आतंकियों से स्थानीय लोगों के ‘गठजोड़’ की कहानियां कई बार सामने आने के बावजूद मान सरकार बंद आंख से तमाशा देखने में मशगूल है। पंजाब से लेकर दिल्ली तक और आस्ट्रेलिया से लेकर कनाडा और अन्य देशों तक खालिस्तानी समर्थक राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हैं। 
पंजाब में AAP की मान सरकार आने के बाद फिर KHALISTAN बनाने की मांग तेज
पंजाब में तो सरकार की नाक के नीचे खालिस्तानी समर्थकों ने खुलेआम जुलूस निकाला था। इसे रोकना तो दूर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने इसे बकायदा पुलिस प्रोटेक्शन दिया। आप सरकार के ऐसे ही सहयोगात्मक रवैये का ही दुष्परिणाम हाल ही में दिल्ली और ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों की सक्रियता को लेकर सामने आया है। एक ओर केंद्र की पीएम मोदी सरकार की आतंक, आतंकियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर प्रहार करने के लिए जीरो टोलरेंस नीति लगातार जारी है। दूसरी ओर आप की दिल्ली और पंजाब की सरकार राष्ट्र विरोधी खालिस्तानी समर्थकों के लिए पलक-पांवड़े बिछा रही है।

मोदी सरकार की आतंकियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति
मोदी सरकार ने जीरो टोलरेंस नीति आतंकवादी समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) सहित कुछ संगठनों को आतंकवादी घोषित कर उनपर प्रतिबंध लगाया था। टीआरएफ पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा समूह है। अब आईएसआई समर्थित खालिस्तान टाइगर फोर्स के सहयोगी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला के खिलाफ गृह मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन देने और जबरन वसूली में शामिल रहे कनाडा में रहने वाले अर्शदीप सिंह गिल को आतंकवादी घोषित कर दिया है। पंजाब में जन्मा और अभी कनाडा में बसा गिल उर्फ अर्श डल्ला बड़े स्तर पर मादक पदार्थों तथा हथियारों की सीमापार तस्करी में शामिल है। वह प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) के साथ जुड़ा है और घोषित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की तरफ से आतंकी मॉड्यूल का संचालन करता है। गिल ऐसे अनेक मामलों में आरोपी है, जिन्हें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने दर्ज किया है और जिनमें एजेंसी जांच कर रही है।

केजरीवाल स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं- विश्वास
आप और खालिस्तानी समर्थकों का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से चार दिन पहले भी पूर्व आप नेता कुमार विश्वास ने सनसनीखेज खुलासा किया था कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को खालिस्तानी अलगाववादियों की मदद लेने में भी कोई परहेज नहीं है। विश्वास का आरोप था कि केजरीवाल पंजाब में चुनाव जीतने और आप की सरकार बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्योंकि अरविंद केजरीवाल पंजाब में अलगाववादियों के समर्थक हैं। कुमार विश्वास ने कहा कि एक बार केजरीवाल ने उनसे कहा था कि वे या तो पंजाब के मुख्यमंत्री बनेंगे या स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनकर अपना पीएम बनने का सपना साकार करेंगे। इसीलिए केजरीवाल को अलगाववादियों की मदद लेने में भी कोई परहेज नहीं है। विश्वास ने कहा कि एक ऐसा आदमी जिसे एक समय मैंने ये तक कहा था कि अलगाववादियों का साथ नहीं लीजिए। तो उन्होंने कहा था कि नहीं-नहीं हो जाएगा।

मान के राज में बठिंडा में खालिस्तान के समर्थन में नारे और होशियारपुर में निकाली रैली
कवि कुमार विश्वास की बातों में दम इसलिए नजर आने लगा है, क्योंकि पंजाब में मान सरकार बनने के बाद खालिस्तान समर्थक एक बार फिर सक्रिय नज़र आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के बठिंडा में वन विभाग के दफ्तर की दीवार पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे पाए गए हैं, तो वहीं होशियारपुर में खालिस्तान समर्थक रैली निकाली गई। और तो और इसमें भारत विरोधी और पंजाब बनेगा खलिस्तान जैसे नारे लगाए गए। इन नारों के पीछे प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ की भूमिका सामने आई। ये दावा खुद इस आतंकी संगठन के चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किया है। हैरानी की बात यह है कि होशियारपुर में खालिस्तान समर्थक रैली राज्य पुलिस की मौजूदगी में ही निकाली गई। अब इस पर फिल्ममेकर अशोक पंडित ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को घेरा था। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि यह अरविंद केजरीवाल का खालिस्तानियों के लिए उधार चुकाने का समय है, क्योंकि खालिस्तान वालों ने ही चुनाव के समय केजरीवाल जी का समर्थन किया था।

राजधानी में बड़ी वारदात की साजिश रच रहे दो खालिस्तानी समर्थक गिरफ्तार
आप नेताओं की शह पर खालिस्तान समर्थकों की सक्रियता बनी हुई है। देश की राजधानी से दिल्ली पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। दोनों खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सदस्य हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली के कई इलाकों में दीवारों पर खालिस्तानी संदेश लिखे थे। वहीं देश की खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी समर्थकों के एक्टिव होने की सूचना जारी करते हुए बड़ा हमला होने की चेतावनी दी है। इसके बाद से पूरी दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है और चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है। दोनों आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं। ये विदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू के इशारे पर दिल्ली में खालिस्तानी स्लीपर सेल के साथ कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक दोनों को देश-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग की गई थी।

दिल्ली में कई जगह पंजाब बनेगा खालिस्तान और रेफरेंडम 2020 के लगाए पोस्टर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार दोनों आरोपी विक्रम सिंह व बलराम सिंह विदेश में बैठे गुरपंत सिंह पन्नू के इशारों पर काम कर रहे थे। वो खलिस्तानी टेरर नेटवर्क के स्लीपर सेल की मदद से किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। 12 जनवरी को दिल्ली के जनकपुरी, तिलक नगर, पश्चिम विहार समेत तकरीबन 12 जगहों पर खालिस्तान के समर्थन में लगे पोस्टर एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे। इतना ही नहीं रेफरेंडम 2020 लिखकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने इन पोस्टरों को हटाकर दिवारों पर पेंट किया। इससे पहले खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने भी वीडियो जारी करके दिल्ली में हमले की धमकी दी थी। लाल किले पर झंडा फहराने वाले को 5 मिलियन डॉलर का इनाम देने की बात भी कही थी। पुलिस सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन पोस्टरों को लगाने वालों की पहचान करने में जुटी है। इन समर्थकों ने अंग्रेजी व गुरमुखी में खालिस्तान जिंदाबाद, एसएफजे, 1984, पंजाब बनेगा खालिस्तान और रेफरेंडम 2020 वोट फॉर खालिस्तान जैसे राष्ट्रविरोधी नारे लिखे गए थे।

ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों ने तिरंगा लिए भारतीयों पर किया हमला
राजधानी दिल्ली ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में भी खालिस्तानी समर्थक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को अपने हाथों में लेकर खड़े भारतीयों पर हमला किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है। इस घटना में पांच लोग घायल हो गए जिनको अस्पताल में भर्ती किया गया है। ऑस्ट्रेलिया टुडे ने ट्वीट कर बताया कि मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में खालिस्तान समर्थकों के हमलों में पांच लोग घायल हो गए। वीडियो वायरल होने के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थक द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है।

ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर पर दो स्क्वायर से दो खालिस्तानी पकड़े
भाजपा नेता सिरसा ने कहा कि असामाजिक तत्व जो इन गतिविधियों से देश की शांति और सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ छात्र तिरंगा झंडा लिए हुए खड़े हैं तभी वहां खालिस्तानी समर्थक अचानक आते हैं और तिरंगा झंडा लिए स्टूडेंट और कुछ लोगों को खदेड़ देते हैं और उन पर हमला कर रहे हैं वहीं खालिस्तान समर्थक अपना खुद का झंडा हाथ में लिए हैं। हिंदू ह्यूमन राइट्स ऑस्ट्रेलेशिया की निदेशक सारा एल गेट्स ने खालिस्तान समर्थकों के एक समूह द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ले जा रहे एक भारतीय युवक को खदेड़ते हुए ट्विटर पर वीडियो साझा किया। 

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ऑस्ट्रेलिया टुडे ने पहले बताया कि भारतीयों ने विक्टोरिया पुलिस को सूचित किया था कि उन्होंने देश में बढ़ती खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर पर एक विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। इस बीच हमले की निंदा करते हुए विक्टोरिया पुलिस ने बताया कि हिंसक हमले के बाद अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए दो लोगों की उम्र 30 साल के आसपास है और उन्हें दंगाई व्यवहार के लिए पेनल्टी नोटिस जारी किया गया है।