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CJP आम आदमी पार्टी की B-टीम है : कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व समर्थक ने खोली सारी पोल

        कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने खोली AAP नेताओं की पोल (फोटो साभार : News18
वो कहावत है ना… देर आए, दुरुस्त आए। ये ही कहावत अब कॉकरोच जनता पार्टी में देखने को मिल रही है। जी हाँ, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग का मुद्दा अब कहीं भटकता दिखाई दे रहा है। तिलचट्टों के ग्रुप में अब कलह पैदा होती दिख रही है। सीजेपी में अब उनके ही प्रदर्शनकारी पार्टी पर आरोप लगाते दिखाई नजर आ रहे हैं। आंदोलन में लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने संगठन और उसके AAP नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत में वीरू भाई ने खुलासा किया कि वह करीब एक महीने तक इस आंदोलन से जुड़े रहे, लेकिन अब उन्होंने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन से अलग कर लिया है। उनका सीधा आरोप है कि खुद को गैर-राजनीतिक बताने वाली सीजेपी असल में आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने आंदोलन में असामाजिक तत्वों के घुसने का भी दावा किया है। 

इस पार्टी के बनने पर सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि इसमें छात्र कम असामाजिक तत्वों का जमावड़ा है। राहुल गाँधी पहले ही देश में माजिस दिखाने की देर की बात कर रहा था, इस आदमी ने मिले LoP पद की गरिमा को ही तार-तार कर दिया है।   

टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि वे एक महीने पहले बिहार में अपना घर छोड़कर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। उनके परिवार ने बार-बार उन्हें इसमें शामिल न होने की सलाह दी थी और कहा था कि सीजेपी ‘केवल नाटक कर रही है’, लेकिन वे इस उम्मीद में अड़े रहे कि सीजेपी शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्ष कर रही है।

आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत के दौरान वीरू भाई ने बताया कि आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को काफी उम्मीदें थीं। उन्हें लगता था कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेता इस प्रदर्शन में उनका साथ देंगे। लोगों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेता मार्च में समर्थन करने जरूर आएँगे।

लेकिन ऐन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोई भी बड़ा नेता वहाँ नहीं पहुँचा। पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने गद्दार पार्टी AAP से सवाल किया कि अगर आम आदमी पार्टी सच में इस आंदोलन का समर्थन कर रही थी, तो फिर उसका कोई भी सांसद प्रदर्शन में शामिल होने क्यों नहीं आया।

छात्रों और महिलाओं को आगे कर खुद पीछे छुपे सीजेपी वाले

पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य मुख्य नेताओं पर आंदोलनकारियों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ झड़प के समय कोई भी बड़ा नेता आगे नहीं आया। आयोजकों ने खुद पीछे रहकर महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे आगे धकेल दिया।

इसी कारण भटके नौजवानों और युवाओं ने पहली बार आंदोलन में भाग लिया और अंत में उन्हें परेशानी का सामना खुद करना पड़ा। सही नेतृत्व न मिलने के कारण छात्रों को पुलिस की कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ी। नेताओं की इस रणनीति से कई युवा छात्र जख्मी हो गए।

संसद मार्च की अनुमति न होने के बावजूद जोखिम लेने पर सवाल

पूर्व प्रदर्शनकारी ने पुलिस कार्रवाई के दौरान नेताओं की भूमिका पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि ‘संसद चलो’ मार्च की कोई अनुमति नहीं है। पुलिस ने रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग भी कर रखी थी।

इसके बावजूद आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए उकसाया। जब सब जानते थे कि आगे खतरा है, तब भी आम लोगों को बैरिकेड्स तोड़ने के लिए आगे क्यों भेजा गया। नेताओं की इस लापरवाही के कारण ही स्थिति इतनी खराब हुई।

20 जुलाई के संसद मार्च में हुई हिंसा का पूरा लेखा-जोखा

यह पूरा विवाद 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के बाद शुरू हुआ है। सीजेपी के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर सड़क पर उतरे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई थी।

दिल्ली पुलिस के अनुसार इस हिंसा में कुल 178 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा था।

केजरीवाल मीडिया का नया शिगूफा : ‘कोर्ट ने केजरीवाल को सभी गुनाहों से किया बरी…’ AAP नेताओं की ‘ईमानदारी’ के शिगूफे

                                                    केजरीवाल को कोर्ट ने नहीं किया है बरी
सोशल मीडिया पर एक बार फिर पुराना खेल शुरू हो गया है। अधूरी खबर, आधा सच और पूरा प्रोपेगैंडा। गुजरात में आम आदमी पार्टी के कुछ नेता और समर्थक पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को लेकर नया नैरेटिव बनाने में लग गए है। इनका कहना है कि दिल्ली की एक कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है।

यह दावा ऐसे बेचा जा रहा है जैसे केजरीवाल को दिल्ली शराब पॉलिसी स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई हो, जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो और अब BJP ‘झूठे आरोप’ लगाकर केजरीवाल को बदनाम कर रही हो।

कुछ ‘मीडिया’ पेज और हैंडल्स भी इस झूठ को आगे बढ़ाने में एक्टिव दिख रहे हैं, जिनमें ‘निर्भय न्यूज़’ जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन लोगों का काम खबर देना नहीं, बल्कि ‘पार्टी-स्पेसिफिक’ के लिए माहौल बनाना है। हेडलाइन्स इस तरह से बनाई जाती हैं कि आम आदमी उन्हें पढ़कर मान ले कि ‘केजरीवाल बरी हो गए हैं।’

लेकिन सच तो यह है कि केजरीवाल को शराब स्कैम या मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने ‘निर्दोष’ नहीं बताया है। जिस फैसले को गलत तरीके से ‘दोषी नहीं’ बताया जा रहा है, वह एक अलग और टेक्निकल मामला है। दरअसल यह ED के भेजे समन से जुडा है, न कि शराब घोटाला से। इस पूरे मामले को समझना जरूरी है, क्योंकि जनता को गुमराह करने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है।

AAP का झूठा दावा

आम आदमी पार्टी गुजरात के ऑफिशियल X हैंडल से किए गए पोस्ट में दावा किया गया है, “आज दिल्ली की कोर्ट ने ED के दर्ज झूठे मामलों में अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है।” पोस्ट की भाषा और टोन ऐसी है जैसे कोर्ट ने केजरीवाल को किसी बड़े स्कैम से बरी कर दिया हो।

पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने भी यही प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी गुजरात के जनरल सेक्रेटरी मनोज सोरठिया ने भी ऐसा ही दावा किया है कि केजरीवाल ‘सभी जुर्मों’ से बरी हो गए हैं। उन्होंने एक वीडियो में तो यह भी दावा किया है कि ‘अगर केजरीवाल ईमानदार नहीं हैं, तो दुनिया में कोई भी ईमानदार नहीं है।’ उन्होंने ‘सत्यमेव जयते’ के साथ बकवास की है और BJP पर इल्जाम लगाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि BJP ने भ्रष्टाचार, शराब, फाइनेंशियल गड़बड़ियों वगैरह के कई आरोप लगाए, लेकिन कोर्ट ने ‘केजरीवाल को सभी जुर्मों से बरी कर दिया।’

इसी तरह, गुजरात AAP की गौरी देसाई और AAP प्रेसिडेंट यसुदन गढ़वी ने भी वीडियो बनाकर केजरीवाल को ‘बेगुनाह’ बताया है और उन्हें ‘कट्टर ईमानदार’ का टैग दे दिया है। गौरी ने तो यहाँ तक ​​कहा, “ED के आरोप झूठे साबित हुए हैं।” इसके अलावा, ‘सच को परेशान किया जा सकता है, हराया नहीं जा सकता’।

अब सवाल यह है कि क्या कोर्ट ने सच में केजरीवाल को ‘सभी जुर्मों’ से बरी कर दिया है? जवाब है — नहीं। ‘जिम्मेदार और समर्पित’ मीडिया भी बड़ी ही चालाकी से सॉफ्ट ब्रेनवॉश करने से नहीं चूक रहा। इनमें सबसे बड़ा नाम ‘निर्भय न्यूज़’ का है। ‘निर्भय न्यूज़’ ने जो हेडलाइन चलाई, उसमें सीधे कहा गया था कि ‘दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल को बरी कर दिया’ और उसी के आधार पर AAP नेता चैतर वसावा का बयान जोड़ा गया।

यह प्रोपेगैंडा फैलाने की पुरानी ट्रिक है। पहले कोई गलत नतीजा निकालो, फिर किसी नेता का रिएक्शन दिखाकर उसे ‘न्यूज’ बना दो। ऐसी हेडलाइंस जिससे दर्शक समझें कि केजरीवाल ‘बच गए’, ‘बेगुनाह और बेकसूर’, ‘क्लीन चिट मिल गई’। यह झूठ फैलाने का एक तरीका है।

दरअसल ED ने केजरीवाल को कुछ समन भेजे थे और आरोप यह था कि केजरीवाल ने उन समन को नजरअंदाज किया। इसी मुद्दे पर कोर्ट ने कजरीवाल को राहत दी।

यह राहत किसी घोटाले से बरी करने का नहीं है। यह राहत एक प्रोसिजरल/टेक्निकल पहलू पर आधारित है, यानी समन के प्रोसेस, सर्विस, वैलिडिटी और उससे जुड़े लीगल मामलों पर। आसान भाषा में कहें तो यह घोटाले में बरी होना नहीं है, बल्कि ‘समन प्रक्रिया’ से जुड़े मामले में राहत है।

यह ऐसा है जैसे कोई आदमी मेन केस में आरोपी हो, लेकिन उसे एक अलग केस में राहत मिल जाए और उसके सपोर्टर यह कहकर जश्न मनाने लगें कि वह ‘सभी चार्ज से बरी’ है। यह कोई जश्न नहीं है, बल्कि जनता को उल्टा चश्मा पहनाने की एक चाल है।

तो क्या शराब पॉलिसी/मनी लॉन्ड्रिंग केस खत्म हो गया है? बिल्कुल नहीं

आम आदमी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता यह बात छिपा रहे हैं कि दिल्ली शराब स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस अलग-अलग हैं और उनका लीगल प्रोसेस चल रहा है। जिस तरह से AAP सपोर्टर ‘निर्दोष’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे लोगों को लगता है कि कोर्ट ने केजरीवाल को शराब पॉलिसी केस में भी क्लीन चिट दे दी है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ है।

मुख्य बात यह है कि केजरीवाल को शराब केस में कोई राहत नहीं मिली है, मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी भी चल रहा है, दूसरे सीरियस केस भी चल रहे हैं और उन्हें जो राहत मिली है, वह सिर्फ उसी केस में है जिसमें ED ने उन्हें समन दिया है और अब वह उससे परेशान भी नहीं हैं, क्योंकि केजरीवाल ने समन भी नहीं माने हैं और तिहाड़ जेल में भी रहे हैं और बेल पर बाहर भी आए हैं। इसलिए अब समन जैसी छोटी-मोटी बातों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

असलियत यह है कि केजरीवाल पर अभी भी शराब पॉलिसी स्कैम, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में सुनवाई चल रही है और कोर्ट ने उनमें कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया है। यह पहली बार नहीं है जब AAP ने किसी कानूनी घटना को ‘सच की जीत’ और ‘क्लीन चिट’ के तौर पर पेश किया है। पार्टी पॉलिटिक्स का एक लगातार पैटर्न रहा है-

  1. जाँच एजेंसी पर हमला करना
  2. हर एक्शन को ‘पॉलिटिकल बदला’ दिखाना
  3. टेक्निकल राहत के जरिए ‘बेगुनाही साबित करना’
  4. सपोर्टर्स द्वारा सोशल मीडिया पर नैरेटिव को आगे बढ़ाना
  5. मीडिया पेजों से हेडलाइन चलाना।
इससे जनता को नुकसान होता है, क्योंकि आम नागरिक के पास हर खबर की कानूनी परतें खोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। वह सिर्फ हेडलाइन पढ़ता है और मान लेता है कि ‘कोर्ट ने बरी कर दिया।’ यही इस प्रोपेगैंडा का लक्ष्य है, सिर्फ नैरेटिव गढ़ना।