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CJP आम आदमी पार्टी की B-टीम है : कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व समर्थक ने खोली सारी पोल

        कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने खोली AAP नेताओं की पोल (फोटो साभार : News18
वो कहावत है ना… देर आए, दुरुस्त आए। ये ही कहावत अब कॉकरोच जनता पार्टी में देखने को मिल रही है। जी हाँ, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग का मुद्दा अब कहीं भटकता दिखाई दे रहा है। तिलचट्टों के ग्रुप में अब कलह पैदा होती दिख रही है। सीजेपी में अब उनके ही प्रदर्शनकारी पार्टी पर आरोप लगाते दिखाई नजर आ रहे हैं। आंदोलन में लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने संगठन और उसके AAP नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत में वीरू भाई ने खुलासा किया कि वह करीब एक महीने तक इस आंदोलन से जुड़े रहे, लेकिन अब उन्होंने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन से अलग कर लिया है। उनका सीधा आरोप है कि खुद को गैर-राजनीतिक बताने वाली सीजेपी असल में आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने आंदोलन में असामाजिक तत्वों के घुसने का भी दावा किया है। 

इस पार्टी के बनने पर सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि इसमें छात्र कम असामाजिक तत्वों का जमावड़ा है। राहुल गाँधी पहले ही देश में माजिस दिखाने की देर की बात कर रहा था, इस आदमी ने मिले LoP पद की गरिमा को ही तार-तार कर दिया है।   

टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि वे एक महीने पहले बिहार में अपना घर छोड़कर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। उनके परिवार ने बार-बार उन्हें इसमें शामिल न होने की सलाह दी थी और कहा था कि सीजेपी ‘केवल नाटक कर रही है’, लेकिन वे इस उम्मीद में अड़े रहे कि सीजेपी शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्ष कर रही है।

आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत के दौरान वीरू भाई ने बताया कि आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को काफी उम्मीदें थीं। उन्हें लगता था कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेता इस प्रदर्शन में उनका साथ देंगे। लोगों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेता मार्च में समर्थन करने जरूर आएँगे।

लेकिन ऐन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोई भी बड़ा नेता वहाँ नहीं पहुँचा। पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने गद्दार पार्टी AAP से सवाल किया कि अगर आम आदमी पार्टी सच में इस आंदोलन का समर्थन कर रही थी, तो फिर उसका कोई भी सांसद प्रदर्शन में शामिल होने क्यों नहीं आया।

छात्रों और महिलाओं को आगे कर खुद पीछे छुपे सीजेपी वाले

पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य मुख्य नेताओं पर आंदोलनकारियों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ झड़प के समय कोई भी बड़ा नेता आगे नहीं आया। आयोजकों ने खुद पीछे रहकर महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे आगे धकेल दिया।

इसी कारण भटके नौजवानों और युवाओं ने पहली बार आंदोलन में भाग लिया और अंत में उन्हें परेशानी का सामना खुद करना पड़ा। सही नेतृत्व न मिलने के कारण छात्रों को पुलिस की कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ी। नेताओं की इस रणनीति से कई युवा छात्र जख्मी हो गए।

संसद मार्च की अनुमति न होने के बावजूद जोखिम लेने पर सवाल

पूर्व प्रदर्शनकारी ने पुलिस कार्रवाई के दौरान नेताओं की भूमिका पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि ‘संसद चलो’ मार्च की कोई अनुमति नहीं है। पुलिस ने रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग भी कर रखी थी।

इसके बावजूद आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए उकसाया। जब सब जानते थे कि आगे खतरा है, तब भी आम लोगों को बैरिकेड्स तोड़ने के लिए आगे क्यों भेजा गया। नेताओं की इस लापरवाही के कारण ही स्थिति इतनी खराब हुई।

20 जुलाई के संसद मार्च में हुई हिंसा का पूरा लेखा-जोखा

यह पूरा विवाद 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के बाद शुरू हुआ है। सीजेपी के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर सड़क पर उतरे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई थी।

दिल्ली पुलिस के अनुसार इस हिंसा में कुल 178 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा था।

पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री डार के पोते ने दो विदेशी महिलाओं को किडनैप कर किया बलात्कार, लाहौर पुलिस ने किया गिरफ्तार


पाकिस्तान में लाहौर पुलिस ने उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के पोते मुहम्मद रजा डार और चार अन्य लोगों को दो विदेशी नागरिकों के अपहरण, गैंगरेप और जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर की अदालत ने आरोपितों को 5 दिनों की हिरासत में भेज दिया है।

पीड़ितों में एक डच महिला स्टेफनी एड्रियाना और एक वेनेजुएला की महिला एस्ट्रिड रॉबिन्सन ब्राचो शामिल हैं, जो अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में मुहम्मद रजा डार से मिली थीं। आरोप है कि डार ने उन्हें पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया और उनके वीजा भी बनवाए। जून 2026 में उसने उनके अपहरण की योजना बनाई।

2 जुलाई को दर्ज FIR के अनुसार, महिलाओं ने अपने बयान में अपहरण, बलात्कार और यातना की जानकारी दी है। आरोप है कि उन्हें लाहौर के डिफेंस इलाके में एक खाली घर में ले जाकर उनके कीमती सामान छीन लिए गए, फिर उनके साथ कई बार गैंगरेप और बेरहमी से मारपीट की गई।

साथ ही आरोपितों ने उन्हें धमकी दी कि अगर फिरौती नहीं दी गई तो उनकी हत्या कर दी जाएगी या उनके अंग निकाल लिए जाएँगे। पीड़ित महिलाएँ किसी तरह अपने-अपने दूतावासों से संपर्क करके बचाई गईं।

यह भी उल्लेखनीय है कि यह मामला राजनीतिक विवाद का कारण बन सकता है क्योंकि इशाक डार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के करीबी माने जाते हैं। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने इस मामले की सख्त जाँच के आदेश दिए हैं।

दिल्ली : सीलमपुर में 16 साल के हिंदू लड़के को फैजान और उसके साथियों ने दौड़ा-दौड़कर घोंपा चाकू: जाँच में जुटी दिल्ली पुलिस; कहीं ये जेहादी आतंकियों के sleeper cell तो नहीं?

                    दिल्ली के सीलमपुर में 16 साल के लक्क की चाकू से गोदकर हत्या (फोटो साभार: NDTV)
केजरीवाल सरकार के समय किसी हिन्दू की हत्या होने पर जो बीजेपी शोर मचाती थी, आज उसी बीजेपी के राज में भी वही हो रहा है। जब तक इन जेहादियों के परिवार को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा बंद नहीं होगी ये इस तरह आतंक करते रहेंगे। Victim card खेला जाएगा, कोई भटका हुआ मासूम बताएगा तो कोई दिमाग से पैदल आदि आदि इन जेहादियों के इस 
Victim card को नज़रअंदाज़ कर सरकारी सुविधाओं को बंद करना होगा।  
पहले जगह-जगह बम धमाके से आतंक फैलाया जाता था अब क़त्ल करके आतंक फैलाया जा रहा है। सरकार, पुलिस और अदालतों को इस बात की गंभीरता से जाँच करनी होगी कि कहीं ये जेहादी आतंकियों के sleeper cell तो नहीं?     

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर में 16 साल के नाबालिग लड़के की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। फिलहाल हत्या के पीछे की वजह सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि आरोपितों में से एक लड़के का नाम फैजान है, जिसने अपने साथियों संग मिलकर लक्की की हत्या को अंजाम दिया।

अगर यही काम हिन्दुओं ने किया होता सारे सेक्युलरिस्ट्स सडकों पर आकर चील-कौओं की तरह चिल्ला रहे होते। संविधान की दुहाई दे रहे होते लेकिन अब ये काम उनके शांतिदूतों ने किया है सबको सांप सूंघ गया है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सीलमपुर थाना क्षेत्र के गौतमपुरी इलाके की है। यहाँ लक्की नाम के लड़के की बुधवार (24 जून 2026) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, देर रात फैजान और उसके चार से ज्यादा साथियों ने लक्की को घेर लिया और उस पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए। गंभीर रूप से घायल लक्की सड़क पर गिर गया।

आसपास के लोगों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। लक्की को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ज्यादा खून बहने से उसकी मौत हो गई। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुँची और इलाके का घेराव कर जाँच शुरू कर दी।

पुलिस ने लक्की के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और परिजनों व स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। बताया गया कि लक्की अक्सर माता की चौकी और जागरण में शामिल हुआ करता था, घटना वाले दिन भी वह माता की चौकी से ही लौट रहा था जब उसकी हत्या को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है, हर पहलू से जाँच की जा रही है।

TMC नेता मछली फ्राई के बहाने बुलाकर गरीब महिलाओं की लूटता था इज्जत: बांग्लादेश भागते समय रबीउल इस्लाम गिरफ्तार

           TMC नेता रबीउल इस्लाम का करोड़ों का घर, जहाँ लूटता था महिलाओं की इज्जत (साभार : News18)
जैसे-जैसे TMC के सत्ता से बाहर होने के दिन बीत रहे हैं वैसे-वैसे ममता बनर्जी के समय हुई काली करतूतें सामने आने लगी हैं। जिसे देख शंका होती है कि ये जो नेता ममता का साथ छोड़ रहे हैं इसके पीछे बहुत गहरा षड़यंत्र दिखाई पड़ता है। क्योकि जो आज पार्टी को छोड़ अपने आपको दूध का धुला साबित करने की कोशिश कर रहे हैं इन काली करतूतों में इनके भी शामिल होने पर शक होना स्वाभाविक है। इनको मालूम है कि पहले तो ममता की छत्रसाया में चाहे कुछ भी कर लो कोई पूछने वाला नहीं। जिस हिसाब से नेता पार्टी छोड़ रहे हैं उस हिसाब से तो इतनी काली करतूतें नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन हुई, क्यों? क्यों नहीं जिस तरह हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हो रहा था, हिन्दू त्यौहारों पर हमले हो रहे थे और हिन्दुओं पर जानलेवा हमले हो रहे थे तब क्यों नहीं पार्टी छोड़ी? तब कहाँ मर गया था इनका जमीर?           

बंगाल में संदेशखाली के विलेन शेख शाहजहाँ के बाद एक और दरिंदा सामने आया है। TMC नेता रबीउल इस्लाम पर महिलाओं को बंधक बनाकर उनका जिस्म लूटने और करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने का आरोप है। पुलिस ने इस हैवान को बांग्लादेश भागते समय बॉर्डर पर दबोचा।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर 24 परगना के देगंगा से इस TMC नेता की काली करतूत बाहर आई है। आरोप है कि रबीउल इस्लाम ने 100 बीघे की जमीन पर अपना एक आलीशान गार्डन हाउस बना रखा था।

वह गरीब महिलाओं को रात के अँधेरे में वहाँ मछली तलने और खाना बनाने के बहाने बुलाता था। वहाँ पहुँचने के बाद महिलाओं को बंधक बना लिया जाता था। फिर रबीउल और उसके गुर्गे उनके साथ अमानवीय अत्याचार करते थे। इलाके में इसका इतना खौफ था कि पीड़ित परिवार डर के मारे मुँह नहीं खोलते थे।

मजदूर से करोड़पति बनने का खूनी सफर

रबीउल इस्लाम के अपराध और रसूख की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। साल 2011 से पहले रबीउल एक साधारण दिहाड़ी मजदूर था। वह दो वक्त की रोटी के लिए तरसता था। लेकिन सत्ता का हाथ मिलते ही वह देगंगा पंचायत समिति में वन एवं भूमि विभाग का बड़ा अफसर बन बैठा। इसके बाद उसने सरकारी पैसों और पेड़ों को लूटकर अपना 10 करोड़ का अय्याशी का अड्डा तैयार किया।

पुलिस को ठेंगा, फिर भागते हुए दबोचा गया

रबीउल ने अपने राजनीतिक रसूख के दम पर लंबे समय तक कानून की धज्जियाँ उड़ाईं। उसके खिलाफ जबरन वसूली और महिला उत्पीड़न के कई केस थाने पहुँचे, लेकिन पुलिस हाथ डालने से डरती थी।

अब जब बीजेपी की सरकार आई, तब जाकर इस हवस के शिकारी पर शिकंजा कसा, और ये डरपोक अंडरग्राउंड हो गया। जान बचाकर सीमा पार बांग्लादेश भागने की फिराक में था। लेकिन बसिरहाट बॉर्डर पर मुस्तैद पुलिस ने उसकी चालाकी फेल कर दी और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया।

उत्तर प्रदेश : कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारी ने की डॉक्टर से मारपीट, सदस्यता लेने से मना करने पर पीटा: मऊ में दर्ज हुई FIR

                                                                                                            सभार - एक्स/@AnkurSingh
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सदस्यता को लेकर विवाद सामने आया है। घोसी कोतवाली क्षेत्र के मझवारा मोड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक युवक ने खुद को पार्टी का पदाधिकारी बताते हुए सरकारी चिकित्सक पर पार्टी का समर्थन करने और सदस्यता लेने का दबाव बनाया।

डॉक्टर के इनकार करने पर मारपीट की, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और जान से मारने की धमकी भी दी।

डॉक्टर का आरोप- सदस्यता लेने से मना किया तो की मारपीट

गाजीपुर जिले के बरेसर थाना क्षेत्र स्थित अलावलपुर अफगा गाँव के निवासी और मझवारा मोड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात सरकारी डॉक्टर हरिश्चन्द्र जायसवाल ने बताया कि गुरुवार (4 जून 2026) की सुबह करीब 10 बजे वह अपने चैंबर में मरीजों को देख रहे थे।

इसी दौरान केरमा महरूपुर निवासी रविशंकर यादव उनके पास ECG जाँच कराने पहुँचा। जाँच पूरी होने के बाद उसने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी का पदाधिकारी बताया और डॉक्टर से पार्टी में शामिल होने को कहा। डॉक्टर के अनुसार जब उन्होंने इससे इनकार किया तो युवक नाराज हो गया और बहस करने लगा फिर बात आगे बढ़ी तो उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, आरोपित की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलने पर अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी कोतवाली पहुँचे तथा पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने बताया कि डॉक्टर की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है।

वहीं डॉ जितेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि आरोपित के खिलाफ डॉ से मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है।

TCS के बाद अब पुणे के Wipro में इस्लामीकरण कांड, हिंदू महिला बोली- विरोध करने पर मुझे कंपनी से निकाला; ‘इस्लाम अपनाओ, मुस्लिम लड़के से संबंध बनाओ’

           पुणे की Wipro कंपनी में हिंदू महिला कर्मचारी पर जबरन धर्मांतरण का आरोप ( साभार : Bhaskar)
TCS नासिक कांड के बाद अब पुणे की दिग्गज IT कंपनी ‘विप्रो’ (Wipro) से भी ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया। 
Wipro की एक पूर्व हिंदू महिला कर्मचारी ने कंपनी के ही एक सहकर्मी पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।

देश में मुस्लिम कट्टरपंथी हर क्षेत्र में घुसकर माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं। हिन्दू महिलाओं को नौकरी पर रखो और लव जिहाद की आड़ में इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाओ। क्या सरकार ऐसे कर्मचारियों, अधिकारियों और कंपनी के विरुद्ध सख्त कार्रवाही करेगी? क्या हिन्दू महिलाओं को अपने जाल में फंसा इस्लाम कबूल करवाकर फिदायीन बनाने का घिनौना खेल चल रहा है? पकडे जाने पर बदनाम होंगे हिन्दू।    

इस मामले में पुणे के हिंजवड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही हिंदू पीड़ित के वकील ने Wipro कंपनी को एक लीगल नोटिस भी भेजा है। हिंदू जनजागृति समिति की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंदू पीड़िता ने अपनी आपबीती बताई।

पीड़िता का आरोप है कि उसका एक साथी कर्मचारी उसे बार-बार इस्लाम अपनाने और एक मुस्लिम युवक से संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था। विरोध करने पर कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने महिला की मदद करने के बजाय उल्टा उसी पर दबाव बनाया।

पीड़िता का आरोप है कि अगस्त 2025 में एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान उससे जबरन इस्तीफा ले लिया गया। पीड़िता के वकील विवेक भोसले ने बताया कि Wipro कंपनी को नोटिस भेजकर महिला को वापस नौकरी पर रखने और मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 लाख रुपए का मुआवजा देने की माँग की गई है।

नोटिस में कहा गया है कि अगर 15 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कोर्ट जाएँगे। फिलहाल Wipro कंपनी की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

बंगाल में योगी मॉडल लागू करेगी BJP सरकार, उपद्रवियों से वसूला जाएगा नुकसान: डायमंड हार्बर से बोले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी


पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार (16 मई 2026) को डायमंड हार्बर क्षेत्र में एक अहम प्रशासनिक बैठक कर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

यह इलाका लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए कि अब राज्य में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और हिंसा या तोड़फोड़ की कीमत सीधे आरोपियों को चुकानी पड़ेगी।

आसनसोल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए सुवेंदु ने कहा, “आसनसोल में जो अप्रिय घटना हुई थी, उस पर हमारी सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने अब तक इस मामले में संलिप्त 15 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है। तोड़-फोड़ और हिंसा के लिए जिम्मेदार इन सभी आरोपियों को पुलिस हिरासत, रिमांड और कड़ी पूछताछ का सामना करना पड़ेगा।”

उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी स्थिति में अराजकता फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पुलिस को पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर भरपाई की नीति, सीएम ने कहा- एजेंसियों को दी जाएगी खुली छूट

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नई नीति लागू करने का संकेत देते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से पूरी क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। उन्होंने कहा, “किसी को भी बंगाल में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “आसनसोल घटना या भविष्य में होने वाली किसी भी ऐसी तोड़फोड़ के नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई सीधे आरोपियों के निजी फंड और संपत्तियों से कराई जाएगी। यह कदम राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए बेहद जरूरी है।”

अंत में सुवेंदु कहा, “पूर्ववर्ती व्यवस्था के दौरान CID और अन्य राज्य स्तरीय जाँच एजेंसियों का कानून-व्यवस्था सुधारने में पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया था। हमारी सरकार अब इन पेशेवर एजेंसियों को खुली छूट देगी ताकि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर सकें।”

वाह शुभेंदु अधिकारी वाह ! दिल जीत लिया

कांग्रेस के हटते ही धीरे धीरे नर्क में बदले जा रहे बंगाल में 50 बरस बाद लागू कर दिया योगी मॉडल! सोमवार से सभी स्कूलों में वन्देमातरम अनिवार्य। धर्मस्थलों से हटेंगे लाउडस्पीकर। गौ हत्या और गौ कटान पर पूरी तरह प्रतिबंध। गरीबों और मजदूरों के लिए 5 रूपए में माछ भात । सीमावर्ती तमाम जिलों में बॉर्डर पर फैंसिंग के लिए 6 महीनों के भीतर लैंड ट्रान्सफर। मदरसों की गतिविधियों की पड़ताल, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर सख्त एक्शन। गुंडा माफियाओं के खिलाफ ऑपरेशन लंगड़ा। घुसपैठियों को चुनचुनकर निकालने की तैयारी।

80 साल बाद बंगाल में खुशियों की बहार। छह दिनों में ही शुभेंदु के ताबड़तोड़ फैसलों से ममता बनर्जी इतनी बौखलाई कि वकीलों की ड्रेस और काला कोट पहनकर हाईकोर्ट पहुंच गई। छह ही दिनों में सरकार पर आरोपों की बौछार कर दी। अरी दीदी सब्र करो थोड़ा धीरज धरो। अभी शुभेंदु के पास 5 साल ही नहीं हैं, लंबा भविष्य भी है। बंगाल की जनता ममता से इसकदर ऊब चुकी है कि उनकी सूरत नहीं देखनी चाहते। तभी तो ममता जैसे ही कोर्ट से बाहर निकलीं, लोगों ने चोर चोर के नारे लगाने शुरू कर दिए। याद कीजिए ऐसे ही नारे अभी हाल ही में महुआ मोइत्रा के विरुद्ध भी लगे जब वे प्लेन में कोलकाता से दिल्ली पहुंची। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बंगाल बार से ममता के लाइसेंस की बाबत रिकॉर्ड तलब किया है।
तृणमूल को अभी यह झेलना होगा, ममता समझ लें। थोड़ा रुकिए ममता दीदी, आपके भतीजे अभिषेक को अभी काफी भुगतना है। अपने भ्रष्टाचार, कटमनी, तोलाबाजी और धमकियों के लिए अभिषेक को अभी जेलें भी काटनी हैं। यही नहीं घुसपैठियों की बदौलत बंगाल की डेमोग्राफी बदलने वाली ममता को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय जांच एजेंसियों को बंधक बनाने लेने के लिए काफी कुछ झेलना है। अभिषेक को मुख्यमंत्री पद देकर दिल्ली की राजनीति करते हुए प्रधानमंत्री बनने का स्वप्न तो चकनाचूर हुआ। हां सब ठीक चला तो वे राज्यसभा के रास्ते दिल्ली पहुंचकर दिल्ली में इंडी का नेतृत्व संभाल सकती हैं। बशर्ते कि ममता से मुंह फेर चुके राहुल गांधी अपना सपना वापस ले लें।
तो ममता बनर्जी, आपका खेल खत्म हो चुका है। वामपंथियों ने 35 साल और अपने 15 साल बड़े जुल्म ढहाए। इस बॉर्डर स्टेट को भारत से अलग करने का षड्यंत्र किया, राज्यपाल को कुछ नहीं समझा। आपकी तमन्ना थी कि केन्द्र सरकार बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा दे ताकि आप सहानुभूति का वोट हासिल कर लें। लेकिन दीदी आप शाह मोदी को अब तक गलत पहचानती रही। आ जाएगा, जल्द समझ आ जाएगा कि देश के सिस्टम के ख़िलाफ़ जाना भी देशद्रोह के समान है। बंगाल के साथ साथ पूरे देश की जनता समझ गई है कि आपके समर्थन में बांग्लादेश और पाकिस्तान में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? समझ जाओ दीदी वक्त बदल गया है।

‘शराब पीकर सदन में आए पंजाब के मुख्यमंत्री’: विपक्षी दलों ने की ‘डोप टेस्ट’ कराने की माँग

                           शराब पीकर पहुँचें पंजाब के सीएम, विपक्ष का आरोप (साभार : Aajtak)
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में उस समय भारी तनाव पैदा हो गया, जब विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शराब पीकर सदन में आने का गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस और अकाली दल के नेताओं ने माँग की कि मुख्यमंत्री समेत सभी विधायकों का तुरंत ‘एल्को-मीटर’ और ‘डोप टेस्ट‘ कराया जाए।

BJP ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का नशे में धुत होने वाला वीडियो भी शेयर किया है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इसके लिए स्पीकर को पत्र भी लिखा। हालाँकि, विधानसभा स्पीकर ने विपक्ष की इस माँग को सिरे से खारिज कर दिया।

हंगामे के बीच आम आदमी पार्टी ने सरकार का बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव पेश करने की तैयारी की। सत्र के दौरान ‘आप’ के 89 विधायक मौजूद रहे, जबकि भाजपा ने इस सत्र का पूरी तरह बहिष्कार किया। 

गुजरात : AAP का उपाध्यक्ष हसमुख पटेल गिरफ्तार, बेनामी संपत्तियों को छिपाने से इनकार करने पर अपनी ही महिला अकाउंटेंट का किया अपहरण

                                                   बेनामी लेनदेन में पकड़े गए AAP प्रदेश उपाध्यक्ष
गुजरात के गाँधीनगर में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश उपाध्यक्ष हसमुख पटेल को एक महिला अकाउंटेंट के अपहरण, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला बेनामी लेनदेन और संदिग्ध वित्तीय गड़बड़ियों के खुलासे से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद के गोटा इलाके में रहने वाली महिला गाँधीनगर के सेक्टर-25 GIDC स्थित HBC लाइफ साइंस कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में काम करती थी। कंपनी के मालिक हसमुख पटेल हैं, जबकि उनके भाई हिमांशु पटेल ने महिला को अपनी दूसरी कंपनी मैक्सिएमएस हॉलीडे प्राइवेट लिमिटेड के ऑडिट का काम भी सौंपा था।

ऑडिट के दौरान महिला ने करीब 80 से 85 लाख रुपए के संदिग्ध लेनदेन और बिना बिल के भुगतान का खुलासा किया। इस खुलासे के बाद कंपनी प्रबंधन में हड़कंप मच गया और यहीं से पूरे विवाद की शुरुआत हुई।

अपहरण, मारपीट और धमकी देने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, 26 मार्च 2026 को दोपहर के समय कंपनी के पार्किंग एरिया से महिला को जबरन एक हरे रंग की कार में बैठाकर अगवा कर लिया गया। चलती गाड़ी में आरोपितों ने महिला के साथ मारपीट की, उसके बाल खींचे और धमकी दी कि अगर उसने इस मामले की जानकारी किसी को दी तो उसे जान से मारकर कहीं दफना दिया जाएगा।

घटना के बाद डरी हुई महिला ने हसमुख पटेल को फोन कर पूरी जानकारी दी, लेकिन मदद करने के बजाय उस पर शिकायत न करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि यह पूरी साजिश उन्हीं के इशारे पर रची गई थी।

बाद में महिला ने गाँधीनगर के सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हसमुख पटेल को गिरफ्तार कर लिया। मामले में अन्य आरोपितों के खिलाफ भी जाँच जारी है।

दिल्ली को बूँद-बूँद पानी के लिए तरसाना चाहते थे कट्टरपंथी दंगाई : पुलिस ने बताया 2020 में दंगाइयों का प्लान; आखिर सुप्रीम कोर्ट दंगाइयों को जमानत देने की याचिका पर बहस में क्यों समय बर्बाद कर रही है?

                      दिल्ली दंगें के आरोपित शरजील इमाम और उमर खालिद (फोटो साभार : aajtak)
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े 6 आरोपितों की जमानत याचिकाओं का मंगलवार(18 नवंबर 2025) को जोरदार विरोध किया। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य आरोपित उन तीन सह-आरोपियों (नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा) से बराबरी की माँग नहीं कर सकते जिन्हें पहले हाई कोर्ट से जमानत मिली थी।

आखिर सुप्रीम कोर्ट दंगाइयों को जमानत देने की याचिका पर बहस में क्यों समय बर्बाद कर रही है? क्या सुप्रीम कोर्ट को नहीं मालूम कि किस तरह सीलमपुर में हिन्दुओं की सम्पत्तियों को आग के हवाले किया गया था? किस तरह पुलिस अधिकारी की हत्या कर गंदे नाले में फेंक दिया गया था? आखिर सुप्रीम कोर्ट क्या चाहता है? दूसरे, जिस तरह दिल्ली लाल किला के पास हुए ब्लास्ट के बाद से आज देश में आतंकवादियों को पकड़ा जा रहा है उस पर कोर्ट ने आँखों पर पट्टी बाँधी हुई है? जिन दलाल वकीलों के इशारे पर कोर्ट नाच रही है देश के लिए बहुत घातक है। कन्हैया के कातिलों को अब तक फांसी क्यों नहीं हुई? जब तक अदालतें दलाल वकीलों के चुंगल से बाहर नहीं आएगी देश में आतंकवाद और दंगाइयों को कोई रोकने वाला नहीं।    

जानकारी के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस वी राजू ने जस्टिस अरविंद कुमार और एन वी अंजारिया की बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन तीन सह-आरोपितों को मिली जमानत को मिसाल नहीं माना जाएगा।

ASG राजू ने तर्क दिया कि उमर खालिद जैसे आरोपित पहले भी ‘बराबरी’ का मुद्दा उठा चुके हैं, जिसे कोर्ट खारिज कर चुका है। इसलिए, जब तक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव न हो, बार-बार वही मुद्दा उठाकर जमानत नहीं माँगी जा सकती।

अवलोकन करें:-

देश के गद्दारों को जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट तैयार रहते हैं, कभी आतंकियो
देश के गद्दारों को जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट तैयार रहते हैं, कभी आतंकियो
 

वहीं, SG मेहता ने कहा कि दंगे अचानक नहीं हुए थे, बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे। उन्होंने शरजील इमाम के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि उनका मकसद देश के मुसलमानों को एकजुट करके शहरों को ठप करना और समाज को सांप्रदायिक आधार पर बाँटना था। इसके अलावा, दिल्ली में दूध-पानी की व्यवस्था भी रोक देना था। इस मामले में अगली सुनवाई 20 नवंबर को जारी रहेगी।

गाजा युद्ध के दौरान इजरायल को हथियार से लेकर फाइटर जेट तक की मदद दे रहा था तुर्की, फोड़ रहा था TATA कंपनी पर ठीकरा: UN की रिपोर्ट ने खोल दी पोल

                                               यूएन रिपोर्ट में तुर्की को लेकर खुलासा ( x@tnt,nbt)
जाने-माने हबीब पेंटर की एक बहु-चर्चित कव्वाली है "जब खून ही बना दुश्मन ..." जो इजराइल और गाज़ा युद्ध में चरितार्थ हो रही है। यानि मुसलमान ही मुसलमान को निपटाने में लगा है और बदनाम इजराइल को किया जा रहा है। भारत मुस्लिम वोट के भूखे नेता और उनकी पार्टियां गाज़ा को लेकर मुसलमानों को मोदी सरकार के खिलाफ बयानबाज़ी कर रहे हैं। लोकसभा में फलीस्तीन का बैग लेकर जाने पर सुरमा भोपाली बनने वाली प्रियंका गाँधी 
UN की रिपोर्ट में खुलासा होने पर माफ़ी मांगेगी? 

भारत में यूँ तो मुसलमान बड़ी-बड़ी बात करता है लेकिन भूल जाता है फिलिस्तीन को कोई भी मुस्लिम देश किसी भी कीमत पर पनाह देने को तैयार नहीं। एक बार सदर जिया-उल-हक़ के समय पाकिस्तान ने फिलिस्तीनियों को शरण देकर गलती की थी, हालत सामान्य होने पर जब वापस अपने मुल्क जाने से मना करने पर जिया-उल-हक़ ने क्या हश्र किया किसी से नहीं छुपा। लेकिन भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी, मुस्लिम वोट की भूखी पार्टियां और मुसलमान फिलिस्तीन के लिए छाती पीट रहे हैं। फिलिस्तीन दंगाई में पाकिस्तान से कम नहीं। 

क्या भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी, मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां और इनके इशारे पर नाचने वाले मुसलमान तुर्की के खिलाफ बोलेगा? क्या तुर्की दूतावास पर प्रदर्शन करने की हिम्मत है? मुसलमानों को इस ढोंगी गैंग को दरकिनार कर सच्चाई को जानने के बाद ही अगर कुछ बोलें तो उनके ही हित में होगा। आखिर तुर्की क्यों इजराइल की मदद कर रहा है इसकी सच्चाई सामने आने पर बेशर्म ढोंगी गैंग तो मालपुए खाने में मस्त रहेगा और आम मुसलमान बदनाम होता रहेगा। ये ही वजह है कि मुसलमान शक के दायरे में रहता है। ये तुष्टिकरण करने वाला गैंग मुसलमानों को उकसा कर अपनी तिजोरियां भरते हैं और बदनाम आम मुसलमान होता रहता है।

         

तुर्की इन दिनों भारत की मशहूर कंपनी टाटा ग्रुप पर गुस्सा निकाल रहा है। उसका ब्रॉडकास्टर टीआरटी कह रहा है कि टाटा ने इजरायल को गाजा युद्ध के लिए हथियारों के पार्ट्स दिए। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने तुर्की की पोल खोल दी। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि तुर्की खुद इजरायल की मदद कर रहा था।

पत्रकार सिद्धांत सिब्बल ने यूएन की रिपोर्ट की कॉपी शेयर की है। सिद्धांत ने लिखा, “जिन बंदरगाहों ने एफ-35 के पुर्जों, हथियारों, जेट ईंधन, तेल और अन्य सामग्रियों को इजरायल तक पहुँचाने में मदद की है, उनमें तुर्की भी शामिल है।”

यूएन रिपोर्ट में तुर्की का आया नाम

 रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2025 में जब गाजा पर इजरायल का कब्जा कर लिया, उस वक्त भी मिस्र ने इजरायल के साथ 35 बिलियन यूएस डॉलर के गैस डील की। ये इजरायल के इतिहास में सबसे बड़ी गैस डील थी। यूरोपीय यूनियन और मिस्र लगातार गाजा से नजदीक से अवैध तरीके से होकर जाने वाले गैस पाइप लाइन से गैस मँगाते रहे हैं। ये तभी भी था जब फिलिस्तीन पर इजरायल ने ताबड़तोड़ हमला किया और अभी भी है, जब गाजा पर इजरायल का कब्जा हो चुका है।

इजरायल का व्यापार और सामानों की आवाजाही दूसरे देशों के परिवहन तंत्र पर ही निर्भर रही है। अमेरिका के अलावा तुर्की, फ्रांस, इटली, बेलजियम, नीदरलैंड,ग्रीस, मोरक्को आदि देशों के बंदरगाहों से एफ-35 के पुर्जों, हथियारों, जेट ईंधन, गैस और ऑयल समेत दूसरी सामग्रियों को इजरायल तक पहुँचाए गए।

टाटा समूह पर तुर्की के आरोप

तुर्की गाजा के विनाश के लिए भारतीय कंपनी ‘टाटा समूह’ पर आरोप लगा रहा है। टीआरटी का कहना है कि इजरायल को हार्ड वेयर और दूसरे साजो सामान टाटा ने उपलब्ध कराए। टाटा समूह की कंपनी टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर पर एमडीटी डेविड हल्के वाहनों के चेसिस की आपूर्ति करने का आरोप लगाया।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर इजरायल की वित्तीय और सरकारी प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा प्रदान करने और प्रोजेक्ट निम्बस में भागीदारी करने का आरोप लगाया है। टीआरटी का कहना है कि इसका इस्तेमाल इजरायल ने गाजा की निगरानी में किया।

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) पर आरोप लगाया गया कि सभी नए F-16 लड़ाकू विमानों के लिए विंग और सभी AH-64 अपाचे हमलावर हेलीकॉप्टरों के लिए फ्यूज़लेज उपलब्ध कराया। जबकि इन विमानों के फ्यूल की व्यवस्था तुर्की के बंदरगाहों ने किया। इन बंदरगाहों से विमानों के कलपुर्जें और दूसरे सामान मँगाए गए। इनका इस्तेमाल गाजा युद्ध में इजरायल ने किया। तुर्की पहले अपने गिरेबान में झाँक ले। इजरायल को मदद करने के सबूत संयुक्त राष्ट्र के पास हैं।

इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध और गाजा में बमबारी के दौरान इजरायल द्वारा इस्तेमाल विस्फोटकों को पहुँचाने में तुर्की का हाथ रहा। जबकि भारत ने इस युद्ध से दूरी बनाई और मानवीय आधार पर इजरायल के साथ-साथ गाजा में रहने वाले लोगों की मदद की। तुर्की के दोगले रवैये का ये एक उदाहरण है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान का दिया था साथ

दरअसल ये वही तुर्की है, जिसने गाजा युद्ध के दौरान अपनी हवाई अड्डों को इजरायल के लिए बंद करने का ऐलान किया था। यहाँ तक कि अपने बंदरगाहों पर इजरायली जहाजों के आने पर पाबंदी लगा दी थी, लेकिन अब उसकी असलियत सामने आ गई है।

तुर्की उन चंद देशों में शामिल है, जिसकी नीति ‘भारत विरोध’ की रही है। तुर्की पर जब प्राकृतिक आपदा आई, तो उसकी मदद के लिए सबसे पहला हाथ भारत ने उठाया। लेकिन जब भारत पर पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया और भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया, तो तुर्की को ‘सार्वभौमिकता’ याद आ गई।

उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वक्त भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस्लामाबाद के पक्ष में खड़े दिखाई दिया था। अब साजिश के तहत भारतीय कंपनियों को टारगेट किया जा रहा है। दरअसल ये सभी सामने आया था कि तुर्की में भारतीय पर्यटकों की संख्या काफी कम हो गई है।

पहले भारतीयों की पसंदीदा जगहों में इस्तांबुल हुआ करता था। हिन्दी फिल्मों की शूटिंग भी काफी यहाँ होती थी, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की के स्टेंड की वजह से भारत में नाराजगी दिखाई दी। सोशल मीडिया पर #BoycottTurkey हैशटैग ट्रेंड करने लगा। तुर्की की यात्रा रद्द करने की अपील की जाने लगी और पर्यटन एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ रोक दी।

तुर्की के पर्यटन उद्योग पर काफी असर पड़ा। अनुमान के मुताबिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद 33.3% भारतीय पर्यटकों की संख्या यहाँ कम हो गई। इसकी खीझ निकालने के लिए अब तुर्की भारतीय कंपनियों को टारगेट कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिन देशों ने इजरायल को जरूरी सामानों यहाँ तक कि ऑयल और गैस के आवाजाही के लिए अपनी बंदरगाह का इस्तेमाल करने दिया, उनमें तुर्की, फ्रांस, इटली,मोरक्को भी शामिल हैं। अब तुर्की से पूछा जाना चाहिए कि उसने किस आधार पर टाटा समूह पर उँगली उठाई। इजरायल के साजो सामान के लिए अपने बंदरगाह के इस्तेमाल करने की इजाजत दी। न सिर्फ तुर्की बल्कि यूरोपियन देशों और मिस्र ने गैस डील की। ये गाजा पर आक्रमण करने से अब तक जारी है।

‘अचानक बेड से उठा, मेरी ब्रेस्ट छूने लगा’: आतंकियों और देशद्रोहियों के मानवाधिकारों की बात करने वाली इंदिरा जयसिंह के सहयोगी पर ट्रांसजेंडर महिला वकील ने लगाए यौन शोषण के आरोप

             इंदिरा जयसिंह के सहयोगी भट्ट पर यौन उत्पीड़न का आरोप ( फोटो साभार- ET n India today)
आतंकियों और देशद्रोहियों के मानवाधिकारों की बात करने वाली सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह अपने सहयोगी वकील रोहिन भट्ट पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप पर खामोश हैं। ये आरोप एक ट्रांसजेंडर महिला वकील राघवी ने लगाए हैं।

रोहिन भट्ट पर यौन उत्पीड़न का आरोप

सोशल मीडिया पर राघवी ने एक के बाद एक कई पोस्ट डाले हैं। इसमें कहा गया है कि समलैंगिक मामलों के अधिकारों की माँग करने वाले एक्टिविस्ट रोहिन भट्ट ने राघवी का यौन शोषण किया।
राघवी ने लिखा है कि दो साल पहले उनके साथ शर्मनाक हरकत की गई थी। उस वक्त वह कानून की पढ़ाई कर रही थी और हार्मोन थरेपी ले रही थी। दिल्ली में रोहिन भट्ट का कोई स्थायी घर नहीं था। इसलिए भट्ट दोस्तों के घर लाजपत नगर में रह रहा था। दरअसल ये दोस्त राघवी के भी दोस्त थे। उन्होंने राघवी को मिलने के लिए बुलाया था। वह जब मिलने पहुँची, तो उसने अपने दोस्तों से हार्मोन थरेपी से होने वाले शारीरिक बदलाव के बारे में बतलाया। उसने बताया कि उसके ब्रेस्ट अब बड़े होने लगे हैं। बेड पर लेटा भट्ट अचानक उठ गया और उसके ब्रेस्ट को छूने लगे। उसने पूरे शरीर को गलत तरीके से छूआ।
राघवी के मुताबिक, “वह काफी सकते में आ गई। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ क्या हुआ। मेरे दोनों दोस्त भी काफी शॉक्ड थे। उन दोनों ने कुछ देर चुप रहने के बाद मुझे नॉर्मल किया और भट्ट से कहा कि आज के बाद कभी ऐसी हरकत किसी महिला के साथ नहीं करना। भट्ट खुद को सही साबित करने के लिए कहता रहा कि वह मजाक कर रहा है।”
राघवी के मुताबिक, उस वक्त समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इस तरह की हरकत के लिए कानून में क्या सजा है, ये समझ नहीं आ रहा था। उसने दोस्तों से बात की, लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला।
इसी तरह समय बीता। लेकिन पीड़िता के अंदर दहशत बैठ गया। कुछ दूसरे दोस्तों से बात हुई, जो भट्ट के भी दोस्त थे। दोस्तों ने भट्ट को लोगों को न छूने की सलाह दी। भट्ट ने इसे नजरअंदाज किया। पीड़िता के मुताबिक, “उसके पास माफी माँगने का मौका था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। मैंने उसे हर जगह नजरअंदाज करने की कोशिश की। वर्क प्लेस से लेकर दोस्तों के बीच भी। काफी वक्त तक मैं खुद से लड़ती रही। एक दिन मैंने उसका इंटरव्यू देखा। मुझे उसका अमानवीय चेहरा याद आ गया। वह उस वक्त रेप और उत्पीड़न पर बात कर रहा था।”
हाल ही में जब राघवी का रोहिन भट्ट से आमना-सामना हुआ, तो पुराने घाव याद आ गए। राघवी के मुताबिक, “उसने सोचा कि अब वह आवाज बुलंद करेगी। कुछ दिन इसमें बीत गया कि कैसे एक पुरुष ‘क्लास प्रिविलेज’ मिलने के बाद दूसरों को कुछ नहीं समझता है। उसे ट्रांसजेंडर और महिलाओं के अधिकारों का कोई ख्याल नहीं रहता है।”
राघवी का कहना है कि भट्ट ने एक महिला के इमोशन की परवाह नहीं की। न ही कभी माफी माँगी।

कौन है रोहिन भट्ट

रोहिन भट्ट समलैंगिकों के अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट में लड़ने वाला वकील और एक्टविस्ट है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर का सहयोगी रहा रोहिन भट्ट की पहचान LGBTQIA+ समुदाय के लोगों के रिश्ते और शादी को कानूनी मान्यता देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने से बनी। रोहिन भट्ट जुलाई 2022 से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के चैंबर में काम करता है। वह कानूनी और रिसर्च सहायता देता है।
उसने दो मामले, समीर समुद्र द्वारा दायर याचिका और नितिन करणी द्वारा दायर याचिका का मसौदा तैयार किया था। वह सेम सेक्स मैरिज केस में वादियों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखता रहा है। बोस्टन के हार्वर्ड लॉ स्कूल में बायोएथिक्स में मास्टर्स करने वाले भट्ट को इंदिरा जयसिंह ने भारत में पहली नौकरी दी।
रोहिन खुद भी समलैंगिक है। रोहिन का जन्म गुजरात के भावनगर में हुआ। उसके पिता एक सिविल सेवक थे और माँ एक कॉलेज लेक्चरर थीं। रोहिन ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स गांधीनगर और उदगाम स्कूल अहमदाबाद से पूरी की।
उसका कहना है कि स्कूल में उसे धमकाया गया था। उसके समलैंगिक दोस्त थे, जो उसे डेटिंग ऐप्स के माध्यम से मिले थे। हालाँकि वह समलैंगिकों के आयोजनों से दूर रहता था। 2021 में हार्वर्ड में प्रवेश मिलने के बाद वह दहशत से बाहर आ पाया।
समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले समलैंगिक रोहिन भट्ट पर एक समलैंगिक महिला ने ही यौन उत्पीड़न का आरोप लगा कर बताया है कि कैसे ‘उच्चवर्ग वाले’ वकील महिलाओं और ट्रांसजेंडर को अपने पैर की जूती समझते हैं।

NSUI ने किया बिहारी महिला का अपमान : ‘भगाओ इस बिहारन को, मैडम बीड़ी-दारू पीती है, मिथिला से है…’: DUSU की संयुक्त सचिव दीपिका झा को गाली देने वाले कौन, ABVP नेता ने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI को बताया जिम्मेदार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में ABVP से संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करने वाली दीपिका झा  (साभार: Dainik Bhaskar)
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP से संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करने वाली बिहार की दीपिका झा को इंस्टाग्राम पर ट्रोल किया जा रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ दिल्ली साइबर पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। साथ ही दीपिका झा ने इसके पीछे NSUI का हाथ बताते हुए करारा जवाब दिया है।

इसकी जानकारी खुद दीपिका झा ने एक वीडियो जारी कर दी। वीडियो में दीपिका झा ने कहा, “इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर बदतमीजी की जा रही है। बिहार से जुड़ा ‘बिहारन’ शब्द को गाली की तरह उपयोग किया जा रहा है। तमाम कमेंटबाजों के खिलाफ FIR हो चुकी है। जो-जो लिंक है इस FIR से सबके पास समय से सूचना पहुँच जाएगी।”

दीपिका झा ने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) पर निशाना साधते हुए कहा, “पूरे NSUI को कह देना चाहती हूँ कि अब करो तुम कमेंट। अब मैं FIR-FIR खेलुँगी। एक लड़की को नीचा दिखाने के लिए तुम इस हद तक गए। तुम चाहते हो कि लड़की शांत होकर घर बैठ जाए। लेकिन नहीं, मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूँ। मैं आप सभी की टाइम-टाइम पर औकात याद दिलाती रहूँगी कि मैं क्या हूँ।”

उन्होंने राज्य के नाम पर बदतमीजी झेलने वालों के साथ खड़े रहने की भी बात कही, “किसी के भी चमचे हो अगर इस तरह का कमेंट दोबारा करा जाएगा तो मैं सदैव खड़ी रहूँगी अपने समाज के साथ, अपने राज्य के साथ और सिर्फ अपने राज्य के साथ ही नहीं अगर किसी को भी उसके राज्य के नाम को गाली की तरह इस्तेमाल किया जाएगा तो मैं सदैव उन लोगों के साथ खड़ी रहूँगी।”

दीपिका झा बताती हैं कि उन्होंने इंस्टाग्राम में पर बदतमीजी के खिलाफ दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत कर दी है। वह कहती हैं कि इस शिकायत में कुछ लोगों का नाम शामिल किया गया है, जिनके पास जल्द ही पुलिस का नोटिस पहुँच जाएगा।

इंस्टाग्राम पर लगातार किया जा रहा ट्रोल

दीपिका झा को DUSU चुनाव में संयुक्त सचिव पद पर खड़े होने के साथ उस पद पर जीत हासिल करने तक भी इंस्टाग्राम पर लगातार ट्रोल किया गया। चुनाव अभियान में दीपिका ने कई वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए, जिस पर ट्रोलर्स ने भद्दे-भद्दे कमेंट्स किए हैं। यहाँ तक की उनके राज्य और उनकी पहचान मिथिला को लेकर भी सवाल उठाए गए।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट में एक ट्रोलर ने लिखा, “भगाओ इस बिहारन को।”

                              दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, “मिथिला से है या पूर्वांचल से है। मतलब वोट के लिए कुछ भी।”

                                         दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

दीपिका झा ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की तो एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिखा, “मैडम की पार्टी की सरकार और मैडम उनसे ही लड़ रही।”

                                  दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

यहाँ तक की दीपिका झा के चरित्र को मैला करने की भी कोशिश की गई। ट्रोलर्स ने लिखा, “यह दीपिका झा सिगरेट बीड़ी दारू सब पीती है। स्टूडेंट होने के बाद भी और फिर छात्र अध्यक्ष का इलेक्शन लड़ती है और शरीफ होने का ड्रामा करती है।”

NSUI की भद्दी राजनीति

इंस्टाग्राम ट्रोल्स के पीछे दीपिका झा ने NSUI का हाथ बताया है। दीपिका झा ने NSUI को चेतावनी भी दी कि अगर इस बार वो FIR-FIR खेलेंगी। साथ ही दीपिका झा ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि इंस्टाग्राम पर भद्दे कमेंट्स करने वाले NSUI के ही ‘चमचे’ हैं।

यह पहली बार नहीं है जब NSUI ने ABVP को नीचा दिखाने के लिए किसी महिला का अपमान किया हो। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में भी NSUI ने भद्दी राजनीति खेली। लगातार ABVP के उम्मीदवारों को निशाना बनाकर बदनाम करने की कोशिश की।

चुनाव प्रचार के दौरान दीपिका झा का एक वीडियो भी वायरल करवाया और दावा किया कि वो सिगरेट पीती हैं। NSUI ने कांग्रेस का प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाते हुए दिल्ली चुनाव में ‘वोट चोरी’ के भी आरोप लगाए थे। अब ‘बिहारन’ नाम से गाली दी जा रही है।

लेकिन फिर भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP तीन पदों पर परचम लहराया। DUSU के अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर ABVP ने जीत हासिल की। DUSU के नए अध्यक्ष बने आर्यन मान के खिलाफ भी NSUI ने नैगेटिव कैंपने चलाया था।

मध्य प्रदेश : लव जिहाद की फंडिंग करने वाले कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत को वकीलों ने कूटा, कोर्ट ने दी 8 दिन की रिमांड

          लव जिहाद के लिए फंडिंग करने वाला कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने किया सरेंडर (साभार: Hindustan)
इंदौर में लव जिहाद की फंडिंग करने वाला कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वह डाढ़ी और मूंछ कटाकर बदले हुए वेश में कोर्ट पहुँचा। यहाँ कोर्ट ने पुलिस को कादरी की 8 दिन की रिमांड दी है। कोर्ट से बाहर निकलते ही कादरी को वकीलों ने घेरकर पीटना शुरू कर दिया।

पुलिस हिरासत में कादरी को किसी तरह छुड़ाया गया। पुलिस उसे भगाते हुए कोर्ट के गेट के बाहर ले गई और गाड़ी में बिठाकर रवाना हो गई। अब पुलिस हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम लड़कों को पैसे देने के मामले में उससे पूछताछ करेगी।

दरअसल, 14 जून 2025 को सामने आए लव जिहाद के मामले में आरोपित साहिल खान और अल्ताफ खान ने स्वीकार किया था कि कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने उन्हें लड़िकयों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए 3 लाख रुपए दिए थे। दोनों आरोपितों को रेप समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था।

अनवर कादरी पर 40 हजार रूपए का इनाम था

लव जिहाद की फंडिंग में नाम आने के बाद से ही कांग्रेस पार्षद फरार चल रहा था। इंदौर के बाणगंगा पुलिस ने पिछले दो महीने में उसकी तलाश में उसके रिश्तेदारों और करीबियों के घर दबिश दी। उसका कुछ पता ना लगने पर पुलिस ने 10 हजार रूपए इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में 40 हजार रूपए कर दिया गया।

वहीं पुलिस ने लव जिहाद फंडिंग मामले में आरोपित उसकी बेटी आयशा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालाँकि, फिलहाल आयशा जमानत पर जेल से बाहर है।

अनवर कादरी पर 19 अपराधिक मुकदमे दर्ज

कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी पर इंदौर के तमाम थानों में 19 अपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जानलेवा हमला, डकैती, बलवा, अवैध हथियार रखना और जमीन कब्जा करना शामिल है। इन्हीं मामलों में पहले इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार करने का आदेश भी जारी किया था।

लव जिहाद फंडिंग मामले में अनवर कादरी का नाम सामने आया

इतने अपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद अनवर कादरी बेखौफ जुर्म की दुनिया में पैर-पसार रहा था। वह मुस्लिम लड़कों को पैसे देकर हिंदू लड़कियों से रेप और धर्म परिवर्तन करवाता था। इंदौर के ही एक लव जिहाद मामले के आरोपितों ने उसका नाम लिया, जिसके बाद से उसकी गिरफ्तारी के आदेश जारी हो गए। हालाँकि, अनवर तभी से फरार हो गया।

यह मामला 14 जून 2025 को दो पीड़िता की शिकायत का है, जिसमें दो आरोपित साहिल खान और अल्ताफ खान पर लव जिहाद और धर्मांतरण का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों आरोपितो को गिरफ्तार किया। दोनों ने पुलिस की पूछताछ में कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पैसे दिए जाने की बात कबूली थी।

इंदौर का कांग्रेस पार्षद कश्मीर से गिरफ्तार, लव जिहाद में हिंदू लड़कियों को फाँसने के लिए देता था लाखों रुपए: बुर्का वाली महिलाओं ने समर्थन में किया प्रदर्शन

कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी 
लव जिहाद के लिए फंडिंग करने वाला आरोपित कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार किया गया है। कादरी पर आरोप है कि वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम युवकों को एक लाख और निकाह करने के लिए दो लाख रुपए देता था।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इससे पहले अनवर की बेटी आयशा को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उसकी खोज में पुलिस ने पहले दिल्ली में भी दबिश दी थी, लेकिन अनवर फरार हो गया था।

अनवर कादरी की बेटी आयशा से भी पुलिस को कई जानकारी मिली है। इसके बाद और गिरफ्तारियाँ होने की भी संभावना है। उसके अलावा इंदौर पुलिस ने साहिल शेख और अल्ताफ के खिलाफ भी दो युवतियों के साथ रेप और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का मामला दर्ज किया था।

इसके बाद जाँच के दौरान आरोपितों ने कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी का नाम लिया था। दोनों ने पुलिस को बताया था कि अनवर ने युवकों को एक हिंदू लड़की को फँसाने के लिए एक लाख रुपए और निकाह कराने पर दो लाख रुपए देने की बात कही थी।

उसके बाद मोबाइल जाँच में यह सामने आया कि वह ‘अर्जुन’ और ‘राज’ जैसे नामों का इस्तेमाल कर हिंदू लड़कियों से दोस्ती करता था और फिर उन्हें मिलने बुलाता था। इसके बाद उन पर निकाह और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता था। 2011 में कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी, उसका भाई और एक अन्य आरोपित जानलेवा हमले के मामले में भी एक-एक साल की सजा काट चुके है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही इंदौर के वार्ड 58 की मुस्लिम महिलाओं ने अनवर कादरी के समर्थन में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया है। बता दें कि मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए पहले 10 हजार का इनाम घोषित किया था लेकिन बाद में ये इनाम राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दी गई थी।

बूढ़ा हूँ, जमानत दे दो… पहलगाम आतंकी हमले के बाद पोस्ट में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखने वाला अंसर अहमद इलाहाबाद HC के आगे गिड़गिड़ाया, अदालत ने खारिज की याचिका; बार एसोसिएशन को जेहादियों की पैरवी करने वाले वकीलों को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लेना चाहिए

                                                                                                 साभार 
जेहादी जब कानून की गिरफ्त में आने पर victim card खेलना शुरू कर देते हैं। इन जेहादियों की वकालत करने बेशर्म वकील भी अपनी तिजोरी भरने इन गद्दारों की पैरवी करने खड़े हो जाते हैं। क्यों नहीं कोर्ट भी इन लालची वकीलों को भी उसी श्रेणी में डालते? ईरान ने गद्दारों को दे दी फांसी। कोई वकील उनके बचाव में खड़ा हुआ। लेकिन ये भारत में ही संभव है कि जहां वकीलों को गद्दारों/जेहादियों की पैरवी करने की छूट दे दी जाती है। बार एसोसिएशन ऐसे वकीलों पर क्यों नहीं कोई कार्यवाही करती? अपनी कमाई के चक्कर में गद्दारों का साथ दोगे? "पाकिस्तान ज़िन्दाबाद" गद्दार ने 62 साल की उम्र में ही लिखा है जवानी में नहीं। बार एसोसिएशन को इस गंभीर मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 62 वर्षीय अंसर अहमद सिद्दीकी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सिद्दीकी पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखे फेसबुक पोस्ट शेयर करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध संविधान के विरुद्ध और देश की स्वतंत्रता को चुनौती देने जैसा है।

आरोपित के वकील ने कोर्ट से कहा कि वह 62 साल के वृद्ध हैं और उनका मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा है। लेकिन कोर्ट ने इसके बाद भी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपित का अपराध राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। वहीं, प्रोसेक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि यह फेसबुक पोस्ट पहलगाम आतंकी हमले के बाद ही शेयर किया गया था।

अवलोकन करें:-

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कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा, “आवेदक एक वरिष्ठ नागरिक है और उसकी उम्र से पता चलता है कि वह स्वतंत्र भारत में पैदा हुआ है। उसका गैर-जिम्मेदाराना और राष्ट्र-विरोधी आचरण उसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा माँगने का अधिकार नहीं देता है।”